Author: bharati

  • समर सुपरफूड करेला: शुगर कंट्रोल से लेकर डाइजेशन तक फायदेमंद

    समर सुपरफूड करेला: शुगर कंट्रोल से लेकर डाइजेशन तक फायदेमंद


    नई दिल्ली गर्मी के मौसम में ही शरीर में कई तरह की समस्याएं बढ़ती हैं जैसे पाचन खराब होना, ब्लड शुगर की कमी, थकान और कमजोरी। ऐसे में करेला (करेला) एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, करेले का नियमित सेवन न केवल गर्मी से राहत देता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाता है।

    पोषक तत्व सेपूर्ती

    आयुष मंत्रालय के अनुसार, करेला विटामिन ए, बी और सी, बीटा कैरोटीन, आयरन, ड्रैगन, पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैग्नीज जैसे कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है। ये तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान के साथ-साथ इमामत सिस्टम को भी मजबूत बनाते हैं।

    शराब में मिलावट

    डायबिटीज के इलाज के लिए करेला को बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में जब शुगर लेवल बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, तब करेले का सब्जी या सब्जी नियमित रूप से लेना आश्चर्यजनक साबित होता है।

    पाचन तंत्र को बनाए रखें

    गर्मी में अपच, गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में करेला पाचन क्रिया को सुधारने और पेट को साफ रखने में मदद मिलती है। यह पेट दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए जाना जाता है।

    शरीर को ठंडा और ठंडा रखा जाता है

    करेला प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, जो शरीर की अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में मदद करता है। यह डिहाइड्रेशन से प्रमाणित है और समुद्र तट पर शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

    प्रतिरक्षा और वजन नियंत्रण

    करेले में मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। साथ ही यह खून को साफ करता है और मेटाबॉलिज्म को तेज गति से वजन को नियंत्रित में रखने में भी मदद करता है।

    सेवन का सही तरीका

    गर्मियों में सुबह खाली पेट करेले का प्लांट सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसके अलावा आप करेले की सब्जी, सूखा या अन्य प्रकार के करेले भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं. हालाँकि, अगर आपको किसी तरह की एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो इसका सेवन पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा

    भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक, आपसी संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली  भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 30 मार्च, 2026 को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के साथ विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) किया। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ रणनीतिक साझेदारी, आपसी हितों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार भी साझा किए।

    दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में हुए 23वें सालाना समिट में लिए गए फैसलों को लागू करने में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की। दिसंबर की इस यात्रा के दौरान, रुडेंको ने भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से भी मुलाकात की। एफओसी का आखिरी राउंड मार्च 2025 में मॉस्को में हुआ था।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, “भारत-रूस विदेश कार्यालय परामर्श सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता विदेश सचिव विक्रम मिसरी और रूस के उप विदेश मंत्री एंड्रे रुडेन्को ने की।”

    उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किए।”

    इसके अलावा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के मई में भारत आने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, लावरोव 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं।

    इससे पहले 17 मार्च को, भारत और रूस ने नई दिल्ली में 7वां संयुक्त राष्ट्र परामर्श आयोजित किया, जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे। विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।

    जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी प्राथमिकताओं का आदान-प्रदान किया। चर्चा का मुख्य केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एजेंडे से जुड़े मुद्दे थे, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी उपाय, शांति स्थापना, यूएनएससी सुधार और अन्य विषय।”

    इससे पहले 11 मार्च को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया संघर्ष तथा द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की

  • संसद में गूंजा ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, राघव चड्ढा ने उठाई अहम मांग

    संसद में गूंजा ‘पैटरनिटी लीव’ का मुद्दा, राघव चड्ढा ने उठाई अहम मांग


    नई दिल्ली देश में पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर एक अहम बहस तेज होती नजर आ रही है। Raghav Chadha ने राज्यसभा में ‘पितृत्व अवकाश’ (Paternity Leave) को कानूनी अधिकार बनाने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने कहा कि भारत में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी केवल मां तक सीमित कर देना एक बड़ी सामाजिक और कानूनी कमी है, जिसे अब बदलने की जरूरत है।

    “केयरगिविंग सिर्फ मां की नहीं”

    संसद में बोलते हुए Raghav Chadha ने कहा कि बच्चे के जन्म पर बधाई तो माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन देखभाल की पूरी जिम्मेदारी मां पर डाल दी जाती है। उन्होंने इसे “समाज की विफलता” करार देते हुए कहा कि यह सोच अब बदलनी चाहिए।
    उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था केवल मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को महत्व देती है, जबकि पिता की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    पितृत्व अवकाश को मिले कानूनी मान्यता

    राघव चड्ढा ने मांग की कि पितृत्व अवकाश को एक कानूनी अधिकार बनाया जाए, ताकि पिता को अपने परिवार और नौकरी के बीच चुनाव न करना पड़े। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद मां को शारीरिक और मानसिक रूप से काफी सहारे की जरूरत होती है, जिसमें पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    मां के साथ-साथ पत्नी की देखभाल भी जरूरी

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्नी की देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद महिला को भावनात्मक और शारीरिक सहयोग की जरूरत होती है, और ऐसे समय में पति की मौजूदगी “लक्जरी नहीं, बल्कि आवश्यकता” है।

    निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को नहीं मिलती सुविधा

    राघव चड्ढा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि फिलहाल भारत में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है। जबकि देश की करीब 90 प्रतिशत कार्यबल निजी क्षेत्र में काम करती है, जहां इस तरह की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। इसका मतलब है कि ज्यादातर पिता इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं।

    दुनिया के कई देशों में बेहतर व्यवस्था

    उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि Sweden, Iceland और Japan जैसे देशों में पितृत्व अवकाश 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक कानूनी रूप से सुनिश्चित किया गया है। यह दर्शाता है कि विकसित देशों में माता-पिता दोनों की भूमिका को बराबरी से महत्व दिया जाता है।

    बदलते समाज के साथ कानून भी बदले

    राघव चड्ढा ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि कानून समाज का आईना होता है और इसमें यह साफ दिखना चाहिए कि बच्चे की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता और पिता दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

  • 1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका: बिजली, प्रॉपर्टी, टोल और ATM सब महंगे

    1 अप्रैल से महंगाई का डबल झटका: बिजली, प्रॉपर्टी, टोल और ATM सब महंगे


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में नए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2026 की शुरुआत आम जनता के लिए महंगाई का बड़ा झटका लेकर आ रही है। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कई अहम क्षेत्रों में बदलाव होने जा रहे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। बिजली से लेकर प्रॉपर्टी खरीद तक और हाईवे पर सफर से लेकर एटीएम से पैसे निकालने तक लगभग हर क्षेत्र महंगा होने जा रहा है।

    सबसे पहले बात करें बिजली की तो 2026-27 के लिए नया टैरिफ लागू किया जा रहा है। बिजली दरों में औसतन 4.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जारी रहेगी लेकिन जैसे-जैसे खपत बढ़ेगी बिल भी तेजी से बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वालों को हर महीने औसतन 150 रुपए तक अधिक चुकाने पड़ सकते हैं।

    प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी यह समय भारी पड़ने वाला है। राज्य में कलेक्टर गाइडलाइन दरों में औसतन 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। करीब 65 हजार स्थानों पर नई दरें लागू होंगी जिससे जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी। इसके साथ ही निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण पक्के मकानों का निर्माण भी पहले से ज्यादा खर्चीला हो जाएगा।

    हाईवे पर सफर करने वाले लोगों को भी अब ज्यादा भुगतान करना होगा। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। फास्टैग के सालाना पास की कीमत में भी करीब 75 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है जिससे रोजाना सफर करने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

    बैंकिंग सेवाओं में भी बदलाव किए गए हैं। एटीएम से पैसे निकालना अब पहले से महंगा हो जाएगा। पहले की तरह महीने में पांच मुफ्त ट्रांजैक्शन की सुविधा जारी रहेगी लेकिन इसके बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर करीब 23 रुपए तक शुल्क देना होगा। इस पर टैक्स भी अलग से लगेगा जिससे बार-बार पैसे निकालना महंगा सौदा साबित होगा।

    नगर निगम और स्थानीय निकायों ने कचरा प्रबंधन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत अब कचरे को चार हिस्सों में अलग करना अनिवार्य होगा जिसमें गीला सूखा सैनिटरी और खतरनाक कचरा शामिल है। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा जिससे लोगों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालना पड़ेगा।

    रेलवे यात्रियों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब ट्रेन के निर्धारित समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा जबकि पहले यह सीमा 4 घंटे थी। 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करने पर करीब 50 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी वहीं 24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 75 प्रतिशत तक रिफंड मिलेगा। इसके अलावा यात्रियों को ट्रेन रवाना होने से आधे घंटे पहले तक क्लास अपग्रेड कराने की सुविधा भी दी जाएगी।

    कुल मिलाकर 1 अप्रैल से लागू होने वाले ये बदलाव आम आदमी के बजट को प्रभावित करेंगे। ऐसे में लोगों को अपनी आर्थिक योजना को नए सिरे से तैयार करना होगा ताकि बढ़ते खर्चों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

  • सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने बताई मजबूत होती भूमिका

    सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने बताई मजबूत होती भूमिका

    नई दिल्ली भारत ने वैश्विक टेक्नोलॉजी दुनिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। Sanand में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने केयन्स सेमीकॉन की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) सुविधा का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत अब तेजी से एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में उभर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।

    ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ बना गेमचेंजर

    प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को India Semiconductor Mission की सफलता से जोड़ते हुए कहा कि 2021 में शुरू किया गया यह मिशन केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इस मिशन के तहत देश के छह राज्यों में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के 10 बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है, जो आने वाले समय में भारत को चिप निर्माण का बड़ा हब बना सकते हैं।

    तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

    पीएम मोदी ने हाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि 28 फरवरी को Micron Technology के प्लांट में उत्पादन शुरू हुआ और अब 31 मार्च को Kaynes Technology के सेमीकंडक्टर प्लांट ने भी काम शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे संयोग नहीं, बल्कि भारत के तेजी से विकसित होते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का प्रमाण बताया।

    ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत की अपनी कंपनियां भी सेमीकंडक्टर निर्माण में आगे आ रही हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। Kaynes Technology का यह कदम भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ को मिल रही मजबूती

    पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि आज का दौर केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों को दिशा देने का समय है। भारत अब सिर्फ बदलाव को देख नहीं रहा, बल्कि उसका नेतृत्व करने के लिए आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ का विजन अब जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।

    भविष्य की टेक्नोलॉजी में भारत की बड़ी भूमिका

    प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत की कई कंपनियां अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को और मजबूत करेंगी। इस दशक में उठाए गए कदम आने वाले दशकों में भारत को टेक्नोलॉजी लीडर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • सरकारी यूनिवर्सिटी में 64 पदों पर भर्ती, प्रोफेसर समेत कई पद खाली

    सरकारी यूनिवर्सिटी में 64 पदों पर भर्ती, प्रोफेसर समेत कई पद खाली


    नई दिल्ली सरकारी विश्वविद्यालय में करियर बनाने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए शानदार अवसर आया है। Sri Dev Suman Uttarakhand University (एसडीएसयूवी) ने प्रोफेसर सहित विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के तहत कुल 64 पदों को भरा जाएगा, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 10 अप्रैल शाम 5 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    किन पदों पर होगी भर्ती?

    इस भर्ती अभियान के तहत अलग-अलग पदों पर वैकेंसी निकाली गई है। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के 41 पद, असिस्टेंट लाइब्रेरियन का 1 पद, एसोसिएट प्रोफेसर के 11 पद और प्रोफेसर के 11 पद शामिल हैं। यह भर्ती उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए एक बेहतरीन मौका है।

    आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 अप्रैल निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तय समय से पहले अपना आवेदन पूरा कर लें। खास बात यह है कि ऑनलाइन आवेदन के बाद उम्मीदवारों को अपने फॉर्म की हार्ड कॉपी भी 24 अप्रैल शाम 5 बजे तक विश्वविद्यालय के पते पर भेजनी होगी।

    योग्यता और अनुभव

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, एमफिल या पीएचडी की डिग्री होना जरूरी है। इसके अलावा पद के अनुसार निर्धारित अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना भी अनिवार्य है।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा। इसमें सबसे पहले स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग होगी, जिसके बाद पर्सनल इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चरण में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद ही चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी।

    सैलरी और आवेदन शुल्क

    चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 57,700 रुपये से लेकर 2,18,200 रुपये तक का मासिक वेतन मिलेगा।
    वहीं आवेदन शुल्क की बात करें तो:

    प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए:
    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹2000
    एससी/एसटी: ₹1000
    असिस्टेंट प्रोफेसर और असिस्टेंट लाइब्रेरियन पद के लिए:
    जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹1000
    एससी/एसटी: ₹500

    ऐसे करें आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Sri Dev Suman Uttarakhand University की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करें। इसके बाद आवेदन फॉर्म में सभी जरूरी जानकारी भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसका प्रिंटआउट निकाल लें।

    ऑनलाइन आवेदन पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को अपने आवेदन की हार्ड कॉपी 24 अप्रैल शाम 5 बजे तक रजिस्ट्रार, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल, टिहरी गढ़वाल-249199 पते पर भेजना अनिवार्य है।

    करियर बनाने का सुनहरा मौका

    यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए खास अवसर है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित नौकरी की तलाश में हैं। अच्छी सैलरी, सम्मानजनक पद और सरकारी सुविधाएं इसे और आकर्षक बनाती हैं।

  • बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा

    बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा


    नई दिल्ली Nalanda जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए दर्दनाक भगदड़ हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। पूजा-अर्चना के दौरान अचानक भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे मची भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 8 से 10 लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल है।

    राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने जताया गहरा शोक

    इस दुखद घटना पर Droupadi Murmu ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नालंदा में मंदिर भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत का समाचार अत्यंत दुखद है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। साथ ही उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, C. P. Radhakrishnan ने भी हादसे पर दुख जताते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

    🇮🇳 प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मदद की घोषणा

    इससे पहले Narendra Modi ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
    वहीं, Nitish Kumar ने मृतकों के परिवारों को 6 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया।

    कैसे हुआ हादसा?

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में पूजा के दौरान अचानक अत्यधिक भीड़ जमा हो गई। भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

    राहत और बचाव कार्य जारी

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने और पीड़ितों की हर संभव मदद करने में जुटा है।

    लापरवाही पर कार्रवाई

    हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कर्तव्यहीनता के आरोप में दीपनगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

    सबक और सतर्कता की जरूरत

    यह हादसा एक बार फिर भीड़ प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है। धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

  • KP ओली को गिरफ्तार करके फंस गए पीएम बालेन? नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

    KP ओली को गिरफ्तार करके फंस गए पीएम बालेन? नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस


    काठमांडू। नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। उनके समर्थक अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर रिहाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच नेपाल सुपीम कोर्ट ने सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए गिरफ्तारी पर स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब के लिए तीन दिन का समय दिया है।
    यह आदेश ओली की ओली की पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर याचिका पर आया। याचिका में गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तुरंत रिहाई की मांग की गई थी। हालांकि जस्टिस मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले स्वास्थ्य कारणों से जूझ रहे ओली ने काठमांडू जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी दी, जहां उनकी हिरासत पांच दिन और बढ़ा दी गई।

    दरअसल ‘जेनजी आंदोलन’ के दौरान हुई 76 लोगों की मौत की जांच के लिए गठित Gauri Bahadur Karki Commission ने अपनी रिपोर्ट में कई नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए थे। नई सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में आयोग की सिफारिशें लागू कर दीं, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि आंदोलन के दौरान हिंसा की जानकारी न होने का दावा “आपराधिक लापरवाही” की श्रेणी में आ सकता है।

    गौरतलब है कि सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाद नेपाल में व्यापक विरोध शुरू हुआ था, जो बाद में देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में आगजनी और संसद भवन को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। राजनीतिक संकट के बाद अंतरिम व्यवस्था बनी और चुनाव कराए गए, जिसके बाद नई सरकार का गठन हुआ।

    अब ओली की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर नेपाल की राजनीति गरमा गई है और अदालत के नोटिस से सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

  • पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

    पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

    नई दिल्ली. भारतीय टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भाजपा का दामन थाम लिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया है। पेस, जो भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांता मजुमादर भी मौजूद रहे। पेस का पार्टी में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
    किरण रिजिजू ने लिएंडर को लेकर क्या कहा?
    इस मौके पर रिजिजू ने कहा, ‘लिएंडर पेस का भाजपा परिवार में शामिल होना ऐतिहासिक है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में खेल और खिलाड़ियों को लगातार बढ़ावा दिया है।’ वहीं लिएंडर ने इसे अपने जीवन का सबसे खास दिन बताया। उन्होंने कहा, ‘यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा दिन है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन जी का धन्यवाद करना चाहता हूं। यह मेरे लिए खेल और युवाओं की सेवा करने का बड़ा अवसर है।’

    ‘अब युवाओं के लिए काम करूंगा’
    लिएंडर पेस ने भारत के लिए ओलंपिक पदक और कई ग्रैंड स्लैम जीते हैं और अब राजनीति के मैदान में अपनी नई पारी खेलने जा रहे हैं। उनका भाजपा से जुड़ना यह दिखाता है कि पार्टी खेल जगत के बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पेस ने अपने करियर को याद करते हुए कहा कि अब वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने 40 साल देश के लिए खेला है, अब समय है युवाओं की सेवा करने का।’ लिएंडर पेस ने केंद्र सरकार की खेल योजनाओं की भी सराहना की।

    उन्होंने कहा, ‘खेलो इंडिया मूवमेंट और टॉप्स स्कीम बहुत शानदार पहल हैं। मैंने देखा है कि किरेन रिजिजू जी ने टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए कितनी मेहनत की। प्रधानमंत्री जी ने उन्हें जो रोल दिया था, उसे बखूबी निभाया।’

    बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर बोले पेस
    पेस ने बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘ भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमें अगले 20-25 वर्षों में स्पोर्ट्स एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल का ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। आज भी बंगाल में इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी है। बंगाल, तमिलनाडु और बिहार बेहतर कर सकते हैं, लेकिन हमें युवाओं को खेल शिक्षा के जरिए प्रेरित और सशक्त बनाने पर ध्यान देना होगा। मेरा सपना है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए बराबरी के अवसर वाली स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया जाए।’

    बंगाल चुनाव से पहले बड़ा संदेश
    भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता से खासकर युवा और खेल प्रेमी वोटर्स पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पेस चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वह चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी छवि और अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत चेहरा साबित हो सकते हैं।

    लिएंडर के पिता का पिछले साल हुआ था निधन
    लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके दिवंगत पिता वेस पेस ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी मां जेनिफर पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुआई कर अपना लोहा मनवाया था। लिएंडर के पिता वेस पेस का पिछले साल ही 80 साल की उम्र में निधन हुआ था।

    अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर ने जीता था कांस्य
    लिएंडर ने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में पुरुष टेनिस के एकल वर्ग में ब्राजील के फर्नांडो मेलिगेनी को मात देकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। साथ ही वह केडी जाधव के बाद पहले भारतीय खिलाड़ी बने, जिन्होंने व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीता। उनकी सफलताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन्हें 1996-97 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वह 1990 में अर्जुन अवॉर्ड, 2001 में पद्म श्री अवॉर्ड और जनवरी 2014 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।

    पुरुष और मिक्स्ड डबल्स के महारथी हैं लिएंडर
    वैसे तो पेस ने पुरुष एकल में कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीता, लेकिन पुरुष युगल में उनके नाम आठ ग्रैंडस्लैम ट्रॉफीज हैं। लिएंडर ने 2012 में एकमात्र ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था। इसके अलावा वह 1999, 2001 और 2009 में फ्रेंच ओपन, 1999 में विंबलडन और 2006, 2009 और 2013 में यूएस ओपन का खिताब भी जीत चुके हैं। वह मिक्स्ड डबल्स में 10 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके हैं। इनमें तीन ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब (2003, 2010, 2015), एक फ्रेंच ओपन खिताब (2016), चार विंबलडन खिताब (1999, 2003, 2010 और 2015) और दो यूएस ओपन खिताब (2008 और 2015) शामिल हैं।

  • मजदूर के बेटे से IPL स्टार तक बृजेश शर्मा ने डेब्यू मैच में मचाया धमाका संघर्ष और जुनून की फिल्मी कहानी

    मजदूर के बेटे से IPL स्टार तक बृजेश शर्मा ने डेब्यू मैच में मचाया धमाका संघर्ष और जुनून की फिल्मी कहानी

    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में उभरा है और वह है बृजेश शर्मा राजस्थान रॉयल्स के लिए डेब्यू करने वाले इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले ही मैच में ऐसा प्रदर्शन किया कि हर कोई उनकी चर्चा करने लगा। Indian Premier League 2026 के इस मुकाबले में Rajasthan Royals और Chennai Super Kings आमने सामने थे जहां राजस्थान ने शानदार जीत दर्ज की लेकिन इस जीत के साथ एक नई कहानी भी जन्म ले चुकी थी।

    Udhampur के रहने वाले 27 वर्षीय बृजेश शर्मा एक अनकैप्ड राइट आर्म पेसर हैं जिनका क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। खास बात यह है कि आईपीएल में चुने जाने से पहले उन्होंने प्रोफेशनल क्रिकेट तक नहीं खेली थी। इसके बावजूद राजस्थान रॉयल्स ने उन पर भरोसा जताया और ऑक्शन में उन्हें उनके बेस प्राइस 30 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। यह फैसला अब पूरी तरह सही साबित होता नजर आ रहा है।

    गुवाहाटी में खेले गए इस मैच में राजस्थान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और कप्तान Riyan Parag के इस निर्णय को बृजेश शर्मा ने सही साबित कर दिखाया। उन्होंने तीन ओवर में सिर्फ 17 रन दिए और एक महत्वपूर्ण विकेट भी हासिल किया। उनकी सधी हुई लाइन लेंथ और आत्मविश्वास से भरी गेंदबाजी ने चेन्नई के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। डेब्यू मैच में इतना संयम और नियंत्रण दिखाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी बात मानी जाती है।

    बृजेश का यह सफर आसान नहीं रहा। वह पहले जम्मू कश्मीर की स्टेट टीम का हिस्सा थे लेकिन बाद में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। यह उनके करियर का कठिन दौर था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। खुद को साबित करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी और दिल्ली के यूनिक स्पोर्ट्स क्लब में कोच दीपक पुनिया के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग शुरू की। इस दौरान उन्होंने खेल के प्रति अनुशासन और बड़े स्तर की क्रिकेट की समझ विकसित की जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

    उनकी प्रतिभा की झलक 2025 की बंगाल प्रो टी20 लीग में देखने को मिली जहां उन्होंने मालदा स्मैशर्स की ओर से खेलते हुए सात मैचों में 11 विकेट झटके और टूर्नामेंट के टॉप गेंदबाजों में शामिल रहे। यही प्रदर्शन उनके लिए आईपीएल का दरवाजा खोलने में मददगार साबित हुआ।

    बृजेश शर्मा का पारिवारिक बैकग्राउंड भी बेहद साधारण है। उनके पिता मजदूरी करते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। बृजेश ने खुद स्वीकार किया कि उनके संघर्ष के दिनों में परिवार और दोस्तों ने आर्थिक और मानसिक रूप से उनका भरपूर साथ दिया। यही समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना।

    अगर मैच की बात करें तो चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 127 रन बनाए थे जिसे राजस्थान रॉयल्स ने आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत में जहां बल्लेबाजों का योगदान रहा वहीं बृजेश शर्मा की गेंदबाजी ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई।

    बृजेश शर्मा की कहानी यह साबित करती है कि अगर मेहनत और जुनून सच्चा हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। एक अनजान खिलाड़ी से आईपीएल स्टार बनने तक का उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।