Author: bharati

  • अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग

    अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग


    नई दिल्ली। भोपाल में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। जिला प्रशासन की पहल पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए एक बार फिर नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस शुरू की जा रही हैं। इस बार नए बैच में 50 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए 24 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं और आवेदन की प्रक्रिया 31 अगस्त तक चलेगी। विद्यार्थियों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

    निःशुल्क कोचिंग की शुरुआत 5 सितंबर से होगी। इस बार क्लासेस पॉलीटेक्निक चौराहा स्थित हिंदी भवन में आयोजित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। प्रशासन की इस पहल से UPSC और MPPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बिना फीस के पढ़ाई और मार्गदर्शन हासिल करने का मौका मिलेगा।

    इस फ्री कोचिंग में केवल किताबों और सामान्य अध्ययन तक सीमित तैयारी नहीं होगी, बल्कि विद्यार्थियों को अनुभवी लोगों और विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी मिलेगा। स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोग और कॉलेज के प्रोफेसर्स भी विद्यार्थियों को पढ़ाने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन से जुड़े ऐसे अधिकारी, जिनकी पढ़ाने में रुचि है, वे भी नियमित रूप से क्लास लेंगे। अधिकारियों की ओर से रोजाना करीब एक से दो घंटे की कक्षाएं लेने की योजना है।

    कोचिंग में अलग-अलग विषयों की तैयारी के लिए विषय विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों को परीक्षा के सिलेबस को समझने, जरूरी विषयों पर फोकस करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन की कोशिश है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए, जहां वे आर्थिक दबाव के बिना अपनी तैयारी को मजबूत कर सकें।

    भोपाल जिला प्रशासन ने करीब दो साल पहले इस तरह की नि:शुल्क कोचिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए यह पहल लगातार उपयोगी साबित हो रही है। इस बार भी नए बैच के जरिए अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर उन छात्रों को इससे फायदा हो सकता है, जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद कोचिंग की महंगी फीस के कारण अच्छे संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।

    इस नि:शुल्क कोचिंग का संचालन जिला प्रशासन भोपाल के मार्गदर्शन में आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा की ओर से पं. रविशंकर शुक्ल न्यास के सहयोग से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी रजिस्ट्रेशन और प्रवेश से जुड़ी जानकारी के लिए 8357835433 और 9584732481 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और जरूरी जानकारी भी इन्हीं माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है।

    UPSC और MPPSC की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह मौका खास है, क्योंकि सीमित सीटों के कारण केवल 50 छात्रों को ही इस बैच में जगह मिलेगी। ऐसे में इच्छुक विद्यार्थियों को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। 5 सितंबर से हिंदी भवन में शुरू होने वाली यह पहल उन युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह बन सकती है, जो प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।

  • त्योहारी सीजन में बढ़ी मावे की मांग, खरीदारी से पहले रंग, खुशबू और बनावट देखकर ऐसे करें गुणवत्ता की शुरुआती पहचान

    त्योहारी सीजन में बढ़ी मावे की मांग, खरीदारी से पहले रंग, खुशबू और बनावट देखकर ऐसे करें गुणवत्ता की शुरुआती पहचान

    नई दिल्ली ।त्योहारों का मौसम शुरू होते ही मिठाइयों और उनसे जुड़े खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने लगती है। इस दौरान मावे का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाता है, क्योंकि कई पारंपरिक मिठाइयों में यह प्रमुख सामग्री होती है। मांग बढ़ने के साथ बाजार में घटिया या मिलावटी मावे की बिक्री की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए मावा खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

    मावा खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग और बनावट पर ध्यान दिया जा सकता है। सामान्य तौर पर अच्छी गुणवत्ता वाला मावा हल्के क्रीम या सफेद रंग का दिखाई देता है और उसकी बनावट अपेक्षाकृत नरम होती है। यदि मावा जरूरत से ज्यादा चमकदार, असामान्य रूप से सफेद या बहुत अलग रंग का नजर आए तो सावधानी बरतनी चाहिए।

    मावे को हल्के हाथ से दबाकर उसकी बनावट का शुरुआती अंदाजा भी लगाया जा सकता है। यदि वह बहुत ज्यादा रबड़ जैसा, असामान्य रूप से सख्त या बनावट में अलग महसूस हो तो उसे खरीदने से पहले अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। हालांकि केवल रंग और बनावट देखकर मावे को पूरी तरह असली या नकली घोषित नहीं किया जा सकता।

    मावे की खुशबू भी शुरुआती जांच में मदद कर सकती है। सामान्य मावे में दूध जैसी हल्की और प्राकृतिक गंध होती है। यदि उसमें तेज रासायनिक, साबुन जैसी या दूसरी असामान्य गंध महसूस हो तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है। हालांकि खुशबू भी गुणवत्ता की अंतिम पुष्टि का आधार नहीं है।

    यदि किसी विश्वसनीय दुकान पर मावा चखने की अनुमति हो तो बहुत थोड़ी मात्रा से स्वाद का अंदाजा लगाया जा सकता है। सामान्य मावे में दूध जैसा स्वाद और हल्की प्राकृतिक मिठास रहती है। कड़वा, साबुन जैसा या किसी अन्य तरह का असामान्य स्वाद मिलने पर उसे नहीं खरीदना चाहिए। बहुत अधिक मीठा स्वाद भी सावधानी का संकेत हो सकता है।

    मावे में स्टार्च जैसी मिलावट की शुरुआती जांच के लिए आयोडीन आधारित घरेलू परीक्षण का इस्तेमाल किया जाता है। थोड़े से मावे को पानी के साथ गर्म करने के बाद ठंडा किया जा सकता है और फिर आयोडीन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। मिश्रण का रंग नीला या नीला-काला होने पर उसमें स्टार्च मौजूद होने की संभावना हो सकती है। यह केवल प्रारंभिक संकेत है, इसे मिलावट का पक्का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

    मावा खरीदते समय उसकी कीमत पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि कोई उत्पाद बाजार की सामान्य कीमत की तुलना में असामान्य रूप से सस्ता मिल रहा है तो उसकी गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि मावा भरोसेमंद दुकान या डेयरी से ही खरीदा जाए।

    पैक्ड मावा खरीदते समय पैकेट की पैकिंग, तारीख और उत्पाद से जुड़ी जरूरी जानकारी अवश्य देखनी चाहिए। पैकेट फटा हुआ हो या उत्पाद की स्थिति संदिग्ध लगे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है। किसी भी तरह का संदेह होने पर मावे का सेवन न करना ही सुरक्षित विकल्प है।

    त्योहारों के दौरान मिठाइयों और मावे की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं की सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है। घरेलू तरीकों से केवल शुरुआती संकेत मिल सकते हैं, जबकि किसी खाद्य पदार्थ की वास्तविक मिलावट की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच अधिक विश्वसनीय मानी जाती है। इसलिए खरीदारी में गुणवत्ता, स्रोत और पैकेजिंग को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • सावन का चौथा सोमवार आज: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न करें, जानें पूजा विधि और व्रत के खास नियम

    सावन का चौथा सोमवार आज: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न करें, जानें पूजा विधि और व्रत के खास नियम


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पवित्र महीने में आने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन के चौथे सोमवार पर शिव भक्त सुबह से ही भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना और अभिषेक में जुट जाते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करने और व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करना और शिव मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। यदि आप भी सावन के चौथे सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो पूजा के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। संभव हो तो घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा करें या किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का दर्शन करें। शिवलिंग पर सबसे पहले स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दूध से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद दोबारा जल अर्पित करें।

    भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की भी परंपरा है। भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान चंदन लगाएं और धूप दीप जलाकर महादेव की आरती करें। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। ॐ नमः शिवाय का जाप सावन सोमवार के दिन विशेष रूप से किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत में खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है। कुछ भक्त पूरे दिन निराहार रहकर व्रत करते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना और व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। व्रत हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक भूखा रहने में परेशानी होती है तो वह अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन सोमवार के दिन केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन और व्यवहार को भी सात्विक रखना चाहिए। इस दिन क्रोध विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।

    सावन के चौथे सोमवार पर भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और विश्वास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं। इसलिए पूजा में दिखावे के बजाय मन की शुद्धता और भक्ति भावना को महत्व दें। ध्यान रखें कि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा और व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने कुलाचार और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा।

  • हथकड़ी में नजर आया इंग्लैंड का स्टार तेज गेंदबाज, पुलिस ले गई थाने, मचा हड़कंप

    हथकड़ी में नजर आया इंग्लैंड का स्टार तेज गेंदबाज, पुलिस ले गई थाने, मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ब्राइडन कार्स से जुड़ी एक घटना ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में डरहम के इस तेज गेंदबाज को डर्बी स्थित एक क्लब के बाहर पुलिस अधिकारियों के साथ हथकड़ी में जाते देखा गया। पुलिस शनिवार रात हुई एक घटना के सिलसिले में मामले की जांच कर रही है।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने रविवार को घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उसे डर्बी में हुई घटना की जानकारी है और मामले की जांच की जा रही है। बोर्ड ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जरूरत के मुताबिक आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

    पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट की टीम में हैं कार्स

    ब्राइडन कार्स इंग्लैंड की उस टीम का हिस्सा हैं, जिसे पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में उतरना है। हालांकि, पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी।

    फिलहाल ECB ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुलिस जांच के बावजूद कार्स दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम में बने रहेंगे या नहीं।

    इंग्लैंड टीम के अनुशासन पर पहले भी उठे सवाल

    कार्स के खिलाफ जांच ऐसे समय शुरू हुई है, जब इंग्लैंड की टेस्ट टीम में खिलाड़ियों के मैदान से बाहर के व्यवहार और अनुशासन को लेकर चर्चा चल रही है। टेस्ट कप्तान जो रूट ने हाल ही में खिलाड़ियों के जिम्मेदार व्यवहार और अच्छे रोल मॉडल बनने पर जोर दिया था।

    रूट ने एक क्रिकेट पॉडकास्ट में कहा था कि टीम में खिलाड़ियों पर कोई सख्त कर्फ्यू लागू नहीं किया जाएगा, लेकिन उनसे मैदान के बाहर भी समझदारी और जिम्मेदारी से फैसले लेने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा था कि इंग्लैंड के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों को अपनी मैदान के बाहर की जिम्मेदारियों का भी एहसास होना चाहिए।

    बेन स्टोक्स भी तोड़ चुके हैं टीम प्रोटोकॉल

    इंग्लैंड की टीम में अनुशासन को लेकर इस साल जून में भी विवाद हुआ था। पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन पर टीम के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का मामला सामने आया था। इसके बाद दोनों को ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया था।

    बाद में स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जबकि ब्रेंडन मैकुलम ने टेस्ट कोच का पद छोड़ दिया। ऐसे में ब्राइडन कार्स से जुड़ी ताजा घटना ने इंग्लैंड की टीम के अनुशासन और खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक

    गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक


    नई दिल्ली। गोलन हाइट्स को लेकर अमेरिकी राजदूत टॉम बराक के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। बराक ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा था कि इजरायल अब भी गोलन हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। उनका यह बयान अमेरिका की मौजूदा नीति से अलग माना गया, क्योंकि 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। विवाद बढ़ने के बाद बराक ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बराक ने लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और पत्रकार मारियो नौफल को दिए इंटरव्यू में गोलन हाइट्स का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि इजरायल अभी भी इस इलाके पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप नहीं है।

    1967 में इजरायल ने किया था कब्जा

    गोलन हाइट्स सीरिया का रणनीतिक क्षेत्र है। 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान इजरायल ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था। 1981 में इजरायल ने इसे अपने में मिला लिया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देश आज भी इस कदम को मान्यता नहीं देते।

    अमेरिका का रुख हालांकि अलग रहा है। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। यह इस मुद्दे पर दशकों पुरानी अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव था।

    विवाद बढ़ा तो बराक ने दी सफाई

    गोलन हाइट्स को लेकर दिए बयान के बाद अमेरिकी राजदूत सवालों के घेरे में आ गए। इजरायल की ओर से भी उनके बयान पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद रविवार को बराक ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का मतलब संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करना नहीं था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, बराक ने कहा कि 2019 में ट्रंप ने गोलन हाइट्स को लेकर जो अमेरिकी नीति तय की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वह गोलन हाइट्स का उदाहरण दक्षिणी लेबनान की स्थिति को समझाने के लिए दे रहे थे। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए हुए समझौते केवल नक्शे बदलने की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

    अमेरिकी सांसद और इजरायल ने जताई आपत्ति

    बराक के बयान पर रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अमेरिकी राजदूत ट्रंप के उस फैसले को भूल गए हैं, जिसमें गोलन हाइट्स को इजरायल का हिस्सा माना गया था।

    इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी बराक के बयान का विरोध किया और इसे ट्रंप की नीति के बिल्कुल विपरीत बताया।

    सीरिया एयरबेस पर भी बयान से विवाद

    टॉम बराक इसी इंटरव्यू में सीरिया के एक एयरबेस पर इजरायली हमले की आलोचना को लेकर भी चर्चा में आए। इजरायल ने मंगलवार को एयरबेस पर हमला किया था। उसका कहना था कि वह सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई थी।

    रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने रविवार को इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल सीरिया में तुर्की की ऐसी सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो।

    हिजबुल्लाह पर भी देनी पड़ी सफाई

    बराक का एक अन्य बयान भी विवाद का कारण बना। उन्होंने इजरायल-लेबनान मुद्दे पर कहा था कि बातचीत की मेज से हिजबुल्लाह और ईरान गायब हैं। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि वह दोनों को वार्ता में शामिल करने की बात कर रहे हैं।

    हालांकि, बराक ने बाद में स्पष्ट किया कि अमेरिका हिजबुल्लाह से बातचीत नहीं करता। उनका मकसद केवल यह बताना था कि इजरायल-लेबनान का मुद्दा जटिल है, क्योंकि हिजबुल्लाह को हथियार और आर्थिक मदद ईरान से मिलती है।

  • अरंडी का तेल बालों और त्वचा की देखभाल में कैसे मदद करता है, जानिए इसके संभावित फायदे और जरूरी सावधानियां

    अरंडी का तेल बालों और त्वचा की देखभाल में कैसे मदद करता है, जानिए इसके संभावित फायदे और जरूरी सावधानियां

    नई दिल्ली ।अरंडी का तेल लंबे समय से घरेलू और पारंपरिक देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह अरंडी के बीजों से निकाला जाता है और सामान्य तौर पर गाढ़ा तथा हल्के पीले रंग का होता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड और अन्य घटक इसे त्वचा और बालों की देखभाल के लिए उपयोग किए जाने वाले तेलों में शामिल करते हैं। हालांकि, प्राकृतिक उत्पाद होने का मतलब यह नहीं है कि यह हर व्यक्ति की त्वचा या बालों के लिए समान रूप से उपयुक्त होगा।

    बालों की देखभाल में अरंडी के तेल का इस्तेमाल खासतौर पर सूखे और बेजान बालों के लिए किया जाता है। इसकी गाढ़ी बनावट बालों और स्कैल्प पर नमी बनाए रखने में मदद कर सकती है। इससे बालों को मुलायम महसूस कराने और उनमें चमक लाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसे बालों की तेज ग्रोथ कराने वाले निश्चित उपचार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    अरंडी का तेल सीधे लगाने पर कुछ लोगों को काफी गाढ़ा लग सकता है। इसलिए इसे नारियल या बादाम जैसे हल्के तेल के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना सुविधाजनक रहता है। तेल को बालों और स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। मसाज करते समय बहुत अधिक दबाव डालने से बचना चाहिए। इस्तेमाल की मात्रा बालों की लंबाई और जरूरत के अनुसार रखी जा सकती है।

    त्वचा की देखभाल में भी अरंडी के तेल का उपयोग किया जाता है। इसमें मौजूद रिसिनोलिक एसिड त्वचा को नमी प्रदान करने में मदद कर सकता है। खासतौर पर शरीर के ऐसे हिस्सों पर इसे लगाया जाता है जहां रूखापन अधिक महसूस होता है। हाथ, पैर और अन्य सूखे हिस्सों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाने से त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    सर्दियों या कम नमी वाले मौसम में त्वचा का रूखापन बढ़ सकता है। ऐसे समय में कुछ लोग अरंडी के तेल को मॉइस्चराइजिंग देखभाल के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, तैलीय या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसे चेहरे पर लगाने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकती है।

    फटी एड़ियों की घरेलू देखभाल में भी अरंडी का तेल इस्तेमाल किया जाता है। रात में पैरों को साफ करके एड़ियों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाया जा सकता है। इसके बाद मोजे पहनने से तेल त्वचा के संपर्क में अधिक समय तक रह सकता है। इससे सूखी त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन गहरी दरार, रक्तस्राव या संक्रमण होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    अरंडी का तेल इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना एक जरूरी सावधानी है। त्वचा के छोटे हिस्से पर थोड़ी मात्रा लगाकर प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। लालिमा, खुजली, जलन या सूजन जैसी परेशानी होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। आंखों और शरीर के संवेदनशील हिस्सों के संपर्क से भी इसे बचाना जरूरी है।

    अरंडी के तेल को त्वचा या बालों की देखभाल में सीमित और उचित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके संभावित लाभ मुख्य रूप से नमी बनाए रखने और त्वचा तथा बालों को मुलायम महसूस कराने से जुड़े हैं। किसी गंभीर त्वचा समस्या, संक्रमण या लगातार बालों से जुड़ी परेशानी में घरेलू तेलों को उपचार का विकल्प मानने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना अधिक उचित रहता है।

  • महाराष्ट्र में अचानक बदला कैबिनेट मीटिंग का दिन, फडणवीस की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ से सियासी अटकलें तेज

    महाराष्ट्र में अचानक बदला कैबिनेट मीटिंग का दिन, फडणवीस की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ से सियासी अटकलें तेज


    मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में सोमवार को बैठकों का दौर देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नियमित तौर पर मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक को इस बार एक दिन पहले सोमवार को बुलाया है। इसके बाद महायुति के प्रमुख नेता वर्षा बंगले पर बैठक करेंगे और फिर गठबंधन के नेताओं के लिए डिनर रखा गया है। बैठकों के इस कार्यक्रम ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी है।

    हालांकि सरकार की ओर से कैबिनेट बैठक की तारीख बदलने की वजह मुख्यमंत्री फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताया गया है। लेकिन कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद महायुति के वरिष्ठ नेताओं की बैठक और डिनर के कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं।

    कैबिनेट के बाद महायुति नेताओं की बैठक
    कैबिनेट की बैठक सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक प्रस्तावित है।

    बैठक में फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की मौजूदगी रहेगी। इसके बाद बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के प्रमुख नेताओं तथा गठबंधन के मंत्रियों के लिए डिनर रखा गया है।

    सरकारी तौर पर इस बैठक का उद्देश्य गठबंधन के भीतर बेहतर तालमेल बनाना, आपसी मतभेदों को दूर करना और सरकार के कामकाज को गति देना बताया जा रहा है।

    बदलाव की अटकलें क्यों?
    महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में कैबिनेट बैठक का अचानक एक दिन पहले होना और उसके तुरंत बाद महायुति के शीर्ष नेताओं का साथ बैठना इन अटकलों को और बढ़ा रहा है। हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना से इनकार किया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस राज्य के कामकाज पर लगातार सक्रियता से नजर बनाए हुए हैं।

    सैनी ने वर्षा बंगले पर की फडणवीस से मुलाकात
    इस बीच रविवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। सैनी वर्षा बंगले पहुंचे, जहां फडणवीस ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात को फिलहाल शिष्टाचार भेंट बताया गया है।

    अब निगाहें सोमवार को होने वाली कैबिनेट और महायुति नेताओं की बैठकों पर टिकी हैं। इन बैठकों में होने वाली चर्चा और नेताओं के बयानों से ही साफ होगा कि यह महज संगठनात्मक समन्वय की कवायद है या महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े फैसले की भूमिका तैयार हो रही है।

  • सोमवार व्रत रखने जा रहे हैं तो जान लें ये जरूरी नियम, शिव पूजा की सही विधि से मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

    सोमवार व्रत रखने जा रहे हैं तो जान लें ये जरूरी नियम, शिव पूजा की सही विधि से मिलेगा महादेव का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर महादेव की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। विशेष रूप से सावन के सोमवार और अन्य शुभ अवसरों पर सोमवार व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। हालांकि व्रत रखने के साथ पूजा की सही विधि और नियमों का पालन करना भी जरूरी माना गया है। यदि आप सोमवार का व्रत रखने जा रहे हैं तो सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के स्थान को साफ करके वहां भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक करें।

    शिवलिंग पर सबसे पहले स्वच्छ जल अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद दूध और जल से अभिषेक करने की परंपरा है। भगवान शिव को बेलपत्र विशेष प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान साफ और साबुत बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह कटा फटा या गंदा न हो। इसके साथ ही भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। धतूरा और आक के फूल भी शिव पूजा में अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद चंदन लगाकर धूप और दीप जलाएं तथा भगवान शिव को नैवेद्य अर्पित करें।

    सोमवार व्रत के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त श्रद्धा के साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। मान्यता है कि पूजा में सबसे अधिक महत्व भक्त की श्रद्धा और भावना का होता है इसलिए दिखावे के बजाय मन से पूजा करना चाहिए।

    सोमवार व्रत में खानपान के नियम व्यक्ति की परंपरा और व्रत के प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कई लोग फलाहार करते हैं। फलाहार में फल दूध दही मखाना और व्रत में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री का सेवन किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी कारणों से लंबे समय तक भूखा नहीं रह सकता तो उसे अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए। व्रत के दौरान अत्यधिक तला भुना भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार व्रत के दिन मन को शांत रखना चाहिए और क्रोध तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। किसी का अपमान करने या गलत आचरण से बचना भी व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शाम के समय दोबारा भगवान शिव की पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। पारण का समय और विधि अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकती है।

    मान्यता है कि नियमित रूप से सोमवार व्रत करने और भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सुख शांति और सकारात्मकता आती है। हालांकि धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं। इसलिए सोमवार व्रत को श्रद्धा और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

  • सऊदी-पाक-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान की एंट्री? न्योता मिलने की खबर से पश्चिम एशिया में हलचल

    सऊदी-पाक-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ में ईरान की एंट्री? न्योता मिलने की खबर से पश्चिम एशिया में हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आने की खबर है। ईरान को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने का न्योता मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी तक ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान या तुर्की में से किसी भी देश ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    यह दावा शनिवार को अल मयादीन ने ईरानी संसद की समाचार एजेंसी ‘खानेह मेल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से किया। रहीमी के मुताबिक ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है और इस पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा के लिए साझा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    अगर यह खबर सही साबित होती है तो इसे पश्चिम एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा, क्योंकि सऊदी अरब और ईरान लंबे समय तक एक-दूसरे के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

    क्या है ‘मक्का पैक्ट’?

    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा।

    समझौते का उद्देश्य आपसी रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत सैन्य तालमेल, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने समझौते के आपसी रक्षा प्रावधान की तुलना NATO के अनुच्छेद 5 से की थी। हालांकि, तीनों देशों ने स्पष्ट किया था कि यह समझौता किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है।

    ईरान ने पहले नहीं जताई थी आपत्ति

    मक्का पैक्ट के गठन के बाद ईरान ने इस पर खुलकर विरोध नहीं जताया था। 10 अगस्त को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि तेहरान को समझौते से चिंता की कोई वजह नजर नहीं आती। उन्होंने माना था कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है।

    ऐसे में अब ईरान को इसी सुरक्षा समझौते में शामिल होने का न्योता मिलने की खबर सामने आना चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, ईरान का इसमें शामिल होना पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति में बड़ा बदलाव होगा।

    सऊदी और ईरान की रही है पुरानी प्रतिद्वंद्विता

    सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर खींचतान रही है। इसका असर यमन और खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में भी दिखाई देता रहा है। यमन में सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता रहा है, जबकि ईरान के हूती विद्रोहियों से संबंध बताए जाते हैं।

    हालांकि, 2023 में चीन की मध्यस्थता से दोनों देशों ने राजनयिक रिश्ते बहाल किए थे। इसके बाद संबंधों में कुछ नरमी आई, लेकिन क्षेत्र में जारी तनाव के बीच दोनों देशों के रिश्तों में चुनौतियां बनी हुई हैं।

    ऐसे में यदि ईरान के ‘मक्का पैक्ट’ में शामिल होने की खबर की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह पश्चिम एशिया के शक्ति समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल मामला न्योते की रिपोर्ट तक सीमित है और सभी संबंधित देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • MP में भारी बारिश का अलर्ट, डिंडौरी-बालाघाट में 8 इंच तक गिर सकता है पानी, 3 दिन एक्टिव रहेगा स्ट्रॉन्ग सिस्टम

    MP में भारी बारिश का अलर्ट, डिंडौरी-बालाघाट में 8 इंच तक गिर सकता है पानी, 3 दिन एक्टिव रहेगा स्ट्रॉन्ग सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और लो प्रेशर एरिया से बने स्ट्रॉन्ग सिस्टम का सबसे ज्यादा असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में 22 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। डिंडौरी और बालाघाट में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। दोनों जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार विदिशा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह, सिवनी, जबलपुर, मंडला, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और छतरपुर में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सतना, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, पन्ना, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    भोपाल में तेज बारिश, लटेरी में बाजार में भरा पानी

    इससे पहले रविवार रात भोपाल में तेज बारिश हुई। वहीं विदिशा जिले के लटेरी में करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। इससे मेन बाजार की सड़कों पर पानी भर गया और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    27 अगस्त तक बारिश के आसार

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर बना रहेगा। 27 अगस्त तक प्रदेश में भारी बारिश की गतिविधियां जारी रहने के आसार हैं। पूर्वी हिस्से के साथ पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी तेज बारिश हो सकती है।

    प्रदेश में अब तक 24.8 इंच बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 1 जून से अब तक 629.8 मिमी यानी 24.8 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 707.3 मिमी यानी 27.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 3 इंच यानी 11% कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 8% और पश्चिमी हिस्से में 14% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 6% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 1% से 48% तक कम बारिश हुई है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। इनमें अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं।