Author: bharati

  • 23 अक्टूबर को OTT पर रिलीज होंगी 9 नई फिल्में और सीरीज, मनोज बाजपेयी की थ्रिलर से हनुमान सीजन 7 तक

    23 अक्टूबर को OTT पर रिलीज होंगी 9 नई फिल्में और सीरीज, मनोज बाजपेयी की थ्रिलर से हनुमान सीजन 7 तक

    नई दिल्ली । ओटीटी पर फिल्में और वेब सीरीज देखने वालों के लिए 23 अक्टूबर 2026 का शुक्रवार खास रहने वाला है। इस दिन नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, जी5 और जियोहॉटस्टार पर नौ नई फिल्में और सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। इन पेशकशों में क्राइम ड्रामा, सस्पेंस थ्रिलर, कॉमेडी, खेल पर आधारित जीवनी और पौराणिक कहानियों से लेकर प्राकृतिक आपदा पर बनी फिल्म तक शामिल हैं।

    मनोज बाजपेयी की फिल्म गजब रात में एक पुलिस अधिकारी के सामने आने वाली मुश्किलों और उसके फैसले के परिणामों को दिखाया जाएगा। वहीं, सूमो दीदी में महिला पहलवान के संघर्ष की कहानी देखने को मिलेगी। भगवान हनुमान की वीरता और भक्ति पर आधारित एनिमेटेड सीरीज द लीजेंड ऑफ हनुमान का सातवां सीजन भी इसी दिन रिलीज होगा। इसके अलावा चार यार, डोरोथी, सर्वाइविंग हरिकेन ओटिस, सत्तमुम नीधियुम सीजन 2, धूमकेतु और अय्याना माने सीजन 2 भी दर्शकों के लिए उपलब्ध होंगे।

    क्राइम ड्रामा पसंद करने वालों के लिए चार यार अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। इसकी कहानी जय, टोनी, साहिल और समीर नाम के चार मध्यमवर्गीय दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। चारों जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, लेकिन एक गलत फैसला उन्हें अपराध की दुनिया में पहुंचा देता है। इसके बाद उन्हें गैंगस्टरों और पुलिस का सामना करना पड़ता है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली डोरोथी में कीर्ति सुरेश नजर आएंगी।

    1990 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित इस तमिल फिल्म में बचपन के दो दोस्तों की कहानी है। जातिगत भेदभाव, हिंसा, सामाजिक बंदिशों और पुरुषों की दबंग सोच के बीच उनकी दोस्ती कई चुनौतियों से गुजरती है। इसी मंच पर मनोज बाजपेयी की गजब रात भी आएगी। यह सस्पेंस थ्रिलर एक पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो एक रात ऐसी परिस्थिति में फंस जाता है जहां उसे अपने फायदे और कर्तव्य में से किसी एक को चुनना पड़ता है। उसके एक फैसले के बाद घटनाएं लगातार जटिल होती जाती हैं। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरूचा, साकिब सलीम, दिव्या दत्ता और अक्षय ओबेरॉय भी नजर आएंगे।

    जी5 पर रिलीज होने वाली सूमो दीदी भारत की पहली पेशेवर महिला सूमो पहलवान हेतल दवे के जीवन से प्रेरित स्पोर्ट्स बायोपिक है। इसमें एक महिला के पहलवान बनने के सपने, वजन को लेकर होने वाली टिप्पणियों, सामाजिक तानों और भेदभाव के बीच आगे बढ़ने के संघर्ष को दिखाया जाएगा।

    जियोहॉटस्टार पर द लीजेंड ऑफ हनुमान का सातवां सीजन आएगा। इस एनिमेटेड सीरीज में भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और भगवान राम के प्रति समर्पण से जुड़ी पौराणिक कथाएं दिखाई जाती हैं। नेटफ्लिक्स की सर्वाइविंग हरिकेन ओटिस साल 2023 में मैक्सिको के अकापुल्को शहर में आए श्रेणी पांच के तूफान पर आधारित है। फिल्म में तूफान से हुई तबाही और अपनी जान बचाने के लिए लोगों के संघर्ष को दिखाया जाएगा। प्राकृतिक आपदा की घटनाओं में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह एक अलग तरह की पेशकश होगी।

    जी5 पर सत्तमुम नीधियुम सीजन 2 भी 23 अक्टूबर को रिलीज होगा। इस कोर्टरूम ड्रामा में वकील सुंदरमूर्ति की कहानी आगे बढ़ेगी। इस बार उनके सामने ऐसा मामला आता है, जो न्याय के प्रति उनकी ईमानदारी और सिद्धांतों की परीक्षा लेता है। जांच के दौरान भ्रष्टाचार और सच छिपाने की कोशिशों से जुड़े रहस्य सामने आते हैं। नेटफ्लिक्स पर आने वाली मलयालम फिल्म धूमकेतु में कॉमेडी, सस्पेंस और टाइम लूप का मेल है। कहानी 36 वर्षीय कुट्टन की है, जिसकी शादी के दिन नकाबपोश हमलावर उसकी हत्या कर देते हैं और उसकी होने वाली पत्नी शर्मिला का अपहरण कर लेते हैं।

    इसके बाद कुट्टन बार-बार शादी वाले दिन की सुबह जागता है और अपने दोस्त की मदद से घटनाओं को बदलकर शर्मिला को बचाने की कोशिश करता है। वहीं, जी5 पर अय्याना माने सीजन 2 रिलीज होगा। इसमें जाजी अपने पुश्तैनी घर की जिम्मेदारी संभालती है, जबकि उसके रिश्तेदार संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। इसी दौरान उसे अपनी दिवंगत सास नागलंबिके की आवाज सुनाई देती है, जो अपनी मौत को प्राकृतिक नहीं बतातीं। इसके बाद जाजी के सामने परिवार और घर से जुड़े पुराने रहस्य खुलने लगते हैं।

  • शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की कृपा के संकेत, लक्ष्मी नारायण योग से इन 3 राशियों को मिल सकते हैं धन और करियर में लाभ

    शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की कृपा के संकेत, लक्ष्मी नारायण योग से इन 3 राशियों को मिल सकते हैं धन और करियर में लाभ


    नई दिल्ली। शरद पूर्णिमा 2026: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है और उसकी चांदनी को विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस बार शरद पूर्णिमा को लेकर ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास चर्चा हो रही है। पंचांग के अनुसार 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग बनने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बनने का ज्योतिषीय संयोग भी बताया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों का प्रभाव कुछ राशियों के लिए अनुकूल रह सकता है। खासतौर पर वृषभ कन्या और मकर राशि के जातकों को धन करियर और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में अच्छे संकेत मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और इनके आधार पर भविष्य की घटनाओं की निश्चितता नहीं मानी जा सकती।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए शरद पूर्णिमा का यह संयोग आर्थिक मामलों में नई उम्मीदें लेकर आने वाला माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस राशि के लोगों को आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरी करने वालों को कार्यक्षेत्र में कोई अच्छी खबर मिलने की संभावना है जबकि कारोबार से जुड़े लोगों को अपने काम का विस्तार करने के मौके मिल सकते हैं। लंबे समय से बनाई गई योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है। कुछ जातकों को रुके हुए काम पूरे होने से राहत मिल सकती है। निवेश से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि किसी भी वित्तीय फैसले से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम का आकलन करना जरूरी होगा।

    कन्या राशि के जातकों के लिए भी यह समय कई मामलों में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे सकता है। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद बन सकती है। इसके अलावा कमाई बढ़ाने के लिए नए रास्ते तलाशने का अवसर मिल सकता है। जो लोग अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने का लाभ मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में भी आपसी तालमेल बेहतर होने और पुराने मतभेद दूर करने की संभावना जताई जा रही है। माता पिता का सहयोग मिलने से जरूरी काम पूरे करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में इस राशि के लोगों के लिए धैर्य और समझदारी के साथ फैसले लेना महत्वपूर्ण रहेगा।

    मकर राशि के जातकों के लिए शरद पूर्णिमा पर बनने वाले ज्योतिषीय संयोग को करियर और संपत्ति से जुड़े मामलों में अनुकूल माना जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने और कार्यक्षेत्र में सम्मान बढ़ने की उम्मीद हो सकती है। जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या पेशेवर जीवन में बदलाव करना चाहते हैं उन्हें नए अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। मकान या संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी परिस्थितियों का सही आकलन करके आगे बढ़ने का समय हो सकता है। परिवार के साथ संबंध मजबूत करने और घर से जुड़े जरूरी काम पूरे करने के लिहाज से भी सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य और दिनचर्या को लेकर लापरवाही से बचना और नियमित देखभाल करना जरूरी है।

    कुल मिलाकर शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग और लक्ष्मी नारायण राजयोग को लेकर धार्मिक तथा ज्योतिषीय मान्यताओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। वृषभ कन्या और मकर राशि के जातकों के लिए धन करियर और पारिवारिक जीवन से जुड़े अच्छे संकेत बताए जा रहे हैं। इस दिन लोग चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना भी करते हैं। हालांकि किसी भी राशि के लिए अमीर बनने या निश्चित रूप से सफलता मिलने की गारंटी नहीं दी जा सकती। जीवन में आर्थिक मजबूती और तरक्की के लिए मेहनत सही योजना और सोच समझकर लिए गए फैसले सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

  • घर की सुख शांति पर पड़ सकता है असर! वास्तु के अनुसार इन 4 चीजों को मुफ्त में लेने से बचते हैं लोग

    घर की सुख शांति पर पड़ सकता है असर! वास्तु के अनुसार इन 4 चीजों को मुफ्त में लेने से बचते हैं लोग


    नई दिल्ली। वास्तु टिप्स: भारतीय परंपराओं में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व माना जाता है। घर की बनावट से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीजों तक को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसी कड़ी में नमक सरसों का तेल लोहा और रुमाल जैसी चार चीजों को मुफ्त में लेने से बचने की सलाह भी दी जाती है। वास्तु और ज्योतिष से जुड़ी मान्यताओं में इन वस्तुओं का संबंध घर की सुख शांति और व्यक्ति के जीवन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इन धारणाओं का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और इन्हें धार्मिक तथा पारंपरिक विश्वास के रूप में ही समझना चाहिए।

    नमक हर घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीज है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ ही नमक को कई पारंपरिक मान्यताओं में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु से जुड़ी कुछ धारणाओं के अनुसार नमक को मुफ्त में लेने से बचना चाहिए। माना जाता है कि नमक का लेनदेन सोच समझकर करना बेहतर होता है। यही वजह है कि कुछ लोग जरूरत पड़ने पर भी नमक खरीदकर इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। हालांकि किसी परिचित या पड़ोसी से जरूरत के समय नमक लेने से घर में अशांति आती है ऐसी धारणा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    सरसों के तेल को लेकर भी कई धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। भारतीय घरों में इसका इस्तेमाल भोजन बनाने के अलावा पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। ज्योतिषीय परंपराओं में सरसों के तेल का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसी कारण कुछ लोग सरसों का तेल मुफ्त में लेने या देने से बचने की सलाह देते हैं। मान्यता है कि इस वस्तु का लेनदेन करते समय परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि तेल मुफ्त में लेने से दुर्भाग्य आता है या जीवन में परेशानियां बढ़ती हैं इस बात का कोई प्रमाण नहीं है।

    लोहा भी उन वस्तुओं में शामिल है जिन्हें लेकर वास्तु और ज्योतिष में अलग अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं। घर के निर्माण से लेकर औजारों और घरेलू उपकरणों तक में लोहे का व्यापक इस्तेमाल होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में लोहे को शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है। इसी वजह से कुछ परंपराओं में लोहे की वस्तु के लेनदेन को लेकर सावधानी बरतने की बात कही जाती है। हालांकि व्यावहारिक जीवन में किसी से लोहे की कोई वस्तु मुफ्त में लेने से दुर्भाग्य आता है ऐसा साबित नहीं हुआ है।

    रुमाल रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली निजी वस्तु है। कुछ पारंपरिक मान्यताओं में किसी दूसरे व्यक्ति से रुमाल मुफ्त में लेने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे भावनात्मक जुड़ाव और व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ी धारणाएं बताई जाती हैं। कुछ लोग रुमाल को निजी इस्तेमाल की वस्तु मानते हुए इसे खरीदकर इस्तेमाल करना बेहतर समझते हैं। लेकिन किसी से उपहार में रुमाल लेना अपने आप में अशुभ नहीं है। इस मामले में व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ सफाई का ध्यान रखना अधिक जरूरी है।

    कुल मिलाकर वास्तु शास्त्र में नमक सरसों के तेल लोहे और रुमाल को लेकर प्रचलित मान्यताएं सदियों से चली आ रही परंपराओं का हिस्सा हैं। इन्हें मानना या न मानना व्यक्तिगत आस्था का विषय है। इन चीजों को मुफ्त में लेने से घर की सुख शांति प्रभावित होती है इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए ऐसी मान्यताओं के कारण अनावश्यक डर पालने के बजाय व्यावहारिक सोच अपनाना चाहिए। जरूरत के समय किसी की मदद लेना और दूसरों की सहायता करना सामान्य सामाजिक व्यवहार है। आपसी सम्मान स्वच्छता और समझदारी को प्राथमिकता देना ही बेहतर है।

  • मैक्रों का ट्रंप-नेतन्याहू पर हमला, बोले- फ्रांस की कीमत पर चला रहे सियासी अभियान; क्या है पूरा विवाद?

    मैक्रों का ट्रंप-नेतन्याहू पर हमला, बोले- फ्रांस की कीमत पर चला रहे सियासी अभियान; क्या है पूरा विवाद?


    दोहा।
    फ्रांस में हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों पर कड़ी नाराजगी जताई है। मैक्रों ने आरोप लगाया कि विदेशी नेता फ्रांस के हालात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार फर्जी तस्वीरों के जरिए गलत सूचनाएं फैलाए जाने पर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, ट्रंप ने फ्रांस में हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया, जबकि नेतन्याहू ने इसे ‘चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण’ बताते हुए फ्रांसीसी सरकार की आलोचना की। घटनाओं के बाद फ्रांस के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है और कुछ स्थानों पर कर्फ्यू भी लगाया गया है।

    मैक्रों ने विदेशी नेताओं को क्या कहा?

    फ्रांस में हालिया हिंसा को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की टिप्पणियों के बीच मैक्रों ने विदेशी नेताओं की आलोचना की। बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ नेता फ्रांस की कीमत पर अपना राजनीतिक अभियान चला रहे हैं।

    मैक्रों ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अटलांटिक के इस पार और उस पार, दोनों तरफ के नेता चुनावी अभियान की मुद्रा में हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोग फ्रांस की कीमत पर अपना अभियान चलाते हैं। इनमें ऐसे नेता भी हैं, जो यहां इस क्षेत्र में या अटलांटिक की दूसरी तरफ अपने राजनीतिक अभियान में जुटे हैं।”

    मैक्रों तीन दिवसीय कतर और खाड़ी क्षेत्र की यात्रा पर हैं। उनकी इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य फ्रांस में जीवनयापन की बढ़ती लागत के संकट के बीच देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करना भी है।

    ट्रंप ने फ्रांस के हालात के लिए किसे ठहराया जिम्मेदार?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा। ट्रंप ने फ्रांस की सीमाएं बंद नहीं करने को लेकर मैक्रों की आलोचना भी की।

    व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, उसका संबंध स्कूलों या किसी दूसरी समस्या से नहीं, बल्कि आव्रजन से है। उन्होंने मैक्रों को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि दुनिया भर से लोगों को फ्रांस में आने देने का फैसला गलत था।

    ट्रंप ने अमेरिकी मतदाताओं को चेतावनी देते हुए फ्रांस के हालात की तुलना अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित जीत के परिणामों से भी की। उनके इन बयानों ने फ्रांस में आव्रजन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

    एआई से बनी फर्जी तस्वीरों पर मैक्रों ने जताई नाराजगी

    मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं के पीछे विदेशी हस्तक्षेप के स्पष्ट संकेत नहीं हैं, लेकिन घटनाओं के बाद गलत सूचनाएं फैलाने के लिए विदेशी स्तर पर हेरफेर किया गया। उनके मुताबिक, इसके चलते कई विदेशी नेताओं की ओर से गलत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां सामने आईं।

    उन्होंने एआई की मदद से तैयार की गई उन तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें फ्रांस में ऐसी घटनाएं दिखाई गईं, जो वास्तव में हुई ही नहीं थीं। मैक्रों ने कहा कि कुछ लोगों ने फ्रांस में प्रवासियों और इस्लामवादियों की भारी भीड़ के घुस आने के दावे किए।

    जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या उनकी टिप्पणी सीधे ट्रंप के लिए थी, तो मैक्रों ने जवाब दिया, “हां।” उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा परिस्थितियां बताती हैं कि फ्रांस से कौन प्यार करता है और कौन नहीं। उनके अनुसार, जो लोग इस समय उनके देश के बारे में बुरा बोल रहे हैं, वे फ्रांस से प्यार नहीं करते।

    नेतन्याहू ने फ्रांस पर क्या आरोप लगाए?

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को फ्रांस के हालात को ‘चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण’ बताया। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, फ्रेंच भाषा के समाचार चैनल आई24न्यूज को दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने फ्रांसीसी अधिकारियों पर स्थिति का पहले से आकलन करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

    नेतन्याहू ने कहा, “उन्होंने समय रहते तैयारी नहीं की। उन्होंने बस हार मान ली। वे चरमपंथी इस्लाम के आक्रमण के आगे झुक गए।”

    फ्रांस को सलाह देने के सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि उसे चरमपंथियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनानी चाहिए। उनके इस बयान ने फ्रांस में सुरक्षा, आव्रजन और धार्मिक चरमपंथ को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया।

    फ्रांस में कैसे हैं हालात?

    सप्ताहांत में फ्रांस के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। अधिकांश मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शनिवार को लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और कुछ क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया।

    बोर्दो शहर में अकेले बाहर निकलने वाले नाबालिगों के लिए एक सप्ताह का रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाया गया है। गिरोंद और नोवेल-अकितेन की प्रीफेक्ट सोफी ब्रोका ने सोमवार को इस संबंध में आदेश घोषित किया था। यह आदेश मंगलवार से 26 अक्टूबर की सुबह तक प्रभावी रहेगा।

    आदेश के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक माता-पिता या कानूनी अभिभावक के बिना सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रह सकेंगे।

    फ्रांस की घटनाओं को लेकर अब केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आव्रजन, धार्मिक चरमपंथ, सोशल मीडिया पर गलत सूचना और विदेशी नेताओं की राजनीतिक बयानबाजी भी विवाद के केंद्र में है। मैक्रों ने जहां फ्रांस के आंतरिक मामलों पर विदेशी नेताओं की टिप्पणियों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताया है, वहीं ट्रंप और नेतन्याहू ने फ्रांसीसी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

  • 24 अक्टूबर से इन 3 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, बुध की उल्टी चाल से नौकरी कारोबार और रिश्तों में आएंगे उतार-चढ़ाव

    24 अक्टूबर से इन 3 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, बुध की उल्टी चाल से नौकरी कारोबार और रिश्तों में आएंगे उतार-चढ़ाव


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनके राशि परिवर्तन को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि ग्रहों की स्थिति में बदलाव का प्रभाव व्यक्ति के करियर कारोबार आर्थिक स्थिति और निजी जीवन पर पड़ सकता है। इसी क्रम में 24 अक्टूबर 2026 को बुध ग्रह तुला राशि में वक्री होने जा रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार बुध दोपहर 12 बजकर 14 मिनट पर वक्री अवस्था में प्रवेश करेंगे। बुध को बुद्धि संवाद तर्कशक्ति व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। ऐसे में उनकी वक्री चाल के दौरान कुछ राशियों को अपने कामकाज और रिश्तों के मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कर्क कन्या और धनु राशि के जातकों को इस अवधि में विशेष सावधानी रखने की जरूरत हो सकती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए बुध की वक्री चाल कुछ चुनौतियां लेकर आ सकती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध इस राशि के तृतीय और द्वादश भाव के स्वामी हैं। ऐसे में इस अवधि में कामकाज से जुड़ी योजनाओं में देरी होने या पहले से तय कार्यों में रुकावट आने की आशंका जताई जा रही है। नौकरी करने वाले लोगों को किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पूरा करने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। इसलिए जरूरी है कि काम को लेकर पहले से योजना बनाकर चलें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। स्वास्थ्य के मामले में भी लापरवाही से बचना बेहतर रहेगा। प्रेम संबंधों और विवाह से जुड़े मामलों में बातचीत के दौरान धैर्य बनाए रखने की जरूरत हो सकती है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझना फायदेमंद रहेगा।

    कन्या राशि के जातकों के लिए भी बुध की वक्री अवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध कन्या राशि के लग्न और दशम भाव के स्वामी हैं। इस कारण उनकी चाल में बदलाव का संबंध व्यक्तित्व कार्यक्षेत्र और पेशेवर जिम्मेदारियों से जोड़ा जाता है। इस अवधि में नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव बढ़ सकता है और कुछ योजनाओं को पूरा करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों या अधिकारियों के साथ मतभेद होने की आशंका भी जताई गई है। कारोबार करने वाले जातकों को अपने फैसलों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। परिवार में किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति बनने पर संयम से काम लेना जरूरी होगा। अधूरे कामों को प्राथमिकता देना और बिना पूरी जानकारी के कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना समझदारी होगी।

    धनु राशि के जातकों को भी बुध की वक्री चाल के दौरान कार्यक्षेत्र और निजी संबंधों में सावधानी रखने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध इस राशि के सप्तम और दशम भाव के स्वामी हैं। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ लोगों के लिए स्थानांतरण या जिम्मेदारियों में बदलाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि ऐसे बदलाव निश्चित रूप से होंगे ऐसा नहीं कहा जा सकता। व्यापार करने वाले लोगों को साझेदारी से जुड़े मामलों में विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। किसी समझौते या व्यावसायिक सौदे को अंतिम रूप देने से पहले सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी होगा। निजी जीवन में बातचीत के दौरान शब्दों का चयन सोच समझकर करना बेहतर रहेगा। मित्रों और परिचितों पर भरोसा करते समय भी तथ्यों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कुल मिलाकर 24 अक्टूबर से शुरू होने वाली बुध की वक्री अवस्था को ज्योतिषीय दृष्टि से आत्ममंथन और सावधानी का समय माना जा रहा है। इस दौरान कर्क कन्या और धनु राशि के जातकों को अपने कामकाज की समीक्षा करने संवाद में स्पष्टता रखने और महत्वपूर्ण फैसलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ग्रहों की चाल से जुड़े ये प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक जीवन में सफलता और चुनौतियां व्यक्ति की परिस्थितियों और उसके निर्णयों पर भी निर्भर करती हैं।

  • 12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारियों-मजदूरों की मदद से उतरेगा रिएक्टर, 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदी है मशीन

    12 क्रेन और 250 से ज्यादा कर्मचारियों-मजदूरों की मदद से उतरेगा रिएक्टर, 308 पहियों वाले ट्रेलर पर लदी है मशीन

    लखीमपुर। बेल्जियम से भारत लाया गया विशालकाय रिएक्टर अब अपने अंतिम पड़ाव लखीमपुर खीरी पहुंच गया है। कुंभी स्थित बलरामपुर चीनी मिल परिसर में इसकी स्थापना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 308 पहियों वाले विशाल हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लदी इस मशीन को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इतने भारी-भरकम रिएक्टर को ट्रेलर से उतारकर निर्धारित स्थान पर कैसे स्थापित किया जाएगा।

    रिएक्टर को उतारने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसके लिए 12 क्रेनों की मदद ली जाएगी। साथ ही कर्मचारियों और मजदूरों की बड़ी टीम तैनात रहेगी। जिस मशीन को भारत लाने के लिए कई फुट ओवरब्रिज हटाने पड़े और नए रास्ते तैयार करने पड़े, उसे उतारने और स्थापित करने की प्रक्रिया भी बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

    बेल्जियम से आया करीब 110 फुट लंबा और 26 फुट चौड़ा यह रिएक्टर बुधवार सुबह खीरी जिले में पहुंचा। बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए महत्वपूर्ण यह मशीन करीब 160 दिनों के सफर और तीन राज्यों के दर्जनों जिलों से गुजरने के बाद अपने गंतव्य तक पहुंची है। इसे ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से 15 मई को रवाना किया गया था। वहां से यह ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए चंदौली के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचा और फिर विभिन्न जिलों से गुजरकर लखीमपुर खीरी आया।

    12 क्रेन मिलकर उठाएंगी भारी-भरकम रिएक्टर

    रिएक्टर को ट्रेलर से उतारने और निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने विशेष व्यवस्था की है। इस काम में 12 क्रेनें लगाई जाएंगी। इनके संचालन और पूरी प्रक्रिया में 60 कर्मचारियों तथा 150 मजदूरों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा करीब 40 मजदूर ट्रेलर के साथ चल रहे हैं। इस तरह उतारने और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में बड़ी संख्या में कर्मचारी-मजदूर जुटे हुए हैं।

    प्रबंधन के मुताबिक, रिएक्टर को उतारने की प्रक्रिया के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। अनुमान है कि 23 या 24 अक्टूबर को ट्रेलर चीनी मिल परिसर में दाखिल हो जाएगा। इसके बाद मशीन को उतारने और स्थापित करने का काम आगे बढ़ेगा।

    ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर भी रही चर्चा

    रिएक्टर के परिवहन के दौरान ट्रेलर के पहियों की संख्या को लेकर अलग-अलग सूचनाएं सामने आती रहीं। शुरुआत में 308 पहियों वाले ट्रेलर की चर्चा हुई। बाद में खबरें आईं कि झारखंड तक पहुंचने के दौरान पहियों की संख्या 308 थी, जिसके बाद करीब 50 पहिए कम कर दिए गए। मोड़ पर ट्रेलर को घुमाने में आ रही दिक्कतों के चलते पहियों की संख्या घटाए जाने की बात भी सामने आई, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

    इन चर्चाओं के बावजूद विशालकाय ट्रेलर और उस पर लदे रिएक्टर को देखने के लिए लोगों का उत्साह बना रहा। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए।

    बुधवार को धौरहरा तहसील के सिसैया चौराहे से जिले में प्रवेश करने के बाद ट्रेलर को राष्ट्रीय राजमार्ग-730ए पर छाउछ में खड़ा किया गया। यहां से इसे गुरुवार सुबह कुंभी चीनी मिल पहुंचाया जाना था।

    ट्रेलर के साथ चल रही है विशेष टीम

    रिएक्टर को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तीन सहायक ट्रक, तीन एस्कॉर्ट वाहन और करीब 40 कर्मचारियों की टीम साथ चल रही है। रास्ते में बिजली के लटकते तारों को उठाने और पेड़ों की डालियां हटाने के लिए कर्मचारियों को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

    सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस, सदर कोतवाली पुलिस, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और बिजली विभाग की टीमों ने आपसी समन्वय के साथ काम किया। रिएक्टर के आकार और ट्रेलर की लंबाई-चौड़ाई को देखते हुए रास्ते में कई तरह की व्यवस्थाएं करनी पड़ीं।

    बलरामपुर शुगर यूनिट, कुंभी के महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि यह मशीन ‘साइक्लाइजेशन रिएक्टर’ है। इसमें लैक्टिक एसिड से पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) तैयार किया जाएगा। पीएलए का इस्तेमाल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने में होता है।

    3,080 करोड़ रुपये से बन रहा देश का पहला औद्योगिक बायोप्लास्टिक प्लांट

    लखीमपुर खीरी जिले की कुंभी चीनी मिल में देश का पहला औद्योगिक स्तर का पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) यानी बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 3,080 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।

    इसी परियोजना के लिए बेल्जियम से रिएक्टर मंगाया गया था, जो पहले ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा और फिर सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी लाया गया। मिल अधिकारियों के मुताबिक, मशीन के पहुंचने का लंबे समय से इंतजार था। इसके पहुंचने के बाद स्थापना संबंधी काम शुरू किया जाएगा।

    अधिकारियों ने बताया कि रिएक्टर को जल्द स्थापित करने की योजना है और नवंबर में प्लांट चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्लांट शुरू होने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।

  • कादर खान जयंती पर याद आए पुराने दिन, कब्रिस्तान में करते थे एक्टिंग की प्रैक्टिस, गोविंदा के साथ कॉमेडी से जीते करोड़ों दिल

    कादर खान जयंती पर याद आए पुराने दिन, कब्रिस्तान में करते थे एक्टिंग की प्रैक्टिस, गोविंदा के साथ कॉमेडी से जीते करोड़ों दिल


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में जब भी शानदार कॉमेडी और दमदार संवाद लेखन की बात होती है तो दिग्गज अभिनेता कादर खान का नाम सबसे पहले याद आने वाले कलाकारों में शामिल होता है। उन्होंने अपने अभिनय से कभी दर्शकों को खूब हंसाया तो कभी खलनायक बनकर पर्दे पर खौफ पैदा किया। उनकी लेखनी ने भी हिंदी फिल्मों को ऐसे संवाद दिए जो आज तक दर्शकों के जेहन में बसे हुए हैं। 22 अक्टूबर 1937 को अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे कादर खान की 22 अक्टूबर 2026 को 89वीं जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर उनकी जिंदगी से जुड़े उन दिलचस्प किस्सों को याद किया जा रहा है जो बताते हैं कि किस तरह संघर्षों के बीच उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

    कादर खान का बचपन आर्थिक तंगी के बीच बीता था। उनके पिता अब्दुल रहमान खान अरबी और इस्लामी साहित्य के विद्वान थे जबकि उनकी मां का नाम इकबाल बेगम था। परिवार में पहले तीन बच्चों की कम उम्र में मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी मां को लगने लगा कि काबुल का माहौल उनके बच्चों के लिए ठीक नहीं है। इसी वजह से परिवार ने अफगानिस्तान छोड़कर मुंबई आने का फैसला किया। मुंबई में उनका परिवार कमाठीपुरा इलाके की एक छोटी सी चॉल में रहने लगा। यहां जिंदगी आसान नहीं थी और कई बार परिवार को खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ता था। इन मुश्किल परिस्थितियों ने कादर खान को कम उम्र में ही जिंदगी की हकीकत से रूबरू करा दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि कादर खान केवल अभिनय के क्षेत्र में ही प्रतिभाशाली नहीं थे बल्कि पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और बाद में सिद्दिकी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर के रूप में काम किया। एक ओर वह विद्यार्थियों को पढ़ाते थे तो दूसरी ओर उनके भीतर अभिनय और नाटक के प्रति जुनून लगातार बढ़ रहा था। यही जुनून आगे चलकर उन्हें फिल्मी दुनिया तक ले गया।

    कादर खान के शुरुआती दिनों का एक चर्चित किस्सा उनके अभिनय अभ्यास से जुड़ा है। बताया जाता है कि वह दक्षिण मुंबई के एक कब्रिस्तान में जाकर अकेले संवाद बोलने की प्रैक्टिस किया करते थे। वहां उन्हें कोई परेशान नहीं करता था और वह अपने अंदाज में अभिनय का अभ्यास कर सकते थे। इसी दौरान अभिनेता अशरफ खान की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने कादर खान की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें नाटक में काम करने का अवसर मिला। यहीं से उनके रंगमंच के सफर को नई दिशा मिली।

    फिल्मी दुनिया में कादर खान को शुरुआती पहचान एक संवाद लेखक के रूप में मिली। वर्ष 1972 में रिलीज हुई फिल्म जवानी दीवानी के संवाद लिखने के लिए उन्हें 1500 रुपये मिले थे। उस समय उनकी शिक्षक के रूप में मासिक तनख्वाह करीब 400 रुपये थी। इसके बाद फिल्मों में उनकी मांग बढ़ने लगी। फिल्म निर्माता मनमोहन देसाई ने उन्हें फिल्म रोटी के संवाद लिखने का मौका दिया जिसके लिए उन्हें 1 लाख 21 हजार रुपये की फीस मिली। यह उनके करियर का बड़ा पड़ाव साबित हुआ। वर्ष 1973 में फिल्म दाग के जरिए उन्होंने बतौर अभिनेता भी हिंदी सिनेमा में कदम रखा।

    कादर खान ने अमिताभ बच्चन की कई चर्चित फिल्मों के संवाद लिखे। अमर अकबर एंथनी मुकद्दर का सिकंदर लावारिस शराबी कुली और अग्निपथ जैसी फिल्मों में उनके लेखन का प्रभाव देखने को मिला। गंभीर बातों को सरल और प्रभावशाली शब्दों में कहने की उनकी कला ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। अपने करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।

    1990 के दशक में गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय हुई। कुली नंबर 1 हीरो नंबर 1 दूल्हे राजा आंखें और साजन चले ससुराल जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उनके योगदान के लिए उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार मिले और 2019 में मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 31 दिसंबर 2018 को कनाडा के टोरंटो में 81 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। आज भी उनके अभिनय और संवादों के जरिए उनकी विरासत हिंदी सिनेमा में जीवित है।

  • अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी एंगल को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभिनेत्री उर्मिला सनावर का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती है। इसके लिए अदालत में आवेदन दिया गया है और अब उनकी सहमति की पुष्टि के लिए उन्हें 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच में कोई नई जानकारी सामने आएगी। हालांकि अभी किसी नए खुलासे की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी ने 21 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के घर पहुंची और उन्हें अदालत में पेश होने का नोटिस सौंपा। उन्हें 23 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि वह पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं।

    सीबीआई की ओर से इन परीक्षणों की मांग ऐसे समय की गई है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। इन ऑडियो के माध्यम से कुछ दावे किए गए थे जिनकी सत्यता और मामले से संबंधित पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम कथित आरोपों में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

    सीबीआई इस मामले में पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति चाहती है। पॉलीग्राफ परीक्षण के दौरान व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया जाता है जबकि नार्को परीक्षण में विशेष दवाओं के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं की अपनी सीमाएं हैं और इनके नतीजों को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसी को अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इनका मूल्यांकन करना होगा।

    इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी भी परीक्षण के लिए सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक होनी चाहिए। अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि उर्मिला सनावर की सहमति किसी दबाव धमकी लालच या अनुचित प्रभाव के कारण न हो। रिपोर्ट के अनुसार वह पहले ही परीक्षण कराने के लिए सहमति देने की बात कह चुकी हैं। अब अदालत में उनकी इच्छा की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड में संवेदनशील और चर्चित मामला रहा है। कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठते सवालों के कारण इस प्रकरण पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है। सीबीआई की जांच और उर्मिला सनावर के प्रस्तावित परीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन परीक्षणों से किसी कथित वीआईपी का नाम सामने आएगा या मामले में कोई नया मोड़ आएगा। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

  • यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की एक मतदाता सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल सूची में कुछ ऐसे नाम और पिता के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है जिन्हें देखकर लोग हैरान हैं। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने जांच के निर्देश दिए हैं। झांसी के मंडलायुक्त से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है और गुरुवार दोपहर तक रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। शुक्रवार 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उठे इन सवालों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूची में राम ने यादव को मारा और मूर्खचंद जैसे नामों का उल्लेख किया जा रहा है। कुछ प्रविष्टियों में मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम असामान्य बताए गए हैं। सूची में नरेंद्र यादव के पिता का नाम बीकाम लिखे होने और कुछ अन्य मतदाताओं के नामों में भी गड़बड़ी होने का दावा किया गया है। हालांकि इन वायरल प्रविष्टियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ये वास्तविक मतदाता सूची की त्रुटियां हैं या किसी अन्य कारण से ऐसे नाम दर्ज दिखाई दे रहे हैं। निर्वाचन आयोग की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

    निर्वाचन आयोग ने आधी रात के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अजीब नाम होने की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। इसके बाद झांसी के मंडलायुक्त को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। मंडलायुक्त इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी हैं। मतदान से कुछ घंटे पहले मामला सामने आने के कारण जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस विवाद के बीच भाजपा ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव अधिकारियों से शिकायत की है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सूची में बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम शामिल हैं। भाजपा के चुनाव आयोग संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक अखिलेश कुमार अवस्थी ने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली स्नातक नेताओं ने एक ही व्यक्ति के नाम को दो से तीन बार दर्ज कराया है। पार्टी की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ऐसे नामों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

    भाजपा नेताओं के शिकायती पत्र के मुताबिक मतदाता सूची में कुल 4397 डुप्लीकेट मतदाता होने का दावा किया गया है। इनमें प्रयागराज में 3163 नाम होने की बात कही गई है। इसके अलावा कौशांबी में 320 जालौन में 179 झांसी में 178 बांदा में 140 फतेहपुर में 139 ललितपुर में 109 हमीरपुर में 81 चित्रकूट में 68 और महोबा में 20 डुप्लीकेट नाम होने का आरोप लगाया गया है। इन आंकड़ों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मतदाता सूची में उम्र और पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। भाजपा का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल हैं जिनकी जन्मतिथि के आधार पर उनकी पात्रता संदिग्ध है। स्नातक निर्वाचन में मतदान के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है तो वे निर्धारित मतदान केंद्र पर ही वोट डालें। एक से अधिक स्थानों पर मतदान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग की जांच रिपोर्ट पर है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि वायरल सूची में दिखाई गई गड़बड़ियां कितनी वास्तविक हैं और डुप्लीकेट नामों को लेकर किए गए दावों में कितनी सच्चाई है। मतदान से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

  • शबाना आजमी बोलीं- मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती, धर्म और नास्तिकता पर जावेद अख्तर से होती है बहस

    शबाना आजमी बोलीं- मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती, धर्म और नास्तिकता पर जावेद अख्तर से होती है बहस

    नई दिल्ली । अभिनेत्री शबाना आजमी ने धर्म, धार्मिक मान्यताओं और नास्तिकता को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम हैं, लेकिन नमाज नहीं पढ़तीं और धर्म के साथ उनका कोई खास जुड़ाव नहीं है। शबाना ने अपने पति और मशहूर गीतकार-लेखक जावेद अख्तर की नास्तिक सोच पर भी बात की। उनके मुताबिक, दोनों के बीच धर्म और धार्मिक अभिव्यक्ति को लेकर बातचीत होती रहती है।

    शबाना का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को धर्म का पालन करने या प्रार्थना करने से सुकून मिलता है, तो उसे ऐसा करने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म किसी व्यक्ति का निजी मामला है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अपने विचार रखते हुए अभिनेत्री ने परिवार में मिले संस्कारों, बचपन के माहौल और धार्मिक परंपराओं के प्रति अपने नजरिये के बारे में भी बताया।

    शबाना ने एक बातचीत के दौरान अपने बचपन और परिवार में धर्म की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता और मशहूर शायर कैफी आजमी नास्तिक थे, जबकि उनकी मां शौकत आजमी कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन करती थीं। हालांकि, उनकी मां भी इन परंपराओं को लेकर बहुत अधिक गंभीर नहीं रहती थीं। शबाना के अनुसार, उनके घर में धार्मिक रीति-रिवाजों को जीवन का अनिवार्य हिस्सा नहीं बनाया गया था।

    यही वजह रही कि बचपन से ही धर्म और भगवान को लेकर उनके मन में कोई विशेष जिज्ञासा नहीं रही। अभिनेत्री ने बताया कि वह कभी-कभी बातचीत के दौरान माशाल्लाह और इंशाल्लाह जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। उनके लिए ये शब्द उनकी भाषा और बोलचाल का हिस्सा हैं। हालांकि, उनके पति जावेद अख्तर इन शब्दों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हैं और उनसे पूछते हैं कि वह ऐसा क्यों कहती हैं। शबाना के मुताबिक, वह इन शब्दों को किसी धार्मिक मान्यता के कारण नहीं, बल्कि अपनी भाषा की सहज अभिव्यक्ति के रूप में इस्तेमाल करती हैं।

    जावेद अख्तर की नास्तिक सोच के बारे में बात करते हुए शबाना ने उन्हें कट्टर नास्तिक बताया। उन्होंने कहा कि वह कई बार जावेद से पूछती हैं कि वह अपने धार्मिक विचारों को इतनी मुखरता से क्यों व्यक्त करते हैं। शबाना का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को धर्म का पालन करने से मानसिक सुकून मिलता है, तो उसे अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की जरूरत क्यों होनी चाहिए।

    शबाना के अनुसार, इस पर जावेद अख्तर का जवाब होता है कि धार्मिक लोग भी उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। जावेद का तर्क है कि नास्तिक होने के नाते उन्हें भी बुरा महसूस करने का अधिकार है। इस तरह दोनों के बीच धर्म और नास्तिकता को लेकर अलग-अलग नजरिये सामने आते हैं। शबाना ने बातचीत में इन मतभेदों का उल्लेख करते हुए बताया कि धार्मिक विश्वासों के प्रति सम्मान और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता, दोनों महत्वपूर्ण विषय हैं।

    अपने धार्मिक जुड़ाव के बारे में शबाना ने स्पष्ट कहा कि वह मुस्लिम हैं और उन्हें ईद, उर्दू भाषा तथा खान-पान पसंद है। इसके बावजूद वह नमाज नहीं पढ़तीं और धर्म को अपने जीवन का विशेष हिस्सा नहीं मानतीं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं करने का अर्थ यह नहीं है कि वह दूसरों की आस्था को नहीं समझतीं। अभिनेत्री के अनुसार, धर्म हर व्यक्ति का निजी मामला है। यदि किसी को प्रार्थना करने या धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से खुशी और सुकून मिलता है, तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

    इसी आधार पर उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के व्यक्तिगत धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। शबाना के बयान में अपनी धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत जीवनशैली के बीच अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने अपने और जावेद अख्तर के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि धार्मिक आस्था रखने और नास्तिक होने वाले लोगों, दोनों की भावनाओं को समझना जरूरी है। उनके विचारों का मुख्य आधार यह है कि व्यक्ति को अपनी मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और दूसरों की पसंद का भी सम्मान किया जाना चाहिए।