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  • शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में लंबी अवधि तक धैर्य और समझदारी के साथ किया गया निवेश कई लोगों को बड़ी आर्थिक सफलता दिलाता है। वर्षों तक निवेश बनाए रखने के बाद जब निवेशक अपने शेयर बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ कमाते हैं, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती टैक्स की होती है। आमतौर पर बड़ी कमाई के साथ भारी टैक्स देनदारी भी जुड़ जाती है, लेकिन आयकर नियमों में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनका सही तरीके से उपयोग करके इस टैक्स बोझ को काफी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में निवेशक टैक्स प्लानिंग के कानूनी विकल्पों की ओर ध्यान दे रहे हैं।

    हाल के समय में एक ऐसी व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है जिसके तहत शेयर बाजार से हुई लंबी अवधि की कमाई पर लगने वाले टैक्स को कम करने या कुछ परिस्थितियों में शून्य तक लाने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्होंने लंबे समय तक शेयरों या इक्विटी आधारित निवेश को होल्ड करने के बाद बड़ा लाभ अर्जित किया है। हालांकि इस लाभ का फायदा सभी लोगों को स्वतः नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है।

    नियमों के अनुसार यदि कोई निवेशक अपनी शेयर बिक्री से प्राप्त राशि को निर्धारित समय सीमा के भीतर एक रिहायशी संपत्ति में निवेश करता है, तो उसे टैक्स में राहत मिलने की संभावना बनती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को केवल टैक्स छूट देना नहीं बल्कि पूंजी को उत्पादक और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों की ओर बढ़ावा देना भी माना जाता है। यही कारण है कि निवेश और संपत्ति निर्माण को एक साथ जोड़कर देखने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

    हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना भी जरूरी है कि केवल करोड़ों रुपये की कमाई होने भर से टैक्स स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। इसके लिए निवेशक को समय सीमा, निवेश राशि और पात्रता से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता या प्रक्रिया में चूक करता है, तो उसे टैक्स राहत का लाभ नहीं मिल सकता। कुछ मामलों में छूट वापस भी ली जा सकती है और अतिरिक्त देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े निवेश निर्णय केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि टैक्स प्रबंधन को भी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाना चाहिए। कई निवेशक केवल रिटर्न पर ध्यान देते हैं और टैक्स प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण अंतिम लाभ उम्मीद से काफी कम हो सकता है। इसलिए निवेश के साथ कानूनी और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी रखना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

    बदलते निवेश माहौल में अब केवल पैसा कमाना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि उसे समझदारी से संरक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। सही योजना, समय पर निर्णय और नियमों की स्पष्ट जानकारी के साथ निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि अब निवेश जगत में टैक्स प्लानिंग को आर्थिक सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

  • UPI यूजर्स सावधान! पुरानी ID से हो सकती है साइबर ठगी, जानें बचाव के तरीके

    UPI यूजर्स सावधान! पुरानी ID से हो सकती है साइबर ठगी, जानें बचाव के तरीके


    नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते दौर में UPI जहां लोगों की जिंदगी आसान बना रहा है, वहीं साइबर ठगी के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक नया खतरा सामने रखा है—पुरानी या निष्क्रिय UPI ID, जो अब ठगों के लिए आसान निशाना बन सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग मोबाइल नंबर बदलने के बाद भी अपनी पुरानी UPI ID को अपडेट या बंद नहीं करते। यही लापरवाही बाद में बड़ा जोखिम बन सकती है। कई बार पुराना मोबाइल नंबर किसी दूसरे व्यक्ति को अलॉट कर दिया जाता है, और ऐसी स्थिति में उस नंबर से जुड़ी UPI ID का गलत इस्तेमाल होने की संभावना बढ़ जाती है। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश करते हैं और यूजर के खाते तक पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे बैंक अकाउंट खाली होने जैसे गंभीर मामले सामने आ सकते हैं।

    एक्सपर्ट्स की अहम सलाह
    साइबर विशेषज्ञों ने यूजर्स को सलाह दी है कि अगर आपने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है, तो तुरंत बैंक और UPI ऐप में नई जानकारी अपडेट करें। इसके साथ ही पुरानी UPI ID को निष्क्रिय या डिलीट करना भी जरूरी है। इसके अलावा, समय-समय पर अपने बैंक अकाउंट और UPI ट्रांजैक्शन की जांच करना भी बेहद जरूरी माना गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता चल सके।

    डिजिटल सुरक्षा के जरूरी टिप्स
    विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, QR कोड या कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। OTP, UPI PIN या बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा करने से बचना चाहिए। अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन में शिकायत करनी चाहिए।

    रिपोर्ट्स के अनुसार NPCI और बैंक समय-समय पर निष्क्रिय UPI IDs को बंद करने की प्रक्रिया अपनाते हैं, लेकिन यूजर्स की सतर्कता सबसे अहम सुरक्षा कवच है।

    डिजिटल लेनदेन की सुविधा जितनी आसान है, उतना ही जरूरी है उससे जुड़ी सावधानियों को अपनाना—क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बड़ा वित्तीय नुकसान करा सकती है।

  • आधार कार्ड अपडेट करने का सुनहरा मौका, अब ज्यादा समय तक मिलेगा फ्री सर्विस

    आधार कार्ड अपडेट करने का सुनहरा मौका, अब ज्यादा समय तक मिलेगा फ्री सर्विस


    नई दिल्ली। आधार कार्ड धारकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार अपडेट से जुड़ी मुफ्त ऑनलाइन सुविधा की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया है। अब नागरिक 14 जून 2026 तक बिना किसी शुल्क के अपना आधार अपडेट कर सकते हैं।

    UIDAI के अनुसार यह सुविधा केवल myAadhaar पोर्टल पर उपलब्ध होगी, जहां यूजर्स अपने पहचान पत्र (Proof of Identity) और पते के प्रमाण (Proof of Address) जैसे जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है, जिससे लोगों को आधार सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    हालांकि UIDAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह मुफ्त सुविधा सिर्फ ऑनलाइन अपडेट के लिए है। अगर कोई व्यक्ति आधार सेवा केंद्र पर जाकर जानकारी अपडेट कराता है तो उसे निर्धारित शुल्क देना होगा।

    UIDAI ने उन लोगों को खास तौर पर आधार अपडेट करने की सलाह दी है, जिनका आधार 10 साल या उससे अधिक पुराना है और अब तक अपडेट नहीं हुआ है। इससे डेटा की शुद्धता बनी रहती है और सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती।

    ऐसे करें ऑनलाइन आधार अपडेट
    आधार अपडेट की प्रक्रिया बेहद आसान है। इसके लिए यूजर्स को सबसे पहले myAadhaar पोर्टल पर जाना होगा। वहां अपने आधार नंबर और OTP की मदद से लॉगिन करना होता है। इसके बाद “Document Update” विकल्प चुनकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं और फॉर्म सबमिट कर दिया जाता है। सबमिट करने के बाद यूजर को एक SRN (Service Request Number) मिलता है, जिसकी मदद से वह अपने अपडेट का स्टेटस ट्रैक कर सकता है।

    UIDAI ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने आधार दस्तावेज अपडेट कर लें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

  • स्पेसएक्स IPO से इतिहास रच सकते हैं एलन मस्क, दुनिया के पहले खरबपति बनने की ओर बढ़े कदम

    स्पेसएक्स IPO से इतिहास रच सकते हैं एलन मस्क, दुनिया के पहले खरबपति बनने की ओर बढ़े कदम

    वॉशिंगटन। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क अब एक और बड़ा इतिहास रचने की तैयारी में हैं। उनकी अंतरिक्ष और सैटेलाइट कंपनी SpaceX जल्द ही शेयर बाजार में उतर सकती है। माना जा रहा है कि यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है और इसके बाद मस्क दुनिया के पहले खरबपति बनने के करीब पहुंच जाएंगे।

    24 साल बाद शेयर बाजार में उतरने की तैयारी
    स्पेसएक्स ने करीब 24 वर्षों तक निजी कंपनी बने रहने के बाद अब अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने नास्देक टेक्सास पर “SPCX” टिकर के तहत लिस्टिंग के लिए आवेदन किया है और अमेरिकी नियामक SEC के पास जरूरी दस्तावेज भी जमा करा दिए हैं। हालांकि आईपीओ के बाद भी कंपनी पर एलन मस्क का नियंत्रण बना रहेगा।

    रिकॉर्ड तोड़ सकता है IPO
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेसएक्स इस आईपीओ के जरिए लगभग 75 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा।

    इससे पहले सऊदी अरामको ने 2019 में 29.4 अरब डॉलर जुटाए थे। अलीबाबा ग्रुप ने 2014 में 22 अरब डॉलर का आईपीओ लाया था स्पेसएक्स की संभावित वैल्यू 1.75 से 2 ट्रिलियन डॉलर के बीच आंकी जा रही है, जो कई देशों के पूरे शेयर बाजार से भी बड़ी मानी जा रही है।

    स्टारलिंक बना कमाई का बड़ा स्रोत
    कंपनी के दस्तावेजों के अनुसार, Starlink इंटरनेट सेवा स्पेसएक्स की कमाई का प्रमुख आधार बन चुकी है। 2025 में कंपनी का अनुमानित राजस्व करीब 18.7 अरब डॉलर बताया गया है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का मूल्यांकन काफी ऊंचा है, लेकिन निवेशकों के बीच इसे भविष्य की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में देखा जा रहा है।

    ऐसे बन सकते हैं पहले खरबपति
    स्पेसएक्स में एलन मस्क की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत बताई जाती है। यदि कंपनी की वैल्यू 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचती है, तो सिर्फ स्पेसएक्स में उनकी हिस्सेदारी का मूल्य 735 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। इसके अलावा Tesla, xAI और अन्य कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी जोड़ने पर मस्क की कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 1 खरब डॉलर के पार जा सकती है। ऐसा होने पर वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन जाएंगे।

  • बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने दिखाई समझदारी, अप्रैल में शेयर बाजार में आया भारी निवेश

    बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने दिखाई समझदारी, अप्रैल में शेयर बाजार में आया भारी निवेश

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल महीने के दौरान निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में बाजार में निवेश का स्तर मार्च की तुलना में काफी बेहतर रहा। खास बात यह रही कि निवेशकों ने इस दौरान एसआईपी के जरिए सबसे अधिक भरोसा लार्ज कैप कंपनियों पर जताया। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों ने अनुशासित निवेश रणनीति अपनाते हुए बड़े और मजबूत शेयरों की ओर रुख किया।

    रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में भारतीय शेयर बाजार में कुल 73,639 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले काफी अधिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों का झुकाव अब जोखिम कम करने और स्थिर रिटर्न पाने की दिशा में बढ़ रहा है। यही वजह है कि लार्ज कैप कंपनियों में निवेश लगातार बना हुआ है। हालांकि इन फंड्स के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई, लेकिन फिर भी निवेशकों का भरोसा इन पर कायम रहा।

    निवेशकों ने इस दौरान खासतौर पर पीएसयू और बीएफएसआई सेक्टर के वैल्यू स्टॉक्स में दिलचस्पी दिखाई। बैंकिंग, फाइनेंस और सरकारी कंपनियों से जुड़े शेयरों में निवेश बढ़ने से यह साफ संकेत मिला कि निवेशक अब सुरक्षित और स्थिर सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों से निवेशकों ने दूरी बनाए रखी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टेक शेयरों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक दबाव के कारण निवेशकों ने फिलहाल सावधानी बरतना बेहतर समझा।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारतीय निवेशकों की एसआईपी संस्कृति पहले से अधिक परिपक्व होती जा रही है। बाजार में कमजोरी और गिरावट के बावजूद निवेशकों ने नियमित निवेश जारी रखा। यह संकेत देता है कि अब लोग अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि कमजोर प्रदर्शन वाले फंड्स में भी एसआईपी निवेश जारी रहा।

    अप्रैल महीने में इक्विटी निवेश रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। जहां पहले भारी निकासी हो रही थी, वहीं अब निवेश दोबारा तेजी से लौटता दिखाई दिया। विशेष रूप से आर्बिट्राज फंड्स में निवेश का स्तर काफी बढ़ा। माना जा रहा है कि संस्थागत निवेशकों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए इन फंड्स में अधिक रुचि दिखाई।

    इसके अलावा फैक्टर आधारित निवेश श्रेणियों में ‘ग्रोथ’ कैटेगरी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में सकारात्मक रिटर्न दर्ज किए गए और नए निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी। वहीं फोकस्ड फंड्स में निवेशकों की रुचि घटती नजर आई और इस श्रेणी में निकासी दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक व्यापक बाजार पूरी तरह मजबूत स्थिति में नहीं लौटता, तब तक निवेशक आक्रामक निवेश की बजाय संतुलित और अनुशासित रणनीति अपनाते रहेंगे। अप्रैल के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक और धैर्यवान हो चुके हैं। यही परिपक्वता आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार को और अधिक स्थिरता प्रदान कर सकती है।

  • भारत बना भरोसेमंद ग्लोबल पार्टनर, युवाओं की ताकत और टेक्नोलॉजी से दुनिया प्रभावित: पीएम मोदी

    भारत बना भरोसेमंद ग्लोबल पार्टनर, युवाओं की ताकत और टेक्नोलॉजी से दुनिया प्रभावित: पीएम मोदी


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को 19वें रोजगार मेले के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में चयनित युवाओं को 51 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में उभर रहा है और दुनिया भारत की युवा शक्ति तथा तकनीकी क्षमता को लेकर बेहद उत्साहित है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनना चाहती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है और इसका सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास नए रोजगार और अवसरों के द्वार खोल रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने हालिया विदेश दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न देशों के नेताओं और वैश्विक कंपनियों के साथ हुई चर्चाओं में भारत के प्रति गहरा भरोसा देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा, उनकी क्षमता और देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया में सकारात्मक माहौल बना है।

    उन्होंने बताया कि नीदरलैंड के साथ सेमीकंडक्टर, कृषि और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है। वहीं स्वीडन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में साझेदारी पर सहमति बनी है। इसके अलावा नॉर्वे के साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी और मैरीटाइम सेक्टर में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है।

    यूएई और इटली जैसे देशों के साथ ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां सीधे तौर पर भारत के युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए अवसर पैदा करेंगी।

    उन्होंने सेमीकंडक्टर सेक्टर का उदाहरण देते हुए बताया कि वैश्विक स्तर की कंपनियां भारत की कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, जिससे देश में नई तकनीक और रोजगार दोनों का विस्तार हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों में क्लीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे और भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभाएगा।

    रोजगार मेले को लेकर उन्होंने कहा कि यह पहल देश में रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तक आयोजित 18 रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। 19वें रोजगार मेले का आयोजन देशभर के 47 स्थानों पर किया गया, जिसमें चयनित उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सेवाएं प्रदान करने का अवसर मिलेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक ऐसा देश बन रहा है जो वैश्विक विकास का प्रमुख आधार बन सकता है। उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत की प्रगति में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।

  • 10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी: CNG 81 रुपये के पार, पेट्रोल-डीजल भी हुआ महंगा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर

    10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी: CNG 81 रुपये के पार, पेट्रोल-डीजल भी हुआ महंगा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली और एनसीआर में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। शनिवार को सीएनजी के दामों में 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद नई कीमत 81 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है। यह पिछले कुछ दिनों में तीसरी बार है जब सीएनजी के रेट में बदलाव किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सीधा असर देखने को मिल रहा है।

    Indraprastha Gas Limited के अनुसार दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 80.09 रुपये से बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कीमतें और अधिक बढ़कर करीब 89.70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। गुरुग्राम में भी सीएनजी के दाम 86 रुपये से अधिक हो गए हैं।

    पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में यह तीसरी बार बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को 2 रुपये और 17 मई को 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार हो रही इस वृद्धि ने ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहनों के संचालन पर दबाव बढ़ा दिया है।

    सीएनजी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल में करीब 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब लगभग 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

    इस बढ़ोतरी का असर देश के अन्य बड़े शहरों में भी देखने को मिला है, जहां कोलकाता और मुंबई में भी ईंधन के दाम बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की संभावना है, जिसका असर अंततः रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद कीमतों को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।

  • भोपाल से स्विट्जरलैंड तक पहुंची फ्लेवर्ड आइस्ड टी, एमएसएमई की वैश्विक पहचान पर सरकार ने जताई खुशी

    भोपाल से स्विट्जरलैंड तक पहुंची फ्लेवर्ड आइस्ड टी, एमएसएमई की वैश्विक पहचान पर सरकार ने जताई खुशी

    मध्य प्रदेश /भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से तैयार की गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली खेप यूरोप के प्रमुख देश Switzerland के लिए निर्यात की गई है। यह कदम न केवल भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को भी मजबूत करता है। इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा है कि भारतीय एमएसएमई अब वैश्विक मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और लगातार नए बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार यह निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से संभव हुआ है, जिसने मध्य प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इस पहल को भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाता है बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में भी मदद करता है।

    इस अवसर पर यह भी बताया गया कि पिछले एक दशक में भारत के चाय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश के पारंपरिक उत्पादों की वैश्विक मांग और स्वीकार्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि भारतीय चाय और उससे जुड़े उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाई है, जिसका श्रेय बेहतर गुणवत्ता, विविधता और निरंतर सुधार को जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेवर्ड आइस्ड टी जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद भारत के निर्यात क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। इससे न केवल किसानों और छोटे उत्पादकों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह कदम “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों को भी मजबूती देता है, जिनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

    आने वाले समय में ऐसे और उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और निर्यात हिस्सेदारी दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह उपलब्धि देश के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि भारतीय उत्पाद अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक उपभोक्ताओं की पसंद भी बन रहे हैं।

  • पेट्रोल-डीजल सप्लाई पर बड़ा बयान, देशभर में पर्याप्त स्टॉक मौजूद: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन

    पेट्रोल-डीजल सप्लाई पर बड़ा बयान, देशभर में पर्याप्त स्टॉक मौजूद: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन

    नई दिल्ली ।  कंपनी के अनुसार देशभर में उसके नेटवर्क के तहत हजारों पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और केवल कुछ ही आउटलेट्स पर अस्थायी बाधा देखी गई है। Indian Oil Corporation ने यह भी कहा कि वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जहां भी समस्या सामने आ रही है, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    जानकारी के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ इलाकों में डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण कृषि क्षेत्र में फसल कटाई का मौसम बताया जा रहा है। इसके साथ ही कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर कीमतें अधिक होने के कारण उपभोक्ता सरकारी पंपों की ओर अधिक संख्या में जा रहे हैं, जिससे कुछ स्थानों पर अस्थायी दबाव की स्थिति बन गई है। इसके अलावा संस्थागत खरीद में वृद्धि ने भी कुछ क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

    कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की राष्ट्रीय स्तर की कमी की स्थिति नहीं है। मौजूदा चुनौतियां केवल वितरण और मांग के स्थानीय बदलाव से जुड़ी हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए तेल विपणन कंपनियां लगातार सक्रिय हैं।

    इसी बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि Indian Oil Corporation ने यह भरोसा दिलाया है कि वह देशभर में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कुल मिलाकर कंपनी का संदेश साफ है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सप्लाई व्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है।

  • आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड स्तर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। यह राशि करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़े सरप्लस ट्रांसफर में से एक माना जा रहा है। इस निर्णय से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

    नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।

    आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

    डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ।

    नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा।

    इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

    इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।