Author: bharati

  • भीषण गर्मी से थोड़ी राहत, इंदौर में तापमान 40-41 डिग्री तक सीमित रहने की संभावना

    भीषण गर्मी से थोड़ी राहत, इंदौर में तापमान 40-41 डिग्री तक सीमित रहने की संभावना


    मध्यप्रदेश । प्रदेश के कई हिस्सों में जहां भीषण गर्मी और लू का असर लगातार बना हुआ है, वहीं इंदौर में पिछले तीन दिनों से तापमान में थोड़ी राहत दर्ज की जा रही है। शहर में अधिकतम तापमान अब 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है, जिससे लोगों को पहले की तुलना में कुछ राहत मिली है। हालांकि दोपहर 12 बजे से 3-4 बजे के बीच तेज धूप अभी भी परेशान कर रही है।

    रात के तापमान में भी हल्की बढ़ोतरी देखी गई है, जो करीब 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम सामान्य से लगभग 2 डिग्री अधिक गर्म बना हुआ है, लेकिन पहले जैसी तीव्र लू की स्थिति फिलहाल कम नजर आ रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार 25 मई से नौतपा की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन इस बार इसके दौरान भी भीषण गर्मी के चरम पर पहुंचने की संभावना कम है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तापमान 43 से 44 डिग्री तक पहुंचने की बजाय 39 से 41 डिग्री के बीच ही बना रह सकता है। इससे लोगों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

    हालांकि राहत के बीच एक चिंता यह भी है कि इस बार मई में बारिश की संभावना बेहद कम है। पिछले साल जहां मई में करीब 8 इंच बारिश दर्ज की गई थी, वहीं इस बार अब तक बारिश का कोई खास सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ है। इसी कारण पूरे महीने सूखा मौसम रहने की आशंका जताई जा रही है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्री-मानसून गतिविधियां आमतौर पर 20 मई के बाद सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन इस बार ऐसा कोई मजबूत सिस्टम नहीं बना है। इसी वजह से 8 मई के बाद से तापमान लगातार 40 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 जून के बाद मानसून की औपचारिक शुरुआत हो सकती है। इसके बाद ही बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। फिलहाल 5 जून के बाद बादलों की आवाजाही बढ़ने और हल्की बारिश शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।

    मौसम विशेषज्ञ एचएस पांडे ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप का असर सबसे ज्यादा रहता है, इसलिए इस दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। साथ ही पर्याप्त पानी पीना, हल्के सूती कपड़े पहनना और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

    कुल मिलाकर इंदौर में फिलहाल गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन नौतपा के दौरान भीषण लू से राहत की उम्मीद ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है।

  • एमवाय अस्पताल में भर्ती मरीजों ने तोड़ा दम, पटाखा फैक्ट्री हादसे से बढ़ा शोक

    एमवाय अस्पताल में भर्ती मरीजों ने तोड़ा दम, पटाखा फैक्ट्री हादसे से बढ़ा शोक

    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंककला में 14 मई को हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री हादसे में घायल दो और मजदूरों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MYH) अस्पताल में भर्ती अजय और निरंजन की शुक्रवार रात मौत हो गई। दोनों मजदूर बिहार के रहने वाले थे और हादसे के बाद से बर्न यूनिट में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे।

    इस दर्दनाक हादसे में अब तक कुल 8 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इससे पहले भी कई घायलों ने अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ा था। गुरुवार देर रात और सोमवार को भी कुछ मरीजों की मौत की पुष्टि हुई थी, जिससे मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

    अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, कई मरीजों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। कुछ मजदूरों के शरीर 90 से 99 प्रतिशत तक झुलस चुके थे, जिससे उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। गंभीर घायलों का इलाज MYH की बर्न यूनिट में किया जा रहा है, जहां संक्रमण से बचाव के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

    वहीं एक अन्य घायल विशाल (25) को सिर में गंभीर चोट लगने के बाद न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती किया गया था। धमाके के दौरान वह दूर जाकर गिरा था, जिससे उसके सिर में खून का थक्का जम गया था। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि बर्न यूनिट में संक्रमण के खतरे को देखते हुए विशेष सावधानियां बरती जा रही हैं। 24 घंटे निगरानी के लिए नर्सिंग स्टाफ की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि मरीजों की देखभाल में कोई कमी न रहे।

    हादसे के बाद चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती कई मरीजों में से अधिकांश को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि एक मरीज अभी भी उपचाराधीन है। उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उसे जल्द ही छुट्टी दिए जाने की संभावना है।

    यह हादसा 14 मई की सुबह करीब 11:30 बजे हुआ था, जब टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया था। विस्फोट इतना भयानक था कि फैक्ट्री की दीवारें ढह गईं और शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे थे। आसपास के घरों तक कंपन महसूस किया गया था, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाके के बाद कई मजदूर झुलसी हालत में बाहर भागते नजर आए थे। कई लोगों के कपड़े शरीर से चिपक गए थे और फैक्ट्री परिसर में चारों ओर जले हुए अवशेष बिखरे पड़े थे।

    इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ रही मौतों ने प्रशासन और फैक्ट्री संचालन पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। फिलहाल जांच जारी है और घायलों के इलाज पर नजर रखी जा रही है।

  • विराट कोहली ने रचा इतिहास, T20 में 50+ साझेदारियों के मामले में बने विश्व नंबर-1, बाबर आजम और क्रिस गेल को पीछे छोड़ा

    विराट कोहली ने रचा इतिहास, T20 में 50+ साझेदारियों के मामले में बने विश्व नंबर-1, बाबर आजम और क्रिस गेल को पीछे छोड़ा

    नई दिल्ली ।  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली आईपीएल 2026 के 67वें मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ बड़ी पारी नहीं खेल पाए, इसके बावजूद वह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करने में कामयाब रहे। एसआरएच ने पहले बैटिंग करते हुए आरसीबी के सामने जीत के लिए 256 रनों का टारगेट रखा था, इस स्कोर का पीछा करते हुए विराट कोहली महज 15 के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। हालांकि जाते-जाते वह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर गए। यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है मेंस टी20 सबसे ज्यादा 50 प्लस पार्टनरशिप में शामिल होने वाले बल्लेबाज का।
    256 रनों के टारगेट का पीछा करते हुए विराट कोहली और वेंकटेश अय्यर ने महज 3.4 ओवर में ही 50 रन बोर्ड पर लगा दिए थे। पहले विकेट के लिए दोनों के बीच 4.3 ओवर में 60 रनों की साझेदारी हुई।

    मेंस टी20 क्रिकेट में यह 211वां मौका है जब विराट कोहली किसी 50 प्लस पार्टनरशिप का हिस्सा रहे हो। इससे पहले यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के बल्लेबाज ऐलेक्स हेल्स के नाम था, वह 210 बार फिफ्टी प्लस पार्टनरशिप में इनवोल्व रहे थे। इस लिस्ट में डेविड वॉर्नर, बाबर आजम और क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों का नाम भी शामिल है।

    T20 में सबसे ज्यादा 50 प्लस पार्टनरशिप का हिस्सा रहने वाले बल्लेबाज-
    211 – विराट कोहली*
    210 – एलेक्स हेल्स
    200 – डेविड वॉर्नर
    196 – बाबर आजम
    191 – क्रिस गेल
    कौन जीता कल का SRH vs RCB मैच?
    सनराइजर्स हैदराबाद ने शुकवार को आईपीएल 2026 के 67वें मुकाबले में 55 रन से जीत हासिल की लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) को अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंचने से नहीं रोक सकी। सनराइजर्स हैदराबाद की टीम अभिषेक शर्मा (56 रन) की आक्रामक बल्लेबाजी, ईशान किशन (79 रन) के बेखौफ अंदाज और हेनरिक क्लासेन (51 रन) की ताकतवर हिटिंग की बदौलत चार विकेट पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने में कामयाब रही।
    आरसीबी को शीर्ष दो में रहने के लिए 166 रन का स्कोर बनाना था और 178 रन से ज्यादा रन का स्कोर बनाने से उसका शीर्ष स्थान तय था। कप्तान रजत पाटीदार (56 रन) और कृणाल पंड्या (नाबाद 41) के बीच चौथे विकेट के लिए 58 गेंद में 84 रन की भागीदारी से आरसीबी ने 20 ओवर में चार विकेट पर 200 रन बनाकर हारने के बावजूद पहला स्थान सुनिश्चित किया।
    आरसीबी (प्लस 0.783), गुजरात टाइटन्स (प्लस 0.695) और सनराइजर्स हैदराबाद (प्लस 0.524) के 18-18 अंक हैं लेकिन नेट रन रेट से क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।अब पहले क्वालीफायर में आरसीबी का सामना 26 मई को धर्मशाला में गुजरात टाइटन्स से होगा। वहीं सनराइजर्स हैदराबाद 27 मई को एलिमिनेटर में खेलेगी।

  • इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी

    इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी


    मध्यप्रदेश । इंदौर, जो लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल करता रहा है, आज गंभीर जल संकट की चपेट में है। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर ने शहर की पानी व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके हैं, और नल-जल आपूर्ति भी अनियमित हो गई है। नतीजतन, हजारों परिवार अब पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।

    शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां कई कॉलोनियों में दो-दो दिन बाद पानी पहुंच रहा है। लोगों को घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भरने को लेकर विवाद और झड़पें तक सामने आ रही हैं। महिलाएं खाली बर्तन लेकर दूर-दराज तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे भी इस संकट से परेशान हैं।

    स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। चक्काजाम, मटका फोड़ प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी आम हो गई है। कई जगह लोगों ने खुले तौर पर कहा है कि “ऐसे नेताओं को वोट नहीं देंगे।” विकास नगर और वीणा नगर जैसे क्षेत्रों में लोगों ने पार्षदों के साथ सड़क जाम कर पानी की मांग की। वहीं कुछ इलाकों में गुस्साई भीड़ ने पानी सप्लाई सिस्टम तक को नुकसान पहुंचाया।

    नगर निगम का कहना है कि भूजल स्तर में भारी गिरावट और आधे से ज्यादा बोरिंग के सूखने से यह संकट पैदा हुआ है। स्थिति से निपटने के लिए नर्मदा परियोजना की टंकियों से सप्लाई के साथ-साथ सैकड़ों टैंकरों के जरिए पानी वितरण किया जा रहा है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि पानी के बदले पैसे मांगने या अवैध वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में कई बिना स्टीकर वाले टैंकर पकड़े गए और उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

    इंदौर में पानी की किल्लत अब सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन चुकी है। कांग्रेस ने कई इलाकों में मटका फोड़ प्रदर्शन किया, जबकि नागरिक लगातार जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कई वार्डों में लोगों का आरोप है कि न तो नियमित सप्लाई हो रही है और न ही टैंकर समय पर पहुंच रहे हैं।

    महिलाओं का कहना है कि उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कई जगह लोगों ने साफ कहा है कि “पानी नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं देंगे।”

    वार्ड-वार स्थिति भी चिंताजनक है। वार्ड 20, 41, 47, 60 और 64 सहित कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कहीं पानी गंदा आ रहा है तो कहीं प्रेशर बेहद कम है। कई इलाकों में लोग आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।

    इंदौर का जल संकट अब एक बड़े शहरी संकट का रूप ले चुका है, जहां स्वच्छता की पहचान रखने वाला शहर आज बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

  • महंगाई का झटका जारी, पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे हुआ महंगा

    महंगाई का झटका जारी, पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे हुआ महंगा


    मध्यप्रदेश । देशभर में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस नई बढ़ोतरी के बाद मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में ईंधन की कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।

    राजधानी भोपाल में पेट्रोल की कीमत अब बढ़कर ₹111.71 प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जिससे आम लोगों के बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। बीते 9 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं, जिससे कुल मिलाकर मई महीने में पेट्रोल-डीजल लगभग ₹5 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं।

    इससे पहले 15 मई को पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी, जबकि 19 मई को दूसरी बार लगभग 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ था। अब लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।

    तेल कीमतों में इस उछाल की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं। वैश्विक तनाव और ईरान-अमेरिका जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जबकि कुछ समय पहले यह लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है। इसी वजह से तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ता है और वे कीमतों में बढ़ोतरी करने को मजबूर हो जाती हैं।

    भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें प्रतिदिन सुबह 6 बजे संशोधित की जाती हैं, जिसे ‘डेली प्राइस रिवीजन’ प्रणाली कहा जाता है। इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और टैक्स संरचना को ध्यान में रखा जाता है।

    ईंधन की अंतिम कीमत में कई घटक शामिल होते हैं—कच्चे तेल की मूल कीमत, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार का एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का वैट (VAT)। इन्हीं कारणों से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग होती हैं।

    सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव के कारण उन्हें भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ तक का घाटा हो रहा था, जिसे कम करने के लिए कीमतों में समायोजन जरूरी हो गया।

    गौरतलब है कि 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जिसके बाद लंबे समय तक दरें स्थिर रहीं। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय हालात बदलने के साथ एक बार फिर ईंधन महंगा होने लगा है।

    कुल मिलाकर, लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम जनता के लिए एक और आर्थिक चुनौती बनकर सामने आई हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में परिवहन और रोजमर्रा की लागत पर भी दिखाई दे सकता है।

  • गर्मी के साथ ग्रहों की मार: नौतपा में इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय, बढ़ सकता है खर्च और विवाद

    गर्मी के साथ ग्रहों की मार: नौतपा में इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय, बढ़ सकता है खर्च और विवाद

    नई दिल्ली ।  सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते ही नौतपा प्रारंभ हो जाते हैं. नौतपा यानी कि प्रचंड गर्मी के 9 दिन. इस साल 25 मई 2026 से 2 जून 2026 तक नौतपा हैं. ज्‍योतिष के अनुसार यह समय कुछ राशियों के लिए परेशानी भरा हो सकता है.
    धन से लेकर सम्‍मान तक...
    सूर्य 25 मई से 8 जून 2026 तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे. सूर्य सम्‍मान, यश, आत्‍मविश्‍वास और सेहत के कारक हैं. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आते ह 4 राशि वालों को कुछ क्षेत्रों में निगेटिविटी का सामना करना पड़ सकता है. जैसे- आर्थिक मामले, सेहत और मान-सम्‍मान.

    मिथुन राशि : बढ़ेंगे खर्च, धन हानि की आशंका

    नौतपा के दौरान मिथुन राशि वालों को धन के लेन-देन में सावधानी बरतने की जरूरत है. एक ओर खर्च बढ़ सकते हैं, लिहाजा बजट बनाकर चलना जरूरी है. वहीं धन का निवेश भी सोच-समझकर ही करें. वरना रिटर्न मिलने की बजाय मूल धन निकालना भी मुश्किल हो जाए.
    वृश्चिक राशि : गुस्‍से पर काबू रखें
    वृश्चिक राशि वालों को इस समय गुस्‍से पर काबू रखना बेहद जरूरी है, वरना बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं. वर्कप्‍लेस पर सहकर्मियों से विवाद होने की आशंका है. ऐसे में संभलकर बात करना ही बेहतर रहेगा. अपमान होने के भी योग हैं. इस राशि के पुरुष वर्ग के लोग जीवनसाथी पर गुस्‍सा निकालने से बचें.

    धनु राशि : सेहत और पैसे में न करें लापरवाही

    धनु राशि वाले लोग इस समय अपने स्‍वास्‍थ्‍य का विशेष रूप से ध्‍यान रखें. खान-पान सही रखें वरना पेट संबंधी बीमारियां होने की आशंका है. वहीं आर्थिक मामलों में भी जल्दबाजी न करें. धन हानि हो सकती है.
    कुंभ राशि : वरिष्‍ठ लोगों से न उलझें
    नौतपा के दौरान कुंभ राशि वालों का गुस्‍सा भी बढ़ा हुआ रहेगा. मानसिक अशांति रह सकती है. ऑफिस में किसी से विवाद हो सकता है. अधिकारियों से विवाद करने से बचें. काम समय पर पूरे न हों तो धैर्य रखें. परिवार में भी कुछ तनाव रह सकता है.

  • दहेज हत्या पर बड़ा खुलासा: MP में बढ़ते मामले, भोपाल से ग्वालियर तक चिंता

    दहेज हत्या पर बड़ा खुलासा: MP में बढ़ते मामले, भोपाल से ग्वालियर तक चिंता

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में दहेज प्रताड़ना और महिलाओं की संदिग्ध मौतों की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि हर दिन किसी न किसी घर से एक ‘ट्विशा’ जैसी कहानी सामने आ रही है, जहां शादी के बाद उम्मीदों के साथ गई बेटी या तो वापस नहीं लौटती या फिर उसकी मौत एक रहस्य बनकर रह जाती है।

    हाल ही में भोपाल की ट्विशा शर्मा की मौत ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। शादी के मात्र छह महीने बाद हुई इस संदिग्ध मौत के बाद परिवार और ससुराल पक्ष के अलग-अलग आरोपों ने मामले को और उलझा दिया है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हैं और अंतिम संस्कार तक रोक दिया गया है, जबकि जांच अभी कोर्ट में विचाराधीन है।

    इसी तरह ग्वालियर की पलक रजक का मामला भी सामने आया, जिसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है। पलक की आखिरी कॉल और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने उसके मानसिक तनाव की ओर इशारा किया, जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।

    गुना और राजगढ़ जिलों से भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां नवविवाहित महिलाओं को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मानसिक दबाव डालने के आरोप लगे हैं। कहीं जहरीला पदार्थ खाने से मौत हुई तो कहीं आत्महत्या के लिए उकसाने की घटनाएं दर्ज हुईं।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 232 मामले IPC और 218 मामले नए BNS कानून के तहत दर्ज हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य देश में दहेज हत्या के मामलों में तीसरे स्थान पर है।

    इस सूची में उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद मध्यप्रदेश का नाम आता है, जहां लगातार ऐसे मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पति या ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के 7514 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि आत्महत्या के लिए उकसाने के 210 मामले सामने आए हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दहेज प्रताड़ना अब केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव के रूप में भी सामने आ रही है। कई मामलों में लव मैरिज के बाद भी दहेज के कारण विवाद और उत्पीड़न की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं।

    राज्य महिला आयोग ने भी इन बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है और कहा है कि कई मामलों में पुलिस की जांच में देरी और लापरवाही सामने आ रही है। आयोग अब ऐसे मामलों की निगरानी और जांच प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए विशेष कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है।

    कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर हालात गंभीर संकेत दे रहे हैं। लगातार सामने आ रहे दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौतों के मामले इस बात की ओर इशारा करते हैं कि समाज और व्यवस्था दोनों स्तरों पर गहन सुधार की जरूरत है, ताकि हर ‘ट्विशा’ को न्याय और सुरक्षा मिल सके।

  • कंगना रनौत के मंगलसूत्र लुक ने मचाई हलचल, अभिनेत्री बोलीं- “मैं चुपचाप शादी नहीं करूंगी”

    कंगना रनौत के मंगलसूत्र लुक ने मचाई हलचल, अभिनेत्री बोलीं- “मैं चुपचाप शादी नहीं करूंगी”

    नई दिल्ली ।  कंगना रनौत हरी-चूड़ी और मंगलसूत्र वाला वीडियो काफी वायरल हुआ। इस पर लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाए। अब कंगना ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके बताया है कि उनके इस गेटअप के पीछे क्या राज था। उन्होंने लिखा है कि वह शूट कर रही हैं और किसी ने उन्हें कैमरे में कैप्चर कर लिया। कंगना ने लिखा है कि इस लुक में क्या ही बड़ी बात है। क्लिप्स वायरल होने के बाद उनको लोगों के फोन आने लगे हैं।
    नहीं करूंगी चुपचाप शादी
    कंगना रनौत ने अपने मंगलसूत्र और चूड़ी वाले लुक पर उठ रहे सवालों वाला एक न्यूज आर्टिकल शेयर किया है। इसमें लिखा है कि कंगना रनौत ने गुपचुप कर ली शादी? गले में मंगलसूत्र, हाथों में हरी चूड़ियां पहने दिखीं। इस पर कंगना ने लिखा है, ‘मैं हर दिन शूट कर रही हूं। किसी ने ये रैंडम फोटो खींच ली जिसमें मैं कैरेक्टर मेकअप में थी, अब मुझे बहुत से फोन कॉल्स आ रहे हैं। पर किसी शादीशुदा महिला के लुक में क्या बड़ी बात है। एक्टर्स हर तरह के रोल करते हैं, मैं वादा करती हूं, चुपचाप शादी नहीं करूंगी।’

    चैलेंजिंग लाइफ को बताया अच्छा

    एक और पोस्ट में कंगना ने लिखा है, ‘न्यूज एंकर्स एसी स्टूडियोज से बाहर की हीट वेब और टेम्परेचर की शिकायत कर रहे हैं, हम जैसे लोगों का क्या जो आउटडोर शूटिंग कर रहे हैं, इतनी सारी लाइट्स, बंद जगहें, हाहा शिकायतें करना बंद कीजिए दोस्तों, जिंदगी जब तक चैलेंजिंग है, तब तक ही अच्छी है, अगर आसान और प्रिडिक्टिबल तरह से आप जीवित फील करते हैं तो यह मौत के बराबर है, हैपी समर।’
    वायरल वीडियो में क्या था
    कंगना का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने पीच कलर का सलवार सूट पहना था। वह बिंदी लगाए थीं, मांग भरे थीं, गले में मंगलसूत्र और उनके हाथों में हरी चूड़ियां थीं। उनको इस गेटअप में देखकर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे थे। कई लोगों ने लिखा था कि कंगना को पता था कि बाहर कैमरा है, जानबूझकर ही वह ऐसे बाहर आई हैं। वो लकी इंसान कौन है जिससे उन्होंने शादी की। कुछ लोगों को लग रहा था कि कंगना ने फैशन में मंगलसूत्र पहना है। कुछ का ध्यान उनकी हरी चूड़ियों पर था। वहीं कुछ लोग यह भी लिख रहे थे कि वह शूट के लिए ऐसे तैयार हुई हैं।

    कंगना के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स

    कंगना की अपकमिंग फिल्मों की बात करें तो उनकी फिल्म भारत भाग्य विधाता जून में रिलीज होनी है। वहीं क्वीन 2 की शूटिंग हो रही है। इसकी रिलीज डेट अभी ऑफिशियल नहीं हुई।

  • जब मुश्किलों में घिरा था परिवार, तब लोगों ने उड़ाया मजाक; त्रिशला दत्त ने सुनाया दर्दभरा किस्सा

    जब मुश्किलों में घिरा था परिवार, तब लोगों ने उड़ाया मजाक; त्रिशला दत्त ने सुनाया दर्दभरा किस्सा


    नई दिल्ली । साल 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के दौरान संजय दत्त पर एके 56 राइफल और 9 एमएम पिस्टल समेत प्रतिबंधित हथियारों को रखने का आरोप लगा था। इसके लिए संजय दत्त को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। जब संजय दत्त इन परेशानियों से गुजर रहे थे, तब उनकी बेटी त्रिशला महज 5 साल की थीं। अब त्रिशला ने उस बुरे वक्त को याद करते हुए बताया कि कैसे उस वक्त उनका परिवार परेशानी झेल रहा था।

    जब जेल गए थे संजय दत्त

    इनसाइड थॉट्स आउट लाउड से खास बातचीत में 38 साल की त्रिशला ने बताया, “बहुत कम उम्र में ही उन्हें नशे की लत से जूझना पड़ा, उससे बाहर आना, फिर जेल जाना, वहां लगभग तीन साल रहना और फिर वहां से बाहर आना। मैं सोच भी नहीं सकती कि वो क्या महसूस कर रहे होंगे।”
    त्रिशला बोलीं- कभी अपने पिता से किसी भी चीज के लिए नाराज नहीं हुई
    त्रिशला ने इस बारे में भी बात की कि जब पूरा देश उनके परिवार के संघर्षों को देख रहा था, तब उस स्थिति से डील करना उनके लिए कितना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा, वो बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं उनसे बात नहीं कर पा रही थी क्योंकि वो किसी चीज से गुजर रहे थे, और अगर मैं उन्हें कॉल कर भी रही थी, उनके आसपास लोग होते थे।
    उस वक्त उनसे इस बारे में बात करना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब दुनिया आपके परिवार को बिखरता हुआ देखती है, तो वो आसान नहीं होता है। मुझे लगता है बहुत सारे लोग मुझे इसलिए देखते थे कि मेरा रिएक्शन क्या होगा। मेरा रिएक्शन था कि मुझे अपने पिता के लिए स्ट्रॉन्ग बनना है। मैं कभी भी अपने पिता से गुस्सा नहीं हुई, किसी भी चीज के लिए।

    मेरे पिता के खराब वक्त में लोग मना रहे थे जश्न

    त्रिशला ने बताया कि कैसे बहुत से लोग उस वक्त उनके पिता के पतन का जश्न मना रहे थे। उन्होंने कहा, “मैंने सब देखा है। सब पढ़ा है। बहुत लोग जश्न मना रहे थे। वो वहां वापस जा रहे थे क्योंकि लोगों की अपनी राय थी।”
    त्रिशला पर गर्व करते हैं संजय दत्त
    त्रिशला ने इस बात को माना कि इतनी कम उम्र में इतना ट्रॉमा झेलने के बाद, उन्हें बुली भी किया गया। उन्होंने कहा कि उससे निकलने के लिए उन्हें सालों लग गए। त्रिशला ने कहा कि वो कह सकती हैं कि उनके पिता को आज उनमें बदलाव नजर आता है।
    त्रिशला ने कहा कि कभी उनके पिता ने सीधेतौर पर तो ये नहीं कहा कि वो मुझमें बदलाव देख सकते हैं, लेकिन वो कहते हैं कि उन्हें मुझपर गर्व है। मुझे गर्व है कि तुम इतना आगे आ गई हो। बस ध्यान रखो कि अपने काम पर फोकस करो, अपना फोकस मत खो। वो कहते हैं कि अगर मुझे जरूरत है तो वो हमेशा मेरे साथ हैं।इतने संघर्षों के बीच त्रिशला ने जो अपने पिता से सीखा वो है जरूरतमंदों की मदद करना। अगर कोई मुसीबत में है, तो उसकी मदद करो। किसी को नीचा मत दिखाओ और कभी मत सोचो की आप दूसरों से बेहतर हैं।
  • अमित शाह का ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्लान: घुसपैठ पर कड़ा संदेश, सुरक्षा होगी हाई-टेक

    अमित शाह का ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्लान: घुसपैठ पर कड़ा संदेश, सुरक्षा होगी हाई-टेक

    नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़े और महत्वाकांक्षी “स्मार्ट बॉर्डर” प्लान की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगी लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा को तकनीक आधारित और पूरी तरह अभेद्य बनाना है।

    नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force) द्वारा आयोजित वार्षिक रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार देश से हर घुसपैठिए को खोजकर बाहर करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की सीमाओं पर अब किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ या जनसांख्यिकीय बदलाव की साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    गृह मंत्री ने बताया कि “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना के तहत सीमा सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। इसमें ड्रोन, रडार, हाई-टेक कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिससे सीमा पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। उनका कहना था कि पारंपरिक सुरक्षा प्रणाली अब बदलते खतरे के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

    अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाओं को इस समय कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, नकली मुद्रा, मवेशियों की अवैध आवाजाही और संगठित अपराध शामिल हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल घुसपैठ रोकना नहीं, बल्कि उन सभी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजना भी है, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया।

    उन्होंने सीमा सुरक्षा बल के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को पहले से पहचानना और उसके अनुसार रणनीति बनाना बेहद जरूरी है।

    अमित शाह ने यह भी दावा किया कि 2014 के बाद देश की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आया है और सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।

    इस योजना के तहत केंद्र सरकार आने वाले समय में सीमा सुरक्षा से जुड़े राज्यों और एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाएगी। इसके अलावा सीएपीएफ जवानों के कल्याण और नशा तस्करी के खिलाफ बड़े अभियान की भी तैयारी की जा रही है।

    कुल मिलाकर, “स्मार्ट बॉर्डर” योजना को सरकार की एक बड़ी सुरक्षा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लक्ष्य आधुनिक तकनीक के जरिए भारत की सीमाओं को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना है।