Author: bharati

  • एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी

    एमपी में मानसून की रफ्तार थमी, एंट्री के बाद ठहरा, 43 जिलों में आज बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 जून को दक्षिण-पूर्वी हिस्से के 15 जिलों में दस्तक देने के बाद मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है। पिछले तीन दिनों से मानसून आगे नहीं बढ़ा है और मौसम विभाग के अनुसार इसके अगले 2 से 3 दिन तक भी इसी स्थिति में रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अनुकूल परिस्थितियां बनने पर मानसून सबसे पहले भोपाल और उज्जैन संभाग में आगे बढ़ेगा, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इसकी एंट्री सबसे आखिर में होगी।

    24 जून को मानसून के प्रदेश में प्रवेश के साथ आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में इसके पहुंचने की घोषणा की गई थी। इसके बाद से मानसून की प्रगति रुकी हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना जताई है।

    आज 43 जिलों में बारिश के आसार
    शनिवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह और छतरपुर में बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, निवाड़ी और टीकमगढ़ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    शुक्रवार को कई जिलों में झमाझम बारिश
    शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब 2 इंच बारिश दर्ज की गई। शाजापुर जिले के शुजालपुर, अकोदिया और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि उज्जैन में डेढ़ इंच से अधिक पानी बरसा। इसके अलावा दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर समेत कई जिलों में भी आंधी और बारिश का असर रहा।

    तापमान में आई गिरावट
    बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। खरगोन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा खंडवा में 30.1, सागर में 31.1, छिंदवाड़ा में 31.8, बैतूल में 32.7, सिवनी और उमरिया में 33.2, धार में 33.4 तथा नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल और इंदौर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बारिश के आंकड़ों में सुधार
    पिछले 72 घंटे से प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार बारिश होने से वर्षा के आंकड़ों में सुधार दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर 4 इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 99 मिमी (करीब 4 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक 58.5 मिमी (करीब 2.1 इंच) वर्षा हुई है। यह सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी, यानी हालिया बारिश से करीब 9 प्रतिशत का सुधार हुआ है। फिलहाल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 68 प्रतिशत कम और पश्चिमी हिस्से में 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

  • जब लता मंगेशकर ने दिया नितिन मुकेश को पहला बड़ा मंच, पिता के निधन के बाद मिला ऐसा मौका जिसने बना दिया सफल पार्श्वगायक

    जब लता मंगेशकर ने दिया नितिन मुकेश को पहला बड़ा मंच, पिता के निधन के बाद मिला ऐसा मौका जिसने बना दिया सफल पार्श्वगायक

    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिनकी सफलता के पीछे संघर्ष, प्रतिभा और सही समय पर मिला एक अवसर अहम भूमिका निभाता है। प्रसिद्ध पार्श्वगायक नितिन मुकेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। महान गायक मुकेश के निधन के बाद जब पूरा परिवार गहरे शोक में था, उसी कठिन दौर में स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने उन्हें ऐसा अवसर दिया जिसने उनके संगीत करियर की दिशा ही बदल दी।

    नितिन मुकेश का जन्म 27 जून 1950 को हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था और बचपन से ही उन्होंने अपने पिता मुकेश से गायन की बारीकियां सीखीं। वह शुरुआत से ही संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें सबसे बड़ा अवसर उस समय मिला जब उनके पिता का अचानक निधन हो गया।

    मुकेश के निधन से भारतीय संगीत जगत में गहरा शून्य पैदा हो गया था। उस समय लता मंगेशकर के साथ उनके कई अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रम पहले से तय थे। शुरुआती दौर में इन कार्यक्रमों को रद्द करने पर विचार किया गया, लेकिन बाद में लता मंगेशकर ने एक अलग फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि इन कार्यक्रमों को जारी रखा जाएगा और मंच पर मुकेश की जगह उनके बेटे नितिन मुकेश को अवसर दिया जाएगा।

    बताया जाता है कि कार्यक्रमों के दौरान लता मंगेशकर ने दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा कि मुकेश अब उनके बीच नहीं रहे, इसलिए वह उनके बेटे के साथ इस संगीत यात्रा को आगे बढ़ा रही हैं। यह पल नितिन मुकेश के लिए बेहद भावुक होने के साथ-साथ उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ भी साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति देने का यह अवसर उन्हें व्यापक पहचान दिलाने में निर्णायक साबित हुआ।

    इसके बाद नितिन मुकेश ने देश और विदेश के अनेक संगीत कार्यक्रमों में अपनी गायकी से श्रोताओं का दिल जीता। धीरे-धीरे उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में भी अपनी अलग पहचान बनाई। विशेष रूप से 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई लोकप्रिय गीत गाए, जिन्हें आज भी संगीत प्रेमी पसंद करते हैं। उनकी आवाज ने उन्हें फिल्म उद्योग के स्थापित पार्श्वगायकों की श्रेणी में पहुंचा दिया।

    अपने करियर के दौरान नितिन मुकेश ने कई प्रतिष्ठित संगीतकारों के साथ काम किया। उन्होंने आर.डी. बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, बप्पी लाहिड़ी, खय्याम और आनंद-मिलिंद जैसे दिग्गज संगीतकारों की धुनों को अपनी आवाज दी। इसके अलावा उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले और अलका याज्ञनिक जैसी शीर्ष गायिकाओं के साथ भी कई यादगार युगल गीत रिकॉर्ड किए।

    नितिन मुकेश का संगीत सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कठिन परिस्थितियों में मिला एक भरोसा और सही मार्गदर्शन किसी कलाकार के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और प्रतिभा के दम पर भारतीय संगीत जगत में एक सम्मानजनक और स्थायी पहचान स्थापित की।

  • देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    देश का 16 फीसदी केला देता है महाराष्ट्र का यह जिला, आधुनिक खेती और GI टैग ने बनाया ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’

    नई दिल्ली । भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई मानी जाती है। देश में हर वर्ष करोड़ों टन केले का उत्पादन होता है, जिसमें महाराष्ट्र अग्रणी राज्य है। इसी राज्य का जलगांव जिला अपनी असाधारण उत्पादन क्षमता के कारण ‘बनाना कैपिटल ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। यह जिला अकेले देश के कुल केला उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि महाराष्ट्र में केले की खेती के कुल क्षेत्रफल का करीब 69 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं स्थित है।

    जलगांव की सफलता के पीछे उसकी अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां सबसे बड़ा कारण मानी जाती हैं। उत्तर में सतपुड़ा और दक्षिण में अजंता पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह क्षेत्र उपजाऊ काली मिट्टी, पर्याप्त धूप और गर्म जलवायु के कारण केले की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। यहां की मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता अधिक है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर होते हैं।

    केले की खेती केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि जलगांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी है। जिले के हजारों किसान सीधे तौर पर इस फसल पर निर्भर हैं। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। इस कारण केला उत्पादन यहां की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बन चुका है।

    जलगांव के किसानों ने समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को तेजी से अपनाया है। टिश्यू कल्चर पौधों का उपयोग, ड्रिप सिंचाई प्रणाली और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन ने उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विशेष रूप से ड्रिप सिंचाई तकनीक ने पानी की बचत के साथ पौधों तक आवश्यक मात्रा में सिंचाई सुनिश्चित की है, जिससे लागत कम हुई और गुणवत्ता में सुधार आया।

    इस जिले में कई लोकप्रिय केले की किस्मों की खेती होती है। बसराई किस्म अपनी गुणवत्ता, स्वाद और लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता के कारण देशभर के बाजारों में पसंद की जाती है। वहीं जी-9 (G-9) किस्म अधिक उत्पादन, बड़े आकार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और निर्यात की संभावनाओं के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है। इन उन्नत किस्मों ने जलगांव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत पहचान दिलाई है।

    जलगांव की एक और बड़ी ताकत उसका बेहतर परिवहन नेटवर्क है। सड़क और रेल मार्ग से देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जुड़ा होने के कारण यहां से केले की आपूर्ति तेजी और आसानी से की जाती है। भुसावल जंक्शन देश के महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में शामिल है, जिससे कृषि उत्पादों का परिवहन और भी सुगम हो जाता है।

    जलगांव के केले को वर्ष 2016 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है। यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि यहां उत्पादित केले की गुणवत्ता और विशेषताएं इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, अनुकूल प्राकृतिक संसाधन, मजबूत परिवहन व्यवस्था और किसानों की नवाचार अपनाने की क्षमता ने जलगांव को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी केले के प्रमुख उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

  • पिता की मौत के छह महीने बाद बेटे ने उठाया आत्मघाती कदम, घर में फंदे पर मिला शव, कारणों की जांच जारी

    पिता की मौत के छह महीने बाद बेटे ने उठाया आत्मघाती कदम, घर में फंदे पर मिला शव, कारणों की जांच जारी


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक 19 वर्षीय युवक द्वारा कथित रूप से आत्महत्या किए जाने का’ मामला सामने आया है। अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र के बल्लभ नगर स्थित घर में युवक का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले युवक के पिता ने भी आत्महत्या की थी।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान आकाश गौतम के रूप में हुई है। वह बेरोजगार था और अपनी मां तथा छोटे भाई के साथ रहता था। शुक्रवार सुबह उसकी मां रोज की तरह घरों में काम करने चली गई थीं, जबकि छोटा भाई खेलने के लिए बाहर निकल गया था। दोपहर के समय जब छोटा भाई घर लौटा तो उसने आकाश को कमरे में फंदे पर लटका देखा। इसके बाद परिजनों और आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    घटना की जानकारी मिलते ही अरेरा हिल्स थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। जांच अधिकारी का कहना है कि परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है तथा सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    प्रारंभिक पूछताछ में परिजनों ने बताया कि लगभग छह महीने पहले आकाश के पिता ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिवार का कहना है कि पिता की मृत्यु के बाद आकाश मानसिक तनाव में रहने लगा था। बताया गया कि इस दौरान उसे शराब की लत भी लग गई थी और समय के साथ उसकी स्थिति और बिगड़ती चली गई। हालांकि पुलिस इन दावों की भी जांच कर रही है और इन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं मान रही है।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।

  • 30 जून से राहु बदलेंगे नक्षत्र, अंगारक योग का असर मेष, कन्या और धनु राशि पर कैसा रहेगा?

    30 जून से राहु बदलेंगे नक्षत्र, अंगारक योग का असर मेष, कन्या और धनु राशि पर कैसा रहेगा?


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में राहु को रहस्यमयी और मायावी ग्रह माना जाता है, जबकि मंगल ऊर्जा, साहस और पराक्रम के प्रतीक हैं। 30 जून 2026 को राहु धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिसका स्वामी मंगल है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह परिवर्तन अंगारक योग के प्रभाव को बढ़ा सकता है। इस दौरान कुछ राशियों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा में सकारात्मक बदलाव के संकेत माने जाते हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर इसका वास्तविक प्रभाव उसकी जन्म कुंडली, ग्रहों की दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।

    क्या है अंगारक योग?

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और मंगल का विशेष संबंध बनने पर अंगारक योग का प्रभाव माना जाता है। यह योग व्यक्ति में साहस, महत्वाकांक्षा और जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ा सकता है, लेकिन साथ ही क्रोध, आवेग और जल्दबाजी में फैसले लेने की प्रवृत्ति भी बढ़ा सकता है।

    कुछ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दौरान तकनीक, शेयर बाजार, राजनीति और कारोबारी गतिविधियों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

    इन 3 राशियों के लिए शुभ माने जा रहे हैं योग

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर आत्मविश्वास और पराक्रम बढ़ाने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बन सकती है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है और नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    कन्या राशि

    कन्या राशि वालों के लिए करियर और व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। रुकी हुई पदोन्नति मिलने, आय बढ़ने और अचानक आर्थिक लाभ के अवसर बनने की संभावना मानी जा रही है। नए व्यावसायिक संपर्क भी लाभकारी साबित हो सकते हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि के जातकों के लिए यह समय आय के नए स्रोत विकसित करने वाला हो सकता है। सामाजिक सम्मान बढ़ सकता है और निवेश से जुड़े मामलों में सोच-समझकर लिया गया निर्णय लाभदायक साबित हो सकता है।

    इस दौरान किन बातों का रखें विशेष ध्यान?

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अंगारक योग के दौरान—

    जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचें।

    क्रोध और आवेग पर नियंत्रण रखें।

    निवेश या आर्थिक निर्णय पूरी जानकारी के बाद ही लें।

    विवादों और अनावश्यक बहस से दूरी बनाए रखें।

    पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय

    अंगारक योग के प्रभाव को संतुलित करने के लिए पारंपरिक रूप से ये उपाय बताए जाते हैं—

    प्रत्येक मंगलवार हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

    भगवान हनुमान की पूजा करें।

    जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।

    मूक पशुओं को गुड़ और रोटी खिलाएं।

    धैर्य और विवेक के साथ निर्णय लें।

    महत्वपूर्ण सूचना

    यह लेख वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें बताए गए फल और उपाय वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं तथा इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक, निवेश, करियर या व्यक्तिगत निर्णय के लिए योग्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
  • Guru Gochar 2026: कर्क राशि में गुरु का गोचर, इन 4 राशियों के लिए बन सकते हैं धन लाभ के योग

    Guru Gochar 2026: कर्क राशि में गुरु का गोचर, इन 4 राशियों के लिए बन सकते हैं धन लाभ के योग


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, सुख, समृद्धि, संतान, शिक्षा और धन का कारक ग्रह माना जाता है। जब भी गुरु अपनी राशि बदलते हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ता है।

    5 जून 2026 को गुरु का कर्क राशि में प्रवेश होने जा रहा है। कर्क राशि में गुरु को उच्च (Exalted) माना जाता है। इसलिए कई ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह गोचर कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के जीवन पर वास्तविक प्रभाव उसकी जन्म कुंडली, दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर करता है।

    आर्थिक दृष्टि से क्यों खास माना जाता है यह गोचर?

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु के कर्क राशि में प्रवेश से—

    आय के नए स्रोत बनने की संभावना बढ़ सकती है।

    निवेश से जुड़े अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

    करियर में उन्नति के योग बन सकते हैं।

    व्यापार में नई साझेदारियां लाभदायक साबित हो सकती हैं।

    बचत और वित्तीय योजना मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

    इन 4 राशियों के लिए शुभ मानी जा रही है अवधि

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में प्रगति का संकेत दे सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलने, पदोन्नति के अवसर बनने और वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग मिलने की संभावना है। पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    मिथुन राशि

    मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत माने जा रहे हैं। लंबे समय से रुके हुए धन की प्राप्ति या आय के नए स्रोत बनने की संभावना बन सकती है। परिवार में सुखद वातावरण रहने के योग भी बताए गए हैं।

    सिंह राशि

    सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय निवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है और कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत बनने के संकेत हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के अधूरे कार्य पूरे होने की संभावना बन सकती है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। पारिवारिक संबंध बेहतर होने और स्वास्थ्य में सुधार के भी योग बताए गए हैं।

    गुरु के शुभ प्रभाव के लिए पारंपरिक उपाय

    ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं—

    प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु या देवगुरु बृहस्पति की पूजा करें।

    “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

    जरूरतमंद लोगों को पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी या बेसन से बनी मिठाई का दान करें।

    केले के वृक्ष या भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें।

    गुरुजनों और शिक्षकों का सम्मान करें।

    ध्यान रखें

    यह सभी फल वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक, निवेश या करियर संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
  • क्या घर की खुशबू बदल सकती है भाग्य? जानिए वास्तु शास्त्र में सुगंध का महत्व

    क्या घर की खुशबू बदल सकती है भाग्य? जानिए वास्तु शास्त्र में सुगंध का महत्व


    नई दिल्ली । घर की साफ-सफाई और सजावट जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्व वहां के वातावरण का भी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ प्राकृतिक सुगंध घर में सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बनाने में सहायक मानी जाती हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है और इन्हें पारंपरिक विश्वासों के रूप में देखा जाता है। अगर आप घर का माहौल शांत और सुखद बनाना चाहते हैं, तो इन प्राकृतिक सुगंधों का उपयोग कर सकते हैं।

    चंदन
    चंदन की सुगंध को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यह घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

    मोगरा

    मोगरे की भीनी-भीनी खुशबू मन को सुकून देती है। यह तनाव कम करने और घर में ताजगी का एहसास कराने के लिए लोकप्रिय है।

    पारिजात

    हरसिंगार के फूलों की सुगंध को शांति और सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है। कई लोग इसे घर के आंगन या बगीचे में लगाना शुभ मानते हैं।

    केवड़ा

    केवड़े की ठंडी और मनमोहक खुशबू मानसिक शांति का अनुभव कराती है। इसकी सुगंध ध्यान और एकाग्रता के लिए भी पसंद की जाती है।

    लैवेंडर

    लैवेंडर की खुशबू तनाव कम करने और अच्छी नींद के लिए दुनियाभर में लोकप्रिय है। अरोमाथेरेपी में भी इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।

    दालचीनी

    दालचीनी की गर्म और मीठी महक घर में आरामदायक माहौल बनाने में मदद करती है। इसकी सुगंध सर्द मौसम में विशेष रूप से पसंद की जाती है।

    पुदीना 

    पुदीने की ताजगीभरी खुशबू मन को तरोताजा रखने और वातावरण में ताजगी का एहसास कराने के लिए जानी जाती है।

    लेमन ग्रास

    लेमन ग्रास की हल्की साइट्रस सुगंध घर को फ्रेश महसूस कराती है और कई लोग इसे प्राकृतिक एयर फ्रेशनर के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
     कपूर
    पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाला कपूर वातावरण को सुगंधित बनाने के साथ-साथ पारंपरिक रूप से पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

    गुलाब

    गुलाब की खुशबू प्रेम, शांति और सकारात्मक भावनाओं का प्रतीक मानी जाती है। यह घर के वातावरण को सुखद बनाने में मदद करती है।

    सुगंध का सही उपयोग कैसे करें?

    घर में प्राकृतिक फूलों का इस्तेमाल करें।

    एसेंशियल ऑयल डिफ्यूजर का उपयोग कर सकते हैं।

    कृत्रिम तेज केमिकल वाली खुशबुओं की बजाय प्राकृतिक सुगंध चुनें।

    घर में नियमित सफाई और उचित वेंटिलेशन बनाए रखें, ताकि ताजगी बनी रहे।

    ध्यान रखें

    वास्तु शास्त्र में इन सुगंधों को शुभ माना जाता है, लेकिन आर्थिक सफलता, स्वास्थ्य या भाग्य पर इनके प्रभाव के दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी प्राकृतिक और मनभावन खुशबुएं तनाव कम करने, मन को शांत रखने और घर का माहौल सुखद बनाने में निश्चित रूप से मदद कर सकती हैं।
  • सिर्फ परंपरा नहीं, विज्ञान भी था वजह! पुराने जमाने के घरों में छोटे दरवाजे बनाने का राज

    सिर्फ परंपरा नहीं, विज्ञान भी था वजह! पुराने जमाने के घरों में छोटे दरवाजे बनाने का राज


    नई दिल्ली । अगर आपने कभी किसी पुराने गांव, हवेली या पारंपरिक घर को देखा होगा, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि वहां के दरवाजे आज के मुकाबले काफी छोटे और नीचे होते थे। घर में प्रवेश करने के लिए लोगों को झुकना पड़ता था। पहली नजर में यह अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे कई व्यावहारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण मौजूद थे। आइए जानते हैं कि आखिर पुराने समय में दरवाजे इतने छोटे क्यों बनाए जाते थे।

    तापमान नियंत्रित रखने का आसान तरीका

    उस दौर में न बिजली की सुविधा हर जगह उपलब्ध थी और न ही एसी या हीटर जैसे आधुनिक साधन। ऐसे में छोटे दरवाजे घर के अंदर का तापमान संतुलित रखने में मदद करते थे। गर्मी के मौसम में बाहर की गर्म हवा कम मात्रा में घर के अंदर प्रवेश करती थी, जबकि सर्दियों में घर की गर्माहट लंबे समय तक बनी रहती थी। इससे ऊर्जा के बिना ही प्राकृतिक तापमान नियंत्रण संभव हो जाता था।

    सुरक्षा के लिहाज से भी था बेहतर

    पुराने समय में चोरी, डकैती और बाहरी हमलों का खतरा अधिक रहता था। छोटे दरवाजों से कोई भी व्यक्ति सीधे और तेजी से घर में प्रवेश नहीं कर सकता था। घर में आने वाले को झुकना पड़ता था, जिससे उसकी गति धीमी हो जाती थी। ऐसे में घर के लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया देने का अतिरिक्त समय मिल जाता था।

    मिट्टी और पत्थर के घरों की मजबूती

    उस समय अधिकांश घर मिट्टी, ईंट या पत्थर से बनाए जाते थे। भारी लकड़ी के बड़े दरवाजे इन दीवारों पर ज्यादा दबाव डाल सकते थे। इसी वजह से दरवाजों का आकार छोटा रखा जाता था, ताकि चौखट और दीवारों पर कम भार पड़े और घर लंबे समय तक मजबूत बना रहे।

     घर की निजता बनाए रखने में मददगार
    छोटे और नीचे बने दरवाजे घर के अंदर की गतिविधियों को बाहर से आसानी से दिखाई नहीं देने देते थे। इससे आंगन और परिवार, विशेषकर महिलाओं की निजता बनी रहती थी। ग्रामीण और पारंपरिक समाज में इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता था।

    सम्मान और विनम्रता का प्रतीक
    भारतीय परंपरा में यह भी माना जाता था कि जब कोई व्यक्ति झुककर किसी के घर में प्रवेश करता है, तो वह अपने अहंकार को बाहर छोड़कर सम्मान के साथ अंदर आता है। यही कारण है कि कई पुराने मंदिरों और पारंपरिक भवनों के प्रवेश द्वार भी अपेक्षाकृत छोटे बनाए जाते थे, ताकि प्रवेश करने वाला स्वाभाविक रूप से सिर झुकाए।

    क्या यह पूरी तरह सच है?

    हालांकि इन कारणों का उल्लेख इतिहास, पारंपरिक वास्तुकला और लोक मान्यताओं में मिलता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर पुराने घर में दरवाजे छोटे होने का कारण एक जैसा नहीं था। अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु, निर्माण सामग्री, स्थानीय सुरक्षा जरूरतों और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार इनके आकार में अंतर देखने को मिलता था।
  • स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद, सेहत भी बरकरार! नोट करें हेल्दी होममेड मोमोज की सीक्रेट रेसिपी

    स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद, सेहत भी बरकरार! नोट करें हेल्दी होममेड मोमोज की सीक्रेट रेसिपी


    नई दिल्ली । मोमोज आज बच्चों से लेकर बड़ों तक का पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुके हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मोमोज मैदे से बनाए जाते हैं, जिनका अधिक सेवन सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। अगर आपके बच्चे भी बार-बार मोमोज खाने की जिद करते हैं, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप इन्हें घर पर ही हेल्दी तरीके से तैयार कर सकते हैं। इस रेसिपी में मैदे की जगह मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल किया जाता है और भरावन में ताजी सब्जियां व पनीर डाला जाता है, जिससे स्वाद के साथ पोषण भी मिलता है।

    सामग्री

    आटे के लिए
    2 कप मल्टीग्रेन आटा

    1 बड़ा चम्मच दूध

    चुटकीभर नमक

    आवश्यकतानुसार पानी

    स्टफिंग के लिए
    2 चम्मच तेल

    2 कप कद्दूकस की हुई पत्तागोभी

    ½ कप मैश किया हुआ पनीर

    1 बारीक कटी गाजर

    ½ कप बारीक कटा प्याज

    1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट

    1 छोटा चम्मच सोया सॉस

    ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर

    स्वादानुसार नमक

    ऐसे बनाएं हेल्दी मोमोज

    सबसे पहले मल्टीग्रेन आटे में नमक, दूध और पानी डालकर मुलायम आटा गूंथ लें और 15-20 मिनट के लिए ढककर रख दें।

    अब एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट हल्का भून लें। इसके बाद प्याज, गाजर और पत्तागोभी डालकर तेज आंच पर हल्का स्टिर फ्राई करें, ताकि सब्जियां कुरकुरी बनी रहें।

    अब इसमें सोया सॉस, काली मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाकर अच्छी तरह चलाएं। अगर सब्जियों से ज्यादा पानी निकल जाए, तो स्टफिंग को सूती कपड़े में हल्का निचोड़ लें।

    अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बेलें, बीच में तैयार स्टफिंग रखें और मनचाही मोमोज की शेप दें।

    स्टीमर की ट्रे में हल्का तेल लगाएं या पत्तागोभी के पत्ते बिछा दें। सभी मोमोज सजाकर 10-12 मिनट तक स्टीम करें। जब मोमोज हल्के चमकदार दिखाई देने लगें, तो समझिए वे तैयार हैं।

    इन्हें गर्मागर्म चिली-गार्लिक सॉस या हेल्दी डिप के साथ परोसें।

    परफेक्ट मोमोज बनाने के खास टिप्स

    मोमोज का आटा मुलायम रखने के लिए थोड़ा दूध मिलाएं।

    स्टफिंग हमेशा पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही भरें।

    बेले हुए मोमोज के रैपर को सूखने न दें, उन्हें ढककर रखें।

    स्टीमर में पत्तागोभी के पत्ते बिछाने से मोमोज चिपकते नहीं हैं।

    स्टीम होने के तुरंत बाद मोमोज सर्व करें, इससे उनका स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर रहते हैं।

  • CM योगी का देवरिया दौरा: 106 विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, विपक्ष पर भी साधा निशाना

    CM योगी का देवरिया दौरा: 106 विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, विपक्ष पर भी साधा निशाना

    देवरिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को देवरिया जिले को 456 करोड़ रुपये से अधिक की 106 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि देवरिया में तेजी से निवेश बढ़ रहा है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण विकास अब हर गांव और हर घर तक पहुंच रहा है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक और प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित करना और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

    अयोध्या और राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े हालिया विवादों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इस पर अनावश्यक आक्षेप नहीं लगाए जाने चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामले में विशेष जांच दल (SIT) अपनी रिपोर्ट दे चुका है और कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि “दूध का दूध और पानी का पानी” होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई ठोस प्रमाण है तो वह उसे एसआईटी के सामने प्रस्तुत करे, बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए।

    कांग्रेस पर भी साधा निशाना

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और “जय श्रीराम” के नारे पर आपत्ति जताते थे, वे आज आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश को केवल लूटा ही नहीं, बल्कि उसकी व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया।

    सोशल मीडिया पर भी दी जानकारी

    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि बाबा दुग्धेश्वर नाथ, बाबा महेंद्र नाथ और महर्षि देवरहा बाबा की पावन भूमि देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर जिले के समग्र विकास को नई मजबूती दी गई है।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से देवरिया में निवेश लगातार बढ़ रहा है, युवाओं को रोजगार मिल रहा है और आधुनिक सड़क व अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से विकास अब लोगों के द्वार तक पहुंच चुका है।