Author: bharati

  • गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

    गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष स्वदेशी रक्षा उपकरणों की बेहतरीन झलक देखने को मिली। गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत भी स्वदेशी तोपों की सलामी के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ से गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया।

    इस दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, व समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से हुई। यहां उन्होंने माल्यार्पण करके अपने प्राण न्योछावर करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि दी। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ ‘पारंपरिक बग्गी’ में कर्तव्य पथ पर आईं। उनके साथ राष्ट्रपति के अंगरक्षक थे जो भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। यह देश में बना तोपखाना हथियार सिस्टम है।

    वहीं पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि अब बीते कुछ समय से 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी 21 तोपों की सलामी दे रही है। दरअसल गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। इस परंपरा के तहत गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का उपयोग किया गया। गौरतलब है कि यह भारत में ही बनी एक पूर्णत स्वदेशी तोप प्रणाली है। यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है।

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक 105 मिमी लाइट फील्ड गन के प्रयोग से न केवल पुरानी परंपरा को आधुनिक स्वरूप मिला है, बल्कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के सशक्त होने का संदेश गया है। यह स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर भारतीय सेना के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिया जाने वाला 21 तोपों का सलामी समारोह भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी जाती है।

    भारतीय सेना द्वारा संचालित इस समारोह का प्रत्येक क्षण अत्यंत अनुशासन, सटीकता और गरिमा का प्रतीक होता है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह सलामी कर्तव्य पथ के लॉन से दी गई। 21 तोपों की यह सलामी भारत की सैन्य परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है। इसके साथ ही यह आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर भारतीय सेना की सशक्त छवि को भी राष्ट्र और विश्व के समक्ष प्रस्तुत करती है। इसके उपरांत ‘विविधता में एकता’ थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत करते हुए कर्तव्य पथ पर अग्रसर हुए। यह म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का शानदार प्रदर्शन रहा।

    इस दृश्य ने देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया। वहीं 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करते हुए कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े। राष्ट्रीय ध्वज को लेकर, हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत ने किया। इसके बाद राष्ट्रपति के सलामी लेने के साथ परेड शुरू हुई।

    दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने परेड की कमान संभाली। वह दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों परेड के सेकंड-इन-कमांड थे। वह तीसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी हैं। इसके बाद सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गर्वित विजेता आए। इनमें परमवीर चक्र विजेता – सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार – और अशोक चक्र विजेता – मेजर जनरल सीए पिथावालिया (रिटायर्ड) और कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल थे।

  • अमेरिका में कुदरत का कहर: बर्फीले तूफान में प्राइवेट जेट क्रैश, एयरपोर्ट पूरी तरह बंद, 19 करोड़ लोग प्रभावित

    अमेरिका में कुदरत का कहर: बर्फीले तूफान में प्राइवेट जेट क्रैश, एयरपोर्ट पूरी तरह बंद, 19 करोड़ लोग प्रभावित


    वॉशिंगटन। अमेरिका में बर्फीले तूफान ने तबाही मचा दी है और इसी बीच मेन राज्य के बैंगर एयरपोर्ट पर एक निजी जेट क्रैश होने की खबर ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। रविवार शाम टेकऑफ के दौरान ही बॉम्बार्डियर चैलेंजर 650 बिजनेस जेट क्रैश हो गया। इस विमान में 8 लोग सवार थे—3 क्रू मेंबर और 5 यात्री। हादसे के बाद एयरपोर्ट को तुरंत बंद कर दिया गया और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यात्रियों की स्थिति क्या है।

    हादसा कब और कैसे हुआ?
    CNN की रिपोर्ट के मुताबिक हादसा रविवार शाम 7.45 बजे के करीब हुआ। टेकऑफ से कुछ मिनट पहले कंट्रोल रूम और पायलट के बीच बातचीत में कम दृश्यता और बर्फ जमने की समस्या का जिक्र हुआ। रनवे से उड़ान की अनुमति मिलने के करीब दो मिनट बाद कंट्रोलर ने आदेश दिया“सभी विमानों की आवाजाही रोक दी जाए।”

    इसके बाद बताया गया कि विमान उल्टा पड़ा हुआ है। तुरंत एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लागू कर दी गई और सिर्फ इमरजेंसी वाहनों को रनवे पर जाने की अनुमति दी गई।

    बर्फीले तूफान की चपेट में अमेरिका: 37 राज्य प्रभावित, 20 से ज्यादा में आपात स्थिति
    यह हादसा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका का बड़ा हिस्सा भीषण बर्फीले तूफान की चपेट में है।

    भारी बर्फबारी और जमाव वाली बारिश से 37 राज्यों में करीब 19 करोड़ लोग प्रभावित हैं। 20 से ज्यादा राज्यों में आपात स्थिति घोषित करनी पड़ी है।

    रॉकी पर्वत से लेकर न्यू इंग्लैंड तक बर्फ की चादर बिछ गई है। कई इलाकों में तापमान माइनस 20 से माइनस 30 डिग्री तक महसूस किया गया। इतना ही नहीं, व्हाइट हाउस भी बर्फ से ढक गया है।

    तूफान से उड़ानें और बिजली व्यवस्था चरमरा गई, हजारों उड़ानें रद्द
    तूफान के कारण घरों में बिजली गुल हो चुकी है।

    शनिवार तक लगभग 1.32 लाख घरों में बिजली बंद थी। टेक्सास और लुइज़ियाना सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जहां बर्फ और जमाव से बिजली की लाइनें टूट रही हैं और ढांचों को नुकसान पहुंच रहा है।

    यात्रा व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। वीकेंड में पूरे अमेरिका में 14 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। अधिकारियों का कहना है कि यह रविवार विमानन इतिहास के सबसे खराब दिनों में से एक साबित हो सकता है। डलास-फोर्ट वर्थ, शार्लेट और नैशविले जैसे बड़े एयरपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

    अमेरिका में यह बर्फीला तूफान केवल मौसम की आपदा नहीं, बल्कि लाइव यात्रा, बिजली और जनजीवन को प्रभावित करने वाली बड़ी तबाही बनकर उभरा है। और इसी बीच प्राइवेट जेट क्रैश ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है।

  • हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

    हांगकांग, मलेशिया जैसे देशों से आगे निकला भारत, कर-से-जीडीपी अनुपात 19.6 प्रतिशत हुआ

    नई दिल्ली। भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात बढ़कर 19.6 प्रतिशत हो गया है, यह अन्य उभरते हुई बाजार हांगकांग, मलेशिया और इंडोनेशिया से अधिक है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में दी गई।

    अधिक कर-से-जीडीपी अनुपात दिखाता है कि देश में कर दक्षता बढ़ रही है और संग्रह में सुधार हो रहा है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किया जाने वाला कर संग्रह शामिल है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि भारत का केंद्रीय सकल कर राजस्व जीडीपी के 11.7 प्रतिशत पर कम है, लेकिन समग्र एकीकृत आंकड़ा राज्यों की मजबूत भागीदारी और पूरे सिस्टम में बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

    हालांकि, अभी भी भारत का कर-से-जीडीपी अनुपात जर्मनी के 38 प्रतिशत और अमेरिका के 25.6 प्रतिशत से काफी कम है।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि विशेष रूप से इसकी अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति को देखते हुए, यह अंतर भारत के लिए एक बड़ा नीतिगत अवसर प्रस्तुत करता है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार सरलीकरण, युक्तिकरण और डिजिटलीकरण के उद्देश्य से व्यापक कर सुधारों पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है।

    इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में कर-से-जीडीपी अनुपात में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    आयकर अधिनियम, 2025 की शुरुआत और कॉर्पोरेट कर संरचनाओं का सरलीकरण सहित प्रमुख नियामकीय कदमों से पारदर्शिता में सुधार और अनुपालन में आसानी होने की उम्मीद है।

    नया आयकर अधिनियम, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाला है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के अधिक हिस्से को औपचारिक प्रणाली में लाकर कर आधार को व्यापक बनाने की भी उम्मीद है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि ऐतिहासिक विश्लेषण से पता चलता है कि समय के साथ कर संग्रह और नॉमिनल जीडीपी में निकटता बढ़ने लगी है।

    रिपोर्ट में बताया गया कि आयकर संग्रह का नॉमिनल जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय दोनों के साथ मजबूत सहसंबंध दिखता है – जो बढ़ती आय और बेहतर अनुपालन को दर्शाता है।

    कंपनियों को बेहतर मुनाफे से कॉर्पोरेट कर संग्रह को भी लाभ हुआ है, और ऐतिहासिक रुझानों की तुलना में इसमें मजबूती का स्तर बरकरार है।

  • क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश को झांसा दिया? वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी

    क्या पाकिस्तान ने बांग्लादेश को झांसा दिया? वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। वर्ल्ड कप का रोमांच बढ़ता जा रहा है और इसी बीच बांग्लादेश- पाकिस्तान के बीच चल रही ड्रामेबाजी ने सबकी नज़रें खींच ली हैं। इस विवाद की कहानी केवल मैदान तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक बहस में बदल गई है। insiders के अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति ने बांग्लादेश को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी मुश्किल लग रही है।

    सबसे पहले क्या हुआ?

    पाकिस्तान ने शुरुआत में बांग्लादेश के साथ मैत्रीपूर्ण रुख दिखाया, मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर मिलनसारता का भाव पैदा किया। फिर धीरे-धीरे टेंशन बढ़ाने वाली बातें और रणनीतिक संकेत सामने आने लगे। यही “ललचाने” की रणनीति बांग्लादेश को भावनात्मक रूप से कमजोर करने का काम कर रही है, कहा जा रहा है।

    फिर क्या हुआ?
    जैसे ही टूर्नामेंट आगे बढ़ा, पाकिस्तान ने अपने मैच और रणनीति के जरिए बांग्लादेश की टीम पर दबाव बढ़ाया।

    बांग्लादेश के खिलाड़ियों के ऊपर बढ़ते दबाव, टीम की असमंजस स्थिति और रणनीतिक उलझनों ने “ड्रामा” का रंग बढ़ा दिया।

    और फिर ‘धोखा’ का दावा…
    कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मैनिपुलेटिव रणनीति के तहत फंसा दिया, जिससे बांग्लादेश के लिए मैच की स्थिति और भी कठिन हो गई।लेकिन यह बात अभी अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे “सूत्रों के अनुसार” ही देखा जा रहा है।

    वर्ल्ड कप ड्रामेबाजी की असली वजह क्या है?
    विश्लेषकों का कहना है कि क्रिकेट में ऐसे ड्रामे अक्सर स्ट्रेटेजिक और मानसिक खेल का हिस्सा होते हैं।
    किसी भी टीम की कमजोरी को पकड़कर माइंड गेम खेलना भी एक रणनीति होती हैऔर इस बार पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच यह खेल ज़्यादा तीखा दिख रहा है।

    क्या है आगे?
    अब सबकी नजरें बांग्लादेश के अगले मैच पर हैं, जहां यह टीम अपने मानसिक दबाव को पार कर सकेगी या नहीं। और पाकिस्तान की रणनीति क्या अगले मैचों में भी असर दिखाएगीयह समय ही बताएगा।

  • गणतंत्र दिवस 2026: देशभक्ति के रंग में रंगा मध्य प्रदेश, डिप्टी सीएम से लेकर अफसरों तक ने किया झंडा वंदन

    गणतंत्र दिवस 2026: देशभक्ति के रंग में रंगा मध्य प्रदेश, डिप्टी सीएम से लेकर अफसरों तक ने किया झंडा वंदन


    नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर मध्य प्रदेश पूरी तरह देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आया। प्रदेशभर में 26 जनवरी को उत्साह, उमंग और राष्ट्रीय गौरव के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, सागर और अन्य जिलों तक राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ भव्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह आयोजित किए गए। हर जिले में लोकतंत्र और संविधान के प्रति आस्था का संदेश स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

    राजधानी भोपाल में राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने परेड की सलामी ली और प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में राज्यपाल ने संविधान के मूल्यों, एकता और अखंडता को बनाए रखने का आह्वान किया। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान देश की सबसे बड़ी ताकत है और इसके आदर्शों पर चलकर ही विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकता है।

    सागर जिले में उपमुख्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने पीटीसी ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। झंडा वंदन के पश्चात उन्होंने परेड की सलामी ली और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया। इस अवसर पर पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित भगवानदास रैकवार का सम्मान कर जिले को गौरवान्वित किया गया। समारोह में विभिन्न स्कूलों और शासकीय विभागों द्वारा आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं, जिनमें सामाजिक जागरूकता, विकास योजनाओं और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया। स्कूली बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति रही।

    इंदौर में नेहरू स्टेडियम में आयोजित मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने झंडा वंदन किया। उन्होंने परेड की सलामी लेते हुए उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समर्पित और ईमानदार अधिकारी-कर्मचारी ही प्रदेश और देश की प्रगति की मजबूत नींव होते हैं। समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया और विद्यार्थियों तथा नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्री, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने निर्धारित स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। हर जगह देशभक्ति गीतों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संविधान के प्रति निष्ठा के संकल्प के साथ गणतंत्र दिवस मनाया गया। कुल मिलाकर गणतंत्र दिवस 2026 ने मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के संकल्प को और मजबूत किया।

  • गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान: लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार

    गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान: लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार

    नई दिल्ली। देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ते भारत में आइस हॉकी का खेल भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके केंद्र में है इंडियन आर्मी की विशेष माउंटेन इन्फेंट्री रेजिमेंट लद्दाख स्काउट्स। बर्फ से ढके पहाड़ों और कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाली यह रेजिमेंट भारत में आइस हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

    इस समय 2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स के छठे संस्करण का पहला चरण लेह (लद्दाख) में खेला जा रहा है। आइस हॉकी और आइस स्केटिंग जैसे खेलों में देश के बेहतरीन एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। एक बार फिर, इन खेलों में लद्दाख स्काउट्स के प्रतिनिधि, यानी आर्मी की टीम, शानदार प्रदर्शन करते हुए अजेय नजर आ रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आर्मी टीम पुरुषों के फाइनल में चंडीगढ़ से भिड़ेगी।

    लद्दाख स्काउट्स का असली योगदान सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है। आइस रिंक के बाहर उनकी सोच और कोशिशें कहीं ज्यादा अहम हैं। उनका सपना है कि आइस हॉकी को केवल लेह और लद्दाख तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे देश के मैदानों और तटीय इलाकों तक पहुंचाया जाए। वे चाहते हैं कि यह खेल पूरे भारत में पहचाना जाए और युवाओं के लिए एक नया विकल्प बने।

    माना जाता है कि लद्दाख स्काउट्स ने 1970 के दशक के आखिर में आइस हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय न तो सही सतह थी और न ही आधुनिक उपकरण। सैनिक बर्फ पर फिसलते हुए इस खेल का आनंद लेते थे। 1980 के दशक के अंत में उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू किया। इस खेल के लिए जरूरी संसाधन विकसित किए गए और महंगे उपकरण मंगाए गए।

    साल 2000 में जब लद्दाख स्काउट्स को एक पूर्ण इन्फेंट्री रेजिमेंट का दर्जा मिला, तब आइस हॉकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भी बढ़ गई। आज भारत में सिर्फ दो ओलंपिक-साइज आर्टिफिशियल आइस रिंक हैं एक देहरादून में और दूसरा लेह के इनडोर नवांग दोरजे स्टोबदान स्टेडियम में।

    2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स में हिस्सा ले रही आर्मी टीम के कप्तान पार्थ जगताप मानते हैं कि आइस हॉकी को लोकप्रिय बनाने के लिए देशभर में और रिंक बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, अभी यह खेल ज्यादातर लेह तक सीमित है और अगर इसे आगे बढ़ाना है तो बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने खेलो इंडिया पहल की तारीफ करते हुए कहा कि मीडिया कवरेज और सरकारी सहयोग से इस खेल के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।

    पिछले साल लद्दाख स्काउट्स की ओर से भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को आखिरी समय में दी गई फंडिंग बेहद अहम साबित हुई। इसी मदद से भारतीय महिला टीम ने यूएई में आयोजित आईआईएचएफ महिला एशिया कप में अपना पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता।

    आइस हॉकी का खेल महंगा है। पूरे आइस हॉकी गियर की कीमत चार लाख रुपये तक हो सकती है। आइस रिंक बनाना बेहद महंगा है। एक साधारण रिंक पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। यही इस खेल की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में इस खेल को देश में विकसित करने में कॉर्पोरेट जगत की भूमिका अहम हो जाती है।

    लद्दाख स्काउट्स ने इस दिशा में पहल करते हुए कॉर्पोरेट सहयोग का विचार भी रखा है। सैनिक सिर्फ सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि कई बार वे समाज के लिए ऐसी जिम्मेदारियां भी उठा लेते हैं, जो उनकी ड्यूटी से कहीं आगे होती हैं। आइस हॉकी इसका बेहतरीन उदाहरण है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को किया अशोक चक्र से सम्मानित

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को किया अशोक चक्र से सम्मानित

    नई दिल्ली।  भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

    शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा की और 2025 में अपनी स्पेस फ्लाइट पूरी की थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने थे।

    इस मिशन के दौरान उन्होंने असाधारण साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।

    अंतरिक्ष में अपने प्रवास के दौरान शुक्ला ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और कृषि से जुड़े परीक्षण भी किए। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज को सफलतापूर्वक उगाया, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और यह संदेश देगा कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता और शांत निर्णय लेने की कला को इस सम्मान के जरिए सराहा गया है।

    इस उपलब्धि को भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनका साहस और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

    इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान दिखाने के लिए 70 सशस्त्र बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें से छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाएंगे।

    वीरता पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (एक मरणोपरांत), एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (पांच मरणोपरांत), छह नौसेना मेडल (वीरता), और दो वायुसेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।

    इसके अलावा, ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा। वे एक प्रतिष्ठित फाइटर टेस्ट पायलट हैं और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं। उनके नाम 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है और वे 2019 से इसरो के साथ गगनयान कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं।

  • गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति का जश्न: ‘बॉर्डर’ से ‘इक्कीस’ तक, देखें भारतीय सेना के शौर्य को सलाम करती ये वॉर फिल्में

    गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति का जश्न: ‘बॉर्डर’ से ‘इक्कीस’ तक, देखें भारतीय सेना के शौर्य को सलाम करती ये वॉर फिल्में

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और देशभक्ति का प्रतीक है। इस दिन हम वीर सैनिकों को याद करते हैं, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सीमाओं की रक्षा की। बॉलीवुड की फिल्मों में युद्ध के कठिन हालात, सेना के साहस और बलिदान की कहानियों को शानदार तरीके से दिखाया गया है, जो दर्शकों को रोमांचित करने के साथ-साथ भावुक भी करती है। इसी कड़ी में कई वॉर-ड्रामा फिल्में हैं, जिन्हें गणतंत्र दिवस पर अपने परिवार के साथ देखना बेहतरीन अनुभव साबित होता है।

    ‘बॉर्डर’- साल 1997 में जेपी दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’ रिलीज हुई थी, जिसे बॉलीवुड में एक कल्ट क्लासिक माना जाता है। फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राजस्थान के लोंगेवाला पोस्ट की कहानी बताती है, जहां 120 भारतीय सैनिक अपनी पोस्ट की रक्षा करते हैं। फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ और अक्षय खन्ना जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में थे। युद्ध के बीच सैनिकों की हिम्मत, दोस्ती और देशभक्ति का जज्बा बड़े ही रोमांचक अंदाज में पर्दे पर दिखाई गई। ‘बॉर्डर’ ने दर्शकों को भावुक किया और उस साल की बड़ी हिट भी रही। इस कड़ी में बीते शुक्रवार इसकी सीक्वल ‘बॉर्डर 2’ रिलीज हुई। इसमें सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी ने आर्मी, नेवी और एयरफोर्स ऑफिसर्स की भूमिका निभाई है।

    ‘एलओसी कारगिल’—साल 2003 में जेपी दत्ता ने एक और वॉर-ड्रामा फिल्म ‘एलओसी कारगिल’ बनाई थी। यह फिल्म भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय पर आधारित थी। इसमें संजय दत्त, अभिषेक बच्चन और अजय देवगन जैसे कलाकार शामिल थे। फिल्म ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। इसमें कारगिल युद्ध की कठिनाइयों और सैनिकों की बहादुरी को बड़े ही प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया।

    ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’—2019 में आई ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ एक नई तरह की वॉर फिल्म थी। आदित्य धर ने इस फिल्म का लेखन और निर्देशन किया। यह 2016 में पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित थी। विक्की कौशल ने मेजर विहान सिंह शेरगिल का किरदार निभाया और फिल्म ने अपने रिलीज के समय काफी चर्चा बटोरी। इसे दर्शकों ने न केवल पसंद किया, बल्कि यह साल की सबसे हिट फिल्मों में से एक बन गई।

    ‘शेरशाह’: साल 2021 में सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘शेरशाह’ रिलीज हुई। यह मेजर विक्रम बत्रा की बायोपिक थी, जिन्होंने कारगिल युद्ध में देश के खातिर अपनी जान दे दी थी। फिल्म के जरिए दर्शकों को उनकी बहादुरी और देशभक्ति का अनुभव कराया गया। विष्णुवर्धन द्वारा निर्देशित यह फिल्म न केवल भावनाओं को छूती है, बल्कि दर्शकों में देशभक्ति की भावना भी भर देती है।

    ‘इक्कीस’: साल 2026 की शुरुआत में आई ‘इक्कीस’ फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभाई। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल के बलिदान पर आधारित थी। यह धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म थी। ‘इक्कीस’ सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं बताती, बल्कि युद्ध के दर्द, सैनिकों के संघर्ष और उनके साहस को भी दर्शाती है।

  • सविता पुनिया और बलदेव सिंह को पद्मश्री मिलने पर हॉकी इंडिया ने दी बधाई

    सविता पुनिया और बलदेव सिंह को पद्मश्री मिलने पर हॉकी इंडिया ने दी बधाई

    नई दिल्ली। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, “सविता और बलदेव सिंह को पद्मश्री मिलना पूरी हॉकी बिरादरी के लिए बहुत गर्व की बात है। सविता ने विश्व हॉकी में गोलकीपिंग के स्तर को फिर से तय किया है और भारतीय महिला टीम के लिए हर तरह से एक स्टार रही हैं। 300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच हासिल करना उनके बेहतरीन काम के बारे में बहुत कुछ बताता है। एक खिलाड़ी और कोच के तौर पर बलदेव सिंह की विरासत बेमिसाल है। भारतीय हॉकी खिलाड़ियों की कई पीढ़ियों को उनके ज्ञान, अनुशासन और विजन से फायदा हुआ है।”

    हॉकी इंडिया के सचिव भोला नाथ सिंह ने कहा, “सविता का सफर लगन और मेहनत की ताकत दिखाता है, और उनकी उपलब्धियां देश भर के युवा एथलीटों को प्रेरित करती रहती हैं। बलदेव ने अपनी जिंदगी प्रतिभा को निखारने और भारतीय हॉकी को जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बनाने में लगा दी है। यह सम्मान पूरी तरह से उनके लायक है और खेल के लिए दशकों की बिना किसी स्वार्थ के सेवा को पहचान देता है।”

    भारतीय महिला हॉकी का बड़ा नाम सविता ने 20 साल की उम्र में डेब्यू किया था। 2025 में, वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनी। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत के ऐतिहासिक चौथे स्थान पर रहने में भी अहम योगदान दिया। रियो ओलंपिक 2016 और 2018 हॉकी विमेंस विश्व कप के दौरान गोलकीपर के तौर पर उनका अनुभव और मौजूदगी अहम रही।

    भारत की विमेंस हॉकी टीम की पूर्व कप्तान सविता ने टीम को कई बड़ी सफलताएं दिलाई हैं। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज पदक जीतना और एफआइएच नेशंस कप में जीत पक्की करना इसमें अहम है। उनकी लीडरशिप में भारत ने 2023 और 2024 में विमेंस एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में लगातार गोल्ड मेडल जीते, जिससे पूरे एशिया में टीम का बढ़ता दबदबा दिखा।

    2018 में, सविता को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें 2022 और 2023 में दो बार प्लेयर ऑफ द ईयर के लिए हॉकी इंडिया बलबीर सिंह सीनियर अवॉर्ड भी मिला है। गोलकीपर के तौर पर उनके शानदार स्किल्स ने उन्हें लगातार तीन सीजन 2020–21, 2021–22, और 2022–23 के लिए एफआइएच गोलकीपर ऑफ द ईयर अवॉर्ड दिलाया है।

    बलदेव सिंह को एक हॉकी खिलाड़ी और कोच के तौर पर उनके यादगार योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। उन्होंने 1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक्स में भारत के लिए हिस्सा लिया था। वह तीन हॉकी विश्व कप 1971 में बार्सिलोना, जहां भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता, 1973 में एम्स्टर्डम, जहां सिल्वर मेडल जीता, और 1978 में ब्यूनस आयर्स में हिस्सा ले चुके हैं। इसके अलावा, वह 1970 और 1974 में एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीमों का हिस्सा थे।

    खिलाड़ी के तौर पर रिटायर होने के बाद, बलदेव सिंह कोच बन गए। उन्होंने ओलंपिक मेडलिस्ट और पूर्व ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह, भारतीय महिला टीम की पूर्व कैप्टन रानी रामपाल, दीदार सिंह, संजीव कुमार डांग, हरपाल सिंह, और नवजोत कौर जैसे बड़े और सफल खिलाड़ियों को कोचिंग दी है। उन्हें 2009 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

  • 'बॉर्डर 2' ने 100 करोड़ पार कर रचा इतिहास, ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन में 'दंगल', 'धुरंधर' और 'सिकंदर' को भी पीछे छोड़ा

    'बॉर्डर 2' ने 100 करोड़ पार कर रचा इतिहास, ओपनिंग वीकेंड कलेक्शन में 'दंगल', 'धुरंधर' और 'सिकंदर' को भी पीछे छोड़ा

    नई दिल्ली। सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ ने रिलीज के पहले दिन से ही रफ्तार पकड़ी हुई है। सिर्फ तीन दिनों में फिल्म का कुल घरेलू कलेक्शन 121 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। देशभक्ति, जज्बे और बड़े सितारों की दमदार मौजूदगी ने इस फिल्म को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां हर तरफ सिर्फ इसी की चर्चा है। इस फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही हैं।

    बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो ‘बॉर्डर 2’ ने बेहद शानदार शुरुआत की। पहले दिन फिल्म ने करीब 30 करोड़ रुपए की कमाई की। दूसरे दिन इसमें और तेजी आई और कलेक्शन बढ़कर 36.5 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। असली धमाका तीसरे दिन देखने को मिला, जब इस वॉर ड्रामा ने करीब 54.5 करोड़ रुपए की कमाई कर डाली।

    इन आंकड़ों के साथ ‘बॉर्डर 2’ ने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। यह महज तीन दिनों में सनी देओल के करियर की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। इसने ‘जाट’ और ‘गदर: एक प्रेम कथा’ जैसी फिल्मों के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है।

    साल 2025 की फिल्मों की बात करें तो ‘बॉर्डर 2’ ने ओपनिंग वीकेंड पर कई बड़ी फिल्मों को मात दे दी है। इसने ‘धुरंधर’, ‘थामा’, ‘हाउसफुल 5’, ‘सिकंदर’ और ‘सैयारा’ जैसी फिल्मों के शुरुआती वीकेंड कलेक्शन को भी पीछे छोड़ दिया।

    तीसरे दिन की कमाई के मामले में भी ‘बॉर्डर 2’ ने इतिहास रच दिया। इसने ‘दंगल’, ‘बाहुबली 2’, ‘आरआरआर’, ‘केजीएफ 2’ और ‘गदर 2’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के तीसरे दिन के कलेक्शन रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

    फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे कलाकार हैं। इसके निर्माता गुलशन कुमार और टी-सीरीज हैं। फिल्म के निर्देशक अनुराग सिंह हैं, जबकि भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता इसके निर्माण में शामिल हैं।

    ‘बॉर्डर 2’ 1997 में आई जे.पी. दत्ता की क्लासिक फिल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित थी। नई फिल्म भी उसी युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है, लेकिन इसे नए दौर की कहानी और भावनाओं के साथ पेश किया गया है।