Author: bharati

  • सिर्फ परंपरा नहीं, विज्ञान भी था वजह! पुराने जमाने के घरों में छोटे दरवाजे बनाने का राज

    सिर्फ परंपरा नहीं, विज्ञान भी था वजह! पुराने जमाने के घरों में छोटे दरवाजे बनाने का राज


    नई दिल्ली । अगर आपने कभी किसी पुराने गांव, हवेली या पारंपरिक घर को देखा होगा, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि वहां के दरवाजे आज के मुकाबले काफी छोटे और नीचे होते थे। घर में प्रवेश करने के लिए लोगों को झुकना पड़ता था। पहली नजर में यह अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे कई व्यावहारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण मौजूद थे। आइए जानते हैं कि आखिर पुराने समय में दरवाजे इतने छोटे क्यों बनाए जाते थे।

    तापमान नियंत्रित रखने का आसान तरीका

    उस दौर में न बिजली की सुविधा हर जगह उपलब्ध थी और न ही एसी या हीटर जैसे आधुनिक साधन। ऐसे में छोटे दरवाजे घर के अंदर का तापमान संतुलित रखने में मदद करते थे। गर्मी के मौसम में बाहर की गर्म हवा कम मात्रा में घर के अंदर प्रवेश करती थी, जबकि सर्दियों में घर की गर्माहट लंबे समय तक बनी रहती थी। इससे ऊर्जा के बिना ही प्राकृतिक तापमान नियंत्रण संभव हो जाता था।

    सुरक्षा के लिहाज से भी था बेहतर

    पुराने समय में चोरी, डकैती और बाहरी हमलों का खतरा अधिक रहता था। छोटे दरवाजों से कोई भी व्यक्ति सीधे और तेजी से घर में प्रवेश नहीं कर सकता था। घर में आने वाले को झुकना पड़ता था, जिससे उसकी गति धीमी हो जाती थी। ऐसे में घर के लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया देने का अतिरिक्त समय मिल जाता था।

    मिट्टी और पत्थर के घरों की मजबूती

    उस समय अधिकांश घर मिट्टी, ईंट या पत्थर से बनाए जाते थे। भारी लकड़ी के बड़े दरवाजे इन दीवारों पर ज्यादा दबाव डाल सकते थे। इसी वजह से दरवाजों का आकार छोटा रखा जाता था, ताकि चौखट और दीवारों पर कम भार पड़े और घर लंबे समय तक मजबूत बना रहे।

     घर की निजता बनाए रखने में मददगार
    छोटे और नीचे बने दरवाजे घर के अंदर की गतिविधियों को बाहर से आसानी से दिखाई नहीं देने देते थे। इससे आंगन और परिवार, विशेषकर महिलाओं की निजता बनी रहती थी। ग्रामीण और पारंपरिक समाज में इसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता था।

    सम्मान और विनम्रता का प्रतीक
    भारतीय परंपरा में यह भी माना जाता था कि जब कोई व्यक्ति झुककर किसी के घर में प्रवेश करता है, तो वह अपने अहंकार को बाहर छोड़कर सम्मान के साथ अंदर आता है। यही कारण है कि कई पुराने मंदिरों और पारंपरिक भवनों के प्रवेश द्वार भी अपेक्षाकृत छोटे बनाए जाते थे, ताकि प्रवेश करने वाला स्वाभाविक रूप से सिर झुकाए।

    क्या यह पूरी तरह सच है?

    हालांकि इन कारणों का उल्लेख इतिहास, पारंपरिक वास्तुकला और लोक मान्यताओं में मिलता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर पुराने घर में दरवाजे छोटे होने का कारण एक जैसा नहीं था। अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु, निर्माण सामग्री, स्थानीय सुरक्षा जरूरतों और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार इनके आकार में अंतर देखने को मिलता था।
  • स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद, सेहत भी बरकरार! नोट करें हेल्दी होममेड मोमोज की सीक्रेट रेसिपी

    स्ट्रीट फूड जैसा स्वाद, सेहत भी बरकरार! नोट करें हेल्दी होममेड मोमोज की सीक्रेट रेसिपी


    नई दिल्ली । मोमोज आज बच्चों से लेकर बड़ों तक का पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुके हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मोमोज मैदे से बनाए जाते हैं, जिनका अधिक सेवन सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। अगर आपके बच्चे भी बार-बार मोमोज खाने की जिद करते हैं, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप इन्हें घर पर ही हेल्दी तरीके से तैयार कर सकते हैं। इस रेसिपी में मैदे की जगह मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल किया जाता है और भरावन में ताजी सब्जियां व पनीर डाला जाता है, जिससे स्वाद के साथ पोषण भी मिलता है।

    सामग्री

    आटे के लिए
    2 कप मल्टीग्रेन आटा

    1 बड़ा चम्मच दूध

    चुटकीभर नमक

    आवश्यकतानुसार पानी

    स्टफिंग के लिए
    2 चम्मच तेल

    2 कप कद्दूकस की हुई पत्तागोभी

    ½ कप मैश किया हुआ पनीर

    1 बारीक कटी गाजर

    ½ कप बारीक कटा प्याज

    1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट

    1 छोटा चम्मच सोया सॉस

    ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर

    स्वादानुसार नमक

    ऐसे बनाएं हेल्दी मोमोज

    सबसे पहले मल्टीग्रेन आटे में नमक, दूध और पानी डालकर मुलायम आटा गूंथ लें और 15-20 मिनट के लिए ढककर रख दें।

    अब एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट हल्का भून लें। इसके बाद प्याज, गाजर और पत्तागोभी डालकर तेज आंच पर हल्का स्टिर फ्राई करें, ताकि सब्जियां कुरकुरी बनी रहें।

    अब इसमें सोया सॉस, काली मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाकर अच्छी तरह चलाएं। अगर सब्जियों से ज्यादा पानी निकल जाए, तो स्टफिंग को सूती कपड़े में हल्का निचोड़ लें।

    अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बेलें, बीच में तैयार स्टफिंग रखें और मनचाही मोमोज की शेप दें।

    स्टीमर की ट्रे में हल्का तेल लगाएं या पत्तागोभी के पत्ते बिछा दें। सभी मोमोज सजाकर 10-12 मिनट तक स्टीम करें। जब मोमोज हल्के चमकदार दिखाई देने लगें, तो समझिए वे तैयार हैं।

    इन्हें गर्मागर्म चिली-गार्लिक सॉस या हेल्दी डिप के साथ परोसें।

    परफेक्ट मोमोज बनाने के खास टिप्स

    मोमोज का आटा मुलायम रखने के लिए थोड़ा दूध मिलाएं।

    स्टफिंग हमेशा पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही भरें।

    बेले हुए मोमोज के रैपर को सूखने न दें, उन्हें ढककर रखें।

    स्टीमर में पत्तागोभी के पत्ते बिछाने से मोमोज चिपकते नहीं हैं।

    स्टीम होने के तुरंत बाद मोमोज सर्व करें, इससे उनका स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर रहते हैं।

  • CM योगी का देवरिया दौरा: 106 विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, विपक्ष पर भी साधा निशाना

    CM योगी का देवरिया दौरा: 106 विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, विपक्ष पर भी साधा निशाना

    देवरिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को देवरिया जिले को 456 करोड़ रुपये से अधिक की 106 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि देवरिया में तेजी से निवेश बढ़ रहा है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण विकास अब हर गांव और हर घर तक पहुंच रहा है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक और प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित करना और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

    अयोध्या और राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े हालिया विवादों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इस पर अनावश्यक आक्षेप नहीं लगाए जाने चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामले में विशेष जांच दल (SIT) अपनी रिपोर्ट दे चुका है और कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि “दूध का दूध और पानी का पानी” होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई ठोस प्रमाण है तो वह उसे एसआईटी के सामने प्रस्तुत करे, बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए।

    कांग्रेस पर भी साधा निशाना

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और “जय श्रीराम” के नारे पर आपत्ति जताते थे, वे आज आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने देश को केवल लूटा ही नहीं, बल्कि उसकी व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया।

    सोशल मीडिया पर भी दी जानकारी

    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि बाबा दुग्धेश्वर नाथ, बाबा महेंद्र नाथ और महर्षि देवरहा बाबा की पावन भूमि देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर जिले के समग्र विकास को नई मजबूती दी गई है।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से देवरिया में निवेश लगातार बढ़ रहा है, युवाओं को रोजगार मिल रहा है और आधुनिक सड़क व अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से विकास अब लोगों के द्वार तक पहुंच चुका है।

  • अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज

    अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई राजस्व टीम पर खनन माफिया द्वारा खुलेआम धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है। बदरवास तहसील के सड़बूड़ गांव में हुई इस घटना में तहसीलदार सचिन भार्गव और उनकी टीम को जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि सिंध नदी के पास सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। इस पर तहसीलदार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि भारी मशीनों की मदद से मिट्टी निकाली जा रही थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए उसका अवैध परिवहन किया जा रहा था। टीम ने मौके पर कार्रवाई शुरू की, तभी स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने विरोध शुरू कर दिया और सरकारी अमले के साथ अभद्रता की। इसी दौरान मुख्य आरोपी जयमंडल यादव ने तहसीलदार को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह गोली चला देगा और जेल जाने के लिए भी तैयार है। इसके साथ ही उसने अपने बेटे को घर से हथियार लाने के लिए भी कहा, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दहशत में आ गए।

    घटना के दौरान अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और आरोपी पक्ष ने मौके से हाइड्रा मशीन और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को भगा दिया। हालांकि राजस्व टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर बदरवास थाने में खड़ा करा दिया। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भूमि पर करीब 15-15 फीट गहरे गड्ढे बनाकर अवैध खनन किया गया था, जिससे बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन सामने आया है।

    कोटवार और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने भी इस पूरी घटना की पुष्टि की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि जान से मारने की धमकी देकर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में चिंता बढ़ गई है और अवैध खनन पर कार्रवाई को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।

    यह मामला राज्य में अवैध खनन पर बढ़ते दबाव और प्रशासनिक टीमों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

  • मौत को दी मात! चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरी महिला, लोको पायलट की सूझबूझ से बची जान

    मौत को दी मात! चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिरी महिला, लोको पायलट की सूझबूझ से बची जान


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर शुक्रवार को एक बड़ा रेल हादसा टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर चलती दून एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश कर रही एक महिला का संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच बने गैप में जा गिरी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन चलने के बाद महिला ने उसमें चढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म तथा ट्रेन के बीच फंस गई। यह भयावह दृश्य देखते ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों ने जोर-जोर से शोर मचाकर लोको पायलट को सतर्क किया।

    यात्रियों की आवाज सुनते ही लोको पायलट ने तत्काल ट्रेन के इमरजेंसी ब्रेक लगाए और ट्रेन रोक दी। इसके बाद मौके पर मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के जवान तुरंत हरकत में आए और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

    हादसे में महिला को मामूली चोटें आईं। रेलवे अधिकारियों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी। फिलहाल महिला की हालत सामान्य बताई जा रही है। घटना के बाद रेलवे प्रशासन और जीआरपी ने यात्रियों से अपील की है कि वे कभी भी चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें।

    अधिकारियों ने कहा कि ऐसी छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। यात्रियों को हमेशा ट्रेन के पूरी तरह रुकने के बाद ही सुरक्षित तरीके से चढ़ना और उतरना चाहिए तथा रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि यात्रियों की सतर्कता, लोको पायलट की त्वरित सूझबूझ और सुरक्षा बलों की तेजी से की गई कार्रवाई कई बार बड़ी दुर्घटनाओं को टाल सकती है।
  • भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड

    भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड


    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लंदन में आयोजित यूके-इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में ‘भारत-ब्रिटेन संबंधों को बेहतर बनाने में उत्कृष्ट नेतृत्व’ के विशेष सम्मान से नवाजा गया।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद 300 से अधिक नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों की साझेदारी का सबसे बेहतरीन दौर अभी आना बाकी है।

    उन्होंने बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। उनके अनुसार यह समझौता व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा तथा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।

    पीयूष गोयल ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने सरकार, उद्योग, शिक्षा, संस्कृति और भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से भारत और ब्रिटेन के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया है।

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है। यह विकास यात्रा व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, नवाचार और उभरते क्षेत्रों में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने समारोह में सम्मानित अन्य विजेताओं को भी बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके प्रयासों से भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार, मजबूत होते कारोबारी संबंध और लोगों के बीच गहरे होते संपर्क भविष्य में सहयोग के नए आयाम स्थापित करेंगे।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि “भारत-ब्रिटेन साझेदारी की सबसे बेहतरीन पारी अभी बाकी है।” यह संदेश दोनों देशों के बीच भविष्य में और व्यापक आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

  • भारत-जापान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम साने ताकाइची के पहले भारत दौरे पर होगी अहम वार्ता

    भारत-जापान रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, पीएम साने ताकाइची के पहले भारत दौरे पर होगी अहम वार्ता


    नई दिल्ली । भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1 से 3 जुलाई, 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा साने ताकाइची का पहला आधिकारिक भारत दौरा होगा। इस दौरान वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी।

    नई दिल्ली में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करने, रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर देगा। बैठक में आर्थिक सहयोग, निवेश, रक्षा, तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े विषयों पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त 2025 में जापान गए थे, जहां उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती देने की प्रतिबद्धता जताई थी।

    जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए पांच सूत्रीय रोडमैप भी प्रस्तुत किया था। उन्होंने निवेश, विनिर्माण, नवाचार और तकनीकी सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के विकास का आधार बताया था।

    प्रधानमंत्री मोदी ने उस दौरान जापान की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की थी। इसके अलावा उन्होंने जापान के विभिन्न प्रांतों के राज्यपालों के साथ बैठक कर क्षेत्रीय सहयोग और निवेश के अवसरों पर चर्चा की थी।

    जापान दौरे की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग रही थी। प्रधानमंत्री मोदी और शिगेरु इशिबा ने जापान के मियागी प्रांत स्थित Tokyo Electron Miyagi Limited का दौरा किया था, जहां उन्हें उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण तकनीकों और वैश्विक सप्लाई चेन में कंपनी की भूमिका की जानकारी दी गई थी।

    इस यात्रा के बाद भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर निर्माण, परीक्षण, अनुसंधान और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों ने सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित करने तथा औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प भी दोहराया था।

    साने ताकाइची की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और जापान रक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल इकोनॉमी, हरित ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूती मिलेगी।

  • भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत वेनेजुएला भेजे डॉक्टर, भीष्म क्यूब और राहत सामग्री

    भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत वेनेजुएला भेजे डॉक्टर, भीष्म क्यूब और राहत सामग्री


    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए राहत और चिकित्सा सहायता के लिए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है। इस विशेष अभियान के तहत भारतीय सेना की मेडिकल टीम, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और बड़ी मात्रा में राहत सामग्री वेनेजुएला भेजी गई है, ताकि आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल इलाज और जरूरी सहायता मिल सके।

    भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल से 41 सदस्यीय विशेषज्ञ दल भारतीय वायुसेना के दो सी-17 परिवहन विमानों के जरिए वेनेजुएला रवाना हुआ है। इस टीम में नौ अनुभवी सैन्य चिकित्सक भी शामिल हैं, जो प्रभावित इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, ट्रॉमा केयर, गंभीर घायलों का इलाज, सर्जरी और गहन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।

    भारतीय सेना के अनुसार राहत दल अपने साथ लगभग छह टन चिकित्सा सामग्री और मानवीय सहायता लेकर गया है। इसके अलावा मिशन में 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां और चिकित्सा उपकरण भी भेजे गए हैं। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ‘भीष्म क्यूब’ है, जिसे भारत की आरोग्य मैत्री परियोजना के तहत विकसित किया गया है। यह अत्याधुनिक मॉड्यूलर फील्ड हॉस्पिटल बेहद कम समय में स्थापित किया जा सकता है और लगभग 200 मरीजों को एक साथ जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा देने में सक्षम है।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ऑपरेशन अमिस्ताद के तहत भारतीय वायुसेना के दो सी-17 विमान राहत सामग्री और चिकित्सा दल के साथ वेनेजुएला रवाना हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है तथा हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    भीष्म क्यूब को विशेष रूप से प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट वाले क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह उन्नत ट्रॉमा केयर, आपातकालीन सर्जरी और गहन चिकित्सा सुविधाओं से लैस है, जिससे बड़ी संख्या में घायलों का तत्काल उपचार संभव हो पाता है।

    भारत का यह मिशन केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मित्र देशों के साथ संकट की घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की उसकी विदेश नीति और मानवीय दृष्टिकोण का भी मजबूत संदेश देता है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित यह अभियान वैश्विक सहयोग, करुणा और मानवता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से रेखांकित करता है।

    वेनेजुएला में चलाया जा रहा ऑपरेशन अमिस्ताद हजारों प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो सकता है। साथ ही यह अभियान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और मानवीय शक्ति की छवि को भी और मजबूत करेगा।

  • CBSE भाषा नीति पर साफ स्थिति, मौजूदा छात्रों को नहीं बदलना होगा विषय, दो विदेशी भाषाओं की पढ़ाई 10वीं तक जारी रखने की छूट

    CBSE भाषा नीति पर साफ स्थिति, मौजूदा छात्रों को नहीं बदलना होगा विषय, दो विदेशी भाषाओं की पढ़ाई 10वीं तक जारी रखने की छूट

    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई भाषा नीति को लेकर लंबे समय से चल रहे असमंजस पर शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को अपनी मौजूदा भाषा संयोजन में किसी भी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होगी। इन छात्रों को 10वीं तक अपनी चुनी हुई भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। इस फैसले से देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

    हाल ही में CBSE द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत जारी किए गए सर्कुलर के बाद तीन-भाषा नीति को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। सर्कुलर में कहा गया था कि कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। इसके बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताई थी, खासकर उन छात्रों ने जो पहले से दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं।

    इस विवाद के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया तक भी पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट में इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल की गईं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया था। इसी बीच शिक्षा मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा छात्रों पर यह नियम लागू नहीं होगा।

    मंत्रालय के अनुसार, नया भाषा ढांचा केवल भविष्य में लागू होने वाले बैच पर लागू किया जाएगा। यानी कक्षा 6 से नए प्रवेश लेने वाले छात्रों पर ही यह तीन-भाषा नीति प्रभावी होगी। वर्तमान में पढ़ रहे छात्र अपनी मौजूदा भाषा संरचना के साथ बिना किसी बदलाव के अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी नीति परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि केवल पहले से मौजूद व्यवस्था को स्पष्ट करने का प्रयास है।

    शिक्षा मंत्रालय के अनुसार देश में हर वर्ष लगभग 24 लाख छात्र CBSE की 10वीं परीक्षा में शामिल होते हैं, जिनमें से केवल एक छोटा हिस्सा, लगभग 30 हजार छात्र, दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। यही वर्ग इस विवाद से प्रभावित हो सकता था। अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने के बाद इन छात्रों को भी पूरी राहत मिल गई है।

    सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है, लेकिन इसे लागू करने में किसी भी प्रकार की अचानक बाध्यता नहीं होगी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी प्रकार की शैक्षणिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    कुल मिलाकर, इस स्पष्टीकरण के बाद CBSE की भाषा नीति को लेकर फैला भ्रम समाप्त हो गया है। मौजूदा छात्रों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नई व्यवस्था भविष्य के शैक्षणिक बैचों पर लागू होगी।

  • संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा, खेत में करंट लगने से 22 वर्षीय युवक की मौत

    संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा, खेत में करंट लगने से 22 वर्षीय युवक की मौत


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय युवक की करंट लगने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया, जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के निखरकपार गांव की है। गांव निवासी विनोद ने पुलिस को दी सूचना में बताया कि उनका छोटा भाई मुकेश शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे घर से लगभग 300 मीटर दूर स्थित अपने खेत को देखने गया था।

    बताया जा रहा है कि खेत के पास लगे बिजली के पोल में किसी कारणवश करंट उतर आया था। जैसे ही मुकेश पोल के संपर्क में आया, वह तेज करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक युवक की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    प्रारंभिक जांच में बिजली के पोल में करंट उतरने की बात सामने आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।