Author: bharati

  • यूपी में जल्द लागू होगी नई एग्रीगेटर पॉलिसी, ड्राइवर ने राइड कैंसिल की तो देना होगा किराया

    यूपी में जल्द लागू होगी नई एग्रीगेटर पॉलिसी, ड्राइवर ने राइड कैंसिल की तो देना होगा किराया

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कैब सेवाओं को लेकर नई एग्रीगेटर पॉलिसी तैयार हो गई है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कैब कंपनियां यात्रियों से मनमाने तरीके से किराया नहीं वसूल सकेंगी। परिवहन विभाग ने किराया तय कर दिया है और पीक आवर के दौरान भी कंपनियां निर्धारित किराए से अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी कर सकेंगी।

    नई पॉलिसी के तहत यदि ड्राइवर बुकिंग रद्द करता है तो उसे संबंधित ट्रिप का किराया स्वयं वहन करना होगा। वहीं, यदि यात्री अपनी ओर से राइड कैंसिल करता है तो उस पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। परिवहन विभाग का कहना है कि अब तक एग्रीगेटर पॉलिसी नहीं होने के कारण कैब कंपनियां मनमाने तरीके से किराया वसूल रही थीं, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    परिवहन विभाग ने पॉलिसी का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसके लागू होने के बाद राज्य में एग्रीगेटर के रूप में वाहन संचालन के लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, बुकिंग स्वीकार करने के बाद ड्राइवर को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। तय समय का पालन नहीं करने पर कम से कम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

    डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (एसटीए) सगीर अहमद अंसारी के अनुसार, नई पॉलिसी में यात्रियों की सुविधाओं और शिकायतों का विशेष ध्यान रखा गया है। तय सीमा से अधिक वाहन संचालित करने पर जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर लाइसेंस भी रद्द किया जा सकेगा।

    नई व्यवस्था के तहत सभी एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य सरकार से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पांच लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 25 हजार रुपये शुल्क और 50 लाख रुपये तक की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी होगी।

    पॉलिसी में ड्राइवरों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। प्रत्येक ड्राइवर को कम से कम पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाए जाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नौ अलग-अलग नोटिस जारी किए हैं। इन शिकायतों में ग्राहकों को एक्सपायर्ड, खराब, दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्य उत्पादों की आपूर्ति किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। नियामक ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए कंपनी से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

    जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। इनमें एक प्रमुख मामला ऐसे अंडों की बिक्री का बताया गया है, जिन्हें उस ब्रांड नाम के तहत बेचा जा रहा था जो कंपनी के मौजूदा खाद्य लाइसेंस में स्वीकृत उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत शामिल नहीं था। नियामक ने निर्देश दिया है कि वैध अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस में संशोधन के लिए आवेदन किया जाए।

    शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ पैक्ड खाद्य उत्पाद एक्सपायरी तिथि समाप्त होने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इनमें प्रोटीन सप्लीमेंट और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या आपूर्ति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण नियामक ने इस मामले को विशेष रूप से गंभीरता से लिया है।

    एक अन्य शिकायत में ऑर्गेनिक अंडों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों को ऐसे अंडे उपलब्ध कराए गए जिनमें सड़न, दुर्गंध और संक्रमण जैसे संकेत मौजूद थे, जिससे वे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गए थे। इसी प्रकार एक तैयार खाद्य उत्पाद के खराब और बदबूदार होने की भी शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने और संबंधित मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके अतिरिक्त शिशुओं के लिए तैयार एक खाद्य उत्पाद के खराब और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। इतना ही नहीं, एक मामले में ग्राहक द्वारा दोषपूर्ण उत्पाद लौटाने के बाद वही उत्पाद दोबारा आपूर्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे नियामक ने गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।

    एफएसएसएआई ने कंपनी से उसके खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • UP: रामपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, उत्तराखंड जा रहे आईटी कंपनी मालिक समेत 4 दोस्तों की मौत, 3 गंभीर

    UP: रामपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, उत्तराखंड जा रहे आईटी कंपनी मालिक समेत 4 दोस्तों की मौत, 3 गंभीर


    रामपुर।
    उत्तर प्रदेश के रामपुर में शनिवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में नोएडा की एक आईटी कंपनी के मालिक सहित चार युवकों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी दोस्त और कर्मचारी उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क घूमने जा रहे थे। सुबह करीब 5 बजे उनकी तेज रफ्तार ईको कार सड़क किनारे खड़ी डीसीएम में पीछे से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए।

    हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार में फंसा एक घायल युवक खून से लथपथ हालत में लोगों से मदद की गुहार लगाता दिखाई दे रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों व घायलों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को अस्पताल पहुंचाया गया।

    पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि चालक को झपकी आने के कारण यह हादसा हुआ। मृतकों की पहचान दिल्ली निवासी अभिषेक अग्निहोत्री (30), नीरज (24), गुलबुद्दीन उर्फ सोनू (35) और बागपत निवासी कार्तिक (24) के रूप में हुई है। अभिषेक अग्निहोत्री नोएडा में ‘इंडियन शॉप’ नाम से आईटी कंपनी संचालित करते थे और अपने कर्मचारियों व दोस्तों के साथ वीकेंड ट्रिप पर निकले थे।

    अभिषेक के मित्र पदम धीमान ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे दो कारों से सभी लोग जिम कॉर्बेट के लिए रवाना हुए थे। अभिषेक अपनी ईको कार में पांच कर्मचारियों और छोटे भाई विशाल के साथ थे, जबकि पदम अपने चार दोस्तों के साथ दूसरी कार में सफर कर रहे थे। रास्ते में ईको कार का टायर पंचर हो गया, जिसे ठीक कराने में समय लगने के कारण दोनों गाड़ियां अलग हो गईं। काफी देर तक संपर्क नहीं होने पर अभिषेक के मोबाइल पर कॉल किया गया, लेकिन बाद में किसी अन्य व्यक्ति ने फोन उठाकर हादसे की सूचना दी।

    पदम ने बताया कि मौके पर पहुंचने पर अभिषेक समेत चार लोगों की मौत हो चुकी थी। हादसे में जतिन, कमल और अभिषेक के भाई विशाल गंभीर रूप से घायल हुए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेरठ रेफर किया गया, लेकिन परिजन बाद में उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ले गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले कार्तिक राजपूत बागपत के निवासी थे। उन्होंने बीसीए की पढ़ाई करने के बाद नोएडा के सेक्टर-2 स्थित एक कंपनी में नौकरी शुरू की थी। उनके परिवार में पत्नी भारती और एक वर्ष की बेटी काशवी है। दो वर्ष पहले ही उनकी शादी हुई थी। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    वहीं, दिल्ली निवासी गुलबुद्दीन उर्फ सोनू अविवाहित थे और अभिषेक की कंपनी में कार्यरत थे। उनके बड़े भाई सद्दाम हुसैन के अनुसार, गुलबुद्दीन ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी और परिवार में माता-पिता के साथ रहते थे।

    थाना प्रभारी संदीप मिश्रा ने बताया कि सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। परिजन मौके पर पहुंच चुके हैं। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और चालक को आई झपकी को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

  • नोएडा में खुले नाले ने ली युवा इंजीनियर की जान, आर्यन की मौत के बाद फिर कठघरे में प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही

    नोएडा में खुले नाले ने ली युवा इंजीनियर की जान, आर्यन की मौत के बाद फिर कठघरे में प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही


    नई दिल्ली ।
    नोएडा में एक बार फिर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। सेक्टर-58 में जलभराव के बीच खुले नाले में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की मौत ने शहर में सार्वजनिक सुरक्षा, जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के कई हादसे हो चुके हैं और प्रत्येक घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए गए थे।

    मूल रूप से फर्रुखाबाद निवासी आर्यन रोज की तरह अपने कार्यालय जा रहे थे। रातभर हुई बारिश के कारण सड़क पर काफी जलभराव था, जिससे नाले के ऊपर बने स्लैब पूरी तरह पानी में छिप गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक स्थान पर स्लैब पहले से टूटा हुआ था, लेकिन पानी भरे होने के कारण वह दिखाई नहीं दे रहा था। जैसे ही आर्यन वहां से गुजरे, उनका संतुलन बिगड़ा और वे सीधे गहरे नाले में गिर गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला जा सका और बाद में उनका शव बरामद हुआ।

    घटना के बाद परिजनों ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते टूटे स्लैब बदले गए होते, खुले नालों को सुरक्षित किया गया होता और जलभराव की समस्या का प्रभावी समाधान किया गया होता, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था। परिजनों ने मामले में उचित कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।

    यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। इसी वर्ष सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन परियोजना के पास बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से युवा इंजीनियर युवराज की मौत हुई थी। उस समय भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवाल उठे थे। घटना के बाद जांच समिति गठित करने, खुले गड्ढों की बैरिकेडिंग करने और नियमित निरीक्षण कराने जैसे निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल बने रहे।

    इसके कुछ समय बाद एक अन्य हादसे में एमिटी विश्वविद्यालय के एक छात्र की भी निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से जान चली गई थी। उस घटना के बाद भी निर्माण स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, सुरक्षा घेराबंदी सुनिश्चित करने और जलभराव वाले गड्ढों को तत्काल भरने की बात कही गई थी। इसके बावजूद ताजा घटना यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में खुले नाले, क्षतिग्रस्त स्लैब, निर्माणाधीन स्थलों पर असुरक्षित गड्ढे और बारिश के दौरान गंभीर जलभराव आज भी आम समस्या बने हुए हैं। उनका आरोप है कि शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कई स्थानों पर समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं किया जाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। उनका मानना है कि केवल हादसों के बाद निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित निगरानी और प्रभावी अमल भी उतना ही आवश्यक है।

    आर्यन की मौत ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने ला दिया है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के मौसम में संवेदनशील स्थानों की पहचान, नियमित निरीक्षण, क्षतिग्रस्त संरचनाओं की तत्काल मरम्मत और प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं मजबूत किए बिना ऐसे हादसों को रोकना कठिन होगा। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • सीरीज गंवा चुका भारत अब प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती में इंग्लैंड से आखिरी मुकाबला आज पिच और मौसम देंगे बल्लेबाजों का साथ

    सीरीज गंवा चुका भारत अब प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती में इंग्लैंड से आखिरी मुकाबला आज पिच और मौसम देंगे बल्लेबाजों का साथ


    नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का आखिरी मुकाबला शनिवार को साउथैम्पटन के रोज बाउल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक तरफ टीम सीरीज में सम्मान बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी तो दूसरी ओर आईसीसी टी20 रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक टीम बने रहने की चुनौती भी उसके सामने होगी। यदि इंग्लैंड इस मुकाबले में जीत दर्ज करने में सफल रहता है तो वह भारत को पीछे छोड़ते हुए टी20 क्रिकेट की नई नंबर वन टीम बन जाएगा। ऐसे में यह मुकाबला केवल सीरीज का अंतिम मैच नहीं बल्कि प्रतिष्ठा और रैंकिंग की जंग भी बन गया है।

    हैरी ब्रूक की कप्तानी में इंग्लैंड ने पूरी श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन किया है। मेजबान टीम पहले ही 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है और उसके खिलाड़ियों ने बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी दोनों विभागों में लगातार दमदार खेल दिखाया है। कप्तान हैरी ब्रूक ने चौथे मुकाबले में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए केवल 35 गेंदों में 79 रन बनाए थे जबकि फिल साल्ट जैकब बेथेल और टॉम बैंटन ने भी लगातार उपयोगी पारियां खेलकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। जरूरत पड़ने पर सैम करन ने भी बल्ले से अहम योगदान दिया है।

    गेंदबाजी में जोफ्रा आर्चर और जोश टंग की जोड़ी भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई है। नई गेंद से दोनों तेज गेंदबाजों ने भारतीय शीर्ष क्रम को लगातार परेशान किया है। इंग्लैंड के स्पिन और तेज गेंदबाजों के संतुलित प्रदर्शन ने पूरी श्रृंखला में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    दूसरी ओर भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी लगातार मिले अवसरों का फायदा नहीं उठा सके जबकि अभिषेक शर्मा पिछले दो मुकाबलों में बड़ी पारी खेलने में असफल रहे। ईशान किशन भी रनों के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए। तिलक वर्मा और अक्षर पटेल का बल्ला भी इस श्रृंखला में खामोश रहा। हालांकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने चौथे मुकाबले में 80 रन की शानदार पारी खेलकर अपने शानदार फॉर्म का परिचय दिया और टीम को संघर्ष करने का मौका दिया।

    गेंदबाजी विभाग में भी भारतीय टीम अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी। अर्शदीप सिंह हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा लगातार रन लुटाते नजर आए जबकि स्पिन विभाग में भी विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सफलता नहीं मिली। ऐसे में आखिरी मुकाबले में भारतीय टीम अपने सभी विभागों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करेगी।

    साउथैम्पटन के रोज बाउल मैदान की बात करें तो यहां की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। अच्छी बाउंस और तेज आउटफील्ड के कारण बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल सकते हैं। इस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर लगभग 166 रन है जबकि दूसरी पारी में औसतन 138 रन बने हैं। आंकड़े बताते हैं कि यहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को अधिक सफलता मिली है। अब तक खेले गए 24 टी20 मुकाबलों में 16 बार पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम विजयी रही है जबकि लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम केवल 8 मैच जीत सकी है। ऐसे में टॉस की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।

    मौसम की बात करें तो क्रिकेट प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार पूरे मुकाबले के दौरान आसमान साफ रहने की संभावना है और बारिश की आशंका बेहद कम है। ऐसे में दर्शकों को बिना किसी रुकावट के पूरे 40 ओवर का रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।

    भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला केवल हार जीत का नहीं बल्कि आत्मविश्वास वापस हासिल करने और दुनिया की नंबर एक टी20 टीम का ताज बचाने का अवसर भी है। वहीं इंग्लैंड की नजर सीरीज में क्लीन स्वीप करने के साथ दुनिया की नंबर एक टीम बनने के गौरव पर होगी। यही वजह है कि दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला बेहद रोमांचक और हाई वोल्टेज होने की पूरी उम्मीद है।

  • स्पेन की जीत के सबसे बड़े हीरो बने मिकेल मेरिनो लगातार दो नॉकआउट मुकाबलों में विजयी गोल कर रचा विश्व कप इतिहास

    स्पेन की जीत के सबसे बड़े हीरो बने मिकेल मेरिनो लगातार दो नॉकआउट मुकाबलों में विजयी गोल कर रचा विश्व कप इतिहास


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन के मिडफील्डर मिकेल मेरिनो ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे विश्व फुटबॉल लंबे समय तक याद रखेगा। बेल्जियम के खिलाफ खेले गए रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मेरिनो ने बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरने के महज दो मिनट बाद निर्णायक गोल दागकर स्पेन को 2-1 की शानदार जीत दिला दी। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई और मेरिनो ने अपने नाम ऐसा रिकॉर्ड दर्ज करा लिया जो अब तक कोई खिलाड़ी नहीं बना सका।

    मिकेल मेरिनो फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में एक ही टूर्नामेंट के दो अलग अलग नॉकआउट मुकाबलों में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के रूप में विजयी गोल करने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बन गए हैं। इससे पहले उन्होंने प्री क्वार्टर फाइनल में पुर्तगाल के खिलाफ भी अंतिम क्षणों में गोल कर स्पेन को जीत दिलाई थी। अब बेल्जियम के खिलाफ भी उन्होंने वही कारनामा दोहराते हुए अपनी टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिला दिया। इसके साथ ही वह स्पेन के लिए विश्व कप में 80वें मिनट के बाद दो अलग मुकाबलों में निर्णायक गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए हैं।

    इस विश्व कप में मेरिनो का योगदान बेहद खास रहा है। स्पेन ने अब तक छह मुकाबले खेले हैं जिनमें उन्हें केवल एक मैच में शुरुआती एकादश में मौका मिला जबकि बाकी पांच मुकाबलों में वह सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे। इसके बावजूद उन्होंने हर अवसर पर अपनी उपयोगिता साबित करते हुए टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है। उनकी मौजूदगी ने स्पेन के कोच की रणनीति को भी नई पहचान दी है क्योंकि हर बार जरूरत पड़ने पर मेरिनो ने टीम की उम्मीदों पर खरा उतरकर मैच का रुख बदल दिया।

    बेल्जियम के खिलाफ मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने आक्रामक फुटबॉल खेली। लगातार दबाव का असर 30वें मिनट में देखने को मिला जब लैमिन यामल की शानदार दौड़ और पेड्रो पोरो के सटीक क्रॉस के बाद फैबियन रुइज ने रिबाउंड पर गोल करते हुए स्पेन को बढ़त दिला दी। हालांकि बेल्जियम ने हार नहीं मानी और पहले हाफ के आखिर में चार्ल्स डी केटेलेयर ने शानदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।

    दूसरे हाफ में दोनों टीमों ने कई अवसर बनाए लेकिन कोई भी बढ़त हासिल नहीं कर सका। मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था। तभी 86वें मिनट में स्पेन के कोच ने मिकेल मेरिनो को मैदान पर उतारा। यह फैसला कुछ ही क्षणों में मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। 88वें मिनट में पाउ क्यूबार्सी के शॉट पर बेल्जियम के गोलकीपर गेंद को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके और मेरिनो ने मौके का शानदार फायदा उठाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। इस गोल ने स्पेन को 2-1 की यादगार जीत दिला दी।

    मेरिनो के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि फुटबॉल में केवल शुरुआती एकादश ही नहीं बल्कि बेंच पर बैठे खिलाड़ी भी मैच का सबसे बड़ा हीरो बन सकते हैं। उनकी सूझबूझ आत्मविश्वास और सही समय पर किए गए शानदार फिनिश ने स्पेन को खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार बना दिया है। अब सेमीफाइनल में स्पेन का सामना फ्रांस जैसी मजबूत टीम से होगा जहां एक बार फिर सभी की नजरें मेरिनो पर टिकी रहेंगी कि क्या वह अपनी गोल्डन टच से टीम को फाइनल तक पहुंचाने का कमाल कर पाएंगे।

  • न्यूजीलैंड को बताया दिलदार देश पीएम मोदी बोले रचिन सोढ़ी और एजाज पटेल जैसी प्रतिभाओं को मिला सम्मान

    न्यूजीलैंड को बताया दिलदार देश पीएम मोदी बोले रचिन सोढ़ी और एजाज पटेल जैसी प्रतिभाओं को मिला सम्मान


    नई दिल्ली। ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को नई ऊंचाई देने का संदेश दिया। उन्होंने न्यूजीलैंड को दिलदार देश बताते हुए कहा कि यह ऐसा राष्ट्र है जहां प्रतिभा की पहचान उसकी जन्मभूमि से नहीं बल्कि उसकी क्षमता से होती है। यही कारण है कि भारतीय मूल के कई खिलाड़ी आज न्यूजीलैंड की पहचान बन चुके हैं और पूरी दुनिया में अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ियों रचिन रवींद्र ईश सोढ़ी और एजाज पटेल का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि मेहनत और प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती। भारतीय मूल के इन खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड ने अवसर दिया और उन्होंने अपने प्रदर्शन से देश का विश्वास भी जीता। यही भावना दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाती है।

    प्रधानमंत्री ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि लगभग एक शताब्दी पहले भारतीय हॉकी टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर पहुंची थी। उस समय हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने अपने शानदार खेल से न्यूजीलैंड के लोगों का दिल जीत लिया था। उन्होंने कहा कि खेल हमेशा से दोनों देशों के बीच दोस्ती का मजबूत माध्यम रहा है और आज भी यही भावना दोनों देशों को और करीब ला रही है।

    उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड खेलों के क्षेत्र में नई साझेदारी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में आयोजित न्यूजीलैंड रग्बी और भारत रग्बी के संयुक्त कोचिंग कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए इसे सकारात्मक शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि भारत में रग्बी को आगे बढ़ाने के लिए अनुभवी कोच विशेषज्ञ और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है और न्यूजीलैंड इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय रग्बी टीम ऑल ब्लैक्स की हालिया जीत पर भी बधाई दी और कहा कि उनकी सफलता पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच खेल प्रशिक्षण खिलाड़ियों के आदान प्रदान और आधुनिक तकनीक के उपयोग से भविष्य में कई नए अवसर पैदा होंगे।

    उन्होंने अपने दौरे के दौरान स्पोर्ट्स स्टार्टअप कार्यक्रम में शामिल होने का अनुभव भी साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां प्रस्तुत किए गए नए विचार आधुनिक तकनीक और नवाचार ने उन्हें बेहद प्रभावित किया। उनका मानना है कि खेल तकनीक डेटा एनालिटिक्स स्पोर्ट्स साइंस और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भारत और न्यूजीलैंड मिलकर वैश्विक स्तर पर नई मिसाल कायम कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में न्यूजीलैंड जैसे अनुभवी देश के साथ सहयोग दोनों देशों के खिलाड़ियों युवाओं और खेल संस्थानों के लिए लाभकारी साबित होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं रहेगा बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता नवाचार और आर्थिक सहयोग का भी मजबूत आधार बनेगा।

    प्रधानमंत्री के संबोधन ने भारतीय समुदाय में उत्साह का माहौल पैदा किया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं बल्कि खेल संस्कृति नवाचार और मानवीय मूल्यों के साझा विश्वास पर भी आधारित हैं। यही साझेदारी आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी।

  • यूपीएससी ने निकाली 48 पदों पर भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर लीगल और साइंटिफिक पदों तक आवेदन शुरू

    यूपीएससी ने निकाली 48 पदों पर भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर लीगल और साइंटिफिक पदों तक आवेदन शुरू

    नई दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने वर्ष 2026 की चयन आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कुल 48 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। भर्ती प्रक्रिया 11 जुलाई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक एवं पात्र उम्मीदवार 31 जुलाई की शाम 6 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती स्वास्थ्य, कृषि, कॉर्पोरेट मामलों, गृह तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में की जाएगी।

    जारी अधिसूचना के अनुसार सबसे अधिक रिक्तियां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्पेशलिस्ट ग्रेड-III असिस्टेंट प्रोफेसर के विभिन्न विषयों में निकाली गई हैं। इनमें एंडोक्रिनोलॉजी, नियोनेटोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पल्मोनरी मेडिसिन, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा विषय शामिल हैं। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में असिस्टेंट सॉइल केमिस्ट, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस में प्रॉसिक्यूटर तथा अन्य तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भी भर्ती की जाएगी।

    भर्ती में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के अंतर्गत डिप्टी असिस्टेंट डायरेक्टर (कीट विज्ञान) और एंटोमोलॉजिस्ट के पद भी शामिल हैं। वहीं गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर (टॉक्सिकोलॉजी) तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय में अधीक्षक (कानूनी) के पदों पर भी योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित पद के अनुसार मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक, स्नातकोत्तर अथवा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक है। अधिकांश पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में एक से तीन वर्ष का कार्यानुभव भी अनिवार्य रखा गया है। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले प्रत्येक पद की योग्यता और अनुभव संबंधी शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है।

    आयु सीमा पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। अधिकतम आयु 30 वर्ष से 43 वर्ष के बीच रखी गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमानुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। हालांकि किसी भी श्रेणी के उम्मीदवार के लिए अधिकतम आयु 56 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती।

    चयन प्रक्रिया में भर्ती परीक्षा अथवा संयुक्त भर्ती परीक्षा, व्यक्तिगत साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन शामिल होंगे। अंतिम चयन सभी चरणों में उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-7 से लेवल-11 के तहत वेतन दिया जाएगा। इसके साथ केंद्र सरकार के नियमानुसार विभिन्न भत्तों और अन्य सेवा लाभों का भी प्रावधान रहेगा।

    आवेदन शुल्क सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए 25 रुपये निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट प्रदान की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित पदों की विस्तृत पात्रता, अनुभव तथा अन्य शर्तों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में सावधानीपूर्वक जांचने की सलाह दी गई है।

  • CM योगी गोरखपुर से शुरू कल करेंगे 35 करोड़ पौधे लगाने के अभियान का शुभारंभ

    CM योगी गोरखपुर से शुरू कल करेंगे 35 करोड़ पौधे लगाने के अभियान का शुभारंभ


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे ‘पौधरोपण महायज्ञ-2026’ का शुभारंभ 12 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से करेंगे। प्रदेशव्यापी अभियान के तहत मुख्यमंत्री भगवानपुर टोल प्लाजा लिंक एक्सप्रेसवे के समीप और आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड किनारे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण करेंगे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करेंगे। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना भी उपस्थित रहेंगे।

    त्रिवेणी और मौलश्री के पौधों से होगी शुरुआत
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पास त्रिवेणी—नीम, पीपल और बरगद—का पौधा रोपकर अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद वह ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा लगाएंगे। राज्य सरकार ने इस वर्ष पूरे उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    गोरखपुर को मिला 55.28 लाख पौधरोपण का लक्ष्य
    राज्य सरकार के इस अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग के समन्वय में कुल 27 विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के कुल लक्ष्य में गोरखपुर जिले को 55 लाख 28 हजार 600 पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सबसे अधिक योगदान वन विभाग का रहेगा।

    पौधों की सुरक्षा और संरक्षण के पूरे इंतजाम
    प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी सरकारी पौधशालाओं में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। साथ ही पौधों की बेहतर वृद्धि और उनकी उत्तरजीविता (सर्वाइवल) दर बढ़ाने के लिए चयनित स्थलों पर गड्ढों की खुदाई, ऊपरी मिट्टी (टॉप सॉयल) की उपलब्धता और पौधों के संरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।

  • कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा

    कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा


    कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर, रामकोला हाटा विधानसभा क्षेत्र की 525 करोड़ की 464 परियोजनाओं का शनिवार को लोकार्पण व शिलान्यास करते हुए विपक्ष को विकास और कानून व्यवस्था पर घेरते हुए सीधा हमला बोला। कहा कि, पहले की सरकार के पास नीयत थी न नीति थी। सोच ही लकवाग्रस्त थी, ऐसे में विकास की बात ही बेमानी थी।

    इस दौरान टेकुआटार में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा पर हमला बोला और कहा कि, पहले उत्तर प्रदेश में त्योहारों पर दंगे होते थे, अब नो कर्फ्यू , नो दंगा, यूपी में सब चंगा। बिना राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिरों पर कब्जा करने वाले अयोध्या, काशी और मथुरा के बारे में कैसे सोच सकते हैं। धर्म आस्था पर आज हमें आइना दिखाने वाले अपना चेहरा देखें।

    मुख्यमंत्री योगी ने कुशीनगर की इंसेफेलाइटिस से मासूमो के बचपन छिनने व मुसहरों की मौत का उदाहरण देते पूर्व की सरकारों को कठघरे में खड़ा किया तो कहा कि, अब इंसेफेलाइटिस से बचपन छिनता है और न कोई प्रदेश में भूख से मरता है। अब आवास, बिजली, गैस कनेक्शन, उपचार व रोजगार संग विकास की बात होती है।

    कुशीनगर से शीघ्र शुरू होगी उड़ान, गया और जेवर से जुड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, पश्चिम एशिया संकट से दुनिया में मची उथल-पुथल के चलते नए नए एयरक्राफ्ट नहीं आ सके, जिससे कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान शुरू नहीं हो सकी। शीघ्र ही यहां से उड़ान शुरू होगी और गया और जेवर को जोड़ जाएगा। सरकार पूरी तरह संजीदा है।

    दियारा को मिलेगा 800 करोड़ का पुल
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नारायणी उस पार दियारा के गांवों की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि डीपीआर बन रहा है। शीघ्र ही नारायणी पर 800 करोड़ का पुल बनेगा। दियारा के सभी गांव विकास की मुख्य धारा से जुड़ेगें। अंतिम व्यक्ति का विकास ही हमारी सरकार की सोच है। इस पर हम इमानदारी से कार्य भी कर रहे हैं।