Author: bharati

  • माधव चौक पर रातभर गूंजे माता के भजन, अमोला पुल पर विसर्जन के दौरान मची अफरा-तफरी, बेहोश युवक को बचाया

    माधव चौक पर रातभर गूंजे माता के भजन, अमोला पुल पर विसर्जन के दौरान मची अफरा-तफरी, बेहोश युवक को बचाया


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर को माता रानी की प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम के साथ किया गया। श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल के आयोजन में शहर के माधव चौक से आकर्षक झांकियां निकाली गईं। इस दौरान भव्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और माता की प्रतिमाओं के साथ निकली झांकियों का आयोजन समिति की ओर से सम्मान किया गया। पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहा और देर रात तक डीजे तथा ढोल की धुन पर युवा माता के भजनों पर झूमते नजर आए। वहीं अमोला पुल पर बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार सुबह तक जारी रहा। इस दौरान विसर्जन की व्यवस्थाओं को लेकर पुलिस और वहां पहुंचे लोगों के बीच गहमा-गहमी भी देखने को मिली। इसी बीच पानी में ट्यूब पर बैठा एक युवक अचानक चक्कर आने से बेहोश हो गया। उसके साथ मौजूद युवकों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पानी में डूबने से बचा लिया।

    माधव चौक पर रातभर रही उत्सव की रौनक

    दशहरे के अवसर पर माधव चौक पर भव्य मंच तैयार किया गया था। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ माता रानी की आकर्षक झांकियां निकाली गईं। आयोजन समिति ने झांकियों का सम्मान कर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। शहर के अलग-अलग इलाकों के साथ बाहर से भी डीजे और ढोल की टीमें पहुंचीं। उनकी धुन पर युवा देर रात तक माता के भजनों पर नाचते रहे। माधव चौक पर अलग-अलग डीजे के बीच तेज संगीत बजाने की होड़ भी दिखाई दी। कई जगहों पर एक-दूसरे के पास खड़े होकर डीजे बजाए गए और युवाओं ने जमकर नृत्य किया। श्रद्धा और उत्साह के बीच पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।

    अमोला पुल पर सुबह तक चलता रहा विसर्जन

    शहर में निकलीं माता की बड़ी प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए अमोला पुल ले जाया गया। यहां मंगलवार रात से शुरू हुआ विसर्जन बुधवार सुबह तक चलता रहा। बड़ी प्रतिमाओं को पानी तक पहुंचाने और विसर्जन की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। लगातार आवाजाही के कारण मौके पर भीड़ बनी रही। व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस और विसर्जन करने पहुंचे कुछ लोगों के बीच गहमा-गहमी की स्थिति भी बनी। प्रतिमाओं के आकार और भीड़ को देखते हुए विसर्जन का काम सुबह तक जारी रहा।

    ट्यूब पर बैठा युवक चक्कर आने से हुआ बेहोश

    अमोला पुल के नीचे पानी में कुछ युवक ट्यूब पर बैठकर प्रतिमा विसर्जन के दौरान क्रेन का पट्टा निकाल रहे थे। इसी दौरान एक युवक को अचानक चक्कर आया और वह बेहोश हो गया। पानी में मौजूद उसके साथियों ने उसे संभालते हुए पकड़ लिया और डूबने से बचाया। इसके बाद युवक को पानी से बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार युवक की हालत सामान्य बताई गई है। इस घटना के बाद विसर्जन के दौरान पानी में उतरने और भारी प्रतिमाओं के आसपास काम करने के समय सावधानी बरतने की जरूरत एक बार फिर सामने आई। विजयादशमी पर जहां शहर में धार्मिक उत्साह और भव्य आयोजनों की रौनक रही वहीं अमोला पुल पर हुई इस घटना ने विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को भी उजागर किया।

  • पत्नी को दूसरे युवक के साथ देख पति ने खोया आपा, शिवपुरी में बीच सड़क पर मारपीट, महिला की शिकायत पर कार्रवाई

    पत्नी को दूसरे युवक के साथ देख पति ने खोया आपा, शिवपुरी में बीच सड़क पर मारपीट, महिला की शिकायत पर कार्रवाई


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में धार्मिक पर्यटन स्थल भदैया कुंड पर मंगलवार को पति पत्नी के बीच विवाद का मामला सामने आया। आरोप है कि पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखकर पति भड़क गया और अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर महिला और उसके दोस्त की बेल्ट से पिटाई कर दी। घटना का वीडियो बुधवार को सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित लोगों को थाने ले गई। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसके पति के खिलाफ मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई भी की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार पूजा मंगलवार दोपहर अपने एक दोस्त के साथ शिवपुरी के भदैया कुंड घूमने पहुंची थी। इसी दौरान वहां उसका पति गोविंद भी पहुंच गया। पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखकर वह नाराज हो गया। आरोप है कि इसके बाद गोविंद ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी। बताया गया है कि महिला के दोस्त के पैर बांध दिए गए और फिर दोनों को बेल्ट से पीटा गया। इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। बुधवार को यह वीडियो सामने आया जिसमें दो युवक महिला और एक युवक को बेल्ट से मारते दिखाई दे रहे हैं।

    घटना की जानकारी मिलने पर डायल 112 की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए संबंधित लोगों को फिजिकल थाने पहुंचाया। इसके बाद महिला ने अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि घटना के सभी पहलुओं और मारपीट से पहले हुए विवाद की विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    बताया गया है कि पूजा और गोविंद के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी वजह से महिला कुछ दिनों से अपने मायके में रह रही थी। मंगलवार को भदैया कुंड पर दोनों का आमना-सामना हुआ और इसके बाद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि पति ने गुस्से में आकर कानून अपने हाथ में ले लिया और पत्नी तथा उसके दोस्त के साथ मारपीट की। घरेलू विवाद की स्थिति में इस तरह हिंसा करना कानूनन कार्रवाई का कारण बन सकता है। किसी भी विवाद का समाधान मारपीट के जरिए नहीं किया जा सकता।

    फिजिकल थाना प्रभारी अवनीश सिंह राठौड़ ने बताया कि महिला की शिकायत पर गोविंद के खिलाफ मारपीट से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। साथ ही शांति भंग करने के मामले में बुधवार को उसे जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर विवाद के दौरान हिंसा की समस्या को सामने ला दिया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। मामले में अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे के तथ्य सामने आएंगे।

  • हॉस्टल में खाने की गुणवत्ता पर सवाल, भोपाल में छात्राओं का प्रदर्शन, बोलीं- भोजन में कीड़े निकलते हैं और पानी भी साफ नहीं

    हॉस्टल में खाने की गुणवत्ता पर सवाल, भोपाल में छात्राओं का प्रदर्शन, बोलीं- भोजन में कीड़े निकलते हैं और पानी भी साफ नहीं


    भोपाल। भोपाल के कटारा हिल्स स्थित गर्ल्स हॉस्टल में भोजन और पेयजल की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं ने बुधवार सुबह प्रदर्शन किया। छात्राओं ने हॉस्टल में परोसे जाने वाले खाने में कीड़े निकलने और पीने का पानी साफ नहीं होने की शिकायत की है। उनका कहना है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। भोजन और पानी जैसी जरूरी व्यवस्थाओं में लापरवाही से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है। अपनी समस्याओं को लेकर छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में आवाज उठाई और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था सुधारने की मांग की।

    प्रदर्शन कर रही छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उनके मुताबिक खाने में कीड़े निकलने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। छात्राओं ने सवाल उठाया कि छात्रावास में रहने वाली लड़कियों को यदि साफ और सुरक्षित भोजन नहीं मिलेगा तो उनके स्वास्थ्य की देखभाल कैसे होगी। उनका कहना है कि भोजन तैयार करने और परोसने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। खाने की गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए ताकि छात्राओं को किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

    छात्राओं ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हॉस्टल में वाटर कूलर और साफ पीने के पानी की व्यवस्था में कमियां हैं। छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के लिए स्वच्छ पेयजल बेहद जरूरी है क्योंकि दूषित पानी से पेट संबंधी संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में पानी की नियमित सफाई और उसकी गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्राओं ने मांग की कि वाटर कूलर की साफ-सफाई कराई जाए और पीने के लिए सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जाए।

    स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी SFI भोपाल के बैनर तले छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने भोजन और पानी के साथ-साथ छात्रावास की स्वच्छता और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि हॉस्टल केवल रहने की जगह नहीं है बल्कि छात्राओं की पढ़ाई और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यहां ऐसा वातावरण होना चाहिए जिसमें छात्राएं बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। बुनियादी सुविधाओं में कमी होने से उनकी दिनचर्या और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने प्रशासन से मांग की कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय भोजन की गुणवत्ता में सुधार पेयजल की उचित व्यवस्था और परिसर की साफ-सफाई पर नियमित निगरानी जरूरी है। छात्राओं ने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी मामले में तत्काल कार्रवाई करेंगे और हॉस्टल में रहने वाली सभी छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    अब इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि शिकायतों की जांच में भोजन या पेयजल की व्यवस्था में खामियां मिलती हैं तो उन्हें जल्द दूर किया जाना चाहिए। छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को स्वच्छ भोजन सुरक्षित पेयजल और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है। फिलहाल छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान समस्याओं की ओर आकर्षित किया है।

  • अंग्रेजों के सामने वंदेमातरम का उद्घोष, RSS संस्थापक हेडगेवार के जीवन पर बनी AI शॉर्ट फिल्म की खास उपलब्धि

    अंग्रेजों के सामने वंदेमातरम का उद्घोष, RSS संस्थापक हेडगेवार के जीवन पर बनी AI शॉर्ट फिल्म की खास उपलब्धि


    भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदेमातरम से जुड़े संघर्ष पर आधारित एआई शॉर्ट फिल्म वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार का चयन उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के सीजन-4 में स्क्रीनिंग के लिए किया गया है। इस फिल्म में ब्रिटिश शासन के दौरान किशोरावस्था से लेकर जेल यात्रा तक डॉ. हेडगेवार के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शाया गया है। फिल्म का निर्देशन और पटकथा लेखन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने किया है। यह उनकी पहली एआई फिल्म है। फिल्म में ऐतिहासिक घटनाओं और संस्मरणों के आधार पर उन प्रसंगों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है जिनमें वंदेमातरम के उद्घोष और सम्मान को लेकर संघर्ष देखने को मिला था।

    फिल्म की कहानी वर्ष 1905 के बंग-भंग आंदोलन और ब्रिटिश शासन के दौर से शुरू होती है। उस समय वंदेमातरम राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन रहा था। फिल्म में वर्ष 1907 की उस घटना को भी दिखाया गया है जब नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल में पढ़ने वाले किशोर केशव बलिराम हेडगेवार ने ब्रिटिश स्कूल इंस्पेक्टर के निरीक्षण के दौरान पूरी कक्षा से वंदेमातरम का नारा लगवाया था। इस प्रसंग के माध्यम से फिल्म में उस दौर के विद्यार्थियों के बीच विकसित हो रही राष्ट्रवादी चेतना और अंग्रेजी शासन के प्रति विरोध को दर्शाया गया है।

    फिल्म में वर्ष 1908 में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के रामपायली में दशहरे के अवसर पर दिए गए हेडगेवार के भाषण का भी चित्रण किया गया है। इस भाषण को सीमोल्लंघन के नाम से जाना जाता है। इसके बाद उनके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलने और परिवार को दमन का सामना करने से जुड़े प्रसंग भी फिल्म की कहानी में शामिल किए गए हैं। इन घटनाओं के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि ब्रिटिश शासन के दौरान राष्ट्रवादी विचारों को व्यक्त करने वालों को किस तरह की कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

    फिल्म की कहानी आगे बढ़ते हुए वर्ष 1930 के यवतमाल जंगल सत्याग्रह तक पहुंचती है। इसमें डॉ. हेडगेवार की गिरफ्तारी और अकोला जेल यात्रा से जुड़े प्रसंगों को शामिल किया गया है। फिल्म में रेलवे स्टेशनों पर उनके स्वागत के लिए जुटने वाली भीड़ और वंदेमातरम के नारों को प्रभावशाली दृश्यों तथा संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा वर्ष 1937 में प्रांतीय सरकारों के गठन के दौर में राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए उनके संकल्प को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। इस तरह फिल्म स्वतंत्रता आंदोलन के अलग-अलग चरणों को एक साथ जोड़ते हुए हेडगेवार के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को सामने लाती है।

    निर्देशक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि वंदेमातरम केवल एक गीत या नारा नहीं है बल्कि भारत की स्वाधीनता का बीज मंत्र और राष्ट्रीय चेतना की अमर ध्वनि है। उनके अनुसार डॉ. हेडगेवार का जीवन मातृभूमि की वंदना और इस मंत्र के सम्मान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने बताया कि फिल्म बनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास के उन प्रसंगों से परिचित कराना है जिनमें त्याग और राष्ट्रभक्ति को विशेष महत्व दिया गया था।

    डॉ. लोकेन्द्र सिंह इससे पहले बाचा : द राइजिंग विलेज समिधा गो-वर और कद जैसी फिल्मों से भी जुड़े रहे हैं। उनकी ये फिल्में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही जा चुकी हैं। अब एआई तकनीक के माध्यम से बनाई गई उनकी पहली शॉर्ट फिल्म का उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में चयन उनके फिल्म निर्माण के सफर की एक नई उपलब्धि है। फिल्म की स्क्रीनिंग के जरिए दर्शकों को डॉ. हेडगेवार के जीवन और वंदेमातरम से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को एक नए सिनेमाई रूप में देखने का अवसर मिलेगा।

  • भोपाल में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पेट्रोल डालकर लगाई थी आग, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच

    भोपाल में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पेट्रोल डालकर लगाई थी आग, पुलिस हर पहलू से कर रही जांच


    भोपाल। भोपाल में छह महीने पहले प्रेम विवाह करने वाली 20 वर्षीय नवविवाहिता की आग में गंभीर रूप से झुलसने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना गांधीनगर इलाके में अचारपुरा के पास मीणा चौराहे की बताई जा रही है। युवती ने 18 अक्टूबर को कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। गंभीर हालत में उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां बुधवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान दीपाली प्रजापति के रूप में हुई है। वह मूल रूप से छिंदवाड़ा की रहने वाली थी। दीपाली की सोशल मीडिया के जरिए भोपाल निवासी रोहित कुशवाह से दोस्ती हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद दोनों ने करीब छह महीने पहले प्रेम विवाह कर लिया था। शादी के बाद दीपाली अपने पति के साथ करोंद की पूजा कॉलोनी स्थित ससुराल में रह रही थी। रोहित एक निजी कंपनी में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता है जबकि दीपाली गृहिणी थी। कम उम्र में प्रेम विवाह करने वाले इस दंपती की जिंदगी में हुई इस दुखद घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रोहित के बयान के मुताबिक दीपाली अपनी एक सहेली के साथ बिना बताए ग्वालियर घूमने गई थी और 17 अक्टूबर को भोपाल लौटी थी। उसी रात उसने घबराहट होने की बात कही और चाय पीने के लिए बाहर चलने को कहा। इसके बाद रोहित उसे चाय पिलाने के लिए लेकर गया। वापस लौटते समय दीपाली ने कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए। रोहित ने आग की लपटों में घिरी पत्नी को बचाने की कोशिश की। इस दौरान उसके हाथ भी झुलस गए। गंभीर रूप से घायल दीपाली को उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। हालांकि कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। एएसआई जेएस पाटिल के अनुसार इस मामले में मर्ग कायम किया गया है और घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है। परिवार की ओर से मौत को लेकर किसी तरह का संदेह भी व्यक्त नहीं किया गया है। इसके बावजूद पुलिस घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित लोगों के बयान और अन्य जरूरी जानकारियां जुटा रही है।

    पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर किन परिस्थितियों में दीपाली ने यह कदम उठाया। घटना से पहले उसकी मानसिक स्थिति क्या थी और उस रात वास्तव में क्या हुआ था इसकी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। छह महीने पहले शुरू हुए वैवाहिक जीवन का इस तरह अंत होने से परिवार और परिचितों में दुख का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • एमपी के नगरीय निकायों में खरीदी की दरों में भारी अंतर, 250 करोड़ रुपए की बचत की गुंजाइश, ACS संजय दुबे ने दी कार्रवाई की चेतावनी

    एमपी के नगरीय निकायों में खरीदी की दरों में भारी अंतर, 250 करोड़ रुपए की बचत की गुंजाइश, ACS संजय दुबे ने दी कार्रवाई की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की दरों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कचरा वाहनों से लेकर एलईडी लाइट और सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की खरीदी तक में कीमतों का भारी अंतर सामने आया है। नगरीय प्रशासन विभाग की एक विभागीय बैठक में इन आंकड़ों पर चर्चा के दौरान प्रमुख सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में प्रस्तुत विश्लेषण के मुताबिक पिछले तीन साल में प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल के माध्यम से करीब 1134 करोड़ रुपए की खरीदी की। विश्लेषण में यह भी बताया गया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता तो लगभग 250 करोड़ रुपए की बचत संभव थी।

    बैठक में कचरा वाहनों की खरीदी का उदाहरण देकर कीमतों में अंतर को समझाया गया। प्रमुख सचिव संजय दुबे के मुताबिक एक नगरीय निकाय ने करीब दो लाख रुपए में कचरा वाहन खरीदा जबकि दूसरे निकाय ने इसी तरह के वाहन को चार डस्टबिन के साथ छह लाख रुपए में खरीदा। इस तरह दोनों खरीदी की कीमत में तीन गुना तक का अंतर सामने आया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कुछ निकायों ने डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद लिए जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं। अधिकारियों से कहा गया कि वे यह न समझें कि विभाग को खरीदी की जानकारी नहीं है। किस निकाय ने कौन सा सामान कितनी मात्रा में और किस दर पर खरीदा है इसका पूरा ब्योरा विभाग के पास उपलब्ध है।

    भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई इस बैठक में नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे समेत प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों के अधिकारी मौजूद थे। बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि पिछले साल खरीदी की गड़बड़ियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था लेकिन अब ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हालांकि सामने आए मूल्य अंतर और संभावित अनियमितताओं के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित खरीदी के दस्तावेजों और परिस्थितियों की जांच जरूरी होगी।

    बैठक में MPSEDC के एडिशनल एमडी अंशुमन राज ने भी खरीदी के आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में एक नगर पालिका में 60 लाख रुपए में 200 एलईडी बल्ब खरीदने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद अलग-अलग नगरीय निकायों में सामान की खरीदी दरों की तुलना की गई। प्रस्तुतीकरण में फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट की कीमतों में भी बड़ा अंतर बताया गया। एक जगह एक लीटर उत्पाद की कीमत पांच रुपए दर्ज हुई जबकि दूसरी जगह इसी तरह के उत्पाद की कीमत 33 हजार 500 रुपए बताई गई। सरदारपुर निकाय में 2500 लीटर संबंधित उत्पाद की खरीदी एक लाख 35 हजार रुपए में होने का भी उल्लेख किया गया।

    एलईडी लाइट की खरीदी के आंकड़ों ने भी अधिकारियों का ध्यान खींचा। प्रस्तुतीकरण के मुताबिक 60 वाट की एक एलईडी लाइट कहीं 306 रुपए में खरीदी गई जबकि भोपाल में इसकी कीमत 11 हजार 800 रुपए दर्ज हुई। भोपाल की इस खरीदी का कुल मूल्य 3.78 लाख रुपए बताया गया। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सरकारी खरीद प्रक्रिया में दरों की तुलना और मूल्य निर्धारण की समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया गया।

    पिछले तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के नगरीय निकायों ने करीब 65 करोड़ रुपए गारबेज टिपर और डंपर की खरीदी पर खर्च किए। स्ट्रीट लाइट पर लगभग 49 करोड़ रुपए ऑक्टागोनल पोल पर 27 करोड़ रुपए और डिसइन्फेक्टेंट की खरीदी पर 18 करोड़ रुपए खर्च किए गए। जबलपुर संभाग में कुल खरीदी करीब 202 करोड़ रुपए बताई गई जबकि बड़ोदिया कलां में लगभग 97 लाख रुपए के ऑक्टागोनल पोल खरीदे जाने का भी उल्लेख हुआ।

    अब नगरीय प्रशासन विभाग की नजर इस बात पर है कि अलग-अलग निकायों में एक जैसे सामान की कीमतों में इतना अंतर क्यों रहा। यदि जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। विभाग की चेतावनी के बाद सरकारी खरीदी की प्रक्रिया और खर्च की निगरानी को लेकर जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

  • बुखार से राहत पाने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, गूगल और रील देखकर दवा ले रहे लोग, किडनी को नुकसान का बढ़ा खतरा

    बुखार से राहत पाने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, गूगल और रील देखकर दवा ले रहे लोग, किडनी को नुकसान का बढ़ा खतरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों वायरल फीवर सर्दी जुकाम और खांसी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अनुमान के मुताबिक प्रदेश में प्रतिदिन करीब 3 हजार मरीज वायरल फीवर से जुड़ी शिकायतों के साथ अस्पतालों और क्लीनिकों में पहुंच रहे हैं। भोपाल में जेपी अस्पताल हमीदिया अस्पताल जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में रोजाना करीब 600 मरीज सर्दी जुकाम और बुखार की समस्या लेकर आ रहे हैं। वहीं इंदौर और जबलपुर में लगभग 500-500 ग्वालियर में 200 और उज्जैन में करीब 150 मरीज रोजाना इन बीमारियों से पीड़ित बताए जा रहे हैं। इस बीच चिंता की बात यह है कि कई लोग जल्द राहत पाने के लिए डॉक्टर की सलाह लेने के बजाय खुद ही एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं लेने लगे हैं। यह आदत सेहत पर भारी पड़ सकती है और कुछ परिस्थितियों में किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बढ़ा सकती है।

    डॉक्टरों के मुताबिक सर्दी जुकाम और वायरल फीवर के दौरान हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं जबकि वायरल संक्रमण में इनका सामान्य तौर पर फायदा नहीं होता। बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से भविष्य में बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम हो सकता है। इसी तरह कुछ पेनकिलर यानी दर्द निवारक दवाओं का गलत मात्रा में या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। खासकर पहले से किडनी की समस्या से जूझ रहे लोगों में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

    एमबीबीएस एमडी और एफआईसीडी विशेषज्ञ डॉ. समन ताहिर के अनुसार उनके पास इलाज के लिए आने वाले करीब 50 प्रतिशत मरीज डॉक्टर से मिलने से पहले ही खुद दवाएं ले चुके होते हैं। उनके व्यक्तिगत क्लिनिकल अनुभव में ऐसे कई मरीज सामने आते हैं जिन्हें गलत दवा अनुचित खुराक या लंबे समय तक दवा लेने के कारण जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों से जुड़ा यह अनुभव किसी बड़े सर्वे का आंकड़ा नहीं है। उनका कहना है कि दवा की खुराक और उसे लेने की अवधि मरीज की बीमारी मेडिकल हिस्ट्री और किडनी की स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए।

    डॉ. ताहिर ने करीब 20 साल के एक युवक का उदाहरण भी दिया जिसे सर्दी जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत रहती थी। युवक डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक लेने लगा। हर बार कुछ राहत मिलने के कारण उसने दवाओं का इस्तेमाल जारी रखा। बाद में जांच में उसकी किडनी प्रोफाइल में गड़बड़ी और क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ पाया गया। हालांकि चिकित्सकीय जांच के बिना यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि किडनी की परेशानी केवल किसी एक दवा के कारण हुई थी।

    ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना ने भी एक ऐसे मरीज का मामला बताया जिसे गर्दन की नस पर दबाव के कारण सिरदर्द हो रहा था। मरीज इसे सामान्य सिरदर्द समझकर करीब तीन महीने तक दर्द निवारक दवाएं लेता रहा। बाद में जांच में दर्द की असली वजह सामने आई और उसके क्रिएटिनिन में भी बढ़ोतरी पाई गई। इस मामले से स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक दर्द दबाने के बजाय उसकी मूल वजह का पता लगाना जरूरी है।

    डॉक्टरों का कहना है कि अब कई लोग गूगल और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी देखकर अपनी दवा और एक्सरसाइज खुद तय करने लगे हैं। किसी दूसरे व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाला उपचार हर मरीज के लिए सही हो यह जरूरी नहीं है। लगातार बुखार दर्द या सर्दी जुकाम बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। पुराने पर्चे के आधार पर दवाएं दोबारा शुरू करने से भी बचना चाहिए।

    केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने भी दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स के तर्कसंगत इस्तेमाल पर जोर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक वायरल फीवर के दौरान पर्याप्त आराम पानी और तरल पदार्थों का सेवन तथा जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह से उपचार करना बेहतर है। बिना सलाह के एंटीबायोटिक या पेनकिलर लेने से बचना चाहिए। तुरंत राहत पाने की जल्दबाजी में दवाओं का गलत इस्तेमाल बीमारी को और जटिल बना सकता है इसलिए लक्षणों को दबाने के बजाय सही जांच और उचित इलाज को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • घर भी सुरक्षित नहीं, भोपाल में आवारा कुत्ते ने 8 साल के बच्चे को बुरी तरह काटा, 5 दिन में 15 लोग बने शिकार

    घर भी सुरक्षित नहीं, भोपाल में आवारा कुत्ते ने 8 साल के बच्चे को बुरी तरह काटा, 5 दिन में 15 लोग बने शिकार


    भोपाल। भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के शाहजहांनाबाद स्थित नूर महल लाल मस्जिद रोड पर कुत्तों के हमलों से स्थानीय लोग दहशत में हैं। यहां हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि आवारा कुत्ते घरों में घुसकर भी लोगों पर हमला कर रहे हैं। ताजा मामला आठ वर्षीय इब्राहिम का है जिसे एक कुत्ते ने घर में घुसकर बुरी तरह काट लिया। हमले में बच्चे के चेहरे पर गंभीर घाव हो गए जिसके बाद उसे तत्काल हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों को उसके चेहरे की सर्जरी करनी पड़ी। परिजनों के मुताबिक इब्राहिम पिछले पांच दिनों से अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने इलाके में बच्चों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    जानकारी के मुताबिक 16 अक्टूबर को इब्राहिम पर आवारा कुत्ते ने हमला किया था। कुत्ते ने उसके चेहरे पर चार जगह काट लिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद परिजन बिना देर किए उसे हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और सर्जरी की। बच्चे के मामा फैजान ने बताया कि डॉक्टरों ने फिलहाल ऑपरेशन किया है और उम्मीद जताई है कि इससे इब्राहिम की हालत में सुधार होगा। हालांकि यदि घाव ठीक नहीं होते हैं तो दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। परिवार बच्चे के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लाल मस्जिद रोड और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सुबह नमाज के लिए मस्जिद जाने वाले लोगों को भी कुत्तों के पीछे पड़ने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार लोगों को रास्ता बदलकर या बचते हुए निकलना पड़ता है। रहवासी मोहम्मद अली ने बताया कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। वहीं वासिद खान का कहना है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने में भी खतरा बना रहता है। अभिभावकों को हर समय डर रहता है कि कहीं कोई कुत्ता बच्चों पर हमला न कर दे।

    रहवासी इब्राहिम अली दाऊदी के अनुसार इलाके में 50 से ज्यादा आवारा कुत्तों के झुंड घूमते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले पांच दिनों में ये कुत्ते 15 से अधिक लोगों को काट चुके हैं। लगातार हो रही घटनाओं से नाराज रहवासियों ने उत्तर क्षेत्र के विधायक आतिफ अकील वार्ड पार्षद और नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की है। लोगों ने मांग की है कि हमलावर कुत्तों को पकड़कर उचित कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों बुजुर्गों और अन्य नागरिकों को राहत मिल सके।

    दूसरी ओर भोपाल में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनकी नसबंदी पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अनुमान के मुताबिक शहर में करीब सवा लाख स्ट्रीट डॉग्स हैं। नगर निगम इस वित्तीय वर्ष में कुत्तों की नसबंदी के लिए 3.30 करोड़ रुपये का बजट रख चुका है। प्रति कुत्ते पर करीब 1100 रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 25 हजार 214 कुत्तों की नसबंदी की गई। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था। ऐसे में स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि लाखों रुपये खर्च होने और लगातार कार्रवाई के बावजूद आवारा कुत्तों के हमलों पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। अब रहवासियों की मांग है कि नगर निगम इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान निकाले ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे या नागरिक को ऐसी गंभीर घटना का सामना न करना पड़े।

  • मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती का ऐलान, 20 हजार पदों पर होगी नियुक्ति, आदिवासी क्षेत्रों में बनेंगे 200 नए स्कूल भवन

    मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती का ऐलान, 20 हजार पदों पर होगी नियुक्ति, आदिवासी क्षेत्रों में बनेंगे 200 नए स्कूल भवन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम में विभाग के अंतर्गत 20 हजार पदों पर नई भर्ती करने की घोषणा की। इसके साथ ही प्रदेश में 200 नए सांदीपनि विद्यालय खोलने और जनजातीय क्षेत्रों में 200 नए स्कूल भवन बनाने की योजना भी सामने रखी गई। सरकार का कहना है कि इन पहलों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि नई भर्तियों की तारीख और चयन प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार अब तक 85 हजार नियुक्तियां कर चुकी है और आने वाले समय में स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार पदों पर और भर्ती की जाएगी। इस घोषणा से उन युवाओं की उम्मीदें बढ़ी हैं जो शिक्षक और शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य सरकारी पदों पर नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुल पदों में शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों के लिए कितनी रिक्तियां होंगी। भर्ती का विज्ञापन कब जारी होगा और चयन परीक्षा या अन्य प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाएगी इसकी जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के बजट में हुई बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2003 से पहले स्कूल शिक्षा विभाग का बजट करीब 400 करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये हो गया है। सरकार स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर बनाने के साथ शैक्षणिक माहौल मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में सांदीपनि विद्यालयों के विस्तार की योजना तैयार की गई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल 369 सांदीपनि विद्यालय संचालित हो रहे हैं और अब 200 नए विद्यालय खोलने की पहल की जा रही है। इन स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    शिक्षा सुविधाओं के विस्तार में जनजातीय क्षेत्रों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इन इलाकों में 200 नए विद्यालय भवन बनाए जाने की योजना है। नए भवन बनने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा और स्कूलों की बुनियादी व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। हालांकि इन भवनों का निर्माण किन जिलों में होगा और काम कब तक पूरा किया जाएगा इस बारे में अभी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। योजना के क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी आगे जारी होने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 950 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति के आदेश भी सौंपे। इनमें 661 सहायक ग्रेड-3 के कर्मचारी 31 प्राथमिक शिक्षक और 262 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पहले अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में कई बार वर्षों लग जाते थे लेकिन अब इसमें तेजी लाने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पदोन्नति के कारण खाली हुए पदों पर नियुक्तियों का रास्ता तैयार किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद आश्रितों को समय पर नौकरी मिलना उनके लिए आर्थिक सहारा बन सकता है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से ईमानदारी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं का भी उल्लेख हुआ। मुख्यमंत्री के अनुसार पहले 500 विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए जाते थे जबकि अब 1 लाख 45 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित किए गए हैं। विद्यार्थियों को स्कूटी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब 20 हजार पदों पर प्रस्तावित भर्ती और नए विद्यालयों की योजना के संबंध में युवाओं तथा अभिभावकों की नजर सरकार की अगली आधिकारिक घोषणाओं पर रहेगी।

  • भोपाल में 7 हजार से ज्यादा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन, रात 8 बजे से शुरू होंगे झांकियों के जुलूस, घर से निकलने से पहले देख लें वैकल्पिक रास्ते

    भोपाल में 7 हजार से ज्यादा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन, रात 8 बजे से शुरू होंगे झांकियों के जुलूस, घर से निकलने से पहले देख लें वैकल्पिक रास्ते


    भोपाल । भोपाल में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार 21 अक्टूबर को शहर में भव्य झांकियों के चल समारोह निकलेंगे। रात 8 बजे से शुरू होने वाले इन समारोहों के कारण पुराने भोपाल समेत कई प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूट प्लान जारी किया है। ऐसे में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे पहले वैकल्पिक मार्गों की जानकारी ले लें ताकि जाम और रास्ते बंद होने की परेशानी से बचा जा सके।
    शहर में अब तक छोटी बड़ी 883 दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका है जबकि कुल सात हजार से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। यह प्रक्रिया गुरुवार को भी जारी रहेगी। प्रशासन ने खटलापुरा प्रेमपुरा बैरागढ़ हथाईखेड़ा शाहपुरा आर्च ब्रिज मालीखेड़ी सीहोर नाका अनंतपुरा ईंटखेड़ी और नरोन्हा सांकल सहित प्रमुख विसर्जन घाटों पर इंतजाम किए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा सफाई और विसर्जन की व्यवस्था संभालने के लिए करीब पांच हजार अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं। घाटों पर गोताखोरों के साथ क्रेन जेसीबी और लाइफ जैकेट की व्यवस्था भी रखी गई है।

    मुख्य चल समारोह रात आठ बजे भारत टॉकीज तिराहे से शुरू होकर सेंट्रल लाइब्रेरी इतवारा चौराहा गणेश चौक मंगलवारा गल्ला मंडी हनुमानगंज छोटे भैया चौराहा जनकपुरी जुमेराती पुराना पोस्ट ऑफिस सिंधी मार्केट पीरगेट मोती मस्जिद रेतघाट और कमला पार्क से होते हुए कमलापति घाट पहुंचेगा। वहीं कुछ झांकियां पॉलीटेक्निक चौराहा डिपो चौराहा और 25वीं वाहिनी के सामने से भदभदा तिराहे के रास्ते प्रेमपुरा घाट जाएंगी। झांकियों की आवाजाही के अनुसार अलग अलग मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लागू होंगे।

    ट्रैफिक व्यवस्था के तहत बुधवार शाम पांच बजे के बाद भारत टॉकीज चौराहा अल्पना तिराहा नादरा बस स्टैंड चौराहा और भोपाल टॉकीज चौराहे के बीच सिटी बसों मैजिक और चार पहिया वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। शाम छह बजे से मंगलवारा थाना तिराहा दयानंद चौक जुमेराती पानी की टंकी तिराहा और पुरानी सब्जी मंडी की ओर से घोड़ा नक्कास तथा बस स्टैंड की तरफ जाने वाले वाहनों को भी रोक दिया जाएगा। भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर शुक्रवार सुबह आठ बजे तक प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध खजूरी सड़क मुबारकपुर लांबाखेड़ा इस्लाम नगर पटेल नगर रातीबड़ लालघाटी एयरपोर्ट चौराहा करोंद भानपुर और रत्नागिरी सहित प्रमुख मार्गों पर लागू रहेगा।

    बैरागढ़ और खजूरी क्षेत्र की दुर्गा प्रतिमाओं का चल समारोह बीआरटीएस कॉरिडोर से होते हुए सीहोर रोड स्थित बैरागढ़ विसर्जन स्थल पहुंचेगा। इस दौरान भोपाल इंदौर मार्ग पर यातायात प्रभावित हो सकता है। इंदौर और देवास की ओर जाने वाले वाहन लालघाटी नूरगंज तिराहा गांधीनगर एयरपोर्ट तिराहा मुबारकपुर चौराहा और नए बायपास से होकर जा सकेंगे। वहीं इंदौर और सीहोर की ओर आने जाने वाले वाहन झागरिया रातीबड़ नीलबड़ और भदभदा चौराहे का वैकल्पिक मार्ग अपना सकते हैं।

    रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को भारत टॉकीज की ओर से रास्ता बंद मिलने पर एमपी नगर न्यू मार्केट अशोका गार्डन 80 फीट रोड प्रभात चौराहा सुभाष नगर ओवरब्रिज और मैदा मिल वाले मार्ग का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। रात दो बजे के बाद रेतघाट की ओर चल समारोह बढ़ने पर पॉलीटेक्निक चौराहे से रेतघाट और वीआईपी रोड बंद हो सकता है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्री लिंक रोड नंबर एक बोर्ड ऑफिस चौराहा डीबी मॉल तिराहा सुभाष नगर रेलवे ओवरब्रिज और प्रभात चौराहे से होकर जा सकते हैं। बस यात्रियों के लिए भी बदलाव किए गए हैं। इंदौर और सीहोर की बसें हलालपुर बस स्टैंड तक आएंगी जबकि आईएसबीटी से चलने वाली बसों को होशंगाबाद रोड और बायपास का इस्तेमाल करना होगा। इसलिए जरूरी है कि लोग यात्रा से पहले अपने मार्ग की जानकारी लें और अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें।