Author: bharati

  • भारत और एस्टोनिया के बीच डिजिटल सेवाओं और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं, व्यापार समझौते पर भी नजरें

    भारत और एस्टोनिया के बीच डिजिटल सेवाओं और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं, व्यापार समझौते पर भी नजरें

    नई दिल्ली । भारत और एस्टोनिया के बीच डिजिटल सेवाओं, तकनीक और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। भारत में एस्टोनिया की राजदूत क्रिस्टी कारेलसोहन ने 21 अक्टूबर 2026 को कहा कि दोनों देशों के बीच खासकर सेवा क्षेत्र में व्यावसायिक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता इस साल के अंत तक लागू हो सकता है। उनके अनुसार, इस समझौते से कारोबार में आने वाली कई बाधाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

    कारेलसोहन ने कहा कि एस्टोनिया की कंपनियां भारतीय कंपनियों की तुलना में आकार में अपेक्षाकृत छोटी हैं। देश में बड़े पैमाने पर विनिर्माण भी सीमित है। ऐसे में भारत जैसे विशाल बाजार में बड़े स्तर पर वस्तुओं का व्यापार और निर्यात करना एस्टोनियाई कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एस्टोनिया का घरेलू बाजार भी छोटा है, इसलिए वहां की कंपनियों के लिए भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    राजदूत के मुताबिक, एस्टोनिया की कंपनियों की प्रमुख ताकत सेवाओं के क्षेत्र में है। डिजिटल सेवाओं, तकनीकी समाधान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी की अच्छी संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप सेवाएं और समाधान उपलब्ध कराकर व्यावसायिक संबंधों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि एस्टोनिया की कंपनियां इन क्षेत्रों में आगे विकास और सहयोग की संभावनाएं तलाश रही हैं।

    वस्तुओं के व्यापार के संबंध में उन्होंने बताया कि एस्टोनिया की कुछ कंपनियां भारत में लकड़ी से बने उत्पाद, खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति करती हैं। देश में कुछ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं, लेकिन उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी स्तर पर नहीं होतीं। इसके बावजूद गुणवत्ता को प्राथमिकता देने वाले ग्राहकों के बीच ऐसे उत्पादों की मांग हो सकती है। इस वजह से भारत में एस्टोनिया के उत्पादों के लिए सीमित लेकिन संभावित बाजार मौजूद है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। एस्टोनिया यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में शामिल है। कारेलसोहन ने उम्मीद जताई कि समझौता वर्ष 2026 के अंत तक लागू हो सकता है। उनके अनुसार, इससे मौजूदा सीमा शुल्क में कमी लाने के साथ-साथ गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने में भी मदद मिल सकती है। ऐसी बाधाएं विशेष रूप से छोटी कंपनियों के लिए दूसरे देशों के बाजारों में कारोबार करना कठिन बनाती हैं।

    राजदूत ने कहा कि भारत एस्टोनिया के लिए व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण बाजार है। कई देशों की तरह एस्टोनिया की भी प्राथमिकता भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना है। वह दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्कों को और विकसित करना चाहती हैं। भारत का बड़ा बाजार एस्टोनियाई कंपनियों के लिए अपनी सेवाओं और उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

    कुल मिलाकर, भारत और एस्टोनिया के बीच सहयोग की संभावनाएं केवल पारंपरिक वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल सेवाएं, तकनीक और साइबर सुरक्षा ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें दोनों देशों के व्यावसायिक संबंध आगे बढ़ सकते हैं। प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से भी कारोबार की परिस्थितियों में बदलाव आने की उम्मीद है। हालांकि, समझौते के लागू होने और उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे होने वाले निर्णयों तथा व्यापारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

  • ग्वालियर हादसे ने छीना बुढ़ापे का सहारा, 21 साल के पवन की मौत से टूटे पिता, बोले- बेटा चला गया अब कर्ज कैसे चुकाऊंगा

    ग्वालियर हादसे ने छीना बुढ़ापे का सहारा, 21 साल के पवन की मौत से टूटे पिता, बोले- बेटा चला गया अब कर्ज कैसे चुकाऊंगा


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाले 21 वर्षीय पवन राठौर की कहानी बेहद दर्दनाक है। पिता विद्याराम राठौर ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपना मकान गिरवी रख दिया था। दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती की ताकि बेटे की पढ़ाई जारी रह सके और वह भविष्य में परिवार का सहारा बन सके। लेकिन 17 अक्टूबर की रात मंदिर में दर्शन करने निकला पवन कभी वापस नहीं लौटा। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग घायल हुए हैं। बेटे को खोने के गम के साथ अब परिवार के सामने कर्ज चुकाने और आगे की जिंदगी चलाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

    विद्याराम राठौर बताते हैं कि हादसे वाली रात पवन के कुछ दोस्त पैदल शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। पवन ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। उसकी मां ने उसे जाने से मना किया लेकिन वह दोस्तों के साथ जाने की जिद करता रहा। आखिरकार परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी। माता-पिता को जरा भी अंदाजा नहीं था कि दोस्तों के साथ मंदिर जाने का फैसला उनके बेटे की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था उसके बजाय परिवार को उसकी मौत की खबर मिली।

    पवन पढ़ाई में होशियार था और ग्वालियर में बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा था। पिता का सपना था कि बेटा डॉक्टर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेगा। इसी उम्मीद में उन्होंने अपना मकान गिरवी रखा और दूसरों की जमीन पर बटाई से खेती करके परिवार का खर्च चलाया। पवन का बड़ा भाई विशाल राठौर भोपाल से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। परिवार को उम्मीद थी कि दोनों बेटे पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े होंगे और माता-पिता को मेहनत भरी जिंदगी से राहत मिलेगी। अब पवन की मौत के बाद ये सपने अधूरे रह गए हैं।

    परिवार को पवन के दोस्तों ने बताया कि वह धार्मिक स्वभाव का था। मंदिर पहुंचने के बाद वह नहाकर दर्शन करने की बात कह रहा था। इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान वाले रास्ते पर एक तेज रफ्तार ट्रक बेकाबू होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पवन उछलकर पास की दुकान में जा गिरा और ट्रक उसके ऊपर चढ़ गया। हादसे में कई अन्य श्रद्धालुओं की भी जान चली गई।

    पवन की मौत के बाद परिवार में शोक के साथ नाराजगी भी है। परिजनों का आरोप है कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक का मंदिर के पास तक पहुंचना पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। बड़े भाई विशाल का कहना है कि रास्ता संकरा है और वहां बड़े ट्रक के प्रवेश पर रोक होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक हादसे से पहले एक अन्य ट्रक भी उस रास्ते से गुजरा था। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। अब विद्याराम सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बड़े बेटे को नौकरी दिलाने में मदद की जाए ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके और गिरवी रखे मकान का कर्ज चुकाया जा सके। जिस बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी और घर दांव पर लगाया था वह अब उनके बीच नहीं है।

    इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद को सौंपी है और सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे और उस समय सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी। हादसे से पहले ट्रक को कथित तौर पर 200 रुपये लेकर प्रवेश देने का आरोप भी सामने आया है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पीड़ित परिवारों को जांच से जवाब और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद है।

  • पहले ट्रेडिंग ऐप पर दिखाया मुनाफा फिर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, इंदौर के व्यक्ति से 15 लाख की साइबर ठगी

    पहले ट्रेडिंग ऐप पर दिखाया मुनाफा फिर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, इंदौर के व्यक्ति से 15 लाख की साइबर ठगी


    इंदौर । इंदौर में शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की चाह एक व्यक्ति को भारी पड़ गई। लसूड़िया थाना क्षेत्र में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब 15 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पहले वॉट्सऐप के जरिए पीड़ित से संपर्क किया और फिर उसे एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाकर निवेश के लिए तैयार किया। शुरुआत में ऐप पर जमा रकम और मुनाफा दिखाई दिया जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला देकर उससे कई किश्तों में रुपए जमा कराए गए। जब रकम वापस नहीं मिली तो उसे ठगी का अहसास हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    लसूड़िया पुलिस के मुताबिक स्कीम नंबर 78 में रहने वाले विश्वामित्र दुबे ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि एक सितंबर को उनके वॉट्सऐप पर अनजान नंबर से संपर्क किया गया था। फोन करने वाली युवती ने अपना नाम शिखा बताया और शेयर बाजार में निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने की बात कही। युवती की बातों में आकर विश्वामित्र ने उसके बताए तरीके से मोबाइल में निफ्टी पीडब्ल्यूएम नाम का ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कर लिया।

    पीड़ित के अनुसार ऐप में एक कस्टमर एजेंट भी मौजूद था जो उन्हें निवेश के लिए अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी देता था। इन खातों में रुपए ट्रांसफर करने के बाद ऐप पर जमा राशि दिखाई देने लगती थी। इससे उन्हें लगा कि उनका पैसा ट्रेडिंग में लगाया जा रहा है। इसी दौरान उन्हें दो आईपीओ अलॉट होने का दावा भी किया गया। ऐप पर शेयर और आईपीओ से बड़ा लाभ होता दिखाए जाने के कारण पीड़ित को निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    मामले में ठगी का संदेह तब गहराया जब विश्वामित्र ने ऐप में दिखाई जा रही रकम को अपने बैंक खाते में वापस लेने की कोशिश की। आरोप है कि जालसाजों ने रुपए निकालने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला दिया और इसके नाम पर उनसे और रकम जमा करवाई। पीड़ित से कई किश्तों में अलग-अलग बैंक खातों में करीब 15 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए। इसके बावजूद उनकी रकम वापस नहीं आई।

    करीब दस दिन इंतजार करने के बाद भी जब पैसा खाते में नहीं पहुंचा तो विश्वामित्र को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के बाद मामला लसूड़िया पुलिस को सौंपा गया। पुलिस ने फोन करने वाली युवती और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

    अब पुलिस संबंधित बैंक खातों के लेनदेन और ट्रेडिंग ऐप से जुड़े विवरणों की जांच कर रही है ताकि इस पूरे मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। यह मामला ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के उस तरीके की ओर इशारा करता है जिसमें शुरुआत में फर्जी मुनाफा दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता है और बाद में रकम निकालने के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है। निवेशकों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करने या अज्ञात बैंक खातों में पैसे भेजने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

  • 64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपए की संपत्तियों को लेकर जांच के घेरे में आए पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान का नाम अब 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री से भी जुड़ गया है। इंदौर उज्जैन हाईवे पर मगरखेड़ा गांव में स्थित इस जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह के रूप में दर्ज हैं। जमीन को लेकर एक परिवार ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि 83 वर्षीय कस्तूरी बाई के अस्पताल की आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही वृद्धा की मौत हो गई। अब परिवार ने रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए अदालत का रुख किया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

    दस्तावेजों के मुताबिक मगरखेड़ा गांव में कस्तूरी बाई के नाम दर्ज करीब 11.403 हेक्टेयर यानी 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम की गई थी। दस्तावेजों में जमीन का सरकारी मूल्यांकन करीब 8.97 करोड़ रुपए और बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है। कस्तूरी बाई के पोते दीपक शर्मा का कहना है कि यह परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है। परिवार के मुताबिक कस्तूरी बाई की तबीयत खराब होने पर उन्हें रतलाम से इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर विवाद हुआ। परिवार का आरोप है कि वृद्धा के आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को कस्तूरी बाई की अस्पताल में मौत हो गई।

    इस जमीन की कीमत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया है। परिवार और स्थानीय जानकारों का दावा है कि इंदौर उज्जैन रोड पर स्थित जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए है। वहीं 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से इस जमीन का मूल्य करीब 45 करोड़ 61 लाख रुपए बैठता है। स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होने के कारण जमीन की बाजार कीमत सरकारी गाइडलाइन से कई गुना अधिक हो सकती है। हालांकि 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा परिवार और स्थानीय जानकारों का अनुमान है।

    रजिस्ट्री के दस्तावेजों में फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर दर्ज है। दस्तावेजों के पेज 12 और 25 पर उनका नाम पता फोटो और हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। इस सौदे को लेकर एक और कारोबारी संबंध चर्चा में है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार के बेटे युवराज पंवार स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। इसी कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हिना खान भी डायरेक्टर बताई गई हैं। कंपनी का नाम लोकायुक्त की जांच में जमीनों की खरीद फरोख्त के मामलों में सामने आया है। इन संबंधों के कारण सौदे में फिरोज खान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन उनकी भूमिका और किसी कथित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    जमीन के नामांतरण को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया है। परिवार की अपील के बाद एसडीएम कोर्ट ने नामांतरण निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि नामांतरण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं। इनमें सिविल कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने और जमीन नहीं बेचने के अंतरिम आदेश के बाद नामांतरण किया जाना तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलना शामिल है। हालांकि नामांतरण निरस्त होने से रजिस्ट्री अपने आप अमान्य नहीं होती। इसी कारण परिवार ने अब सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की मांग की है।

    लोकायुक्त पुलिस पहले से फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच कर रही है। जांच में 64 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 48 संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक मगरखेड़ा की जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फिरोज खान और उनसे जुड़ी कंपनियों की इस सौदे में क्या भूमिका रही। दूसरी ओर पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार ने कहा कि वह कस्तूरी बाई के कानूनी सलाहकार थे। उन्होंने दावा किया कि कस्तूरी बाई अपनी जमीन परिवार को नहीं देना चाहती थीं। अब इस पूरे मामले में अदालत और जांच एजेंसियों की पड़ताल से ही विवादित रजिस्ट्री की वैधता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

  • दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल

    दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में गर्म दाल से झुलसे 30 वर्षीय युवक की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिजनों ने इलाज के दौरान इंजेक्शन दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दर्द से परेशान युवक को इंजेक्शन लगाने के बाद होश नहीं आया और बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चल सकेगा।

    एमआईजी पुलिस के मुताबिक मृतक आकाश वर्मा पुत्र कन्हैयालाल वर्मा सोमनाथ की चाल का निवासी था। रविवार को वह घर में गर्म दाल से झुलस गया था। हादसे में उसके पैर बुरी तरह जल गए थे। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसे भर्ती किया गया। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार होगा लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी मौत की खबर से परिवार में शोक छा गया।

    परिजनों और रिश्तेदारों के अनुसार आकाश का परिवार एमआईजी मेन रोड पर दाल पकवान की दुकान चलाता है। दुकान के लिए दाल घर पर ही उबाली जाती है। रविवार को आकाश ऊपर बने कमरे से गर्म दाल लेकर नीचे आ रहा था। इसी दौरान वह गर्म दाल की चपेट में आ गया और उसके पैर झुलस गए। हादसे के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया।

    परिवार का आरोप है कि मंगलवार रात आकाश दर्द के कारण चिल्ला रहा था। इसी दौरान डॉक्टरों ने उसे एक इंजेक्शन लगाया। परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन दिए जाने के बाद आकाश को होश नहीं आया। बुधवार रात चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत के बाद परिवार ने उपचार के तरीके को लेकर सवाल उठाए और इंजेक्शन दिए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने की आशंका जताई। हालांकि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि इंजेक्शन और युवक की मौत के बीच कोई सीधा संबंध था। इस संबंध में चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

    पुलिस ने परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए मामले में मर्ग कायम किया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान उपचार से जुड़े तथ्यों और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    इसी बीच इंदौर के खुड़ैल क्षेत्र से भी एक अन्य मौत का मामला सामने आया है। तिल्लोर खुर्द निवासी 46 वर्षीय अजय पुत्र दयाशंकर की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस के अनुसार अजय ने जहर खा लिया था और परिजन बुधवार को उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में भी पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    दोनों घटनाओं के बाद पुलिस मौतों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। आकाश वर्मा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं इलाज के दौरान लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका

    इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका


    इंदौर इंदौर के पास खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के नजदीक बुधवार सुबह घायल हालत में तेंदुआ दिखाई देने से आसपास के इलाके में चिंता का माहौल बन गया। तेंदुआ एक रहवासी मकान के पास बैठा नजर आया। ग्रामीणों के मुताबिक उसके सिर और मुंह पर चोट के निशान थे और वह सुस्त हालत में दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से अब तक तेंदुए की मौजूदगी और उसके घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास हरिओम ठाकुर के मकान के नजदीक लोगों ने तेंदुए को बैठे देखा। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ सामान्य रूप से सक्रिय नहीं दिख रहा था। उसके चेहरे और सिर पर चोट के निशान नजर आ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई गई कि वह किसी दूसरे वन्यजीव के साथ संघर्ष के दौरान घायल हुआ होगा। हालांकि चोट लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। तेंदुए को आबादी के नजदीक देखने के बाद आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई और पुलिस तथा वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू की। तेंदुआ कुछ समय बाद वहां से भाग गया था। ऐसे में वन विभाग की टीम उसकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्चिंग कर रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल होने के कारण तेंदुआ किसी खेत या झाड़ियों में छिपा हो सकता है। यदि वह आसपास के रहवासी क्षेत्र में मौजूद है तो लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए उसकी लोकेशन का पता लगाना और स्थिति की पुष्टि करना जरूरी माना जा रहा है।

    हरिओम ठाकुर के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उनके फार्म हाउस के आसपास तेंदुआ दिखाई दिया हो। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को भी एक तेंदुआ उनके फार्म हाउस में घुस आया था और वहां मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने उसे भगाया था। अब दोबारा मकान के पास तेंदुआ दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेंदुए की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग को सतर्कता बढ़ाने और लोगों को जरूरी जानकारी देने की आवश्यकता है।

    ठाकुर के अनुसार उनके मकान के पास रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं। उनका मानना है कि पहाड़ियों से तेंदुआ आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्र और आसपास के इलाके के बीच पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। फिलहाल खेतों में पानी देने का समय है और किसान सुबह तथा देर शाम तक खेतों में काम करते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि यदि घायल तेंदुआ खेतों या रास्तों के आसपास मौजूद रहा तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बढ़ सकती है।

    इस घटना के बाद अब वन विभाग की सर्चिंग पर नजर है। सबसे जरूरी है कि तेंदुए की वास्तविक स्थिति और उसके घायल होने की पुष्टि की जाए। तब तक स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और तेंदुए के नजदीक जाने या उसे घेरने की कोशिश नहीं करने की जरूरत है। वन विभाग की टीम के सामने चुनौती तेंदुए का पता लगाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।

  • शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक की पत्नी ने लिव-इन संबंधों को लेकर किया हंगामा, दोनों पक्षों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

    शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक की पत्नी ने लिव-इन संबंधों को लेकर किया हंगामा, दोनों पक्षों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी में एक कॉलेज के सहायक प्राध्यापक के कथित लिव-इन संबंधों को लेकर विवाद सामने आया है। प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक आवास पर पहुंची उनकी पत्नी ने पति के एक महिला सहकर्मी के साथ रहने पर आपत्ति जताई। इस दौरान करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बाद में संबंधित लोगों को थाने ले गई। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

    यह मामला शिवपुरी के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्रीमंत माधवराव सिंधिया पीजी कॉलेज में पदस्थ सहायक प्राध्यापक चेतन्य राजपूत और उनकी महिला सहकर्मी राजवती किरार से जुड़ा है। ग्वालियर निवासी प्रीति राजपूत का आरोप है कि उनके पति चेतन्य राजपूत कॉलेज में पदस्थ अविवाहित सहायक प्राध्यापक राजवती किरार के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। इसी बात को लेकर वह प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आवास पर पहुंचीं और दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया।

    प्रीति राजपूत का दावा है कि उनके पति और महिला सहकर्मी का एक बच्चा भी है। उन्होंने अपने नौ वर्षीय बेटे का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उनके पति ने उन्हें और बच्चे को छोड़ दिया है। प्रीति का कहना था कि उनका पति संबंधित आवास के अंदर मौजूद है, लेकिन बाहर नहीं आ रहा है। इसी बात को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति बनी रही। हालांकि, बच्चे के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    हंगामे की सूचना मिलने के बाद डायल-112 और महिला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में भी काफी देर तक गतिरोध बना रहा। करीब तीन घंटे बाद पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई, जहां उनके बीच हुए विवाद से संबंधित शिकायतें सामने आईं। इस दौरान मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    प्रीति राजपूत ने अपने पति चेतन्य राजपूत और महिला सहायक प्राध्यापक राजवती किरार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिव-इन संबंधों और कथित धोखाधड़ी को लेकर जांच की मांग की। साथ ही, उन्होंने संबंधित बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई है। यह मांग उनकी शिकायत का हिस्सा है। फिलहाल डीएनए परीक्षण कराए जाने या बच्चे की जैविक पहचान के संबंध में किसी निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर, सहायक प्राध्यापक राजवती किरार ने भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रीति राजपूत उनके घर में जबरन घुसीं और उनके साथ बदतमीजी की। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस के सामने आरोपों की जांच करने और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है।

    कॉलेज के प्राचार्य पवन श्रीवास्तव ने चेतन्य राजपूत और राजवती किरार के साथ रहने की बात की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने बताया कि घटना के समय वह बाहर थे और उन्हें प्रोफेसर कॉलोनी में हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी। वहीं, फिजिकल थाना प्रभारी अविनाश राठौड़ के अनुसार, दोनों पक्षों से प्राप्त शिकायतों की जांच की जा रही है।

    फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और विवाद से जुड़े अन्य तथ्यों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।

  • इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना

    इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी सियासी बहस के बीच भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ अभियान चलाएगी। इसके तहत पदयात्रा से लेकर प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाया जाएगा।

    भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।

    अभियान की तैयारियों को लेकर बुधवार रात इंदौर में बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत पार्टी के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में अभियान की रूपरेखा और अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। भाजपा ने तय किया है कि अभियान को केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर पार्टी अपनी बात पहुंचाएगी।

    सुमित मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा निकाली जाएगी। हालांकि पदयात्रा का शुरुआती स्थान और रूट अभी तय नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रबुद्धजनों की गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है। युवाओं के साथ संवाद और छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बातचीत के जरिए भी अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका फ्रांस बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं और देश के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल या संस्था तक सीमित नहीं है बल्कि उन ताकतों के खिलाफ भी है जो उनके मुताबिक भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अभियान के जरिए विपक्ष के कथित षड्यंत्र को जनता के सामने रखें।

    अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए भाजपा ने अलग-अलग टोलियां भी बनाई हैं। नगर स्तरीय टोली के संयोजक सुधीर कोल्हे को बनाया गया है जबकि महेश कुकरेजा कैलाश पीपले हरप्रीत सिंह बक्शी मुकेश मंगल नेहा शर्मा और दीपक बागवान को जिम्मेदारी दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की टोली में आलोक दुबे वरुण पाल रितेश शर्मा और नितीन शर्मा शामिल हैं। पदयात्रा की जिम्मेदारी विधायक रमेश मेंदोला मधु वर्मा गोलू शुक्ला पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय स्वप्निल कोठारी और अक्षय कांति बम को सौंपी गई है। वहीं राष्ट्र चिंतन संवाद टोली में सांसद शंकर लालवानी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।

    भाजपा का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान भाजपा अपने तर्कों को जनता तक किस तरह पहुंचाती है और विपक्ष इन कार्यक्रमों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • शिवपुरी पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, पुनीत वाजपेयी बने सिटी कोतवाली प्रभारी, 19 अधिकारियों के तबादले

    शिवपुरी पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, पुनीत वाजपेयी बने सिटी कोतवाली प्रभारी, 19 अधिकारियों के तबादले


    शिवपुरी जिले में पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 19 निरीक्षक और उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने 21 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल में कई थानों के प्रभारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है।

    तबादला सूची में सबसे प्रमुख बदलाव शिवपुरी सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी पद पर हुआ है। निरीक्षक पुनीत वाजपेयी, जो इससे पहले कोलारस थाने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उन्हें अब कोतवाली का नया थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं, कोतवाली के मौजूदा थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित दुबे को उनके पद से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इस बदलाव के बाद कोतवाली की जिम्मेदारी पुनीत वाजपेयी संभालेंगे।

    कोलारस थाने में भी नए प्रभारी की नियुक्ति की गई है। निरीक्षक जितेंद्र चंदेलिया को पुलिस लाइन से स्थानांतरित कर कोलारस थाना प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले वह पुलिस लाइन में पदस्थ थे। अब उन्हें थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नियुक्ति के साथ कोलारस में थाना प्रभारी का दायित्व बदल गया है।

    पोहरी थाने की कमान निरीक्षक मनीष कुमार धाकड़ को सौंपी गई है। वह भी पुलिस लाइन से स्थानांतरित होकर पोहरी पहुंचेंगे। वहीं, पोहरी के मौजूदा थाना प्रभारी निरीक्षक रवि चौहान को बैराड़ थाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह पोहरी और बैराड़ थानों में भी प्रभारियों की अदला-बदली की गई है।

    उप निरीक्षक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। अरविंद छारी को कोतवाली से स्थानांतरित कर दिनारा थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं, दिनारा में पदस्थ उप निरीक्षक रविंद्र कुशवाह को कोतवाली भेजा गया है। इन नियुक्तियों के जरिए दोनों अधिकारियों की नई पदस्थापना तय की गई है।

    तबादला आदेश में कुछ अधिकारियों को वर्तमान जिम्मेदारियों से हटाकर पुलिस लाइन भेजने के निर्देश भी शामिल हैं। इनमें कोतवाली से रोहित दुबे, बम्हारी से सुनील राजपूत, बैराड़ से सुरेशचंद्र शर्मा और मायापुर से अनिल भारद्वाज के नाम शामिल हैं। इसके अलावा भटनावर चौकी से सीमा धाकड़ और सीहोर से जूली तोमर को भी उनके वर्तमान प्रभार से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है।

    जारी जानकारी के अनुसार, इस पूरी तबादला सूची में 11 निरीक्षकों और 8 उप निरीक्षकों के नाम शामिल हैं। आदेश में सभी संबंधित अधिकारियों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर आमद दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल के तहत जिले के कई थानों और पुलिस इकाइयों में जिम्मेदारियां बदली गई हैं। नई नियुक्तियों के बाद संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र का प्रभार संभालना होगा।

  • कन्या भोज के बाद इंदौर में बवाल, बच्चियों पर पैसे चोरी का आरोप लगाकर मारपीट की शिकायत, शिक्षिका ने दी सफाई

    कन्या भोज के बाद इंदौर में बवाल, बच्चियों पर पैसे चोरी का आरोप लगाकर मारपीट की शिकायत, शिक्षिका ने दी सफाई


    इंदौर । इंदौर में कन्या भोज के लिए गईं सात बच्चियों से कथित मारपीट और उन्हें फ्लैट में बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। घटना शहनाई रेसीडेंसी की बताई जा रही है जहां परिजनों की शिकायत के बाद एमआईजी पुलिस ने 62 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका अनिता मोहता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परिजनों का आरोप है कि बच्चियों को कन्या भोज और उपहार देने के बहाने फ्लैट में ले जाया गया और वहां चोरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट की गई। वहीं शिक्षिका ने इन आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मंदिर में रखे रुपए गायब होने के बाद उन्होंने बच्चियों से केवल पूछताछ की थी और किसी के साथ मारपीट नहीं की।

    परिजनों के मुताबिक बच्चियां कन्या पूजन के लिए शहनाई रेसीडेंसी गई थीं। वहां अलग-अलग फ्लैट में कन्या भोज और पूजन का कार्यक्रम चल रहा था। बच्चियों को खाना और उपहार मिलने की उम्मीद थी लेकिन कुछ समय बाद जब वे घर नहीं लौटीं तो परिवार के लोग परेशान हो गए। उनकी तलाश करते हुए परिजन सोसाइटी पहुंचे। उनका आरोप है कि बच्चियां एक फ्लैट से रोते हुए नीचे आईं और उन्होंने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। परिवार का दावा है कि बच्चियों को करीब चार घंटे तक फ्लैट में रोके रखा गया और उनके साथ मारपीट की गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चियों से वीडियो बनवाकर उनसे रुपए लेने की बात कहलवाई गई। उन्होंने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    दूसरी ओर रिटायर्ड शिक्षिका अनिता मोहता ने परिजनों के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि बच्चियां खुद उनके फ्लैट पर आई थीं और उन्होंने खाना मांगा था। इसके बाद उन्होंने बच्चियों को अंदर बैठाया और उनके लिए दाल चावल बनाने लगीं। शिक्षिका के मुताबिक बच्चियों ने बताया था कि वे सोसाइटी के दूसरे फ्लैट से आ रही हैं। बाद में उन्हें मंदिर में रखे रुपए और लिफाफे गायब होने की जानकारी मिली। अनिता का दावा है कि जब बच्चियां दोबारा उनके पास आईं तो उन्होंने रुपए के बारे में पूछा। इस दौरान बच्चियों ने एक बच्ची की ओर इशारा किया और पूछताछ में रुपए लेने की बात सामने आई। शिक्षिका ने कहा कि उन्होंने बच्चियों को नहीं पीटा और न ही उन्हें बंधक बनाया। उनके अनुसार वे खुद बच्चियों को नीचे छोड़ने गई थीं।

    सोसाइटी के कुछ रहवासियों और सुरक्षा कर्मियों के मुताबिक बच्चियां दोपहर करीब 12 बजे परिसर में पहुंची थीं। वे अलग-अलग फ्लैट में कन्या पूजन के लिए गई थीं जहां उन्हें रुपए और उपहार दिए गए। रहवासियों ने बताया कि बच्चियां हर साल कन्या पूजन के लिए सोसाइटी आती हैं। हालांकि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में मेडिकल जांच की जानकारी भी सामने आई है। परिजनों ने बच्चियों के हाथ-पैरों और गालों पर चोट के आरोप लगाए थे लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में मारपीट से लगी किसी चोट की पुष्टि नहीं हुई। वहीं सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिजनों का कहना है कि परिसर में कैमरे लगे हैं जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संबंधित फ्लैट और उसी मंजिल पर कैमरे नहीं थे।

    पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर बच्चियों के बयान लिए हैं। अब जांच में शिकायतों और शिक्षिका के पक्ष के साथ उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।