Category: Economy

  • मौसम की मार…. 40 फीसदी तक घटी सेब की पैदावार….. आसमान पर कीमतें

    मौसम की मार…. 40 फीसदी तक घटी सेब की पैदावार….. आसमान पर कीमतें


    श्रीनगर।
    सेब (Apples) इस बार महंगा बिकेगा। देश के दो शीर्ष उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में सेब की पैदावार तेजी से घटी है। हिमाचल में पिछले साल के 4.07 लाख टन के मुकाबले इस साल सिर्फ 3.87 लाख टन सेब बाजार में पहुंचा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में हालत और खराब है, जहां उत्पादन 40 फीसदी तक घटा है।

    दोनों राज्यों में सेब उत्पादन पर प्रतिकूल मौसम की मार पड़ी है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सर्वाधिक प्रभावित कुछ क्षेत्रों में उत्पादन 50 फीसदी तक कम हुआ है। सामान्य वर्षों में 20 से 22 लाख टन उत्पादन होता था, मगर इस बार इसके 14 से 15 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन घटने से मंडियों में आपूर्ति घटी है और बेहतर गुणवत्ता वाले सेब के भाव चढ़ गए हैं। दोनों ही राज्यों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से ठंड के घंटे कम हुए। हिमाचल में इस बार ड्रॉपिंग भी अधिक रही और सेब सीजन 15 दिन देरी से शुरू हुआ। पिछले साल प्रदेश में सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन इससे बहुत कम रह सकता है। 


    शोपियां व ऊपरी इलाकों में फसल को 55% तक नुकसान

    जम्मू-कश्मीर उद्यान विभाग के अनुसार दक्षिण कश्मीर के शोपियां के ऊपरी इलाके हीरपोरा, केलर, जैनपोरा और कुलगाम के डीएच पोरा व फ्रिसल में मई-जून की बेमौसम ओलावृष्टि और तेज हवा से फसल को 45 से 55 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ।

    बडगाम के खानसाहिब, चरार-ए-शरीफ और पुलवामा के त्राल व राजपोरा के पारंपरिक बागानों में परागण के समय लगातार बारिश और कम धूप के कारण फल तेजी से गिरे। इससे पैदावार आधी रह गई।


    जलवायु परिवर्तन का असर

    सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक व नए रूट स्टॉक अपनाना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है, जो उत्पादन घटने का बड़ा कारण है।
    -जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री, हिमाचल प्रदेश

    आपूर्ति में भारी कमी
    सोपोर फ्रूट मंडी के फल व्यापारी हाजी मुश्ताक अहमद ने कहा, मंडियों में रोजाना आने वाली गाड़ियों की संख्या कम है। खासकर शोपियां और कुलगाम की ओर से ए ग्रेड माल की भारी कमी है।

  • आरडीआई योजना में फंड की कमी नहीं, बड़ी संख्या में प्रस्तावों की समीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई

    आरडीआई योजना में फंड की कमी नहीं, बड़ी संख्या में प्रस्तावों की समीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई

    । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) योजना के तहत प्रस्ताव आमंत्रण प्रक्रिया को फंड की कमी के कारण बंद किए जाने की खबरों को गलत बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं को धनराशि जारी करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और फंड की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) की ओर से जारी प्रस्ताव आमंत्रण को केवल प्रशासनिक कारणों से अस्थायी रूप से रोका गया है। बड़ी संख्या में परियोजना प्रस्ताव मिलने के बाद सभी आवेदनों का मूल्यांकन पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है। 30 सितंबर 2026 तक प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा पूरी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू की जाएगी।

    मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव आमंत्रण रोकने के पीछे धन की कमी होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। टीडीबी ने भी अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट किया है कि मौजूदा प्रस्ताव आमंत्रण को केवल प्रशासनिक कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया गया है। बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के कारण निवेश समिति और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में जुटे हैं। संबंधित अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं, ताकि पात्र और योग्य परियोजनाओं का मूल्यांकन जल्द पूरा किया जा सके और उन्हें नियमानुसार मंजूरी दी जा सके। सरकार का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन आमंत्रण फिर शुरू किया जाएगा।

    मंत्रालय के अनुसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) निकट भविष्य में अन्य सेकंड-लेवल फंड मैनेजर्स (एसएलएफएम) नियुक्त करने की प्रक्रिया में भी हैं। इससे आरडीआई योजना के क्रियान्वयन और वित्तपोषण क्षमता को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। डीएसटी और एएनआरएफ आरडीआई योजना के डिजाइन, वित्तपोषण और निगरानी के लिए जिम्मेदार शीर्ष सरकारी संस्थान हैं। यह योजना 1 लाख करोड़ रुपये की है और इसके तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड एक फंड मैनेजर के रूप में कार्य करता है।

    आरडीआई योजना का उद्देश्य उन कंपनियों, कॉर्पोरेट संस्थाओं और स्टार्टअप्स को सहायता देना है, जो डीप-टेक, अनुसंधान और नवाचार आधारित तकनीकों पर काम कर रहे हैं। विशेष रूप से रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं को इस योजना के तहत दीर्घकालिक और कम लागत वाली वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। योजना के तहत चयनित पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं को बड़े आकार के ऋण और अन्य वित्तीय सहायता दी जाती है। हालांकि, टीडीबी किसी परियोजना को धनराशि तभी जारी करता है, जब संबंधित संस्था गैर-सरकारी या निजी स्रोतों से निर्धारित अनुपात में पूंजी जुटाने में सफल हो जाती है।

    मंत्रालय ने दोहराया कि आरडीआई योजना पूरी तरह सक्रिय है और इसके संचालन पर फंड की कमी का कोई असर नहीं पड़ा है। योजना का उद्देश्य भारत में अनुसंधान, नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव आमंत्रण को रोकने का कारण केवल बड़ी संख्या में प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया है। समीक्षा पूरी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया जल्द दोबारा शुरू की जाएगी और पात्र परियोजनाओं को नियमों के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती रहेगी।

  • Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले

    Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है और अब इसका असर बाजार के बड़े हिस्से में दिखाई देने लगा है। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन बिकवाली के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71909.70 अंक पर बंद हुआ जबकि कारोबार के दौरान यह 1187 अंक तक टूट गया और एक साल के निचले स्तर 71292.88 तक पहुंच गया। निफ्टी भी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22421.95 अंक पर बंद हुआ।

    निफ्टी में जारी कमजोरी की एक बड़ी तस्वीर लगातार आठवें हफ्ते की गिरावट से सामने आती है। पिछले नौ हफ्तों में निफ्टी करीब 2156 अंक यानी 8.7 प्रतिशत नीचे आ चुका है। सितंबर महीने में भी निफ्टी में करीब 6.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस साल जनवरी में बनाए गए 26373 अंक के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में मौजूदा स्तर करीब 15 प्रतिशत नीचे है। बाजार में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि किसी बाजार को मंदी या बियर मार्केट में प्रवेश करने के लिए सामान्य तौर पर रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 20 प्रतिशत गिरावट का तकनीकी पैमाना इस्तेमाल किया जाता है।

    इस गिरावट के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 9484.22 करोड़ रुपये की निकासी की। इससे पहले बुधवार को उन्होंने करीब 10148 करोड़ रुपये और मंगलवार को 10743 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इस तरह सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में एफआईआई की बिकवाली 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से बाजार में खरीदारी का भरोसा प्रभावित हुआ है।

    बाजार की कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 500 में करीब 80 प्रतिशत शेयर अपने 50 दिन के औसत भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि बाजार में दबाव व्यापक है और कई कंपनियों के शेयरों में निवेशकों को लगातार बिकवाली का सामना करना पड़ रहा है।

    तकनीकी स्तर पर भी अब निफ्टी के कुछ महत्वपूर्ण स्तरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। सेबी रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक विपिन डिक्सेना के मुताबिक निफ्टी फिलहाल 22400 के आसपास के समर्थन स्तर पर है। यदि यह स्तर टूटता है तो 22200 से 22000 तक दबाव बढ़ने की संभावना बताई गई है। वहीं ऊपर की तरफ 22600 से 22800 के बीच तत्काल प्रतिरोध का क्षेत्र बताया गया है। ये स्तर बाजार की आगे की दिशा समझने के लिए तकनीकी विश्लेषण का हिस्सा हैं और वास्तविक बाजार चाल इससे अलग भी हो सकती है।

    बाजार में जारी गिरावट के पीछे विदेशी निकासी के अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारक भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में बाजार की दिशा केवल एक कारण से तय नहीं होती। आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेश का रुख वैश्विक संकेतक और कंपनियों से जुड़े कारोबारी आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशकों के लिए मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी फैसले से पहले अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    नई दिल्ली। 2 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में नियमित कारोबार नहीं होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर इस दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने वाले निवेशकों को शुक्रवार के बाजार अवकाश को ध्यान में रखकर अपनी ट्रेडिंग योजना बनानी होगी। बाजार में अगला सामान्य कारोबारी सत्र छुट्टी के बाद खुलेगा।
    शेयर बाजार में छुट्टियां पहले से तय कैलेंडर के अनुसार होती हैं। राष्ट्रीय अवकाश और अन्य निर्धारित छुट्टियों के दौरान इक्विटी मार्केट में कारोबार बंद रहता है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण भी बाजार बंद रहेगा। इसका मतलब यह है कि निवेशक इस दिन सामान्य इक्विटी कारोबार के जरिए शेयरों की खरीद या बिक्री नहीं कर सकेंगे। बाजार बंद रहने के कारण दिनभर सेंसेक्स और निफ्टी में नियमित उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा।

    निवेशकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि शेयर बाजार बंद होने का अर्थ सभी वित्तीय सेवाओं का पूरी तरह बंद होना नहीं है। अलग अलग बैंकिंग और निवेश प्लेटफॉर्म की सेवाओं के कामकाज का समय और उपलब्धता अलग हो सकती है। इसके अलावा बाजार से जुड़े कुछ सेटलमेंट और अन्य कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए किसी लेनदेन की योजना बनाने से पहले अपने ब्रोकर या संबंधित वित्तीय संस्थान की सूचना देखना उपयोगी रहेगा।

    2 अक्टूबर की छुट्टी के कारण निवेशकों के लिए पिछले कारोबारी सत्र के प्रदर्शन का विश्लेषण करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार बंद रहने के दौरान वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेतों और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार के अगले कारोबारी सत्र पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कंपनियों से जुड़ी खबरें और आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल होते हैं।

    छुट्टी के दिन कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के लिए समय निकालते हैं। ऐसे में अलग अलग कंपनियों के प्रदर्शन और अपनी निवेश रणनीति पर विचार किया जा सकता है। हालांकि केवल एक दिन के बाजार उतार चढ़ाव को देखकर जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। शेयर बाजार में जोखिम बना रहता है और किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत कई अलग अलग परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है।

    नए निवेशकों के लिए बाजार की छुट्टियों की जानकारी रखना खास तौर पर जरूरी है। इससे ऑर्डर प्लेस करने और ट्रेडिंग की योजना बनाते समय भ्रम की स्थिति नहीं रहती। यदि किसी निवेशक ने छुट्टी से पहले कोई ऑर्डर लगाया है तो उसके निष्पादन की स्थिति बाजार के नियमों और ऑर्डर के प्रकार पर निर्भर करेगी। इसलिए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में ऑर्डर की स्थिति जांचना बेहतर रहेगा।

    कुल मिलाकर 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के कारण NSE और BSE पर नियमित शेयर बाजार कारोबार नहीं होगा। निवेशकों को इस दिन बाजार खुलने की उम्मीद में ट्रेडिंग करने के बजाय अगले कारोबारी सत्र की तैयारी करनी चाहिए। बाजार की छुट्टी को पोर्टफोलियो की समीक्षा और आने वाले कारोबारी सत्र के लिए रणनीति बनाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। निवेश संबंधी कोई भी फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लेना बेहतर रहेगा।

  • Petrol Diesel Price: कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता

    Petrol Diesel Price: कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी देखने को मिली है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। 2 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमत 102.61 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 93.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने कच्चे तेल के बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है हालांकि घरेलू स्तर पर कीमतों में बदलाव कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।

    फिलहाल भारतीय वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि 2 अक्टूबर को देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 112.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में आखिरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मई 2026 में बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा तेजी पर घरेलू बाजार की नजर बनी हुई है।

    दरअसल मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव तेल बाजार के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अमेरिका की ओर से क्षेत्र में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप भेजने पर विचार किए जाने की खबरों के बीच बाजार में सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। अगर सैन्य तनाव और बढ़ता है और प्रमुख तेल मार्गों से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर और दबाव आ सकता है।

    सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से गुजर रहे एक टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की सूचना के बाद तनाव और बढ़ गया है। फिलहाल घटना से हुए नुकसान की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन इस तरह की घटनाएं वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकती हैं। यदि इस मार्ग से तेल की सप्लाई में बड़ा व्यवधान आता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका या यूरोप ही नहीं बल्कि भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।

    ईरान से होने वाले तेल निर्यात को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में ईरान ने टैंकरों पर लगभग कोई कच्चा तेल लोड नहीं किया। इसे अमेरिकी दबाव और क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच ईरान की वैश्विक ऊर्जा बाजार तक पहुंच प्रभावित होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि हाल में मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में कुछ सुधार के संकेत मिले थे लेकिन सैन्य तनाव बढ़ने से बाजार में दोबारा अस्थिरता पैदा हो गई है।

    अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों का प्रभाव सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहता बल्कि माल ढुलाई परिवहन और कई वस्तुओं की लागत पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों में वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंची रहती हैं और भारतीय तेल कंपनियां आगे क्या फैसला करती हैं।

  • रुपया पर बढ़ा दबाव, एक्सपर्ट की चेतावनी- 97 टूटा तो 99 तक जा सकता है, महंगाई का भी खतरा

    रुपया पर बढ़ा दबाव, एक्सपर्ट की चेतावनी- 97 टूटा तो 99 तक जा सकता है, महंगाई का भी खतरा


    नई दिल्ली। ग्लोबल तनाव और बढ़ते आयात बिल के बीच भारतीय रुपया लगातार दबाव में कारोबार कर रहा है और 96 के स्तर तक कमजोर हो चुका है। कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपया जल्द 97 के स्तर तक जा सकता है और यदि यह स्तर टूटता है तो 99 तक गिरने की स्थिति बन सकती है। इससे बाजार पर दबाव बढ़ने के साथ महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    बनर्जी के अनुसार, रुपये पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है, आयात महंगा हुआ है और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इन सभी कारकों का असर रुपये की चाल पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां रुपये के लिए चुनौती पैदा कर रही हैं।

    विदेशी निवेशकों ने 6.1 अरब डॉलर के शेयर बेचे

    रुपये की कमजोरी के पीछे विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी एक बड़ा कारण बताई जा रही है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 6.1 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।

    अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, पिछले दो महीनों में भारतीय बाजार में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ा है और विदेशी मुद्रा बाजार में इसकी कमजोरी दिखाई दे रही है।

    FCNR(B) से आया पैसा, लेकिन तुरंत नहीं मिला फायदा

    रुपये को सहारा देने के लिए FCNR(B) के जरिए भी विदेशी मुद्रा आई है, लेकिन इसका तत्काल फायदा रुपये को नहीं मिला। बनर्जी के मुताबिक, इस माध्यम से आया बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में जाने के बजाय भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में पहुंचा है।

    ऐसे में यदि रुपये पर दबाव आगे भी बढ़ता है तो रिजर्व बैंक के बाजार में हस्तक्षेप करने की संभावना बन सकती है। इसका उद्देश्य रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना हो सकता है।

    97 के बाद 99 का स्तर अहम

    एक्सपर्ट के मुताबिक, रुपये की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 97 का स्तर महत्वपूर्ण है। अगर रुपया इस स्तर के नीचे जाता है तो कमजोरी और बढ़ सकती है और 99 का स्तर भी देखने को मिल सकता है।

    बनर्जी का मानना है कि ऐसे स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार में गिरावट का दबाव और ज्यादा हावी हो सकता है। रुपये की लगातार कमजोरी का असर आयात लागत और घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल ने बढ़ाया आयात बिल

    कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग पर दबाव आता है।

    बनर्जी के अनुसार, केवल Brent फ्यूचर्स की कीमत ही नहीं, बल्कि स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी भी रुपये पर दबाव डाल रही है। डीजल और एविएशन फ्यूल की ऊंची कीमतें भी आयात लागत को प्रभावित कर रही हैं।

    RBI की नजर महंगाई पर, रेट बढ़ने की संभावना

    अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि RBI का फैसला केवल वैश्विक सेंटिमेंट या अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति को देखकर नहीं होगा, बल्कि घरेलू महंगाई के दबाव को ध्यान में रखकर रेट हाइक की जा सकती है।

    फिलहाल रुपये की दिशा पर विदेशी पूंजी का प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव जैसे कारक नजर बनाए हुए हैं। यदि इन मोर्चों पर दबाव बना रहता है तो रुपये की कमजोरी आगे भी जारी रहने की संभावना पर बाजार की नजर रहेगी।

  • त्योहारी सीजन से पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, दिल्ली में 62.50 और मुंबई में 63 रुपये बढ़े दाम

    त्योहारी सीजन से पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, दिल्ली में 62.50 और मुंबई में 63 रुपये बढ़े दाम

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। 1 अक्टूबर से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 62.50 रुपये बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है। सितंबर में दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2,747.50 रुपये थी। मुंबई में भी कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। यहां 63 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नया रेट 2,764 रुपये हो गया है, जबकि सितंबर में इसकी कीमत 2,701 रुपये थी।

    चेन्नई में भी 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,983 रुपये हो गई है। सितंबर में यहां सिलेंडर का रेट 2,916.50 रुपये था। यानी चेन्नई में भी कारोबारियों को पिछले महीने की तुलना में अधिक कीमत चुकानी होगी। कोलकाता में सितंबर के दौरान 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,884 रुपये थी। 1 अक्टूबर से यहां भी कीमत में बढ़ोतरी लागू की गई है। कमर्शियल LPG का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है।

    कमर्शियल LPG के दाम बढ़ने के बावजूद घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, चेन्नई में 957.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये पर बना हुआ है। इस तरह 1 अक्टूबर से लागू बदलाव का सीधा असर कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर पड़ा है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर के मौजूदा दाम बरकरार रखे गए हैं।

    19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक रसोई में बड़े स्तर पर किया जाता है। ऐसे में कीमत बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और अन्य कमर्शियल किचन की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, किसी कारोबार पर इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि LPG की लागत उसके कुल खर्च में कितनी हिस्सेदारी रखती है और बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। कीमतों में यह बदलाव त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले हुआ है, जब कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गतिविधियां बढ़ती हैं।

    कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में सितंबर की शुरुआत में भी बढ़ोतरी की गई थी। उस समय दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये हुआ था। मुंबई में इसका रेट 2,701 रुपये, चेन्नई में 2,916.50 रुपये और कोलकाता में 2,884 रुपये पहुंचा था। कमर्शियल LPG की कीमतों की समीक्षा आम तौर पर हर महीने की जाती है। कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय LPG बेंचमार्क, विदेशी मुद्रा दर और अन्य लागत कारकों से प्रभावित हो सकता है। 1 अक्टूबर की बढ़ोतरी के बाद चारों प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं।

  • अक्टूबर से पैसों से जुड़े कई नियम बदले, SBI ATM, LPG सब्सिडी, UPI, NPS और FD पर नए अपडेट लागू

    अक्टूबर से पैसों से जुड़े कई नियम बदले, SBI ATM, LPG सब्सिडी, UPI, NPS और FD पर नए अपडेट लागू


    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर
    । अक्टूबर 2026 की शुरुआत के साथ पैसों और वित्तीय सेवाओं से जुड़े कई नियमों में बदलाव हुआ है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, रसोई गैस, पेंशन योजना, बड़ी रकम वाली एफडी और टैक्स से संबंधित नियमों में किए गए इन बदलावों का असर अलग-अलग श्रेणी के ग्राहकों पर पड़ सकता है। SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट से लेकर LPG सब्सिडी, UPI भुगतान और NPS तक कुछ व्यवस्थाओं में नए प्रावधान लागू हुए हैं। वहीं, छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट वाले ग्राहकों के लिए दूसरे बैंकों के ATM से मिलने वाले मुफ्त लेनदेन की मासिक सीमा घटाई गई है। पहले हर महीने 10 मुफ्त लेनदेन की सुविधा थी, जिसे अब 5 कर दिया गया है। इस सीमा में केवल नकद निकासी ही नहीं, बल्कि बैलेंस चेक जैसी गैर-वित्तीय ATM सेवाएं भी शामिल हैं।

    हालांकि, SBI के अपने ATM पर सैलरी पैकेज ग्राहकों के लिए मुफ्त लेनदेन की सुविधा जारी रहेगी। LPG सब्सिडी लेने वाले ग्राहकों के लिए भी 1 अक्टूबर से आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक सत्यापन महत्वपूर्ण हो गया है। सब्सिडी वाले LPG रिफिल के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सत्यापन गैस एजेंसी के माध्यम से कराया जा सकता है और कुछ मामलों में डिलीवरी के समय भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

    UPI को लेकर 15 अक्टूबर से कुछ खास मर्चेंट लेनदेन पर नया MDR ढांचा लागू होगा। यह व्यवस्था 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन से संबंधित है। इसका शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के कई मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR के दायरे में आने वाले लेनदेन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, बड़ी रकम वाली FD यानी बल्क डिपॉजिट के मामले में 1 अक्टूबर से बैंकों को अधिक पारदर्शिता रखनी होगी। बैंकों को ऐसी जमा पर लागू ब्याज दरें अपनी वेबसाइट पर तय समय के अनुसार प्रकाशित करनी होंगी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सामान्य FD की ब्याज दर अक्टूबर से अपने आप बदल जाएगी।

    NPS में भी 1 अक्टूबर से शुल्क ढांचे में बदलाव हुआ है। Point of Presence यानी PoP के माध्यम से NPS या NPS Lite में पंजीकरण कराने वाले ग्राहकों के लिए प्रति PRAN 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग चार्ज लागू होगा। टैक्स से जुड़े मामलों में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। टैक्स ऑडिट वाले मामलों में रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है।

    ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख भी 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। इसके अलावा, भारत में रहने वाले व्यक्ति या HUF द्वारा किसी NRI से संपत्ति खरीदने पर लागू TDS प्रक्रिया में अलग TAN की जरूरत नहीं होगी और PAN का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, लागू TDS काटने और जमा करने की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

    अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि, SCSS और अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये दरें पिछली तिमाही के स्तर पर ही बनी रहेंगी। ऐसे में SBI सैलरी अकाउंट, LPG सब्सिडी, NPS या बड़ी FD से जुड़े ग्राहकों के लिए संबंधित बदलावों की जानकारी रखना जरूरी है। सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि नए MDR ढांचे का अर्थ हर UPI भुगतान पर ग्राहक से अलग शुल्क लिया जाना नहीं है।

  • 1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    नई दिल्ली। 1 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में गिरावट आई। 24 कैरेट सोने का भाव 308 रुपये बढ़कर 1,48,687 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,379 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी महंगा हुआ। इसका भाव 282 रुपये बढ़कर 1,36,197 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि बुधवार को यह 1,35,915 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में 319 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर को एक किलो चांदी 2,21,954 रुपये पर आ गई, जबकि बुधवार को इसका भाव 2,22,273 रुपये प्रति किलो था।

    देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के भाव में भी मामूली अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,950 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और रायपुर में यह भाव 1,36,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। भोपाल और अहमदाबाद में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,850 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। इन शहरों में आभूषणों की वास्तविक कीमत स्थानीय कर, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोने के मानक बुलियन भाव और आभूषणों के खुदरा भाव में भी अंतर हो सकता है।

    सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता और कीमत की जांच करना जरूरी है। खरीदारी के दौरान बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना लेने पर ध्यान देना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है, इसलिए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के भाव की जांच करना जरूरी है। आभूषण खरीदते समय केवल सोने की मूल कीमत ही नहीं, बल्कि उस पर लागू अन्य शुल्कों को भी ध्यान में रखना होता है।

    चांदी खरीदने वालों के लिए भी उसकी शुद्धता की जांच महत्वपूर्ण है। चांदी की वस्तु को चुंबक के पास ले जाकर शुरुआती तौर पर जांच की जा सकती है, क्योंकि शुद्ध चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती। हालांकि, केवल इस परीक्षण से शुद्धता की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती। बर्फ के जरिए भी एक शुरुआती जांच की जा सकती है, क्योंकि चांदी गर्मी को तेजी से स्थानांतरित करती है और उसकी सतह पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में तेजी से पिघल सकती है। चांदी में तेज या असामान्य धातु जैसी गंध होना भी दूसरी धातु की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।

    चांदी की सतह को साफ सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी कपड़े पर काला या गहरा निशान दिखाई दे सकता है। यह चांदी की सतह पर होने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया के कारण हो सकता है, लेकिन इस तरीके से भी शुद्धता की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। घरेलू परीक्षण केवल शुरुआती अंदाजा लगाने में मदद करते हैं। चांदी की शुद्धता की सही पुष्टि के लिए हॉलमार्क, 925 स्टैम्प या पेशेवर शुद्धता जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है। सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव को देखते हुए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के ताजा भाव और आभूषण की शुद्धता की जानकारी जांचना जरूरी है।

  • सितंबर में GST कलेक्शन 14.7% बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार, पहली छमाही में भी 11.6% की बढ़त

    सितंबर में GST कलेक्शन 14.7% बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार, पहली छमाही में भी 11.6% की बढ़त


    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। त्योहारों के मौसम से पहले देश के कर संग्रह से जुड़े आंकड़ों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में कुल सकल वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कलेक्शन 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2,03,521 करोड़ रुपये के नए स्तर पर पहुंच गया। पिछले साल सितंबर की तुलना में यह उल्लेखनीय वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भी जीएसटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस छह महीने की अवधि में कुल कलेक्शन 12,46,278 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 11.6 प्रतिशत अधिक है।

    सितंबर के दौरान घरेलू आर्थिक गतिविधियों से होने वाले जीएसटी कलेक्शन में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। घरेलू स्तर पर प्राप्त जीएसटी राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.38 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके साथ ही आयात से मिलने वाले राजस्व में इससे भी अधिक तेजी देखी गई। आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व 26 प्रतिशत बढ़कर 65,525 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सितंबर में कुल जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में घरेलू गतिविधियों के साथ आयात से प्राप्त राजस्व की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    सितंबर के आंकड़ों के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही का प्रदर्शन भी सामने आया है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कुल जीएसटी कलेक्शन 12,46,278 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में दर्ज संग्रह से 11.6 प्रतिशत अधिक है। छह महीने के संचयी आंकड़ों में दर्ज यह वृद्धि कर संग्रह में लगातार बने सुधार को दर्शाती है। सितंबर में दर्ज 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मासिक कलेक्शन भी इस अवधि के दौरान कर संग्रह में आई तेजी को रेखांकित करता है।

    त्योहारी सीजन से ठीक पहले जीएसटी कलेक्शन में यह वृद्धि कारोबारी और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेहतर कर अनुपालन और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी ने संग्रह बढ़ाने में योगदान दिया है। सितंबर में घरेलू गतिविधियों से प्राप्त राजस्व में 10.1 प्रतिशत और आयात से मिलने वाले राजस्व में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इससे संकेत मिलता है कि कर संग्रह में बढ़ोतरी केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों और आयात दोनों से राजस्व में वृद्धि हुई है।

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 12,46,278 करोड़ रुपये का कुल जीएसटी कलेक्शन और सितंबर में 2,03,521 करोड़ रुपये का मासिक संग्रह सरकार के राजस्व आंकड़ों में दर्ज महत्वपूर्ण बढ़ोतरी को दिखाता है। त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू होने से पहले आए इन आंकड़ों में बाजार की गतिविधियों और कर संग्रह में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर के दौरान कुल संग्रह में 14.7 प्रतिशत की वृद्धि और अप्रैल से सितंबर की अवधि में 11.6 प्रतिशत की संचयी बढ़त रही। इससे चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीएसटी राजस्व संग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई है।