Author: bharati

  • पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    ग्वालियर । ग्वालियर में शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। सिरोल थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि युवक ने पहले उससे प्रेम संबंध बनाए और शादी करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद वह उसे बहाने से होटल ले गया जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के मुताबिक जब उसने घटना के बाद शादी की बात कही तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे डराने धमकाने लगा। इसके बाद युवती ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान रोहित राजौरिया के रूप में हुई है जो सिरोल की फूटी कॉलोनी का निवासी बताया गया है। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि रोहित ने लगातार शादी का भरोसा देकर उसका विश्वास जीता था। इसी भरोसे के चलते वह उसके साथ जाने के लिए तैयार हुई। पीड़िता के अनुसार 15 अक्टूबर को आरोपी उसे मंदिर जाने के बहाने कलारी चौराहा स्थित होटल सिरोल ले गया था।

    शिकायत के मुताबिक होटल में दोपहर करीब 11:30 बजे से 1 बजे के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि उस समय आरोपी ने शादी करने का भरोसा दिलाया था। हालांकि घटना के बाद जब उसने युवक से शादी करने के लिए कहा तो उसका रवैया बदल गया। आरोप है कि उसने शादी करने से इनकार कर दिया और युवती को डराने धमकाने लगा। इससे पीड़िता को महसूस हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है।

    इसके बाद युवती ने हिम्मत जुटाकर सिरोल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच शुरू की। बुधवार देर रात आरोपी रोहित राजौरिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा सके।

    पुलिस अब पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे मामलों में शिकायत के प्रत्येक पहलू की जांच करना और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी होता है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना ने एक बार फिर प्रेम संबंधों में शादी का झूठा भरोसा देकर धोखा देने के आरोपों से जुड़े मामलों को चर्चा में ला दिया है। पुलिस की ओर से फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस का नोटिस

    तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस का नोटिस

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को नोटिस जारी किया है। दोनों को तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा, अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए तलब किया गया है। पुलिस इस मामले में कथित सरकारी आदेश के उल्लंघन और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति में अनधिकृत प्रवेश से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहा होने के बाद नोटिस भेजे गए। वहीं, अजिंक्य शिंदे को भी जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए समन जारी किया गया है। क्राइम ब्रांच तीनों से संबंधित घटनाक्रम और आरोपों के बारे में जानकारी जुटाना चाहती है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह समझने की कोशिश कर सकती है कि कथित घटना किन परिस्थितियों में हुई और संबंधित लोगों की इसमें क्या भूमिका रही।

    मामले का संबंध कथित तौर पर सरकारी आदेश का पालन नहीं करने और जंतर-मंतर पहुंचने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति में बिना अनुमति प्रवेश करने के आरोपों से बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित उल्लंघन से जुड़े घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल जांच का विषय माना जाना चाहिए। किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जाना अपने आप में आरोप साबित होने या दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है।

    क्राइम ब्रांच की ओर से की जा रही पूछताछ का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करना हो सकता है। पुलिस तीनों से घटना के क्रम, कथित सरकारी आदेश और संपत्ति में प्रवेश से जुड़े पहलुओं पर सवाल कर सकती है। हालांकि, पूछताछ में किन विशिष्ट सवालों पर ध्यान दिया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इस मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पुलिस के आधिकारिक नोटिस, संबंधित दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध विवरण में यह पुष्टि नहीं की गई है कि तीनों के खिलाफ किन धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में किसी विशिष्ट अपराध या कानूनी निष्कर्ष का दावा करना उचित नहीं होगा।

    सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद नोटिस जारी होने तथा अजिंक्य शिंदे को तलब किए जाने से मामले की जांच आगे बढ़ने का संकेत मिलता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पूछताछ के बाद पुलिस क्या कदम उठाएगी या जांच में कौन-से नए तथ्य सामने आएंगे।

    फिलहाल, मामले में तीनों को जांच में शामिल होने के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान या नोटिस की पूरी जानकारी सामने आने पर आरोपों की प्रकृति, जांच के दायरे और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • पत्नी से बात कराने की जिद में रेलवे की हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, घंटों चला बचाव अभियान..

    पत्नी से बात कराने की जिद में रेलवे की हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, घंटों चला बचाव अभियान..


    नई दिल्ली ।
    तेलंगाना के वारंगल जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां पत्नी के बात नहीं करने से नाराज एक युवक रेलवे स्टेशन पर हाईटेंशन बिजली लाइन के गर्डर पर चढ़ गया। युवक ने ऊंचाई पर बैठकर नीचे कूदने की धमकी दी और कहा कि जब तक उसकी पत्नी उससे फोन पर बात नहीं करेगी या मौके पर नहीं आएगी, वह नीचे नहीं उतरेगा। घटना के दौरान स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बाद में पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने उसे समझाकर सुरक्षित नीचे उतारा।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना वारंगल जिले के नेक्कोंडा रेलवे स्टेशन की है। बताया गया कि युवक अचानक प्लेटफॉर्म से रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन के गर्डर पर चढ़ गया। वह जिस स्थान पर पहुंचा, वहां करीब 25 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन मौजूद थी। इतनी खतरनाक जगह पर युवक को देखकर स्टेशन पर मौजूद लोग घबरा गए। यात्रियों और रेल कर्मचारियों की नजर जब उस पर पड़ी, तो तत्काल स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू हुई।

    गर्डर पर बैठे युवक ने नीचे मौजूद लोगों के सामने रोना-धोना शुरू कर दिया। उसने बताया कि उसकी पत्नी उससे बात नहीं कर रही है और काफी समय से नाराज चल रही है। युवक ने अपनी पत्नी से बातचीत कराने की मांग की। उसने धमकी दी कि यदि उसकी पत्नी फोन पर बात नहीं करेगी या उससे मिलने मौके पर नहीं आएगी, तो वह नीचे कूदकर अपनी जान दे देगा। उसकी इस हरकत से वहां मौजूद लोगों की चिंता बढ़ गई, क्योंकि बिजली की हाईटेंशन लाइन के पास जरा-सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल के जवान मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन की बिजली आपूर्ति को सुरक्षित किया गया, ताकि बचाव के दौरान किसी तरह का बड़ा हादसा न हो। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने युवक से बातचीत शुरू की और उसे शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उसे समझाया कि उसकी मांग पर बात करने का रास्ता निकाला जा सकता है, लेकिन इस तरह जान जोखिम में डालना खतरनाक है।

    बताया जा रहा है कि युवक का यह घटनाक्रम काफी देर तक चलता रहा। पुलिस और स्थानीय लोगों ने धैर्य बनाए रखते हुए उसे लगातार समझाया। उसे आश्वासन दिया गया कि उसकी पत्नी से बातचीत कराने की कोशिश की जाएगी। काफी समझाने-बुझाने के बाद युवक शांत हुआ और गर्डर से नीचे उतरने के लिए तैयार हो गया। उसके सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने राहत की सांस ली।

    नीचे उतरने के बाद पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से युवक को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके परिजनों को भी घटना की जानकारी दी गई है। हालांकि, युवक और उसकी पत्नी के बीच विवाद की पूरी वजह तथा इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। कुछ लोग इसे फिल्म ‘शोले’ के उस दृश्य से जोड़कर देख रहे हैं, जिसमें वीरू टंकी पर चढ़कर अपनी शादी की बात मनवाने की कोशिश करता है। हालांकि, वास्तविक घटना में युवक की हरकत ने यात्रियों और रेल कर्मचारियों के सामने सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी। रेलवे की हाईटेंशन लाइन के आसपास इस तरह चढ़ना बेहद जोखिमभरा है और इससे संबंधित व्यक्ति के साथ अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

  • दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के नोटिस पर विवाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र से की कार्रवाई वापस लेने की मांग

    दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के नोटिस पर विवाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र से की कार्रवाई वापस लेने की मांग


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के लिए जारी नोटिस के बाद विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान और कानूनी स्थिति से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उसने सरकार से धार्मिक स्थलों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की अपील भी की है।

    इस मामले में बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बयान जारी कर नोटिस का विरोध किया। उनके अनुसार, संबंधित सरकारी एजेंसी लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस की ओर से मस्जिद को हटाने के लिए कार्रवाई की गई है। बोर्ड ने केंद्र सरकार से इस नोटिस को निरस्त कर वापस लेने की मांग की है। हालांकि, नोटिस जारी होने के पीछे सरकारी पक्ष की विस्तृत दलील और मस्जिद की जमीन को लेकर आधिकारिक स्थिति की पूरी जानकारी उपलब्ध विवरण में सामने नहीं आई है।

    डॉ. इलियास ने आरोप लगाया कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से दिल्ली की प्राचीन और ऐतिहासिक मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग आधारों पर इन धार्मिक स्थलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। रेस कोर्स मस्जिद के मामले में भी सरकारी जमीन पर निर्माण होने का दावा किया जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद के ऐतिहासिक अस्तित्व और कानूनी स्थिति के समर्थन में सरकारी रिकॉर्ड के कई दस्तावेज मौजूद हैं। ये आरोप बोर्ड के प्रवक्ता ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    मस्जिद की ऐतिहासिक और धार्मिक अहमियत का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि यह केवल पूजा का प्राचीन स्थल नहीं है, बल्कि दिल्ली के इतिहास से भी जुड़ी हुई है। प्रवक्ता के अनुसार, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी ने मस्जिद को अपनी ऐतिहासिक इमारतों की सूची में शामिल किया है। इसके अतिरिक्त, मस्जिद का उल्लेख वक्फ से जुड़े रिकॉर्ड में भी होने का दावा किया गया है।

    बोर्ड के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि रेस कोर्स मस्जिद को वर्ष 1977 में दिल्ली के राजपत्र में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मस्जिद को सूचीबद्ध किया गया है, जहां उसकी संपत्ति की पहचान से संबंधित जानकारी दर्ज है। इन रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बोर्ड ने मस्जिद के ऐतिहासिक दर्जे और उसके अस्तित्व से जुड़े पक्ष को महत्वपूर्ण बताया है।

    डॉ. इलियास के बयान के अनुसार, मस्जिद ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित की गई थी और इसे ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित घोषित किए जाने की बात भी कही गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिद के इमाम को वक्फ बोर्ड की ओर से वेतन दिया जाता है। बोर्ड इन तथ्यों को मस्जिद की धार्मिक और प्रशासनिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश कर रहा है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र मस्जिद को हटाने के लिए जारी नोटिस और उसकी जमीन की कानूनी स्थिति है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर नोटिस वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, मस्जिद की भूमि, सरकारी रिकॉर्ड और नोटिस के आधार को लेकर संबंधित विभागों की विस्तृत स्थिति सामने आने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।

  • अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमित शाह के वेतन, सरकारी सुविधाओं, निवेश और जमीन-जायदाद को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर सीट से नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण चुनावी हलफनामे में दिया था। इसके अनुसार, अमित शाह और उनकी पत्नी सोनल शाह की संयुक्त घोषित संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। इसमें अमित शाह की व्यक्तिगत संपत्ति करीब 36.55 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    अमित शाह की आय में सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उनके चुनावी हलफनामे में किराये से होने वाली आय, कृषि से प्राप्त आमदनी और शेयरों से मिलने वाले लाभांश का भी उल्लेख है। उनकी कुल संपत्ति को समझने के लिए वेतन के साथ-साथ निवेश और अचल संपत्तियों के विवरण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, अमित शाह का मूल मासिक वेतन 1 लाख 24 हजार रुपये बताया गया है। निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 87 हजार रुपये और अन्य भत्ता 2 हजार रुपये प्रति माह दर्ज किया गया है। दैनिक भत्ते के रूप में 75 हजार रुपये का आंकड़ा भी दिया गया है, लेकिन इसे नियमित मासिक वेतन के साथ जोड़कर निश्चित मासिक आय मानना सही नहीं होगा। दैनिक भत्ता निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार मिलता है।

    गृह मंत्री के पद पर रहते हुए उन्हें सरकारी कामकाज के लिए आवास, आधिकारिक वाहन, सुरक्षा व्यवस्था और पात्रता के अनुसार चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। ये सुविधाएं पद से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए होती हैं। इन्हें उनकी निजी संपत्ति या व्यक्तिगत वेतन का हिस्सा नहीं माना जाता।

    वर्ष 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अमित शाह की चल संपत्ति लगभग 20.23 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति करीब 16.32 करोड़ रुपये थी। इस तरह उनकी कुल व्यक्तिगत घोषित संपत्ति लगभग 36.55 करोड़ रुपये बैठती है। चल संपत्ति में बैंक जमा, शेयर, निवेश, नकदी और आभूषण जैसी चीजें शामिल हैं, जबकि अचल संपत्ति में जमीन, भूखंड और मकान जैसी संपत्तियां आती हैं।

    हलफनामे में अमित शाह के पास लगभग 17.46 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर होने का उल्लेख था। इसके अलावा, करीब 72.87 लाख रुपये के कीमती धातुओं और आभूषणों का विवरण दर्ज किया गया था। उनके पास नकद राशि लगभग 24,164 रुपये बताई गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि उनकी घोषित चल संपत्ति में शेयर निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    उनकी पत्नी सोनल शाह की संपत्ति को जोड़ने पर दंपति की संयुक्त संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। सोनल शाह की चल संपत्ति करीब 22.46 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति लगभग 6.55 करोड़ रुपये बताई गई थी। दोनों की कुल घोषित देनदारियां लगभग 42.10 लाख रुपये थीं। ये आंकड़े 2024 में दाखिल हलफनामे पर आधारित हैं, इन्हें वर्तमान बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।

    अमित शाह की घोषित संपत्ति में पिछले वर्षों के दौरान बदलाव भी दर्ज हुआ है। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव के हलफनामे में उनकी संपत्ति लगभग 11.78 करोड़ रुपये बताई गई थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह और उनकी पत्नी की संयुक्त संपत्ति करीब 40.33 करोड़ रुपये दर्ज हुई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 65.67 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग वर्षों में व्यक्तिगत और संयुक्त संपत्ति के विवरण का आधार अलग हो सकता है।

    संपत्ति में वृद्धि का अर्थ केवल वेतन से हुई कमाई नहीं है। शेयरों के मूल्य में बदलाव, कृषि और किराये से होने वाली आय, विरासत तथा अन्य निवेश भी कुल संपत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

    अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता अनिलचंद्र शाह प्लास्टिक पाइप के कारोबार से जुड़े थे। राजनीति में सक्रिय होने से पहले अमित शाह पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े रहे और शेयर बाजार में भी काम किया। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े तथा भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय राजनीति के जरिए आगे बढ़े। गुजरात विधानसभा में उनका चुनावी सफर 1997 में शुरू हुआ। उस समय संपत्ति संबंधी हलफनामों का आज जैसा व्यवस्थित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, इसलिए राजनीति में प्रवेश के समय उनकी कुल संपत्ति का सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है।

  • पुलित्जर पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रंप ने जताई नाराजगी, रूस जांच की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर साधा निशाना

    पुलित्जर पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रंप ने जताई नाराजगी, रूस जांच की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार के बाद अब पुलित्जर पुरस्कार नहीं मिलने पर भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने दावा किया कि लेखन के क्षेत्र में उनके काम के लिए उन्हें पुलित्जर सम्मान मिलना चाहिए था। बुधवार को दक्षिण कैरोलिना में आयोजित एक रैली के दौरान उन्होंने यह बात कही। इस मौके पर ट्रंप ने रूस से जुड़े मामलों की जांच पर रिपोर्टिंग करने वाले उन पत्रकारों की भी आलोचना की, जिन्हें पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर चर्चा शुरू हो गई और कई यूजर्स ने उनकी लेखन क्षमता पर सवाल उठाए।

    ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके साथ ही उन्होंने लेखन के लिए पुलित्जर पुरस्कार पर भी अपना दावा जताया। उनका आरोप था कि रूस से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करने वाले जिन पत्रकारों को यह सम्मान दिया गया, उनकी रिपोर्टिंग गलत थी। ट्रंप के मुताबिक, ऐसे पत्रकारों को पुरस्कार नहीं मिलना चाहिए था।

    रूस से संबंधित जांच और उसकी मीडिया रिपोर्टिंग पहले भी अमेरिकी राजनीति में विवाद का विषय रही है। इस बार ट्रंप ने पुरस्कार विजेता पत्रकारों की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए सम्मान के फैसले की आलोचना की। हालांकि, उनके बयान में रिपोर्टिंग की किन विशिष्ट खबरों या तथ्यों को गलत बताया गया, इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।

    ट्रंप अब तक 19 किताबें लिख चुके हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘द आर्ट ऑफ द डील’ शामिल है। इस पुस्तक के जरिए वह कारोबारी दुनिया में अपनी पहचान और व्यावसायिक अनुभवों को सामने रख चुके हैं। पुलित्जर पुरस्कार के लिए अपना दावा पेश करते समय उन्होंने अपने लेखन का उल्लेख किया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस पुस्तक या रचना के आधार पर इस सम्मान के हकदार होने की बात कर रहे थे।

    उनके बयान पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने ट्रंप की लेखन क्षमता को लेकर व्यंग्य किया। एक यूजर ने टिप्पणी की कि जो व्यक्ति बच्चों की किताब तक नहीं लिख सकता, वह पुलित्जर पुरस्कार पाने की उम्मीद कैसे कर सकता है। एक अन्य यूजर ने उनके अंग्रेजी लिखने और बोलने के तरीके पर तंज कसते हुए कहा कि उनके वाक्यों को समझने के लिए खोजी दल की जरूरत पड़ सकती है। ये प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर उनके दावे को लेकर होने वाली आलोचना का हिस्सा रहीं।

    पुलित्जर पुरस्कार को दुनिया के प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। यह मुख्य रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम के लिए दिया जाता है, लेकिन इसका दायरा केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है। साहित्य, नाटक और संगीत के क्षेत्र में भी इस पुरस्कार के तहत सम्मान प्रदान किए जाते हैं। इसकी प्रतिष्ठा के कारण इसे कई बार पत्रकारिता के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जैसी अहमियत वाला सम्मान भी कहा जाता है।

    ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब वह पहले भी नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए नोबेल पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी का उल्लेख किया है। अब पुलित्जर पुरस्कार को लेकर दिए गए बयान में भी उन्होंने अपने काम को सम्मान के योग्य बताया और पूर्व में सम्मानित पत्रकारों की आलोचना की।

    हालांकि, किसी पुरस्कार के लिए पात्रता और चयन का फैसला संबंधित पुरस्कार संस्था के नियमों तथा निर्णायक प्रक्रिया के आधार पर होता है। ट्रंप के बयान से उनकी व्यक्तिगत अपेक्षा सामने आती है, जबकि रूस से जुड़ी रिपोर्टिंग और पुरस्कार विजेताओं के काम को लेकर उठाए गए उनके सवालों का आकलन संबंधित खबरों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

  • शिवपुरी कोतवाली में कथित शराबखोरी और फायरिंग के मामले में टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच, सात पुलिसकर्मी निलंबित

    शिवपुरी कोतवाली में कथित शराबखोरी और फायरिंग के मामले में टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच, सात पुलिसकर्मी निलंबित

    शिवपुरी: में सिटी कोतवाली से जुड़े एक कथित घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। थाना प्रभारी टीआई रोहित दुबे को लाइन अटैच कर दिया गया है, जबकि उपनिरीक्षक प्रवीण त्रिवेदी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। यह मामला मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात का बताया जा रहा है, जब शहर में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चल रहा था। घटनाक्रम में थाने के भीतर कथित रूप से शराब पीने, ताश खेलने, पुलिसकर्मियों के बीच विवाद और गोली चलने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात करीब एक बजे सिटी कोतवाली परिसर में स्थित पुराने महिला थाने के कमरों में कुछ पुलिसकर्मियों के मौजूद होने की बात कही गई है। इनमें हवलदार विनय सिंह जाटव, कोतवाली के चालक शरद यादव और दो अन्य आरक्षकों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मी शराब के नशे में ताश खेल रहे थे। इसी बीच ताश खेलने के दौरान कहासुनी हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई।

    बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान शरद यादव के साथ मारपीट की गई। इसके बाद गुस्से में आकर उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली चला दी। हालांकि, गोली किसी व्यक्ति को नहीं लगी और किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई। घटना के बाद विनय सिंह जाटव समेत कुछ पुलिसकर्मियों के कोतवाली परिसर से चले जाने की बात कही गई है। यह भी दावा किया गया कि शरद यादव उन्हें तलाश करते हुए माधव चौक तक पहुंचे थे। इन विवरणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले को लेकर विनय सिंह जाटव से संपर्क किए जाने पर उन्होंने ऐसी किसी घटना से इनकार करते हुए इसे अफवाह बताया। इस विरोधाभास के कारण घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है। थाने के पुराने महिला थाना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फुटेज की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित समय पर परिसर में क्या हुआ था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुटेज और निलंबन आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

    घटनाक्रम के दौरान टीआई रोहित दुबे की ड्यूटी माधव चौक पर बताई गई थी। आरोप है कि वह करीब दो घंटे तक निर्धारित स्थान पर मौजूद नहीं थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिवपुरी की पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया सिटी कोतवाली पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद थाना प्रभारी को लाइन अटैच करने और सात पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। विभागीय कार्रवाई का विस्तृत आधार और आरोपों की अंतिम स्थिति उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।

    निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में उपनिरीक्षक प्रवीण त्रिवेदी के अलावा गजेंद्र परिहार, देवेंद्र रावत, जितेंद्र रायपुरिया, विनय जाटव, शरद यादव और अवतार सिंह शामिल हैं। इस प्रकार कुल सात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। थाना प्रभारी रोहित दुबे को लाइन अटैच करने के पीछे स्टाफ पर नियंत्रण रखने में कथित विफलता और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का मामला बताया गया है।

    रोहित दुबे का शिवपुरी में कोतवाली प्रभारी के रूप में यह दूसरा कार्यकाल बताया गया है। वह अशोकनगर से स्थानांतरित होकर शिवपुरी आए थे और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौर के कार्यकाल में उन्हें सिटी कोतवाली की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले एक जन आंदोलन के दौरान विवाद में आने के बाद उन्हें इस थाने से हटाया गया था। बाद में उन्हें फिर से कोतवाली प्रभारी बनाया गया। अब ताजा घटनाक्रम के बाद उन्हें दोबारा लाइन अटैच किया गया है। मामले में आरोपों की पुष्टि और घटनाक्रम की पूरी स्थिति जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • पुरानी रंजिश में पथराव और गोलियां चलने से मचा हड़कंप, ग्वालियर में मुख्य आरोपी उदय गुर्जर पकड़ा गया, बाकी की तलाश तेज

    पुरानी रंजिश में पथराव और गोलियां चलने से मचा हड़कंप, ग्वालियर में मुख्य आरोपी उदय गुर्जर पकड़ा गया, बाकी की तलाश तेज


    ग्वालियर । ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र के दुल्लपुर इलाके में पथराव और फायरिंग के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने बुधवार देर रात इस मामले के मुख्य आरोपी उदय गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और दहशत का माहौल बन गया था। दोनों पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गया था। आरोप है कि दोनों ओर से छतों पर चढ़कर पत्थर बरसाए गए और फायरिंग भी की गई। इस दौरान घरों के बाहर खड़े कई वाहनों के कांच टूट गए थे। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

    मामला 7 अक्टूबर का है जब दुल्लपुर इलाके में रहने वाले रघुवीर गुर्जर और रामवीर गुर्जर के परिवारों के बीच कहासुनी हो गई थी। दोनों परिवार एक दूसरे के आमने सामने रहते हैं। जानकारी के मुताबिक घर के पास खड़ी कार के नजदीक आग जलाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। शुरुआत में मामूली दिखाई देने वाली यह कहासुनी कुछ ही देर में बढ़ गई और दोनों पक्षों के लोग आमने सामने आ गए। इसके बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और पथराव शुरू हो गया।

    बताया गया है कि विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के लोग अपने घरों की छतों पर पहुंच गए और एक दूसरे पर पत्थर फेंकने लगे। इस दौरान फायरिंग किए जाने की बात भी सामने आई थी। अचानक हुए इस घटनाक्रम से आसपास रहने वाले लोग घबरा गए। घरों के बाहर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा और इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की पहचान करने में जुट गई।

    पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि दोनों परिवारों के बीच पहले से ही विवाद चल रहा था। करीब चार महीने पहले भी दोनों पक्षों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। उस मामले में एक पक्ष की शिकायत पर 11 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज किया गया था। बाद में उदय गुर्जर का नाम भी इस मामले में जोड़ा गया था। बताया जा रहा है कि पुराने मामले में राजीनामा करने के लिए दबाव बनाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ गई थी। इसी पुरानी दुश्मनी के बीच 7 अक्टूबर को एक बार फिर विवाद भड़क गया।

    पुलिस ने अब उदय गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ के जरिए घटना की पूरी परिस्थितियों और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। थाटीपुर थाना पुलिस इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के दौरान फायरिंग किसने की और हिंसा में किन लोगों की भूमिका रही।

    दुल्लपुर की यह घटना बताती है कि पुरानी रंजिश और मामूली विवाद किस तरह गंभीर हिंसा का रूप ले सकते हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई पूछताछ तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। इलाके के लोगों को अब उम्मीद है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य होगी और इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सकेगी।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 366.36 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,343.33 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 123.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.75 के स्तर पर कारोबार शुरू किया।

    कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा। सेंसेक्स दिन के शुरुआती कारोबार में 73,005.11 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 ने 22,554.85 का न्यूनतम स्तर छुआ। निफ्टी में 22,700 का स्तर टूटने से बाजार की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी। व्यापक बाजार में भी गिरावट देखने को मिली और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयर दबाव में रहे।

    निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.04 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार कारोबार में ऑटोमोबाइल, धातु और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांकों में 0.98 प्रतिशत तक की गिरावट रही। निफ्टी फार्मा भी 0.78 प्रतिशत कमजोर हुआ। इसके अलावा एफएमसीजी, रियल्टी, सीमेंट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर रहा है। व्यापक बाजार में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ने के कारण निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन वाले बड़े शेयरों की ओर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के समय में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तेजी को कंपनियों की कमाई के बजाय बाजार में उपलब्ध तरलता से भी समर्थन मिला था। ऐसे में ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड वायदा एक प्रतिशत से अधिक चढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर निवेशकों की कारोबारी धारणा पर पड़ सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,590 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो बाजार में सुधार की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, तेजी के मजबूत संकेत के लिए निफ्टी का 22,840 के स्तर से ऊपर लौटना जरूरी बताया गया। हालिया गिरावट और 22,700 के स्तर के नीचे कारोबार ने बाजार में संभावित सुधार को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।

    इस बीच, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1,022 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी करीब 1,614 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद शुरुआती कारोबार में बाजार गिरावट से नहीं उबर सका।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में दो प्रतिशत तक गिर गए। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को तेजी दर्ज की गई थी। प्रौद्योगिकी शेयरों में मजबूती के कारण नैस्डैक लगभग एक प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त रही। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के बेहतर कारोबारी नतीजों ने अमेरिकी बाजारों को समर्थन दिया था।

  • दीपावली और छठ पर घर जाना होगा आसान, ग्वालियर-गांधीनगर समेत 4 ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाए, नई व्यवस्था लागू

    दीपावली और छठ पर घर जाना होगा आसान, ग्वालियर-गांधीनगर समेत 4 ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाए, नई व्यवस्था लागू


    ग्वालियर । दीपावली और छठ पूजा के दौरान ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने राहत देने वाला फैसला लिया है। त्योहारों के समय बढ़ती भीड़ और स्लीपर क्लास में सीटों की मांग को देखते हुए चार ट्रेनों के कोच कंपोजिशन में बदलाव किया गया है। इन ट्रेनों में थर्ड एसी इकोनॉमी कोच की संख्या घटाकर स्लीपर कोच बढ़ाए गए हैं। रेलवे के इस फैसले से उन यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है जो त्योहारों पर अपने घर जाने या दूसरे शहरों की यात्रा करने के लिए स्लीपर क्लास में टिकट बुक कराते हैं।

    रेलवे के अनुसार कोच व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य यात्रियों की जरूरत के हिसाब से सीटों की उपलब्धता बढ़ाना है। दीपावली और छठ पूजा के आसपास ग्वालियर और झांसी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग गुजरात और महाराष्ट्र की ओर यात्रा करते हैं। त्योहारों के दौरान ट्रेनों में भीड़ बढ़ने से टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यात्रियों को कई बार वेटिंग टिकट लेकर सफर की योजना बनानी पड़ती है। स्लीपर कोच बढ़ने से इस श्रेणी में अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध हो सकेंगी।

    रेलवे ने जिन ट्रेनों की व्यवस्था में बदलाव किया है उनमें ग्वालियर-गांधीनगर एक्सप्रेस और झांसी-बांद्रा स्पेशल शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन दोनों ट्रेनों में नई कोच व्यवस्था 21 और 22 अक्टूबर से लागू की गई है। बाकी दो ट्रेनों के नाम और उनमें बदलाव लागू होने की तारीख की जानकारी संबंधित रेलवे सूचना से स्पष्ट होने पर ही बताई जा सकती है।

    त्योहारों के समय लंबी दूरी की ट्रेनों में स्लीपर क्लास की मांग अधिक रहती है। बड़ी संख्या में यात्री परिवार के साथ सफर करते हैं और किफायती किराए के कारण स्लीपर श्रेणी को प्राथमिकता देते हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इसी श्रेणी में सीटों की कमी और वेटिंग की समस्या सामने आती है। ऐसे में एसी इकोनॉमी कोच घटाकर स्लीपर कोच बढ़ाने का फैसला यात्रियों की मांग के अनुरूप माना जा रहा है।

    हालांकि कोचों की संख्या में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि हर ट्रेन में हर तारीख पर सीट मिलना सुनिश्चित हो गया है। यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित ट्रेन में उपलब्ध सीटों और टिकट की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए। साथ ही ट्रेन के कोच कंपोजिशन और यात्रा संबंधी ताजा जानकारी के लिए रेलवे के आधिकारिक आरक्षण माध्यमों पर भरोसा करना चाहिए।

    रेलवे का यह कदम त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है। स्लीपर कोच में बर्थ बढ़ने से अधिक यात्रियों को आरक्षण मिलने की संभावना बनेगी और उन्हें यात्रा की योजना बनाने में कुछ राहत मिल सकती है।