Author: bharati

  • MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….

    MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट (Balaghat) के बैगा अंचल में 19 बच्चों की मौत ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. शुरुआत में इन बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण (Malnutrition) को वजह माना गया था, लेकिन ICMR और दूसरे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की जांच रिपोर्ट में मौतों की मुख्य वजह मलेरिया और मीजल्स (Malaria and Measles) यानी खसरा संक्रमण (Measles infection) सामने आया है. जांच में खसरा और मलेरिया संक्रमण को बच्चों की मौत की प्रमुख वजह बताया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला खत्म नहीं हुआ है. इसके बजाय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

    जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे सभी नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. यानी संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी टीकाकरण इन बच्चों तक नहीं पहुंच पाया था. बालाघाट में हुई 19 बच्चों की मौतें संक्रमण से जुड़ी बताई गई हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों में बच्चों के सामने सिर्फ संक्रमण का खतरा नहीं है. इन इलाकों में कुपोषण भी बच्चों के स्वास्थ्य को लगातार कमजोर कर रहा है. एक तरफ मलेरिया और खसरे जैसे संक्रमण हैं और दूसरी तरफ कुपोषण की समस्या. इन दोनों के बीच आदिवासी बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    एक तरफ बीमारी, दूसरी तरफ कुपोषण

    ग्रामीण मध्य प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 33 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी से ज्यादा हो गया है. इस स्थिति में सवाल यह है कि बच्चों को बीमारी से बचाने वाली वैक्सीन और कुपोषण से बचाने वाला पोषण दोनों की व्यवस्था में कमी कहां रह गई. बालाघाट में सामने आई 19 बच्चों की मौतों ने इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एक ओर अगर बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में संक्रमण और कुपोषण दोनों बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रहे हैं. केंद्र के मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ 6 साल तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन मध्य प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में एक साल में जुलाई तक करीब 260 दिन ही नियमित पोषण आहार मिलने के आरोप लगाए गए हैं. यानी जिस व्यवस्था के तहत बच्चों और महिलाओं तक पूरे साल पोषण पहुंचाने की बात है, वहां नियमित सप्लाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इसी बीच प्रदेश में पोषण आहार बनाने वाले रीवा, सागर, देवास, शिवपुरी और होशंगाबाद सहित जिलों के सभी 7 प्लांट बंद किए जा चुके हैं. पोषण आहार की व्यवस्था में हुए बदलाव ने भी सवाल खड़े किए हैं. जिस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों तक लगातार पोषण पहुंचाना था, वही व्यवस्था बदलाव के दौरान प्रभावित हुई. ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की नियमितता को लेकर चिंता सामने आई है।


    सरकार ने माना, व्यवस्था बदलने के दौरान सप्लाई प्रभावित हुई

    महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री निर्मला भूरिया के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग की ओर से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा था. मंत्री के अनुसार यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद इसमें बदलाव किया गया. नए टेंडर जारी होने तक स्थानीय स्तर पर विभाग स्वसहायता समूहों के जरिए बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध करा रहा है. हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि व्यवस्था बदलने के दौरान कुछ दिनों तक पोषण आहार की सप्लाई प्रभावित हुई थी. इससे यह सवाल और अहम हो जाता है कि व्यवस्था बदलने के बीच बच्चों तक पोषण आहार की नियमित पहुंच कैसे सुनिश्चित की गई. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभाग की सचिव को बालाघाट जाने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य वहां के हालात पर नजर रखना और स्थिति की जानकारी लेना है. बालाघाट के बैगा अंचल में हुई 19 बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने रख दिए हैं. जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण मौतों की मुख्य वजह सामने आने के बाद अब नियमित टीकाकरण भी चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की संख्या बढ़ने का आंकड़ा भी सामने है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    मध्य प्रदेश की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि देश की कमजोर जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा इसी राज्य में रहता है. देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह घोषित किया गया है. मध्य प्रदेश में डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, श्योपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय समुदाय इस श्रेणी में शामिल हैं. ऐसे में बालाघाट की 19 बच्चों की मौत केवल एक इलाके की घटना नहीं रह जाती, बल्कि यह सवाल उठाती है कि कमजोर जनजातीय इलाकों में बच्चों तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं।

    बालाघाट में बच्चों की मौत की जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण सामने आया है. खसरे से संक्रमित बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हुआ था. दूसरी ओर ग्रामीण मध्य प्रदेश में कुपोषण के आंकड़े बढ़े हैं और पोषण आहार की सप्लाई में भी व्यवधान की बात सरकार ने स्वीकार की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी बच्चों को एक साथ बीमारी और कुपोषण से कैसे बचाया जाए. टीकाकरण और पोषण दोनों की नियमित व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. बालाघाट की घटना ने इस पूरी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ेगा अमेरिका…. अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की दी चेतावनी!

    ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ेगा अमेरिका…. अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की दी चेतावनी!


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच तनाव अब आर्थिक मोर्चे (Economic front) पर और गहराता दिख रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (US Treasury Secretary Scott Bessent) ने ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करेगा और ईरान की सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। बेसेंट ने यह भी कहा कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब फिलहाल सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है।


    अमेरिका ईरान पर क्या बड़ी कार्रवाई करने वाला है?

    बेसेंट के मुताबिक अमेरिका ऐसे कदम उठाएगा, जिससे ईरान की आर्थिक क्षमता और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों तक पहुंच सीमित हो सके। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर भी अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है। बेसेंट ने संकेत दिया कि सोमवार को होने वाली एक मीडिया बैठक में ईरान के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यानी अमेरिका की नई रणनीति केवल प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रह सकती है।

    चीन को अमेरिका ने क्यों दी चेतावनी?
    ईरान के साथ चीन के व्यापारिक संबंधों को लेकर भी अमेरिका ने दबाव बढ़ाया है। बेसेंट ने चीन से अमेरिकी कार्यक्रम के साथ आने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए होर्मुज का खुला रहना चीन के अपने हित में भी है। अमेरिका ने चीन पर संभावित कार्रवाई के सवाल पर साफ जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि कुछ बातचीत निजी स्तर पर बेहतर होती है।


    ट्रंप ने ईरान पर क्या ऐलान किया था?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया था। उन्होंने इसे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव की रणनीति बताया। ट्रंप ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, मुद्रा विनिमय केंद्रों, जहाज पंजीकरण और फर्जी कंपनियों को निशाना बनाने की बात कही। उन्होंने सहयोगी देशों से भी ईरान को अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ देने की अपील की।

    होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद में क्यों अहम है?
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ट्रंप का कहना है कि जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी रही है। दूसरी ओर ईरान की ओर से इसे लेकर सख्त रुख सामने आया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले कह चुके हैं कि अमेरिका की ओर से अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी किए जाने तक तेहरान इसे फिर से खोलने पर सहमत नहीं होगा।


    ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को क्या बताया?

    ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इन्हें ‘आर्थिक आतंकवाद’ और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका दशकों से ईरानी लोगों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपना रहा है। ईरान ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव युद्ध और सैन्य हमले के ही दूसरे रूप हैं। साथ ही उसने साफ किया कि अमेरिकी दबाव के बावजूद वह अपनी सुरक्षा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा।


    क्या आर्थिक दबाव के बाद सैन्य कार्रवाई का खतरा टल गया?

    बेसेंट ने कहा है कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब संभवतः सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिका आर्थिक और वित्तीय दबाव को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देने की बात दोहराई है। ऐसे में सैन्य विकल्प को पूरी तरह खत्म माना नहीं जा सकता। होर्मुज में तनाव और ईरान की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा तय कर सकती है।


    क्या अमेरिका-ईरान टकराव में चीन भी खिंच सकता है?

    फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधा आर्थिक टकराव है, लेकिन चीन का मुद्दा इसे और बड़ा बना सकता है। चीन के ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं और उसकी ऊर्जा जरूरतों का संबंध खाड़ी क्षेत्र से है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बढ़ाने में सहयोग करे। वहीं ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार करने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर भी कार्रवाई करता है तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा कीमतों और कूटनीतिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।

  • शादी का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों ऐंठने वाला गिरफ्तार ज्वेलरी दुकान पर हुई थी मुलाकात 1.27 करोड़ की ठगी का खुलासा

    शादी का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों ऐंठने वाला गिरफ्तार ज्वेलरी दुकान पर हुई थी मुलाकात 1.27 करोड़ की ठगी का खुलासा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में महिलाओं को कथित तौर पर प्रेम जाल में फंसाकर शादी का झांसा देने और उनसे मोटी रकम ऐंठने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने जयपुर निवासी एक युवक को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोप है कि आरोपी महिलाओं से पहले नजदीकी बढ़ाता था और शादी का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम लेता था। इसके बाद जब महिलाएं शादी के लिए दबाव बनाती थीं तो वह उनसे दूरी बनाने लगता और अपना ठिकाना बदलकर फरार हो जाता था। उज्जैन में सामने आए मामले में आरोपी पर एक महिला से करीब 1 करोड़ 27 लाख रुपये लेने का आरोप है।
    मामले की शिकायत उज्जैन निवासी महिला ने 13 मई 2026 को माधवनगर थाने में दर्ज कराई थी। महिला के मुताबिक उसकी मुलाकात आरोपी मनीष से एक ज्वेलरी की दुकान पर हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे धीरे नजदीकियां हो गईं। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा और भरोसा दिलाया कि दोनों जल्द शादी करेंगे। इसी भरोसे के आधार पर उसने महिला से अलग अलग समय पर बड़ी रकम ली। शिकायत के अनुसार करीब चार महीने तक संपर्क में रहने के दौरान आरोपी ने महिला से लगभग 1 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च करा लिए।

    महिला का आरोप है कि मार्च 2026 में जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर उसने महिला को धमकी भी दी और वहां से फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए माधवनगर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर आरोपी को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस ने पूछताछ और बरामदगी के लिए उसे पुलिस अभिरक्षा में लिया।

    उज्जैन पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर नकदी दो महंगे मोबाइल फोन और ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए खरीदा गया सामान बरामद किया गया है। पुलिस को शक है कि यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में आरोपी के मध्य प्रदेश के धार और नीमच में भी युवतियों के संपर्क में रहने और उनसे लाखों रुपये लेने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन दावों की जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी कथित तौर पर अपना ठिकाना बदलकर किराए के मकानों में रहता था और महिलाओं से बातचीत के जरिए नजदीकी बढ़ाता था। इसके बाद शादी का वादा कर उनसे पैसे लेने का तरीका अपनाता था। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन ऑनलाइन खरीदारी बैंकिंग और पैसों के लेन देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। साथ ही उसके संपर्क में रही महिलाओं के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि उसने कितनी महिलाओं को कथित तौर पर अपना शिकार बनाया।

    उज्जैन पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ के बाद इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर ठगी गई रकम कहां इस्तेमाल की गई और आरोपी के साथ इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकेगा।

  • मिग-21 की आखिरी उड़ान की कहानी दिखाएगा Netflix, ‘द लास्ट सैल्यूट’ 26 अगस्त को होगी रिलीज

    मिग-21 की आखिरी उड़ान की कहानी दिखाएगा Netflix, ‘द लास्ट सैल्यूट’ 26 अगस्त को होगी रिलीज


    नई दिल्ली।
    कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियानों और ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को दर्शकों की मिल रही शानदार प्रतिक्रिया के बीच नेटफ्लिक्स ने अब भारतीय वायुसेना के सबसे चर्चित लड़ाकू विमानों में शामिल मिग-21 पर नई डॉक्यूमेंट्री का ऐलान किया है। इसका नाम ‘द लास्ट सैल्यूट: ए लव लेटर टू मिग-21’ रखा गया है। डॉक्यूमेंट्री में मिग-21 के साथ भारतीय वायुसेना के छह दशकों से ज्यादा लंबे सफर और इसे उड़ाने वाले पायलटों की अनकही कहानियां दिखाई जाएंगी।

    26 अगस्त को Netflix पर आएगी डॉक्यूमेंट्री

    नेटफ्लिक्स इंडिया ने डॉक्यूमेंट्री का पहला टीजर जारी करते हुए इसकी रिलीज डेट का ऐलान किया है। ‘द लास्ट सैल्यूट’ 26 अगस्त 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। टीजर के साथ प्लेटफॉर्म ने मिग-21 की छह दशक लंबी यात्रा को इसकी कहानी का केंद्र बताया है।

    62 साल तक भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहा मिग-21

    यह डॉक्यूमेंट्री भारतीय वायुसेना के साथ मिग-21 के करीब 62 वर्षों के जुड़ाव पर केंद्रित है। इसमें उन पायलटों के अनुभव और यादें भी शामिल होंगी, जिन्होंने अलग-अलग दौर में इस लड़ाकू विमान को उड़ाया।

    डॉक्यूमेंट्री में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अलावा मिग-21 उड़ाने वाले कई पूर्व और वर्तमान पायलटों की बातचीत देखने को मिलेगी। उनके अनुभवों के जरिए विमान की तकनीकी क्षमता के साथ-साथ उससे जुड़ी भावनात्मक यादों और चुनौतियों को सामने लाने की कोशिश की गई है।

    ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की टीम ने बनाई

    ‘द लास्ट सैल्यूट’ का निर्माण मैचबॉक्स शॉट्स ने किया है, जबकि इसका निर्देशन कुशल श्रीवास्तव ने किया है। यही प्रोडक्शन टीम ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ से भी जुड़ी रही है।

    मिग-21 का भारतीय वायुसेना के इतिहास में खास स्थान रहा है। यह विमान दशकों तक भारतीय लड़ाकू बेड़े की अहम ताकत रहा और कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में इसका इस्तेमाल हुआ।

    ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को मिल रही सफलता

    नेटफ्लिक्स की ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ इस समय लगातार दर्शकों का ध्यान खींच रही है। छह एपिसोड वाली यह सीरीज वैश्विक टॉप-10 नॉन-इंग्लिश टीवी लिस्ट में लगातार बनी हुई है और मौजूदा सप्ताह में दूसरे स्थान पर है।

    सीरीज में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के गोल्डन एरो स्क्वाड्रन की भूमिका और उसके अभियानों को कहानी के केंद्र में रखा गया है। सीरीज में सिद्धार्थ, जिमी शेरगिल, अभय वर्मा, दीया मिर्जा, प्राजक्ता कोली, आदिल हुसैन और अन्य कलाकार नजर आते हैं।

    मिग-21 की विरासत को समेटेगी ‘द लास्ट सैल्यूट’

    नई डॉक्यूमेंट्री सिर्फ एक लड़ाकू विमान की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की कई पीढ़ियों के अनुभवों को दर्ज करने की कोशिश है। मिग-21 ने भारतीय सैन्य इतिहास में लंबा सफर तय किया है और अब ‘द लास्ट सैल्यूट’ के जरिए इसके साथ जुड़े पायलटों की यादों और इसकी विरासत को दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।

    ‘द लास्ट सैल्यूट: ए लव लेटर टू मिग-21’ 26 अगस्त 2026 को सिर्फ नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

  • अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, ट्रंप के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती

    अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, ट्रंप के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती

    वॉशिंगटन। अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को कारोबार खत्म होने तक सरकार का कुल बकाया कर्ज बढ़कर 40.05 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। कर्ज का यह स्तर कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के अनुमान से भी ज्यादा है।

    कर्ज में यह तेज बढ़ोतरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती मानी जा रही है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने सरकारी खर्च कम करने और सरकारी कामकाज में दक्षता बढ़ाने का वादा किया था।

    CBO के अनुमान से भी आगे निकला कर्ज

    CBO ने वित्त वर्ष 2026 के अंत तक अमेरिका के कुल सरकारी कर्ज के करीब 39.4 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया था। लेकिन वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले ही कर्ज इस अनुमान से ऊपर निकल गया।

    सरकारी कर्ज में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें बढ़ता संघीय खर्च, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च तथा पुराने कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान प्रमुख हैं।

    ब्याज भुगतान ने बढ़ाई मुश्किल

    अमेरिकी सरकार के लिए कर्ज का बढ़ता ब्याज खर्च एक बड़ी चिंता बन गया है। जैसे-जैसे सरकारी कर्ज बढ़ता है, उस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जाता है। इसके साथ ही महंगाई और सरकारी खर्च को लेकर बाजार में बनी चिंता के कारण सरकार के लिए नए सिरे से कर्ज लेना भी महंगा हुआ है।

    सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर लगातार बढ़ता खर्च भी अमेरिका के दीर्घकालिक वित्तीय दबाव को बढ़ा रहा है।

    ट्रंप के खर्च घटाने के दावे पर सवाल

    ट्रंप प्रशासन ने संघीय कर्मचारियों, सरकारी एजेंसियों और सरकारी खर्च में कटौती के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के जरिए कई कदम उठाए हैं। सरकार की वेबसाइट पर फिलहाल करीब 215 अरब डॉलर की बचत का दावा किया गया है।

    हालांकि, स्वतंत्र विशेषज्ञ इन आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से बताई गई बचत और वास्तव में हासिल हुई बचत में अंतर हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि खर्च में कटौती का सरकारी कर्ज पर कितना वास्तविक असर पड़ा है।

    दोनों पार्टियों के सांसदों ने जताई चिंता

    अमेरिकी सरकारी कर्ज के 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सांसदों की ओर से चिंता जताई गई है। बढ़ता कर्ज अमेरिका की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भविष्य के बजट पर भी दबाव बढ़ा रहा है।

    कर्ज का यह रिकॉर्ड स्तर ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका को सामाजिक योजनाओं, रक्षा और अन्य सरकारी कार्यक्रमों पर बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में खर्च घटाने, टैक्स नीति और कर्ज नियंत्रण को लेकर ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।

  • खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    नई दिल्ली । खर्राटे लेना आम समस्या है और बहुत से लोगों को सोते समय इसकी परेशानी होती है लेकिन हर बार खर्राटों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई बार खर्राटे केवल सोने के दौरान गले और मुंह के आसपास मौजूद ऊतकों में कंपन के कारण आते हैं लेकिन कुछ परिस्थितियों में यही खर्राटे शरीर में चल रही गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। खासतौर पर अगर खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकने लगे हांफते हुए नींद खुले रात में बार बार आंख खुले या सुबह उठने के बाद भी अत्यधिक थकान महसूस हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

    दरअसल जब व्यक्ति सोता है तो गले जीभ और मुंह के आसपास के कुछ ऊतक ढीले पड़ जाते हैं। इससे सांस लेने का रास्ता कुछ संकरा हो सकता है। जब हवा इस संकरे रास्ते से गुजरती है तो आसपास के ऊतकों में कंपन पैदा होता है और इसी कंपन की आवाज खर्राटे के रूप में सुनाई देती है। अधिक वजन धूम्रपान शराब का सेवन और सोने की कुछ स्थितियां खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकती हैं। हालांकि लगातार और बहुत तेज खर्राटे हमेशा सामान्य कारणों से ही हों यह जरूरी नहीं है।

    सबसे बड़ा खतरा तब माना जाता है जब सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस रुकती है और इसके बाद व्यक्ति अचानक जोर से सांस लेने लगता है। परिवार के किसी सदस्य को अगर ऐसा बार बार दिखाई देता है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में नींद के दौरान सांस की ऊपरी नली बार बार संकरी या बंद हो सकती है जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है और नींद बार बार बाधित होती रहती है। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद सुबह उठकर तरोताजा महसूस नहीं करता।

    खर्राटों के साथ हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है तो विशेष सावधानी जरूरी है। लंबे समय से तेज खर्राटे आने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है क्योंकि नींद में सांस रुकने की समस्या का संबंध हाई ब्लड प्रेशर और हृदय तथा रक्त वाहिकाओं से जुड़ी परेशानियों से हो सकता है। इसलिए केवल खर्राटे कम करने के उपाय करने के बजाय उनके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी है।

    अगर दिन के समय लगातार नींद आती है काम करते समय थकान महसूस होती है एकाग्रता प्रभावित होती है या रात में घुटन और हांफने के कारण बार बार नींद खुलती है तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। समय रहते समस्या की पहचान होने पर उचित उपचार और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है।

    खर्राटों की समस्या में वजन को नियंत्रित रखना करवट लेकर सोना धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित करना मददगार हो सकता है। लेकिन अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे संकेत दिखाई दे रहे हैं तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा जरूरी है। शरीर रात में जिन संकेतों के जरिए अपनी परेशानी बता रहा हो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।

  • फिल्मी पर्दे से सब्जी मंडी तक पहुंचे एक्टर विमल, दुकानदारों के साथ बैठकर बेची सब्जियां; 4.5 करोड़ के चेक केस से भी चर्चा में

    फिल्मी पर्दे से सब्जी मंडी तक पहुंचे एक्टर विमल, दुकानदारों के साथ बैठकर बेची सब्जियां; 4.5 करोड़ के चेक केस से भी चर्चा में

    नई दिल्ली । तमिल सिनेमा के अभिनेता विमल इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा एक अनोखी वजह से चर्चा में हैं। तिरुचिरापल्ली जिले में मनाप्पराई के पास अपने होमटाउन पहुंचे अभिनेता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विमल स्थानीय दुकानदारों के साथ बैठकर सब्जियां बेचते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरा मामला उस समय सामने आया है जब अभिनेता हाल ही में 4.5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में एक साल की जेल की सजा को लेकर सुर्खियों में आए थे। हालांकि उनकी सजा पर फिलहाल रोक लगाई गई है ताकि वह अदालत के फैसले के खिलाफ अपील कर सकें।

    विमल तिरुचिरापल्ली के पास पन्नानकोम्बु में शुरू हुए एक साप्ताहिक बाजार में पहुंचे थे। वह इलाके में अपनी एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में आए थे। इसी दौरान उन्होंने बाजार का रुख किया और वहां मौजूद स्थानीय व्यापारियों के बीच जाकर बैठ गए। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक दुकानदारों के साथ सब्जियां बेचने में मदद की। अभिनेता को इस अंदाज में देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए और देखते ही देखते बाजार में उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    वायरल वीडियो में विमल बेहद सहज अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह किसी बड़े स्टार की तरह अलग रहने के बजाय स्थानीय दुकानदारों के साथ बैठकर बातचीत करते दिखाई देते हैं। उन्होंने ग्राहकों के साथ भी बातचीत की और कुछ देर तक सब्जियां बेचने में हाथ बंटाया। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान अभिनेता ने आसपास के कुछ दुकानदारों को 500 रुपये भी दिए। उनके इस व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग उनकी सादगी की तारीफ कर रहे हैं।

    विमल का यह अंदाज इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले ही वह एक कानूनी मामले को लेकर सुर्खियों में थे। चेन्नई की अदालत ने जुलाई 2026 में फिल्म मन्नार वर्गीयारा के निर्माण से जुड़े 4.5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में उन्हें एक साल की जेल की सजा सुनाई थी। रिपोर्टों के अनुसार अभिनेता ने फिल्म के लिए फाइनेंसर गोपी से 4.5 करोड़ रुपये उधार लिए थे। रकम लौटाने के लिए दिया गया चेक बैंक में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया था। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

    फैसले के बाद विमल की ओर से अपील करने की बात कही गई थी। अदालत ने भी उन्हें अपील के लिए समय देते हुए सजा को फिलहाल एक महीने के लिए निलंबित कर दिया था। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अभिनेता इस समय जेल की सजा काट रहे हैं। उनका कानूनी मामला अभी अपील की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

    इस कानूनी विवाद के बीच विमल का अपने गृह क्षेत्र के लोगों के साथ इस तरह घुलना मिलना उनके फैंस के लिए भी खास रहा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अभिनेता की जमीन से जुड़ी सादगी बता रहे हैं तो कुछ इसे अपने क्षेत्र के लोगों के साथ जुड़ने का सहज तरीका मान रहे हैं।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो विमल ने तमिल सिनेमा में लंबे समय तक काम किया है। उन्हें कलवाणी वागई सूडा वा और केडी बिल्ला किल्लाडी रंगा जैसी फिल्मों से पहचान मिली। उनकी हालिया फिल्म वधम को दर्शकों और समीक्षकों से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी। अब अभिनेता कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सब्जी बाजार में उनका यह अलग अंदाज फिल्मी करियर से इतर उनकी चर्चा का नया कारण बन गया है।

  • घुटने की पुरानी चोट के बीच प्रभास की हेल्थ पर फिर सवाल, सर्जन की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बढ़ी बेचैनी

    घुटने की पुरानी चोट के बीच प्रभास की हेल्थ पर फिर सवाल, सर्जन की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बढ़ी बेचैनी

    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास की सेहत को लेकर उनके फैंस की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। इसकी वजह अभिनेता की ओर से जारी कोई आधिकारिक हेल्थ अपडेट नहीं बल्कि एक ऑर्थोपेडिक सर्जन की सोशल मीडिया पोस्ट है। हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल से जुड़े ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. केजे रेड्डी ने प्रभास के साथ एक तस्वीर शेयर की और अभिनेता की मेहनत तथा उनके संघर्ष की तारीफ की। पोस्ट में उन्होंने सफलता के पीछे छिपी निजी कुर्बानियों का जिक्र किया। इसके बाद फैंस ने कमेंट सेक्शन में प्रभास की सेहत को लेकर सवाल पूछने शुरू कर दिए।

    डॉ. केजे रेड्डी की पोस्ट में प्रभास के साथ उनकी तस्वीर दिखाई दे रही है। डॉक्टर ने अभिनेता के व्यवहार और उनके सकारात्मक रवैये की तारीफ की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभास की सेहत की देखभाल की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए खुशी की बात है। पोस्ट में अभिनेता के अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की कामना भी की गई है। हालांकि डॉक्टर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रभास को फिलहाल कौन सी समस्या है या उन्होंने हाल में किस तरह का उपचार कराया है।

    पोस्ट का वह हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में आया जिसमें डॉक्टर ने कहा कि किसी सफल व्यक्ति को देखने पर उसकी सार्वजनिक उपलब्धियां दिखाई देती हैं लेकिन उस मुकाम तक पहुंचने के लिए की गई निजी कुर्बानियां नजर नहीं आतीं। इसी लाइन को फैंस ने प्रभास की पुरानी चोटों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर कई फैंस ने अभिनेता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और डॉक्टर से उनका बेहतर ध्यान रखने की अपील की।

    प्रभास की सेहत को लेकर चिंता की एक वजह उनका पुराना इंजरी इतिहास भी है। अपने लंबे एक्शन फिल्मी करियर के दौरान अभिनेता को कई बार चोटों का सामना करना पड़ा है। बाहुबली साहो और सालार जैसी फिल्मों के दौरान उनके एक्शन सीक्वेंस और शारीरिक मेहनत की चर्चा होती रही है। रिपोर्टों में उनके घुटने से जुड़ी पुरानी समस्या और सर्जरी का भी जिक्र किया गया है। इसी वजह से डॉक्टर की नई पोस्ट सामने आने के बाद फैंस को लगा कि शायद अभिनेता किसी नए उपचार से गुजर रहे हैं।

    हालांकि यहां सबसे जरूरी बात यह है कि डॉक्टर की पोस्ट को प्रभास की किसी गंभीर बीमारी या हालिया सर्जरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता। पोस्ट में ऐसा कोई स्पष्ट मेडिकल विवरण नहीं दिया गया है जिससे यह साबित हो कि अभिनेता की हालत गंभीर है। तस्वीर में भी प्रभास सामान्य और मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। इसलिए फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    इससे पहले अगस्त में प्रभास की एक नई तस्वीर को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई थी। तस्वीर में वह पहले की तुलना में काफी दुबले नजर आए थे। कुछ फैंस ने इसे लेकर चिंता जताई जबकि कई लोगों ने माना कि यह उनकी आगामी फिल्म फौजी के किरदार के लिए किया गया शारीरिक बदलाव हो सकता है। प्रभास फिलहाल कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं और उनका व्यस्त शूटिंग शेड्यूल भी लगातार चर्चा में है।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रभास की आने वाली फिल्मों में फौजी और संदीप रेड्डी वांगा की स्पिरिट प्रमुख हैं। फौजी को लेकर अभिनेता का लुक और फिल्म की कहानी पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में उनके फैंस उनकी फिटनेस को लेकर भी काफी सतर्क रहते हैं।

    फिलहाल डॉक्टर की पोस्ट ने सवाल जरूर खड़े किए हैं लेकिन प्रभास की किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या नई सर्जरी की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आधिकारिक जानकारी आने तक अटकलों पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर की पोस्ट को अभिनेता की सेहत और मेहनत को लेकर की गई प्रशंसा के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा। फैंस की चिंता के बीच फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि तस्वीर में प्रभास सामान्य और खुश नजर आ रहे हैं।

  • फाइव स्टार होटल की किचन में गंदगी का मामला, फ्रीजर का तापमान भी मानक से बाहर; खाद्य विभाग ने लिए कई सैंपल

    फाइव स्टार होटल की किचन में गंदगी का मामला, फ्रीजर का तापमान भी मानक से बाहर; खाद्य विभाग ने लिए कई सैंपल


    इंदौर । इंदौर के प्रसिद्ध सयाजी होटल में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का मामला सामने आया है। गुरुवार को खाद्य विभाग की टीम ने होटल की किचन और फूड स्टोरेज एरिया में करीब पांच घंटे तक निरीक्षण किया। जांच के दौरान फूड स्टोरेज में चूहे और किचन तथा फूड प्रिपरेशन एरिया में कॉकरोच मिलने की बात सामने आई। अधिकारियों को खाद्य सामग्री के रखरखाव और लेबलिंग से जुड़ी कई कमियां भी मिलीं। विभाग ने अलग अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। संबंधित कार्रवाई की पुष्टि खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े सोशल मीडिया अपडेट में भी हुई है।

    जांच के दौरान खाद्य स्टोरेज में चूहों की मौजूदगी दिखाई दी। पैलेट के नीचे भी चूहों की मौजूदगी के संकेत मिले। किचन और फूड प्रिपरेशन प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच तथा गंदगी मिलने की बात अधिकारियों ने दर्ज की। ड्राय स्टोरेज की दीवार और फर्श में दरारें भी मिलीं। इसके अलावा गीले और सूखे कचरे के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने की कमी सामने आई। पीने के पानी के बर्तनों के पास रखे डस्टबिन में भी अलग अलग प्रकार का कचरा एक साथ मिला।

    स्टोरेज में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठे। जांच में सीफूड चिकन और मटन के लिए अलग अलग स्टोरेज व्यवस्था नहीं मिलने की जानकारी सामने आई। ड्राय और नॉनवेज स्टोरेज के प्लेटफॉर्म पर जंग के निशान भी मिले। स्टोरेज रैक दीवार से सटाकर रखे गए थे। खाद्य सामग्री को नमी और संभावित संक्रमण से बचाने के लिए स्टोरेज की स्वच्छता और उचित व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है।

    फ्रीजर के तापमान को लेकर भी जांच में गंभीर कमी सामने आई। नॉनवेज को सुरक्षित रखने के लिए सामान्य तौर पर फ्रीजर में करीब माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। निरीक्षण के दौरान एक फ्रीजर का तापमान प्लस 20 डिग्री और दूसरे का माइनस 16 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा 33 नॉनवेज पैकेटों पर पैकेजिंग डेट बैच नंबर और एक्सपायरी डेट दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। पैक्ड कुल्फी पर भी जरूरी जानकारी नहीं मिली।

    स्टोर में रखी मूंगफली में फंगस पाया गया। इसके साथ ही सड़े हुए टमाटर और आलू भी मिले। उबले आलू पर एक्सपायरी डेट की टैगिंग पाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ खाद्य उत्पाद उचित लेबल के बिना रखे गए थे। टॉपिंग के कुछ टेट्रापैक लीक भी मिले जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है। पैकेटबंद कुकीज पर भी पैकेजिंग और एक्सपायरी से जुड़ी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई।

    लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी खाद्य विभाग ने आपत्ति दर्ज की। जांच में होटल में इस्तेमाल होने वाली नॉनवेज गतिविधियों का लाइसेंस में उल्लेख नहीं होने की जानकारी सामने आई। इसी तरह इन हाउस बेकरी और स्वीट्स निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख भी लाइसेंस में नहीं मिलने की बात कही गई। निरीक्षण के दौरान होटल का सेंट्रल FSSAI फाइव स्टार लाइसेंस मौके पर उपलब्ध नहीं मिला। हालांकि होटल स्वयं अलग अलग ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर पांच सितारा होटल के रूप में सूचीबद्ध है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जांच के दौरान पनीर कच्चे नॉनवेज पैक्ड पनीर सौंफ मसाले और ड्रायफ्रूट्स समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए हैं। इन सैंपलों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब खाद्य सुरक्षा विभाग इंदौर में होटल और रेस्टोरेंट्स में स्वच्छता तथा खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर लगातार निरीक्षण कर रहा है। FSSAI के नियमों के तहत खाद्य कारोबारियों के लिए स्वच्छ परिसर उचित भंडारण और सही लेबलिंग जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।

    अब सभी की नजर प्रयोगशाला रिपोर्ट और खाद्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। सैंपल रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जांच के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थ निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। इसके बाद विभाग नियमों के मुताबिक होटल प्रबंधन के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर सकता है।

  • इंदौर के दोहरे हत्याकांड में मासूम की गवाही पर टिकी नजर, घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुआ बयान जांच में बनेगा अहम कड़ी

    इंदौर के दोहरे हत्याकांड में मासूम की गवाही पर टिकी नजर, घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुआ बयान जांच में बनेगा अहम कड़ी


    इंदौर  इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झलारिया गांव में हुए मां बेटी हत्याकांड की जांच में अब 8 साल के मासूम बेटे का बयान बेहद अहम माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पिता सुनील चौहान ने पहले पत्नी अनीता की हत्या की और इसके बाद दोनों बच्चों को हिंगोनिया तालाब में फेंक दिया। इस घटना में 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह अपनी जान बचाकर तालाब से बाहर निकल आया। इसके बाद उसने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। घटना के बाद पुलिस ने बच्चे का बयान मोबाइल में रिकॉर्ड किया था। बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब 2 मिनट 8 सेकंड का है। बाद में बच्चे का बयान अदालत में भी दर्ज कराया गया। घटना और बच्चे के पुलिस को दिए बयान की जानकारी की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है।

    पुलिस के अनुसार तालाब में फेंके जाने के बाद बच्चे ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को मृत होने का आभास दिया और मौका मिलते ही पानी से बाहर निकलकर सड़क की ओर पहुंचा। वहां गश्त कर रही पुलिस टीम की नजर उस पर पड़ी। गीले कपड़ों और घबराए हुए बच्चे ने पुलिस को जो जानकारी दी उसके बाद तालाब में तलाश अभियान शुरू किया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद उसकी बहन का शव बरामद किया गया। इस तरह घटना के तुरंत बाद सामने आया बच्चे का बयान पुलिस के लिए शुरुआती जांच का महत्वपूर्ण आधार बना।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अदालत में 8 साल के बच्चे की गवाही कितनी महत्वपूर्ण होगी। कानूनी तौर पर केवल उम्र कम होने की वजह से किसी बच्चे की गवाही को खारिज नहीं किया जाता। अदालत यह देखती है कि बच्चा सवाल समझने और उनके जवाब तार्किक तरीके से देने में सक्षम है या नहीं। यदि अदालत को लगता है कि बच्चा घटनाक्रम को समझने और सही तरीके से बताने की क्षमता रखता है तो उसकी गवाही को साक्ष्य के रूप में महत्व दिया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी और बयान की विश्वसनीयता दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के साथ परखी जाएगी।

    इस मामले में घटना के तुरंत बाद दिया गया बयान भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बच्चे ने घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस को जानकारी दी थी। ऐसे बयान की जांच करते समय पुलिस और अदालत परिस्थितियों तथा दूसरे साक्ष्यों से उसका मिलान कर सकती है। वीडियो रिकॉर्डिंग भी जांच में उपयोगी हो सकती है लेकिन केवल वीडियो बन जाना अपने आप में पर्याप्त नहीं माना जाता। डिजिटल रिकॉर्ड को कानून के मुताबिक सुरक्षित और प्रमाणित तरीके से अदालत के सामने पेश करना जरूरी होगा।

    मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घटनास्थल से मिले साक्ष्य आरोपी के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच होगी। इन सभी साक्ष्यों को एक साथ देखकर अदालत यह तय करेगी कि अभियोजन पक्ष के आरोप किस हद तक साबित होते हैं। इसलिए बच्चे का बयान महत्वपूर्ण होने के बावजूद पूरे मामले का फैसला केवल एक साक्ष्य के आधार पर नहीं बल्कि समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा।

    इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू मासूम की मानसिक स्थिति भी है। उसने अपनी मां और बहन को खोया है और खुद भी जानलेवा परिस्थिति से बचकर निकला है। ऐसे हादसे का बच्चे के मन पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक उसे सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल देना जरूरी है। परिवार को उससे बार बार घटना पूछने के बजाय उसे भावनात्मक सहारा देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।

    इस पूरे मामले में एक तरफ पुलिस हत्या के आरोपों से जुड़े साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है तो दूसरी तरफ मासूम के भविष्य और मानसिक सुरक्षा की चुनौती भी सामने है। मां और बहन की मौत के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। ऐसे में अदालत में न्याय की प्रक्रिया के साथ उसकी देखभाल और पुनर्वास पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी होगा। आरोपी सुनील चौहान के खिलाफ पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।