Category: Economy

  • ठंड और कोहरे के चलते भारतीय रेलवे ने रद्द की 24 ट्रेनों की सेवाएं, यात्रा से पहले जरूर चेक करें लिस्ट

    ठंड और कोहरे के चलते भारतीय रेलवे ने रद्द की 24 ट्रेनों की सेवाएं, यात्रा से पहले जरूर चेक करें लिस्ट

    नई दिल्ली। बढ़ती ठंड और कोहरे के कारण भारतीय रेलवे ने यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 24 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। रात और सुबह के समय कम विजिबिलिटी के चलते कई रूट्स पर ट्रेनों की रफ्तार धीमी हो रही थी, जिससे लगातार लेट और सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे थे।

    रेलवे ने घोषणा की है कि ये 24 ट्रेनें 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक कई अहम रूट्स पर पूरी तरह रद्द रहेंगी। इस फैसले का असर दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम सहित कई बड़े राज्यों के लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है।

    यात्री सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना बनाते समय IRCTC या रेलवे इन्क्वायरी वेबसाइट पर ट्रेन की स्टेटस चेक करें। इससे आखिरी समय में रूट या ट्रेन बदलने की परेशानी से बचा जा सकता है।

    रद्द ट्रेनों की कुछ प्रमुख लिस्ट:

    14112 प्रयागराज जं.-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस – 25 फरवरी 2026 तक रद्द
    14111 मुजफ्फरपुर-प्रयागराज जं. एक्सप्रेस – 25 फरवरी 2026 तक रद्द
    22198 वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी)-कोलकाता एक्सप्रेस – 27 फरवरी 2026 तक रद्द
    12327 हावड़ा-देहरादून उपासना एक्सप्रेस – 27 फरवरी 2026 तक रद्द
    14003 मालदा टाउन-नई दिल्ली एक्सप्रेस – 28 फरवरी 2026 तक रद्द
    14523 बरौनी-अंबाला हरिहर एक्सप्रेस – 26 फरवरी 2026 तक रद्द
    14617 पूर्णिया कोर्ट-अमृतसर जनसेवा एक्सप्रेस – 2 मार्च 2026 तक रद्द
    15903 डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस – 27 फरवरी 2026 तक रद्द
    15620 कामाख्या-गया एक्सप्रेस – 23 फरवरी 2026 तक रद्द
    12873 हटिया-आनंद विहार एक्सप्रेस – 26 फरवरी 2026 तक रद्द
    22857 संतरागाछी-आनंद विहार एक्सप्रेस – 2 मार्च 2026 तक रद्द
    18103 टाटा-अमृतसर एक्सप्रेस – 25 फरवरी 2026 तक रद्द

    यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे टिकट बुक करने से पहले ट्रेन स्टेटस और वैकल्पिक रूट की जानकारी अवश्य जांच लें।

  • Gold & Silver Update: सोने-चांदी की कीमतों में मंदी, 22 जनवरी को सोने का रेट हुआ कम

    Gold & Silver Update: सोने-चांदी की कीमतों में मंदी, 22 जनवरी को सोने का रेट हुआ कम

    नई दिल्ली। Gold Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोने की कीमतों में गुरुवार, 22 जनवरी को जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 फरवरी, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा गुरुवार को 1,51,557 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,52,862 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था.

    22 जनवरी की सुबह 10:00 बजे, एमसीएक्स पर 5 फरवरी का एक्सपायरी वाला गोल्ड 1,50,170 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. जो कि पिछले दिन की बंद कीमत से लगभग 2700 रुपये की गिरावट दिखाता है. एमसीएक्स गोल्ड शुरुआती कारोबार में 1,53,784 रुपए के हाई लेवल पर पहुंचा था.
    एमसीएक्स पर 5 मार्च 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 3,05,753 रुपये (प्रति किलो) पर ट्रेड कर रहा था. जो कि पिछले दिन की बंद कीमत से लगभग 12800 रुपये की कमी दिखाता है. एमसीएक्स सिल्वर शुरुआती कारोबार में 3,25,602 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं कि आज आपके शहर में सोने और चांदी का ताजा भाव…..

    आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार)

    दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

    24 कैरेट – 1,54,460 रुपए
    22 कैरेट – 1,41,600 रुपए
    18 कैरेट – 1,15,880 रुपए

    मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

    24 कैरेट – 1,54,310 रुपए
    22 कैरेट – 1,41,450 रुपए
    18 कैरेट – 1,15,730 रुपए

    चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

    24 कैरेट – 1,54,910 रुपए
    22 कैरेट – 1,42,000 रुपए
    18 कैरेट – 1,18,500 रुपए

    कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

    24 कैरेट – 1,54,310 रुपए
    22 कैरेट – 1,41,450 रुपए
    18 कैरेट – 1,15,730 रुपए

    अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम)

    24 कैरेट – 1,54,360 रुपए
    22 कैरेट – 1,41,500 रुपए
    18 कैरेट – 1,15,780 रुपए

  • कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट

    कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर नकारात्मक रही जिससे इन वर्गों के लिए महंगाई के बोझ में राहत मिली है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सीपीआई-एल 0.04 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए (सीपीआई-आरएल) 0.11 प्रतिशत सालाना आधार पर दर्ज किया गया।

    मंत्रालय ने बताया कि खाद्य महंगाई इस दौरान कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73 प्रतिशत रही। इस नकारात्मक महंगाई का मुख्य कारण खाद्य उत्पादन में वृद्धि के साथ कीमतों में गिरावट है। हाल के महीनों में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में आई यह कमी विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है। इससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है और जीवन स्तर में सुधार की संभावना बढ़ती है।

    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो ने जून 2025 से कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2019=100 निर्धारित किया है। इस नए आधार वर्ष में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से आंकड़े एकत्रित किए गए। पुराने 1986-87=100 सीरीज को बदलकर सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल की नई सीरीज लाई गई है। नई सीरीज में सूचकांक की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दायरा और कवरेज काफी हद तक बढ़ाया गया और इसमें कार्यप्रणालीगत सुधार भी किए गए।

    इस बीच सामान्य खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2025 में 1.33 प्रतिशत रही जो नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी। वहीं थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर दिसंबर में 0.83 प्रतिशत दर्ज की गई जबकि नवंबर में यह -0.32 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है।

    आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई दर करीब 2 प्रतिशत रह सकती है। इसकी वजह जीएसटी में कटौती और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट को बताया गया है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई में आई यह कमी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे उनकी खरीद क्षमता बढ़ती है और जीवन यापन में आसानी होती है। सरकार की नीतियों और उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

  • डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा ‘संपन्न’ पोर्टल, पेंशनरों को मिलेगी ऑनलाइन सुविधा

    डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा ‘संपन्न’ पोर्टल, पेंशनरों को मिलेगी ऑनलाइन सुविधा


    नई दिल्ली। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने एक बड़ी पहल की है। अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए संपन्न पोर्टल को डिजीलॉकर से जोड़ दिया गया है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनर अपनी पेंशन संबंधित जरूरी दस्तावेज जैसे ई-पेंशन पेमेंट ऑर्डरई-पीपीओ ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर कम्यूटेशन ऑर्डर और फॉर्म-16 घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

    संपन्न पेंशन पोर्टल कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्सCGCA द्वारा विकसित किया गया है। दूरसंचार विभाग ने इस पहल के तहत अपने सभी पेंशनरों को इंटीग्रेशन की जानकारी दे दी है। अब पेंशनर पोर्टल पर अपने पीपीओ नंबर को दर्ज कर गेट डॉक्यूमेंट पर क्लिक करेंगे और सिस्टम उनके अनुरोध के अनुसार आवश्यक दस्तावेज तैयार कर देगा।संचार मंत्रालय के अनुसार इस कदम से पेंशनर सीधे अपने डिजीलॉकर अकाउंट में कम्युनिकेशन स्वीकृति आदेश फॉर्म-16 और अन्य अहम दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। इससे दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और कागज की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त होगी। साथ ही बैंकिंग मेडिकल रिइंबर्समेंट या अन्य आधिकारिक प्रक्रियाएं पहले से अधिक आसान और त्वरित हो जाएंगी।

    दिल्ली के प्रधान संचार लेखा नियंत्रक आशीष जोशी ने कहा कि यह पहल पेंशनरों के समय और पैसे की बचत करेगी क्योंकि उन्हें अब कागजी दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।पेंशनर इस सेवा का उपयोग डिजीलॉकर.गव.इन पर आधार के माध्यम से लॉगिन करके कर सकते हैं। लॉगिन के बाद अपना पीपीओ नंबर लिंक कर तुरंत जरूरी दस्तावेज डाउनलोड किए जा सकते हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 दिसंबर 2018 को देश को समर्पित किया गया संपन्न पोर्टल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेंशनर-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ है। इस पोर्टल के माध्यम से पेंशन की पूरी प्रक्रिया – आवेदन प्रोसेसिंग ई-पीपीओ जारी करना भुगतान लेखा-जोखा ऑडिट और शिकायत निवारण – पूरी तरह डिजिटल हो गई है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों की जिंदगी आसान हुई है।सरकार की यह पहल न केवल पेंशनरों की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को साकार करने में भी एक अहम कदम साबित होगी।

  • वनप्लस इंडिया ने परिचालन बंद करने की अफवाहों को किया खारिज, सीईओ बोले- स्थिति सामान्य

    वनप्लस इंडिया ने परिचालन बंद करने की अफवाहों को किया खारिज, सीईओ बोले- स्थिति सामान्य


    नई दिल्ली। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि वनप्लस इंडिया भारत में अपने ऑपरेशन बंद करने जा रही है। इस खबर के सामने आते ही कंपनी ने बुधवार को इसे पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि उनके संचालन पूरी तरह से सामान्य हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वनप्लस के सीईओ रॉबिन लियू ने एक पोस्ट में कहा,वनप्लस इंडिया और उसके संचालन के बारे में फैल रही कुछ गलत जानकारियों को मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। हम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।- उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में आई अपुष्ट खबरें पूरी तरह झूठी हैं और सभी पक्षकारों से आग्रह किया कि वे आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि किए बिना कोई जानकारी साझा न करें।कंपनी की इस सफाई ऐसे समय में आई है जब भारत में स्मार्टफोन निर्माताओं को कड़ी सुरक्षा जांच और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। वनप्लस 2013 में स्वतंत्र ब्रांड के रूप में स्थापित हुआ थालेकिन इसकी ओप्पो के साथ काफी करीबी साझेदारी है। दोनों कंपनियां बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स ग्रुप का हिस्सा हैं और निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों के बीच निकटता है।

    वनप्लस भारतीय स्मार्टफोन बाजार के मध्य-प्रीमियम सेगमेंट में सक्रिय है। 2025 की तीसरी तिमाही में कंपनी की वृद्धि सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत रही और बाजार हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई। इस सेगमेंट में सैमसंग शीर्ष पर हैउसके बाद ओप्पो और फिर वनप्लस का स्थान है।आईडीसी के अनुसार2025 की तीसरी तिमाही में भारत का स्मार्टफोन बाजार पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयाजिसमें सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल बिक्री 48 मिलियन यूनिट तक पहुंची। इस अवधि में भारत से स्मार्टफोन की विदेशी शिपमेंट लगभग 79.03 बिलियन डॉलर रहीजिसमें एप्पल के आईफोन का हिस्सा लगभग 75 प्रतिशत यानी 22 बिलियन डॉलर से अधिक रहा।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि सेमीकंडक्टर उत्पादन बढ़ने से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में और वृद्धि होने की उम्मीद है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया हैजहां घरेलू स्तर पर बिकने वाले 99 प्रतिशत से अधिक फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैंजिससे देश की विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में महत्व बढ़ गया है।वनप्लस इंडिया की स्थिति स्पष्ट है – कंपनी भारत में कामकाज जारी रखेगी और स्मार्टफोन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मार्च 2026 में समाप्त होने वाली स्मार्टफोन पीएलआई योजना के बावजूद सरकार कथित तौर पर समर्थन बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैजिससे भारत में स्मार्टफोन उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मिलते हैं।

  • मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी

    मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित आमदनी और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को मजबूत बनाना है।
    सरकार ने कहा है कि योजना का प्रचार-प्रसार, विकास और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता जारी रहेगी। इसका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा गरीब और कम आय वाले लोग इस योजना से जुड़ सकें।

    यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
    इससे असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों को बुढ़ापे में स्थायी आमदनी मिलेगी।

    यह कदम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा।
    सरकार जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, और वित्तीय सहायता जारी रखेगी।
    यदि किसी बैंक/संस्था को योजना चलाने में आर्थिक कमी होती है, तो गैप फंडिंग के जरिए उसे पूरा किया जाएगा, ताकि योजना टिकाऊ बनी रहे।

    अटल पेंशन योजना कब शुरू हुई?
    9 मई 2015 को अटल पेंशन योजना की शुरुआत हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था असंगठित क्षेत्र के लोगों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन का लाभ देना, ताकि वे अपने बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहें।

    पेंशन कितनी मिलती है?

    योजना के अनुसार 60 साल की उम्र के बाद लाभार्थी को ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिल सकती है।

    पेंशन राशि इस पर निर्भर करती है:
    आपकी उम्र
    आपने कितनी पेंशन चुनी
    आपकी कुल जमा राशि

    अब तक कितने लोग जुड़े?
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा योजना की विश्वसनीयता और लोकप्रियता को दर्शाता है।

    अटल पेंशन योजना की पात्रता (Eligibility)
    भारतीय नागरिक होना चाहिए
    उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए
    आपके पास बैंक/पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए
    1 अक्टूबर 2022 से यदि आप इनकम टैक्सपेयर हैं या रहे हैं, तो आप शामिल नहीं हो सकते
    जो व्यक्ति NPS या अन्य पेंशन स्कीम में नहीं है, वह जुड़ सकता है

    कितना निवेश करना पड़ता है?
    आप अपनी पेंशन राशि चुन सकते हैं:
    ₹1,000 / ₹2,000 / ₹3,000 / ₹4,000 / ₹5,000
    मासिक योगदान आपकी उम्र और चुनी गई पेंशन पर निर्भर करता है।
    जितनी कम उम्र में शुरू करेंगे, उतना कम मासिक योगदान देना पड़ेगा।

    उम्र के अनुसार मासिक योगदान
    एंट्री की उम्र ₹1,000 ₹2,000 ₹3,000 ₹4,000 ₹5,000
    18 ₹42 ₹84 ₹126 ₹168 ₹210
    20 ₹50 ₹100 ₹150 ₹198 ₹248
    25 ₹76 ₹151 ₹226 ₹301 ₹376
    30 ₹126 (approx) ₹252 ₹378 ₹504 ₹630 (approx)
    35 ₹231 (approx) ₹462 ₹693 ₹924 ₹1,154
    40 ₹471 (approx) ₹942 ₹1,413 ₹1,884 ₹2,354
    नोट: यह राशि इंडिकेटिव है।

    सटीक राशि के लिए बैंक या आधिकारिक APY कैलकुलेटर (npstrust.org.in या PFRDA वेबसाइट) देखें।

    अटल पेंशन योजना में निवेश कैसे करें?
    नजदीकी बैंक/पोस्ट ऑफिस जाएं
    APY आवेदन फॉर्म भरें
    आधार, मोबाइल नंबर, नामिनेशन, बैंक डिटेल्स भरें
    पेंशन राशि चुनें
    बैंक ऑटो-डेबिट सेट करेगा और PRAN जारी करेगा
    कुछ बैंक ऐप्स/पोर्टल से भी आवेदन हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में बैंक शाखा से ही शुरू होता है।

    अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। यह कदम उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देगा और देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करेगा।

  • India & PAX SILICA: अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट में शामिल होने से आपूर्ति नेटवर्क मजबूत होगा

    India & PAX SILICA: अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट में शामिल होने से आपूर्ति नेटवर्क मजबूत होगा

    नई दिल्ली: चीन और पश्चिमी देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बढ़ते तनाव के बीच भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल पैक्स सिलिका में शामिल होने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कदम भारत को विकसित देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। हालांकि, नई दिल्ली यह सुनिश्चित करेगी कि इस प्रक्रिया में उसकी रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित न हो।

    पैक्स सिलिका क्या है?

    पैक्स सिलिका एक अंतरराष्ट्रीय समूह है, जिसमें सिंगापुर, इजराइल, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। यह समूह सेमीकंडक्टर निर्माण और एडवांस टेक्नोलॉजी आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग के लिए काम करता है। इसका उद्देश्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और अत्याधुनिक एआई सिस्टम जैसे क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों को दूर करना है।

    भारत जैसे विकासशील देश के लिए, पैक्स सिलिका में शामिल होने से सब्सिडी, खरीद प्राथमिकता और संतुलित आयात नियमों जैसी नीतिगत गुंजाइश बनाए रखना संभव होगा, जो कुछ अन्य सदस्यों के साथ हमेशा मेल न खा सके।

    भारत की तैयारी और रणनीति

    भारत जापान और सिंगापुर जैसे देशों के साथ मिलकर लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर काम कर रहा है। इससे न केवल आपूर्ति में स्थिरता आएगी, बल्कि उच्च तकनीक निवेश और स्थानीय विनिर्माण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

    नई दिल्ली में अपने पहले दिन, अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने घोषणा की कि भारत को पैक्स सिलिका में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का विकास

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महीने कहा कि भारत संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र—डिज़ाइन, विनिर्माण, ऑपरेटिंग सिस्टम, अनुप्रयोग, सामग्री और उपकरण—में एक प्रमुख खिलाड़ी बनेगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष चार नए सेमीकंडक्टर प्लांट वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे, जिससे भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी और बढ़ेगी।

    भारत के लिए महत्व

    पैक्स सिलिका में शामिल होने से भारत को:

    अमेरिका और अन्य विकसित देशों के साथ साझेदारी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    विदेशी निवेश आकर्षित करने और उन्नत तकनीक लाने का अवसर मिलेगा।

    आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और संकट प्रबंधन क्षमता बढ़ेगी।

    साथ ही, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और नीतिगत स्वतंत्रता को बनाए रख सकता है, ताकि देश के विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर कोई असर न पड़े।

    इस पहल से भारत वैश्विक तकनीकी और आर्थिक परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है, जबकि उसकी संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता भी मजबूत होगी।

  • Zomato अपडेट: दीपिंदर गोयल की विदाई, कंपनी की कमान अब इस शख्स के हाथों में

    Zomato अपडेट: दीपिंदर गोयल की विदाई, कंपनी की कमान अब इस शख्स के हाथों में

    नई दिल्ली।  Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने कंपनी में ग्रुप CEO का पद छोड़ने का फैसला किया है। इस बदलाव की घोषणा Eternal ने बड़ी लीडरशिप स्ट्रक्चर में बदलाव के तहत की। शेयरहोल्डर की मंज़ूरी मिलने के बाद गोयल ने पद छोड़ दिया और अब तुरंत प्रभाव से अलबिंदर ढींडसा को नया ग्रुप CEO नियुक्त किया गया है।

    क्यों छोड़ा दीपिंदर ने पद?

    दीपिंदर गोयल का कहना है कि वे अब नई चीज़ों को आज़माना चाहते हैं, जिसमें अधिक रिस्क लेना शामिल है। उनका मानना है कि Eternal जैसी पब्लिक कंपनी में स्ट्रक्चर के बाहर ही ऐसे कदम बेहतर तरीके से लिए जा सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कंपनी को ऐसी लीडरशिप की ज़रूरत है जो मुख्य बिज़नेस पर फोकस करे और अनुशासित ढंग से कंपनी को आगे बढ़ाए।

    अलबिंदर ढींडसा: नए CEO की प्रोफ़ाइल

    दीपिंदर गोयल की जगह अब अलबिंदर ढींडसा यानी अल्बी कंपनी के ग्रुप CEO के तौर पर जिम्मेदार होंगे। ढींडसा कंपनी की ऑपरेटिंग प्राथमिकताओं और बिज़नेस से जुड़े सभी अहम फैसलों को संभालेंगे। उनकी लीडरशिप में ब्लिंकिट को ब्रेक-ईवन तक लाने और इसे टॉप प्रायोरिटी बनाए रखने के अनुभव को देखा गया है।

    अलबिंदर की नई भूमिका और जिम्मेदारियां

    अलबिंदर ढींडसा के नेतृत्व में Zomato की रणनीति और बिज़नेस फैसलों की दिशा स्पष्ट होगी। वे ऑपरेटिंग टीम के साथ मिलकर कंपनी के मुख्य लक्ष्यों पर फोकस करेंगे और नई योजनाओं को कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दीपिंदर गोयल का यह कदम कंपनी में नए नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, जबकि वे खुद नई रिस्क और प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज

    फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज


    नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान और यूपीआई सेवाओं की अग्रणी कंपनी फोनपे को अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO के लिए SEBI से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही कंपनी अब अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस DRHP दाखिल करने की तैयारी में है। अनुमान है कि फोनपे का यह IPO लगभग ₹12,000 करोड़ का होगा, जो भारतीय शेयर बाजार में डिजिटल पेमेंट सेक्टर की मौजूदगी को और मजबूत करेगा।

    इस IPO में कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS के जरिए लाया जाएगा, यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेचेंगे। कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर लगभग ₹1.33 लाख करोड़ आंकी गई है। यह पेटीएम के ₹18,000 करोड़ IPO के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।

    IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे निवेशक अपनी संयुक्त हिस्सेदारी का लगभग 10% बेच सकते हैं। वर्तमान में वॉलमार्ट का शेयर फोनपे में 73% से अधिक है। IPO प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे प्रमुख निवेश बैंकों को सलाहकार नियुक्त किया है।फोनपे की सबसे बड़ी ताकत उसका UPI कारोबार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी लगभग 45% है, जबकि गूगल पे के पास 35% की हिस्सेदारी है। फोनपे हर महीने लगभग 1,000 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करता है, जिनका कुल मूल्य ₹12 लाख करोड़ से अधिक है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।

    फोनपे ने इस साल 16 अप्रैल 2025 को खुद को प्राइवेट से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित किया था और अपने नॉन-पेमेंट कारोबार को अलग सब्सिडियरी में विभाजित किया था।विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। DRHP दाखिल होने के बाद इश्यू की समयसीमा, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि के बारे में और स्पष्टता सामने आएगी। वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और भारतीय फिनटेक सेक्टर की परिपक्वता को देखते हुए यह इश्यू पब्लिक और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक अवसर होगा।

  • 2025 की रियल एस्टेट रिपोर्ट: MMR रीजन में सबसे ज्यादा जमीनों के सौदे, देश में कुल 126 ट्रांज़ैक्शन हुए

    2025 की रियल एस्टेट रिपोर्ट: MMR रीजन में सबसे ज्यादा जमीनों के सौदे, देश में कुल 126 ट्रांज़ैक्शन हुए

    नई दिल्ली। भारत में 2025 में कुल 126 जमीन सौदे संपन्न हुए, जिनमें सबसे अधिक सौदे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में हुए। एनारॉक रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, एमएमआर में 500 एकड़ से अधिक जमीन के 32 सौदे दर्ज हुए। बेंगलुरु में भी 454 एकड़ से अधिक के 27 सौदे संपन्न हुए। हालांकि कुल सौदों की संख्या 2024 के मुकाबले कम रही, लेकिन संपन्न सौदों का वॉल्यूम बढ़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिल्डर्स का भरोसा देश के प्रमुख और उभरते रियल एस्टेट बाजारों में बना हुआ है।

    अविकसित और टियर 1, 2, 3 शहरों में सौदे
    रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में हुए 126 सौदों में 1,877 एकड़ जमीन के 96 सौदे आवासीय विकास के लिए हुए। ये सौदे टियर 1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में बंटे हुए हैं। एनारॉक समूह के अध्यक्ष अनुज पुरी के अनुसार, एमएमआर में नियोजित विकास परियोजनाओं में आवासीय, वाणिज्यिक, डेटा सेंटर, औद्योगिक और भूखंड विकास शामिल हैं। पूरे देश में 2025 में कुल मिलाकर 3,772 एकड़ से अधिक भूमि के 126 अलग-अलग सौदे संपन्न हुए।

    दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में सौदे
    दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आवासीय, वाणिज्यिक और मिश्रित उपयोग परियोजनाओं के लिए लगभग 137.22 एकड़ भूमि के 16 सौदे हुए। शहरों के हिसाब से गुरुग्राम में 39.75 एकड़ के 4 सौदे, नोएडा में 41.28 एकड़ के 8 सौदे, दिल्ली में 30.89 एकड़ के 2 सौदे, ग्रेटर नोएडा में 12 एकड़ का 1 सौदा, और गाजियाबाद में 13.3 एकड़ का 1 सौदा हुआ।

    रियल एस्टेट मार्केट में बढ़ता निवेश और विकास
    रिपोर्ट दर्शाती है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी 2025 में कुल 2,192.8 एकड़ भूमि के कम से कम 16 सौदे संपन्न हुए। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि न केवल बड़े शहरों में बल्कि उभरते हुए शहरों में भी बिल्डर्स और निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में एमएमआर और बेंगलुरु में भूमि की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन इससे डेवलपर्स प्रमुख और रणनीतिक संपत्तियों पर निवेश करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।

    निष्कर्ष: रियल एस्टेट में भरोसा और भविष्य की संभावना
    2025 के जमीन सौदों का विश्लेषण यह बताता है कि भारत के बड़े और उभरते शहरों में रियल एस्टेट मार्केट में निवेशक भरोसा मजबूत है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में बड़े सौदे संपन्न होने से यह भी संकेत मिलता है कि देश का रियल एस्टेट सेक्टर भविष्य में और अधिक विकास और आर्थिक अवसर प्रदान कर सकता है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी बढ़ती गतिविधियां निवेशकों के विश्वास और आवासीय व वाणिज्यिक परियोजनाओं के विस्तार की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।