Author: bharati

  • यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्तावों को मंजूरी, मैनपुरी सैनिक स्कूल को मुफ्त जमीन और शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्तावों को मंजूरी, मैनपुरी सैनिक स्कूल को मुफ्त जमीन और शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के स्वास्थ्य और प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े विषय शामिल हैं। बैठक में मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल के लिए 9.524 हेक्टेयर जमीन मुफ्त हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इसके अलावा माध्यमिक, संस्कृत और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव भी मंजूर किए गए। प्रदेश की ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को भी स्वीकृति दी गई।

    मैनपुरी सैनिक स्कूल को 9.524 हेक्टेयर जमीन मुफ्त मिलेगी
    कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल को 9.524 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय के तहत स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सैनिक स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ अनुशासन और रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए तैयार करना है। मैनपुरी के सैनिक स्कूल को भूमि हस्तांतरित करने का फैसला इसी संस्थान से संबंधित व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा

    कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़ा प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। इसके तहत माध्यमिक और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का प्रावधान शामिल है। इस फैसले से संबंधित पात्र कर्मचारियों को इलाज के दौरान निर्धारित व्यवस्था के तहत कैशलेस सुविधा मिल सकेगी।

    बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे कर्मचारियों के परिवारों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। कैशलेस इलाज का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को चिकित्सा खर्च का भुगतान सीधे करने की जरूरत कम करना है। हालांकि, सुविधा के वास्तविक लाभ और उसके इस्तेमाल से संबंधित नियमों का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

    जीसीसी नीति-2024 के प्रस्ताव को मंजूरी
    उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर ऐसी इकाइयां होती हैं, जहां कंपनियां तकनीक, वित्त, शोध और दूसरी व्यावसायिक सेवाओं से जुड़े काम करती हैं। इन केंद्रों के माध्यम से कंपनियां अपने विभिन्न व्यावसायिक कार्यों का संचालन और प्रबंधन करती हैं।

    प्रदेश की जीसीसी नीति निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने से संबंधित है। उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी मिलने के बाद नीति के तहत संबंधित प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, बैठक में स्वीकृत संस्तुतियों के विशिष्ट विवरण और उनसे जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश से जुड़े फैसले

    कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सैनिक स्कूल मैनपुरी के लिए भूमि हस्तांतरण, शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियां प्रमुख रहीं।

    इन निर्णयों के जरिए सरकार ने शिक्षा संस्थानों से जुड़ी भूमि व्यवस्था, कर्मचारियों के स्वास्थ्य लाभ और निवेश नीति से संबंधित विषयों पर स्वीकृति दी है। मंजूर किए गए प्रस्तावों के क्रियान्वयन और उनसे जुड़े लाभों की विस्तृत जानकारी संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पेरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की पेरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर का आदेश

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को मेडिकल आधार पर पेरोल की अवधि बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। आसाराम राजस्थान में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अदालत के आदेश के बाद उन्हें निर्धारित समय तक जेल प्रशासन के सामने पेश होना होगा।

    आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से 20 दिनों की पेरोल दी गई थी, जिसकी अवधि 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। उनकी ओर से अदालत में पेरोल आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित एक अस्पताल में भर्ती हैं। वकील ने बेहतर इलाज की आवश्यकता का हवाला देते हुए पेरोल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल की अवधि समाप्त होने के मद्देनजर आसाराम को उसी दिन शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले में राजस्थान सरकार को भी निर्देश दिए कि जेल में आसाराम के स्वास्थ्य का उचित ध्यान रखा जाए। साथ ही, उनकी जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है।

    अदालत के निर्देश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पेरोल बढ़ाने से इनकार करने के बावजूद जेल में चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। अब आसाराम की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक उपचार की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, मेडिकल आधार पर राहत की मांग को अदालत ने मंजूरी नहीं दी है।

    आसाराम को वर्ष 2018 में राजस्थान के जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जोधपुर जेल में सजा काट रहे हैं। मामले में दोषसिद्धि के बाद उनकी ओर से समय-समय पर स्वास्थ्य और इलाज से जुड़े आधारों पर राहत की मांग की जाती रही है।

    मौजूदा मामले में भी बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य की स्थिति को आधार बनाकर पेरोल बढ़ाने की अपील की थी। दलील दी गई कि आसाराम की तबीयत ठीक नहीं है और बेहतर इलाज के लिए उन्हें अतिरिक्त समय की जरूरत है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पेरोल की अवधि आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए निर्धारित समय पर जेल लौटने का निर्देश दिया।

    उज्जैन के अस्पताल में भर्ती होने की बात सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने रखी थी। इसके बावजूद अदालत ने पेरोल बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की। साथ ही राजस्थान सरकार को निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि जेल में रहने के दौरान उनकी चिकित्सा जरूरतों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद आसाराम के लिए 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना जरूरी है। वहीं, जेल में उनके स्वास्थ्य की निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।

  • ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, 28 अक्टूबर को होगा अंतिम संस्कार

    ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का निधन, 28 अक्टूबर को होगा अंतिम संस्कार

    नई दिल्ली ।भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘सीआईडी’ और ‘आहट’ के निर्माता-निर्देशक बी.पी. सिंह का मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 की सुबह निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने साझा की। उन्होंने बताया कि बी.पी. सिंह को सुबह तड़के दिल का दौरा पड़ा था। उनके जाने से टेलीविजन जगत में शोक का माहौल है। अशोक पंडित ने उन्हें एक प्रतिभाशाली फिल्मकार और करीबी मित्र बताते हुए उनके योगदान को याद किया।

    अशोक पंडित ने बी.पी. सिंह के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बनाए अपराध और डर पर आधारित धारावाहिकों ने देशभर के दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा। उन्होंने कहा कि बी.पी. सिंह का काम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बना रहेगा। पंडित ने यह भी बताया कि जब बी.पी. सिंह भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन निर्देशक संघ के अध्यक्ष थे, तब उन्हें उनके साथ करीबी सहयोगी के रूप में काम करने का अवसर मिला था।

    उन्होंने दिवंगत निर्माता-निर्देशक को बेहतरीन इंसान और प्रिय मित्र बताते हुए उनके परिवार तथा करीबियों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बी.पी. सिंह का अंतिम संस्कार 28 अक्टूबर को किया जाएगा। अंतिम संस्कार के समय और स्थान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में साझा किए जाने की बात कही गई है।

    बी.पी. सिंह का पूरा नाम बृजेंद्रपाल सिंह था। उनका जन्म उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1973 में दूरदर्शन के साथ समाचार कैमरामैन के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। करीब दस वर्षों तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद वह मुंबई पहुंचे। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रमों के निर्माण और निर्देशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

    उनके करियर में दूरदर्शन के लिए बनाई गई टेलीफिल्म ‘सिर्फ चार दिन’ का अहम स्थान रहा। इस फिल्म की तैयारी के दौरान वह पुलिस की अपराध शाखा में जाने लगे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात निरीक्षक जयंत वागले से हुई। पुलिस की जांच प्रक्रिया और अपराधों को सुलझाने के तरीकों में उनकी रुचि बढ़ी। आगे चलकर यही दिलचस्पी उनके चर्चित अपराध धारावाहिक ‘सीआईडी’ की पृष्ठभूमि बनी।

    वर्ष 1998 में शुरू हुए ‘सीआईडी’ ने बी.पी. सिंह को भारतीय टेलीविजन के प्रमुख निर्माताओं और निर्देशकों में शामिल कर दिया। अपराधों की जांच, रहस्य और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आधारित इस धारावाहिक ने दर्शकों के बीच व्यापक पहचान बनाई। लंबे समय तक प्रसारित होने के कारण यह भारतीय टेलीविजन के चर्चित कार्यक्रमों में गिना गया।

    ‘सीआईडी’ से पहले वर्ष 1995 में प्रसारित हुए डर और रहस्य पर आधारित धारावाहिक ‘आहट’ के निर्माण और निर्देशन में भी बी.पी. सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डरावनी कहानियों और रहस्यमय घटनाओं पर आधारित इस कार्यक्रम ने भी दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। इन दोनों धारावाहिकों के जरिए उन्होंने टेलीविजन पर अपराध और हॉरर शैली को मजबूत पहचान दिलाने में योगदान दिया।

    उनके काम का दायरा इन दो धारावाहिकों तक सीमित नहीं था। वह ‘एक शून्य शून्य’, ‘सीआईडी: स्पेशल ब्यूरो’, ‘अचानक 37 साल बाद’, ‘रात होने को है’, ‘जिंदगी बदल सकता है हादसा’, ‘गुटुर गू’, ‘सूर्य द सुपर कॉप’, ‘हम ने ली है शपथ’, ‘सुपरकॉप्स वर्सेज सुपर विलेन’ और ‘दिव्य दृष्टि’ जैसे कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे।

    बी.पी. सिंह का निधन भारतीय टेलीविजन के उस दौर की एक महत्वपूर्ण हस्ती का जाना है, जिन्होंने समाचार कैमरे से अपने करियर की शुरुआत कर अपराध और रहस्य आधारित धारावाहिकों के जरिए व्यापक पहचान बनाई। उनके काम और लोकप्रिय कार्यक्रमों को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • करवाचौथ से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड सस्ता, जानें दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    करवाचौथ से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड सस्ता, जानें दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव


    नई दिल्ली । करवाचौथ से पहले सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आए। सोने की कीमत में करीब 660 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की कमी आई, जबकि चांदी का भाव लगभग 3,260 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गया। त्योहारी सीजन में खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमतों में यह बदलाव महत्वपूर्ण है।

    ताजा दरों के अनुसार, 22 कैरेट सोने की कीमत कई प्रमुख शहरों में 1,31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई है। वहीं, 24 कैरेट सोने का भाव भी 1,42,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम दर्ज किया गया। बीते सप्ताह के दौरान भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी। ऐसे में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों की नजर अब बाजार के ताजा भाव पर है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 27 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,870 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,964 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर और लखनऊ में भी दोनों श्रेणियों की कीमतें दिल्ली के समान रहीं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,720 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,814 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। कोलकाता और बेंगलुरु में भी सोने के भाव इसी स्तर पर रहे। इन शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,720 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,814 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।

    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,42,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। यहां 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,864 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी कीमतें अहमदाबाद के समान रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,770 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,864 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।

    चांदी की कीमतों में भी मंगलवार को उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोमवार की तुलना में इसका भाव करीब 3,260 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आया। इसके बाद अधिकांश प्रमुख शहरों में चांदी की कीमत लगभग 1,93,150 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। सोने के साथ चांदी के दाम घटने से त्योहारों के दौरान इन धातुओं की खरीदारी पर विचार कर रहे ग्राहकों को ताजा कीमतों की जानकारी लेना जरूरी हो गया है।

    करवाचौथ से पहले सोने और चांदी के भाव में आई कमी ऐसे समय हुई है, जब बाजार में त्योहारों के लिए खरीदारी की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि, कीमतों में गिरावट को खरीदारी के लिए निश्चित रूप से बेहतर अवसर नहीं माना जा सकता, क्योंकि वास्तविक खर्च आभूषण के डिजाइन, वजन, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू करों पर भी निर्भर करता है।

    खरीदारी करने से पहले ग्राहकों को अपने शहर के सर्राफा बाजार में उपलब्ध दरों की पुष्टि करनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों में अंतर हो सकता है। इसके अलावा, सोने की शुद्धता और आभूषण पर हॉलमार्क की जांच करना भी जरूरी है। बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव के कारण खरीदारी के समय अंतिम बिल में दर्ज राशि घोषित दर से अलग हो सकती है।

  • प्रधानमंत्री मोदी और लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मुलाकात, भारत-यूरोप व्यापारिक सहयोग पर बढ़ा जोर

    प्रधानमंत्री मोदी और लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मुलाकात, भारत-यूरोप व्यापारिक सहयोग पर बढ़ा जोर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टाइन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी से मुलाकात की। इस दौरान भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई। प्रिंस एलोइस भारत की राजकीय यात्रा पर आए हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के बीच यह बैठक हुई है। खास तौर पर भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते से मिलने वाले अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी प्रिंस एलोइस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और लिकटेंस्टाइन के संबंधों के साथ-साथ ईएफटीए के साथ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते के तहत उभरने वाले अवसरों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि इस समझौते से मिलने वाले अवसरों के कारण दोनों देशों की साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रिंस की बैठक से आपसी सहयोग को और गति मिलेगी।

    प्रिंस एलोइस का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। स्वागत समारोह के बाद प्रिंस ने भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा को सम्मान की बात बताया। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए आभार जताया।

    प्रिंस एलोइस ने कहा कि भारत जैसे देश की पहली राजकीय यात्रा उनके लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह भारत के साथ अपने संबंधों को लिकटेंस्टाइन की ओर से दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा स्पष्ट हुई।

    प्रिंस की यात्रा के कार्यक्रम में भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं। मंगलवार को उनकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात प्रस्तावित है। इन बैठकों में आर्थिक संबंधों और सहयोग के संभावित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    इसके बाद प्रिंस एलोइस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। उनके सम्मान में आधिकारिक भोज का आयोजन भी किया गया है। यह कार्यक्रम भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच राजनयिक संपर्कों को आगे बढ़ाने के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है।

    प्रिंस एलोइस सोमवार को गुजरात के वडोदरा से नई दिल्ली पहुंचे थे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद उनकी राजकीय यात्रा से जुड़े औपचारिक कार्यक्रम शुरू हुए।

    भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच संपर्कों को मजबूत करने की यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब ईएफटीए समझौते के माध्यम से व्यापार और आर्थिक साझेदारी के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रिंस की बैठकों से दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू की सत्ता पर नजर, गाजा युद्ध और ईरान संघर्ष के बीच विपक्ष से कड़ी चुनौती

    इजरायल चुनाव में नेतन्याहू की सत्ता पर नजर, गाजा युद्ध और ईरान संघर्ष के बीच विपक्ष से कड़ी चुनौती

    नई दिल्ली । इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले और उसके बाद गाजा में सैन्य कार्रवाई तथा ईरान के साथ संघर्ष को संभालने के तरीके को लेकर नेतन्याहू की सरकार आलोचनाओं का सामना करती रही है। चुनाव में मतदाताओं का रुख यह तय करने में अहम होगा कि देश की सत्ता मौजूदा नेतृत्व के पास रहती है या विपक्ष को सरकार बनाने का अवसर मिलता है।

    इस चुनाव में करीब 73 लाख मतदाता मतदान के पात्र हैं। नेतन्याहू को पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट से चुनौती मिल रही है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में मुकाबला कड़ा रहने के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, इजरायल की चुनाव प्रणाली में किसी एक दल के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना आसान नहीं होता। इसलिए चुनावी नतीजों के साथ-साथ अलग-अलग दलों के बीच गठबंधन की बातचीत भी अगली सरकार का स्वरूप तय करेगी।

    77 वर्षीय नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। उनके समर्थक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर उनके नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताते हैं। वहीं, आलोचक 7 अक्टूबर 2023 के हमले को रोकने में हुई विफलताओं, युद्ध से जुड़े फैसलों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उनकी जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं। चुनाव के दौरान इन मुद्दों का राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है।

    गादी आइजेनकोट इजरायल डिफेंस फोर्सेज के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वह याशर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और खुद को नेतन्याहू के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर, नफ्ताली बेनेट भी मौजूदा प्रधानमंत्री के गठबंधन को चुनौती दे रहे हैं। उनके नेतृत्व वाले बी’याचद गठबंधन में पूर्व प्रधानमंत्री यायर लैपिड की येश अतीद पार्टी भी शामिल है। विपक्षी दलों के बीच सहयोग सरकार बनाने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

    चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू का समर्थन किया। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू ने कठिन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के रूप में अच्छा काम किया है। नेतन्याहू ने भी ट्रंप की तारीफ करते हुए दोनों देशों के नेताओं के बीच असाधारण मित्रता का उल्लेख किया। अमेरिका और इजरायल के संबंध चुनावी चर्चा के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं।

    इजरायल में संसदीय चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत होते हैं। पूरे देश को एक ही चुनावी क्षेत्र माना जाता है और मतदाता संसद यानी नेसेट की 120 सीटों के लिए राजनीतिक दलों की सूची पर वोट डालते हैं। मतदाता सीधे किसी व्यक्तिगत सांसद का चुनाव नहीं करते। संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वैध मत हासिल करना जरूरी है। इस व्यवस्था में छोटी पार्टियां भी सरकार गठन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    सरकार बनाने के लिए संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जुटाना आवश्यक है। सबसे अधिक सीटें हासिल करने वाला दल अपने आप सरकार नहीं बना लेता। मतदान के बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करते हैं और उस सांसद को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके बहुमत जुटाने की संभावना हो। इसके बाद गठबंधन बनाने के लिए बातचीत होती है। यदि कोई नेता 61 सांसदों का समर्थन हासिल नहीं कर पाता, तो सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

    इस चुनाव के नतीजों का असर इजरायल की सुरक्षा नीति, क्षेत्रीय संघर्षों और दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों पर पड़ सकता है। गाजा में युद्ध और ईरान के साथ टकराव के बीच नई सरकार के सामने सुरक्षा तथा कूटनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे। चुनाव परिणामों के बाद गठबंधन का स्वरूप तय करेगा कि आने वाले समय में देश की नीतियों को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला कैबिनेट का विस्तार, चार नए मंत्री शामिल, सतीश शर्मा की मंत्रिमंडल से छुट्टी

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया। श्रीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में चार नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू शामिल हैं। इस फेरबदल में सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है।

    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या नौ हो गई है। जम्मू-कश्मीर की 90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मंत्रिमंडल में अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं। इस तरह उमर अब्दुल्ला सरकार ने मंत्रिपरिषद की निर्धारित संख्या पूरी कर ली है। अब नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने और मौजूदा विभागों में बदलाव को लेकर नजर रहेगी।

    इस विस्तार में राजनीतिक अनुभव, महिला प्रतिनिधित्व और विभिन्न क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में जगह देने पर जोर दिखाई देता है। अली मोहम्मद सागर और मीर सैफुल्लाह पहले भी मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं, जबकि शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। शमीमा फिरदौस के शामिल होने से सरकार में महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा।

    अली मोहम्मद सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह श्रीनगर जिले की खानयार विधानसभा सीट से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है और वह महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इससे पहले वह उमर अब्दुल्ला सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

    मीर सैफुल्लाह उत्तरी कश्मीर के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह चार बार विधायक चुने गए हैं। उनके पिछले तीन कार्यकाल कुपवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रहे, जबकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने त्रेहगाम सीट से जीत हासिल की। पेशे से वकील रहे सैफुल्लाह पहले भी मंत्री पद संभाल चुके हैं। उनके मंत्रिमंडल में लौटने से उत्तरी कश्मीर का प्रतिनिधित्व सरकार में मजबूत होगा।

    शमीमा फिरदौस नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल हैं। वह श्रीनगर की हब्बाकदल विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुनी गई हैं। पहली बार मंत्री बनने के साथ ही वह सकीना इट्टू के बाद मंत्रिमंडल में दूसरी महिला मंत्री होंगी। उनके शामिल होने से सरकार में महिला नेतृत्व की भागीदारी बढ़ेगी।

    अल्ताफ अहमद कल्लू, जिन्हें अल्ताफ कल्लू के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह दूसरी बार विधायक बने हैं और विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं। विधानसभा और विधान परिषद का अनुभव रखने वाले कल्लू को पहली बार मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिली है।

    इस बीच, कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होने तक सरकार में शामिल नहीं होने का अपना रुख बरकरार रखा है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार के भीतर ही हुआ है। अब विभागों के बंटवारे से यह स्पष्ट होगा कि नए मंत्रियों को कौन-कौन सी जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में कितना बदलाव होता है।

  • गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र आज से, सरकार पेश करेगी 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट

    गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र आज से, सरकार पेश करेगी 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट


    नई दिल्ली ।
    उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण में शुरू हो रहा है। सत्र के पहले दिन राज्य सरकार लगभग 7,412 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके अलावा आठ विधेयक सदन में रखे जाने हैं। वित्तीय प्रस्तावों, विधायी कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होने की संभावना है।

    इस सत्र में राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है। सरकार अनुपूरक बजट के माध्यम से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों से संबंधित प्रस्ताव सदन के सामने रखेगी। आठ विधेयकों की प्रस्तुति भी कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इनके जरिए विभिन्न विधायी विषयों पर सदन में चर्चा और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। सदन में दोनों नेताओं के योगदान को याद किया जाएगा। सत्र के दौरान वित्तीय मामलों के साथ-साथ राज्य के सामाजिक, प्रशासनिक और विकास संबंधी विषयों पर भी विधायकों की ओर से सवाल उठाए जाने की उम्मीद है।

    इस दो दिवसीय सत्र के लिए कुल 31 विधायकों ने 445 सवाल जमा किए हैं। इन सवालों के माध्यम से विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। प्रश्नों में जनता की समस्याओं और राज्य के विकास से संबंधित विषयों के उठने की संभावना है। सदन में इन सवालों के जवाबों के जरिए सरकार की योजनाओं और संबंधित मामलों पर चर्चा हो सकती है।

    विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी ने सभी राजनीतिक दलों से सत्र के सुचारू संचालन में सहयोग करने की अपील की है। दो दिन की सीमित अवधि को देखते हुए सदन की कार्यवाही में वित्तीय प्रस्तावों, विधेयकों और विधायकों के सवालों को लेकर महत्वपूर्ण गतिविधियां रहने की उम्मीद है।

    सत्र से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने के लिए बैठकें कीं। दोनों दलों ने उन विषयों पर चर्चा की, जिन्हें वे सदन में उठाना चाहते हैं। इन मुद्दों में शासन, जनकल्याण और राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं से जुड़े विषय शामिल हैं। कांग्रेस कार्य सलाहकार समिति की बैठक में शामिल नहीं हुई।

    सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में भाजपा विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में मंत्रियों और विधायकों ने सत्र की तैयारियों, सदन की कार्यवाही और संभावित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में जनहित, राज्य के विकास और जनकल्याण से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।

    वहीं, कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष इन मुद्दों को सदन में उठाने के साथ विधानसभा के आसपास विरोध प्रदर्शन करने की योजना भी बना रहा है। ऐसे में सत्र के दौरान सरकार के वित्तीय प्रस्तावों के साथ विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवाल भी राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रहेंगे।

    दो दिवसीय सत्र में अनुपूरक बजट की प्रस्तुति, आठ विधेयकों और 445 सवालों के बीच सरकार तथा विपक्ष की रणनीति पर नजर रहेगी। सदन की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित समय में किन वित्तीय, विधायी और जनहित के मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ती है।

  • तमिलनाडु में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, सड़कें क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में बिजली गुल

    तमिलनाडु में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, सड़कें क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में बिजली गुल

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के कई जिलों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जगह-जगह सड़कों और घरों में पानी भरने से आवागमन बाधित हुआ है, जबकि कुछ इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त होने और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति ठप रहने की समस्या सामने आई है। लगातार बारिश के कारण लोगों को दैनिक गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने राज्य के पश्चिमी घाट से लगे जिलों और दक्षिणी हिस्सों में अगले दो दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश होने का अनुमान जताया है।

    तिरुपत्तुर जिले के वायमपट्टू इलाके में भारी बारिश के कारण सड़कें पानी में डूब गईं। जलभराव के बीच वाहन चालकों को आवाजाही करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पानी से भरे रास्तों के कारण यातायात प्रभावित हुआ और स्थानीय लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी हुई।

    शिवगंगा के शहरी क्षेत्रों में भी तेज बारिश दर्ज की गई। यहां बिजली आपूर्ति 10 घंटे से अधिक समय तक बाधित रही। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बारिश के कारण पहले से प्रभावित जनजीवन के बीच बिजली गुल रहने से सामान्य कामकाज भी प्रभावित हुआ।

    कोयंबटूर जिले के पुलियामारथुपलायम, सुलूर और वरपट्टी में मूसलाधार बारिश हुई। पुलियामारथुपलायम में बारिश के चलते डामर से बनी एक सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। इससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

    मयिलादुथुराई जिले के तरंगमबाडी इलाके में भी बारिश का असर देखने को मिला। बारिश के बीच छात्र स्कूल पहुंचे, जिनमें कई बच्चे पूरी तरह भीग गए थे। सुबह के समय खराब मौसम के कारण बच्चों और उनके साथ जाने वाले लोगों को सफर करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    कोडैकनाल में भारी बारिश से सिल्वर कैस्केड झरने में पानी का बहाव काफी बढ़ गया। वहीं, थोप्पिकनल इलाके में पानी घरों के भीतर तक पहुंच गया। घरों में जलभराव होने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुईं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से पैदा हुई चुनौतियों के बीच उदगमंडलम जाने वाली सड़क के भूस्खलन प्रभावित हिस्से को साफ करने और उसकी मरम्मत का काम भी जारी रहा। इस कार्य में सेना के जवान जुटे रहे, ताकि बाधित मार्ग को दोबारा चालू किया जा सके।

    इस बीच मौसम विभाग ने पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहे चक्रवात के और तीव्र होकर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई है। विभाग के बुलेटिन के अनुसार, इसके आंध्र प्रदेश के तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यानम के पास पहुंचने और तट से टकराने की संभावना है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मंगलवार को तमिलनाडु के पश्चिमी घाट वाले जिलों और दक्षिणी हिस्सों में एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। राज्य के बाकी क्षेत्रों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की उम्मीद है। बुधवार को पश्चिमी घाट के जिलों में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    राजधानी चेन्नई में मंगलवार को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में राज्य में बारिश का दायरा काफी सीमित रह सकता है। हालांकि, अलग-अलग जिलों में बारिश की तीव्रता और स्थानीय परिस्थितियों के कारण लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।

  • भारत-चिली व्यापार समझौता अंतिम चरण में, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी बातचीत तेज

    भारत-चिली व्यापार समझौता अंतिम चरण में, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी बातचीत तेज

    नई दिल्ली । भारत और चिली के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कनाडा के साथ भी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। भारत विभिन्न देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए समझौतों पर काम कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना है।

    नीदरलैंड्स की दो दिवसीय यात्रा के दौरान गोयल ने बताया कि दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ भी औपचारिक वार्ता शुरू हो चुकी है। अगस्त में भारत और एसएसीयू ने वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत शुरू करने के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए थे। इस समूह में बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

    गोयल के मुताबिक, चिली के साथ समझौता लगभग निष्कर्ष तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। कनाडा के साथ बातचीत भी अच्छी प्रगति कर रही है, जबकि एसएसीयू के साथ चर्चा अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए इस समूह के साथ समझौते की प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है।

    भारत मेक्सिको के साथ भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गोयल ने बताया कि मेक्सिको भारत के साथ शुरुआती चरण के व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने का इच्छुक है। इसके अलावा ब्राजील में चुनावों के बाद सरकार की निरंतरता से दक्षिण अमेरिकी व्यापारिक समूह मर्कोसुर के साथ भारत के मौजूदा वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते के विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

    नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान गोयल ने वहां के विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री स्जोर्ड स्जोर्ड्स्मा, आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्री हेलेन हेर्बर्ट और नॉर्थ हॉलैंड के किंग्स कमिश्नर आर्थर वैन डाइक के साथ बैठकें कीं। उन्होंने डच संसद के प्रतिनिधि सदन की विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग समिति तथा सीनेट की यूरोपीय मामलों की समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की।

    इन बैठकों में भारत और नीदरलैंड्स के आर्थिक संबंधों के साथ भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक साझेदारी पर चर्चा हुई। यात्रा का प्रमुख कार्यक्रम इंडिया-नीदरलैंड्स बिजनेस फोरम रहा, जिसकी सह-अध्यक्षता गोयल और स्जोर्ड्स्मा ने की। इसमें दोनों देशों की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

    फोरम में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से बनने वाले अवसरों, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश साझेदारी मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया गया। गोयल ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और खुदरा कारोबार से जुड़ी डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं।

    इसके अलावा उन्होंने द हेग में भारतीय दूतावास और एचएसबीसी नीदरलैंड्स की ओर से आयोजित 15 डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। इस बैठक में व्यापार और निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई।

    गोयल ने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स के संबंध रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ एफटीए की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। उन्होंने नीदरलैंड्स को यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने का प्रमुख प्रवेश द्वार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।