Author: bharati

  • सलमान खान को कोर्ट का समन जैसा नोटिस! शोरूम में कथित धोखाधड़ी के मामले में बहन अलवीरा भी तलब

    सलमान खान को कोर्ट का समन जैसा नोटिस! शोरूम में कथित धोखाधड़ी के मामले में बहन अलवीरा भी तलब


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। चंडीगढ़ की जिला अदालत ने सलमान खान और उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री समेत कई लोगों को कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में नोटिस जारी किया है। यह विवाद मनीमाजरा इलाके में Being Human ब्रांड के ज्वेलरी शोरूम खोलने से जुड़ा बताया जा रहा है। मामले में शिकायतकर्ता स्थानीय बिजनेसमैन अरुण गुप्ता हैं जिन्होंने आरोप लगाया है कि शोरूम शुरू करने को लेकर उनके साथ किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया और उन्हें कथित तौर पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अभी अदालत ने आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और मामले की शुरुआती कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
    शिकायत के मुताबिक यह मामला Style Quotient Jewellery Private Limited से जुड़ा है। इसी कंपनी के साथ शोरूम को लेकर कारोबारी समझौता किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें Being Human ब्रांड के तहत ज्वेलरी शोरूम शुरू करने के लिए तैयार किया गया था लेकिन बाद में परिस्थितियां उनके लिए मुश्किल होती चली गईं। उनका दावा है कि जिस तरह से कारोबार को लेकर बातें और आश्वासन दिए गए थे उन्हें उस रूप में पूरा नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया और अपनी शिकायत के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

    इस मामले में अदालत ने सिर्फ सलमान खान को ही नोटिस नहीं भेजा है बल्कि उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री का नाम भी इसमें शामिल है। इसके अलावा Style Quotient Jewellery Private Limited से जुड़े डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव और प्रसाद बिंदु माधव कापड़े को भी नोटिस जारी किया गया है। अदालत का उद्देश्य फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों का पक्ष जानना है ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे बढ़ाई जा सके।

    खास बात यह है कि अदालत की ओर से जारी नोटिस BNSS की धारा 223 के तहत बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि सलमान खान या अन्य संबंधित लोगों को इस मामले में दोषी ठहरा दिया गया है। यह प्रक्रिया शिकायत पर आगे बढ़ने से पहले संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने से जुड़ी है। इसलिए इस मामले में आरोप और अदालत के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    अदालत ने सभी संबंधित लोगों को 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे उपस्थित होने का निर्देश दिया है। वे खुद या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। अब इस तारीख पर होने वाली कार्यवाही काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी दौरान शिकायत से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्ष अपनी सफाई पेश कर सकते हैं।

    यह विवाद सलमान खान के चर्चित Being Human ब्रांड से जुड़ा होने के कारण भी खासा चर्चा में है। Being Human ब्रांड का नाम सलमान खान से लंबे समय से जुड़ा रहा है और इसके तहत फैशन तथा ज्वेलरी से जुड़े उत्पादों का कारोबार भी किया जाता है। ऐसे में शोरूम से जुड़ा यह कानूनी विवाद अभिनेता के लिए एक और चुनौती बनकर सामने आया है। फिलहाल मामले में अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार है और 5 अक्टूबर को होने वाली कार्यवाही से साफ होगा कि इस शिकायत पर आगे किस दिशा में कानूनी कदम बढ़ता है।

  • कुकू कोहली संग रिश्ते पर लगे थे घर तोड़ने के आरोप, अरुणा ईरानी ने क्यों चुनी बिना बच्चों की जिंदगी?

    कुकू कोहली संग रिश्ते पर लगे थे घर तोड़ने के आरोप, अरुणा ईरानी ने क्यों चुनी बिना बच्चों की जिंदगी?


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर कुकू कोहली अब इस दुनिया में नहीं हैं। 25 अगस्त को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में 77 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। बताया गया कि हार्ट अटैक के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। कुकू कोहली ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं और अजय देवगन को फूल और कांटे के जरिए बतौर अभिनेता लॉन्च किया। उनके निधन के बाद जहां फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है वहीं उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी पुरानी बातें भी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उनकी और दिग्गज अभिनेत्री अरुणा ईरानी की प्रेम कहानी की हो रही है।

    कुकू कोहली की पहली शादी रीता कोहली से हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां करिश्मा और पूजा कोहली हुईं। इसके बाद उनकी जिंदगी में अभिनेत्री अरुणा ईरानी की एंट्री हुई। दोनों की मुलाकात एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। शुरुआती दौर में दोनों के बीच ज्यादा अच्छी बॉन्डिंग नहीं थी। बताया जाता है कि कुकू कोहली के सेट पर देर से पहुंचने की वजह से अरुणा उनसे नाराज रहती थीं। बाद में कुकू उन्हें मनाने लगे और इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती चली गईं।

    अरुणा ईरानी ने अपने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि जब उनकी मुलाकात कुकू कोहली से हुई थी तब उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वह शादीशुदा हैं और उनके बच्चे भी हैं। जब दोनों के रिश्ते की खबर सामने आई तो अरुणा को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्हें घर तोड़ने वाली दूसरी औरत तक कहा गया। हालांकि अरुणा ईरानी ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि उन्होंने किसी का घर तोड़ने के इरादे से यह रिश्ता नहीं बनाया था। उनके मुताबिक रिश्तों में परिस्थितियां कई बार ऐसी बन जाती हैं जिन्हें बाहर से देखने वाला व्यक्ति पूरी तरह नहीं समझ सकता।

    कुकू कोहली की पहली पत्नी के निधन के बाद अरुणा ईरानी ने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बात करनी शुरू की। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली। लेकिन इस रिश्ते में एक ऐसा फैसला भी था जिसने अरुणा ईरानी की जिंदगी को हमेशा के लिए अलग दिशा दे दी। शादी के बाद उन्होंने मां न बनने का फैसला किया।

    अरुणा ईरानी ने खुद इसके पीछे दो बड़ी वजहें बताई थीं। पहली वजह दोनों के बीच उम्र का अंतर था। उन्हें लगता था कि अगर इस उम्र में वह मां बनती हैं तो बच्चे और उनके बीच उम्र का फासला काफी ज्यादा होगा। उन्हें डर था कि भविष्य में यह अंतर बच्चे और उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    दूसरी वजह इससे भी ज्यादा भावनात्मक थी। अरुणा नहीं चाहती थीं कि उनका बच्चा बड़ा होकर अपने पिता को लेकर उनसे ऐसे सवाल पूछे जिनका वह स्पष्ट जवाब न दे पाएं। उन्हें यह चिंता भी थी कि अगर कभी बच्चे को रात के समय पिता की जरूरत हुई तो वह उसकी मदद के लिए उन्हें बुलाने की स्थिति में नहीं होंगी। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि जिस उलझन और परेशानी का सामना उन्हें खुद करना पड़ा है उसका असर वह अपने बच्चे की जिंदगी पर नहीं पड़ने देंगी।

    इस तरह अरुणा ईरानी और कुकू कोहली की प्रेम कहानी भले ही विवादों में रही लेकिन अरुणा ने अपनी जिंदगी का यह बेहद निजी फैसला सोच समझकर लिया। कुकू कोहली के निधन के बाद उनकी यह कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है और यह बताती है कि बॉलीवुड की चमकती दुनिया के पीछे सितारों की निजी जिंदगी में कितने मुश्किल और भावनात्मक फैसले छिपे होते हैं।

  • हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके

    हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके


    नई दिल्ली । ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का बढ़ना आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। सामान्य स्थिति में रक्तचाप शरीर में खून के प्रवाह को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है लेकिन जब यह लंबे समय तक सामान्य स्तर से अधिक बना रहे तो हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

    ब्लड प्रेशर बढ़ने की एक बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल हो सकती है। आजकल लोगों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम हो गई है और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत बढ़ गई है। नियमित व्यायाम की कमी से वजन बढ़ सकता है और मोटापे के कारण हाई BP का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा खाने में ज्यादा नमक का सेवन भी कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। पैकेज्ड फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    तनाव भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय होते हैं जो कुछ समय के लिए हृदय की धड़कन और रक्तचाप बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव बना रहने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही नींद पूरी न होना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से कम नींद लेने वाले लोगों में हाई BP का खतरा बढ़ सकता है।

    धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसी तरह अत्यधिक शराब का सेवन कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ने से जुड़ा हो सकता है। इसलिए BP को नियंत्रित रखने के लिए इन आदतों से दूरी बनाना महत्वपूर्ण है।

    कई बार हाई ब्लड प्रेशर के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं या कुछ दवाएं भी कारण हो सकती हैं। किडनी से जुड़ी समस्याएं हार्मोन संबंधी परेशानियां और कुछ अन्य स्थितियां रक्तचाप को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का BP बार बार बढ़ रहा है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और तनाव को कम करने वाली स्वस्थ आदतें अपनाना फायदेमंद हो सकता है। खाने में नमक की मात्रा सीमित रखना फल सब्जियां और साबुत अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी मददगार हो सकता है। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से BP की जांच करवानी चाहिए।

    अगर BP बहुत ज्यादा बढ़ जाए और इसके साथ तेज सिरदर्द सीने में दर्द सांस लेने में परेशानी कमजोरी बोलने में दिक्कत या दिखाई देने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। हाई BP का सही कारण जानने और उचित उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह सबसे जरूरी है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं है।

  • MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम आते ही मध्य प्रदेश की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की बूंदों के साथ पहाड़ों पर छाई हरियाली बहते झरने जंगलों की ताजगी और बादलों से घिरे खूबसूरत नजारे लोगों को घूमने के लिए आकर्षित करते हैं। अगर आप भी बारिश के मौसम में परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो मध्य प्रदेश आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जहां मानसून के दौरान प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है।

    मानसून ट्रैवल के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में पचमढ़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में हरियाली से ढक जाता है। यहां पहाड़ों के बीच बादलों का नजारा और झरनों का बहता पानी पर्यटकों को खास अनुभव देता है। बी फॉल्स रजत प्रपात और जटाशंकर जैसी जगहों पर बारिश के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। हालांकि झरनों के पास जाते समय स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।

    इंदौर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए पातालपानी मानसून में घूमने की अच्छी जगह हो सकती है। बारिश के दौरान यहां का झरना और आसपास की हरियाली मन मोह लेती है। दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए यह जगह आकर्षक विकल्प बन सकती है। तेज बारिश के समय पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है इसलिए झरने के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए।

    जबलपुर की बात करें तो भेड़ाघाट मानसून में अलग ही रूप में नजर आता है। नर्मदा नदी के किनारे संगमरमर की ऊंची चट्टानें और आसपास का प्राकृतिक वातावरण बारिश के बाद बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धुआंधार जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पानी का प्रवाह बढ़ने पर इसका नजारा और ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है लेकिन यहां भी सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का तामिया भी मानसून ट्रैवल के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है। पहाड़ियों घाटियों और घने जंगलों से घिरा यह इलाका बारिश के मौसम में बेहद हरा भरा नजर आता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण उन लोगों को खास पसंद आ सकते हैं जो भीड़भाड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।

    इसके अलावा मांडू भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए आकर्षक जगह है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ हरियाली और बादलों का मेल यहां के नजारों को खास बना देता है। भोपाल के आसपास भोजपुर और केरवा जैसे स्थान भी बारिश के दौरान प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।

    हालांकि मानसून में यात्रा करते समय खूबसूरत नजारों के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नदी झरने और जलप्रपात के पास सेल्फी लेने के लिए जोखिम उठाने से बचें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर यात्रा की योजना बनाएं और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले हासिल करें। इस तरह थोड़ी सावधानी के साथ मध्य प्रदेश का मानसून ट्रिप खूबसूरत यादों से भरपूर बनाया जा सकता है।

  • 18 साल बाद फिर साथ आएंगे अक्षय-सैफ: ‘हैवान’ से पहले देखिए 6 फिल्मों में कैसी रही जोड़ी की किस्मत

    18 साल बाद फिर साथ आएंगे अक्षय-सैफ: ‘हैवान’ से पहले देखिए 6 फिल्मों में कैसी रही जोड़ी की किस्मत


    नई दिल्ली। अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में है। दोनों कलाकार फिल्म हैवान के जरिए लंबे समय बाद एक ही प्रोजेक्ट का हिस्सा बने हैं हालांकि इस बार दोनों एक साथ स्क्रीन पर दोस्त या साथी के तौर पर नहीं बल्कि अलग अलग भूमिकाओं में नजर आएंगे। सैफ अली खान फिल्म में लीड रोल निभा रहे हैं जबकि अक्षय कुमार विलेन के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म की रिलीज से पहले दर्शकों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर अतीत में जब अक्षय और सैफ एक साथ फिल्मों में आए तो बॉक्स ऑफिस पर उनका प्रदर्शन कैसा रहा था।

    अक्षय कुमार और सैफ अली खान ने अपने करियर में करीब छह फिल्मों में साथ काम किया है। इन फिल्मों में कुछ को शानदार सफलता मिली तो कुछ फिल्मों का प्रदर्शन औसत या मिला जुला रहा। यानी दोनों की जोड़ी ने कई यादगार फिल्में जरूर दीं लेकिन केवल इन दोनों सितारों का साथ आना किसी फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं रहा। इसके बावजूद दोनों कलाकारों की स्क्रीन केमिस्ट्री और अलग अलग अंदाज दर्शकों को पसंद आया है और यही वजह है कि हैवान को लेकर भी उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।

    दोनों की सबसे चर्चित फिल्मों में साल 1994 में रिलीज हुई मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल करने वाली फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में अक्षय कुमार ने सख्त मिजाज पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था जबकि सैफ अली खान एक ऐसे अभिनेता के रोल में नजर आए थे जो अपने अभिनय को बेहतर बनाने के लिए अक्षय के किरदार के साथ जुड़ जाता है। फिल्म में एक्शन कॉमेडी और दोनों कलाकारों की शानदार टाइमिंग ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था। इसके गाने भी उस दौर में काफी लोकप्रिय हुए थे।

    साल 1994 में ही दोनों कलाकार फिल्म ये दिल्लगी में भी नजर आए। इसके बाद 1996 में तू चोर मैं सिपाही में दोनों ने साथ काम किया। साल 1998 में कीमत और 1999 में आरजू में भी अक्षय और सैफ की जोड़ी देखने को मिली। दोनों की साथ में आखिरी चर्चित फिल्मों में 2008 की टशन शामिल है। इन फिल्मों में दोनों ने अलग अलग तरह के किरदार निभाए और कई फिल्मों में उनकी जोड़ी ने दर्शकों का मनोरंजन किया।

    अब हैवान को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कहानी और कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर है। फिल्म में सैफ अली खान मुख्य किरदार में हैं जबकि अक्षय कुमार पहली बार उनके सामने खलनायक के अंदाज में दिखाई देंगे। दोनों के बीच टकराव फिल्म की सबसे बड़ी खासियतों में से एक माना जा रहा है। ऐसे में दर्शकों की नजर इस बात पर होगी कि दोनों दिग्गज अभिनेता एक दूसरे के सामने किस तरह का स्क्रीन प्रेजेंस दिखाते हैं।

    हैवान की उम्मीदों को बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी वजह यह है कि यह एक सफल साउथ फिल्म का हिंदी रीमेक बताई जा रही है। मूल कहानी दर्शकों के बीच पहले ही अपनी पहचान बना चुकी है और ऐसे में हिंदी दर्शकों के लिए इसे बड़े सितारों के साथ पेश किया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन कर रहे हैं। प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी इससे पहले हेरा फेरी और भूल भुलैया जैसी बेहद लोकप्रिय फिल्मों में काम कर चुकी है। यही कारण है कि हैवान को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता और बढ़ गई है।

    अक्षय और सैफ का पिछला रिकॉर्ड भले ही पूरी तरह ब्लॉकबस्टर नहीं रहा हो लेकिन दोनों ने मिलकर कुछ ऐसी फिल्में जरूर दी हैं जो आज भी दर्शकों को याद हैं। मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी जैसी सफलता इस जोड़ी के खाते में दर्ज है जबकि अन्य फिल्मों का प्रदर्शन अलग अलग रहा। अब हैवान में दोनों का समीकरण पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। सैफ जहां कहानी के केंद्र में होंगे वहीं अक्षय का विलेन अवतार फिल्म में संघर्ष को नया रंग देगा।

    फिल्म की रिलीज के बाद ही साफ होगा कि अक्षय और सैफ की यह नई जोड़ी पुराने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड को दोहरा पाती है या नहीं। फिलहाल दोनों सितारों की लोकप्रियता प्रियदर्शन का निर्देशन और साउथ की सफल कहानी का आधार हैवान को रिलीज से पहले ही एक चर्चित फिल्म बना चुका है।

  • Yash की Toxic के हिंदी वर्जन पर सेंसर बोर्ड की कैंची, गाली से लेकर ड्रग्स सीन तक में बदलाव; A सर्टिफिकेट के साथ होगी रिलीज

    Yash की Toxic के हिंदी वर्जन पर सेंसर बोर्ड की कैंची, गाली से लेकर ड्रग्स सीन तक में बदलाव; A सर्टिफिकेट के साथ होगी रिलीज


    नई दिल्ली। साउथ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म Toxic रिलीज से पहले ही सेंसर बोर्ड के फैसले को लेकर चर्चा में आ गई है। फिल्म के हिंदी वर्जन में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC ने कई बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। जहां फिल्म के तमिल वर्जन में सिर्फ एक डायलॉग पर आपत्ति जताई गई थी वहीं हिंदी वर्जन में गाली गलौज से लेकर ड्रग्स वाले सीन और अश्लील डायलॉग तक मेंYash Toxic Movie, Toxic CBFC Cuts, Yash New Movie, Bollywood South Cinema, Toxic Hindi Version बदलाव करने को कहा गया है। फिल्म बुधवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और रिलीज से ठीक एक दिन पहले सेंसर बोर्ड के निर्देश सामने आने के बाद दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी वर्जन में फिल्म के फर्स्ट हाफ में इस्तेमाल किए गए एक अपमानजनक शब्द को हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सेकंड हाफ के एक सीन में बच्चे को दी गई गाली को म्यूट करने के लिए कहा गया है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में दिखाए गए ड्रग्स के सेवन वाले एक सीन की अवधि भी कम करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सेकंड हाफ में मौजूद एक अश्लील डायलॉग को बदलने के लिए कहा गया है। यानी हिंदी दर्शकों के लिए फिल्म का कंटेंट सेंसर बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक थोड़ा बदला हुआ नजर आएगा।

    फिल्म के डिसक्लेमर में भी बदलाव किया गया है। बताया गया है कि फिल्म के अंत में इस्तेमाल किया गया डिसक्लेमर तमिल भाषा में था। CBFC ने इसे हिंदी में करने का निर्देश दिया है। सभी जरूरी बदलाव पूरे किए जाने के बाद फिल्म के हिंदी वर्जन को A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि फिल्म को केवल वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे।

    Toxic की लंबाई भी दर्शकों के लिए खासा चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म का रन टाइम 194 मिनट 12 सेकंड बताया गया है। यानी फिल्म करीब 3 घंटे 14 मिनट लंबी है। इंटरवल और थिएटर में चलने वाले विज्ञापनों को जोड़ दिया जाए तो दर्शकों को सिनेमाघर में लगभग चार घंटे तक का समय देना पड़ सकता है। इतने लंबे रन टाइम के कारण फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता के साथ चर्चा भी तेज है।

    दिलचस्प बात यह है कि हिंदी वर्जन की तुलना में फिल्म के तमिल वर्जन पर सेंसर बोर्ड ने काफी कम सख्ती दिखाई। तमिल वर्जन को 20 अगस्त को सेंसर सर्टिफिकेट मिला था और इसमें सिर्फ एक बदलाव करने के लिए कहा गया था। फिल्म में मौजूद एक गाली वाले डायलॉग को बदलने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा तमिल वर्जन में किसी अन्य बदलाव की बात सामने नहीं आई थी।

    यश की Toxic लंबे समय से सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म में यश एक अलग और ग्रे शेड वाले किरदार में नजर आने वाले हैं। बड़े बजट की इस फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही जबरदस्त माहौल बना हुआ है। फिल्म की कहानी और यश का नया अवतार दर्शकों के बीच चर्चा का विषय है। अब सेंसर बोर्ड के बदलावों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म का हिंदी वर्जन दर्शकों पर कितना असर डालता है।

    फिल्म की रिलीज रामायण से पहले हो रही है और ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर भी इसके प्रदर्शन को लेकर काफी उम्मीदें हैं। यश की पिछली फिल्मों की लोकप्रियता और Toxic को लेकर बने हाईप को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स की नजर इसकी ओपनिंग पर रहेगी। हालांकि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और बॉक्स ऑफिस पर कितनी बड़ी शुरुआत करती है इसका जवाब रिलीज के बाद ही सामने आएगा।

    फिलहाल Toxic के हिंदी वर्जन में सेंसर बोर्ड द्वारा किए गए बदलावों ने फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे चर्चा में ला दिया है। गाली वाले शब्दों को हटाने या म्यूट करने से लेकर ड्रग्स सीन छोटा करने और अश्लील डायलॉग बदलने तक कई निर्देश दिए गए हैं। अब A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज होने जा रही यह फिल्म यश के फैंस को कितना प्रभावित करती है यह देखने वाली बात होगी।

  • रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन के मौके पर भाई या बहन के लिए उपहार खरीदना अगर आखिरी समय तक टल गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्विक कॉमर्स सेवाओं के जरिए घर बैठे कुछ ही समय में कई तरह के गिफ्टिंग विकल्प तलाशे जा सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक से लेकर ब्यूटी, ग्रूमिंग और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान तक कई विकल्प अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध हो सकते हैं।

    आखिरी समय में गिफ्ट ऑर्डर करने से पहले सबसे जरूरी बात अपने इलाके में उपलब्धता देखना है। संबंधित ऐप खोलकर लोकेशन दर्ज करने के बाद यह जांचना चाहिए कि चुना हुआ सामान आसपास के स्टोर में मौजूद है या नहीं। इसके साथ ही ऐप पर दिखाई जा रही अनुमानित डिलीवरी अवधि को भी देखना जरूरी है।

    Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रक्षाबंधन के लिए कई तरह के छोटे और तुरंत दिए जा सकने वाले उपहार मिल सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक के अलावा स्नैक्स, ब्यूटी तथा पर्सनल केयर से जुड़े उत्पाद भी विकल्प हो सकते हैं। भाई या बहन की पसंद को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामान चुनना आखिरी समय में भी बेहतर गिफ्ट तैयार करने का आसान तरीका हो सकता है।

    Zepto पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में गिफ्टिंग से जुड़े कई उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं। चॉकलेट और दूसरे खाद्य उत्पादों के अलावा परफ्यूम, ब्यूटी तथा ग्रूमिंग से जुड़े सामान और रोजाना काम आने वाले उत्पादों को भी उपहार के तौर पर चुना जा सकता है। हालांकि हर इलाके में हर उत्पाद उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

    Swiggy Instamart भी आखिरी समय में गिफ्ट तलाशने वालों के लिए एक विकल्प हो सकता है। यहां उपलब्धता के आधार पर चॉकलेट, मिठाई, फूल, स्नैक्स और अन्य छोटे गिफ्टिंग आइटम देखे जा सकते हैं। भाई या बहन की पसंद की अलग-अलग चीजें एक साथ मंगाकर छोटा सा गिफ्ट कॉम्बिनेशन भी तैयार किया जा सकता है।

    हालांकि क्विक डिलीवरी का मतलब यह नहीं है कि हर ऑर्डर निश्चित रूप से 15 मिनट में पहुंच जाएगा। डिलीवरी का समय ग्राहक की लोकेशन, आसपास उपलब्ध स्टॉक, ऑर्डर की संख्या और उस समय की स्थानीय मांग पर निर्भर करता है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर ऑर्डर की संख्या बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से अधिक देरी भी हो सकती है।

    इसीलिए ऑर्डर करने से पहले अनुमानित डिलीवरी समय जरूर जांचना चाहिए। यदि राखी बांधने या परिवार के साथ मिलने का समय बेहद करीब है, तो ऐसा सामान चुनना बेहतर हो सकता है जिसकी उपलब्धता स्पष्ट हो और जिसकी अनुमानित डिलीवरी निर्धारित समय से पहले दिखाई दे रही हो।

    गिफ्ट चुनने में ज्यादा समय नहीं है तो चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक आसान विकल्प हो सकते हैं। इनके अलावा परफ्यूम, स्किन केयर, ग्रूमिंग उत्पाद, कॉफी और स्नैक कॉम्बो या भाई-बहन की पसंद का कोई छोटा उपयोगी सामान भी चुना जा सकता है। बजट के अनुसार एक से अधिक छोटी चीजों को मिलाकर व्यक्तिगत गिफ्ट तैयार किया जा सकता है।

    रक्षाबंधन पर आखिरी समय में खरीदारी करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जल्दबाजी में केवल डिलीवरी स्पीड देखकर ऑर्डर करना नहीं, बल्कि उपलब्धता, कीमत और अनुमानित डिलीवरी समय की जांच करना है। सही विकल्प चुनकर कम समय में भी भाई या बहन के लिए उपयोगी और पसंद आने वाला उपहार मंगाया जा सकता है।

  • अजय देवगन के धमाकेदार डेब्यू के पीछे थे कुकू कोहली, ‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान; हार्ट अटैक ने ली जान

    अजय देवगन के धमाकेदार डेब्यू के पीछे थे कुकू कोहली, ‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान; हार्ट अटैक ने ली जान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म निर्देशक कुकू कोहली का निधन हो गया है। 1991 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को बॉलीवुड में शानदार लॉन्च देने वाले कुकू कोहली ने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। जानकारी के मुताबिक स्टेंट प्रक्रिया के एक दिन बाद उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया जिसके बाद उनकी मौत हो गई। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई और कई कलाकारों तथा फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    कुकू कोहली को हिंदी सिनेमा में अजय देवगन के शुरुआती करियर को मजबूत आधार देने वाले फिल्ममेकर के तौर पर याद किया जाता है। फूल और कांटे अजय देवगन की डेब्यू फिल्म थी और इसी फिल्म ने उन्हें रातोंरात दर्शकों के बीच पहचान दिला दी थी। फिल्म में अजय देवगन की एंट्री का वह दृश्य आज भी बॉलीवुड की सबसे चर्चित एंट्री में गिना जाता है जिसमें वह दो चलती मोटरसाइकिलों पर पैर रखकर अनोखे अंदाज में नजर आए थे। फिल्म की सफलता ने अजय देवगन को एक नए एक्शन स्टार के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी।

    कुकू कोहली ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। फूल और कांटे के अलावा उन्होंने कोहराम सुहाग हकीकत और अनाड़ी नंबर वन जैसी फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी फिल्मों में एक्शन ड्रामा और मनोरंजन का ऐसा मेल देखने को मिलता था जो उस दौर के दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा। साल 2004 में उन्होंने वो तेरा नाम था फिल्म का निर्देशन किया था और यही उनके निर्देशन करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण से दूरी बना ली थी।

    फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कुकू कोहली के निधन की जानकारी साझा की। उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में कुकू कोहली का योगदान खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उन्होंने अजय देवगन जैसे कलाकार को शुरुआती दौर में ऐसा मंच दिया जिसने उनके लंबे और सफल फिल्मी करियर की नींव रखी।

    कुकू कोहली का असली नाम अवतार कोहली था। उनका जन्म 4 जून 1949 को पेशावर में हुआ था। बाद में वह मुंबई पहुंचे और फिल्मी दुनिया में अपना करियर शुरू किया। निर्देशन की दुनिया में आने से पहले उन्होंने दिग्गज फिल्ममेकर राज कपूर के साथ बतौर असिस्टेंट काम किया। राज कपूर के साथ काम करने के दौरान उन्होंने बॉबी सत्यम शिवम सुंदरम और प्रेम रोग जैसी चर्चित फिल्मों की मेकिंग को करीब से समझा। इस अनुभव ने उनकी फिल्म निर्माण की समझ को मजबूत किया और आगे चलकर उन्होंने खुद निर्देशन की कमान संभाली।

    कुकू कोहली की निजी जिंदगी भी कई वजहों से चर्चा में रही। उन्होंने 1990 में अभिनेत्री अरुणा ईरानी से शादी की थी। यह उनकी दूसरी शादी थी। उनकी पहली पत्नी रीटा कोहली थीं और पहली शादी से उनकी दो बेटियां पूजा कोहली और करिश्मा कोहली हैं। पूजा कोहली फिल्म निर्माण से जुड़ी रही हैं। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी का रिश्ता लंबे समय तक फिल्मी दुनिया में चर्चा का विषय रहा।

    कुकू कोहली भले ही पिछले कई वर्षों से फिल्मों से दूर थे लेकिन उनका काम और खास तौर पर फूल और कांटे के जरिए अजय देवगन को दिया गया लॉन्च आज भी याद किया जाता है। एक ऐसी फिल्म जिसने एक नए अभिनेता को पहचान दिलाई और निर्देशक को भी हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम दिया। उनके निधन से बॉलीवुड ने एक ऐसे फिल्ममेकर को खो दिया जिसने अपने दौर में मसाला और एक्शन फिल्मों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। कुकू कोहली का नाम आने वाले समय में भी फूल और कांटे और अजय देवगन के यादगार डेब्यू के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।

  • नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता

    नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता

    नई दिल्ली ।भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में कर्मचारियों के बीच नौकरी बदलने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है। वहीं, चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। यह स्थिति कंपनियों के सामने प्रतिभाओं को बनाए रखने की चुनौती को और गंभीर बनाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कार्यबल की संरचना में भी बड़ा बदलाव आया है। जेन जी यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी 2023 में 17 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई है। यानी केवल तीन वर्षों में इस पीढ़ी की कार्यबल में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है। इसके साथ ही कंपनियों को नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यस्थल नीतियों में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है।

    जेन जी कर्मचारियों में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता स्वीकार करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जब उन्हें अपनी अपेक्षाओं और वास्तविक कार्यस्थल अनुभव के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है तो वे नौकरी बदलने का फैसला तेजी से ले सकते हैं।

    कर्मचारियों को बनाए रखने की समस्या केवल युवा कार्यबल तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है। इससे प्रबंधन स्तर पर बढ़ते दबाव और असंतोष की स्थिति का संकेत मिलता है।

    फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे एक ओर प्रोजेक्ट पूरा करने और ग्राहकों की अपेक्षाओं का दबाव संभालते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी टीम की जरूरतों और समस्याओं पर भी ध्यान देते हैं। संगठन में होने वाले बदलावों को कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अक्सर इन्हीं स्तरों पर आती है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों की अपनी औपचारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त प्रयास करने की इच्छा में कमी आई है। हालांकि कार्यस्थल की बुनियादी परिस्थितियों में सुधार हुआ है, लेकिन केवल सुविधाओं में बदलाव कर्मचारियों के लंबे समय तक जुड़े रहने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। कर्मचारी संगठन की संस्कृति, विकास के अवसर और काम की स्पष्टता जैसे व्यापक पहलुओं को भी महत्व दे रहे हैं।

    प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। करीब 10 में से छह संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में एआई का उपयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल 10 में से दो कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें एआई उपकरणों से जुड़े संभावित फायदे और जोखिमों की पर्याप्त जानकारी दी गई है।

    इस स्थिति में कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ नई पीढ़ी के कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं को समझना होगा और दूसरी तरफ अनुभवी कर्मचारियों तथा प्रबंधकीय स्तर पर बढ़ते नौकरी बदलाव के रुझान को रोकना होगा। स्पष्ट वेतन और पदोन्नति व्यवस्था, बेहतर संवाद, विकास के अवसर और एआई के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    नई दिल्ली । घर में चूहों की मौजूदगी छोटी परेशानी से शुरू होकर धीरे धीरे बड़ी समस्या बन सकती है। चूहे खाने की चीजों को दूषित करने के अलावा कपड़ों, फर्नीचर और बिजली के तारों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कई लोग उन्हें मारने के बजाय घर से दूर रखने के घरेलू उपाय तलाशते हैं। हालांकि, हर इंटरनेट आधारित नुस्खा सुरक्षित नहीं होता और किसी भी जहरीले या रासायनिक पदार्थ को खाने वाली चीज में मिलाकर चूहों को खिलाना नुकसानदायक हो सकता है।

    चूहों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका उनके लिए घर में भोजन और सुरक्षित ठिकाने की उपलब्धता कम करना है। रसोई में खुले में रखे अनाज, बिस्किट, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थों को ढक्कन वाले मजबूत डिब्बों में रखना चाहिए। खाने के बाद बचे टुकड़ों को तुरंत साफ करना और रात में रसोई को अच्छी तरह साफ करके रखना भी जरूरी है।

    चूहे अक्सर सिंक के नीचे, रसोई की अलमारियों के पीछे, स्टोर रूम, पाइप के आसपास और दरवाजों के नीचे मौजूद छोटे रास्तों से घर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए इन स्थानों की नियमित जांच करनी चाहिए। दीवार में दिखाई देने वाले छोटे छेद, दरार या पाइप के आसपास की खाली जगह को उपयुक्त सामग्री से बंद करना घर में उनकी आवाजाही रोकने का महत्वपूर्ण उपाय है।

    घर में बेकार सामान, पुराने डिब्बे, कागज और कबाड़ लंबे समय तक जमा रहने पर चूहों को छिपने की जगह मिल सकती है। स्टोर रूम और रसोई के आसपास अनावश्यक सामान को व्यवस्थित रखना चाहिए। सफाई के दौरान उन कोनों और जगहों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जहां आमतौर पर पहुंचना मुश्किल होता है।

    कुछ घरेलू उपायों में तेज गंध वाली चीजों का इस्तेमाल चूहों को किसी स्थान से दूर रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इनकी प्रभावशीलता हर स्थिति में समान नहीं होती। खासकर फिनाइल, डिटर्जेंट या अन्य रासायनिक पदार्थों को आटे, चीनी या घी जैसी खाने की चीजों में मिलाकर चूहों के लिए रखना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मिश्रण बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    यदि चूहे पहले से घर में मौजूद हैं, तो उन्हें पकड़कर सुरक्षित तरीके से बाहर छोड़ने वाले उपयुक्त मानवीय ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रैप को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से न पहुंच सकें। समस्या ज्यादा होने पर प्रशिक्षित कीट नियंत्रण विशेषज्ञ की सहायता लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    घर में चूहों की संख्या कम करने के लिए केवल उन्हें भगाने पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यदि भोजन आसानी से उपलब्ध रहेगा और प्रवेश के रास्ते खुले रहेंगे, तो चूहे दोबारा घर में आ सकते हैं। इसलिए सफाई, भोजन का सुरक्षित भंडारण और प्रवेश मार्गों को बंद करना एक साथ जरूरी है।

    रसोई की नियमित सफाई के अलावा कूड़ेदान को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। रातभर सिंक में गंदे बर्तन और खाने के अवशेष पड़े रहने से भी चूहों को आकर्षण मिल सकता है। घर के बाहर भी कचरा और भोजन के अवशेष जमा नहीं होने देने चाहिए।

    इस तरह चूहों को बिना मारे दूर रखने के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति उनके भोजन, पानी और छिपने की जगहों को सीमित करना है। साथ ही घर में मौजूद संभावित प्रवेश मार्गों को बंद करके समस्या की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। रासायनिक पदार्थों वाले ऐसे घरेलू नुस्खों से बचना बेहतर है जिनसे चूहों, बच्चों या पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो।