Author: bharati

  • योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता

    योगमाया मंदिर में पूजा गुरुद्वारे में मत्था टेक विकास योजनाओं के साथ महरौली दौरे पर सीएम रेखा गुप्ता


    नई दिल्ली में शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली विधानसभा क्षेत्र के विकास को नई गति देते हुए 135 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ते हुए सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में पूजा अर्चना की और गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महरौली दौरे के दौरान कहा कि विकसित दिल्ली का सपना तभी साकार होगा जब हर विधानसभा हर कॉलोनी और हर घर तक विकास पहुंचे। उन्होंने कहा कि महरौली अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ अब आधुनिक सुविधाओं की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। विकास योजनाओं के माध्यम से स्वच्छता आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि महरौली की ऐतिहासिक भव्यता को सुरक्षित रखते हुए उसे इक्कीसवीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरासत का संरक्षण और भविष्य का निर्माण दोनों साथ साथ किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को सशक्त और सुव्यवस्थित महरौली मिल सके।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने दिल्ली को केवल विज्ञापनों में चमकाने का काम किया। महरौली की विरासत स्थानीय जरूरतें और नागरिकों की अपेक्षाएं लंबे समय तक उपेक्षित रहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की राजनीति सत्ता केंद्रित नहीं बल्कि सेवा सुशासन और विकास पर आधारित है।

    रेखा गुप्ता ने कहा कि जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है उनका उद्देश्य स्वच्छता सुनिश्चित करना आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने प्राचीन सिद्धपीठ माता योगमाया मंदिर में दर्शन कर पूजा की। उन्होंने कहा कि माता योगमाया शक्ति संरक्षण और धर्म की दिव्य चेतना हैं जिनकी कृपा से यह क्षेत्र सदियों से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने माता से प्रार्थना की कि हर परिवार के जीवन में सुख स्वास्थ्य और मंगल बना रहे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर जी पहुंचकर गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की कृपा से समाज में सेवा समर्पण और समानता की भावना निरंतर बढ़ती रहे। उन्होंने इस अवसर पर सप्तम पातशाह गुरु हर राय साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की सभी को शुभकामनाएं भी दीं।मुख्यमंत्री के इस दौरे को महरौली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे क्षेत्र में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ है।

  • राजधानी में दिल दहला देने वाली घटना बालकनी में खून से लथपथ मिला बच्चा

    राजधानी में दिल दहला देने वाली घटना बालकनी में खून से लथपथ मिला बच्चा


    भोपाल ।राजधानी भोपाल के गौतम नगर इलाके में शुक्रवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 12 वर्षीय छात्र की सिर में गोली लगने से मौत हो गई। बच्चा अपने ही घर की बालकनी में खून से लथपथ और अचेत अवस्था में मिला था। परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन इलाज के दौरान शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।

    घटना शुक्रवार रात करीब एक बजकर पचास मिनट की बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार जब घर में बच्चे की मौजूदगी नजर नहीं आई तो उसकी तलाश की गई। इसी दौरान वह घर की बालकनी में बेहोशी की हालत में पड़ा मिला। उसके सिर से लगातार खून बह रहा था। घबराए परिजन बिना समय गंवाए उसे कमला नेहरू अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने गंभीर हालत में उसका इलाज शुरू किया लेकिन शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।

    गौतम नगर थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मृतक की पहचान इब्राहिम पिता रिजवान लाला के रूप में हुई है। इब्राहिम अपने परिवार के साथ जेपी नगर क्षेत्र में रहता था और पास के स्कूल में तीसरी कक्षा का छात्र था। उसके पिता बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का काम करते हैं। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई।

    शनिवार सुबह फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। बालकनी और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि बच्चे के सिर में गोली लगी थी। हालांकि गोली किस दिशा से आई और किस हथियार से चलाई गई इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

    जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि बच्चे के घर में देर रात तक बाहरी युवकों का आना जाना होता था। स्थानीय लोगों और शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पिता के मेलजोल के चलते कुछ बाहरी युवक अक्सर घर आते थे। पुलिस इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हर संभावित एंगल से जांच कर रही है।थाना प्रभारी का कहना है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मामला किसी दुर्घटना से जुड़ा है लापरवाही का परिणाम है या किसी आपराधिक साजिश से संबंधित है। घर के सभी सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि घर में कोई हथियार मौजूद था या गोली बाहर से आई।

    बच्चे की मौत के बाद पड़ोसियों और परिचितों में गहरा शोक है। लोगों का कहना है कि इब्राहिम शांत स्वभाव का बच्चा था और नियमित रूप से स्कूल जाता था। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि यदि किसी भी तरह की लापरवाही या अपराध सामने आता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भारत का सपना: अवसर, चुनौतियां और तैयारी की असली परीक्षा

    2036 ओलंपिक की मेजबानी का भारत का सपना: अवसर, चुनौतियां और तैयारी की असली परीक्षा


    नई दिल्ली । भारत ने 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए औपचारिक रूप से दावेदारी पेश कर दी है। यह कदम देश की खेल महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासनिक कमजोरियां, बुनियादी ढांचे की सीमाएं, पर्यावरणीय चिंताएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट जैसे सुधारों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत न सिर्फ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स बल्कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी गंभीर प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के अवसर देना है।

    पिछले वर्ष जुलाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्विट्जरलैंड के लुजान स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति आईओसी मुख्यालय का दौरा किया और गुजरात के अहमदाबाद को संभावित मेजबान शहर के रूप में प्रस्तुत किया। अहमदाबाद और गांधीनगर को मिलाकर तैयार की गई योजना में करीब 4.1 से 7.5 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईओसी ने बातचीत के दौरान तीन प्रमुख चिंताएं जताईं भारतीय ओलंपिक संघ के भीतर प्रशासनिक खामियां, डोपिंग के बढ़ते मामले और ओलंपिक खेलों में भारत का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन।

    विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। स्पोर्ट्स मेडिसिन और एंटी-डोपिंग विशेषज्ञ पी.एस.एम. चंद्रन का मानना है कि इन चुनौतियों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार डोपिंग के आंकड़े इसलिए अधिक दिखते हैं क्योंकि भारत अन्य देशों की तुलना में ज्यादा परीक्षण करता है। उनका यह भी कहना है कि बोली प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका पैसे और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव की होती है, न कि केवल पदकों की संख्या की।

    दूसरी ओर, खेल प्रशासक शाजी प्रभाकरन का मानना है कि भारत को अब स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के जरिए अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखना चाहिए। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इंडोनेशिया, तुर्की, चिली, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे देशों से मुकाबला कड़ा होगा। उनके अनुसार, यदि भारत 2036 की रेस में सफल नहीं होता, तो 2040 का दशक ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

    पूर्व ओलंपियन और लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की दावेदारी की प्रबल समर्थक हैं। उनका कहना है कि ग्रासरूट टैलेंट प्रोग्राम और नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल जैसे कदम भारत को ओलंपिक मेजबानी के लिए तैयार कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ खेल पत्रकार शारदा उग्रा आगाह करती हैं कि प्रदूषण, शहरी बुनियादी ढांचा और वैश्विक छवि जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक अहमदाबाद को एक पूर्ण वैश्विक शहर के रूप में खुद को साबित करने के लिए अभी समय चाहिए। कुल मिलाकर, 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है लेकिन यह तभी संभव होगा जब देश खेल प्रशासन, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर ठोस और विश्वसनीय प्रगति दिखा सके।

  • आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट

    आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट


    नई दिल्ली। टीवी शो अनुपमा इस समय दर्शकों की फेवरेट बन चुका है और टीआरपी चार्ट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रुपाली गांगुली का किरदार और उनके चर्चित डायलॉग सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उनका फेमस डायलॉग “इतना मारूंगी” फिर से वायरल हो गया है इस बार के कारण है बिग बॉस 19 के फेमस कंटेस्टेंट आवेज दरबार का रील वीडियो।

    वीडियो में आवेज इस डायलॉग पर अपने स्टाइलिश और मजेदार मूव्स के साथ डांस करते नजर आए, जिसे देखकर फैंस खूब एंटरटेन हो रहे हैं। वीडियो में अनुपमा के डायलॉग की लंबाई और मजाकिया अंदाज का पूरा मज़ा देखने को मिलता है, जिसमें वह कहती हैं कि “गिरा गिरा कर, दौड़ा दौड़ा कर, भगा भगा कर, जूता भिगो के, सैंडल तोड़ के, हाथ थक गए तो लातों से और पैर थक गए तो बातों से” मारेंगी।

    अनुज कपाड़िया और अन्य सितारों ने दिया रिएक्शन
    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो पर कई सेलेब्स ने प्रतिक्रिया दी। अनुपमा के अनुज कपाड़िया (गौरव खन्ना) ने लिखा, “भाई ये तुम्हारा बेस्ट वाला है।” इसके अलावा अभिषेक बजाज मृदुल तिवारी, आकांक्षा खन्ना और किम शर्मा समेत कई अन्य सितारों ने भी वीडियो पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की।

    अनुपमा बनी टीआरपी टॉप पर
    अनुपमा की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इस हफ्ते शो ने 2.2 की टीआरपी हासिल की है, जो इसे टीआरपी चार्ट में टॉप पर रखती है। वहीं स्मृति ईरानी के शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी ने भी इसी 2.2 की टीआरपी के साथ कड़ी टक्कर दी। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अनुपमा के डायलॉग्स और वीडियोज़ का मज़ा ले रहे हैं, और इस बार आवेज दरबार की मस्ती भरी रील ने इसे और भी वायरल बना दिया है।

  • महाबली सतपाल सिंह का योगदान: खिलाड़ी के रूप में पदक और कोच के रूप में दुनिया के मुक़ाबलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पहलवान तैयार किए

    महाबली सतपाल सिंह का योगदान: खिलाड़ी के रूप में पदक और कोच के रूप में दुनिया के मुक़ाबलों में भारत का नाम रोशन करने वाले पहलवान तैयार किए


    नई दिल्ली। में भारतीय कुश्ती के दिग्गज सतपाल सिंह का नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उनका योगदान अभूतपूर्व रहा है। सतपाल सिंह ने न केवल एक पहलवान के रूप में अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए देश का प्रतिनिधित्व किया बल्कि पेशेवर खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद अपने कोचिंग करियर में सुशील कुमार योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे विश्वस्तरीय पहलवान तैयार किए।

    सतपाल सिंह का जन्म 1 फरवरी 1955 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने हनुमान अखाड़ा में कोच गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कुश्ती के दाव पेंच सीखे। 16 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहने वाले सतपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता 19 साल की उम्र में 1974 में क्राइस्टचर्च कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के साथ मिली। इसके बाद 1978 एलबर्टा और 1982 ब्रिसबेन कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक जीता। एशियन गेम्स में 1974 तेहरान में कांस्य, 1978 बैंकॉक में रजत और 1982 नई दिल्ली में हैवीवेट स्वर्ण पदक उनके करियर की विशेष उपलब्धियां हैं। 1980 के समर ओलंपिक्स में पुरुष फ्रीस्टाइल 100 किग्रा में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया।

    सतपाल पारंपरिक कुश्ती में भी माहिर रहे। भारत कुमार, रुस्तम-ए-हिंद, भारत केसरी, महाभारत केसरी, रुस्तम-ए-जमान और हिंद केसरी सहित कई राष्ट्रीय खिताब उन्होंने अपने नाम किए। उन्हें महाबली सतपाल के नाम से भी जाना जाता है।खिलाड़ी जीवन से संन्यास के बाद सतपाल सिंह 1988 से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोचिंग कर रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र को देश में कुश्ती का हब माना जाता है। उन्होंने सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार किया।भारतीय कुश्ती में योगदान के लिए सतपाल सिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री, 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान और 2015 में पद्मभूषण उनकी असाधारण उपलब्धियों की पुष्टि करते हैं।

    70 साल की उम्र में भी सतपाल सिंह सक्रिय हैं और लगातार नए पहलवानों को प्रशिक्षित कर देश का नाम रोशन करने में जुटे हैं। उनके अनुशासन, मेहनत और कुश्ती के प्रति समर्पण ने उन्हें खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में प्रेरक बना दिया है।

  • Budget 2026: इतिहास में एक ऐसा साल, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी परंपरा टूटी थी, जानें क्‍या थी वजह?

    Budget 2026: इतिहास में एक ऐसा साल, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी परंपरा टूटी थी, जानें क्‍या थी वजह?


    नई दिल्ली। देश का आम बजट 2026 कल यानी 1 फरवरी, रविवार को संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए पेश करेंगी। हर साल बजट से पहले हलवा सेरेमनी की खास परंपरा निभाई जाती है, लेकिन इतिहास में ऐसा एक साल भी आया जब यह रस्म नहीं हो सकी।

    हलवा सेरेमनी क्या होती है?
    हर साल बजट के ड्राफ्ट तैयार होने के बाद, नॉर्थ ब्लॉक में हलवा सेरेमनी का आयोजन होता है। इस दौरान बड़ी कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्री इसे मंत्रालय के कर्मचारियों और अधिकारियों में बांटती हैं। यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बजट प्रक्रिया की शुभ शुरुआत का प्रतीक भी है।

    इतिहास और लंबी परंपरा
    आजादी के बाद से यह रस्म लगातार निभाई जाती रही है। हर सरकार ने इसे बनाए रखा है। यही वजह है कि जब किसी साल यह परंपरा टूटी, तो वह घटना इतिहास में यादगार बन गई।

    कब और क्यों टूटी यह परंपरा?
    साल 2022 में दशकों पुरानी हलवा सेरेमनी पहली बार नहीं हुई। इसका कारण कोरोना महामारी की तीसरी लहर थी। संक्रमण तेजी से फैल रहा था और बड़े समूह में इकट्ठा होना खतरनाक माना गया। इसलिए वित्त मंत्रालय ने फैसला किया कि नॉर्थ ब्लॉक में सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को इकट्ठा करना सुरक्षित नहीं होगा, और हलवा सेरेमनी रद्द करनी पड़ी। हालांकि सीधे हलवा नहीं परोसा गया, लेकिन परंपरा की भावना बनी रही। बजट से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को मिठाई उनके घर या ऑफिस पर भेजी गई। इस तरह सुरक्षा और परंपरा दोनों का संतुलन रखा गया।

    हलवा सेरेमनी का और भी महत्व

    हलवा सेरेमनी केवल मिठाई बांटने तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही बजट की गोपनीय प्रक्रिया की शुरुआत भी होती है। समारोह के बाद अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह अलग-थलग हो जाते हैं। मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग बंद हो जाता है। अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक में ही रहते हैं, उनके लिए खाने-पीने और अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि बजट की कोई जानकारी लीक न हो। इस प्रकार हलवा सेरेमनी मिठास का प्रतीक होने के साथ-साथ बजट की गंभीरता और गोपनीयता का संकेत भी बन जाती है।

  • Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा की रात दान करना अधिक फलदायी, जानें कैसे करें पुण्यकारी दान

    Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा की रात दान करना अधिक फलदायी, जानें कैसे करें पुण्यकारी दान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा को अत्यंत पावन और शुभ माना जाता है। यह दिन केवल स्नान और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन की रात किए गए दान को विशेष पुण्यकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा की रात किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल देता है। इस दिन दान करना पूर्वजन्म के दोषों और अशुभ कर्मों के प्रभाव को कम करता है।

    इस साल माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात देवता पृथ्वी के निकट आते हैं और श्रद्धा के साथ किए गए कर्म तुरंत स्वीकार करते हैं। साथ ही, ऐसा माना जाता है कि माघ पूर्णिमा का दान व्यक्ति, परिवार और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पुण्यकारी होता है।

    माघ पूर्णिमा पर क्या दान करें?

    शास्त्रों के अनुसार इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी, गुड़, कंबल और गर्म कपड़े दान करना शुभ माना जाता है। अगर दान सीधे गरीब और जरूरतमंदों तक पहुँचता है, तो इसका लाभ और भी अधिक होता है। इससे न केवल जीवन में आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि आती है, बल्कि दान करने वाले को मानसिक शांति और आत्मिक संतोष भी प्राप्त होता है।

    दान करते समय ध्यान रखें ये बातें

    दान केवल मात्रा से नहीं, बल्कि भावना और विधि से पुण्यकारी होता है। कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। जैसे-दान ईश्वर का स्मरण करते हुए करें। हमेशा दाएं हाथ से दान दें। दान के बाद मन में पश्चाताप या खेद न रखें। दान की चर्चा न करें, इसे गुप्त रखना श्रेष्ठ माना गया है। क्रोध, अहंकार और जल्दबाजी से बचें, क्योंकि ये दान के पुण्य को कम कर सकते हैं। श्रद्धा और सही मनोभाव से किया गया दान आध्यात्मिक शांति और पुण्य दोनों प्रदान करता है। माघ पूर्णिमा की यह रात इसलिए खास है क्योंकि इस दिन किए गए छोटे-से छोटे दान का भी अत्यधिक फल प्राप्त होता है।

  • असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान

    असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान


    गुवाहाटी । असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर रही है। पार्टी ने फरवरी में एक बड़ी मेगा यात्रा आयोजित करने का योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई करेंगे, जबकि राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अलग-अलग चरणों में इसमें शामिल होंगे।

    यात्रा हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें बस यात्रा, पदयात्रा, नुक्कड़ सभाएं और बड़े जनसमूह के कार्यक्रम शामिल होंगे। पार्टी का उद्देश्य सीधे जनता से संवाद करना और राज्य में सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना है। यात्रा की सटीक तारीख और नाम को अंतिम रूप दिया जा रहा है, और संभावना है कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी।

    कांग्रेस पूरी ताकत झोंक रही

    असम में कांग्रेस चुनाव से पहले पूरी ताकत झोंक रही है। संगठन को मजबूत करने और चुनावी बढ़त हासिल करने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। गौरव गोगोई, जो प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ लोकसभा में उपनेता भी हैं, को चुनावी चेहरा बनाया जा रहा है। पार्टी इस कदम से भाजपा के लगातार हमलों का सामना करना चाहती है, खासकर राहुल गांधी पर गमछा विवाद के बाद।

    अमित शाह का हमला
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान असम की जनसांख्यिकी बदल गई। शाह ने करेनग चापोरी में आयोजित ‘मिसिंग युवा महोत्सव’ में जनता से अपील की कि भाजपा को वोट दें ताकि राज्य को अवैध घुसपैठ से मुक्त किया जा सके।

    घुसपैठ और भूमि सुधार

    अमित शाह ने बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठियों की संख्या बढ़कर 64 लाख हो गई और सात जिलों में वे बहुसंख्यक बन गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और असम की भाजपा सरकारें अब इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए काम कर रही हैं। इसके तहत 1.26 लाख एकड़ अतिक्रमित भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया है। शाह ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ लड़ाई में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हाथ मजबूत करने के लिए भाजपा को तीसरी बार सत्ता में लाना जरूरी है।

  • असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

    असम CM का बयान मुस्लिम-विरोधी AIMPLB ने की SC और राष्ट्रपति से संज्ञान लेने की मांग

    नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड AIMPLB ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हालिया बयान को मुस्लिम-विरोधी और असंवैधानिक करार दिया है। बोर्ड ने शुक्रवार को मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले का स्वतः संज्ञान ले। शर्मा ने अपने बयान में कहा था कि असम में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान “मियां” समुदाय के लोग परेशान हैं और उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस दौरान उन्होंने बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल किया।

    AIMPLB ने किया गंभीर आरोप

    बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान मुस्लिम-विरोधी और अत्यंत विभाजनकारी है। उन्होंने चेताया कि नफरत भरी भाषा और उकसावे का प्रयोग अब राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है। इलियास ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री लगातार मुसलमानों को निशाना बनाकर भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दे रहे हैं।

    CJI और राष्ट्रपति से अपील

    बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि एक मुख्यमंत्री के रूप में शर्मा ने संविधान की रक्षा की शपथ ली है, लेकिन उनके बयान खुले तौर पर किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और मताधिकार से वंचित करने का संकेत देते हैं। AIMPLB ने CJI और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी संवैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

    सेक्युलर दलों और नागरिकों से आग्रह

    AIMPLB ने सभी सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों, सिविल सोसाइटी समूहों और न्याय पसंद नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में एकजुट होने का आग्रह किया है।

    मुख्यमंत्री का बयान

    हिमंत शर्मा ने बुधवार को कहा कि असम में “बांग्लादेशी मियां” रहते हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान ऐसे “विदेशियों” के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। शर्मा ने शिवसागर जिले के डेमो में कहा कि “अज्ञात लोग” अब यहां से चले गए हैं और अपर असम के कुछ जिलों में ऐसे लोग रहते हैं, जहां पांच साल पहले कोई संदिग्ध नहीं था।

    उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी मियां असम में बस गए हैं। यदि इनमें से किसी को एसआर नोटिस नहीं मिलता, तो इसका मतलब है कि राज्य में कोई विदेशी नहीं है। भाजपा कार्यकर्ता ऐसे संदिग्ध लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर रहे हैं, और सरकार या निर्वाचन आयोग इसकी जांच करेगा। शर्मा ने कहा कि यदि शिकायतें दर्ज नहीं की जातीं, तो लोग सवाल उठाएंगे कि विदेशियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

  • पश्चिम बंगाल: हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद निर्माण का किया ऐलान, ओवैसी से बढ़ी नजदीकियां

    पश्चिम बंगाल: हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद निर्माण का किया ऐलान, ओवैसी से बढ़ी नजदीकियां


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। ‘जनता उन्नयन पार्टी  के अध्यक्ष हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी के बीच शुक्रवार शाम मुर्शिदाबाद में हुई मुलाकात ने नए गठबंधन की अटकलों को हवा दे दी है। इसी बैठक के दौरान कबीर ने बड़ा बयान देते हुए 11 फरवरी से बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य की शुरुआत होने की घोषणा की।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक, 11 फरवरी को निर्माण स्थल पर करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी रहेगी। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10 बजे पवित्र कुरान के पाठ से होगी, जो लगभग डेढ़ घंटे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए मुस्लिम बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और ट्रस्ट के सदस्य मिलकर मस्जिद की नींव रखेंगे। कबीर ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम में केवल समाज के प्रबुद्ध लोग शामिल होंगे और इसे राजनीति से अलग रखा जाएगा।

    ममता सरकार पर सीधा हमला

    बैठक के बाद हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि AIMIM और SDPI के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। कबीर ने दावा किया कि मार्च महीने में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी तय मानी जा रही है। कबीर ने इसे ममता सरकार के पतन की शुरुआत बताया।

    पुरानी बातचीत, नई मजबूती
    गौरतलब है कि दिसंबर से ही हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत मिलते रहे हैं। अब मुर्शिदाबाद में इमरान सोलंकी के साथ हुई ताजा बैठक के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। AIMIM की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में मुस्लिम, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए पूरी ताकत के साथ संघर्ष करेगी।