Category: Economy

  • शेयर बाजार पर नजर! RBI पॉलिसी, ग्लोबल टेंशन और क्रूड ऑयल की चाल से तय होगी दिशा

    शेयर बाजार पर नजर! RBI पॉलिसी, ग्लोबल टेंशन और क्रूड ऑयल की चाल से तय होगी दिशा


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होगा। आरबीआई मौद्रिक नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल से शेयर बाजार की दिशा तय होगी।

    ब्याज दरों की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की बैठक 6-8 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम उच्चतम स्तर पर बने हुए हैं, जिससे महंगाई को लेकर दुनियाभर में चिंताएं बढ़ रही हैं।

    अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध भी शेयर बाजार के लिए अगले हफ्ते एक अहम फैक्टर होगा, क्योंकि युद्ध का प्रभाव अब दुनिया की आपूर्ति श्रृंख्लाओं पर दिखाई देने लगा है। ऐसे में इस युद्ध से जुड़े अपटेड आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार के लिए अहम होंगे।

    मौजूदा समय में कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। बीते एक महीने में इसमें 34 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आने वाले हफ्ते में कच्चे तेल की चाल पर निवेशकों की निगाहें बनी रहेंगी।

    बीते हफ्ते शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ था। इस दौरान सेंसेक्स 1,953.90 अंक या 2.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,319.55 और निफ्टी 593.35 अंक या 2.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,713 पर बंद हुआ। यह लगातार छठवां हफ्ता था, जब शेयर बाजार में गिरावट देखी गई।

    सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक (5.21 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (4.06 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (4.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (3.87 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (3.84 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.27 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (2.90 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (2.89 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे।

    इस दौरान केवल निफ्टी आईटी (2.60 प्रतिशत) और निफ्टी मेटल (1.01 प्रतिशत) ही हरे निशान में बंद हुए।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.05 अंक या 1.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,650.50 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,654 अंक या 2.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,677.05 पर बंद हुआ।

  • फार्मा सेक्टर को मिलेगी नई ताकत! सरकार बढ़ाएगी निर्यात और सप्लाई चेन क्षमता

    फार्मा सेक्टर को मिलेगी नई ताकत! सरकार बढ़ाएगी निर्यात और सप्लाई चेन क्षमता


    नई दिल्ली।  तेलंगाना की राजधानी में फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर पर ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया, जिसको लेकर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मीडिया से बात की। इस दौरान राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘चिंतन शिविर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर गहन मंथन करना है। इस पहल के तहत सेक्टर से जुड़ी चुनौतियों को समझते हुए उनके समाधान और भविष्य की स्पष्ट दिशा तय की जा रही है।

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह मंच केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकार, उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए ठोस रणनीति तैयार की जाती है। खासतौर पर फार्मा सेक्टर के लिए यह अहम है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और तेजी से विकसित होता क्षेत्र है।

    अमेरिका द्वारा फार्मास्युटिकल सेक्टर पर लगाए गए संभावित टैरिफ को लेकर अग्रवाल ने कहा कि शुरुआती समझ के मुताबिक भारतीय जेनेरिक दवाएं इन टैरिफ से बाहर हैं। ऐसे में भारत के फार्मा निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, कुछ इनोवेटिव या पेटेंटेड दवाओं पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है। यदि किसी भी सेगमेंट में भारतीय उद्योग को दिक्कत आती है, तो उसे इस समझौते के तहत उठाया जाएगा और समाधान खोजा जाएगा।

    अग्रवाल ने आगे कहा कि भारत का फार्मा सेक्टर मजबूत स्थिति में है, और केंद्र सरकार इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए लगातार नए बाजारों और उत्पादों पर ध्यान दे रही है। पिछले 5-6 वर्षों में भारत ने 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किए हैं, जो करीब 38 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। इनका कुल आर्थिक आकार 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।

    अग्रवाल के मुताबिक, ये समझौते भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेंगे, बाजारों में विविधता लाएंगे और घरेलू उद्योग को मजबूत करेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट अभी कुछ ही हफ्तों पुराना है, इसलिए इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है।

    वाणिज्य सचिव ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी बाहरी चुनौतियां समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन भारत ने हर बार इनसे निपटते हुए आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई है।

    अग्रवाल के अनुसार, करीब 60 अरब डॉलर के आकार वाला भारत का फार्मा उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, आधुनिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि बायोसिमिलर, बायोलॉजिक्स और इनोवेटिव दवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।

    अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल दवाओं की कीमतों पर किसी बड़े असर के संकेत नहीं हैं। लेकिन अगर भविष्य में कोई समस्या आती है, तो सरकार और उद्योग मिलकर उसका समाधान निकालेंगे।

    वाणिज्य सचिव ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि दवाओं की सप्लाई किसी भी हाल में बाधित न हो। सरकार और उद्योग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर दवाओं की उपलब्धता बनी रहे और भारत का फार्मा सेक्टर अपनी विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे।

  • क्रूड के रेट आसमान पर… भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

    क्रूड के रेट आसमान पर… भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम


    नई दिल्ली।
    सरकारी ऑयल कंपनियों (Government Oil Companies) ने आज रविवार को एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price ) में कोई बदलाव नहीं किया है। तेल कंपनियों (Oil Companies) ने पुरानी कीमतों को बरकरार रखा है। बता दें, 1 अप्रैल को Shell India ने पेट्रोल के रेट में 7.41 रुपये और डीजल के रेट में 25 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है।


    वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के रेट

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों में पर देखने को मिल रहा है। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुई है। इसी रास्ते से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। लेकिन अब यह बाधित होने के बाद कच्चे तेल के रेट में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का रेट 109 डॉलर प्रति बैरल को क्रॉस तक पहुंच गया। युद्ध शुरू होने से पहले रेट 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था।


    आज पेट्रोल का क्या है रेट?

    – नई दिल्ली में – 94.72
    – कोलकाता – 104.21
    – चेन्नई – 100.75
    – अहमदाबाद – 94.49
    – बेंगलुरू – 102.92
    – हैदराबाद – 107.46
    – जयपुर – 104.72
    – लखनऊ – 94.69
    – पुणे – 104.04
    – चंडीगढ़ – 94.30
    – इंदौर – 106.48
    – पटना – 105.58
    – सूरत – 95
    – नाशिक – 95.50


    आज डीजल का क्या है रेट?

    – दिल्ली – 87.62
    – मुंबई – 92.15
    – चेन्नई – 92.34
    – अहमदाबाद – 90.17
    – बेंगलुरू – 89.02
    – हैदराबाद – 95.70
    – जयपुर – 90.21
    – लखनऊ – 87.80
    – चंडीगढ़ – 82.45
    – इंदौर – 91.88
    – पटना – 93.80
    – सूरत – 89
    – नाशिक – 89.50


    प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हुआ था इजाफा

    1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने XP100 पेट्रोल के रेट में 11 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। जिसके बाद इसका रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर को क्रॉस कर गया था। प्रीमियम डीजल वैरिएंट एक्सट्रा ग्रीन की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला है। यह अब 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।


    नायरा के बाद Shell India ने भी बढ़ाया रेट

    प्राइवेट कंपनियों ने तेल की कीमतों में इजाफा शुरू कर दिया है। नयारा के बाद Shell India ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। पेट्रोल के रेट में कंपनी ने 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 25.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।

  • पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, सोने की खरीद पर भी लगी सख्ती: आज का पूरा अपडेट

    पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, सोने की खरीद पर भी लगी सख्ती: आज का पूरा अपडेट


    नई दिल्ली। 4 अप्रैल 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। हालांकि, कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    पेट्रोल के दाम
    दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और मुंबई में ₹103.54 प्रति लीटर पर स्थिर है। कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
    नोएडा, मुजफ्फरपुर और रांची जैसे कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    डीजल की कीमतों में स्थिरता
    डीजल के दाम भी ज्यादातर शहरों में स्थिर रहे। दिल्ली में डीजल ₹87.67 और मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर मिल रहा है। कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार स्थिर बना हुआ है।

    कीमतें क्यों बदलती हैं?
    पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (Excise Duty और VAT) इसी वजह से हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं।

    सरकार का बड़ा फैसला: सोने की खरीद पर नए नियम
    सरकार अब सोने की खरीदारी से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सोने की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब हर सोने के गहने पर 6 अंकों का HUID (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य होगा। यह कोड एक तरह का यूनिक पहचान नंबर है, जिसे दोबारा किसी अन्य गहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ग्राहक BIS CARE ऐप के जरिए इस कोड की जांच कर सकते हैं ताकि सोने की असलियत की पुष्टि हो सके। हॉलमार्किंग एक प्रमाणन प्रक्रिया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सोना तय शुद्धता मानकों के अनुसार है। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इससे नकली या कम गुणवत्ता वाले सोने की बिक्री पर रोक लगती है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलती है।

    नए नियमों के तहत क्या बदलाव होंगे?
    सोने पर HUID कोड का दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा हर गहने की अलग पहचान होगी खरीदारी में पारदर्शिता बढ़ेगी धोखाधड़ी और नकली हॉलमार्क पर रोक लगेगी ₹2 लाख से अधिक खरीद पर PAN कार्ड जरूरी ₹10 लाख से अधिक खरीद पर PAN + आधार + आय प्रमाण जरूरी₹2 लाख से अधिक का कैश भुगतान नहीं किया जा सकेगा 4 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के दामों में स्थिरता देखने को मिली है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। वहीं, सरकार के नए फैसले के तहत सोने की खरीद को और सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। आने वाले समय में ये नियम ग्राहकों के लिए सुरक्षा और भरोसे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • भारत का एलपीजी टैंकर ‘Green Sanvi’ ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, दो और टैंकर लाइन में

    भारत का एलपीजी टैंकर ‘Green Sanvi’ ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, दो और टैंकर लाइन में


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी सफलता सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी ने होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार कर लिया। यह जहाज इस रणनीतिक और संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार करने वाला सातवां भारत के झंडे वाला पोत है। जहाज में लगभग 44,000 टन एलपीजी था, जो देश की लगभग आधे दिन की एलपीजी खपत के बराबर है।

    रणनीतिक नेविगेशन और सुरक्षा

    ग्रीन सान्वी ने ईरानी समुद्री इलाके से होकर एक तय मार्ग का पालन किया। शिपिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि जहाज संवेदनशील पानी से सुरक्षित गुजरें। इसके साथ ही दो और भारतीय एलपीजी टैंकर, ग्रीन आशा और जग विक्रम, आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट पार करके भारत आने की उम्मीद में हैं।

    भारत के झंडे वाले जहाजों की स्थिति

    स्ट्रेट पार करने के साथ ही फारस की खाड़ी के पूर्वी हिस्से में भारत के झंडे वाले 17 जहाज मौजूद हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के जहाज शामिल हैं: तीन एलपीजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक LNG टैंकर, एक केमिकल प्रोडक्ट टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और दो जहाज जिनका नियमित मेंटेनेंस चल रहा है।

    ईरान के साथ डिप्लोमैटिक समन्वय

    भारत अपने व्यापारी जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत कर रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों के अलावा अन्य गैर-दुश्मन देशों के जहाज ईरानी अधिकारियों के समन्वय में स्ट्रेट पार कर सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी बताया कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को इस चोकपॉइंट से गुजरने की अनुमति दी गई है।

    ट्रांजिट के दौरान प्रोटोकॉल

    ग्रीन सान्वी ने अपने भारतीय पहचान और नाविकों की जानकारी ईरानी अधिकारियों को उपलब्ध करवाई। यह प्रैक्टिस अब सुरक्षित नेविगेशन का स्टैंडर्ड बन चुकी है, ताकि तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यापारिक जहाज अपने मार्ग पर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकें।

    होर्मुज स्ट्रेट का महत्व

    होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच इसे सुरक्षित बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ग्रीन सान्वी का सफलतापूर्वक पार होना दर्शाता है कि भारत एनर्जी सप्लाई लाइन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रभावी डिप्लोमेसी और समुद्री सुरक्षा उपाय कर रहा है।

  • ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव: नए कोड के तहत छोटा अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

    ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव: नए कोड के तहत छोटा अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली।नई श्रम नीति ने कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कुछ योग्य कर्मचारियों को सिर्फ एक साल की लगातार सेवा पूरी होने के बाद भी ग्रेच्युटी पाने का अधिकार मिल सकता है। इससे पहले यह लाभ केवल 5 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को ही मिलता था। यह बदलाव नवंबर 2025 से लागू हुआ है और इसका उद्देश्य फॉर्मल सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को नौकरी के बाद मिलने वाले लाभों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।

    फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को लाभ

    नए नियमों के अनुसार, फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी अब अपनी नौकरी की अवधि के आधार पर ग्रेच्युटी पाने के पात्र होंगे। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी वे हैं जिन्हें कंपनियां एक तय समय के लिए लिखित कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त करती हैं, जो आमतौर पर एक या दो साल का हो सकता है। अब उनके ग्रेच्युटी की राशि उनकी सेवा अवधि के अनुरूप तय होगी। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए लाभकारी है, जो छोटे या सीमित कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। इससे उन्हें भी लंबे समय तक नौकरी न होने पर भी कानूनी रूप से ग्रेच्युटी का हक मिलेगा।

    स्थायी कर्मचारियों के लिए नियम

    स्थायी या परमानेंट कर्मचारियों के लिए नियम अभी भी पुराने अनुसार हैं, यानी 5 साल की लगातार सेवा पूरी करना अनिवार्य है। हालांकि, मृत्यु या दिव्यांगता के मामलों में स्थायी कर्मचारियों को भी एक साल की सेवा पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी का अधिकार मिल सकता है। इससे कर्मचारियों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी सुरक्षा का आश्वासन मिलेगा।

    ग्रेच्युटी की गणना और वेतन संरचना

    नए नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी की गणना वेतन के आधार पर की जाएगी। इसमें कर्मचारी के कुल CTC (कॉस्ट-टू-कंपनी) का कम से कम 50 प्रतिशत शामिल होगा। वेतन में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA), रिटेनिंग अलाउंस और अन्य भत्ते शामिल होंगे। जिन कर्मचारियों का पहले बेसिक वेतन कम था, उनके लिए अब ग्रेच्युटी की राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

    कानूनी मान्यता और लाभ

    ग्रेच्युटी एक कानूनी रूप से अनिवार्य एकमुश्त भुगतान है, जो नियोक्ता अपने कर्मचारी को लंबी सेवा या रिटायरमेंट के सम्मान में देता है। अब यह लाभ छोटे समय की नौकरी करने वाले फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध होगा। इसका मतलब है कि 21 नवंबर 2025 या उसके बाद जॉइन करने वाले कर्मचारी एक साल की लगातार सेवा पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी का दावा कर सकेंगे।

    संस्थानों की जिम्मेदारी

    श्रम मंत्रालय ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने अकाउंटिंग नियमों के अनुसार इस प्रावधान को लागू करें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारियों को उनके हक का भुगतान समय पर और सही तरीके से मिले। यह बदलाव विशेष रूप से औपचारिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए राहत और सुरक्षा का जरिया साबित होगा।

  • ईरान से तेल कार्गो डायवर्जन की खबरें भ्रामक, सरकार ने कहा-‘तथ्यात्मक रूप से गलत’

    ईरान से तेल कार्गो डायवर्जन की खबरें भ्रामक, सरकार ने कहा-‘तथ्यात्मक रूप से गलत’


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने शनिवार को उन खबरों और सोशल मीडिया दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान से भारत आने वाले तेल के एक कार्गो को चीन भेज दिया गया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसे “तथ्यात्मक रूप से गलत” और भ्रामक बताया।

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और तेल कंपनियों को व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार किसी भी सप्लायर से तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होती है। मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में जहाज ‘पिंग शुन’ के वाडिनार से मार्ग बदलने को गलत तरीके से जोड़कर यह दावा किया गया कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण तेल चीन भेजा गया, जबकि ऐसा कोई मामला नहीं है।

    शिप ट्रैकिंग डेटा में जहाज पहले भारत की ओर आ रहा था, लेकिन बाद में उसने अपनी मंजिल बदल ली। इसके आधार पर बाजार और सोशल मीडिया में अटकलें शुरू हुईं कि भुगतान की समस्या वजह हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह गलत है और ईरान से तेल आयात में कोई बाधा नहीं है।

    मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि भारतीय रिफाइनरियों ने मध्य पूर्व में सप्लाई संकट के बावजूद आने वाले महीनों की कच्चे तेल की जरूरत पहले ही सुनिश्चित कर ली है, जिसमें ईरान से सप्लाई भी शामिल है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि जहाजों का मार्ग बदलना व्यापारिक और ऑपरेशनल कारणों से होता है और इसे गलत रूप में पेश किया गया।

    एलपीजी सप्लाई को लेकर आई खबरों को भी सरकार ने खारिज किया। पुष्टि की गई कि ‘सी बर्ड’ नामक जहाज, जिसमें लगभग 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी था, 2 अप्रैल को मैंगलोर पहुंच चुका है और अपना माल उतार रहा है।

    ईरान से तेल और एलपीजी की सप्लाई सुरक्षित है। सरकार ने सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में फैल रही गलत जानकारी को स्पष्ट रूप से भ्रामक बताया। भुगतान संबंधी कोई बाधा नहीं है और भारतीय रिफाइनरियों की आवश्यकताएं पूरी तरह सुनिश्चित हैं।

  • अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बंपर रेट बढ़ोतरी! 60k टिकट हुआ 1.5 L, यात्रियों के लिए अलर्ट

    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बंपर रेट बढ़ोतरी! 60k टिकट हुआ 1.5 L, यात्रियों के लिए अलर्ट


    नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये में भारी उछाल, ₹60 हजार का टिकट अब ₹1.5 लाख के पार। दिल्ली से लंदन, दुबई और न्यूयॉर्क की उड़ानें महंगी। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इज़राइल-अमेरिका तनाव का असर अब हवाई यात्रा पर साफ दिखने लगा है। कई देशों के एयरस्पेस बंद होने की वजह से एयरलाइंस को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और टिकट की कीमतों में भारी उछाल आया है।

    दिल्ली से लंदन का किराया दोगुने से ज्यादा
    दिल्ली से London जाने वाली फ्लाइट्स के किराये में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। मौजूदा समय में इकोनॉमी क्लास का नॉन-स्टॉप टिकट करीब ₹1.49 लाख तक पहुंच गया है, जबकि बिज़नेस क्लास का किराया ₹1.79 लाख तक जा चुका है। पहले यही टिकट ₹45,000 से ₹65,000 के बीच मिल जाता था, यानी अब कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। सिर्फ लंदन ही नहीं, Dubai और New York City जाने वाली फ्लाइट्स के किराये भी तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली-दुबई का इकोनॉमी टिकट अब ₹28,000 से ऊपर पहुंच गया है, जो पहले ₹12,000 से ₹20,000 के बीच होता था। वहीं दिल्ली-न्यूयॉर्क का किराया ₹1.26 लाख से लेकर ₹2 लाख से ज्यादा तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में यह ₹55,000 से ₹80,000 के बीच रहता था।

    ATF और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
    किराये में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल भी है। ATF के दाम $85-90 प्रति बैरल से बढ़कर $150-200 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड ऑयल भी $72 से बढ़कर $105 प्रति बैरल हो गया है, जिससे एयरलाइंस की लागत और बढ़ गई है।

    यूरोप रूट पर फ्लाइट्स रद्द और किराया बढ़ा
    यूरोप जाने वाली उड़ानों पर भी इस संकट का असर पड़ा है। मार्च के शुरुआती हफ्तों में 700 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हुईं और किराये में 40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौजूदा हालात में इंटरनेशनल हवाई यात्रा काफी महंगी हो गई है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में किराये और भी बढ़ सकते हैं, जिससे यात्रियों की जेब पर और बोझ पड़ना तय है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने हवाई यात्रा को काफी महंगा बना दिया है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये और भी बढ़ सकते हैं। यात्रियों को फिलहाल यात्रा से पहले किराये और रूट की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी जा रही है।

  • HDFC बैंक का वित्तीय अलर्ट! जमा और लोन के बीच बढ़ा अंतर, 18 अप्रैल को बोर्ड बैठक

    HDFC बैंक का वित्तीय अलर्ट! जमा और लोन के बीच बढ़ा अंतर, 18 अप्रैल को बोर्ड बैठक


    नई दिल्ली।एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही में अपने कर्ज और जमा के बीच अंतर और बढ़ने की जानकारी दी है। बैंक के अनुसार, लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट (C-D) रेशियो 106-108 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

    लोन की ग्रोथ: रिटेल और SME का योगदान

    31 मार्च तक बैंक के कुल लोन (ग्रॉस एडवांस) सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए हो गए, जबकि एक साल पहले यह 21.4 लाख करोड़ रुपए थे। तिमाही आधार पर लोन की ग्रोथ मध्यम रही, जिसमें मुख्य रूप से रिटेल और SME सेगमेंट ने योगदान दिया। कॉरपोरेट लोनिंग सीमित और संतुलित रही।

    जमा की धीमी बढ़त और सीएएसए पर दबाव

    बैंक की कुल जमा राशि लगभग 23.5 लाख करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले 20.5 लाख करोड़ रुपए थी। हालांकि, डिपॉजिट की ग्रोथ लोन के मुकाबले धीमी रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना रहा। कम लागत वाले डिपॉजिट (CASA) की ग्रोथ भी धीमी रही, जिससे CASA रेशियो 37-38 प्रतिशत पर आ गया। इससे स्पष्ट होता है कि कड़े लिक्विडिटी माहौल में सस्ते फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    बोर्ड बैठक और डिविडेंड

    एचडीएफसी बैंक का बोर्ड 18 अप्रैल को बैठक करेगा, जिसमें मार्च तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इस बैठक में FY 2026 के लिए डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा और इसके लिए रिकॉर्ड डेट तय की जाएगी।

    आगे की रणनीति

    विश्लेषकों का मानना है कि बैंक के लिए डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ाना, CASA बढ़ाना और मार्जिन को स्थिर बनाए रखना सबसे अहम होगा। बैंक वर्तमान में कुछ गवर्नेंस मामलों को भी संभाल रहा है और आंतरिक सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, खासकर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री प्रक्रिया में।

    कानूनी और आंतरिक कार्रवाई

    पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई फिलहाल शुरू नहीं की गई है। इसके अलावा, 2018-19 में एटी-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग मामले में बैंक ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया और 12 अन्य कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया।

    एचडीएफसी बैंक में मार्च तिमाही में लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना। बोर्ड बैठक 18 अप्रैल को होगी, जिसमें ऑडिटेड नतीजे और डिविडेंड पर निर्णय लिया जाएगा। बैंक CASA बढ़ाने और आंतरिक सिस्टम मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

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    FTL सिलेंडर योजना: बिना स्थायी पते के भी घर लाएं 5 किलो का LPG, आसान प्रक्रिया


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार की एलपीजी उपलब्धता बढ़ाने की पहल के तहत, सरकारी तेल वितरण कंपनियां अब 5 किलोग्राम के एफटीएल (फ्री-ट्रेड) एलपीजी सिलेंडर को आसानी से उपलब्ध करा रही हैं। खास बात यह है कि इस सिलेंडर को पाने के लिए अब स्थायी पते की आवश्यकता नहीं है; केवल एक सरकारी आईडी दिखाकर आप इसे अपने नजदीकी एलपीजी एजेंसी या वितरक से ले सकते हैं।

    छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए सुविधा

    सरकार की यह सुविधा विशेषकर उन लोगों के लिए है जो अपने शहरों से दूर रहते हैं और उनके पास स्थायी पता नहीं है। छात्र और प्रवासी कामगार अब बिना किसी पते की बाधा के घर से दूर भी एलपीजी सिलेंडर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

    इंडियन ऑयल ने पोस्ट करते हुए बताया, “अगर आप घर से दूर रहते हैं, आपके पास स्थायी पता नहीं है, और एलपीजी कनेक्शन लेने में कठिनाई हो रही है, तो अब इसका आसान समाधान है।”

    ‘छोटू’ – छोटा, सुविधाजनक और भरोसेमंद

    इंडियन ऑयल ने इस सिलेंडर को ‘छोटू’ नाम दिया है। पोस्ट के अनुसार, यह छोटा और सुविधाजनक सिलेंडर खासकर छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें तुरंत और भरोसेमंद खाना पकाने का समाधान चाहिए।

    एलपीजी आपूर्ति सामान्य, डिजिटल प्लेटफॉर्म से बुकिंग

    कंपनी ने कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और प्रतिदिन लगभग 28 लाख सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है।

    87 प्रतिशत एलपीजी बुकिंग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे एसएमएस और IVRS के माध्यम से हो रही हैं। सिलेंडर की डिलीवरी को डीएसी ओटीपी से प्रमाणित किया जाता है, जिससे ग्राहकों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलती है।

    ग्राहकों को आश्वासन

    इंडियन ऑयल ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि किसी भी कमी की संभावना नहीं है और घबराहट में बुकिंग या जमाखोरी करने की जरूरत नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि आधिकारिक सहायता चैनलों के जरिए ग्राहकों की चिंताओं का सक्रिय समाधान किया जा रहा है।