Category: Economy

  • शेयर बाजार में कमजोरी जारी: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में

    शेयर बाजार में कमजोरी जारी: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में



    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 21 जनवरी को कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 100 अंक से अधिक गिरकर 82,000 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया जबकि निफ्टी करीब 30 अंक फिसलकर 25,200 के आसपास रहा। शुरुआती सत्र से ही बाजार पर वैश्विक संकेतों और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 14 शेयर हरे निशान में रहे। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन रियल एस्टेट मीडिया और आईटी शेयरों में बिकवाली हावी रही। आईटी कंपनियों पर दबाव अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और डॉलर की मजबूती के कारण देखा गया।

    वैश्विक कारकों का असर घरेलू बाजारों पर साफ नजर आया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.26% गिरकर 4,873 पर, जापान का निक्केई 0.56% टूटकर 52,693 पर हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.13% गिरकर 26,453 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ 4,120 पर बंद हुआ अमेरिकी बाजारों में भी 20 जनवरी को भारी गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स 1.76% टूटकर 48,488 पर, नैस्डेक कंपोजिट में 2.39% और एसएंडपी 500 में 2.06% की गिरावट आई। इन कमजोर वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजारों पर भी देखा गया।

    संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों की बात करें तो 20 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों FII ने ₹2,191 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DII ने ₹2,755 करोड़ की खरीदारी की जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। दिसंबर 2025 में FIIs द्वारा ₹34,350 करोड़ की निकासी के मुकाबले DIIs ने ₹79,620 करोड़ का निवेश किया था जिससे बाजार में संतुलन बना रहा।शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO निवेशकों के रडार पर है। ₹118–₹124 के प्राइस बैंड वाला यह IPO कुल ₹1,907 करोड़ का है और 22 जनवरी तक खुला रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान वैश्विक अनिश्चितता और तीसरी तिमाही में कुछ बड़ी कंपनियों खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के कमजोर नतीजे प्रमुख वजह माने जा रहे हैं।इस प्रकार निवेशकों को वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

  • बजट 2026 से पहले वित्त मंत्रालय ने गिनाईं उपलब्धियां, टैक्स सुधारों और बड़े ऐलानों पर डाली नजर

    बजट 2026 से पहले वित्त मंत्रालय ने गिनाईं उपलब्धियां, टैक्स सुधारों और बड़े ऐलानों पर डाली नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान करीब 300 अंक गिरकर 82950 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी लगभग 100 अंकों की गिरावट के साथ 25450 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs की लगातार बिकवाली के कारण आया।

    बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में से 24 शेयर नुकसान में रहे जबकि केवल 6 शेयरों में हल्की तेजी दर्ज हुई। कंज्यूमर टेक और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया। जोमैटो और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3 प्रतिशत तक गिरावट आई जिसने सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव डाला।

    एशियाई बाजारों से भी अनुकूल संकेत नहीं मिले। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.22% गिरकर 52931 पर बंद हुआ हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.075% टूटकर 26543 पर रहा जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 0.30% गिरकर 4101 पर बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 4905 पर बना रहा लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।

    अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही। 16 जनवरी को डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.17% गिरकर 49359 पर बंद हुआ। नैस्डेक और एसएंडपी-500 में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह नरमी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर रही है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 19 जनवरी को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹3262 करोड़ की बिकवाली की जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने ₹4234 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को आंशिक सहारा दिया। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने ₹34350 करोड़ की बिकवाली की थी जबकि DIIs ने ₹79620 करोड़ का निवेश किया था जिसने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया।

    पिछले कारोबारी सत्र में भी सेंसेक्स 324 अंक गिरकर 83246 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 108 अंक टूटकर 25585 पर बंद हुआ। लगातार गिरावट से अल्पकालिक निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों का रुख और प्रमुख आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और सरकारी अपडेट तथा राष्ट्रीय-आंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 300 अंक फिसला; निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट

    शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 300 अंक फिसला; निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान करीब 300 अंक गिरकर 82950 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी लगभग 100 अंकों की गिरावट के साथ 25,450 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के कारण आया।बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में से 24 शेयर नुकसान में रहे जबकि केवल 6 शेयरों में हल्की तेजी दर्ज हुई। कंज्यूमर टेक और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया। जोमैटो और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3 प्रतिशत तक गिरावट आई जिसने सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव डाला।

    एशियाई बाजारों से भी अनुकूल संकेत नहीं मिले। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.22% गिरकर 52931 पर बंद हुआ, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.075% टूटकर 26,543 पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 0.30% गिरकर 4,101 पर बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 4,905 पर बना रहा, लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही। 16 जनवरी को डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.17% गिरकर 49,359 पर बंद हुआ। नैस्डेक और एसएंडपी-500 में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह नरमी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर रही है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 19 जनवरी को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹3,262 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने ₹4,234 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को आंशिक सहारा दिया। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने ₹34,350 करोड़ की बिकवाली की थी, जबकि DIIs ने ₹79,620 करोड़ का निवेश किया था, जिसने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया।

    पिछले कारोबारी सत्र में भी सेंसेक्स 324 अंक गिरकर 83,246 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 108 अंक टूटकर 25,585 पर बंद हुआ। लगातार गिरावट से अल्पकालिक निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा, विदेशी निवेशकों का रुख और प्रमुख आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और सरकारी अपडेट तथा राष्ट्रीय-आंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत

    भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत


    नई दिल्ली।
    रूसी तेल (Russian oil), वेनेजुएला (Venezuela), ईरान में प्रदर्शन (Iran protests) और ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा हर थोड़े समय बाद इन मुद्दों से शेयर बाजार (Stock market) सहमे हैं। इन सबके बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही। हालांकि कुछ सेक्टर में गिरावट है, स्मॉल कैप और मिड कैप में मुनाफावसूली चल रही है लेकिन सूचकांक इस गिरावट को दर्शा नहीं रहे हैं। इस संबंध में बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता से सवाल किए गए। पेश हैं उनके जवाब-

    विदेशियों की तेज बिकवाली से भी बाजार क्यों नहीं टूटा?
    अब भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशक-जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और ईपीएफओ लगातार खरीदारी कर रहे हैं। एसआईपी के जरिए बढ़ती रिटेल भागीदारी से हर महीने आने वाला स्थायी निवेश विदेशी बिकवाली की भरपाई कर देता है।

    क्या भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों से चल रहा है?
    हां, काफी हद तक। पहले बाजार विदेश निवेशकों के मूड पर निर्भर रहता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली का असर सीमित दिखता है। भारतीय बाजार का ढांचा बदल रहा है- देसी संस्थानों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड पर है, एसआईपी से रिटेल निवेश साल-दर-साल बढ़ रहा, बाजार में लंबी अवधि का पैसा ज्यादा आ रहा है।

    ज्यादातर शेयर गिर रहे हैं, फिर भी निफ्टी-सेंसेक्स क्यों टिके हैं?
    निफ्टी और सेंसेक्स कुछ बड़ी कंपनियों पर आधारित हैं। इन बड़े शेयरों का अधिमान इतना ज्यादा होता है कि अगर वे स्थिर रहें, तो सूचकांक भी स्थिर रहते हैं, चाहे बाकी शेयर गिर रहे हों। सूचकांकों की हकीकत यह है कि निफ्टी के शीर्ष 10 शेयरों का अधिमान 60% है, इसमें बैंक और आईटी सेक्टर का दबदबा है और छोटे शेयरों का असर सीमित है।

    सूचकांक में गड़बड़ी हो रही है?
    नहीं, इसे सूचकांक प्रबंधन कहना सही नहीं है। यह सूचकांकों की बनावट का असर है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयर पूरे सूचकांकों की दिशा तय करते हैं। यह ‘खेल’ संभव नहीं है क्योंकि सूचकांकों के नियम तय और पारदर्शी होते हैं, उनका अधिमान पहले से निर्धारित है, कोई रोज इनके उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    तो क्या बाजार की असली हालत सूचकांक इंडेक्स नहीं दिखा रहे?
    पूरी तरह नहीं। सूचकांक दिशा दिखाते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात नहीं। इस समय गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज्यादा है, यानी बाजार के भीतर करेक्शन चल रहा है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा क्यों टूट रहे हैं?
    इन शेयरों में पहले बहुत तेज तेजी आई थी। मूल्याकंन महंगे हो गए थे, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। साथ ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

    खुदरा निवेशकों की भूमिका कितनी अहम है?
    बहुत अहम। करोड़ों रिटेल निवेशक एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश कर रहे हैं। यह पैसा बाजार को स्थिरता देता है।

  • SBI Home Loan: ₹40 लाख का लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी, EMI कितनी आएगी?

    SBI Home Loan: ₹40 लाख का लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी, EMI कितनी आएगी?


    नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक SBI ने होम लोन की शुरुआती ब्याज दर 7.25 प्रतिशत रखी है। रिजर्व बैंक की रेपो रेट में कटौती के बाद होम लोन की ब्याज दरें कम हुई हैं, जिससे EMI पर बोझ घटा है। अगर आप SBI से 30 साल के लिए ₹40 लाख का होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो जानना जरूरी है कि आपकी मंथली सैलरी कितनी होनी चाहिए और EMI कितनी लगेगी।₹40 लाख का होम लोन लेने के लिए मंथली सैलरी

    SBI के मुताबिक 7.25% की ब्याज दर से 30 साल के लिए ₹40 लाख का होम लोन लेने के लिए आपकी मंथली सैलरी कम से कम ₹55,000 होनी चाहिए।ध्यान दें कि यह तभी संभव है जब आपके नाम पर कोई अन्य एक्टिव लोन न हो।

    EMI का हिसाब
    30 साल 360 महीने के लिए ₹40 लाख के होम लोन पर मासिक EMI लगभग ₹27,500 होगी। होम लोन की EMI आमतौर पर आपकी सैलरी का लगभग आधा हिस्सा होती है।

    क्रेडिट स्कोर और अन्य जरूरी बातें
    होम लोन लेने के लिए आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होना जरूरी है। खराब क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक आवेदन रिजेक्ट कर सकता है।बैंक आपके पुराने लोन अकाउंट और भुगतान इतिहास की भी जांच करता है।अच्छे क्रेडिट स्कोर पर ब्याज दर में छूट भी मिल सकती है।बेहतर ऑफर पाने के लिए अलग-अलग बैंकों के लोन प्रोडक्ट्स की तुलना करना फायदेमंद है।SBI का नया होम लोन प्लान उन लोगों के लिए आकर्षक है जो लंबी अवधि के लिए बड़ा लोन लेना चाहते हैं और अपनी EMI को नियंत्रित रखना चाहते हैं।

  • डव सॉफ्ट लिमिटेड ने लॉन्च किया CPaaS 2.0, एआई-संचालित मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म

    डव सॉफ्ट लिमिटेड ने लॉन्च किया CPaaS 2.0, एआई-संचालित मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म

    मुंबई। डव सॉफ्ट लिमिटेड, एक तेजी से बढ़ता क्लाउड-कम्युनिकेशन्स और CPaaS प्रदाता, ने CPaaS 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। यह एआई-संचालित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म उद्यमों को यूनिफाइड कम्युनिकेशन इकोसिस्टम के माध्यम से ग्राहक जुड़ाव को सरल, स्वचालित और स्केल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    CPaaS 2.0 व्हाट्सएप, एसएमएस, आरसीएस, इंस्टाग्राम, वॉयस, ईमेल और एआई-संचालित बॉट्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर यूनिफाइड वॉलेट द्वारा संचालित है। यह इंटीग्रेटेड अप्रोच बिलिंग को सरल बनाता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और व्यवसायों को एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से स्केल पर कम्युनिकेशन मैनेज करने में सक्षम बनाता है।
    प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग करके नियमित ग्राहक इंटरैक्शन्स को स्वचालित करता है, रिस्पॉन्स टाइम में सुधार करता है और चैनल उपयोग, परफोर्मेंस मेट्रिक्स तथा वॉलेट खपत में वास्तविक समय की दृश्यता प्रदान करता है। इसके वर्कफ्लो स्वचालित रूप से सबसे इफेक्टिव कम्युनिकेशन चैनल का चयन करते हैं, जिससे उद्यम लागतों को अनुकूलित कर सकें, जबकि प्राथमिक चैनल विफल होने पर बिल्ट इन फॉलबैक लॉजिक के माध्यम से मैसेज डिलीवरी सुनिश्चित होता है।
    CPaaS 2.0 दैनिक बिज़नेस कम्युनिकेशन को समर्थन देने के लिए एआई-सक्षम उपयोगिता टूल्स का एक सूट भी पेश करता है। इनमें सर्वे, कैलेंडरिक्स, सपोर्टिक्स, वॉयसएक्स, रिमाइंडरबॉक्स, डायनामिक पीडीएफ और डॉकएआई शामिल हैं, जो उद्यमों को फीडबैक कलेक्शन, अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग, कस्टमर सपोर्ट, वॉयस एंगेजमेंट, रिमाइंडर और पसंदीदा चैनलों पर पर्सनलाइज्ड दस्तावेज़ डिलीवरी को स्वचालित करने में सक्षम बनाते हैं।
    उन्नत उद्यम आवश्यकताओं के लिए, CPaaS 2.0 व्यवसायों को अपना खुद का एजेंटिक एआई बनाना संभव बनाता है, जो दोहराव वाले प्रश्नों को संभाल सकता है, सहायता टीमों की मदद कर सकता है और वर्कफ्लो को स्वचालित कर सकता है। एआई-सहायता प्राप्त एजेंट्स को सुझाए गए उत्तर, वार्तालाप सारांश और बुद्धिमान रूटिंग के साथ समर्थन प्रदान किया जाता है, जो स्केल पर उत्पादकता और ग्राहक अनुभव में सुधार करने में मदद करता है।
    लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए, राहुल भानुशाली, निदेशक, डव सॉफ्ट लि., ने कहा, “CPaaS 2.0 के साथ, फोकस व्यवसायों को कम्युनिकेशन को सरल बनाने में मदद करने पर है, जबकि एआई का उपयोग संचालन दक्षता और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। यह प्लेटफॉर्म कई चैनलों, बुद्धिमान वर्कफ्लो और एआई-संचालित टूल्स को इस तरह एक साथ लाता है जो जटिलता को कम करता है और उद्यमों के लिए स्केलेबल विकास को समर्थन देता है।”
    डव सॉफ्ट लिमिटेड प्लेटफॉर्म नवाचार, सुरक्षा और बुद्धिमत्ता-आधारित संचार क्षमताओं में निवेश करना जारी रखे हुए है। कंपनी उद्यमों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और तकनीकी भागीदारों के साथ निकट सहयोग कर रही है ताकि विकसित होते व्यवसाय संचार आवश्यकताओं का समाधान किया जा सके। इसके समाधान मिशन-क्रिटिकल उपयोग मामलों का समर्थन करने के लिए बनाए गए हैं, जहां विश्वसनीयता, अनुपालन, पारदर्शिता और विश्वास सर्वोपरि हैं, भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों दोनों में।

  • सस्ते कार लोन की दौड़: सरकारी बैंक दे रहे 7.50% से भी कम दर पर ऑफर!

    सस्ते कार लोन की दौड़: सरकारी बैंक दे रहे 7.50% से भी कम दर पर ऑफर!


    नई दिल्ली। अगर आप नई कार खरीदने के लिए ₹12 लाख का लोन लेने की सोच रहे हैं और सबसे कम ब्याज दर पर EMI चाहते हैं, तो कुछ सरकारी बैंक (Public Sector Banks) अभी भी सबसे बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं। जनवरी 2026 में कई प्रमुख सरकारी बैंकों ने कार लोन की ब्याज दरें 7.40% से शुरू रखी हैं, खासकर अच्छे CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों के लिए। हालांकि वास्तविक ब्याज दर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल, CIBIL स्कोर और बैंक संबंध पर निर्भर करेगी। सबसे सस्ती दर आम तौर पर उन्हीं ग्राहकों को मिलती है जिनका सिबिल स्कोर शानदार होता है।

    इन बैंकों की खास बात यह है कि वे प्री-पेमेंट पेनल्टी भी नहीं वसूल रहे हैं, यानी आप चाहें तो पहले भी लोन चुका सकते हैं बिना अतिरिक्त शुल्क के। कम ब्याज दर का फायदा यह होता है कि न सिर्फ मासिक EMI कम होगी, बल्कि कुल ब्याज भुगतान भी काफी बच जाएगा।

    सबसे पहले इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) का नाम आता है, जो नई कार के लिए 7.60% सालाना ब्याज दर पर लोन दे रहा है। बैंक की सुविधा के अनुसार यह लोन 84 महीने (7 साल) में चुकाया जा सकता है।

    इस लोन में पति/पत्नी, बेटा, बेटी, पिता, माता आदि की इनकम जोड़कर लोन की पात्रता बढ़ाई जा सकती है।

    दूसरा बैंक है केनरा बैंक, जो कार या व्हीकल लोन पर 7.95% सालाना दर पर लोन दे रहा है। यहां लोन की कोई ऊपरी सीमा नहीं है और नई गाड़ी के लिए 90% तक फाइनेंसिंग उपलब्ध है। इसके साथ ही, केनरा बैंक भी प्री-पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूलता। इसके अलावा, इस बैंक से आप दूसरी और की गाड़ियों के लिए भी फाइनेंसिंग ले सकते हैं।

    तीसरा विकल्प है यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जहां कार लोन की शुरुआती दर 7.50% है। यदि आपका सिबिल स्कोर अच्छा है और बाकी पात्रता पूरी होती है, तो आपको इतनी सस्ती दर पर लोन मिल सकता है।

    नई चार पहिया गाड़ी खरीदने पर इस बैंक में ₹1000 + GST प्रोसेसिंग फीस देनी होती है।

    चौथा बैंक है बैंक ऑफ इंडिया (BOI), जो 7.60% की शुरुआती ब्याज दर पर नई कार लोन दे रहा है। इस बैंक में ब्याज Daily Reducing Balance के आधार पर लिया जाता है, यानी हर घटते बैलेंस पर ब्याज कम होता जाता है। प्रोसेसिंग चार्ज लोन अमाउंट का 0.25% तक हो सकता है, जो ₹2,500 से ₹10,000 के बीच तय होता है। अगर आप इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद रहे हैं, तो प्रोसेसिंग फीस में 50% की छूट भी मिलती है।

    अब अगर आप यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से ₹12 लाख का कार लोन 4 साल (48 महीने) के लिए लेते हैं, तो 7.50% की शुरुआती दर पर EMI की गणना के अनुसार आपकी मंथली EMI ₹29,014.68 बनेगी। इस लोन पर कुल ₹1,92,704.75 ब्याज देना होगा और आप बैंक को कुल ₹13,92,704.75 चुकाएंगे।

    इन सरकारी बैंकों के ऑफर खासकर उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद हैं जिनका CIBIL स्कोर अच्छा है और वे कम ब्याज दर पर EMI लेकर कार खरीदना चाहते हैं।

  • FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?

    FD की सुरक्षा, EMI का खर्च, SIP की ताकत: 20 साल बाद किसका पलड़ा भारी?


    नई दिल्ली। आज के समय में निवेश के लिए लोगों के पास तीन बड़े रास्ते हैंFD, EMI और SIP। FD को सुरक्षित माना जाता है, EMI से लोग अपनी जरूरतें पूरी करते हैं, जबकि SIP धीरे-धीरे पैसा बढ़ाने का काम करता है। लेकिन सवाल यह है कि 20 साल बाद कौन आपको अमीर बना सकता है? अगर आप आज अपनी कमाई का एक हिस्सा इन तीनों में से किसी भी रास्ते पर लगाते हैं, तो 20 साल बाद आपकी स्थिति कैसी होगी?
    चलिए एक आसान कैलकुलेशन के जरिए समझते हैं कि FD की सीमा क्या है, EMI का नुकसान कितना भारी है और SIP की कंपाउंडिंग पावर कितनी मजबूत है।

    सबसे पहले FD की बात करें। FD को भारत में भरोसे और सुरक्षा का दूसरा नाम माना जाता है।  20 साल बाद आपका फंड लगभग ₹52 लाख तक पहुंच सकता है। लेकिन अगर आप महंगाई को भी ध्यान में रखें, तो 20 साल बाद उस पैसे की असली वैल्यू लगभग ₹15-20 लाख के आसपास ही रह सकती है।

    इसका मतलब FD आपके पैसे को बचाती है, लेकिन महंगाई के हिसाब से बढ़ा नहीं पाती। FD में रिटर्न कम होने के कारण आपका पैसा “सुरक्षित” जरूर रहता है, लेकिन वह अमीर नहीं बनाता।

    अब EMI की बात करें। EMI आमतौर पर लोगों को तुरंत सुख देती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके लिए भारी पड़ सकती है। जब आप किसी पर्सनल लोन या लग्जरी कार के लिए 20 साल तक ₹10,000 EMI भरते हैं, तो आप कुल मिलाकर लगभग ₹24 लाख तो दे ही देते हैं, साथ ही बैंक को ब्याज में लगभग ₹15-20 लाख अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। 20 साल बाद आपके पास केवल एक पुरानी चीज बचती है जिसकी वैल्यू काफी कम हो चुकी होती है।

    EMI असल में आपकी फ्यूचर की कमाई को आज ही खर्च कर देती है और आपके लिए एक लंबा ब्याज का बोझ छोड़ जाती है। इसलिए EMI आपको अमीर नहीं बनाती, बल्कि बैंक को अमीर बनाती है।

    तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प SIP है। SIP में आप छोटे-छोटे निवेश करते हैं और कंपाउंडिंग की ताकत से लंबे समय में बड़ा फंड बनाते हैं। अगर आप हर महीने ₹10,000 की SIP करते हैं और औसतन 12% रिटर्न मानें, तो 20 साल बाद आपका निवेश लगभग ₹24 लाख होकर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा बन सकता है। और अगर रिटर्न 15% रहे तो यह राशि ₹1.5 करोड़ तक भी पहुंच सकती है।

    SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव को अपने पक्ष में इस्तेमाल करता है। शुरुआती सालों में मार्केट गिरती है तो units ज्यादा मिलते हैं, और बाद में जब मार्केट बढ़ता है तो वही units ज्यादा लाभ देती हैं।

    अब 20 साल की जंग में किसका पलड़ा भारी है? FD सुरक्षित है, लेकिन महंगाई के हिसाब से अमीर नहीं बनाती। EMI आपको तुरंत सुविधा देती है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी कमाई को खा जाती है और ब्याज के बोझ से आपकी संपत्ति घटती है।

    वहीं SIP में जोखिम जरूर है, लेकिन लंबे समय में यह कंपाउंडिंग के जरिए सबसे ज्यादा फायदा देता है। अगर आपका लक्ष्य 20 साल में “वेल्थ” बनाना है और आप निवेश को समय के साथ बढ़ते देखना चाहते हैं, तो SIP सबसे बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
    (नोट: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।)
  • 45–54 साल की उम्र का अर्निंग रिपोर्ट कार्ड: आप कितना कमा रहे हैं और कितना होना चाहिए? समझें पूरा A to Z हिसाब

    45–54 साल की उम्र का अर्निंग रिपोर्ट कार्ड: आप कितना कमा रहे हैं और कितना होना चाहिए? समझें पूरा A to Z हिसाब

    नई दिल्ली।  ज़िंदगी की ‘हाफ सेंचुरी’ यानी 45 से 54 साल का दौर बाहर से जितना स्थिर दिखता है, भीतर से उतना ही उथल-पुथल भरा होता है। करियर के इस फेज़ में अनुभव आपकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका होता है, लेकिन जिम्मेदारियों का पहाड़ भी लगातार दबाव बढ़ाता है-बच्चों की महंगी कॉलेज फीस, होम लोन की भारी EMI और सिर पर मंडराती रिटायरमेंट की चिंता। इस उम्र में स्ट्रेस सिर्फ बढ़ता नहीं, बल्कि एक नए स्तर पर पहुंच जाता है।

    1. आप ‘कमाई’ की रेस में कहां खड़े हैं?

    भारत में 45–54 साल की उम्र को आमतौर पर ‘पीक अर्निंग इयर्स’ कहा जाता है। इस उम्र तक करियर अपने सबसे मजबूत फेज़ में होता है और कमाई भी जीवन की सबसे ऊंची सीढ़ी पर पहुंचने की उम्मीद होती है।

    बड़ी प्राइवेट कंपनियों में सीनियर या लीडरशिप पोज़िशन वालों की मासिक कमाई ₹2 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है।

    20–25 साल के अनुभव वाले मिड से सीनियर लेवल प्रोफेशनल्स ₹80,000 से ₹1.5 लाख प्रति माह कमाते हैं।

    सरकारी नौकरी में यह आंकड़ा ₹70,000 से ₹1.4 लाख तक होता है, जिसमें पेंशन भी शामिल होती है।

    स्थिर और जमे हुए बिज़नेस ओनर की मासिक कमाई ₹1.2 लाख से ऊपर मानी जाती है।

    2. कमाई का ग्राफ गिरना क्या है?

    अगर आपकी कमाई पिछले 2–3 साल से वहीं की वहीं अटकी हुई है, तो यह अलर्ट है। बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल खर्च हर साल 8–10% की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इस उम्र में इनकम ग्रोथ ठहरना आगे चलकर रिटायरमेंट को टेंशन-फ्री बनाना मुश्किल कर सकता है।

    3. ‘सैलरी’ के साथ ‘नेट वर्थ’ भी समझें

    सैलरी सिर्फ खातों में आने वाला नंबर है, असली आर्थिक तस्वीर नेट वर्थ से मापी जाती है। 45–50 साल की उम्र तक आपकी संपत्ति-घर, सोना, म्यूचुअल फंड, पीएफ और अन्य सेविंग्स-आपकी सालाना कमाई का कम से कम 10 गुना होनी चाहिए।

    उदाहरण: अगर आपकी सालाना आय ₹15 लाख है, तो नेट वर्थ लगभग ₹1.5 करोड़ होना चाहिए।

    4. क्या आप पीछे रह गए हैं?

    AI और नई स्किल्स सीखें: डिजिटल टूल्स, डेटा एनालिटिक्स और AI सीखकर प्रोफेशनल डिमांड बढ़ाएं।

    साइड हसल शुरू करें: रोज़ सिर्फ 2 घंटे देकर कंसल्टेंसी या फ्रीलांसिंग शुरू करें।

    पैसिव इनकम बनाएं: पैसिव निवेश से पैसे को आपके लिए काम करने दें।

    5. 45–54 की उम्र ‘रेस्ट’ की नहीं, एक्टिव होने की है

    यह उम्र करियर की बेस्ट इनिंग खेलने का समय है। अनुभव, नेटवर्क और समझ—तीनों आपके पक्ष में हैं। दूसरों की कमाई देखकर निराश होने के बजाय रणनीति बदलें और धीरे-धीरे अपना लेवल ऊपर ले जाएँ। सही निर्णय लेने से 60 के बाद की जिंदगी सिर्फ आरामदायक नहीं, बल्कि किंग-साइज़ बन सकती है।

    FAQs

    Q1. 45–54 साल को ‘पीक अर्निंग इयर्स’ क्यों कहा जाता है?
    क्योंकि इस उम्र में अनुभव, सीनियरिटी और नेटवर्क मजबूत हो जाते हैं और कमाई अपने शीर्ष पर होती है।

    Q2. इस उम्र में औसत मासिक कमाई कितनी है?
    ₹80,000 से ₹5 लाख तक, प्रोफाइल और सेक्टर के आधार पर।

    Q3. क्या केवल सैलरी देखकर खुद को जज करना सही है?
    नहीं। नेट वर्थ-संपत्ति और निवेश-अधिक महत्वपूर्ण होती है।

    Q4. 50 की उम्र तक नेट वर्थ कितनी होनी चाहिए?
    सालाना आय का कम से कम 10 गुना।

    Q5. अगर कमाई ग्रोथ नहीं है, तो क्या करें?
    नई स्किल्स सीखें, साइड हसल शुरू करें और पैसिव इनकम पर फोकस करें।

  • प्राइवेट कर्मचारियों को कब और कैसे मिलती है पेंशन? 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का पूरा गणित समझिए

    प्राइवेट कर्मचारियों को कब और कैसे मिलती है पेंशन? 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का पूरा गणित समझिए


    नई दिल्ली । निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन एक बड़ा सहारा होती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत चलाई जा रही कर्मचारी पेंशन योजना इसी उद्देश्य से बनाई गई है लेकिन इसके नियम और गणित अक्सर लोगों को उलझा देते हैं। कई कर्मचारी यह नहीं समझ पाते कि पेंशन कब मिलेगी कितनी मिलेगी और इसके लिए कौनकौन सी शर्तें जरूरी हैं। अगर आप भी प्राइवेट नौकरी करते हैं तो ईपीएफ और ईपीएस के इस सिस्टम को समझना बेहद जरूरी है। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपकी सैलरी से कटने वाला पीएफ दो हिस्सों में बंटता है। पहला है ईपीएफ जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है और इस पर ब्याज मिलता है।
    दूसरा है ईपीएस जिसमें केवल नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा जाता है। यही ईपीएस फंड आगे चलकर आपकी मासिक पेंशन का आधार बनता है। प्राइवेट कर्मचारियों को पेंशन पाने के लिए दो सबसे अहम शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहली शर्त है कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा। इसका मतलब यह है कि आपने कुल मिलाकर 10 साल तक ईपीएस में योगदान किया हो। अगर आप बीच-बीच में नौकरी बदलते हैं तो अपना पीएफ अकाउंट ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है ताकि आपकी सर्विस की अवधि जुड़ती रहे। दूसरी शर्त है उम्र। ईपीएस नियमों के अनुसार नियमित पेंशन 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद ही शुरू होती है।

    हालांकि ईपीएफओ कुछ मामलों में समय से पहले पेंशन का विकल्प भी देता है। यदि आपकी उम्र 50 साल हो चुकी है और आपने 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी कर ली है तो आप अर्ली पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इसमें एक नुकसान भी है आपकी पेंशन की राशि हर साल के लिए 4 प्रतिशत कम कर दी जाती है। यानी 58 साल से पहले जितने साल पेंशन लेंगे उतनी कटौती होगी। अगर कोई कर्मचारी 10 साल की सेवा पूरी करने से पहले नौकरी छोड़ देता है तो उसे मासिक पेंशन नहीं मिलती। ऐसे मामलों में वह ईपीएस का पैसा एकमुश्त निकाल सकता है। वहीं अगर 10 साल की सेवा पूरी हो चुकी है लेकिन उम्र 58 साल नहीं हुई है तो कर्मचारी स्कीम सर्टिफिकेट ले सकता है। यह सर्टिफिकेट भविष्य में पेंशन पाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

    पेंशन की गणना एक तय फॉर्मूले से होती है। इसका सामान्य फॉर्मूला है मासिक पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70 यहां पेंशन योग्य वेतन आमतौर पर अंतिम वर्षों का औसत वेतन माना जाता है जिस पर ईपीएस का योगदान हुआ हो। कुल मिलाकर प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पेंशन का गणित 10 साल की सेवा और 58 साल की उम्र के इर्द-गिर्द घूमता है। अगर आप समय रहते नियम समझ लें और पीएफ ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाएं सही से पूरी करें तो रिटायरमेंट के बाद एक सुनिश्चित मासिक आय का लाभ उठा सकते हैं।