Author: bharati

  • आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'

    आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'


    मंदसौर  मध्य प्रदेश के मंदसौर जिला अस्पताल में आधी रात को हुई बैग चोरी की घटना ने सभी को हैरान कर दिया। अस्पताल में अपने बेटे का इलाज कराने पहुंची महिला के पास रखा करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषणों से भरा बैग अचानक गायब हो गया। परिवार को पहले आशंका हुई कि अस्पताल परिसर में किसी ने बैग पर हाथ साफ कर दिया है लेकिन जब पुलिस ने अस्पताल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो जो सच सामने आया उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। बैग किसी इंसान ने नहीं बल्कि एक कुत्ते ने मुंह में दबाकर अस्पताल से बाहर पहुंचाया था।

    मामला 23 और 24 अगस्त की दरमियानी रात का बताया जा रहा है। कयामपुर निवासी लताबाई अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए मंदसौर जिला अस्पताल आई थीं। महिला ने घर में रखे कीमती जेवर सुरक्षा की दृष्टि से अपने साथ अस्पताल लाए थे। बैग में करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषण के अलावा लगभग 2 हजार रुपये नकद और खाने पीने का सामान भी रखा था। रात करीब 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला को बैग गायब होने का पता चला। लाखों रुपये के जेवरात गायब होने से परिवार के होश उड़ गए और उन्होंने तत्काल पुलिस से मदद मांगी।

    लताबाई ने कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बिना देर किए अस्पताल परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। पुलिस को उम्मीद थी कि फुटेज से किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो सकेगी लेकिन कैमरे में जो दृश्य सामने आया उसने पूरे मामले को ही अलग मोड़ दे दिया। CCTV फुटेज में एक कुत्ता अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के आसपास घूमता दिखाई दिया। कुछ देर बाद वही कुत्ता बैग को मुंह में दबाकर अस्पताल के दरवाजे से बाहर निकलता नजर आया।

    पुलिस ने इसके बाद कुत्ते की गतिविधियों और उसके जाने की दिशा का पता लगाने के लिए आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की भी मदद ली। अलग अलग स्थानों की फुटेज को जोड़कर पुलिस टीम ने कुत्ते के रास्ते को ट्रेस किया और लगातार तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को ज्वेलरी से भरा बैग मिल गया। बैग में रखे सोने चांदी के आभूषण और अन्य सामान सुरक्षित पाए गए। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद पूरा सामान महिला को वापस सौंप दिया।

    कीमती सामान वापस मिलने के बाद लताबाई और उनके परिवार ने राहत की सांस ली। महिला ने पुलिस की तत्परता के लिए आभार जताया। अगर पुलिस समय रहते CCTV फुटेज खंगालकर कुत्ते की दिशा का पता नहीं लगाती तो लाखों रुपये के जेवरात बरामद करना मुश्किल हो सकता था। इस पूरे मामले में पुलिस की जांच का तरीका भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि आमतौर पर चोरी के मामलों में संदिग्ध इंसान की तलाश की जाती है लेकिन यहां जांच का रास्ता एक कुत्ते तक पहुंचा।

    हालांकि घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता सामने आई है। सवाल यह है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आवारा कुत्ते रात के समय वार्ड तक कैसे पहुंच रहे हैं। इस घटना में महिला का कीमती सामान वापस मिल गया लेकिन अगर बैग किसी दूसरी जगह चला जाता या कुत्ता उसे कहीं छोड़ देता तो लाखों रुपये के आभूषणों का पता लगाना काफी मुश्किल हो सकता था।

    फिलहाल इस अजीबोगरीब घटना की चर्चा पूरे मंदसौर में है। जिस मामले की शुरुआत लाखों रुपये की चोरी की आशंका से हुई थी उसका अंत एक ऐसे CCTV खुलासे के साथ हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस की तत्परता और CCTV की मदद से महिला का कीमती सामान सुरक्षित वापस मिल गया और यह मामला मंदसौर जिला अस्पताल की उन घटनाओं में शामिल हो गया जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

  • पुतिन का ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ फिर तैयार? बुरेवेस्टनिक के संभावित टेस्ट से बढ़ी दुनिया की चिंता

    पुतिन का ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ फिर तैयार? बुरेवेस्टनिक के संभावित टेस्ट से बढ़ी दुनिया की चिंता


    नई दिल्ली।
    रूस की परमाणु क्षमता से लैस नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइल बुरेवेस्टनिक (9M730 Burevestnik) एक बार फिर चर्चा में है। आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और विमानों की बढ़ती आवाजाही से ऐसी अटकलें तेज हुई हैं कि रूस इस परमाणु-संचालित मिसाइल का नया फ्लाइट टेस्ट कर सकता है। हालांकि, रूस ने संभावित परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    बुरेवेस्टनिक को रूस लंबे समय से ऐसी मिसाइल के रूप में पेश करता रहा है जिसकी मारक क्षमता बेहद लंबी बताई जाती है। इसे परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम बताया गया है और इसकी खासियत इसका कथित परमाणु-ऊर्जा आधारित प्रोपल्शन सिस्टम है।

    नोवाया जेमल्या में बढ़ी हलचल

    हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, रूस के आर्कटिक क्षेत्र स्थित नोवाया जेमल्या में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रोगाचेवो एयरबेस पर दो Il-976 SKIP विमान पहुंचे हैं। इन विमानों का इस्तेमाल मिसाइल परीक्षण के दौरान उसके रास्ते और उड़ान से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए किया जाता है।

    बेस पर एक A-50U एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान, चार An-26 परिवहन विमान, एक An-74 और कई हेलिकॉप्टर भी दिखाई दिए हैं। इसके अलावा पिछले बुरेवेस्टनिक परीक्षणों से जुड़े कुछ नागरिक जहाजों की भी बैरेंट्स और कारा सागर में मौजूदगी बताई गई है।

    नॉर्वे के रक्षा विश्लेषक थोर्ड अरे इवरसेन के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रही गतिविधियां बुरेवेस्टनिक के पिछले परीक्षणों से मिलती-जुलती हैं। उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि रूस मिसाइल के फ्लाइट टेस्ट की तैयारी कर रहा हो सकता है।

    14 परीक्षणों में कितनी बार सफल हुई?

    रिपोर्टों के मुताबिक, बुरेवेस्टनिक का अब तक करीब 14 बार परीक्षण किया जा चुका है, लेकिन इनमें सफलता सीमित रही है। रूस ने 2022 और 2025 के परीक्षणों को सफल बताया था।

    रूसी जनरल वैलेरी गेरासिमोव ने दावा किया था कि 2025 के कथित सफल परीक्षण के दौरान मिसाइल ने करीब 15 घंटे में 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। रूस का दावा है कि उड़ान के दौरान मिसाइल ने अलग-अलग ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दिशाओं में निर्धारित गतिविधियां कीं और उसकी एयर डिफेंस से बचने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

    इसके मुकाबले 2022 में हुआ परीक्षण महज करीब दो मिनट तक चला था।

    इसे ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ क्यों कहा जाता है?

    बुरेवेस्टनिक की सबसे असामान्य विशेषता इसका कथित न्यूक्लियर पावर प्रोपल्शन सिस्टम है। इसी वजह से पश्चिमी विश्लेषकों में इसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।

    इसे कभी-कभी ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ कहा जाता है। यह नाम 1986 की चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना से जुड़ी आशंकाओं को दर्शाता है। चिंता यह है कि परमाणु रिएक्टर से संचालित इस तरह की मिसाइल के परीक्षण या दुर्घटना की स्थिति में रेडियोधर्मी सामग्री के फैलने का जोखिम पैदा हो सकता है।

    नाटो ने बुरेवेस्टनिक के लिए ‘Skyfall’ नाम इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी थॉमस कंट्रीमैन ने भी इस हथियार प्रणाली को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी।

    MIT के शोधकर्ताओं ने कैसे समझा डिजाइन?

    मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने रूसी मीडिया में उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण कर बुरेवेस्टनिक के आकार और संभावित डिजाइन का अनुमान लगाने की कोशिश की।

    प्रोफेसर जेक हेक्ला और उनके सहयोगी आर. स्कॉट केम्प के विश्लेषण के मुताबिक, मिसाइल रूस की बड़ी क्रूज मिसाइलों से बड़ी है, लेकिन अत्यधिक विशाल नहीं है।

    एयरोडायनामिक मॉडलिंग के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि इसे हवा में बनाए रखने के लिए करीब Mach 0.75, यानी लगभग 575 मील प्रति घंटे की गति की जरूरत हो सकती है। यह गति करीब-करीब किसी आधुनिक यात्री विमान की क्रूजिंग स्पीड के आसपास है।

    न्यूक्लियर रिएक्टर से कैसे मिलती है ताकत?

    शोधकर्ताओं के अनुसार, बुरेवेस्टनिक में डायरेक्ट-साइकिल एयर-ब्रीदिंग न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसी तकनीक इस्तेमाल होने की संभावना है।

    सरल शब्दों में समझें तो इस अवधारणा में हवा को इंजन के भीतर मौजूद परमाणु रिएक्टर से सीधे गुजारा जाता है। रिएक्टर की ऊर्जा हवा को बेहद गर्म करती है और गर्म हवा को पीछे की ओर तेजी से निकालकर थ्रस्ट पैदा किया जाता है।

    यह सामान्य परमाणु रिएक्टरों से अलग अवधारणा है, जहां रिएक्टर की गर्मी को एक अलग कूलेंट सिस्टम के जरिए दूसरे चरण में पहुंचाया जाता है।

    हेक्ला के मुताबिक, अप्रत्यक्ष सिस्टम की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती, लेकिन उसका अतिरिक्त वजन और जटिलता इसे कम संभावित विकल्प बनाती है।

    ‘असीमित रेंज’ का दावा कितना अहम?

    बुरेवेस्टनिक को लेकर रूस का सबसे बड़ा दावा इसकी बेहद लंबी या लगभग असीमित रेंज है। पारंपरिक क्रूज मिसाइलों में ईंधन की सीमा सबसे बड़ी बाधाओं में से एक होती है। परमाणु प्रोपल्शन का उद्देश्य इसी सीमा को काफी हद तक कम करना है।

    अगर यह तकनीक व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से काम करती है, तो मिसाइल लंबे समय तक हवा में रह सकती है और अप्रत्याशित दिशा से लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर सकती है। यही वजह है कि पश्चिमी देशों में इसके संभावित परीक्षणों पर नजर रखी जा रही है।

    हालांकि, बुरेवेस्टनिक की वास्तविक क्षमता, विश्वसनीयता और संचालन संबंधी दावों को लेकर स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सीमित है। रूस की ओर से संभावित नए परीक्षण की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!

    US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का प्रशासन देश में शरण पाने के लिए आवेदन कर चुके या फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया में शामिल दो लाख तक विदेशी नागरिकों के कारोबारी और पर्यटन वीजा (Tourist Visa) रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास (American History) में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए जाने की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी और इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों और दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई या इसमें बदलाव नहीं किया गया, तो विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए बी1 और बी2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। इसमें ऐसे वीजा धारक शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण मांग रहे हैं। यह कार्रवाई गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के समन्वय से की जाएगी।


    क्या है बी1 और बी2 वीजा

    बी1 वीजा आम तौर पर कारोबारी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि बी2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या चिकित्सा उपचार के लिए जारी किए जाते हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘हम डीएचएस के साथ समन्वय कर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उनके गैर-आप्रवासी वीजा रद्द करने का काम कर रहे हैं, जो अमेरिका में अल्पकालिक आगंतुक के रूप में आए थे, लेकिन बाद में यहां स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन दाखिल कर देते हैं।’

    उन्होंने वीजा रद्द किए जाने की संभावित संख्या पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘चूंकि यह प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए रद्द किए जाने वाले वीजा की संख्या लगातार बदलती रहेगी और यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।’


    क्या तुरंत देश से निकाल दिए जाएंगे 2 लाख लोग

    अधिकारियों ने कहा कि वीजा रद्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित लोगों को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल जिन लोगों के शरण संबंधी मामले लंबित हैं, उनमें से अधिकांश की श्रेणी बदली जा सकती है, लेकिन वे कारोबारी या पर्यटन यात्री के रूप में अपना वीजा दर्जा खो देंगे।


    वीजा पर जारी हैं पाबंदियां

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद से उनके प्रशासन ने वीजा आवेदकों पर लगातार पाबंदियां कड़ी की हैं। इनमें आवेदकों से उनके सोशल मीडिया इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मांगना, वीजा प्रक्रिया के लिए महंगे बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है।

    उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ऐसे लोगों को निशाने पर लिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पर्यटक और कारोबारी वीजा का इस्तेमाल करते हैं और फिर शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

    वर्तमान में बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों से यह पुष्टि करने को कहा जाता है कि वे अमेरिका में शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगे। साथ ही, उन्हें यह भी साबित करना होता है कि वे अपने देश लौटने का इरादा रखते हैं।


    करीब 2 लाख हो चुके हैं रद्द

    पिछले 18 महीनों में विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें नशे में वाहन चलाने से लेकर दुष्कर्म और लूट जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है या जिन पर ऐसे अपराधों के आरोप हैं। इसके अलावा अमेरिका की नीतियों, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़ी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोगों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं द्वारा अमेरिका आकर यहां बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य वाले विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) पर भी कार्रवाई तेज कर दी है।

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • शक्कर की कीमत में 18% की गिरावट…, 55 रुपये प्रति किलो पर आए थोक दाम

    शक्कर की कीमत में 18% की गिरावट…, 55 रुपये प्रति किलो पर आए थोक दाम


    नई दिल्ली।
    चीनी के आयात (Sugar imports) की अनुमति और सट्टेबाजी व जमाखोरी पर सरकार (Government) के अंकुश का असर अब दिखने लगा है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा (Food Secretary Sanjeev Chopra) ने बताया कि चीनी की एक्स-मिल कीमत (Ex-mill price Sugar) (थोक भाव) 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है और आने वाले दिनों में इनमें और गिरावट आएगी। हालांकि, मिल भाव में आई गिरावट का असर खुदरा बाजारों में दिखना अभी बाकी है।

    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर मिल और खुदरा भाव में सात-आठ रुपये प्रति किलो का अंतर होता है। पिछले हफ्ते चीनी की एक्स-मिल कीमतें बढ़कर रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं।

    चोपड़ा ने इसके लिए मिलों की ओर से भाव बढ़ाने को जिम्मेदार ठहराया था। कहा, कीमतों में उछाल बुनियादी वजहों से नहीं आया है। देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। खाद्य सचिव ने कहा, भले ही विपणन वर्ष 2025-26 अक्तूबर-सितंबर) के लिए चीनी का उत्पादन पहले के 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह गया है, फिर भी देश में स्टॉक काफी है। घरेलू मांग 285 लाख टन है।


    10 लाख टन आयात को मिली मंजूरी

    चीनी के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी। इसके साथ ही थोक खरीदारों के लिए भंडार सीमा भी लागू की थी।


    कीमतों पर कितना असर

    मिल भावों में गिरावट का खुदरा बाजार की कीमतों पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। चीनी की कीमत मंगलवार को लगभग एक रुपये बढ़कर करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। एक दिन पहले खुदरा मार्केट में चीनी की औसत कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो थी।

  • रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व माना जाता है। समय के साथ इस त्योहार पर उपहार देने का तरीका भी बदल रहा है। युवा पीढ़ी खासकर Gen-Z अब केवल चॉकलेट, मिठाई, कपड़े या गैजेट देने के बजाय ऐसे उपहारों पर विचार कर रही है, जिनका लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके। इसी बदलाव के बीच हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के एक नए और उपयोगी उपहार के रूप में देखा जा रहा है।

    बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक उपहारों पर त्योहार के दौरान कुछ हजार रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित समय तक ही रहता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा ऐसा वित्तीय सुरक्षा साधन हो सकता है, जो बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक बोझ कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि युवा वर्ग त्योहार के उपहार को भविष्य की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

    इस बदलाव को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति रक्षाबंधन पर करीब 7,000 रुपये चॉकलेट, मिठाई या किसी अन्य उपहार पर खर्च करता है, तो यह राशि कुछ समय बाद पूरी तरह खर्च हो जाती है। वहीं इसी स्तर के खर्च को उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के तौर पर इस्तेमाल करने पर भाई या बहन के लिए स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा तैयार की जा सकती है।

    बताया गया है कि लगभग 7,000 रुपये के वार्षिक प्रीमियम में परिस्थितियों और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रीमियम उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शहर, बीमा कंपनी, कवरेज, पॉलिसी की शर्तों और अन्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी पॉलिसी को लेने से पहले उसके लाभ, सीमाएं, प्रतीक्षा अवधि और बहिष्करण को समझना जरूरी है।

    मासिक हिसाब से देखें तो 7,000 रुपये का सालाना खर्च 600 रुपये से भी कम बैठता है। युवा उपभोक्ताओं के लिए यह राशि नियमित छोटे खर्चों के मुकाबले कम या समान हो सकती है। इसी सोच के कारण हेल्थ इंश्योरेंस को केवल बीमा उत्पाद नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के लिए जिम्मेदारी और आर्थिक सुरक्षा के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने, जांच, दवाओं और उपचार पर होने वाला खर्च परिवार के बजट पर अचानक दबाव डाल सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्र चिकित्सा खर्चों का भुगतान बीमा के माध्यम से किया जा सकता है।

    हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में चुनते समय केवल प्रीमियम की रकम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बीमा राशि, नेटवर्क अस्पताल, कमरे के किराये की सीमा, सह-भुगतान, प्रतीक्षा अवधि, पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े नियम और क्लेम प्रक्रिया जैसी बातों की जानकारी लेना जरूरी है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी हमेशा सबसे बेहतर विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है।

    रक्षाबंधन के अवसर पर उपहारों का यह बदलता स्वरूप बताता है कि युवा पीढ़ी भावनात्मक रिश्तों के साथ वित्तीय योजना को भी महत्व दे रही है। चॉकलेट या मिठाई जैसे पारंपरिक उपहार अपनी जगह कायम हैं, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जैसा विकल्प लंबे समय की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला उपहार बन सकता है। सही पॉलिसी और पर्याप्त कवरेज का चुनाव भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा की भावना को आर्थिक रूप भी दे सकता है।

  • चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो पपीता आजमाएं, स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल

    चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो पपीता आजमाएं, स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली ।
    पपीता सिर्फ स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि स्किन केयर के लिए भी एक आसान घरेलू विकल्प माना जाता है। अगर चेहरा बेजान नजर आने लगा है त्वचा पर टैनिंग दिखाई दे रही है या स्किन की चमक कम हो गई है तो पपीते का इस्तेमाल किया जा सकता है। पपीते में पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो त्वचा की सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जो त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यही वजह है कि पपीते को कई घरेलू स्किन केयर उपायों में शामिल किया जाता है।

    पपीते को चेहरे पर लगाने का सबसे आसान तरीका इसका फेस पैक बनाना है। इसके लिए पके हुए पपीते का थोड़ा सा गूदा लेकर अच्छी तरह मैश कर लें। इसे साफ चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। पपीते का यह इस्तेमाल त्वचा को मुलायम महसूस कराने और चेहरे की डलनेस कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।

    अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी रहती है तो पपीते में थोड़ा शहद मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। शहद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है जबकि पपीते में मौजूद एंजाइम त्वचा की सतह से मृत कोशिकाओं को हटाने में सहायक हो सकते हैं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने के बाद ज्यादा देर तक न रखें और कुछ समय बाद पानी से धो लें। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग पपीते के साथ थोड़ी मात्रा में दही का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे त्वचा को ठंडक और नमी मिल सकती है।

    पपीते का इस्तेमाल त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए भी किया जाता है लेकिन इसे चेहरे पर जोर से रगड़ना सही नहीं है। खासकर अगर त्वचा पर मुंहासे हैं लालिमा है कट लगा है या जलन हो रही है तो पपीते का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। प्राकृतिक चीज होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित ही होगी। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    स्किन केयर में केवल फेस पैक लगाना ही पर्याप्त नहीं है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और धूप से त्वचा को बचाना भी जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि लगातार धूप में रहने से टैनिंग और त्वचा संबंधी दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पपीते से तुरंत किसी चमत्कारी नतीजे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसका असर व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर कर सकता है। अगर त्वचा पर लगातार दाने खुजली लालिमा या जलन जैसी समस्या बनी हुई है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। कुल मिलाकर सही तरीके और सावधानी के साथ पपीता आपके सामान्य स्किन केयर रूटीन का एक आसान घरेलू हिस्सा बन सकता है।

  • IND vs SL: ऋषभ पंत की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन, कंधे पर लगी गेंद के बाद नहीं कर सके विकेटकीपिंग; चौथे दिन वापसी की उम्मीद

    IND vs SL: ऋषभ पंत की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन, कंधे पर लगी गेंद के बाद नहीं कर सके विकेटकीपिंग; चौथे दिन वापसी की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के बीच टीम इंडिया की चिंता ऋषभ पंत की चोट को लेकर बढ़ गई है। मैच के तीसरे दिन पंत विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर नहीं उतर सके। उनकी जगह ध्रुव जुरेल ने विकेट के पीछे जिम्मेदारी संभाली। पंत को दूसरे दिन बल्लेबाजी के दौरान कंधे पर गेंद लगी थी जिसके बाद उनके शरीर पर चोट का असर दिखाई दिया और मूवमेंट भी सामान्य नहीं रही। टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने पंत की स्थिति को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि टीम उनकी चोट पर लगातार नजर रख रही है और उम्मीद है कि वह चौथे दिन विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर लौट सकते हैं।

    मोर्केल के मुताबिक पंत के कंधे पर गेंद लगने के बाद रात में भी उनकी चोट को लेकर चर्चा हुई थी। अगले दिन जब वह वार्मअप के लिए मैदान पर आए तो उनकी मूवमेंट सीमित नजर आई। यही वजह रही कि टीम प्रबंधन ने उन्हें विकेटकीपिंग से दूर रखने का फैसला किया। पंत तीसरे दिन ड्रेसिंग रूम में हाथ पर पट्टी बांधे भी नजर आए। हालांकि फिलहाल उनकी चोट को लेकर कोई गंभीर आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है और टीम रातभर उनकी स्थिति पर नजर रखेगी।

    पंत का विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर होना टीम इंडिया के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोर्केल ने कहा कि पंत जिस तरह से खेल को पढ़ते हैं और मैदान की परिस्थितियों को समझते हैं वह टीम के लिए काफी उपयोगी है। ऐसे में भारतीय टीम चाहेगी कि पंत जल्द से जल्द पूरी तरह फिट होकर विकेट के पीछे लौटें। चौथे दिन उनकी उपलब्धता को लेकर फैसला उनकी फिटनेस और सुबह की स्थिति देखने के बाद लिया जा सकता है।

    पंत की चोट के बीच ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली। जुरेल पहले ही इस टेस्ट में बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं और शतक लगाकर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। ऐसे में अगर पंत चौथे दिन भी विकेटकीपिंग नहीं कर पाते हैं तो जुरेल पर एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी होगी। हालांकि टीम की पहली प्राथमिकता पंत को पूरी तरह फिट रखना होगी ताकि चोट आगे गंभीर रूप न ले।

    इसी बीच गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने कुलदीप यादव को लेकर भी अहम बात कही। कुलदीप वायरल फीवर की वजह से कोलंबो टेस्ट के लिए चयन की दौड़ से बाहर रहे। मोर्केल ने कहा कि अंतिम चयन का फैसला उनके हाथ में नहीं है लेकिन अगर कुलदीप पूरी तरह उपलब्ध होते तो उनका नाम निश्चित तौर पर चयन की चर्चा में शामिल होता। टीम प्रबंधन के मुताबिक कुलदीप गॉल से ही वायरल फीवर से जूझ रहे थे और इसी कारण उन्हें दूसरे टेस्ट में नहीं चुना गया।

    अब भारतीय टीम की नजर टेस्ट के चौथे दिन श्रीलंका की पारी को जल्द समेटने पर होगी। भारत ने बोर्ड पर 500 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया है और श्रीलंका के अभी दो विकेट बाकी हैं। मोर्केल ने कहा कि भारत को शुरुआत में एक सफलता हासिल करने पर ध्यान देना होगा और इसके बाद गेंदबाजों को लगातार सही लाइन और लेंथ के साथ दबाव बनाए रखना होगा।

    तीसरे दिन श्रीलंका के निचले क्रम ने भारतीय गेंदबाजों को कुछ समय तक जरूर परेशान किया। सोनल दिनुषा के साथ केशरा नुवंथा और लाहिरू कुमारा ने आखिरी दौर में संघर्ष किया। मोर्केल ने माना कि भारतीय टीम जल्द से जल्द श्रीलंका की पारी खत्म करना चाहती थी लेकिन टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम की साझेदारियां भी मुकाबले का रुख बदल सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कूकाबुरा गेंद के नरम पड़ने के बाद पिच से अतिरिक्त उछाल और तेजी हासिल करना गेंदबाजों के लिए मुश्किल हो सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऋषभ पंत चौथे दिन विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर उतरेंगे। टीम इंडिया को उम्मीद है कि उनकी चोट रातभर में बेहतर होगी और वह फिर से दस्ताने संभाल पाएंगे। हालांकि अंतिम फैसला उनकी फिटनेस जांच के बाद ही होगा। पंत की वापसी भारत के लिए इसलिए भी अहम होगी क्योंकि टीम मजबूत स्थिति में है और मैच को निर्णायक दिशा में ले जाने के लिए विकेटकीपिंग के साथ उनकी मैदान पर मौजूदगी बड़ा फर्क डाल सकती है।

  • दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर, सरसों, जैतून और तिल के तेल समेत जानिए विशेषज्ञ की सलाह

    दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर, सरसों, जैतून और तिल के तेल समेत जानिए विशेषज्ञ की सलाह

    नई दिल्ली ।खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हमारी रोजमर्रा की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किस तरह के तेल का इस्तेमाल किया जाए और उसकी कितनी मात्रा ली जाए, यह सवाल लगातार चर्चा में रहता है। रिफाइंड तेल को लेकर भी कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन किसी एक तेल को सीधे तौर पर दिल के लिए जहर कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता। तेल का असर उसके प्रकार, फैटी एसिड की संरचना, इस्तेमाल की मात्रा और पूरी डाइट पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक मात्रा में वसा का सेवन, खासकर संतृप्त और ट्रांस फैट की अधिकता, लंबे समय में कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल तेल बदलना ही पर्याप्त नहीं है। भोजन में तेल की कुल मात्रा, तली हुई चीजों का सेवन और व्यक्ति की पूरी जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    घी भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है। इसमें वसा के साथ कुछ वसा में घुलने वाले विटामिन भी पाए जाते हैं। हालांकि घी में संतृप्त वसा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ व्यक्ति भी इसे जरूरत से ज्यादा लेने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकता है।

    मक्खन भी वसा का स्रोत है और इसे भोजन में स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन मक्खन में भी संतृप्त वसा पर्याप्त मात्रा में होती है। इसलिए इसे रिफाइंड तेल का असीमित विकल्प मानना उचित नहीं होगा। विशेष रूप से हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल या अन्य जोखिम वाले लोगों को अपने आहार में मक्खन और घी की मात्रा तय करने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    सरसों का तेल भारतीय भोजन में लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसमें अल्फा लिनोलेनिक एसिड भी मौजूद होता है। संतुलित मात्रा में इसका इस्तेमाल कई भारतीय व्यंजनों में किया जा सकता है। तेल खरीदते समय गुणवत्ता, शुद्धता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना भी जरूरी है।

    ऑलिव ऑयल को भी हृदय के अनुकूल वसा के विकल्पों में शामिल किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद होते हैं। खासकर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को बिना अत्यधिक गर्म किए इस्तेमाल करने से इसके प्राकृतिक घटकों का लाभ मिल सकता है।

    तिल का तेल भी एक विकल्प है। इसमें असंतृप्त वसा के साथ कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। इसका स्वाद भारतीय व्यंजनों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है और सीमित मात्रा में इसे खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों की सलाह का मूल संदेश यह है कि किसी एक तेल को पूरी तरह चमत्कारी या नुकसानदेह मानने के बजाय अलग-अलग स्वस्थ वसा स्रोतों को संतुलित तरीके से डाइट में शामिल किया जाए। तेल को बार-बार गर्म करने, अत्यधिक तला भोजन खाने और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचना भी जरूरी है।

    जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, उनके लिए तेल का चुनाव व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार होना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह अधिक उपयुक्त रहती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल खाना पकाने का तेल बदलना पर्याप्त नहीं, बल्कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी भी महत्वपूर्ण है।

  • शेयर मार्केट में पैसा डुबोना है या बढ़ाना, निवेश से पहले समझ लें ये नियम; इन जगहों पर गलती से भी न लगाएं पैसा

    शेयर मार्केट में पैसा डुबोना है या बढ़ाना, निवेश से पहले समझ लें ये नियम; इन जगहों पर गलती से भी न लगाएं पैसा

    नई दिल्ली । शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की चाहत आज बहुत से लोगों में है लेकिन शेयर बाजार में कमाई जितनी आकर्षक दिखाई देती है इसमें जोखिम भी उतना ही मौजूद रहता है। इसलिए निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा कहां लगाया जाए और किन जगहों पर निवेश करने से बचना चाहिए। शेयर बाजार में कोई भी निवेश पूरी तरह जोखिम रहित नहीं होता और पुराने प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं दी जा सकती। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी भी निवेशकों को बाजार में पैसा लगाने से पहले जानकारी हासिल करने और जोखिम को समझने पर जोर देता है।

    अगर आप शेयरों में निवेश करना चाहते हैं तो सबसे पहले मजबूत कारोबार और बेहतर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों पर नजर डालना बेहतर हो सकता है। किसी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार का मॉडल कंपनी की कमाई कर्ज मुनाफा नकदी प्रवाह और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। केवल इसलिए किसी शेयर को नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि उसकी कीमत कम है। कम कीमत वाला शेयर जरूरी नहीं कि सस्ता हो और महंगा दिखने वाला शेयर जरूरी नहीं कि खराब निवेश हो। निवेश का फैसला कंपनी की वास्तविक स्थिति और उसके मूल्यांकन को देखकर करना चाहिए।

    नए निवेशकों के लिए सबसे बड़ी गलती अक्सर एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में पूरा पैसा लगा देना होती है। बाजार में किसी एक कंपनी या सेक्टर पर ज्यादा निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है। अलग अलग कंपनियों और सेक्टर में निवेश करके पोर्टफोलियो में विविधता लाई जा सकती है। सेबी के निवेशक शिक्षा पोर्टल के अनुसार इंडेक्स म्यूचुअल फंड व्यापक स्तर पर कई शेयरों में निवेश के जरिए व्यक्तिगत शेयरों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    अगर आपको कंपनियों का विश्लेषण करने का पर्याप्त अनुभव नहीं है तो म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड जैसे विकल्पों को भी समझा जा सकता है। म्यूचुअल फंड में पेशेवर प्रबंधन और विविधीकरण जैसे फायदे हो सकते हैं लेकिन इनमें भी बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है। इसलिए केवल यह सोचकर निवेश नहीं करना चाहिए कि म्यूचुअल फंड में नुकसान नहीं होगा।

    वहीं दूसरी तरफ उन शेयरों से सावधान रहना चाहिए जिनमें केवल सोशल मीडिया या किसी व्यक्ति की टिप के आधार पर तेजी की चर्चा हो रही हो। व्हाट्सऐप ग्रुप टेलीग्राम चैनल या सोशल मीडिया पोस्ट में किसी शेयर के जल्द दोगुना होने का दावा देखकर पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। इसी तरह बिना कंपनी की जानकारी देखे लगातार अपर सर्किट या तेजी वाले शेयर के पीछे भागना भी नुकसान का कारण बन सकता है।

    निवेश करते समय अपनी पूरी बचत शेयर बाजार में लगाना भी सही रणनीति नहीं मानी जानी चाहिए। सबसे पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है। जिस पैसे की जरूरत निकट भविष्य में पड़ सकती है उसे अत्यधिक जोखिम वाले निवेश में लगाने से बचना चाहिए। बाजार में गिरावट आने पर घबराकर तुरंत बेचने के बजाय पहले यह समझना चाहिए कि गिरावट कंपनी की वास्तविक स्थिति से जुड़ी है या पूरे बाजार की अस्थायी कमजोरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार को जल्दी अमीर बनने का जरिया न समझें। लंबी अवधि का नजरिया अनुशासन और सही जानकारी निवेश की बेहतर नींव बन सकते हैं। अगर किसी निवेश को समझने में परेशानी हो तो सेबी के आधिकारिक निवेशक शिक्षा संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।