Author: bharati

  • सोलर पैनल की उम्र और बिजली उत्पादन बढ़ाना है तो अपनाएं सही सफाई तरीका, एक्सपर्ट्स ने दी महत्वपूर्ण सलाह

    सोलर पैनल की उम्र और बिजली उत्पादन बढ़ाना है तो अपनाएं सही सफाई तरीका, एक्सपर्ट्स ने दी महत्वपूर्ण सलाह

    नई दिल्ली । घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कृषि क्षेत्रों में सोलर पैनलों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। बढ़ती बिजली लागत के बीच सौर ऊर्जा एक किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर उभरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर बिजली उत्पादन और लंबे समय तक पैनलों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए उनकी नियमित एवं सही तरीके से सफाई करना बेहद जरूरी है। सफाई के दौरान की गई छोटी सी लापरवाही भी पैनलों को नुकसान पहुंचा सकती है और उनकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोलर पैनलों की सतह पर समय के साथ धूल, मिट्टी, प्रदूषण के कण, सूखे पत्ते, परागकण और पक्षियों की बीट जमा हो जाती है। इससे सूर्य की किरणें सीधे पैनल तक नहीं पहुंच पातीं और बिजली उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इसलिए समय-समय पर पैनलों की सफाई करना आवश्यक माना जाता है।

    सफाई के लिए सबसे उपयुक्त समय सुबह का शुरुआती समय या सूर्यास्त के बाद का होता है। दोपहर के समय तेज धूप में सोलर पैनल का तापमान काफी अधिक हो जाता है। ऐसे में गर्म पैनल पर अचानक ठंडा पानी डालने से थर्मल शॉक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे पैनल का ग्लास चटकने या उसमें दरार आने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्म सतह पर पानी तेजी से सूखने के कारण दाग भी पड़ सकते हैं, जो प्रकाश के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सफाई शुरू करने से पहले पूरे सोलर सिस्टम को सुरक्षित तरीके से बंद कर देना चाहिए। सबसे पहले इनवर्टर और उसके बाद एसी तथा डीसी डिस्कनेक्ट स्विच बंद किए जाएं। इससे सफाई के दौरान बिजली के झटके या अन्य तकनीकी जोखिमों की संभावना काफी कम हो जाती है। सफाई पूरी होने के बाद सभी स्विच निर्धारित क्रम में दोबारा चालू किए जाने चाहिए।

    सोलर पैनलों की ऊपरी सतह पर विशेष सुरक्षात्मक कोटिंग होती है, जो सूर्य की रोशनी को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने में मदद करती है। इसलिए सफाई के दौरान कठोर ब्रश, स्टील स्क्रबर, झाड़ू या खुरदरे कपड़े का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसे उपकरणों से सतह पर खरोंच आ सकती है, जिससे पैनल की क्षमता और आयु दोनों प्रभावित हो सकती हैं। सफाई के लिए माइक्रोफाइबर कपड़ा, मुलायम स्पंज या सॉफ्ट कपड़े का उपयोग सबसे सुरक्षित माना जाता है।

    सोलर पैनलों की सफाई करते समय हाई प्रेशर वाटर जेट या तेज दबाव वाले पाइप का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। अधिक दबाव से पानी डालने पर पैनल की सीलिंग कमजोर पड़ सकती है और नमी अंदर प्रवेश कर सकती है, जिससे तकनीकी खराबी का जोखिम बढ़ जाता है। इसी प्रकार तेज रासायनिक क्लीनर, एसिड, फिनायल या अन्य कठोर केमिकल का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पैनल की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंच सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य साफ पानी अधिकांश परिस्थितियों में पर्याप्त होता है। यदि अधिक गंदगी जमी हो तो हल्के साबुन के घोल का सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। नियमित अंतराल पर सही तरीके से की गई सफाई न केवल सोलर पैनलों की कार्यक्षमता बनाए रखती है, बल्कि उनकी उम्र बढ़ाने और अधिकतम बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज से स्पष्ट दूरी बना ली है। संगठन ने कहा है कि मंदिर के संचालन और ट्रस्ट से जुड़े सभी प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट की है। वीएचपी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम बताया है।

    वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संगठन की भूमिका मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने तक सीमित थी। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रहा है और उसके प्रशासनिक तथा वित्तीय निर्णयों से वीएचपी का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर ही है।

    आलोक कुमार ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में मंदिरों का संचालन करना वीएचपी का दायित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के निर्णयों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार जिस संस्था को मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही उसके सभी निर्णयों और परिणामों के लिए उत्तरदायी है।

    उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय के कार्यों से भी स्वयं को अलग बताया। उनका कहना था कि ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है और किसी अन्य संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच वीएचपी के स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।

    चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता बढ़ने से ट्रस्ट के भीतर भी बदलाव देखने को मिले हैं। इसी क्रम में नैतिक आधार पर चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया। इन घटनाक्रमों के बाद पूरे मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, उससे देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु आहत हुए हैं। उनके अनुसार जिन लोगों ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया, आर्थिक सहयोग दिया और अपनी आस्था इस अभियान से जोड़ी, उनके लिए यह घटनाक्रम बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    उन्होंने यह भी दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वीएचपी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि संगठन न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसका संचालन करेगा। इसके बाद ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से अपने सभी निर्णय लेता रहा है। इसलिए ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय विवाद की जवाबदेही उसी संस्था की है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस विवाद की निष्पक्ष जांच न केवल तथ्यों को स्पष्ट करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में अहम साबित होंगे।

  • शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम

    शीर्षक विकल्प 3 बादल आते हैं लेकिन बरसते नहीं इंदौर में कमजोर मानसून ने बढ़ाई उमस और गर्मी आज शाम बदल सकता है मौसम


    इंदौर  इंदौर में मानसून की दस्तक के बावजूद बारिश की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है। जून का महीना समाप्ति की ओर है लेकिन अब तक शहर में करीब 4 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। अच्छी बारिश का आखिरी दौर 24 जून को देखने को मिला था जब शहर के अलग अलग हिस्सों में आधा इंच से लेकर करीब 2 इंच तक पानी बरसा था। इसके बाद मौसम में लगातार बदलाव तो देखने को मिला लेकिन तेज बारिश नहीं हो सकी।

    पिछले एक सप्ताह से दोपहर बाद आसमान में बादल छा रहे हैं और बारिश जैसे हालात बन रहे हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी या रिमझिम तक ही मौसम सीमित रह गया। मंगलवार सुबह भी धूप और बादलों की आवाजाही का सिलसिला जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार शाम के समय हल्की बारिश होने की संभावना है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।

    कम बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले सात दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है जो सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक है। वहीं रात का तापमान भी लगातार 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। सामान्य से अधिक तापमान के कारण दिन में उमस और रात में गर्मी लोगों को परेशान कर रही है।

    इस वर्ष 24 जून को मध्य प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था और इंदौर सहित प्रदेश के 15 जिलों में इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह आगे बढ़ने के बजाय एक क्षेत्र में ही ठहर गया। इसी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दोबारा सक्रिय होकर आगे बढ़ने के बाद ही व्यापक वर्षा का दौर शुरू होगा।

    बारिश की कमी का असर केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। प्रदेश के उत्तरी क्षेत्रों खासकर ग्वालियर चंबल सागर और रीवा संभाग में भी तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। इन इलाकों में भी लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

    यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून के महीने में इंदौर में तापमान में अच्छी गिरावट देखने को मिलती रही है और औसतन पर्याप्त वर्षा भी दर्ज होती रही है। पिछले वर्ष जून में शहर में लगभग साढ़े पांच इंच बारिश हुई थी जबकि वर्ष 1980 में जून के महीने में 17 इंच से अधिक वर्षा का रिकॉर्ड बना था। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में करीब 5 इंच बारिश दर्ज की गई थी जो आज भी एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में यदि मानसून सक्रिय होता है तो बारिश की रफ्तार तेज हो सकती है। फिलहाल शहरवासियों को हल्की बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच उमस भरे मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

  • उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    उत्तर प्रदेश चुनावी तैयारियों को धार देंगे नितिन नवीन, पहले लखनऊ दौरे में संगठन से लेकर सरकार तक होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 3 और 4 जुलाई को अपने पहले आधिकारिक दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचेंगे। हाल ही में घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी के बाद यह शीर्ष नेतृत्व का पहला महत्वपूर्ण दौरा माना जा रहा है। राजनीतिक दृष्टि से इस प्रवास को संगठन की मजबूती, चुनावी रणनीति और सरकार-संगठन के बेहतर समन्वय के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नितिन नवीन के कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। दौरे के दौरान वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा करना और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आवश्यक सुझावों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।

    दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने, विभिन्न स्तरों पर संवाद को मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा। भाजपा नेतृत्व लंबे समय से संगठनात्मक समन्वय को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है और यह बैठक उसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में पार्टी ने विभिन्न पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दौरे के दौरान नई टीम के साथ बैठक कर संगठनात्मक कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्षों, संगठन मंत्रियों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों से भी संवाद कर जमीनी स्तर की गतिविधियों और संगठन की सक्रियता का आकलन करेंगे।

    भाजपा नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी तैयारियों को केवल शीर्ष स्तर तक सीमित न रखकर बूथ और मंडल स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर स्थानीय मुद्दों, जनसंपर्क अभियानों और संगठन की कार्यप्रणाली पर फीडबैक प्राप्त करेंगे। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय और संगठित ढांचा चुनावी सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के चुनावी अनुभवों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक रणनीति को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रत्येक स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा हो और संगठन के भीतर समन्वय तथा संवाद को लगातार बेहतर बनाया जाए। इसी कारण शीर्ष नेतृत्व स्वयं प्रदेश का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कर रहा है।

    नितिन नवीन के इस दौरे को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। संभावना है कि बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान, सरकार की योजनाओं के प्रभावी प्रचार और विपक्ष की राजनीतिक रणनीतियों के जवाब जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह दौरा उत्तर प्रदेश भाजपा की चुनावी तैयारियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • रहस्यमयी गुमशुदगी से हत्या तक कर्ज प्रेम संबंध और एक फोन कॉल में उलझी नरसिंहपुर की सनसनीखेज कहानी

    रहस्यमयी गुमशुदगी से हत्या तक कर्ज प्रेम संबंध और एक फोन कॉल में उलझी नरसिंहपुर की सनसनीखेज कहानी


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में एक युवक की रहस्यमयी गुमशुदगी और सात दिन बाद तालाब से मिली लाश ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। शुरुआत में यह मामला गुमशुदगी या हादसे का माना जा रहा था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी। जांच में सामने आए एक फोन कॉल कर्ज के विवाद और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े कई पहलुओं ने इस हत्याकांड को और भी रहस्यमय बना दिया।

    घटना 24 जनवरी 2021 की है। करेली निवासी 32 वर्षीय सपनेश पटेल शाम के समय अपने काम से लौटने की तैयारी कर रहे थे। तभी उनके मोबाइल पर एक परिचित का फोन आया जिसमें उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए बुलाया गया। सपनेश तुरंत वहां जाने के लिए निकल गए लेकिन इसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। रात भर इंतजार करने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटे और उनका मोबाइल भी बंद मिला तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।

    अगले दिन परिवार ने रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां तलाश शुरू की लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। आखिरकार करेली थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इस बीच गांव में तरह तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने बताया कि सपनेश पर पहले भी कर्ज था और संभव है कि वह फिर कहीं चला गया हो। हालांकि पुलिस ने हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच जारी रखी।

    जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि लापता होने से पहले सपनेश की आखिरी बातचीत उनके रिश्तेदार सूर्यप्रकाश पटेल से हुई थी। पूछताछ में सूर्यप्रकाश ने स्वीकार किया कि उसने ही सपनेश को शराब पार्टी के लिए बुलाया था लेकिन इसके बाद वह लगातार यही कहता रहा कि सपनेश शायद कर्ज के कारण कहीं चला गया होगा। उसके बयान पुलिस के संदेह को और गहरा करते गए।

    सात दिन बाद डूडा गांव के पास एक तालाब में ग्रामीणों ने एक शव देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और परिजनों से पहचान कराई। शव सपनेश का ही था। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शव सड़ चुका था लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सबसे बड़ा खुलासा किया। डॉक्टरों ने साफ किया कि मौत डूबने से नहीं बल्कि गला दबाकर हत्या करने से हुई थी। गले पर तार जैसी किसी वस्तु से कसने के स्पष्ट निशान मिले थे। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच का दायरा और बढ़ा दिया।

    इसी दौरान सपनेश के भाई ने पुलिस को बताया कि सूर्यप्रकाश का उनके घर में लगातार आना जाना था और उसने कई बार उसे सपनेश की पत्नी के साथ बेहद घुलते मिलते देखा था। इस जानकारी के बाद जांच की दिशा बदल गई और पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि हत्या के पीछे असली वजह कर्ज थी या पारिवारिक संबंधों से जुड़ा कोई विवाद।

    फिलहाल इस सनसनीखेज मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या हत्या की साजिश पहले से रची गई थी या यह किसी विवाद का नतीजा थी। इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।

  • बांग्लादेश की राजनीति में फिर उबाल, जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की मांग तेज, शेख हसीना की वापसी के ऐलान से बढ़ी सियासी हलचल

    बांग्लादेश की राजनीति में फिर उबाल, जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की मांग तेज, शेख हसीना की वापसी के ऐलान से बढ़ी सियासी हलचल

    नई दिल्ली । बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। संसद में कट्टरपंथी राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग ने देश की सियासत को गरमा दिया है। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इसी वर्ष बांग्लादेश लौटने का सार्वजनिक ऐलान कर राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। इन दोनों घटनाक्रमों ने देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और भविष्य के सत्ता समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

    संसद में यह मुद्दा उस समय प्रमुखता से उठा जब सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े सांसद ने जमात-ए-इस्लामी की राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की। उनका तर्क था कि जिन संगठनों या राजनीतिक दलों का संबंध 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के विरोध से रहा है अथवा जो धर्म का राजनीतिक उद्देश्य के लिए उपयोग करते हैं, उन्हें लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने धार्मिक स्थलों को भी राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह अलग रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    इस मांग के सामने आते ही जमात-ए-इस्लामी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पार्टी के नेताओं ने संसद के भीतर सरकार पर विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि प्रमुख विपक्षी दलों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाएगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी और देश में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार एक-दलीय राजनीतिक व्यवस्था की दिशा में बढ़ रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब वर्ष 2024 के राजनीतिक आंदोलन के बाद बने नए सत्ता संतुलन की लगातार परीक्षा हो रही है। पूर्व सरकार के पतन के बाद जमात-ए-इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटाया गया था, जिसके बाद हुए आम चुनाव में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए संसद में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद से वह सरकार के सामने प्रभावी विपक्ष के रूप में उभरी है।

    विवाद के बीच जमात-ए-इस्लामी ने सरकार पर अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का भी आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि सरकार प्रशासनिक और संवैधानिक चुनौतियों का समाधान करने के बजाय राजनीतिक टकराव को बढ़ावा दे रही है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए ऐसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति अपनाना आवश्यक है।

    इसी दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के हालिया बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह इसी वर्ष अपने देश लौटेंगी और राजनीतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार के साथ किसी प्रकार की गुप्त बातचीत या समझौते की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक अधिकार किसी भी राजनीतिक सौदेबाजी का विषय नहीं हो सकते।

    शेख हसीना की संभावित वापसी और जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की मांग ने बांग्लादेश की राजनीति को एक नए दौर में पहुंचा दिया है। आने वाले समय में संसद के भीतर होने वाली बहस, सरकार के निर्णय और विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति यह तय करेगी कि देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन घटनाक्रमों पर नजर बनी हुई है, क्योंकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता का प्रभाव पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर पड़ सकता है।

  • इंदौर नगर निगम की अपील आज आखिरी दिन समय पर कर जमा कर पाएं विशेष छूट और बनें शहर विकास के भागीदार

    इंदौर नगर निगम की अपील आज आखिरी दिन समय पर कर जमा कर पाएं विशेष छूट और बनें शहर विकास के भागीदार


    इंदौर । इंदौर नगर निगम की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम संपत्तिकर और जलकर जमा करने का मंगलवार यानी 30 जून अंतिम दिन है। नगर निगम ने करदाताओं से समय रहते भुगतान करने की अपील की है ताकि वे विशेष छूट का लाभ उठा सकें। अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए निगम ने सभी कर संग्रह केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं और काउंटर भी नियमित रूप से संचालित किए जा रहे हैं।

    नगर निगम के अनुसार अग्रिम कर जमा करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहन के रूप में संपत्तिकर पर 6.25 प्रतिशत और जलकर पर 6 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। निगम का मानना है कि इस योजना से लोगों को आर्थिक राहत मिलने के साथ नगर निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    नगर निगम ने इस वर्ष अग्रिम संपत्तिकर और जलकर संग्रह के लिए 140 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि नागरिकों की अच्छी भागीदारी को देखते हुए उम्मीद है कि तय लक्ष्य से भी अधिक कर संग्रह हो सकता है। पिछले वित्तीय वर्ष में अग्रिम कर के रूप में लगभग 103 करोड़ रुपये जमा हुए थे जबकि इस बार उससे कहीं बेहतर परिणाम मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    करदाताओं को जागरूक करने के लिए नगर निगम ने पिछले कई दिनों से व्यापक प्रचार अभियान चलाया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सूचना प्रसारित की गई और नागरिकों से समय पर कर जमा करने की अपील की गई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भी लोगों से आग्रह किया कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना अपना कर जमा करें और उपलब्ध छूट का पूरा लाभ उठाएं।

    महापौर ने कहा कि समय पर कर जमा करना केवल नागरिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि शहर के विकास में सहभागिता का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। नगर निगम को मिलने वाला राजस्व सड़क निर्माण स्वच्छता पेयजल व्यवस्था उद्यानों के विकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में उपयोग किया जाता है। इसलिए नागरिकों का सहयोग शहर की प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है।

    नगर निगम ने करदाताओं से अपील की है कि यदि उन्होंने अभी तक अपना अग्रिम संपत्तिकर या जलकर जमा नहीं किया है तो आज ही भुगतान कर विशेष छूट का लाभ उठाएं। अंतिम तिथि के बाद यह छूट उपलब्ध नहीं होगी और सामान्य नियमों के अनुसार कर का भुगतान करना होगा।

  • E20 पेट्रोल पर बढ़ी बहस क्या इथेनॉल मिश्रित ईंधन से बढ़ रहा है वाहन मेंटेनेंस का खर्च जानिए पूरी सच्चाई

    E20 पेट्रोल पर बढ़ी बहस क्या इथेनॉल मिश्रित ईंधन से बढ़ रहा है वाहन मेंटेनेंस का खर्च जानिए पूरी सच्चाई


    मध्य प्रदेश । देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि देश में शत प्रतिशत इथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। वहीं बाजार में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके बीच अब वाहन चालकों और ऑटो मैकेनिकों के बीच इस ईंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    भोपाल के कई ऑटो मैकेनिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाली कुछ गाड़ियों में फ्यूल पंप जल्दी खराब होने और फ्यूल सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। उनका कहना है कि पहले जिन वाहनों में फ्यूल पंप वर्षों तक बिना किसी परेशानी के चलता था अब कुछ मामलों में उसे अपेक्षाकृत कम समय में बदलना पड़ रहा है। हालांकि यह अनुभव सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होता और यह वाहन की तकनीक तथा उसकी स्थिति पर भी निर्भर करता है।

    मैकेनिकों के अनुसार जिन वाहनों का लंबे समय तक उपयोग नहीं होता उनमें इथेनॉल मिश्रित ईंधन अधिक समय तक टैंक में रहने पर नमी खींच सकता है। इससे फ्यूल सिस्टम में गंदगी या जंग जैसी समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में फ्यूल फिल्टर और फ्यूल पंप पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है और इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देने का भी उद्देश्य है। लेकिन यह भी जरूरी है कि वाहन निर्माता कंपनियों के निर्देशों का पालन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित वाहन E20 ईंधन के अनुकूल है।

    ऑटो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहने वाला है तो समय समय पर उसे स्टार्ट करना चाहिए ताकि फ्यूल सिस्टम सक्रिय रहे। साथ ही निर्धारित समय पर सर्विस कराना फ्यूल फिल्टर बदलना और अच्छी गुणवत्ता का ईंधन भरवाना भी जरूरी है। इससे संभावित तकनीकी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    वाहन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी गाड़ी की यूजर मैनुअल में दी गई ईंधन संबंधी जानकारी को ध्यान से पढ़ें। यदि वाहन निर्माता ने E20 के उपयोग की अनुमति दी है तो उसका उपयोग सुरक्षित माना जाता है। वहीं पुराने मॉडल के वाहनों में किसी भी तरह की समस्या महसूस होने पर अधिकृत सर्विस सेंटर या विशेषज्ञ मैकेनिक से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

    इथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फिलहाल अलग अलग अनुभव सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि तकनीकी तथ्यों और वाहन निर्माता कंपनियों के दिशा निर्देशों के आधार पर ही निर्णय लिया जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण और वाहन की बेहतर कार्यक्षमता दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

  • ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला

    ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला


    इंदौर । इंदौर में एक मीडियाकर्मी के खिलाफ सात दिन के भीतर दूसरी एफआईआर दर्ज होने से मामला चर्चा में आ गया है। इस बार बाणगंगा थाना पुलिस ने एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक की शिकायत पर मीडियाकर्मी अनवर खान उसके भाई एक महिला साथी और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग धमकी देकर रुपए वसूलने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    बाणगंगा थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के अनुसार शिकायत एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक शिवलाल पुत्र दयाराम करबाडिया ने दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अनवर खान साधना शक्वातव सिद्दीकी खान और फारूख सिद्दीकी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार उनका कार्यालय और निवास पोलोग्राउंड क्षेत्र में स्थित है। आरोप है कि चारों आरोपी कई वर्षों से रिपोर्टिंग के सिलसिले में वहां आते जाते थे। इसी दौरान उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में कथित रूप से भ्रामक और दबाव बनाने वाली खबरें प्रकाशित करने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया।

    एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को रेप के झूठे मामले में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी देकर रुपए की मांग की। शिकायत के मुताबिक जून 2024 से दिसंबर 2025 के बीच करीब डेढ़ लाख रुपये विभिन्न किस्तों में वसूल किए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद भी लगातार और पैसे की मांग की जाती रही जिससे शिकायतकर्ता मानसिक रूप से परेशान हो गया।

    शिवलाल करबाडिया ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि अनवर खान के खिलाफ पहले से ही बाणगंगा थाने में ब्लैकमेलिंग का एक अन्य मामला दर्ज है। इसके बाद उन्होंने भी अपने साथ हुई कथित घटनाओं की शिकायत पुलिस से की और पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।

    पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। मामले से जुड़े दस्तावेज साक्ष्य और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सके और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

    नई दिल्ली । पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल की ओर से अदालत में दिए गए बयान और उसके बाद सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। इस बीच एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये के मानहानि दावे का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा, भ्रामक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है।

    इससे पहले अदालत में सुनवाई के दौरान सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी को 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इसी दौरान अदालत में यह मुद्दा भी उठा कि सिया गोयल की ओर से पैरवी कौन कर रहा है। सुनवाई के दौरान सिया गोयल ने अदालत को बताया कि उनकी ओर से अधिवक्ता विपुल दुशिंग पैरवी कर रहे हैं, जबकि आशुतोष श्रीवास्तव उनके वकील नहीं हैं।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब साहिल गोयल ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने आशुतोष श्रीवास्तव को कभी अपना वकील नियुक्त नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस विषय पर आपत्ति जताने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। साहिल ने कहा कि परिवार की ओर से विपुल दुशिंग को अधिवक्ता नियुक्त किया गया है और इस संबंध में अदालत में हलफनामा भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

    इन आरोपों के बाद एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने साहिल गोयल को कानूनी नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों से उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। नोटिस के माध्यम से आरोपों को तत्काल वापस लेने, सार्वजनिक माफी मांगने और भविष्य में इस प्रकार के बयान न देने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गई है। साथ ही 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी किया गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि नोटिस में दर्ज सभी आरोप एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव की ओर से किए गए दावे हैं। दूसरी ओर, इस कानूनी नोटिस पर साहिल गोयल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित जवाब पर सभी की नजर बनी हुई है।

    एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने अपने पक्ष में कहा कि उनकी कानूनी टीम ने सीधे सिया गोयल से संपर्क किया था और उनकी सहमति से वकालतनामा पर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका दावा है कि सिया गोयल बालिग हैं और अपने कानूनी निर्णय स्वयं लेने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने साहिल गोयल से नहीं बल्कि सीधे सिया गोयल से बातचीत की थी और उनके पक्ष में विधिवत वकालतनामा उपलब्ध है, जिसमें उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।

    दूसरी ओर, अदालत में दिए गए सिया गोयल के बयान और परिवार की ओर से पेश किए गए दावों ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है। अब यह मामला केवल हत्याकांड की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी प्रतिनिधित्व और कथित मानहानि के आरोप भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

    आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि साहिल गोयल इस कानूनी नोटिस का क्या जवाब देते हैं और अदालत के समक्ष दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में कौन से दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल, मामले से जुड़े सभी आरोप और प्रत्यारोप संबंधित पक्षों के दावे हैं, जिनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।