Category: Economy

  • फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक तेज झटके, सुरक्षित उतरा विमान, मामूली रूप से घायल यात्रियों का हुआ इलाज

    फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक तेज झटके, सुरक्षित उतरा विमान, मामूली रूप से घायल यात्रियों का हुआ इलाज

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान मंगलवार को अचानक आए तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान मौसम में आए अचानक बदलाव के कारण विमान को कुछ समय के लिए तेज झटकों का सामना करना पड़ा, जिससे विमान की ऊंचाई में भी क्षणिक बदलाव दर्ज किया गया। इस घटना में कई यात्रियों और कुछ क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आईं। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    एअर इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार फुकेत से दिल्ली आने वाली फ्लाइट एआई2379 उड़ान के दौरान अप्रत्याशित टर्बुलेंस से प्रभावित हुई। विमान में आए तेज झटकों के कारण कुछ यात्रियों को हल्की चोटें लगीं। एयरलाइन ने बताया कि किसी भी यात्री या क्रू सदस्य को गंभीर चोट नहीं आई है। एहतियात के तौर पर जिन लोगों को चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता महसूस हुई, उन्हें एयरपोर्ट पर मौजूद मेडिकल सुविधा केंद्र ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

    एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी की एयरपोर्ट टीम और मेडिकल स्टाफ ने प्रभावित यात्रियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। साथ ही संबंधित विमानन अधिकारियों के साथ मिलकर घटना की आवश्यक औपचारिकताओं और जांच प्रक्रिया में भी सहयोग किया जा रहा है। एयर इंडिया ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित यात्रियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार टर्बुलेंस उड़ान के दौरान मौसम में अचानक बदलाव, तेज हवाओं या वायुमंडलीय दबाव में परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो सकता है। अधिकांश मामलों में आधुनिक विमान ऐसे हालात से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर यात्रियों को सीट बेल्ट बांधकर रखने की सलाह लगातार दी जाती है, ताकि अचानक झटकों की स्थिति में चोट लगने का खतरा कम हो सके।

    हाल के महीनों में एअर इंडिया की उड़ानों से जुड़ी कुछ अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। जून में दिल्ली से रायपुर जा रही एक उड़ान लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना का शिकार हुई थी। उस समय भी विमान सुरक्षित उतरा था और किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को नुकसान नहीं पहुंचा था। घटना के बाद विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की गई और सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद उसे दोबारा परिचालन के लिए मंजूरी दी गई थी।

    ताजा घटना के बाद भी विमान की सुरक्षित लैंडिंग ने यात्रियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत दी है। एयरलाइन और विमानन अधिकारियों की ओर से पूरी घटना की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। फिलहाल सभी प्रभावित यात्रियों की स्थिति सामान्य बताई गई है और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

  • सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    नई दिल्ली । कारोबारी सप्ताह के पहले दिन घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी दर्ज की गई है। पिछले कारोबारी सत्रों में लगातार दर्ज की जा रही गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को सुधार देखने को मिला। बाजार में आई इस नई तेजी से निवेशकों और कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि ताजा रिकवरी के बावजूद चांदी अभी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी निचले स्तर पर बनी हुई है, जबकि सोने में भी सकारात्मक गति दर्ज की गई है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सितंबर एक्सपायरी वाले चांदी के अनुबंध ने सोमवार को बढ़त के साथ व्यापार की शुरुआत की। पिछले सत्र में चांदी का भाव 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था, जो नए सत्र की शुरुआत में उछलकर 2,18,709 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार चांदी की कीमत में प्रति किलोग्राम 1,511 रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में आई इस उछाल ने पिछले सप्ताह की सुस्ती को दूर करते हुए कारोबारियों में नया उत्साह भरा है।

    बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान चांदी की दरों में काफी दबाव देखा गया था। 24 जुलाई को चांदी का भाव 2,22,138 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था, जो सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन तक गिरकर 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया था। महज पांच कारोबारी दिनों के भीतर चांदी करीब 4,940 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई थी। सोमवार को दर्ज की गई तेजी से इस बड़ी गिरावट की आंशिक भरपाई संभव हो सकी है, लेकिन बाजार को पूरी तरह उबरने में अभी समय लग सकता है।

    यदि चांदी के लंबे समय के आंकड़ों और ऐतिहासिक प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो इस धातु ने चालू वर्ष के जनवरी महीने में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया था। उस दौरान चांदी की कीमत इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची थी। वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना करें तो चांदी अभी भी अपने उस रिकॉर्ड स्तर से लगभग 2,01,339 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती बिक रही है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में रिकवरी की बड़ी संभावना मौजूद है।

    सोने के बाजार में भी सप्ताह के पहले दिन मजबूती का रुख देखा गया। अगस्त एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का वायदा भाव पिछले कारोबारी दिन 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को बाजार खुलते ही यह बढ़त के साथ 1,41,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह सोने में प्रति 10 ग्राम 309 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के सकारात्मक संकेतों और स्थानीय मांग के कारण सोने को यह समर्थन प्राप्त हुआ है।

    पिछला हफ्ता सोने के लिए भी सुस्ती भरा साबित हुआ था। 24 जुलाई को सोने की कीमत 1,43,106 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थी, जो सप्ताहांत तक घटकर 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई थी। इस अवधि में सोने के दाम में करीब 1,595 रुपये प्रति 10 ग्राम की नरमी दर्ज की गई थी। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में कारोबारी अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति के संकेतों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सराफा बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

  • EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी

    EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी


    नई दिल्ली।
    संगठित क्षेत्र में काम करने वाले उन लाखों कर्मचारियों को भी पीएफ (PF) और पेंशन (Pension) का लाभ मिल सकता है, जिनका मासिक बेसिक वेतन (Monthly Basic Salary) 25,000 रुपये है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) (Employees’ Provident Fund – EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) (Employees’ Pension Scheme -EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इसे केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। नया नियम 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली सभी पंजीकृत कंपनियों पर लागू होगा। आखिरी बार इसमें सितंबर, 2014 में संशोधन किया गया था।


    पहले 30,000 रुपये करने का था प्रस्ताव

    सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने पहले वेतन सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ गहन समीक्षा के बाद 25,000 रुपये प्रति माह (बेसिक पे और डीए) पर अंतिम मुहर लगाई गई। 


    मौजूदा नियम

    वर्तमान नियमों के अनुसार, 15,000 तक बेसिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए ही ईपीएफओ में योगदान अनिवार्य था। इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों के पास ईपीएफ से बाहर रहने का विकल्प था।


    कंपनियों और सरकारी खजाने पर पड़ेगा असर

    वेतन सीमा बढ़ने से कंपनियों और सरकार दोनों का वित्तीय बोझ बढ़ेगा। कंपनियों को अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन में 12 फीसदी का योगदान देना होगा, जिससे उनकी पेरोल लागत बढ़ जाएगी। पेंशन फंड में सरकार भी बेसिक वेतन का 1.16 फीसदी योगदान देती है। वेतन सीमा बढ़ने से सरकार का पेंशन सब्सिडी बजट भी बढ़ जाएगा।

  • LPG उपभोक्ता 16 अगस्त से पहले जरूर करा लें ये काम… वरना, सिलेंडर पाने में होगी दिक्कत

    LPG उपभोक्ता 16 अगस्त से पहले जरूर करा लें ये काम… वरना, सिलेंडर पाने में होगी दिक्कत


    नई दिल्ली।
    आप एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) यूज करते हैं, तो फिर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (Registered Mobile Number) पर भी एक मैसेज आया होगा, जिसमें e-KYC पूरा करने का अलर्ट (LPG e-KYC Alert) दिया गया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भेजे गए इस एसएमएस में एलपीजी यूजर्स को ये जरूरी काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है. इसके लिए डेडलाइन 16 अगस्त तय की गई है, ऐसे में अगर ये लास्ट डेट चूक जाती है, तो फिर एलपीजी सिलेंडर पाने में मुश्किल हो सकती है, इसके साथ ही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी सरकारी सब्सिडी में रुकावट पेश आ सकती है।


    राहत के साथ अगस्त की शुरुआत

    अगस्त महीने की शुरुआत एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी हुई. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अगस्त 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती कर राहत दी. हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) का दाम जस का तस रखा गया. इसके साथ ही कंपनियों ने अलर्ट भी जारी किया है कि सिलेंडर की सप्लाई सुचारू पाने के लिए फटाफट ई-केवाईसी करा लें।

    घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर नजर डालें, तो दिल्ली में सिलेंडर की कीमत (Delhi LPG Cylinder Price) 942 रुपये, कोलकाता में दाम (Kolkata LPG Cylinder Price) 968 रुपये, मुंबई में कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में ये 957.50 रुपये है।


    SMS अलर्ट के जरिए चेतावनी

    घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को 16 अगस्त तक ये आधार बेस्ड ई-केवाईसी सत्यापन प्रोसेस पूरा करना है और इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने उन्हें एसएमएस अलर्ट भेजना भी शुरू कर दिया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि जो लोग डेडलाइन तक ये काम पूरा नहीं करते हैं, तो फिर अधिसूचित घरेलू दर पर LP Cylinder खरीदने में दिक्कत पेश आ सकती है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को भी तय की गई लास्ट डेट तक LPG e-KYC पूरा करना जरूरी है।

    बता दें 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के देश में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं और इसके तहत उन्हें हर साल चार एलपीजी सिलेंडर की रिफिल पर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलता है. इससे पहले 9 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते हैं, जिसका नियम बीते जून महीने में ही बदला गया है।


    घर बैठे कर सकते हैं काम पूरा

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भी लगातार एसएमएस के जरिए अलर्ट भेजा जा रहा है. इनमें कहा गया है, ‘प्रिय ग्राहक, घरेलू दरों पर एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए आपको e-KYC करना जरूरी है, पहले भी कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं किया है।

    IOCL की ओर से इस जरूरी काम के लिए अलर्ट भेजने के साथ ही घर बैठे इसे पूरा करने का प्रोसेस भी शेयर किया गया है. मैसेज में आगे कहा गया है कि आप इंडियनऑयल वन ऐप (Indian Oil One App) के माध्यम से घर बैठे, अपने डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाकर या डिलीवरी कर्मी के जरिए ई-केवाईसी प्रोसेस को पूरा कर सकते हैं. इसमें साफ कहा गया है कि, ’16 अगस्त 2026 तक ये काम पूरा न करने पर, इसके पूरा होने तक आप घरेलू दरों पर सिलेंडर प्राप्त करने के पात्र नहीं रहेंगे. कृपया जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करें।

  • आज बैंक खुलेंगे या रहेंगे बंद? आज की आरबीआई हॉलिडे लिस्ट में जानिए आपके राज्य का पूरा हाल

    आज बैंक खुलेंगे या रहेंगे बंद? आज की आरबीआई हॉलिडे लिस्ट में जानिए आपके राज्य का पूरा हाल


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक के अवकाश कैलेंडर के अनुसार 4 अगस्त 2026, मंगलवार को देशभर में बैंक बंद नहीं रहेंगे। इस दिन केवल त्रिपुरा राज्य में केर पूजा के अवसर पर बैंक अवकाश रहेगा। ऐसे में अगर किसी ग्राहक को बैंक शाखा में जाकर कोई जरूरी काम करना है तो उसे अपने राज्य की छुट्टियों की सूची पहले देख लेनी चाहिए। देश के अधिकांश राज्यों में बैंक सामान्य समय के अनुसार खुले रहेंगे और नियमित बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।

    त्रिपुरा में मनाया जाने वाला केर पूजा राज्य का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक धार्मिक उत्सव है। इसी कारण राज्य के सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक इस दिन बंद रहेंगे। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक और क्षेत्रीय बैंक सभी शामिल हैं। अगरतला सहित पूरे राज्य में बैंक शाखाओं में नकद लेनदेन, चेक क्लियरेंस और अन्य शाखा आधारित सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी।

    केर पूजा त्रिपुरा की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यह उत्सव खारची पूजा के लगभग दो सप्ताह बाद आयोजित किया जाता है और राज्य के संरक्षक देवता ‘केर’ को समर्पित होता है। इस दौरान प्रदेश में सुख-समृद्धि, सुरक्षा और शांति की कामना की जाती है। पूजा के दौरान कई पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्धारित क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं लागू रहती हैं।

    इतिहासकारों के अनुसार इस पर्व की शुरुआत त्रिपुरा के माणिक्य राजवंश के शासनकाल में हुई थी। समय के साथ यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गया। आज भी इस आयोजन को सरकारी स्तर पर महत्व दिया जाता है और स्थानीय प्रशासन इसके आयोजन में सहयोग करता है। यही वजह है कि इस अवसर पर राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है।

    हालांकि, त्रिपुरा को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों में 4 अगस्त को बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी। ग्राहक जमा, निकासी, ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, ऋण संबंधी सेवाएं और अन्य बैंकिंग कार्य सामान्य तरीके से करा सकेंगे। जिन लोगों को बैंक शाखा में व्यक्तिगत रूप से जाना है, उनके लिए किसी अतिरिक्त अवकाश की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, यदि वे त्रिपुरा से बाहर हैं।

    आरबीआई के अवकाश कैलेंडर के अनुसार अगस्त महीने में कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय छुट्टियां भी निर्धारित हैं। इनमें दूसरे और चौथे शनिवार, सभी रविवार, स्वतंत्रता दिवस, विभिन्न राज्यों के स्थानीय त्योहार, ईद-ए-मिलाद, ओणम, रक्षाबंधन तथा अन्य क्षेत्रीय पर्व शामिल हैं। इन छुट्टियों का प्रभाव संबंधित राज्यों तक सीमित रहेगा, जबकि राष्ट्रीय अवकाश पूरे देश में लागू होंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद अधिकांश डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह चालू रहेंगी। ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अधिकांश वित्तीय लेनदेन कर सकेंगे। हालांकि, शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता होने पर अवकाश से पहले या बाद का समय चुनना अधिक सुविधाजनक रहेगा।

    ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य से पहले अपने शहर या राज्य में लागू बैंक अवकाश की जानकारी अवश्य जांच लें। इससे अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है और आवश्यक वित्तीय कार्य समय पर पूरे किए जा सकते हैं।

  • आज कितना बदला सोने-चांदी का रेट? खरीदारी से पहले 24K, 22K, 18K के ताजा भाव जरूर देखें

    आज कितना बदला सोने-चांदी का रेट? खरीदारी से पहले 24K, 22K, 18K के ताजा भाव जरूर देखें

    नई दिल्ली । 3 अगस्त को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित बदलाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी दिन की तुलना में सोने के विभिन्न कैरेट की कीमतों में मामूली अंतर दर्ज किया गया, जबकि चांदी के भाव में भी हल्की गिरावट देखने को मिली। हालांकि कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं होने से बाजार में स्थिरता का माहौल बना हुआ है और खरीदारी की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आज 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,210 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट सोना 1,32,190 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 1,08,150 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। पिछले दिन की तुलना में इन कीमतों में केवल मामूली बदलाव हुआ है, जिससे यह साफ है कि फिलहाल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है।

    चांदी की बात करें तो आज एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,34,900 रुपये दर्ज किया गया। पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले इसमें करीब 100 रुपये की कमी देखने को मिली। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन लगातार कीमतों पर नजर रखने वाले निवेशकों और खरीदारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की मांग जैसे कई कारक सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि घरेलू बाजार में भी समय-समय पर कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है। फिलहाल बाजार में स्थिरता बनी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ी कीमतों का सामना नहीं करना पड़ रहा।

    ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को केवल कीमत पर ही नहीं, बल्कि सोने की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। आभूषण खरीदते समय बीआईएस हॉलमार्क और छह अंकों वाला एचयूआईडी कोड अवश्य जांचना चाहिए। इससे आभूषण की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है और भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी की संभावना कम हो जाती है।

    चांदी खरीदते समय भी गुणवत्ता की जांच आवश्यक मानी जाती है। बाजार में उपलब्ध चांदी पर बीआईएस हॉलमार्क और उसकी शुद्धता का प्रमाण देखना उपभोक्ताओं के हित में होता है। विशेष रूप से 925 स्टर्लिंग सिल्वर को बेहतर गुणवत्ता का मानक माना जाता है, इसलिए खरीदारी से पहले इसकी पुष्टि करना उचित रहता है।

    ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बाजार में बताए जाने वाले सोने के मूल भाव में मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते। आभूषण खरीदते समय अंतिम बिल इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण अधिक हो सकता है। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले कुल भुगतान की जानकारी लेना और बिल अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

    त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के समय सोने-चांदी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में नियमित रूप से बाजार भाव की जानकारी लेकर और प्रमाणित गुणवत्ता वाले आभूषण खरीदकर उपभोक्ता बेहतर निर्णय ले सकते हैं। वर्तमान में कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं होने से खरीदारी की योजना बनाने वालों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

  • एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए अहम अपडेट, तय समय सीमा से पहले e-KYC नहीं कराया तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए अहम अपडेट, तय समय सीमा से पहले e-KYC नहीं कराया तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    नई दिल्ली । देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करना जरूरी हो गया है। गैस कनेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और प्रमाणित बनाने के उद्देश्य से उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर e-KYC कराने की सलाह दी गई है। यदि तय अवधि तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है, तो भविष्य में गैस सिलेंडर की आपूर्ति या उससे जुड़ी कुछ सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है।

    e-KYC का उद्देश्य उपभोक्ताओं की पहचान का सत्यापन करना और एलपीजी कनेक्शन से संबंधित जानकारी को अद्यतन रखना है। इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित होगी और फर्जी या निष्क्रिय कनेक्शनों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में सहायता मिलेगी। साथ ही गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे 16 अगस्त की निर्धारित समय सीमा से पहले अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी कर लें। इसके लिए गैस एजेंसी, अधिकृत सेवा केंद्र या उपलब्ध डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं, जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।

    e-KYC के दौरान आधार से जुड़ी जानकारी और बायोमेट्रिक अथवा अन्य निर्धारित पहचान प्रक्रिया के माध्यम से उपभोक्ता का सत्यापन किया जाता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित गैस कनेक्शन का रिकॉर्ड अपडेट हो जाता है, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या दस्तावेजी परेशानी की संभावना कम हो जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर e-KYC पूरा करने से उपभोक्ताओं को गैस वितरण, सब्सिडी से जुड़ी सेवाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा। वहीं, जिन उपभोक्ताओं की जानकारी अपडेट नहीं होगी, उन्हें भविष्य में सेवा प्राप्त करने के दौरान अतिरिक्त सत्यापन या अन्य औपचारिकताओं से गुजरना पड़ सकता है।

    ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए भी यह प्रक्रिया समान रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में संबंधित एजेंसियां लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करा रही हैं, ताकि कोई भी पात्र उपभोक्ता समय सीमा के कारण असुविधा का सामना न करे। वरिष्ठ नागरिकों और तकनीकी जानकारी कम रखने वाले लोगों को भी परिवार या स्थानीय सेवा केंद्र की मदद से यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने की सलाह दी गई है।

    उपभोक्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके मोबाइल नंबर, पता और अन्य व्यक्तिगत विवरण गैस कनेक्शन के रिकॉर्ड में सही दर्ज हों। यदि किसी जानकारी में बदलाव हुआ है, तो उसे e-KYC के दौरान अपडेट कराया जा सकता है। इससे भविष्य में गैस बुकिंग, वितरण और अन्य सेवाओं में किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी।

    एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि अंतिम समय तक प्रतीक्षा करने के बजाय जल्द से जल्द e-KYC की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। समय सीमा के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने से गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति, रिकॉर्ड का सही रखरखाव और सभी उपलब्ध सेवाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।

  • उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल स्थानीय आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से वैश्विक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में उद्योग, निर्यात और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश के उद्योगों, किसानों, कारीगरों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को मिल रहा है।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते देश के विभिन्न राज्यों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख उद्योग अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे राज्य के निर्यातकों को नए बाजार मिल रहे हैं और स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ने की संभावना मजबूत हो रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानपुर का प्रसिद्ध चमड़ा उद्योग उत्तर प्रदेश की औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब व्यापार समझौतों और बेहतर वैश्विक पहुंच के कारण इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि चमड़ा उद्योग से जुड़े हजारों कारीगरों और कारोबारियों को इसका सीधा फायदा पहुंच सकता है।

    उन्होंने नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तकनीकी उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    पीयूष गोयल ने सहारनपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ रही है और व्यापारिक बाधाएं कम होने से छोटे कारीगरों और लघु उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय कला और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। बेहतर व्यापार व्यवस्था और निर्यात के नए रास्ते खुलने से कृषि उत्पादकों को अधिक अवसर मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम तेज हुआ है। कानपुर का चमड़ा उद्योग, नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, सहारनपुर का हस्तशिल्प और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। औद्योगिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

    बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

     
    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे उन्हें जमा दरें तय करने में पहले की तुलना में अधिक लचीलापन मिलेगा। नए नियमों के तहत बैंक अब बल्क डिपॉजिट की कीमत तय करते समय लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो यानी एलसीआर के रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रख सकेंगे। माना जा रहा है कि यह बदलाव बैंकों की फंडिंग लागत, तरलता प्रबंधन और एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

    रेटिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे बैंक अपनी जरूरतों और जमा की तरलता विशेषताओं के आधार पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को अधिक प्रभावी तरीके से तय कर सकेंगे। पहले जमा की लिक्विडिटी विशेषताओं के आधार पर ब्याज दरों में अंतर करने की गुंजाइश सीमित थी।

    नए ढांचे के तहत बैंक अलग-अलग प्रकार के डिपॉजिट और उनसे जुड़े तरलता जोखिम को ध्यान में रखते हुए कीमत तय कर पाएंगे। इससे बैंकों को यह आकलन करने में सुविधा होगी कि किसी जमा राशि के अचानक निकलने की स्थिति में उन्हें कितनी नकदी की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए बैंकों को पर्याप्त हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स रखने की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में नकदी की जरूरत पूरी की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से बैंकों के बीच जमा आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। जिन बैंकों का जमा आधार मजबूत है और जिनके पास करंट अकाउंट तथा सेविंग्स अकाउंट की अच्छी हिस्सेदारी है, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। वहीं, कमजोर जमा आधार वाले बैंकों को फंड जुटाने के लिए अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है।

    आरबीआई ने नए नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिस्क्लोजर से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक जैसी डिपॉजिट कैटेगरी के लिए ब्याज दर तय करने में किसी तरह का भेदभाव न हो। यानी समान परिस्थितियों वाले ग्राहकों के लिए दरों में मनमाना अंतर नहीं किया जा सकेगा।

    संशोधित निर्देशों के अनुसार, सभी बैंक शाखाओं में जमा पर लागू ब्याज दरों को समान रखना जरूरी होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट के मामले में लिक्विडिटी रिस्क और उससे जुड़ी लागत के आधार पर कीमत तय करने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था बैंकों को जोखिम और लागत के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में मदद करेगी।

    आरबीआई के नए निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके तहत बैंक द्वारा ग्राहकों को दिया जाने वाला वास्तविक ब्याज उनकी वेबसाइट पर पहले से घोषित ब्याज दरों के शेड्यूल के अनुसार ही होना चाहिए। इससे ग्राहकों को भी जमा दरों की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    नए नियमों के तहत बैंकों को प्रत्येक कार्य दिवस की सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट के लिए लागू ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसके लिए उन्हें 10 मिनट का अतिरिक्त समय यानी ग्रेस पीरियड भी दिया जाएगा। इससे बैंकिंग व्यवस्था में स्पष्टता बढ़ेगी और ग्राहक भी बेहतर जानकारी के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले ले सकेंगे।

    कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन को मजबूत करने और जमा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बैंकों को अपनी वित्तीय रणनीति तैयार करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

  • निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    नई दिल्ली ।भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को मजबूत करना है।

    एसोचैम के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से विभिन्न देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश के अवसरों की पहचान, नई तकनीकों के उपयोग और संयुक्त कारोबारी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    बिजनेस फ्रांस के साथ हुए समझौते में भारत और फ्रांस की कंपनियों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दोनों संस्थाएं तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और व्यापारिक आयोजनों के संयुक्त संचालन में सहयोग करेंगी।

    समझौते के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और अन्य कारोबारी गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के उद्यमों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अरब देशों के साथ हुई ये साझेदारियां मजबूत संस्थागत संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कंपनियों को नए बाजार तलाशने, निवेश बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

    बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने इस साझेदारी को भारत और फ्रांस के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता भारत और अरब क्षेत्र के बीच व्यापारिक संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके जरिए निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

    इस समझौते के तहत व्यापारिक सूचनाओं का साझा उपयोग, निवेश संबंधी अवसरों की पहचान, संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां तेजी से बदल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के समझौते भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।