Author: bharati

  • उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी

    उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी


    देहरादून। हरिद्वार के गंगा घाटों पर प्रतिबंध के बाद अब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का कदम बढ़ता जा रहा है। गंगोत्री धाम में यह फैसला लागू कर दिया गया है और अब बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह का प्रस्ताव बोर्ड में लाया जाएगा।

    गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन
    श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है।
    गंगोत्री धाम के साथ-साथ शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा।

    बदरीनाथ-केदारनाथ में भी प्रस्ताव लाया जाएगा
    श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बोर्ड की अगली बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव लाया जाएगा।
    इसके बाद इसे शासन और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

    हरिद्वार के बाद अब अन्य स्थलों पर मांग बढ़ी
    हरिद्वार में सरकार ने पहले ही गंगा घाटों, हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई है।
    धार्मिक संस्थाओं की मांग है कि पूरे कुंभ क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू किया जाए।

    बीकेटीसी अध्यक्ष का बयान
    हेमंत द्विवेदी ने इसे “ऐतिहासिक फैसला” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिया गया यह कदम बदरी-केदार धाम में भी लागू होगा।
    उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रस्ताव पास होने के बाद सरकार को इसे लागू कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख
    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पवित्र धाम हमारी आस्था के धाम हैं और यहाँ पौराणिक मान्यता व संस्कृति के अनुसार ही निर्णय होंगे।
    उन्होंने कहा कि मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की मांग पर सरकार काम करेगी।
    हरिद्वार के गंगा घाटों के पुराने एक्ट का अध्ययन करके आगे निर्णय लिया जाएगा।


    सरकार का संकेत
    धामी ने कहा कि अगर बीकेटीसी से प्रस्ताव आता है, तो सरकार सभी पहलुओं को देखते हुए आगे निर्णय करेगी।
    सरकार सनातन धर्म के आस्था केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है।

  • MP में लौटी कड़ाके की ठंड: 15 शहरों में कोल्ड-डे जैसे हालात, 27–28 जनवरी को मावठे और बारिश का अलर्ट

    MP में लौटी कड़ाके की ठंड: 15 शहरों में कोल्ड-डे जैसे हालात, 27–28 जनवरी को मावठे और बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में एक बार फिर कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। राजधानी भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 15 से अधिक शहरों में कोल्ड-डे जैसी स्थिति बनी हुई है। ठंडी हवाओं, घने कोहरे और गिरते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी 27 और 28 जनवरी को प्रदेश में मावठा गिरने की संभावना है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है। इस दौरान भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार जताए गए हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमालय क्षेत्र के ऊपर एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय है, वहीं प्रदेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन की भी एक्टिविटी बनी हुई है। इसी सिस्टम के असर से मौसम ने अचानक करवट ली है। शनिवार और रविवार की रात प्रदेश के कई इलाकों में तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दतिया में न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री, गुना में 7.7 डिग्री, श्योपुर और पचमढ़ी में 8.4 डिग्री, नौगांव में 9 डिग्री तथा रीवा और रतलाम में 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    रविवार को दिन के तापमान में भी खासा असर देखने को मिला। गुना में दिन का अधिकतम तापमान सबसे कम 19.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कोल्ड-डे की श्रेणी में आता है। नौगांव में अधिकतम तापमान 20 डिग्री, दतिया में 20.1 डिग्री, श्योपुर में 20.6 डिग्री, टीकमगढ़ में 20.7 डिग्री, शिवपुरी और रतलाम में 21 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा खजुराहो में 21.2 डिग्री, धार में 21.4 डिग्री, रीवा में 21.6 डिग्री और दमोह में 21.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश के कई शहरों में सुबह और रात के समय घना कोहरा भी छाया रहा, जिससे दृश्यता कम हो गई। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, सागर, सतना, सीधी, रायसेन, राजगढ़, रीवा, मंडला, मलाजखंड, नौगांव, गुना, खजुराहो, उमरिया और दमोह जैसे जिलों में कोहरे का असर साफ दिखाई दिया। ठंड और कोहरे के चलते लोगों को अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    मौसम विभाग ने बारिश को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। 27 जनवरी को भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, विदिशा, सागर, शिवपुरी, श्योपुर, शाजापुर, अशोकनगर, आगर मालवा, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, रतलाम, राजगढ़, गुना, नीमच और मंदसौर में बारिश होने की संभावना है। वहीं 28 जनवरी को जबलपुर, विदिशा, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, सतना, सागर, रायसेन, मऊगंज, मैहर, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, पन्ना, दमोह, नरसिंहपुर, उमरिया और कटनी में मावठे के साथ बारिश हो सकती है। कुल मिलाकर प्रदेश में ठंड का असर अभी कुछ दिन और बने रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने, ठंड से बचाव के उपाय अपनाने और कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

  • ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी

    ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद भारतीय निर्यात को हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता अब यूरोप की ओर से दिखाई दे रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अंतिम चरण में है और अगर यह समझौता 27 जनवरी को औपचारिक रूप से हो गया तो यह भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक जीत साबित होगी।

    ट्रंप के टैरिफ से कितना हुआ नुकसान?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्त में भारत पर 25-25% टैरिफ लगाए थे। इसके बाद भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लागू हो गया, जिससे भारतीय निर्यात क्षेत्र को लगभग 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

    अब एक डील से 10 गुना फायदा
    भारत ने इस नुकसान को कम करने के लिए रणनीतिक कदम उठाया और अब एक ही डील से न सिर्फ यह नुकसान भरपाई हो जाएगी, बल्कि उस नुकसान से 10 गुना ज्यादा कमाई का रास्ता खुल सकता है।
    27 जनवरी को होने वाले EU-India FTA से भारत एक साथ 27 यूरोपीय देशों के बाजार में बिना शुल्‍क के कारोबार करने का अवसर पाएगा।

    ‘मदर ऑफ आल डील’ क्यों कहा जा रहा है?
    भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ आल डील’ कहा है। क्योंकि इस एक समझौते से भारत को यूरोप के 27 देशों में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल जाएगा, जो भारतीय निर्यात को एक बड़ा बाजार प्रदान करेगा।
    इस समय यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है।

    भारतीय निर्यात को कितना फायदा होगा?
    अगर EU-India FTA लागू होता है, तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्लस लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
    एमके ग्लोबल की शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के पूरा होने पर वित्त वर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
    वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी 17.3% थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22-23% तक बढ़ने का अनुमान है।

    यूरोप को भी फायदा होगा
    यह डील सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार के लिए भी फायदेमंद होगी।
    हालांकि अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 0.8% है, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा था।
    वित्त वर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस था।

    इस डील के बाद भारत का यूरोप के साथ व्यापार और बढ़ेगा और यूरोप का घाटा भी बढ़ सकता है।
    फिर भी यूरोप ने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्लाई का विकल्प खोजने की तैयारी कर ली है। इसलिए यूरोप में भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल की खरीद पहले से बढ़ रही है, और FTA के बाद इसमें और तेजी आने की संभावना है।

    किस सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा?
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे अधिक लाभ होने का अनुमान है।
    वर्तमान वित्त वर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8% पर आ गई है।
    लेकिन इस डील के बाद भारत के साथ यूरोप का व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना है।

    EU-India FTA के लागू होने से भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी और यह ट्रंप के टैरिफ के नुकसान की भरपाई के साथ 10 गुना अधिक लाभ का मार्ग खोल सकता है।
    यह डील भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को नई दिशा दे सकती है और भारत को विश्व व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करेगी।

  • राष्ट्रगीत के 150 साल… सिनेमा में हर बार नए जोश और अंदाज के साथ गूंजा 'वंदे मातरम'

    राष्ट्रगीत के 150 साल… सिनेमा में हर बार नए जोश और अंदाज के साथ गूंजा 'वंदे मातरम'


    नई दिल्ली। वंदे मातरम केवल राष्ट्रीय गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है, यह भारतीय सिनेमा में भी बार-बार देशभक्ति की भावना जगाता रहा है। हर बार जब स्क्रीन पर यह गीत सुनाई दिया, तो जोश, ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ गई।

    ‘वंदे मातरम’ क्लासिकल से मॉडर्न तक विकसित होता रहा। लता मंगेशकर से विशाल-शेखर तक कई हस्तियों ने इसे गाया। सिनेमा में यह बलिदान और एकता का प्रतीक बना।

    भारतीय सिनेमा में ‘वंदे मातरम’ पहली बार 1952 की फिल्म ‘आनंद मठ’ में गूंजा। लता मंगेशकर ने इसे गाया और हेमंत कुमार ने संगीत दिया। यह क्लासिक वर्जन आज भी सबसे प्रसिद्ध है। फिल्म में यह गीत स्वतंत्रता संग्राम की भावना को दर्शाता है।

    यही नहीं साल 1997 में एआर. रहमान ने ‘वंदे मातरम’ (मां तुझे सलाम) नाम से एक इंडिपेंडेंट एल्बम ट्रैक जारी किया। यह नॉन-फिल्म म्यूजिक वीडियो था। भारत बाला और मेहबूब ने वीडियो बनाया। आधुनिक फ्यूजन, रॉक और क्लासिकल मिश्रण के साथ गीत नए अंदाज में पेश किया गया।

    साल 2001 की फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में ‘वंदे मातरम’ को उषा उत्थुप और कविता कृष्णमूर्ति ने गाया। संगीत संदेश शांडिल्य का था। यह गाना फिल्म के अंत में आता है। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, काजोल जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म में परिवार और देशभक्ति का मिश्रण दिखाया गया।

    वंदे मातरम साल 2015 की फिल्म ‘एबीसीडी 2’ में सचिन-जिगर ने ‘वंदे मातरम’ को नए अंदाज में पेश किया। यह डांस फिल्म थी। गीत में एनर्जेटिक बीट्स थे। फिल्म में देशभक्ति और डांस का मेल दिखाया गया। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहा। वहीं, साल 2024 की फिल्म ‘फाइटर’ में विशाल-शेखर ने ‘वंदे मातरम’ (द फाइटर एंथम) गाया। विशाल ददलानी, शेखर रवजियानी मुख्य गायक थे। ऋतिक रोशन, दीपिका पादुकोण, अनिल कपूर स्टारर फिल्म के इस गाने को खूब पसंद किया गया।

    साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘कोड नेम: तिरंगा’ में शंकर महादेवन ने ‘वंदे मातरम’ गाया। यह देशभक्ति थीम वाली फिल्म थी। गीत ने राष्ट्रप्रेम का संदेश मजबूत किया। वहीं, साल 2024 की फिल्म ‘ऑपरेशन वेलेंटाइन’ में भी ‘वंदे मातरम’ का नया वर्जन इस्तेमाल हुआ। यह आधुनिक एंथम स्टाइल में था। फिल्म देशभक्ति और एक्शन पर आधारित थी। गीत ने क्लाइमैक्स में जोश भरा।

    इसके अलावा, कई अन्य फिल्मों के छोटे-छोटे हिस्सों में भी यह गीत इस्तेमाल होता रहा है। वहीं, साल 2021 में टाइगर श्रॉफ ने ‘वंदे मातरम’ का अपना इंडिपेंडेंट वर्जन गाया। यह उनका हिंदी सिंगिंग डेब्यू था। जैकी भगनानी प्रोडक्शन में म्यूजिक वीडियो बना। युवा और एनर्जेटिक स्टाइल में देशभक्ति थीम पर आधारित गाने को विशाल मिश्रा ने कंपोज किया था।

    ‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी। यह पहली बार 7 नवंबर 1875 को उनकी साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ। उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल यह गीत मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने का संदेश देता है। साल 2025 में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 नवंबर 2025 को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में एक साल भर चलने वाले राष्ट्रव्यापी समारोह की शुरुआत की। यह जश्न 7 नवंबर 2026 तक चलेगा।

  • कराची-लाहौर में दोपहर में ‘अंधेरा’! भारत के रणनीतिक कदम से पाकिस्तान में हलचल, आज दिखेगी ‘सूर्यास्त्र’ की पहली झलक

    कराची-लाहौर में दोपहर में ‘अंधेरा’! भारत के रणनीतिक कदम से पाकिस्तान में हलचल, आज दिखेगी ‘सूर्यास्त्र’ की पहली झलक


    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर भारत एक ऐसे हथियार को कर्तव्य पथ पर उतारने जा रहा है, जिसकी एक झलक से ही दुश्मन के दिमाग में खौफ पैदा हो सकता है। भारत का पहला स्वदेशी मल्टी-कैलिबर लॉन्ग-रेंज रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ आज परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देगा। यह सिस्टम 300 किलोमीटर की गहराई तक स्ट्राइक करने में सक्षम है और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पाकिस्तान के कई बड़े शहर कराची, लाहौर और रावलपिंडी जैसे केंद्र अब भारत की पहुंच में हैं।

    सूर्यास्त्र क्या है और क्यों खास है?
    ‘सूर्यास्त्र’ भारत का पहला Made-in-India, Multi-Caliber, Long-Range Rocket Launcher System है, जिसे पुणे स्थित NIBE लिमिटेड ने इज़राइल की एल्बिट सिस्टम्स के सहयोग से विकसित किया है। यह Elbit के PULS (Precise & Universal Launching System) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक बेहद सटीक हमले करने में सक्षम है।

    सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
    सूर्यास्त्र की टेस्टिंग में 5 मीटर से भी कम CEP (Circular Error Probable) की सटीकता दिखाई गई है, जो इसे दुश्मन के एयरबेस, रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल ठिकानों के लिए घातक बनाती है।इसके अलावा, यह सिस्टम 100 किलोमीटर तक लोइटरिंग मिशन भी चला सकता है, जिससे दुश्मन के रडार और सुरक्षा नेटवर्क को चकमा देना आसान हो जाता है।

    मल्टी-कैलिबर क्षमता: एक ही लॉन्चर, कई रॉकेट
    सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-कैलिबर क्षमता है।
    यानी एक ही लॉन्चर से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और गाइडेड म्यूनिशन दागे जा सकते हैं, जिससे ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ता है और लॉजिस्टिक बोझ कम होता है।
    यह सिस्टम BEML के हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV) पर स्थापित है, जिससे यह तेजी से स्थान बदलकर सुरक्षित स्थिति में आ सकता है।

    कराची, लाहौर, पिंडी… सब पर सूर्यास्त्र का साया
    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यास्त्र से भारत की डीप-स्ट्राइक डिटरेंस क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।
    अब पाकिस्तान के बड़े शहर कराची, लाहौर, रावलपिंडी जैसी जगहें भी भारत की सीधी पहुंच में आ गई हैं।
    सूर्यास्त्र के एक सटीक हमले से दुश्मन के लिए दोपहर 12 बजे भी ‘सूरज डूब’ सकता है—यह भारत की नई रणनीतिक गहराई का प्रतीक माना जा रहा है।

    गणतंत्र दिवस पर दिखेंगे और कई आधुनिक हथियार
    गणतंत्र दिवस परेड में सूर्यास्त्र के अलावा ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्टम, MRSAM, ATAGS, धनुष तोप, शक्तिबान जैसे कई आधुनिक हथियार भी दिखेंगे।
    साथ ही इस बार चार जांस्कर पोनी, दो बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी और सेना के कुत्ते भी पहली बार परेड में नजर आएंगे।
    आज कर्तव्य पथ पर जब सूर्यास्त्र की झलक दिखेगी, तो यह सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि भारत की नई सैन्य ताकत और आत्मविश्वास का प्रतीक होगा।
    यह सिस्टम न सिर्फ दुश्मन को दूर से मारने की क्षमता देता है, बल्कि भारतीय सेना की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी को भी बढ़ाता है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्यास्त्र ने भारत की रणनीतिक गहराई को मजबूत कर दिया है और पाकिस्तान के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि ऑफेंसिव डीप-स्ट्राइक में भी सक्षम हो गया है।

  • तनाव और एंग्जाइटी से राहत दिलाए हाकिनी योग मुद्रा, याददाश्त बढ़ाने का आसान तरीका

    तनाव और एंग्जाइटी से राहत दिलाए हाकिनी योग मुद्रा, याददाश्त बढ़ाने का आसान तरीका

    नई दिल्ली। आज की तेज-तर्रार जिंदगी में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। काम का दबाव, लगातार स्मार्टफोन और स्क्रीन के सामने बैठना, नींद की कमी और बढ़ता तनाव हमारे शरीर और दिमाग पर गहरा असर डाल रहे हैं।

    इससे न केवल एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक परेशानियां बढ़ रही हैं, बल्कि याददाश्त कमजोर हो रही है और ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो रही है। ऐसे में योग हमारी सेहत के लिए समाधान का काम कर सकता है।

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और नर्वस सिस्टम को मजबूत करने का भी काम करता है। इसी कड़ी में हाकिनी योग मुद्रा एक सरल हस्त मुद्रा है, जो दिमाग को सक्रिय रखने, तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।

    हाकिनी योग मुद्रा, जिसे पावर जेस्चर या ब्रेन पॉवर मुद्रा भी कहा जाता है, हाथों की पांचों उंगलियों को आपस में जोड़कर की जाती है। इसे करने के लिए सबसे पहले आप पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाएं और आंखें बंद करके गहरी और लंबी सांस लें। इसके बाद एक हाथ की सभी उंगलियों की टिप को दूसरे हाथ की उंगलियों की टिप से जोड़ दें। ध्यान रखें कि उंगलियों पर अत्यधिक दबाव न पड़े। भौहों के बीच पर ध्यान केंद्रित करते हुए मन को अनावश्यक विचारों से दूर रखें। शुरुआत में इसे दो से तीन मिनट करें और धीरे-धीरे इसे पांच मिनट तक बढ़ाएं। रोजाना सुबह खाली पेट और शाम को इसका अभ्यास करने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

    इस मुद्रा के अनेक लाभ हैं। सबसे पहले, यह ध्यान और एकाग्रता बढ़ाती है। हाथों की उंगलियों को जोड़ने से मस्तिष्क के दोनों हिस्से सक्रिय होते हैं, जिससे याददाश्त मजबूत होती है और किसी भी काम पर ध्यान बनाए रखना आसान होता है। इसके साथ ही यह तनाव और घबराहट को कम करता है। जो लोग लगातार चिंतित रहते हैं या डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह मुद्रा मानसिक शांति और संतुलन का काम करती है।

    हाकिनी मुद्रा आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करती है। इसे करने से न केवल व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति उत्साहित और प्रेरित महसूस करता है, बल्कि मानसिक स्थिरता और ऊर्जा भी बढ़ती है।

    इसके अलावा, हाकिनी मुद्रा नींद की गुणवत्ता को सुधारने में भी मदद करती है। दिनभर की थकान और तनाव के कारण कई लोगों को रात में नींद नहीं आती। इस मुद्रा का अभ्यास शरीर में रक्तसंचार बढ़ाता है और ऑक्सीजन का प्रवाह सुधारता है, जिससे नींद गहरी और संतुलित होती है। इसके नियमित अभ्यास से नर्वस सिस्टम, टिश्यू और सेल्स की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। इससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति दिनभर सक्रिय महसूस करता है।

  • भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फहराया तिरंगा: परेड की सलामी ली, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन

    भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फहराया तिरंगा: परेड की सलामी ली, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन


    नई दिल्ली । 77वें गणतंत्र दिवस पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। परेड की सलामी लेने के साथ उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का भव्य नज़ारा देखने को मिला। लाल परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर पूरा वातावरण तिरंगे की शान, देशभक्ति के गीतों और नागरिक गर्व से ओत-प्रोत नजर आया।

    परेड में कुल 23 प्लाटून ने अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। इसके साथ ही अश्वरोही दल, शौर्य दल और डॉग स्क्वाड की प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी प्रभावशाली बना दिया। सशस्त्र बलों और पुलिस टुकड़ियों की सधी हुई कदमताल ने उपस्थित जनसमूह को गर्व की अनुभूति कराई। राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण कर जवानों के उत्साह और अनुशासन की सराहना की।

    झंडा वंदन के पश्चात अपने संबोधन में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने प्रदेश और देशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दिन हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सुदृढ़ करने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।

    राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों और अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं महापुरुषों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता और सशक्त संविधान प्राप्त हुआ। बाबा साहेब के विचार सामाजिक न्याय, समता और बंधुत्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, जो आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं।

    उन्होंने गर्व के साथ कहा कि मध्य प्रदेश को बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। उनके सिद्धांतों को आत्मसात कर प्रदेश निरंतर सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्यपाल ने कहा कि आज भारत विश्व पटल पर एक सशक्त, आत्मविश्वासी और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है और देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    राज्यपाल ने किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी तैयारियां पहले से ही की जा रही हैं। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का बजट वर्ष 2002-03 में जहां 600 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य के तहत कृषि विकास का बहुआयामी मॉडल अपनाया गया है, जिसमें तकनीक, नवाचार, प्राकृतिक खेती, बाजार और डिजिटल पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कुल मिलाकर, भोपाल में आयोजित यह गणतंत्र दिवस समारोह संविधान के मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और विकास के संकल्प को दोहराने का सशक्त मंच बना, जिसने नागरिकों में देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर शौर्य चक्र से हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।

    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन के स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।

    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई।सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है। पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।

    यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है। सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के और इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।

  • ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

    ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए टैरिफ के जरिए दबाव बना रहे हैं। ट्रंप अपने हिसाब से लगातार तमाम देशों को टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोपीय यूनियन के साथ-साथ दुनिया के कई देश अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।

    दरअसल, आज के वक्त में हमारे जीवन में डिजिटल फ्रेमवर्क एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। डिजिटल जगत की ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की देन हैं। ऐसे में अगर यह फ्रेमवर्क टूटता है, तो कई जरूरी सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।

    ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक राजनीति में एक तनाव पैदा कर दिया है। दुनिया के कई देश राजनीति और व्यापार से लेकर तकनीक के क्षेत्र में डायनेमिक्स चेंज करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की बार-बार की मांगों और टैरिफ की धमकियों ने ईयू को अपने पुराने साथी के साथ संबंधों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    यूरोप का ज्यादातर डेटा अमेरिकी क्लाउड सर्विसेज पर स्टोर होता है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के पास यूरोप के दो-तिहाई से ज्यादा मार्केट का मालिकाना हक है, जबकि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिका-बेस्ड एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे हैं।

    यूरोपियन पार्लियामेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईयू 80 फीसदी से ज्यादा डिजिटल प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के लिए नॉन-ईयू देशों पर निर्भर करता है।

    ईयू के लॉ-मेकर्स अमेरिका से इतर अलग तकनीकी निर्भरता पर जोर दे रहे हैं। ईयू के कानून बनाने वाले गूगल, ओपन एआई, माइक्रोसॉफ्ट जैसी तमाम कंपनियों के बदले अन्य सोर्स या देसी जुगाड़ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

    स्वीडन के राइज रिसर्च इंस्टीट्यूट की सीनियर रिसर्चर और लुंड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर जोहान लिनाकर के अनुसार यूरोप की लापरवाही ने इस समूह को एक ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां यूरोप का ज्यादातर हिस्सा अमेरिका के बिग टेक के दिए गए क्लाउड पर चल रहा है।

    उन्होंने कहा, “पब्लिक सेक्टर और सरकारें दशकों से एक कम्फर्ट सिंड्रोम से जूझ रही हैं। यहां कंजर्वेटिव प्रोक्योरमेंट कल्चर, रिस्क से बचने की आदत और जैसा है, वैसा ही रहने को तरजीह देने का रिवाज रहा है। अब फर्क यह है कि भूराजनीतिक माहौल जोखिम का एक नया पहलू जोड़ता है, इनोवेशन की कमी और बढ़ती लाइसेंस कॉस्ट से भी आगे है।”

    थिंक-टैंक बर्टेल्समैन स्टिफ्टंग का अनुमान है कि यूरोस्टैक को अपना लक्ष्य हासिल करने में लगभग एक दशक और 300 बिलियन यूरो लगेंगे। अमेरिकी ट्रेड ग्रुप चैंबर ऑफ प्रोग्रेस (जिसमें अमेरिका की कई दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं) के एक कम कंजर्वेटिव अनुमान के अनुसार, पूरी लागत 5 ट्रिलियन यूरो से कहीं ज्यादा होगी।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर मिला शौर्य चक्र, हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
    शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।
    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन का स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।
    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई है।
    सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
    पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है।सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव केऔर इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।