Category: Economy

  • कांचीपुरम में पुस्तक विमोचन और पुडुचेरी में ऐतिहासिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगी निर्मला सीतारमण

    कांचीपुरम में पुस्तक विमोचन और पुडुचेरी में ऐतिहासिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगी निर्मला सीतारमण

    नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तमिलनाडु और पुडुचेरी का दो दिवसीय आधिकारिक दौरा शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के पुनरोद्धार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के कारण चर्चा में है। इस यात्रा के दौरान वह कई ऐसी परियोजनाओं का शुभारंभ और उद्घाटन करेंगी, जिनका उद्देश्य स्थानीय इतिहास, परंपरा और सामाजिक विकास को नई दिशा प्रदान करना है।

    वित्त मंत्री बुधवार शाम नई दिल्ली से चेन्नई पहुंचीं, जहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। दौरे की शुरुआत तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले से होगी, जहां वह महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेंगी। कांचीपुरम स्थित एसएसकेवी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस फॉर विमेन में वह ‘डॉटर्स ऑफ कांची – द एसएसकेवी स्टोरी’ नामक पुस्तक का विमोचन करेंगी।

    यह पुस्तक संस्थान के इतिहास, उपलब्धियों और समाज में उसके योगदान को रेखांकित करती है। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका और उसके प्रभाव को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। माना जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से संवाद भी करेंगी तथा शिक्षा के महत्व और महिलाओं की भागीदारी पर अपने विचार साझा करेंगी।

    कांचीपुरम लंबे समय से अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र वित्त मंत्री के लिए भी विशेष महत्व रखता है। वह विभिन्न अवसरों पर कांचीपुरम की प्रसिद्ध बुनाई परंपरा और यहां के शिल्पकारों के योगदान का उल्लेख करती रही हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र की कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

    दौरे के दूसरे चरण में वित्त मंत्री पुडुचेरी पहुंचेंगी, जहां वह ऐतिहासिक महत्व रखने वाले पुनर्निर्मित लाइटहाउस का उद्घाटन करेंगी। यह कार्यक्रम सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स कमिश्नरेट परिसर में आयोजित होगा। लंबे समय से संरक्षण और मरम्मत की प्रक्रिया से गुजर रहे इस लाइटहाउस को अब नई पहचान के साथ आम लोगों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।

    इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक ऐतिहासिक संरचना का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय इतिहास के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ाते हैं। औपनिवेशिक काल की वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अपने दौरे के अंतिम दिन वित्त मंत्री पुडुचेरी के एक सरकारी मध्य विद्यालय परिसर में स्थित लगभग 400 वर्ष पुराने ‘मुझियांकुलम’ के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन करेंगी। यह परियोजना ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण और सामुदायिक सुविधाओं के विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। इसके माध्यम से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले ये कार्यक्रम केंद्र सरकार की उस नीति को दर्शाते हैं, जिसमें शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक विकास को समान महत्व दिया जा रहा है। वित्त मंत्री का यह दौरा स्थानीय स्तर पर चल रही विकास और संरक्षण परियोजनाओं को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।

  • भारत-अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ाया रणनीतिक फोकस, उभरती तकनीकों में गहरे सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    भारत-अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ाया रणनीतिक फोकस, उभरती तकनीकों में गहरे सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों तथा रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई। इस चर्चा में सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य के बीच साझेदारी को और गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    वाशिंगटन में आयोजित इस बैठक के दौरान भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों ने तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। बातचीत का प्रमुख केंद्र उन क्षेत्रों पर रहा जिन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया।

    वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक तकनीकी विकास की रीढ़ माना जाता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के निर्माण में इसकी केंद्रीय भूमिका है। हाल के वर्षों में दुनिया ने चिप आपूर्ति संकट का सामना किया है, जिसके बाद कई देशों ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित करने पर जोर बढ़ाया है। भारत और अमेरिका की यह पहल भी इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा मानी जा रही है।

    वार्ता के दौरान दोनों देशों ने भरोसेमंद और विविधीकृत सप्लाई चेन विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया। वैश्विक व्यापार में भू-राजनीतिक चुनौतियों और आपूर्ति व्यवधानों को देखते हुए मजबूत सप्लाई नेटवर्क की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उत्पादों और औद्योगिक विनिर्माण के लिए स्थिर आपूर्ति श्रृंखला भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी इस चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा। एआई वर्तमान समय में स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, विनिर्माण और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों को तेजी से प्रभावित कर रहा है। भारत और अमेरिका दोनों ही इस तकनीक को आर्थिक विकास, नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में एआई अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक उपयोग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, क्लीन एनर्जी सिस्टम, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। वैश्विक स्तर पर इन संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई देश इनके सुरक्षित और स्थायी स्रोत विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारत और अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक महत्व का विषय माना है।

    यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग का दायरा तेजी से बढ़ा है। दोनों देश उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग आने वाले वर्षों में तेज विस्तार के दौर में प्रवेश करने वाला है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। भारत के पास विशाल तकनीकी प्रतिभा और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे वह वैश्विक सेमीकंडक्टर और उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कौशल केंद्र के रूप में उभर सकता है।

    कुल मिलाकर यह वार्ता केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था, औद्योगिक सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस सहयोग का प्रभाव तकनीक, निवेश, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है।

  • कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

    कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती लौटती दिखाई दी है। लगातार दो कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी, जिससे कीमतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शुरुआती कारोबार में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की दिशा बदल दी और सोना-चांदी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की शुरुआत दबाव के साथ हुई थी। कारोबार के शुरुआती चरण में कीमतें पिछले बंद स्तर की तुलना में नीचे खुलीं, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार में अभी भी सतर्कता बनी हुई है। हालांकि कुछ ही समय बाद खरीदारी का माहौल बनने लगा और सोने ने तेजी से रिकवरी करते हुए अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली। कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन निवेशकों की रुचि बढ़ने से कीमतें मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहीं।

    चांदी के बाजार में भी लगभग यही तस्वीर दिखाई दी। शुरुआत में कीमतों पर दबाव रहा और बाजार कमजोर स्तर पर खुला, लेकिन बाद में मांग बढ़ने से तेजी का रुख बन गया। कारोबार के शुरुआती घंटों में ही चांदी ने अपनी गिरावट को पीछे छोड़ते हुए मजबूती हासिल कर ली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में हुई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को अवसर के रूप में देखा, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रभाव भी घरेलू कारोबार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर सोने में सीमित बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी के दामों में दबाव बना रहा। इसके बावजूद भारतीय बाजार में दोनों धातुओं ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू निवेशकों की मांग और तकनीकी स्तरों पर हुई खरीदारी ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया।

    बीते कुछ महीनों का प्रदर्शन देखें तो सोना और चांदी दोनों ही भारी दबाव में रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों और वैश्विक निवेश प्रवाह में बदलाव के कारण कीमती धातुओं में व्यापक बिकवाली देखी गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों को कई बार तेज गिरावट का सामना करना पड़ा।

    विशेष रूप से चांदी में गिरावट का दायरा अधिक रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान इसके दामों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई, जबकि सोना भी लगातार दबाव में बना रहा। एक सप्ताह के भीतर चांदी में दो अंकों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में मौजूदा तेजी को बाजार सहभागियों ने राहत के संकेत के रूप में देखा है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान तेजी को अभी स्थायी रुझान नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और डॉलर की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो सोना और चांदी अपनी हालिया रिकवरी को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं किसी भी नकारात्मक संकेत की स्थिति में बाजार में फिर से अस्थिरता लौट सकती है।

    फिलहाल, दो दिनों की लगातार गिरावट के बाद कीमती धातुओं में आई यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि निचले स्तरों पर खरीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है और निवेशक सोने तथा चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह स्पष्ट होगा कि यह तेजी अल्पकालिक राहत है या फिर बाजार में नए उछाल की शुरुआत।

  • कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत दर्ज की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रमुख सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में आईटी, रियल्टी और बैंकिंग क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान प्रमुख रूप से देखने को मिला, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और कारोबारी माहौल सकारात्मक बना रहा।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए ऊंचे स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। शुरुआती घंटों में बाजार की चाल से यह संकेत मिला कि निवेशक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता और तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र का सूचकांक तेजी से ऊपर गया। वहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया।

    लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। व्यापक बाजार में खरीदारी के संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक भागीदारी किसी भी तेजी को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। हालांकि कुछ बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला, फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। तेल कीमतों में कमी से आयात बिल पर दबाव घट सकता है, जिससे चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।

    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो इसका लाभ आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई दे सकता है। कम लागत वाले आर्थिक माहौल में उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ सकती है और निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार ने तेल कीमतों में आई गिरावट को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है। गुरुवार की शुरुआती तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल मजबूत बना हुआ है और बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

  • AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

    AI से बढ़ेगा जॉब संकट, 99% कंपनियों के प्रमुखों ने जताई छंटनी की आशंका, युवा कर्मचारियों पर खतरा

    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल काम को आसान बनाने वाली तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजगार बाजार की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। एक नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो वर्षों में AI के बढ़ते उपयोग के कारण नौकरी कटौती का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सबसे अधिक असर करियर की शुरुआत कर रहे युवा कर्मचारियों पर पड़ने की आशंका है।

    ग्लोबल HR और कंसल्टिंग फर्म मर्सर (Mercer) की ताजा *ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट* में सामने आया है कि 99 प्रतिशत से अधिक बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स का मानना है कि AI के कारण आने वाले दो वर्षों में किसी न किसी स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। इस रिपोर्ट के लिए दुनिया भर के करीब 12 हजार एग्जीक्यूटिव्स, HR लीडर्स और कर्मचारियों से राय ली गई।

    एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के मुताबिक AI का सबसे बड़ा प्रभाव उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जो अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं। जिन कार्यों के जरिए नए कर्मचारी अनुभव और कौशल हासिल करते थे, उनमें से कई जिम्मेदारियां अब AI आसानी से संभाल सकता है। यही वजह है कि कंपनियां जूनियर स्तर की भर्तियों को लेकर अपनी रणनीति बदल रही हैं।

    पिछले एक वर्ष में उन कंपनियों की संख्या 17 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है, जिन्होंने जूनियर पदों में कटौती की है। विशेषज्ञों के अनुसार 22 से 27 वर्ष आयु वर्ग के युवा प्रोफेशनल्स इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

    AI अपनाने की दौड़, लेकिन तैयारी अधूरी
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कंपनियां तेजी से AI को अपने कामकाज में शामिल कर रही हैं, लेकिन अधिकांश संस्थान इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। सर्वे के अनुसार केवल एक-तिहाई कंपनियों को ही विश्वास है कि वे मानव कर्मचारियों और AI के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर पाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि कई संगठन पहले AI लागू कर रहे हैं और बाद में कर्मचारियों की भूमिका तय कर रहे हैं।

    क्या छंटनी से कंपनियों को मिलेगा फायदा?

    विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या घटाने से हमेशा बेहतर परिणाम नहीं मिलते। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि बड़े पैमाने पर छंटनी करने वाली कंपनियों को जरूरी नहीं कि अधिक मुनाफा या बेहतर उत्पादकता हासिल हुई हो। कई मामलों में AI का सबसे प्रभावी उपयोग तब देखा गया, जब इसे कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

    AI के कारण बढ़ रही नौकरी कटौती

    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में AI का असर रोजगार बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अकेले अप्रैल 2026 में अमेरिका में करीब 21,500 नौकरियों की कटौती के पीछे AI एक प्रमुख कारण रहा, जो उस महीने हुई कुल छंटनी का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा था।

    वहीं, वर्ष 2026 में अब तक AI से जुड़ी 49 हजार से अधिक नौकरियां समाप्त हो चुकी हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के कुल स्तर के लगभग बराबर पहुंच चुका है। Meta, Oracle, Salesforce और Block जैसी प्रमुख टेक कंपनियां भी AI आधारित ऑटोमेशन और री-स्ट्रक्चरिंग के तहत कर्मचारियों की संख्या में कमी कर चुकी हैं।

    भविष्य में किन स्किल्स की होगी मांग?
    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन पेशेवरों की मांग बढ़ेगी जो AI के साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसे प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI अब केवल तकनीकी बदलाव का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह भर्ती, रोजगार, करियर और कार्य संस्कृति को प्रभावित करने वाली एक बड़ी शक्ति बन चुका है। अगले दो वर्ष यह तय करेंगे कि AI कर्मचारियों के लिए चुनौती बनता है या नए अवसरों का रास्ता खोलता है।

  • नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली । देश में नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख प्रतियोगिता में युवाओं द्वारा संचालित छह स्टार्टअप्स को विजेता घोषित किया गया है। सस्टेनेबिलिटी, संसाधन संरक्षण और सामाजिक प्रभाव पर आधारित इन स्टार्टअप्स ने अपने अभिनव समाधानों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। चयनित उद्यमों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, मेंटरशिप और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद मिलेगी।

    यह प्रतियोगिता देश में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और सतत विकास से जुड़े समाधान विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी, टिकाऊ वस्त्र एवं फैशन, पर्यावरण-अनुकूल खाद्य प्रणालियां तथा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया। इन विषयों पर आधारित नवाचारों ने न केवल तकनीकी क्षमता दिखाई बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत कीं।

    प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिस्पर्धा मिली। देश के 28 राज्यों से 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 50 संभावनाशील स्टार्टअप्स का चयन एक विशेष क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए किया गया। तीन महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को व्यवसाय विकास, बाजार रणनीति, प्रभाव मूल्यांकन और निवेशकों से संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

    कार्यक्रम के तहत सभी चयनित स्टार्टअप्स को अपने विचार और व्यवसाय मॉडल विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला। मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद शीर्ष 20 स्टार्टअप्स को एक विशेष इमर्शन बूटकैंप के लिए चुना गया, जहां उन्हें उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों के साथ संवाद ने प्रतिभागियों को अपने मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता प्रदान की।

    अंतिम चरण में तीन स्टार्टअप्स को विजेता घोषित करते हुए उन्हें 3.5 लाख रुपये की सीड ग्रांट प्रदान की गई, जबकि तीन अन्य स्टार्टअप्स को उपविजेता के रूप में 2.2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त सभी विजेता टीमों को क्षमता विकास कार्यक्रमों और राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे अपने समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिभा और नवाचार की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और अवसरों का समान वितरण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों में निवेश और मार्गदर्शन अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों, दूरस्थ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमियों तक ऐसे अवसर सीमित रूप से पहुंच पाते हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए इस प्रकार की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि चयनित स्टार्टअप्स में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल चयनित उद्यमों में 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो देश के नवाचार परिदृश्य में बढ़ती महिला भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवा नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह संगम भारत को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

  • सरकारी बीमा दिग्गज एलआईसी का बड़ा तोहफा: 10 रुपए प्रति शेयर लाभांश के लिए आज ही खरीदने होंगे शेयर

    सरकारी बीमा दिग्गज एलआईसी का बड़ा तोहफा: 10 रुपए प्रति शेयर लाभांश के लिए आज ही खरीदने होंगे शेयर


    नई दिल्ली । भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरधारकों के लिए बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपए प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम डिविडेंड की घोषणा की है और इसके लिए 25 जून को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। ऐसे में जो निवेशक इस लाभांश का फायदा उठाना चाहते हैं, उनके लिए 24 जून तक शेयर खरीदना जरूरी है।

    भारतीय शेयर बाजार में लागू टी+1 सेटलमेंट व्यवस्था के अनुसार किसी भी निवेशक का नाम रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के शेयरधारकों की सूची में होना चाहिए। इसके लिए निवेशकों को रिकॉर्ड डेट से एक कारोबारी दिन पहले तक शेयर खरीदने होते हैं ताकि तय तारीख तक शेयर उनके डीमैट खाते में दिखाई दें। इसी कारण 24 जून को एलआईसी के शेयर खरीदने वाले निवेशक डिविडेंड के पात्र माने जाएंगे।

    कंपनी ने अपने शेयरधारकों को प्रति इक्विटी शेयर 10 रुपए के अंतिम लाभांश का प्रस्ताव दिया है। यह भुगतान उन निवेशकों को मिलेगा जिनके नाम रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होंगे। डिविडेंड को निवेशकों के लिए अतिरिक्त आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, क्योंकि कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा शेयरधारकों के साथ साझा करती हैं।

    एलआईसी ने हाल के महीनों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसका असर कंपनी के निवेशकों के विश्वास पर भी दिखाई दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 23.2 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 19,013 करोड़ रुपए था। इस प्रदर्शन के साथ एलआईसी वित्तीय क्षेत्र की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शामिल रही।

    जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में कंपनी की शुद्ध प्रीमियम आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़कर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए थी। प्रीमियम आय में यह वृद्धि कंपनी के व्यवसाय विस्तार और बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

    एलआईसी ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के बीच सबसे अधिक तिमाही लाभ अर्जित करने वाली कंपनी का स्थान भी बनाए रखा है। मजबूत आय, लाभ में वृद्धि और स्थिर कारोबारी प्रदर्शन के कारण कंपनी निवेशकों के बीच लगातार आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कंपनी की परिसंपत्तियों के आकार में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 31 मार्च 2026 तक प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 57 लाख करोड़ रुपए से अधिक के स्तर पर पहुंच गईं। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में लगातार वृद्धि कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के भरोसे को प्रतिबिंबित करती है।

    डिविडेंड आय से जुड़े कर नियमों को लेकर भी निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वर्तमान नियमों के अनुसार यदि किसी निवासी व्यक्ति को एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपए से अधिक का कुल डिविडेंड प्राप्त होता है, तो उस पर 10 प्रतिशत की दर से स्रोत पर कर कटौती लागू होती है। इसलिए निवेशकों को अपने कर दायित्वों का भी ध्यान रखना चाहिए।

    मजबूत वित्तीय परिणाम, बढ़ता लाभ, विशाल परिसंपत्ति आधार और आकर्षक डिविडेंड घोषणा के चलते एलआईसी के शेयर एक बार फिर निवेशकों की चर्चा के केंद्र में हैं। रिकॉर्ड डेट से पहले डिविडेंड पात्रता हासिल करने की होड़ के बीच बाजार की नजरें अब कंपनी के आगामी प्रदर्शन और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

  • गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार वापसी दर्ज की। दिनभर खरीदारी का मजबूत रुख देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की सकारात्मक भागीदारी और प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी के कारण बाजार ने एक बार फिर मजबूती का संकेत दिया। सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेजी दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही और दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,190.37 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,090.05 तक पहुंच गया।

    बाजार में तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों ने सक्रियता दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा विभिन्न वर्गों के शेयरों में बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बाजार की मजबूती का सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों क्षेत्रों के सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर ऑटोमोबाइल और धातु क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इन सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    दिनभर के कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। एविएशन, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में मजबूत तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत ऊर्जा और धातु क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। हालांकि इन चुनिंदा शेयरों की कमजोरी बाजार की समग्र तेजी को प्रभावित नहीं कर सकी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी ने बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। तकनीकी चार्ट पर निफ्टी ने मजबूत तेजी का संकेत देने वाला पैटर्न बनाया है, जिससे निकट भविष्य में बाजार की दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर बने रहना निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है।

    तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निफ्टी ने एक बार फिर अपने महत्वपूर्ण औसत स्तर के ऊपर जगह बनाई है। साथ ही बाजार की गति को मापने वाले प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार में खरीदारी की वापसी हो रही है और निवेशकों का रुझान फिर से सकारात्मक बना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,140 से 24,170 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण प्रतिरोध साबित हो सकता है। यदि सूचकांक इस दायरे को पार कर स्थिरता बनाए रखने में सफल रहता है तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,870 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। जब तक निफ्टी इस दायरे के ऊपर बना रहेगा, तब तक बाजार की समग्र धारणा सकारात्मक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • नई दिल्ली में व्यापार वार्ता को मिली रफ्तार, भारत-अमेरिका ने संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में बढ़ाए कदम

    नई दिल्ली में व्यापार वार्ता को मिली रफ्तार, भारत-अमेरिका ने संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की दिशा में बढ़ाए कदम

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने, निवेश बढ़ाने तथा आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर व्यापक चर्चा की गई। आगामी टैरिफ समयसीमा से पहले वार्ता में तेजी आने को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के बीच हुई बैठकों में व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने व्यापार वार्ता में हुई प्रगति का आकलन करते हुए उन क्षेत्रों की पहचान की, जहां आपसी सहयोग को और मजबूत बनाया जा सकता है। चर्चा का मुख्य उद्देश्य ऐसा समझौता तैयार करना है, जिससे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिल सके और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त हो।

    बैठकों के बाद गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और व्यापार वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया तथा व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए संभावनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने वार्ता प्रक्रिया में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और दोनों देशों की टीमों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।

    भारत और अमेरिका लंबे समय से ऐसे व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के उद्योगों, निर्यातकों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर सके। वर्तमान दौर की बातचीत में बाजार पहुंच, व्यापारिक बाधाओं को कम करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों और भारतीय अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चाएं हुईं, जिनमें आर्थिक साझेदारी के भविष्य को लेकर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया गया। दोनों देशों ने यह संकेत दिया है कि वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर पर्याप्त इच्छाशक्ति मौजूद है। यही कारण है कि समझौते को लेकर उम्मीदें पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार कर रहे हैं। दोनों देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और तकनीक, विनिर्माण, ऊर्जा, कृषि तथा सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौते को इसी व्यापक आर्थिक सहयोग का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

    अमेरिकी पक्ष ने भी इस वार्ता को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा है कि मजबूत व्यापार समझौता न केवल आर्थिक अवसरों का विस्तार करेगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। अधिकारियों का मानना है कि समझौते के जरिए निवेश प्रवाह बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी निर्भरता और विश्वास में वृद्धि होगी।

    आगामी टैरिफ समयसीमा को देखते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में नई दिल्ली में हुई हालिया बैठकों को व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में दोनों पक्ष लंबित मुद्दों पर कितनी जल्दी सहमति बनाकर समझौते को अंतिम रूप दे पाते हैं।

  • भारत बनेगा अमेजन के सबसे बड़े ग्रोथ इंजन का केंद्र, ‘अमेजन नाउ’ की रिकॉर्ड रफ्तार से उत्साहित सीईओ एंडी जेसी ने जताया बड़ा भरोसा

    भारत बनेगा अमेजन के सबसे बड़े ग्रोथ इंजन का केंद्र, ‘अमेजन नाउ’ की रिकॉर्ड रफ्तार से उत्साहित सीईओ एंडी जेसी ने जताया बड़ा भरोसा

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक ई-कॉमर्स उद्योग के लिए तेजी से एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है और दुनिया की अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल अमेजन भी भारतीय बाजार को अपनी भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण आधार मान रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने भारत को अमेजन के सबसे तेजी से बढ़ते कारोबारों में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि देश में शुरू की गई ‘अमेजन नाउ’ सेवा ने बेहद कम समय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और यह वर्तमान में कंपनी की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट बन चुकी है।

    मुंबई में स्थित एक माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर के दौरे के दौरान एंडी जेसी ने भारतीय बाजार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के बीच तेज डिलीवरी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और ग्राहक अब कुछ ही मिनटों में सामान प्राप्त करने की सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी बदलती उपभोक्ता प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने क्विक कॉमर्स सेगमेंट में अपने निवेश और विस्तार को गति दी है।

    माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर आधुनिक लॉजिस्टिक मॉडल का हिस्सा हैं, जिन्हें विशेष रूप से तेज डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है। इन केंद्रों में दैनिक जरूरतों से जुड़े उत्पाद जैसे किराना सामान, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं, बच्चों के उत्पाद और घरेलू सामग्री व्यवस्थित रूप से रखी जाती हैं, ताकि ऑर्डर मिलते ही उन्हें तेजी से पैक कर ग्राहकों तक पहुंचाया जा सके। कंपनी का दावा है कि इस मॉडल के जरिए ग्राहकों को बहुत कम समय में डिलीवरी उपलब्ध कराई जा रही है।

    एंडी जेसी के अनुसार ‘अमेजन नाउ’ सेवा को उपयोग करने वाले ग्राहकों, विशेष रूप से प्राइम सदस्यों, के खरीदारी व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि जो ग्राहक इस सेवा का उपयोग करना शुरू करते हैं, उनकी खरीदारी की आवृत्ति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। इससे न केवल ग्राहक जुड़ाव मजबूत हुआ है, बल्कि प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर की संख्या में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

    कंपनी के आंकड़ों के अनुसार भारत में इस सेवा की शुरुआत के बाद से प्रत्येक तिमाही में ऑर्डर की संख्या लगभग दोगुनी हो रही है। यह वृद्धि दर्शाती है कि तेज डिलीवरी आधारित सेवाओं को लेकर भारतीय उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इसी मांग को देखते हुए अमेजन अब अपने नेटवर्क का व्यापक विस्तार करने की तैयारी कर रही है।

    कंपनी ने आने वाले समय में ‘अमेजन नाउ’ को 300 से अधिक शहरों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही भारत में मिनटों में डिलीवरी करने वाले सबसे बड़े नेटवर्क के निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अमेजन का मानना है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण बाजार में क्विक कॉमर्स की संभावनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं और आने वाले वर्षों में इसमें कई गुना वृद्धि देखने को मिल सकती है।

    एंडी जेसी ने यह भी कहा कि भारत में विकसित किए जा रहे परिचालन मॉडल और नवाचार कंपनी के लिए वैश्विक स्तर पर भी उपयोगी साबित हो रहे हैं। भारत में मिले अनुभवों का उपयोग अमेरिका सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में समान सेवाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार भारतीय टीमों ने जिस तरह तेज डिलीवरी और ग्राहक सुविधा को लेकर नए समाधान विकसित किए हैं, वह वैश्विक स्तर पर अमेजन की रणनीति को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

    उन्होंने भारतीय बाजार के प्रति भरोसा जताते हुए कहा कि यहां विकास की संभावनाएं अभी केवल शुरुआत हैं। तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या और बदलती उपभोक्ता आदतें भारत को ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण बाजार बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। अमेजन आने वाले वर्षों में इसी क्षमता का लाभ उठाते हुए अपने कारोबार का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है।