Category: Economy

  • नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की बड़ी छलांग चार पायदान सुधार के साथ 45वें स्थान पर पहुंचा देश

    नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की बड़ी छलांग चार पायदान सुधार के साथ 45वें स्थान पर पहुंचा देश


    नई दिल्ली :भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी डिजिटल और नेटवर्क से जुड़ी तैयारियों में एक बार फिर मजबूती दिखाई है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत ने चार पायदान की छलांग लगाते हुए 45वां स्थान हासिल किया है। यह जानकारी सरकार की ओर से साझा की गई है। इस रिपोर्ट में भारत ने न केवल अपनी रैंकिंग बेहतर की है बल्कि कई अहम वैश्विक संकेतकों में शीर्ष स्थान भी प्राप्त किया है।

    यह रिपोर्ट वॉशिंगटन डीसी स्थित स्वतंत्र और गैर लाभकारी शोध संस्थान पोर्टुलंस इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई है। इसमें दुनिया के 127 देशों की डिजिटल टेक्नोलॉजी नेटवर्क कनेक्टिविटी और शासन व्यवस्था की तैयारियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल स्कोर वर्ष 2024 में 53.63 था जो 2025 में बढ़कर 54.43 हो गया है।

    नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स में देशों का मूल्यांकन चार प्रमुख आधारों पर किया जाता है। इनमें टेक्नोलॉजी लोग शासन व्यवस्था और प्रभाव शामिल हैं। इन चार स्तंभों के अंतर्गत कुल 53 संकेतकों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने कई क्षेत्रों में दुनिया के अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत टेलीकॉम सेवाओं में सालाना निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैज्ञानिक शोध पत्र आईटी और संचार सेवाओं के निर्यात और ई कॉमर्स कानून जैसे क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहा है। इसके अलावा फाइबर इंटरनेट कनेक्शन देश के भीतर मोबाइल इंटरनेट उपयोग और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता के मामले में भारत को दूसरा स्थान मिला है। घरेलू बाजार के आकार और आय असमानता जैसे संकेतकों में भारत तीसरे स्थान पर रहा है।

    संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत की नेटवर्क से जुड़ी तैयारियां उसके आय स्तर से भी बेहतर हैं। कम आय वाले मध्यम वर्ग के देशों की श्रेणी में भारत दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि देश में डिजिटल समावेशन और तकनीकी पहुंच को दर्शाती है।

    केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में कहा था कि भारत में दुनिया का सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध है और डेटा का उपयोग भी वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक किया जा रहा है। मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश में 120 करोड़ से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जून तक 4जी नेटवर्क देश के हर गांव तक पहुंच जाए।

    सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने अब तक 97068 4जी साइट्स स्थापित की हैं जिनमें से 93511 साइट्स चालू हो चुकी हैं। बीएसएनएल आने वाले महीनों में अपने सभी 4जी टावरों को 5जी में बदलने की योजना पर काम कर रही है।

    देश में 5जी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5जी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और वर्तमान में ये सेवाएं देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं। टेलीकॉम कंपनियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कुल 5.08 लाख 5जी बेस ट्रांससीवर स्टेशन स्थापित किए हैं।नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की यह प्रगति डिजिटल इंडिया पहल मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क और तकनीकी नवाचार का प्रमाण है। यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल शक्ति को और मजबूत बनाती है।

  • सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..

    सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..


    नई दिल्ली :देशभर में सोने और चांदी के बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। खासकर इस शादी के सीजन में सोने और चांदी के भाव ने निवेशकों और खरीदारों की ध्यान खींचा है। पिछले दो हफ्तों में गोल्ड मार्केट ने ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की थी। इस गिरावट के दौरान सोने का भाव पिछले एक हफ्ते में 13 हजार रुपए सस्ता हुआ जबकि चांदी 94 हजार रुपए तक सस्ती हुई।

    इसी बीच आज बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है। भोपाल में आज 24 कैरेट सोने के दाम 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए हैं। वहीं चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। यह बढ़त निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर है क्योंकि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में हड़कंप मचा हुआ था।

    देशभर में आज सोने का भाव 157,530 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 260,040 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव और घरेलू मांग में वृद्धि के कारण हो रहा है। निवेशक इस समय सोने और चांदी में तेजी से ट्रेडिंग कर रहे हैं और खरीदारी के लिए सावधानी बरत रहे हैं।

    सोने और चांदी के बाजार में निवेश करते समय हॉलमार्क पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स BIS हॉलमार्क निर्धारित करता है। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोना शुद्ध और मिलावट रहित हो। 24 कैरेट सोने में विशेष अंक होते हैं जिन्हें देखकर खरीदार असली सोना पहचान सकते हैं। बिना हॉलमार्क की गहने खरीदना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इसमें मिलावट होने की संभावना रहती है।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक या खरीदार बाजार की हलचल को देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव आम बात है और यह वैश्विक आर्थिक स्थिति, डॉलर के भाव और मांग पर निर्भर करता है। आज की बढ़त के बाद निवेशकों में थोड़ी राहत है और खरीदार सोने-चांदी की कीमतों को देखकर खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।

    भोपाल में आज के रेट के अनुसार यदि आप सोने की खरीदी का विचार कर रहे हैं तो 24 कैरेट सोने का भाव 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो है। यह कीमतें स्थानीय बाजार में थोड़ी अलग हो सकती हैं। इसके अलावा गहने खरीदते समय हमेशा हॉलमार्क जांचना और शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है।

    इस प्रकार इस समय सोने और चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। निवेशक और खरीदार दोनों को सावधानी बरतते हुए बाजार की खबरों पर नजर रखनी चाहिए। खरीदारी करने से पहले कीमतों और शुद्धता की पुष्टि करना जरूरी है। बाजार में आज की तेजी ने निवेशकों के बीच नई उम्मीद जगाई है और खरीदारों को फैसला लेने के लिए अवसर दिया है।

  • Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट

    Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट


    नई दिल्ली। सोमवार, 9 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू फ्यूचर मार्केट में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च, 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा 1,54,224 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,53,931 रुपये पर बंद हुआ था।

    दिन की शुरुआत में ही सोना 1,55,674 रुपये तक पहुंच गया, यानी पिछले बंद रेट से करीब 1,800 रुपये की तेजी। शुरुआती कारोबार में MCX गोल्ड ने 1,57,000 रुपये तक का उच्च स्तर भी छुआ।

    चांदी में भी तेजी, जानें MCX रेट
    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती रही। MCX पर 5 मार्च 2026 की सिल्वर फ्यूचर वायदा 2,60,301 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है। यह पिछले बंद रेट से लगभग 10,400 रुपये की तेजी दिखाता है। शुरुआती कारोबार में सिल्वर 2,64,885 रुपये के उच्च स्तर तक भी गया।

    शहरवार सोने का रेट
    दिल्ली:
    24 कैरेट: ₹1,56,740
    22 कैरेट: ₹1,43,690
    18 कैरेट: ₹1,17,590

    मुंबई:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

    चेन्नई:
    24 कैरेट: ₹1,57,300
    22 कैरेट: ₹1,44,190
    18 कैरेट: ₹1,23,490

    कोलकाता:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

    अहमदाबाद:
    24 कैरेट: ₹1,56,640
    22 कैरेट: ₹1,43,590
    18 कैरेट: ₹1,17,490

    लखनऊ:
    24 कैरेट: ₹1,56,740
    22 कैरेट: ₹1,43,690
    18 कैरेट: ₹1,17,590

    पटना:
    24 कैरेट: ₹1,56,640
    22 कैरेट: ₹1,43,590
    18 कैरेट: ₹1,17,490

    हैदराबाद:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

  • बैंकों में FDI की सीमा 20 से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की तैयारी… वित्त मंत्रालय कर रहा विचार

    बैंकों में FDI की सीमा 20 से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की तैयारी… वित्त मंत्रालय कर रहा विचार



    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) Foreign Direct Investment – FDI) की सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने कहा, हम अभी भी विचार कर रहे हैं, और एफडीआई सीमा को 49 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए अंतर-मंत्रालयी परामर्श जारी है।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बेहतर स्थिति से उत्साहित वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने भरोसा जताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में इन बैंकों का संयुक्त मुनाफा दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाना चाहिए। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के अच्छी स्थिति में होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस साल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण वृद्धि 12 प्रतिशत और जमा वृद्धि 10 प्रतिशत है, जो काफी उत्साहजनक है।


    बैंकों का संयुक्त मुनाफा तीन साल में दोगुना होगा

    उन्होंने कहा, बैंक अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत हैं। इसलिए, वे लचीले हैं। हमारे पास नियामक आरबीआई के तहत बहुत ही विवेकपूर्ण प्रबंधन प्रणाली मौजूद है। इसलिए हम अपने बैंकिंग क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले बाहरी कारकों के बारे में बहुत चिंतित नहीं हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का संयुक्त मुनाफा तीन साल में दोगुना हो जाएगा। संपत्ति की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार, ऋण वृद्धि, स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता अनुपात और संपत्तियों पर बढ़ते प्रतिफल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष 2022-23 में एक लाख करोड़ रुपये को पार कर 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गया था।

  • भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे

    भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे


    नई दिल्ली। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत के गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 2.49 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। यह दिसंबर 2025 के 1.25 अरब डॉलर से 98 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है। यह लगातार आठवां महीना है जब गोल्ड ETF में निवेश बढ़ रहा है।

    2025 का निवेश सिलसिला जारी

    साल 2025 में मार्च और मई को छोड़कर हर महीने गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा। पूरे साल 2025 में कुल 4.68 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2024 के 1.29 अरब डॉलर से 262 प्रतिशत अधिक है। तुलना करें तो 2023 में यह केवल 310 मिलियन डॉलर और 2022 में महज 33 मिलियन डॉलर था।

    वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड

    दुनियाभर में भी निवेशकों ने सोना ETF में पैसा लगाना जारी रखा। जनवरी में वैश्विक सोना ETF में 19 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे मजबूत मासिक फंड फ्लो है। सोने की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ, वैश्विक सोना ETF में प्रबंधित संपत्ति 669 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले महीने से 20 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक होल्डिंग भी 120 टन बढ़कर 4,145 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

    एशिया ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

    एशियाई गोल्ड ETF में जनवरी में 10 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2025 के मासिक औसत से काफी अधिक है। यह क्षेत्र लगातार पांचवें महीने निवेश में वृद्धि दिखा रहा है और अब तक का सबसे मजबूत मासिक प्रवाह दर्ज किया है।

    सभी क्षेत्रों में बढ़त
    जनवरी में उत्तरी अमेरिका और एशिया ने वैश्विक मांग को बढ़ावा दिया। उत्तरी अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा मासिक फ्लो दर्ज किया गया, जबकि एशिया ने अपना सर्वाधिक मासिक प्रवाह देखा। यूरोप में भी भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनावों के बावजूद निवेश उल्लेखनीय रहा।

    गिरावट के बावजूद निवेश जारी

    सोने की कीमतों में कुछ गिरावट के बावजूद, यूरोप को छोड़कर सभी क्षेत्रों में 30 जनवरी और 2 फरवरी को शुद्ध निवेश जारी रहा। निवेशकों ने कीमतों में गिरावट का फायदा उठाते हुए खरीदारी जारी रखी।

    निवेश को सहारा देने वाले कारक
    जनवरी में निवेश को शुरुआती कीमतों में तेजी, अमेरिका और ईरान, ग्रीनलैंड और यूरोप में भू-राजनीतिक तनावों ने सहारा दिया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर अपरिवर्तित रखने के बावजूद, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और नए फेड चेयर केविन वॉर्श की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी रही। इसके साथ ही ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने गोल्ड ETF की मांग बनाए रखी।

  • CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम

    CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम


    नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो फ्लाइट टिकट बुक करनी हो या अचानक आई जरूरत आज के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल सुविधा नहीं बल्कि फाइनेंशियल लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति नया क्रेडिट कार्ड अप्लाई करता है सबसे पहले जिस चीज की जांच होती है वह है उसका CIBIL स्कोर। ऐसे में जिन लोगों का सिबिल स्कोर खराब है उनके मन में यही सवाल उठता है कि क्या अब उन्हें कभी नया क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेगा? चलिए जानते हैं।
    क्या है CIBIL स्कोर?
    CIBIL स्कोर एक तीन अंकों की संख्या होती है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाती है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा स्कोर को बैंक अच्छा मानते हैं। वहीं 600 से नीचे का स्कोर यह संकेत देता है कि आपने पहले लोन या क्रेडिट कार्ड के भुगतान में लापरवाही की है। ऐसे में बैंक आपको ‘हाई रिस्क कस्टमर’ मान लेते हैं।

    क्या RBI ने खराब स्कोर वालों पर रोक लगाई है?
    यह जानना जरूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक RBIने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जो खराब CIBIL स्कोर वाले व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड देने से रोकता हो। दरअसल क्रेडिट कार्ड जारी करना पूरी तरह बैंकों और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों की नीति पर निर्भर करता है। बैंक अपने रिस्क को देखते हुए शर्तें तय करते हैं।

    खराब CIBIL स्कोर वालों के लिए कोई ऑप्शन?
    अगर आपका स्कोर कम है तब भी कुछ रास्ते खुले हैं। सबसे सेफ ऑप्शन है सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड। इसमें आपको बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट FDकरानी होती है और उसी के बदले कार्ड मिलता है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड भी लिया जा सकता है। कुछ फिनटेक कंपनियां और NBFC सीमित क्रेडिट लिमिट के साथ कार्ड ऑफर करती हैं ताकि यूजर धीरे-धीरे अपनी साख सुधार सके।

    क्रेडिट कार्ड से कैसे सुधरेगा सिबिल स्कोर?
    सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड आपके खराब CIBIL स्कोर को सुधारने में मदद कर सकता है। समय पर बिल भुगतान लिमिट से कम खर्च और नियमित उपयोग से 6 से 12 महीनों में स्कोर में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। एक बार स्कोर बेहतर होते ही अनसिक्योर्ड यानी बिना FD वाले क्रेडिट कार्ड के रास्ते भी खुल जाते हैं।

  • सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है तो आज ही करें ये 4 निवेश, रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित और टैक्स भी जीरो!

    सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है तो आज ही करें ये 4 निवेश, रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित और टैक्स भी जीरो!


    नई दिल्ली । अगर आपकी सालाना आमदनी 12 लाख रुपये से ज्यादा है और हर साल इनकम टैक्स आपकी जेब पर भारी पड़ता है, तो अब चिंता छोड़ दीजिए। सही टैक्स प्लानिंग और स्मार्ट निवेश से न सिर्फ टैक्स का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है, बल्कि रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फाइनेंशियल फंड भी तैयार किया जा सकता है। खास बात यह है कि कुछ निवेश ऐसे हैं, जो टैक्स बचत और भविष्य की सुरक्षा दोनों का डबल फायदा देते हैं।
    नेशनल पेंशन सिस्टम
    नेशनल पेंशन सिस्टम हाई इनकम वालों के लिए सबसे असरदार टैक्स सेविंग टूल माना जाता है। सेक्शन 80CCD के तहत इसमें 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग है। यानी सीधे-सीधे टैक्सेबल इनकम कम। NPS में इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश होता है, जिससे लंबे समय में 10-12% तक रिटर्न की उम्मीद की जाती है। रिटायरमेंट के समय 60% राशि टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है, जबकि बाकी रकम से नियमित पेंशन मिलती है।

    पब्लिक प्रोविडेंट फंड

    जो लोग रिस्क से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड बेहतरीन ऑप्शन है। इसमें 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। मौजूदा समय में PPF पर 7.1% का फिक्स्ड और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। 15 साल की लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा इसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहद मजबूत बनाता है।

    इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम

    इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम उन निवेशकों के लिए है, जो टैक्स बचाते हुए ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। इसमें भी 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। 3 साल के लॉक-इन के साथ ELSS फंड्स इक्विटी में निवेश करते हैं और लंबे समय में 12–15% तक रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि इसमें बाजार का रिस्क रहता है, इसलिए निवेश से पहले प्रोफाइल समझना जरूरी है।

    ULIP और पेंशन प्लान
    ULIP और लाइफ इंश्योरेंस पेंशन प्लान्स भी हाई इनकम वालों के लिए फायदेमंद हैं। 80C/80CCC के तहत टैक्स छूट और 10 के तहत टैक्स-फ्री मैच्योरिटी इन्हें अट्रैक्टिव बनाती है। ULIP में निवेश और इंश्योरेंस दोनों का लाभ मिलता है, जबकि पेंशन प्लान रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करते हैं।

  • Business शुरू करने की सोच रहे हैं….तो अब बिना किसी गारंटी के ₹20 लाख तक का लोन

    Business शुरू करने की सोच रहे हैं….तो अब बिना किसी गारंटी के ₹20 लाख तक का लोन


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय रिजर्व बेंक (Central Reserve Bank) ने कई अहम ऐलान किए हैं। इसमें एक बड़ा ऐलान उन लोगों से जुड़ा था जो अपना बिजनेस शुरू (Start Business) करने की सोच रहे हैं। दरअसल, आरबीआई (RBI) ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के छोटे बिजनेस के लिए बिना गारंटी वाले लोन की लिमिट 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की है। बिना गारंटी वाले लोन की बढ़ी हुई लिमिट 01 अप्रैल, 2026 को या उसके बाद मंजूर या रिन्यू किए गए छोटे कर्जदारों के सभी लोन पर लागू होगी।


    कोलैटरल-फ्री लोन क्या है?

    एक खबर में कोटक महिंद्रा बैंक की वेबसाइट का हवाला देते हुए बताया गया है कि यह एक अनसिक्योर्ड लोन है जो लेंडर आपकी बिजनेस की जरूरतों के लिए देते हैं। इस तरह के लोन में, लोन चुकाए जाने तक अपने घर, कार या प्रॉपर्टी जैसी कोई भी चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। कोलैटरल-फ्री लोन बिजनेस के लिए तुरंत फंड पाने का एक शानदार तरीका है, जिसमें फाइनेंशियल संस्था के पास अपनी संपत्ति को जोखिम में डालने की जरूरत नहीं है।


    MSME का मतलब क्या है?

    MSME से मतलब माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज यानी कारोबार से होता है। एक माइक्रो एंटरप्राइज, जिसमें प्लांट और मशीनरी या इक्विपमेंट में इन्वेस्टमेंट 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है। वहीं, स्मॉल एंटरप्राइज में इन्वेस्टमेंट 25 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक होना चाहिए। इसके अलावा, मीडियम एंटरप्राइज में प्लांट और मशीनरी या इक्विपमेंट में इन्वेस्टमेंट 125 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 500 करोड़ रुपये तक का होता है।


    किसान क्रेडिट कार्ड पर अपडेट

    इसके साथ ही आरबीआई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित नये दिशा-निर्देश भी जारी करेगा। इसमें फसल सीजन के मानकीकरण, केसीसी की अवधि बढ़ाकर छह साल करने और हर फसल सीजन के लिए लोन लिमिट तय करने संबंधी प्रावधान होंगे। इसके प्रारूप दिशा-निर्देश जल्द जारी किये जाएंगे।