Category: Economy

  • केंद्र ने बताया, सुरक्षा कारणों से West Asia जाने वाली फ्लाइट्स पर लगाया ब्रेक!

    केंद्र ने बताया, सुरक्षा कारणों से West Asia जाने वाली फ्लाइट्स पर लगाया ब्रेक!


    नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया के लिए भारतीय उड़ानों में भारी रद्दीकरण हुआ है। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि युद्ध से पहले भारतीय एयरलाइंस प्रतिदिन 300-350 उड़ानें संचालित करती थीं, जो अब घटकर सिर्फ 80-90 रह गई हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी के हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया। इसके बावजूद, भारतीय एयरलाइंस लगातार काम कर रही हैं और कार्गो सेवा भी जारी है।

    डीजीसीए ने पायलटों के लिए छूट दी
    मध्य पूर्व के एयरस्पेस बंद होने के कारण लंबी दूरी की उड़ानों में पायलटों को ड्यूटी टाइम लिमिट का पालन करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने अस्थायी रूप से पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी समय (FDTL) बढ़ाने की अनुमति दी।

    नए नियमों के अनुसार, पायलटों को 48 घंटे का लगातार आराम मिलना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था। यह छूट लंबी उड़ानों में थकान कम करने और उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दी गई है।

  • मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!

    मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!


    नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की बैटरी निर्माता कंपनी LG एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड ने मंगलवार को बताया कि जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में उसे 207.8 बिलियन वॉन (लगभग 138.2 मिलियन डॉलर) का ऑपरेटिंग घाटा हुआ। यह घाटा पिछले साल की इसी तिमाही में हुए 374.7 बिलियन वॉन के मुनाफे के विपरीत है।

    कंपनी की बिक्री 2.5 प्रतिशत गिरकर 6.55 ट्रिलियन वॉन रह गई। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका-ईरान युद्ध और मध्य पूर्व संकट के कारण बढ़ी उत्पादन लागत इस घाटे का प्रमुख कारण रही। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) बैटरी उत्पादन में शुरुआती निवेश का असर भी पड़ा।

    कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट के तहत उसे 189.8 बिलियन वॉन का टैक्स क्रेडिट मिला है। यदि यह क्रेडिट न होता, तो वास्तविक ऑपरेटिंग घाटा 397.5 बिलियन वॉन तक पहुँच जाता।

    एलजी ग्रुप के चेयरमैन कू क्वांग-मो ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री में बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित LG एनर्जी सॉल्यूशन वर्टेक का दौरा भी किया, क्योंकि कंपनी उत्तरी अमेरिका के ESS मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।

  • अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!

    अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!


    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के कई देशों का एयरस्पेस बंद होने के चलते लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस स्थिति में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों के ड्यूटी समय (FDTL) नियमों में अस्थायी राहत देने का फैसला किया है।

    नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि लंबी उड़ानों के कारण एयरलाइंस को नियमों का पालन करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए दो पायलट वाली लंबी उड़ानों के लिए फ्लाइट टाइम (FT) को 1 घंटे 30 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट और फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) को 1 घंटे 45 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 45 मिनट कर दिया गया है।

    DGCA ने कहा कि इससे पायलटों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आराम का ध्यान रखा जाएगा और नियमों का उल्लंघन नहीं होगा। पिछले साल लागू किए गए नियमों के तहत पायलटों को 48 घंटे लगातार आराम देना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था।

    साथ ही, रेगुलेटर ने एयरलाइंस पर निगरानी बढ़ा दी है। इसमें पायलट रोस्टर, क्रू की उपलब्धता, बैकअप व्यवस्था और सिस्टम की मजबूती पर खास ध्यान दिया जाएगा। DGCA अधिकारी हर दो महीने में एयरलाइंस का निरीक्षण करेंगे और साप्ताहिक तथा पखवाड़े के आधार पर निगरानी जारी रहेगी।

    DGCA का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और केवल मिडिल ईस्ट के संघर्ष वाले एयरस्पेस को बायपास करने वाली लंबी उड़ानों पर लागू होगी।

  • कॉर्पोरेट अपडेट: एयर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा मंजूर, कंपनी ने दी आधिकारिक जानकारी

    कॉर्पोरेट अपडेट: एयर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा मंजूर, कंपनी ने दी आधिकारिक जानकारी


    नई दिल्ली भारत के प्रमुख विमान एयर इंडिया में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन सामने आया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपना पद छोड़ दिया है।

    हालाँकि, वे तब तक अपनी जिम्मेदारियाँ मलेशिया गए, जब तक नए सीईओ की पेशकश नहीं हुई। इस कदम को लेकर एयर इंडिया के अगले विकास चरण की तैयारी आधिकारिक तौर पर देखी जा रही है।

    पहले ही कर दी थी पद छोड़ने की घोषणा

    कंपनी के मुताबिक, कैंपबेल विल्सन ने साल 2024 में ही एन. चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़े की अपनी योजना के बारे में बताया था। इसके बाद वे संगठन को मजबूत बनाने और नेतृत्व टीम को स्थिर बनाने पर लगातार काम कर रहे थे, ताकि बदलाव की प्रक्रिया सहज और प्रभावशाली हो सके।

    चार साल में बदली एयर इंडिया की तस्वीर

    अपने फैसले को याद करते हुए कैंपबेल विल्सन ने कहा कि बोली के बाद पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिले हैं। इस दौरान कंपनी ने चार एयरलाइंस का अधिग्रहण और विलय किया, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र की कार्यशैली में भी महत्वपूर्ण बदलाव किये गये।

    ज़ोर से आधुनिक सिस्टम और बेहतर सेवाएँ

    विल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने अपने ऑपरेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण किया और नई शुरुआत की। यूनिवर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ग्राउंड सर्विस से लेकर इन-फ्लाइट होटल तक कई सुधार किए गए। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने बेड़े में 100 नए विमान शामिल किए और पुराने मॉडलों के उद्यमों को भी शामिल किया।

    बड़ा निवेश पर दस्तावेज़ और प्रशिक्षण

    एयर इंडिया ने अपने विस्तार के तहत कई बड़े आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं।इनमें दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग अकादमी, फ़्लाइट सिम्युलेटर किड्स, फ़्लाइंग स्कूल और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (एमआरओ) बेस शामिल हैं।
    ये सभी फर्स्ट फ्यूचर में एयरलाइंस की जगहें और विस्तार को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।

    आस्था ने की नेतृत्व की अभिनेत्री

    एयर इंडिया के सानिध्य एन. चन्द्रशेखरन ने विल्सन के योगदान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद क्रिस्टोफर चेन की तस्वीरें सामने आईं, डॉक्यूमेंट्री में देरी हुई और ग्लोबल मिरर के सामने टीम ने शानदार काम किया।

    नए सीईओ की तलाश शुरू

    कंपनी के बोर्ड ने नए सीईओ के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति आने वाले समय में उपयुक्त अभ्यर्थी का चयन करेगी।

    एयर इंडिया के अगले विकास चरण के लिए इस बदलाव पर बेहद अहम विचार किया जा रहा है, खासकर तब जब 2027 से बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट के दस्तावेज शुरू होने वाले हैं।

    ‘नया एयर इंडिया’ का भविष्य

    कैंपबेल विल्सन ने कहा कि कंपनी अब एक मजबूत प्रतिष्ठान है और आगे की यात्रा के लिए तैयार है। उनके अनुसार, यह सही समय है जब कंपनी के नए नेतृत्व को छोड़ दिया जाए, ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके।

    एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने पद छोड़ दिया है, लेकिन नए सीईओ की नियुक्ति तक पद पर बने रहे-चार साल में उन्होंने विमान को मजबूत आधार देकर अगले विकास चरण के लिए तैयार किया है।

  • इकोनॉमी अपडेट: भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान, Morgan Stanley की रिपोर्ट

    इकोनॉमी अपडेट: भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान, Morgan Stanley की रिपोर्ट


    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। Morgan Stanley की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, यह अनुमान पहले के 6.5 प्रतिशत से थोड़ा कम है, लेकिन इसके बावजूद भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है।

    कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती

    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। अनुमान है कि तेल की औसत कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जिससे ऊर्जा आयात पर खर्च बढ़ेगा और इसका सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ेगा।इसके चलते उत्पादन महंगा होगा और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

    अल्पकाल में ग्रोथ पर दिख सकता है असर

    Morgan Stanley की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। जून 2026 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसकी वजह औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और कंपनियों के मुनाफे में कमी को माना गया है।

    महंगाई और रुपए पर बढ़ेगा दबाव

    ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह महंगाई और मुद्रा पर भी असर डालेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत रह सकती है। इसके अलावा, बढ़ते आयात बिल और कमजोर पूंजी प्रवाह के चलते भारतीय रुपए पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।

    चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका

    बढ़ती तेल कीमतों का असर भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी पड़ सकता है।रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यह घाटा जीडीपी के 1 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति देश के बाहरी आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है और भुगतान संतुलन पर भी दबाव डाल सकती है।

    सरकार के उपायों से मिलेगी राहत

    हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि सरकारी नीतियों और आपूर्ति में सुधार से हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं। सरकार शुरुआती चरण में सब्सिडी और लागत नियंत्रण जैसे उपायों का सहारा ले सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    लंबी अवधि में भारत की ग्रोथ बरकरार

    वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों और स्थिर मांग के चलते देश की विकास दर मध्यम अवधि में फिर से गति पकड़ सकती है।

    वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगे तेल के दबाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जहां 6.2% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि अल्पकाल में महंगाई और रुपए पर दबाव बढ़ सकता है।

  • मध्य पूर्व संघर्ष के तेज होने की चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 300 अंक टूटा

    मध्य पूर्व संघर्ष के तेज होने की चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 300 अंक टूटा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के तेज होने की चिंताओं के बीच सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। इसके पहले सोमवार को भी बाजार लाल रंग में खुला था।

    इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 372.49 अंक या 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,734.36 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 129.55 अंक या 0.56 प्रतिशत गिरकर 22,838.70 पर खुला। इसके अलावा, बैंक निफ्टी 350.40 अंक या 0.67 प्रतिशत गिरकर 52,258.70 पर खुला।

    (सुबह 9:28 बजे के करीब) सेंसेक्स 0.43 प्रतिशत यानी 315.64 अंक गिरकर 73,791.21 पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं निफ्टी50 0.38 प्रतिशत या 87.40 अंक गिरकर 22,880.85 पर कारोबार कर रहा था।

    व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.23 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में 0.93 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.15 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। जबकि निफ्टी ऑटो में 1.33 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.82 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में हिंडाल्को, विप्रो, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, ओएनजीसी, आईटीसी और टीसीएस में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि इसके विपरीत मैक्स हेल्थ, इंडिगो, एमएंडएम, इटरनल, आयशर मोटर, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार इस समय बेहद सतर्क हैं, क्योंकि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक समयसीमा नजदीक आ रही है। निवेशकों की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए अल्टीमेटम पर टिकी हुई है, जिसकी समयसीमा भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 6:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार रात 8:00 बजे) है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलता, तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है और डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिसकी मुख्य वजह यह है कि ट्रंप ने अपने अल्टीमेटम को दोहराते हुए ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है, 28 फरवरी से जारी संघर्ष के कारण बाधित है, जिससे इस साल अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।

    वहीं, ईरान ने अमेरिका समर्थित 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसे पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों ने समर्थन दिया था। ईरान का कहना है कि वह स्थायी शांति, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई चाहता है।

    एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए निकट अवधि का रेजिस्टेंस 23,465 पर है, जबकि सपोर्ट लेवल 22,800 और 22,540 पर देखा जा रहा है।

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के रिकॉर्ड बिक्री के चलते पहली तिमाही के परिचालन लाभ में 33 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के रिकॉर्ड बिक्री के चलते पहली तिमाही के परिचालन लाभ में 33 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। मजबूत बिक्री और खासतौर पर होम अप्लायंस बिजनेस की दमदार ग्रोथ के चलते कंपनी का परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) साल-दर-साल 33 प्रतिशत बढ़ गया है।

    ऑपरेटिंग प्रॉफिट में जबरदस्त उछाल

    कंपनी की नियामक फाइलिंग के अनुसार, पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 1.25 ट्रिलियन वॉन से बढ़कर 1.67 ट्रिलियन वॉन (करीब 1.1 अरब डॉलर) हो गया। यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है, जब पिछली तिमाही में कंपनी को नुकसान उठाना पड़ा था।

    बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल बिक्री 4.4 प्रतिशत बढ़कर 23.73 ट्रिलियन वॉन तक पहुंच गई, जो पहली तिमाही के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। फाइनल अर्निंग रिपोर्ट इस महीने के अंत में जारी की जाएगी।

    पिछली तिमाही से शानदार वापसी

    गौरतलब है कि पिछली (चौथी) तिमाही में कंपनी को 109 बिलियन वॉन का ऑपरेटिंग नुकसान हुआ था। इसकी वजह कमजोर मांग और रिस्ट्रक्चरिंग से जुड़े एकमुश्त खर्च थे।

    लेकिन नई तिमाही में कंपनी ने शानदार वापसी करते हुए न सिर्फ नुकसान की भरपाई की, बल्कि मजबूत मुनाफा भी दर्ज किया।

    होम अप्लायंस बिजनेस बना ग्रोथ का इंजन

    कंपनी के मुताबिक, उसके होम अप्लायंस सॉल्यूशन डिवीजन ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। सब्सक्रिप्शन मॉडल को मजबूत करने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस ने बिक्री को बढ़ावा दिया।

    इसके अलावा, मीडिया और एंटरटेनमेंट बिजनेस भी पिछली तिमाही के नुकसान से उबरकर मुनाफे में लौट आया है, जिसमें लागत कटौती का बड़ा योगदान रहा।

    व्हीकल और अन्य सेगमेंट का प्रदर्शन

    व्हीकल सॉल्यूशन बिजनेस में भी साल-दर-साल मुनाफे में सुधार देखने को मिला। दक्षिण कोरियाई मुद्रा वॉन के कमजोर होने से इस सेगमेंट को फायदा मिला, क्योंकि इसके ज्यादातर ग्राहक विदेशों में हैं। हालांकि, इको सॉल्यूशन बिजनेस में बाजार की अनिश्चितताओं के चलते बिक्री और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई।

    AI और भविष्य की रणनीति पर फोकस

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर से जुड़ी मांग को पूरा करने पर ध्यान देगी। इसके साथ ही, कंपनी भविष्य के ग्रोथ इंजन के रूप में होम रोबोट और स्मार्ट उपकरणों पर निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है।

    वैश्विक चुनौतियों से निपटने की तैयारी

    कंपनी ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कच्चे माल व लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनसे निपटने के लिए कंपनी लागत में कटौती और लचीली रणनीति अपनाएगी, ताकि आने वाले समय में ग्रोथ को बनाए रखा जा सके।

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने रिकॉर्ड बिक्री के दम पर पहली तिमाही में 33% मुनाफा बढ़ाया। होम अप्लायंस बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत रहा, जबकि कंपनी भविष्य में AI और नए टेक्नोलॉजी सेगमेंट पर फोकस बढ़ा रही है।

  • मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

    ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछाल

    वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.69% यानी 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड में 3% से ज्यादा यानी 4.15 डॉलर की तेजी आई और यह 116.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।यह तेजी दिन के शुरुआती कारोबार में ही देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    कुछ ही दिनों में 60% से ज्यादा चढ़ा तेल

    मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया, यानी करीब 60% की तेजी। साल 2026 में अब तक तेल की कीमतों में लगभग 90% तक उछाल देखा जा चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता

    तेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया।ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो “तेहरान पर बड़ा हमला” किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है।”

    होर्मुज स्ट्रेट: तेल सप्लाई की लाइफलाइन

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

    ईरान का सख्त रुख, सीजफायर से इनकार

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    शेयर बाजार पर भी असर

    तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका का वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।

    आगे क्या? बाजार की नजर भू-राजनीति पर

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं, किसी समझौते की स्थिति में कीमतों में राहत मिल सकती है।

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल आया है। होर्मुज स्ट्रेट पर असर और ईरान के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

  • कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले

    कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन इस बार बाजार में वैसी मजबूती नजर नहीं आई।

    MCX पर गिरावट के साथ खुला सोना-चांदी

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना पिछले बंद भाव 1,49,981 रुपये के मुकाबले 222 रुपये गिरकर 1,49,759 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं, 5 मई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 1,379 रुपये गिरकर 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। शुरुआती कारोबार में दोनों धातुओं में कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    दिनभर उतार-चढ़ाव, स्थिरता नहीं

    दोपहर करीब 12:13 बजे तक सोना 175 रुपये यानी 0.12% गिरकर 1,49,806 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन के दौरान यह 1,50,474 रुपये के उच्चतम स्तर तक गया, जबकि 1,49,201 रुपये तक नीचे भी आया।

    इसी तरह चांदी भी 813 रुपये यानी 0.35% गिरकर 2,32,566 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। इंट्रा-डे में चांदी ने 2,35,547 रुपये का उच्चतम और 2,31,503 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ।

    ‘सेफ हेवन’ डिमांड कमजोर क्यों?

    विश्लेषकों का कहना है कि आमतौर पर तनाव के समय सोने-चांदी में निवेश बढ़ता है, लेकिन इस बार “सेफ-हेवन” डिमांड उतनी मजबूत नहीं दिख रही। बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि कीमतें एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो रही हैं।

    चांदी के लिए अहम स्तर

    एमसीएक्स पर चांदी फिलहाल 2,31,000 से 2,33,000 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2,33,000–2,34,000 रुपये का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है तो कीमतों में तेजी आ सकती है, लेकिन 2,30,000 रुपये के नीचे जाने पर तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिला-जुला रुख

    वैश्विक बाजार में कीमती धातुएं लगभग स्थिर रहीं। COMEX पर गोल्ड 3.36 डॉलर की मामूली गिरावट के साथ 4,681.34 डॉलर पर रहा, जबकि सिल्वर 0.09 डॉलर की बढ़त के साथ 72.94 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। स्पॉट मार्केट में सोना हल्की बढ़त के साथ 4,653 डॉलर पर पहुंचा, जबकि चांदी मामूली गिरावट के साथ 72.78 डॉलर पर रही।

    ईरान-हॉर्मुज तनाव और कच्चे तेल में उछाल

    कीमतों में यह उतार-चढ़ाव उस समय देखने को मिला, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 1.69% बढ़कर 111.63 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 3% से ज्यादा चढ़कर 116.56 डॉलर तक पहुंच गया।

    बाजार की नजर आगे क्या?

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी नीतियां ही तय करेंगी कि सोने-चांदी की दिशा क्या होगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और हर बड़े अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।

  • बैंकिंग सेक्टर पर मंडराया संकट, युद्धों को बताया सबसे बड़ा जोखिम: JPMorgan CEO

    बैंकिंग सेक्टर पर मंडराया संकट, युद्धों को बताया सबसे बड़ा जोखिम: JPMorgan CEO


    नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी बैंकिंग संस्थाओं में से एक जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बैंकिंग सेक्टर और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। डिमोन के मुताबिक, यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों ने अनिश्चितता को काफी बढ़ा दिया है, जिससे दुनिया भर के बाजारों और उद्योगों पर दबाव साफ देखा जा रहा है।

    युद्ध और तनाव से बढ़ रही आर्थिक अनिश्चितता

    अपने सालाना शेयरधारक पत्र में जेमी डिमोन ने कहा कि दुनिया इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान से जुड़े तनाव, मध्य पूर्व में बढ़ती दुश्मनी और आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी घटनाएं “अनिश्चितता का क्षेत्र” तैयार कर रही हैं, जहां भविष्य के परिणामों का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। इसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट, निवेश और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।

    चीन और ट्रेड वॉर भी चिंता का कारण

    डिमोन ने चीन के साथ बढ़ते तनाव को भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई टैरिफ आधारित ट्रेड वॉर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

    उनके अनुसार, ये व्यापारिक तनाव भविष्य में वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और नए आर्थिक समीकरण पैदा कर सकते हैं।

    AI: सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति, लेकिन जोखिम भी

    जेमी डिमोन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अब तक की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बताया। उन्होंने कहा कि AI का असर हर सेक्टर पर पड़ेगा और यह पूरी दुनिया के काम करने के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI के अंतिम परिणाम को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।

    अमेरिकी मूल्यों पर भरोसा जरूरी

    डिमोन ने कहा कि इन चुनौतियों के बीच अमेरिका को अपने मूल्यों स्वतंत्रता, अवसर और लोकतंत्र पर फिर से भरोसा जताने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ ऐसे मूल्यों को मजबूत करने का सही मौका है, जो देश की पहचान रहे हैं।

    भविष्य की अर्थव्यवस्था पर बड़ा सवाल

    डिमोन के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाएं यह तय करेंगी कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था कैसी होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अनिश्चितता इतनी ज्यादा है कि कोई भी सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है।

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    जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमोन ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध, चीन के साथ तनाव और ट्रेड वॉर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। साथ ही, AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर भी उन्होंने सतर्क रहने की सलाह दी।