Author: bharati

  • सावधान! पेपर कप में चाय-कॉफी पीना बन सकता है सेहत के लिए ज़हर, कैंसर और थायरॉइड का बढ़ता खतरा

    सावधान! पेपर कप में चाय-कॉफी पीना बन सकता है सेहत के लिए ज़हर, कैंसर और थायरॉइड का बढ़ता खतरा


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चाय और कॉफी पीने के लिए पेपर कप का इस्तेमाल आम हो गया है। ऑफिस, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और स्ट्रीट वेंडर्स पर इन्हें सुरक्षित और इको-फ्रेंडली मानकर धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी चौंकाने वाली है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक पेपर कप में गर्म चाय या कॉफी पीना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है और इससे कैंसर व थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    दरअसल, पेपर कप पूरी तरह कागज से नहीं बने होते। इन्हें वाटरप्रूफ बनाने के लिए अंदर की परत में प्लास्टिक या वैक्स कोटिंग की जाती है। जब इनमें गर्म पेय डाला जाता है, तो यह परत पिघलने लगती है और उससे हानिकारक केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक चाय-कॉफी में मिल जाते हैं, जो सीधे शरीर में पहुंचते हैं।

    सेहत पर कैसे पड़ता है असर?
    डॉक्टर्स के अनुसार, पेपर कप में मौजूद BPA (बिसफेनोल-A) और अन्य केमिकल्स गर्म तरल के संपर्क में आकर एक्टिव हो जाते हैं। इनका लगातार सेवन करने से हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड की समस्या, और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

    इसके अलावा, माइक्रोप्लास्टिक कण पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे एसिडिटी, पेट दर्द, गैस, अपच और आंतों से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोजाना पेपर कप में गर्म पेय पीने से शरीर में टॉक्सिन्स धीरे-धीरे जमा होने लगते हैं।

    पर्यावरण के लिए भी खतरा
    पेपर कप सिर्फ सेहत ही नहीं, पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं। प्लास्टिक कोटिंग के कारण इन्हें पूरी तरह रिसायकल करना मुश्किल होता है। जलाने पर ये जहरीली गैसें छोड़ते हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।

    क्या करें, क्या न करें
    अगर आप खुद को और अपने परिवार को इन खतरों से बचाना चाहते हैं, तो पेपर कप का इस्तेमाल कम से कम करें। चाय-कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक कप सबसे सुरक्षित माने जाते हैं। ये न केवल सेहत के लिए बेहतर हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार हैं।

  • UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें , जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र

    UGC बिल वापस लें या इच्छामृत्यु की अनुमति दें , जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र


    नई दिल्ली । UGC बिल 2026 का विरोध तेज हो गया है. अब इसमें अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य भी कूद गए हैं. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है मांग की है कि या तो यूजीसी के नए नियमों को वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए. नए नियमों के खिलाफ यूपी के अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. नए नियमों का विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि इसमें सर्वण छात्रों को पहले ही दोषी माना गया.

    किसने क्या कहा

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू- हम कानून के तहत ही काम करते हैं  देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक, बीजेपी- इस से समाज में नफरत बढ़ेगी उपेंद्र कुशवाहा, अध्यक्ष, RLSP- गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए नियम चंद्रशेखर आजाद, अध्यक्ष, ASP- बाकी मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है फौजिया खान, सांसद, NCP- शिक्षा में ऐसा माहौल नहीं बनना चाहिए  हरीश चंद, प्रवक्ता, बीजेपी- लोगों के मतभेद पर सरकार विचार करेगी  मणिकम टैगोर, सांसद, कांग्रेस- शिक्षण संस्थानों पर RSS का कंट्रोल  राकेश टिकैत, प्रवक्ता, BKU- ऐसी चीजों से जातिगत दुश्मनी बढ़ती है  रामगोपाल यादव, सांसद, SP- UGC ने कुछ गलत नहीं किया

    UGC का नया एक्ट

    जातीय भेदभाव में SC/ST के अलावा OBC शामि झूठी शिकायतों पर जुर्माना और निलंबन नही कॉलेज, यूनिवर्सिटी में 24 घंटे हेल्पलाइन का गठन कमेटी में SC/ST, OBC, महिला का प्रतिनिधित्व UGC एक्ट पर सवर्णों का दावा सवर्णों को अच्याचारी मानने वाला एक्ट झूठी शिकायत करने पर कोई सजा नहीं सवर्ण छात्रों पर लगेंगे फर्जी आरोप भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ
    कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अस्पष्ट 
    कहां-कहां विरोध
    लखनऊ- करणी सेना का विरोध-प्रदर्शन गोंडा-विरोध में बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण रायबरेली-भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजीं सोनभद्र-सवर्ण समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय घेरा फर्रुखाबाद-प्रधानमंत्री गद्दी छोड़ो के नारे लगे प्रतापगढ़-सवर्ण एकता जिंदाबाद के नारे लगे
    वाराणसी- विरोध में “हमारी भूल, कमल का फूल नारे लगे मेरठ- राजपूत समाज के लोगों ने विरोध किया संभल- काली पट्टी बांधकर विरोध में सड़कों पर नारेबाजी फर्रुखाबाद- फतेहगढ़ स्टेडियम के बाहर सवर्ण समाज की नारेबाजी लखीमपुर- सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा के विरोध में शपथ ली
    दिल्ली- UGC के नये नियम के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन

    विरोध में बीजेपी में इस्तीफे
    BJP के 11 जिला पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफानोएडा- BJYM के जिला उपाध्यक्ष का इस्तीफा रायबरेली- भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष का इस्तीफा इगलास अलीगढ़ भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी का इस्तीफा वाराणसी- BJP बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया
    नए नियम क्यों बने
    17 दिसंबर 2012 से जारी पुराने नियम2016 में छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या की
    जातीय उत्पीड़न के चलते आत्महत्या की मई 2019 में एक मेडिकल छात्रा ने आत्महत्या की जातीय उत्पीड़न के आरोप में आत्महत्या की 29 अगस्त 2019 को SC में याचिका दाखिल  जातीय भेदभाव पर सख्त नियम बनाने की याचिका जनवरी 2025 को SC ने UGC को निर्देश दिए फरवरी 2025 में नए नियमों का ड्राफ्ट जारी हुआ
    संसदीय समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा की कमेटी के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह थे ड्राफ्ट में OBC को शामिल नहीं किया गया था झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान था कमेटी ने ड्राफ्ट में OBC को शामिल कराया कमेटी ने झूठी शिकायत करने पर सजा भी हटाई

  • शंकराचार्य विवाद को लेकर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- 'इस मुद्दे पर योगी सरकार ने…'

    शंकराचार्य विवाद को लेकर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- 'इस मुद्दे पर योगी सरकार ने…'


    नई दिल्ली । AAP सांसद संजय सिंह ने हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और साथ ही उनका समर्थन जताया। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि माघ मेले जैसे पवित्र आयोजन में किसी संत के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि संत के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की, उनकी चोटी खींचकर पिटाई और सरेआम अपमान जैसी घटनाएं हुईं, जो बिल्कुल अस्वीकार्य हैं।

    संवाद से समाधान की मांग, धरना नहीं

    संजय सिंह ने कहा कि शंकराचार्य का धरने पर बैठना उचित नहीं है। उन्होंने योगी सरकार से कहा कि अगर राज्य सरकार संवाद करने में असमर्थ है, तो केंद्र सरकार का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि आगे आए और इस मुद्दे का हल निकाले। सांसद ने यह भी कहा कि अब तक सरकार ने सिर्फ सुनवाई की है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जो निराशाजनक है।

    संगम नोज पर रोक को बताया अपराध

    संजय सिंह ने संगम नोज पर शंकराचार्य के स्नान पर रोक को अपराध बताया। उन्होंने कहा, “एक शंकराचार्य को स्नान से रोकना खुद में अपराध है, और उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांगना उससे भी बड़ा अपराध है। यह घटना बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इसी दौरान संत के शिष्यों को धक्का दिया गया और महाराज को मजबूरन धरने पर बैठना पड़ा।

    धार्मिक और सामाजिक माहौल पर चिंता

    सांसद संजय सिंह ने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि काशी कॉरिडोर में मंदिर और मणिकर्णिका घाट में हुई तोड़फोड़, वृंदावन में बाबा के साथ धक्का-मुक्की और शंकराचार्य के साथ वायरल तस्वीरें, सभी सामाजिक और धार्मिक माहौल के लिए नकारात्मक संकेत हैं।

    यूजीसी बिल और पार्टी की स्थिति

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि यूजीसी बिल को लेकर पार्टी में चर्चा जारी है और आम आदमी पार्टी की आधिकारिक स्थिति जल्द तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पार्टी न्याय और संविधान के दायरे में रहकर ही निर्णय लेगी।

  • UGC बिल पर नीतीश कुमार की JDU ने साफ किया रुख, 'समाज के किसी तबके में…'

    UGC बिल पर नीतीश कुमार की JDU ने साफ किया रुख, 'समाज के किसी तबके में…'


    नई दिल्ली । यूजीसी बिल 2026 पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का रुख सामने आया है. पार्टी के प्रवक्ता और एमलसी नीरज कुमार ने कहा कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने इस देश के अंदर संविधान बनाया है. संविधान में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है. ऐसी स्थिति में समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न्याय के साथ सबका विकास और सबका सम्मान के रोल मॉडल हैं. यूजीसी का जो नया रेगुलेशन आया है, उस संबंध में तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं. अब इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. न्यायपालिका का सम्मान तो सब करते हैं तो अब न्यायपालिका का फैसला ही सबके लिए महत्वपूर्ण होगा.

    यूजीसी की नई गाइडलाइंस का क्यों हो रहा है विरोध

    इसी महीने लागू हुआ है OBC वर्ग को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधान हटे सामान्य वर्ग के मुताबिक, कानून का दुरुपयोग उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है दावा है कि गलत शिकायत दर्ज कराने वाले को किसी दंड का डर नहीं होगा

    सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

    यूजीसी की नई गाडलाइंस ने यूपी का सियासी पारा बढ़ा दिया है. बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इसको लेकर इस्तीफा तक दे दिया. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया कि जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और संस्थागत सुरक्षा से कुछ श्रेणियों को बाहर कर दिया गया है.

    कोर्ट से रोक लगाने की मांग

    सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोका जाए और जाति-आधारित भेदभाव को ‘जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप’ तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए. इसमें कहा गया है जाति के आधार पर भेदभाव को इस तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए कि जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार होने वाले सभी लोगों को सुरक्षा मिले चाहे उनकी जाति की पहचान कुछ भी हो याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन नियमों के तहत बनाए गए ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन आदि को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराया जाए.

  • भोपाल में नाली का पानी भी ‘शुद्ध’! जल सुनवाई में निगम की बड़ी लापरवाही, 6 वार्ड में चौंकाने वाला रियलिटी चेक

    भोपाल में नाली का पानी भी ‘शुद्ध’! जल सुनवाई में निगम की बड़ी लापरवाही, 6 वार्ड में चौंकाने वाला रियलिटी चेक


    भोपाल। भोपाल में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है। नगर निगम की जल सुनवाई के दौरान नाली के गंदे पानी को भी महज 15 सेकंड की जांच में ‘पीने लायक’ बता दिया गया। यह दावा किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि खुद निगम के अमले का है। एक चर्चित मीडिया संस्थान की टीम ने भोपाल के 6 वार्ड कार्यालयों में जाकर जल सुनवाई का रियलिटी चेक किया, जहां हालात बेहद चिंताजनक नजर आए।

    टीम जब अलग-अलग वार्ड दफ्तरों में पहुंची तो सामने आया कि पानी की जांच प्रशिक्षित विशेषज्ञों की बजाय टाइम कीपर, प्यून और डेली वेज कर्मचारी कर रहे हैं। अधिकांश जगहों पर सिर्फ क्लोरीन टेस्ट कर पानी को ‘शुद्ध’ घोषित कर दिया गया, जबकि पानी से बदबू आ रही थी और वह साफ तौर पर नाली से लिया गया था।

    वार्ड 70: नाली के पानी को 15 सेकंड में क्लीन चिट
    पंजाबी बाग स्थित वार्ड 70 कार्यालय में निगम कर्मचारी ने नाली से लाए गए पानी की सिर्फ क्लोरीन जांच की और उसे पीने योग्य बता दिया। हैरानी की बात यह रही कि पानी में बदबू थी, फिर भी उसे सुरक्षित करार दिया गया।

    वार्ड 44: टाइम कीपर कर रहा जांच, क्लोरीन को बताया कैल्शियम
    सुभाष नगर वार्ड में टाइम कीपर और श्रमिक पानी की जांच करते मिले। एक स्थानीय निवासी ने बदबूदार और मटमैले पानी की शिकायत की, लेकिन कर्मचारियों ने सिर्फ क्लोरीन टेस्ट कर पानी को सही बता दिया। जब सवाल उठाया गया तो जवाब मिलायहीं तक जांच होती है।

    वार्ड 60: नाली का पानी ‘पीने लायक’, सच सामने आया तो बचते दिखे कर्मचारी
    अवधपुरी वार्ड में भी नाली के पानी को क्लीन चिट दी गई। जब कर्मचारियों को बताया गया कि यह नाली का पानी है, तो वे खुद उसे पीने से कतराने लगे। एक कर्मचारी ने यहां तक कहा कि अगर नाली का न पता होता तो पी लेता।

    जल सुनवाई की जरूरत क्यों पड़ी?
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 28 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर में हर मंगलवार जल सुनवाई के आदेश दिए थे। निर्देशों में पानी की गुणवत्ता जांच के लिए 11 पैरामीटर (रंग, स्वाद, पीएच, हार्डनेस, टीडीएस आदि) और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया टेस्ट शामिल हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा।

    शिकायतें बहुत, सुनवाई नाम मात्र
    प्रेम नगर, भेल, करोंद और अयोध्या एक्सटेंशन जैसे इलाकों में गंदे पानी की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं पाइपलाइन सीवेज से गुजर रही है तो कहीं टंकियां महीनों से साफ नहीं हुईं, लेकिन जल सुनवाई में सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।

    एक्सपर्ट्स की चेतावनी
    विशेषज्ञों का कहना है कि पेयजल की जांच केवल प्रशिक्षित केमिस्ट या लैब असिस्टेंट ही कर सकते हैं। इस काम में टाइम कीपर, प्यून या सुपरवाइजर को लगाना जनता की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ है और भविष्य में बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकता है। कुल मिलाकर, भोपाल की जल सुनवाई फिलहाल कागजी साबित हो रही है, जहां नाली का पानी भी पीने लायक घोषित किया जा रहा है। अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।

  • महाजंग के अंत की उम्मीद: 100% तैयार हुआ अमेरिकी सुरक्षा गारंटी दस्तावेज, जेलेंस्की बोले- अब बस हस्ताक्षर का इंतजार

    महाजंग के अंत की उम्मीद: 100% तैयार हुआ अमेरिकी सुरक्षा गारंटी दस्तावेज, जेलेंस्की बोले- अब बस हस्ताक्षर का इंतजार


    नई दिल्ली । चार साल से जारी भीषण रक्तपात के बीच रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रविवार को लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में दो दिनों तक चली सघन त्रिपक्षीय वार्ता के बाद अमेरिकी सुरक्षा गारंटी से जुड़ा ऐतिहासिक दस्तावेज अब 100 प्रतिशत तैयार’ है।

    जेलेंस्की ने इस वार्ता को ऐतिहासिक बताया क्योंकि इसमें पहली बार यूक्रेन, रूस और अमेरिका के न केवल राजनयिक, बल्कि सैन्य अधिकारी भी आमने-सामने बैठे थे। उन्होंने कहा यह दस्तावेज हमारे देश के सुरक्षित भविष्य की नींव है। अब हमें बस अपने साझेदारों अमेरिका द्वारा हस्ताक्षर की तारीख और स्थान तय किए जाने का इंतजार है। हस्ताक्षर के बाद इस प्रस्ताव को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस और यूक्रेनी संसद वेरखोव्ना राडा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    20-सूत्रीय शांति योजना और चुनौतियां रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस शांति प्रक्रिया के लिए 20-सूत्रीय एक विस्तृत योजना पेश की है। जेलेंस्की ने माना कि पहले कई विवादित मुद्दे थे, लेकिन हालिया बातचीत के बाद उनकी संख्या कम हुई है। हालांकि, सबसे बड़ा पेंच अब भी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर फंसा हुआ है। जहाँ रूस पूर्वी डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेना की पूरी वापसी की मांग कर रहा है, वहीं जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

    आर्थिक सुरक्षा और भविष्य का विजन सुरक्षा गारंटी के साथ-साथ जेलेंस्की ने यूक्रेन की आर्थिक स्थिरता पर भी जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि उनका लक्ष्य 2027 तक यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता हासिल करना है। उन्होंने इसे ‘आर्थिक सुरक्षा की गारंटी’ करार दिया। अबू धाबी में अगली दौर की बातचीत आगामी रविवार 1 फरवरी को होने की संभावना है, जिसमें अमेरिकी मध्यस्थ और दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधि शेष तकनीकी और राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करेंगे।
  • चीन की सेना में 'परमाणु' भूचाल: राष्ट्रपति जिनपिंग के सबसे खास जनरल पर जासूसी का आरोप, अमेरिका को डेटा लीक करने की आशंका

    चीन की सेना में 'परमाणु' भूचाल: राष्ट्रपति जिनपिंग के सबसे खास जनरल पर जासूसी का आरोप, अमेरिका को डेटा लीक करने की आशंका


    नई दिल्ली । चीन की कम्युनिस्ट पार्टी CPC और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के भीतर उस समय हड़कंप मच गया, जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे वफादार माने जाने वाले जनरल झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच की आधिकारिक पुष्टि हुई। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष और चीन के रक्षा उद्योग के कद्दावर नेता झांग यूक्सिया पर ‘अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन’ का आरोप लगा है। इस हाई-प्रोफाइल जांच के दायरे में जनरल लियू जेनली भी शामिल हैं, जो ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के चीफ हैं।

    परमाणु जासूसी की सनसनीखेज रिपोर्ट अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जनरल झांग पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम की ‘अति-गोपनीय और तकनीकी जानकारियां’ अमेरिका को मुहैया कराई हैं। हालांकि, चीन के रक्षा मंत्रालय ने जासूसी के आरोपों पर चुप्पी साध रखी है लेकिन बंद कमरों में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को इस डेटा लीक के बारे में ब्रीफिंग दी गई है। परमाणु जासूसी के अलावा, झांग पर सैन्य खरीद में भारी रिश्वत लेने, पदोन्नति के बदले पैसे वसूलने और सेना के भीतर अपना एक समानांतर ‘राजनीतिक गुट बनाने के भी गंभीर आरोप हैं।

    जिनपिंग का क्लीनअप ऑपरेशन या सुरक्षा में सेंध विशेषज्ञ इस कार्रवाई को शी जिनपिंग द्वारा सेना पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। इससे पहले पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को भी इसी तरह अचानक बर्खास्त किया गया था। जांच की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झांग के कार्यकाल में नियुक्त हुए दर्जनों अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। 2023 से अब तक चीन की सेना के करीब 50 से अधिक शीर्ष अधिकारी पद से हटाए जा चुके हैं या लापता हैं।

    अंतरराष्ट्रीय अटकलें और संदेह वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का परमाणु कार्यक्रम इतना सख्त होता है कि वहां से डेटा लीक करना लगभग असंभव है, इसलिए यह मामला महज भ्रष्टाचार या सत्ता संघर्ष का भी हो सकता है। सोशल मीडिया पर सैनिकों की झड़प और गिरफ्तारी के अपुष्ट दावे तैर रहे हैं। यदि परमाणु जासूसी के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह न केवल चीन की आंतरिक सुरक्षा बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन को बदल कर रख देगा।

  • बलिया: सांसद के पैरों में झुकी खाकी! सपा सांसद सनातन पांडे के पैर छूने वाले दरोगा का वीडियो वायरल

    बलिया: सांसद के पैरों में झुकी खाकी! सपा सांसद सनातन पांडे के पैर छूने वाले दरोगा का वीडियो वायरल


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति और पुलिसिया कार्यशैली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे और नगरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। घटना रविवार की है जब सांसद सनातन पांडे, जंगीपुर विधायक वीरेंद्र यादव के साथ वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की जांच के लिए जा रहे थे। गाजीपुर के बिरनो टोल प्लाजा पर पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सांसद समर्थकों के साथ वहीं धरने पर बैठ गए।

    इसी गहमागहमी के बीच बलिया के नगरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रोटोकॉल या गिरफ्तारी के बजाय सीधे सांसद सनातन पांडे के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब सपा विधायक वीरेंद्र यादव ने मजाकिया अंदाज में दरोगा से गिरफ्तारी की बात कही, तो दरोगा संजय मिश्रा ने विनम्रता या कटाक्ष भरे लहजे में कहा हमारी औकात कहां जो आपको गिरफ्तार कर सकें। यह सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े, लेकिन कानून के जानकारों के बीच यह बहस का मुद्दा बन गया।

    दरोगा यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि वे किसी को गिरफ्तार नहीं करेंगे बल्कि जरूरत पड़ी तो सांसदों के साथ धरने पर ही बैठ जाएंगे। काफी देर तक चले इस ड्रामे के बाद पुलिस टीम ने सांसद को एस्कॉर्ट करते हुए वापस बलिया के लिए रवाना कर दिया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। जहां एक पक्ष इसे पुलिस का जन प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक प्रदर्शन के प्रति नरम रुख बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे वर्दी का अपमान और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल इस मामले में पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

  • महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, CJI बोले- सब कुछ कोर्ट तय नहीं कर सकता

    महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, CJI बोले- सब कुछ कोर्ट तय नहीं कर सकता


    नई दिल्ली। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब शांत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर परिसर के भीतर किसे प्रवेश दिया जाए और किसे नहीं, यह तय करना पूरी तरह से मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के विवेक का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इन प्रबंधकीय कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    समानता के अधिकार की दलील खारिज याचिकाकर्ता दर्पण सिंह अवस्थी की ओर से पेश हुए प्रसिद्ध अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि या तो सभी श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए गर्भगृह में जाने दिया जाए या फिर किसी को भी नहीं। उन्होंने दलील दी कि कलेक्टर की सिफारिश पर ‘वीआईपी’ को प्रवेश देना आम भक्तों के अधिकारों का हनन है। हालांकि, CJI सूर्यकांत ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यदि मंदिर के भीतर मौलिक अधिकारों को इस तरह लागू किया गया, तो व्यवस्था संभालना नामुमकिन हो जाएगा।

    कोर्ट की तल्ख टिप्पणी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ऐसी याचिकाएं श्रद्धा से प्रेरित नहीं लगतीं, बल्कि इनके पीछे कुछ और ही उद्देश्य प्रतीत होता है। बेंच ने चेतावनी दी कि अगर आज गर्भगृह में प्रवेश को समानता के अधिकार से जोड़ा गया, तो कल लोग वहां जाकर अपनी पसंद के मंत्रोच्चार करने या अन्य गतिविधियों के लिए अनुच्छेद 19 वाक् स्वतंत्रता का दावा करने लगेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मंदिर प्रशासन को सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ विवेकपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है।

    हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी वापस ले ली। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भी इसी तरह का फैसला सुनाया था, जिसे अब शीर्ष अदालत ने भी सही माना है। इस फैसले से साफ है कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के नियम यथावत रहेंगे और मंदिर समिति के दिशा-निर्देशों का ही पालन होगा।

  • झारखंड में शहर की सरकार' का बिगुल: 23 फरवरी को मतदान, 27 को नतीजे; 48 निकायों में लागू हुई आचार संहिता

    झारखंड में शहर की सरकार' का बिगुल: 23 फरवरी को मतदान, 27 को नतीजे; 48 निकायों में लागू हुई आचार संहिता


    नई दिल्‍ली । झारखंड में पिछले कई वर्षों से लंबित नगर निकाय चुनावों का इंतजार अब खत्म हो गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनावी शेड्यूल जारी कर दिया। राज्य के 48 नगर निकायों 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत में 23 फरवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 27 फरवरी को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    महत्वपूर्ण चुनावी कार्यक्रम अधिसूचना जारी होने की तिथि: 28 जनवरी 2026 नामांकन की शुरुआत: 29 जनवरी 2026 नामांकन की अंतिम तिथि: 4 फरवरी 2026 दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच: 5 फरवरी 2026 नाम वापसी की अंतिम तिथि: 6 फरवरी 2026 चुनाव चिन्हों का आवंटन: 7 फरवरी 2026 मतदान की तिथि: 23 फरवरी 2026 सुबह 7 से शाम 5 बजे तक मतगणना व परिणाम: 27 फरवरी 2026

    चुनाव की मुख्य विशेषताएं आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनाव गैर-दलीय आधार पर होंगे, यानी उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। मतदान के लिए बैलेट पेपर मतपत्र का उपयोग किया जाएगा और इस बार नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा।

    आरक्षण और भागीदारी झारखंड में पहली बार नगर निकाय चुनावों में ट्रिपल टेस्ट के आधार पर अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के साथ-साथ पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। राजधानी रांची नगर निगम का मेयर पद इस बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जबकि धनबाद और चास जैसे निकायों में मेयर पद अनारक्षित सामान्य रखा गया है।

    कुल 1087 वार्डों में होने वाले इस चुनाव में 42 ऐसी नगरपालिकाएं हैं जिनका कार्यकाल बहुत पहले समाप्त हो चुका था, जबकि 6 नवगठित निकायों में पहली बार पार्षद और अध्यक्ष चुने जाएंगे। निर्वाचन आयुक्त ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और शांतिपूर्ण मतदान के लिए पर्याप्त बल की तैनाती का भरोसा दिलाया है।