Category: Economy

  • वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर

    वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर


    नई दिल्ली।
    ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत-ईयू एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक जीत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाएगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25% हिस्सा भी कवर करेगा। पीएम ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्व स्तर पर मजबूती देगी और सर्विस सेक्टर के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। साथ ही, यह पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए समझौते को भी और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।

    ऊर्जा अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की एक महाशक्ति बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है। कार्यक्रम में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों और वैश्विक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे निरंतर सुधारों ने निवेश के माहौल को दुनिया में सबसे बेहतर बना दिया है।

    इंडिया एनर्जी वीक 2026: क्या है खास? गोवा में 30 जनवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऊर्जा जगत का सबसे बड़ा आयोजन है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन में 75,000 से अधिक एनर्जी प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं। 700 से अधिक प्रदर्शक और 550 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हैं। इसमें तेल, गैस के साथ-साथ AI, डिजिटलाइजेशन और नेट-जीरो पाथवे जैसे 11 थीमेटिक जोन बनाए गए हैं। 12 से ज्यादा देशों के पवेलियन और 120 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत के उस विजन को दर्शाता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण नेट-जीरो एक साथ चलते हैं। इस समझौते और समिट से भारत में करोड़ों के विदेशी निवेश और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

  • ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी

    ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद भारतीय निर्यात को हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता अब यूरोप की ओर से दिखाई दे रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अंतिम चरण में है और अगर यह समझौता 27 जनवरी को औपचारिक रूप से हो गया तो यह भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक जीत साबित होगी।

    ट्रंप के टैरिफ से कितना हुआ नुकसान?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्त में भारत पर 25-25% टैरिफ लगाए थे। इसके बाद भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लागू हो गया, जिससे भारतीय निर्यात क्षेत्र को लगभग 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

    अब एक डील से 10 गुना फायदा
    भारत ने इस नुकसान को कम करने के लिए रणनीतिक कदम उठाया और अब एक ही डील से न सिर्फ यह नुकसान भरपाई हो जाएगी, बल्कि उस नुकसान से 10 गुना ज्यादा कमाई का रास्ता खुल सकता है।
    27 जनवरी को होने वाले EU-India FTA से भारत एक साथ 27 यूरोपीय देशों के बाजार में बिना शुल्‍क के कारोबार करने का अवसर पाएगा।

    ‘मदर ऑफ आल डील’ क्यों कहा जा रहा है?
    भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ आल डील’ कहा है। क्योंकि इस एक समझौते से भारत को यूरोप के 27 देशों में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल जाएगा, जो भारतीय निर्यात को एक बड़ा बाजार प्रदान करेगा।
    इस समय यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है।

    भारतीय निर्यात को कितना फायदा होगा?
    अगर EU-India FTA लागू होता है, तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्लस लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
    एमके ग्लोबल की शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के पूरा होने पर वित्त वर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
    वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी 17.3% थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22-23% तक बढ़ने का अनुमान है।

    यूरोप को भी फायदा होगा
    यह डील सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार के लिए भी फायदेमंद होगी।
    हालांकि अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 0.8% है, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा था।
    वित्त वर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस था।

    इस डील के बाद भारत का यूरोप के साथ व्यापार और बढ़ेगा और यूरोप का घाटा भी बढ़ सकता है।
    फिर भी यूरोप ने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्लाई का विकल्प खोजने की तैयारी कर ली है। इसलिए यूरोप में भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल की खरीद पहले से बढ़ रही है, और FTA के बाद इसमें और तेजी आने की संभावना है।

    किस सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा?
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे अधिक लाभ होने का अनुमान है।
    वर्तमान वित्त वर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8% पर आ गई है।
    लेकिन इस डील के बाद भारत के साथ यूरोप का व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना है।

    EU-India FTA के लागू होने से भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी और यह ट्रंप के टैरिफ के नुकसान की भरपाई के साथ 10 गुना अधिक लाभ का मार्ग खोल सकता है।
    यह डील भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को नई दिशा दे सकती है और भारत को विश्व व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करेगी।

  • विश्व आर्थिक मंच 2026 में भारत ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को और मजबूत किया: प्रल्हाद जोशी

    विश्व आर्थिक मंच 2026 में भारत ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को और मजबूत किया: प्रल्हाद जोशी

    नई दिल्ली। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक 2026 से लौटने के बाद कहा कि भारत ने स्थिर नीतियों, वैश्विक सहयोग और दीर्घकालिक निवेश के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। उनके अनुसार, यह प्रयास भारत को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित कर रहा है।

    वैश्विक विश्वास और रणनीतिक साझेदारी

    जोशी ने बताया कि विश्व ऊर्जा सम्मेलन 2026 में उनकी बैठकों ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के विकास के प्रति वैश्विक विश्वास को फिर से जागृत किया। उन्होंने दुनिया भर की सरकारों, निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा विकास की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो पूर्वानुमानित नियमों, नीतिगत स्थिरता और निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग द्वारा समर्थित है।”

    दीर्घकालिक निवेश और नीति समन्वय

    दावोस में जोशी ने भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा निवेश रणनीति को प्रस्तुत किया, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय, पारदर्शी नीतियां और हितधारकों की निरंतर भागीदारी पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशकों ने भारत की क्षमता पर भरोसा जताया, जो आर्थिक विकास और सामाजिक समावेश सुनिश्चित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से बढ़ा रहा है।

    प्रधानमंत्री योजनाओं की वैश्विक सराहना

    मंत्री ने पीएम-सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसी प्रमुख योजनाओं की वैश्विक सराहना का उल्लेख किया, जिन्होंने बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों को कुशलतापूर्वक लागू करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही भारत द्वारा सौर ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के प्रयासों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जिससे देश की स्थिति स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण के विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में और मजबूत हुई।

    हरित हाइड्रोजन और एआई में अग्रणी प्रयास

    जोशी ने कहा कि हरित हाइड्रोजन उत्पादों में भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में योगदान देने वाला महत्वपूर्ण कारक है। साथ ही, उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर भी जोर दिया। एआई के माध्यम से भारत पूर्वानुमान सुधारने, बिजली की हानि घटाने, लागत कम करने और ग्रिड की विश्वसनीयता मजबूत करने में सक्षम है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म और बड़े पैमाने पर तकनीकी अपनाने की रणनीति

    मंत्री ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से पायलट परियोजनाओं से प्लेटफॉर्म-आधारित समाधानों की दिशा में भारत के कदमों को साझा किया। इससे उन्नत प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद मिलेगी और भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मंच पर अपनी भूमिका को और सशक्त बनाएगा।

  • रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि एमएसएमई रोजगार पैदा करने का सबसे मजबूत और प्रभावी मंच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाना है तो एमएसएमई सेक्टर को और मजबूती देनी होगी। मांझी गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने के लिए आमंत्रित एमएसएमई लाभार्थियों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

    कृषि के बाद अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान

    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि देश की समृद्धि को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा, “कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र का ही आर्थिक विकास में सबसे बड़ा योगदान है। यह सेक्टर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी अवसर पैदा करता है, जिससे संतुलित विकास संभव हो पाता है।” मांझी ने एमएसएमई की भूमिका को अहम और निर्णायक बताते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार करार दिया।

    गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि बने कारीगर

    इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय की ओर से एमएसएमई से जुड़े लाभार्थियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 लाभार्थी, खादी विकास योजना के तहत प्रशिक्षित 199 कारीगर, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड के 50 लाभार्थी और महिला कॉयर योजना की 50 उत्कृष्ट महिला कारीगर अपने जीवनसाथियों के साथ शामिल रहीं। यह आयोजन कारीगरों और उद्यमियों के सम्मान का प्रतीक बना।

    ‘मिनी इंडिया’ जैसा दृश्य: शोभा करंदलाजे

    एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक ‘मिनी इंडिया’ देख रही हूं।” उन्होंने कहा कि सभी अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि से आए हैं, लेकिन देश की प्रगति के लिए एकजुट हैं। करंदलाजे ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार लगातार ऐसी योजनाएं बना रही है, जिनसे प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    मेहनत से आगे बढ़ रहा देश: सचिव

    एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि देश की प्रगति आप सभी की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विविधता में एकता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया और भरोसा दिलाया कि एमएसएमई मंत्रालय लगातार लाभार्थियों से जुड़ा रहेगा, ताकि और लोग आगे बढ़ सकें।

    पीएम विश्वकर्मा और एसआरआई फंड की अहम भूमिका

    पीएम विश्वकर्मा योजना 18 पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम कर रही है। वहीं, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड एमएसएमई को मजबूत कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम सरकारी पहल साबित हो रहा है।

  • यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    मुंबई। अगर आप लग्जरी कार खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता (Free Trade Deal) होने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, भारत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर सीधे 40% करने की तैयारी में है.

    यह देश के बड़े बाजार को खोलने की अब तक की सबसे बड़ी पहल हो सकती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मंगलवार तक फ्री ट्रेड समझौता होने की उम्मीद है.
    क्या हैं डील की अहम बातें?
    अभी भारत विदेशी कारों पर 110% तक टैक्स लेता है, जिसे घटाकर 40% किया जा सकता है.
    यह छूट उन कारों पर मिलेगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो (करीब 13-14 लाख रुपये) से ज्यादा होगी. यानी इसका बड़ा फायदा लग्जरी कारों को मिलेगा.

    टैक्स सिर्फ 40% पर नहीं रुकेगा. आने वाले समय में इसे धीरे-धीरे घटाकर 10% तक लाने की योजना है.
    इस फैसले से फॉक्सवैगन, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी दिग्गज कंपनियों की कारें भारतीय बाजार में काफी सस्ती हो जाएंगी.

    आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
    अभी तक विदेशों में बनी कारें भारत आते-आते अपनी असली कीमत से दोगुनी महंगी हो जाती थीं. टैक्स कम होने से इन प्रीमियम कारों की कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिससे भारतीय ग्राहकों के पास ज्यादा ऑप्शन होंगे. वहीं दूसरी तरफ विदेशी कंपनियों के लिए भारत में अपना बाजार बढ़ाना आसान होगा.

    भारत के लिए क्यों अहम है यह FTA?

    यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता होगा. 27 देशों के यूरोपीय ब्लॉक के साथ सर्विस और सामानों का यह तालमेल भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

  • डिजिटल इंडिया की जीत: UPI को पब्लिक गुड बनाने पर RBI की तारीफ, नारायण मूर्ति ने कही बड़ी बात

    डिजिटल इंडिया की जीत: UPI को पब्लिक गुड बनाने पर RBI की तारीफ, नारायण मूर्ति ने कही बड़ी बात

    नई दिल्ली।  इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि आरबीआई हमेशा से एक उत्प्रेरक, उदार, दूरदर्शी और देश को सक्षम बनाने वाली संस्था रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को एक पब्लिक गुड के रूप में विकसित करना आरबीआई का ऐतिहासिक निर्णय है, जिसने डिजिटल भुगतान को आम आदमी के लिए सस्ता, सुरक्षित और सुलभ बना दिया।

    यूपीआई ने जीता आम लोगों का भरोसा

    नारायण मूर्ति ने कहा कि यूपीआई को कम लागत वाला और सभी के लिए आसानी से उपलब्ध बनाकर आरबीआई ने देश के हर वर्ग का भरोसा जीता है। इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों तक पहुंच सकी। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल सफलता की सबसे बड़ी कहानी बताया।

    नेतृत्व की सोच से बदलता है देश

    बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मूर्ति ने कहा कि जब किसी देश में ऐसे नेता होते हैं जिनके लक्ष्य बड़े होते हैं और जिनकी नीयत साफ होती है, तब वही नेतृत्व देश को बदलने की ताकत रखता है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाएं मजबूत मूल्यों से बनती हैं, और यही मूल्य लंबे समय तक विकास की नींव रखते हैं।

    कथनी और करनी में समानता जरूरी

    आईआईएम बेंगलुरु के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स में हुई बातचीत के दौरान उन्होंने नेतृत्व के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोई संगठन मजबूत मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो नेताओं को कथनी और करनी में समानता रखनी होगी।
    मूर्ति ने साफ शब्दों में कहा, “मूल्य भाषणों से नहीं, बल्कि कार्यों से बनते हैं।”

    संवेदनशील पूंजीवाद का महत्व

    उन्होंने कहा कि अनुशासन, सही मूल्य, मजबूत नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद समाज और राष्ट्र दोनों को आगे बढ़ाता है। तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदलती है, इसलिए समय के साथ उसे समझना, सुधारना और अनुकूल बनाना बेहद जरूरी है।

    संस्थागत यादों को संजोने की जरूरत

    नारायण मूर्ति ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में संस्थाओं के विकास को लेकर लिखित दस्तावेज बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि संगठनों के बनने की प्रक्रिया, संघर्ष, नेतृत्व की कमियां, टीमवर्क की जटिलताएं और नई तकनीक पर काम करने के अनुभव—ये सभी संस्थागत यादों का हिस्सा होते हैं, जिन पर भविष्य की प्रगति टिकी होती है।

    ओपन और कम लागत वाला मॉडल जरूरी

    उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सबक यह है कि कोड को सार्वजनिक और कम लागत वाला बनाया जाए। इससे एकाधिकार खत्म होता है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। मजबूत आधार के साथ इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नेताओं की जरूरत होती है।

    छात्रों को दिया नेतृत्व का मंत्र

    छात्रों को संबोधित करते हुए मूर्ति ने कहा कि भविष्य के नेताओं को सादा जीवन जीना चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप संवेदनशील पूंजीवाद के संदेशवाहक हैं, जो समाज, देश और उद्यमिता तीनों को आगे ले जाएंगे।”

    नारायण मूर्ति ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाने के लिए आरबीआई की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत मूल्य, दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद ही भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति की असली ताकत हैं।

  • अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को फिर मिला A+ नेशनल रैंकिंग: बिजली आपूर्ति में बनी देश की अग्रणी कंपनी

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को फिर मिला A+ नेशनल रैंकिंग: बिजली आपूर्ति में बनी देश की अग्रणी कंपनी

    नई दिल्ली। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने एक बार फिर बिजली वितरण कंपनियों की राष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी मजबूत स्थिति साबित की है। पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) द्वारा जारी ‘14वीं वार्षिक रेटिंग और रैंकिंग ऑफ डिस्कॉम्स रिपोर्ट’ में अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को ए+ रैंकिंग प्रदान की गई है। लगातार दूसरी बार शीर्ष श्रेणी में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि कंपनी बिना रुकावट बिजली आपूर्ति, कम तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान तथा सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन के मामले में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है।

    मुंबईवासियों के भरोसे की जीत

    इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कहा कि यह रैंकिंग मुंबई के नागरिकों के भरोसे की पहचान है। कंपनी ने बताया कि वह बीते 100 वर्षों से मुंबई की सेवा कर रही है और हर दिन घरों, अस्पतालों, उद्योगों और आवश्यक सेवाओं को भरोसेमंद और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
    कंपनी के अनुसार, “लगातार एक और वर्ष शीर्ष स्थान हासिल करना इस बात को दर्शाता है कि मुंबईवासी हर दिन शहर और देश की अग्रणी विद्युत वितरण कंपनी पर भरोसा करते हैं।”

    100 साल की सेवा, भविष्य पर नजर

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कहा कि मुंबई की सेवा के 100 साल पूरे होने के साथ ही कंपनी शहर के विकास के साथ आगे बढ़ रही है। आधुनिक तकनीक, स्मार्ट सिस्टम और उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं के जरिए कंपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद को लगातार तैयार कर रही है।

    बिजली वितरण सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साल

    यह रेटिंग देश के बिजली वितरण क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2025 में देशभर की बिजली वितरण कंपनियों ने मिलकर 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह पहली बार है जब यह सेक्टर कागजी हिसाब से मुनाफे में आया है।
    इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024 में डिस्कॉम्स को 27,022 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार संरचनात्मक सुधारों, बेहतर वित्तीय अनुशासन और तकनीक के प्रभावी उपयोग का नतीजा है।

    बिलिंग और वसूली में देश में अव्वल

    रिपोर्ट के मुताबिक, अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की बिलिंग दक्षता लगातार 95 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि बिल वसूली लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। भुगतान प्रबंधन और राजस्व वसूली के मामले में कंपनी का प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

    डेटा और तकनीक बनी सफलता की कुंजी

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की सबसे बड़ी ताकत उसका निरंतर एक जैसा उत्कृष्ट प्रदर्शन है। यह किसी एक समय की उपलब्धि नहीं, बल्कि मजबूत सिस्टम, डेटा आधारित निर्णय, स्मार्ट मीटर, एनालिटिक्स और बेहतर उपभोक्ता सेवाओं का परिणाम है।
    इसी वजह से अदाणी इलेक्ट्रिसिटी न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश में शहरी बिजली वितरण के लिए एक मिसाल बन चुकी है।

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने लगातार दूसरी बार ए+ रैंकिंग हासिल कर यह साबित किया है कि मजबूत वित्तीय अनुशासन, तकनीक और भरोसेमंद सेवा से बिजली वितरण में देशभर में नई मिसाल कायम की जा सकती है।

  • केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

    सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

    अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

    पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

    अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

    अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

    चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

    पूंजी की लागत घटाने पर जोर

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

    डेढ़ लाइन का सार:

    बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

  • सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशियों की खबर दी है। वित्त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, वेतन और पेंशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां, NABARD और RBI के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगासरकारी आंकड़ों के अनुसार इस फैसले से 46,322 कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी जबकि 23,570 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और 23,260 पारिवारिक पेंशनधारकों की आय में भी वृद्धि होगी

    PSU बीमा कंपनियों में इस संशोधन के लिए अनुमानित खर्च 8,170.30 करोड़ रुपये है जिसमें एरियर के लिए 5,822.68 करोड़ और पारिवारिक पेंशन के लिए 2,097.47 करोड़ रुपये शामिल हैंनाबार्ड के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन 1 नवंबर 2022 से लागू होगा इसके कारण सालाना 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा और बकाया भुगतान के लिए करीब 510 करोड़ रुपये खर्च होंगे

    RBI और NABARD के पेंशनर्स के लिए भी संशोधन किया गया है इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई भत्ते में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी साथ ही पात्र लाभार्थियों को बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगाइस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और पारिवारिक पेंशनधारकों की भी जीवनशली में सुधार होगा

  • 1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!

    1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!



    नई दिल्‍ली । पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट TD स्कीम इन दिनों खूब चर्चा में है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जहां कई बड़े बैंक एफडी पर ब्याज कम कर चुके हैं, वहीं डाकघर अब भी अच्छा और तय रिटर्न दे रहा है। साथ ही, इसमें सरकारी गारंटी भी मिलती है, जिससे लोगों को अपने पैसे की पूरी सुरक्षा का भरोसा रहता है।बढ़ती महंगाई और घटते बैंक ब्याज दरों के बीच अगर कोई इन्वेस्टमेंट ऑप्शन आम लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, तो वह डाकघर की बचत योजनाएं है। खासकर तब, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की और बैंकों ने अपनी एफडी की ब्याज दरें घटा दीं। ऐसे माहौल में पोस्ट ऑफिस की एक स्कीम निवेशकों के लिए किसी राहत से कम नहीं है, जिसमें न सिर्फ बेहतर रिटर्न मिल रहा है, बल्कि पैसा भी पूरी तरह सुरक्षित है।

    दरअसल, डाकघर की फिक्स्ड डिपॉजिट को टाइम डिपॉजिट TD कहा जाता है। यह योजना बैंकों की एफडी की तरह ही काम करती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत है केंद्र सरकार की सीधी गारंटी। पोस्ट ऑफिस में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के लिए टीडी अकाउंट खुलवाया जा सकता है। मौजूदा समय में डाकघर 1 साल की टीडी पर 6.9 प्रतिशत, 2 साल पर 7.0 प्रतिशत, 3 साल पर 7.1 प्रतिशत और 5 साल की टीडी पर 7.5 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज दे रहा है।

    44,995 का फिक्स रिटर्न

    अगर कोई निवेशक 5 साल की टीडी स्कीम में ₹1,00,000 जमा करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे कुल ₹1,44,995 मिलते हैं। यानी सीधे ₹44,995 का फिक्स ब्याज। मौजूदा हालात में देश का कोई भी बड़ा बैंक 5 साल की एफडी पर इतना हाई ब्याज दर नहीं दे रहा है। यही वजह है कि पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम निवेशकों के बीच तेजी से फेमस हो रही है।

    सभी निवेशकों को समान ब्याज

    डाकघर की टीडी स्कीम का एक और अहम पहलू यह है कि इसमें सभी आयु वर्ग के निवेशकों को समान ब्याज दर मिलती है। हालांकि, बैंकों की तरह इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक्स्ट्रा ब्याज का लाभ नहीं दिया जाता। इसके बावजूद, सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न इसे सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए बेहतरीन ऑप्शन बनाता है।

    ब्याज दरों पर सरकारी कंट्रोल

    खास बात यह भी है कि डाकघर की बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों की समीक्षा हर तीन महीने में की जाती है और इन्हें वित्त मंत्रालय द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इससे निवेशकों को यह भरोसा रहता है कि उनका पैसा सुरक्षित हाथों में है।