Author: bharati

  • किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट

    किचन से बेडरूम तक पहुंचा जंग का असर, कंडोम सप्लाई पर मंडराया संकट


    नई दिल्ली। ईरान में जारी युद्ध का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों से आगे बढ़कर बेडरूम तक पहुंचता दिख रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं पेट्रोकेमिकल्स और लुब्रिकेंट्स की कमी ने कंडोम उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसका असर करीब 860 मिलियन डॉलर के भारतीय कंडोम उद्योग पर भी पड़ रहा है, जो हर साल 400 करोड़ से अधिक यूनिट का उत्पादन करता है।
    रॉ मटीरियल महंगा होने से निर्माण लागत बढ़ रही है। सरकारी कंपनी HLL Lifecare Limited, जो सालाना लगभग 221 करोड़ कंडोम बनाती है, भी इस संकट की जद में है। इसके अलावा Mankind Pharma Limited और Cupid Limited जैसी कंपनियां भी सप्लाई चेन में बाधा से जूझ रही हैं।
    कच्चे माल की कमी से बढ़ी परेशानी
    कंडोम निर्माण मुख्य रूप से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया पर निर्भर करता है।
    सिलिकॉन ऑयल एक अहम लुब्रिकेट है, जिसकी मिडिल ईस्ट में कमी देखी जा रही है।
    अमोनिया कच्चे लेटेक्स को स्थिर रखने में जरूरी है और इसके दाम 40–50% तक बढ़ने की आशंका है।
    पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती कीमतों ने संकट और गहरा दिया है।
    उत्पादन पर असर की आशंका
    कर्नाटक ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के जतिश एन सेठ के मुताबिक, पेट्रोकेमिकल आधारित हर उत्पाद प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसाधनों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित रखना शुरू कर दिया है। 11 मार्च की अंतर-मंत्रालयीय बैठक में पेट्रोकेमिकल यूनिट्स के आवंटन में कटौती की संभावना जताई गई, जिससे कंडोम उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

    सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें
    उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पीवीसी फॉइल, एल्युमिनियम फॉइल और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कमी से ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो रहा है।

    लॉजिस्टिक्स में देरी और लागत बढ़ने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया दोनों के महंगे होने से उत्पादन और प्रभावित हो सकता है।

    फैमिली प्लानिंग पर भी असर की चिंता
    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। भारत में कंडोम कम मार्जिन पर बनाए जाते हैं, ताकि बड़ी आबादी को कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें। कीमत बढ़ाने पर बिक्री घटने का जोखिम है। लंबे समय में इससे फैमिली प्लानिंग कार्यक्रमों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • MP में मिलावट का डर: दूध, घी, मसाले समेत रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ फेल, ग्वालियर नंबर वन

    MP में मिलावट का डर: दूध, घी, मसाले समेत रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ फेल, ग्वालियर नंबर वन


    भोपाल । मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा का अलर्ट जारी हो गया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले तीन सालों में लगभग 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें दूध, मावा, पनीर, घी, मिठाई, मसाले और तेल जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

    मिली जानकारी के अनुसार, मोबाइल वैन के जरिए एक लाख सैंपल लिए गए, जिनमें डेयरी उत्पाद सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए। मिठाइयों जैसे जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन में भी मिलावट पाई गई। मसालों में लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हुए हैं।

    मिलावट में ग्वालियर जिला सबसे ऊपर है। यहां दो हजार सैंपल में से लगभग 420 सैंपल फेल पाए गए। अन्य जिलों में स्थिति इस प्रकार है: गुना 110, उज्जैन 95, भिंड 90, बुरहानपुर और जबलपुर 75-75, शाजापुर 70, खरगोन 65, सीहोर 55, धार 40, राजगढ़ 35, नीमच 30, नरसिंहपुर 28 और अन्य जिले भी इस सूची में शामिल हैं।

    कहां कौन से सैंपल फेल हुए हैं, इसका विवरण भी सामने आया है। ग्वालियर में दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालाई बर्फी, चावल और आटा फेल पाए गए। इंदौर में लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली और सांभर फेल हुए। शाजापुर में दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर और कुकिंग ऑयल फेल पाए गए।

    दमोह में जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाउमीन, घी, पनीर और दही, भिंड में मालाई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च, मुरैना में मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू, बूंदी लड्डू, धार में मावा, पनीर, धनिया पाउडर और पताशे, सागर में मोतीचूर लड्डू, रीवा में तुअर दाल और मिठाई, सिवनी में गुजिया, सेव और पनीर, नरसिंहपुर में दूध, खंडवा में गुड़ चिक्की, बैतूल में दही और काली मिर्च, सीहोर में खाने का तेल फेल पाया गया।

    खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कहा है कि यह रिपोर्ट स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। आम जनता को ऐसे उत्पादों से बचने और केवल प्रमाणित और सुरक्षित ब्रांड के खाद्य पदार्थ खरीदने की सलाह दी गई है।

  • PNG Connections: Delhi में PNG कनेक्शन को बढ़ावा, सरकार का बड़ा प्लान; 4 लाख नए कनेक्शन लगाने के निर्देश

    PNG Connections: Delhi में PNG कनेक्शन को बढ़ावा, सरकार का बड़ा प्लान; 4 लाख नए कनेक्शन लगाने के निर्देश


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साफ और सस्ते ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Rekha Gupta सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शहर में 4 लाख नए PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन (PNG Connections) लगाए जाएं। इस फैसले का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को गैस सिलेंडर की जगह पाइप गैस से जोड़ना है, जिससे पर्यावरण को भी फायदा होगा और लोगों को सुविधा भी मिलेगी।

    सरकार का मानना है कि PNG न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि यह लगातार उपलब्ध रहने वाला ईंधन भी है। इससे गैस खत्म होने की चिंता नहीं रहती और घरों में कनेक्शन सीधे पाइपलाइन के जरिए मिलता है। इसी वजह से सरकार अब तेजी से इसका विस्तार करना चाहती है।

    PNG Connections बढ़ाने पर जोर
    सरकार ने संबंधित विभागों और एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के अंदर बड़े स्तर पर नए कनेक्शन दिए जाएं। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ाया जाएगा। पहले से जिन इलाकों में सुविधा उपलब्ध है, वहां अधिक से अधिक घरों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

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    बताया जा रहा है कि इस योजना के जरिए दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही गैस सिलेंडर पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम होगी, जिससे सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी घटेंगी।

    लोगों को मिलेगा फायदा
    PNG कनेक्शन मिलने से लोगों को कई तरह के फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एलपीजी सिलेंडर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा इसमें गैस खत्म होने या सिलेंडर बुकिंग जैसी परेशानी नहीं होती।

    सरकार का यह कदम दिल्ली को “ग्रीन सिटी” बनाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। पहले भी सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला चुकी है और अब PNG कनेक्शन विस्तार उसी दिशा में एक और बड़ा कदम है।

  • क्या आपका बच्चा कम खाता है और जल्दी थक जाता है? हो सकती है ये गंभीर समस्या, जानें समाधान

    क्या आपका बच्चा कम खाता है और जल्दी थक जाता है? हो सकती है ये गंभीर समस्या, जानें समाधान


    नई दिल्ली बच्चे बार-बार अपने मोनिका से काम करते हैं कभी खाना कम खाते हैं, तो कभी खेलने में इतना मगन हो जाते हैं कि पढ़ाई-लिखाई की ओर ध्यान नहीं देते। लेकिन अगर आपका बच्चा लगातार कम खा रहा है, जल्दी थक जाता है, चैलेंज में दिलचस्पी नहीं है और पढ़ाई में भी दिलचस्पी नहीं है, तो इसे बच्चे में न लें।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण यानि की कमी की ओर इशारा कर सकते हैं। बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। समय की पहचान और सही पोषण से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के भोजन में विभिन्नता होनी चाहिए। अगर बच्चे को लगातार थकान महसूस हो रही है या भूख नहीं लग रही है तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। रक्त परीक्षण से पुष्टि हो सकती है। डॉक्टर की सलाह से आयरन की रेटिंग भी ली जा सकती है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार, बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है, लेकिन सही समय पर ध्यान और डिजिटल आहार से इसे आसानी से सीखा जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से आयरन की कमी होती है। इससे बच्चे की खून और खांसी की स्थिति नहीं होती है, जिससे थकान, कमजोरी और भूख न लगना जैसे लक्षण होते हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो बच्चे का विकास रुक सकता है और पढ़ाई-लिखाई पर भी बुरा असर पड़ता है।

    ऐसी परिस्थिति में डरना नहीं बल्कि लक्षण के साथ समाधान पर काम करना चाहिए। बच्चों में बीमारी के मुख्य लक्षण बताएं तो उन्हें जल्दी थकान महसूस होना, कम भूख लगना, पीला चेहरा और कमजोरी, ध्यान केंद्रित न हो पाना और बार-बार बीमार पड़ना है।

    परिवार से बचाव के लिए हरी पत्तीदार शैली जैसे पालक, मेथी, मसालों का सागा आदि बच्चों को दैनिक अवकाश दें। ये आयरन का अच्छा स्रोत हैं। मूंग, चना, राजमा जैसी दालहन और चावल के अनाज और प्रोटीन की प्रचुरता पाई जाती है। इनकी थाली में शामिल करें। विटामिन सी से युक्त फल जैसे सेंट्रा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, लेम्बोर्गिनी आदि भी शामिल करें। विटामिन सी आयरन के अवशोषण में मदद मिलती है। बच्चों के आहार में दूध, दही और पनीर शामिल करें। स्रोत जैसे गुड़ आदि भी परियोजनाओं से अन्य बचाव में सहायक हैं।

  • विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2026: समझ और स्वीकार्यता की ओर बढ़ते कदम

    विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2026: समझ और स्वीकार्यता की ओर बढ़ते कदम


    नई दिल्ली। हर साल 2 अप्रैल को दुनिया भर में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि समाज को संदेश और समावेशी बनाने की याद है। यह हमें सिखाया जाता है कि हमारे आसपास मौजूद ऑटिज़्म से जुड़े लोगों को किसी सहानुभूति के पात्र नहीं, बल्कि समान अधिकार और सम्मान का दर्जा दिया गया है। उनकी दुनिया को देखना और इशारों का नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन समाज में विविधता और समृद्ध जगह है।

    ऑटिज़्म क्या है? बीमारी नहीं, एक अलग विचार का उपाय

    ऑटिज्म, जिसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) कहा जाता है, कोई भी बीमारी “ठीक” नहीं होती। यह दिमाग का काम करने का एक अलग तरीका है, जिसे न्यूरोडायवर्सिटी कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि हर व्यक्ति की सोच, व्यवहार और अनुभव का तरीका अलग होता है। ऑटिज्म से जुड़े लोग अक्सर नी को गहराई से महसूस करते हैं और अपनी खामियां भी महसूस करते हैं।

    पहचान का संकेत: हर बच्चा अलग

    ऑटिज़्म के संकेत आम तौर पर बचपन में दिखाई देते हैं। जैसे—आंखों में कम संपर्क बनाना, बातचीत में देरी, बार-बार एक ही गतिविधि करना या अभिनव में बदलाव से जुड़ना। कुछ बच्चों को तेज रोशनी, आवाज या स्पर्श से भी परेशानी हो सकती है। लेकिन यह शर्त जरूरी है कि हर ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्ति अलग होता है—किसी में लक्षण ज्यादा, तो किसी में कम हो सकते हैं।

    गलतफहमियां तोड़ना जरूरी है

    समाज में आज भी ऑटिज़्म को लेकर कई मिथक और गलत धारणाएँ हैं। इसे अक्सर कमजोरी या समझ की कमी माना जाता है, जबकि यह केवल एक अलग तरह की क्षमता है। सही जानकारी और जागरूकता से ही इन गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है। जब लोग समझेंगे, तभी वे सही व्यवहार भी कर पाएंगे।

    जड़ता: बदलाव की पहली सीढ़ी

    ऑटिज़्म से जुड़े लोगों को बदलने की कोशिश करने के बजाय उन्हें वैसे ही स्वीकार करना ज़रूरी है जैसे वे हैं। विशेष रूप से बच्चों के मामले में, उनके व्यवहार को जज करने के बजाय लोड करना चाहिए। परिवार, स्कूल और समाज का सहयोग उनके पास मौजूद है और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करता है।

    सम्मान और समान अवसर का अधिकार

    हर व्यक्ति की तरह ऑटिज्म से जुड़े लोगों को भी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में बेरोजगारी का अधिकार मिलना चाहिए। आज कई संस्थान और स्कूल समावेशी शिक्षा (इनक्लूसिव एजुकेशन) की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि ऐसे बच्चों को बुनियादी ढांचे में शामिल किया जा सके।

    चिकित्सक और सहायता से कुशल जीवन

    अगर ऑटिज्म के प्रोटोटाइप की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए, तो सही दिशा-निर्देश और थेरेपी से लेकर बच्चों के विकास में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और बिहेवियरल थेरेपी जैसे उपाय काफी प्रभावशाली साबित होते हैं। इसके साथ ही परिवार का सहयोग और सकारात्मक माहौल भी बेहद जरूरी है।

    समावेशी समाज की ओर कदम

    आज के दौर में जागरूकता से पहले कहीं भी ज्यादा फायदा है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी है। हमें ऐसा समाज क्यों बनाना होगा, जहां हर व्यक्ति-चाहे वह किसी भी तरह से अलग न हो-खुद को सुरक्षित, स्थापित और प्रतिष्ठित महसूस करे।

  • भोपाल में विजय मेवाड़ा हत्याकांड का तीसरा आरोपी आसिफ बम शॉर्ट एनकाउंटर में घायल, पिस्टल छीनकर फायरिंग की कोशिश

    भोपाल में विजय मेवाड़ा हत्याकांड का तीसरा आरोपी आसिफ बम शॉर्ट एनकाउंटर में घायल, पिस्टल छीनकर फायरिंग की कोशिश


    भोपाल । भोपाल में विजय मेवाड़ा हत्याकांड मामले से जुड़ी बड़ी घटना सामने आई है। इस मामले का तीसरा आरोपी आसिफ बम शॉर्ट एनकाउंटर में घायल हुआ। पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने ले जा रही थी तभी रातीबड़ के पास आरोपी ने पिस्टल छीनकर पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायर किया और आसिफ घायल हो गया। फिलहाल उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    आसिफ पर पहले से 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था। यह मर्डर घटना अशोका गार्डन थाना क्षेत्र के प्रभात पेट्रोल पंप के पास हुई थी जहां विजय मेवाड़ा के साथ मामूली विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। विजय पेट और छाती पर कई वार से गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में हमीदिया अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

    इस घटना के बाद राजधानी में हिंदू संगठनों ने गुस्से में सड़क पर उतरकर न्याय की मांग की। शकल हिंदू समाज के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च का ऐलान कर चुके थे लेकिन पुलिस ने उन्हें पॉलिटेक्निक चौराहे पर रोक दिया। संगठन ने आरोपियों पर NSA और बुलडोजर कार्रवाई की मांग की।

    मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने तुरंत मृतक के परिजनों से मिलकर न्याय का भरोसा दिलाया और कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह को निर्देश दिए कि बुलडोजर कार्रवाई तुरंत की जाए। उन्होंने पुलिस को आदेश दिए कि अपराधियों की लिस्ट तैयार करें घर-घर सर्वे कर प्रत्येक आरोपी को जेल भेजा जाए।

    मंत्री ने कहा कि ऐसी कार्रवाई होगी कि अपराधियों की आने वाली पीढ़ियां भी इसे याद रखें। पुलिस पूरे इलाके में हाई अलर्ट पर है और मौके पर भारी फोर्स तैनात कर दी गई है। इस मामले में कार्रवाई तेज़ कर दी गई है और आरोपी आसिफ बम के एनकाउंटर के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।

  • कोशिकाओं का ‘ब्लैक बॉक्स’ तैयार, अब सेल बताएंगे अपनी पूरी कहानी

    कोशिकाओं का ‘ब्लैक बॉक्स’ तैयार, अब सेल बताएंगे अपनी पूरी कहानी


    नई दिल्ली विज्ञान की दुनिया में एक ऐसी खोज सामने आई है, जो भविष्य की चिकित्सा और जीव विज्ञान को पूरी तरह बदल सकती है। जनवरी 2026 में प्रतिष्ठित जर्नल Science में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने कोशिकाओं के लिए एक तरह का “ब्लैक बॉक्स” विकसित किया है। इस नई तकनीक को “टाइम वोल्ट” नाम दिया गया है, जिसे Yu-Kai Shao और उनकी टीम ने तैयार किया है। यह तकनीक अब कोशिकाओं के भीतर होने वाली गतिविधियों को न केवल रिकॉर्ड कर सकती है, बल्कि उन्हें भविष्य में पढ़ना भी संभव बनाती है।

    क्या है ‘टाइम वोल्ट’? समझिए आसान भाषा में

    जैसे किसी हवाई जहाज का ब्लैक बॉक्स उड़ान के दौरान हर घटना को रिकॉर्ड करता है, वैसे ही टाइम वोल्ट कोशिका के अंदर जीन की गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड रखता है। अब तक वैज्ञानिक केवल यह देख पाते थे कि किसी कोशिका में इस समय क्या हो रहा है—यानी एक “तस्वीर” मिलती थी। लेकिन यह समझना मुश्किल था कि कुछ समय पहले उस कोशिका में क्या बदलाव हुए थे, जो बाद में किसी बीमारी या बदलाव का कारण बने। टाइम वोल्ट इस कमी को दूर करता है और कोशिका का “अतीत” भी दिखाता है।

    एमआरएनए की रिकॉर्डिंग: असली गेमचेंजर

    यह तकनीक कोशिका के अंदर मौजूद मैसेंजर आरएनए यानी mRNA को कैप्चर करके सुरक्षित रखती है। mRNA वह संदेश होता है, जो बताता है कि कौन-सा जीन कब और कैसे काम कर रहा है। टाइम वोल्ट इन संदेशों को खास “वोल्ट पार्टिकल्स” में स्टोर कर देता है, जिससे यह डेटा कई दिनों तक सुरक्षित रहता है। बाद में वैज्ञानिक इन रिकॉर्ड्स को पढ़कर यह समझ सकते हैं कि पहले कौन-से जीन सक्रिय थे और उनका आगे क्या असर पड़ा।

    कैंसर रिसर्च में बड़ा ब्रेकथ्रू

    इस तकनीक का इस्तेमाल खासतौर पर Lung Cancer पर किया गया, जहां चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ कैंसर कोशिकाएं दवा दिए जाने से पहले ही ऐसी स्थिति में होती हैं, जिससे वे बाद में दवाओं के असर से बच जाती हैं। इन कोशिकाओं को “पर्सिस्टर सेल्स” कहा जाता है। टाइम वोल्ट की मदद से उन जीन की पहचान संभव हुई, जो पहले नजर नहीं आते थे लेकिन दवा के प्रति प्रतिरोध (ड्रग रेजिस्टेंस) विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    इलाज की रणनीति बदलने की क्षमता

    जब इन छिपे हुए जीन को टारगेट किया गया, तो दवा से बचने वाली कोशिकाओं की संख्या में कमी देखी गई। इसका मतलब है कि भविष्य में डॉक्टर पहले से यह अनुमान लगा सकेंगे कि कौन-सी कोशिकाएं दवा से बच सकती हैं और उसी के अनुसार इलाज की योजना बना सकेंगे। यह कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के इलाज में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

    जीव विज्ञान में नई दिशा

    टाइम वोल्ट तकनीक ने जीव विज्ञान में एक नई खिड़की खोल दी है। अब कोशिकाएं केवल वर्तमान की जानकारी ही नहीं देंगी, बल्कि अपना पूरा “इतिहास” भी सहेजकर रखेंगी। इससे वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि किसी बीमारी की शुरुआत कैसे हुई और उसे रोकने के बेहतर तरीके क्या हो सकते हैं।

    भविष्य के लिए उम्मीद

    यह खोज न केवल कैंसर बल्कि अन्य बीमारियों के अध्ययन में भी क्रांतिकारी साबित हो सकती है। आने वाले समय में यह तकनीक पर्सनलाइज्ड मेडिसिन (व्यक्तिगत उपचार) को और सटीक बना सकती

  • IPL 2026: गुजरात की हार के बाद शुभमन गिल की कप्तानी पर उठे सवाल

    IPL 2026: गुजरात की हार के बाद शुभमन गिल की कप्तानी पर उठे सवाल


    नई दिल्ली आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स के खिलाफ मिली हार के बाद गुजरात टाइटंस की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि टीम के कप्तान शुबमन गिल की तरफ से पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने प्रतिक्रिया दी है। न्यू चंडीगढ़ ने इस मस्जिद में गुजरात को 3 विकेट से हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद टीम के बीच बहस तेज हो गई।

    ऑनलाइन आवेदन उठाएँ प्रश्न

    आकाश चोपड़ा ने जियोहॉटस्टार पर बातचीत के दौरान गिल के वैज्ञानिकों को ‘हरियाणा करने वाली’ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पोस्ट में सही समय पर बदलाव नहीं किये गये। खास बात यह है कि मोहम्मद सिराज के दो ओवर फाइनल तक बचे रहे और प्रसिद्घ कृष्णा को देर से हमले में टीम के लिए नुकसान पहुंचाने वाला साबित हुआ। चोपड़ा के अनुसार, मैच के डायनामिक्स में बेहतर कंप्यूटर की जरूरत थी, जहां गुजरात फेल हो गया।

    मध्यम क्रम बना चिंता का कारण

    चोपड़ा ने गुजरात टाइटंस की ऑल्टरनेटिव पर भी चिंता का विषय बनाया। उनका मानना ​​है कि टीम को ज्यादा से ज्यादा टॉप ऑर्डर पर अनाउंसमेंट की जरूरत है। शुबमन गिल और अन्य टॉप बॉस्ट के शुरुआती आउट होने से मिडिल नंबर के मैच में आउट होकर असफल रहे। उन्होंने कहा कि ग्लेन फिलिप्स का 25 रन बनाना भी टीम के लिए बड़ा योगदान माना जा रहा है, जो बताता है कि मध्यक्रम के खिलाड़ियों के अनुसार प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है।

    टीम कॉम्बिनेशन पर भी उठे सवाल

    आकाश चोपड़ा ने टीम चयन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन सुंदर को और अधिक आक्रामक खेल खेलने की जरूरत है, जबकि शाहरुख खान की टीम में शामिल होने के बावजूद वह जमीनी प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। चोपड़ा का मानना ​​है कि युवा कुमार कुशाग्र को खिलाड़ी मिल सकता है। उन्होंने साफ कहा कि गुजरात को अपने 4, 5 और 6 नंबरों के लिए नामांकित से विचार करना होगा।

    पंजाब को दी सीख: जीत के साथ आगे बढ़ो

    जहां एक ओर गुजरात की आलोचना हुई, वहीं आकाश चोपड़ा ने पंजाब किंग्स की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में जीत के दो अंक सबसे अहम होते हैं। भले ही पंजाब ने लक्ष्य का पीछा करते हुए झटका झेले, लेकिन अंत में जीत ही मायने रखती है। उन्होंने कहा कि जीत के बाद सीखना ज्यादा आसान है और टीम को सकारात्मक निर्णय पर ध्यान देना चाहिए।

    अय्यरी की वैज्ञानिक कोलैण्ड

    चोपड़ा ने पंजाब के कैप्टन श्रेयस अय्यर की गर्लफ्रेंड की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि एरीयर ने सिर्फ पांच नामांकनों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें शानदार तरीके से दोहराया, जिससे गुजरात को बड़े पैमाने पर पहुंचने से पहले ही हासिल कर लिया गया। इसके अलावा युवा बल्लेबाज कूपर कोनोली ने मैच में अहम भूमिका निभाते हुए टीम को जीत दिलाई।

    गुजरात के लिए चेतावनी, सुधार की आवश्यकता

    इस हार के बाद यह साफ हो गया कि गुजरात टाइटंस को अपनी रणनीति और टीम संयोजन पर फिर से काम करना होगा। विशेष रूप से औद्योगिक और मध्यम श्रेणी के संस्थानों पर ध्यान देना जरूरी है, नहीं तो आगे का सफर मुश्किल हो सकता है।

  • जमीन को लेकर खूनी संघर्ष: हरदा में वृद्ध की हत्या, परिजनों में हिंसक झड़प और छह घायल

    जमीन को लेकर खूनी संघर्ष: हरदा में वृद्ध की हत्या, परिजनों में हिंसक झड़प और छह घायल


    हरदा । हरदा जिले के सिराली थाना क्षेत्र के दीपगांव कला में बुधवार सुबह एक पुराना जमीनी विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। जानकारी के अनुसार यह झगड़ा मामा-बुआ के परिवारों के बीच लंबे समय से चला आ रहा था, जो अचानक उग्र रूप ले लिया।

    इस घटना में 65 वर्षीय अमरसिंह कलम की मौके पर ही मौत हो गई। संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने लाठी-डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया। इस झड़प में मृतक के भाई सूरत सिंह सहित रामभरोस, आनंद सिंह, हरिसिंह, सतीश राजपूत और दूसरे पक्ष के नारायण राजपूत भी घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। घायल लोगों को सिराली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से तीन गंभीर रूप से घायल लोगों को जिला अस्पताल हरदा रेफर किया गया।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि जमीनी विवाद इस खूनी झड़प का मुख्य कारण था। स्थानीय लोग और परिवार वाले अब भी इस घटना को लेकर तनाव में हैं और प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।

  • ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेट’ प्रोजेक्ट लॉन्च, 21 भाषाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा

    ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेट’ प्रोजेक्ट लॉन्च, 21 भाषाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा


    नई दिल्ली देश में खेल संस्कृति को जमीनी स्तर से मजबूत करने की दिशा में एक स्मारक सबसे पहले सामने आया है। कैपिटल इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक भव्य कार्यक्रम ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेट’ बुकलेट को एक साथ 21 साल की उम्र में लॉन्च किया गया। यह सबसे पहले बच्चों में शुरुआती स्तर पर स्पोर्ट्स लिटरेचर को बढ़ाने और खेल को बढ़ावा देने का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इस तरह का बहुभाषी स्पोर्ट्स एजुकेशन प्रोजेक्ट आपके सामने पहली बार पेश किया गया है।

    खेल को ‘जीवन का हिस्सा’ बनाने की सोच

    ‘स्पोर्ट्स: ए वे ऑफ लाइफ’ थीम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कलराज मिश्र ने की। इस मौसिकी पर प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद, संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. मिलिंद पैजेंड और कई वैज्ञानिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में कोरियोग्राफी ने खेल को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं कहा, बल्कि जीवन के आधार पर शासन-प्रशासन, नेतृत्व और टीमवर्क-से जुड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

    कॅन्स्क पैवेलियन का विजन: अल्फाबेट से स्पोर्ट्स तक

    इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना खेल के इंजीनियर और कॉन्सेप्ट क्लिनिक के अध्यक्ष कनिष्क पांडे ने की है। उन्होंने बताया कि जैसे अक्षरा के बच्चों की शिक्षा की स्थापना होती है, वैसे ही ‘स्पोर्ट्स अल्फाबेट’ खेलों की प्रति रुचि जगाने का पहला कदम बन सकता है। यह पुस्तिका बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ-साथ खेलों की समझ भी विकसित करती है—यानी शिक्षा और खेल का एक साथ विकास।

    मोबाइल से लेकर ग्राउंड तक:बच्चों को सक्रिय बनाने की पहल

    सबसे पहले इसका एक बड़ा उद्देश्य बच्चों को स्क्रीन से दूर मैदान की ओर प्रेरित करना है। पैंडेज़ के अनुसार, आज के डिजिटल दौर में बच्चे मोबाइल, कंप्यूटर और ऑफ़लाइन गेमिंग पर अधिक प्रतिबंधात्मक हो रहे हैं। ‘स्पोर्ट्स अल्फ़ाबेट’ उन्हें ड्रूड डायजेक्स और शारीरिक-मानसिक विकास में मदद करना चाहिए। साथ ही किंडरगार्टन स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता, निर्देश और नेतृत्व जैसे गुण भी विकसित होंगे।

    भारत की भाषा विविधता का सम्मान

    इस प्रोजेक्ट की विशेषता इसका बहुभाषी स्वरूप है। बुकलेट हिंदी, अंग्रेजी, अरबी, संस्कृत, मराठी, टोकरा, भोजपुरी, राजस्थानी, कश्मीरी, पंजाबी, तमिल, वर्गीय, कन्नड़, मलयालम, उड़िया और गुजराती सहित कई भारतीय भाषाओं में तैयार की गई है। इसमें अरबी और नेपाली के अलावा विदेशी समुद्र भी शामिल है। यह सबसे पहले भारत की ‘एकता में विविधता’ की भावना को मजबूत करता है।

    विश्वव्यापी से प्रेरणा

    पैंडेज़ ने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे एबेट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। उनके छात्र अध्ययन के साथ-साथ ओलंपिक स्तर पर भी अपने देश के प्रतिनिधि होते हैं। भारत में भी इसी मॉडल को विपरीत की आवश्यकता है।

    नेपाल तक एपीआई पहल, इंटरनेट मार्केटिंग

    नेपाल के सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने भी इसे अपने देश में लागू करने की इच्छा जताई है। इससे साफ है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है।

    प्रेरणादायक कदम: खेल और शिक्षा का संगम

    कार्यक्रम के अंत में कलराज मिश्रा ने प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सबसे पहले भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाता है। वहीं अशोक ध्यानचंद ने भी इस प्रोजेक्ट को लंबे समय तक लागू करने वाला कदम बताया।