Category: Economy

  • Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग

    Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग


    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई सुविधा भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

    रेलवे की शिकायतों की सूची लंबी है। ट्रेनों में सफाई व्यवस्था कमजोर है पैंट्री कार का खाना क्वालिटी में अधूरा है बोतलबंद पानी और अन्य सामान की कीमत अधिक वसूली जाती है। गंदे टॉयलेट पानी की कमी स्टेशन और ट्रेन में चोरी और कभी-कभार दुर्घटनाएं यात्रियों की चिंता बढ़ाती हैं। बजट से उम्मीद है कि इन बुनियादी समस्याओं के सुधार के लिए पर्याप्त फंड आवंटित होगा।रेल विशेषज्ञों का मानना है कि नई और तेज रफ्तार ट्रेनों से पहले ट्रैक और सिग्नल सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। कई रूट्स पर ट्रैक की हालत ऐसी है कि ट्रेनें घोषित स्पीड पर नहीं चल पातीं। बजट 2026 में ट्रैक अपग्रेडेशन सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस पर खर्च बढ़ने की संभावना है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को रेलवे के लिए रिफॉर्म ईयर बताया है। उनका दावा है कि साल के 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के पूर्व जीएम सुधांशु मणि का कहना है कि पहले बजट आम आदमी की जेब और जरूरतों पर केंद्रित होता थानई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई, सुविधा, भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

  • ₹12.5 करोड़ की लग्जरी घड़ी लॉन्च, वनतारा को समर्पित खास डिज़ाइन..

    ₹12.5 करोड़ की लग्जरी घड़ी लॉन्च, वनतारा को समर्पित खास डिज़ाइन..


    नई दिल्ली ।लग्जरी घड़ियों की दुनिया में एक बार फिर शिल्पकला और नवाचार का अनोखा उदाहरण देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय वॉच ब्रांड जैकब एंड कंपनी ने 21 जनवरी को अपनी नई एक्सक्लूसिव टाइमपीस ओपेरा वनतारा ग्रीन कैमो को लॉन्च किया। यह घड़ी गुजरात में स्थित अनंत अंबानी के महत्वाकांक्षी वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास प्रोजेक्ट वनतारा को समर्पित है। सीमित संस्करण में तैयार की गई इस घड़ी की कीमत करीब 1.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 12.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।

    इस लग्जरी वॉच का सबसे आकर्षक पहलू इसका थिएटर-स्टाइल डायल है। डायल के भीतर बेहद बारीक कारीगरी से बनाई गई मिनिएचर आकृतियां लगाई गई हैं। इनमें नीली फ्लोरल शर्ट पहने अनंत अंबानी की मूर्ति प्रमुख रूप से दिखाई देती है। उनके साथ एक शेर और एक बंगाल टाइगर की सूक्ष्म आकृतियां भी शामिल हैं, जो वनतारा परियोजना की आत्मा और वन्यजीव संरक्षण की भावना को दर्शाती हैं। डायल में सोने से उकेरा गया हाथी और Vantara नाम भी शामिल किया गया है, जो इस घड़ी को प्रतीकात्मक पहचान देता है।

    डिजाइन को जंगल से प्रेरित लुक देने के लिए इसमें ग्रीन कैमुफ्लाज मोटिफ का उपयोग किया गया है। घड़ी में कुल 397 कीमती रत्न जड़े गए हैं, जिनका कुल वजन लगभग 21.98 कैरेट है। इनमें डिमेंटोइड गार्नेट, सावोराइट्स, हरे रंग के नीलम और सफेद हीरे शामिल हैं। इन रत्नों की बारीक सजावट घड़ी को एक विशिष्ट और बेहद प्रीमियम पहचान देती है।

    तकनीकी दृष्टि से भी यह घड़ी बेहद खास मानी जा रही है। यह जैकब एंड कंपनी के प्रतिष्ठित ओपेरा कलेक्शन का हिस्सा है, जिसमें जटिल म्यूजिकल मैकेनिज्म दिया गया है। बटन दबाते ही घड़ी से धुन निकलती है और उसी के साथ पूरा डायल अनंत अंबानी, शेर और बाघ की आकृतियों सहित घूमने लगता है। घड़ी निर्माण की दुनिया में म्यूजिक और रोटेटिंग मैकेनिज्म का यह संयोजन अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

    जिस वनतारा प्रोजेक्ट से यह घड़ी प्रेरित है, वह गुजरात के जामनगर में रिलायंस के रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के भीतर फैला लगभग 3500 एकड़ का विशाल वन्यजीव पुनर्वास केंद्र है। इसका उद्घाटन मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यहां डेढ़ लाख से अधिक पशुओं की देखभाल की जाती है और हाथियों के लिए विशेष अस्पताल के साथ MRI और CT स्कैन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल भी स्थापित किया गया है।कुल मिलाकर ओपेरा वनतारा ग्रीन कैमो केवल एक महंगी लग्जरी घड़ी नहीं बल्कि कला तकनीक और वन्यजीव संरक्षण के संदेश को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का एक प्रतीक बनकर सामने आई है।

  • छोटी आदतें जो तनाव कम कर जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएं

    छोटी आदतें जो तनाव कम कर जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएं


    नई दिल्ली :तेज़ रफ्तार जिंदगी बढ़ता काम का दबाव और हर समय मोबाइल स्क्रीन से जुड़ी दिनचर्या ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चुनौती बना दिया है। तनाव बेचैनी अनिद्रा और चिड़चिड़ापन अब किसी एक उम्र या पेशे तक सीमित नहीं रहे। ऐसे समय में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ माइंडफुलनेस को संतुलित जीवन के लिए बेहद जरूरी मान रहे हैं। माइंडफुलनेस कोई जटिल साधना या धार्मिक अभ्यास नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाई जा सकने वाली एक सरल और व्यवहारिक आदत है।

    क्या है माइंडफुलनेस और क्यों जरूरी
    माइंडफुलनेस का अर्थ है वर्तमान क्षण में पूरी जागरूकता के साथ जीना। यानी जो काम आप कर रहे हैं उसे बिना जल्दबाज़ी और बिना मन भटकाए पूरी चेतना के साथ करना। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मल्टीटास्किंग और भविष्य की चिंता दिमाग को थका देती है। माइंडफुलनेस व्यक्ति को वर्तमान में टिके रहना सिखाती है जिससे तनाव कम होता है भावनात्मक संतुलन बढ़ता है और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।

    सुबह की शुरुआत से करें माइंडफुलनेस
    माइंडफुलनेस अपनाने के लिए अलग से लंबा समय निकालना जरूरी नहीं है। इसकी शुरुआत सुबह उठते ही की जा सकती है। जागने के बाद कुछ मिनट गहरी सांस लेकर अपने शरीर और मन की स्थिति को महसूस करना एक सरल अभ्यास है। इससे दिन की शुरुआत शांति और सजगता के साथ होती है।

    खाने में भी लाएं सजगता
    खाना खाते समय मोबाइल या टीवी से दूरी बनाना माइंडफुलनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भोजन के स्वाद बनावट और खुशबू पर ध्यान देने से न केवल पाचन बेहतर होता है बल्कि भोजन से संतुष्टि भी बढ़ती है। यह आदत अनावश्यक ओवरईटिंग को भी रोकने में मदद करती है।

    काम के दौरान माइंडफुल अप्रोच
    ऑफिस या घर से काम करने वाले लोग अक्सर एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक समय में एक ही काम करें। ईमेल लिखते समय केवल उसी पर ध्यान दें और बीच बीच में छोटे ब्रेक लें। इससे मानसिक थकान कम होती है और कार्यक्षमता बढ़ती है।

    डिजिटल डिटॉक्स भी है जरूरी
    लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया अपडेट दिमाग को बेचैन रखते हैं। माइंडफुलनेस के लिए डिजिटल संतुलन बेहद जरूरी है। दिन में कुछ समय के लिए फोन साइलेंट करना सोशल मीडिया से दूरी बनाना और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना मानसिक शांति में सहायक होता है।

    चलते फिरते भी संभव है माइंडफुलनेस
    सुबह की वॉक या रोज़ के सफर को भी माइंडफुल बनाया जा सकता है। चलते समय अपने कदमों सांसों और आसपास के वातावरण पर ध्यान देना तनाव को कम करता है। यह अभ्यास खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास योग या ध्यान के लिए लंबा समय नहीं होता।मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि माइंडफुलनेस कोई तात्कालिक समाधान नहीं बल्कि धीरे धीरे विकसित होने वाली आदत है। रोज़ कुछ मिनट का अभ्यास भी लंबे समय में मानसिक और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करता है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक दबाव के दौर में माइंडफुलनेस अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बनती जा रही है।

  • बजट से पहले निवेशकों में सतर्कता, बैंकिंग और एनर्जी शेयर कमजोर

    बजट से पहले निवेशकों में सतर्कता, बैंकिंग और एनर्जी शेयर कमजोर


    नई दिल्ली :घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली के दबाव में प्रमुख सूचकांक कमजोर नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 100 अंकों की गिरावट के साथ 82,250 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 30 अंक फिसलकर 25,250 के स्तर पर बना रहा।
    बाजार की इस कमजोरी के पीछे बैंकिंग, एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में दबाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है।कारोबार के दौरान बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार को कोई ठोस सहारा नहीं मिल सका। निजी और सरकारी दोनों बैंकों के शेयरों में दबाव बना रहा। इसके अलावा तेल गैस और ऊर्जा कंपनियों में मुनाफावसूली ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। एफएमसीजी शेयरों में सुस्ती के चलते निवेशकों की धारणा कमजोर रही और व्यापक बाजार पर इसका असर साफ दिखाई दिया।

    बजट से पहले बाजार में असमंजस
    विशेषज्ञों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार फिलहाल स्पष्ट दिशा के अभाव में है। निवेशक बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं और सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों में भी बाजार में उतार चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं ऊपर की ओर 25,400 से 25,500 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ निवेशकों को फिलहाल केवल मजबूत फंडामेंटल वाले चुनिंदा लार्ज कैप शेयरों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं।

    ग्लोबल बाजारों से मिले मिले जुले संकेत
    जहां घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती का रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,994 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। जापान का निक्केई भी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53,870 पर पहुंच गया।हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.29 प्रतिशत चढ़कर 26,706 के स्तर पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.27 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार को मजबूती देखने को मिली थी। डाउ जोंस 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था, जबकि नैस्डेक कंपोजिट और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

    FII की बिकवाली, DII बने सहारा
    निवेश प्रवाह की बात करें तो 22 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार में बिकवाली की। एफआईआई ने करीब 2,549 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,222 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में एफआईआई ने कुल 34,350 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि डीआईआई ने 79,620 करोड़ रुपये की मजबूत खरीदारी की थी। इससे साफ है कि घरेलू निवेशक बाजार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

    पिछले सत्र में दिखी थी तेजी
    इससे पहले गुरुवार को बाजार में अच्छी मजबूती देखने को मिली थी। सेंसेक्स 398 अंक की तेजी के साथ 82,307 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 132 अंक चढ़कर 25,290 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि बजट से पहले मौजूदा सत्र में बाजार ने फिर से सतर्क रुख अपना लिया है।कुल मिलाकर बजट से जुड़ी उम्मीदें और वैश्विक संकेत आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • 27 जनवरी को बैंक बंद? यूनियनों की हड़ताल का ऐलान, जानिए कर्मचारियों की मुख्य मांगें

    27 जनवरी को बैंक बंद? यूनियनों की हड़ताल का ऐलान, जानिए कर्मचारियों की मुख्य मांगें

    नई दिल्ली। Bank Unions Strike: पूरे देश में 27 जनवरी 2026 को बैंकिंग व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना है. करीब आठ लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने वाले हैं. बैंक कर्मचारी पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन में सरकारी, निजी, विदेशी, ग्रामीण और सहकारी बैंक सभी शामिल होंगे
    5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग है हड़ताल की वजह
    बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के पीछे सप्ताह में 5 दिनों की कार्य दिवस की मांग है. जिसे लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. भारतीय बैंक संघ की ओर से यह प्रस्ताव पिछले दो साल से सरकार के पास लंबित है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है.

    यूनियनों के अनुसार, यह मांग 7 दिसंबर 2023 को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और भारतीय बैंक संघ के बीच हुए समझौते का हिस्सा थी. जिसे बाद में 8 मार्च 2024 के सेटलमेंट और जॉइंट नोट में भी दोहराया गया था.

    इस प्रस्ताव के तहत सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम का समय 40 मिनट बढ़ाने और सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने की बात कही गई है. यह मांग पूरी न होने के कारण बैंकों यूनियनों ने 27 जनवरी को पूरे देश में हड़ताल करने का फैसला लिया है.
    इन संगठनों ने दिया समर्थन
    देशभर में होने वाली यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है. जो बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के नौ प्रमुख संगठनों का संयुक्त मंच है. इसमें ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन, इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस, नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स शामिल हैं.
    लगातार 4 दिन बंद रह सकते हैं बैंक

    जनवरी के आखिरी हफ्ते में ग्राहकों को बैंक से जुड़े कामों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. लगातार चार दिन बैंक बंद रहने की संभावना है. 24 जनवरी को चौथा शनिवार होने की वजह से बैंक बंद रहने वाले हैं. वहीं, 25 जनवरी को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी होगी.

    26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 27 जनवरी को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रह सकती हैं. ऐसे में लोगों को पहले से अपनी बैंक के प्लान बना लेने की सलाह दी जा रही है.

  • शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी: सेंसेक्स 850 अंक उछलकर 82,750 पर, निफ्टी 25,400 के पार

    शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी: सेंसेक्स 850 अंक उछलकर 82,750 पर, निफ्टी 25,400 के पार


    नई दिल्ली। गुरुवार, 22 जनवरी को घरेलू शेयर बाजार ने पिछले तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद दमदार वापसी की। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और सेंसेक्स करीब 850 अंकों की छलांग लगाकर 82,750 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी में भी लगभग 250 अंकों की तेजी रही और यह 25,400 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस उछाल ने निवेशकों को बड़ी राहत दी और बाजार में दोबारा भरोसे का माहौल बना।

    बीएसई सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे, जबकि केवल 2 शेयरों में हल्का दबाव रहा। जोमैटो, एशियन पेंट्स और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया SBI के शेयरों में 4 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही और तेजी व्यापक आधार पर दिखाई दी।

    बाजार में इस मजबूती के पीछे सबसे अहम भूमिका ग्लोबल संकेतों की रही। अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक रुझानों ने घरेलू निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। इसके साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों ने भी बाजार की चिंता को कम किया। ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेने और नाटो देशों के साथ बातचीत के संकेत देने से भू-राजनीतिक तनाव को लेकर आशंकाएं घटी हैं। इसके अलावा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उनके सकारात्मक रुख से निवेशकों में भरोसा बढ़ा है।एशियाई बाजारों की बात करें तो वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 53,706 पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.87 प्रतिशत चढ़कर 5,001 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स हल्की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती का असर दिखा, जहां 21 जनवरी को डाउ जोंस 1.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था।

    निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs ने 1,787 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने 4,520 करोड़ रुपये की जोरदार खरीदारी कर बाजार को मजबूत सहारा दिया। दिसंबर 2025 में FIIs की भारी बिकवाली के बावजूद DIIs की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा है।गौरतलब है कि बुधवार को बाजार दबाव में रहा था। उस दिन सेंसेक्स 270 अंक गिरकर 81,909 पर और निफ्टी 75 अंक टूटकर 25,157 पर बंद हुआ था। लेकिन गुरुवार की तेजी ने संकेत दिया है कि बाजार में रिकवरी की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक ग्लोबल संकेतों, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी खबरों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।

  • Stock Market Update: बाजार शानदार लिवल पर खुला, सेंसेक्स में रिकॉर्ड 500 से अधिक अंकों की बढ़त

    Stock Market Update: बाजार शानदार लिवल पर खुला, सेंसेक्स में रिकॉर्ड 500 से अधिक अंकों की बढ़त


    नई दिल्ली। ग्रीनलैंड से जुड़े ट्रेड वॉर की चिंताओं में कमी आने के साथ भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए शानदार वापसी की। बीएसई सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंकों की तेजी के साथ 82,459.66 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 25,344.15 पर ट्रेडिंग शुरू हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 523 अंक ऊपर 82,432.69 पर और निफ्टी 152.55 अंक बढ़कर 25,310.05 पर था।

    व्यापक बाजार में तेजी, मिड और स्मॉलकैप भी हरे निशान में

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सभी प्रमुख सेक्टर हरे निशान में रहे, जिसमें निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो और बैंक इंडेक्स 1 प्रतिशत और निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.9 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

    कौन से शेयर चमके?

    सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में बढ़त रही। टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, बीईएल, एसबीआई, कोटक बैंक, सन फार्मा, ट्रेंट, एम एंड एम, बजाज फिनसर्व, इंडिगो और आईटीसी सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल थे। केवल आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में गिरावट दर्ज हुई।

    अमेरिका-यूरोप तनाव में कमी, ट्रेड वॉर का खतरा टला

    जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर बलपूर्वक कब्जे की धमकी से पीछे हटते हुए समझौते का फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसके साथ ही अमेरिका ने यूरोप पर टैरिफ लगाने से फिलहाल परहेज किया, जिससे अमेरिकी-यूरोपीय ट्रेड वॉर का खतरा टल गया। इन सकारात्मक संकेतों ने बाजार में रिलीफ रैली को जन्म दिया।

    शॉर्ट-कवरिंग और अगले दौर की तेजी की संभावना

    डॉ. विजयकुमार ने बताया कि बाजार में करीब 2 लाख शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स बने हुए हैं, जो शॉर्ट-कवरिंग के लिए अनुकूल स्थिति बनाते हैं। इसका मतलब है कि बाजार में आगे और तेजी की संभावना है। हालांकि, कंपनियों की तीसरी तिमाही के मुनाफे पर नए लेबर कोड से जुड़ी अतिरिक्त प्रावधानों का असर देखा गया है, लेकिन इसे बाजार एक बार के खर्च के रूप में ही देख रहा है।

    ट्रेड वॉर की चिंताओं में कमी और शॉर्ट-कवरिंग के चलते गुरुवार को सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, व्यापक बाजार और प्रमुख सेक्टरों में भी तेजी दर्ज की गई।

  • भारत बना निवेशकों की पसंद: 2025 में एफडीआई 73% बढ़ा, UNCTAD रिपोर्ट में खुलासा

    भारत बना निवेशकों की पसंद: 2025 में एफडीआई 73% बढ़ा, UNCTAD रिपोर्ट में खुलासा

    नई दिल्ली। वर्ष 2025 में भारत ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एफडीआई 73 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह उछाल ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर बना हुआ है। इसके बावजूद भारत सेवा, उत्पादन और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    सेवा क्षेत्र बना निवेश का सबसे बड़ा इंजन

    यूएनसीटीएडी के मुताबिक, एफडीआई में इस तेज वृद्धि की सबसे बड़ी वजह सेवा क्षेत्र में हुआ भारी निवेश है। वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) जैसे क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर पूंजी लगाई। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए भरोसेमंद बाजार बना दिया।

    उत्पादन क्षेत्र को भी मिला वैश्विक समर्थन

    सेवा क्षेत्र के साथ-साथ उत्पादन क्षेत्र में भी विदेशी निवेश बढ़ा है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक आपूर्ति शृंखला से भारत को जोड़ने वाली नीतियों ने इस क्षेत्र को मजबूती दी। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा, जिससे भारत की औद्योगिक क्षमता को नई गति मिली।

    एआई और डाटा सेंटर बने नए आकर्षण

    रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एआई और डाटा सेंटर सेक्टर ने विदेशी निवेश को नई दिशा दी। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स मॉनिटर के मुताबिक, पिछले साल की पहली तीन तिमाहियों में भारत में डाटा सेंटर्स में करीब 7 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जिससे भारत इस क्षेत्र में निवेश पाने वाले देशों में सातवें स्थान पर रहा। चौथी तिमाही में इसमें और तेजी आई।
    अक्टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश में एआई हब के लिए 15 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की, जबकि दिसंबर में माइक्रोसॉफ्ट ने एआई, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा सेंटर्स में 17.5 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया। इसी तरह अमेजन ने भी एआई और अन्य क्षेत्रों में 35 अरब डॉलर निवेश की योजना सामने रखी।

    वैश्विक परिदृश्य में भारत बना अपवाद

    वैश्विक स्तर पर वर्ष 2025 में एफडीआई 14 प्रतिशत बढ़कर 1.6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा, लेकिन यह बढ़ोतरी असमान रही। विकसित देशों में निवेश 43 प्रतिशत बढ़ा, जबकि विकासशील देशों में एफडीआई 2 प्रतिशत घट गया। ऐसे माहौल में भारत का 73 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत प्रदर्शन उसे एक सकारात्मक अपवाद बनाता है।
    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चीन में लगातार तीसरे साल एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई, जबकि भारत निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने में सफल रहा।

    निवेशकों का भरोसा अभी भी चुनौती

    यूएनसीटीएडी ने आगाह किया है कि आंकड़ों में दिख रही बढ़ोतरी पूरी तस्वीर नहीं बताती। अंतरराष्ट्रीय विलय एवं अधिग्रहण में गिरावट और परियोजना वित्त पोषण में कमी निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है। ऐसे में नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे केवल पूंजी प्रवाह ही नहीं, बल्कि वास्तविक निवेश और रोजगार सृजन पर भी ध्यान दें।

    वर्ष 2025 में भारत में एफडीआई 73% बढ़कर 47 अरब डॉलर पहुंचा, जहां सेवा, उत्पादन, एआई और डाटा सेंटर सेक्टर में बड़े वैश्विक निवेश ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल कर दिया।