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  • हॉर्मुज स्ट्रेट में सामान्य हो रहा समुद्री व्यापार, सुरक्षित कॉरिडोर बनने के बाद जहाजों की आवाजाही में दिखा तेज सुधार

    हॉर्मुज स्ट्रेट में सामान्य हो रहा समुद्री व्यापार, सुरक्षित कॉरिडोर बनने के बाद जहाजों की आवाजाही में दिखा तेज सुधार

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव समाप्त होने के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही है। ताजा आकलन के अनुसार, इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या युद्ध से पहले के स्तर के लगभग 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह सुधार अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां काफी प्रभावित हुई थीं।

    हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट से एक दिन में कुल 78 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई। इनमें से बड़ी संख्या में जहाजों ने नए सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर का उपयोग किया, जिसे ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों की पहल के बाद लागू किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों को संभावित सुरक्षा जोखिमों से बचाते हुए सुरक्षित और सुचारु आवागमन सुनिश्चित करना है। समुद्री क्षेत्र में इस नई व्यवस्था का प्रभाव जहाजों की बढ़ती आवाजाही के रूप में स्पष्ट दिखाई देने लगा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, दिनभर की कुल समुद्री गतिविधियों में 40 प्रतिशत से अधिक जहाजों ने सुरक्षित कॉरिडोर का उपयोग किया। इनमें अधिकांश जहाज खाड़ी क्षेत्र से बाहर की ओर रवाना हो रहे थे, जबकि कुछ जहाजों ने विशेष परिस्थितियों में अपनी पहचान संबंधी प्रसारण प्रणाली बंद रखते हुए यात्रा की। कुछ अन्य जहाज ईरान की समुद्री सीमा के अपेक्षाकृत निकट से भी गुजरे। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों पर जोखिम का आकलन करते हुए जहाज परिचालन कंपनियां अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं।

    संघर्ष शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। कई जहाज सुरक्षा कारणों से बंदरगाहों और खाड़ी क्षेत्र के भीतर ही रुके रहे। अब हालात सामान्य होने के साथ इनमें से कई जहाज दोबारा अपने निर्धारित मार्गों पर लौटने लगे हैं। इसे वैश्विक समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों के धीरे-धीरे सामान्य होने का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।

    हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों में कच्चे तेल और रासायनिक उत्पादों के टैंकरों की संख्या सबसे अधिक रही। इसके अलावा बल्क कैरियर, सामान्य कार्गो जहाज, कंटेनर पोत, एलपीजी और एलएनजी टैंकरों ने भी इस समुद्री मार्ग का उपयोग किया। ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है, इसलिए यहां गतिविधियों का सामान्य होना वैश्विक बाजारों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आने वाले जहाजों में उल्लेखनीय हिस्सेदारी उन पोतों की रही, जिनका संबंध ईरान से था। इसी अवधि में कई बड़े क्रूड ऑयल टैंकरों ने भी सफलतापूर्वक हॉर्मुज स्ट्रेट को पार किया। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई करने वाले कई टैंकर भी इस मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरे, जिससे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में धीरे-धीरे स्थिरता लौटने के संकेत मिले हैं।

    हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में निर्यात होने वाले कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या सुरक्षा संकट अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और समुद्री व्यापार को सीधे प्रभावित करता है। वर्तमान में जहाजों की बढ़ती आवाजाही यह संकेत दे रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ समुद्री परिवहन धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है, जिससे वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

  • हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

    हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

    नई दिल्ली । भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत ने 61 यूनिकॉर्न स्टार्टअप के साथ दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि देश में नवाचार, तकनीकी विकास और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत मानी जा रही है। यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनका बाजार मूल्य एक अरब डॉलर या उससे अधिक होता है।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब भी यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। उसके पास 806 यूनिकॉर्न हैं, जो वैश्विक कुल का लगभग आधा हिस्सा हैं। इसके बाद चीन 381 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे और यूनाइटेड किंगडम 70 यूनिकॉर्न के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत 61 यूनिकॉर्न के साथ चौथे स्थान पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहा है।

    देश के भीतर बेंगलुरु एक बार फिर स्टार्टअप राजधानी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। शहर में 25 यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नवाचार केंद्र बनाती हैं। इसके बाद मुंबई 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों शहरों ने तकनीकी उद्यम, निवेश और प्रतिभा विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या बढ़कर 1,603 तक पहुंच गई है। इन सभी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ प्रगति ने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति दी है और इसी वजह से यूनिकॉर्न कंपनियों के मूल्यांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार एआई क्षेत्र ने इस वर्ष सबसे अधिक प्रभाव डाला है। वैश्विक यूनिकॉर्न कंपनियों की कुल वैल्यू में एआई आधारित कंपनियों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एआई यूनिकॉर्न की संख्या भी तेजी से बढ़कर 215 हो गई है, जो फिनटेक क्षेत्र की कंपनियों के लगभग बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक निवेश और तकनीकी विकास की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बनी रह सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 के दौरान 308 नए स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हालांकि यह संख्या वर्ष 2021 के रिकॉर्ड स्तर से कम है, लेकिन इस बार उभरने वाले स्टार्टअप अधिक परिपक्व और उच्च गुणवत्ता वाले माने जा रहे हैं। इनमें एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियों का दबदबा देखने को मिला।

    वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक सबसे अधिक मूल्यांकन वाली यूनिकॉर्न कंपनी बनी हुई है। इसके बाद ओपनएआई और चीन की बाइटडांस का स्थान है। इन कंपनियों की सफलता यह दर्शाती है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में एआई आधारित तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी और निवेशकों का झुकाव भी इसी क्षेत्र की ओर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रैंकिंग केवल संख्या का संकेत नहीं बल्कि देश की नवाचार क्षमता, उद्यमिता संस्कृति और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। यदि निवेश, अनुसंधान, तकनीकी विकास और नीतिगत सहयोग की वर्तमान गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक यूनिकॉर्न सूची में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी लगातार विकसित कर रहा है।

  • वैश्विक तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, आपूर्ति सुधरने से बाजार को राहत, फिर भी पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है नजर

    वैश्विक तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, आपूर्ति सुधरने से बाजार को राहत, फिर भी पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है नजर

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी का दौर जारी है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और प्रमुख समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति सामान्य होने के कारण शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों के दाम दो प्रतिशत तक लुढ़क गए। ऊर्जा बाजार में यह गिरावट ऐसे समय दर्ज की गई है जब निवेशकों का भरोसा आपूर्ति व्यवस्था के स्थिर होने की ओर बढ़ा है। हालांकि पश्चिम एशिया में हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं ने यह संकेत भी दिया है कि बाजार पूरी तरह जोखिम से बाहर नहीं निकला है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ सप्ताह से उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां रही हैं। पहले संघर्ष और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन अब हालात अपेक्षाकृत सामान्य होने के बाद बाजार में राहत का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति सुचारु बनी रहती है तो निकट भविष्य में कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।

    हालांकि इस राहत के बीच ओमान के निकट एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने ऊर्जा बाजार को फिर से सतर्क कर दिया। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए तेल की कीमतों में तेजी आई, क्योंकि निवेशकों को आशंका थी कि यदि समुद्री सुरक्षा प्रभावित हुई तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। बाद में बाजार ने स्थिति का आकलन किया और कीमतें दोबारा गिरावट की ओर लौट गईं। इससे स्पष्ट है कि निवेशक अभी भी पश्चिम एशिया की हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि, सुरक्षा चुनौती या राजनीतिक तनाव का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में इस मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही में सुधार होने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका काफी कम हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है।

    सप्ताहभर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो प्रमुख वैश्विक बेंचमार्क में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि बाजार फिलहाल आपूर्ति की स्थिति को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त है। फिर भी विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यदि क्षेत्रीय तनाव दोबारा बढ़ता है या समुद्री मार्गों में किसी प्रकार की बाधा आती है तो कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सकारात्मक मानी जाती है। इससे आयात लागत कम हो सकती है, जिसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है। साथ ही परिवहन, विनिर्माण और ऊर्जा पर निर्भर उद्योगों को भी लागत में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान लंबे समय तक बना रहता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है।

    भारतीय कच्चे तेल बास्केट की औसत कीमतों में भी हाल के समय में उल्लेखनीय कमी आई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार में आई नरमी का असर भारत के आयात बिल पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इससे विदेशी मुद्रा व्यय में कमी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    फिलहाल वैश्विक तेल बाजार राहत और सतर्कता के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है। एक ओर आपूर्ति सामान्य होने से कीमतों में गिरावट का माहौल बना है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया की घटनाएं यह याद दिला रही हैं कि ऊर्जा बाजार अभी भी भू-राजनीतिक जोखिमों से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मांग की दिशा ही कच्चे तेल की कीमतों का अगला रुख तय करेगी।

  • भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में दोनों देश लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देश ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो व्यापार, निवेश, नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करे। उनका कहना है कि आगामी समय में लागू होने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने यूके के बिजनेस एवं ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और गहरा बनाने, निवेश बढ़ाने तथा नई व्यापारिक संभावनाओं पर विचार किया गया। गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, पारदर्शिता और भविष्य की साझा सोच लगातार मजबूत हो रही है, जो इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) लागू होने के बाद दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों और कारोबारियों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश को प्रोत्साहन देना और आर्थिक सहयोग को व्यापक आधार प्रदान करना है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों में रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देगा। उन्होंने कारोबारी समुदाय से आग्रह किया कि वे इस समझौते के माध्यम से उपलब्ध होने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं।

    गोयल ने कहा कि भारत और यूके के बीच संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक दायरे से कहीं आगे निकल चुके हैं। दोनों देश तकनीक, नवाचार, निवेश, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, आवश्यक खनिजों और रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि यूनाइटेड किंगडम वैश्विक वित्त, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकती है। मजबूत आर्थिक सहयोग से उद्योगों के लिए बाजार का विस्तार होगा और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

    पीयूष गोयल ने विश्वास जताया कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता भारत और यूके के संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा। उनका कहना है कि दोनों देश साझा हितों और दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी व्यापार, निवेश, तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी तथा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

  • 26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए डेटाबेस माइग्रेशन तथा क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेशन कर रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के चलते 26 जून से 30 जून तक ईपीएफओ की कई प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। इस दौरान सदस्य और नियोक्ता दोनों ही कई जरूरी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    ईपीएफओ के अनुसार, 26 जून की मध्यरात्रि से 30 जून की रात 11:59 बजे तक मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन पांच दिनों के दौरान उपयोगकर्ता अपने खाते में लॉग इन नहीं कर पाएंगे, जिससे ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कई कार्य पूरी तरह बाधित रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि सभी सेवाएं 1 जुलाई से दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस अवधि में कर्मचारी नया पीएफ क्लेम जमा नहीं कर सकेंगे और पहले से जमा क्लेम की स्थिति भी ऑनलाइन नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा ई-पासबुक डाउनलोड करने या खाते का विवरण देखने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। जिन कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते से संबंधित किसी प्रक्रिया को पूरा करना है, उन्हें सेवाएं बहाल होने तक इंतजार करना होगा।

    नियोक्ताओं पर भी इस तकनीकी अपग्रेडेशन का असर पड़ेगा। वे इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल नहीं कर सकेंगे और नए कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। इससे नई नियुक्तियों और नियमित मासिक अनुपालन से जुड़े कुछ कार्य निर्धारित अवधि तक प्रभावित रह सकते हैं।

    ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन की डिजिटल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सिस्टम माइग्रेशन पूरा होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के पहले से अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित होने की उम्मीद है। इसलिए यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संगठन ने सदस्यों और नियोक्ताओं से अपील की है कि जिन कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवाओं की आवश्यकता है, वे उन्हें 1 जुलाई के बाद पूरा करने की योजना बनाएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन से भविष्य में क्लेम निपटान की गति बेहतर होगी और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। हालांकि जिन कर्मचारियों को तत्काल पीएफ निकासी, क्लेम स्टेटस या अन्य डिजिटल सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें अगले कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। 1 जुलाई से सभी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना जताई गई है।

  • राशन के लिए तरसा परिवार आज करोड़ों का सपना देख रहा बेटा जानिए ,सिक्योरिटी गार्ड से सफल स्टार्टअप फाउंडर बनने का सफर

    राशन के लिए तरसा परिवार आज करोड़ों का सपना देख रहा बेटा जानिए ,सिक्योरिटी गार्ड से सफल स्टार्टअप फाउंडर बनने का सफर


    नई दिल्ली ।  ओडिशा के बरगढ़ जिले से निकलकर अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर सफलता की नई कहानी लिखने वाले अजय कुमार शर्मा आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। कभी ऐसा समय था जब उनके परिवार को उधार पर राशन तक मिलना बंद हो गया था। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई थी कि भविष्य पूरी तरह अंधकारमय नजर आने लगा था। लेकिन कठिन परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय अजय ने संघर्ष का रास्ता चुना और आज करोड़ों रुपये के कारोबार का सपना साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    अजय का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जिसने कभी अच्छे दिन देखे थे लेकिन पारिवारिक बंटवारे के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। परिवार आर्थिक संकट में डूब गया और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्होंने परिवार की परेशानी को देखते हुए बिना किसी को बताए बेंगलुरु जाने का फैसला किया। वहां उन्होंने गुजारा करने के लिए सब्जियां बेचीं और बाद में एक आईटी कंपनी में मात्र 3000 रुपये मासिक वेतन पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी शुरू कर दी।

    उनकी ड्यूटी रोज 12 घंटे की होती थी लेकिन सीखने की ललक इतनी मजबूत थी कि ड्यूटी खत्म होने के बाद भी वे कंपनी के इंजीनियरों को काम करते हुए देखते और नई चीजें सीखने की कोशिश करते। दिन में कंप्यूटर क्लास करने के लिए उन्होंने रात की शिफ्ट चुनी और कई महीनों तक रोज केवल दो से तीन घंटे की नींद लेकर खुद को तैयार किया। इसी मेहनत का परिणाम था कि धीरे-धीरे उन्हें बेहतर अवसर मिलने लगे और आखिरकार उन्हें अमेरिका की एक आईटी कंपनी में काम करने का मौका मिला।

    अमेरिका में शानदार करियर आलीशान जीवन और लग्जरी सुविधाएं मिलने के बावजूद अजय का सपना कुछ अलग करने का था। उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया और महसूस किया कि देश में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति खासकर महिलाओं और यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इसी सोच से उन्होंने अपने स्टार्टअप मैग्नेटकनेक्ट्स के तहत mFresh ब्रांड की शुरुआत की और आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रीमियम रिफ्रेशिंग स्टेशन विकसित करने का लक्ष्य बनाया।

    शुरुआत आसान नहीं थी। जब उन्होंने एयर कंडीशनर युक्त आधुनिक पब्लिक टॉयलेट का आइडिया मैन्युफैक्चरर्स के सामने रखा तो अधिकांश लोगों ने इसे असंभव बताया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर टॉयलेट में एसी की क्या जरूरत है। करीब आठ महीने तक लगातार प्रयास करने के बाद एक निर्माता उनके साथ जुड़ने को तैयार हुआ और जनवरी 2025 में पहला यूनिट शुरू किया गया। शुरुआती महीनों में हर महीने लाखों रुपये का खर्च उठाना पड़ा लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने इस सुविधा को अपनाना शुरू कर दिया और कारोबार स्थिर हो गया।

    आज उनके आधुनिक रिफ्रेशिंग स्टेशनों में एयर कंडीशनिंग के साथ स्वच्छ टॉयलेट शॉवर मोबाइल चार्जिंग स्टेशन लॉकर डायपर चेंजिंग सुविधा और सैनिटरी पैड डिस्पेंसर जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर उपयोग के बाद तत्काल सफाई की व्यवस्था की जाती है ताकि स्वच्छता का उच्च स्तर बना रहे। यह सेवा बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है जिससे आम लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

    वर्तमान में अजय का स्टार्टअप ओडिशा के पुरी और भुवनेश्वर में कई यूनिट्स संचालित कर रहा है और अब तक दो लाख से अधिक लोगों को सेवाएं दे चुका है। खाटू श्याम वृंदावन और हरिद्वार जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी नए प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। वर्ष 2026 में कंपनी ने 1.6 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है जबकि आने वाले वर्षों में इसे कई गुना बढ़ाने की योजना है।

    व्यवसाय के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाना भी अजय की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अपनी सामाजिक संस्था के माध्यम से अपने पैतृक गांव में दिव्यांग अनुकूल और पूरी तरह निशुल्क सुविधा केंद्र का निर्माण कराया है। उनका मानना है कि जिस तरह लोगों ने समय के साथ स्वच्छ पेयजल की अहमियत समझी है उसी तरह सार्वजनिक स्वच्छता और गरिमा के महत्व को भी समझेंगे। अजय कुमार शर्मा की कहानी इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादे और निरंतर मेहनत के दम पर कोई भी व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़कर सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, लेकिन टैरिफ बढ़त के बिना लागू नहीं होगा समझौता: पीयूष गोयल

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, लेकिन टैरिफ बढ़त के बिना लागू नहीं होगा समझौता: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति होने के बावजूद इसके क्रियान्वयन पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते की रूपरेखा लगभग तय हो चुकी है, लेकिन भारत तब तक इसे लागू नहीं करेगा जब तक उसे अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट और प्रभावी टैरिफ लाभ प्राप्त नहीं हो जाता।

    लंदन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम के दौरान गोयल ने कहा कि किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का मूल उद्देश्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर बाजार पहुंच हासिल करना होता है। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका के साथ व्यापार में ऐसी टैरिफ व्यवस्था मिले, जिससे वह चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार और फिलीपींस जैसे देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ सके।

    उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच इस समझौते की बुनियादी सहमति इसी वर्ष फरवरी में बन गई थी। दोनों देशों ने समझौते की व्यापक रूपरेखा पर सहमति जताई थी और उसके बाद से तकनीकी, कानूनी तथा टैरिफ संबंधी विवरणों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। गोयल के अनुसार समझौते को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं है, बल्कि अब केवल उन शर्तों को सुनिश्चित किया जा रहा है जो भारत के व्यापारिक हितों को मजबूत करें।

    व्यापार मंत्रालय का मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में किसी भी समझौते का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब उससे निर्यातकों को प्रत्यक्ष आर्थिक फायदा प्राप्त हो। इसी कारण भारत अमेरिका के साथ ऐसी टैरिफ संरचना चाहता है जो उसके उद्योगों और निर्यातकों को अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बढ़त प्रदान करे।

    फरवरी में हुई अंतरिम सहमति के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर कुछ श्रेणियों में शुल्क दरों को कम करने पर सहमत हुआ था। इसके साथ ही कुछ अतिरिक्त शुल्कों में राहत देने पर भी चर्चा हुई थी, जिससे भारतीय निर्यातकों को फायदा मिल सकता था। उस समय प्रस्तावित व्यवस्था को भारत के लिए लाभकारी माना गया था क्योंकि इससे कई एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक स्थिति बनने की संभावना थी।

    हालांकि इसके बाद अमेरिका में कानूनी और नीतिगत परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिला। अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया और टैरिफ प्राधिकरण से जुड़े निर्णयों के कारण व्यापार नीति को लेकर कुछ नई अनिश्चितताएं सामने आईं। इसी दौरान अस्थायी टैरिफ व्यवस्था लागू की गई, जिसकी समयसीमा जुलाई के अंत तक निर्धारित है। भारत अब उस अवधि के बाद बनने वाली अंतिम टैरिफ संरचना का इंतजार कर रहा है।

    इसके समानांतर अमेरिका ने कुछ व्यापारिक मामलों को लेकर जांच प्रक्रियाएं भी शुरू की हैं, जिनके निष्कर्ष भविष्य की शुल्क व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। भारत इन सभी पहलुओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कर रहा है ताकि किसी भी समझौते का दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख उसके बदलते आर्थिक आत्मविश्वास को दर्शाता है। सरकार अब केवल व्यापार समझौते करने पर जोर नहीं दे रही, बल्कि ऐसे समझौते चाहती है जो भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और निवेशकों को वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करें। आने वाले हफ्तों में अमेरिका की अंतिम टैरिफ नीति और जांच संबंधी निष्कर्ष सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

  • LPG उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव, PNG कनेक्शन लेने के 30 दिन के भीतर गैस कनेक्शन सरेंडर करना होगा अनिवार्य

    LPG उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव, PNG कनेक्शन लेने के 30 दिन के भीतर गैस कनेक्शन सरेंडर करना होगा अनिवार्य

    नई दिल्ली । देश में घरेलू गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नए नियम के तहत अब उन उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन निर्धारित समय के भीतर सरेंडर करना होगा, जिनके घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है और जिन्होंने उसका कनेक्शन ले लिया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से गैस वितरण नेटवर्क को अधिक संतुलित बनाया जा सकेगा तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

    पिछले कुछ वर्षों में देश के कई महानगरों और बड़े शहरों में पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस पहुंचाने की इस सुविधा को सुरक्षित, सुविधाजनक और निरंतर आपूर्ति वाली व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता मौजूद हैं जो पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन एक साथ उपयोग कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और गैस संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन प्रभावित होता है।

    इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘वन हाउसहोल्ड, वन गैस कनेक्शन’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। नए नियम के अनुसार यदि किसी घरेलू उपभोक्ता ने अपने घर में पीएनजी कनेक्शन सक्रिय करा लिया है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। यह नियम सभी प्रमुख गैस कंपनियों के घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू होगा।

    सरकार का उद्देश्य केवल डुप्लिकेट कनेक्शनों को कम करना ही नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों तक एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर बनाना भी है जहां अभी तक पीएनजी नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे गैस सिलेंडरों की उपलब्धता अधिक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेगी और सब्सिडी व्यवस्था का दुरुपयोग भी कम होगा।

    नए नियम के साथ उपभोक्ताओं की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। यदि कोई परिवार भविष्य में ऐसे क्षेत्र में स्थानांतरित होता है जहां पीएनजी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसके लिए एलपीजी कनेक्शन दोबारा प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। कनेक्शन सरेंडर करते समय उपभोक्ताओं को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनकी सहायता से वे नए स्थान पर अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया के माध्यम से एलपीजी सेवा फिर से शुरू कर सकेंगे।

    सरकार गैस वितरण व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाने पर भी लगातार जोर दे रही है। इसी क्रम में ओटीपी आधारित डिलीवरी प्रणाली पहले से लागू की जा चुकी है। अब सिलेंडर वितरण के समय उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के सत्यापन के बाद ही डिलीवरी पूरी की जाती है। इससे फर्जी डिलीवरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल रही है।

    इसके अलावा ई-केवाईसी प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया जा रहा है ताकि सभी उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड अद्यतन और सत्यापित रहे। सरकार का मानना है कि डिजिटल सत्यापन, पारदर्शी वितरण व्यवस्था और गैस कनेक्शनों के बेहतर प्रबंधन से वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकेगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पीएनजी नेटवर्क के विस्तार और एलपीजी वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए उठाया गया यह कदम ऊर्जा क्षेत्र में संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में इससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित बनने की उम्मीद है।

  • दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ आगे बढ़े, हालांकि दिन के अंतिम चरण में मुनाफावसूली और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के कारण बढ़त सीमित हो गई। इसके बावजूद बाजार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहने के संकेत मिले।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 34 अंकों की मजबूती के साथ 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार दिखाई थी और एक समय सेंसेक्स 77,800 के पार तथा निफ्टी 24,260 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।

    बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच हुई थी। निवेशकों ने ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। इन क्षेत्रों में कमजोरी के कारण दिन के अंतिम घंटों में बाजार पर दबाव बढ़ा।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वाहन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल की लागत में कमी, सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार और उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से ऑटो कंपनियों के प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी क्षेत्र ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    दूसरी ओर आईटी और धातु क्षेत्र के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और निर्यात आधारित कंपनियों पर संभावित असर के कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में सतर्क रुख अपनाया। कुछ बड़े आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े और मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे शेयरों में सतर्कता बरती जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी बिकवाली तेजी की गति को सीमित कर सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है।

    इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पहली तिमाही के कारोबारी नतीजों, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

    गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

    नई दिल्ली । देश के स्टार्टअप और नवाचार परिदृश्य को व्यापक आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उद्योगपति गौतम अदाणी ने ‘वंदे भारतम्’ नामक नई पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के उन प्रतिभाशाली लोगों तक अवसर पहुंचाना है, जो बड़े शहरों से दूर रहते हैं लेकिन अपने विचारों, नवाचारों और उद्यमशीलता की क्षमता के बल पर समाज और अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं।

    अपने 64वें जन्मदिन के अवसर पर शुरू की गई इस पहल को देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम 800 से अधिक जिलों तक पहुंचेगा और विभिन्न भारतीय भाषाओं में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस पहल का उद्देश्य केवल स्थापित स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी अवसर देना है जिनके पास कोई नया विचार, समाधान या व्यवसाय शुरू करने की इच्छा है।

    गौतम अदाणी ने कहा कि उनका अपना सफर भी सीमित संसाधनों से शुरू हुआ था और जो कुछ उन्होंने हासिल किया है, उसमें भारत की मिट्टी और अवसरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अवसरों का समान वितरण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ का लक्ष्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्हें अब तक उचित पहचान और सहयोग नहीं मिल पाया है।

    इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए किसी विशेष आयु, शैक्षणिक योग्यता, पेशे या व्यवसायिक अनुभव की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। प्रतिभागी अपने विचार, प्रोटोटाइप, शुरुआती चरण के स्टार्टअप या पहले से संचालित व्यवसाय के साथ आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी कंपनी का औपचारिक रूप से पंजीकृत होना भी आवश्यक नहीं होगा। इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को अवसर मिलेगा जो पारंपरिक ढांचे से बाहर रहकर भी नवाचार पर काम कर रहे हैं।

    पहल के तहत तकनीक, विनिर्माण, कृषि, पर्यावरणीय स्थिरता, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय उद्योगों और सामुदायिक समाधान जैसे विविध क्षेत्रों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। विशेष रूप से महिलाओं, आदिवासी समुदायों, ग्रामीण क्षेत्रों के नवाचारकर्ताओं, दिव्यांग उद्यमियों और स्थानीय समस्याओं के समाधान विकसित करने वाले लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    आवेदनों के मूल्यांकन के दौरान नवाचार की गुणवत्ता, उद्यमशीलता की क्षमता, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव तथा विस्तार की संभावनाओं को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। चयन प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी होगी, जिसमें राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर मूल्यांकन शामिल रहेगा। इसके बाद चुने गए 75 फाइनलिस्ट को अहमदाबाद में आयोजित विशेष कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अनुभवी मेंटर्स, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और व्यवसायिक नेताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें इनक्यूबेशन सपोर्ट, रणनीतिक साझेदारी और संभावित निवेश तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनके विचारों को व्यवहारिक और टिकाऊ व्यवसाय में बदला जा सके।

    कार्यक्रम का ग्रैंड फिनाले स्वतंत्रता दिवस के आसपास आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से एक ऐसा राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जो नवाचारकर्ताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को एक साझा मंच पर जोड़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उद्यमशीलता और नवाचार की व्यापक भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ जैसी पहलें देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।