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  • चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा

    चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा


    नई दिल्ली। मानव अंतरिक्ष इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। NASA का Artemis II मिशन आधी सदी बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा के करीब ले गया है। इस ऐतिहासिक मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष से पृथ्वी की ऐसी शानदार तस्वीरें भेजी हैं, जिन्हें देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है।

    ओरियन कैप्सूल से दिखी ‘ब्लू मार्बल’ की खूबसूरती

    मिशन के कमांडर Reid Wiseman द्वारा ली गई तस्वीरों में पृथ्वी का अद्भुत नजारा देखने को मिला। Orion spacecraft की खिड़की से ली गई एक तस्वीर में धरती का घुमावदार हिस्सा दिखाई देता है, जबकि दूसरी तस्वीर में पूरी पृथ्वी नजर आती है नीले महासागर, सफेद बादल और हरे रंग की चमकती ऑरोरा के साथ। इन तस्वीरों में पृथ्वी की खूबसूरती और उसकी नाजुकता दोनों साफ झलकती हैं, मानो अंतरिक्ष से ‘ब्लू मार्बल’ जीवंत हो उठी हो।

    ‘टर्मिनेटर’ लाइन ने खींचा ध्यान

    एक अन्य तस्वीर में दिन और रात के बीच की स्पष्ट सीमा दिखाई देती है, जिसे ‘टर्मिनेटर’ कहा जाता है। यह वह रेखा होती है जहां सूरज की रोशनी और अंधेरा मिलते हैं। इस दृश्य ने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों को आकर्षित किया है।

    तकनीक का कमाल: शटर स्पीड से बदली तस्वीरों की कहानी

    इन तस्वीरों को अलग-अलग शटर स्पीड पर कैद किया गया है। एक तस्वीर में ज्यादा शटर स्पीड के कारण धरती की रोशनी अधिक चमकदार दिख रही है, जबकि दूसरी में कम शटर स्पीड के जरिए रात में चमकती मानव बस्तियों और प्राकृतिक रोशनी को बेहतर तरीके से दिखाया गया है। यह अंतरिक्ष फोटोग्राफी की तकनीकी खूबसूरती को भी दर्शाता है।

    1972 के बाद पहली बार इतना करीब

    यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि 1972 में Apollo 17 के बाद पहली बार कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। लगभग 50 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद के पड़ोस तक पहुंचा है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए रास्ता खोलता है।

    चार अंतरिक्ष यात्री, एक साझा सपना

    इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। एक्सप्लोरेशन सिस्टम लीडर लकीशा हॉकिन्स ने कहा, “इस तस्वीर को देखते हुए यह एहसास होता है कि हमारे चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर पूरी मानवता इसमें शामिल है।” यह बयान इस मिशन की भावनात्मक गहराई को भी दर्शाता है।

    चंद्रमा की ओर बढ़ता कदम

    रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 1,80,000 किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं और उन्हें चंद्रमा तक पहुंचने के लिए करीब 2,40,000 किलोमीटर और सफर तय करना है। मिशन की योजना चंद्रमा की परिक्रमा कर ‘यू-टर्न’ लेकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटने की है, बिना लैंडिंग के।

    भविष्य के मिशनों की नींव

    Artemis II मिशन को आने वाले समय में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी परीक्षण है, बल्कि मानवता के अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के सपनों को नई उड़ान भी देता है।

  • निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?

    निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?


    नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में पहुंचने के बावजूद, अब बाजार का रुख बदलता नजर आ रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.2% और चांदी 3.8% तक टूट गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।

    रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। एमसीएक्स पर सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 50 हजार रुपए नीचे आ गया है, जबकि चांदी में तो और बड़ी गिरावट आई है—यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 2 लाख रुपए तक टूट चुकी है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को झटका दिया है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर निवेश किया था।

    मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारण

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है।

    कच्चे तेल और महंगाई का असर

    इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ता है, क्योंकि ये धातुएं ब्याज नहीं देतीं। ऐसे में निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।

    ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मूड

    विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआत में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को “सेफ हेवन” के रूप में समर्थन मिला था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतें नीचे आ गईं।

    चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?

    चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक अहम वजह यह है कि यह सिर्फ निवेश धातु नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उद्योगों में इसकी मांग घटने का डर रहता है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव आता है।

    आगे कैसी रहेगी चाल?

    अब निवेशकों की नजर अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़ों नॉन-फार्म पेरोल, एडीपी रोजगार डेटा और बेरोजगारी दर पर टिकी है। ये आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। तकनीकी तौर पर सोने के लिए 1,48,000 रुपए के आसपास सपोर्ट और 1,55,000 रुपए के करीब रेजिस्टेंस माना जा रहा है। हालांकि, सभी दबावों के बावजूद सोने ने सप्ताह के दौरान करीब 2.20% की बढ़त भी दर्ज की है, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है।

    निवेशकों के लिए संकेत

    फिलहाल बाजार पूरी तरह मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों जैसे महंगाई, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर है। आने वाले समय में भी सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • Gold Jewellery: हॉलमार्किंग नियमों को सख्त करने की तैयारी… हर आईटम का होगा यूनिक नंबर!

    Gold Jewellery: हॉलमार्किंग नियमों को सख्त करने की तैयारी… हर आईटम का होगा यूनिक नंबर!


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) अब सोने के गहनों (Gold Jewellery) की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्किंग नियमों (Hallmarking rules.) को और सख्त करने की तैयारी में है। इसके तहत, हर आइटम के लिए एक खास पहचान संख्या (HUID) का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाएगा। इसका मकसद नकली सामान पर रोक लगाना और उसकी पहचान को बेहतर बनाना है।


    यूनिक ID का दोबारा नहीं हो सकेगा इस्तेमाल

    मिंट की एक खबर में सूत्र के हवाले से बताया गया है कि नई व्यवस्था के तहत हर गहने को उसके डिजाइन, आकार और अन्य विशेषताओं के आधार पर एक अलग पहचान संख्या दी जाएगी। यह संख्या किसी भी हालत में दोबारा इस्तेमाल नहीं की जा सकेगी, भले ही गहने एक जैसे क्यों न दिखें। वहीं, एक बार जब कोई ज्वेलरी आइटम पिघला दिया जाता है तो उसे दी गई यूनिक ID का दोबारा इस्तेमाल किसी दूसरे प्रोडक्ट के लिए नहीं किया जा सकेगा। इससे सर्टिफिकेशन की नकल या गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।


    क्यों लिया जा रहा फैसला?

    सूत्र ने बताया कि यह फैसला उन बढ़ती शिकायतों को देखते हुए लिया गया है, जिनमें किसी खास हॉलमार्क ID और शुद्धता के स्तर के साथ खरीदे गए गहनों की प्योरिटी बाद में अलग पाई गई। यह बात संज्ञान में आई है कि एक ही यूनिक ID का इस्तेमाल कई चीजों के लिए किया जा रहा है। हालांकि, शिकायतों की कुल संख्या का खुलासा नहीं किया गया है।


    इंडस्ट्री का मिल रहा समर्थन

    आदित्य बिड़ला ज्वेलरी की कंपनी इंद्रिया के सीईओ संदीप कोहली ने कहा कि यह पहल कॉर्पोरेट ज्वेलर्स के साथ पार्टनरशिप में शुरू की जा रही है और धीरे-धीरे इसे ज्वेलरी के पूरे इकोसिस्टम तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरीके से थर्ड पर्टी द्वारा हमारे प्रोडक्ट के HUID नंबरों की डुप्लीकेशन या गलत इस्तेमाल का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि हॉलमार्क निशानों की तस्वीरें उनके प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाएंगी, जिससे भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकली या जाली निशानों की पहचान करके उन्हें रोका जा सकेगा। कंपनी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के साथ मिलकर इस बदलाव को अपने सिस्टम में शामिल कर रही है।

    2025 में पायलट प्रोजेक्ट
    बता दें कि अक्टूबर 2025 में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अपनी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स विंग BIS के जरिए, 25 जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसका मकसद ज्वेलरी की डिटेल्स को डिजिटली रिकॉर्ड करना था। BIS ने इंटीग्रेटेड कैमरों और वजन करने वाले सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने पोर्टल पर हर हॉलमार्क वाली ज्वेलरी आइटम की फोटो और वजन रिकॉर्ड किया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी।

    हॉलमार्किंग की शुरुआत साल 2000 में हुई थी और 2021 से इसे अलग-अलग चरणों में अनिवार्य कर दिया गया, जो अब लगभग 400 जिलों तक पहुंच चुका है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, तब से अब तक 580 मिलियन से ज़्यादा सोने की चीजों पर हॉलमार्क लगाया जा चुका है, जिसका औसत हर महीने 10 मिलियन से ज्यादा है।

  • पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें

    पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price Today) में आज फिर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर के रेट से बिक रहा है। वहीं, डीजल का रेट दिल्ली में आज शनिवार को 87.67 रुपये प्रति लीटर है। बता दें, दुनिया भर में इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में जारी तेजी की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, घरेलू स्तर पर भारत सरकार ने आम-आदमी को अबतक इससे बचा कर रखा है।


    पाकिस्तान में 458 रुपये प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल

    पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ाने की घोषणा की। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में क्रमश: 43 प्रतिशत और 55 प्रतिशत की भारी बढोतरी की है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये से 137.23 रुपये प्रति लीटर (करीब 42.7 प्रतिशत) बढ़ाकर 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। वहीं, हाई स्पीड डीजल की कीमत 335.86 रुपये से 184.49 रुपये प्रति लीटर (करीब 55 प्रतिशत) बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इसके साथ, केरोसिन तेल की कीमत भी 34.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 457.80 रुपये कर दी गई है।


    देश के अलग-अलग शहरों में किस रेट पर बिक रहा पेट्रोल (Petrol Rate)

    दिल्ली – 94.77 रुपये
    मुंबई – 104.21 रुपये
    कोलकाता – 103.94 रुपये
    चेन्नई – 100.75 रुपये
    अहमदाबाद – 94.49 रुपये
    बेंगलुरू – 102.92 रुपये
    हैदराबाद – 107.46 रुपये
    जयपुर – 104.72 रुपये
    लखनऊ – 94.69 रुपये
    पुणे – 104.04 रुपये
    चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
    इंदौर – 106.48 रुपये


    डीजल का क्या है अलग-अलग शहरों में रेट (Diesel Rate)

    मुंबई – 92.15 रुपये
    कोलकाता – 90.76 रुपये
    चेन्नई – 92.34 रुपये
    अहमदाबाद – 90.17 रुपये
    बेंगलुरू – 89.02 रुपये
    हैदराबाद – 95.70 रुपये
    जयपुर – 90.21 रुपये
    लखनऊ – 87.80 रुपये
    पुणे – 90.57 रुपये
    चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
    इंदौर – 91.88 रुपये
    पटना – 93.80 रुपये

    पिछले दिनों प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इंडियन ऑयल ने इजाफा किया था। जिसके बाद दिल्ली में XP100 पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल का रेट 91.49 रुपये से 92.99 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

  • ईरान-US युद्ध का असर, आम उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान

    ईरान-US युद्ध का असर, आम उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान

    नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिख रहा है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम डबल हो गए हैं। इसके बावजूद भारत में रिटेल कीमतें स्थिर हैं, जिससे तेल कंपनियों की सेहत पर दबाव बढ़ गया है।

    3 अप्रैल सुबह 6 बजे के रेट के अनुसार दिल्ली में इंडियन ऑयल के पंप पर साधारण पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर बिक रहा है। XP95 पेट्रोल ₹101.89 और XG डीजल ₹91.49 प्रति लीटर की दर पर उपलब्ध हैं।

    कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

    पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, फिलहाल पेट्रोल पर कंपनियों को प्रति लीटर लगभग ₹24 और डीजल पर करीब ₹104 का नुकसान हो रहा है। इस अंतर को “अंडर-रिकवरी” कहा जाता है, जिसे कंपनियां अपने मुनाफे से पूरा कर रही हैं।

    सरकार ने क्यों नहीं बढ़ाए दाम?
    उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की और तेल कंपनियों को भी कीमतें स्थिर रखने का भार दिया। युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर के पार जा चुकी हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।

    सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित

    देशभर में फ्यूल सप्लाई सामान्य है। सरकार ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल और अन्य उपोत्पादों की कमी नहीं है।

    वैश्विक पेट्रोल-डीजल दामों में भारी उछाल

    पेट्रोल – म्यांमार 100%, फिलीपींस 71.6%, मलेशिया 52.4%, ऑस्ट्रेलिया 46.5%, UAE 40.8%
    डीजल – म्यांमार 119.9%, लाओस 117.5%, फिलीपींस 111%, कंबोडिया 92%, वियतनाम 91.3%, UAE 86.1%

  • भारतीय रिफाइनिंरियों ने तेल संकट के बीच किया इस देश का रुख… आयात के सारे रिकॉर्ड तोड़े

    भारतीय रिफाइनिंरियों ने तेल संकट के बीच किया इस देश का रुख… आयात के सारे रिकॉर्ड तोड़े


    काराकास।
    भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां (Indian Refining Companies) अब वेनेजुएला (Venezuela) के कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदार बनकर उभर रही हैं। अमेरिका द्वारा इस लैटिन अमेरिकी देश की तेल बिक्री पर नियंत्रण लगाने के बाद, अब तक के सबसे बड़े आयातक चीन ने अपनी खरीदारी कम कर दी है। चीन के पीछे हटने से जो खाली जगह बनी उसे अब भारत तेजी से भर रहा है।

    मार्च के आंकड़ों में भारी उछाल
    ब्लूमबर्ग और समुद्री खुफिया फर्म ‘केप्लर लिमिटेड’ (Kpler Ltd) द्वारा जुटाए गए शिपिंग डेटा के अनुसार, मार्च महीने में भारत को भेजे गए तेल के शिपमेंट में चार गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस भारी उछाल के साथ भारत ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में वेनेजुएला का देशव्यापी तेल निर्यात 890,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जो दिसंबर 2019 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।


    उत्पादन बढ़ने का मुख्य कारण: ‘डाइल्यूएंट्स’ का आयात

    वेनेजुएला के कच्चे तेल के उत्पादन और प्रवाह में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका मुख्य श्रेय आयातित ‘डाइल्यूएंट्स’ (Diluents) को जाता है। डाइल्यूएंट्स क्या हैं? ये खास तरह के रासायनिक योजक होते हैं जिनका इस्तेमाल वेनेजुएला के भारी और गाढ़े (तारकोल जैसे) कच्चे तेल को पतला करने के लिए किया जाता है, ताकि इसे पाइपलाइनों के माध्यम से आसानी से बहाया जा सके। मार्च में डाइल्यूएंट्स के आयात में वृद्धि देखी गई। फरवरी के 7 कार्गो के मुकाबले मार्च में 9 कार्गो आयात किए गए।


    प्रमुख कंपनियां

    इन डाइल्यूएंट्स का आयात मुख्य रूप से कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनियों विटोल ग्रुप और ट्राफिगुरा ग्रुप द्वारा किया गया। ध्यान रहे, ट्रंप प्रशासन ने इन कंपनियों को देश का तेल बेचने में मदद करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके अलावा, शेवरॉन कॉर्प भी इसमें शामिल है, जिसके पास वेनेजुएला के कच्चे तेल का उत्पादन और बिक्री करने का विशेष लाइसेंस है।


    भारतीय तेल कंपनियों की खरीदारी और रणनीति

    भारत की प्रमुख सरकारी और निजी तेल रिफाइनरियों ने मिलकर मार्च लोडिंग के लिए 343,000 बैरल प्रतिदिन की दर से तेल खरीदा है। इनमें शामिल प्रमुख भारतीय कंपनियां हैं-
    – रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड
    – हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL)
    – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL)

    मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है। इस व्यवधान से बचने और अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय कंपनियां वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति का यह विकल्प आगे भी जारी रख सकती हैं। ट्रेडिंग कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल को सुरक्षित रखने के लिए कैरेबियन क्षेत्र के स्टोरेज टैंकों में भेजना जारी रखा है। इस साल अब तक लगभग 1.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल बहामास, कुराकाओ और सेंट लूसिया ले जाया गया है। अब इन भंडारों से तेल धीरे-धीरे बाहर आना शुरू हो गया है। हाल ही में ‘पीबीएफ एनर्जी’ ने बहामास से एक कार्गो उठाया है। मार्च में, ‘एसएफएल टाइगर’ नामक एक समुद्री जहाज ने कुराकाओ से तेल लोड किया है और ट्रैकिंग सिग्नल्स के अनुसार इसका अंतिम गंतव्य इटली है।

  • भारतीय रुपया रिकॉर्ड तेजी के साथ 93.10 डॉलर पर बंद, 13 साल का रुझान बदलता नजर

    भारतीय रुपया रिकॉर्ड तेजी के साथ 93.10 डॉलर पर बंद, 13 साल का रुझान बदलता नजर


    नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गुरुवार को 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली और इसके चलते अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 93.10 के स्तर पर बंद हुआ।

    डॉलर के मुकाबले रुपए में तेजी की वजह आरबीआई द्वारा भारतीय मुद्रा में सट्टेबाजी को कम करने के लिए कदम उठाना है।

    हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए में तेज गिरावट को रोकने के लिए घरेलू और विदेशी मार्केट्स में नियमों को सख्त किया है।

    एक विश्लेषक ने कहा,“अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के बाद रिस्क सेंटीमेंट में सुधार के कारण रुपए में तेजी आई। उनके भाषण ने तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत का संकेत दिया गया, जिससे बाजार में तेजी आई। हालांकि, अनिश्चितता का स्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जिससे मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।”

    तीन दिन की छुट्टी के बाद कारोबार फिर से शुरू होने पर रुपया दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत तक बढ़कर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपए की सबसे मजबूत वृद्धि है।

    केंद्रीय बैंक ने हाल ही में बैंकों को निवासी और अनिवासी दोनों ग्राहकों को रुपए के नॉन-डिलीवरी वाले फॉरवर्ड जारी करने से रोक दिया है, और कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को पुनः बुक करने से भी प्रतिबंधित कर दिया है।

    इससे पहले उठाए गए कदमों में बैंकों की रुपए में नेट ओपन पॉजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित करना और संबंधित पक्षों के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर रोक लगाना शामिल था।

    इन कदमों का उद्देश्य मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को कम करना और रुपए को स्थिर करना है।

    विश्लेषकों ने कहा कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, जो 700 अरब डॉलर से अधिक है, अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है और केंद्रीय बैंक को जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की गुंजाइश देता है।

    वैश्विक बाजार के कमजोर संकेतों के बावजूद रुपए में उछाल आया। आज एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी जैसे प्रमुख सूचकांक 3 प्रतिशत तक गिर गए।

    इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया, जिससे वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ गई। ब्रेंट क्रूड वायदा 5.24 प्रतिशत बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई वायदा 4.5 प्रतिशत बढ़कर 104.64 डॉलर हो गया।

    महावीर जयंती और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत की छुट्टियों के कारण इस सप्ताह की शुरुआत में मुद्रा बाजार बंद रहे थे और यह गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को भी बंद रहेंगे।

  • कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, Labour Codes के तहत कंपनी को करना होगा फास्ट सेटलमेंट

    कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, Labour Codes के तहत कंपनी को करना होगा फास्ट सेटलमेंट


    नई दिल्ली।  1 अप्रैल 2026 से नौकरी छोड़ने या निकाले जाने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव (Labour Codes) लागू हो गया है। अब कंपनियों को कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF) सिर्फ 2 दिनों के भीतर करना होगा। पहले यह प्रक्रिया कई कंपनियों में हफ्तों या महीनों तक लंबित रहती थी, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था।

    2 दिन में मिलेगा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट
    नए लेबर कोड के तहत अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि कर्मचारी के इस्तीफा देने या नौकरी से हटाए जाने के 48 घंटे के अंदर ही सभी बकाया भुगतान निपटा दिए जाएं। इसमें सैलरी, बोनस, लीव एनकैशमेंट और अन्य देनदारियां शामिल होंगी।

    इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों को तुरंत आर्थिक राहत देना और कंपनियों द्वारा सेटलमेंट में देरी की समस्या को खत्म करना है। पहले अलग-अलग कंपनियों में अलग नियम होने के कारण कर्मचारियों को लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब इस प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाया गया है।

    अपडेटेड Labour Codes आने से कर्मचारियों को क्या होगा फायदा
    इस नए नियम से नौकरी बदलने वाले या अचानक नौकरी जाने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें तुरंत पैसा मिलने से वे अपनी आर्थिक जरूरतें आसानी से पूरी कर सकेंगे। इसके अलावा, यह नियम कंपनियों पर भी जवाबदेही तय करता है, जिससे वे कर्मचारियों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगी। इससे एम्प्लॉयर-एम्प्लॉयी संबंधों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा।

    कंपनियों के लिए सख्त निर्देश
    सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम का पालन न करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है। यह बदलाव नए लेबर कोड का हिस्सा है, जिसका मकसद कामकाजी माहौल को बेहतर बनाना और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना है। कुल मिलाकर, यह नया नियम नौकरी छोड़ने के बाद होने वाली लंबी और जटिल प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • भारती एयरटेल 650 मिलियन यूजर्स के साथ बनी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी

    भारती एयरटेल 650 मिलियन यूजर्स के साथ बनी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी

    नई दिल्ली। भारती एयरटेल ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने दुनिया भर में 650 मिलियन (65 करोड़) ग्राहकों का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ कंपनी सब्सक्राइबर बेस के हिसाब से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर बन गई है।

    मजबूत वैश्विक उपस्थिति

    सुनील भारती मित्तल के नेतृत्व में एयरटेल ने भारत और अफ्रीका में मजबूत पकड़ बनाई है। जीएसएमए इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, अकेले भारत में ही एयरटेल के 368 मिलियन से ज्यादा मोबाइल यूजर्स हैं। इसके अलावा, 13 मिलियन घर फिक्स्ड ब्रॉडबैंड से जुड़े हैं और 15 मिलियन ग्राहक डिजिटल टीवी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। अफ्रीका में एयरटेल की सहायक कंपनी 14 देशों में 179 मिलियन ग्राहकों को हाई-स्पीड डेटा, वॉयस और मोबाइल मनी जैसी सेवाएं देती है। यहां 52 मिलियन से ज्यादा यूजर्स कंपनी के फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।

    भारत में स्थिति और प्रतिस्पर्धा

    भारत में एयरटेल अभी भी दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, क्योंकि रिलायंस जियो ने पिछले साल 500 मिलियन से अधिक यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि जियो की सेवाएं केवल भारत तक सीमित हैं।

    प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं

    एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने कहा कि 650 मिलियन ग्राहकों तक पहुंचना बड़ी जिम्मेदारी है। कंपनी नवाचार और भरोसेमंद सेवाओं के जरिए ग्राहक अनुभव बेहतर बनाने पर ध्यान देगी और टेलीकॉम इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।

    तकनीकी विकास और संभावनाएं

    एयरटेल भारत में शुरुआती 5जी सेवाओं में शामिल रही है। कोटक इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 से 2026 के बीच एयरटेल का सब्सक्राइबर बेस औसतन 2.9 प्रतिशत सालाना बढ़ा है। डेटा यूजर्स 9.7 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं, जिससे दिखता है कि अधिक मूल्य वाले ग्राहक तेजी से जुड़ रहे हैं।

    कंपनी के करीब 20 प्रतिशत यूजर्स अभी भी 2जी और 3जी नेटवर्क पर हैं, जो एयरटेल के लिए उन्हें 4जी और 5जी नेटवर्क में अपग्रेड करने का बड़ा अवसर पेश करता है। ग्रामीण क्षेत्रों और मोबाइल ब्रॉडबैंड में भी कंपनी के पास विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।


  • गिफ्ट निफ्टी का रिकॉर्ड मार्च: अब तक का सबसे अधिक 129.80 अरब डॉलर टर्नओवर

    गिफ्ट निफ्टी का रिकॉर्ड मार्च: अब तक का सबसे अधिक 129.80 अरब डॉलर टर्नओवर


    नई दिल्ली। गिफ्ट निफ्टी ने मार्च 2026 में अपना अब तक का सबसे बड़ा मासिक टर्नओवर 129.80 अरब डॉलर दर्ज किया है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में सबसे अधिक टर्नओवर 106.22 अरब डॉलर था। यह जानकारी एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज (आईएक्स) ने गुरुवार को साझा की।

    मासिक और दैनिक वॉल्यूम में भी रिकॉर्ड
    मार्च में गिफ्ट निफ्टी का मासिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 28 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स पर पहुंच गया, जो अप्रैल 2025 में बने 21 लाख कॉन्ट्रैक्ट्स के पिछले उच्चतम स्तर को पार कर गया। फरवरी 2026 में गिफ्ट निफ्टी ने 4,57,989 कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ अब तक का सबसे अधिक एक दिवसीय ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्ज किया था, जिसका कारोबार 23.48 अरब डॉलर था। यह जनवरी 2024 के 22.88 अरब डॉलर के रिकॉर्ड से भी अधिक है।

    संचयी व्यापार और तेज वृद्धि
    3 जुलाई 2023 को पूर्ण परिचालन शुरू होने के बाद, मार्च 2026 तक गिफ्ट निफ्टी पर डेरिवेटिव्स का संचयी व्यापार वॉल्यूम 63.37 मिलियन कॉन्ट्रैक्ट्स से अधिक रहा, जबकि कुल कारोबार 2.92 ट्रिलियन डॉलर रहा। फरवरी 2026 तक यह संचयी वॉल्यूम 60.05 मिलियन कॉन्ट्रैक्ट्स और कारोबार 2.76 ट्रिलियन डॉलर था, जो वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में तेज वृद्धि का संकेत देता है।

    एनएसईआईएक्स का बाजार प्रभुत्व
    एनएसईआईएक्स, जिसका गिफ्ट सिटी स्थित अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों में 99.7 प्रतिशत से अधिक बाजार हिस्सा है, 5 जून 2017 को स्थापित हुआ और इसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) द्वारा मान्यता प्राप्त है।

    विविध उत्पाद पोर्टफोलियो
    गिफ्ट निफ्टी भारतीय सिंगल स्टॉक डेरिवेटिव्स, इंडेक्स डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और डिपॉजिटरी रिसीट्स के साथ-साथ इक्विटी शेयर, आरईआईटी, इनविट्स और ईएसजी डेट सिक्योरिटीज जैसे प्राथमिक बाजार उत्पाद भी उपलब्ध कराता है। ये सभी आईएफएससीए लिस्टिंग विनियम, 2024 के तहत एक्सचेंज पर उपलब्ध हैं।