Author: bharati

  • तीस्ता पर चीन-बांग्लादेश समझौता, भारत के लिए बढ़ी टेंशन? सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नई रणनीतिक हलचल

    तीस्ता पर चीन-बांग्लादेश समझौता, भारत के लिए बढ़ी टेंशन? सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नई रणनीतिक हलचल


    नई दिल्ली । चीन और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी परियोजना को लेकर सहयोग का नया अध्याय शुरू हो गया है। दोनों देशों ने तीस्ता सहित अन्य नदियों के जल प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और संभावित वित्तीय सहायता को लेकर सहमति जताई है। इस फैसले को भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तीस्ता नदी परियोजना भारत के बेहद संवेदनशील सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के निकट स्थित है। यही संकरा भूभाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे अहम संपर्क मार्ग है।

    बीजिंग में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर व्यापक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। बांग्लादेश ने तीस्ता परियोजना के लिए चीन से आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहयोग की मांग भी की है। चीन लंबे समय से इस परियोजना में रुचि दिखाता रहा है और अब दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों ने इस सहयोग को नई गति दे दी है।

    तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक चीन दौरा माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने जल संसाधन प्रबंधन के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि तीस्ता परियोजना से सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और लाखों लोगों की आजीविका बेहतर होगी।

    हालांकि इस समझौते को भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। परियोजना का स्थान सिलिगुड़ी कॉरिडोर के काफी निकट होने के कारण विशेषज्ञ इसे सामरिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हैं। यही कारण है कि चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भारत की नजर बनी हुई है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। पश्चिम बंगाल की सहमति नहीं बनने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापक जल समझौता अब तक नहीं हो सका है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा चीन के साथ बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह सहयोग जल संसाधन प्रबंधन और विकास परियोजनाओं तक सीमित बताया जा रहा है, लेकिन भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना का वास्तविक स्वरूप क्या होता है और इसका क्षेत्रीय सुरक्षा तथा कूटनीतिक संबंधों पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • डेनमार्क में अजान पर बैन की तैयारी! सरकार बोली- ऐसा न लगे कि इस्लामाबाद में हैं

    डेनमार्क में अजान पर बैन की तैयारी! सरकार बोली- ऐसा न लगे कि इस्लामाबाद में हैं


    नई दिल्ली । यूरोप में प्रवासन और धार्मिक पहचान को लेकर जारी बहस के बीच डेनमार्क ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना की समीक्षा कर रही है। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक वातावरण को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। हालांकि अभी यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

    डेनमार्क के इमिग्रेशन मंत्री मोर्टेन बोडस्कोव ने कहा कि सरकार यह जांच कर रही है कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के प्रावधानों के तहत अजान पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क की छतों के ऊपर लाउडस्पीकर से अजान की आवाज नहीं सुनाई देनी चाहिए और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी दूसरे देश के धार्मिक माहौल में हैं। उनके इस बयान ने पूरे यूरोप में नई बहस छेड़ दी है।

    सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक उद्घोषणाओं को नियंत्रित करना देश की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए जरूरी हो सकता है। वहीं दूसरी ओर इस प्रस्ताव के विरोध में यह दलील दी जा रही है कि डेनमार्क का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और सार्वजनिक रूप से धार्मिक गतिविधियां करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा पर रोक लगाने का फैसला कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।

    डेनमार्क में लगभग 2.7 लाख मुस्लिम आबादी रहती है और पूरे देश में करीब 100 मस्जिदें हैं। हाल के वर्षों में यूरोप के कई देशों में प्रवासन हिजाब धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हुई है। कई देशों ने पहले भी धार्मिक प्रतीकों और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर नए नियम लागू किए हैं।

    सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की राय ले रही है ताकि यह तय किया जा सके कि प्रस्ताव संविधान और मानवाधिकार संबंधी कानूनों के अनुरूप है या नहीं। यदि कानूनी समीक्षा सकारात्मक रहती है तो सरकार संसद में नया विधेयक ला सकती है। हालांकि इसके लिए राजनीतिक सहमति और संसदीय मंजूरी भी जरूरी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल अजान तक सीमित नहीं है बल्कि यूरोप में राष्ट्रीय पहचान धार्मिक स्वतंत्रता और प्रवासन नीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में डेनमार्क सरकार की कानूनी समीक्षा और राजनीतिक निर्णय पर पूरे यूरोप की नजर रहेगी क्योंकि इसका असर अन्य देशों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।

  • भारत-सेशेल्स रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री मोदी

    भारत-सेशेल्स रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली । सेशेल्स की आजादी की 50वीं वर्षगांठ भारत और सेशेल्स के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का अवसर बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रहेंगे, जहां वह राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भरोसेमंद संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर सेशेल्स में उत्साह का माहौल है। स्थानीय नागरिकों से लेकर भारतीय समुदाय तक सभी इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि भारत और सेशेल्स के बीच पिछले कुछ वर्षों में सहयोग लगातार बढ़ा है और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा इस साझेदारी को नई गति देगी। उनका मानना है कि व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा और विकास परियोजनाओं में सहयोग और मजबूत होगा।

    सेशेल्स में रहने वाले भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री के दौरे का गर्मजोशी से स्वागत किया है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद मजबूत हैं। बड़ी संख्या में भारतीय सेशेल्स की अर्थव्यवस्था, व्यापार और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर की यह यात्रा दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को और गहरा करेगी तथा नए अवसरों के द्वार खोलेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स की यात्रा कर चुके हैं। इस बार उनका दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है क्योंकि यह सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर हो रहा है। समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे, जो दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा और समुद्री सहयोग का प्रतीक होंगे।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश, विकास सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, जलवायु परिवर्तन और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। प्रधानमंत्री सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।

    भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच गहरे संपर्क पर आधारित रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। भारत के ‘महासागर’ विजन और ग्लोबल साउथ को मजबूत करने की नीति में भी सेशेल्स की अहम भूमिका है। यही वजह है कि यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा और व्यापक होगा तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के साझा लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत की दमदार पैरवी शांति निर्माण के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व और समान साझेदारी पर दिया जोर

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की दमदार पैरवी शांति निर्माण के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व और समान साझेदारी पर दिया जोर


    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित उच्चस्तरीय बहस के दौरान भारत ने वैश्विक शांति निर्माण को लेकर अपना स्पष्ट और दूरदर्शी दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि किसी भी देश में स्थायी शांति तभी स्थापित की जा सकती है जब उसकी अगुवाई स्वयं उस देश के नेतृत्व के हाथों में हो और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बराबरी सम्मान तथा विश्वास के आधार पर आगे बढ़े। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब पारंपरिक दाता और प्राप्तकर्ता वाले मॉडल से आगे बढ़ने का समय आ गया है।

    पी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र में पहले पीसबिल्डिंग वीक के दौरान आयोजित शांति निर्माण आयोग के वार्षिक सत्र और संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बहस में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि शांति निर्माण की पूरी प्रक्रिया मांग आधारित होनी चाहिए। इसका उद्देश्य संबंधित देशों की वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका सहयोगी की होनी चाहिए न कि निर्णय थोपने वाले पक्ष की।

    उन्होंने कहा कि किसी भी शांति निर्माण अभियान की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब वह संबंधित देश की संस्थागत क्षमता को मजबूत करे और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उसे आत्मनिर्भर बनाए। मजबूत संस्थाएं और सक्षम प्रशासन ही दीर्घकालिक शांति की सबसे बड़ी गारंटी हैं।

    भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण संरचना के बीस वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण व्यवस्था की चौथी समीक्षा पहली राष्ट्रीय शांति निर्माण रणनीति की प्रस्तुति और पीसबिल्डिंग फंड के साथ पहला वार्षिक रणनीतिक संवाद शामिल है। उन्होंने इन पहलों को वैश्विक शांति प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उन्होंने यह भी चिंता जताई कि पिछले तीन वर्षों में पीसबिल्डिंग फंड के लिए स्वैच्छिक योगदान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा वित्तीय स्थिति का भी शांति निर्माण कार्यक्रमों पर असर पड़ा है। भारत का मानना है कि सीमित संसाधनों का उपयोग सबसे अधिक उन देशों में किया जाना चाहिए जो संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। इससे उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    पी हरीश ने कहा कि इस वर्ष आयोजित पीसबिल्डिंग वीक की थीम नवाचार समावेशन और प्रभाव के लिए साझेदारी वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में बेहद प्रासंगिक है। भारत भरोसे और समानता पर आधारित साझेदारी को शांति निर्माण की सबसे मजबूत नींव मानता है। उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारी तभी सफल होगी जब राष्ट्रीय स्वामित्व हर प्रक्रिया का मूल सिद्धांत बना रहेगा।

    भारत ने महिलाओं की भूमिका को भी शांति निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। पी हरीश ने हाल ही में भारत की मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 का मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर सम्मान मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिलाओं शांति और सुरक्षा के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्र निर्माण के अनुभव और विकास मॉडल को दुनिया के साथ साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सभी साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

  • 26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए डेटाबेस माइग्रेशन तथा क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेशन कर रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के चलते 26 जून से 30 जून तक ईपीएफओ की कई प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। इस दौरान सदस्य और नियोक्ता दोनों ही कई जरूरी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    ईपीएफओ के अनुसार, 26 जून की मध्यरात्रि से 30 जून की रात 11:59 बजे तक मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन पांच दिनों के दौरान उपयोगकर्ता अपने खाते में लॉग इन नहीं कर पाएंगे, जिससे ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कई कार्य पूरी तरह बाधित रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि सभी सेवाएं 1 जुलाई से दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस अवधि में कर्मचारी नया पीएफ क्लेम जमा नहीं कर सकेंगे और पहले से जमा क्लेम की स्थिति भी ऑनलाइन नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा ई-पासबुक डाउनलोड करने या खाते का विवरण देखने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। जिन कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते से संबंधित किसी प्रक्रिया को पूरा करना है, उन्हें सेवाएं बहाल होने तक इंतजार करना होगा।

    नियोक्ताओं पर भी इस तकनीकी अपग्रेडेशन का असर पड़ेगा। वे इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल नहीं कर सकेंगे और नए कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। इससे नई नियुक्तियों और नियमित मासिक अनुपालन से जुड़े कुछ कार्य निर्धारित अवधि तक प्रभावित रह सकते हैं।

    ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन की डिजिटल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सिस्टम माइग्रेशन पूरा होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के पहले से अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित होने की उम्मीद है। इसलिए यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संगठन ने सदस्यों और नियोक्ताओं से अपील की है कि जिन कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवाओं की आवश्यकता है, वे उन्हें 1 जुलाई के बाद पूरा करने की योजना बनाएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन से भविष्य में क्लेम निपटान की गति बेहतर होगी और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। हालांकि जिन कर्मचारियों को तत्काल पीएफ निकासी, क्लेम स्टेटस या अन्य डिजिटल सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें अगले कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। 1 जुलाई से सभी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना जताई गई है।

  • वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम

    वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम


    नई दिल्ली । अमेरिका की ट्रंप सरकार वीजा प्रोसेसिंग और कानूनी इमिग्रेशन सेवाओं में बड़ा डिजिटल बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नई तकनीक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए पूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया को पहले से अधिक तेज सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है। इस पहल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करना कागजी कार्रवाई घटाना और सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे भविष्य में लाखों वीजा आवेदकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष बताया कि गृह सुरक्षा विभाग तेजी से इमिग्रेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ऐसा ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आवेदन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम करेगा।

    मुलिन के अनुसार पहला एआई आधारित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स यानी डीएसीए कार्यक्रम के लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का तेजी से समाधान संभव होगा और आगे आने वाले आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा।

    सरकार आवेदन प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों को भी समाप्त करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें अधूरा या गलत आवेदन जमा ही नहीं किया जा सकेगा। इससे बार बार दस्तावेज लौटने और सुधार के कारण होने वाली देरी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा तकनीक इस बदलाव को संभव बना सकती है और अब जरूरत केवल उसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है।

    गृह सुरक्षा विभाग वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक आधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आवेदक अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी कर पाएंगे। मार्कवेन मुलिन ने बताया कि उन्होंने इस योजना की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी है और राष्ट्रपति ने इस पहल का समर्थन किया है।

    सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न केवल आवेदकों को सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। वीजा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ता है। इसलिए सरकार तकनीक के जरिए दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।

    मुलिन ने बताया कि एच टू ए कृषि वीजा की प्रोसेसिंग अवधि पहले ही घटाकर लगभग 15 दिन कर दी गई है। अब सरकार डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए भी नए विकल्पों पर विचार कर रही है क्योंकि वर्तमान वीजा नियम वहां की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के दौरान स्वीकृत कई इमिग्रेशन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त स्क्रीनिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं जिससे केवल पात्र और नियमों के अनुरूप आवेदकों को ही मंजूरी मिले।

    भारत अमेरिका में पढ़ाई रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। ऐसे में यदि एआई आधारित वीजा प्रोसेसिंग सफल होती है तो हजारों भारतीय छात्रों पेशेवरों और कानूनी आवेदकों को तेज सेवा और बेहतर डिजिटल अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही दी जाएगी।

  • बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन

    बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन


    नई दिल्ली । दुनिया भर में तेजी से बढ़ते साइबर हमलों और डिजिटल जासूसी की घटनाओं के बीच अमेरिका अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी साइबर रक्षा एजेंसी साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी यानी सीआईएसए का व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा ताकि चीन रूस ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से मिलने वाली साइबर चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष कहा कि मौजूदा समय में साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार विदेशी साइबर हमले केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं हैं बल्कि निजी कंपनियों बैंकिंग नेटवर्क ऊर्जा क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में सीआईएसए की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    मुलिन ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी अपनी मूल जिम्मेदारियों से भटक गई थी और अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य केवल एजेंसी को दोबारा सक्रिय करना नहीं बल्कि उसे दुनिया की सबसे सक्षम साइबर सुरक्षा संस्थाओं में शामिल करना है। इसके लिए नए नेतृत्व की नियुक्ति की जा रही है और अनुभवी विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा ताकि एजेंसी आधुनिक साइबर खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम बन सके।

    उन्होंने बताया कि फिलहाल एजेंसी अपनी जरूरत के मुकाबले लगभग आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। सरकार का अनुमान है कि करीब 600 नए विशेषज्ञों की भर्ती से इसकी कार्यक्षमता में बड़ा सुधार आएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पुराने पदों को भरना जरूरी नहीं है बल्कि जरूरत के अनुसार विशेषज्ञता आधारित नियुक्तियां की जाएंगी।

    गृह सुरक्षा सचिव के अनुसार एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रिया होगी और नए निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। इस दौरान संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ तकनीकी क्षमताओं को भी नई दिशा दी जाएगी।

    मुलिन ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर साझेदारी पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि मेटा गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां अकेले साइबर अपराधियों और विदेशी हैकर समूहों का मुकाबला नहीं कर सकतीं। इसके लिए सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान तथा संयुक्त रणनीति की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि गृह सुरक्षा विभाग अपने आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को खत्म किया जा सके और साइबर ऑपरेशन अधिक तेज और प्रभावी बन सकें। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीकों को देखते हुए भविष्य में कांग्रेस से नए कानूनी दिशा निर्देश भी मांगे जा सकते हैं।

    अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ साइबर सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। भारत सहित कई साझेदार देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा साइबर रेजिलिएंस और उभरती तकनीकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साइबर युद्ध और डिजिटल सुरक्षा किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम आधार बनने वाले हैं और इसी दिशा में अमेरिका अपनी तैयारियों को नई गति दे रहा है।

  • 7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय

    7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय


    नई दिल्ली । वेनेजुएला में बुधवार शाम आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुकाबले हालात कहीं अधिक गंभीर साबित हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 235 हो गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। लगातार चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में भी बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।

    समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निजी कंपनियों को भारी मशीनें और मलबा हटाने वाले उपकरण तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ताकि बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही सरकार ने 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर का विशेष राहत कोष बनाने का फैसला किया है जिससे प्रभावित परिवारों और क्षेत्रों को आर्थिक सहायता मिल सके। कारोबारियों को राहत देने के लिए विशेष ऋण सुविधा भी शुरू की जा रही है ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को जल्द दोबारा पटरी पर लाया जा सके।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने बताया कि यह देश में कई दशकों बाद आई सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। उनके अनुसार करीब 200 लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल दिन रात अभियान चला रहे हैं और समय के साथ जीवन बचाने की चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हर संभव संसाधन बचाव अभियान में लगाए गए हैं और प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।

    विदेश मंत्री इवान गिल ने जानकारी दी कि वेनेजुएला सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता के समन्वय के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कम से कम एक दर्जन देशों ने राहत सामग्री विशेषज्ञ टीमों और तकनीकी सहयोग की पेशकश की है। सरकार इन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है ताकि प्रभावित इलाकों तक जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।

    बुधवार को आए दोनों भूकंपों की तीव्रता क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई थी। दोनों झटके लगभग 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आए जिससे उनका असर अत्यधिक विनाशकारी रहा। उत्तर मध्य राज्य ला गुएरा और राजधानी काराकस महानगरीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों के बीच एक मिनट से भी कम का अंतर था और उसके बाद आए लगातार आफ्टरशॉक्स ने पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ा दिया है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वेनेजुएला को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल राहत कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने भी वेनेजुएला के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए बचाव एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम भेजने की तैयारी का ऐलान किया है। वैश्विक सहयोग के बीच अब वेनेजुएला के सामने सबसे बड़ी चुनौती राहत कार्यों को तेज करते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और सामान्य जीवन बहाल करना है।

  • 150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

    150 इंजेक्शन, लंबा इंतजार और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, अनुष्का रंजन ने साझा किया IVF के जरिए मां बनने का कठिन सफर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री अनुष्का रंजन ने मां बनने के अपने सफर को लेकर खुलकर बात करते हुए आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान झेली गई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का अनुभव साझा किया है। हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा करने वाली अनुष्का ने बताया कि मातृत्व तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। इसके पीछे लंबा इलाज, लगातार चिकित्सकीय प्रक्रियाएं और कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव शामिल रहे। उन्होंने अपने अनुभव को साझा कर उन महिलाओं का हौसला बढ़ाने की कोशिश की है, जो इसी तरह की परिस्थितियों का सामना कर रही हैं।

    अनुष्का रंजन ने बताया कि उन्होंने और उनके पति आदित्य सील ने परिवार बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से विचार करने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह ली। सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं होने पर दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, यह उपचार केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद थकाने वाला साबित हुआ। कई बार उन्हें लगा कि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनके लिए बेहद कठिन हो जाएगा।

    अभिनेत्री ने बताया कि उपचार के दौरान उन्हें 150 से अधिक इंजेक्शन लेने पड़े। कई बार इंजेक्शन का दर्द इतना अधिक होता था कि आंखों में आंसू आ जाते थे। शुरुआती चरण में उनके पति आदित्य सील स्वयं उन्हें इंजेक्शन लगाने में मदद करते थे और हर कठिन पल में उनका हौसला बढ़ाते थे। अनुष्का के मुताबिक, लगातार दवाइयों, जांचों और उपचार के बीच कई ऐसे क्षण आए जब उन्होंने मानसिक रूप से खुद को बेहद कमजोर महसूस किया, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

    उन्होंने कहा कि आईवीएफ केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनात्मक परीक्षा भी है। इस दौरान महिलाएं शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक दबाव, चिंता और अनिश्चितता से भी गुजरती हैं। इसलिए इस विषय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि समाज में आईवीएफ को लेकर सही जानकारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस उपचार से गुजर रही महिलाओं को बेहतर समझ और भावनात्मक सहयोग मिल सके।

    अनुष्का ने बताया कि इस विषय पर उनकी बहन आकांक्षा ने भी उन्हें कई महत्वपूर्ण बातें समझाईं। उनके अनुसार, समाज में अक्सर यह धारणा बना दी जाती है कि विवाह के बाद गर्भधारण आसानी से हो जाता है, जबकि वास्तविकता कई बार इससे अलग होती है। विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान उन्हें यह समझ आया कि प्रत्येक ओव्यूलेशन चक्र में गर्भधारण की संभावना सीमित होती है। इस जानकारी ने उन्हें प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद की।

    अभिनेत्री का कहना है कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें महिलाओं की मानसिक और शारीरिक क्षमता का नया एहसास कराया। उनका मानना है कि मातृत्व का सफर हर महिला के लिए अलग होता है और किसी की परिस्थितियों का आकलन बिना पूरी जानकारी के नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन महिलाओं से भी सकारात्मक बने रहने की अपील की जो किसी कारणवश गर्भधारण में कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।

    अनुष्का रंजन ने इस अवसर पर पुरुषों से भी संवेदनशीलता और सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पत्नी या जीवनसाथी आईवीएफ जैसी प्रक्रिया से गुजर रही हैं, तो उन्हें धैर्य, समझ और भावनात्मक समर्थन देना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, परिवार का साथ इस कठिन सफर को काफी हद तक आसान बना सकता है। उन्होंने कहा कि अपने अनुभव को सार्वजनिक करने का उद्देश्य आईवीएफ से जुड़ी झिझक को कम करना और इस विषय पर खुलकर संवाद को बढ़ावा देना है।

  • महिला टी20 विश्व कप में भारत की शानदार जीत, बांग्लादेश को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल की उम्मीदों को दी नई मजबूती

    महिला टी20 विश्व कप में भारत की शानदार जीत, बांग्लादेश को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल की उम्मीदों को दी नई मजबूती

    नई दिल्ली । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बांग्लादेश को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम इंडिया ने 137 रन के लक्ष्य को 16.5 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल करते हुए टूर्नामेंट में अपनी तीसरी जीत दर्ज की। इस महत्वपूर्ण सफलता के साथ भारतीय टीम ने अंकतालिका में अपनी दावेदारी मजबूत रखी है और अब उसकी निगाहें अंतिम लीग मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले अहम मैच पर टिकी हैं।

    मुकाबले में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। फील्डिंग के दौरान कुछ आसान कैच जरूर छूटे, लेकिन गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट निकालकर बांग्लादेश को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका नहीं दिया। निर्धारित 20 ओवर में बांग्लादेश की टीम छह विकेट के नुकसान पर 136 रन ही बना सकी।

    भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में राधा यादव सबसे प्रभावशाली रहीं। उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकेट लेकर मध्यक्रम को पूरी तरह झकझोर दिया और रनगति पर लगातार नियंत्रण बनाए रखा। युवा स्पिनर श्री चरणी ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट अपने नाम किए। तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर और नंदिनी शर्मा ने भी एक-एक विकेट लेकर विपक्षी टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोका। गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन ने भारत के लिए लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बनने नहीं दिया।

    137 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और शुरुआती झटका जल्दी लग गया। इसके बाद शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। उन्होंने केवल 34 गेंदों में 53 रन की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली। अपनी पारी के दौरान शेफाली ने आकर्षक स्ट्रोक्स के साथ तेज रनगति बनाए रखी और बांग्लादेशी गेंदबाजों को दबाव में ला दिया।

    शेफाली के आउट होने के बाद मध्यक्रम ने भी जिम्मेदारी निभाई। यास्तिका भाटिया ने 23 रन की उपयोगी पारी खेलकर टीम को संभाला, जबकि जेमिमा रोड्रिग्स ने महज 14 गेंदों में 26 रन बनाकर जीत की राह आसान कर दी। ऋचा घोष ने भी महत्वपूर्ण समय पर उपयोगी योगदान दिया। बल्लेबाजों के संतुलित प्रदर्शन के दम पर भारत ने 19 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया, जिससे नेट रन रेट के लिहाज से भी टीम को महत्वपूर्ण फायदा मिला।

    शानदार अर्धशतकीय पारी खेलने वाली शेफाली वर्मा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने पूरे मैच के दौरान आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ बल्लेबाजी करते हुए विपक्षी टीम को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। वहीं गेंदबाजी में राधा यादव और श्री चरणी की प्रभावी भूमिका भारतीय जीत की सबसे बड़ी वजहों में शामिल रही।

    इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, लेकिन अंतिम चार में जगह सुनिश्चित करने के लिए अगला मुकाबला बेहद अहम साबित होगा। भारत का अंतिम लीग मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला जाएगा, जिसे टूर्नामेंट का निर्णायक मुकाबला माना जा रहा है। यदि भारतीय टीम इस चुनौती को पार करने में सफल रहती है तो सेमीफाइनल का टिकट लगभग तय हो जाएगा। ऐसे में टीम अब पूरे आत्मविश्वास और बेहतर लय के साथ अगले मुकाबले की तैयारी में जुट गई है।