Author: bharati

  • ईरान में अलर्ट रहने का नया तरीका, हमलों और अपडेट के लिए ऐप बना सहारा

    ईरान में अलर्ट रहने का नया तरीका, हमलों और अपडेट के लिए ऐप बना सहारा


    नई दिल्ली मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान में एक गंभीर डिजिटल संकट उत्पन्न हो रहा है। पिछले 30 दिनों से अधिक समय से देश में इंटरनेट समुद्र तट पर मौजूद हैं, जिसमें शेष आम नागरिकों के सामने की जानकारी हासिल करना बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि इस मुश्किल दौर में लोगों ने खुद ही रास्ता निकाल लिया है। अब वे हवाई हमले और जरूरी अपडेट पाने के लिए वैकल्पिक प्लेटफॉर्म और ऐप्स का सहारा ले रहे हैं।

    इथियोपिया के अनुसार, हज़ारों ईरानी नागरिक टेलीग्राम जैसे इलेक्ट्रानिक मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके माध्यम से लोग एक-दूसरे को यह जानकारी दे रहे हैं कि किस स्थान पर हवाई हमला हुआ, किस स्थान पर बिजली गिरी और किस स्थान पर कितनी क्षति हुई। इंटरनेट की भारी पाबंदियों के बावजूद यह ऐप एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम बना हुआ है, जहां लोग तेजी से अपडेट शेयर कर रहे हैं।

    इसके अलावा, एक खास ऐप महसा संभावित (महसा अलर्ट) भी इस समय लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो रहा है। यह ऐप ईरान के डिजिटल अधिकार और स्वयंसेवकों द्वारा तैयार किया गया है। महसा अलर्ट के माध्यम से लोग हवाई हमले, सैन्य हमले और खतरनाक क्षेत्र की जानकारी ट्रैक कर पा रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरी तरह से क्राउडसोर्स सिस्टम है, यानी आम लोग ही सूचना प्रौद्योगिकीकर और साझा करके इसे शुरू करते हैं।

    इस ऐप की सूची भी काफी दिलचस्प है। मिलने वाली जानकारी को सीधे प्रकाशित नहीं किया जाता है, बल्कि उसे कई स्तरों पर दर्ज किया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, चित्र और अन्य तथ्यों के आधार पर भ्रूण की पुष्टि की जाती है, इसलिए फर्जी खबरों से बचा जा सके। हालाँकि यह कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है और पूरी तरह से रीयल-टाइम भी नहीं है, लेकिन फिर भी यह लोगों के लिए स्वामित्व की जानकारी का ज़रिया बन गया है।

    महसा की एक और प्रकृति यह है कि इसके डेटा अपडेट में बेहद बच्चे होते हैं—औसतन सिर्फ 100KB। इसका फ़ायदा यह है कि अवैध या सीमित इंटरनेट कनेक्शन में भी लोग आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप में मेडिकल लॉट, एसआईटी सुईट और स्कींट चेक प्वाइंट जैसी अतिरिक्त जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लोगों को सुरक्षा के दावे से मदद मिलती है।

    वहीं नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट सामान्य स्तर के केवल 1 प्रतिशत तक है। यह स्थिति 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त सैन्य हमले के बाद बनी। इसके बाद देश से करीब-करीब डिजिटल ब्लैक आउट हो गया, जिससे करीब 9 करोड़ लोग ग्लोबल वर्ल्ड से कट गए।

    इन हालातों ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय में प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयास कितने अहम हैं। जब सरकारी सिस्टम उपलब्ध नहीं होता है, तब आम नागरिक खुद आगे बढ़कर समाधान तैयार करते हैं—और ईरान में ‘महसा संभावना’ का सबसे बड़ा उदाहरण सामने आया है।

  • हनुमान जयंती 2026 पर करें ये चमत्कारी उपाय बजरंगबली की कृपा से हर संकट होगा दूर

    हनुमान जयंती 2026 पर करें ये चमत्कारी उपाय बजरंगबली की कृपा से हर संकट होगा दूर

    नई दिल्ली। हनुमान जयंती का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है और इसे संकटों को दूर करने वाला दिन माना जाता है। चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए एक ऐसा अवसर होता है जब सच्चे मन से की गई पूजा और उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की आराधना करने से भय बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो मानसिक तनाव आर्थिक परेशानी या किसी प्रकार की रुकावट का सामना कर रहे हैं। इस दिन किए गए सरल लेकिन प्रभावी उपाय व्यक्ति के जीवन में साहस ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं।

    हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान हनुमान की पूजा करनी चाहिए। मंदिर जाकर या घर में ही उनकी प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से मन की अशांति दूर होती है और मानसिक शक्ति बढ़ती है।

    इस दिन राम नाम का जप करना भी बेहद फलदायी माना जाता है क्योंकि भगवान हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। श्रीराम के नाम का स्मरण करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखकर पूरे दिन सात्विक आहार का पालन करें और शाम को विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें।

    हनुमान जयंती पर जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। खासकर बंदरों को गुड़ और चना खिलाना शुभ फल देता है और इसे संकटों से मुक्ति का एक सरल उपाय माना जाता है। इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और हनुमान मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाने से भी जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि हनुमान जी को प्रसन्न करना कठिन नहीं है बल्कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही उनकी कृपा पाने का सबसे बड़ा माध्यम है। इसलिए इस दिन किए गए छोटे छोटे उपाय भी बड़े परिणाम दे सकते हैं।

    हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्मबल और विश्वास को मजबूत करने का दिन है। यह हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस और भक्ति के बल पर हर समस्या का समाधान संभव है। यदि इस दिन पूरे मन से बजरंगबली की आराधना की जाए तो जीवन में आने वाले संकटों से राहत मिल सकती है और सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं।

  • गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां

    गर्मी में खाली पेट बाहर निकलना पड़ सकता है भारी, जानें जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली घर में नवजात शिशु का जन्म खुशियों की सौगात लेकर आता है, लेकिन इस खुशी के पीछे कई बार ऐसी बुद्धिमान छिपी होती हैं, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। आमतौर पर ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ को सिर्फ मां से जुड़कर देखा जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा को बदल दिया है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद पिता भी मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना करते हैं। यह समस्या जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9 से 12 महीने के भीतर ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है, जब गर्भधारण का दबाव बढ़ जाता है।

    स्वीडन में किए गए इस बड़े अध्ययन में करीब 10 लाख पिताओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। शोध में सामने आया कि शुरुआती महीनों में पिता लगातार सामान्य नजर आते हैं, क्योंकि उनका पूरा ध्यान मां और बच्चे की देखभाल पर होता है। वे अपनी थकान, मानसिक दबाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है। नींद की कमी, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलावों का दबाव धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यही कारण है कि बच्चे के जन्म के लगभग एक साल के भीतर डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ जाता है।

    शोध में यह भी सामने आया कि पुरुष अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर समझता। सामाजिक दबाव और ‘मजबूत बने रहने’ की सोच के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं। यही कारण है कि समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती। दिव्यांगों का मानना ​​है कि यदि समय रहते इस स्थिति को समझा जाए और सही समर्थन दिया जाए, तो पिता भी इस दौर से आसानी से निकल सकते हैं। परिवार और समाज को चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में सहयोग करें।

    दिव्यांगों के अनुसार, पिता को अपनी दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना चाहिए, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर सहकर्मियों या प्रोफेशनल मदद लेने से बढ़ना नहीं चाहिए। साथ ही, पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करना और दिव्यांगों को साझा करना भी इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। यह अध्ययन इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि नवजात के जन्म के बाद मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के लिए भी उतनी ही जरूरी है।

  • जबलपुर में मामूली विवाद बना जानलेवा, शादी में घोड़ी हटाने को लेकर युवक की चाकू मारकर हत्या

    जबलपुर में मामूली विवाद बना जानलेवा, शादी में घोड़ी हटाने को लेकर युवक की चाकू मारकर हत्या


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक मामूली विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। शादी समारोह के दौरान हुई कहासुनी के बाद 33 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वारदात सोमवार देर रात की है, जहां पांच बदमाशों ने युवक को घेरकर उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए।

    जानिए क्‍या है मामला

    जानकारी के मुताबिक, हनुमानताल निवासी मोनू उर्फ सादिल शादियों में दूल्हे के लिए घोड़ी उपलब्ध कराने का काम करता था। सोमवार रात वह घमापुर इलाके में एक शादी समारोह में घोड़ी लेकर पहुंचा था। इसी दौरान कुछ युवक बाइक से वहां से निकल रहे थे। भीड़ अधिक होने के कारण मोनू ने उन्हें घोड़ी से दूर रहने को कहा, ताकि कोई हादसा न हो। इसी बात को लेकर आरोपियों से उसका विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया, जिसके बाद आरोपी वहां से चले गए।

    बारात खत्म होने के बाद देर रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच मोनू घर लौटा। घोड़ी बांधकर जैसे ही वह घर के अंदर जाने लगा, तभी बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे और उस पर चाकू से हमला कर दिया। हमलावरों ने उसे घेरकर कई वार किए और खून से लथपथ हालत में सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। कुछ देर बाद राहगीरों ने घायल मोनू को देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। हनुमानताल और घमापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।

    परिवार की जिम्मेदारी थी मृतक पर

    मृतक के भाई मोहम्मद साबिर के अनुसार, परिवार हमलावरों को नहीं जानता। विवाद की वजह सिर्फ इतनी थी कि मोनू ने घोड़ी से दूर रहने की बात कही थी। बताया जा रहा है कि मोनू ही पूरे परिवार का सहारा था और शादी-विवाह में घोड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

    प्रारंभिक जांच में जीशान नाम के युवक और उसके साथियों की संलिप्तता सामने आई है। हनुमानताल थाना पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • नवजात के बाद पिता भी होते हैं डिप्रेशन का शिकार, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

    नवजात के बाद पिता भी होते हैं डिप्रेशन का शिकार, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा


    नई दिल्ली नए बच्चे का जन्म आमतौर पर खुशी का मौका माना जाता है, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस धारणा के पीछे छिपी एक अहम सच्चाई उजागर की है। JAMA Network Open में प्रकाशित शोध के अनुसार, पिता भी बच्चे के जन्म के बाद डिप्रेशन और मानसिक तनाव का सामना करते हैं, खासकर कुछ महीनों बाद।

    क्या कहती है स्टडी?
    स्वीडन में करीब 10 लाख पिताओं पर रिसर्च की गई बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 9–12 महीने बाद जोखिम बढ़ता हैइस दौरान डिप्रेशन और तनाव का खतरा 30% से ज्यादा बढ़ जाता है

    क्यों बढ़ता है पिता में डिप्रेशन?

    शोध के मुताबिक, शुरुआती समय में पिता अपनी भावनाओं को दबाकर परिवार की जिम्मेदारियों में लग जाते हैं। लेकिन समय के साथ:

    नींद की कमी बनी रहती है
    काम और परिवार का संतुलन मुश्किल हो जाता है
    आर्थिक दबाव बढ़ता है
    रिश्तों में बदलाव आता है

    इन सबका असर धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और डिप्रेशन या स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में सामने आता है।  बड़ी समस्या: पुरुष मदद नहीं मांगते स्टडी में यह भी सामने आया कि: पिता अक्सर अपनी भावनाओं को छिपाते हैं सामाजिक दबाव के कारण खुलकर बात नहीं करते इसी वजह से समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती

    क्या करना चाहिए?
    पिता भी अपनी मानसिक स्थिति को सीरियस लें
    पार्टनर और परिवार से खुलकर बात करें
    जरूरत पड़े तो काउंसलिंग या प्रोफेशनल मदद लें
    परिवार को भी चाहिए कि वे पिता की भावनाओं को समझें और सपोर्ट करें

  • अनूपपुर में अवैध कोयले पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3 टन कोयला जब्त, ड्राइवर गिरफ्तार

    अनूपपुर में अवैध कोयले पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 3 टन कोयला जब्त, ड्राइवर गिरफ्तार


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में भालूमाड़ा पुलिस ने अवैध कोयला तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार रात करीब तीन टन चोरी का कोयला जब्त किया। इस दौरान एक मालवाहक वाहन को भी पकड़ा गया और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से 49 हजार रुपए नकद भी बरामद किए हैं।

    नाकाबंदी कर पकड़ा गया अवैध कोयला

    थाना प्रभारी विपुल शुक्ला के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि एक मालवाहक वाहन में चोरी का कोयला ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ग्राम पयारी नंबर 02 में ठाकुर बाबा के पास नाकाबंदी की। जांच के दौरान पिकअप वाहन (क्रमांक CG 10 BK 0962) को रोका गया, जिसमें अवैध कोयला लोड पाया गया।

    ड्राइवर गिरफ्तार, नकदी भी बरामद

    जब्त किए गए कोयले का वजन लगभग तीन टन है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस ने वाहन के ड्राइवर संतोष कुमार चौधरी (42 वर्ष), निवासी मुंडा, थाना जैतहरी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से 49 हजार रुपए नकद भी बरामद हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि यह राशि पहले बेचे गए कोयले से संबंधित हो सकती है।

    आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज

    पुलिस ने जब्त वाहन को थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। उसे मंगलवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

    पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

    गौरतलब है कि तीन दिन पहले 27 मार्च को भी भालूमाड़ा पुलिस ने एक ऑटो से करीब सात क्विंटल चोरी का कोयला जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह कोयला आसपास के गांवों से गुजरने वाली मालगाड़ियों से चोरी किया जाता है और बाद में ईंट भट्ठों या होटल संचालकों को बेच दिया जाता है।

  • महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा

    महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा


    नई दिल्ली महावीर जयंती के मौके पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर किसी भी तरह की ट्रेडिंग या सेटलमेंट नहीं हुआ। अब निवेशकों के लिए अगला ट्रेडिंग दिन 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) होगा, जब बाजार सामान्य रूप से खुलेगा। हालांकि इस दिन एक खास बात यह रहेगी कि सेटलमेंट हॉलिडे होगा यानी खरीद-बिक्री तो होगी, लेकिन पे-इन और पे-आउट उसी दिन नहीं होगा।

    कमोडिटी मार्केट का हाल
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX):
    सुबह का सेशन बंद, लेकिन शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग होगी
    नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX):
    पूरे दिन बंद रहेगा
    इस हफ्ते कम रहेंगे ट्रेडिंग के दिन

    इस सप्ताह निवेशकों को कम मौके मिलेंगे:

    31 मार्च: महावीर जयंती (बंद)
    3 अप्रैल: गुड फ्राइडे (फिर से बंद)
    यानी पूरे हफ्ते में सिर्फ 3 दिन ही ट्रेडिंग होगी।

    निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

    लगातार छुट्टियों के कारण बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बढ़ सकता है। ऐसे में:

    ट्रेडिंग प्लान पहले से बनाएं
    सेटलमेंट हॉलिडे को ध्यान में रखें
    शॉर्ट-टर्म ट्रेड में सावधानी बरतें

  • दतिया में दिनदहाड़े भाजपा पार्षद की हत्या, मंदिर से लौटते समय बदमाशों ने मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस

    दतिया में दिनदहाड़े भाजपा पार्षद की हत्या, मंदिर से लौटते समय बदमाशों ने मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस


    दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया में मंगलवार सुबह एक भाजपा पार्षद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात उस समय हुई जब पार्षद मंदिर से लौट रहे थे। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटना सुबह करीब 8:30 बजे सेवढ़ा चुंगी चौराहे पर हुई।

    ऐसे हुआ हमला

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वार्ड नंबर 1 के पार्षद कल्लू कुशवाहा रोज की तरह चौराहे पर टहलने पहुंचे थे। उनके साथ दो अन्य लोग भी मौजूद थे। इसी दौरान तीन हमलावर वहां पहुंचे और उन पर फायरिंग कर दी। हमलावरों ने दो राउंड फायर किए। एक गोली कल्लू कुशवाहा के सिर में लगी, जबकि दूसरी पीठ में जा लगी। गोली लगते ही वे मौके पर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

    कई आपराधिक मामले दर्ज थे

    दतिया एसडीओपी आकांक्षा जैन के मुताबिक, कल्लू कुशवाहा पर शराब तस्करी, हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित 15 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में मामला वर्चस्व की रंजिश से जुड़ा माना जा रहा है।

    पहले भी हत्या के मामले में मिली थी सजा

    कल्लू कुशवाहा 2022 में वार्ड नंबर 1 से भाजपा के टिकट पर पार्षद चुने गए थे। 18 फरवरी 2025 को दतिया कोर्ट ने पूर्व पार्षद बाल किशन कुशवाहा की हत्या के मामले में कल्लू सहित छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। वह करीब चार महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे। घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।

    नगर पालिका का बजट सम्मेलन स्थगित

    पार्षद की हत्या के बाद नगर पालिका का बजट सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। बैठक की शुरुआत में सभी पार्षदों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा। नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढेंगुला ने बताया कि बजट पहले ही प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) में पारित हो चुका है, इसलिए इसे स्वतः मंजूर माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के कारण शहर के विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

  • एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच

    एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच


    नई दिल्ली  शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक बड़ा अलर्ट सामने आया है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में कथित ‘पंप-एंड-डंप’ घोटाले के संकेत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। यह मामला शेयर कीमतों में असामान्य तेजी और उसके बाद आई तेज गिरावट से जुड़ा हुआ है।

    60 गुना उछाल के बाद अचानक गिरावट ने बढ़ाए शक
    सेबी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी के शेयरों में बेहद कम समय में 60 गुना से ज्यादा की उछाल आई। इसके बाद कीमतों में अचानक गिरावट देखी गई, जो आमतौर पर ‘पंप-एंड-डंप’ स्कीम का संकेत माना जाता है। इस तरह के मामलों में पहले कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती हैं और फिर ऊंचे स्तर पर शेयर बेचकर मुनाफा कमाया जाता है।

    प्रमोटरों और जुड़े पक्षों की भूमिका पर सवाल
    नियामक को संदेह है कि कंपनी के प्रमोटरों और उनसे जुड़े पक्षों ने आपसी तालमेल से ट्रेडिंग की और फंड ट्रांसफर के जरिए शेयर की कीमतों को ऊपर पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि ऊंचे दामों पर शेयर बेचने वालों में कंपनी के अंदरूनी लोग शामिल हो सकते हैं। प्रमोटर विपिन शर्मा को इस मामले में एक प्रमुख विक्रेता के तौर पर चिन्हित किया गया है।

    आय में असामान्य उछाल ने खड़े किए सवाल
    सेबी ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का राजस्व दो वर्षों में करीब 686 गुना बढ़ा, जो असामान्य माना जा रहा है। खासतौर पर सितंबर 2025 तिमाही में आय 525 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,195.8 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जिसने नियामक की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    भ्रामक जानकारी से निवेशकों को गुमराह करने का शक
    जांचकर्ताओं को यह भी आशंका है कि कंपनी ने अपने वास्तविक कारोबार से ज्यादा मजबूत तस्वीर दिखाने के लिए भ्रामक कॉर्पोरेट खुलासे किए। इसका उद्देश्य शेयर की कीमतों में तेजी लाकर खुदरा निवेशकों को आकर्षित करना हो सकता है।

    खुलासे में लापरवाही भी जांच के दायरे में
    सेबी ने कंपनी पर गंभीर खुलासा संबंधी चूक का आरोप भी लगाया है। खासकर 408 करोड़ रुपए के जीएसटी विवाद जैसी अहम जानकारी समय पर शेयरधारकों को नहीं दी गई। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को या तो देर से बताया गया या पूरी तरह छिपाया गया।

    जांच जारी, हो सकते हैं कड़े एक्शन
    नियामक इस पूरे मामले में ट्रेडिंग पैटर्न, फाइनेंशियल डेटा और संबंधित पक्षों के बीच संबंधों की गहराई से जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कंपनी और संबंधित लोगों पर भारी जुर्माना, बाजार से प्रतिबंध जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

    शेयर में गिरावट, निवेशकों में चिंता
    इस खबर के बाद सोमवार को बीएसई पर एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर करीब 5% गिरकर 48.38 रुपए पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

    क्या होता है ‘पंप-एंड-डंप’?
    ‘पंप-एंड-डंप’ एक धोखाधड़ी वाली रणनीति होती है, जिसमें शेयर की कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है (पंप) और फिर ऊंचे स्तर पर बेचकर (डंप) निवेशकों को नुकसान में छोड़ दिया जाता है।

  • 1 अप्रैल से गूंजेगा स्कूल चलें हम अभियान CM मोहन यादव की मौजूदगी में बच्चों के भविष्य का महाअभियान शुरू

    1 अप्रैल से गूंजेगा स्कूल चलें हम अभियान CM मोहन यादव की मौजूदगी में बच्चों के भविष्य का महाअभियान शुरू

    भोपाल । मध्यप्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत एक बड़े जनजागरूकता अभियान के साथ होने जा रही है। मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल चलें हम अभियान की शुरुआत की जाएगी जो 4 अप्रैल तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना नामांकन बढ़ाना और स्कूलों को एक उत्सव के रूप में सक्रिय करना है। राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल में आयोजित होगा जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव की विशेष उपस्थिति रहेगी।

    यह अभियान प्रदेश की लगभग 92 हजार सरकारी स्कूलों में एक साथ चलाया जाएगा जहां प्रतिदिन अलग अलग गतिविधियां आयोजित होंगी। इन गतिविधियों में प्रवेशोत्सव नामांकन अभियान खेलकूद सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल सभाएं प्रमुख रूप से शामिल रहेंगी। सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल बच्चों में स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ेगा बल्कि अभिभावकों की भागीदारी भी मजबूत होगी।

    अभियान के पहले दिन यानी 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बच्चों का स्वागत किया जाएगा और कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए बाल सभा आयोजित होगी। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। कई स्थानों पर साइकिल और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की जाएगी जिससे छात्रों को स्कूल आने में सुविधा मिल सके।

    दूसरे दिन भविष्य से भेंट कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के सफल और प्रेरणादायी व्यक्तियों को स्कूलों में आमंत्रित किया जाएगा। ये अतिथि बच्चों के साथ संवाद करेंगे और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाएंगे। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करना और उन्हें अपने भविष्य के प्रति जागरूक बनाना है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर बच्चों से सीधे संवाद करें।

    तीसरे दिन सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों के माध्यम से स्कूलों में उत्सव जैसा माहौल बनाया जाएगा। इस दिन अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे स्कूल की गतिविधियों में भाग ले सकें। साथ ही शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उन्हें दी जाएगी। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से अधिक रही है उनके अभिभावकों का सम्मान किया जाएगा जिससे अन्य परिवार भी प्रेरित हो सकें।

    अभियान के अंतिम दिन हार के आगे जीत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें उन विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो किसी कारणवश अपनी कक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं। उनके अभिभावकों को समझाइश दी जाएगी कि बच्चों को निराश न होने दें और उन्हें आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें। इसी दिन स्कूल प्रबंधन समितियों की बैठक भी होगी जिसमें शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    सरकार का मानना है कि स्कूल चलें हम अभियान शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करेगा और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मददगार साबित होगा। यह पहल न केवल नामांकन बढ़ाने का प्रयास है बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।