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  • इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका


    नई दिल्‍ली । यूनियन बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बजट के ऐलान के साथ ही निवेशकों की नजर अब नए निवेश अवसरों पर टिक गई है और इसी कड़ी में इस सप्ताह आईपीओ बाजार काफी सक्रिय रहने वाला है। खास बात यह है कि इस हफ्ते खुलने वाले सभी नए पब्लिक इश्यू एसएमई  SME सेगमेंट से जुड़े हुए हैं, जो छोटे और मझोले निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

    इस सप्ताह कुल तीन नए आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने जा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह हफ्ता बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सही कंपनी में निवेश कर अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं इन तीनों आईपीओ के बारे में-

    Grover Jewells IPO

    ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी Grover Jewells अपना आईपीओ 4 फरवरी को निवेशकों के लिए खोलने जा रही है। इस पब्लिक इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल 33.83 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

    Grover Jewells ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 83 से 88 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में एक लॉट 1600 शेयरों का होगा, यानी निवेशकों को न्यूनतम निवेश इसी लॉट साइज के अनुसार करना होगा। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। ज्वेलरी सेक्टर में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए यह आईपीओ आकर्षक विकल्प माना जा रहा है।

    Biopol Chemicals IPO

    केमिकल सेक्टर से जुड़ी कंपनी Biopol Chemicals अपना पब्लिक इश्यू 6 फरवरी से सब्सक्रिप्शन के लिए खोलने जा रही है। निवेशक इस आईपीओ में 10 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस इश्यू के जरिए 31.26 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। Biopol Chemicals ने आईपीओ के लिए 102 से 108 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इसमें एक लॉट 1200 शेयरों का रखा गया है। सब्सक्रिप्शन बंद होने के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 13 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर होने की संभावना है। केमिकल इंडस्ट्री में बढ़ती मांग को देखते हुए इस आईपीओ पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है।

    NFP Sampoorna Foods IPO

    फूड प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी NFP Sampoorna Foods का आईपीओ 4 फरवरी से निवेशकों के लिए ओपन हो रहा है। इस इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक अपनी बोली लगा सकते हैं। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए कुल 24.53 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

    कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 52 से 55 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में निवेश के लिए एक लॉट में 2000 शेयर शामिल किए गए हैं। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। कम प्राइस बैंड होने के कारण यह आईपीओ छोटे निवेशकों के लिए खासा आकर्षक माना जा रहा है।

    निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह सप्ताह

    बजट 2026 के बाद बाजार में बने सकारात्मक माहौल के बीच इन तीनों एसएमई आईपीओ को निवेश के नए अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, एसएमई आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं का आकलन करना जरूरी होता है।गौरतलब है कि यह सप्ताह उन निवेशकों के लिए खास हो सकता है जो बजट के बाद उभरते अवसरों का फायदा उठाना चाहते हैं और एसएमई सेगमेंट में निवेश करने में रुचि रखते हैं।

  • मारुति सुजुकी ने कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से कारों के दाम में बढ़ोतरी के दिए संकेत

    मारुति सुजुकी ने कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से कारों के दाम में बढ़ोतरी के दिए संकेत


    नई दिल्‍ली।
    देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी (Country’s Largest Car Manufacturer) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने सोमवार को बढ़ती जिंस (कमोडिटी) की लागत को देखते हुए अपने वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

    पार्थो बनर्जी ने ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती के बाद बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है। इसके बावजूद उत्पादन संबंधी बाधाओं के कारण कंपनी के पास फिलहाल 1.75 लाख वाहनों के लंबित ऑर्डर हैं। उन्‍होंने बताया कि केवल जनवरी में ही 2.78 लाख बुकिंग मिली है। कच्चे माल की लागत बढ़ने से निकट भविष्य में कीमतें बढ़ाने की संभावना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जिंस के मोर्चे पर कीमतें बढ़ रही हैं। कीमती धातुओं में वृद्धि काफी ज्यादा है। भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए हम इस पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में कीमतों की समीक्षा जरूर करेंगे।

    बनर्जी ने कहा कि हमारा प्रयास हमेशा ग्राहकों पर लागत बढ़ोतरी का बोझ कम से कम रखने का रहा है। हमारी आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन दल इस बात पर गौर कर रहे हैं कि जिंस की वजह से बढ़ी लागत को हम कितनी हद तक खुद वहन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक सीमा के बाद अगर हम लागत बढ़ोतरी को समायोजित नहीं कर पाए, तो हमें इसका बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ेगा। संभावित कीमत बढ़ोतरी के लिए कोई समय-सीमा बताए बिना बनर्जी ने कहा कि कंपनी ने जनवरी में उन ग्राहकों के लिए ‘प्राइस प्रोटेक्शन स्कीम’ (कीमत सुरक्षाा योजना) शुरू की है, जिनकी बुकिंग के बावजूद आपूर्ति नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 सुधारों से मोटर वाहन उद्योग को जो बढ़ावा मिला है। वह केंद्रीय बजट 2026-27 में बुनियादी ढांचे में पूंजीगत व्यय बढ़ाने की घोषणा “मोटर वाहन उद्योग के लिए काफी सहायक साबित होगी।

    जनवरी की बिक्री पर बनर्जी ने कहा कि कंपनी ने अब तक की सबसे अधिक मासिक कुल बिक्री 2,36,963 इकाई दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हमें 2.78 लाख से अधिक बुकिंग मिली, जो सालाना आधार पर 25 फीसदी की वृद्धि है। हमें रोजाना करीब 9 से 10 हजार बुकिंग मिल रही है। उन्होंने बताया कि जनवरी में कंपनी का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 51,020 इकाई रहा। बनर्जी ने कहा कि कंपनी की नई एसयूवी ‘विक्टोरिस’ ने पांच महीने में 50,000 इकाई की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है।

    उत्पादन संबंधी बाधाओं पर उन्होंने कहा कि नई क्षमताएं उपलब्ध होने तक कंपनी को कुछ और महीनों तक इससे निपटना होगा। हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया का दूसरा संयंत्र अप्रैल 2026 तक परिचालन में आने वाला है। इसके बाद गुजरात स्थित मौजूदा संयंत्र में चौथी उत्पादन ‘लाइन’ शुरू की जाएगी, जिससे सालाना कुल 5 लाख इकाई की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। घरेलू बाजार में ‘ई-विटारा’ के पेश होने को लेकर उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक एसयूवी इस महीने बाजार में उतरेगी।

    यात्री वाहन उद्योग के परिदृश्य पर पूछे गए सवाल पर बनर्जी ने कहा कि मोटर वाहन उद्योग फिर से छह से सात प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) पर लौट सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में जिंस कीमतें काफी तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए इंतजार करना होगा, तभी बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा।

    कंपनी ने पिछले साल सितंबर में जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद एस-प्रेसो की कीमत में 1,29,600 रुपये तक, ऑल्टो के-10 में 1,07,600 रुपये तक, सेलेरियो में 94,100 रुपये और वैगन-आर में 79,600 रुपये तक की कटौती की थी।

  • ITC शेयर का भविष्य: 300 रुपये के स्तर पर आया भाव, तेजी या मंदी?

    ITC शेयर का भविष्य: 300 रुपये के स्तर पर आया भाव, तेजी या मंदी?


    नई दिल्ली। देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के शेयरों में जनवरी महीने में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली और यह 20 फीसदी तक टूट गया। 1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू पर लागू हुए नए टैक्स के चलते शेयरों में कमजोरी आई और 2 फरवरी को यह ₹302 के स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों के लिए यह चिंता का विषय बन गया कि अब ITC के शेयरों में और गिरावट आएगी या तेजी का दौर शुरू होगा।

    ब्रोकरेज और एक्सपर्ट का नजरिया
    घरेलू ब्रोकरेज फर्म ICICI Direct ने ITC के शेयरों पर एक साल के नजरिये से ₹350 का टारगेट प्राइस दिया है और ₹285 के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी की राय दी है। फर्म का कहना है कि बजट में ऐसा कोई एलान नहीं हुआ जो आईटीसी के बिजनेस को प्रभावित करे। सिगरेट और तंबाकू पर 55% टैक्स की घोषणा बजट से पहले की जा चुकी थी और अब इसका असर बाजार में पहले ही समाहित हो चुका है।

    इंडिपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा ने माना कि ITC के शेयरों ने निचला स्तर बना लिया है और अब तेजी की संभावना है। उनका कहना है कि लंबे समय में शेयर ₹400+ तक जा सकता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निकट अवधि में शेयर ₹325 तक जा सकता है और ₹306 रुपये पर मजबूत सपोर्ट नजर आता है।

    ITC शेयरों के लिए अहम स्तर
    टेक्निकल विश्लेषक जिगर एस पटेल के अनुसार ITC के शेयरों में निकट भविष्य में ₹325 तक तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं निचला स्तर यानी सपोर्ट ₹306 रुपये है। इस स्तर से नीचे गिरावट जोखिम भरा हो सकता है और निवेशकों को स्टॉप लॉस का ध्यान रखना चाहिए। ICICI Direct का मानना है कि 1 साल के नजरिये से ₹350 टारगेट तक पहुंचना संभव है और अंबरीश बलिगा का दीर्घकालिक टारगेट ₹400+ है।

    निवेशकों के लिए संकेत
    विशेषज्ञों के अनुसार ITC ने हाल ही में बॉटम बना लिया है। कम अवधि के निवेशक सपोर्ट और रेसिस्टेंस के स्तर पर निगरानी रखकर कदम उठा सकते हैं। लंबे समय के निवेशक बजट और टेक्स प्रावधानों के स्थिर होने की वजह से शेयर में मजबूती देख सकते हैं। बाजार में मंदी का डर कम हुआ है और तकनीकी संकेत तेजी की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। ITC का बिजनेस मॉडल एफएमसीजी सेक्टर में स्थिर है और टैक्स पहले ही शेयर मूल्य में समाहित हो चुका है। निवेशकों को चाहिए कि स्टॉप लॉस और टारगेट प्राइस के हिसाब से पोर्टफोलियो मैनेजमेंट करें और भावुक होकर फैसले न लें।

  • शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद

    शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स 943 अंकों की तेजी के साथ बंद


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार के कारोबारी सत्र में जबरदस्त तेजी दिखाई और दिन के अंत में मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 943.52 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,666.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 262.95 अंक या 1.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,088.40 पर पहुंच गया।

    बाजार में इस तेजी का नेतृत्व इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने किया। सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी इन्फ्रा 2.26 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 2.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.04 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.04 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.88 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 1.87 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए।हालांकि आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में हल्की कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी आईटी 0.47 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 546.80 अंक या 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 57,667.60 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 105.20 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,523.35 के स्तर पर पहुंच गया।सेंसेक्स के 30 शेयरों में पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी प्रमुख गेनर्स रहे। वहीं एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, ट्रेंट, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक नुकसान में बंद हुए।

    एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद निफ्टी में मजबूत उछाल देखने को मिला है, हालांकि व्यापक ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है। उनका कहना है कि इंडेक्स अभी भी 200 डीएमए से नीचे है और किसी भी तेजी का इस्तेमाल लीवरेज पोजीशन घटाने और शॉर्ट पोजीशन बनाने में करना चाहिए। निफ्टी के लिए 25,200 का स्तर रुकावट और 24,900 का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है।

    गौरतलब है कि मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच बाजार की शुरुआत कमजोर रही थी। सेंसेक्स 167 अंक की गिरावट के साथ खुला था और निफ्टी भी लाल निशान में था, लेकिन कुछ ही मिनटों में बाजार ने वापसी करते हुए हरे निशान में कारोबार शुरू कर दिया।

  • Gold-Silver Crash: चांदी फिर क्रैश… झटके में ₹16000 सस्ती, सोना भी 4000 रुपये फिसला

    Gold-Silver Crash: चांदी फिर क्रैश… झटके में ₹16000 सस्ती, सोना भी 4000 रुपये फिसला

    नई दिल्ली :सोना-चांदी की कीमतें क्रैश होने का सिलसिला जारी है. बजट के दिन भर-भराकर टूटने के बाद सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में वायदा कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती हो गईं. एक ओर जहां 1 Kg Silver Price झटके में करीब 16,000 रुपये गिर गया, तो वहीं दूसरी ओर 10 Gram 24 Karat Gold का वायदा भाव एमसीएक्स पर 4000 रुपये से ज्यादा कम हो गया.
    इतना रह गया 1 किलो चांदी का भाव
    चांदी की कीमतें बीते सप्ताह के गुरुवार को इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के पार निकलने के बाद से ही लगातार क्रैश हो रही हैं. रविवार को Budget 2026 वाले दिन करीब 9 फीसदी से ज्यादा टूटने के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जब MCX पर कमोडिटी ट्रेडिंग की शुरुआत हुई, तो चांदी खुलते ही और भी सस्ती हो गई. बीते कारोबारी दिन सिल्वर प्राइस तगड़ी गिरावट और फिर रिकवरी के बाद अंत में 2,65,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और सोमवार को जैसे ही कारोबार ओपन हुआ, तो ये गिरकर 2,55,652 रुपये प्रति किलो पर आ गया और फिर इसके कुछ ही मिनटों बाद ये 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि चांदी वायदा 15,943 रुपये और सस्ती हो गई.

    अपने हाई से अब इतनी सस्ती Silver
    चांदी में जिस रफ्तार से बीते कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली थी, उससे तेज रफ्तार इसके फिसलने की है. बता दें कि पिछले गुरुवार को एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी के वायदा भाव ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते 4,20,048 रुपये के नया लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, लेकिन इस स्तर से अब तक Silver Price 1,70,335 रुपये कम हो चुका है.

    सोने का भी चांदी जैसा हाल

    Silver Price Crash होने से साथ ही सोना भी धड़ाम नजर आ रहा है. बजट वाले दिन ये भी 13,000 रुपये तक टूट गया था, हालांकि फिर थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली थी. रविवार को ये 1,47,753 रुपये के लेवल पर क्लोज हुआ था और सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही ये फिसलकर 1,43,321 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 4432 रुपये तक सस्ता हो गया.

    हाई से अब कितना सस्ता Gold
    सोने की कीमत ने भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते गुरुवार को अपना नया हाई लेवल छुआ था और तूफानी तेजी के साथ 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गई थी. इस स्तर पर पहुंचने के बाद Gold Rate बिखरता हुआ चला गया और अब तक ये 49,775 रुपये सस्ता मिल रहा है.

  • साल 2026-27 के बजट में बांग्लादेश को आधी मदद, भूटान को बड़ी राशि, चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं

    साल 2026-27 के बजट में बांग्लादेश को आधी मदद, भूटान को बड़ी राशि, चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं


    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत की विदेश सहायता नीति में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। बांग्लादेश के लिए आवंटित राशि इस बार आधी कर दी गई है। जबकि भूटान को पिछले वर्ष से अधिक मदद दी जाएगी। वहीं, ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए इस बार कोई फंड नहीं रखा गया।

    बांग्लादेश और पड़ोसी देशों को मदद

    इस वित्तीय वर्ष में बांग्लादेश को 60 करोड़ रुपये सहायता के रूप में आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 में यह राशि 120 करोड़ रुपये थी। संशोधित अनुमान के अनुसार पिछली बार यह राशि 34.48 करोड़ रुपये रह गई थी। भूटान को सबसे अधिक मदद के रूप में 2,288 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। नेपाल को 800 करोड़ रुपये, जबकि मालदीव और मॉरीशस को 550-550 करोड़ रुपये की सहायता मिल रही है।

    चाबहार परियोजना के लिए कोई फंड नहीं

    चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें भारत पिछले वर्षों से 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष निवेश करता आया है, इस बार बजट में शामिल नहीं है। यह बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापारिक संपर्क के लिए अहम माना जाता है और ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस बार चाबहार को कोई आवंटन नहीं दिया गया।अमेरिका द्वारा पिछले वर्ष सितंबर में ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के तहत भारत को चाबहार परियोजना पर छह महीने की छूट दी गई थी, जो 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।

    विदेश मंत्रालय का बजट
    विदेश मंत्रालय के लिए 2026-27 के बजट में कुल 22,118 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो चालू वित्त वर्ष के 21,742 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान और 20,516 करोड़ रुपये के मूल अनुमान से अधिक है। विदेश साझेदारी विकास मद में कुल 6,997 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें करीब 4,548 करोड़ रुपये निकटवर्ती पड़ोसी देशों के लिए निर्धारित हैं। इस राशि का उपयोग पनबिजली संयंत्र, बिजली पारेषण लाइनों, आवास, सड़क और पुल जैसी बड़ी परियोजनाओं से लेकर छोटे पैमाने पर सामुदायिक विकास कार्यों तक किया जाएगा। लातिन अमेरिकी देशों के लिए कुल सहायता 120 करोड़ रुपये तय की गई है।

  • Budget 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, कैंसर दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी हटाई, 3 आयुर्वेदिक AIIMS का ऐलान

    Budget 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, कैंसर दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी हटाई, 3 आयुर्वेदिक AIIMS का ऐलान


    नई दिल्ली। संसद के पटल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार 9वां बजट पेश किया। 85 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने देश की आर्थिक नींव को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि, इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न करके मध्यम वर्ग को थोड़ा निराश जरूर किया है, लेकिन टैक्स फाइलिंग की समय सीमा बढ़ाकर और ‘न्यू इनकम टैक्स एक्ट’ की घोषणा कर भविष्य में प्रक्रिया को सरल बनाने का वादा किया है।

    1. स्वास्थ्य क्षेत्र: कैंसर और दुर्लभ बीमारियों का इलाज होगा सस्ता
    बजट की सबसे मानवीय और बड़ी घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 महत्वपूर्ण दवाओं पर से 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया है। इसके अलावा, हीमोफिलिया और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाएं भी अब ड्यूटी फ्री होंगी। आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए देश में 3 नए आयुर्वेदिक एम्स (AIIMS) खोले जाएंगे, जो भारत को ‘बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    2. रेलवे और कनेक्टिविटी: 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर का जाल
    बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने रेलवे को नई गति दी है। देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है। इसमें दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे जैसे रूट शामिल हैं, जो न केवल यात्रा का समय घटाएंगे बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी तेज करेंगे। साथ ही, अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास किया जाएगा, जिससे माल ढुलाई सस्ती और सुगम होगी।

    3. रक्षा बजट: आधुनिकीकरण पर ₹2.19 लाख करोड़ का दांव
    बदलते वैश्विक परिवेश और जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों को देखते हुए रक्षा बजट में 15.2% की भारी बढ़ोतरी की गई है। कुल ₹7.85 लाख करोड़ के रक्षा बजट में से ₹2.19 लाख करोड़ सीधे तौर पर सैन्य बलों के आधुनिकीकरण (Modernization) पर खर्च होंगे। इसमें स्वदेशी विमानों के इंजन विकास के लिए ₹64 हजार करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को साकार करेगा।

    4. महिला सशक्तिकरण और शिक्षा: हॉस्टल और SHE-मार्ट
    महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘लखपति दीदी’ मॉडल को विस्तार देते हुए SHE-मार्ट (शी-मार्ट) योजना शुरू की गई है। ये स्टोर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित होंगे, जहाँ वे बिना बिचौलियों के अपने उत्पाद बेच सकेंगी। शिक्षा के क्षेत्र में, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने और कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित करने का निर्णय युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का प्रयास है।

    5. कृषि और लघु उद्योग: चंदन से लेकर काजू-कोको तक
    खेती को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मुनाफे का जरिया बनाने के लिए सरकार ने नारियल, चंदन और काजू-कोको उद्योग को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। ‘मछली पालन’ के लिए 500 नए तालाबों का विकास किया जाएगा। टेक्सटाइल सेक्टर में कारीगरों की मदद के लिए ‘नेशनल हैंडलूम पॉलिसी’ और ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ के जरिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे।
    बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न की तारीख 31 मार्च तक बढ़ाई गई है। कैंसर की 17 दवाएं सस्ती होंगी, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 3 आयुर्वेदिक एम्स बनेंगे। रक्षा बजट को बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है, जिसमें सैन्य आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।

  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों का फायदा उठाना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का परिव्यय बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 40,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसके जरिए कोशिश इंडस्ट्री के नेतृत्व में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग सेक्टर को आने बढ़ाना है।

    बजट भाषण में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार किया है। इसी आधार पर सरकार उपकरण और सामग्री उत्पादन, पूर्ण-स्टैक भारतीय बौद्धिक संपदा (आईपी) विकास और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 की शुरुआत करेगी। भारत के सेमीकंडक्टर विकास की गति का लाभ उठाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम काे परिव्यय को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया है।”

    वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हम प्रौद्योगिकी और कुशल कार्यबल के विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। अप्रैल 2025 में 22,999 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (आईएसएम) को पहले ही लक्ष्य से दोगुने निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं।”

    इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए के एक समर्पित कोष की शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य भविष्य में रोजगार सृजित करना और चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहन देना है।

    श्रम प्रधान वस्त्र क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री ने पांच प्रमुख घटकों वाले एक एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्तावित किया गया है। पहला घटक – नेशनल फाइबर स्कीम है, जिसका लक्ष्य रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर्स के साथ-साथ मानव निर्मित और नए औद्योगिक युग के फाइबर्स में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

    दूसरा घटक- वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, जिसका उद्देश्य मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और साझा परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों के लिए पूंजीगत सहायता प्रदान करके पारंपरिक क्लस्टरों का आधुनिकीकरण करना है।

    तीसरा घटक राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी) है, जिसे बुनकरों और कारीगरों के लिए लक्षित समर्थन सुनिश्चित करते हुए मौजूदा योजनाओं को एकीकृत और मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

  • केंद्रीय बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, प्रक्रिया होगी और आसान

    केंद्रीय बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, प्रक्रिया होगी और आसान

    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपने कार्यकाल का लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। बजट 2026-27 में आम करदाताओं को लेकर सबसे बड़ा ऐलान यही रहा कि इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद फिलहाल टैक्स स्ट्रक्चर को स्थिर रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसका मतलब यह है कि करदाता जिस टैक्स सिस्टम के तहत अभी टैक्स चुका रहे हैं, वही व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी।

    टैक्स सिस्टम स्थिर, लेकिन राहत पर जोर

    हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन बजट में टैक्स भरने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सरकार का फोकस टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाना और अनावश्यक परेशानियों को कम करना रहा।

    रिटर्न संशोधन की समयसीमा बढ़ी

    वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन (रिवाइज्ड रिटर्न) करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। इससे उन करदाताओं को राहत मिलेगी, जिनसे रिटर्न दाखिल करते समय अनजाने में कोई गलती हो जाती है।

    अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग समयसीमा

    बजट में रिटर्न फाइलिंग की तारीखों को भी वर्गों के अनुसार स्पष्ट किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले करदाता पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय दिया गया है।

    ब्याज और एनआरआई को बड़ी राहत

    टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रहेगा और इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा भारत की कंपनियों को पूंजीगत सामान देने वाले एनआरआई को पांच साल तक इनकम टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

    टीसीएस दरों में कटौती

    बजट में स्रोत पर टैक्स वसूली (TCS) को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। विदेश यात्रा पैकेज पर लगने वाला टीसीएस 5 और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है और अब इसमें न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं होगी। वहीं लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

    छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम

    छोटे टैक्सपेयर्स के लिए सरकार एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम लाने जा रही है। इसके तहत कम या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट लेने के लिए अब टैक्स अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही शेयरधारक अब फॉर्म 15G और 15H सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे।

    शेयर बाजार लेनदेन महंगे

    हालांकि बजट में शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।

    कुल मिलाकर बजट 2026 में टैक्स स्लैब को स्थिर रखते हुए प्रक्रिया को सरल बनाने और लक्षित राहत देने पर सरकार का खास फोकस देखने को मिला।

  • क्या सिर्फ 30 दिनों में सिबिल स्कोर बन सकता है बेहतर? यहां जानें कितना सही कितना नहीं

    क्या सिर्फ 30 दिनों में सिबिल स्कोर बन सकता है बेहतर? यहां जानें कितना सही कितना नहीं

    नई दिल्ली। सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर तीन अंकों का एक खास पैमाना होता है, जो आपकी वित्तीय आदतों और लोन चुकाने की क्षमता को दर्शाता है। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान इसी स्कोर के आधार पर यह तय करते हैं कि आपको लोन या क्रेडिट कार्ड मिलेगा या नहीं, और किन शर्तों पर मिलेगा। कई हार लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या सिबिल स्कोर कम समय में सुधारा जा सकता है। तो जवाब है- हां। कम समय में क्रेडिट स्कोर बढ़ाना चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन थोड़े से अनुशासन और सही रणनीति से यह पूरी तरह संभव है।
    सभी बिल समय पर चुकाएं
    सिबिल स्कोर सुधारने का सबसे जरूरी नियम है-भुगतान में कभी देरी न करें। चाहे क्रेडिट कार्ड का बिल हो, लोन की EMI हो या कोई अन्य भुगतान, हमेशा तय तारीख से पहले भुगतान करना बेहतर रहता है। देरी या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है।

    क्रेडिट कार्ड लेना हो सकता है फायदेमंद
    अगर आपने अब तक कोई क्रेडिट नहीं लिया है, तो आपका क्रेडिट स्कोर भी नहीं बनता। भले ही यह शुरुआत में सही लगे, लेकिन लोन की जरूरत पड़ने पर यह परेशानी बन सकता है। क्रेडिट कार्ड लेने से आपका क्रेडिट हिस्ट्री बनती है, जिससे भविष्य में कम ब्याज दर पर लोन मिलने में मदद मिलती है। पहली बार कार्ड लेने वालों के लिए सिक्योर्ड (कैश-बैक्ड) क्रेडिट कार्ड अच्छा विकल्प है।

    क्रेडिट उपयोग 30% से कम रखें
    सिबिल स्कोर बेहतर रखने के लिए जरूरी है कि आप अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का 30 प्रतिशत से ज्यादा इस्तेमाल न करें। मान लीजिए आपकी लिमिट ₹1 लाख है, तो कोशिश करें कि खर्च ₹30,000 के अंदर ही रहे। इससे आपका सिबिल स्कोर स्कोर बेहतर होता है।

    क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए करें आवेदन
    अगर आप समय पर भुगतान कर रहे हैं और क्रेडिट उपयोग कम है, तो बैंक से क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं। बढ़ी हुई लिमिट यह दिखाती है कि आप जिम्मेदार ग्राहक हैं। हालांकि, लिमिट बढ़ने के बाद भी जरूरत से ज्यादा खर्च करने से बचना जरूरी है।

    सिक्योर्ड या कैश-बैक्ड क्रेडिट कार्ड अपनाएं
    सिबिल स्कोर जल्दी सुधारने के लिए कैश-बैक्ड क्रेडिट कार्ड एक आसान विकल्प है। इसमें आपको बैंक के पास एक तय रकम जमा करनी होती है, जो आपकी क्रेडिट लिमिट बनती है। यह बैंक के लिए सुरक्षित होता है और नए यूजर्स को आसानी से क्रेडिट कार्ड मिल जाता है, साथ ही स्कोर भी तेजी से बेहतर होता है।

    एक साथ कई लोन या कार्ड लेने से बचें
    एक समय में बहुत सारे लोन या क्रेडिट कार्ड होना आपकी भुगतान क्षमता पर सवाल खड़े कर सकता है। इससे बैंक आपको ज्यादा जोखिम वाला ग्राहक मान सकते हैं। बेहतर है कि सीमित क्रेडिट लें और अलग-अलग लोन के बीच पर्याप्त अंतर रखें।

    क्रेडिट रिपोर्ट पर नियमित नजर रखें
    भारत में CIBIL, Equifax, Experian और Highmark जैसे चार मान्यता प्राप्त क्रेडिट ब्यूरो हैं। इनकी रिपोर्ट में अगर कोई गलती या गलत एंट्री होती है, तो इसका सीधा असर आपके स्कोर पर पड़ता है। नियमित रूप से क्रेडिट रिपोर्ट चेक करने से आप ऐसी गलतियों को समय रहते ठीक करवा सकते हैं और 30 दिनों में क्रेडिट स्कोर सुधार सकते हैं।