Author: bharati

  • ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला

    ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला


    इंदौर । इंदौर में एक मीडियाकर्मी के खिलाफ सात दिन के भीतर दूसरी एफआईआर दर्ज होने से मामला चर्चा में आ गया है। इस बार बाणगंगा थाना पुलिस ने एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक की शिकायत पर मीडियाकर्मी अनवर खान उसके भाई एक महिला साथी और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग धमकी देकर रुपए वसूलने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    बाणगंगा थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के अनुसार शिकायत एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक शिवलाल पुत्र दयाराम करबाडिया ने दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अनवर खान साधना शक्वातव सिद्दीकी खान और फारूख सिद्दीकी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार उनका कार्यालय और निवास पोलोग्राउंड क्षेत्र में स्थित है। आरोप है कि चारों आरोपी कई वर्षों से रिपोर्टिंग के सिलसिले में वहां आते जाते थे। इसी दौरान उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में कथित रूप से भ्रामक और दबाव बनाने वाली खबरें प्रकाशित करने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया।

    एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को रेप के झूठे मामले में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी देकर रुपए की मांग की। शिकायत के मुताबिक जून 2024 से दिसंबर 2025 के बीच करीब डेढ़ लाख रुपये विभिन्न किस्तों में वसूल किए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद भी लगातार और पैसे की मांग की जाती रही जिससे शिकायतकर्ता मानसिक रूप से परेशान हो गया।

    शिवलाल करबाडिया ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि अनवर खान के खिलाफ पहले से ही बाणगंगा थाने में ब्लैकमेलिंग का एक अन्य मामला दर्ज है। इसके बाद उन्होंने भी अपने साथ हुई कथित घटनाओं की शिकायत पुलिस से की और पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।

    पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। मामले से जुड़े दस्तावेज साक्ष्य और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सके और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया कानूनी विवाद, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस

    नई दिल्ली । पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल की ओर से अदालत में दिए गए बयान और उसके बाद सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। इस बीच एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये के मानहानि दावे का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा, भ्रामक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है।

    इससे पहले अदालत में सुनवाई के दौरान सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी को 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इसी दौरान अदालत में यह मुद्दा भी उठा कि सिया गोयल की ओर से पैरवी कौन कर रहा है। सुनवाई के दौरान सिया गोयल ने अदालत को बताया कि उनकी ओर से अधिवक्ता विपुल दुशिंग पैरवी कर रहे हैं, जबकि आशुतोष श्रीवास्तव उनके वकील नहीं हैं।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब साहिल गोयल ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने आशुतोष श्रीवास्तव को कभी अपना वकील नियुक्त नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस विषय पर आपत्ति जताने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। साहिल ने कहा कि परिवार की ओर से विपुल दुशिंग को अधिवक्ता नियुक्त किया गया है और इस संबंध में अदालत में हलफनामा भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

    इन आरोपों के बाद एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने साहिल गोयल को कानूनी नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों से उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। नोटिस के माध्यम से आरोपों को तत्काल वापस लेने, सार्वजनिक माफी मांगने और भविष्य में इस प्रकार के बयान न देने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गई है। साथ ही 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी किया गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि नोटिस में दर्ज सभी आरोप एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव की ओर से किए गए दावे हैं। दूसरी ओर, इस कानूनी नोटिस पर साहिल गोयल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित जवाब पर सभी की नजर बनी हुई है।

    एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने अपने पक्ष में कहा कि उनकी कानूनी टीम ने सीधे सिया गोयल से संपर्क किया था और उनकी सहमति से वकालतनामा पर हस्ताक्षर कराए गए थे। उनका दावा है कि सिया गोयल बालिग हैं और अपने कानूनी निर्णय स्वयं लेने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने साहिल गोयल से नहीं बल्कि सीधे सिया गोयल से बातचीत की थी और उनके पक्ष में विधिवत वकालतनामा उपलब्ध है, जिसमें उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।

    दूसरी ओर, अदालत में दिए गए सिया गोयल के बयान और परिवार की ओर से पेश किए गए दावों ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है। अब यह मामला केवल हत्याकांड की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी प्रतिनिधित्व और कथित मानहानि के आरोप भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं।

    आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि साहिल गोयल इस कानूनी नोटिस का क्या जवाब देते हैं और अदालत के समक्ष दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में कौन से दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल, मामले से जुड़े सभी आरोप और प्रत्यारोप संबंधित पक्षों के दावे हैं, जिनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • तीस्ता नदी परियोजना पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की आपत्तियों के बीच बोला- बांग्लादेश के साथ सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं

    तीस्ता नदी परियोजना पर चीन का दोटूक संदेश, भारत की आपत्तियों के बीच बोला- बांग्लादेश के साथ सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं

    नई दिल्ली । बांग्लादेश की तीस्ता नदी से जुड़ी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना को लेकर भारत की रणनीतिक चिंताएं एक बार फिर चर्चा में हैं। चीन और बांग्लादेश के बीच इस परियोजना पर बढ़ते सहयोग ने भारत की सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे सामान्य तौर पर ‘चिकन-नेक’ कहा जाता है, के आसपास संभावित चीनी प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस बीच चीन ने स्पष्ट किया है कि उसका बांग्लादेश के साथ सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसे बाहरी प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए।

    चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग और ढाका के बीच सहयोग पूरी तरह विकास आधारित है। चीन का कहना है कि दोनों देश अपनी विकास रणनीतियों में बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं और आर्थिक सहयोग, व्यापार, जल संरक्षण, बुनियादी ढांचा तथा आजीविका जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाया जाएगा। चीन ने यह भी दोहराया कि उसके सभी सहयोगात्मक प्रयास किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं हैं।

    दूसरी ओर भारत इस परियोजना को केवल जल प्रबंधन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक परिप्रेक्ष्य में देख रहा है। भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि तीस्ता नदी का क्षेत्र देश के पूर्वोत्तर हिस्से से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील इलाका है। यदि इस क्षेत्र में चीन की तकनीकी, वित्तीय या बुनियादी ढांचा संबंधी उपस्थिति बढ़ती है तो इसका असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर पड़ सकता है।

    तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर पहले सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरती है तथा इसके बाद बांग्लादेश में प्रवेश करती है। नदी का भौगोलिक मार्ग भारत और बांग्लादेश के बीच साझा जल संसाधनों के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण इस क्षेत्र में किसी बाहरी शक्ति की सक्रिय भूमिका पर भारत लगातार सतर्क नजर बनाए हुए है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण एशिया में अपनी आर्थिक और आधारभूत संरचना संबंधी परियोजनाओं के माध्यम से प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। बांग्लादेश के साथ परिवहन, ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क और जल संसाधन जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग भी उसी व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब तीस्ता परियोजना के जरिए जल संसाधन प्रबंधन में भी चीन की भागीदारी भारत के लिए नई रणनीतिक चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा भी लंबे समय से लंबित है। ऐसे में इस नदी से जुड़ी किसी भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय परियोजना पर भारत की विशेष नजर बनी रहती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नदी प्रबंधन से जुड़े ढांचागत विकास का प्रभाव केवल जल संसाधनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क, लॉजिस्टिक्स और सामरिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

    चीन की ओर से दिए गए ताजा बयान ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि उसका उद्देश्य केवल विकास सहयोग को आगे बढ़ाना है, लेकिन भारत के लिए इस परियोजना का महत्व कहीं अधिक व्यापक है। आने वाले समय में यह विषय भारत, बांग्लादेश और चीन के बीच कूटनीतिक संवाद तथा क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है। भारत की प्राथमिकता इस पूरे घटनाक्रम पर सतत निगरानी रखते हुए अपनी सुरक्षा, सीमाई हितों और पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंधों को बनाए रखने की होगी।

  • उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए ठोकी दावेदारी

    उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र में बड़ा राजनीतिक झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल, विधान परिषद उपसभापति पद के लिए ठोकी दावेदारी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया है। इस राजनीतिक बदलाव को शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि सचिन अहीर को लंबे समय से आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनके इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    शिंदे गुट में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि उन्हें नई राजनीतिक जिम्मेदारी देने की तैयारी पहले से ही की जा चुकी थी। दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी ने इस पद के लिए जे. एम. अभ्यंकर को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में उपसभापति का चुनाव अब राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

    सचिन अहीर का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े और फिर अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गए। वर्ष 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ बने रहने का फैसला किया था। हालांकि अब उनका शिंदे गुट में जाना महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान सचिन अहीर का शिवसेना में शामिल होना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना गया था। विशेष रूप से मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट पर आदित्य ठाकरे के चुनाव अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा में रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और स्थानीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ ने उस समय पार्टी को लाभ पहुंचाया था। ऐसे नेता का अब प्रतिद्वंद्वी खेमे में जाना उद्धव ठाकरे के लिए संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    हाल के महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में दल-बदल की चर्चाएं लगातार तेज रही हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के नए राजनीतिक विकल्प तलाशने और खेमे बदलने की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसी बीच सचिन अहीर का फैसला इस बहस को और अधिक बल देता है कि राज्य की राजनीति अभी भी पुनर्संतुलन के दौर से गुजर रही है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल विधान परिषद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुंबई और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। खासकर शिवसेना (यूबीटी) के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। वहीं शिंदे गुट इसे अपने राजनीतिक विस्तार और संगठनात्मक मजबूती के रूप में देख रहा है।

    आने वाले दिनों में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद का चुनाव और उसके परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं और विभिन्न दल भविष्य की रणनीति को लेकर सक्रिय नजर आ रहे

  • किराये के बहाने जुटाई संपत्ति की जानकारी, फर्जी पहचान से 18 करोड़ का लोन; दिल्ली का चौंकाने वाला बैंक फ्रॉड उजागर

    किराये के बहाने जुटाई संपत्ति की जानकारी, फर्जी पहचान से 18 करोड़ का लोन; दिल्ली का चौंकाने वाला बैंक फ्रॉड उजागर

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के विवेक विहार इलाके से सामने आए कथित बैंक ऋण घोटाले ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की सुरक्षा और किरायेदारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में आरोप है कि किराए पर रहने आए दो व्यक्तियों ने मकान मालकिन की संपत्ति और पहचान से जुड़े दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 18 करोड़ रुपये का ऋण हासिल कर लिया। वर्षों बाद जब बैंक से जुड़े कानूनी नोटिस पहुंचे, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ और जांच एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर पड़ताल शुरू की।

    पुलिस के अनुसार यह मामला वर्ष 2012 से जुड़ा है। विवेक विहार निवासी ऊषा रानी ने अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से अपने दो फ्लैट किराए पर दिए थे। किराएदारों ने स्वयं को कारोबारी बताकर विधिवत किरायेदारी समझौता किया और कुछ समय तक सामान्य रूप से वहां रहे। इसके बाद दोनों फ्लैट खाली कर चले गए। मकान मालकिन ने भी इसे सामान्य घटना मानते हुए आगे कोई संदेह नहीं जताया।

    करीब एक वर्ष बाद स्थिति तब बदली जब बैंक ऋण से जुड़े मामले में कानूनी प्रतिनिधि उनके घर पहुंचे और बकाया ऋण के संबंध में जानकारी मांगी। इस सूचना से हैरान मकान मालकिन ने पुलिस से संपर्क किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उनके नाम पर केवल एक नहीं, बल्कि लगभग 18 करोड़ रुपये के कई ऋण दर्ज हैं, जिनके लिए उनकी संपत्तियों को आधार बनाया गया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि ऋण प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर उन्हें बैंक में प्रस्तुत किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार मकान मालकिन के परिवार से संबंधित पहचान दस्तावेजों की प्रतियां इस्तेमाल की गईं, जबकि हस्ताक्षर वास्तविक नहीं थे। इसके अलावा एक महिला द्वारा स्वयं को संपत्ति की वास्तविक मालिक बताकर उप-पंजीयक कार्यालय में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की भी जानकारी सामने आई, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो गई।

    जांच में यह भी आरोप सामने आया कि ऋण के माध्यम से प्राप्त धनराशि को कई अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिए स्थानांतरित किया गया, ताकि लेनदेन की वास्तविक श्रृंखला को छिपाया जा सके। वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद विभिन्न एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल शुरू की। मामले में पुलिस के साथ अन्य जांच एजेंसियां भी शामिल हुईं और वित्तीय लेनदेन के कई पहलुओं की जांच की गई।

    जांच के दौरान एक आरोपी की गिरफ्तारी भी की गई। पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा और उसके खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में और किन लोगों की भूमिका रही तथा बैंकिंग और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में कहां-कहां चूक हुई।

    यह मामला संपत्ति मालिकों के लिए भी महत्वपूर्ण सीख माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किरायेदारी के दौरान पहचान और संपत्ति संबंधी दस्तावेज साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है। किसी भी प्रकार के दस्तावेज देने से पहले उनकी आवश्यकता, उपयोग और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही समय-समय पर संपत्ति के रिकॉर्ड, बैंकिंग गतिविधियों और आधिकारिक दस्तावेजों की निगरानी करते रहना ऐसे मामलों से बचाव का महत्वपूर्ण उपाय माना

  • धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा

    धर्म परिवर्तन के बाद SC/ST एक्ट की सुरक्षा नहीं मिलेगी, बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला; IPC के तहत मुकदमा जारी रहेगा


    नई दिल्ली ।
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की व्याख्या करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेता है, तो वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन का प्रभाव भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत दर्ज आपराधिक मामलों पर नहीं पड़ेगा और ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

    यह मामला एक पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें महिला ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। शिकायत में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं भी शामिल की गई थीं। विवाद की पृष्ठभूमि में परिवार के भीतर साथ रहने के दौरान स्वच्छता, पानी के उपयोग और घरेलू व्यवस्थाओं को लेकर मतभेद सामने आए थे।

    सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि विवाह के समय महिला ने अपने पति के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। उसने अपना नाम भी बदल लिया था और लंबे समय से मुस्लिम धर्म का पालन कर रही थी। इसी आधार पर अदालत के समक्ष यह कानूनी प्रश्न उठा कि क्या धर्म परिवर्तन के बाद भी वह एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत संरक्षण की पात्र मानी जा सकती है।

    आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि यह मूल रूप से पारिवारिक और संपत्ति से जुड़ा विवाद है तथा अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते। वहीं सरकारी पक्ष ने भी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति को एससी/एसटी अधिनियम के तहत मिलने वाला संरक्षण उपलब्ध नहीं रहता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।

    न्यायमूर्ति वृषाली वी. जोशी की एकल पीठ ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधान लागू नहीं होंगे। इस आधार पर अदालत ने आरोपियों को इस विशेष अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों से राहत प्रदान की। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि शिकायत में भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए अन्य आरोप प्रथम दृष्टया विचारणीय हैं और उनकी सुनवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी।

    अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि विशेष कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकार और संरक्षण संबंधित वैधानिक प्रावधानों तथा न्यायालयों की स्थापित व्याख्याओं के अनुरूप ही निर्धारित किए जाते हैं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि यदि किसी मामले में अन्य आपराधिक आरोप बनते हैं, तो केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर उन मामलों की सुनवाई समाप्त नहीं हो जाती।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दायरे और धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनी प्रभावों को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित कानूनों की व्याख्या और न्यायिक दृष्टिकोण को समझने में सहायता मिलेगी, जबकि प्रत्येक मामले का अंतिम निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

  • इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती

    इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी थाने से अवैध शराब मामले में गिरफ्तार आरोपी साबिर उर्फ गज्जू हथकड़ी से हाथ निकालकर फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी की तलाश में कई टीमें रवाना कर दी गईं।

    इंदौर के द्वारकापुरी थाना परिसर से मंगलवार को पुलिस की हिरासत में मौजूद एक आरोपी के फरार होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार साबिर उर्फ गज्जू संतरी को चकमा देकर हथकड़ी से अपना हाथ निकालने में सफल रहा और मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल अलग अलग टीमों का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार साबिर उर्फ गज्जू निवासी अहीरखेड़ी को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया था। वह अवैध शराब के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे द्वारकापुरी थाने लाया गया जहां सुरक्षा के तहत हथकड़ी लगाकर बैठाया गया था। मंगलवार को मौका मिलते ही उसने धीरे धीरे हथकड़ी से अपना हाथ निकाल लिया और पुलिसकर्मियों को भनक लगे बिना वहां से भाग निकला।

    जानकारी के मुताबिक जिस स्थान पर साबिर को बैठाया गया था वहीं पास में पुलिस की गिरफ्त में मौजूद ड्रग्स तस्कर चेतन नाथ भी बैठा हुआ था। चेतन नाथ को सोमवार को ही आठ किलो गांजा लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन और 22 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का फायदा उठाकर साबिर फरार हो गया।

    घटना सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल पूरे मामले की जानकारी ली और आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीमों को रवाना किया। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में दबिश दे रही है और आरोपी के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार साबिर कोई नया अपराधी नहीं है। करीब दो महीने पहले उसके साथी अरुण को अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय भी साबिर उसके साथ मौजूद था लेकिन पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी और सोमवार रात उसे पकड़ने में सफलता मिली थी लेकिन अगले ही दिन वह फिर पुलिस हिरासत से भाग निकला।

    सूत्रों के मुताबिक साबिर के खिलाफ अवैध शराब की तस्करी मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों सहित तीन से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के साथ साथ यह भी जांच कर रही है कि थाने से फरार होने में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

  • सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क

    सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क


    इंदौर । इंदौर में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक बड़े नेटवर्क के अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार आरोपी चेतन नाथ से पूछताछ में सामने आया है कि नशे का पूरा कारोबार सोशल मीडिया कॉलिंग के जरिए संचालित किया जाता था। आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में एक भी सेव संपर्क नंबर नहीं मिला जिससे पुलिस को अंदेशा है कि गिरोह पहचान छिपाने के लिए आधुनिक डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। फिलहाल अदालत ने आरोपी को दो जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।

    द्वारकापुरी थाना पुलिस के अनुसार चेतन नाथ की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि ड्रग्स की खरीद और सप्लाई के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेज की बजाय सोशल मीडिया कॉलिंग का उपयोग किया जाता था ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल का तकनीकी विश्लेषण कर उसके डिजिटल नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस ने बताया कि जब टीम चेतन नाथ को पकड़ने उसके ठिकाने पर पहुंची थी तब वहां उसका एक साथी भी मौजूद था। पुलिस को देखते ही वह मौके से फरार हो गया। पूछताछ में पता चला कि दोनों पहले जेल में साथ रह चुके हैं और लंबे समय से संपर्क में थे। अब पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और उसके संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है।

    पूछताछ के दौरान चेतन नाथ ने यह भी दावा किया कि उसके पास से बरामद 19 लाख रुपये नकद उसके एक साथी की जमानत के लिए जुटाए गए थे। हालांकि पुलिस इस दावे को पूरी तरह सत्यापित करने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इतनी बड़ी नकदी नशे के कारोबार से अर्जित की गई हो सकती है और इसके वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 8 किलो गांजा और पिस्टल के 22 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद कारतूसों के स्रोत और उनके संभावित इस्तेमाल को लेकर भी जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी के पास हथियारों से जुड़ा कोई नेटवर्क भी था या नहीं।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ दिन पहले पुलिस ने लकी नाथ नामक आरोपी को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया था। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बैक ट्रैकिंग करते हुए चेतन नाथ तक पहुंच बनाई। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं हो सकता और इसके तार दूसरे शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से डिजिटल साक्ष्यों बैंकिंग लेनदेन और कॉलिंग पैटर्न की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।

  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • आलू डालने से बढ़ेगा पुदीना या सिर्फ सोशल मीडिया का दावा? जानिए वायरल ट्रिक कितनी कारगर और पौधे को हरा-भरा रखने के सही उपाय

    आलू डालने से बढ़ेगा पुदीना या सिर्फ सोशल मीडिया का दावा? जानिए वायरल ट्रिक कितनी कारगर और पौधे को हरा-भरा रखने के सही उपाय

    नई दिल्ली । घर में ताजा और हरा-भरा पुदीना उगाना आजकल गार्डनिंग के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी ट्रिक तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि गमले की मिट्टी में आलू का टुकड़ा दबाने से पुदीने की ग्रोथ तेजी से होती है और पौधा अधिक घना बनता है। हालांकि बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इसे केवल एक घरेलू प्रयोग के रूप में देखा जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी पौधे की अच्छी वृद्धि का आधार उसकी मिट्टी, पोषण, नमी और नियमित देखभाल होती है। पुदीना विशेष रूप से ऐसी मिट्टी में बेहतर बढ़ता है जो भुरभुरी, उपजाऊ और जैविक पदार्थों से भरपूर हो। साथ ही मिट्टी में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना भी आवश्यक है ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो और जड़ों को नुकसान न पहुंचे।

    वायरल वीडियो में यह दावा किया जाता है कि मिट्टी में रखा गया आलू धीरे-धीरे गलकर स्टार्च और कुछ जैविक तत्व छोड़ता है, जिससे पौधे को अतिरिक्त पोषण मिलता है। हालांकि बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया का पुदीने की वृद्धि पर कितना प्रभाव पड़ता है, इसे लेकर कोई प्रमाणित अध्ययन उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग मौसम, मिट्टी और वातावरण के अनुसार इसके परिणाम भी भिन्न हो सकते हैं। इसलिए केवल इस उपाय पर निर्भर रहना उचित नहीं माना जाता।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि पुदीने को घना और स्वस्थ बनाना है तो नियमित सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण है। मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। अत्यधिक पानी से जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है, जिससे पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है। इसी प्रकार हर 20 से 25 दिनों के अंतराल पर वर्मी कम्पोस्ट या अन्य जैविक खाद देने से पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहते हैं।

    पुदीने की नियमित कटाई भी उसकी अच्छी बढ़त का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि समय-समय पर ऊपरी टहनियों और पत्तियों की छंटाई करने से नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और पौधा अधिक घना दिखाई देता है। यदि पौधा पुराना हो जाए तो उसकी स्वस्थ कटिंग लेकर नया पौधा तैयार करना भी एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

    धूप का संतुलन भी पुदीने की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधे को ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां सुबह की हल्की धूप मिले, जबकि दोपहर की तेज धूप से बचाव हो। इससे पत्तियां ताजा बनी रहती हैं और पौधे की वृद्धि लगातार होती रहती है। उचित प्रकाश और संतुलित नमी के साथ पुदीना लंबे समय तक स्वस्थ बना रह सकता है।

    बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली कई गार्डनिंग ट्रिक्स रोचक जरूर होती हैं, लेकिन सभी उपाय हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं होते। इसलिए किसी भी वायरल दावे को अपनाने से पहले उसकी विश्वसनीयता और व्यावहारिक उपयोगिता को समझना आवश्यक है। यदि उद्देश्य लंबे समय तक हरा-भरा और घना पुदीना उगाना है, तो सही मिट्टी, जैविक खाद, संतुलित सिंचाई, नियमित छंटाई और उचित धूप जैसी बुनियादी बागवानी तकनीकों पर ध्यान देना सबसे अधिक लाभकारी और भरोसेमंद तरीका माना जाता है।