Category: Economy

  • खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता

    खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर की दिग्गज कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कंपनी के कमजोर चौथी तिमाही (Q4) बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया और 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    कारोबार के दौरान 52-हफ्ते के लो पर पहुंचा स्टॉक

    एनएसई पर दोपहर करीब 1:35 बजे जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड का शेयर 10.14% गिरकर 414.25 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन की शुरुआत 440 रुपये पर हुई थी, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह गिरकर 408.80 रुपये तक पहुंच गया, जो इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर है।गौरतलब है कि इस स्टॉक का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 727.95 रुपये रहा है, जिससे साफ है कि पिछले एक साल में इसमें भारी गिरावट आई है।

    रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मांग कमजोर

    कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 19% की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की और कुल आय 2,506 करोड़ रुपये रही। हालांकि, इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। इसकी सबसे बड़ी वजह Domino’s Pizza इंडिया का कमजोर प्रदर्शन रहा। कंपनी की लाइक-फॉर-लाइक (LFL) ग्रोथ सिर्फ 0.2% रही, जो घरेलू बाजार में सुस्त मांग को दर्शाती है।

    मार्जिन पर दबाव और सीमित ग्रोथ की चिंता

    विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर LFL ग्रोथ के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। बड़े इवेंट जैसे टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बावजूद कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके अलावा, डिलीवरी बिजनेस से ग्रोथ की संभावनाएं भी सीमित होती दिख रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ रफ्तार और धीमी पड़ सकती है।

    हालांकि, कंपनी का तुर्की बिजनेस अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया है, जो कुछ राहत जरूर देता है।

    नए स्टोर्स का विस्तार जारी

    कमजोर मांग के बावजूद कंपनी अपने विस्तार पर ध्यान दे रही है। इस तिमाही में जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड ने कुल 69 नए स्टोर्स जोड़े, जिससे कुल आउटलेट्स की संख्या बढ़कर 3,663 हो गई है।
    इनमें Domino’s Pizza इंडिया के 59 नए स्टोर शामिल हैं, जबकि तुर्की में 4 नए आउटलेट खोले गए।

    डंकिन के साथ 15 साल पुरानी साझेदारी खत्म

    कंपनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Dunkin’ के साथ अपनी फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट को रिन्यू न करने का ऐलान किया है। यह 15 साल पुरानी साझेदारी इस साल 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगी। कंपनी ने बताया कि लगातार घाटे और कमजोर ग्रोथ के चलते यह कदम उठाया गया है। अब कंपनी इस बिजनेस के लिए बिक्री या फ्रेंचाइजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर विचार करेगी।

    निवेशकों के लिए चिंता बढ़ी

    इस साल अब तक कंपनी के शेयर 20% से ज्यादा गिर चुके हैं, जबकि पिछले एक साल में इसमें करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर मांग, मार्जिन प्रेशर और धीमी ग्रोथ के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

    कमजोर Q4 अपडेट के बाद जुबिलेंट फूडवर्क्स के शेयर 10% से ज्यादा गिरकर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। डोमिनोज इंडिया की धीमी ग्रोथ और मार्जिन दबाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है।

  • टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

    टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना


    नई दिल्ली।
    टाटा संस (Tata Sons) के नए कारोबारों (New Businesses) में बढ़ते घाटे (Growing losses) ने ग्रुप के अंदर चिंता बढ़ा दी है। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इन बजनेसों का कुल घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान ₹5,700 करोड़ से बहुत ज्यादा है। यह बढ़ता नुकसान अब समूह की रणनीति और निवेश फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है।


    9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पार

    एक खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था। इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है।


    नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबाव

    नोएल टाटा (Noel Tata) ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी।


    टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंता

    टाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।


    एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझ

    घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है।


    अन्य बिजनेस भी दबाव में

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा।


    क्या है आगे की चुनौती?

    टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

  • ऑनलाइन शॉपिंग का फायदा: PhonePe SBI Card पर रिवॉर्ड और जीरो ज्वाइनिंग फीस

    ऑनलाइन शॉपिंग का फायदा: PhonePe SBI Card पर रिवॉर्ड और जीरो ज्वाइनिंग फीस


    नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ मिलकर नया क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया है, जो सीमित अवधि के लिए पहले साल जीरो ज्वाइनिंग फीस के साथ उपलब्ध है। इसका मतलब है कि ग्राहक बिना किसी अग्रिम लागत के कार्ड के सभी लाभ उठा सकते हैं।

    यह कार्ड रुपे और विजा प्लेटफॉर्म दोनों पर उपलब्ध है और खासतौर पर उन उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अक्सर ऑनलाइन लेनदेन करते हैं। कार्ड की सबसे बड़ी खासियत इसकी यूनिवर्सल रिवॉर्ड स्ट्रक्चर है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस ब्रांड या व्यापारी से खरीदारी कर रहे हैं, सभी ऑनलाइन खर्च पर आपको 5 प्रतिशत रिवॉर्ड मिलेगा।

    फोनपे का कहना है कि यह कार्ड उन यूजर्स के लिए बेहतरीन विकल्प है जो अपने दैनिक डिजिटल खर्च पर अधिकतम लाभ पाना चाहते हैं। इसके अलावा, फोनपे इकोसिस्टम के भीतर चुनिंदा श्रेणियों जैसे मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल और अन्य नियमित लेनदेन पर 10 प्रतिशत रिवॉर्ड मिलेगा। इसी तरह, बीमा प्रीमियम भुगतान पर भी कार्डधारक रिवॉर्ड अर्जित कर सकते हैं।

    ऑफलाइन खर्च पर भी कार्ड लाभकारी है। रुपे वर्जन के माध्यम से स्कैन-एंड-पे लेनदेन पर 1 प्रतिशत रिवॉर्ड मिलेगा। यानी कम राशि के भुगतान भी आकर्षक बन जाएंगे।

    कार्ड में यात्रा संबंधी सुविधाएं भी शामिल हैं। साल में चार बार घरेलू हवाई अड्डे के लाउंज में निःशुल्क प्रवेश मिलेगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए दो साल की प्रायोरिटी पास सदस्यता भी कार्ड के साथ उपलब्ध है।

    कार्ड से अर्जित रिवॉर्ड पॉइंट्स को सीधे क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान में उपयोग किया जा सकता है। हर पॉइंट का मूल्य 1 रुपए है, जिससे मासिक बिलों को आसानी से समायोजित किया जा सकता है और कार्ड का कुल लाभ बढ़ जाता है।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है और इसे फोनपे ऐप के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। यह ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सहज और सरल बनाता है, जिससे उपयोगकर्ता बिना किसी परेशानी के कार्ड के लाभ उठा सकते हैं।

    जीरो ज्वाइनिंग फीस (पहला साल)
    ऑनलाइन खर्च पर 5% रिवॉर्ड
    फोनपे इकोसिस्टम में 10% रिवॉर्ड (रिचार्ज, बिल आदि)
    ऑफलाइन स्कैन-एंड-पे पर 1% रिवॉर्ड
    यात्रा लाभ: घरेलू लाउंज चार बार फ्री, अंतरराष्ट्रीय लाउंज प्रायोरिटी पास दो साल
    रिवॉर्ड पॉइंट्स क्रेडिट बिल में सीधे भुनाए जा सकते हैं
    पूरी प्रक्रिया डिजिटल और आसान

    यह कार्ड डिजिटल खर्च, यात्रा और नियमित बिल भुगतान पर अधिकतम लाभ देने वाला एक आकर्षक विकल्प साबित होता है।

  • मार्केट अपडेट: मिनटों में लाल निशान, निवेशकों में चिंता बढ़ी, Sensex-Nifty गिरावट में

    मार्केट अपडेट: मिनटों में लाल निशान, निवेशकों में चिंता बढ़ी, Sensex-Nifty गिरावट में


    नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर ही बिकवाली हावी हो गई और सूचकांक लाल निशान में आ गए।

    चंद मिनट में हरे से लाल हुआ बाजार
    शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 157 अंकों की बढ़त के साथ 73,477 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, Nifty 50 भी 67 अंकों की तेजी के साथ 22,723 पर खुला। लेकिन जल्द ही बाजार में गिरावट शुरू हो गई और सेंसेक्स 377 अंक टूटकर 72,942 पर आ गया, जबकि निफ्टी 66 अंक गिरकर 22,642 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल संकेतों का कमजोर होना है। एशियाई बाजारों में जहां कुछ सूचकांक बढ़त में रहे, वहीं कई प्रमुख बाजार छुट्टियों के कारण बंद रहे, जिससे निवेशकों में स्पष्ट दिशा की कमी नजर आई।

    अमेरिकी बाजार से मिले कमजोर संकेत
    वहीं, अमेरिकी बाजार से भी नकारात्मक संकेत मिले हैं। डाऊ जोन्स, S&P 500 और नैस्डैक के फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाला है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार के लिए बड़ा फैक्टर बना हुआ है। ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहे हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर बना हुआ है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। US Dollar Index (DXY) में बढ़त दर्ज की गई है, जिससे विदेशी निवेशकों के रुख पर असर पड़ सकता है। बाजार की शुरुआत भले ही अच्छी रही हो, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती लागत के दबाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।

  • ग्लोबल तनाव का असर! CAIT ने सरकार से मांगी राहत, इनपुट लागत कंट्रोल करने की अपील

    ग्लोबल तनाव का असर! CAIT ने सरकार से मांगी राहत, इनपुट लागत कंट्रोल करने की अपील

    नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश के व्यापारिक संगठनों ने चिंता जतानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और छोटे व्यापारियों के लिए त्वरित राहत उपाय लागू करे। संगठन का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर भारत के व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और लागत संरचना पर पड़ रहा है।

    क्रेडिट और लिक्विडिटी बढ़ाने की मांग

    CAIT ने सरकार से विशेष क्रेडिट गारंटी लाइन स्कीम शुरू करने की मांग की है, जिससे छोटे व्यवसायों को लिक्विडिटी सपोर्ट मिल सके। इसके साथ ही MSME सेक्टर को राहत देने के लिए लोन चुकाने की समयसीमा बढ़ाने की भी अपील की गई है। संगठन का मानना है कि मौजूदा हालात में नकदी की उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि कारोबार प्रभावित न हो।

    इनपुट लागत और ईंधन कीमतों पर नजर जरूरी

    संगठन ने ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत पर भी चिंता जताई है। CAIT ने सरकार से इन लागतों की बारीकी से निगरानी और स्थिरीकरण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों के लिए ब्याज सब्सिडी, बीमा सहायता और निर्यातकों के लिए तेजी से रिफंड की सुविधा देने की भी मांग की गई है।

    सरकार को लिखा गया पत्र, त्वरित कार्रवाई की अपील

    CAIT के महासचिव और सांसद Praveen Khandelwal ने वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर इन मुद्दों को उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

    ‘वेस्ट एशिया टास्क फोर्स’ बनाने का सुझाव

    खंडेलवाल ने एक विशेष ‘पश्चिम एशिया प्रभाव आकलन एवं प्रतिक्रिया कार्य बल’ बनाने का सुझाव भी दिया है। इसमें प्रमुख मंत्रालयों, Reserve Bank of India, व्यापार संगठनों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लगातार आकलन कर समय-समय पर नीतिगत सुझाव देना होगा।

    आपूर्ति श्रृंखला और लागत दबाव पर बढ़ती चिंता

    पत्र में कहा गया है कि मौजूदा तनाव के कारण इनपुट लागत बढ़ रही है, सप्लाई चेन बाधित हो रही है और कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और संचालन पर पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है।

    सरकार के प्रयासों की सराहना भी

    हालांकि CAIT ने Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की। संगठन ने कहा कि सप्लाई सोर्स का विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और जरूरी वस्तुओं की निगरानी जैसे कदमों से बाजार में स्थिरता बनी हुई है और व्यापार जगत का भरोसा कायम है।

    समय रहते कदम जरूरी

    कुल मिलाकर, CAIT का मानना है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में सरकार को सक्रिय और सतर्क रहकर छोटे व्यवसायों के लिए राहत उपाय लागू करने चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था की गति बनी रहे।

  • भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली

    भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली


    नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ खुला। सुबह करीब 9:17 बजे BSE Sensex 241 अंक यानी 0.33% की गिरावट के साथ 73,078.49 पर और Nifty 50 84.70 अंक यानी 0.37% की कमजोरी के साथ 22,628.40 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखा, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।

    फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

    इस गिरावट की अगुवाई फार्मा शेयरों ने की। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1% तक लुढ़क गया, जिससे यह टॉप लूजर सेक्टर बना। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, मीडिया, प्राइवेट बैंक, रियल्टी, डिफेंस और इंफ्रा सेक्टरों में भी बिकवाली देखने को मिली। यह दर्शाता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है।

    आईटी और मेटल स्टॉक्स ने दी थोड़ी राहत

    हालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में ट्रेंट, टाइटन, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

    लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.59% गिरकर 53,384 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.64% गिरकर 15,549 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का माहौल बना हुआ है।

    वैश्विक तनाव का असर, निवेशकों में सतर्कता

    बाजार की इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिख रहा है। निवेशक जोखिम से बचने के मूड में नजर आ रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ रही है।

    एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला-जुला संकेत

    एशियाई बाजारों में Tokyo और Seoul के बाजार हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता में गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

    कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव

    कमोडिटी बाजार की बात करें तो कच्चे तेल में मिलाजुला रुख देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड हल्की तेजी के साथ 109.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में गिरावट रही। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है।

    दबाव में बाजार, आगे भी रह सकती है उतार-चढ़ाव की स्थिति

    कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर नोट पर की है। वैश्विक तनाव, महंगाई और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • सर्विस सेक्टर में उछाल! ग्लोबल डिमांड से मार्च में बढ़ी गतिविधियां

    सर्विस सेक्टर में उछाल! ग्लोबल डिमांड से मार्च में बढ़ी गतिविधियां


    नई दिल्ली। भारत की सेवा अर्थव्यवस्था ने मार्च महीने में मजबूती के संकेत दिए हैं। वैश्विक मांग में सुधार के चलते सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में इजाफा हुआ है, हालांकि घरेलू नए ऑर्डर्स की रफ्तार कुछ धीमी जरूर पड़ी है। S&P Global द्वारा जारी HSBC इंडिया सर्विसेज PMI रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में सर्विसेज PMI 57.5 दर्ज किया गया, जो इसके दीर्घकालिक औसत 54.4 से काफी ऊपर है। यह संकेत देता है कि सेक्टर में विस्तार जारी है और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

    विदेशी ऑर्डर्स ने बढ़ाया कारोबार, घरेलू मांग थोड़ी सुस्त

    रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स में तेज वृद्धि ने सर्विस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट दिया। हालांकि, घरेलू स्तर पर नए बिजनेस की ग्रोथ में नरमी देखी गई। इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार की बदलती परिस्थितियों का असर माना जा रहा है। खासतौर पर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर मांग, पर्यटन और बिजनेस माहौल पर पड़ा है, जिससे उत्पादन की रफ्तार सीमित हुई।

    रोजगार में तेजी, कंपनियों का भरोसा मजबूत

    एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि कंपनियों ने मार्च में रोजगार बढ़ाने की रफ्तार तेज की। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मध्य के बाद से यह सबसे तेज भर्ती देखी गई है। इतना ही नहीं, करीब 12 वर्षों में उत्पादन को लेकर सबसे मजबूत आउटलुक भी सामने आया है। इससे साफ है कि कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी हैं और विस्तार की योजनाएं बना रही हैं।

    चार में से तीन प्रमुख सेक्टरों में धीमी बिक्री

    सेवा क्षेत्र के चार प्रमुख हिस्सों—वित्त एवं बीमा, रियल एस्टेट एवं प्रोफेशनल सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट, सूचना एवं संचार—में बिक्री की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। इससे संकेत मिलता है कि सेक्टर में ग्रोथ तो है, लेकिन यह व्यापक रूप से समान नहीं है और कुछ हिस्सों में दबाव बना हुआ है।

    महंगाई का दबाव बढ़ा, कीमतों में उछाल

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जून 2022 के बाद से इनपुट लागत में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते सर्विसेज की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई और मार्च में चार्ज किए जाने वाले शुल्क सात महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। यानी, कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

    चुनौतियों के बीच मजबूती दिखा रहा सर्विस सेक्टर

    कुल मिलाकर, भारतीय सर्विस सेक्टर ने मार्च में वैश्विक मांग के दम पर अच्छी वृद्धि दर्ज की है, लेकिन घरेलू मांग और महंगाई जैसे कारक आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी कंपनियों का बढ़ता भरोसा और रोजगार में सुधार इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

  • स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश! मेसाबी मेटालिक्स ने जुटाए 150 मिलियन डॉलर

    स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश! मेसाबी मेटालिक्स ने जुटाए 150 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली।एस्सार समूह द्वारा समर्थित मेसाबी मेटालिक्स ने अमेरिकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसे मैक्वेरी ग्रुप से 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है। यह निवेश मिनेसोटा के नैशवॉक में बन रही उसकी डायरेक्ट रिडक्शन (डीआर) ग्रेड लौह अयस्क खदान और पेलेट संयंत्र परियोजना को गति देगा, जिसके 2026 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब अमेरिका अपनी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

    पहले से मिल रही पूंजी को मिला और बल

    यह नई फंडिंग मेसाबी मेटालिक्स के लिए पहले से जारी निवेश प्रवाह को और मजबूत करती है। इससे पहले कंपनी ने Breakwall Capital के साथ 520 मिलियन डॉलर की सीनियर सिक्योर्ड क्रेडिट फैसिलिटी की घोषणा की थी। इसके अलावा, कंपनी को Export-Import Bank of the United States से भी समर्थन मिल चुका है, जो इस परियोजना के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। इन निवेशों से साफ है कि वैश्विक निवेशक इस प्रोजेक्ट की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं।

    अमेरिकी इस्पात सेक्टर के लिए गेमचेंजर प्रोजेक्ट

    मेसाबी मेटालिक्स की यह परियोजना अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में उच्च गुणवत्ता वाले डीआर-ग्रेड लौह अयस्क का घरेलू स्रोत तैयार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे न केवल इस्पात उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपबिल्डिंग और रक्षा जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा। खासकर ऐसे समय में, जब अमेरिका वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    2.5 बिलियन डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, हजारों को रोजगार

    उत्तरी मिनेसोटा में 16,000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली यह परियोजना करीब 2.5 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार की जा रही है। वर्तमान में 800 से अधिक श्रमिक इस साइट पर काम कर रहे हैं, जिससे यह मिनेसोटा के इतिहास में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल हो गई है। एस्सार समूह पहले ही इस प्रोजेक्ट में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इक्विटी निवेश कर चुका है, जो इसकी दीर्घकालिक रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।

    कंपनी और निवेशकों ने जताया भरोसा

    मेसाबी मेटालिक्स के सीईओ जो ब्रोकिंग ने इस फंडिंग को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही वित्तीय साझेदारियां इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और संभावनाओं पर बढ़ते विश्वास को दिखाती हैं। वहीं मैक्वेरी ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक माइक बर्न्स ने कहा कि उनकी कंपनी का एस्सार समूह के साथ पुराना संबंध रहा है और वे अमेरिका में इस परियोजना के साथ जुड़कर इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका

    आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका


    मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया सख्त नीति और रुपये को संभालने के प्रयासों का असर बैंकिंग शेयरों पर दिखने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बैंकों की मार्केट वैल्यू करीब 95 अरब डॉलर घट गई है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है।

    रुपये को संभालने की कोशिश, बैंकों पर असर

    रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया।

    इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की निकासी

    आंकड़ों के मुताबिक मार्च के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों से लगभग 327 अरब रुपये (करीब 3.5 अरब डॉलर) निकाल लिए। इसी दौरान बैंकिंग इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह बियर मार्केट की सीमा (20% गिरावट) के करीब पहुंच गया।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    क्रांति बथिनी का कहना है कि मौद्रिक नीति के सख्त बने रहने से बैंक स्टॉक्स पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि गिरावट के बाद इन शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक होने की बात भी उन्होंने कही।

    पूरे बाजार पर असर का खतरा

    रिपोर्ट्स के अनुसार बैंकिंग शेयर लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के भारतीय शेयर बाजार का करीब एक-तिहाई हिस्सा हैं। ऐसे में बैंक शेयरों में कमजोरी बनी रहती है तो इसका असर व्यापक बाजार पर पड़ सकता है।

    उम्मीद की किरण भी
    कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत रहने से बैंकिंग सेक्टर संभल सकता है। फिलहाल बैंकिंग इंडेक्स करीब 1.5 गुना वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक पर ट्रेड कर रहा है, जो 2020 के बाद निचले स्तरों में है। Citibank ने भी सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

    आगे का खतरा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक Jefferies का अनुमान है कि करेंसी ट्रेड्स पर बैंकों को करीब 50 अरब रुपये तक का नुकसान हो सकता है। वहीं Fitch Ratings के अनुसार सख्त वित्तीय हालात से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 20-30 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है।
    रजत अग्रवाल ने कहा कि हाल की तेज क्रेडिट ग्रोथ पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे कारकों का असर देखने लायक होगा।
    कुल मिलाकर, आरबीआई की सख्ती, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बैंकिंग सेक्टर पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है, हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है।

  • सरकारी तेल कंपनियों ने घाटे से निपटने उठाया कदम, रिफाइनरियों से सस्ते दाम पर खरीदेंगी ईंधन

    सरकारी तेल कंपनियों ने घाटे से निपटने उठाया कदम, रिफाइनरियों से सस्ते दाम पर खरीदेंगी ईंधन

    नई दिल्ली। ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) रिफाइनरियों से पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और केरोसिन को रियायती दरों पर खरीदेंगी। यह कदम घाटे की भरपाई के लिए उठाया गया है और यह पहली बार है जब कीमत नियंत्रण के बाद ऐसा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ओएमसी ने 26 मार्च को ऐसी दरें तय की हैं, जो आयात लागत से 60 रुपये प्रति लीटर तक कम हैं।

    रियायती दरें 16 मार्च से प्रभावी
    ओएमसी की ये रियायती दरें 16 मार्च से लागू मानी जाएंगी। पश्चिम एशिया में संघर्ष से पहले कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ, जिससे होने वाले नुकसान को ओएमसी को खुद वहन करना पड़ रहा है।

    ईंधन पर छूट के बाद आरटीपी में कमी
    मार्च के दूसरे पखवाड़े में डीजल पर 22,342 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट दी गई थी, जिससे आरटीपी 85,349 रुपये से घटाकर 63,007 रुपये प्रति किलोलीटर किया गया। अप्रैल के पहले पखवाड़े के लिए डीजल पर छूट 60,239 रुपये प्रति किलोलीटर रखी गई है, ताकि आरटीपी 1,46,243 रुपये से घटाकर 86,004 रुपये प्रति किलोलीटर किया जा सके।

    विमान ईंधन (एटीएफ) पर 50,564 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी को 1,27,486 रुपये से घटाकर 76,923 रुपये प्रति किलोलीटर किया गया।

    केरोसिन पर 46,311 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी 1,23,845 रुपये से घटाकर 77,534 रुपये प्रति किलोलीटर तय किया गया है।