Author: bharati

  • नौतपा से पहले झुलसता मध्यप्रदेश, तापमान और बढ़ने की चेतावनी

    नौतपा से पहले झुलसता मध्यप्रदेश, तापमान और बढ़ने की चेतावनी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गर्मी ने एक बार फिर अपना तीखा असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हालात बेहद चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए राज्य के 4 जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया है, जहां अगले कुछ दिनों तक भीषण लू और अत्यधिक गर्मी का खतरा बना रहेगा।

     नौतपा में और बढ़ेगी तपिश
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय चल रहे नौतपा के दौरान प्रदेश में तापमान और ऊपर जा सकता है। नौतपा को गर्मी का सबसे कठिन दौर माना जाता है, जिसमें सूर्य की सीधी किरणें धरती को सबसे ज्यादा गर्म करती हैं। इस दौरान दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहने की संभावना है, जिससे राहत मिलने के आसार कम हैं।

    किन जिलों में रेड अलर्ट
    रेड अलर्ट वाले जिलों में प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन इलाकों में दिन के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि इन जिलों में तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया जा सकता है और लू का असर तेज रहेगा।

     स्वास्थ्य पर बढ़ रहा असर
    भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में शरीर में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।

     विशेषज्ञों की सलाह
    मौसम और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है-
    दिन में 11 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें
    पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें
    हल्के और ढीले कपड़े पहनें
    धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें
    बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें

    प्रशासन अलर्ट मोड प
    प्रशासन ने भी गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। कई जगहों पर पेयजल व्यवस्था और हीटवेव से बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

    मध्य प्रदेश में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद कम है। नौतपा के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है, ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • 27 मई से बनेगा व्यातिपात योग, सूर्य-चंद्रमा की खास स्थिति से इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    27 मई से बनेगा व्यातिपात योग, सूर्य-चंद्रमा की खास स्थिति से इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह में एक महत्वपूर्ण ग्रह योग बनने जा रहा है, जिसे व्यातिपात योग कहा जाता है। यह योग 27 मई को सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण निर्मित होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, जब सूर्य और चंद्रमा 180 डिग्री की विपरीत स्थिति में आते हैं, तब यह योग बनता है, जिसे ऊर्जावान लेकिन तनावपूर्ण माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग 27 मई सुबह 3 बजे से शुरू होकर 30 मई तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट और निर्णय लेने में भ्रम जैसी स्थितियां बन सकती हैं। इसलिए इस अवधि में नए या शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    क्या है व्यातिपात योग?
    ज्योतिष शास्त्र में व्यातिपात योग को विशेष और संवेदनशील योग माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की आमने-सामने की स्थिति के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे लोगों के व्यवहार, निर्णय और दैनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इस समय कई बार योजनाओं में बाधाएं और मानसिक अस्थिरता देखने को मिलती है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा ज्यादा सावधान

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने का संकेत दे रहा है।
    – बड़े निवेश या पैसों के लेन-देन में जल्दबाजी से बचें।
    – खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
    – धैर्य और समझदारी से लिया गया फैसला नुकसान से बचा सकता है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों को कार्यक्षेत्र में संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है।
    – ऑफिस में सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है।
    – किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय को सोच-समझकर लें।
    – जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना लाभकारी रहेगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लोगों के लिए यह समय वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखने का है।
    – छोटी बात भी विवाद का कारण बन सकती है।
    – किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें।
    – शांत और संतुलित व्यवहार से कई परेशानियों से बचा जा सकता है।

    शुभ कार्यों में बरतें सावधानी
    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि व्यातिपात योग के दौरान नए कार्य, बड़े निवेश, शुभ आयोजन या महत्वपूर्ण फैसले टालना बेहतर माना जाता है। इस समय मानसिक संतुलन और धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी होगा।

  • एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज 42 जिलों में लू की चेतावनी, नौगांव सबसे गर्म

    एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज 42 जिलों में लू की चेतावनी, नौगांव सबसे गर्म

     
    भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा शुरू होने से पहले ही भीषण गर्मी का दौर जारी है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। खासकर ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग इस समय हीटवेव की चपेट में हैं। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक तीखी हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को प्रदेश के 42 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जबकि ग्वालियर समेत 21 जिलों में तीव्र लू को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है।

    नौगांव और खजुराहो सबसे गर्म
    शुक्रवार को प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। छतरपुर जिले का नौगांव प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं खजुराहो में पारा 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। इसके अलावा टीकमगढ़ और सतना में 44.5 डिग्री, दतिया में 44.4 डिग्री, नरसिंहपुर और दमोह में 44.2 डिग्री तथा सागर और राजगढ़ में तापमान 44 डिग्री दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में भी बढ़ी गर्मी
    प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। ग्वालियर में 43.7 डिग्री, भोपाल में 42.2 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    इन जिलों में अलर्ट जारी

    रेड अलर्ट
    टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना।

    ऑरेंज अलर्ट
    ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, सागर, दमोह, निवाड़ी, कटनी, उमरिया, मैहर, सतना, मऊगंज और रीवा।

    येलो अलर्ट
    भोपाल, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर।

    इन जिलों में उमस और तेज गर्मी
    इंदौर, देवास, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट समेत कई जिलों में तेज गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है।

    31 मई तक जारी रहेगा गर्मी का प्रकोप
    मौसम विभाग के अनुसार 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो रही है और 31 मई तक प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर बनी रह सकती है। अगले चार दिनों तक लोगों को राहत मिलने की संभावना नहीं है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत अधिकांश शहरों में तापमान लगातार ऊंचा बना रहेगा।

  • AC से बाहर निकलते ही धूप में जाना पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है बीमारी का खतरा

    AC से बाहर निकलते ही धूप में जाना पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है बीमारी का खतरा


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के बीच एयर कंडीशनर (AC) लोगों की जरूरत बन चुका है। घर, ऑफिस और गाड़ियों में लोग घंटों AC में समय बिता रहे हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक AC में रहने के बाद अचानक तेज धूप और गर्म हवा में निकलना शरीर पर भारी पड़ सकता है। यह बदलाव शरीर के लिए एक तरह का “थर्मल शॉक” बन जाता है, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    तापमान में अचानक बदलाव क्यों करता है नुकसान?
    विशेषज्ञों के अनुसार, AC कमरे की गर्मी और नमी को काफी कम कर देता है, जिससे वातावरण बेहद ड्राई हो जाता है। इसका असर सीधे गले, त्वचा और सांस लेने की प्रणाली पर पड़ता है। जब व्यक्ति अचानक ऐसे वातावरण से तेज धूप में जाता है, तो शरीर को तापमान के अंतर को एडजस्ट करने में समय लगता है। इसी दौरान शरीर पर दबाव बढ़ता है और सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

    किन समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है
    डॉक्टरों के मुताबिक, अचानक तापमान बदलने से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं—
    सिरदर्द और चक्कर आना
    थकान और कमजोरी महसूस होना
    डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)
    गले में खराश और सूखी खांसी
    हीट एक्सॉशन का खतरा
    अस्थमा और एलर्जी के मरीजों में बढ़ी परेशानी
    विशेष रूप से वे लोग जो लंबे समय तक AC में काम करते हैं और सीधे धूप में निकलते हैं, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

    शरीर को कैसे करें सुरक्षित
    हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि AC से निकलते ही सीधे धूप में जाने से बचना चाहिए। शरीर को धीरे-धीरे बाहरी तापमान के अनुसार ढालना जरूरी है।
    AC से निकलकर कुछ मिनट छांव या सामान्य तापमान में रुकें
    दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
    नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें
    हल्के और ढीले कॉटन कपड़े पहनें
    बाहर निकलते समय टोपी, छाता या स्कार्फ का उपयोग करें
    बहुत ठंडा पानी या ड्रिंक तुरंत न पिएं

    विशेषज्ञों की सलाह
    डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना और तापमान के अचानक बदलाव से बचना सबसे जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हीट से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

  • शिमला जाने से पहले क्या तैयारी करें? सफर को आरामदायक बनाने के जरूरी टिप्स

    शिमला जाने से पहले क्या तैयारी करें? सफर को आरामदायक बनाने के जरूरी टिप्स


    नई दिल्ली । अगर आप शिमला घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहद जरूरी है। सही प्लानिंग आपके ट्रिप को ज्यादा आरामदायक और बजट फ्रेंडली बना सकती है। खासकर पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए तैयारी पहले से होना जरूरी है।

    1. मौसम की जानकारी जरूर ले
    शिमला में मौसम जल्दी बदलता है।
    गर्मियों में हल्की ठंड रहती है
    सर्दियों में बर्फबारी और तेज ठंड पड़ती है
    मानसून में फिसलन और भूस्खलन का खतरा रहता है
    यात्रा से पहले मौसम अपडेट जरूर चेक करें।

    2. कपड़े सही पैक करें
    गर्मियों में भी हल्की जैकेट रखें
    सर्दियों में भारी ऊनी कपड़े, ग्लव्स और कैप जरूरी हैं
    आरामदायक स्पोर्ट्स शूज़ या ग्रिप वाले जूते पहनें
    बारिश के मौसम में रेनकोट या छाता साथ रखें

    3. होटल पहले से बुक करे
    सीजन के समय शिमला में होटल जल्दी फुल हो जाते हैं। इसलिए ऑनलाइन एडवांस बुकिंग करना बेहतर रहता है। मॉल रोड के पास होटल महंगे हो सकते हैं, जबकि थोड़ा दूर रहने पर बजट विकल्प मिल जाते हैं।

    4. यात्रा के जरूरी दस्तावेज रखें
    आधार कार्ड या अन्य आईडी प्रूफ
    होटल बुकिंग की कॉपी
    ट्रेन/बस/फ्लाइट टिकट
    जरूरी दवाइयां और मेडिकल किट

    5. रास्ते की तैयारी करें
    अगर आप सड़क मार्ग से जा रहे हैं तो:
    गाड़ी की सर्विस पहले करा लें
    ब्रेक और टायर जरूर चेक करें
    पहाड़ी रास्तों के लिए अनुभवी ड्राइवर बेहतर रहता है
    6. घूमने की जगहों की लिस्ट बना लें
    मॉल रोड, जाखू मंदिर, कुफरी और द रिज जैसी जगहें पहले से प्लान कर लें ताकि समय बच सके।

    7. कैश और नेटवर्क का ध्यान रखें
    कुछ पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क कमजोर हो सकता है। डिजिटल पेमेंट हर जगह उपलब्ध नहीं होता, इसलिए थोड़ा कैश साथ रखें।

    8. स्वास्थ्य का रखें ध्या
    ऊंचाई वाले इलाकों में कुछ लोगों को चक्कर या सांस की दिक्कत हो सकती है।
    पानी पर्याप्त पिएं
    ज्यादा दौड़भाग से बचें
    जरूरी दवाइयां साथ रखें
    यात्रा को यादगार बनाने के लिए
    स्थानीय खानपान का आनंद लें, लेकिन साफ-सफाई का ध्यान रखें। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचें और पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता का सम्मान करें।

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वालों के लिए गाइड, इन बातों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

    कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वालों के लिए गाइड, इन बातों की अनदेखी पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । कैलाश मानसरोवर यात्रा को हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन यह यात्रा जितनी आध्यात्मिक है, उतनी ही कठिन और चुनौतीपूर्ण भी है। तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचने के लिए यात्रियों को 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरना पड़ता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होता है और मौसम बेहद अनिश्चित रहता है।

    ऊंचाई और मौसम सबसे बड़ी चुनौती
    इस यात्रा में सबसे बड़ी परेशानी हाई एल्टीट्यूड की होती है। यहां कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा तेज हवाएं, बर्फबारी और अचानक तापमान गिरना आम बात है, जिससे यात्रा और कठिन हो जाती है।

    यात्रा से पहले हेल्थ चेकअप जरूर
    विशेषज्ञों के अनुसार यात्रा पर जाने से पहले पूरी मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी है। खासकर जिन लोगों को–
    दिल की बीमारी
    ब्लड प्रेशर
    डायबिटीज
    सांस से जुड़ी समस्या
    उनके लिए डॉक्टर की अनुमति के बिना यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है।

    फिटनेस और तैयारी सबसे जरूर
    कैलाश मानसरोवर यात्रा में शारीरिक सहनशक्ति बेहद अहम भूमिका निभाती है। इसलिए यात्रा से कुछ महीने पहले ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
    रोजाना वॉक और हल्की दौड़
    प्राणायाम और एक्सरसाइज
    स्टैमिना बढ़ाने वाली गतिविधियां
    इससे शरीर ऊंचाई वाले वातावरण के लिए तैयार हो जाता है।

    सही समय का चयन भी जरूरी
    यात्रा के लिए मई से जून का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है। जुलाई से सितंबर में बारिश और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जबकि नवंबर से अप्रैल तक भारी बर्फबारी के कारण यात्रा लगभग बंद रहती है।

    दस्तावेज और अनुमति जरूरी
    इस यात्रा के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज और अनुमति अनिवार्य हैं-
    वैध पासपोर्ट
    चीन ग्रुप वीजा
    तिब्बत ट्रैवल परमिट
    सरकारी अनुमति
    आमतौर पर यह यात्रा अधिकृत एजेंसियों या सरकारी कार्यक्रमों के जरिए ही कराई जाती है।

    क्या-क्या सामान साथ रखें?
    यात्रा के दौरान मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए सही पैकिंग बहुत जरूरी है—
    गर्म कपड़े और थर्मल वियर
    वॉटरप्रूफ जैकेट
    मजबूत ट्रैकिंग शूज
    सनस्क्रीन, सनग्लासेस और टोपी
    ग्लव्स और मफलर

    मेडिकल किट और जरूरी सामान
    यात्रा में सीमित सुविधाओं को देखते हुए मेडिकल किट साथ रखना जरूरी है, जिसमें शामिल हों—
    बुखार और दर्द की दवाएं
    डिहाइड्रेशन की दवा
    ऊंचाई पर होने वाली समस्याओं की दवाएं
    एनर्जी बार और सूखे मेवे
    पानी शुद्ध करने वाली टेबलेट

    कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल आस्था की नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक तैयारी की भी परीक्षा है। सही योजना, फिटनेस और सावधानियों के साथ यह यात्रा सुरक्षित और यादगार अनुभव बन सकती है।

  • Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम

    Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम


    नई दिल्ली । वास्तु और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन नमक का दान करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन नमक दान करने से शनिदेव नाराज हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
    शनिवार को नमक दान करने से क्या हो सकते हैं नुकसान?
    आर्थिक तंगी और बरकत में कम
    मान्यता है कि शनिवार को नमक दान करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। इससे धन हानि और आर्थिक परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
    वास्तु शास्त्र के अनुसार नमक ऊर्जा से जुड़ी वस्तु माना जाता है। शनिवार को इसका दान या खरीदारी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और कर्ज संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

    परिवार में तनाव
    ऐसी भी मान्यता है कि शनिवार को नमक देने से परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद और दूरी बढ़ सकती है। घर का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है।

    शनिवार को किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है?
    शनिवार के दिन शनिदेव की कृपा पाने और शनि दोष कम करने के लिए इन चीजों का दान शुभ माना जाता है-
    सरसों का तेल
    काले तिल
    उड़द की दाल
    काले कपड़े या कंबल
    लोहे की वस्तुएं
    मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

    क्या करें
    अगर शनिवार को किसी जरूरतमंद की मदद करनी हो, तो नमक की जगह अन्न, वस्त्र या तेल का दान करना बेहतर माना जाता है। साथ ही शनिदेव की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

  • शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं

    शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, उनके लिए शनिवार का व्रत बेहद लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया शनिवार व्रत जीवन की बाधाओं, आर्थिक परेशानियों और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है।

    हालांकि, कई लोग यह सवाल करते हैं कि क्या शनिदेव के लिए व्रत रखना सही है? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि पूरी श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ व्रत रखा जाए तो यह शुभ फलदायी माना जाता है।

    शनिवार व्रत के प्रमुख नियम–


    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
    शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ काले, नीले या गहरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनिदेव का ध्यान करें।

    पीपल के पेड़ की पूजा
    शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि दोष कम होता है।

    इन चीजों का करें दान
    शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, लोहे की वस्तुएं और कंबल का दान करना शुभ माना जाता है।

    हनुमानजी की पूजा भी करें
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी की पूजा करने से भी शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ लाभकारी माना जाता है।

  • शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन

    शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र और ज्योतिष मान्यताओं में रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी को भी शुभ-अशुभ से जोड़ा गया है। खासतौर पर जूते-चप्पल खरीदने को लेकर कई नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि गलत दिन पर जूते-चप्पल खरीदने से जीवन में नकारात्मकता, आर्थिक परेशानी और शनिदेव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और ग्रहण वाले दिन जूते-चप्पल खरीदने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन दिनों खरीदे गए फुटवियर दुर्भाग्य और मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।

    शनिवार को जूते-चप्पल खरीदना क्यों माना जाता है अशुभ?
    ज्योतिष शास्त्र में पैरों का संबंध शनिदेव से माना गया है। इसलिए शनिवार के दिन जूते-चप्पल खरीदना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे शनि दोष बढ़ सकता है और व्यक्ति को आर्थिक तंगी, तनाव और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    नए जूते-चप्पल खरीदने का सबसे शुभ दिन कौन सा है?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार शुक्रवार का दिन नए जूते-चप्पल खरीदने और पहनने के लिए सबसे शुभ माना गया है। कहा जाता है कि शुक्रवार को खरीदे गए फुटवियर सुख-सुविधा और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आते हैं।

    पुराने जूते-चप्पल कब हटाने चाहिए
    मान्यता के अनुसार फटे-पुराने या इस्तेमाल में नहीं आने वाले जूते-चप्पल शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर के बाहर छोड़ना शुभ माना जाता है। इससे शनि की अशुभ दृष्टि कम होती है और नकारात्मकता दूर होती है।

    जूते-चप्पल रखने से जुड़े वास्तु नियम

    बेड के नीचे जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए
    पूजा घर के पास फुटवियर रखना अशुभ माना जाता है
    घर के मुख्य दरवाजे पर बिखरे जूते नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं
    गंदे और टूटे फुटवियर घर में रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार साफ-सुथरे और व्यवस्थित जूते-चप्पल घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • छोटे बच्चों में मोटापा बढ़ना क्यों है चिंता की बात? जानें संभावित बीमारी

    छोटे बच्चों में मोटापा बढ़ना क्यों है चिंता की बात? जानें संभावित बीमारी


    नई दिल्ली । आजकल छोटे बच्चों में तेजी से बढ़ता वजन माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। अक्सर इसे ज्यादा खाना, जंक फूड या कम खेलकूद का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार यह समस्या शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी, खासकर थायरॉइड बीमारी का संकेत हो सकती है। यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा हो और साथ में थकान, सुस्ती, कमजोरी या पढ़ाई में ध्यान न लगने जैसी परेशानियां भी दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क होने की जरूरत है।

    क्या होता है थायरॉइड और क्यों है जरूरी?
    थायरॉइड गले के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ग्रोथ और दिमाग के विकास को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तो बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित होने लगती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में सबसे आम समस्या हाइपोथायरॉइडिज्म होती है। इसमें थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बनाती है। यह बीमारी कई बार आनुवंशिक भी हो सकती है और परिवार में पहले से मौजूद रहती है।

    बच्चों में दिख सकते हैं ये लक्षण
    अगर बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो जाता है—
    तेजी से वजन बढ़ना
    हमेशा थकान और सुस्ती रहना
    कब्ज की समस्या
    ठंड ज्यादा लगना
    बालों का रूखा होना
    पढ़ाई में ध्यान कम लगना
    लंबाई की ग्रोथ धीमी होना
    गले में सूजन दिखाई देना
    डॉक्टरों का कहना है कि केवल मोटापा हमेशा थायरॉइड का संकेत नहीं होता, लेकिन मोटापे के साथ सुस्ती और ग्रोथ रुकने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    जन्म से भी हो सकती है बीमारी
    बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ बच्चों में जन्म के समय से ही थायरॉइड की समस्या हो सकती है, जिसे जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है। वहीं कई बच्चों में यह समस्या धीरे-धीरे बड़े होने के साथ विकसित होती है।

    हाइपरथायरॉइडिज्म भी बन सकता है परेशानी
    कुछ मामलों में बच्चों में हाइपरथायरॉइडिज्म भी देखने को मिलता है। इसमें थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है। इसके कारण बच्चे का वजन तेजी से कम होने लगता है और घबराहट, चिड़चिड़ापन, दस्त और आंखों का उभरना जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

    समय पर इलाज बेहद जरूरी
    विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और इलाज शुरू कर दिया जाए तो थायरॉइड को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसकी पहचान साधारण ब्लड टेस्ट से हो जाती है। अधिकतर मामलों में बच्चों को रोजाना दवा देकर हार्मोन संतुलित रखे जाते हैं।

    अगर इलाज में देरी हो जाए तो बच्चे की शारीरिक वृद्धि, मानसिक विकास और पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए बच्चों के वजन और व्यवहार में अचानक बदलाव को सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।