Author: bharati

  • तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द, केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का आरोप लगाकर सरकार पर साधा निशाना

    तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द, केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने का आरोप लगाकर सरकार पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा रद्द हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया है कि केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिलने के कारण मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल की अमेरिका यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। रेवंत रेड्डी फिलहाल लंदन के दौरे पर हैं और अमेरिका की यात्रा के बजाय लंदन से सीधे हैदराबाद लौट सकते हैं।

    मुख्यमंत्री का विदेश दौरा राज्य में निवेश, शिक्षा और विभिन्न संस्थानों के साथ संभावित सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लंदन के बाद रेवंत रेड्डी को 24 अगस्त को अमेरिका पहुंचना था। वहां कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित थीं। दौरे में तेलंगाना राइजिंग टीम के अधिकारी भी शामिल थे।

    जानकारी के मुताबिक, रेवंत रेड्डी 20 अगस्त को लंदन पहुंचे थे। लंदन प्रवास के दौरान उनके ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और लंदन बिजनेस स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने का कार्यक्रम था। इन मुलाकातों के जरिए शिक्षा, कौशल, निवेश और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत की योजना बनाई गई थी।

    लंदन के बाद अमेरिका में भी मुख्यमंत्री के कई कार्यक्रम निर्धारित थे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी एमआईटी में जाने की योजना थी। इसके अलावा बोस्टन में 25 अगस्त को एक टीम के साथ बातचीत और 26 अगस्त को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित था।

    मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, विदेश मंत्रालय से आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण अमेरिका की यात्रा रद्द करनी पड़ी। कार्यालय ने कहा कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना राइजिंग प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका जाने की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।

    अमेरिका दौरे के दौरान जिन संस्थानों और प्रतिनिधियों के साथ बैठकें प्रस्तावित थीं, उनमें से कुछ कार्यक्रमों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय आगे की तारीखों के लिए निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में कार्यक्रमों को पुनर्निर्धारित करने के लिए कहा गया है।

    मुख्यमंत्री के इस दौरे की पृष्ठभूमि में तेलंगाना में निवेश आकर्षित करने और राज्य के विकास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को मजबूत करने की कोशिश भी देखी जा रही थी। प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा के दौरान उद्योग, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद की संभावना थी।

    रेवंत रेड्डी 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे। इसके बाद वह 20 अगस्त को लंदन के लिए रवाना हुए। पहले तय कार्यक्रम के अनुसार उनकी विदेश यात्रा के बाद 30 अगस्त को हैदराबाद लौटने की योजना थी। हालांकि अमेरिका दौरा रद्द होने के बाद अब उनकी वापसी की समय-सारणी में बदलाव हो सकता है।

    अमेरिकी यात्रा को लेकर अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा केंद्र और तेलंगाना सरकार के बीच राजनीतिक मतभेदों को लेकर भी चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अनुमति नहीं मिलने की बात कही है, जबकि इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार के आगामी विदेश संपर्क कार्यक्रमों में भी बदलाव की संभावना बनी हुई है।

  • रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान

    रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान


    कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले मानवेंद्र प्रताप सिंह कटनी में आयकर विभाग में तैनात थे और विभागीय गेस्ट हाउस में रह रहे थे। गुरुवार रात वह अपने कमरे में सोने गए थे लेकिन शुक्रवार सुबह काफी देर तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई। जब सरकारी ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा और कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भीतर से कोई जवाब नहीं मिला तो गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। वहां अधिकारी बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिले।

    घटना माधवनगर थाना क्षेत्र के बरगवां इलाके की बताई जा रही है। पुलिस ने मृतक की पहचान मानवेंद्र प्रताप सिंह के रूप में की है। वह बाराबंकी के निलालडिया असंदा क्षेत्र के रहने वाले विजेंद्र प्रताप सिंह के बेटे थे। शुरुआती जांच में कमरे के भीतर किसी तरह के संघर्ष या हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस को न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। यही वजह है कि फिलहाल मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

    बताया गया है कि शुक्रवार सुबह सरकारी ड्राइवर मानवेंद्र प्रताप सिंह के कमरे पर कार की चाबी लेने पहुंचा था। उसने दरवाजे की घंटी बजाई और कई बार दस्तक दी लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक कमरे से आवाज या किसी प्रकार की हलचल नहीं आने पर गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और अधिकारी को बिस्तर पर पड़ा देखा गया। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

    प्रारंभिक स्तर पर अधिकारी की मौत को हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अधिकारी की तबीयत पहले से खराब थी या रात के दौरान अचानक कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई। कमरे के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश या किसी आपराधिक घटना के संकेत मिले हैं या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है।

    मानवेंद्र प्रताप सिंह की कटनी में आयकर विभाग के कार्यालय में पोस्टिंग वर्ष 2024-25 के दौरान हुई थी। पोस्टिंग के बाद से वह बरगवां स्थित विभागीय गेस्ट हाउस में ही रह रहे थे। उनका परिवार बाराबंकी में रहता था और नौकरी के कारण वह कटनी में अकेले रह रहे थे। परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और उनके कटनी पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

    माधवनगर थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मामले की जांच जारी है। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी। फिलहाल पुलिस ने घटना को लेकर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस मामले में सबसे अहम होंगे। बंद कमरे में अधिकारी की मौत ने विभागीय गेस्ट हाउस में भी चिंता बढ़ा दी है और पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

  • युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:

    युवा, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, इमरान मसूद और रेणुका चौधरी ने उठाए सवाल हेडलाइन 2:


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रगीत, झंडा फहराने और राष्ट्रगान को लेकर राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने देशभक्ति से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ युवाओं की बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, टैक्स का बोझ और महंगी होती ईएमआई जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इन पर चर्चा करने की मांग की है।

    कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राष्ट्रगीत को लेकर बीजेपी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी को राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अचानक इतना जोर देने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। मसूद ने कहा कि देश में जब राष्ट्रगीत गाने को लेकर विरोध और कार्रवाई की स्थिति बनी थी, तब बीजेपी के लोग इस तरह सामने नहीं आए थे।

    उन्होंने आजादी के बाद के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके लोगों ने लंबे समय तक राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और झंडा फहराने जैसे विषयों को लेकर वह भूमिका नहीं निभाई, जिसका दावा अब किया जा रहा है। मसूद ने कहा कि देश की जनता शिक्षित है और राजनीतिक दलों के पुराने रुख तथा उनके वर्तमान बयानों के बीच अंतर को समझती है।

    मसूद ने यह भी कहा कि आज सूचना तकनीक के दौर में लोगों के पास पुराने घटनाक्रमों और बयानों को जानने के कई साधन मौजूद हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी पुराने तथ्य की जानकारी हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार देशभक्ति से जुड़े इतिहास को किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक रहा है और इसमें अलग-अलग विचारधाराओं तथा समुदायों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया था। इसलिए देशभक्ति पर किसी एक संगठन या राजनीतिक विचारधारा का अधिकार नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान के जरिए कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की मौजूदा राजनीतिक बहस को स्वतंत्रता आंदोलन के व्यापक इतिहास से जोड़ने की कोशिश की।

    वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने सरकार और बीजेपी नेताओं से जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने की अपील की। उन्होंने रोजगार की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं के सामने नौकरियों की चुनौती बनी हुई है। चौधरी ने कहा कि राजनीतिक बहस को उन मुद्दों पर भी केंद्रित किया जाना चाहिए जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।

    रेणुका चौधरी ने बढ़ती महंगाई, टैक्स के बोझ और ईएमआई महंगी होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और ऐसे समय में सरकार को इन समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रुपये की स्थिति में गिरावट का असर लोगों की आर्थिक परिस्थितियों पर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी राष्ट्रगीत और देशभक्ति से जुड़ी बहस के समानांतर आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के लिए रोजगार, महंगाई से राहत और आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक बोझ जैसे विषयों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

    दूसरी ओर, राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बहस केवल राष्ट्रगीत की स्वीकार्यता तक सीमित रहने के बजाय देशभक्ति की राजनीतिक व्याख्या और जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दों तक भी फैल सकती है।

  • यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान

    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं और प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूटने लगा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है जिससे सड़कें जलमग्न हो गई हैं और लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

    बहराइच में भी कई गांवों में पानी भर गया है। हालात का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ट्रैक्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दूसरी ओर प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी रिवर फ्रंट रोड तक पहुंच गया है और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गंगा का पानी लेटे हुए हनुमान मंदिर कॉरिडोर के आसपास भी पहुंच गया है।

    वाराणसी में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर असर डाल रहा है। विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद करना पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के नियमित शवदाह स्थल पानी में डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों और सीढ़ियों के आसपास अंतिम संस्कार किया गया जबकि मणिकर्णिका घाट पर छत के हिस्से में यह प्रक्रिया करनी पड़ी। दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती भी छत से कराई गई। नमो घाट का बड़ा हिस्सा भी जलमग्न हो चुका है।

    प्रयागराज में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। दारागंज करेली और सलोरी जैसे इलाकों में कई घरों में कई फीट तक पानी भरने की सूचना है। जलभराव और बिगड़ते हालात के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को हॉस्टल खाली करना पड़ा है। कौशांबी और आसपास के जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। फर्रुखाबाद में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और कई संपर्क मार्गों पर पानी बह रहा है। कुछ गांवों के टापू में बदल जाने के कारण प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए नावों तथा मोटर बोट की व्यवस्था की है।

    राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों का जलस्तर लगातार निगरानी में है। घाघरा सरयू गंगा शारदा टोंस सोन और मंदाकिनी जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। पिछले 72 घंटों में बारिश से जुड़े हादसों में मकान गिरने के कारण छह लोगों की मौत की भी सूचना है। इनमें मिर्जापुर जौनपुर और अमेठी के मामले शामिल हैं।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि लखनऊ कानपुर और वाराणसी जैसे कई शहरों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ है लेकिन बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और 25 अगस्त तक कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों पर उठाए सवाल

    E20 पेट्रोल पर सियासी बहस तेज, कांग्रेस ने गन्ने से इथेनॉल उत्पादन और चीनी कीमतों पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । 
    देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण वाली E20 नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि गन्ने और अनाज के एक हिस्से का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में होने से खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ रहा है।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि लोगों को एक तरफ सड़क पर वाहन चलाने के दौरान और दूसरी तरफ रसोई में खाद्य सामग्री खरीदते समय कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने E20 नीति की दोबारा समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने का विकल्प देने की मांग की है।

    कांग्रेस की ओर से चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर गन्ने के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। पार्टी का दावा है कि लगभग 25 लाख टन चीनी बनाने में इस्तेमाल होने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन की ओर गया। जयराम रमेश ने इसी संदर्भ में चीनी और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया।

    उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कांग्रेस ने गुड़, चावल और मक्के के आटे जैसी कुछ अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी का उल्लेख किया है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों और क्षेत्रों में इन वस्तुओं की कीमतों में अंतर हो सकता है।

    E20 पेट्रोल को लेकर कांग्रेस ने वाहनों के माइलेज का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का कहना है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है। खासकर पुराने वाहनों को लेकर भी कांग्रेस ने संभावित तकनीकी समस्याओं की चिंता जताई है।

    कांग्रेस की मांग है कि उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत और वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुसार बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि ईंधन संबंधी नीतियों में उपभोक्ता हितों और वाहन मालिकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर, चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाया है। सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के देश में लाने की मंजूरी दी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है।

    दिल्ली में 21 अगस्त को चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। कीमतों में बढ़ोतरी और सरकार के आयात फैसले के बाद E20 नीति को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। कांग्रेस इसे खाद्य महंगाई और वाहन माइलेज से जोड़ रही है, जबकि सरकार का चीनी आयात का कदम बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में है।

    इथेनॉल मिश्रण नीति का उद्देश्य पेट्रोल में वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाना, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और किसानों के लिए गन्ने तथा अन्य फीडस्टॉक से अतिरिक्त बाजार तैयार करना रहा है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और वाहन ईंधन दक्षता पर इसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है।

    आने वाले समय में चीनी की कीमतों, घरेलू आपूर्ति और E20 ईंधन के वास्तविक प्रभाव के आंकड़े इस बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कांग्रेस ने नीति की समीक्षा और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने की मांग को केंद्र में रखा है, जबकि सरकार का ताजा कदम चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर बाजार कीमतों को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।

  • पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई

    पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई


    नई दिल्ली । 
    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला शुक्रवार को उस समय और गरमा गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचव के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। कांग्रेस ने छात्र की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

    साहिल लोचव का दावा है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उस पर पैलेट गन से हमला हुआ था। उसके अनुसार, घटना के बाद उसे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से आगे एम्स रेफर किया गया। एम्स में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन उसकी आंख की रोशनी अब भी स्पष्ट नहीं है। साहिल ने बताया कि उसने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।

    राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की बात सामने आई है और कुछ छर्रे उसकी आंख में भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली पुलिस पैलेट गन चलाने से इनकार कर रही है तो फिर छात्र को चोट कैसे लगी। राहुल गांधी ने कहा कि मामले में अपराध हुआ है और इसकी जांच के लिए FIR दर्ज होना जरूरी है।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए साहिल और उसके वकील को अलग-अलग पुलिस अधिकारियों के पास भेजा गया। साहिल की वकील के मुताबिक, पहले कनॉट प्लेस और फिर संसद मार्ग थाने से संबंधित क्षेत्र को लेकर उन्हें भेजा गया। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें बताया गया कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि ऊपर से निर्देश मिले हैं। कांग्रेस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

    राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कुछ लोगों ने भजन गाते हुए तथा चरखे का इस्तेमाल करते हुए विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया और संसद मार्ग के दोनों ओर यातायात प्रभावित रहा।

    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है कि शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और उसका नंबर दिया जाए। उन्होंने कहा कि साहिल की शिकायत को लेकर राहुल गांधी उसके साथ खड़े हैं और प्राथमिकी दर्ज होने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे छात्रों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा मामला बताया।

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को लेकर पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। भाजपा ने राहुल गांधी पर न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले को देख रहा है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का औचित्य क्या है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि घटना की जांच चल रही है और कांग्रेस को कानून की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

    इस बीच कांग्रेस का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि घायल छात्र की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। पैलेट गन के इस्तेमाल और साहिल की चोटों से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होती है या नहीं और इस मामले में आगे पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

  • पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार

    पीएम-आशा से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य, डिजिटल खरीद व्यवस्था ने बढ़ाई पारदर्शिता और भुगतान प्रक्रिया की रफ्तार

    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम-आशा योजना किसानों को उनकी कृषि उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और मजबूरी में कम कीमत पर बिक्री रोकने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। योजना के तहत खरीद व्यवस्था, मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप को मजबूत करने के साथ किसानों तक सरकारी समर्थन पहुंचाने पर जोर दिया गया है।

    पीएम-आशा के अंतर्गत दलहन, तिलहन और खोपरा जैसी प्रमुख कृषि उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है। किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने में सुविधा मिले, इसके लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। इससे बाजार तक पहुंच बढ़ाने और बिक्री प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिली है।

    योजना की खरीद व्यवस्था में नाफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों से निर्धारित व्यवस्था के तहत उपज खरीदी जाती है। इसका उद्देश्य बाजार में कीमतों के दबाव के समय किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ उपलब्ध कराना और उन्हें तत्काल कम कीमत पर उपज बेचने से बचाना है।

    सरकार ने पीएम-आशा की खरीद प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ाया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के साथ ई-एनएएम, ई-समृद्धि और ई-सम्युक्ति जैसे डिजिटल मंचों का उपयोग खरीद और भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किया जा रहा है। डिजिटल प्रणाली से किसानों की पहचान, खरीद संबंधी रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायता मिल रही है।

    कृषि क्षेत्र में भंडारण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष का समर्थन भी योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने में उपयोगी माना गया है। खरीद केंद्रों और कृषि ढांचे के विस्तार से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

    पीएम-आशा के लिए बजटीय प्रावधान में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत वास्तविक व्यय 5,437.99 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2025-26 में इसका बजट बढ़ाकर 6,941.36 करोड़ रुपये किया गया, जबकि 2026-27 के लिए 7,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बढ़ता आवंटन किसानों की आय सुरक्षा और कृषि मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करने की प्राथमिकता को दर्शाता है।

    फसल उत्पादन लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच अंतर भी किसानों के लिए मूल्य सुरक्षा के महत्व को स्पष्ट करता है। वर्ष 2026-27 में सामान्य धान की उत्पादन लागत 1,627 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल है। इस तरह दोनों के बीच 814 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है।

    पीली सोयाबीन के मामले में उत्पादन लागत 3,805 रुपये प्रति क्विंटल और एमएसपी 5,708 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके अलावा गेहूं की उत्पादन लागत 1,239 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

    जूट के लिए उत्पादन लागत 3,662 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है, जबकि एमएसपी 5,925 रुपये प्रति क्विंटल है। इस आधार पर दोनों के बीच 2,293 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बनता है। सरकार की कोशिश है कि खरीद व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और बाजार हस्तक्षेप के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले तथा कृषि बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता को और मजबूत किया जा सके।

  • भगवान जगन्नाथ की आस्था और परंपराओं को एनिमेशन में दिखाएगी महाप्रभु जगन्नाथ, बच्चों और परिवारों के लिए होगी खास पेशकश

    भगवान जगन्नाथ की आस्था और परंपराओं को एनिमेशन में दिखाएगी महाप्रभु जगन्नाथ, बच्चों और परिवारों के लिए होगी खास पेशकश

    नई दिल्ली ।भगवान जगन्नाथ की भक्ति, परंपराओं और उनकी दिव्य दुनिया को एनिमेशन के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने वाली फिल्म महाप्रभु जगन्नाथ अब सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। निर्माताओं ने फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा कर दी है। यह फिल्म 28 अगस्त 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी। रिलीज की तारीख रक्षाबंधन और भगवान बलराम की जयंती के आसपास होने के कारण इसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी खास माना जा रहा है।

    फिल्म का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आस्था, मान्यताओं और परंपराओं को एनिमेशन के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। निर्माताओं ने इसे विशेष रूप से बच्चों और परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। कहानी में धार्मिक विषय को मनोरंजन और एनिमेशन की आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिससे परिवार के सदस्य एक साथ फिल्म का अनुभव ले सकें।

    फिल्म के निर्माता दुर्गा प्रसाद दलाई ने इसकी रिलीज को लेकर खुशी जताई है। उनका कहना है कि फिल्म के निर्माण से लेकर सिनेमाघरों तक पहुंचने का सफर उनके लिए महत्वपूर्ण रहा है। रक्षाबंधन और बलराम जयंती जैसे अवसर पर फिल्म का प्रदर्शन उनके लिए विशेष महत्व रखता है और वह इसे भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद मानते हैं।

    दुर्गा प्रसाद दलाई के मुताबिक, उनकी टीम की शुरुआत से ही ऐसी फिल्म बनाने की कोशिश रही है, जिसे बच्चे और परिवार साथ बैठकर देख सकें। फिल्म के जरिए दर्शकों को महाप्रभु जगन्नाथ की दुनिया और उनसे जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। उनका मानना है कि धार्मिक और पारंपरिक विषय को एनिमेशन के माध्यम से प्रस्तुत करने से इसे बच्चों तक सहज तरीके से पहुंचाया जा सकता है।

    बलराम जयंती भगवान कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे समय में महाप्रभु जगन्नाथ की रिलीज फिल्म को व्यापक पारिवारिक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर दे सकती है।

    महाप्रभु जगन्नाथ का निर्माण ईएलई एनिमेशंस ने किया है। यह स्टूडियो के सनातन यूनिवर्स के तहत सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली पहली फिल्म बताई गई है। फिल्म में एनिमेशन के माध्यम से भगवान जगन्नाथ की दुनिया, उनसे संबंधित पुरानी मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।

    फिल्म की एक खास बात इसका बहुभाषी संगीत भी है। इसका साउंडट्रैक हिंदी, उड़िया और तेलुगु भाषाओं में तैयार किया गया है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों के दर्शकों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है। फिल्म में अथर्व बक्शी, अविरल कुमार और अभय जोधपुरकर सहित कई कलाकारों ने अपनी आवाज दी है।

    28 अगस्त को रिलीज होने वाली यह फिल्म धार्मिक विषयों पर आधारित एनिमेटेड सिनेमा की दिशा में एक उल्लेखनीय पेशकश के रूप में सामने आएगी। निर्माताओं की कोशिश है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को मनोरंजन के माध्यम से बच्चों तथा परिवारों तक पहुंचाया जाए।

  • भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ा, छह वर्षों में लाइव आईटी क्षमता चार गुना होकर 1.7 गीगावाट पहुंची

    भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ा, छह वर्षों में लाइव आईटी क्षमता चार गुना होकर 1.7 गीगावाट पहुंची

    नई दिल्ली ।भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बाद सबसे बड़े डेटा सेंटर बाजार के रूप में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता करीब चार गुना बढ़कर 1.7 गीगावाट हो गई है। डेटा सेंटर क्षेत्र में बढ़ती मांग, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश के कारण आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और विस्तार की उम्मीद है।

    भारत में डेटा सेंटर परियोजनाओं की एक बड़ी पाइपलाइन भी तैयार हो चुकी है। वर्तमान में करीब 1.3 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन है। इसके अलावा लगभग 3.2 गीगावाट क्षमता वाली ऐसी परियोजनाएं भी मौजूद हैं, जिनके लिए जमीन, बिजली और निर्माण से संबंधित जरूरी मंजूरियां हासिल की जा चुकी हैं। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में देश की डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

    डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार में बिजली की उपलब्धता और फाइबर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। भारत में इंटरनेट उपयोग, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा स्टोरेज तथा प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि वैश्विक और घरेलू कंपनियां भारत में बड़े स्तर पर निवेश की योजनाएं बना रही हैं।

    महाराष्ट्र देश का सबसे प्रमुख डेटा सेंटर बाजार बना हुआ है। भारत की कुल लाइव आईटी क्षमता में राज्य की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। निर्माण शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियां प्राप्त कर चुकी परियोजनाओं की सबसे बड़ी पाइपलाइन भी महाराष्ट्र में मौजूद है। मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पहले से विकसित डिजिटल और बिजली संबंधी बुनियादी ढांचा इस क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    डेटा सेंटर विकास का अगला चरण केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहने वाला है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी कंपनियां बड़े निवेश और नई परियोजनाओं की घोषणाएं कर रही हैं। इन राज्यों में जमीन, बिजली, कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के कारण भविष्य में नई क्षमता विकसित होने की संभावना है।

    घरेलू कारोबारी समूहों ने देश में डेटा सेंटर विकास के लिए करीब 210 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह घोषित कुल निवेश का लगभग 45 प्रतिशत है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र का विकास केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि घरेलू उद्योग भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार में बड़े निवेश की तैयारी कर रही हैं। गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने मिलकर करीब 84 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। घोषित कुल निवेश का लगभग 95 प्रतिशत बड़े हाइपरस्केल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैंपस से जुड़ा है।

    डेटा सेंटर के विस्तार का सीधा असर बिजली की मांग पर भी पड़ेगा। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली खपत 2025 में करीब 11 टेरावाट-घंटे से बढ़कर 2035 तक 91 टेरावाट-घंटे पहुंचने का अनुमान है। यानी एक दशक में मांग आठ गुना से अधिक बढ़ सकती है।

    बढ़ती बिजली जरूरत के बीच अक्षय ऊर्जा की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। कई बड़ी हाइपरस्केल कंपनियों ने वर्ष 2030 तक नेट-जीरो लक्ष्य निर्धारित किए हैं। ऐसे में डेटा सेंटर संचालन के लिए सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में 2021 से अब तक 7.1 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है।

  • वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करेगा, इंडो-पैसिफिक में मजबूत होगी ऊर्जा आपूर्ति

    वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करेगा, इंडो-पैसिफिक में मजबूत होगी ऊर्जा आपूर्ति

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने के बीच भारत ने अपनी तेल रिफाइनिंग क्षमता को और विस्तार देने की तैयारी तेज कर दी है। देश की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता करीब 272 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे बढ़ाकर 300 एमएमटीपीए करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

    भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग देशों में शामिल है और उसकी रिफाइनरियां घरेलू मांग पूरी करने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। क्षमता में प्रस्तावित वृद्धि से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच रणनीतिक मजबूती हासिल करने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है। देश में 23 रिफाइनरियां सालाना करीब 270 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता रखती हैं। रिफाइनिंग क्षेत्र के विस्तार को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूमिका बढ़ाने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भारत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक भी है। ऐसे में अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता देश को घरेलू खपत के साथ-साथ मित्र देशों को भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगी। विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत अपनी रिफाइनिंग और आपूर्ति क्षमता को रणनीतिक संपत्ति के रूप में विकसित कर रहा है।

    इसी व्यापक ऊर्जा सहयोग के तहत भारत और मॉरिशस के बीच तेल और गैस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही इंडियनऑयल और मॉरिशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर पांच साल का समझौता भी हुआ है।

    समझौते के तहत मॉरिशस को पेट्रोलियम उत्पादों की नियमित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे द्वीपीय देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए स्थिर आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारत के लिए यह समझौता क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और अपने रिफाइनिंग नेटवर्क की उपयोगिता बढ़ाने का अवसर भी है।

    भारत और मॉरिशस के बीच ऊर्जा साझेदारी को दोनों देशों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार से सरकार और कारोबार से कारोबार स्तर पर हुए समझौतों से ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध और मजबूत हो सकते हैं।

    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की कीमतों तथा आपूर्ति पर बाहरी घटनाओं का प्रभाव लगातार दिखाई देता है। ऐसे माहौल में घरेलू रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक लचीलापन प्रदान कर सकता है। 300 एमएमटीपीए का लक्ष्य हासिल होने पर भारत की उत्पादन और निर्यात क्षमता में भी महत्वपूर्ण विस्तार की संभावना बनेगी।

    सरकार का जोर केवल रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर ऊर्जा भागीदार के रूप में स्थापित करने पर भी है। मॉरिशस के साथ हुआ समझौता इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में रिफाइनिंग क्षमता और क्षेत्रीय ऊर्जा साझेदारियों का विस्तार भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।