Author: bharati

  • हेडिंग्ले में पाकिस्तान का शर्मनाक सरेंडर, इंग्लैंड ने 3 दिन में पारी और 103 रन से रौंदा; बल्लेबाजों ने टेके घुटने

    हेडिंग्ले में पाकिस्तान का शर्मनाक सरेंडर, इंग्लैंड ने 3 दिन में पारी और 103 रन से रौंदा; बल्लेबाजों ने टेके घुटने


    नई दिल्ली। इंग्लैंड ने हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में पाकिस्तान को बुरी तरह शिकस्त देकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। लीड्स में खेला गया यह मुकाबला तीसरे दिन ही खत्म हो गया। इंग्लैंड ने पाकिस्तान को पारी और 103 रन से हराया। पाकिस्तान की टीम दोनों पारियों को मिलाकर भी इंग्लैंड की पहली पारी के स्कोर के करीब नहीं पहुंच सकी। मेजबान टीम ने पहली पारी में 409 रन बनाए थे जबकि पाकिस्तान 171 और 135 रन पर ऑलआउट हो गया।

    पाकिस्तान की परेशानी मुकाबले के पहले ही दिन शुरू हो गई थी। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया और उसके तेज गेंदबाजों ने इस फैसले को पूरी तरह सही साबित कर दिया। ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। दोनों ने पहली पारी में पांच-पांच विकेट झटके। रॉबिन्सन ने 5 विकेट देकर 51 रन दिए जबकि टंग ने 5 विकेट के लिए 46 रन खर्च किए। पाकिस्तान की पूरी टीम 171 रन पर सिमट गई।

    पाकिस्तान की ओर से अब्दुल्लाह शफीक ने 61 रन बनाकर सबसे ज्यादा संघर्ष किया। उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों को रन बनाने का मौका नहीं दिया। मुश्किल परिस्थितियों में इंग्लैंड की सीम गेंदबाजी के सामने पाकिस्तान का टॉप और मिडिल ऑर्डर पूरी तरह बेअसर नजर आया।

    इसके बाद इंग्लैंड ने बल्लेबाजी में भी पाकिस्तान को कोई राहत नहीं दी। मेजबान टीम ने 409 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया और पहली पारी के आधार पर 238 रन की बढ़त हासिल कर ली। हैरी ब्रूक ने 91 रन की शानदार पारी खेली। जॉर्डन कॉक्स ने 73 रन बनाए जबकि कप्तान जो रूट ने 66 रन और डैन लॉरेंस ने 51 रन का योगदान दिया। पाकिस्तान के अली उस्मान ने पांच विकेट लेकर इंग्लैंड को रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक मेजबान टीम मैच पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर चुकी थी।

    238 रन से पिछड़ने के बाद पाकिस्तान को मैच बचाने के लिए बड़ी दूसरी पारी की जरूरत थी लेकिन कहानी फिर वही रही। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने पाकिस्तान के बल्लेबाजों को क्रीज पर जमने का मौका ही नहीं दिया। पाकिस्तान ने 51 रन तक दो विकेट गंवा दिए थे और इसके बाद विकेटों का पतन तेज हो गया। टीम ने केवल 25 रन के भीतर चार विकेट गंवा दिए। मोहम्मद रिजवान ने 41 रन बनाकर कुछ प्रतिरोध जरूर किया लेकिन उनकी पारी भी पाकिस्तान को हार से नहीं बचा सकी। पूरी टीम 135 रन पर सिमट गई।

    दूसरी पारी में ओली रॉबिन्सन जोश टंग और जोफ्रा आर्चर ने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखा। रॉबिन्सन और टंग ने पूरे मैच में आठ-आठ विकेट अपने नाम किए। रॉबिन्सन को उनके 8 विकेट के प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पाकिस्तान की दोनों पारियों में कुल 20 विकेट हासिल किए और यही इस एकतरफा मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी रही।

    इस जीत के साथ जो रूट की टेस्ट कप्तानी में वापसी भी शानदार रही। इंग्लैंड ने पाकिस्तान को तीन दिन के अंदर हराकर नई टेस्ट शुरुआत का मजबूत संदेश दिया है। पाकिस्तान के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी की कमजोरियों को दूर करना होगी। तीन मैचों की सीरीज का दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से लॉर्ड्स में खेला जाएगा जहां पाकिस्तान की टीम वापसी कर सीरीज बराबर करने के इरादे से उतरेगी।

  • कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट

    कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब यानी एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम गॉल में पहला टेस्ट 165 रन से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है। अब भारत के पास कोलंबो में जीत हासिल कर सीरीज अपने नाम करने का मौका है। दूसरी तरफ श्रीलंका के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है क्योंकि सीरीज बराबर करने के लिए उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।

    मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा कोलंबो की पिच को लेकर हो रही है। माना जा रहा था कि श्रीलंका भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को परेशान करने के लिए बेहद ज्यादा स्पिन वाली पिच तैयार कर सकता है। हालांकि ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मेजबान टीम इस रणनीति से पीछे हटती दिखाई दे रही है। श्रीलंका क्रिकेट से जुड़े एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि फिलहाल गॉल टेस्ट जैसी संतुलित पिच तैयार करने के बारे में सोचा जा रहा है। ऐसी पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को पर्याप्त मदद मिलने की उम्मीद रहती है।

    श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी चिंता उसका कमजोर बल्लेबाजी क्रम है। अनुभवी बल्लेबाज कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल दूसरे टेस्ट से बाहर हैं जबकि पथुम निसांका भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अगर पिच को जरूरत से ज्यादा स्पिन के अनुकूल बनाया जाता है तो इसका नुकसान श्रीलंकाई बल्लेबाजों को भी उठाना पड़ सकता है। टीम पहले ही भारत के स्पिन आक्रमण के सामने दबाव में रही है और युवा बल्लेबाजों को कठिन परिस्थितियों में उतारना जोखिम भरा फैसला साबित हो सकता है।

    गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था। देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में 167 रन की बड़ी पारी खेली जबकि भारत ने 460 रन से ज्यादा का स्कोर खड़ा किया। श्रीलंका के स्पिनरों ने मुकाबले में वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन भारतीय बल्लेबाजी की गहराई ने मेजबान टीम को दबाव में बनाए रखा। भारत ने अंत में 165 रन से मुकाबला अपने नाम किया।

    कोलंबो में संतुलित पिच होने की स्थिति में टॉस और पहली पारी का स्कोर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। एसएससी मैदान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताता है कि यहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को बड़े स्कोर के जरिए दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस मैदान पर टेस्ट में पहली पारी का औसत स्कोर 323 रन रहा है जबकि दूसरी पारी का औसत 354 रन है।

    श्रीलंका के लिए एक और चुनौती टीम संयोजन की है। पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर रसेल अर्नोल्ड ने भी माना है कि मेजबान टीम भारत की तरह तीन विशेषज्ञ स्पिनरों के साथ उतरने की स्थिति में नहीं है क्योंकि इससे बल्लेबाजी का संतुलन बिगड़ सकता है। भारत के पास रविंद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी मजबूत योगदान दे सकते हैं। इसी कारण श्रीलंका को पिच और प्लेइंग इलेवन दोनों में संतुलन साधना होगा।

    ऐसे में कोलंबो टेस्ट में असली मुकाबला सिर्फ भारतीय बल्लेबाजों और श्रीलंकाई स्पिनरों के बीच नहीं होगा बल्कि रणनीति और टीम संतुलन के बीच भी होगा। अगर श्रीलंका बहुत ज्यादा टर्न वाली पिच तैयार करता है तो उसके अनुभवहीन बल्लेबाज खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं। वहीं संतुलित विकेट मिलने पर भारत की मजबूत बल्लेबाजी को रोकना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी। इसलिए पिच का अंतिम मिजाज दोनों टीमों की रणनीति और मैच के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के रक्षा गठजोड़ में बांग्लादेश की एंट्री? मक्का समझौते पर दिया बड़ा संकेत

    पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के रक्षा गठजोड़ में बांग्लादेश की एंट्री? मक्का समझौते पर दिया बड़ा संकेत


    नई दिल्ली। बांग्लादेश ने पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर अपना रुख साफ करते हुए संभावित रूप से इस ढांचे में शामिल होने का विकल्प खुला रखा है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि ढाका सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना को सकारात्मक नजरिए से देख रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी फैसला बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा व्यापारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    दरअसल सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी पर हमला माना जाएगा। इसके साथ ही तीनों देशों ने रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है और कहा है कि इसका उद्देश्य किसी विशेष देश के खिलाफ मोर्चा बनाना नहीं बल्कि बाहरी आक्रमण के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा क्षमता बढ़ाना है।

    इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे कई बार मुस्लिम नाटो की संज्ञा दी जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह नाम इस समझौते का हिस्सा नहीं है। बांग्लादेश के सकारात्मक संकेत के बाद अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह सुरक्षा ढांचा भविष्य में तीन देशों से आगे बढ़कर अन्य देशों को भी अपने साथ जोड़ सकता है। तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने भी समझौते के बाद मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावना की बात कही थी।

    ढाका के रुख को उसकी मौजूदा विदेश नीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के साथ व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं चीन के साथ भी उसके रणनीतिक और आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दूसरी ओर भारत और बांग्लादेश के संबंधों में हाल के समय में कई मुद्दों को लेकर तनाव दिखाई दिया है। ऐसे में मक्का रक्षा ढांचे को लेकर सकारात्मक रुख बांग्लादेश की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह अपने रणनीतिक विकल्पों को व्यापक बनाना चाहता है।

    बांग्लादेश के लिए सऊदी अरब के साथ संबंध भी बेहद अहम हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक और श्रम संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक सऊदी अरब में काम करते हैं। वहीं तुर्किये के साथ ढाका के राजनीतिक और रक्षा संबंध भी लगातार विकसित हुए हैं। पाकिस्तान के साथ संबंधों में भी हाल के समय में नई सक्रियता दिखाई दे रही है। ऐसे में तीनों देशों से जुड़े किसी व्यापक आर्थिक या रक्षा मंच में भागीदारी बांग्लादेश के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से नया अवसर हो सकती है।

    इस घटनाक्रम पर भारत की नजर भी स्वाभाविक रूप से बनी हुई है। मक्का समझौते में बांग्लादेश की संभावित भागीदारी का मतलब यह नहीं है कि ढाका ने भारत विरोधी किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होने का फैसला कर लिया है। अभी बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से समझौते में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उसका मौजूदा रुख केवल इस संभावना को खुला रखने और विकल्प का आकलन करने तक सीमित है। इसलिए इसे सीधे तौर पर किसी नए सैन्य गठजोड़ में बांग्लादेश की एंट्री के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि मक्का रक्षा समझौते के विस्तार की संभावना ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के रणनीतिक समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यदि भविष्य में बांग्लादेश इस ढांचे का औपचारिक हिस्सा बनता है तो इसका असर केवल तीन देशों के मौजूदा रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दक्षिण एशिया में कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला बांग्लादेश की सरकार अपने राष्ट्रीय हितों और बदलते क्षेत्रीय हालात का आकलन करने के बाद ही करेगी।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से पहले आजमाएं गुलाब, त्वचा की देखभाल के लिए जानें गुलाब से जुड़े आसान घरेलू नुस्खे

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से पहले आजमाएं गुलाब, त्वचा की देखभाल के लिए जानें गुलाब से जुड़े आसान घरेलू नुस्खे


    नई दिल्ली ।
    गुलाब केवल अपनी खुशबू और खूबसूरती के लिए ही पसंद नहीं किया जाता बल्कि त्वचा की देखभाल में भी इसका इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। गुलाब जल और गुलाब की पंखुड़ियों से बने पारंपरिक घरेलू उपायों को त्वचा को ताजगी देने और चेहरे को साफ रखने के लिए उपयोग किया जाता है। गुलाब में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक और इसकी खुशबू स्किन केयर को सुखद अनुभव बना सकती है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

    गुलाब जल को स्किन केयर में शामिल करने का सबसे आसान तरीका है इसे चेहरे की सफाई के बाद हल्के तरीके से लगाना। साफ चेहरे पर कॉटन की मदद से गुलाब जल लगाया जा सकता है और इसे कुछ देर त्वचा पर रहने दिया जा सकता है। इससे चेहरे को ताजगी महसूस हो सकती है। अगर त्वचा बहुत संवेदनशील है तो पहले हाथ या कान के पीछे थोड़ी मात्रा लगाकर पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है।

    रूखी त्वचा वालों के लिए गुलाब जल के साथ मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। चेहरे को साफ करने के बाद गुलाब जल लगाने और उसके बाद त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाने से स्किन केयर रूटीन पूरा किया जा सकता है। ध्यान रखें कि गुलाब जल त्वचा को मॉइस्चराइजर का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। खासकर बहुत शुष्क त्वचा में अच्छे मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल जरूरी है।

    गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार किया गया पानी भी पारंपरिक रूप से त्वचा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए साफ गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी भी तरह के केमिकल या कीटनाशक से उपचारित फूल को त्वचा पर लगाने से बचना चाहिए। बाजार में मिलने वाले गुलाब जल का इस्तेमाल करते समय उसके लेबल पर मौजूद सामग्री को जरूर पढ़ें और तेज खुशबू या अनावश्यक रसायनों वाले उत्पाद संवेदनशील त्वचा पर लगाने से बचें।

    गुलाब जल को ठंडा करके इस्तेमाल करने की सलाह भी कई लोग देते हैं। ठंडक चेहरे को कुछ समय के लिए फ्रेश महसूस करा सकती है लेकिन यह त्वचा की किसी बीमारी का इलाज नहीं है। आंखों के आसपास गुलाब जल का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और इसे आंखों के अंदर जाने से रोकना चाहिए। अगर जलन खुजली लालिमा या सूजन महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    स्किन केयर में गुलाब का इस्तेमाल करते समय एक और जरूरी बात यह है कि केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना सही नहीं है। चेहरे को साफ रखने के साथ पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना नींद पूरी करना और दिन में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना त्वचा की देखभाल के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। गुलाब जल या गुलाब आधारित उत्पाद आपकी दिनचर्या का हिस्सा हो सकते हैं लेकिन इन्हें चमत्कारी उपचार समझना उचित नहीं है।

    अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे दाने अत्यधिक रूखापन लालिमा या किसी तरह की एलर्जी रहती है तो घरेलू उपाय आजमाने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सही उत्पाद और अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार बनाया गया स्किन केयर रूटीन ही लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

  • मासूम छात्रा की मौत ने भड़काया गुस्सा, शिक्षक और भाई सलाखों के पीछे; शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड

    मासूम छात्रा की मौत ने भड़काया गुस्सा, शिक्षक और भाई सलाखों के पीछे; शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा की मौत के बाद सनसनी फैल गई है। छात्रा की गर्भावस्था और उसकी मौत को लेकर एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने मामले में शिक्षक खालिद हुसैन शेख और उसके भाई तारिक हुसैन को गिरफ्तार किया है। आरोपी शिक्षक किश्तवाड़ के बुमालपोरा मिडिल स्कूल में शिक्षक ग्रेड-द्वितीय के पद पर तैनात था और प्रभारी हेडमास्टर की जिम्मेदारी भी संभाल रहा था। शिक्षा विभाग ने गिरफ्तारी के बाद उसे निलंबित कर दिया है। मामले की जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार छात्रा को गर्भावस्था से जुड़ी चिकित्सीय प्रक्रिया के लिए किश्तवाड़ से बाहर ले जाया जा रहा था। रास्ते में उसकी हालत गंभीर हो गई और बाद में उसने दम तोड़ दिया। अलग-अलग रिपोर्टों में गर्भावस्था की अवधि को लेकर अलग जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम से गर्भावस्था की पुष्टि हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रा गर्भवती कैसे हुई और उसकी मौत से पहले उसके साथ क्या परिस्थितियां बनीं।

    परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में यौन शोषण और गर्भावस्था से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। आरोपी शिक्षक और उसके भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई की है। मुख्य शिक्षा अधिकारी किश्तवाड़ ने आरोपी शिक्षक को सेवा से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश में दर्ज एफआईआर और शिक्षक के पुलिस हिरासत में होने का हवाला दिया गया है। विभागीय स्तर पर भी मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार छात्रा कुछ समय से स्कूल नहीं आ रही थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि उसकी अनुपस्थिति के बावजूद स्कूल और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।

    घटना सामने आने के बाद किश्तवाड़ और छात्रू क्षेत्र में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे और प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्र

    वाई की मांग उठाई। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मामले की न्यायिक जांच तथा दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।

    इस घटना ने नाबालिगों की सुरक्षा और स्कूलों में बच्चों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षक और छात्र के बीच भरोसे का रिश्ता होता है और इसी कारण शिक्षक पर लगे ऐसे आरोप बेहद गंभीर माने जा रहे हैं। हालांकि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और अदालत में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस छात्रा की मौत की पूरी परिस्थितियों को सामने लाने और उसके साथ कथित यौन शोषण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने पर है। पुलिस ने संबंधित साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपियों से पूछताछ जारी है। किश्तवाड़ में इस घटना को लेकर आक्रोश बना हुआ है और लोग पीड़ित परिवार के लिए न्याय तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • स्कूल खुलते ही स्वीडन में दहशत का साया, तलवार से हमला कर तीन को किया घायल; हमलावर की मंशा पर जांच जारी

    स्कूल खुलते ही स्वीडन में दहशत का साया, तलवार से हमला कर तीन को किया घायल; हमलावर की मंशा पर जांच जारी


    नई दिल्ली। स्वीडन के मध्य हिस्से में स्थित फागेरस्ता शहर के ब्रिनेल स्कूल में शुक्रवार को उस समय दहशत फैल गई जब एक हमलावर ने तलवार से हमला कर दिया। घटना में कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं जिनमें दो किशोरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। एक अन्य घायल व्यक्ति को भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया। पुलिस ने मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन अभी तक हमले के पीछे की वजह और संदिग्ध की मंशा स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    बताया गया है कि घटना के समय ब्रिनेल स्कूल में कक्षाएं चल रही थीं और परिसर में करीब 400 से 500 विद्यार्थी मौजूद थे। अचानक हुए हमले के बाद स्कूल में अफरातफरी मच गई। विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच भय का माहौल बन गया। हमले में दो किशोर गंभीर रूप से घायल हुए हैं जबकि एक अन्य व्यक्ति को भी अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों की ओर से घायलों की विस्तृत स्थिति को लेकर अभी अधिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना के बाद पुलिस ने तत्काल स्कूल और आसपास के इलाके को सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू की। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के कई स्कूलों को भी बंद कर दिया गया और कुछ रास्तों पर अवरोध लगाए गए। लोगों की आवाजाही नियंत्रित करते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। जांच टीमों ने स्कूल और आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध स्कूल तक कैसे पहुंचा और हमले से पहले तथा बाद में उसकी गतिविधियां क्या थीं।

    प्रशासन ने घटना से प्रभावित विद्यार्थियों और अन्य लोगों की सहायता के लिए स्कूल के नजदीक स्थित एक खेल परिसर में संकट केंद्र भी बनाया। यहां प्रभावित लोगों को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। पुलिस के साथ दमकल और स्वास्थ्यकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने लोगों से इलाके में शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।

    इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूल खुलने के तुरंत बाद हुई इस घटना ने विद्यार्थियों अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन ने भी घटना को गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के पीछे क्या कारण था।
    इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूल खुलने के तुरंत बाद हुई इस घटना ने विद्यार्थियों अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन ने भी घटना को गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के पीछे क्या कारण था।

    अब जांच का मुख्य फोकस गिरफ्तार संदिग्ध की पूछताछ और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों पर है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हमला किसी व्यक्तिगत विवाद का परिणाम था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। जांच आगे बढ़ने के साथ हमले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल फागेरस्ता में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और स्कूल परिसर में हुई इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • बिना जानकारी शेयर बाजार में न लगाएं पैसा, निवेश शुरू करने से पहले इन जरूरी नियमों को जरूर समझें

    बिना जानकारी शेयर बाजार में न लगाएं पैसा, निवेश शुरू करने से पहले इन जरूरी नियमों को जरूर समझें

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में निवेश आज के समय में पैसे को लंबे समय में बढ़ाने का एक विकल्प माना जाता है लेकिन इसमें मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं होता और बाजार में उतार चढ़ाव के कारण नुकसान की संभावना भी बनी रहती है। इसलिए शेयर मार्केट में कदम रखने से पहले निवेशक को बाजार की बुनियादी जानकारी समझना और अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार रणनीति बनाना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए केवल किसी दोस्त की सलाह सोशल मीडिया की पोस्ट या तेजी से मुनाफे के वादे के आधार पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

    शेयर बाजार में निवेश शुरू करने के लिए सबसे पहले डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। इसके लिए निवेशक को किसी पंजीकृत ब्रोकर के माध्यम से अकाउंट खोलना होता है। डीमैट अकाउंट में खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद और बिक्री की जाती है। अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकरेज चार्ज अन्य शुल्क और संबंधित सुविधाओं को समझ लेना चाहिए।

    निवेश की शुरुआत हमेशा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार करनी चाहिए। ऐसा पैसा शेयर बाजार में नहीं लगाना चाहिए जिसकी जरूरत निकट भविष्य में पड़ने वाली हो। पहले इमरजेंसी फंड और जरूरी खर्चों की व्यवस्था करना बेहतर माना जाता है। इसके बाद अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि तय करनी चाहिए। लंबे समय के लिए निवेश करने वाले व्यक्ति और कुछ महीनों के लिए ट्रेडिंग करने वाले निवेशक की रणनीति अलग होती है।

    किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार और वित्तीय स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। कंपनी का कारोबार किस क्षेत्र में है उसकी आय और मुनाफा कैसा है उस पर कितना कर्ज है और भविष्य में उसके सामने कौन से अवसर और चुनौतियां हैं जैसी बातों पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट और आधिकारिक वित्तीय जानकारी को समझना सोशल मीडिया की अफवाहों पर भरोसा करने से कहीं बेहतर तरीका है।

    नए निवेशकों के लिए एक ही कंपनी में अपनी पूरी रकम लगाने से बचना भी महत्वपूर्ण है। अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में निवेश फैलाने से किसी एक शेयर के खराब प्रदर्शन का पूरे पोर्टफोलियो पर असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि विविधीकरण भी नुकसान की गारंटी नहीं देता। बाजार में निवेश करते समय जोखिम हमेशा बना रहता है।

    शेयर बाजार में धैर्य भी बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार में कभी तेजी तो कभी गिरावट आती है और छोटी अवधि के उतार चढ़ाव देखकर घबराकर फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है। निवेशक को अपने तय लक्ष्य और निवेश अवधि के अनुसार समय समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। अगर किसी शेयर को खरीदने की वजह बदल गई है तो उसके प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर दोबारा विचार करना जरूरी है।

    निवेशकों को गारंटीड रिटर्न के दावों से सावधान रहना चाहिए। शेयर बाजार में कोई भी व्यक्ति निश्चित और बिना जोखिम वाले मुनाफे की गारंटी नहीं दे सकता। ट्रेडिंग खासकर इंट्राडे और डेरिवेटिव्स में जोखिम काफी अधिक हो सकता है इसलिए शुरुआती निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी और अनुभव के ऐसे विकल्पों में पैसा लगाने से बचना चाहिए।

    कुल मिलाकर शेयर बाजार में सफल निवेश का आधार जल्दी पैसा कमाना नहीं बल्कि सही जानकारी अनुशासन जोखिम प्रबंधन और लंबी अवधि की सोच है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें जोखिम समझें और जरूरत पड़ने पर सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। किसी भी निवेश का फैसला अपनी परिस्थितियों के अनुसार सोच समझकर लेना चाहिए।

  • Gold Silver Price Today: 22 अगस्त को सोने-चांदी के दाम ने बदली करवट, खरीदारी से पहले जान लें कीमतों का हाल

    Gold Silver Price Today: 22 अगस्त को सोने-चांदी के दाम ने बदली करवट, खरीदारी से पहले जान लें कीमतों का हाल

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए 22 अगस्त का दिन अहम है। घरेलू सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें कई कारकों के असर से बदलती रहती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चाल से लेकर डॉलर की स्थिति कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की खरीदारी तक इन धातुओं के भाव को प्रभावित करती है। ऐसे में अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो केवल एक दिन के भाव को देखकर फैसला करने के बजाय बाजार की मौजूदा दिशा को समझना जरूरी है।

    सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट का सीधा असर आभूषण खरीदने वालों के बजट पर पड़ता है। खासकर शादी विवाह या किसी बड़े पारिवारिक आयोजन के लिए सोना खरीदने वाले लोग कीमत में मामूली बदलाव को भी गंभीरता से लेते हैं। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है जबकि आभूषणों के लिए आम तौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। इसलिए बाजार में सोने का भाव जानने के साथ यह भी देखना जरूरी है कि कीमत किस कैरेट के सोने की बताई जा रही है।

    चांदी की बात करें तो इसकी कीमत भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख पर निर्भर करती है। चांदी को केवल आभूषणों और पारंपरिक खरीदारी तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि इसका इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स सोलर पैनल और कई तकनीकी उत्पादों में चांदी की मांग बनी रहती है। यही वजह है कि वैश्विक औद्योगिक मांग में बदलाव का असर भी चांदी की कीमत पर दिखाई दे सकता है। निवेशकों की गतिविधियां बढ़ने पर चांदी में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    22 अगस्त को सोने और चांदी की खरीदारी करने वालों को एक और महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखनी चाहिए। बाजार में बताए जाने वाले सोने के भाव में कई बार मेकिंग चार्ज जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते हैं। इसलिए यदि आप आभूषण खरीद रहे हैं तो दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत बाजार भाव से अलग हो सकती है। अलग अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। इसी कारण खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में उसी दिन का ताजा रेट और बिल में लगने वाले सभी शुल्क जरूर जांचें।

    वर्तमान वैश्विक माहौल में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों डॉलर की चाल और दुनिया की आर्थिक अनिश्चितताओं पर भी बनी हुई है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता है। इससे सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं चांदी में निवेश का रुख औद्योगिक मांग और निवेश दोनों से प्रभावित होता है।

    अगर आप सोना या चांदी निवेश के उद्देश्य से खरीदना चाहते हैं तो केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर है। कीमतों में कभी भी बदलाव हो सकता है। जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करना और शुद्धता तथा बिल की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। सोने में हॉलमार्क और चांदी में शुद्धता की जांच जरूर करें। 22 अगस्त के भाव को देखते हुए खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ताजा रेट की पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका रहेगा।

  • क्रूड ऑयल में 2 फीसदी से ज्यादा तेजी ने बढ़ाई टेंशन, आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

    क्रूड ऑयल में 2 फीसदी से ज्यादा तेजी ने बढ़ाई टेंशन, आने वाले दिनों में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

    नई दिल्ली । पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। 20 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 2.4 फीसदी की तेजी के साथ 93.78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। दूसरी तरफ अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत में भी करीब 2.5 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। कच्चे तेल की इस तेजी ने भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए ईंधन की कीमतों को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ने वाले हैं लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड लंबे समय तक महंगा बना रहा तो घरेलू कीमतों पर असर पड़ने की संभावना जरूर बढ़ सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में तनाव बढ़ने के साथ बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं मजबूत हुई हैं। अमेरिका की ओर से ईरान के समर्थन वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। तेल बाजार में किसी बड़े उत्पादक क्षेत्र से सप्लाई बाधित होने की आशंका पैदा होते ही कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। यही स्थिति अभी दिखाई दे रही है।

    इस पूरे मामले में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व बेहद ज्यादा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती है। अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और इस मार्ग से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर दबाव और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों पर पड़ सकता है।

    भारत के लिए यह चिंता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होता है तो भारतीय तेल कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमत केवल कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होती। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स डीलर कमीशन तेल कंपनियों की लागत और मार्जिन तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति जैसे कई कारक शामिल होते हैं। इसलिए क्रूड में तेजी आने के साथ ही अगले दिन पेट्रोल और डीजल महंगा हो जाए ऐसा जरूरी नहीं है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो क्या होगा। ऐसी स्थिति में घरेलू ईंधन की कीमतों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना तेल कंपनियों और नीति निर्माताओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अगर क्रूड की कीमतें और ऊपर जाती हैं तथा रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है तो आयात लागत पर दोहरा दबाव पड़ सकता है। इसका असर पेट्रोल और डीजल के साथ परिवहन लागत पर भी दिखाई दे सकता है।

    ईंधन महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। डीजल की कीमत बढ़ने पर माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इससे सब्जियों खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। उद्योगों की लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि क्रूड की कीमतें कितने समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं और सरकार तथा तेल कंपनियां घरेलू कीमतों को लेकर क्या फैसला करती हैं।

    फिलहाल सबसे बड़ी निगाह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति पर बनी हुई है। अगर तनाव कम होता है और सप्लाई सामान्य रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ता है तो क्रूड में और तेजी संभव है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईंधन की कीमत निश्चित रूप से बढ़ने वाली है लेकिन महंगे क्रूड ने सस्ते पेट्रोल-डीजल की उम्मीदों के सामने जरूर एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

  • Shani Dev Puja: आखिर शनि देव को ही क्यों चढ़ाया जाता है तेल? जानें इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा

    Shani Dev Puja: आखिर शनि देव को ही क्यों चढ़ाया जाता है तेल? जानें इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा


    नई दिल्ली ।
    हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनि देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसी वजह से शनि देव की पूजा में तेल चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। खासकर सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था के रूप में ही समझना चाहिए।

    पौराणिक कथाओं में शनि देव को सूर्य देव का पुत्र बताया गया है। उनका स्वभाव न्यायप्रिय और कठोर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का फल देते हैं। इसी कारण कई लोग शनि की साढ़ेसाती या ढैया जैसे ज्योतिषीय समय को लेकर विशेष पूजा करते हैं। शनिवार को शनि मंदिर में जाकर तेल चढ़ाना भी इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

    शनि देव को तेल चढ़ाने से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा हनुमान जी से भी संबंधित है। मान्यता के अनुसार एक बार शनि देव को अपने बल और प्रभाव पर गर्व था। इसी दौरान उनका सामना हनुमान जी से हुआ। कथा में बताया जाता है कि संघर्ष के दौरान शनि देव को चोट लगी और उनके शरीर में पीड़ा होने लगी। इसके बाद हनुमान जी ने उन्हें तेल लगाने की सलाह दी। तेल से शनि देव की पीड़ा शांत हुई। इसी मान्यता के आधार पर शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई।

    एक अन्य धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि तेल अर्पित करने से व्यक्ति शनि देव के प्रति अपनी श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करता है। यहां तेल केवल एक पूजा सामग्री नहीं बल्कि समर्पण और सेवा का प्रतीक माना जाता है। भक्त अपनी परेशानियों और चिंताओं को शनि देव के सामने रखते हुए न्याय और सद्बुद्धि की कामना करते हैं। कई लोग शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और शनि मंत्र का जाप भी करते हैं।

    शनि देव की पूजा में केवल तेल चढ़ाना ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति को अपने आचरण और कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना गरीबों को भोजन कराना बुजुर्गों का सम्मान करना और किसी के साथ अन्याय न करना भी शनि देव की कृपा पाने से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि शनि देव कर्मों के देवता हैं इसलिए अच्छे कर्मों को उनकी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार को शनि मंदिर में तेल चढ़ाते समय श्रद्धालु अक्सर काले तिल काला कपड़ा और सरसों का तेल अर्पित करते हैं। कुछ लोग पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक भी जलाते हैं। हालांकि पूजा की विधि अलग अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति व्रत या विशेष धार्मिक अनुष्ठान कर रहा है तो उसे अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार पूजा करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा श्रद्धा पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों से जुड़ी हुई है। इसका उद्देश्य केवल किसी परेशानी को दूर करना नहीं बल्कि व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहने और न्यायपूर्ण आचरण की प्रेरणा देना भी माना जाता है। इसलिए शनिवार को शनि देव की पूजा करते समय बाहरी अनुष्ठान के साथ अपने व्यवहार और कर्मों को बेहतर बनाने पर ध्यान देना भी इस परंपरा का महत्वपूर्ण संदेश माना जाता है।