Author: bharati

  • कराची-लाहौर में दोपहर में ‘अंधेरा’! भारत के रणनीतिक कदम से पाकिस्तान में हलचल, आज दिखेगी ‘सूर्यास्त्र’ की पहली झलक

    कराची-लाहौर में दोपहर में ‘अंधेरा’! भारत के रणनीतिक कदम से पाकिस्तान में हलचल, आज दिखेगी ‘सूर्यास्त्र’ की पहली झलक


    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर भारत एक ऐसे हथियार को कर्तव्य पथ पर उतारने जा रहा है, जिसकी एक झलक से ही दुश्मन के दिमाग में खौफ पैदा हो सकता है। भारत का पहला स्वदेशी मल्टी-कैलिबर लॉन्ग-रेंज रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ आज परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देगा। यह सिस्टम 300 किलोमीटर की गहराई तक स्ट्राइक करने में सक्षम है और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पाकिस्तान के कई बड़े शहर कराची, लाहौर और रावलपिंडी जैसे केंद्र अब भारत की पहुंच में हैं।

    सूर्यास्त्र क्या है और क्यों खास है?
    ‘सूर्यास्त्र’ भारत का पहला Made-in-India, Multi-Caliber, Long-Range Rocket Launcher System है, जिसे पुणे स्थित NIBE लिमिटेड ने इज़राइल की एल्बिट सिस्टम्स के सहयोग से विकसित किया है। यह Elbit के PULS (Precise & Universal Launching System) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक बेहद सटीक हमले करने में सक्षम है।

    सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
    सूर्यास्त्र की टेस्टिंग में 5 मीटर से भी कम CEP (Circular Error Probable) की सटीकता दिखाई गई है, जो इसे दुश्मन के एयरबेस, रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल ठिकानों के लिए घातक बनाती है।इसके अलावा, यह सिस्टम 100 किलोमीटर तक लोइटरिंग मिशन भी चला सकता है, जिससे दुश्मन के रडार और सुरक्षा नेटवर्क को चकमा देना आसान हो जाता है।

    मल्टी-कैलिबर क्षमता: एक ही लॉन्चर, कई रॉकेट
    सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-कैलिबर क्षमता है।
    यानी एक ही लॉन्चर से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और गाइडेड म्यूनिशन दागे जा सकते हैं, जिससे ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ता है और लॉजिस्टिक बोझ कम होता है।
    यह सिस्टम BEML के हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV) पर स्थापित है, जिससे यह तेजी से स्थान बदलकर सुरक्षित स्थिति में आ सकता है।

    कराची, लाहौर, पिंडी… सब पर सूर्यास्त्र का साया
    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यास्त्र से भारत की डीप-स्ट्राइक डिटरेंस क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है।
    अब पाकिस्तान के बड़े शहर कराची, लाहौर, रावलपिंडी जैसी जगहें भी भारत की सीधी पहुंच में आ गई हैं।
    सूर्यास्त्र के एक सटीक हमले से दुश्मन के लिए दोपहर 12 बजे भी ‘सूरज डूब’ सकता है—यह भारत की नई रणनीतिक गहराई का प्रतीक माना जा रहा है।

    गणतंत्र दिवस पर दिखेंगे और कई आधुनिक हथियार
    गणतंत्र दिवस परेड में सूर्यास्त्र के अलावा ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्टम, MRSAM, ATAGS, धनुष तोप, शक्तिबान जैसे कई आधुनिक हथियार भी दिखेंगे।
    साथ ही इस बार चार जांस्कर पोनी, दो बैक्ट्रियन ऊंट, शिकारी पक्षी और सेना के कुत्ते भी पहली बार परेड में नजर आएंगे।
    आज कर्तव्य पथ पर जब सूर्यास्त्र की झलक दिखेगी, तो यह सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि भारत की नई सैन्य ताकत और आत्मविश्वास का प्रतीक होगा।
    यह सिस्टम न सिर्फ दुश्मन को दूर से मारने की क्षमता देता है, बल्कि भारतीय सेना की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी को भी बढ़ाता है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्यास्त्र ने भारत की रणनीतिक गहराई को मजबूत कर दिया है और पाकिस्तान के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि ऑफेंसिव डीप-स्ट्राइक में भी सक्षम हो गया है।

  • तनाव और एंग्जाइटी से राहत दिलाए हाकिनी योग मुद्रा, याददाश्त बढ़ाने का आसान तरीका

    तनाव और एंग्जाइटी से राहत दिलाए हाकिनी योग मुद्रा, याददाश्त बढ़ाने का आसान तरीका

    नई दिल्ली। आज की तेज-तर्रार जिंदगी में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। काम का दबाव, लगातार स्मार्टफोन और स्क्रीन के सामने बैठना, नींद की कमी और बढ़ता तनाव हमारे शरीर और दिमाग पर गहरा असर डाल रहे हैं।

    इससे न केवल एंग्जाइटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक परेशानियां बढ़ रही हैं, बल्कि याददाश्त कमजोर हो रही है और ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो रही है। ऐसे में योग हमारी सेहत के लिए समाधान का काम कर सकता है।

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और नर्वस सिस्टम को मजबूत करने का भी काम करता है। इसी कड़ी में हाकिनी योग मुद्रा एक सरल हस्त मुद्रा है, जो दिमाग को सक्रिय रखने, तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है।

    हाकिनी योग मुद्रा, जिसे पावर जेस्चर या ब्रेन पॉवर मुद्रा भी कहा जाता है, हाथों की पांचों उंगलियों को आपस में जोड़कर की जाती है। इसे करने के लिए सबसे पहले आप पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाएं और आंखें बंद करके गहरी और लंबी सांस लें। इसके बाद एक हाथ की सभी उंगलियों की टिप को दूसरे हाथ की उंगलियों की टिप से जोड़ दें। ध्यान रखें कि उंगलियों पर अत्यधिक दबाव न पड़े। भौहों के बीच पर ध्यान केंद्रित करते हुए मन को अनावश्यक विचारों से दूर रखें। शुरुआत में इसे दो से तीन मिनट करें और धीरे-धीरे इसे पांच मिनट तक बढ़ाएं। रोजाना सुबह खाली पेट और शाम को इसका अभ्यास करने से इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

    इस मुद्रा के अनेक लाभ हैं। सबसे पहले, यह ध्यान और एकाग्रता बढ़ाती है। हाथों की उंगलियों को जोड़ने से मस्तिष्क के दोनों हिस्से सक्रिय होते हैं, जिससे याददाश्त मजबूत होती है और किसी भी काम पर ध्यान बनाए रखना आसान होता है। इसके साथ ही यह तनाव और घबराहट को कम करता है। जो लोग लगातार चिंतित रहते हैं या डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह मुद्रा मानसिक शांति और संतुलन का काम करती है।

    हाकिनी मुद्रा आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करती है। इसे करने से न केवल व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति उत्साहित और प्रेरित महसूस करता है, बल्कि मानसिक स्थिरता और ऊर्जा भी बढ़ती है।

    इसके अलावा, हाकिनी मुद्रा नींद की गुणवत्ता को सुधारने में भी मदद करती है। दिनभर की थकान और तनाव के कारण कई लोगों को रात में नींद नहीं आती। इस मुद्रा का अभ्यास शरीर में रक्तसंचार बढ़ाता है और ऑक्सीजन का प्रवाह सुधारता है, जिससे नींद गहरी और संतुलित होती है। इसके नियमित अभ्यास से नर्वस सिस्टम, टिश्यू और सेल्स की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। इससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति दिनभर सक्रिय महसूस करता है।

  • भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फहराया तिरंगा: परेड की सलामी ली, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन

    भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फहराया तिरंगा: परेड की सलामी ली, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन


    नई दिल्ली । 77वें गणतंत्र दिवस पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। परेड की सलामी लेने के साथ उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का भव्य नज़ारा देखने को मिला। लाल परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर पूरा वातावरण तिरंगे की शान, देशभक्ति के गीतों और नागरिक गर्व से ओत-प्रोत नजर आया।

    परेड में कुल 23 प्लाटून ने अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। इसके साथ ही अश्वरोही दल, शौर्य दल और डॉग स्क्वाड की प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी प्रभावशाली बना दिया। सशस्त्र बलों और पुलिस टुकड़ियों की सधी हुई कदमताल ने उपस्थित जनसमूह को गर्व की अनुभूति कराई। राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण कर जवानों के उत्साह और अनुशासन की सराहना की।

    झंडा वंदन के पश्चात अपने संबोधन में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने प्रदेश और देशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दिन हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सुदृढ़ करने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।

    राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों और अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं महापुरुषों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता और सशक्त संविधान प्राप्त हुआ। बाबा साहेब के विचार सामाजिक न्याय, समता और बंधुत्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, जो आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं।

    उन्होंने गर्व के साथ कहा कि मध्य प्रदेश को बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। उनके सिद्धांतों को आत्मसात कर प्रदेश निरंतर सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्यपाल ने कहा कि आज भारत विश्व पटल पर एक सशक्त, आत्मविश्वासी और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है और देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    राज्यपाल ने किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी तैयारियां पहले से ही की जा रही हैं। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का बजट वर्ष 2002-03 में जहां 600 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य के तहत कृषि विकास का बहुआयामी मॉडल अपनाया गया है, जिसमें तकनीक, नवाचार, प्राकृतिक खेती, बाजार और डिजिटल पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कुल मिलाकर, भोपाल में आयोजित यह गणतंत्र दिवस समारोह संविधान के मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और विकास के संकल्प को दोहराने का सशक्त मंच बना, जिसने नागरिकों में देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: पलक झपकते ही 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर शौर्य चक्र से हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।

    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन के स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।

    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई।सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है। पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।

    यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है। सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव के और इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।

  • ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

    ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए टैरिफ के जरिए दबाव बना रहे हैं। ट्रंप अपने हिसाब से लगातार तमाम देशों को टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोपीय यूनियन के साथ-साथ दुनिया के कई देश अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।

    दरअसल, आज के वक्त में हमारे जीवन में डिजिटल फ्रेमवर्क एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। डिजिटल जगत की ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की देन हैं। ऐसे में अगर यह फ्रेमवर्क टूटता है, तो कई जरूरी सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।

    ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक राजनीति में एक तनाव पैदा कर दिया है। दुनिया के कई देश राजनीति और व्यापार से लेकर तकनीक के क्षेत्र में डायनेमिक्स चेंज करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की बार-बार की मांगों और टैरिफ की धमकियों ने ईयू को अपने पुराने साथी के साथ संबंधों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    यूरोप का ज्यादातर डेटा अमेरिकी क्लाउड सर्विसेज पर स्टोर होता है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के पास यूरोप के दो-तिहाई से ज्यादा मार्केट का मालिकाना हक है, जबकि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिका-बेस्ड एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे हैं।

    यूरोपियन पार्लियामेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईयू 80 फीसदी से ज्यादा डिजिटल प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के लिए नॉन-ईयू देशों पर निर्भर करता है।

    ईयू के लॉ-मेकर्स अमेरिका से इतर अलग तकनीकी निर्भरता पर जोर दे रहे हैं। ईयू के कानून बनाने वाले गूगल, ओपन एआई, माइक्रोसॉफ्ट जैसी तमाम कंपनियों के बदले अन्य सोर्स या देसी जुगाड़ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

    स्वीडन के राइज रिसर्च इंस्टीट्यूट की सीनियर रिसर्चर और लुंड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर जोहान लिनाकर के अनुसार यूरोप की लापरवाही ने इस समूह को एक ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां यूरोप का ज्यादातर हिस्सा अमेरिका के बिग टेक के दिए गए क्लाउड पर चल रहा है।

    उन्होंने कहा, “पब्लिक सेक्टर और सरकारें दशकों से एक कम्फर्ट सिंड्रोम से जूझ रही हैं। यहां कंजर्वेटिव प्रोक्योरमेंट कल्चर, रिस्क से बचने की आदत और जैसा है, वैसा ही रहने को तरजीह देने का रिवाज रहा है। अब फर्क यह है कि भूराजनीतिक माहौल जोखिम का एक नया पहलू जोड़ता है, इनोवेशन की कमी और बढ़ती लाइसेंस कॉस्ट से भी आगे है।”

    थिंक-टैंक बर्टेल्समैन स्टिफ्टंग का अनुमान है कि यूरोस्टैक को अपना लक्ष्य हासिल करने में लगभग एक दशक और 300 बिलियन यूरो लगेंगे। अमेरिकी ट्रेड ग्रुप चैंबर ऑफ प्रोग्रेस (जिसमें अमेरिका की कई दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं) के एक कम कंजर्वेटिव अनुमान के अनुसार, पूरी लागत 5 ट्रिलियन यूरो से कहीं ज्यादा होगी।

  • पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा

    पाकिस्तान ही नहीं, इस देश में भी घुसी थी इंडियन आर्मी: 9 उग्रवादियों का ‘खातमा’, अब आधिकारिक हुआ खुलासा



    नई दिल्ली। भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद अब म्यांमार में भारतीय सेना द्वारा किए गए covert operation का औपचारिक खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में 9 उग्रवादी मार गिराए गए और एक बड़े आतंकवादी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया गया था।
    77वें गणतंत्र दिवस पर मिला शौर्य चक्र, हुआ खुलासा
    77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
    शौर्य चक्र से जुड़े आधिकारिक प्रशस्ति पत्र (Citation) में पहली बार जुलाई 2025 में म्यांमार के अंदर की गई एक गोपनीय सैन्य कार्रवाई का औपचारिक उल्लेख किया गया।

    इस ऑपरेशन को 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में अंजाम दिया गया बताया गया है।
    Citation के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे के नेतृत्व में सटीक और तेज कार्रवाई में एक मजबूत आतंकवादी ठिकाना नष्ट किया गया और 9 हथियारबंद कैडर को मार गिराया गया। इनमें एक वरिष्ठ नेता भी शामिल था।

    किस संगठन को निशाना बनाया गया?
    सेना ने ऑपरेशन का स्थान और लक्ष्य संगठन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह घटनाक्रम जुलाई 2025 में सामने आए दावों से मेल खाता है।
    उस समय प्रतिबंधित ULFA-I (United Liberation Front of Asom – Independent) ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उसके तीन शीर्ष नेताओं को ड्रोन और मिसाइल हमलों में मारा गया था।

    संगठन ने आरोप लगाया था कि भारतीय सेना ने उसके मोबाइल शिविरों को निशाना बनाया था।

    इसी दौरान भारत की ओर से इस तरह की किसी कार्रवाई से इनकार किया गया था, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी स्पष्ट किया था कि राज्य पुलिस इस कार्रवाई में शामिल नहीं थी।

    ऑपरेशन की खासियत: सटीक, सीमित और गोपनीय
    शौर्य चक्र साइटेशन में ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा गया कि लक्ष्य एक राष्ट्रविरोधी संगठन के शिविर थे।

    Citation में लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे की रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की सराहना की गई है।
    सेना का कहना है कि मिशन बिना किसी नुकसान के सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

    क्या यह भारत की नई सीमा-पार नीति का संकेत है?
    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से भारत की सीमापार आतंकवाद विरोधी रणनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है।
    पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें तेज हुई हैं और यह ऑपरेशन इसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि सरकार और सेना ऐसे अभियानों पर आम तौर पर सीमित जानकारी साझा करती हैं, लेकिन इस सम्मान के जरिए पहली बार इस ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी है।यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सटीक, सीमित और गोपनीय ऑपरेशन की भूमिका को रेखांकित करता है।सीमा पार सक्रिय आतंकवादी ढांचों को कमजोर करना, बिना किसी बड़े कूटनीतिक तनाव केऔर इस मिशन की सफलता ने भारतीय सेना की तैयारी, रणनीति और साहस को फिर से साबित कर दिया है।
  • विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी पर संशय, टीम चयन के बाद भी जारी है अटकलें

    विश्व कप में पाकिस्तान की भागीदारी पर संशय, टीम चयन के बाद भी जारी है अटकलें

    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टी20 विश्व कप 2026 के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। टीम के ऐलान के साथ ही माना जा रहा है कि पाकिस्तान विश्व कप में हिस्सा लेने के लिए तैयार है, लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और है। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के विश्व कप खेलने पर अब भी संशय बना हुआ है।

    पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने साफ किया है कि टीम की घोषणा को टूर्नामेंट में भागीदारी की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, टीम की घोषणा के बाद नकवी ने विश्व कप के लिए चुने गए खिलाड़ियों के साथ एक बंद कमरे में बैठक की। बैठक में खिलाड़ियों को पीसीबी के मौजूदा रुख और सरकार की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

    लाहौर में हुई चर्चा के दौरान नकवी ने खिलाड़ियों और हेड कोच माइक हेसन से कहा, “हम सरकार की सलाह का इंतजार कर रहे हैं। सरकार जो भी फैसला लेगी, हम उसका पालन करेंगे। अगर वे नहीं चाहते कि हम विश्व कप में हिस्सा लें, तो हम नहीं जाएंगे।”

    इस बैठक में खिलाड़ियों को बांग्लादेश के समर्थन में पीसीबी के रुख के बारे में भी बताया गया। बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत जाने से इनकार कर दिया था, जिसे पाकिस्तान ने आईसीसी का गलत फैसला करार दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों ने इस मुद्दे पर पीसीबी और सरकार का समर्थन किया। खिलाड़ियों ने कथित तौर पर कहा कि बोर्ड और सरकार जो भी फैसला लेंगी, वे उसके साथ खड़े रहेंगे। पाकिस्तान के सोमवार को इस पूरे मामले पर अपना अंतिम फैसला घोषित करने की उम्मीद है।

    मीडिया से बातचीत में नकवी ने रविवार को कहा कि बोर्ड अभी भी पाकिस्तान सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार कर रही है कि टीम को विश्व कप खेलना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि ये बात खिलाड़ियों को भी स्पष्ट रूप से बता दी गई है।

    टी20 विश्व कप में पाकिस्तान को भारत, नामीबिया, यूएसए और नीदरलैंड के साथ ग्रुप ए में रखा गया है। भारत और श्रीलंका की मेजबानी में हो रहे विश्व कप में पाकिस्तान क्रिकेट टीम विश्व कप के अपने सारे मैच श्रीलंका में खेलेगी।

    अगर पाकिस्तान टूर्नामेंट से हटने का फैसला लेती है, तो आईसीसी उस पर सख्त प्रतिबंध लगा सकती है। वहीं विश्व कप में उसकी जगह युगांडा को मौका दिया जा सकता है

  • चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम

    चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम


    नई दिल्ली। चीन सीमा के नजदीक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने 6 दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह अभ्यास 19 से 24 जनवरी तक पूर्वी सियांग जिले के सिगार में आयोजित किया गया, जिसका मकसद इंटर-फोर्स कोऑर्डिनेशन और युद्ध की तैयारी को और मजबूत करना था।

    अग्नि परीक्षा: युद्धक्षेत्र की नई तैयारी
    रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह अभ्यास दोनों बलों के बीच ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और संयुक्त कौशल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    इस अभ्यास में स्पीयर कोर के स्पीयरहेड गनर्स ने पैदल सेना रेजिमेंट और ITBP कर्मियों के साथ मिलकर इसे संचालित किया। यह अपनी तरह की पहली सहयोगात्मक गोलाबारी (Artillery firing) प्रशिक्षण पहल है।

    तोपखाने की ताकत को समझना, लक्ष्य यही
    इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था कि नॉन-आर्टिलरी (non-artillery) कर्मियों को तोपखाने के अभियानों और प्रक्रियाओं से परिचित कराकर युद्धक्षेत्र में तालमेल बढ़ाया जा सके।

    कर्नल रावत ने कहा कि इससे पारंपरिक भूमिकाओं के बीच के अलगाव को तोड़ने में मदद मिलती है और गतिशील युद्ध परिदृश्यों में गोलाबारी के एकीकरण की समझ बढ़ती है।

    आर्टिलरी फायरिंग का प्रशिक्षण
    प्रशिक्षण के दौरान पैदल सेना और ITBP कर्मियों को अनुभवी गनर्स की देखरेख में स्वतंत्र रूप से कई तोपखाना फायरिंग अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
    इस प्रक्रिया से आपसी विश्वास, समन्वय और तत्परता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

    अग्नि परीक्षा का पहला चरण: भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी
    लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि यह अभ्यास भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए एकीकृत युद्ध क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    इस अभ्यास ने भारतीय सेना की ज्वाइंट कार्यकुशलता, मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।
    चीन सीमा के पास यह अभ्यास भारतीय सेना और ITBP की तैयारी, एकता और युद्ध कौशल का एक मजबूत संदेश है। ‘अग्नि परीक्षा’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हर स्तर पर तैयार है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गणतंत्र दिवस की गरिमा, अमेरिका और अन्य देशों ने जताई शुभकामनाएं

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गणतंत्र दिवस की गरिमा, अमेरिका और अन्य देशों ने जताई शुभकामनाएं

    नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिका ने भारत को बधाई दी और दोनों देशों के बीच गहरे और मजबूत रिश्तों का जिक्र किया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच एक ऐतिहासिक और मजबूत बंधन है, जो समय के साथ और अधिक व्यापक और प्रभावशाली हुआ है।

    रुबियो ने अपने संदेश में कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों की ओर से, मैं भारत के लोगों को आपके गणतंत्र दिवस पर दिल से बधाई देता हूं।” उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उभरती हुई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही क्वाड मंच के तहत भी भारत और अमेरिका की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बना रही है।

    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए ठोस और सकारात्मक परिणाम ला रहे हैं। उन्होंने भविष्य की ओर देखते हुए कहा, “मैं आने वाले वर्ष में अपने साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हूं।”

    पिछले दो दशकों में अमेरिका और भारत के रिश्ते रक्षा, व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़े हैं। आज यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जहां दोनों देश अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर स्थिरता, आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

    इस बीच, भूटान के पीएम त्शेरिंग तोबगे ने संदेश जारी कर भारत को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। और लिखा, “मैं इस खुशी के गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार और लोगों को गर्मजोशी भरी और दिल से शुभकामनाएं देने में भूटान के लोगों के साथ शामिल हूं। यह अवसर देश की समृद्ध यात्रा और उस भावना का सम्मान करता है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है, साथ ही यह हमारे दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों और गहरे संबंधों को भी दर्शाता है। जैसे ही हम इस सार्थक रास्ते पर पीछे मुड़कर देखते हैं, हमें भूटान और भारत के बीच स्थायी दोस्ती की याद आती है, और मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारी साझेदारी और साझा आकांक्षाएं और मजबूत होती रहेंगी। भारत में हमारे प्यारे दोस्तों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।”

    रूस के दूतावास ने भी भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं दीं, जिससे भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और मित्रता का संदेश मजबूत बताया।

    रूस के दूतावास ने अलग-अलग भाषाओं में 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। रूस के दूतावास ने कहा, “भारत एक ऐसी जगह है जहां पुरानी समझ और भविष्य के सपने साथ-साथ चलते हैं। भारत ने दुनिया को दिखाया है कि विविधता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। भारत का गणतंत्र हर इंसान की गरिमा में विश्वास पर आधारित है।” रूसी दूतावास की ओर भारत की विभिन्न भाषाओं में ये शुभकामनाएं दी गई।

    बांग्लादेश के दूतावास ने भी भारत को 77 वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

    वहीं, ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “26 जनवरी ऑस्ट्रेलिया और भारतीयों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास दिन है। गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और ऑस्ट्रेलिया-भारत की मजबूत दोस्ती के एक और साल के लिए भी शुभकामनाएं।”

  • रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल

    रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात रिंग रोड निर्माण के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू भेड़ाघाट क्षेत्र के ललपुर गांव के पास निर्माणाधीन पुल के पिलर की सेंट्रिंग अचानक गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में पश्चिम बंगाल निवासी एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान शेख नैरुद्दीन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात के समय पुल के पिलर पर सेंट्रिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से भारी ढांचा गिर पड़ा। सेंट्रिंग के नीचे काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए। घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य मजदूरों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई।

    हादसे में घायल हुए मजदूरों के नाम राहिल और राजेश्वर बताए जा रहे हैं। दोनों को हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों मजदूर फिलहाल निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और एहतियातन रिंग रोड पर चल रहा निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया। प्रारंभिक जांच में सेंट्रिंग के गिरने की वजह तकनीकी खामी या लापरवाही मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

    बताया जा रहा है कि रिंग रोड पर यह पुल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से बनवाया जा रहा है। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण कार्य में नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा था और मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे कार्य में लगाया गया था। हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा साधनों की कमी के आरोप भी सामने आए हैं।

    इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। मजदूरों की जान की कीमत पर तेजी से काम पूरा करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। वहीं मृतक मजदूर के परिजनों को सूचना दे दी गई है और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। कुल मिलाकर यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।