Category: Economy

  • फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए जरूरी खबर, SBI ने छोटी अवधि की बल्क एफडी पर ब्याज दरें घटाईं

    नई दिल्ली ।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी घरेलू बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की कुछ अवधि वाली ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जमा राशि वाली चुनिंदा बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरें 15 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से कम अवधि वाली बल्क एफडी पर किया गया है, जबकि लंबी अवधि की कई जमाओं की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

    बैंक की ओर से किए गए बदलाव के तहत 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की कमी की गई है। इसके अलावा 180 दिन से 210 दिन की अवधि वाली जमा पर ब्याज दर में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है। इससे इन अवधि में बड़ी राशि एफडी के रूप में रखने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में कम ब्याज मिलेगा।

    हालांकि 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि वाली 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंक की नई बल्क एफडी दरें अलग-अलग अवधि के आधार पर 5.25 प्रतिशत से 6.50 प्रतिशत के बीच हैं। इसलिए बड़ी राशि को कम अवधि के लिए एफडी में लगाने वाले निवेशकों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

    बल्क एफडी में किया गया यह बदलाव सामान्य एफडी ग्राहकों पर लागू नहीं होता। 3 करोड़ रुपये से कम की घरेलू जमा राशि पर बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक जिनकी एफडी राशि इस सीमा से कम है, उनके मौजूदा ब्याज ढांचे पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    सामान्य एफडी में आम नागरिकों को अलग-अलग अवधि के आधार पर 3.05 प्रतिशत से 6.40 प्रतिशत तक ब्याज मिलता है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अवधि के अनुसार 3.55 प्रतिशत से 7.05 प्रतिशत तक ब्याज मिल रहा है। इस वजह से कम राशि वाली नियमित एफडी करने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा दरों में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट और सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट के बीच राशि की सीमा महत्वपूर्ण होती है। बड़ी राशि जमा करने वाले ग्राहकों के लिए बैंक अलग दरें निर्धारित कर सकता है। ऐसे में निवेश से पहले संबंधित अवधि और लागू ब्याज दर को देखना जरूरी होता है। खास तौर पर छोटी अवधि की एफडी में मामूली दर बदलाव भी बड़ी जमा राशि पर मिलने वाले कुल ब्याज को प्रभावित कर सकता है।

    एफडी को आमतौर पर निश्चित रिटर्न वाले निवेश विकल्प के रूप में देखा जाता है। ब्याज दर पहले से तय होने के कारण निवेशक को मैच्योरिटी तक संभावित रिटर्न का अनुमान लगाने में आसानी होती है। हालांकि अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग होती है और समय से पहले एफडी तोड़ने पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज या जुर्माने में बदलाव हो सकता है।

    SBI की नई दरों का असर मुख्य रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि को छोटी अवधि की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट में रखने की योजना बना रहे हैं। ऐसे निवेशकों के लिए एफडी बुक करने से पहले नई दरों और अवधि की तुलना करना उपयोगी होगा।

    वहीं सामान्य ग्राहकों और 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि रखने वालों के लिए इस बदलाव से राहत है, क्योंकि उनकी एफडी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी मौजूदा नियमित एफडी दरें जारी हैं। इसलिए निवेशकों को अपनी जमा राशि, निवेश अवधि और लागू ब्याज दर के आधार पर फैसला लेना चाहिए।

  • गाजा कैपिटल आईपीओ में निवेश से पहले समझें बड़े जोखिम, नकारात्मक कैश फ्लो और प्रमोटर डिफॉल्ट रिकॉर्ड चिंता बढ़ाते हैं

    गाजा कैपिटल आईपीओ में निवेश से पहले समझें बड़े जोखिम, नकारात्मक कैश फ्लो और प्रमोटर डिफॉल्ट रिकॉर्ड चिंता बढ़ाते हैं


    नई दिल्ली । गाजा कैपिटल का आईपीओ रिटेल निवेशकों के लिए खुल चुका है। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कारोबार और वित्तीय स्थिति से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया गया है। इनमें ऑपरेशन से लगातार नकारात्मक कैश फ्लो, कैरिड इंटरेस्ट पर आय की बढ़ती निर्भरता, अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर के ऑडिट ट्रेल की एक अवधि में उपलब्ध नहीं रहने और एक प्रमोटर का नाम डिफॉल्ट से संबंधित सूची में शामिल होना प्रमुख है। निवेशकों के लिए इन बिंदुओं को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी ने इन्हें अपने आधिकारिक खुलासों में जोखिम कारकों के तौर पर दर्ज किया है।

    कंपनी के अनुसार उसके ऑपरेशन से मिलने वाला नेट कैश फ्लो हाल के वर्षों में नकारात्मक रहा है। वित्त वर्ष 2025 में ऑपरेशंस से नेट कैश फ्लो माइनस 8.75 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा और नीचे जाकर माइनस 14.98 करोड़ रुपये हो गया। लगातार नकारात्मक ऑपरेशनल कैश फ्लो कंपनी की नकदी स्थिति को लेकर निवेशकों के लिए विचार करने योग्य महत्वपूर्ण पहलू है।

    गाजा कैपिटल के ऑडिटर्स ने अकाउंटिंग रिकॉर्ड से संबंधित कुछ टिप्पणियां भी की हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में अपने खातों को बनाए रखने के लिए ऐसे अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया, जिसमें ऑडिट ट्रेल यानी एडिट लॉग रिकॉर्ड करने की सुविधा मौजूद थी। हालांकि, 1 अप्रैल 2025 से 27 अगस्त 2025 तक यह सुविधा सक्रिय नहीं थी।

    ऑडिट ट्रेल का काम अकाउंटिंग रिकॉर्ड में किए गए बदलावों का विवरण सुरक्षित रखना होता है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी रिकॉर्ड में कब और किस तरह का बदलाव किया गया। कंपनी के ऑडिटर ने कहा कि ऑडिट के दौरान ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें ऑडिट ट्रेल सुविधा सक्रिय रहने के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की गई हो।

    कंपनी ने यह भी बताया कि ऑडिट ट्रेल सुविधा दोबारा सक्रिय होने के बाद रिकॉर्ड को संबंधित कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप सुरक्षित रखा गया है। हालांकि, सुविधा के एक निश्चित अवधि तक बंद रहने का उल्लेख कंपनी के आरएचपी में जोखिम और अनुपालन से जुड़े खुलासे के रूप में किया गया है।

    कंपनी की आय में कैरिड इंटरेस्ट का हिस्सा भी एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। गाजा कैपिटल ने बताया कि वित्त वर्ष 2024 में कुल आय में कैरिड इंटरेस्ट की हिस्सेदारी 17.69 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 52.25 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में 47.79 प्रतिशत हो गई। कंपनी के मुताबिक आय के बड़े हिस्से का कैरिड इंटरेस्ट पर निर्भर होना उसकी कुल आय में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है।

    आरएचपी में प्रमोटर गोपाल जैन से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण खुलासा भी किया गया है। कंपनी ने बताया कि जैन का नाम भारतीय रिजर्व बैंक की एक ऐसी सूची में शामिल है, जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक के डिफॉल्ट वाले ऐसे खाते शामिल हैं, जिनके संबंध में कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।

    कंपनी के अनुसार यह मामला एडुकॉम्प इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड स्कूल मैनेजमेंट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसके बोर्ड में गोपाल जैन पहले नॉमिनी डायरेक्टर रहे थे। गाजा कैपिटल का कहना है कि संबंधित कंपनी के डिफॉल्ट के समय जैन उससे जुड़े नहीं थे।

    कंपनी ने यह भी बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने गोपाल जैन का नाम संबंधित सूची से हटाने के लिए पत्र दिया है। ऐसे में आईपीओ में निवेश करने वालों के लिए कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, आय के स्रोत, ऑडिट संबंधी खुलासों और प्रमोटर से जुड़े जोखिमों का समग्र आकलन करना महत्वपूर्ण है। आईपीओ से जुड़े अंतिम निर्णय से पहले निवेशकों को आरएचपी में दर्ज सभी जोखिम कारकों को ध्यान से समझना चाहिए।

  • भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 325 अंक टूटा और निफ्टी 24,100 के नीचे बंद हुआ, निवेशकों में सतर्कता बढ़ी

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार बुधवार को कारोबारी सत्र के अंत में लाल निशान में बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों से पहले निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,909.68 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32 प्रतिशत कमजोर होकर 24,078.30 अंक पर रहा।

    बाजार में बुधवार को व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। प्रमुख सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस सबसे अधिक प्रभावित रहा और इसमें 1.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी एनर्जी 1.18 प्रतिशत कमजोर हुआ। मीडिया, पीएसई, इंफ्रास्ट्रक्चर और कमोडिटीज से जुड़े सूचकांक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, ऑटो, सर्विसेज, फार्मा और कंजप्शन सूचकांकों में भी कमजोरी रही। इससे संकेत मिला कि बाजार में दबाव केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई प्रमुख क्षेत्रों में निवेशकों ने बिकवाली की।

    हालांकि आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच कुछ राहत दी। दोनों सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। कमजोर रुपये और कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग से आईटी कंपनियों को समर्थन मिलने की बात बाजार जानकारों ने कही।

    लार्जकैप शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 130.65 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 63,408.75 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 101.70 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,707.15 अंक पर रहा।

    सेंसेक्स में कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। एचसीएल टेक, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, टाइटन, टीसीएस, इंफोसिस और ट्रेंट बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बीईएल और इंडिगो में गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा एसबीआई, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक भी कमजोर होकर बंद हुए। बैंकिंग, वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बाजार की कमजोरी का एक कारण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।

    इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद स्थायी कूटनीतिक समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर भी नजर बनी हुई है। ऊंचे क्रूड और बॉन्ड यील्ड का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ निवेशकों की ओर से चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग देखने को मिली। कमजोर रुपये से आईटी कंपनियों को संभावित लाभ की उम्मीद ने इस क्षेत्र के कुछ शेयरों को समर्थन दिया। हालांकि वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी फेड मिनट्स को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।

  • क्रॉम्पटन ने नई मास्टर ब्रांड पहचान के साथ सुपर-प्रीमियम ब्रांड ‘रायन’ और एनर्जी प्लेटफॉर्म ‘एनर्जियन’ लॉन्च किया

    क्रॉम्पटन ने नई मास्टर ब्रांड पहचान के साथ सुपर-प्रीमियम ब्रांड ‘रायन’ और एनर्जी प्लेटफॉर्म ‘एनर्जियन’ लॉन्च किया


    मुंबई। क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने अपने कारोबार के अगले चरण की शुरुआत करते हुए नई मास्टर ब्रांड पहचान का अनावरण किया है। ‘क्रॉम्पटन 2.0’ के तहत कंपनी खुद को नवाचार आधारित और उपभोक्ता केंद्रित घरेलू समाधान कारोबार के रूप में विकसित कर रही है। इसी रणनीति के तहत कंपनी ने सुपर-प्रीमियम श्रेणी के लिए नया ब्रांड ‘क्रॉम्पटन रायन’ और ऊर्जा समाधान के लिए ‘एनर्जियन’ मंच को भी मजबूत किया है।

    कंपनी के अनुसार, पिछले एक दशक में उसने पारंपरिक विद्युत उत्पाद श्रेणियों से आगे बढ़ते हुए तकनीक, उत्पाद नवाचार और नए उपभोक्ता क्षेत्रों में निवेश किया है। नई ब्रांड पहचान इसी बदलाव को दर्शाती है और नवाचार, प्रीमियम उत्पादों तथा दीर्घकालिक विकास के लिए एक साझा मंच तैयार करती है।

    ‘सेफायर’ बना नई ब्रांड पहचान का प्रतीक

    क्रॉम्पटन की नई पहचान के केंद्र में ‘सेफायर’ नामक नया प्रतीक और दृश्य रूप है। कंपनी के मुताबिक इसका नाम नीलम के गहरे नीले रंग और यूनानी पवन देवता ‘जेफिरस’ से प्रेरित है। यह गुणवत्ता, देखभाल, परिष्कार और स्थायित्व के साथ सहजता तथा गतिशीलता का भाव प्रस्तुत करता है।

    इस प्रतीक में ‘सी’ अक्षर को उपभोक्ता, ग्राहक, देखभाल, संपर्क और क्रॉम्पटन से जोड़ा गया है। इसके भीतर से बाहर की ओर बढ़ता अनंत का चिह्न निरंतर नवाचार और सीमाओं से आगे बढ़ने की कंपनी की सोच को दर्शाता है। प्रतीक को 12 वृत्तों से तैयार किया गया है, जो वर्ष के 12 महीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कंपनी का कहना है कि इससे पूरे वर्ष बदलती उपभोक्ता जरूरतों के साथ जुड़े रहने का संदेश मिलता है।

    नई पहचान के साथ कंपनी ने नया ब्रांड वादा ‘अमेजिंग, एवरी डे’ भी पेश किया है। इसके जरिए क्रॉम्पटन रोजमर्रा के जीवन को तकनीक, उपयोगिता और भरोसेमंद प्रदर्शन के माध्यम से बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है। इसके अलावा कंपनी ने एक विशिष्ट ध्वनि पहचान भी विकसित की है, जिसका इस्तेमाल विज्ञापन, डिजिटल मंच, उत्पाद अनुभव और खुदरा केंद्रों सहित विभिन्न उपभोक्ता संपर्क बिंदुओं पर किया जाएगा।

    क्रॉम्पटन की नई पहचान को चरणबद्ध तरीके से उत्पादों, पैकेजिंग, खुदरा उपस्थिति, डिजिटल मंचों और उपभोक्ता संचार में लागू किया जाएगा।

    ‘एनर्जियन’ के जरिए ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार

    कंपनी ने अपने ऊर्जा समाधान मंच ‘एनर्जियन’ को भी नई पहचान के साथ मजबूत किया है। ‘द पावर बिहाइंड एवरीडे प्रोग्रेस’ के वादे के साथ एनर्जियन को ऐसे ऊर्जा मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो विश्वसनीय, बुद्धिमान और टिकाऊ ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराएगा।

    कंपनी के मुताबिक एनर्जियन केवल किसी एक उत्पाद श्रेणी तक सीमित नहीं रहेगा। यह ऊर्जा उत्पादन, रूपांतरण, भंडारण और चार्जिंग से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने के लिए पूरी ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में काम करेगा। इसका उद्देश्य घरों और कारोबारों की बदलती ऊर्जा जरूरतों को एकीकृत समाधान के जरिए पूरा करना है।

    सुपर-प्रीमियम बाजार में ‘क्रॉम्पटन रायन’ की शुरुआत

    प्रीमियम उत्पादों पर बढ़ते जोर के बीच क्रॉम्पटन ने अपना नया सुपर-प्रीमियम ब्रांड ‘क्रॉम्पटन रायन’ पेश किया है। कंपनी के अनुसार, यह ब्रांड आधुनिक और बेहतर जीवनशैली की आकांक्षा रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए तैयार किया गया है। इसमें डिजाइन, तकनीकी दक्षता और उपयोग में सहजता को एक साथ जोड़ा गया है।

    रायन की मूल अवधारणा ‘प्रोवेस इनसाइड, पॉयज आउटसाइड’ है। इसका अर्थ ऐसे उत्पादों से है, जिनमें अंदर उन्नत इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमता हो, जबकि बाहरी डिजाइन परिष्कृत और आकर्षक हो। कंपनी का कहना है कि रायन के उत्पादों में अगली पीढ़ी की तकनीक को मानव केंद्रित डिजाइन के साथ जोड़ा जाएगा।

    क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोमीत घोष ने कहा कि ‘क्रॉम्पटन रायन’ का शुभारंभ कंपनी की प्रीमियम उत्पाद रणनीति में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, समर्पित सुपर-प्रीमियम ब्रांड के रूप में रायन डिजाइन, उन्नत तकनीक और उपभोक्ताओं की बदलती आकांक्षाओं के अनुरूप समाधान उपलब्ध कराने पर केंद्रित होगा।

    जल शुद्धिकरण क्षेत्र में पहला उत्पाद

    रायन ब्रांड ने प्रीमियम जल शुद्धिकरण श्रेणी में ‘रायन वॉटर बायोफायर’ के साथ शुरुआत की है। कंपनी इसे श्रेणी में नए प्रकार का नवाचार बता रही है। इसका उद्देश्य पारंपरिक जल शुद्धिकरण से आगे बढ़कर उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के अनुरूप बेहतर संतुलित पानी उपलब्ध कराना है।

    कंपनी के अनुसार, भारत में घरेलू विद्युत जल शोधक बाजार का आकार करीब 5,565 करोड़ रुपये है और इसमें रिवर्स ऑस्मोसिस आधारित उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 85 प्रतिशत है। इसके बावजूद देश में घरेलू स्तर पर जल शोधकों की पहुंच करीब छह प्रतिशत ही है। क्रॉम्पटन का मानना है कि कम पहुंच और बढ़ती उपभोक्ता आकांक्षाओं के कारण इस बाजार में आगे विस्तार तथा प्रीमियम उत्पादों की मांग की बड़ी संभावना मौजूद है।

    क्रॉम्पटन 2.0 के तहत कारोबार में बदलाव

    क्रॉम्पटन के मुख्य विपणन अधिकारी तन्मय प्रस्ती ने कहा कि नई ब्रांड पहचान कंपनी के पिछले कुछ वर्षों में हुए बदलाव को सामने लाती है। उनके मुताबिक कंपनी अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों में उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए एक एकीकृत ब्रांड व्यवस्था तैयार कर रही है।

    प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोमीत घोष ने कहा कि घरेलू समाधान उद्योग तेजी से बदल रहा है और भविष्य के मजबूत ब्रांड किसी एक उत्पाद श्रेणी के बजाय उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के जीवन में निभाई जाने वाली भूमिका से पहचाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि क्रॉम्पटन 2.0 का उद्देश्य कंपनी को विविधीकृत और नवाचार आधारित घरेलू समाधान कारोबार के रूप में आगे बढ़ाना है।

    कंपनी के मुताबिक नई ब्रांड पहचान, एनर्जियन और रायन के जरिए वह एक ओर अपनी 85 वर्ष से अधिक पुरानी विद्युत विरासत को मजबूत बनाए रखेगी, वहीं दूसरी ओर नए ऊर्जा समाधान, प्रीमियम उत्पाद और तकनीक आधारित उपभोक्ता अनुभव के क्षेत्रों में विस्तार करेगी।

  • बुधवार 19 अगस्त को Stock Market का क्या रहेगा हाल? तेजी आएगी या मुनाफावसूली बढ़ाएगी चिंता

    बुधवार 19 अगस्त को Stock Market का क्या रहेगा हाल? तेजी आएगी या मुनाफावसूली बढ़ाएगी चिंता


    नई दिल्ली। बुधवार 19 अगस्त को शेयर बाजार की चाल को लेकर निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और ऐसे में बुधवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में हलचल बनी रहने की संभावना है। बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की चाल कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों से जुड़ी खबरें अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी या गिरावट किसी एक संकेत पर निर्भर नहीं करती।

    अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी बाजारों में खरीदारी का माहौल रहता है तो भारतीय शेयर बाजार को भी इसका फायदा मिल सकता है। ऐसी स्थिति में निफ्टी और सेंसेक्स में शुरुआती मजबूती देखने को मिल सकती है। बैंकिंग वित्तीय सेवाओं आईटी और बड़े कंपनियों वाले शेयरों में खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे सकती है। हालांकि ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। इसलिए केवल शुरुआती तेजी देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।

    दूसरी ओर अगर विदेशी बाजारों में कमजोरी रहती है या निवेशकों के बीच चिंता बढ़ाने वाली खबरें सामने आती हैं तो भारतीय बाजार पर दबाव पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की तेजी को कमजोर कर सकती है। रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बन सकती है। खासतौर पर आयात पर निर्भर कंपनियों और कुछ सेक्टर के शेयरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

    बुधवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी खास नजर रह सकती है। इसके अलावा आईटी फार्मा ऑटो और मेटल सेक्टर में स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। किसी खास कंपनी से जुड़ी बड़ी खबर उसके शेयर में सामान्य बाजार से अलग तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है। इसलिए निवेशकों को केवल इंडेक्स की दिशा देखकर किसी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए।

    छोटे निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र खासतौर पर सावधानी बरतने वाला हो सकता है। बाजार अगर लगातार ऊपर जाता दिखाई दे तो तेजी के पीछे भागने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और वैल्यूएशन को समझना जरूरी है। इसी तरह अचानक गिरावट आने पर घबराकर मजबूत शेयरों में जल्दबाजी में बिकवाली करना भी नुकसानदेह हो सकता है। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को अपने स्टॉप लॉस और रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान रखना चाहिए।

    कुल मिलाकर 19 अगस्त को शेयर बाजार की दिशा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बीच तय होगी। बाजार में तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए धैर्य रखना और अपने निवेश लक्ष्य के अनुसार फैसला लेना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार की संभावनाओं और जोखिम को समझना जरूरी है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए केवल बाजार की एक दिन की चाल देखकर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए।

  • वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली

    वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं पर बने दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोना भी 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4350 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता रहा। इसी तरह हाजिर चांदी करीब 62.8 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास कमजोर बनी रही। वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी के साथ घरेलू निवेशकों की बिकवाली ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया।

    एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2,32,419 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद भाव से गिरकर 2,27,931 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस स्तर पर चांदी में 4,488 रुपये यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और कारोबार के दौरान चांदी 3,734 रुपये यानी 1.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,28,685 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रही।

    बाजार विश्लेषकों के मुताबिक व्यापक कमोडिटी बाजार में कमजोरी और मुनाफावसूली ने चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला। चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग से जुड़े संकेतों और निवेश धारणा का भी असर पड़ता है, इसलिए बाजार में जोखिम बढ़ने पर इसमें सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    सोने के वायदा भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स अपने पिछले बंद भाव 1,54,262 रुपये प्रति 10 ग्राम से 858 रुपये यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 1,53,404 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंचा। बाद में सोने में कुछ सुधार आया और यह 581 रुपये यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,681 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की नरमी के साथ डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने भी घरेलू कीमतों को प्रभावित किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी को कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण दबाव वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। ऊंची बॉन्ड यील्ड निवेशकों को निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड की कीमतें क्रमशः करीब 85.5 डॉलर और 91.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना मजबूत हो सकती है।

    मध्य पूर्व की स्थिति भी सोने और चांदी की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी रहती है तो सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर वैश्विक तनाव बढ़ने या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर दोनों धातुओं को दोबारा सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिल सकता है।

  • जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी

    जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी


    नई दिल्ली । 
    क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो ने ग्राहकों के लिए फ्री डिलीवरी से जुड़ी अपनी न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव किया है। अब सामान्य परिस्थितियों में मुफ्त डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को कम से कम 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा। इससे पहले यह सीमा 149 रुपये थी। वहीं अधिक मांग वाले समय में फ्री डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर राशि 299 रुपये तक पहुंच सकती है।

    नई व्यवस्था का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कम कीमत की कुछ जरूरी वस्तुएं ही मंगाते हैं। पहले 149 रुपये के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी उपलब्ध होने के कारण छोटे ऑर्डर करना अपेक्षाकृत आसान था। अब ऐसे ग्राहकों को मुफ्त डिलीवरी पाने के लिए अपनी खरीदारी में अतिरिक्त सामान जोड़ना पड़ सकता है।

    जेप्टो की नई न्यूनतम ऑर्डर सीमा सामान्य समय और पीक डिमांड के हिसाब से अलग रखी गई है। सामान्य परिस्थितियों में ग्राहक को 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा, जबकि जब मांग अधिक होगी, तब यह सीमा बढ़कर 299 रुपये तक हो सकती है। इस तरह फ्री डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहक की ओर से किया जाने वाला न्यूनतम खर्च समय के अनुसार बदल सकता है।

    क्विक कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में डिलीवरी की लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने के लिए कंपनियों को डार्क स्टोर, डिलीवरी नेटवर्क, कर्मचारियों और लॉजिस्टिक्स पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ाने का उद्देश्य प्रति ऑर्डर मिलने वाले राजस्व और डिलीवरी लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाना हो सकता है।

    इस बदलाव से जेप्टो की फ्री डिलीवरी नीति प्रतिस्पर्धी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के करीब आती दिखाई दे रही है। बाजार में कंपनियां लगातार अपनी फीस, डिलीवरी शर्तों और न्यूनतम ऑर्डर मूल्य में बदलाव कर रही हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के साथ कारोबार की लाभप्रदता को बेहतर करना भी है।

    नई व्यवस्था से ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है। जिन उपभोक्ताओं को केवल एक या दो छोटी जरूरत की चीजें तत्काल मंगानी होती हैं, वे अतिरिक्त सामान खरीदने या डिलीवरी शुल्क का विकल्प चुनने के बीच फैसला कर सकते हैं। वहीं नियमित ग्राहक अपनी खरीदारी को एक साथ करने पर विचार कर सकते हैं, ताकि न्यूनतम ऑर्डर सीमा पूरी हो सके।

    क्विक कॉमर्स क्षेत्र में लाभप्रदता का मुद्दा पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है। कंपनियां तेजी से डिलीवरी के साथ परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। डिलीवरी शुल्क और न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव इसी व्यापक कारोबारी रणनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं।

    ऑनलाइन डिलीवरी क्षेत्र में केवल क्विक कॉमर्स ही नहीं, बल्कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी शुल्क संबंधी बदलाव करते रहे हैं। मार्च में जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद स्विगी ने भी प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म शुल्क बढ़ाया था। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि डिलीवरी आधारित कारोबार में कंपनियां राजस्व बढ़ाने और परिचालन खर्च का दबाव कम करने के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

    जेप्टो की नई सीमा ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है। ग्राहकों के लिए कीमत, डिलीवरी समय और सुविधा महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे लागत और लाभप्रदता को नियंत्रित करते हुए ग्राहकों को आकर्षक सेवा उपलब्ध कराती रहें। जेप्टो की बढ़ी हुई न्यूनतम ऑर्डर राशि इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया कदम है।

  • सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे बोले, विनियमित संस्थाएं एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के उपयोग की खुद होंगी जिम्मेदार

    सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे बोले, विनियमित संस्थाएं एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के उपयोग की खुद होंगी जिम्मेदार

    नई दिल्ली ।भारतीय वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि सेबी के दायरे में आने वाली सभी विनियमित संस्थाएं अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी।

    मुंबई में आयोजित एक उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए सेबी चेयरमैन ने कहा कि किसी संस्था द्वारा इस्तेमाल की जा रही तकनीक चाहे उसके भीतर विकसित की गई हो या किसी बाहरी कंपनी अथवा तीसरे पक्ष से प्राप्त की गई हो, उसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की ही होगी। इसका उद्देश्य वित्तीय बाजारों में तकनीकी नवाचार के साथ जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि वित्तीय बाजारों में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, तकनीकी बदलाव के बीच निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता को प्राथमिकता देना जरूरी है। सेबी इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए नियामकीय ढांचे को विकसित करने पर काम कर रहा है।

    सेबी अध्यक्ष के अनुसार नियामकीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा दे, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता न हो। एआई आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि संस्थाएं अपने तकनीकी फैसलों और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निभाएं।

    उन्होंने बाजार अवसंरचना संस्थानों की तकनीकी क्षमता और जोखिम से निपटने की तैयारी को मापने के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना पर भी जानकारी दी। सेबी इस तरह के ढांचे की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों की मजबूती और जोखिम प्रतिरोधक क्षमता का वस्तुनिष्ठ तरीके से आकलन करना है।

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण में तकनीक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। वित्तपोषण के नए माध्यम विकसित करने, निवेश के अवसरों का विस्तार करने और नियामकीय व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने में तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके लिए नियामक व्यवस्था को भी बदलते तकनीकी वातावरण के साथ आगे बढ़ना होगा।

    सेबी की रणनीति को उन्होंने संतुलित, अनुपातिक और भविष्य केंद्रित बताया। उनके अनुसार बाजार में नवाचार के लिए पर्याप्त अवसर होने चाहिए, लेकिन साथ ही निवेशकों के हित, निष्पक्षता, सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता भी कायम रहनी चाहिए।

    सेबी चेयरमैन ने भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवार बाजार आधारित निवेश से जुड़े हैं। इससे भारतीय पूंजी बाजार की पहुंच और मजबूती बढ़ी है, हालांकि निवेशकों की भागीदारी को और व्यापक बनाने की गुंजाइश अभी बनी हुई है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार अब केवल आर्थिक गतिविधियों का प्रतिबिंब नहीं रह गए हैं, बल्कि आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यमों में भी शामिल हो चुके हैं। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ निवेश और वित्तपोषण की जरूरतें भी बढ़ेंगी। ऐसे में पूंजी बाजार को अधिक गहरा और नवोन्मेषी बनाने के साथ उन्हें निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखना भी जरूरी होगा।

  • रियलमी पी4एस 5जी में सैमसंग एम14 डिस्प्ले तकनीक, 6500 निट्स लोकल पीक ब्राइटनेस और एआई गेमिंग फीचर्स मिलेंगे

    रियलमी पी4एस 5जी में सैमसंग एम14 डिस्प्ले तकनीक, 6500 निट्स लोकल पीक ब्राइटनेस और एआई गेमिंग फीचर्स मिलेंगे

    नई दिल्ली । भारत के स्मार्टफोन बाजार में खरीदारों की प्राथमिकताएं लगातार बदल रही हैं। कैमरा, प्रोसेसर और डिजाइन के साथ अब डिस्प्ले क्वालिटी भी फोन खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रही है। ओटीटी स्ट्रीमिंग, मोबाइल गेमिंग, सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग के बढ़ते इस्तेमाल के कारण उपयोगकर्ता ऐसी स्क्रीन चाहते हैं जो लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बेहतर विजुअल और स्मूथ अनुभव दे सके।

    इसी बदलते रुझान के बीच रियलमी अपनी पी सीरीज के तहत नया पी4एस 5जी स्मार्टफोन भारत में पेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी के अनुसार यह फोन 26 अगस्त को लॉन्च होगा और इसकी बिक्री फ्लिपकार्ट तथा रियलमी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से होगी। नए स्मार्टफोन में डिस्प्ले और गेमिंग अनुभव को प्रमुखता दी गई है।

    रियलमी पी4एस 5जी में 17.22 सेंटीमीटर यानी 6.78 इंच का सैमसंग 1.5के एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है। कंपनी ने इसमें सैमसंग की एम14 ल्यूमिनसेंट मटेरियल तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिसे आम तौर पर ज्यादा प्रीमियम स्मार्टफोन में देखा जाता है।

    कंपनी के मुताबिक यह डिस्प्ले पारंपरिक एमोलेड पैनल की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक ल्यूमिनस एफिशिएंसी और 50 प्रतिशत तक लंबी स्क्रीन लाइफ देने में सक्षम है। फोन में 1400 निट्स ग्लोबल पीक ब्राइटनेस भी दी गई है, जिससे तेज रोशनी वाले वातावरण में स्क्रीन की विजिबिलिटी बेहतर रहने का दावा किया गया है।

    एचडीआर कंटेंट के लिए फोन 6500 निट्स तक लोकल पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करता है। इसके अलावा एचडीआर10 प्लस और नेटफ्लिक्स एचडीआर सपोर्ट भी दिया गया है। कंपनी के अनुसार इन सुविधाओं से वीडियो और अन्य कंटेंट में बेहतर कॉन्ट्रास्ट, डिटेल और रंगों का अनुभव मिल सकता है।

    गेमिंग को ध्यान में रखते हुए 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट के साथ 3000 हर्ट्ज इंस्टेंटेनियस टच सैंपलिंग रेट दिया गया है। इसका उद्देश्य स्क्रीन पर स्वाइप, एनिमेशन और गेमिंग कमांड को अधिक प्रतिक्रियाशील बनाना है। खासकर तेज गति वाले गेम में टच रिस्पॉन्स उपयोगकर्ता के नियंत्रण अनुभव को प्रभावित करता है।

    फोन में रियलमी का हाइपर विजन प्लस एआई क्लिप सिस्टम मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7400 अल्ट्रा चिपसेट के साथ काम करता है। कंपनी के अनुसार यह सेटअप एआई आधारित फ्रेम इंटरपोलेशन की मदद से गेमिंग के दौरान विजुअल फ्लूडिटी और प्रभावी फ्रेम रेट को बेहतर करने के लिए तैयार किया गया है।

    रियलमी पी4एस 5जी में आंखों के आराम को ध्यान में रखते हुए टीयूवी राइनलैंड लो ब्लू लाइट सर्टिफिकेशन भी दिया गया है। इसके साथ फुल ब्राइटनेस डीसी डिमिंग तकनीक मौजूद है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग ब्राइटनेस स्तरों पर स्क्रीन फ्लिकर को कम करना है।

    पी सीरीज के पिछले मॉडल भी कंपनी के प्रदर्शन और डिजाइन केंद्रित पोर्टफोलियो का हिस्सा रहे हैं। कंपनी के अनुसार पी3 सीरीज की वैश्विक शिपमेंट तीन मिलियन यूनिट से अधिक रही है। अब पी4एस 5जी के जरिए रियलमी डिस्प्ले, गेमिंग और रोजमर्रा के उपयोग को एक साथ बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।

    कुल मिलाकर नए स्मार्टफोन में स्क्रीन को केवल एक स्पेसिफिकेशन के बजाय उपयोगकर्ता अनुभव के प्रमुख हिस्से के रूप में पेश किया गया है। 1.5के रिजॉल्यूशन, 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट, एम14 तकनीक, एचडीआर सपोर्ट और एआई गेमिंग फीचर्स इसे भारतीय बाजार में डिस्प्ले केंद्रित स्मार्टफोन के तौर पर स्थापित करने की कंपनी की कोशिश को दिखाते हैं।

  • भारत की तेल खरीद पर दोहरी मार: कच्चा तेल 10 डॉलर महंगा, रूसी क्रूड की छूट भी लगभग खत्म

    भारत की तेल खरीद पर दोहरी मार: कच्चा तेल 10 डॉलर महंगा, रूसी क्रूड की छूट भी लगभग खत्म


    नई दिल्ली। भारतीय तेल रिफाइनरियों के लिए कच्चा तेल खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दो हफ्तों में करीब 10 डॉलर बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं, खाड़ी और पश्चिम अफ्रीकी तेल की कीमतों पर भी सप्लाई की कमी के चलते प्रीमियम बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि रूसी तेल पर मिलने वाली छूट लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि वेनेजुएला के क्रूड पर भी डिस्काउंट काफी कम हो गया है।

    अगर खाड़ी क्षेत्र में तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती और रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट वापस नहीं आती, तो भारतीय रिफाइनरियों की लागत और बढ़ सकती है। इसका असर तेल कंपनियों के मार्जिन के साथ आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है।

    खाड़ी का तेल ब्रेंट से करीब 10 डॉलर महंगा

    ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक, बाजार में कच्चे तेल की कमी का फायदा ट्रेडर्स उठा रहे हैं। भारतीय रिफाइनरियों को खाड़ी देशों से तेल खरीदने के लिए स्पॉट मार्केट का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां अतिरिक्त प्रीमियम वसूला जा रहा है।

    खाड़ी के सप्लायर दुबई-ओमान बेंचमार्क पर करीब 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं। वहीं, दुबई-ओमान बेंचमार्क खुद ब्रेंट से करीब 6 से 7 डॉलर महंगा है। इस तरह भारतीय रिफाइनरों के लिए खाड़ी का कच्चा तेल ब्रेंट की तुलना में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा पड़ रहा है।

    सऊदी अरामको की आधिकारिक सेल प्राइस दुबई-ओमान बेंचमार्क से 1.5 से 3 डॉलर नीचे जरूर हैं, लेकिन लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण टर्म डील के तहत मिलने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे भारतीय रिफाइनरियों की स्पॉट मार्केट पर निर्भरता बढ़ गई है।

    जहाजों की कमी ने बढ़ाई लागत

    संघर्ष वाले क्षेत्रों से कच्चा तेल लाने में जहाजों की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन गई है। जोखिम वाले समुद्री रास्तों से तेल पहुंचाने के लिए ट्रेडर्स अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं। टर्म कॉन्ट्रैक्ट में तेल सस्ता होने के बावजूद भारत तक उसे पहुंचाने के लिए पर्याप्त जहाज नहीं मिलना रिफाइनरों की लागत बढ़ा रहा है।

    पश्चिम अफ्रीकी क्रूड भी महंगा

    खाड़ी के बाद पश्चिम अफ्रीका से मिलने वाला कच्चा तेल भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए महंगा हो गया है। इसके चलते कंपनियां अब वैकल्पिक स्रोतों पर नजर डाल रही हैं। अमेरिका, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।

    रूसी तेल की सबसे बड़ी बढ़त खत्म

    कुछ समय पहले तक रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए सबसे आकर्षक विकल्पों में था। इसकी बड़ी वजह उस पर मिलने वाली भारी छूट थी। अब यह डिस्काउंट लगभग खत्म हो चुका है। वेनेजुएला के तेल पर मिलने वाली छूट भी काफी कम हो गई है।

    इससे भारतीय रिफाइनरियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है और दूसरी तरफ सस्ता रूसी तेल भी पहले जैसा उपलब्ध नहीं है।

    अमेरिकी प्रतिबंध बढ़े तो मुश्किल और बढ़ेगी

    भारतीय तेल कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध भी बड़ा जोखिम हैं। अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों और कंपनियों पर प्रतिबंध और कड़े करता है, तो भारत के लिए रूसी क्रूड खरीदना और मुश्किल हो सकता है। ऐसे में रिफाइनरियों को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है।