Author: bharati

  • ट्रंप की आर्थिक नीतियों पर भारी पड़ा अविश्वास: मंदी की दहलीज पर अमेरिका, कोविड काल से भी नीचे गिरा उपभोक्ता भरोसा

    ट्रंप की आर्थिक नीतियों पर भारी पड़ा अविश्वास: मंदी की दहलीज पर अमेरिका, कोविड काल से भी नीचे गिरा उपभोक्ता भरोसा


    नई दिल्ली। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन और डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति की वापसी के बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था गहरे संकट के संकेतों से घिरी नजर आ रही है। सख्त इमिग्रेशन नियमों और भारी-भरकम टैरिफ के जरिए देश को ट्रिलियन डॉलर का फायदा पहुंचाने के ट्रंप सरकार के दावों पर अब खुद अमेरिकी जनता ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। ताजा आर्थिक आंकड़ों ने व्हाइट हाउस की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि अमेरिका का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स उपभोक्ता विश्वास सूचकांक फिसलकर उस स्तर पर जा पहुंचा है जो 2020-21 की विनाशकारी कोविड महामारी के दौर में भी नहीं देखा गया था।

    आंकड़ों में मंदी की आहट यूएस कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा जनवरी 2026 के लिए जारी किए गए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। उपभोक्ता विश्वास का ग्राफ एक ही महीने में 94.2 फीसदी से गिरकर 84.5 फीसदी पर आ गया है। साल 2014 के बाद यह सबसे निचला स्तर है जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जनता का अपनी अर्थव्यवस्था पर से भरोसा डगमगा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नागरिकों में भविष्य की आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं लगातार गहरा रही हैं। विशेष रूप से एक्सपेक्टेशन इंडेक्स जो भविष्य की आय और व्यावसायिक स्थितियों का आकलन करता है वह 65.1 पॉइंट पर आ गया है। अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि यदि यह सूचकांक 80 से नीचे रहता है तो यह आने वाली भीषण मंदी का स्पष्ट पूर्व-संकेत होता है। ऐसे में ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन जैसे नारे अब धरातल पर हवा-हवाई साबित होते दिख रहे हैं।

    महंगाई और बेरोजगारी का दोहरा वार अमेरिकी जनता के इस असमंजस के पीछे सबसे बड़ा कारण बेतहाशा बढ़ती महंगाई है। किराने का सामान और रोजमर्रा की जरूरतें इतनी महंगी हो गई हैं कि मध्यम वर्ग की कमर टूट चुकी है। कॉन्फ्रेंस बोर्ड की चीफ इकॉनमिस्ट दाना पीटरसन का कहना है कि सूचकांक के पांचों प्रमुख घटक अपने निचले स्तर पर हैं। वहीं दूसरी ओर लेबर मार्केट की स्थिति भी उत्साहजनक नहीं है। ट्रंप सरकार ने स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के नाम पर वीजा और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा तो किया लेकिन इसका सकारात्मक असर नौकरियों पर नहीं दिखा। दिसंबर 2025 में केवल 50 हजार नई नौकरियां सृजित हुईं जबकि तुलनात्मक रूप से साल 2024 में जहां 20 लाख नौकरियां मिली थीं वहीं 2025 में यह आंकड़ा सिमटकर महज 6 लाख रह गया।

    टैरिफ और ट्रेड पॉलिटिक्स का दुष्प्रभाव डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड वॉर और टैरिफ नीतियों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है जिससे लेबर मार्केट में लो हायर-लो फायर (कम भर्ती कम छंटनी) की स्थिति बन गई है। कंपनियां अनिश्चितता के माहौल में नई नियुक्तियों से बच रही हैं। वर्तमान में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत है लेकिन रोजगार सृजन की सुस्त रफ्तार ने भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। निष्कर्षतः ट्रंप की आर्थिक नीतियां फिलहाल उनके ही प्रशासन के लिए गले की हड्डी बनती दिख रही हैं जहां दावे तो ट्रिलियन डॉलर के मुनाफे के हैं लेकिन हकीकत में जनता मंदी के साये में जीने को मजबूर है।

  • सरहद पार से आई सुखद खबर: लाहौर किले में 'लौह मंदिर' का जीर्णोद्धार संपन्न, अब लव की नगरी में गूंजेगी आस्था

    सरहद पार से आई सुखद खबर: लाहौर किले में 'लौह मंदिर' का जीर्णोद्धार संपन्न, अब लव की नगरी में गूंजेगी आस्था


    नई दिल्ली । भगवान श्री राम के भक्तों और भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था रखने वालों के लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित लाहौर किले के भीतर स्थित प्राचीन लौह मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सदियों पुराने इस मंदिर की चमक अब फिर से लौट आई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने इसे अब आम जनता और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया है।

    यह मंदिर केवल एक ढांचा नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर रामायण काल और भगवान श्री राम के कुल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार यह मंदिर भगवान राम के पुत्र लव को समर्पित है। जनश्रुतियों में यह गहरा विश्वास है कि वर्तमान लाहौर शहर की स्थापना माता सीता के ज्येष्ठ पुत्र लव ने ही की थी और उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम कालांतर में लाहौर पड़ा। यही कारण है कि इस मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व सरहद के दोनों ओर रहने वाले लोगों के लिए बेहद खास है।

    सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की कवायद वाल्ड सिटी लाहौर अथॉरिटी ने मंगलवार को आधिकारिक रूप से इस पुनरुद्धार की घोषणा की। अथॉरिटी की प्रवक्ता तानिया कुरैशी ने मीडिया को बताया कि लौह मंदिर के साथ-साथ सिख साम्राज्य की स्मृतियों को संजोए हम्माम और महाराजा रणजीत सिंह के प्रसिद्ध अठदारा पैविलियन का भी संरक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस पूरे अभियान का मूल उद्देश्य लाहौर किले की उस बहुआयामी विरासत को प्रदर्शित करना है, जहाँ मुगलकालीन मस्जिदें, ब्रिटिश काल के भवन और हिंदू-सिख मंदिर एक साथ खड़े होकर इतिहास की गवाही देते हैं। जीर्णोद्धार की प्रक्रिया में ऐतिहासिक मौलिकता को बनाए रखने के लिए आधुनिक और व्यापक वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया गया है।

    सिख साम्राज्य का वैभव और शोध इस जीर्णोद्धार के पीछे एक लंबा शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों का गहरा अध्ययन शामिल है। साल 2025 में एक सिख शोधकर्ता ने लाहौर किले में सिख युग 1799-1849 के दौरान मौजूद लगभग 100 स्मारकों की पहचान की थी। हालांकि समय की मार के कारण इनमें से 30 स्मारक अब विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन शेष बचे हिस्सों को बचाने के लिए अब बड़े स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित सिख शोधकर्ता डॉ. तरुणजीत सिंह बुटालिया को एक विशेष टूर गाइडबुक ‘सिख साम्राज्य के दौरान लाहौर किला’ लिखने का दायित्व सौंपा गया है।

    डॉ. बुटालिया ने इस प्रोजेक्ट पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि लाहौर किला सिख मानस और हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए भावनात्मक रूप से बहुत करीब है। यह किला आधी शताब्दी तक सिख सत्ता का केंद्र रहा और उनके पूर्वजों ने भी इसी दरबार में अपनी सेवाएं दी थीं। इस मंदिर का खुलना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि दक्षिण एशिया की साझा विरासत और अंतर-सांस्कृतिक सौहार्द को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। अब दुनिया भर से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु लाहौर किले में लव की विरासत और सिख काल के वैभव को करीब से देख सकेंगे।

  • Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी पर भूल से भी न करें इन चीजों का दान, वरना भगवान विष्णु हो जाएंगे नाराज

    Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी पर भूल से भी न करें इन चीजों का दान, वरना भगवान विष्णु हो जाएंगे नाराज

    नई दिल्ली | Jaya Ekadashi 2026 Daan NIyam: जया एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा, व्रत और सही चीजों का दान करने से व्यक्ति के जीवन से दुख-कष्ट दूर होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है। लेकिन शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि जया एकादशी के दिन कुछ चीजों का दान करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पूजा का फल कम हो सकता है और भगवान विष्णु अप्रसन्न हो सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि जया एकादशी पर किन चीजों का दान नहीं करना चाहिए।

    मांस और शराब से जुड़ी चीजें
    जया एकादशी के दिन सात्विकता का विशेष महत्व होता है। इस दिन भूलकर भी मांस, मछली, अंडा या शराब जैसी तामसिक चीजों का दान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत की पवित्रता भंग होती है।

    काले तिल और लोहे की चीजें
    शास्त्रों के अनुसार, जया एकादशी के दिन लोहे या उससे निर्मित किसी भी उपकरण का दान नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही काले तिल का दान करने से भी बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ये वस्तुएं शनि ग्रह से संबंधित मानी जाती हैं, इसलिए इस दिन इनका दान करने से जीवन में अचानक बाधाएं आ सकती हैं और सकारात्मक ऊर्जा में धीरे-धीरे कमी आने लगती है।

    काले रंग की वस्तुएं
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े या अन्य काली वस्तुओं का दान अशुभ माना जाता है। जया एकादशी पर पीले या सफेद रंग की चीजें ही शुभ फल देती हैं।

    चमड़े से बनी वस्तुएं
    जूते-चप्पल, बेल्ट या कोई भी चमड़े की वस्तु जया एकादशी के दिन दान नहीं करनी चाहिए। यह दिन पूरी तरह सात्विक और शुद्ध माना जाता है।

    झूठ, धोखा और गलत कमाई से मिली चीजें
    अगर किसी वस्तु को गलत तरीके से कमाया गया हो या उसमें छल-कपट जुड़ा हो, तो उसका दान करने से पुण्य नहीं मिलता। जया एकादशी पर हमेशा साफ मन और ईमानदारी से दान करना चाहिए।

    अनाज का दान बिना नियम जाने
    कुछ मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन कच्चे अनाज का दान करने से पहले नियम जान लेना जरूरी होता है। बिना जानकारी के अनाज दान करने से लाभ की जगह नुकसान हो सकता है।

    जया एकादशी पर क्या करना चाहिए?
    इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें, तुलसी को जल चढ़ाएं, जरूरतमंद लोगों को फल, दूध, मिठाई, पीले वस्त्र या धन का दान करें। साथ ही मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें।

  • Ajit Pawar Death: क्या करते हैं अजित पवार की पत्नी और बच्चे, जानें पॉलिटिक्स से किसका कितना कनेक्शन?

    Ajit Pawar Death: क्या करते हैं अजित पवार की पत्नी और बच्चे, जानें पॉलिटिक्स से किसका कितना कनेक्शन?

    नई दिल्ली | Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के बारामती से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां एक विमान दुर्घटना में एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया है. खबर है कि यह हादसा बुधवार, 28 जनवरी 2026 को सुबह नौ बजे के बाद हुआ और इसमें कुल छह लोगों के मरने की बात कही जा रही है. इन्हीं खबरों के बीच यह जानना अहम हो जाता है कि अजित पवार का परिवार क्या करता है और उनका राजनीति से कैसा और कितना गहरा जुड़ाव रहा है.

    पवार परिवार और राजनीति की मजबूत जड़ें

    अजित पवार महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा में जन्मे हैं. उनके पिता का नाम अनंतराव पवार और माता आशाताई पवार थीं. वह देश के वरिष्ठ नेता शरद पवार के भतीजे हैं. शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं और चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इसी वजह से पवार परिवार की पहचान दशकों से राजनीति के केंद्र में रही है.

    अजित पवार की पत्नी

    अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार न सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा हैं, बल्कि संगठन और सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी भूमिका रही है. वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही हैं और राज्यसभा सदस्य के रूप में भी काम कर चुकी हैं. इसके साथ ही सुनेत्रा पवार बारामती टेक्सटाइल कंपनी से भी जुड़ी रही हैं और पर्यावरण से जुड़े संगठनों में उनकी सक्रियता रही है. उन्हें पवार परिवार की रणनीतिक और शांत भूमिका निभाने वाली सदस्य माना जाता है.

    बड़ा बेटा जय पवार

    अजित पवार के बड़े बेटे जय पवार ने राजनीति के बजाय कारोबार का रास्ता चुना है. वह बिजनेस सेक्टर से जुड़े हुए हैं और पारिवारिक औद्योगिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बताई जाती है. जय पवार सार्वजनिक राजनीति में सक्रिय नहीं दिखते, लेकिन आर्थिक और प्रबंधन से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है.

    पार्थ पवार

    अजित पवार के छोटे बेटे पार्थ पवार ने राजनीति में कदम रखा और लोकसभा चुनाव भी लड़ा. हालांकि उन्हें उस चुनाव में जीत नहीं मिल सकी, लेकिन उनकी राजनीतिक मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि नई पीढ़ी भी पवार परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी हुई है. पार्थ पवार युवाओं के बीच संपर्क और पार्टी कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आते रहे हैं.

    शरद पवार परिवार से जुड़ा व्यापक नेटवर्क

    पवार परिवार सिर्फ अजित पवार तक सीमित नहीं है. शरद पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार स्वयं राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं. उनके बेटे जय पवार और भतीजे-भतीजियां भी राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रहते हैं. युगेंद्र पवार जैसे युवा चेहरे भी समय-समय पर सार्वजनिक मंचों पर नजर आते हैं, जिससे साफ होता है कि यह परिवार आने वाले समय में भी राजनीति में प्रभाव बनाए रखने की तैयारी में है.

  • कॉमेडी से दूरी पर ज़ाकिर खान का खुलासा: ‘मैंने खुद अपने शरीर को नुकसान पहुंचाया है’

    कॉमेडी से दूरी पर ज़ाकिर खान का खुलासा: ‘मैंने खुद अपने शरीर को नुकसान पहुंचाया है’


    नई दिल्ली | स्टैंड-अप कॉमेडियन ज़ाकिर ख़ान ने हाल ही में घोषणा की है कि वे कॉमेडी और लाइव परफॉर्मेंस से एक लंबा ब्रेक लेने जा रहे हैं। इस बार उन्होंने अपने ब्रेक के पीछे का कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और परिवार में मौजूद कुछ जेनेटिक बीमारियों को बताया।

    स्वास्थ्य कारणों से लिया फैसला
     

    बातचीत में ज़ाकिर ने माना कि लगातार काम करते-करते उन्होंने अपने स्वास्थ्य की अनदेखी की। उन्होंने कहा, “मुझे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। हमारे परिवार में कुछ जेनेटिक बीमारियां हैं जो किसी खास उम्र के बाद सामने आती हैं। इसके साथ ही मैंने खुद भी अपनी बॉडी को नुकसान पहुँचाया है। रात में सिर्फ दो घंटे सोकर मैं हजारों लोगों से मिलने निकल जाता था। जैसे ही किसी शहर में उतरता, तुरंत लोगों से मिलना शुरू कर देता।”

    ज़ाकिर ने बताया कि वह अपने परिवार में सबसे पहले बड़े पैमाने पर सफलता हासिल करने वाले सदस्य हैं, जिसके कारण जिम्मेदारी का एहसास उन्हें काम के प्रति ज़्यादा प्रेरित करता रहा। यह भावना उन्हें लगभग एक दशक तक अपने स्वास्थ्य से ऊपर काम को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करती रही।

    लगातार दस साल काम का असर

    ज़ाकिर ने कहा, “जब आप दस साल लगातार पैडल दबाए रखते हैं, तो शरीर पर असर पड़ना तय है। शुरू में मैंने सोचा कि स्वास्थ्य और काम दोनों संभाल लूंगा। लेकिन पिछले साल जब हम अमेरिका में थे, तब मुझे एहसास हुआ कि दोनों साथ में नहीं चल सकते। तब मैंने यह फैसला लिया।”

    ब्रेक की अवधि और योजनाएं

    हाल ही में हैदराबाद में अपने Papa Yaar टूर के शो में ज़ाकिर ने बताया कि उनका ब्रेक कई सालों तक चल सकता है और यह 2028, 2029 या 2030 तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा, “यह तीन, चार या पांच साल का ब्रेक होगा ताकि मैं अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकूं और कुछ अन्य व्यक्तिगत चीज़ें सुलझा सकूं। आज यहाँ मौजूद हर कोई मेरे दिल के बहुत करीब है। आपकी मौजूदगी मेरे लिए अनमोल है और मैं हमेशा आपका आभारी रहूंगा।”

    ज़ाकिर ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए भी यह जानकारी दी कि 20 जून तक के सभी शो एक जश्न की तरह होंगे, और इसके बाद वे अपनी सेहत और परिवार पर ध्यान देंगे।

  • अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह, चाचा की छाया से निकलकर बनाई थी अपनी जगह

    अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह, चाचा की छाया से निकलकर बनाई थी अपनी जगह

    नई दिल्ली | महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई.

    सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में कदम रखा. वो अपनी राजनीतिक कौशल के जरिए पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाया. पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एनसीपी को एक बड़ा जनाधार तैयार करने में अहम रोल अदा किया, लेकिन 2022 में शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक लकीर खींची और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई.

    अजित पवार के पिता फिल्म जगत से जुड़े

    22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर जन्मे अजित पवार, शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवरा के बेटे हैं. उनके पिता फिल्म जगत से जुड़े हुए थे. अनंतराव ने मुंबई में मौजूद वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम किया. अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और उनके दो बच्चे हैं, जिनका नाम पार्थ पवार और जय पवार है,

    महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से अजित पवार ने प्राथमिक शिक्षा हासिल की, हालांकि, जब वो कॉलेज में थे तो उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद सियासत में कदम रखा.

    शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में आए

    अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर साल 1982 में राजनीति में कदम रखा. अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा यानी शरद पवार एक दिग्गज सियासी नेता बन चुके थे. राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने लड़ा. वो पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुने गए, वो16 सालों तक इस पद पर काबिज रहे.

    साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी. इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने. यहीं से शरद पवार केंद्र की राजनीति में खुद को सक्रिय कर लिया तो अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत की कमान अपने हाथ में ले ली.

    शरद पवार के सियासी वारिस बनकर उभरे

    अजित पवार ने अपनी मेहनत और लगन के बाद खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के तौर पर महाराष्ट्र में स्थापित किया. महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली, इसके बाद साल 1995 में वो पहली बार पुणे जिले में बारामती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने. इसके बाद से वो लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चुने जाते रहे, उन्होंने साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक बने. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में खुद को स्थापित ही नहीं किया बल्कि अपनी पकड़ भी बनाई.

    विधायक से डिप्टी सीएम तक का सियासी सफर

    अजित पवार ने अपने 45 साल के सियासी सफर में एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे. उन्होंने खुद को महाराष्ट्र के राजनीति तक सीमित रखा. सरकार में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभालने का तजुर्बा है, उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया, उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में काम किया, इसके बाद जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने तो उन्हें मंत्री बनाया गया.

    साल 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई तो उन्हों विलासराव देशमुख की सरकार सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया. वहीं, साल 2003-2004 में सुशील कुमार शिंदे की सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया. इसके बाद उपमुख्यमंत्री बने.

    एक साल में दो बार अजित पवार बने डिप्टी सीएम

    साल 2019 के बाद अजित पवार की राजनीतिक करियर काफी दिलचस्प रही. उन्होंने 2019 में दो अलग-अलग मुख्यमंत्री के अधीन उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. 23 नवंबर की सुबह उन्होंने देवेंद्र फडनवीस के साथ उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. लेकिन, सदन में फडनवीस बहुमत साबित करने में नाकाम रहे। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की शपथ ली तो उन्हें एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब साल 2023 में वो एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने हैं. वो अबतक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं.

    अजित पवार पहली बार साल 2010 के नवंबर महीने में उपमुख्मंत्री बने, इसके बाद साल 2010 में वो दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने. 2019 में फडणवीस के साथ डिप्टीसीएम बने और फिर उद्धव ठाकरे के अगुवाई में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उसमें भी डिप्टीसीएम रहे. इसके बाद 2023 में शरद पवार के बगावत कर शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टीसीएम बने. 2024 में छठी बार डिप्टीसीएम बने.

    2022 में अजित पवार ने किया चाचा से बगावत

    अजित पवार जिस चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति सीखा, लेकिन शरद पवार ने अपने सियासी वारिस के तौर पर बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाने लगे तो फिर अजित पवार ने अपनी अलग सियासी राह चुन ली. एनसीपी के तमाम नेताओं को लेकर बीजेपी के अगुवाई वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए. 2023 में अजित पवार ने पूरी तरह से एनसीपी पर कब्जा जमा लिया. 2024 में खुद को स्थापित करने में भी सफल रहे.

  • 'दादा के बिना महाराष्ट्र की राजनीति कुछ नहीं', अजित पवार के निधन पर संजय राउत ने जताया दुख

    'दादा के बिना महाराष्ट्र की राजनीति कुछ नहीं', अजित पवार के निधन पर संजय राउत ने जताया दुख


    नई दिल्ली| महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ और लोकप्रिय नेता अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे. बुधवार, 28 जनवरी को बारामती प्लेन क्रैश में उनका निधन हो गया. यह हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को कुछ सोचने-समझने का समय ही नहीं मिला. अजित पवार के निधन पर पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर है. उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने भी शोक व्यक्त किया है.

    शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे ‘महाराष्ट्र की राजनीति का काला दिन’ बताया है. उन्होंने कहा कि अजित पवार के बिना महाराष्ट्र की राजनीति कुछ नहीं है.

    ‘कभी सोचा नहीं था अजित पवार की सियासत ऐसे खत्म होगी’
    संजय राउत ने कहा कि अजित पवार ने शरद पवार के बिना राजनीति शुरू की थी, लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह ऐसे खत्म होगी. हमने चैनल पर उनके काम के बारे में एक वीडियो देखा था. उन्हें वाक्य कहने का हुनर था.

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी के चेयरमैन अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे। बुधवार, 28 जनवरी को बारामती में उनके निजी विमान के क्रैश में अचानक निधन हो गया, जिससे राज्य में शोक की लहर फैल गई। यह हादसा इतना त्वरित था कि किसी को कुछ सोचने-समझने का मौका तक नहीं मिला। शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इसे महाराष्ट्र की राजनीति का काला दिन बताया और कहा कि अजित पवार के बिना राज्य की राजनीति अधूरी है।
    अजित पवार को बारामती से था गहरा लगाव
    शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अजित पवार को याद करते हुए कहा कि उनकी पर्सनालिटी बहुत खुले दिल की थी और हर कार्यकर्ता उन्हें बेहद चाहता था। उन्होंने बताया कि अजित पवार की प्रशासनिक पकड़ मजबूत थी और उन्हें बारामती से गहरा लगाव था। राउत ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार में वे डिप्टी सीएम के रूप में कैबिनेट को पूरी तरह तैयार करते थे और राज्य के शिक्षा क्षेत्र में भी उनका योगदान अहम रहा।

    अजित पवार की सियासत का अचानक अंत
    संजय राउत ने कहा कि अजित पवार ने शरद पवार के बिना राजनीति की शुरुआत की थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि उनका सियासी सफर इतना अचानक खत्म हो जाएगा। उन्होंने याद किया कि हाल ही में चैनल पर उनके काम का वीडियो देखा गया था और अजित पवार को वाक्य कहने का खास हुनर हासिल था।
    अजित पवार: महाराष्ट्र का अधूरा सपना
    शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र पर ऐसे संकट आए कि कई बड़े नेता गुज़र गए। अजित पवार रिकॉर्ड पांच या छह बार उपमुख्यमंत्री रहे और अगर वे मुख्यमंत्री बनते, तो राज्य को एक महान नेतृत्व मिलता। ठाकरे ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अचानक निधन पर दुख व्यक्त किया।
  • झुर्रियां होंगी छूमंतर, चेहरे पर आएगा चांदी जैसा निखार; इन 5 जड़ी-बूटियों से घर पर बनाएं 'नेचुरल नाइट सीरम

    झुर्रियां होंगी छूमंतर, चेहरे पर आएगा चांदी जैसा निखार; इन 5 जड़ी-बूटियों से घर पर बनाएं 'नेचुरल नाइट सीरम


    नई दिल्ली । खूबसूरत, बेदाग और ग्लोइंग स्किन की चाहत आज हर किसी को है। लेकिन बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स अक्सर त्वचा को निखार देने के बजाय उसे नुकसान पहुँचाते हैं। ऐसे में आयुर्वेद की प्राचीन विधाएं एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनकर उभरी हैं। आयुर्वेद में कई ऐसी औषधीय जड़ी-बूटियों और जड़ों का उल्लेख मिलता है जो त्वचा को अंदर से गहराई तक पोषण देती हैं। अगर आप भी झुर्रियों और बेजान त्वचा से परेशान हैं, तो घर पर इन 5 जड़ी-बूटियों से बना नेचुरल नाइट सीरम आपकी किस्मत बदल सकता है।

    कौन सी हैं वो 5 चमत्कारी जड़ी-बूटियां? विशेषज्ञों के अनुसार, केसर, चंदन, मंजिष्ठा, मुलेठी और हल्दी का अर्क जब सही अनुपात में मिलाया जाता है, तो यह त्वचा के लिए एक शक्तिशाली अमृत बन जाता है। केसर त्वचा की रंगत सुधारता है, तो मंजिष्ठा रक्त शोधन कर कील-मुहासों को रोकता है। वहीं मुलेठी और हल्दी झुर्रियों को कम करने और एंटी-एजिंग गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं।

    कैसे काम करता है यह सीरम? रात के समय हमारी त्वचा खुद को ‘रिपेयर’ यानी ठीक करती है। जब हम सोने से पहले इस आयुर्वेदिक सीरम का इस्तेमाल करते हैं, तो इसमें मौजूद सक्रिय तत्व त्वचा के छिद्रों में गहराई तक समा जाते हैं। यह कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे झुर्रियां कम होती हैं और त्वचा में कसाव आता है। नियमित इस्तेमाल से यह सीरम न केवल झाइयां और दाग-धब्बों को हल्का करता है, बल्कि त्वचा को प्राकृतिक रूप से चमकदार भी बनाता है। प्राकृतिक और शुद्ध होने के कारण यह हर तरह की स्किन के लिए अनुकूल है। यदि आप इसे अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाते हैं, तो कुछ ही दिनों में आपका चेहरा जवां और चमकदार नजर आने लगेगा।

  • सावधान! पेपर कप में चाय-कॉफी पीना बन सकता है सेहत के लिए ज़हर, कैंसर और थायरॉइड का बढ़ता खतरा

    सावधान! पेपर कप में चाय-कॉफी पीना बन सकता है सेहत के लिए ज़हर, कैंसर और थायरॉइड का बढ़ता खतरा


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चाय और कॉफी पीने के लिए पेपर कप का इस्तेमाल आम हो गया है। ऑफिस, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और स्ट्रीट वेंडर्स पर इन्हें सुरक्षित और इको-फ्रेंडली मानकर धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी चौंकाने वाली है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक पेपर कप में गर्म चाय या कॉफी पीना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है और इससे कैंसर व थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    दरअसल, पेपर कप पूरी तरह कागज से नहीं बने होते। इन्हें वाटरप्रूफ बनाने के लिए अंदर की परत में प्लास्टिक या वैक्स कोटिंग की जाती है। जब इनमें गर्म पेय डाला जाता है, तो यह परत पिघलने लगती है और उससे हानिकारक केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक चाय-कॉफी में मिल जाते हैं, जो सीधे शरीर में पहुंचते हैं।

    सेहत पर कैसे पड़ता है असर?
    डॉक्टर्स के अनुसार, पेपर कप में मौजूद BPA (बिसफेनोल-A) और अन्य केमिकल्स गर्म तरल के संपर्क में आकर एक्टिव हो जाते हैं। इनका लगातार सेवन करने से हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड की समस्या, और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

    इसके अलावा, माइक्रोप्लास्टिक कण पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एसिडिटी, पेट दर्द, गैस, अपच और आंतों से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजाना पेपर कप में गर्म पेय पीने से शरीर में टॉक्सिन्स धीरे-धीरे जमा होने लगते हैं।

    पर्यावरण के लिए भी खतरा
    पेपर कप सिर्फ सेहत ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं। प्लास्टिक कोटिंग के कारण इन्हें पूरी तरह रिसायकल करना मुश्किल होता है। जलाने पर ये जहरीली गैसें छोड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।

    क्या करें, क्या न करें
    अगर आप खुद को और अपने परिवार को इन खतरों से बचाना चाहते हैं, तो पेपर कप का इस्तेमाल कम से कम करें। चाय-कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक कप सबसे सुरक्षित माने जाते हैं। ये न केवल सेहत के लिए बेहतर हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार हैं।

  • UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें , जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र

    UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें , जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र


    नई दिल्ली । UGC बिल 2026 का विरोध तेज हो गया है. अब इसमें अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य भी कूद गए हैं. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है मांग की है कि या तो यूजीसी के नए नियमों को वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए. नए नियमों के खिलाफ यूपी के अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. नए नियमों का विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि इसमें सर्वण छात्रों को पहले ही दोषी माना गया.

    किसने क्या कहा

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू- हम कानून के तहत ही काम करते हैं  देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक, बीजेपी- इस से समाज में नफरत बढ़ेगी उपेंद्र कुशवाहा, अध्यक्ष, RLSP- गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए नियम चंद्रशेखर आजाद, अध्यक्ष, ASP- बाकी मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है फौजिया खान, सांसद, NCP- शिक्षा में ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए  हरीश चंद, प्रवक्ता, बीजेपी- लोगों के मतभेद पर सरकार विचार करेगी  मणिकम टैगोर, सांसद, कांग्रेस- शिक्षण संस्थानों पर RSS का कंट्रोल  राकेश टिकैत, प्रवक्ता, BKU- ऐसी चीजों से जातिगत दुश्मनी बढ़ती है  रामगोपाल यादव, सांसद, SP- UGC ने कुछ गलत नहीं किया

    UGC का नया एक्ट

    जातीय भेदभाव में SC/ST के अलावा OBC शामि झूठी शिकायतों पर जुर्माना और निलंबन नही कॉलेज, यूनिवर्सिटी में 24 घंटे हेल्पलाइन का गठन कमेटी में SC/ST, OBC, महिला का प्रतिनिधित्व UGC एक्ट पर सवर्णों का दावा सवर्णों को अच्याचारी मानने वाला एक्ट झूठी शिकायत करने पर कोई सजा नहीं सवर्ण छात्रों पर लगेंगे फर्जी आरोप भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ
    कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अस्पष्ट 
    कहां-कहां विरोध
    लखनऊ- करणी सेना का विरोध-प्रदर्शन गोंडा-विरोध में बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण रायबरेली-भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं सोनभद्र-सवर्ण समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय घेरा फर्रुखाबाद-प्रधानमंत्री गद्दी छोड़ो के नारे लगे प्रतापगढ़-सवर्ण एकता जिंदाबाद के नारे लगे
    वाराणसी- विरोध में “हमारी भूल, कमल का फूल नारे लगे मेरठ- राजपूत समाज के लोगों ने विरोध किया संभल- काली पट्टी बांधकर विरोध में सड़कों पर नारेबाजी फर्रुखाबाद- फतेहगढ़ स्टेडियम के बाहर सवर्ण समाज की नारेबाजी लखीमपुर- सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा के विरोध में शपथ ली
    दिल्ली- UGC के नये नियम के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन

    विरोध में बीजेपी में इस्तीफे
    BJP के 11 जिला पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफानोएडा- BJYM के जिला उपाध्यक्ष का इस्तीफा रायबरेली- भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष का इस्तीफा इगलास अलीगढ़ भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी का इस्तीफा वाराणसी- BJP बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया
    नए नियम क्यों बने
    17 दिसंबर 2012 से जारी पुराने नियम2016 में छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या की
    जातीय उत्पीड़न के चलते आत्महत्या की मई 2019 में एक मेडिकल छात्रा ने आत्महत्या की जातीय उत्पीड़न के आरोप में आत्महत्या की 29 अगस्त 2019 को SC में याचिका दाखिल  जातीय भेदभाव पर सख्त नियम बनाने की याचिका जनवरी 2025 को SC ने UGC को निर्देश दिए फरवरी 2025 में नए नियमों का ड्राफ्ट जारी हुआ
    संसदीय समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा की कमेटी के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह थे ड्राफ्ट में OBC को शामिल नहीं किया गया था झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान था कमेटी ने ड्राफ्ट में OBC को शामिल कराया कमेटी ने झूठी शिकायत करने पर सजा भी हटाई