Category: Economy

  • एसबीआई का मुनाफा तीसरी तिमाही में 13 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये

    एसबीआई का मुनाफा तीसरी तिमाही में 13 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये


    नई दिल्‍ली।
    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) (State Bank of India (SBI) ने चालू वित्‍त वर्ष 2025-26 (Current Financial Year 2025-26) की दिसंबर तिमाही के नतीजे का ऐलान कर दिया है। एसबीआई ने शनिवार को कहा कि 31 दिसंबर को समाप्‍त अक्‍टूबर-दिसंबर तिमाही में उसका मुनाफा 13.06 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये रहा। बैंक को पिछले वित्‍त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में 18,853 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था।

    एसबीआई ने बयान में बताया कि वित्‍त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक ने 21,137 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। एकल आधार पर अक्‍टूबर-दिसंबर तिमाही में शुद्ध लाभ 24.48 फीसदी बढ़कर 21,028 करोड़ रुपये रहा है। पिछले वित्‍त वर्ष की समान अवधि में यह 16,891 करोड़ रुपये रहा था।

    देश के सबसे बड़े ऋणदाता बैंक का वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में एकल आधार पर कुल आय बढ़कर 1,40,915 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्‍त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही में 1,28,467 करोड़ रुपये थी। इस दौरान बैंक का कुल खर्च 1,04,917 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,08,052 करोड़ रुपये हो गया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) का अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक बेहतर होकर 1.57 फीसदी रहा, जो सितंबर 2025 में 1.73 फीसदी था। वहीं, बैंक का कुल प्रावधान 4,507 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्‍त वर्ष की समान अवधि में 911 करोड़ रुपये रहा था। इसके अलावा बैंक का कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक 14.04 फीसदी रहा।

  • बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..

    बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..


    नई दिल्ली। Toll Tax Without Toll Plaza: देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है.

    देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर.

    बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन
    नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा.

    हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है

    फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा?
    अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा.

    जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा.

  • सोना 14 हजार और चांदी 94 हजार गिरकर रिकॉर्ड स्तर से नीचे, निवेशकों में चिंता

    सोना 14 हजार और चांदी 94 हजार गिरकर रिकॉर्ड स्तर से नीचे, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। इस हफ्ते सोने और चांदी के दाम में तेज गिरावट देखी गई है। सोना 13,717 रुपये घटकर 1,52,078 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि चांदी 3,39,350 रुपये प्रति किलो से गिरकर 2,44,929 रुपये पर पहुंच गई। इस गिरावट में चांदी करीब 94,421 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी में यह गिरावट मुख्य रूप से दो कारणों से हुई। पहला, हाल के दिनों में दोनों धातुओं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी थीं, जिससे निवेशकों ने बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग की। दूसरा, फिजिकल डिमांड में कमी और औद्योगिक उपयोग को लेकर बढ़ी चिंताओं ने भी दामों पर दबाव डाला।

    निवेशकों के लिए यह गिरावट चेतावनी का संकेत है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इस समय केवल सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें और कीमतों की क्रॉस-चेकिंग करें। सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला गोल्ड चुनना चाहिए। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक होते हैं, जैसे AZ4524, जो सोने की कैरेट वैल्यू बताते हैं।

    ज्वेलर्स और निवेशकों के लिए दो बातें खासकर महत्वपूर्ण हैं। पहला, सोने का सही वजन और दैनिक कीमत को विभिन्न सोर्सेज जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट से क्रॉस-चेक करें। दूसरा, सोने के भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के अनुसार अलग-अलग होते हैं, इसलिए खरीदते समय सही कैरेट का ध्यान रखें।

    चांदी की असली पहचान करने के लिए चार आसान तरीके हैं। मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट: सिल्वर पर रखी बर्फ तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में कोई गंध नहीं होती, जबकि नकली में कॉपर जैसी गंध हो सकती है। क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ने पर असली चांदी के निशान काले होंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को भाव के उतार-चढ़ाव को समझते हुए ही सोना और चांदी में निवेश करना चाहिए। वहीं, ज्वेलर्स को सावधानी से स्टॉक प्रबंधन करने और ग्राहकों को प्रमाणित उत्पाद देने की सलाह दी जा रही है।इस हफ्ते की गिरावट के बाद, सोने और चांदी के निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। हालाँकि, अगर वैश्विक मार्केट और घरेलू मांग लंबे समय में स्थिर रहती है, तो इनकी कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।

  • यूपीआई पेमेंट में UPI Now Pay Later सुविधा क्या है? जानें कैसे करता है काम और क्या हैं इसके फायदे

    यूपीआई पेमेंट में UPI Now Pay Later सुविधा क्या है? जानें कैसे करता है काम और क्या हैं इसके फायदे


    नई दिल्ली । अगर आप कभी कम बैंक बैलेंस की वजह से UPI पेमेंट फेल होने की परेशानी से जूझ चुके हैं, तो अब आपके लिए राहत की खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया एनपीसीआई ने UPI यूज़र्स के लिए एक नया और बेहद उपयोगी फीचर ‘UPI Now Pay Later’ लॉन्च किया है, जिसे यूपीआई के जरिए प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन के नाम से भी जाना जाता है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद UPI सिर्फ आपके बैंक अकाउंट में मौजूद बैलेंस तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर आप बैंक से पहले से स्वीकृत क्रेडिट का इस्तेमाल कर तुरंत भुगतान कर सकते हैं।
    क्या है UPI Now Pay Later
    यह एक डिजिटल क्रेडिट सुविधा है, जिसके तहत बैंक ग्राहकों को एक प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लिमिट प्रदान करते हैं। इस लिमिट का उपयोग कर यूज़र UPI के जरिये तुरंत पेमेंट कर सकते हैं और तय समय सीमा के भीतर बाद में उस राशि का भुगतान कर सकते हैं। यह सुविधा शॉर्ट-टर्म क्रेडिट की तरह काम करती है और खास तौर पर उस स्थिति में मददगार साबित होती है, जब खाते में पर्याप्त बैलेंस न हो।

    यह कैसे काम करता है

    herofincorp के मुताबिक, बैंक या लेंडर यूज़र की प्रोफाइल और क्रेडिट स्कोर के आधार पर एक निश्चित क्रेडिट लिमिट तय करता है। उदाहरण के लिए ₹20,000 से ₹50,000 तक। UPI से पेमेंट करते समय यूज़र अपने बैंक अकाउंट की जगह क्रेडिट लाइन को सेलेक्ट कर सकता है। ऐसा करने से भुगतान तुरंत पूरा हो जाता है और राशि क्रेडिट लिमिट से एडजस्ट हो जाती है। बिलिंग साइकिल पूरी होने पर इस्तेमाल की गई रकम का बिल जनरेट होता है, जिसे तय शर्तों के अनुसार चुकाना होता है।

    जानें इसके प्रमुख फायदे

    तुरंत क्रेडिट की सुविधाकम बैलेंस में भी बिना रुकावट भुगतानव्यापक स्वीकार्यताजहां भी UPI स्वीकार किया जाता है, वहां इस सुविधा का इस्तेमाल संभवलचीला भुगतान विकल्पतय समय बाद भुगतान करने की सहूलियतपूरी तरह डिजिटल प्रक्रियाबिना किसी कागजी झंझट के आसान और तेज़ ऑनबोर्डिंग

    क्या है पात्रता

    आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और आप हर हार में भारतीय नागरिक होने चाहिए। डॉक्यूमेंट के तौर पर मोबाइल नंबर से लिंक पैन और आधार होना चाहिए। साथ ही आपका यूपीआई-सक्षम बैंक में सक्रिय खाता होना चाहिए। हां, आपका सिबिल स्कोर 750 या उससे अधिक होना चाहिए। एनपीसीआई का यह कदम डिजिटल भुगतान को और अधिक सुलभ, लचीला और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

  • एलन मस्क ने रचा इतिहास, बने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति

    एलन मस्क ने रचा इतिहास, बने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति


    नई दिल्ली । दुनिया के दिग्गज उद्योगपति और टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उनकी एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया से जुड़ी फर्म xAI के अधिग्रहण के बाद मस्क की संपत्ति में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला है। इस बड़े मर्जर के बाद एलन मस्क की नेटवर्थ 800 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर गई है, जिससे वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।

    फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, SpaceX और xAI के मर्ज होने के बाद दोनों कंपनियों की संयुक्त वैल्यू करीब 1.25 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई है। इस सौदे का सीधा फायदा एलन मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति को मिला, जिसमें करीब 84 बिलियन डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। फिलहाल मस्क की कुल नेटवर्थ अनुमानित रूप से 852 बिलियन डॉलर करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है, जो अब तक किसी भी व्यक्ति के लिए ऐतिहासिक स्तर माना जा रहा है।

    SpaceX-xAI डील से कैसे बढ़ी मस्क की दौलत

    मर्जर से पहले एलन मस्क के पास स्पेसएक्स में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। दिसंबर 2025 में हुए एक टेंडर ऑफर के बाद स्पेसएक्स की वैल्यू करीब 800 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। इस हिसाब से मस्क के हिस्से की कीमत लगभग 336 बिलियन डॉलर बैठती थी। वहीं, उनकी दूसरी कंपनी xAI में मस्क की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत थी।

    इस महीने की शुरुआत में xAI ने एक प्राइवेट फंडरेजिंग राउंड पूरा किया था, जिसके बाद कंपनी की वैल्यू लगभग 250 बिलियन डॉलर आंकी गई। इस वैल्यूएशन के हिसाब से xAI में मस्क के शेयर की कीमत करीब 122 बिलियन डॉलर थी। यानी मर्जर से पहले ही मस्क की दोनों कंपनियों में हिस्सेदारी की कुल कीमत सैकड़ों अरब डॉलर में पहुंच चुकी थी।

    मर्जर के बाद वैल्यू में जबरदस्त उछाल

    SpaceX और xAI के मर्ज होने के बाद स्पेसएक्स की वैल्यू बढ़कर करीब 1 ट्रिलियन डॉलर हो गई, जबकि xAI की वैल्यू 250 बिलियन डॉलर पर बनी रही। फोर्ब्स के अनुमान के मुताबिक, इस नई संयुक्त कंपनी में अब एलन मस्क की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत है। मौजूदा वैल्यू के आधार पर इस हिस्सेदारी की कीमत लगभग 542 बिलियन डॉलर आंकी जा रही है।

    इसी के चलते मस्क की कुल संपत्ति में एक ही झटके में करीब 84 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ और उनकी नेटवर्थ 800 बिलियन डॉलर के पार निकल गई। यह आंकड़ा उन्हें न केवल मौजूदा समय का सबसे अमीर व्यक्ति बनाता है, बल्कि आधुनिक इतिहास में भी एक नया रिकॉर्ड स्थापित करता है।

    मर्जर का विचार क्यों आया?

    SpaceX और xAI के मर्जर के पीछे सिर्फ बिजनेस वैल्यू बढ़ाना ही मकसद नहीं है, बल्कि इसके पीछे एलन मस्क का एक दीर्घकालिक तकनीकी विजन भी छिपा है। स्पेस ट्रांसपोर्टेशन और सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़ी कंपनी SpaceX और एआई स्टार्टअप xAI को इस उद्देश्य से जोड़ा गया है ताकि अंतरिक्ष में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कंप्यूटिंग क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सके।

    इस योजना के तहत आने वाले समय में अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में सैटेलाइट्स भेजे जाएंगे, जो केवल इंटरनेट या कम्युनिकेशन के लिए नहीं, बल्कि एक विशाल “स्पेस-बेस्ड डेटा सेंटर” के रूप में भी काम करेंगे। इन सैटेलाइट्स के जरिए एआई मॉडल्स को ट्रेन करना, रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग और ग्लोबल-लेवल कंप्यूटिंग संभव हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य की टेक्नोलॉजी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

    पहले भी कर चुके हैं मर्जर

    यह पहली बार नहीं है जब एलन मस्क ने अपनी कंपनियों को आपस में मर्ज किया हो। इससे पहले मार्च 2025 में उन्होंने अपने एआई स्टार्टअप xAI को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) के साथ मर्ज किया था। उस मर्जर का मकसद सोशल मीडिया डेटा को एआई डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल करना था। अब SpaceX और xAI का मर्जर मस्क की “स्पेस-एआई इकोसिस्टम” की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।

    दुनिया की अमीरी की रेस में मस्क सबसे आगे

    एलन मस्क पहले भी कई बार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके हैं, लेकिन 800 बिलियन डॉलर से ज्यादा की नेटवर्थ उन्हें बाकी अरबपतियों से कहीं आगे ले जाती है। बिजनेस एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर SpaceX-xAI का यह मॉडल सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में मस्क की संपत्ति और प्रभाव दोनों में और इजाफा हो सकता है।

  • स्पेसएक्स और xAI का ऐतिहासिक विलय, इलॉन मस्क की कंपनी बनी 1 ट्रिलियन डॉलर की ताकत

    स्पेसएक्स और xAI का ऐतिहासिक विलय, इलॉन मस्क की कंपनी बनी 1 ट्रिलियन डॉलर की ताकत


    नई दिल्ली । दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क ने तकनीक और अंतरिक्ष उद्योग में अब तक का सबसे बड़ा कॉरपोरेट कदम उठाया है। उनकी रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण कंपनी स्पेसएक्स का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप xAI के साथ औपचारिक रूप से विलय कर दिया गया है। इस मर्जर के बाद स्पेसएक्स की कुल वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे यह दुनिया की सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों में शामिल हो गई है।

    इस विलय के साथ स्पेसएक्स अब केवल अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक AI रेस में भी एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। xAI वही कंपनी है जिसने चर्चित AI चैटबॉट ग्रोक को विकसित किया है। इलॉन मस्क ने इस डील को दो बड़े मिशनों के एकीकरण की संज्ञा देते हुए कहा कि यह मानवता के भविष्य को आकार देने वाला कदम है।

    डील से जुड़ी जानकारी के अनुसार xAI की वैल्यूएशन करीब 250 बिलियन डॉलर आंकी गई है। समझौते के तहत xAI के निवेशकों को प्रत्येक शेयर के बदले स्पेसएक्स के 0.1433 शेयर दिए जाएंगे। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को शेयर के स्थान पर नकद भुगतान का विकल्प भी दिया गया है, जिसकी कीमत 75.46 डॉलर प्रति शेयर तय की गई है। इसे कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े और जटिल सौदों में गिना जा रहा है।

    इस विलय के पीछे सबसे बड़ी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बढ़ती चुनौतियां मानी जा रही हैं। मौजूदा समय में AI मॉडल्स को ट्रेन और ऑपरेट करने के लिए धरती पर विशाल डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं, जिनमें भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है। इससे न केवल ऊर्जा संकट गहराता है, बल्कि पर्यावरण पर भी दबाव बढ़ता है। मस्क का मानना है कि धरती पर AI की बढ़ती ऊर्जा मांग लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

    इसी सोच के तहत स्पेसएक्स अंतरिक्ष आधारित AI इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने अमेरिकी संचार नियामक संस्था FCC के पास पृथ्वी की कक्षा में लगभग 10 लाख डेटा सेंटर सैटेलाइट्स लॉन्च करने की अनुमति के लिए आवेदन किया है। मस्क का दावा है कि अगले दो से तीन वर्षों में अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग करना धरती की तुलना में सबसे सस्ता और प्रभावी विकल्प बन सकता है।

    xAI की स्थापना 9 मार्च 2023 को की गई थी और अप्रैल 2023 में इसे सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। अब स्पेसएक्स और xAI का यह विलय अंतरिक्ष तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा के भविष्य को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

  • Google पर कैसे बनते हैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स? समझिए इसके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी

    Google पर कैसे बनते हैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स? समझिए इसके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी


    नई दिल्ली । डिजिटल दौर में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि कोई खबर, फिल्म, खिलाड़ी या घटना अचानक Google पर ट्रेंड करने लगती है। कभी यह ब्रेकिंग न्यूज होती है, तो कभी किसी सेलिब्रिटी से जुड़ी चर्चा। ऐसे में सवाल उठता है कि Google आखिर कैसे तय करता है कि कौन-सा विषय ट्रेंड कर रहा है? इसके पीछे एडवांस टेक्नोलॉजी और मजबूत डेटा एनालिसिस सिस्टम काम करता है, जो अलग-अलग स्रोतों से आने वाली जानकारी का तुरंत विश्लेषण करता है।

    क्या होता है ट्रेंडिंग टॉपिक?

    सरल शब्दों में कहें तो जब किसी विषय को लेकर बहुत कम समय में अचानक बड़ी संख्या में सर्च होने लगती हैं, तो Google उसे ट्रेंडिंग टॉपिक के रूप में पहचानता है। यह सामान्य सर्च पैटर्न से अलग होता है। यानी कोई विषय, जिसे पहले कम लोग खोज रहे थे, अचानक हजारों या लाखों लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाता है।

    Google कैसे पकड़ता है ट्रेंड?

    Google के पास हर सेकंड दुनियाभर से करोड़ों सर्च क्वेरी आती हैं। इसके एल्गोरिदम इन रियल-टाइम सर्चेस की तुलना पुराने डेटा से करते हैं। अगर किसी कीवर्ड या टॉपिक में अचानक असामान्य तेजी दिखाई देती है, तो सिस्टम उसे संभावित ट्रेंड मान लेता है और ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल कर देता है।

    ट्रेंड के पीछे AI और डेटा एनालिसिस

    Google सिर्फ सर्च की संख्या नहीं देखता, बल्कि यह भी समझने की कोशिश करता है कि लोग किसी विषय को क्यों खोज रहे हैं। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जाता है। ये तकनीकें न्यूज वेबसाइट्स, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और ब्लॉग्स से डेटा जुटाकर उसका विश्लेषण करती हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि कोई विषय वास्तव में महत्वपूर्ण है या सिर्फ थोड़े समय की हलचल है।

    जगह और समय की अहम भूमिका

    हर ट्रेंड हर जगह एक जैसा नहीं होता। कई बार कोई विषय सिर्फ किसी खास देश, राज्य या शहर तक सीमित रहता है। Google यूजर की लोकेशन और समय के आधार पर ट्रेंडिंग टॉपिक्स दिखाता है। जैसे चुनाव, मौसम या स्थानीय घटनाएं अक्सर क्षेत्रीय स्तर पर ही ट्रेंड करती हैं।

    क्या है Google Trends?

    Google Trends दरअसल Google की ट्रेंडिंग तकनीक का सार्वजनिक रूप है। इस टूल के जरिए यह देखा जा सकता है कि कोई टॉपिक कब, कहां और कितनी तेजी से खोजा गया। ग्राफ और तुलना के जरिए यह टूल सर्च ट्रेंड्स को समझना आसान बना देता है।

  • ट्रंप के ऐलान से अडानी और अंबानी की दौलत में उछाल, अरबपतियों के रुतबे में बदलाव

    ट्रंप के ऐलान से अडानी और अंबानी की दौलत में उछाल, अरबपतियों के रुतबे में बदलाव

    नई दिल्ली! हाल ही में अरबपतियों की सूची में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले। मंगलवार को अडानी और अंबानी ने कमाई के मामले में कई प्रमुख नामों को पीछे छोड़ा। इस दौरान, जहां जेफ बेजोस की संपत्ति में थोड़ी गिरावट आई, वहीं वॉरेन बफेट और स्टीव बाल्मर टॉप-10 से बाहर हो गए।

    दरअसल, ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में अचानक तेजी आई, जिससे मुकेश अंबानी (रिलायंस) और गौतम अडानी (अडानी ग्रुप) की संपत्ति में शानदार इजाफा हुआ। इसके चलते इन दोनों अरबपतियों का रुतबा और बढ़ गया।

    अंबानी एक बार फिर 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि अडानी 24वें से बढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स की ताजा सूची में एलन मस्क सबसे बड़े लाभार्थी रहे। उनकी संपत्ति में 9.64 अरब डॉलर का इजाफा हुआ, और वह 680 अरब डॉलर के साथ दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने हुए हैं।

    मंगलवार को अडानी और अंबानी की संपत्ति में क्रमशः 8.50 अरब डॉलर और 4.85 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। अडानी का नेटवर्थ अब 83.2 अरब डॉलर है, जबकि अंबानी की संपत्ति 97.9 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

    शेयर मार्केट में उछाल
    यूएस-इंडिया डील की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई। सेंसेक्स ने 5.14% की छलांग लगाई, जबकि निफ्टी ने 4.99% की बढ़त दर्ज की।

    इस तेजी से रिलायंस और अडानी ग्रुप के शेयरों में भी उछाल आया, जिससे इन दोनों के नेटवर्थ में वृद्धि हुई।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के अनुसार, एलन मस्क की संपत्ति 680 अरब डॉलर के आसपास है, जबकि दूसरे स्थान पर लैरी पेज हैं, जिनकी संपत्ति 290 अरब डॉलर है। जेफ बेजोस, मार्क जुकरबर्ग और लैरी एलिसन की संपत्ति में भी कुछ गिरावट आई।

    नए अरबपति टॉप-10 में शामिल
    जिम वॉल्टन और रॉब वॉल्टन अब दुनिया के टॉप-10 अरबपतियों में शामिल हो गए हैं। दोनों ने वॉरेन बफेट और स्टीव बाल्मर को सूची से बाहर कर दिया। जिम वॉल्टन 152 अरब डॉलर के साथ आठवें स्थान पर हैं, जबकि रॉब वॉल्टन 149 अरब डॉलर के साथ दसवें स्थान पर हैं।

  • Trump Tariff Effect: बिटकॉइन में 4 माह से गिरावट जारी… एक ही दिन में 7% टूटकर $73,000 के नीचे पहुंची कीमत

    Trump Tariff Effect: बिटकॉइन में 4 माह से गिरावट जारी… एक ही दिन में 7% टूटकर $73,000 के नीचे पहुंची कीमत


    वाशिंगटन।
    बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमत में चार महीने से जारी गिरावट मंगलवार को और तेज हो गई, जब यह न्यूयॉर्क (New York.) में 7% गिरकर $72,877 तक पहुंच गई। यह कीमत नवंबर 2024 के बाद सबसे कम है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने चुनावी जीत (Election victory) हासिल की थी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस गिरावट ने ट्रंप के चुनावी जीत के बाद बिटकॉइन में हुई सारी बढ़त को नष्ट कर दिया है, और अब यह $74,424.95 के 2025 के निचले स्तर से भी नीचे चला गया है।


    बिटकॉइन के गिरते मूल्य के पीछे कारण

    फाल्कनएक्स के ट्रेडिंग विशेषज्ञ बोहान जियांग के मुताबिक, कई व्यापारी इस उम्मीद में गिरावट के दौरान बिटकॉइन खरीदने की कोशिश कर रहे थे कि इसकी कीमत $80,000 के पार जाएगी। लेकिन जैसे-जैसे बिटकॉइन की कीमत नीचे जाती गई, इन निवेशकों के दांव उलटे पड़े, और उनकी मजबूरी में की गई बिकवाली ने और दबाव बना दिया। इसके अलावा, अक्टूबर में ट्रंप के टैरिफ को लेकर दिए गए बयानों ने बाजार में भारी बिकवाली को जन्म दिया, जिससे 19 अरब डॉलर के लीवरेज्ड दांव टूट गए।

    क्रिप्टो बाजार में गिरावट का माहौल
    बिटकॉइन के गिरते मूल्य ने पूरे क्रिप्टो बाजार को प्रभावित किया है। इस दौरान, क्रिप्टो फ्यूचर्स के खुले अनुबंधों की संख्या में भारी कमी आई और परपेचुअल फ्यूचर्स की फंडिंग रेट नकारात्मक हो गई, जो दर्शाता है कि निवेशक गिरावट पर दांव लगाने में दिलचस्पी ले रहे हैं। सिग्नलप्लस के साझेदार ऑगस्टीन फैन का कहना है कि क्रिप्टो बाजार अब मंदी की ओर बढ़ रहा है, और वर्तमान स्थिति में निवेशक बहुत अधिक सतर्क हो गए हैं।


    संस्थागत और खुदरा निवेशकों का मनोबल

    कुछ संस्थागत निवेशक अभी भी क्रिप्टो में डटे हुए हैं, लेकिन प्रमुख लॉन्ग टर्म बिटकॉइन धारकों के अरबों डॉलर की बिकवाली के बाद छोटे निवेशकों की गतिविधि कम हो गई है। बिटकॉइन और एथेरियम के अमेरिकी एटीएफ के अनुमोदन के बावजूद, छोटे क्रिप्टो करेंसी (ऑल्टकॉइन) की कीमतों में भारी गिरावट आई है।


    भविष्य की दिशा

    एयरड्रॉपअलर्ट डॉट कॉम के मोर्टन क्रिस्टेंसन के अनुसार, बिटकॉइन अभी भी एक उच्च जोखिम वाली संपत्ति के रूप में कारोबार कर रहा है, और इसका ‘डिजिटल गोल्ड’ बनने का सपना फिलहाल पूरा नहीं हुआ है। वह मानते हैं कि वर्तमान बाजार की अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के कारण बिटकॉइन के भविष्य को लेकर निवेशक अभी भी आशंकित हैं।

  • चार दिन की लगातार गिरावट के बाद सोने और चांदी में फिर उछाल

    चार दिन की लगातार गिरावट के बाद सोने और चांदी में फिर उछाल

    नई दिल्‍ली। लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। मंगलवार, 3 फरवरी को दोनों कीमती धातुओं ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, जिससे निवेशकों को राहत मिली है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत की तेजी के साथ बढ़कर 4,830 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। वहीं स्पॉट सिल्वर ने भी जोरदार छलांग लगाते हुए लगभग 8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की और इसका भाव 82.74 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।

    30 जनवरी को 10% लुढ़का था भाव
    गोल्ड की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।

    30 जनवरी 2026 को गोल्ड का रेट 10 प्रतिशत लुढ़क गया था। इस गिरावट के बाद स्पॉट गोल्ड का रेट 5000 डॉलर प्रति आउंस के नीचे आ गया था। चांदी की स्थिति तो गोल्ड की तुलना में और खराब हो गई। इसी दिन चांदी का रेट 27 प्रतिशत कम हो गया था।

    आज से पहले बीते दो कारोबारी दिन में गोल्ड की कीमतों में 13 प्रतिशत और चांदी की कीमतों में 34 प्रतिशत की गिरावट इंटरनेशनल मार्केट में दर्ज की गई है।

    चांदी की कीमतें लगातार तीसरे दिन तेजी से गिरीं। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में यह 52,000 रुपये टूटकर 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि कमजोर वैश्विक रुझानों और मजबूत डॉलर के बीच सोना टूटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।

    अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 52,000 रुपये, या लगभग 17 प्रतिशत टूटकर 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गई। शनिवार को, चांदी 19 प्रतिशत, या 72,500 रुपये गिरकर 3.12 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई थी।

    पिछले तीन सत्रों में, चांदी की कीमतें 1,44,500 रुपये, या लगभग 36 प्रतिशत गिरकर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई हैं। 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर 29 जनवरी को दर्ज किया गया जो अब तक की सबसे ऊंची कीमत थी।