Author: bharati

  • अक्षय खन्ना फिर मचाएंगे तहलका, रहमान डकैत के बाद अब 'महाकाली' में निभाएंगे असुर गुरु शुक्राचार्य का किरदार

    अक्षय खन्ना फिर मचाएंगे तहलका, रहमान डकैत के बाद अब 'महाकाली' में निभाएंगे असुर गुरु शुक्राचार्य का किरदार

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बहुमुखी और सशक्त अभिनय क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता अक्षय खन्ना एक बार फिर से एक नए और चुनौतीपूर्ण अवतार में दर्शकों के सामने आने की तैयारी कर रहे हैं। हाल के समय में कई बड़ी फिल्मों और सीरीज़ में अपनी बेहतरीन अदाकारी से वाहवाही बटोरने के बाद अब वे पौराणिक और काल्पनिक सिनेमा के एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने जा रहे हैं। अपनी पिछली चर्चित भूमिकाओं में अलग-अलग रंगों को पेश करने के बाद अभिनेता का यह नया रूप दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता पैदा कर रहा है।

    हाल ही में प्रदर्शित हुई फिल्म धुरंधर में रहमान डकैत के नकारात्मक और जटिल किरदार को निभाकर अक्षय खन्ना ने आलोचकों और दर्शकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए चरित्र की बारीकियों और संवाद अदायगी की काफी सराहना हुई थी। अब वे प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स की आगामी बड़ी फिल्म महाकाली में पौराणिक चरित्र असुर गुरु शुक्राचार्य की भूमिका में दिखाई देंगे। इस फिल्म से जुड़ा उनका पहला लुक और झलक 24 अगस्त को सार्वजनिक रूप से जारी किए जाने की संभावना है।

    अक्षय खन्ना के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो वे लगातार अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं का चयन करते रहे हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म छावा में मुगल सम्राट औरंगजेब का गंभीर और प्रभावशाली किरदार हो या फिर कोर्टरूम ड्रामा फिल्म सेक्शन 375 में एक तीक्ष्ण बुद्धि वाले वकील तरुण सलूजा की भूमिका, उन्होंने हर बार अपनी अदाकारी से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। इसके अलावा हाल ही में आई वेब सीरीज इक्का में भी उनके नकारात्मक चरित्र शौर्यमान गौर को काफी सराहा गया था।

    सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाओं में समान रूप से सहज दिखने वाले इस अभिनेता ने अपने करियर की शुरुआत से ही कई यादगार फिल्में दी हैं। थ्रिलर शैली की फिल्म हमराज में चालाक प्रेमी करण मल्होत्रा का रोल हो या फिर सुपरहिट फिल्म दृश्यम 2 में आईजी तरुण अहलावत का सख्त पुलिस अधिकारी वाला किरदार, अक्षय खन्ना ने हर बार कहानी में एक अलग तनाव और रोमांच पैदा किया है। इसके अतिरिक्त दिल चाहता है, ताल और रेस जैसी सुपरहिट फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों को आज भी भारतीय सिनेमा के बेहतरीन प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    फिल्म प्रेमियों के बीच अक्षय खन्ना की आने वाली फिल्मों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। महाकाली में असुर गुरु शुक्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक चरित्र को वे किस तरह पर्दे पर जीवंत करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि अपनी अनूठी संवाद शैली और चेहरे के भावों से गंभीर से गंभीर किरदार में जान फूंकने की उनकी कला इस नई फिल्म को भी एक खास ऊंचाई पर ले जाने में मददगार साबित होगी।

  • विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    नई दिल्ली । सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली भारतीय क्रिकेट के ऐसे दो नाम हैं जिनकी तुलना अक्सर होती रही है। दोनों ने अलग-अलग दौर में भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और दुनिया के मुश्किल क्रिकेटिंग हालात में अपनी काबिलियत साबित की। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने दोनों दिग्गजों की विदेशी परिस्थितियों में सफलता को लेकर अपनी राय रखी है। डिविलियर्स की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि सचिन और विराट में आखिर बेहतर बल्लेबाज कौन था।

    डिविलियर्स ने सचिन तेंदुलकर की उपलब्धियों को कमतर आंकने के बजाय यह कहा कि सचिन ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए एक रास्ता तैयार किया था। उनके मुताबिक सचिन उन शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में थे जिन्होंने यह विश्वास पैदा किया कि उपमहाद्वीप से आने वाला बल्लेबाज तेज गेंदबाजों की उछाल और सीम वाली परिस्थितियों में भी सफल हो सकता है। हालांकि डिविलियर्स का मानना है कि विराट कोहली ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उसे एक अलग स्तर तक पहुंचाया।

    डिविलियर्स की बात का सबसे चर्चित हिस्सा यही रहा कि उन्होंने विराट कोहली को विदेशी परिस्थितियों में सचिन से अधिक मजबूत बताया। उनकी राय के मुताबिक कोहली ने विदेशों में भारतीय बल्लेबाजी के आत्मविश्वास को और बढ़ाया और टीम इंडिया को विदेशी मैदानों पर एक मजबूत टेस्ट टीम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस बयान ने सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में सचिन बनाम विराट की पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है।

    हालांकि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है। सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने हुए हैं। उनके टेस्ट करियर का बड़ा हिस्सा विदेशी मैदानों पर भी सफल रहा। आंकड़ों के अनुसार सचिन ने दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में 63 टेस्ट खेलकर 51.30 की औसत से 5,387 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए।

    वहीं विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए। भारत के बाहर खेले गए 66 टेस्ट में उनके नाम 4,774 रन दर्ज हैं। चार प्रमुख विदेशी देशों दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में कोहली ने 46 टेस्ट मैचों में 42.08 की औसत से 3,661 रन बनाए। उनके नाम इन परिस्थितियों में 12 शतक और 14 अर्धशतक रहे। यानी कुल विदेशी आंकड़ों में सचिन का पलड़ा मजबूत नजर आता है जबकि डिविलियर्स ने कोहली के प्रभाव और उनके दौर में भारतीय टीम की मानसिकता में आए बदलाव को अधिक महत्व दिया।

    डिविलियर्स ने मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों का भी जिक्र किया और कहा कि सचिन और विराट ने अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल कायम की। केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे बल्लेबाजों को उन्होंने इसी परंपरा का हिस्सा बताया। हालांकि राहुल की विदेशी टेस्ट बल्लेबाजी पर उन्होंने सुधार की गुंजाइश भी बताई। डिविलियर्स के मुताबिक राहुल की तकनीक शानदार है लेकिन विदेशों में उनके औसत से ज्यादा की उम्मीद की जाती है। उन्होंने सलाह दी कि राहुल जब क्रीज पर जम जाएं तो अपनी पारियों को बड़े स्कोर में बदलें और शतक के बाद भी बल्लेबाजी जारी रखते हुए 150 से 180 रन जैसे बड़े स्कोर बनाने की कोशिश करें।

    दरअसल सचिन और विराट की तुलना सिर्फ आंकड़ों से पूरी तरह तय नहीं हो सकती। सचिन ने ऐसे दौर में भारतीय क्रिकेट को विश्व मंच पर स्थापित किया जब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। विराट ने उसी आधार को आगे बढ़ाते हुए फिटनेस आक्रामकता और विदेशी जीत की मानसिकता को नई पहचान दी। इसलिए डिविलियर्स का बयान किसी एक खिलाड़ी को पूरी तरह महान साबित करने के बजाय दोनों की विरासत और उनके प्रभाव के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखता है। यही वजह है कि सचिन बनाम विराट की बहस शायद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच कभी खत्म नहीं होने वाली।

  • राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में सुनीता आहूजा और अभिनेत्री राखी सावंत के बीच हुई बातचीत के सार्वजनिक होने के बाद मनोरंजन जगत में हलचल तेज हो गई है। इस बातचीत के दौरान सुनीता ने दावा किया है कि यदि उन्होंने अपनी तलाक की अर्जी वापस नहीं ली होती तो गोविंदा अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार से शादी करने की योजना बना रहे थे।

    सुनीता आहूजा के इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद नवोदित अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाली कोमल रानी स्वर्णकार फिल्म इंडस्ट्री में नई कलाकार के तौर पर कदम रख रही हैं। गोविंदा ने कुछ समय पहले ही अपनी आने वाली फिल्म रूपा के लिए कोमल को मुख्य अभिनेत्री के रूप में मीडिया के सामने पेश किया था। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि वह अभिनेता के निर्माण में बन रही एक अन्य फिल्म दुनियादारी में भी नजर आ सकती हैं।

    पारिवारिक विवाद की शुरुआत पहले भी देखने को मिली थी जब सुनीता आहूजा ने एक साक्षात्कार में कुछ तीखी टिप्पणियां की थीं। उस समय उन्होंने किसी का नाम लिए बिना नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में जब गोविंदा सार्वजनिक रूप से अपनी नई फिल्म की सह-कलाकार के साथ नजर आने लगे तो सोशल मीडिया पर इन बयानों को कोमल रानी से जोड़कर देखा जाने लगा। अब राखी सावंत के साथ हुई बातचीत में सीधे तौर पर नाम सामने आने से यह मामला अधिक गरमा गया है।

    सुनीता आहूजा का कहना है कि वह लंबे समय से पारिवारिक स्थिति को लेकर चुप थीं, लेकिन अपने अधिकारों और सम्मान की अनदेखी होने पर उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के विचार तक बात पहुंच चुकी थी। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में बॉलीवुड के इस चर्चित परिवार के प्रशंसकों के बीच इस नए घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    दूसरी ओर इस पूरे मामले और निजी जिंदगी से जुड़े आरोपों पर अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने मीडिया के समक्ष इस विषय पर चुप्पी साध रखी है। वहीं गोविंदा ने पूर्व में अपनी सह-कलाकार का बचाव करते हुए सुनीता के आरोपों का खंडन किया था और अपना पक्ष रखा था।

    गौरतलब है कि गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को लगभग 39 वर्ष हो चुके हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। कुछ समय पूर्व कोर्ट परिसर के बाहर सुनीता आहूजा की मौजूदगी के बाद से दोनों के रिश्ते में दरार और कानूनी अलगाव की खबरें सामने आई थीं, हालांकि बाद में अर्जी वापस लेने की बात कही गई थी। फिलहाल इस नए खुलासे ने गोविंदा के निजी और व्यावसायिक जीवन से जुड़े विवाद को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

  • ई20 ईंधन दौर में माइलेज बढ़ाने के लिए किआ की बड़ी योजना, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक एसयूवी करेगी लॉन्च

    ई20 ईंधन दौर में माइलेज बढ़ाने के लिए किआ की बड़ी योजना, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक एसयूवी करेगी लॉन्च


    नई दिल्ली । 
    भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ई20 पेट्रोल के बढ़ते चलन के बीच वाहन निर्माताओं ने गाड़ियों के माइलेज को बेहतर बनाने के लिए रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। ईंधन की बदलती संरचना के कारण उपभोक्ताओं को मिलने वाले माइलेज पर पड़ रहे प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वाहन कंपनियां अब हाइब्रिड तकनीकों पर बड़ा दांव लगा रही हैं। इसी क्रम में किआ मोटर्स ने भारतीय बाजार के लिए अपनी भविष्य की योजनाओं की घोषणा की है, जिसके तहत कंपनी अपनी लोकप्रिय कारों को हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ उतारने की तैयारी कर रही है।

    कंपनी के वार्षिक वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान किआ के शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय बाजार में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार की पुष्टि की। कंपनी की योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में किआ सोनेट और कारेन्स को हाइब्रिड इंजन विकल्प के साथ बाजार में पेश किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कंपनी भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक स्थानीय रूप से विकसित बी-सेगमेंट इलेक्ट्रिक एसयूवी लाने पर भी काम कर रही है।

    कंपनी के रणनीति रोडमैप के तहत वर्ष 2027 से भारतीय बाजार में उपलब्ध लोकप्रिय मॉडलों जैसे सोनेट, कारेन्स और सेल्टॉस के लिए हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल विकल्प चरणबद्ध तरीके से पेश किए जाएंगे। सोनेट कंपनी के सबसे किफायती मॉडलों में से एक है, इसलिए इसके हाइब्रिड संस्करण को मजबूत पावरट्रेन के साथ तैयार किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2028 या 2029 तक इस किफायती एसयूवी को हाइब्रिड तकनीक से लैस करके ग्राहकों के लिए पेश करना है।

    नई पीढ़ी की सोनेट को उन्नत के1 प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाने की संभावना है। यह नया प्लेटफॉर्म न केवल हाइब्रिड पावरट्रेन को सपोर्ट करने में सक्षम है, बल्कि इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स आर्किटेक्चर, ओवर-द-एयर अपडेट और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इसके अलावा इस प्लेटफॉर्म की मदद से वाहन के केबिन के भीतर रियर सीट स्पेस और आराम को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है, जो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।

    हाइब्रिड तकनीक के आने से मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में यात्रा करने वाले वाहन चालकों को बेहतर ईंधन दक्षता मिलेगी। मौजूदा समय में किआ कारेन्स विभिन्न ईंधन विकल्पों जैसे पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल, डीजल और ऑल-इलेक्ट्रिक में उपलब्ध है, जिसे आने वाले समय में हाइब्रिड अवतार देकर और अधिक कुशल बनाने की योजना है। ऑटो विशेषज्ञ मानते हैं कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन से न केवल माइलेज में बढ़ोतरी होगी बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी देखने को मिलेगी।

    ई20 पेट्रोल की उपस्थिति में पारंपरिक इंजनों की माइलेज क्षमता पर पड़ रहे असर को देखते हुए हाइब्रिड वाहन भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकते हैं। किआ द्वारा उठाए गए इन कदमों से स्पष्ट है कि कंपनी भारतीय बाजार में पर्यावरण अनुकूल और लागत प्रभावी ड्राइविंग अनुभव प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।

  • बंटवारा 1947 के फ्लॉप होने पर बोले राजकुमार संतोषी, सनी देओल को मुस्लिम किरदार देने के पीछे थी खास वजह

    बंटवारा 1947 के फ्लॉप होने पर बोले राजकुमार संतोषी, सनी देओल को मुस्लिम किरदार देने के पीछे थी खास वजह

    नई दिल्ली । सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं और इसी वजह से जब दोनों लंबे समय बाद एक साथ फिल्म बंटवारा 1947 लेकर आए तो दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। फिल्म में सनी देओल पहली बार एक अलग तरह के किरदार में नजर आए हैं। उन्होंने मुस्लिम शख्स सिकंदर मिर्जा की भूमिका निभाई है जो कहानी के दौरान कट्टरपंथ के खिलाफ खड़ा होता है। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उस स्तर की सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके बाद यह सवाल भी उठने लगा कि क्या सनी देओल को मुस्लिम किरदार में पेश करना फिल्म की दर्शक अपील पर भारी पड़ा। अब निर्देशक राजकुमार संतोषी ने इस सवाल पर खुलकर अपनी बात रखी है।

    राजकुमार संतोषी के मुताबिक फिल्म की कास्टिंग करते समय इस पहलू पर विचार जरूर किया गया था लेकिन सनी देओल को मुस्लिम किरदार में लेने का फैसला किसी मजबूरी के तहत नहीं बल्कि पूरी तरह रचनात्मक सोच के साथ किया गया था। उनका मानना था कि सनी इस भूमिका को बेहद प्रभावी तरीके से निभा सकते हैं। निर्देशक ने बताया कि सिकंदर मिर्जा का किरदार सिर्फ एक धर्म विशेष की पहचान तक सीमित नहीं है बल्कि वह कहानी में एक महत्वपूर्ण विचार और संघर्ष को सामने रखता है। किरदार कट्टरपंथ का विरोध करता है और दुश्मन के इलाके में जाकर लड़ाई लड़ने वाला व्यक्ति है। यही वजह थी कि संतोषी इस भूमिका में सनी देओल की छवि और उनकी अभिनय क्षमता का अलग इस्तेमाल करना चाहते थे।

    निर्देशक ने यह भी बताया कि सनी देओल के साथ उनकी पुरानी दोस्ती और पेशेवर रिश्ते ने इस कास्टिंग को आसान बनाया। दोनों की जोड़ी पहले घायल दामिनी और घातक जैसी सफल फिल्मों में दर्शकों का मनोरंजन कर चुकी है। संतोषी का कहना है कि सनी एक बेहद प्रभावशाली अभिनेता हैं और वह किसी भी किरदार को अपनी शैली में विश्वसनीय बनाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए सिकंदर मिर्जा की भूमिका के लिए उन्हें चुनना एक सोचा समझा फैसला था।

    राजकुमार संतोषी ने यह भी खुलासा किया कि वह और सनी देओल काफी समय से दोबारा साथ काम करने की योजना बना रहे थे। करीब 2008 में भी दोनों ने एक फिल्म पर साथ काम करने की योजना बनाई थी। संतोषी ने बताया कि जब उन्होंने उस समय अपनी कहानी सनी को सुनाई थी तो अभिनेता को भी विषय पसंद आया था। निर्देशक उस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर की मुख्यधारा की फिल्म बनाना चाहते थे और उनका मानना था कि सनी देओल की लोकप्रियता के जरिए कहानी ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच सकती है। इसी सोच का असर बाद में बंटवारा 1947 की कास्टिंग में भी दिखाई दिया।

    फिल्म की कहानी बंटवारे के दौर की पृष्ठभूमि से जुड़ी है और इसमें उस समय के सामाजिक तथा मानवीय संघर्षों को सामने लाने की कोशिश की गई है। सनी देओल का किरदार इसी माहौल में अलग नजरिया पेश करता है। हालांकि सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने भारत में करीब 33.60 करोड़ रुपये और दुनियाभर में लगभग 47.62 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इसके बाद फिल्म की कमाई और इसकी कास्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई।

    हालांकि राजकुमार संतोषी ने साफ कर दिया है कि सनी देओल को मुस्लिम किरदार देना फिल्म की कमजोरी नहीं बल्कि उनकी रचनात्मक पसंद थी। उनके अनुसार सनी के लिए भी यह भूमिका एक अलग अभिनय चुनौती थी और अभिनेता इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित थे। ऐसे में फिल्म की कमाई कम रहने के बावजूद निर्देशक अपनी कास्टिंग के फैसले को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

  • गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    नई दिल्ली । श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रनों की शानदार जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त जरूर बना ली है लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 के फाइनल की दौड़ में भारत की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गॉल में मिली जीत से भारतीय टीम के अंक प्रतिशत में सुधार हुआ है और फाइनल की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं लेकिन अंक तालिका में टीम अभी पांचवें स्थान पर ही बनी हुई है। ऐसे में अब बचे हुए आठ टेस्ट मुकाबले भारत के लिए बेहद अहम हो गए हैं और फाइनल की रेस में बने रहने के लिए टीम को लगभग हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

    गॉल टेस्ट से पहले भारत ने नौ मुकाबलों में चार जीत दर्ज की थीं और उसका पॉइंट्स प्रतिशत 48.15 था। इस जीत के बाद भारत का पीसीटी बढ़कर 53.33 हो गया है। हालांकि इस सुधार के बावजूद भारतीय टीम अभी बांग्लादेश से पीछे है। बांग्लादेश ने पांच टेस्ट में तीन जीत के साथ 66.67 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह चौथे स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 77.78 प्रतिशत के साथ तालिका में सबसे ऊपर है। दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ भारत से आगे हैं। इससे साफ है कि भारत को सिर्फ अपने प्रदर्शन पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरी टीमों के नतीजे भी फाइनल की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    भारत के पास अब इस चक्र में आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम इन सभी मुकाबलों में जीत दर्ज करती है तो उसका पॉइंट्स प्रतिशत करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की फाइनल में पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि इन आठ मुकाबलों में एक भी हार भारत के समीकरण को काफी प्रभावित कर सकती है। एक हार की स्थिति में पीसीटी लगभग 68.52 तक गिर सकता है जबकि दो हार होने पर यह करीब 62.96 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच जाएगा। यानी भारत के लिए अब हर टेस्ट का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    श्रीलंका के खिलाफ सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। भारत की कोशिश इस मुकाबले को जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम करने की होगी। इसके बाद टीम इंडिया के सामने न्यूजीलैंड की चुनौती होगी जहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होंगी और हाल के वर्षों में कीवी टीम ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में कड़ी चुनौती दी है।

    इसके बाद भारत की अगली बड़ी परीक्षा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ घरेलू मैदान पर होने वाली यह सीरीज WTC फाइनल की दौड़ में निर्णायक साबित हो सकती है। भारत अगर ऑस्ट्रेलिया को 4-1 या 3-1 से हराने में सफल रहता है तो उसके फाइनल की राह काफी मजबूत हो जाएगी। इसके उलट सीरीज में ज्यादा नुकसान भारत के समीकरण को मुश्किल बना सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर चार अंक हासिल होते हैं और हार की स्थिति में कोई अंक नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत के लिए अब हर टेस्ट में जीत की अहमियत बढ़ गई है। गॉल की जीत ने टीम इंडिया को राहत जरूर दी है लेकिन फाइनल का टिकट अभी दूर है। आने वाले आठ टेस्ट मुकाबले अब भारत के लिए सिर्फ सीरीज जीतने की लड़ाई नहीं बल्कि WTC फाइनल में जगह बनाने की निर्णायक जंग बनने वाले हैं।

  • चीनी खिलाड़ी के सामने सिंधु का संघर्ष बेअसर 3 गेम तक चला रोमांचक मुकाबला, हार के साथ वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सफर खत्म

    चीनी खिलाड़ी के सामने सिंधु का संघर्ष बेअसर 3 गेम तक चला रोमांचक मुकाबला, हार के साथ वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सफर खत्म

    नई दिल्ली । भारत में 17 साल बाद आयोजित हो रही बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप में घरेलू दर्शकों को भारतीय स्टार खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन टूर्नामेंट आगे बढ़ने के साथ ही कई बड़े नाम मेडल की दौड़ से बाहर हो गए हैं। भारत की दिग्गज महिला शटलर पीवी सिंधु को भी प्री-क्वार्टर फाइनल में चीन की वांग झी यी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में वांग झी यी ने सिंधु को 11-21 21-15 17-21 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। करीब एक घंटे 28 मिनट तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला लेकिन निर्णायक गेम में चीनी खिलाड़ी ने दबाव के क्षणों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाजी अपने नाम कर ली।

    मुकाबले की शुरुआत सिंधु के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पहले गेम में वांग झी यी ने शुरुआती बढ़त हासिल की और इंटरवल तक 11-9 से आगे रहीं। इसके बाद चीनी खिलाड़ी ने अपनी गति और आक्रामकता बढ़ा दी जबकि सिंधु लय हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आईं। इंटरवल के बाद भारतीय खिलाड़ी केवल दो अंक ही जुटा सकीं और पहला गेम 11-21 से गंवा दिया। हालांकि सिंधु ने दूसरे गेम में जोरदार वापसी की। उन्होंने शुरुआत से ही बेहतर नियंत्रण दिखाया और लगातार अंक जुटाते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। दूसरे गेम में सिंधु ने 21-15 से जीत हासिल कर निर्णायक गेम का रोमांच बढ़ा दिया।

    तीसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला। सिंधु ने कई मौकों पर दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन मैच के अंतिम दौर में वांग झी यी ने धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया। निर्णायक क्षणों में चीनी खिलाड़ी ने लगातार महत्वपूर्ण अंक हासिल किए और 21-17 से तीसरा गेम अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही सिंधु का घरेलू मैदान पर विश्व चैम्पियनशिप में एक और पदक जीतने का सपना टूट गया।

    सिंधु के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वह विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में अब तक पांच पदक जीत चुकी हैं। उनके नाम एक स्वर्ण दो रजत और दो कांस्य पदक हैं। वह विश्व चैम्पियनशिप में पांच पदक जीतने वाली चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं। इस बार भी उनसे शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी। सिंधु ने टूर्नामेंट की शुरुआत मजबूत अंदाज में की थी। राउंड ऑफ 64 में उन्होंने आयरलैंड की सोफिया नोबेल को सीधे गेमों में हराया जबकि राउंड ऑफ 32 में कनाडा की वेन यू झांग के खिलाफ भी जीत दर्ज कर अंतिम 16 में प्रवेश किया था। लेकिन यहां उन्हें तीसरी वरीयता प्राप्त वांग झी यी की चुनौती से पार नहीं मिल सका।

    वांग के खिलाफ सिंधु का रिकॉर्ड भी मुकाबले से पहले भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में नहीं था। दोनों के बीच इससे पहले आठ मुकाबले हो चुके थे जिनमें चीनी खिलाड़ी ने अधिक जीत दर्ज की थी। इस हार के बाद वांग ने एक बार फिर अपनी बढ़त मजबूत कर ली है।

    सिंधु के अलावा भारत के पुरुष वर्ग को भी बड़ा झटका लगा है। आयुष शेट्टी को इंडोनेशिया के अल्वी फरहान ने हराकर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया। इससे एक दिन पहले लक्ष्य सेन को अमेरिका के गैरेट टैन के खिलाफ अप्रत्याशित हार मिली थी। ऐसे में भारत के कई स्टार खिलाड़ियों के बाहर होने से घरेलू विश्व चैम्पियनशिप में भारतीय चुनौती को बड़ा झटका लगा है। हालांकि टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं और बाकी खिलाड़ी अब देश के लिए पदक हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं।

  • नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी

    नासिक TCS केस में 25 दिन की तलाश के बाद गिरफ्तार हुई थी निदा खान अब कोर्ट ने दी जमानत पुलिस के सामने लगानी होगी हाजिरी


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में TCS कार्यालय से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन मामले में आरोपी निदा खान को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर राहत दी है। हालांकि जमानत के साथ अदालत ने शर्त रखी है कि निदा खान को नियमित रूप से संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। यानी मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें समय समय पर पुलिस के सामने उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल आरोपी को राहत मिली है लेकिन मामले की कानूनी जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    यह मामला नासिक के मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज केस नंबर 166/2026 से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि TCS कार्यालय में कुछ कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और इस्लाम से जुड़े रीति रिवाज अपनाने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता था। शिकायत में हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस केस में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    शुरुआत में इस मामले में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें तौसीफ बिलाल अत्तार दानिश एजाज शेख शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी और रजा रफीक मेमन के नाम शामिल थे। जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने निदा खान का नाम भी मामले में जोड़ा और उन्हें आरोपी नंबर पांच बनाया। यानी शुरुआती एफआईआर में उनका नाम नहीं था बल्कि जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस ने उन्हें मामले में आरोपी बनाया।

    पुलिस के अनुसार निदा खान की गिरफ्तारी से पहले करीब 25 दिनों तक उनकी तलाश की गई। इसके बाद नासिक क्राइम ब्रांच और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की टीम ने उन्हें नारेगांव इलाके से गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि वह कैसर कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में मौजूद थीं और वहां उनके चार रिश्तेदार भी मौजूद थे। गिरफ्तारी के बाद मामले में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस ने पूछताछ की।

    जमानत की सुनवाई के दौरान निदा खान की ओर से अदालत में कहा गया कि वह जांच में सहयोग कर रही हैं। अदालत के सामने उनकी गर्भावस्था की बात भी रखी गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दे दी। हालांकि राहत के साथ नियमित पुलिस हाजिरी की शर्त लगाई गई है। इससे साफ है कि जमानत मिलने के बावजूद जांच की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी रहेगी।

    इस मामले की जांच फरवरी 2026 में शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में एक निजी कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला के रमजान के दौरान रोजे रखने का भी जिक्र किया गया था। पुलिस ने मामले की पड़ताल के लिए महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में कंपनी में भेजकर वहां की गतिविधियों की जानकारी जुटाई थी। जांच के दौरान कुछ टीम लीडरों पर कर्मचारियों को परेशान करने और अपने पद का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने के आरोप भी सामने आए थे।

    मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया था। अब निदा खान को भी अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में पुलिस की जांच जारी रहेगी और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी। फिलहाल निदा खान को कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी और जांच में सहयोग करना होगा।

  • यमन और सोमालिया के तटों से समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीयों वाले 2 जहाजों को किया हाइजैक

    यमन और सोमालिया के तटों से समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीयों वाले 2 जहाजों को किया हाइजैक


    सना।
    यमन और सोमालिया (Yemen and Somalia) के तट के पास अलग-अलग घटनाओं में 22 भारतीय नागरिकों (Indian citizens) को लेकर जा रहे दो कॉमर्शियल जहाजों (Two Commercial Ships) को समुद्री लुटेरों (Pirates) ने हाइजैक (Hijack) कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, इन घटनाओं ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका के आसपास के समुद्री इलाकों में एक बार फिर समुद्री डकैती के खतरे को उजागर किया है।


    यमन के पास 16 भारतीयों वाला टैंकर हाइजैक

    पहली घटना में इरिट्रिया के झंडे वाला ऑयल प्रोडक्ट्स टैंकर M.T. Sibu 1 समुद्री लुटेरों के कब्जे में चला गया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक थे। इसे यमन के तट से करीब 30 नॉटिकल मील दूर अदन की खाड़ी में छह हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने हाइजैक किया।

    समुद्री प्रशासन निदेशालय की तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के सभी 20 क्रू सदस्यों के सुरक्षित होने की सूचना है। हालांकि, जहाज और उसके क्रू की ताजा स्थिति का इंतजार किया जा रहा है। क्रू में 16 भारतीयों के अलावा एक सीरियाई, एक सूडानी और एक इराकी नागरिक शामिल है। वहीं, एक अन्य नाविक की राष्ट्रीयता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस एजेंसी से घटना की रिपोर्ट और उसके बाद की नियमित जानकारी e-Navik ऑनलाइन मरीन कैजुअल्टी रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए देने को कहा गया है। SKS Krishiv Marine Services के सुमित कांत सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी ने क्रू के चार सदस्यों की भर्ती की थी और उनके विवरण समुद्री प्रशासन निदेशालय को उपलब्ध करा दिए हैं।


    सोमालिया के पास 6 भारतीयों वाला कार्गो जहाज कब्जे में

    दूसरी घटना में सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास M/V LUTUF नाम के कैमरून-फ्लैग वाले कार्गो जहाज को समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा उद्धृत एक सोमाली अधिकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार को हुई।

    जहाज पर 10 सदस्यीय क्रू था, जिसमें छह भारतीय नागरिक शामिल थे। जहाज को पुंटलैंड के Eyl जिले में Marraya से करीब 3.5 नॉटिकल मील दूर कब्जे में लिया गया और बाद में इसे Nugaal तट की ओर ले जाया गया। क्रू में एक तुर्की नागरिक, एक जॉर्जियाई नागरिक और दो सर्बियाई सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे।

    सोमाली अधिकारी के मुताबिक, पोलर मूवमेंट शिपिंग के स्वामित्व वाला यह जहाज मोगादिशु में तुर्की के एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार लेकर जा रहा था। इसके अलावा जहाज पर संचार और सैटेलाइट उपकरण भी थे।

    अधिकारी ने बताया कि आठ समुद्री लुटेरों ने जहाज को पुंटलैंड के डैंगोरोया जिले में जर्माल के पास तट की ओर ले जाया। माना जा रहा है कि ये वही समूह है जो अप्रैल में M/V Sward के हाईजैक में भी शामिल था।

    हालांकि, M/V LUTUF, उसके क्रू और जहाज पर मौजूद सामान की तत्काल स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। तुर्की के अधिकारियों ने भी घटना पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की थी।

  • भारत विकास की राह पर तेजी से अग्रसर…. 2021 के बाद से GDP ग्रोथ रेट में चीन को छोड़ा पीछे

    भारत विकास की राह पर तेजी से अग्रसर…. 2021 के बाद से GDP ग्रोथ रेट में चीन को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली।
    दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश, भारत (India) और चीन (China), कभी एशियाई सदी (Asian Century) के दो इंजन माने जाते थे. उन्होंने अपनी आर्थिक यात्रा का आधुनिक दौर लगभग एक जैसी आय के स्तर से शुरू किया था, लेकिन जल्द ही उनके रास्ते अलग-अलग हो गए. भारत की आर्थिक वृद्धि दर (India Economic Growth rate) इस समय चीन से तेज नजर आ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP विकास दर का अनुमान 7.7% लगाया गया था, जबकि चीन के लिए यह लगभग 5% था. हालांकि, यह अंतर सिर्फ एक साल का नहीं है. 2015 के बाद से दोनों देशों की ग्रोथ रफ्तार में लगातार बदलाव देखने को मिला है और 2021 से भारत सालाना आर्थिक वृद्धि के मामले में चीन से आगे रहा है।

    1980 में चीन की GDP ग्रोथ करीब 7.9% थी, जबकि भारत 6.7% की दर से बढ़ रहा था. इसके बाद 1980, 1990 और 2000 के दशकों में चीन ने भारत से काफी तेज आर्थिक विस्तार किया. हालांकि, 2010 के दशक में दोनों देशों की ग्रोथ के बीच का अंतर कम होने लगा. वर्ल्ड बैंक के 2025 के आंकड़ों में भारत की ग्रोथ 7.6% और चीन की करीब 5% रही. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के जुलाई 2026 अपडेट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान लगाया गया है।


    कभी बराबर थी दोनों देशों की जीडीपी

    दोनों देशों की आर्थिक यात्रा की शुरुआत पूरी तरह अलग नहीं थी. 1987 में भारत और चीन की नॉमिनल GDP लगभग बराबर थी. PPP यानी Purchasing Power Parity के आधार पर भी 1990 में चीन भारत से बहुत आगे नहीं था. उस समय प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत चीन से आगे था. हालांकि, इसके बाद चीन ने बेहद तेज गति से आर्थिक विस्तार किया. 1961 से 2024 के बीच चीन 22 बार 10% से ज्यादा सालाना GDP ग्रोथ दर्ज कर चुका है, जबकि भारत इस अवधि में कभी भी 10% की सालाना वृद्धि दर तक नहीं पहुंचा।

    आर्थिक आकार में चीन अभी बहुत आगे
    तेज ग्रोथ के बावजूद भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में बड़ा अंतर है. 2025 में चीन की नॉमिनल GDP करीब 19.5 ट्रिलियन डॉलर रही, जबकि भारत की GDP करीब 3.96 ट्रिलियन डॉलर थी. PPP के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था करीब 41 ट्रिलियन डॉलर और भारत की लगभग 17.7 ट्रिलियन डॉलर रही. प्रति व्यक्ति GDP में भी दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर है. नॉमिनल आधार पर चीन की प्रति व्यक्ति GDP करीब 13,806 डॉलर थी, जबकि भारत में यह लगभग 2,818 डॉलर रही।


    चीन का मॉडल और भारत की ताकत

    चीन ने दशकों तक इंडस्ट्री, एक्सपोर्ट और बड़े पैमाने पर निवेश के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया. दूसरी ओर, भारत की आर्थिक वृद्धि में घरेलू मांग, सर्विसेज और निजी खपत की बड़ी भूमिका रही है. 2024 में भारत में घरेलू खपत GDP का करीब 61% थी. व्यापक तौर पर देखें तो भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 70% हिस्सा खपत से जुड़ा है. चीन में घरेलू खपत का GDP में हिस्सा करीब 40% रहा।


    चीन की धीमी रफ्तार के पीछे क्या वजह

    चीन की मौजूदा सुस्ती को सिर्फ एक कमजोर साल के तौर पर नहीं देखा जा सकता. वहां प्रॉपर्टी सेक्टर का संकट, डेवलपर्स पर कर्ज का दबाव, संपत्तियों की गिरती कीमतें, कमजोर उपभोक्ता भरोसा और जनसांख्यिकीय चुनौतियां आर्थिक मांग पर असर डाल रही हैं. इन चुनौतियों के बीच चीन EV, बैटरी, सोलर उपकरण और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर पर जोर दे रहा है. हालांकि, इन क्षेत्रों में बढ़ती उत्पादन क्षमता के कारण ओवरकैपेसिटी की चिंता भी बढ़ी है. इससे चीन की बाहरी बाजारों पर निर्भरता और ट्रेड बैरियर का जोखिम बढ़ सकता है।


    भारत के सामने बड़ा मौका, आर्थिक आंकड़े पॉजिटिव

    पोस्ट-कोविड दौर में ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव भारत के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है. कई मल्टीनेशनल कंपनियां भारत को सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग बेस नहीं, बल्कि बड़े कंज्यूमर मार्केट के तौर पर भी देख रही हैं. लेकिन यहां एक बड़ी चुनौती भी है. अगर हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग चीन, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में बनी रहती है और भारत मुख्य रूप से दूसरे देशों में तैयार सामान का बड़ा बाजार बन जाता है, तो इसका फायदा सीमित रह सकता है. भारत के मौजूदा आर्थिक आंकड़े उम्मीद जगाते हैं. देश का कंजम्पशन इंजन मजबूत है, सर्विस सेक्टर टिकाऊ बना हुआ है, और यहां की आबादी व बाजार का आकार ऐसे मौके देता है जो बहुत कम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मिलते हैं।


    असली चुनौती ग्रोथ को रोजगार और आय में बदलना

    भारत का चीन से तेज बढ़ना निश्चित तौर पर एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन सिर्फ GDP ग्रोथ रेट पूरी तस्वीर नहीं बताती. चीन अब भी आर्थिक आकार, प्रति व्यक्ति आय और औद्योगिक क्षमता के मामले में भारत से काफी आगे है. भारत के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या वह तेज आर्थिक वृद्धि को ज्यादा रोजगार, बेहतर आय, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और जीवन स्तर में सुधार में बदल पाता है. IMF और वर्ल्ड बैंक के अनुमान फिलहाल भारत की ग्रोथ रफ्तार को चीन से बेहतर दिखा रहे हैं. लेकिन अब सबसे जरूरी सवाल यह नहीं है कि क्या भारत चीन से तेजी से विकास कर सकता है. बल्कि सवाल यह है कि क्या भारत उस बढ़त को इतने लंबे समय तक बनाए रख सकता है जिससे इन दो एशियाई दिग्गजों के बीच पैदा हुए भारी आर्थिक अंतर को खत्म किया जा सके।