Category: Economy

  • अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का दूसरी तिमाही में मुनाफा 145 प्रतिशत उछला, आय 51 प्रतिशत बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये पहुंची

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का दूसरी तिमाही में मुनाफा 145 प्रतिशत उछला, आय 51 प्रतिशत बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये पहुंची

    नई दिल्ली । अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का मुनाफा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 145 प्रतिशत बढ़कर 1,364 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी की कुल आय 51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10,239 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। ट्रांसमिशन और ऊर्जा समाधान कारोबार में बेहतर प्रदर्शन को कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बताया गया है।

    कंपनी के परिचालन से प्राप्त आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़कर 7,167 करोड़ रुपये रही। इसी अवधि में कंपनी का एबिटडा 67 प्रतिशत बढ़कर 3,548 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेशनल एबिटडा में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 3,070 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। ये आंकड़े कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में सुधार को दर्शाते हैं।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भी कंपनी ने मुनाफे और आय के मोर्चे पर बढ़त दर्ज की। अप्रैल से सितंबर की अवधि में कंपनी का समेकित मुनाफा सालाना आधार पर 137 प्रतिशत बढ़कर 2,600 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, इस दौरान कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,092 करोड़ रुपये दर्ज की गई। कंपनी के प्रबंधन ने पहली छमाही के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन को भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल के अनुसार, पहली छमाही के दौरान वित्तीय प्रदर्शन के साथ परिचालन गतिविधियों में भी मजबूती रही। उन्होंने बताया कि विजाग और सतारा में रणनीतिक ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का अधिग्रहण कंपनी की विस्तार योजना का हिस्सा है। इन परिसंपत्तियों के जुड़ने से कंपनी की सक्रिय ऑर्डर बुक लगभग 87,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह ऑर्डर बुक भविष्य में परियोजनाओं के क्रियान्वयन और कारोबार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    मुंबई के बिजली वितरण कारोबार में भी कंपनी ने वृद्धि दर्ज की। प्रबंधन के अनुसार, इस कारोबार में बेची गई बिजली की इकाइयों में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, स्मार्ट मीटरिंग कारोबार के तहत लगाए गए मीटरों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ हो गई है। स्मार्ट मीटरिंग कंपनी के ऊर्जा समाधान कारोबार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें बढ़ती गतिविधियां आय में योगदान दे रही हैं।

    कंपनी ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी एमएसईडीसीएल के साथ 2.5 गीगावाट की चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति से संबंधित एक बड़ा अनुबंध भी हासिल किया है। प्रबंधन के मुताबिक, यह समझौता विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा जुटाने और ग्राहकों को बिजली आपूर्ति बेहतर बनाने की कंपनी की क्षमता को मजबूत करता है। हालांकि, इस अनुबंध से होने वाली अतिरिक्त आय का विस्तृत ब्योरा जारी आंकड़ों में नहीं दिया गया है।

    कारोबार के अलग-अलग क्षेत्रों में दूसरी तिमाही के नतीजे भी सामने आए। ट्रांसमिशन कारोबार की परिचालन आय सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,521 करोड़ रुपये रही। बिजली वितरण कारोबार, जिसमें एईएमएल और एमयूएल शामिल हैं, की आय दो प्रतिशत बढ़कर 3,181 करोड़ रुपये हो गई। स्मार्ट मीटरिंग से आय 129 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 267 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि ऊर्जा समाधान कारोबार से आय 2,197 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

    शेयर बाजार में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर बीएसई पर 1,293 रुपये के भाव पर बंद हुआ। उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, शेयर का पिछले 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 1,789 रुपये और न्यूनतम स्तर 804.70 रुपये रहा है। कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे, आय और परिचालन लाभ में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भविष्य का प्रदर्शन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और कारोबार के विस्तार पर निर्भर करेगा।

  • शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 460 अंक टूटा और निफ्टी 22,688 के करीब बंद

    शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 460 अंक टूटा और निफ्टी 22,688 के करीब बंद

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत टूटकर 73,249.39 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,687.65 पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दिया। मीडिया, एफएमसीजी और रक्षा क्षेत्र के शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। इसके बाद प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निचले स्तरों पर कुछ समय के लिए खरीदारी भी आई, जिससे गिरावट को सीमित करने में मदद मिली, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती हासिल नहीं कर सका। लगातार तीसरे दिन की कमजोरी से संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा दबाव में रहा और 2.35 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। निफ्टी एफएमसीजी में 1.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.21 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ्टी एनर्जी और निफ्टी आईटी दोनों में 1.05 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.96 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और व्यापक बना दिया।

    हालांकि, सभी क्षेत्रों में गिरावट नहीं रही। निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन इसका असर प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को पलटने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले कारोबारी संकेतों पर बनी हुई है।

    बड़े शेयरों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 501.90 अंक यानी 0.87 प्रतिशत गिरकर 57,063.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 211.40 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,275.90 पर आ गया। छोटी कंपनियों के शेयरों में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट से पता चलता है कि बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।

    सेंसेक्स में शामिल बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और बजाज फिनसर्व बढ़त के साथ बंद हुए। इन शेयरों में खरीदारी के बावजूद बाजार की समग्र दिशा कमजोर बनी रही।

    दूसरी ओर, इटरनल, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, ट्रेंट, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बीएसई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, टाइटन, इंडिगो, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक गिरावट के साथ बंद हुए। इन शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख सूचकांकों और व्यापक बाजार में लगातार गिरावट निवेशकों की जोखिम लेने की सीमित इच्छा को दर्शाती है। फिलहाल बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संकेतों का प्रभाव महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक बाजार के अगले रुझान को समझने के लिए सतर्कता से कारोबार कर रहे हैं।

  • नवरात्रि में ऑनलाइन फूड डिलीवरी की धूम, नोएडा में 11 हजार की व्रत थाली और मुंबई में रसगुल्लों का बड़ा ऑर्डर

    नवरात्रि में ऑनलाइन फूड डिलीवरी की धूम, नोएडा में 11 हजार की व्रत थाली और मुंबई में रसगुल्लों का बड़ा ऑर्डर


    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान देशभर में व्रत के व्यंजनों और पारंपरिक मिठाइयों की ऑनलाइन मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। दुर्गा अष्टमी, महा नवमी और दशहरे के आसपास त्योहार का उत्साह खाने-पीने के ऑर्डर में भी दिखाई दिया। इस दौरान लोगों ने साबूदाने से बने व्यंजनों, विशेष व्रत थालियों और मिठाइयों को प्राथमिकता दी। नवरात्रि के दौरान कुछ ग्राहकों के बड़े ऑर्डर भी चर्चा में रहे। नोएडा में एक ग्राहक ने 13 व्रत थालियों के लिए 11,072 रुपये खर्च किए, जबकि मुंबई में एक ग्राहक ने मिठाइयों और कॉफी रसगुल्ला तिरामिसु के लिए 9,870 रुपये का ऑर्डर दिया।

    17 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच व्रत के व्यंजनों में साबूदाने से बनी चीजें सबसे ज्यादा पसंद की गईं। इस अवधि में हर घंटे औसतन 1,794 साबूदाने के व्यंजन ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इसके बाद नवरात्रि व्रत थालियों, सिंघाड़े से बनी चीजों और कुट्टू तथा राजगिरा से तैयार विशेष व्यंजनों की मांग रही। समा के चावल और मखाने से बने पकवान भी लोगों के पसंदीदा विकल्पों में शामिल रहे।

    नवरात्रि के दौरान केवल अलग-अलग व्यंजनों ही नहीं, बल्कि पूरे भोजन के कॉम्बो भी ग्राहकों को आकर्षित करते रहे। विशेष व्रत थालियों में सिंघाड़े की पूरी वाली थाली की मांग सबसे आगे रही। इसके अलावा राजगिरा की पूरी और आलू-हींग से तैयार तीन कोर्स वाली थाली भी खूब पसंद की गई। इस तरह की थालियों के ऑर्डर दिल्ली, बेंगलुरु, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों से अधिक आए।

    शहरों के हिसाब से देखें तो मुंबई और बेंगलुरु में साबूदाना खिचड़ी की मांग सबसे ज्यादा रही। पुणे और जयपुर में भी इस व्यंजन को पसंद किया गया। व्रत के दौरान ऐसे भोजन की मांग बढ़ी, जिसे पारंपरिक स्वाद के साथ एक संपूर्ण भोजन के रूप में मंगाया जा सके। व्रत थालियों में अलग-अलग पकवानों के संयोजन ने ग्राहकों को कई विकल्प दिए।

    मिठाइयों की बात करें तो नवरात्रि के दौरान रसगुल्ला सबसे लोकप्रिय विकल्प बनकर सामने आया। 17 से 20 अक्टूबर के बीच देशभर में इसके हर घंटे औसतन 495 ऑर्डर मिले। दिल्ली, मुंबई और गुरुग्राम में रसगुल्ले की मांग विशेष रूप से अधिक रही। कुल मिलाकर पारंपरिक मिठाइयों के ऑर्डर में पिछले वर्ष की तुलना में 36.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    रसगुल्ले के अलावा गुलाब जामुन, काजू कतली, जलेबी और रसमलाई भी त्योहार के दौरान खूब मंगाई गईं। बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में मिठाइयों की मांग अधिक रही। वहीं पटना, देहरादून, जोधपुर, गया और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में भी मिठाइयों के ऑर्डर में अच्छी गतिविधि देखने को मिली। छोटे शहरों में अगरतला, शिलांग, पलवल और भटिंडा में भी मिठाइयों की मांग उल्लेखनीय रही।

    इस अवधि के सबसे बड़े मिठाई ऑर्डरों में मुंबई के ग्राहक का 9,870 रुपये का ऑर्डर शामिल रहा। इसमें कई तरह की मिठाइयों के साथ कॉफी रसगुल्ला तिरामिसु भी मंगाया गया। यह मिठाई पारंपरिक भारतीय रसगुल्ले और इटली की प्रसिद्ध मिठाई तिरामिसु का फ्यूजन रूप है। त्योहार के दौरान इस तरह के नए स्वाद वाले विकल्प भी ग्राहकों के भोजन और मिठाई के चुनाव का हिस्सा बने।

    नवरात्रि के इन आंकड़ों से पता चलता है कि त्योहार के दौरान ग्राहकों की पसंद पारंपरिक व्रत के भोजन और मिठाइयों के इर्द-गिर्द रही। साबूदाने के व्यंजनों और व्रत थालियों की मांग के साथ रसगुल्ले सहित पारंपरिक मिठाइयों के ऑर्डर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम ने बढ़ाई चिंता, बजाज और पीरामल फाइनेंस ने दिए संकेत, दूसरे कर्ज में फंसे ग्राहकों पर भी नजर

    गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम ने बढ़ाई चिंता, बजाज और पीरामल फाइनेंस ने दिए संकेत, दूसरे कर्ज में फंसे ग्राहकों पर भी नजर


    नई दिल्ली। देश में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने यानी गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने सोने के बदले बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज ले रहे हैं। हालांकि गोल्ड लोन को आमतौर पर सुरक्षित कर्ज माना जाता है लेकिन अब इस क्षेत्र में ग्राहकों की भुगतान क्षमता को लेकर चिंताएं सामने आने लगी हैं। देश की प्रमुख गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों बजाज फाइनेंस और पीरामल फाइनेंस ने गोल्ड लोन लेने वाले कुछ ग्राहकों के भुगतान में देरी के संकेत दिए हैं। इससे इस तेजी से बढ़ते कारोबार में संभावित जोखिमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में बैंकों का गोल्ड लोन सालाना आधार पर 83 प्रतिशत बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी का गोल्ड लोन 69 प्रतिशत बढ़कर 3.6 लाख करोड़ रुपये हो गया। इन आंकड़ों से साफ है कि सोने के बदले कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ा है। सोना गिरवी होने के कारण वित्तीय संस्थानों को कर्ज के बदले सुरक्षा मिलती है लेकिन ग्राहकों के समय पर भुगतान नहीं करने की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।

    बजाज फाइनेंस ने जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के नतीजों में बताया कि 30 दिनों से अधिक समय से बकाया कर्ज से जुड़ी उसकी स्टेज दो और स्टेज तीन परिसंपत्तियों में पिछली तिमाही के मुकाबले 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के अनुसार इसके पीछे कम अवधि वाले गोल्ड लोन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी वजह से बजाज फाइनेंस ने अब ऐसे शॉर्ट टर्म गोल्ड लोन देना बंद कर दिया है। कंपनी का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब 24 हजार करोड़ रुपये का है। हालांकि सितंबर तिमाही में कंपनी का समेकित मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत बढ़ा है लेकिन कर्ज की गुणवत्ता पर निगरानी जारी है।

    दूसरी ओर पीरामल फाइनेंस ने भी गोल्ड लोन बाजार में बढ़ते जोखिम को लेकर चिंता जताई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयराम श्रीधरन ने विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ोतरी इस क्षेत्र को जोखिम के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रही है। उनके मुताबिक कंपनी के करीब 35 प्रतिशत ग्राहकों के पास किसी दूसरी वित्तीय संस्था से भी गोल्ड लोन है। ऐसे मामलों में ग्राहकों की कुल कर्ज देनदारी और भुगतान क्षमता को समझना जरूरी हो जाता है।

    पीरामल फाइनेंस के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग स्तर पर करीब 4.7 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन ऐसे ग्राहकों को दिए गए जिनके दूसरे कर्ज 90 दिनों से अधिक समय से बकाया थे। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पास गोल्ड लोन होना अपने आप में उसे जोखिम वाला कर्जदार साबित नहीं करता। इसके बावजूद कई संस्थानों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। पीरामल फाइनेंस ने सितंबर तिमाही में 545 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया जो पिछले साल की समान अवधि से 66 प्रतिशत अधिक है।

    गोल्ड लोन बाजार में बढ़ती गतिविधियों के बीच बजाज फाइनेंस के लिए महंगाई में बढ़ोतरी और नियामकीय बदलाव जैसे दूसरे जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में ग्राहकों को कर्ज लेने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और भुगतान क्षमता का आकलन करना चाहिए। समय पर किस्त या ब्याज नहीं चुकाने की स्थिति में गिरवी रखा सोना भी खतरे में पड़ सकता है। वहीं वित्तीय संस्थानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे कर्ज देने से पहले ग्राहकों की मौजूदा देनदारियों और भुगतान के रिकॉर्ड का बेहतर आकलन करें।

  • जर्मनी-नीदरलैंड दौरा…. ट्रंप की टैरिफ नीति और ट्रेड डील पर अनिश्चितता के बीच भारत का नया दांव

    जर्मनी-नीदरलैंड दौरा…. ट्रंप की टैरिफ नीति और ट्रेड डील पर अनिश्चितता के बीच भारत का नया दांव


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने बीते डेढ़ साल में भारतीय माल (Indian goods) पर शुल्क (Tariff) की दर तीन बार बदली। अब अधिकतर भारतीय सामान पर सामान्य शुल्क के ऊपर 10 फीसदी लगता है। फरवरी 2026 में 18% की दर वाले जिस अंतरिम ढांचे का एलान हुआ था, उस पर आठ महीने बाद भी हस्ताक्षर नहीं हुए। इसी अनिश्चितता के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) 22 से 24 अक्तूबर तक जर्मनी (Germany) और 24 से 27 अक्तूबर तक नीदरलैंड (Netherlands) के दौरे पर रहेंगे। उनके साथ करीब 100 कंपनियों और नवउद्यमों का दल है।

    बीते चार साल में भारत ने एक के बाद एक समझौते किए हैं और यूरोपीय संघ उसका 22वां मुक्त व्यापार साझेदार बना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के व्यापार समझौते पर सकारात्मक बयान के बावजूद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर का कहना है कि घोषणा तुरंत होने वाली नहीं है। यानी तस्वीर अब भी साफ नहीं।


    यूरोप का दरवाजा खुला, पर ताला अब तक नहीं हटा

    यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा सौदा है। यूरोपीय संघ अपने 99.3 प्रतिशत और भारत अपने 96.6 प्रतिशत कारोबार पर शुल्क हटाएगा या घटाएगा। भारत यूरोपीय कारों पर शुल्क 110 प्रतिशत तक के स्तर से घटाकर 40 प्रतिशत पर लाएगा। पर नौ महीने बाद भी यह लागू नहीं हुआ है। गोयल का यह दौरा इसलिए नीतिगत कम और व्यावहारिक ज्यादा है।


    बर्लिन और हेग में क्या होगा

    गोयल बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में हिस्सा लेंगे और जर्मनी के आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री तथा चांसलर कार्यालय के जी-7 और जी-20 शेरपा से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। भारतीय कारोबारी दल की अलग बैठकें वाहन और उन्नत विनिर्माण, सूचना तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि एवं उपभोक्ता सामान, दवा और स्वास्थ्य में होंगी।

    नीदरलैंड में बातचीत सरकार से सरकार के स्तर पर होगी। 25 अक्तूबर को भारतीय दल रॉटरडम बंदरगाह देखने जाएगा और 26 अक्तूबर को हेग में भारत-नीदरलैंड कारोबार मंच की बैठक होगी।


    अब तक की कोशिशों से क्या मिला

    वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसमें वस्तुओं का निर्यात 441.8 अरब डॉलर और सेवाओं का 421.3 अरब डॉलर रहा। यह उसी साल हुआ जिस साल अमेरिका ने शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया था।

    मुक्त व्यापार समझौते वाले बाजारों में आसियान देश सबसे ऊपर रहे, जहां 38.42 अरब डॉलर का माल गया। संयुक्त अरब अमीरात 37.36 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ब्रिटेन के साथ समझौता 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ और उसी वित्त वर्ष में वहां 13.44 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज हुआ।

    ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में वहां भेजे माल के लिए सिर्फ 1,482 मूल प्रमाणपत्र जारी हुए थे, समझौते के बाद यह औसतन 45 हजार से ऊपर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया को निर्यात चार अरब डॉलर से बढ़कर 7.28 अरब डॉलर हो गया।

    ओमान के साथ समझौता एक जून 2026 को लागू हुआ और जून में ही वहां निर्यात पिछले महीने से 54.7 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 189.6 प्रतिशत बढ़ गया। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ समझौता अक्तूबर 2025 से लागू है और अब तक 7,885 मूल प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं।

  • सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, घरेलू बाजार में फिसले भाव, अमेरिकी फेड की बैठक से पहले निवेशक सतर्क

    सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, घरेलू बाजार में फिसले भाव, अमेरिकी फेड की बैठक से पहले निवेशक सतर्क


    नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव कच्चे तेल की ऊंची कीमतों मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी आशंकाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी का असर भारतीय वायदा बाजार में भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। निवेशक फिलहाल अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोने की कीमत खबर लिखे जाने तक 0.23 प्रतिशत गिरकर 4 हजार 133 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। वहीं चांदी में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली और इसकी कीमत 1.03 प्रतिशत फिसलकर 57.405 डॉलर प्रति औंस रह गई। वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती को इस गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है इसलिए विदेशी बाजार में कमजोरी के साथ भारतीय निवेशकों की नजर भी सोने और चांदी के भाव पर बनी हुई है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना एमसीएक्स पर करीब 519 रुपये यानी 0.35 प्रतिशत गिरकर 1 लाख 46 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र की शुरुआत में सोना अपने पिछले बंद भाव 1 लाख 46 हजार 519 रुपये से गिरकर 1 लाख 46 हजार 328 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा और कीमत घटकर 1 लाख 45 हजार 689 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस तरह कारोबार के दौरान सोने में 830 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली।

    चांदी की कीमतों में भी तेज कमजोरी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी करीब 2 हजार 267 रुपये यानी 1.07 प्रतिशत गिरकर 2 लाख 9 हजार 218 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2 लाख 11 हजार 485 रुपये के बंद भाव के मुकाबले 2 लाख 10 हजार 400 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली थी। इसके बाद कीमतों में और गिरावट आई और एक समय चांदी 2 लाख 8 हजार 801 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी दिन के कारोबार में इसमें 2 हजार 684 रुपये तक की कमजोरी दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा रूस की ऊर्जा खरीद से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले और वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी कमोडिटी बाजार को प्रभावित किया है। महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है जिससे केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है।

    निवेशकों की नजर अब 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक पर है। बाजार के अनुमानों के अनुसार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 16 प्रतिशत जबकि दिसंबर में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 90 प्रतिशत बताई जा रही है। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने जैसी संपत्तियों का आकर्षण घट सकता है क्योंकि इनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। मजबूत डॉलर भी सोने की मांग को सीमित कर सकता है।

    आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों खासकर व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है। यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत महंगाई के नरम संकेत मिलने पर कीमती धातुओं में खरीदारी लौटने की संभावना बन सकती है। ऐसे में सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव और अपने बजट को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • SBI के ग्राहकों का निजी डेटा साइबर अपराधियों के हाथ पहुंचने की आशंका, 3,897 रिकॉर्ड उजागर, बैंक ने उठाए कदम

    SBI के ग्राहकों का निजी डेटा साइबर अपराधियों के हाथ पहुंचने की आशंका, 3,897 रिकॉर्ड उजागर, बैंक ने उठाए कदम


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। बैंक ने बुधवार को पुष्टि की कि उसके 3,897 ग्राहकों से संबंधित ऐसे रिकॉर्ड डार्क वेब पर पाए गए हैं जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां मौजूद थीं। इस खुलासे के बाद बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। एसबीआई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसके सामान्य कारोबार और बैंकिंग सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है।

    एसबीआई ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि उसे अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल यानी सीईआरटी-इन से ग्राहकों के डेटा के संभावित लीक होने संबंधी अलर्ट मिले थे। इसके बाद डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड का प्रारंभिक विश्लेषण किया गया। इस जांच के दौरान 3,897 ऐसे ग्राहक रिकॉर्ड की पहचान हुई जिनमें व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी शामिल थी। बैंक अब इस बात का पता लगाने में जुटा है कि उजागर हुए डेटा की वास्तविक स्थिति क्या है और यह किन परिस्थितियों में डार्क वेब तक पहुंचा।

    रिपोर्ट के मुताबिक उजागर हुए रिकॉर्ड में ग्राहकों के नाम जन्मतिथि मोबाइल नंबर ईमेल आईडी लिंग और आवासीय पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा शाखा से संबंधित विवरण सीआईएफ पहचान संख्या लीड आईडी और ऋण आवेदन या लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडाटा तथा अन्य फाइलें भी सामने आने की बात कही गई है। इस तरह की जानकारी का गलत इस्तेमाल होने पर ग्राहकों को फर्जी कॉल संदेश ईमेल और अन्य प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सामने आए सभी रिकॉर्ड पूरी तरह प्रामाणिक हैं या उनमें से कितनी जानकारी वास्तव में ग्राहकों से संबंधित है।

    बैंक ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही उसकी साइबर घटना प्रतिक्रिया और नियंत्रण प्रक्रिया सक्रिय कर दी गई थी। मामले की विस्तृत जांच करने और संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए सीईआरटी-इन से अनुमोदित एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को भी नियुक्त किया गया है। जांच के दौरान डेटा के स्रोत उसकी प्रामाणिकता उजागर हुई जानकारी की कुल मात्रा और उससे जुड़े संभावित जोखिमों का पता लगाया जा रहा है। एसबीआई ने कहा है कि ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी निवारक और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस बीच बैंक ने साफ किया है कि डेटा ब्रीच की घटना से उसके मुख्य कारोबारी संचालन वित्तीय प्रदर्शन या सेवाओं की निरंतरता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। बैंक की प्रमुख सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं और ग्राहकों को बैंकिंग सुविधाएं मिलने में किसी व्यवधान की सूचना नहीं है। हालांकि डेटा लीक की वास्तविक सीमा और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    गौरतलब है कि सप्ताह की शुरुआत में सिरियसिम नामक एक हैकर समूह ने दावा किया था कि उसने एसबीआई से जुड़े गोपनीय ग्राहक डेटा हासिल किए हैं। कथित तौर पर इनमें व्यक्तिगत जानकारियां ऋण आवेदनों और खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज शामिल थे। साइबर सुरक्षा निगरानी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट साइबरपल्स56 ने भी इस दावे को एक्स पर साझा किया था। पोस्ट में लगभग 3.75 लाख डेटा एंट्री और 2,722 पीडीएफ दस्तावेज होने का दावा किया गया था। इन दावों की पूरी स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

    शेयर बाजार में भी इस घटनाक्रम के बीच एसबीआई के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बुधवार दोपहर करीब 12 बजकर 18 मिनट पर एनएसई में बैंक का शेयर लगभग 0.61 प्रतिशत गिरकर 967 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि केवल इस गिरावट को डेटा ब्रीच से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिलहाल निवेशकों और ग्राहकों की नजर बैंक की जांच तथा आगे सामने आने वाले तथ्यों पर बनी हुई है।

  • किसानों की होगी डबल कमाई, एक ही खेत में उगेगी फसल और बनेगी बिजली, एग्रीवोल्टाइक्स से ग्रामीण समृद्धि को नई उड़ान

    किसानों की होगी डबल कमाई, एक ही खेत में उगेगी फसल और बनेगी बिजली, एग्रीवोल्टाइक्स से ग्रामीण समृद्धि को नई उड़ान


    नई दिल्ली। देश के किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को साझा करते हुए इस तकनीक की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कृषि गतिविधियों के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़ने वाली यह व्यवस्था किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है। इस तकनीक के जरिए किसान एक ही जमीन पर खेती जारी रखने के साथ बिजली उत्पादन से भी अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स किसानों के लिए कमाई का अतिरिक्त स्रोत बन सकती है। इससे ऊर्जा पर होने वाला खर्च कम करने और फसल उत्पादकता को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। खेती में मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में कृषि और सौर ऊर्जा को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल किसानों को आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ उनकी आर्थिक निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है।

    भारत 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन की थीम पावरिंग द ग्लोबल साउथ रखी गई है। इसका उद्देश्य कृषि और स्वच्छ ऊर्जा के बीच बेहतर तालमेल की संभावनाओं पर चर्चा करना है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने अपने लेख में एग्रीवोल्टाइक्स को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी मॉडल बताया है। इसे एग्रीपीवी भी कहा जाता है। इस व्यवस्था में खेतों में सौर पैनल इस तरह लगाए जाते हैं कि उनके नीचे या आसपास खेती की जा सके और जमीन का उपयोग कृषि उत्पादन के साथ बिजली बनाने के लिए भी हो।

    मंत्रियों के अनुसार भारत में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। ऐसे किसानों के लिए आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। एग्रीवोल्टाइक्स के माध्यम से किसान खेती से होने वाली कमाई के अलावा सौर ऊर्जा उत्पादन और बिजली की बिक्री से भी आय अर्जित कर सकते हैं। इसके साथ ही सिंचाई के लिए डीजल और खरीदी गई बिजली पर निर्भरता घटाने की संभावना भी बनती है। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    इस तकनीक का लाभ केवल अतिरिक्त आमदनी तक सीमित नहीं है। सौर पैनलों की उचित व्यवस्था खेतों में सूक्ष्म जलवायु तैयार करने में मदद कर सकती है। इससे कुछ परिस्थितियों में फसलों को अत्यधिक गर्मी और तेज सौर विकिरण से राहत मिल सकती है। उपयुक्त डिजाइन और फसल चयन के आधार पर सूखे तथा ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ फसल के प्रकार जलवायु और सौर पैनलों की बनावट पर निर्भर करेगा।

    सरकार प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष महत्व देने की तैयारी कर रही है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल और सिंचाई व्यवस्था के सौरकरण को प्रोत्साहन मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर संयंत्रों की स्थापना रखरखाव और उनसे जुड़ी कृषि सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

    मंत्रियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मॉडल की सफलता के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाना जरूरी होगा। ऐसी फसलों का चयन करना होगा जिन्हें उपलब्ध धूप में बेहतर तरीके से उगाया जा सके। सिंचाई पोषक तत्व प्रबंधन और सौर पैनलों की ऊंचाई तथा दूरी पर भी ध्यान देना होगा ताकि खेती के लिए पर्याप्त सूर्य प्रकाश उपलब्ध रहे। इसके अलावा कृषि और ऊर्जा विभागों राज्य सरकारों अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। सही योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ एग्रीवोल्टाइक्स किसानों की आमदनी बढ़ाने और गांवों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन

    बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार मौजूदा 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। इससे बैंकिंग सेक्टर में पूंजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा भी नहीं की गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में प्रारूप कैबिनेट नोट तैयार किया है। प्रस्तावित बदलाव को आगे बढ़ाने से पहले अन्य मंत्रालयों से उनकी राय मांगी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने भी सरकारी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर जल्द विचार करने की सिफारिश की थी। ऐसे में आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फिलहाल भारत में निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए एफडीआई की अधिकतम सीमा 74 प्रतिशत है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत तक निर्धारित है। इस अंतर को कम करने के उद्देश्य से सरकारी बैंकों में निवेश की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में सबसे अधिक 11.07 प्रतिशत विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। इसके बाद केनरा बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 10.55 प्रतिशत है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सरकारी बैंकों के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    इस प्रस्ताव पर विचार ऐसे समय में किया जा रहा है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश छह प्रतिशत बढ़कर 19.81 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 18.62 अरब डॉलर था। मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में एफडीआई लगभग दोगुना होकर 12.1 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि एक साल पहले इसी महीने यह 6.6 अरब डॉलर था। मई में निवेश घटकर 2.8 अरब डॉलर रहा लेकिन जून में फिर बढ़कर 4.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

    क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार सेवा क्षेत्र विदेशी निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र में 7.04 अरब डॉलर का निवेश आया। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र को 2.84 अरब डॉलर तथा व्यापार क्षेत्र को 1.92 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला। इसके अलावा गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.24 अरब डॉलर और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 62.2 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इक्विटी निवेश पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी को शामिल करने वाला कुल एफडीआई अप्रैल से जून के दौरान लगभग 22 प्रतिशत बढ़कर 30.65 अरब डॉलर हो गया।

    राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु 5.95 अरब डॉलर के निवेश के साथ पहले स्थान पर रहा। महाराष्ट्र में 4.22 अरब डॉलर दिल्ली में 2.67 अरब डॉलर कर्नाटक में 2.11 अरब डॉलर और गुजरात में 1.3 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। अब सरकारी बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश की भूमिका बढ़ सकती है।

  • भारत में AI कंपनियों के IPO से निवेशकों को मिलेगी नई उम्मीद, 55 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनियों पर नजर

    भारत में AI कंपनियों के IPO से निवेशकों को मिलेगी नई उम्मीद, 55 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनियों पर नजर


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का तेजी से बढ़ता इकोसिस्टम आने वाले दो से तीन वर्षों में शेयर बाजार के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में एआई स्टार्टअप्स की संभावित लिस्टिंग से सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मूल्यांकन में 50 अरब डॉलर से लेकर 100 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में मध्यम से लेकर अंतिम विकास चरण तक पहुंच चुकी करीब 70 निजी एआई कंपनियों में से 25 से 50 प्रतिशत कंपनियां आने वाले समय में अपना आईपीओ ला सकती हैं। इन कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग उनके मौजूदा अनुमानित मूल्यांकन से औसतन करीब चार गुना अधिक वैल्यूएशन पर हो सकती है। इससे भारतीय शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों की संख्या बढ़ने के साथ निवेशकों को इस क्षेत्र में निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं।

    एआई स्टार्टअप्स की फंडिंग में तेजी

    भारत में एआई कंपनियों के प्रति निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के बाद से भारतीय एआई स्टार्टअप्स के लिए निजी इक्विटी फंडिंग तीन गुना हो गई है। वहीं देश में कुल निजी इक्विटी निवेश में एआई की हिस्सेदारी चार गुना बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशक अब एआई को केवल उभरती हुई तकनीक के रूप में नहीं बल्कि भविष्य में बड़े कारोबार और कमाई की संभावना वाले क्षेत्र के तौर पर देख रहे हैं। भारत निजी एआई फंडिंग के मामले में दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल है। वहीं नई फंडिंग हासिल करने वाली एआई कंपनियों की संख्या के आधार पर देश दुनिया के शीर्ष चार देशों में जगह रखता है। इस स्थिति से भारतीय एआई उद्योग को वैश्विक निवेश बाजार में मजबूती मिलने की संभावना है।

    84 निजी एआई कंपनियों की कुल वैल्यू 55 अरब डॉलर

    गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में भारत की 84 निजी कंपनियों को प्राइवेट एआई कंटेंडर्स के रूप में पहचाना गया है। इन कंपनियों का कुल अनुमानित मूल्यांकन करीब 55 अरब डॉलर है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के बाद से भारत में एआई से जुड़ी कुल निजी फंडिंग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं कंपनियों को मिला है। ये कंपनियां एआई तकनीक से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। इनमें एआई सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं के साथ ऐसे व्यवसाय भी शामिल हैं जो एआई सिस्टम के संचालन के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन कंपनियों के संभावित आईपीओ से शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कारोबारी गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है।

    अपस्ट्रीम एआई क्षेत्र में सबसे बड़ा अवसर

    रिपोर्ट में एआई वैल्यू चेन के शुरुआती और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्र को सबसे बड़े अवसर के रूप में बताया गया है। इसे अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स कहा जाता है और इसका अनुमानित मूल्यांकन करीब 35 अरब डॉलर है। इस क्षेत्र में बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से लेकर सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन चिप डिजाइन क्वांटम कंप्यूटिंग डेटा सेंटर क्लाउड सेवाओं और डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियां आती हैं। एआई तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित करने और चलाने के लिए इन क्षेत्रों की अहम भूमिका होती है। इसी वजह से इनके कारोबार में वृद्धि की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    आईपीओ में दो-तिहाई हिस्सेदारी की संभावना

    गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भविष्य में एआई कंपनियों की संभावित लिस्टिंग के कुल मूल्य में से लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स का हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों की लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में एआई वैल्यू चेन के उन हिस्सों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है जो फिलहाल बाजार में कम दिखाई देते हैं। गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-प्रशांत इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो के मुताबिक एआई कंपनियों की लिस्टिंग से भारतीय बाजार में इस क्षेत्र से जुड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि संभावित मूल्यांकन और आईपीओ की संख्या अनुमान पर आधारित हैं। वास्तविक नतीजे बाजार की स्थिति कंपनियों के प्रदर्शन और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेंगे।