Author: bharati

  • जुलाई में बदलेंगी सूर्य, बुध और शुक्र की चाल, 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते, इन्‍हें बरतनी होगी सावधानी

    जुलाई में बदलेंगी सूर्य, बुध और शुक्र की चाल, 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते, इन्‍हें बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली। जुलाई 2026 का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने सूर्य, बुध और शुक्र जैसे प्रमुख ग्रह अपनी राशि या चाल में परिवर्तन करेंगे, जबकि शनि पहले से ही वक्री अवस्था में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, इन ग्रहों के गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। जहां कुछ राशियों के लिए यह समय प्रगति, आर्थिक लाभ और सफलता लेकर आ सकता है, वहीं कुछ राशि वालों को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी गई है।

    जुलाई में कब-कब होगा ग्रहों का गोचर
    द्रिक पंचांग के अनुसार, महीने की शुरुआत में 4 जुलाई को शुक्र सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र को सुख, प्रेम, वैभव और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है, इसलिए इस गोचर का प्रभाव इन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

    इसके बाद 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस परिवर्तन को **कर्क संक्रांति** कहा जाता है, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है।

    वहीं, 24 जुलाई से बुध अपनी वक्री चाल समाप्त कर मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इससे व्यापार, संचार, निर्णय क्षमता और बुद्धि से जुड़े कार्यों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। महीने के दौरान शनि देव भी कुंभ राशि में वक्री अवस्था में रहेंगे और अपनी धीमी गति से विभिन्न राशियों पर प्रभाव डालते रहेंगे।

    इन 4 राशियों को मिल सकते हैं शुभ परिणाम

    मेष राशि
    बुध और सूर्य का गोचर आर्थिक मामलों में नए अवसर प्रदान कर सकता है। नौकरी और व्यवसाय में सम्मान बढ़ने के संकेत हैं। नया कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल माना जा रहा है। पारिवारिक जीवन भी सुखद रहने की संभावना है।

    सिंह राशि
    शुक्र और सूर्य का राशि परिवर्तन व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ा सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है।

    तुला राशि
    ग्रहों का यह परिवर्तन करियर में उन्नति के नए अवसर दे सकता है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने के संकेत हैं। स्वास्थ्य में भी पहले की तुलना में सुधार देखने को मिल सकता है।

    धनु राशि
    शनि की अनुकूल स्थिति और बुध के मार्गी होने से भाग्य का साथ मिलने की संभावना है। लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित हो सकती हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं।

    इन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

    मिथुन राशि
    इस महीने अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। कार्यस्थल पर विवाद से बचें और अपनी वाणी पर संयम रखें।

    मकर राशि
    मानसिक तनाव बढ़ सकता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें और खान-पान पर विशेष ध्यान दें। पैसों के लेन-देन में सतर्कता बरतना बेहतर रहेगा।

    कुंभ राशि
    शनि की वक्री चाल के कारण कुछ कार्यों में रुकावट आ सकती है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी रखें। इस दौरान नया निवेश करने से बचने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि
    पारिवारिक जीवन में गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर चलना लाभदायक रहेगा। धैर्य और संयम इस महीने आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं।

  • सिंधु जल संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, दुनिया से मदद की गुहार, समर्थन जुटाने की कोशिश तेज

    सिंधु जल संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, दुनिया से मदद की गुहार, समर्थन जुटाने की कोशिश तेज


    नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की चिंता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने के फैसले के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठा रहा है। हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान के मंत्री, सांसद और वरिष्ठ नेता लगातार वैश्विक समुदाय से इस संधि को बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

    इसी क्रम में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में पाकिस्तान के कई मंत्री, सांसदों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून और जल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना बताया गया।

    इशाक डार बोले- संधि क्षेत्रीय शांति की आधारशिला
    पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि केवल जल बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों को कभी भी राजनीतिक या रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। डार ने कहा कि यदि पाकिस्तान के अधिकारों से समझौता किया गया तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता और करीब दो अरब लोगों के हितों पर पड़ सकता है।

    बिलावल भुट्टो ने भी उठाई संधि बहाल करने की मांग
    पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि सिंधु जल संधि किसी एक देश का दूसरे पर एहसान नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच हुआ एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। उन्होंने कहा कि इस संधि का सम्मान किया जाना चाहिए और इसके प्रावधानों का पालन होना चाहिए।

    सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने जताई चिंता
    सम्मेलन में पाकिस्तान के सीनेटर मुसद्दिक मलिक ने भी भारत के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि कोई शक्तिशाली देश किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा निलंबित कर सकता है, तो इससे दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि विश्व के सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक मानी जाती है।

    पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
    अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। उस समय भारत ने स्पष्ट किया था कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” इसके साथ ही पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को भी तेज गति से आगे बढ़ाया गया।

    पानी और आंकड़ों की अनिश्चितता से बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
    सिंधु नदी प्रणाली का पानी पाकिस्तान की कृषि, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान को जल प्रवाह की अनिश्चितता के साथ-साथ भारत से मिलने वाली हाइड्रोलॉजिकल जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो रही है। इसी कारण पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को लेकर पहले जैसी स्थिति बहाल नहीं की जाएगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे


    अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जिला जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चोरी के तरीके, रकम के इस्तेमाल और दान राशि की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए। इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी एक बार फिर सामने आया। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, जांच का दायरा अब आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों तक भी बढ़ा दिया गया है।

    अविनाश मिश्रा से सबसे लंबी पूछताछ
    सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की, लेकिन सबसे अधिक समय आरोपी अविनाश मिश्रा से सवाल-जवाब में लगाया गया। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई थी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और चोरी के नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे गायब होती रही और इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही।

    पूछताछ में चोरी की कार्यप्रणाली का खुलासा
    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दान राशि की चोरी की पूरी कार्यप्रणाली पुलिस के सामने रखी। दावा किया गया कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था। पुलिस ने यह जानने का प्रयास किया कि रकम किस समय निकाली जाती थी, उसे कैसे छिपाया जाता था और बाद में किस तरीके से मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था।

    सूत्रों का यह भी दावा है कि पूछताछ में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। आरोपियों ने तौर पर कहा कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और जांच एजेंसियां आरोपियों के दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही हैं।

    एक व्यक्ति रकम निकालता, बाकी बनाते थे घेरा
    पूछताछ में सामने आए दावों के अनुसार, चोरी के दौरान एक व्यक्ति दान राशि निकालता था, जबकि बाकी आरोपी उसके चारों ओर इस तरह खड़े रहते थे कि बाहर से किसी को कोई संदेह न हो। इससे सीसीटीवी कैमरों और अन्य कर्मचारियों की नजर सीधे उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचती थी।

    सूत्रों के मुताबिक, निकाली गई रकम को तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था, बल्कि पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था। बाद में अनुकूल अवसर मिलने पर उसे परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस दावे की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।

    कैमरों की निगरानी से बचने की थी पूरी जानकारी
    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और उनकी निगरानी के दायरे की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से योजना ऐसे तैयार की जाती थी कि कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का भी मिलान कर रही है।

    गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी दावा
    पूछताछ में आरोपियों ने तौर पर बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। उनका दावा है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। हालांकि, बैंक कर्मियों की किसी भूमिका की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दस्तावेजों, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
    इस मामले में पुलिस ने पिछले सप्ताह मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गिनती इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव तथा रकम गिनने वाले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में हुई ताजा पूछताछ को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आरोपियों से पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से पूछताछ की गई।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने नोटिस का दिया जवाब
    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी थी, जिस पर बैंक ने जवाब सौंप दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गणना, पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक की कोई भूमिका नहीं होती।

    सूत्रों के अनुसार, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।

    चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की भी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है, जिसे कई वर्ष पहले दिल्ली से अयोध्या स्थानांतरित किया गया था। फिलहाल इस खाते में बहुत कम राशि है और लंबे समय से कोई उल्लेखनीय लेनदेन नहीं हुआ है।

    इसी शाखा में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी बैंक खाता है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि, पुलिस इस जानकारी का सत्यापन कर रही है और अब तक जांच एजेंसियों ने इन खातों का चोरी से कोई सीधा संबंध होने की पुष्टि नहीं की है।

    इन खातों की भी मांगी गई जानकारी
    पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण भी मांगा था। बैंक ने अपने जवाब में बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला।

    सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और पिछले कुछ महीनों से उसमें कोई विशेष लेनदेन नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की रकम किसी अन्य माध्यम से तो नहीं पहुंचाई गई।

  • एमपी के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अगले 2-4 दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा मानसून

    एमपी के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अगले 2-4 दिनों में पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा मानसून


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने बुधवार को बालाघाट और डिंडौरी में अति भारी बारिश, जबकि देवास, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति बन सकती है।

    2 से 4 दिनों में पूरे प्रदेश को कवर करेगा मानसून
    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून मंगलवार को आगे बढ़ते हुए जबलपुर, भोपाल, रीवा और शहडोल संभाग के अधिकांश जिलों तक पहुंच गया है। अगले 2 से 4 दिनों के भीतर भोपाल, सागर, ग्वालियर, उज्जैन और चंबल संभाग के शेष जिलों में भी मानसून की दस्तक होने की संभावना है।

    इन जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, शाजापुर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तेज आंधी के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा और रतलाम में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    23 जिलों में बरसे बादल, तापमान में आई गिरावट
    मंगलवार को प्रदेश के 23 जिलों में बारिश दर्ज की गई। सतना में करीब डेढ़ इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, बैतूल, धार, नर्मदापुरम, खरगोन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी, सीधी, बालाघाट, पांढुर्णा, सीहोर, शाजापुर, डिंडौरी, हरदा और मैहर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।

    बारिश के कारण अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। भोपाल में 30.6 डिग्री, इंदौर में 33 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, जबलपुर में 32 डिग्री और ग्वालियर में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    सबसे कम अधिकतम तापमान बैतूल में 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा सिवनी, छिंदवाड़ा, दमोह, मलाजखंड, खंडवा, सागर, मंडला और खरगोन में भी तापमान सामान्य से नीचे रहा।

    जून में कमी, जुलाई से बेहतर बारिश की उम्मीद
    मौसम विभाग के अनुसार, जून महीने में प्रदेश में कुल 88.2 मिमी (करीब 3.5 इंच) बारिश हुई, जो सामान्य 131.1 मिमी की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत कम रही। हालांकि विभाग का अनुमान है कि जुलाई में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। सामान्य तौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है, इसलिए इस महीने अच्छी बारिश की उम्मीद जताई जा रही है।

  • 1 जुलाई का दैनिक राशिफल करियर धन प्रेम और सेहत में किस राशि को मिलेगा बड़ा लाभ पढ़ें आज का संपूर्ण भविष्यफल

    1 जुलाई का दैनिक राशिफल करियर धन प्रेम और सेहत में किस राशि को मिलेगा बड़ा लाभ पढ़ें आज का संपूर्ण भविष्यफल


    नई दिल्ली। आज 1 जुलाई का दिन कई राशियों के लिए नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है जबकि कुछ लोगों को अपने फैसलों में धैर्य और समझदारी से काम लेने की आवश्यकता होगी। ग्रहों की स्थिति यह संकेत दे रही है कि मेहनत करने वालों को सफलता मिलने के अच्छे योग हैं लेकिन जल्दबाजी और भावनाओं में लिए गए निर्णय नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में दिनभर संयम और सकारात्मक सोच बनाए रखना सबसे बेहतर रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज आत्मविश्वास बढ़ाने वाला दिन रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा होने की संभावना है। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा।

    वृषभ राशि वालों को आर्थिक मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं। निवेश या व्यापार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी रहेगा और किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी जांच करें।

    मिथुन राशि के लोगों के लिए आज संवाद और रिश्तों का दिन रहेगा। नई मुलाकातें भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी।

    कर्क राशि वालों को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। कार्यक्षेत्र में मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा लेकिन मानसिक तनाव से बचने के लिए आराम भी जरूरी होगा। परिवार का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा।

    सिंह राशि के लिए आज का दिन सम्मान और सफलता लेकर आ सकता है। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी।

    कन्या राशि के जातकों को आज धैर्य रखने की सलाह है। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान पहुंचा सकता है। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें और अनावश्यक खर्चों से बचें।

    तुला राशि वालों के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। व्यापार में लाभ और नौकरी में नई संभावनाएं मिल सकती हैं। दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहेंगी और मित्रों का सहयोग मिलेगा।

    वृश्चिक राशि के लोगों को आज अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना होगा। किसी विवाद से दूर रहें और कार्यस्थल पर संयम बनाए रखें। शाम तक कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

    धनु राशि के लिए आज यात्रा के योग बन रहे हैं। करियर में नई दिशा मिलने की संभावना है। पुराने निवेश से लाभ हो सकता है और पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा।

    मकर राशि के जातकों को आज मेहनत का पूरा फल मिलने के संकेत हैं। व्यवसाय में विस्तार की योजना बन सकती है और नौकरी में पदोन्नति की संभावना रहेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

    कुंभ राशि वालों के लिए आज रचनात्मक कार्यों में सफलता का दिन है। नए अवसर मिलेंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार के साथ सुखद समय बिताने का मौका मिलेगा।

    मीन राशि के जातकों को आज सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। प्रेम जीवन में विश्वास बढ़ेगा और धन लाभ के नए अवसर मिलेंगे।

    कुल मिलाकर 1 जुलाई का दिन अधिकांश राशियों के लिए प्रगति और नए अवसरों का संकेत दे रहा है। मेहनत धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ लिया गया हर निर्णय भविष्य में बेहतर परिणाम देने वाला साबित हो सकता है।

  • जुलाई की शुरुआत के साथ बदले कई नियम, आधार अपडेट, रेलवे जुर्माना, पासपोर्ट फीस और बैंकिंग सेवाओं पर दिखेगा असर

    जुलाई की शुरुआत के साथ बदले कई नियम, आधार अपडेट, रेलवे जुर्माना, पासपोर्ट फीस और बैंकिंग सेवाओं पर दिखेगा असर

    नई दिल्ली । जुलाई महीने की शुरुआत के साथ देशभर में कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका सीधा असर आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सेवाओं पर पड़ेगा। आधार से जुड़े अपडेट, रेलवे यात्रा के नियम, पासपोर्ट शुल्क, बैंकिंग सेवाओं तथा एलपीजी और अन्य ईंधनों की कीमतों में होने वाले बदलाव लोगों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में इन नए प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

    आधार से जुड़े बदलाव के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने की सुविधा सीमित अवधि के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब निर्धारित अवधि तक नागरिक बिना किसी शुल्क के अपने आधार रिकॉर्ड में ईमेल आईडी अपडेट करा सकेंगे। इससे पहले इस सेवा के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ता था। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को अपने आधार विवरण अद्यतन कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    रेलवे ने भी यात्रा संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़े जाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने में वृद्धि की गई है। इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी टिकट का उपयोग करने पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। महिला कोच में अनधिकृत रूप से यात्रा करने वाले पुरुष यात्रियों पर भी अधिक जुर्माना लगाया जाएगा। रेलवे का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को मजबूत करना है।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की मासिक समीक्षा भी पहली जुलाई से प्रभावी होगी। तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। नई दरों के अनुसार कीमतों में बदलाव या उन्हें यथावत रखने का निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह विमान ईंधन और सीएनजी की कीमतों में भी संशोधन की संभावना बनी रहती है, जिसका असर परिवहन और अन्य क्षेत्रों की लागत पर पड़ सकता है।

    पासपोर्ट सेवाओं का लाभ लेने वाले नागरिकों के लिए भी नई व्यवस्था लागू हो रही है। सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों में पासपोर्ट जारी कराने के लिए निर्धारित शुल्क में संशोधन किया गया है। इसके बाद नए आवेदन करने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क का भुगतान करना होगा। विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैंकिंग क्षेत्र में भी कुछ नए प्रावधान लागू हुए हैं। विशेष रूप से कुछ क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए एयरपोर्ट लाउंज सुविधा का लाभ लेने संबंधी पात्रता शर्तों में बदलाव किया गया है। अब निर्धारित श्रेणी के कार्डधारकों को निःशुल्क लाउंज सुविधा प्राप्त करने के लिए एक निश्चित अवधि में न्यूनतम खर्च की शर्त पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य कार्ड उपयोग से जुड़े लाभों को नई नीति के अनुरूप व्यवस्थित करना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर किए जाने वाले ऐसे नियामकीय बदलाव प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने और सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से लागू किए जाते हैं। हालांकि इन परिवर्तनों का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर अलग हो सकता है। इसलिए आधार, पासपोर्ट, रेलवे, बैंकिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं का उपयोग करने वाले नागरिकों के लिए नए नियमों की जानकारी रखना और उसी के अनुरूप अपनी योजनाएं बनाना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • राजकोषीय अनुशासन की राह पर केंद्र, वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में घाटा लक्ष्य के दायरे में; कर संग्रह और पूंजीगत व्यय में भी बढ़ोतरी

    राजकोषीय अनुशासन की राह पर केंद्र, वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में घाटा लक्ष्य के दायरे में; कर संग्रह और पूंजीगत व्यय में भी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों अप्रैल और मई के दौरान 1.624 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत है। शुरुआती वित्तीय आंकड़े संकेत देते हैं कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए निर्धारित वित्तीय लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रही है। कर संग्रह, गैर-कर राजस्व और पूंजीगत व्यय में दर्ज हुई प्रगति ने भी वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान की है।

    सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 16.96 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य तय किया है। शुरुआती दो महीनों के आंकड़ों को देखते हुए वित्तीय प्रबंधन संतुलित दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष की शुरुआत में नियंत्रित राजकोषीय स्थिति सरकार को आगे की आर्थिक प्राथमिकताओं पर प्रभावी ढंग से काम करने का अवसर प्रदान करती है।

    मई महीने के दौरान केंद्र सरकार ने लगभग दो लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय अधिशेष दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रहा। इससे पहले अप्रैल में सरकार के कुल व्यय की तुलना में प्राप्तियां कम रहने के कारण घाटा दर्ज हुआ था, लेकिन मई में राजस्व में सुधार से वित्तीय संतुलन मजबूत हुआ। यह संकेत देता है कि सरकारी आय के स्रोतों में निरंतर सुधार हो रहा है।

    गैर-कर राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। मई के दौरान यह आय पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रही, जिसमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राजस्व का योगदान रहा। इसी अवधि में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को अधिशेष राशि हस्तांतरित किए जाने से भी सरकारी वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिली। इससे सरकार के संसाधनों में वृद्धि हुई और वित्तीय प्रबंधन को संतुलित बनाए रखने में सहायता मिली।

    पूंजीगत व्यय के मोर्चे पर भी सरकार ने निवेश की गति बनाए रखी। अप्रैल और मई के दौरान पूंजीगत खर्च में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई। बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक निवेश पर लगातार खर्च किए जाने से अर्थव्यवस्था में मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार लंबे समय से पूंजीगत निवेश को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानती रही है और शुरुआती महीनों के आंकड़े उसी दिशा में निरंतरता का संकेत देते हैं।

    कर संग्रह में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। अप्रैल-मई के दौरान कुल कर राजस्व में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई। बेहतर कर संग्रह सरकार की आय बढ़ाने के साथ-साथ राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे विकास योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में सुविधा मिलती है।

    सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में निर्धारित राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल किया था और चालू वित्त वर्ष में इसे और कम करने का लक्ष्य रखा गया है। राजकोषीय घाटे में कमी से सरकार की उधारी पर दबाव घटता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में निजी क्षेत्र और उपभोक्ताओं के लिए ऋण उपलब्धता बेहतर होती है। साथ ही महंगाई को नियंत्रित रखने, निवेश बढ़ाने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शुरुआती वित्तीय आंकड़े संकेत देते हैं कि सरकार निर्धारित राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • रणनीतिक तैयारी और लगातार राजनयिक प्रयासों से खाड़ी संकट का असर रहा सीमित, पूर्व पेट्रोलियम सचिव ने भारत की ऊर्जा नीति को सराहा

    रणनीतिक तैयारी और लगातार राजनयिक प्रयासों से खाड़ी संकट का असर रहा सीमित, पूर्व पेट्रोलियम सचिव ने भारत की ऊर्जा नीति को सराहा

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न संकट के दौरान भारत ने समय पर लिए गए नीतिगत निर्णयों, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना और निरंतर कूटनीतिक प्रयासों के बल पर देश में ईंधन आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पूर्व सचिव विवेक कुमार ने कहा कि सरकार की सक्रिय रणनीति के कारण आम उपभोक्ताओं पर संकट का व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पूरे समय स्थिर बनी रही।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार अत्यंत जटिल और परस्पर जुड़ा हुआ है, जहां किसी भी क्षेत्र में उत्पन्न तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत ने अपनी पूर्व तैयारी, नीति-निर्माण और रणनीतिक समन्वय के जरिए स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला। उनके अनुसार सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिनसे ईंधन की उपलब्धता बनी रही और खुदरा स्तर पर आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति नहीं बनने दी गई।

    विवेक कुमार ने कहा कि संकट के शुरुआती चरण में ही सरकार ने परिस्थितियों का आकलन करते हुए आवश्यक प्रशासनिक और परिचालन संबंधी कदम उठाने शुरू कर दिए थे। उनका कहना था कि समय रहते किए गए हस्तक्षेपों ने संभावित आपूर्ति संकट को सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी रही तथा उपभोक्ताओं को व्यापक असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

    उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में कोई भी राष्ट्र पूरी तरह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर नहीं है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार आयातकों तथा निर्यातकों के व्यापक नेटवर्क पर आधारित है, इसलिए किसी भी देश की सफलता उसकी रणनीतिक तैयारी, भंडारण क्षमता और परिवहन अवसंरचना पर निर्भर करती है।

    पूर्व सचिव के अनुसार पिछले एक दशक में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक निवेश किया है। सरकार के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तेल भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क, रिफाइनिंग सुविधाओं और आपूर्ति तंत्र में हुए विस्तार ने संकट के समय देश की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की। उनका कहना था कि इसी दीर्घकालिक निवेश का लाभ खाड़ी संकट के दौरान देखने को मिला।

    उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारत ने संबंधित देशों और विभिन्न पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा ताकि समुद्री मार्गों के माध्यम से तेल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। अधिकारियों ने लगातार समन्वय स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित किया कि भारतीय तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित न हो और आवश्यक ऊर्जा संसाधन समय पर देश तक पहुंचते रहें।

    विवेक कुमार ने कहा कि वैश्विक संकटों के समय केवल आर्थिक संसाधन पर्याप्त नहीं होते, बल्कि प्रभावी कूटनीति, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत प्रशासनिक समन्वय भी उतना ही आवश्यक होता है। उनके अनुसार भारत ने इन सभी क्षेत्रों में संतुलित रणनीति अपनाई, जिससे ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था सुरक्षित रही और बाजार में अनिश्चितता का असर सीमित रखा जा सका।

    उन्होंने विश्वास जताया कि ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर निवेश, आधुनिक अवसंरचना का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नीति भविष्य में भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनका कहना था कि बदलते वैश्विक हालात के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक योजना ही देश को संभावित ऊर्जा संकटों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगी।

  • RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारत का विदेशी कर्ज 762.8 अरब डॉलर के पार; निजी क्षेत्र की बढ़ी उधारी बनी प्रमुख वजह

    RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारत का विदेशी कर्ज 762.8 अरब डॉलर के पार; निजी क्षेत्र की बढ़ी उधारी बनी प्रमुख वजह

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर, यानी लगभग 72.2 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें 26.3 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट में विदेशी कर्ज बढ़ने के साथ-साथ उससे जुड़े कई ऐसे संकेत भी सामने आए हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए राहत और सतर्कता दोनों का संदेश देते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी का असर देश के डेट-टू-जीडीपी अनुपात पर भी दिखाई दिया है। मार्च 2025 में यह अनुपात 19.8 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 20.8 प्रतिशत हो गया। इसका अर्थ है कि देश की अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में विदेशी देनदारियों का अनुपात बढ़ा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर अभी भी नियंत्रण में है, लेकिन आने वाले समय में इस पर लगातार निगरानी बनाए रखना आवश्यक होगा।

    रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि विदेशी कर्ज में वृद्धि का प्रमुख कारण सरकारी उधारी नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की बढ़ी हुई विदेशी फंडिंग है। रिपोर्ट के अनुसार गैर-वित्तीय कॉरपोरेट कंपनियों, वाणिज्यिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने कारोबार के विस्तार और निवेश आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशों से अधिक उधार लिया है। कुल विदेशी कर्ज में गैर-वित्तीय कॉरपोरेट क्षेत्र की हिस्सेदारी 36.4 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक दर्ज की गई है।

    रिपोर्ट में वैल्यूएशन इफेक्ट का भी उल्लेख किया गया है। विभिन्न वैश्विक मुद्राओं और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले विनिमय दरों में हुए बदलाव के कारण भारत के विदेशी कर्ज पर अतिरिक्त दबाव कम हुआ। केंद्रीय बैंक के अनुसार यदि विनिमय दरों का यह प्रभाव नहीं होता, तो विदेशी कर्ज में वृद्धि 26.3 अरब डॉलर के बजाय लगभग 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकती थी। इससे स्पष्ट होता है कि मुद्रा विनिमय में आए बदलावों ने कुल देनदारी के आंकड़े को सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    विदेशी कर्ज की मुद्रा संरचना पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 55.5 प्रतिशत रही। इसके बाद भारतीय रुपये में 29.4 प्रतिशत कर्ज दर्ज किया गया। जापानी येन की हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स 4.3 प्रतिशत और यूरो की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत रही। कर्ज के स्वरूप में सबसे बड़ा हिस्सा ऋण यानी लोन का रहा, जिसकी हिस्सेदारी कुल विदेशी कर्ज में 34.7 प्रतिशत दर्ज की गई।

    हालांकि विदेशी कर्ज बढ़ने के बावजूद कुछ आर्थिक संकेतकों ने राहत भी दी है। रिपोर्ट के अनुसार देश की डेट सर्विसिंग क्षमता में सुधार हुआ है। चालू प्राप्तियों के मुकाबले कर्ज और ब्याज चुकाने का अनुपात घटकर 5.8 प्रतिशत रह गया है, जबकि एक वर्ष पहले यह 6.6 प्रतिशत था। इसका अर्थ है कि भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

    रिजर्व बैंक ने यह भी बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। 672 अरब डॉलर से अधिक के फॉरेक्स रिजर्व को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और नियंत्रित कर्ज प्रबंधन नीति के कारण भारत फिलहाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना करने की बेहतर स्थिति में है, हालांकि निजी क्षेत्र की बढ़ती विदेशी उधारी पर भविष्य में सतर्क निगरानी बनाए रखना आवश्यक रहेगा।

  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।