Author: bharati

  • भारत-ईयू एफटीए से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद, यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को उत्साहित

    भारत-ईयू एफटीए से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद, यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ सहयोग को उत्साहित

    नई दिल्ली ।भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के कारोबार और निवेश के लिए नए अवसर खोल सकता है। फिनलैंड दूतावास के ट्रेड काउंसलर एंटी हेरलेवी ने कहा कि यूरोपीय कंपनियां भारतीय उद्योगों के साथ अधिक गहराई से सहयोग करने को लेकर उत्साहित हैं और समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी होने की उम्मीद कर रही हैं।

    हेरलेवी के मुताबिक भारत और यूरोप के कारोबारी संबंधों के लिए मौजूदा वर्ष महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के बीच व्यापार विस्तार, निवेश और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाएं बढ़ी हैं। यूरोपीय कारोबारी भारतीय बाजार और यहां के उद्योगों के साथ अधिक नजदीकी से काम करने में रुचि दिखा रहे हैं।

    मुक्त व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच कारोबार को आसान बनाना और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में कंपनियों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ने की संभावना है। साथ ही भारत और यूरोप के बीच निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ा सहयोग भी मजबूत हो सकता है।

    हेरलेवी ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के संदर्भ में भी भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। बदलते वैश्विक कारोबारी वातावरण में कंपनियां अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में भारत और यूरोपीय देशों के बीच औद्योगिक सहयोग दोनों पक्षों के लिए उपयोगी हो सकता है।

    फिनलैंड के ट्रेड काउंसलर ने भारत के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में फिनलैंड के अनुभव को भी महत्वपूर्ण बताया। चक्रीय अर्थव्यवस्था में संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल, उत्पादों का लंबे समय तक उपयोग और कचरे को कम करने पर जोर दिया जाता है। इस मॉडल में इस्तेमाल हो चुकी सामग्री को दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश की जाती है।

    उनके अनुसार फिनलैंड और अन्य यूरोपीय देशों ने संसाधनों के पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों के विकास में लंबे समय तक काम किया है। भारत और फिनलैंड की कंपनियों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से संसाधनों की खपत कम करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

    चक्रीय अर्थव्यवस्था का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता। संसाधनों का कम इस्तेमाल करने से कंपनियों की लागत घट सकती है और उत्पादन प्रक्रिया में ऊर्जा तथा पानी की खपत भी कम की जा सकती है। साथ ही नई कच्ची सामग्री पर निर्भरता कम होने से उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को घटाने में मदद मिल सकती है।

    हेरलेवी ने इस बदलाव की शुरुआत उत्पाद के डिजाइन चरण से करने पर जोर दिया। उनके अनुसार कंपनियों को ऐसे उत्पाद तैयार करने चाहिए जिनमें कम सामग्री की जरूरत हो, जिनका उपयोग लंबे समय तक किया जा सके और जिन्हें इस्तेमाल के बाद आसानी से पुनर्चक्रित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और शुरुआती स्तर पर सही उत्पाद डिजाइन चक्रीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन सकता है। इस दृष्टिकोण से कंपनियां उत्पादन के साथ-साथ उत्पाद के पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखकर काम कर सकती हैं।

    भारत-ईयू एफटीए और टिकाऊ उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से आने वाले समय में दोनों पक्षों के कारोबारी संबंधों को व्यापक आधार मिलने की संभावना है। व्यापार, निवेश, तकनीक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन में साझेदारी बढ़ने से भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी रास्ते खुल सकते हैं।

  • योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सपा पर साधा निशाना, ‘पी’ की परिभाषा को लेकर दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में पूर्व मुख्यमंत्री और पद्म विभूषण कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा के पीडीए की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समय के साथ राजनीतिक रंग बदलने वाले लोग ‘पी’ की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले ‘पी’ को पिछड़े से जोड़ा गया, फिर पंडित से जोड़ा गया और एक दिन ऐसे लोग ‘पी’ की परिभाषा पाकिस्तान से भी करने लगेंगे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति और उसके पीडीए के दावे पर सीधे हमले के तौर पर देखा गया। उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ विचार और परिभाषाएं बदलने वाले लोगों को जनता समझती है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के जीवन और सार्वजनिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का महत्व केवल उसके पद से निर्धारित नहीं होता। व्यक्ति अपनी सोच, कर्म, सिद्धांत और समाज के प्रति योगदान से बड़ा बनता है। उन्होंने कहा कि अतरौली के सामान्य किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने संघर्ष और मेहनत के बल पर सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई।

    योगी ने बताया कि कल्याण सिंह ने किसान और शिक्षक के रूप में काम करने के बाद विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने उनके जीवन को सादगी, संघर्ष, तप और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में दबाव के बावजूद अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।

    मुख्यमंत्री ने कल्याण सिंह के उस कथन को भी याद किया कि वह टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में इस विचार को व्यवहार में उतारा और गलत कार्यों के लिए किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया।

    राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता से अधिक अपने सिद्धांतों को महत्व दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन का समर्थन किया और ऐसी परिस्थितियों में भी अपने राजनीतिक निर्णयों पर कायम रहे, जब उन्हें सत्ता गंवाने का जोखिम उठाना पड़ा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कल्याण सिंह का योगदान और अधिक याद आता है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संतों, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित विभिन्न संगठनों की भूमिका रही और कल्याण सिंह भी इस आंदोलन के महत्वपूर्ण राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे।

    योगी ने कल्याण सिंह के निधन के समय की परिस्थितियों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे और कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी। अंतिम यात्रा से जुड़े कार्यक्रमों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मौजूदगी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी थी, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व की ओर से प्रत्यक्ष रूप से श्रद्धांजलि देने या संवेदना व्यक्त करने की पहल नहीं की गई। योगी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कल्याण सिंह का जीवन सामाजिक मूल्यों, सिद्धांतों और सनातन परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और सार्वजनिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।

  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    मध्यप्रदेश: में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया गया टेक होम राशन पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार का जोर पोषण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के साथ महिलाओं और बच्चों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर है।

    पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन नाश्ता और गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती तथा धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन और शेष दिनों में टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार टेक होम राशन का वितरण शुरू किया गया है।

    इस बदलाव से पोषण आहार की उपलब्धता को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय समूहों के माध्यम से तैयार होने वाले राशन से आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े हितग्राहियों को निर्धारित पोषण सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। छह से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित बच्चों और छह से 72 माह के अति कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार टेक होम राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर उनका वजन और लंबाई या ऊंचाई मापी जाती है। इन आंकड़ों को पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है, जिससे बच्चों की पोषण स्थिति पर नजर रखी जा सके। चिन्हित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल के साथ जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग तथा पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है।

    हर महीने आयोजित दस दिवसीय शारीरिक माप दिवसों में जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाती है। कुपोषण की स्थिति वाले चिन्हित बच्चों का आवश्यक कार्यक्रमों के तहत पंजीयन कर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट के माध्यम से बच्चों की स्थिति का फॉलोअप करने के साथ परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाता है।

    विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार और बच्चों की वृद्धि तथा पोषण स्थिति की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। नई टेक होम राशन व्यवस्था के जरिए पोषण सेवाओं को अधिक स्थानीय और सतत बनाने की कोशिश की गई है। अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू हुई यह व्यवस्था बच्चों और माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • पश्चिमी अलास्का में चार्टर प्लेन रडार से गायब, दो पायलटों समेत आठ लोग लापता; दुर्गम इलाके में तलाश जारी

    पश्चिमी अलास्का में चार्टर प्लेन रडार से गायब, दो पायलटों समेत आठ लोग लापता; दुर्गम इलाके में तलाश जारी


    नई दिल्ली । अमेरिका के पश्चिमी अलास्का में एक चार्टर विमान दुर्घटना के बाद रडार से गायब हो गया। विमान में दो पायलट और छह यात्री सवार थे। घटना के बाद से सभी आठ लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना स्थल बेहद दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण राहत और बचाव दल के सामने चुनौती बनी हुई है।

    जानकारी के अनुसार चार्टर विमान एंकोरेज से केप न्यूएनहैम के लिए उड़ान पर था। पश्चिमी अलास्का के दूरदराज इलाके में पहुंचने के बाद विमान का संपर्क और रडार सिग्नल टूट गया। इसके बाद विमान की तलाश शुरू की गई। शुरुआती जानकारी में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका जताई गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड के अधिकारी, अलास्का स्टेट ट्रूपर्स और बचाव समन्वय केंद्र की टीमें सक्रिय हो गईं। संबंधित एजेंसियों की ओर से संभावित दुर्घटना स्थल की तलाश और वहां तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    अलास्का का बड़ा हिस्सा दुर्गम और कम आबादी वाला है। कई क्षेत्रों में घने जंगल, पहाड़ी इलाकों और कठिन मौसम जैसी परिस्थितियां राहत एवं बचाव अभियान को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में लापता विमान और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए अभियान को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।

    अधिकारियों की ओर से विमान में सवार लोगों की पहचान और उनकी स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। बचाव अभियान के आगे बढ़ने के साथ दुर्घटना के कारणों और विमान के संभावित मलबे की स्थिति के बारे में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    यह हादसा अमेरिका में उसी दिन हुई एक अन्य विमान दुर्घटना के बाद सामने आया है। पेंसिल्वेनिया में लैंडिंग के दौरान एक विमान की हवा में मौजूद पुलिस हेलिकॉप्टर से टक्कर हो गई थी। उस हादसे में विमान के पायलट की मौत हो गई, जबकि हेलिकॉप्टर में सवार दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए।

    लगातार सामने आए इन दोनों हादसों ने अमेरिका में विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि दोनों घटनाओं के कारण अलग-अलग हो सकते हैं और इनके बीच सीधे संबंध का कोई संकेत सामने नहीं आया है। संबंधित एजेंसियां दोनों हादसों की परिस्थितियों की जांच कर रही हैं।

    अलास्का में हुए हादसे की जांच में विमान की उड़ान से जुड़ी जानकारी, मौसम की परिस्थितियां, पायलटों के अंतिम संपर्क और रडार से विमान के गायब होने की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा दुर्घटनास्थल मिलने के बाद विमान के मलबे और अन्य साक्ष्यों से घटना की वजह समझने में मदद मिल सकती है।

    फिलहाल प्राथमिकता लापता विमान में सवार आठ लोगों की तलाश करना है। बचाव एजेंसियां संभावित दुर्घटना क्षेत्र में अभियान चला रही हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अभियान में समय लग सकता है।

    अधिकारियों की ओर से जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, लापता यात्रियों और पायलटों की स्थिति तथा दुर्घटना के संभावित कारणों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पूरा ध्यान खोज एवं बचाव अभियान पर केंद्रित है।

  • इमरान खान की छह डॉक्टरों ने की मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर अदियाला जेल भेजे गए

    इमरान खान की छह डॉक्टरों ने की मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर अदियाला जेल भेजे गए

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद एक बार फिर अदियाला जेल भेज दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया था। वहां छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी जांच की। जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने फिलहाल उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं बताई, जिसके बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

    इमरान खान लंबे समय से अदियाला जेल में बंद हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उनकी मेडिकल जांच कराने का मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से जुड़ा हुआ था। अदालत ने उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए निर्धारित समय के भीतर मेडिकल जांच कराने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा था।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। अदालत की ओर से मेडिकल जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने की बात भी कही गई थी। जांच और उपचार के दौरान डॉ. उजमा तथा इमरान खान के निजी चिकित्सक को भी मौजूद रहने की अनुमति दी गई थी। उनके इलाज से संबंधित खर्च उनके परिवार द्वारा वहन किए जाने की बात सामने आई थी।

    इमरान खान के अस्पताल पहुंचने से पहले वहां सुरक्षा व्यवस्था को काफी बढ़ा दिया गया था। अस्पताल के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अस्पताल में इमरान खान की मौजूदगी को देखते हुए प्रवेश और आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी गई।

    छह विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण किया। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों की राय के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें वापस अदियाला जेल ले जाया गया। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य निगरानी जेल में ही किए जाने की बात सामने आई है।

    इमरान खान को निजी अस्पताल में जांच के लिए भेजे जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान सरकार ने पहले असहमति जताई थी। केंद्र सरकार ने अदालत के आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा था कि इमरान खान की स्वास्थ्य जांच पहले भी कई बार हो चुकी है और उनके लिए मेडिकल बोर्ड गठित किए जा चुके हैं।

    सरकार का तर्क था कि किसी कैदी को अस्पताल भेजने का फैसला उसकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर होना चाहिए। सरकार ने निजी अस्पताल में जांच के आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर अदालत में पुनर्विचार की कोशिश की थी।

    हालांकि, सरकार की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने कुछ कमियां बताते हुए वापस कर दिया था। इसके बाद अदालत के निर्देश के तहत इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    मेडिकल जांच के बाद अस्पताल में भर्ती न किए जाने से फिलहाल इमरान खान को वापस जेल भेज दिया गया है। इस घटनाक्रम में अदालत के निर्देश, सरकार की आपत्ति और डॉक्टरों की मेडिकल राय तीनों महत्वपूर्ण पहलू रहे। इमरान खान की आगे की स्वास्थ्य निगरानी अदियाला जेल में ही किए जाने की संभावना है।

  • केबीसी 18 के मंच पर पहुंचीं गायिका सुनिधि चौहान, अमिताभ बच्चन संग बातचीत का प्रोमो हुआ वायरल

    केबीसी 18 के मंच पर पहुंचीं गायिका सुनिधि चौहान, अमिताभ बच्चन संग बातचीत का प्रोमो हुआ वायरल

    नई दिल्ली ।टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति के 18वें सीजन में इन दिनों प्रतियोगियों के ज्ञान के साथ-साथ कई मशहूर हस्तियों का मनोरंजन भी देखने को मिल रहा है। शो के आगामी एपिसोड के एक नए प्रोमो ने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींचा है। इस प्रोमो में हिंदी सिनेमा की जानी-मानी पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान हॉट सीट पर बैठी नजर आ रही हैं। शो के दौरान अमिताभ बच्चन और सुनिधि चौहान के बीच हुई बातचीत और हंसी-मजाक के पलों को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं।

    सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफॉर्म द्वारा जारी किए गए इस प्रोमो में सुनिधि चौहान अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर अपनी खुशी जाहिर करती दिख रही हैं। कार्यक्रम के दौरान सुनिधि ने अपनी गायकी का हुनर दिखाते हुए वर्ष 2006 में आई फिल्म डॉन का प्रसिद्ध गीत ‘ये मेरा दिल’ भी प्रस्तुत किया। उनकी इस शानदार परफॉर्मेंस ने मंच का माहौल संगीतमय बना दिया। अमिताभ बच्चन ने भी उनकी गायकी की जमकर सराहना की और तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

    गेम शो में बातचीत के दौरान सुनिधि चौहान ने अमिताभ बच्चन की तारीफ करते हुए कहा कि वे उन्हें अलग-अलग रूपों में देखते आए हैं और वे उनके लिए एक सांता क्लॉज़ की तरह हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अमिताभ बच्चन उनका पहला क्रश हुआ करते थे। सुनिधि की इस बात पर बिग बी ने बेहद चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया दी और मुस्कुराते हुए कहा कि यह बात उन्हें अब पता चल रही है, जबकि इसे पहले बताया जाना चाहिए था। अमिताभ के इस जवाब से सुनिधि शरमा गईं और मंच पर मौजूद दर्शक हंस पड़े।

    इस विशेष एपिसोड के प्रोमो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। संगीत और अभिनय जगत के इन दो दिग्गजों को एक साथ मंच साझा करते देख दर्शक बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। कई लोगों ने सुनिधि चौहान की प्राकृतिक गायकी शैली की तारीफ की तो कई प्रशंसकों ने इस पूरे एपिसोड को देखने के लिए अपनी उत्सुकता जाहिर की है।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के केबीसी प्रशंसकों के बीच इस नए सीजन को लेकर जबरदस्त क्रेज बना हुआ है। हाल ही में शुरू हुए इस 18वें सीजन में पहले भी कई बड़े बॉलीवुड सितारे अपनी फिल्मों के प्रचार और सामाजिक उद्देश्यों के लिए शिरकत कर चुके हैं। सुनिधि चौहान और अमिताभ बच्चन के बीच की यह खास बॉन्डिंग इस एपिसोड के प्रसारण को लेकर दर्शकों का रोमांच और बढ़ा रही है।

  • भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत और जापान ने अपने रक्षा व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा, अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और सैन्य युद्धाभ्यास को बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    बैठक के दौरान दोनों देशों के रक्षा प्रतिनिधियों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग को व्यापक रूप से विस्तारित करने पर विशेष जोर दिया। इसके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, और जहाजों के रखरखाव व मरम्मत सुविधाओं में एक-दूसरे का सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में बारूदी सुरंगों से निपटने और जहाजों के निर्माण में जापानी तकनीक तथा भारत की विनिर्माण क्षमताओं के संयुक्त इस्तेमाल की रणनीतिक योजना बनाई गई है।

    वार्ता में भविष्य के सैन्य ढांचे को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान बलों के बीच तालमेल बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकियों से जुड़ी लंबित परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया। भारत में बनने वाले इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के संदर्भ में भी दोनों देशों के रक्षा बल आपस में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग जारी रखेंगे। दोनों देशों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में निष्पक्ष व्यापारिक आवाजाही और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत स्तंभ की तरह कार्य करेगी।

    वार्ता के दौरान भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी अपना स्पष्ट रुख रखा। भारतीय पक्ष ने जापानी समकक्ष के समक्ष संवेदनशील रक्षा तकनीकों के तीसरे देशों में प्रसार से जुड़े खतरों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। पूर्व के ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए भारत ने यह बात रेखांकित की कि किस प्रकार तकनीक का अनधिकृत साझाकरण क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सुरक्षा पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

    जापानी रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री से भी शिष्टाचार मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से और आगे ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत और जापान के बीच मजबूत होती यह साझेदारी न केवल दोनों राष्ट्रों की सैन्य क्षमताओं को नई दिशा देगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की गारंटी के रूप में भी उभरेगी।

    दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में रक्षा, अनुसंधान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीकों में दोनों मित्र राष्ट्र एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी बनकर कार्य करेंगे।

  • उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    नई दिल्ली ।कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सड़क हादसे से जुड़े मुआवजे के मामले की सुनवाई करते हुए ‘गृहिणी’ और ‘होममेकर’ शब्द की परिभाषा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपने घर पर परिवार के सदस्यों की सेवा और देखभाल करती है, तो उसे कानूनी व सामाजिक रूप से ‘गृहिणी’ ही माना जाएगा। इसके लिए महिला का अनपढ़ होना या केवल घर के कामों तक सीमित रहना बिल्कुल आवश्यक नहीं है, भले ही उसके पास उच्च शैक्षणिक डिग्री हो या वह कोई नौकरी करती हो।

    न्यायमूर्ति चिल्लाकुर सुमलता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम से जुड़े एक दुर्घटना मुआवजे के मामले पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले में बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर एक महिला वर्ष 2013 में बस दुर्घटना के दौरान घायल हो गई थी। पीड़िता ने दुर्घटना के कारण हुए आर्थिक नुकसान और अपनी कार्यक्षमता प्रभावित होने का हवाला देते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। वहीं परिवहन निगम का तर्क था कि महिला की उच्च शिक्षा को देखते हुए उसे केवल एक सामान्य गृहिणी मानकर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता।

    उच्च न्यायालय ने परिवहन निगम की इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कोई महिला कितनी भी पढ़ी-लिखी हो या उसके पास डॉक्टरेट जैसी उच्च उपाधि ही क्यों न हो, यदि वह घर पर अपने परिवार की भलाई के लिए योगदान दे रही है, तो वह गृहिणी की श्रेणी में आती है। पीठ ने माना कि एक पेशेवर या कामकाजी महिला भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए गृहिणी की भूमिका निभाती है और उसके इस योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने गृहिणी शब्द के अर्थ को और अधिक विस्तार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति बिना थके परिवार के लिए मेहनत करता है, अपने आराम का त्याग करता है और एक खुशहाल घर का आधार बनता है, वह होममेकर है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यह अवधारणा केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कोई भी व्यक्ति जो घर चलाने और परिवार के पोषण में योगदान देता है, वह इस परिभाषा के दायरे में आता है।

    इस मामले में अदालत ने महिला के चिकित्सकीय स्थिति और उपचार की अवधि का आकलन करते हुए माना कि चोटों के कारण पीड़िता को कम से कम तीन महीने तक पूर्ण विश्राम करना पड़ा। इस दौरान वह अपने परिवार की सेवा करने में असमर्थ रही, जो कि एक प्रत्यक्ष क्षति है। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए पीड़िता की काल्पनिक आय तय की और निचली अदालत द्वारा निर्धारित राशि के अतिरिक्त 1,96,800 रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश जारी किया।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच उच्च न्यायालय के इस फैसले की काफी सराहना हो रही है। इस निर्णय को महिलाओं द्वारा घर और परिवार के प्रति दिए जाने वाले अमूल्य और अनपेक्षित योगदान को कानूनी रूप से मान्यता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • 'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें

    'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और उसके छंदों को लेकर शुरू हुई बहस में अब मनोरंजन जगत की दो प्रमुख हस्तियों के अलग-अलग विचार सामने आए हैं। वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर दिए गए बयान के बाद अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने उस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस विषय को लेकर दोनों कलाकारों की अलग-अलग सोच के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नई चर्चा छिड़ गई है।

    पूरे विवाद की शुरुआत शर्मिला टैगोर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को पर्याप्त और सर्वसमावेशी बताया था। उन्होंने कहा था कि शुरुआती दो छंदों के बाद के हिस्सों में जिन प्रतीकों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग किया गया है, वे केवल एक ही ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों या विभिन्न धर्मावलंबियों के लिए कहना थोड़ा असहज या मुश्किल हो सकता है। उनके अनुसार, देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रथम दो छंदों को गाना अधिक व्यावहारिक है।

    शर्मिला टैगोर की इस टिप्पणी पर असहमति जताते हुए कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के रूप में कला और कविता को देखने का नजरिया इतना सीमित नहीं होना चाहिए। किसी भी रचना या कविता में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द और प्रतीक रूपक की तरह होते हैं, जिनका उद्देश्य मनचाही भावना का संचार करना होता है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और देशवासियों को प्रेरित करने वाली भावना है।

    कंगना रनौत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह राष्ट्रगीत देश की आंतरिक शक्ति को जगाने का संदेश देता है। उन्होंने संकीर्ण सोच से बाहर निकलने का सुझाव देते हुए कहा कि किसी भी कलात्मक अभिव्यक्ति को हिंदू या मुस्लिम दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि कोई विचारधारा या धर्म किसी एक ही स्वरूप या अभिव्यक्ति तक सीमित है, तो यह उसका व्यक्तिगत या सीमित विषय हो सकता है, लेकिन इसे व्यापक राष्ट्रीय भावना पर लागू नहीं किया जा सकता।

    विभिन्न हिस्सों में इस विषय पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर जहां कुछ लोग शर्मिला टैगोर के सुझाव को सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला विचार मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग कंगना रनौत के इस पक्ष का समर्थन कर रहे हैं कि राष्ट्रीय गीत की मूल आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ के साथ कोई समझौता या उसका सीमित आंकलन नहीं होना चाहिए।

    सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर अक्सर इस प्रकार के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर शुरू हुआ यह संवाद अब कलात्मक स्वतंत्रता, धार्मिक मान्यताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़ी व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जिस पर विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी राय दे रहे हैं।