Author: bharati

  • "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    नई दिल्ली जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में साध्वी और कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने उनके अनुयायियों और ग्रामीण समाज को गहरे शोक में डुबो दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही पलों बाद तबीयत बिगड़ना, अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया जाना और सोशल मीडिया पर उठे सवाल उनकी मौत को रहस्यमयी और चिंता का विषय बना रहे हैं।
    हर घटना की कड़ी अपने आप में गंभीर सवाल खड़े कर रही है और लोग इस हादसे की सही वजह जानने के लिए बेसब्र हैं।

    पार्थिव शरीर परेऊ गांव पहुंचा, शोक और न्याय की मांग
    आज साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। सैकड़ों अनुयायी, ग्रामीण और संत समाज के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजनों ने परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि देने का निर्णय लिया, लेकिन इस बीच न्याय की मांग भी जोर पकड़ने लगी, क्योंकि लोग चाहते हैं कि उनकी मौत के रहस्यमयी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो।

    साध्वी पूरी तरह स्वस्थ, हल्का जुकाम ही था शिकायत
    साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण थकान जरूर थी, लेकिन स्वास्थ्य सामान्य था। 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई। वीरम नाथ के अनुसार, “मैंने कहा कि अस्पताल चल लेते हैं, लेकिन उसने कहा कि यह मामूली जुकाम है, डॉक्टर को घर ही बुला लो।”

    इंजेक्शन के 30 सेकंड में तबीयत बिगड़ी
    कंपाउंडर ने शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन लगाया, लेकिन महज 30 सेकंड में ही साध्वी की हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी ने सबको हैरान कर दिया। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जोधपुर के प्रेक्षा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए-क्या यह एलर्जिक रिएक्शन था, क्या बिना जरूरी जांच के दवा दी गई, या यह मेडिकल लापरवाही थी।

    अंतिम शब्द और न्याय की पुकार
    वीरम नाथ की आंखें भर आती हैं, जब वह अपनी बेटी के अंतिम शब्द याद करते हैं। साध्वी ने कहा था, “मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।” परिवार का कहना है कि वे किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया विवाद ने बढ़ाई पीड़ा
    सोशल मीडिया पर इस मामले में आग में घी डालने का काम हुआ। तरह-तरह की पोस्ट, अफवाहें और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। कुछ पोस्टों में निजी रिश्तों और भगवे को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिससे संत समाज में नाराजगी फैली। मेवाड़ से श्रद्धांजलि देने पहुंचे महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि बिना तथ्य जाने साधु-संतों की छवि खराब की जा रही है और बाप-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करना शर्मनाक है।

    उन्होंने पुलिस से मांग की कि मौत की निष्पक्ष जांच हो और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

    संत समाज की एक सुर में मांग
    संत समाज भी एक सुर में यही मांग कर रहा है

    साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की सच्चाई सामने लाई जाए। कई संतों का कहना है कि बिना प्रमाण की टिप्पणियां न केवल दिवंगत साध्वी का अपमान हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।
    कंपाउंडर आया और शुरुआती जांच के बाद उसने इंजेक्शन लगाया गया.
    परेऊ गांव में अंतिम दर्शन का भावुक माहौल
    गांव परेऊ में अंतिम दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं भजन गा रही थीं, पुरुषों की आंखों में आंसू थे। हर कोई यही कह रहा था कि प्रेम बाईसा का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था।
    समाधि देने के फैसले को लेकर गांव में भावनात्मक माहौल था। अनुयायियों का मानना है कि यह कदम साध्वी की साधना और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।

    आश्रम से कैमरे हटने और पिछले विवाद की जांच जरूरी
    साध्वी के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने कहा कि पूरी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं, जो संदेह पैदा करते हैं। मृत्यु के बाद डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करवाने को कहा, लेकिन पिता ने मना कर दिया। गत वर्ष जुलाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पुलिस की कार्रवाई ने भी साध्वी पर दबाव बनाए रखा।

  • पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?

    पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है और इसी बीच ताजे सर्वे ने राज्य की राजनीति का नया रुख सामने ला दिया है। सर्वे के अनुसार अगर आज लोकसभा चुनाव होते, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2024 के अपने प्रदर्शन को दोहरा सकती है और लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। हालांकि भाजपा के लिए भी एक अच्छी खबर है, क्योंकि सर्वे में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% तक पहुंचने की संभावना दिखाई गई है। यह तीन प्रतिशत की बढ़त भाजपा के लिए सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन इस बढ़त के बावजूद बंगाल में बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन की तस्वीर अभी साफ नहीं दिखती।

    विशेष रूप से यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव सिर्फ दो महीने दूर हैं। ऐसे में यह सर्वे राज्य की जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। फिर भी, सर्वे यह साफ करता है कि बंगाल में अब मुकाबला पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय होता जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है और यह राज्य अब साफ तौर पर TMC और BJP के बीच टकराव की दिशा में बढ़ रहा है। अगर पिछले सर्वे को देखा जाए तो फरवरी 2024 में TMC को 22 सीटें और BJP को 19 सीटें मिलने का अनुमान था। बाद में अगस्त 2024 में TMC के 32 और BJP के 8 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। अब ताजे सर्वे में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन फिर भी TMC की पकड़ मजबूत दिखती है और ममता बनर्जी की छवि बंगाल में एक प्रमुख राजनीतिक धुरी बनी हुई है।

    सर्वे के मुताबिक, BJP के वोट शेयर में बढ़ोतरी के बावजूद वह बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिख रही। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत सामाजिक और क्षेत्रीय जड़ों के कारण भद्रलोक और ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ अभी भी टेढ़ी खाई बनी हुई है। वहीं BJP धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है, खासकर कुछ खास इलाकों में जहां पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि यदि चुनाव तक इसी तरह का जनाधार बना रहता है तो बंगाल में कमल का फूल खिलाने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए यह सर्वे एक राहत भरा संकेत है कि उनकी पार्टी के प्रति लोगों की विश्वास की लहर अभी भी कायम है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भाजपा की बढ़ती ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोट शेयर के बदलाव भविष्य में किसी भी मोड़ पर निर्णायक साबित हो सकते हैं।

    अगले कुछ हफ्तों में चुनावी प्रचार, घोषणापत्र, गठबंधन रणनीति और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव नतीजों को बदल सकता है। फिलहाल सर्वे यह संकेत दे रहा है कि बंगाल में TMC का प्रभाव अभी भी मजबूत है और BJP को बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन के लिए अभी और मेहनत करनी होगी। ऐसे में बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर नजरें टिके हुए हैं, क्योंकि आने वाले चुनावी माहौल में हर छोटा-सा बदलाव भी बड़े नतीजे ला सकता है।

  • देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग

    देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग


    उज्जैन। देश के प्रमुख देवालयों में बढ़ते वीआईपी कल्चर और सुरक्षा के नाम पर पुजारियों व आम श्रद्धालुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर अब खुलकर विरोध सामने आने लगा है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इसे सनातन परंपरा और मंदिरों की मर्यादा के लिए गंभीर संकट बताया है। इसी कड़ी में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री महाकालेश्वर मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंदिरों में “वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून” बनाने की मांग की है।

    महेश शर्मा ने पत्र में कहा है कि आज देश के कई प्रमुख मंदिरों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इस हद तक बढ़ा दी जाती है कि नित्य पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी, पुरोहित और सेवक भी अपने ही गर्भगृह, पूजा कक्ष और आवासीय क्षेत्रों से बाहर कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सनातन परंपराओं के खिलाफ हैं।

    पुजारी महासंघ ने हाल ही में वृंदावन में हुए एक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के दौरान पुजारियों, उनके परिवारों और महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। महासंघ का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर मंदिरों की आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाता है, जिससे न केवल पूजा पद्धति बाधित होती है, बल्कि पुजारियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।

    इस मुद्दे पर महासंघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी तीखे सवाल किए हैं। पत्र में पूछा गया है कि यदि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होता है और कोई अन्य मुख्यमंत्री गोरखनाथ पीठ में दर्शन करने पहुंचे तथा सुरक्षा का हवाला देकर योगी आदित्यनाथ या उनके संतों को मठ से बाहर कर दिया जाए, तो क्या वे इसे स्वीकार करेंगे। महासंघ ने तर्क दिया कि यदि यह स्थिति स्वयं के लिए अनुचित मानी जाती है, तो बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों के साथ हुआ व्यवहार भी पूरी तरह गलत है।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक कोई व्यक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन है, उसे पद के प्रोटोकॉल के साथ मंदिरों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यदि वे दर्शन करना चाहते हैं, तो एक सामान्य श्रद्धालु की तरह कतार में लगकर दर्शन करें। इससे मंदिरों की परंपरा, पूजा पद्धति और आध्यात्मिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।

    महासंघ का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या सत्ता प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, समानता और श्रद्धा का केंद्र हैं। वीआईपी कल्चर के कारण आम भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है और पुजारियों का आत्मसम्मान भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप कर समान प्रवेश कानून बनाने की अपील की है, ताकि देवालयों की मर्यादा और सनातन परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

  • बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के बैठने का रोस्टर जारी, फरवरी में 20 दिन होगी जनसुनवाई

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के बैठने का रोस्टर जारी, फरवरी में 20 दिन होगी जनसुनवाई


    भोपाल । मध्यप्रदेश में संगठन और सरकार के समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी ने एक अहम कदम उठाया है। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में फरवरी महीने के लिए मंत्रियों के बैठने का विस्तृत रोस्टर जारी कर दिया गया है। इस रोस्टर के अनुसार, फरवरी माह में कुल 20 कार्यदिवसों पर अलग-अलग मंत्री प्रदेश कार्यालय में मौजूद रहेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा आमजनों की समस्याएं सुनेंगे।

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था सोमवार से शुक्रवार तक लागू रहेगी। हर कार्यदिवस दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है। खास बात यह है कि इस जनसुनवाई में मंत्रियों के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी और विधायक भी मौजूद रहेंगे, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

    पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना, संगठनात्मक फीडबैक लेना और जनहित से जुड़े मुद्दों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि इससे न केवल संगठन मजबूत होगा, बल्कि जमीनी स्तर की समस्याओं का भी समय पर निराकरण संभव हो सकेगा।

    जारी रोस्टर के मुताबिक फरवरी के पहले सप्ताह में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जैसे वरिष्ठ मंत्री प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे। वहीं दूसरे सप्ताह में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी जनसुनवाई करेंगे।

    तीसरे सप्ताह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, कृषि मंत्री ऐदलसिंह कंसाना, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया और खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को जिम्मेदारी दी गई है। चौथे सप्ताह में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे।

    पार्टी नेताओं का कहना है कि हर दिन अलग-अलग विभागों से जुड़े मंत्री मौजूद रहने से संबंधित विषयों पर सीधे चर्चा संभव हो पाएगी। इसके साथ ही प्रदेश पदाधिकारी भी मंत्रियों के साथ बैठकर मामलों को नोट करेंगे और आवश्यक फॉलोअप सुनिश्चित करेंगे।

    बीजेपी संगठन की इस पहल को आगामी समय में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल का माध्यम माना जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश जाएगा कि पार्टी नेतृत्व उनकी बात सुनने और समाधान निकालने के लिए गंभीर है। प्रदेश कार्यालय में होने वाली यह नियमित सुनवाई आने वाले दिनों में पार्टी की संगठनात्मक मजबूती को और धार देने का काम करेगी।

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज

    MP PSC के सामने धरना बना प्रदर्शनकारियों के लिए सिरदर्द, लाउडस्पीकर की तेज आवाज पर केस दर्ज


    इंदौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MP PSC कार्यालय के सामने आयोजित धरना प्रदर्शन अब प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल का कारण बन गया है। ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संयोगितागंज थाने में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस प्रकरण में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि अन्य की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।

    बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम

    गाय का मांस बेचकर आप राम राज्य की स्थापना करेंगे, शंकराचार्य ने योगी सरकार को दिया 40 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं करती है तो उसे छद्म हिंदू घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गौ माता के मांस को भैंस का मांस बताकर बचाव किया, जो हिंदुत्व के खिलाफ है।

    शंकराचार्य ने कहा कि अब सरकार को हिंदू होने का प्रमाण देना होगा और वे 40 दिन में यह प्रमाण देने को कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “गाय का मांस बेचकर आप डॉलर से राम राज्य की स्थापना करेंगे,” और यदि 10 मार्च तक गौ माता को राज्य माता घोषित नहीं किया गया तो वे दिल्ली नहीं जाएंगे बल्कि लखनऊ में संत महंत आचार्य इकट्ठा करके आगे का निर्णय लेंगे।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि हिंदू होने की पहली शर्त गो रक्षा है और सरकार को बताना होगा कि उन्होंने गौ सेवा के लिए क्या किया। उन्होंने यूपी सरकार को महाराष्ट्र और नेपाल से सीखने की नसीहत दी और कहा कि भारत से गौ मांस का निर्यात अधिकतर उत्तर प्रदेश से होता है।

    उन्होंने कहा कि 24 घंटे में उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण माँगा गया था, जिसे उन्होंने जवाब दिया और अब योगी सरकार को 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण देना होगा। शंकराचार्य ने साफ कहा कि अगर सरकार यह प्रमाण नहीं दे पाती तो उसे “कालनेमि”, “ढोंगी” और “छद्म हिंदू” कहा जाएगा।

  • कलंकित हुआ शिक्षा का मंदिर: टीकमगढ़ में 58 वर्षीय शिक्षक ने मासूम छात्रा के साथ की दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

    कलंकित हुआ शिक्षा का मंदिर: टीकमगढ़ में 58 वर्षीय शिक्षक ने मासूम छात्रा के साथ की दरिंदगी की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार


    टीकमगढ़ । मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से मानवता और गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। जहाँ एक ओर शिक्षक को समाज में ‘गुरु’ का दर्जा देकर भगवान से ऊपर माना जाता है, वहीं पलेरा थाना क्षेत्र के एक शासकीय स्कूल में एक 58 वर्षीय शिक्षक ने इस मर्यादा को तार-तार कर दिया। इस कलयुगी शिक्षक ने स्कूल परिसर के भीतर ही एक छह वर्षीय मासूम छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाने का प्रयास किया, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित मासूम रोज की तरह विद्या के मंदिर में शिक्षा ग्रहण करने पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस शिक्षक की सुरक्षा में वह स्कूल जा रही है, वही उसकी मासूमियत को रौंदने की ताक में बैठा है। आरोपी शिक्षक ने मासूम को बहला-फुसलाकर स्कूल परिसर में ही बन रहे एक निर्माणाधीन कक्ष में ले गया। एकांत का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा के कपड़े उतारे और उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। इस घिनौनी हरकत से सहमी मासूम जोर-जोर से रोने लगी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर और पकड़े जाने के डर से आरोपी ने उसे डराया-धमकाया और इस बारे में किसी को न बताने की चेतावनी देकर छोड़ दिया।

    रोती-बिलखती मासूम जब अपने घर पहुंची, तो उसने अपनी दादी को पूरी आपबीती सुनाई। पोती की जुबानी शिक्षक की काली करतूत सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए परिजन बच्ची को लेकर पलेरा थाने पहुंचे और आरोपी शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस घटना की खबर जैसे ही कस्बे में फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हिंदू संगठनों ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों और संगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि दोषी शिक्षक के खिलाफ न केवल कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, बल्कि उसके घर पर प्रशासन का बुलडोजर चलाकर कड़ी नजीर पेश की जाए।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह कुशवाहा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है और पुलिस हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है कि कैसे शिक्षण संस्थानों में भी बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।

  • इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस

    इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस


    इंदौर । शहर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग छात्र के साथ मारपीट, अपहरण और ब्लैकमेलिंग किए जाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले कुछ नाबालिग लड़कों ने आपसी रंजिश के चलते पीड़ित छात्र को निशाना बनाया और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले छात्र के साथ मारपीट की, इसके बाद जबरन उसे गाड़ी में बैठाकर शहर के खजराना क्षेत्र में स्थित एक कमरे में ले गए। वहां उसे बंद कर दोबारा बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि इसी दौरान पीड़ित के कपड़े उतरवाकर उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया गया। बाद में आरोपियों ने इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर छात्र को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले की जड़ स्कूल से जुड़ी आपसी रंजिश बताई जा रही है। बताया गया है कि मुख्य आरोपी करण की बहन और पीड़ित छात्र एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और पांच नाबालिगों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की, तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा।

    पीड़ित छात्र ने पुलिस को बताया कि घटना के समय उसके पिता की तबीयत गंभीर रूप से खराब थी, जिसके कारण वह डर और मानसिक दबाव में रहा और तत्काल किसी को कुछ नहीं बता सका। इसी दौरान आरोपियों ने हद पार करते हुए वीडियो को पीड़ित के पिता के मोबाइल फोन पर भेज दिया। इसके बाद परिवार को पूरे मामले की जानकारी हुई और वे सीधे थाने पहुंचे।

    परिजनों की शिकायत पर जूनी इंदौर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपहरण, मारपीट, ब्लैकमेलिंग, आईटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी पांचों आरोपियों को पकड़ लिया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी विधि-विवादित बालक नाबालिग हैं, जिनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि वीडियो कहां-कहां भेजा गया और कहीं उसे वायरल तो नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा: एक सिक्के ने बदली जिंदगी, बचपन के दोस्त संग अफेयर और शाहरुख के साथ किया बॉलीवुड में धमाका!

    डिंपल गर्ल प्रीति जिंटा: एक सिक्के ने बदली जिंदगी, बचपन के दोस्त संग अफेयर और शाहरुख के साथ किया बॉलीवुड में धमाका!


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री और ‘डिंपल गर्ल’ प्रीति जिंटा आज अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। 1998 में मणिरत्नम की फिल्म ‘दिल से’ से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। आज भी उनकी स्माइल और डिंपल फैंस के बीच बेहद लोकप्रिय हैं, हालांकि वे अब फिल्मों से दूरी बनाए हुए हैं।

    फिल्मी दुनिया में किस्मत का सिक्का
    प्रीति ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने फिल्मों में आने का फैसला सिक्का उछालकर किया था। उन्होंने कहा कि अगर सिक्का हेड्स आता तो वे फिल्मों में जाएँगी, और टेल्स आने पर नहीं। सिक्का हेड्स आया और इसी के साथ उनका बॉलीवुड सफर शुरू हुआ।

    पहला प्रोजेक्ट रिलीज नहीं हुआ
    प्रीति जिंटा का पहला प्रोजेक्ट ऋतिक रोशन के साथ ‘तारा रम पम पम’ था, लेकिन यह फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने शाहरुख खान के साथ ‘दिल से’ से डेब्यू किया, जिसने उन्हें पहचान दिलाई।

    बॉलीवुड में सफल करियर
    इसके बाद प्रीति ने कई हिट फिल्मों में काम किया, जिनमें प्रमुख हैं:
    वीर-ज़ारा, शोलज़ार, जान-ए-मन, संघर्ष, हर दिल जो प्यार करेगा, क्या कहना आदि। उन्होंने बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स जैसे शाहरुख खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन, अक्षय कुमार, बॉबी देओल और सनी देओल के साथ काम किया।

    पर्सनल लाइफ: अफेयर से शादी तक
    प्रीति की लव लाइफ भी चर्चा में रही। बताया जाता है कि वह अपने बचपन के दोस्त नेस वाडिया के साथ लंबे समय तक रिलेशनशिप में थीं। बाद में उनके और सलमान खान के बीच करीबी रिश्ते की अफवाहें भी चर्चा में आईं।

    शादी और परिवार
    29 फरवरी 2016 को प्रीति ने अमेरिकी बिजनेसमैन जीन गुडइनफ से शादी की। शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और अब अपने पति और दो जुड़वा बच्चों, जय और जिया के साथ खुशहाल जीवन जी रही हैं।

    आज भी बनी हुई है खास जगह
    हालांकि प्रीति जिंटा अब स्क्रीन से दूर हैं, लेकिन उनकी फिल्मों और अदाकारी की वजह से वह आज भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं।