Author: bharati

  • मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

    मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना पर हमला करने की खबरों से इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का निशाना सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इससे पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने मक्का और मदीना की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है। कई इलाकों में मिसाइलों का मलबा गिरने की भी जानकारी दी गई थी।

    हूती समूह के इस बयान से सऊदी अरब और यमन के बीच सीमा पार तनाव बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा कि जब भी वे सैन्य अभियान चलाते हैं, तो उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं। सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के इनकार और उनके बताए लक्ष्यों पर तत्काल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी।

    सऊदी अरब ने मिसाइलें रोकने का किया दावा

    सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों का मलबा मक्का के पास और जेद्दा, ताइफ तथा रबिघ में मिलने की जानकारी सामने आई।

    शनिवार को सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा के लोगों को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। करीब 10 मिनट बाद एजेंसी ने बताया कि खतरा टल गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइलों के मलबे की जानकारी वाले सभी स्थानों पर वास्तव में क्या हुआ और क्या कोई मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंची थी। हूतियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मक्का और मदीना को निशाना नहीं बनाया।

    रियाद एयरपोर्ट और अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों पर हमले किए। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा, रबिघ तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशन और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।

    प्रवक्ता ने दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नज्रान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के एक हवाई अड्डे को भी निशाना बनाने का दावा किया।

    वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। हालांकि, हूतियों की ओर से बताए गए अन्य ठिकानों पर हमलों की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने भी इन दावों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर मिसाइल हमले का आरोप

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया है। यमन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से दो मिसाइलें तटरक्षक बल के मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही इलाके में तटरक्षक बल की एक इमारत पर गिरी।

    दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। उन्होंने अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन ठिकानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।

    2022 के युद्धविराम पर फिर मंडराया खतरा

    ताजा घटनाक्रम से यमन में संघर्ष रोकने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है। वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी।

    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों का राजधानी सना और देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

    ईरान के साथ जारी व्यापक अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है। इसी महीने की शुरुआत में हूतियों ने विमानन कंपनियों को सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, उस चेतावनी में मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को अलग रखा गया था।

  • MP में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की चेतावनी, शहडोल समेत 5 जिलों में आसार

    MP में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की चेतावनी, शहडोल समेत 5 जिलों में आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दिवाली से पहले मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र के मजबूत होकर डिप्रेशन में बदलने की संभावना है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिखाई देगा। इस बीच बारिश का दौर थमने से रात में ठंडक बढ़ गई है। कटनी के करौंदी में न्यूनतम तापमान 12.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। इसके बाद 28 अक्टूबर को मौसम बदलेगा और प्रदेश के करीब आधे हिस्से में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश के आसार हैं।

    5 जिलों में भारी बारिश, कई जगह गरज-चमक की संभावना

    28 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों के कई जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना और अशोकनगर में बादल छाने के साथ गरज-चमक और बूंदाबांदी की संभावना है।

    इसके अलावा जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदल सकता है। इन जिलों में बादल छाने, गरज-चमक और हल्की बारिश के आसार हैं।

    वहीं, भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में मौसम साफ रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में दिन के समय धूप खिल सकती है।

    बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम से बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है। इसके आने वाले दिनों में मजबूत होकर डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इसी सिस्टम के प्रभाव से 28 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है।

    अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बारिश के साथ रात के तापमान में गिरावट का असर भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में दिवाली से पहले प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश और ठंडक दोनों महसूस हो सकती हैं।

    रात में बढ़ी ठंड, करौंदी में पारा 12.1 डिग्री

    प्रदेश में बारिश थमने के बाद रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। बीती रात कटनी जिले के करौंदी में न्यूनतम तापमान 12.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो प्रदेश में सबसे कम दर्ज किया गया।

    इंदौर में न्यूनतम तापमान 13.4 डिग्री, अमरकंटक में 13.6 डिग्री, दमोह और पचमढ़ी में 14 डिग्री तथा शाजापुर और बैतूल में 14.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    दिन में भी गिरा पारा, कई शहरों में तापमान 30 डिग्री से नीचे

    रात के साथ दिन के तापमान में भी गिरावट देखने को मिल रही है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है।

    अमरकंटक, मलाजखंड, शिवपुरी, बैतूल और पचमढ़ी में अधिकतम तापमान 27.4 से 29.4 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम में इस बदलाव से दिन की गर्मी से भी राहत मिल रही है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में नए मौसम सिस्टम का असर प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इसके चलते बारिश की संभावना के साथ रात के तापमान में भी गिरावट हो सकती है।

  • एलआरएस के तहत विदेशी शेयर-बॉन्ड में भारतीयों का निवेश 111% बढ़ा, अगस्त में 321.53 मिलियन डॉलर पहुंचा

    एलआरएस के तहत विदेशी शेयर-बॉन्ड में भारतीयों का निवेश 111% बढ़ा, अगस्त में 321.53 मिलियन डॉलर पहुंचा


    नई दिल्ली । विदेशी शेयर और बॉन्ड बाजारों में भारतीयों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में भारतीयों का निवेश सालाना आधार पर 111 प्रतिशत बढ़कर 321.53 मिलियन डॉलर पहुंच गया। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 152.18 मिलियन डॉलर था। एक साल के भीतर निवेश में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारतीय निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाती है।

    हालांकि, मासिक आधार पर विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश में लगभग सात प्रतिशत की गिरावट आई। इससे पहले जून 2026 में इस श्रेणी में निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इस लिहाज से अगस्त में दर्ज आंकड़ा जून के उच्चतम स्तर से कम रहा, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय वृद्धि बनी रही।

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत कुल बाहरी प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा। अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में निवेश का हिस्सा कुल एलआरएस प्रेषण का लगभग 11.7 प्रतिशत था। अगस्त 2025 में यह अनुपात केवल 5.8 प्रतिशत रहा था। यानी कुल प्रेषण में विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की हिस्सेदारी एक साल में दोगुने से अधिक हो गई।

    एलआरएस के तहत सभी श्रेणियों में किए गए कुल बाहरी प्रेषण में भी वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त 2026 में यह राशि बढ़कर 2.74 अरब डॉलर हो गई, जबकि अगस्त 2025 में 2.64 अरब डॉलर थी। इस तरह सालाना आधार पर कुल प्रेषण में 3.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जुलाई 2026 के 2.58 अरब डॉलर के मुकाबले अगस्त में यह लगभग छह प्रतिशत अधिक रहा।

    विदेश यात्रा एलआरएस के तहत खर्च की सबसे बड़ी श्रेणी बनी हुई है। अगस्त 2026 में भारतीयों ने विदेश यात्रा पर 1.63 अरब डॉलर खर्च किए, जो कुल बाहरी प्रेषण का करीब 59 प्रतिशत था। यह खर्च पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक प्रतिशत और जुलाई 2026 के मुकाबले 11.4 प्रतिशत अधिक रहा। आंकड़े बताते हैं कि विदेश यात्रा से जुड़े भुगतान कुल प्रेषण में सबसे बड़ा हिस्सा बनाए हुए हैं।

    कारोबारी यात्रा पर खर्च में सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी देखने को मिली। जुलाई 2026 में इस मद में 10.9 मिलियन डॉलर भेजे गए थे, जबकि अगस्त में यह राशि बढ़कर 51 मिलियन डॉलर हो गई। इस प्रकार एक महीने के भीतर कारोबारी यात्रा से संबंधित प्रेषण लगभग पांच गुना बढ़ गया।

    अन्य श्रेणियों में उपहार के रूप में विदेश भेजी गई राशि अगस्त में 215.72 मिलियन डॉलर रही। निकट संबंधियों के भरण-पोषण के लिए 275.43 मिलियन डॉलर भेजे गए। वहीं, विदेश में अचल संपत्ति खरीदने के लिए 39.59 मिलियन डॉलर और विदेशी बैंकों में जमा करने के लिए 50.78 मिलियन डॉलर का प्रेषण दर्ज किया गया।

    विदेश में चिकित्सा उपचार के लिए भेजी गई राशि में भी वृद्धि हुई। अगस्त 2026 में इस उद्देश्य से किया गया प्रेषण सालाना आधार पर 21.3 प्रतिशत बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुंच गया। कुल आंकड़ों से स्पष्ट है कि एलआरएस के तहत भारतीयों का पैसा विदेश यात्रा, परिवार के भरण-पोषण, संपत्ति खरीद और विदेशी वित्तीय बाजारों में निवेश जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए भेजा जा रहा है। इनमें विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी अगस्त के आंकड़ों का एक प्रमुख पहलू रही।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, आईएमएफ ने 2026 और 2027 के लिए विकास दर अनुमान 7% किया

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, आईएमएफ ने 2026 और 2027 के लिए विकास दर अनुमान 7% किया

    नई दिल्ली । दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की आशंकाओं, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने के बावजूद भारत प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बना हुआ है। घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल बदलाव और नीतिगत प्रबंधन को इस मजबूती के प्रमुख आधारों में गिना गया है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमुख वैश्विक संस्थानों की ओर से भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमानों में संशोधन किया जाना देश की आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2026 और 2027, दोनों वर्षों के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। इस अनुमान के आधार पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

    भारत की आर्थिक मजबूती का एक बड़ा कारण उसका विशाल और विविध घरेलू बाजार है। घरेलू उपभोग, निजी निवेश और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च मिलकर आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं। वैश्विक बाजारों में मांग कमजोर होने या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अस्थिरता बढ़ने पर घरेलू मांग अर्थव्यवस्था को सहारा प्रदान करती है। इससे बाहरी झटकों का प्रभाव सीमित करने में मदद मिलती है।

    निजी उपभोग का प्रभाव कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। ऑटोमोबाइल, आवास, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों को घरेलू मांग से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती आय, शहरीकरण, डिजिटल सेवाओं तक पहुंच और बेहतर कनेक्टिविटी लोगों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन बदलावों से निवेश और नवाचार के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    डिजिटल परिवर्तन भी भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी सेवाओं ने लेन-देन को आसान बनाया है तथा लागत कम करने में मदद की है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार से छोटे व्यवसायों को भी अपने स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में तकनीक की भूमिका मजबूत हुई है।

    बुनियादी ढांचे में निवेश को भी आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं से वस्तुओं तथा सेवाओं की आवाजाही बेहतर हो रही है। बेहतर संपर्क व्यवस्था से बाजारों तक पहुंच का विस्तार होता है और कारोबार की लागत घटाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही निर्यात में विविधता लाने, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का निर्यात एक ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2030 तक निर्यात को दो ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। विनिर्माण क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। ये आंकड़े उत्पादन और बाहरी व्यापार के क्षेत्र में विस्तार की संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं।

    कुल मिलाकर, भारत की आर्थिक स्थिति को घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नीतिगत प्रबंधन से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, ऊर्जा बाजारों की अस्थिरता और व्यापारिक तनाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में भारत की घरेलू आर्थिक बुनियाद और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता आने वाले वर्षों में उसकी विकास गति बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश एफडीए ने पतंजलि के गाय घी के एक बैच को असुरक्षित बताया, बाजार से वापस मंगाने का आदेश

    मध्य प्रदेश: खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पतंजलि फूड्स लिमिटेड के गाय के घी के एक विशेष बैच को असुरक्षित बताते हुए बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नमूना नहीं पाए जाने के बाद की गई। कंपनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा है कि वह नियामक के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी। मामले में कार्रवाई बुरहानपुर जिले में संबंधित बैच को लेकर की गई है।

    कंपनी के अनुसार, मध्य प्रदेश एफडीए ने गाय के घी के संबंधित बैच का नमूना लेकर जांच कराई थी। जांच में नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों के तहत निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद नियामक ने संबंधित उत्पाद को वापस मंगाने का निर्देश जारी किया। यह मामला खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के तहत निर्धारित प्रावधानों से जुड़ा है। इन नियमों में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित मानक तय किए गए हैं।

    पतंजलि फूड्स ने स्पष्ट किया है कि वह मध्य प्रदेश एफडीए के नामित अधिकारी द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने के लिए अपील दायर कर रही है। कंपनी का कहना है कि इस कार्रवाई से उसके वित्तीय और परिचालन कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। उसके मुताबिक, संभावित प्रभाव संबंधित गाय के घी के बैच के मूल्य तक सीमित रहेगा। हालांकि, नियामक की कार्रवाई के बाद संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस घटनाक्रम के बीच कंपनी के शेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध शेयर बाजार आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को पतंजलि फूड्स का शेयर बीएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ 351 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 52 सप्ताह के दौरान शेयर ने 613.95 रुपये का उच्चतम और 328.05 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। एक साल की अवधि में कंपनी के शेयर में करीब 41 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि तीन वर्षों में इसमें लगभग 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब पांच प्रतिशत का सकारात्मक रिटर्न दिया है।

    पतंजलि फूड्स इससे पहले भी खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर नियामकीय कार्रवाई का सामना कर चुकी है। जून में कंपनी के ज्वार के आटे के एक विशेष बैच को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय केरल के कन्नूर जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जांच में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने के बाद संबंधित बैच की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

    उस मामले में भी कंपनी ने नियामकीय जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उसे कन्नूर जिला खाद्य सुरक्षा कार्यालय से ज्वार के आटे के एक विशेष बैच की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश मिला है। मौजूदा मामले में भी कार्रवाई किसी खास बैच तक सीमित बताई गई है। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे कंपनी के सभी गाय के घी उत्पादों पर लागू कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

    मध्य प्रदेश में हुई इस कार्रवाई के बाद संबंधित बैच की वापसी और कंपनी की प्रस्तावित अपील पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कंपनी ने वित्तीय और परिचालन प्रभाव को सीमित बताया है, जबकि नियामक की जांच में संबंधित घी के नमूने का निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरना कार्रवाई का आधार बना है।

  • Surya Dev Puja: सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए ऐसे करें सूर्य देव की आराधना, जानें व्रत कथा और पूजा विधि

    Surya Dev Puja: सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए ऐसे करें सूर्य देव की आराधना, जानें व्रत कथा और पूजा विधि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सूर्य देव को ऊर्जा प्रकाश और जीवन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की पूजा करने और रविवार का व्रत रखने से जीवन में सुख समृद्धि और सकारात्मकता की कामना की जाती है। सूर्य को प्रत्यक्ष देवता भी कहा जाता है क्योंकि उनके प्रकाश से धरती पर जीवन संभव होता है। यही वजह है कि सुबह उठकर सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कई श्रद्धालु रविवार के दिन व्रत रखकर सूर्य देव की आराधना करते हैं और परिवार की सुख शांति तथा उन्नति की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि नियमित पूजा से व्यक्ति में अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा भी मिलती है।
    रविवार के व्रत की पूजा विधि
    सूर्य देव का व्रत करने वाले श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ कपड़े पहनते हैं। इसके बाद सूर्य उदय के समय तांबे के लोटे में साफ जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार जल में लाल फूल या अक्षत डालना भी शुभ माना जाता है। अर्घ्य देते समय सूर्य देव का स्मरण करते हुए परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद सूर्य मंत्र का जाप और सूर्य चालीसा का पाठ किया जा सकता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ प्रार्थना करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।
    व्रत में किन नियमों का रखें ध्यान
    रविवार का व्रत रखने वाले कई लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार एक समय भोजन करते हैं। व्रत में सात्विक भोजन करने और साफ सफाई बनाए रखने को प्राथमिकता दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध और कटु वचन से बचना तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करना अच्छा माना जाता है। व्रत का पालन अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार करना चाहिए। बच्चों बुजुर्गों और किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। श्रद्धा के साथ पूजा करना जरूरी है लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
    सूर्य देव की पूजा में इन चीजों का महत्व
    सूर्य देव की पूजा में जल लाल फूल अक्षत और दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। कई परंपराओं में लाल रंग को सूर्य देव से जुड़ा शुभ रंग माना जाता है। पूजा के दौरान गुड़ और गेहूं का दान करना भी कुछ स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन या उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं। दान का उद्देश्य दूसरों की सहायता करना और समाज में सद्भाव बढ़ाना होना चाहिए। सूर्य देव की आराधना करते समय गायत्री मंत्र या सूर्य से संबंधित मंत्रों का जाप भी किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति मंत्रों से परिचित नहीं है तो वह सरल प्रार्थना के साथ भी पूजा कर सकता है।
    सूर्य देव के व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार का व्रत आत्मविश्वास सम्मान और उन्नति की कामना से किया जाता है। सूर्य देव को ज्योतिष में आत्मबल नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है। हालांकि व्रत करने से किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं होती। इसे श्रद्धा और व्यक्तिगत आस्था से जुड़ी परंपरा के रूप में देखना चाहिए। सूर्य के प्रकाश में सुबह कुछ समय बिताना भी दिनचर्या का अच्छा हिस्सा हो सकता है लेकिन तेज धूप को सीधे देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए सूर्य देव की पूजा करते समय उनकी ओर सीधे लगातार देखने से बचें। श्रद्धा के साथ सही दिनचर्या और अच्छे कर्म अपनाकर रविवार को सकारात्मक शुरुआत का अवसर बनाया जा सकता है।
  • भोपाल में भूमिगत गैस लाइन में आग से मचा हड़कंप: छोला इलाके में ब्रिज के पास उठीं ऊंची लपटें; पुलिस ने भीड़ हटाई और फायर टीम ने पाया काबू

    भोपाल में भूमिगत गैस लाइन में आग से मचा हड़कंप: छोला इलाके में ब्रिज के पास उठीं ऊंची लपटें; पुलिस ने भीड़ हटाई और फायर टीम ने पाया काबू


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोला इलाके में शनिवार दोपहर थिंक गैस की भूमिगत पाइपलाइन में आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना छोला ब्रिज के पास हुई जहां मेट्रो निर्माण का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जेसीबी से खुदाई के दौरान गैस पाइपलाइन में लीकेज हुआ और इसके बाद आग की लपटें उठने लगीं। बताया गया कि आग की लपटें करीब 10 फीट तक पहुंच रही थीं। अचानक लगी आग को देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा गए और ब्रिज के पास लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने आग बुझाने का प्रयास किया और संबंधित गैस कंपनी से पाइपलाइन की सप्लाई बंद कराई गई। गैस की आपूर्ति बंद होने के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। घटना के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली।
    दोपहर साढ़े 12 बजे के आसपास हुई घटना
    जानकारी के अनुसार घटना शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे की है। छोला ब्रिज के पास से थिंक गैस की भूमिगत पीएनजी पाइपलाइन गुजरती है। इसी क्षेत्र में मेट्रो निर्माण से जुड़ा काम किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खुदाई के दौरान जेसीबी से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई और गैस का रिसाव शुरू हो गया। इसके बाद आग लग गई और लपटें तेजी से ऊपर उठने लगीं। हालांकि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के दौरान आग की ऊंची लपटें देखकर आसपास मौजूद लोग सतर्क हो गए और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।
    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को हटाया
    गैस लाइन में आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। ब्रिज के पास आग देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने लोगों को घटनास्थल से दूर किया ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। छोला फायर टीम के फायर फाइटर पंकज यादव सहित अन्य कर्मचारियों ने आग बुझाने का मोर्चा संभाला। दमकलकर्मियों ने पानी की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। लेकिन गैस लाइन से रिसाव जारी रहने की स्थिति में आग को पूरी तरह बुझाना चुनौतीपूर्ण हो सकता था। ऐसे में गैस कंपनी से संपर्क कर लाइन बंद कराई गई।
    गैस सप्लाई बंद होने के बाद बुझी आग
    जानकारी के मुताबिक थिंक गैस कंपनी से पाइपलाइन की सप्लाई बंद कराई गई। इसके बाद दमकल टीम आग पर पूरी तरह काबू पाने में सफल रही। आग बुझने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत महसूस की। घटना में किसी के हताहत होने या घायल होने की जानकारी खबर में नहीं दी गई है। हालांकि इस तरह की घटनाओं में गैस रिसाव के कारण आग दोबारा भड़कने का खतरा बना रह सकता है इसलिए पाइपलाइन की जांच और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
    पहले भी सामने आ चुका है गैस लाइन लीकेज का मामला
    भोपाल में गैस पाइपलाइन लीकेज की यह पहली घटना नहीं है। खबर के अनुसार कुछ महीने पहले शाहपुरा थाने के सामने भी गैस लाइन में लीकेज हुआ था। छोला ब्रिज के पास हुई ताजा घटना ने निर्माण कार्य के दौरान भूमिगत पाइपलाइन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मेट्रो और अन्य निर्माण परियोजनाओं के दौरान जमीन के नीचे मौजूद गैस तथा दूसरी उपयोगी सेवाओं की पाइपलाइन को नुकसान से बचाना जरूरी है। ऐसे मामलों में खुदाई से पहले संबंधित लाइनों की सही पहचान और सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतना महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल छोला ब्रिज के पास लगी आग पर काबू पा लिया गया है और घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

  • झांसी में प्रैक्टिकल के अंक बढ़ाने का झांसा देकर छात्रा से दुष्कर्म का आरोप, स्कूल का लिपिक गिरफ्तार

    झांसी में प्रैक्टिकल के अंक बढ़ाने का झांसा देकर छात्रा से दुष्कर्म का आरोप, स्कूल का लिपिक गिरफ्तार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में 12वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा से कथित दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में पुलिस ने स्कूल के लिपिक सुरेंद्र पाल को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने प्रैक्टिकल परीक्षा में अंक बढ़ाने का लालच देकर छात्रा को अपने पास बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। छात्रा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस के अनुसार, जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।

    यह मामला झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सुरेंद्र पाल पुनावली कला गांव का निवासी है और संबंधित स्कूल में लिपिक के पद पर कार्यरत था। पीड़िता की ओर से 22 अक्टूबर 2026 को थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में छात्रा ने आरोप लगाया कि आरोपी ने पढ़ाई और प्रैक्टिकल के अंकों से जुड़ा लालच देकर उसे बहलाया-फुसलाया और फिर उसके साथ जबरन संबंध बनाए।

    पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोपी पर लगातार संपर्क करने और बार-बार अपने पास आने का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा, छात्रा का कहना है कि आरोपी ने उसकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने परिवार के सदस्यों को जान से मारने की धमकी भी दी थी। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।

    पुलिस ने इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) और 351(3) के साथ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की है। धारा 64(1) दुष्कर्म से संबंधित अपराध के लिए लागू होती है, जबकि धारा 351(3) आपराधिक धमकी से जुड़ी है। नाबालिग पीड़िता से संबंधित मामले में पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी को 22 अक्टूबर को सुबह करीब 7:34 बजे मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सारमऊ तिराहे से गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने आरोपी को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

    एसपी सिटी प्रीति सिंह के मुताबिक, छात्रा की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपों से संबंधित तथ्यों की पड़ताल की। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर नामजद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

    आरोपी की गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक सूरज सिंह, हेड कांस्टेबल अजमत उल्ला और कांस्टेबल रविकांत शामिल थे। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। नाबालिग की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी को सार्वजनिक करना कानून के तहत प्रतिबंधित हो सकता है, इसलिए पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले विवरण सामने नहीं रखे गए हैं।

    यह मामला शैक्षणिक संस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अंक बढ़ाने के नाम पर कथित रूप से दबाव बनाए जाने के आरोपों से जुड़ा है। पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होने वाली कार्यवाही और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्यार की कहानी साझा की, किताब में खुलेंगी जिंदगी की कई यादें

    सोनिया गांधी ने राजीव गांधी से पहली मुलाकात और प्यार की कहानी साझा की, किताब में खुलेंगी जिंदगी की कई यादें


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते की शुरुआत से जुड़ी यादें साझा की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पहली पोस्ट में एक वीडियो जारी कर बताया कि इंग्लैंड में अपनी पसंद का खाना तलाशते हुए वह कैम्ब्रिज के एक ग्रीक रेस्तरां तक पहुंची थीं। इसी जगह एक मित्र ने उनकी मुलाकात राजीव गांधी से कराई थी। सोनिया ने इस मुलाकात को अपने जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यहीं से उनके प्रेम की शुरुआत हुई और दोनों ने मिलकर यादों से भरी दुनिया बनाई।

    सोनिया गांधी ने बताया कि राजीव गांधी से पहली मुलाकात के दौरान ही उन्हें महसूस हुआ था कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह अपना जीवन बिताना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव की भावना भी कुछ ऐसी ही थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी। वे पार्टियों में जाते, घूमते और विद्यार्थियों की बैठकों में एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे।

    राजीव गांधी के व्यक्तित्व को याद करते हुए सोनिया ने कहा कि उनका स्वभाव बेहद सौम्य था। उन्होंने राजीव के आकर्षक व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया, लेकिन उनके अनुसार राजीव की सबसे खास बात उनका सहज और विनम्र व्यवहार था। सोनिया की ये यादें उनकी आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ से जुड़ी हैं, जिसका विमोचन 10 नवंबर को होना है। उन्होंने शनिवार को ही अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाया और पहली पोस्ट में पुस्तक का वीडियो साझा किया।

    इस पुस्तक में सोनिया गांधी ने अपने बचपन से लेकर भारत में जीवन बिताने तक के अनुभवों का वर्णन किया है। इसकी शुरुआत युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में उनके बचपन से होती है। इसके बाद उनके कैम्ब्रिज पहुंचने और वर्ष 1965 में राजीव गांधी से मुलाकात का विवरण आता है। राजीव गांधी उस समय जवाहरलाल नेहरू के पोते के रूप में जाने जाते थे।

    पुस्तक में राजीव गांधी से विवाह और उनकी मां, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात का भी जिक्र है। सोनिया ने भारत में नई जिंदगी के साथ तालमेल बैठाने के अनुभव साझा किए हैं। इनमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खानपान तथा संस्कृति को अपनाना शामिल है। इस तरह पुस्तक में निजी जीवन के साथ एक नए देश और परिवार में खुद को ढालने की यात्रा भी दर्ज है।

    सोनिया गांधी की आत्मकथा में गांधी परिवार को प्रभावित करने वाली कई बड़ी त्रासदियों का भी उल्लेख है। इनमें विमान हादसे में संजय गांधी की मृत्यु, वर्ष 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद उनके निजी जीवन में आए बदलावों और परिवार की परिस्थितियों का भी वर्णन किया गया है।

    राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। उस समय पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 तक कांग्रेस की स्थिति कमजोर होने लगी और पार्टी के भीतर कई गुट उभर आए। पार्टी को एकजुट करने के प्रयासों के बीच सोनिया गांधी ने वर्ष 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली। इसके बाद वर्ष 1998 में वह पार्टी की अध्यक्ष बन गईं।

    सोनिया गांधी वर्ष 2017 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। उनका कार्यकाल पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा रहा। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिला। सहयोगी दलों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को इस पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

    पुस्तक में इस राजनीतिक दौर और प्रधानमंत्री पद से दूर रहने के उनके फैसले का भी उल्लेख है। मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने भी अपनी पुस्तक ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ में उस समय के घटनाक्रम का वर्णन किया था। सोनिया गांधी की नई पुस्तक में निजी रिश्तों, पारिवारिक त्रासदियों और राजनीतिक जीवन से जुड़े अनुभवों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

  • कौन हैं ITBP के शौर्य कमांडो, LAC पर चीनी सैनिकों के सामने कैसे संभालते हैं मोर्चा..

    कौन हैं ITBP के शौर्य कमांडो, LAC पर चीनी सैनिकों के सामने कैसे संभालते हैं मोर्चा..


    नई दिल्ली
    । भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा सुरक्षा और सैनिकों की गश्त को लेकर सतर्कता लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में दोनों देशों के सैनिकों के आमने-सामने आने की स्थितियों के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के शौर्य कमांडो विशेष चर्चा में हैं। कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में काम करने के लिए प्रशिक्षित ये जवान सीमा पर त्वरित प्रतिक्रिया देने और तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    राजस्थान के अलवर में आयोजित ITBP के वार्षिक अभिनंदन समारोह में संगठन के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में LAC के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना तथा तनातनी की स्थिति बने रहने की बात कही। उन्होंने शौर्य कमांडो के प्रदर्शन और उनकी भूमिका की भी सराहना की। इन विशेष दस्तों का उद्देश्य संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में जवानों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करना है।

    शौर्य कमांडो दस्तों के गठन की पृष्ठभूमि वर्ष 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प से जुड़ी है। इस घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त, निगरानी और सैनिकों की त्वरित तैनाती को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत महसूस की गई। इसी दिशा में ITBP ने अपने जवानों में से शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक तौर पर मजबूत और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों को चुनकर विशेष प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की।

    इन कमांडो को भारतीय सेना की घातक प्लाटून की तर्ज पर तैयार किया गया है। इनके प्रशिक्षण में पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही, अत्यधिक ठंड में काम करना, हाथों से मुकाबला करने की तकनीक, हथियारों का संचालन और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संयम बनाए रखना शामिल है। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी, दुर्गम रास्तों और बेहद कम तापमान के बीच काम करना इनके लिए बड़ी चुनौती होती है। इसलिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक दृढ़ता भी इनके प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है।

    ITBP की तैनाती व्यवस्था के तहत चीन सीमा पर तैनात प्रत्येक बटालियन के साथ कम से कम एक शौर्य कमांडो टीम जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इनकी भूमिका को देखते हुए दो अतिरिक्त इकाइयां तैयार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। भविष्य में इन दस्तों को कंपनी स्तर तक विकसित करने और एक अलग, समर्पित बटालियन बनाने की योजना पर काम किए जाने की बात कही गई है। ऐसी इकाई तैयार होने पर जरूरत के समय विशेष प्रशिक्षित जवानों को तनावग्रस्त क्षेत्रों में तेजी से पहुंचाने की क्षमता बढ़ सकती है।

    अरुणाचल प्रदेश में बुमला और मेचूका जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सीमा पर गश्त और सैनिकों की गतिविधियों पर निगरानी महत्वपूर्ण है। जब दोनों देशों के जवान आमने-सामने आते हैं, तब प्रशिक्षित टीमें स्थिति को संभालने, रास्ता रोकने और भारतीय क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में भूमिका निभा सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के साथ तनाव को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोकना भी महत्वपूर्ण होता है।

    सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ITBP आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संगठन ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों सहित तकनीकी संसाधनों पर निवेश बढ़ा रहा है। सीमा पर तैनात बटालियनों में ड्रोन प्लाटून शामिल किए जाने की व्यवस्था भी बताई गई है, जिनका संचालन प्रशिक्षित जवान करते हैं। ड्रोन के जरिए दुर्गम घाटियों और ऊंची चोटियों पर गतिविधियों की निगरानी की जा सकती है। इससे जमीन पर तैनात जवानों को परिस्थितियों की जानकारी मिलने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने में सहायता मिलती है।

    इस तरह शौर्य कमांडो की विशेष ट्रेनिंग, बटालियन स्तर पर तैनाती और आधुनिक निगरानी तकनीक का इस्तेमाल LAC पर ITBP की तैयारियों का हिस्सा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करते हुए इन दस्तों की भूमिका त्वरित प्रतिक्रिया, सतर्कता और संवेदनशील परिस्थितियों के प्रबंधन से जुड़ी हुई है।