Author: bharati

  • वैवाहिक विवाद में हर अपमान आपराधिक क्रूरता नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी सीमा स्पष्ट की

    वैवाहिक विवाद में हर अपमान आपराधिक क्रूरता नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी सीमा स्पष्ट की

    नई दिल्ली । झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति के खिलाफ धारा 498A के तहत चल रही आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति उसके रंग, शर्मीले स्वभाव, समझ और बातचीत करने के तरीके को लेकर लगातार ताने देता था। अदालत ने माना कि इस तरह की टिप्पणियां अनुचित और दुख पहुंचाने वाली हो सकती हैं, लेकिन केवल इन्हीं आरोपों के आधार पर धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता का मामला नहीं बनता।

    मामला एक ऐसे दंपती से जुड़ा है, जिनकी शादी ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए। पत्नी का आरोप था कि पति उसके रंग को लेकर टिप्पणी करता था और उसके व्यक्तित्व, कम IQ तथा बातचीत करने के तरीके का मजाक उड़ाता था। विवाद बढ़ने के बाद पति ने उसे अलग रहने के लिए कहा।

    इसके बाद पत्नी पहले बेंगलुरु में अपनी छोटी बहन के पास रहने लगी और बाद में कोलकाता में अपनी बड़ी बहन के पास चली गई। इसी दौरान पति ने रांची की फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की। वैवाहिक संबंधों में बढ़ते विवाद के बीच पत्नी ने भी पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पत्नी ने धारा 498A के तहत क्रूरता का आरोप लगाने के अलावा करीब 35 लाख रुपये के स्त्रीधन को वापस नहीं करने की शिकायत भी की। उसका कहना था कि पति ने वैवाहिक जीवन जारी रखने में भी बाधा डाली। दूसरी ओर, पति ने अपने बचाव में पत्नी पर एक बीमारी से संबंधित आरोप लगाया और कहा कि विवाद के कारण परिस्थितियां खराब हुईं।

    11 जून 2024 को रांची की निचली अदालत ने शिकायत और उपलब्ध सामग्री के आधार पर पति को समन जारी किया। इसके बाद पति ने इस कार्रवाई को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी और आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने की मांग की।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने की। अदालत ने धारा 498A में परिभाषित क्रूरता की कानूनी कसौटी पर आरोपों को परखा। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान के तहत ऐसे जानबूझकर किए गए व्यवहार को देखा जाता है, जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती हो या उसके जीवन, शरीर अथवा स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता हो। इसके अलावा गैरकानूनी संपत्ति या दहेज की मांग से जुड़ा उत्पीड़न भी इस प्रावधान के दायरे में आता है।

    अदालत ने पाया कि शिकायत में पति की ओर से किसी गैरकानूनी संपत्ति या दहेज की मांग का आरोप नहीं था। साथ ही ऐसे व्यवहार का स्पष्ट आरोप भी नहीं था, जिससे पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर होने या गंभीर शारीरिक अथवा स्वास्थ्य संबंधी खतरे का सामना करना पड़ा हो।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के रंग, IQ और बातचीत करने की क्षमता पर टिप्पणी करना अपने आप में उचित व्यवहार नहीं माना जा सकता। हालांकि, केवल इन आरोपों को धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता मानने के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है।

    अदालत ने कहा कि आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने के बाद भी इस मामले में धारा 498A के तहत अपराध स्थापित नहीं होता। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत का समन आदेश और पति के खिलाफ संबंधित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

    फैसले का मुख्य संदेश यह है कि वैवाहिक जीवन में अपमानजनक व्यवहार और आपराधिक क्रूरता के बीच कानूनी अंतर होता है। हर वैवाहिक विवाद या ताने को स्वतः धारा 498A के अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पति-पत्नी के बीच अपमानजनक या असम्मानजनक व्यवहार उचित है। अदालत ने इस मामले में केवल यह तय किया कि उपलब्ध आरोप धारा 498A की कानूनी कसौटी पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अभद्र शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने प्रधानमंत्री की माता के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, उसने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रा और उसके माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया कि उससे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रा ने इसके बाद माफी भी मांगी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान की गई उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग भारत के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

    उन्होंने इस संदर्भ में अर्बन नक्सलियों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके हाथों देश के भविष्य को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री की टिप्पणी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के साथ राजनीतिक परिस्थितियों का भी संदर्भ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के भटकाव से बचाना आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके बीच जिम्मेदारी तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों की जनता ने हमेशा राजनीतिक घटनाक्रमों को समझते हुए अपना फैसला दिया है। इन इलाकों का राजनीतिक महत्व लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में रहा है और चुनावी परिस्थितियों में यहां के मतदाताओं के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में मुख्यमंत्री ने छात्रा की ओर से बाद में माफी मांगे जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्रा और उसके माता-पिता ने गलती स्वीकार की और इसके बाद माफी मांगी गई।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में एक ओर छात्रा की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके सामने सही दिशा और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार की जरूरत बताई।

    इस पूरे घटनाक्रम में छात्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी, छात्रा की ओर से माफी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया प्रमुख बिंदु रहे। साथ ही मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी के संदर्भ में भी अपनी बात रखी।

  • ‘टॉक्सिक’ के सेट पर मुश्किल मौसम में भी कियारा आडवाणी ने नहीं छोड़ा काम, हुमा कुरैशी ने की जमकर तारीफ

    ‘टॉक्सिक’ के सेट पर मुश्किल मौसम में भी कियारा आडवाणी ने नहीं छोड़ा काम, हुमा कुरैशी ने की जमकर तारीफ

    नई दिल्ली ।फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की रिलीज से पहले अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने शूटिंग से जुड़ा एक खास अनुभव साझा किया है। चेन्नई में आयोजित फिल्म के प्री-रिलीज कार्यक्रम के दौरान हुमा ने कियारा आडवाणी की तारीफ करते हुए बताया कि एक दृश्य की शूटिंग के समय तेज बारिश के बावजूद कियारा लगातार अपने काम में जुटी रही थीं।

    हुमा ने बताया कि जिस दृश्य की शूटिंग हो रही थी, उस दौरान मौसम काफी चुनौतीपूर्ण था। दोनों अभिनेत्रियों को बारिश के बीच लगातार शूटिंग करनी थी। इस परिस्थिति में हुमा को तेज सिरदर्द भी हो रहा था और कई बार उन्हें शूटिंग की कठिन परिस्थितियों को लेकर शिकायत करने का मन हुआ।

    हालांकि, कियारा को देखकर उनका नजरिया बदल गया। हुमा के अनुसार, उस समय कियारा करीब छह महीने की प्रेग्नेंट थीं और इसके बावजूद वह बारिश में बिना शिकायत किए अपने सीन कर रही थीं। हुमा ने कहा कि कियारा को उस स्थिति में काम करते देखकर उन्हें खुद भी हिम्मत मिली।

    हुमा ने कियारा के रवैये की तारीफ करते हुए उन्हें बारिश में चट्टान की तरह खड़ा बताया। उनके मुताबिक, कियारा जिस तरह मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने काम पर ध्यान दे रही थीं, वह उनके लिए बेहद प्रेरणादायक था। इसी वजह से हुमा को अपनी परेशानी को लेकर शिकायत करने का विचार भी कम महत्वपूर्ण लगा।

    यह किस्सा हुमा ने चेन्नई में आयोजित ‘टॉक्सिक’ के तमिल प्री-रिलीज कार्यक्रम में साझा किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके द्वारा सुनाया गया अनुभव फिल्म की कहानी से जुड़ा कोई स्पॉइलर नहीं है। कार्यक्रम में फिल्म की प्रमुख टीम मौजूद रही और रिलीज से पहले इसके प्रचार अभियान को आगे बढ़ाया गया।

    ‘टॉक्सिक’ का तमिल प्री-रिलीज कार्यक्रम 24 अगस्त को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में हुआ। यह आयोजन पहले 23 अगस्त को निर्धारित था, लेकिन बाद में इसे एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। कार्यक्रम में यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी सहित फिल्म से जुड़े प्रमुख कलाकार शामिल हुए।

    फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में यश मुख्य भूमिका में हैं। कियारा आडवाणी, नयनतारा, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी भी फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। फिल्म को लेकर रिलीज से पहले दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है।

    कियारा से जुड़ा हुमा का यह अनुभव फिल्म की शूटिंग के दौरान सामने आई कठिन परिस्थितियों को रेखांकित करता है। हालांकि यह घटना फिल्म की कहानी से अलग शूटिंग अनुभव से जुड़ी है, लेकिन हुमा की टिप्पणी ने कियारा के पेशेवर रवैये को चर्चा में ला दिया है।

    ‘टॉक्सिक’ दुनियाभर के सिनेमाघरों में 26 अगस्त को रिलीज होने वाली है। फिल्म की रिलीज से पहले कलाकारों की ओर से साझा किए जा रहे अनुभव इसके प्रचार अभियान का हिस्सा बने हुए हैं। अब दर्शकों की नजर फिल्म की कहानी, कलाकारों के प्रदर्शन और सिनेमाघरों में मिलने वाली प्रतिक्रिया पर है।

  • 3 महीने से पीछा कर रहा था मनचला, घर में घुसकर की गलत हरकत की कोशिश; 10वीं की छात्रा ने चप्पलों से कर दी पिटाई

    3 महीने से पीछा कर रहा था मनचला, घर में घुसकर की गलत हरकत की कोशिश; 10वीं की छात्रा ने चप्पलों से कर दी पिटाई

    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक 10वीं कक्षा की छात्रा ने हिम्मत दिखाते हुए उसका पीछा करने वाले युवक का डटकर सामना किया। आरोप है कि युवक पिछले करीब तीन महीने से छात्रा का पीछा कर उसे परेशान कर रहा था। रविवार देर शाम जब छात्रा घर पर अकेली थी तब आरोपी उसके घर में घुस गया और उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। छात्रा ने डरने के बजाय शोर मचाकर विरोध किया। उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और आरोपी को पकड़ लिया। इसके बाद छात्रा ने भी चप्पल उतारकर युवक की पिटाई कर दी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।

    जानकारी के मुताबिक 16 वर्षीय छात्रा कोंच कोतवाली क्षेत्र में अपने दादा के साथ रहती है। उसकी मां का कुछ साल पहले निधन हो चुका है जबकि पिता ने दूसरी शादी कर ली है और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। छात्रा की सौतेली मां दूसरे जिले में शिक्षिका हैं। छात्रा के मुताबिक उसे पढ़ाई के लिए रोजाना घर से करीब दो किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ता है। इसी दौरान भगतसिंहनगर निवासी 22 वर्षीय युवक नजर खान कथित तौर पर उसका पीछा करता था। छात्रा ने पुलिस को बताया कि आरोपी कई बार उससे बातचीत करने की कोशिश करता था और लगातार परेशान करता था। उसकी हरकतों से वह डरने लगी थी।

    रविवार शाम छात्रा के दादा किसी काम से घर से बाहर गए थे। छात्रा उस समय घर पर अकेली थी। आरोप है कि इसी दौरान युवक घर के अंदर घुस आया और छात्रा के साथ अभद्रता करने की कोशिश की। छात्रा ने उसका विरोध किया और जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर आसपास के लोग वहां पहुंच गए और आरोपी को पकड़ लिया। लोगों ने आरोपी की पिटाई की। इसके बाद छात्रा ने भी चप्पल से उसकी पिटाई कर दी। वीडियो में आरोपी कथित तौर पर माफी मांगते हुए दिखाई दे रहा है और दोबारा ऐसी हरकत नहीं करने की बात कह रहा है।

    मामले की सूचना छात्रा ने पुलिस को भी दी। डायल 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को अपने साथ ले गई। छात्रा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी पहले से छात्रा को किस तरह परेशान करता था और उसके खिलाफ पहले कोई शिकायत हुई थी या नहीं।

    कोंच कोतवाली प्रभारी निग्वेंद्र प्रताप के मुताबिक युवक को मौके से पकड़ा गया है। छात्रा की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस स्कूल जाने वाली छात्रा की सहपाठी छात्राओं से भी पूछताछ करेगी ताकि आरोपी की कथित गतिविधियों और पीछा करने की पूरी जानकारी सामने आ सके। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • ‘हैवान’ ट्रेलर में खूंखार अक्षय कुमार और अंधे सैफ अली खान की भिड़ंत ने बढ़ाया सस्पेंस, 18 साल बाद साथ आए सितारे

    ‘हैवान’ ट्रेलर में खूंखार अक्षय कुमार और अंधे सैफ अली खान की भिड़ंत ने बढ़ाया सस्पेंस, 18 साल बाद साथ आए सितारे

    नई दिल्ली ।अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी करीब 18 साल के लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर एक साथ दिखाई देने जा रही है। दोनों की आगामी फिल्म ‘हैवान’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और इसमें एक्शन, अपराध, सस्पेंस तथा सर्वाइवल ड्रामा का गहरा मिश्रण नजर आता है। ट्रेलर में दोनों कलाकार बिल्कुल अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं।

    फिल्म में अक्षय कुमार का किरदार बेहद खतरनाक और हिंसक नजर आता है। उनके हावभाव, संवाद और स्क्रीन प्रेजेंस से एक ऐसे व्यक्ति की छवि सामने आती है, जिसकी मानसिकता सामान्य अपराधी से अलग है। ट्रेलर में उनका किरदार लगातार खतरे और तनाव का माहौल पैदा करता दिखाई देता है।

    दूसरी ओर सैफ अली खान एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी आंखों की रोशनी नहीं है। इसके बावजूद उनका किरदार परिस्थितियों के सामने कमजोर पड़ता नजर नहीं आता। वह अपनी समझ, साहस और आसपास की चीजों को महसूस करने की क्षमता के सहारे मुश्किल हालात से निपटने की कोशिश करता दिखाई देता है।

    ट्रेलर में सैफ के किरदार का जेल से जुड़ा हिस्सा भी नजर आता है। कहानी में अक्षय और सैफ के किरदारों के बीच सिर्फ शारीरिक संघर्ष ही नहीं, बल्कि एक मानसिक मुकाबले की संभावना भी दिखाई देती है। इसी वजह से फिल्म की कहानी को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ी है।

    ‘हैवान’ की एक खास बात अक्षय कुमार और सैफ अली खान की लंबे समय बाद हुई वापसी है। दोनों कलाकार इससे पहले भी साथ काम कर चुके हैं, लेकिन करीब 18 साल बाद किसी फिल्म में उनकी जोड़ी देखने को मिलेगी। इस वजह से दोनों की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री भी फिल्म के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

    फिल्म में बोमन ईरानी, सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर, शारिब हाशमी और जिशु सेनगुप्ता भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। इसके अलावा मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल के स्पेशल कैमियो की चर्चा भी फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा रही है। हालांकि ट्रेलर में उनका कैमियो दर्शकों के लिए अलग आकर्षण का विषय बना हुआ है।

    ‘हैवान’ का निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। यह फिल्म उनकी 2016 में रिलीज हुई मलयालम क्राइम थ्रिलर ‘ओप्पम’ का आधिकारिक हिंदी रीमेक है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हिंदी संस्करण में कहानी को अक्षय कुमार और सैफ अली खान जैसे कलाकारों के साथ नए अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

    ट्रेलर से संकेत मिलता है कि फिल्म में अपराध और रहस्य के साथ-साथ मुख्य किरदारों के संघर्ष को भी प्रमुखता दी गई है। अक्षय का खतरनाक अवतार और सैफ का दृष्टिहीन किरदार कहानी के दो महत्वपूर्ण हिस्से दिखाई देते हैं।

    ‘हैवान’ में एक्शन के साथ तनाव और रहस्य को बनाए रखने की कोशिश की गई है। ट्रेलर में दिखाए गए दृश्य फिल्म की गंभीर और डार्क टोन को सामने रखते हैं। अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि फिल्म में दोनों किरदारों की टक्कर किस दिशा में जाती है और कहानी का अंतिम परिणाम क्या होता है।

    अक्षय कुमार और सैफ अली खान अभिनीत ‘हैवान’ 11 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। लंबे समय बाद दोनों सितारों की जोड़ी और प्रियदर्शन के निर्देशन में तैयार इस क्राइम थ्रिलर को लेकर फिल्म प्रेमियों की दिलचस्पी बनी हुई है।

  • हानिया आमिर का वायरल वीडियो देख सोशल मीडिया पर मचा हंगामा, बोलने के अंदाज पर यूजर्स ने लगाए नशे में होने के आरोप

    हानिया आमिर का वायरल वीडियो देख सोशल मीडिया पर मचा हंगामा, बोलने के अंदाज पर यूजर्स ने लगाए नशे में होने के आरोप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। सामने आए वीडियो में अभिनेत्री अपने हेयरस्टाइलिंग सेशन के दौरान टीम के साथ नजर आ रही हैं। इस दौरान उनके बोलने के अंदाज और हाव-भाव को देखकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके नशे में होने का दावा किया है। हालांकि, अब तक ऐसी किसी भी बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही अभिनेत्री या उनकी टीम की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।

    वायरल हो रही क्लिप में हानिया आमिर अपने बाल तैयार करवाती दिखाई देती हैं। वीडियो में एक महिला उन्हें विग पहनाने में मदद करती नजर आती है। इस दौरान अभिनेत्री अपनी टीम के साथ हंसी-मजाक करती हैं और विग को लेकर अपनी पसंद भी बताती दिखाई देती हैं। बातचीत के दौरान वह ‘हैप्पी हैलोवीन’ भी कहती हैं। वीडियो का यही हिस्सा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

    वीडियो सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने हानिया के बोलने के तरीके और उनके हाव-भाव को सामान्य से अलग बताते हुए सवाल उठाए। कुछ लोगों ने अनुमान लगाया कि उन्होंने शराब पी रखी थी, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने इससे भी आगे बढ़कर नशे से जुड़े अलग-अलग दावे किए। हालांकि, केवल किसी वीडियो में बोलने के अंदाज या व्यवहार के आधार पर किसी व्यक्ति के नशे में होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

    सोशल मीडिया पर हानिया आमिर को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। एक तरफ कुछ यूजर्स वीडियो को लेकर अभिनेत्री पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके प्रशंसक उनके समर्थन में सामने आए हैं। फैंस का कहना है कि हानिया वीडियो में अपनी टीम के साथ हंसी-मजाक करती दिखाई दे रही हैं और उनके इस व्यवहार को तुरंत नशे से जोड़ना उचित नहीं है।

    प्रशंसकों ने यह भी कहा कि किसी छोटे वीडियो क्लिप से पूरी परिस्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। वीडियो किस समय रिकॉर्ड किया गया और उस वक्त अभिनेत्री की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे दावों को तथ्य के रूप में देखना सही नहीं होगा।

    हानिया आमिर पाकिस्तान की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं और सोशल मीडिया पर उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। उनके वीडियो और तस्वीरें अक्सर इंटरनेट पर तेजी से वायरल होते हैं। यही वजह है कि इस बार भी कुछ सेकंड की क्लिप ने व्यापक चर्चा पैदा कर दी है।

    फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हानिया के नशे में होने का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। अभिनेत्री या उनकी टीम ने भी वायरल वीडियो को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही शराब या नशे से जुड़ी बातें फिलहाल महज अटकलें हैं। जब तक हानिया या उनकी टीम की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आता, तब तक वायरल क्लिप को लेकर किए जा रहे दावों को सावधानी के साथ देखना ही उचित होगा।

  • अखिलेश के बयान पर भड़के ओपी राजभर! जयंत चौधरी को लेकर कही बात पर पलटवार, अजय राय की मछली पार्टी पर भी उठाए सवाल

    अखिलेश के बयान पर भड़के ओपी राजभर! जयंत चौधरी को लेकर कही बात पर पलटवार, अजय राय की मछली पार्टी पर भी उठाए सवाल


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। मंगलवार को कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पर तीखे हमले किए। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजभर ने अखिलेश यादव के पुराने बयान को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें पढ़ने की जरूरत है। उन्होंने अखिलेश पर मानसिक संतुलन खोने तक का आरोप लगाया और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से जुड़े पुराने राजनीतिक रिश्तों का हवाला देते हुए जयंत चौधरी को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार किया।

    दरअसल अखिलेश यादव ने 17 अगस्त को गठबंधन की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी ने कुछ ऐसे गठबंधन भी किए जिनके लोग बाद में अलग हो गए। उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि जिनको चवन्नी से रुपया बनाया वे भी उन्हें छोड़कर चले गए। माना गया कि उनका इशारा राष्ट्रीय लोक दल और जयंत चौधरी की तरफ था। इसी बयान पर ओपी राजभर ने जवाब देते हुए कहा कि विरासत में सत्ता मिल सकती है लेकिन बुद्धि नहीं। उन्होंने कहा कि जिन चौधरी चरण सिंह को मुलायम सिंह यादव ने नेता बनाया था उनकी पार्टी को चवन्नी कहना उचित नहीं है।

    राजभर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या में हुए एक कार्यक्रम में मछली परोसे जाने के मुद्दे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में सनातन परंपरा को मानने वाले कई लोग मछली नहीं खाते हैं। ऐसे में अयोध्या में मछली परोसे जाने को लेकर उन्होंने सवाल उठाया और इसे सनातन का अपमान बताया। अजय राय की ओर से मछली नहीं खाने की बात कहे जाने पर राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उन्होंने नहीं खाई तो भी कार्यक्रम में मछली बनाई गई थी।

    दिलचस्प बात यह रही कि जब राजभर से पूछा गया कि क्या वह खुद मछली खाते हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि अगर मिल जाती है तो खा लेते हैं और नहीं मिलती तो नहीं खाते। इसके बाद जब उनसे पश्चिम बंगाल में भाजपा का भगवा पटका पहनकर मछली खाने से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सावन के दौरान उन्होंने ऐसा नहीं किया।

    वहीं आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सीट बंटवारे के सवाल पर ओपी राजभर ने कहा कि भाजपा के साथ सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ लोग लगातार खड़े हो रहे हैं। राजभर के इस बयान को यूपी में आने वाले चुनाव से पहले गठबंधन की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसी बीच बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी चुनावी राजनीति को लेकर बड़ा फैसला किया है। मायावती ने पंजाब विधानसभा चुनाव में BSP के अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति से पार्टी को सीट और वोट प्रतिशत दोनों में नुकसान हुआ है। इसके अलावा गठबंधन के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल भी प्रभावित होता है। पिछली बार BSP ने पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन किया था।

    लखनऊ स्थित BSP कार्यालय में पंजाब के पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद मायावती ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी पार्टी की तैयारियां तेज की जाएंगी। उम्मीदवारों के चयन में मेहनती और ईमानदार नेताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

    उधर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया एक एक पैसा सीधे मंदिर की तिजोरी तक पहुंचना चाहिए। मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच अदालत ने हाई पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पर गौर किया। इससे मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर निगरानी और सख्त होने के संकेत मिले हैं।

  • रक्षाबंधन ऐड की ट्रोलिंग पर कृति सेनन का जवाब, बोलीं संस्कृति और परंपरा कपड़ों की नेकलाइन से तय नहीं होती

    रक्षाबंधन ऐड की ट्रोलिंग पर कृति सेनन का जवाब, बोलीं संस्कृति और परंपरा कपड़ों की नेकलाइन से तय नहीं होती


    नई दिल्ली । 
    अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच चर्चा में हैं। एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन कैंपेन में उनके पहनावे को लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाए। आलोचकों ने विज्ञापन में उनके आधुनिक आउटफिट को पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में अनुपयुक्त बताया। अब कृति सेनन ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    कृति ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि त्योहारों की वास्तविक भावना किसी व्यक्ति के कपड़ों से नहीं, बल्कि परंपराओं के प्रति उसकी भावनाओं और उनके महत्व से जुड़ी होती है। उन्होंने रक्षाबंधन को सुरक्षा, स्नेह और आपसी जिम्मेदारी का प्रतीक बताते हुए अपने और अपनी बहन के रिश्ते का भी जिक्र किया।

    अभिनेत्री ने बताया कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सेहत, खुशी तथा लंबी उम्र की कामना करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए यह भावना उनके पालतू कुत्तों तक भी जुड़ी हुई है, क्योंकि वे भी परिवार का हिस्सा हैं। इस तरह उन्होंने रक्षाबंधन के रिश्ते को केवल भाई-बहन तक सीमित न मानने की बात रखी।

    कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह बताना बंद होना चाहिए कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। उनके मुताबिक समय के साथ पारंपरिक और एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है, लेकिन आज भी किसी महिला के संस्कृति के प्रति सम्मान को उसके कपड़ों के आधार पर आंकने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृति और परंपरा व्यक्ति की भावनाओं और मूल्यों में होती है, केवल कपड़ों की नेकलाइन में नहीं। कृति की इस प्रतिक्रिया को उनके विज्ञापन को लेकर चल रही सोशल मीडिया बहस का सीधा जवाब माना जा रहा है।

    विवाद की शुरुआत उस रक्षाबंधन कैंपेन के सामने आने के बाद हुई, जिसमें कृति ऑफ-व्हाइट ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट वाले आधुनिक-परंपरागत लुक में दिखाई दी थीं। विज्ञापन में रक्षाबंधन के उत्सव को पालतू जानवरों के साथ भी जोड़ा गया है। कैंपेन में कृति पहले अपने भाई के साथ त्योहार मनाती हैं और बाद में अपने पालतू कुत्ते को राखी बांधती नजर आती हैं।

    विज्ञापन जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कृति के पहनावे को लेकर आपत्ति जताई। कुछ टिप्पणियों में उनके ब्लाउज की तुलना ब्रा या बिकिनी से की गई और रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के लिए इस तरह के परिधान को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद विज्ञापन के उद्देश्य के साथ-साथ अभिनेत्री के लुक को लेकर भी चर्चा तेज हो गई।

    इस मामले में अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने महिलाओं के पास उपलब्ध अलग-अलग तरह के परिधानों का उल्लेख करते हुए कृति के विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए लुक पर सवाल उठाया था। हालांकि कृति सेनन ने कंगना की प्रतिक्रिया का नाम लेकर कोई जवाब नहीं दिया है।

    पूरे विवाद के बीच कृति ने अपनी बात महिलाओं की पसंद, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और त्योहार की भावना पर केंद्रित रखी है। उनका कहना है कि किसी महिला के पहनावे को उसकी संस्कृति के प्रति सम्मान का अंतिम पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। विज्ञापन को लेकर उठी बहस ने रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहारों की आधुनिक प्रस्तुति और बदलते फैशन को लेकर चर्चा को भी सामने ला दिया है।

  • स्कूल ड्रेस कोड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त! हिजाब की अलग अनुमति से संस्थागत अनुशासन प्रभावित होने की बात

    स्कूल ड्रेस कोड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त! हिजाब की अलग अनुमति से संस्थागत अनुशासन प्रभावित होने की बात

    नई दिल्ली । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में ड्रेस कोड और धार्मिक पहनावे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि स्कूल की तय यूनिफॉर्म का पालन सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से जरूरी है। कोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि एक शिक्षण संस्थान में समान यूनिफॉर्म का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच बराबरी की भावना पैदा करना और धार्मिक या सामाजिक भेदभाव से मुक्त वातावरण बनाए रखना है। कोर्ट के मुताबिक किसी एक विद्यार्थी को अलग ड्रेस की अनुमति देने से संस्थान के अनुशासन और ड्रेस कोड से जुड़े अधिकार पर असर पड़ सकता है।

    यह मामला प्रयागराज के एक निजी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा से जुड़ा था। छात्रा ने अपनी मां के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उसका कहना था कि वह कक्षा 6 से लेकर 10वीं तक स्कूल में हिजाब पहनकर पढ़ती रही है और उस दौरान स्कूल की तरफ से कोई आपत्ति नहीं जताई गई। छात्रा ने पुराने पहचान पत्र और स्कूल की तस्वीरों को भी अपने पक्ष में पेश किया। 11वीं कक्षा में पहुंचने के बाद जब उसे स्कूल के ड्रेस कोड के अनुसार हिजाब पहनने की अनुमति नहीं मिली तो उसने अधिकारियों से शिकायत की और बाद में हाईकोर्ट का रुख किया।

    याचिका में छात्रा की तरफ से तर्क दिया गया कि हिजाब पहनना उसकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत पसंद से जुड़ा हुआ है। इसलिए उसे इसे पहनने से रोकना उसके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है। छात्रा की ओर से निजता धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे अधिकारों का भी हवाला दिया गया। दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन का कहना था कि संस्थान में सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू है और किसी एक विद्यार्थी को अलग छूट देने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि स्कूल का ड्रेस कोड सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होता है और उसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता तो ड्रेस तय करने का अधिकार संस्थान के पास है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर स्कूल ने पहले किसी समय हेडस्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति दी थी तो इससे यह स्थायी अधिकार नहीं बन जाता कि भविष्य में भी वही छूट जारी रखनी पड़े।

    अदालत ने अपने फैसले में स्कूल यूनिफॉर्म के व्यापक उद्देश्य पर भी जोर दिया। कोर्ट के अनुसार समान पोशाक विद्यार्थियों के बीच समानता की भावना मजबूत करती है और स्कूल की एक अलग पहचान बनाती है। यदि प्रत्येक छात्र अपनी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर यूनिफॉर्म में बदलाव की मांग करने लगे तो संस्थान के लिए अपने ड्रेस कोड और अनुशासन को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

    कोर्ट ने हिजाब को लेकर पहले दिए गए कुछ न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इस मामले में छात्रा की धार्मिक आस्था पर रोक लगाने का सवाल नहीं है बल्कि स्कूल के संस्थागत नियमों का पालन करने का मुद्दा है। अदालत ने यह भी कहा कि हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा साबित करने के लिए याचिका में पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।

    हिजाब से जुड़े विवाद का देश में पहले भी कानूनी स्तर पर असर देखने को मिला है। कर्नाटक में 2022 में स्कूल और कॉलेजों के ड्रेस कोड को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा जहां दो न्यायाधीशों की अलग अलग राय सामने आई थी। इसके बाद मामला बड़ी पीठ के सामने भेजा गया था और इस मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा फैसले में फिलहाल स्कूल के समान ड्रेस कोड और संस्थागत अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है। फैसले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थानों के अनुशासन के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाना चाहिए।

  • युवाओं से लेकर विकास तक बड़े फैसले की तैयारी! UP कैबिनेट में 19 से ज्यादा प्रस्ताव, इलेक्ट्रिक बसों और एक्सप्रेसवे पर भी बड़ा ऐलान

    युवाओं से लेकर विकास तक बड़े फैसले की तैयारी! UP कैबिनेट में 19 से ज्यादा प्रस्ताव, इलेक्ट्रिक बसों और एक्सप्रेसवे पर भी बड़ा ऐलान


    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगार और प्रदेश के विकास को गति देने के लिए योगी सरकार कई बड़े फैसले लेने की तैयारी में है। मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में 19 से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की संभावना है। इनमें युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजना के साथ नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट शामिल हैं। सरकार की कोशिश है कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं और प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाए।

    कैबिनेट में सरदार वल्लभ भाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक विकास योजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस योजना के जरिए प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा परिवहन विभाग के बेड़े को मजबूत करने के लिए करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ प्रदूषण कम करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

    बैठक में जन सेवा केंद्र 4.0 परियोजना को भी मंजूरी मिल सकती है। जन सेवा केंद्रों के जरिए लोगों को आय प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र सहित कई जरूरी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है। जन सेवा केंद्र 3 की अवधि जून 2026 में समाप्त हो चुकी थी। अब नई व्यवस्था के तहत जन सेवा केंद्र 4.0 शुरू करने की तैयारी है।

    उत्तर प्रदेश पुलिस को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए हैं। जिला पुलिस इकाइयों के लिए पुराने और स्क्रैप वाहनों की जगह 1323 नए वाहन खरीदे जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा पुलिस में कुशल खिलाड़ियों की भर्ती और बिना पारी पदोन्नति से जुड़े नियमों में संशोधन पर भी फैसला हो सकता है।

    औद्योगिक विकास के लिहाज से भी कैबिनेट बैठक काफी अहम मानी जा रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने के लिए 27225.33 लाख रुपए के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना और गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से हरिद्वार तक विस्तार देने से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाएंगे। इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    निजी अस्पतालों में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी सहायता नीति और विदेशी निवेश से जुड़े प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने रखे जाएंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना के दिशा निर्देशों को मंजूरी मिलने की संभावना है। साक्षर भारत योजना से जुड़े कर्मचारियों की बकाया देनदारी के भुगतान और मैनपुरी में पर्यटन विकास के लिए भूमि हस्तांतरण जैसे प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं।

    इन फैसलों के बीच युवाओं पर सरकार का विशेष फोकस भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले Gen-Z मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार की सक्रियता बढ़ी है। कैबिनेट में प्रस्तावित फैसले अगर मंजूर होते हैं तो रोजगार पर्यटन परिवहन औद्योगिक विकास और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में प्रदेश को कई नई सौगातें मिल सकती हैं।