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  • युवाओं के लिए बड़ा रोजगार अवसर, इंडियन ऑयल की अप्रेंटिस भर्ती में विभिन्न ट्रेडों के 1,450 पदों पर आवेदन आमंत्रित

    युवाओं के लिए बड़ा रोजगार अवसर, इंडियन ऑयल की अप्रेंटिस भर्ती में विभिन्न ट्रेडों के 1,450 पदों पर आवेदन आमंत्रित

    नई दिल्ली । देश की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने युवाओं के लिए अप्रेंटिस भर्ती का बड़ा अवसर उपलब्ध कराया है। कंपनी ने विभिन्न ट्रेड और टेक्नीशियन अप्रेंटिस श्रेणियों में कुल 1,450 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के माध्यम से तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों के योग्य अभ्यर्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 14 जुलाई से शुरू हो चुकी है और पात्र उम्मीदवार 12 अगस्त 2026 तक अपना आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

    इस भर्ती अभियान के तहत ट्रेड अप्रेंटिस अटेंडेंट ऑपरेटर (केमिकल प्लांट), ट्रेड अप्रेंटिस फिटर, टेक्नीशियन अप्रेंटिस (केमिकल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इंस्ट्रूमेंटेशन), सेक्रेटेरियल असिस्टेंट, अकाउंटेंट तथा डेटा एंट्री ऑपरेटर सहित कई पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें सबसे अधिक रिक्तियां केमिकल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल से जुड़े तकनीकी पदों पर हैं। इससे इंजीनियरिंग, विज्ञान, आईटीआई और वाणिज्य पृष्ठभूमि के युवाओं को देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी में प्रशिक्षण लेने का अवसर मिलेगा।

    इन पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित की गई हैं। संबंधित पद के अनुसार उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएससी, आईटीआई, तीन वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा, बीए, बीकॉम, 12वीं उत्तीर्ण अथवा निर्धारित ट्रेड में स्किल सर्टिफिकेट होना आवश्यक है। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले आधिकारिक पात्रता शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है ताकि आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की त्रुटि न हो।

    भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों का राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) अथवा राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। इसके बाद ही अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन पत्र में दर्ज की गई जानकारी और अपलोड किए गए दस्तावेजों का सत्यापन आगे की चयन प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा। गलत या अधूरी जानकारी मिलने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

    आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 31 जुलाई 2026 को आधार मानकर की जाएगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में निर्धारित छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित होगी। सबसे पहले प्राप्त आवेदनों की जांच की जाएगी, जिसके बाद पात्र उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार की जाएगी। मेरिट में स्थान पाने वाले अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। दस्तावेजों की सफल जांच के बाद मेडिकल फिटनेस परीक्षण कराया जाएगा और सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर अंतिम चयन किया जाएगा। भर्ती कार्यक्रम के अनुसार दस्तावेज सत्यापन के लिए शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों की सूची 20 अगस्त 2026 को जारी किए जाने की संभावना है, जबकि दस्तावेज सत्यापन 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच आयोजित किया जा सकता है।

    यह भर्ती अभियान उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है जो प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने करियर की मजबूत शुरुआत करना चाहते हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करें और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें। आवेदन जमा करने के बाद भी उन्हें भर्ती से संबंधित आगामी सूचनाओं और निर्धारित कार्यक्रम पर नियमित रूप से नजर बनाए रखनी चाहिए।

  • सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति

    सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर विदेशी बाजारों की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के संकेत मौजूद हैं इसलिए कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली थी लेकिन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा अभी भी भारतीय बाजार को सहारा दे रहा है। अगर विदेशी बाजारों से अच्छे संकेत मिलते हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार दबाव में भी आ सकता है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी बाजार को ऊपर ले जाने में मदद कर सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर अमेरिकी बाजार और डॉलर की चाल का असर देखने को मिल सकता है। ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े और इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों की रुचि बढ़ा सकती हैं। फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर परिणाम देने वाली कंपनियों में दबाव बन सकता है। ऐसे में केवल अफवाहों के आधार पर निवेश करने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश आता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में होने वाले बदलाव का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा।

    जानकारों का मानना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसलिए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वालों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाले उतार चढ़ाव से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में मिश्रित लेकिन सक्रिय कारोबार देखने को मिल सकता है। वैश्विक संकेत यदि अनुकूल रहे तो बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर के चलते दबाव भी बन सकता है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य बनाए रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए और केवल विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही निवेश करना चाहिए।

  • E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा, वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही देशभर में लागू किया गया ईंधन

    E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा, वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही देशभर में लागू किया गया ईंधन

     नई दिल्ली:  देशभर में एथेनॉल मिश्रित ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि इस ईंधन को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षण के लागू नहीं किया गया। सरकार ने कहा कि ई20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू करने से पहले व्यापक लैब परीक्षण, वास्तविक परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल और ऑटोमोबाइल उद्योग समेत सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत परामर्श किया गया था। इन सभी परीक्षणों में यह पाया गया कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 पेट्रोल नए और पुराने दोनों प्रकार के वाहनों के लिए सुरक्षित है और इससे इंजन या अन्य पुर्जों पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ता।

    लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और अन्य तकनीकी संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया। सरकार ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता दी गई।

    सरकार के मुताबिक ई20 ईंधन लागू करने से पहले ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल, IIP और प्रमुख वाहन निर्माताओं ने इंजन की मजबूती, ड्राइविंग प्रदर्शन, स्टार्टिंग क्षमता, ईंधन दक्षता, जंग-रोधी क्षमता, उत्सर्जन और विभिन्न ऑटो पार्ट्स की अनुकूलता जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत परीक्षण किए। प्रयोगशाला के साथ-साथ वास्तविक सड़कों पर भी लंबे समय तक वाहनों का परीक्षण किया गया। इन सभी अध्ययनों में यह निष्कर्ष सामने आया कि ई20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित है और इससे वाहन के प्रदर्शन में कोई उल्लेखनीय गिरावट नहीं आती।

    सरकार ने विशेष रूप से पुराने वाहनों को लेकर फैली आशंकाओं को भी खारिज किया। संसद में बताया गया कि परीक्षणों के दौरान पुराने वाहनों में भी इंजन, ईंधन प्रणाली या अन्य पुर्जों में किसी प्रकार की असामान्य घिसावट या जंग नहीं पाई गई। सरकार ने कहा कि देश में पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15 से अधिक मिश्रण वाला पेट्रोल और लगभग ढाई वर्षों से ई19 से ई20 मिश्रित पेट्रोल का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा है। इस दौरान करोड़ों वाहन इन ईंधनों पर चले हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर तकनीकी समस्या का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया।

    सरकार के अनुसार भारत में प्रतिदिन लगभग आठ करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाते हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पेट्रोल वाहन हैं। बीते वर्षों में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर चुकी हैं। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण इंजन या अन्य पार्ट्स में किसी असामान्य नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सभी प्रमुख वाहन निर्माता अभी भी ई20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों पर वारंटी दे रहे हैं। एक प्रमुख कार निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जो मूल रूप से ई20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद कंपनी को एथेनॉल मिश्रण के कारण जंग, पुर्जों की आयु कम होने या किसी बड़े तकनीकी नुकसान की शिकायत नहीं मिली। इसी तरह प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माताओं और अन्य कंपनियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लंबे समय तक ई20 के उपयोग के बावजूद किसी गंभीर तकनीकी समस्या का प्रमाण नहीं मिला।

    सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल का एक बड़ा फायदा पर्यावरण संरक्षण भी है। एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर अधिक होने के कारण आधुनिक इंजन बेहतर प्रदर्शन करते हैं और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। साथ ही इसकी ऊष्मा अवशोषण क्षमता अधिक होने से ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता में सुधार देखा गया है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लागू करने की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तथ्यों, उद्योग की सहमति और व्यापक परीक्षणों पर आधारित रही है।

  • लिथियम कोबाल्ट और निकेल की बढ़ेगी रिकॉर्ड मांग विकसित भारत के लक्ष्य में क्रिटिकल मिनरल निभाएंगे सबसे अहम भूमिका

    लिथियम कोबाल्ट और निकेल की बढ़ेगी रिकॉर्ड मांग विकसित भारत के लक्ष्य में क्रिटिकल मिनरल निभाएंगे सबसे अहम भूमिका


    नई दिल्ली। भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही आने वाले वर्षों में क्रिटिकल मिनरल की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2047 तक देश में लिथियम कोबाल्ट निकेल ग्रेफाइट तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की मांग वर्तमान स्तर से चार से दस गुना तक बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को विकसित भारत 2047 और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना है तो इन महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। यही कारण है कि बैटरियों और ऊर्जा भंडारण प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों की मांग ही वर्ष 2030 तक 110 से 130 गीगावाट तक पहुंच सकती है जिससे इन खनिजों का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।

    रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत को केवल खनिजों के आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू स्तर पर अन्वेषण रिफाइनिंग प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी। यदि देश समय रहते इन क्षेत्रों में निवेश करता है तो भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट और आयात पर बढ़ती निर्भरता से बचा जा सकता है। इसके साथ ही घरेलू उद्योगों को भी नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    विशेषज्ञों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तीन चरणों वाला रोडमैप भी सुझाया है। पहले चरण में वर्ष 2026 से 2031 के बीच बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसमें एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी लागू करना सर्कुलर मिनरल प्रोसेसिंग जोन विकसित करना और बैटरी ट्रेसबिलिटी तथा रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना शामिल है। दूसरे चरण में वर्ष 2031 से 2036 के बीच रीसाइक्लिंग नेटवर्क का विस्तार और ग्रीन फाइनेंसिंग के जरिए औद्योगिक विकास को गति देने की योजना प्रस्तावित की गई है।

    तीसरे और अंतिम चरण में वर्ष 2036 से 2047 तक भारत को रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने आयात पर निर्भरता कम करने और 10 से 15 अरब डॉलर की वार्षिक रीसाइक्लिंग अर्थव्यवस्था विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नीतियों का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं बल्कि संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके लिए खनिज आधारित रणनीतियों को अपनाने घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने और मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने और निजी निवेश आकर्षित करने पर भी जोर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रिफाइनिंग सेपरेशन और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्र अत्यधिक पूंजी निवेश वाले हैं और इनमें निवेश का लाभ लंबे समय बाद मिलता है। इसलिए सरकारी सहायता ग्रीन बॉन्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वेंचर कैपिटल और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के सहयोग जैसी बहुस्तरीय वित्तीय व्यवस्था विकसित करना जरूरी होगा। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के लिए किए गए वित्तीय प्रावधान को सकारात्मक कदम बताते हुए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए और अधिक लक्षित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि भारत भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर सके।

  • जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत उपलब्ध न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद देशभर के परिवारों के लिए स्वास्थ्यवर्धक पोषण सप्लीमेंट को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आवश्यक पोषण उत्पादों को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर आम लोगों के स्वास्थ्य संबंधी खर्च को कम करना और संतुलित पोषण को बढ़ावा देना है।

    सरकार के मुताबिक, जन औषधि केंद्रों पर विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें प्रोटीन बार, इम्यूनिटी बार, महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन सप्लीमेंट, माल्ट आधारित पोषण आहार तथा प्रोटीन पाउडर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को बच्चों, कामकाजी लोगों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और फिटनेस के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जन औषधि प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार 35 ग्राम के चॉकलेट पैक में उपलब्ध हैं। वहीं महिलाओं के लिए तैयार किए गए विशेष प्रोटीन बूस्ट को चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में 250 ग्राम पैक के रूप में उपलब्ध कराया गया है। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों का उद्देश्य रोजमर्रा के आहार में अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है ताकि विभिन्न वर्गों की पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जन औषधि योजना के अंतर्गत पोषण रेंज में माल्ट आधारित न्यूट्रिशनल फूड भी शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, यह उत्पाद आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध है और पूरे परिवार के लिए दैनिक पोषण का एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। 500 ग्राम के सामान्य माल्ट पैक के साथ कोको फ्लेवर वाला विकल्प भी उपलब्ध है। इसके अलावा कम मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे सैशे पैक भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे कम बजट वाले परिवारों को भी इन उत्पादों तक आसान पहुंच मिल सके।

    सरकार का कहना है कि विभिन्न पैक आकार उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और आर्थिक क्षमता के अनुसार उत्पाद चुन सकते हैं। इन पोषण उत्पादों को तैयार करना भी आसान है और नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त माना गया है। इससे परिवारों को कम लागत में अतिरिक्त पोषण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    फिटनेस और प्रोटीन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए योजना के तहत 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर और जन औषधि प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, ये उत्पाद दैनिक प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ मांसपेशियों की रिकवरी में भी सहायक माने जाते हैं। विशेष रूप से व्यायाम करने वाले लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्हें उपयोगी विकल्प बताया गया है।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को आम नागरिकों तक किफायती दरों पर पहुंचाना है। सरकार का कहना है कि न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों को योजना में शामिल करने से अब लोगों को केवल सस्ती दवाएं ही नहीं, बल्कि कम कीमत पर पोषण संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध इन उत्पादों से परिवारों का स्वास्थ्य व्यय कम करने, संतुलित पोषण को प्रोत्साहित करने और विभिन्न आय वर्ग के लोगों तक आवश्यक पोषण उत्पाद पहुंचाने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में भी इस श्रेणी में नए उत्पाद शामिल किए जाने की संभावना पर काम जारी है।

  • 8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट जैसे मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार मांगें उठाई जा रही हैं। इसी बीच संसद में पहली बार इन दोनों अहम विषयों पर विस्तार से सवाल-जवाब हुए, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें आयोग की आगामी प्रक्रिया पर टिक गई हैं।

    संसद में हुई चर्चा के दौरान सरकार से पूछा गया कि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर तय करते समय किन मानकों को आधार बनाया जाएगा और क्या फैमिली यूनिट की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन सभी विषयों पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा। आयोग को स्वतंत्र रूप से अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

    फिटमेंट फैक्टर वह महत्वपूर्ण गुणांक होता है जिसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मूल वेतन और पेंशन में संशोधन किया जाता है। नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर पुराने मूल वेतन को निर्धारित फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर नया वेतन तय किया जाता है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को अधिक रखने की है ताकि वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

    वर्तमान में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 3.68 तक रखने की मांग की जा रही है। वहीं कुछ अन्य संगठन इसे 3 से 3.5 के बीच निर्धारित करने की पैरवी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए बेहतर फिटमेंट फैक्टर तय किया जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    फैमिली यूनिट को लेकर भी कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांग दोहराई है। उनकी मांग है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की परिभाषा का विस्तार किया जाए और परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाए, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। संसद में इस मुद्दे को भी उठाया गया और सरकार से इस संबंध में नीति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया। हालांकि सरकार ने कहा कि इस विषय पर भी आयोग अपनी सिफारिशों के आधार पर विचार करेगा।

    सरकार ने यह भी बताया कि आठवें वेतन आयोग की बैठकें लगातार जारी हैं और आयोग विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। आगामी बैठक 7 अगस्त को दिल्ली में आयोजित होगी। इसके बाद सितंबर महीने में चेन्नई और पुडुचेरी में भी बैठकें प्रस्तावित हैं। आयोग ने संबंधित संगठनों से आग्रह किया है कि वे केवल अपने निर्धारित क्षेत्र की बैठकों में ही भाग लें, क्योंकि आयोग स्वयं विभिन्न राज्यों का दौरा कर सुझाव एकत्र कर रहा है।

    फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा और वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी। सरकार ने साफ किया है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में फिलहाल सभी की नजरें आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम सिफारिशों पर बनी हुई हैं।

  • आईटीआर फाइलिंग ने पार किया 5 करोड़ का आंकड़ा, आयकर विभाग बोला- अंतिम दिन की जल्दबाजी से बचें

    आईटीआर फाइलिंग ने पार किया 5 करोड़ का आंकड़ा, आयकर विभाग बोला- अंतिम दिन की जल्दबाजी से बचें

    नई दिल्ली । असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। निर्धारित अंतिम तारीख 31 जुलाई से ठीक पहले 5 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही आयकर विभाग ने शेष पात्र करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम दिन तक इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना रिटर्न दाखिल कर लें। विभाग का कहना है कि समय रहते रिटर्न फाइल करने से अंतिम समय में संभावित तकनीकी दिक्कतों और अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सकता है।

    आयकर विभाग ने अपने आधिकारिक संदेश के माध्यम से बताया कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न सफलतापूर्वक दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने विशेष रूप से उन करदाताओं को सलाह दी है, जिन्हें आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म के माध्यम से रिटर्न दाखिल करना है, वे अपने दस्तावेजों का मिलान करने के बाद बिना देरी के रिटर्न जमा करें। विभाग का मानना है कि अंतिम दिन बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के एक साथ पोर्टल पर आने से तकनीकी दबाव बढ़ सकता है, जिससे रिटर्न दाखिल करने में परेशानी हो सकती है।

    31 जुलाई की समयसीमा उन करदाताओं के लिए निर्धारित है, जिनके खातों का ऑडिट कराना आवश्यक नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य सामान्य करदाताओं के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्धारित समय के भीतर रिटर्न दाखिल करने से आगे की प्रक्रिया भी सुगमता से पूरी हो सकती है और आवश्यक होने पर रिफंड की प्रक्रिया भी समय पर शुरू हो सकती है।

    विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी करदाता अपने वित्तीय विवरणों का सावधानीपूर्वक सत्यापन अवश्य करें। इसके लिए फॉर्म-16, वार्षिक सूचना विवरण, फॉर्म-26एएस, बैंक स्टेटमेंट तथा आय से संबंधित अन्य दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है। यदि किसी दस्तावेज में दर्ज जानकारी और रिटर्न में भरी गई जानकारी में अंतर पाया जाता है, तो भविष्य में नोटिस या स्पष्टीकरण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए विभाग ने सही और पूर्ण जानकारी के आधार पर रिटर्न दाखिल करने पर जोर दिया है।

    आयकर विभाग पिछले कई दिनों से लगातार करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने के लिए जागरूक कर रहा है। विभाग का कहना है कि अंतिम समय तक प्रतीक्षा करने की प्रवृत्ति के कारण पोर्टल पर अचानक अत्यधिक ट्रैफिक बढ़ जाता है, जिससे तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में समय रहते प्रक्रिया पूरी करना करदाताओं के हित में रहेगा और अनावश्यक तनाव से भी बचाव होगा।

    पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े भी आयकर प्रणाली में बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 31 मार्च 2025 तक 9 करोड़ से अधिक करदाताओं ने आयकर रिटर्न दाखिल किए थे। इनमें से 8.64 करोड़ रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन भी पूरा किया गया था। इसी अवधि में 4,35,008 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर और सही तरीके से रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को प्रक्रिया का लाभ तेजी से मिल सकता है। ऐसे में विभाग ने एक बार फिर सभी पात्र करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम तारीख से पहले अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर निर्धारित प्रक्रिया को समय पर पूरा करें।

  • मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    नई दिल्ली । देश के हेल्थकेयर सेक्टर की प्रमुख अस्पताल श्रृंखलाओं में शामिल मनीपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का ₹9,275.22 करोड़ का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) निवेशकों के लिए खुल चुका है। कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से अपने विस्तार की योजनाओं को गति देने के साथ-साथ कर्ज का बोझ कम करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पहले दिन मिले शुरुआती निवेशकों के रुझान के बाद बाजार में यह चर्चा तेज है कि इस आईपीओ में निवेश करना कितना लाभदायक हो सकता है और किन निवेशकों के लिए यह अवसर उपयुक्त माना जा रहा है।

    मनीपाल हेल्थ देश की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखलाओं में गिनी जाती है। कंपनी के नेटवर्क में 13,000 से अधिक बेड उपलब्ध हैं और पिछले कुछ वर्षों में इसने नए अस्पताल स्थापित करने के साथ-साथ अस्पतालों के अधिग्रहण के जरिए अपने कारोबार का लगातार विस्तार किया है। मजबूत ब्रांड पहचान, व्यापक उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लंबे अनुभव ने कंपनी को उद्योग की प्रमुख संस्थाओं में शामिल किया है।

    कंपनी की एक बड़ी विशेषता इसके प्रमोटर समूह और संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी मानी जा रही है। वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित निवेशकों की मौजूदगी से कंपनी की विश्वसनीयता को मजबूती मिली है। साथ ही, बीते वर्षों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे इसके भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

    आईपीओ के मूल्यांकन को भी उद्योग के अन्य सूचीबद्ध अस्पताल समूहों की तुलना में प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर ₹560 से ₹590 का प्राइस बैंड तय किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मूल्यांकन बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित दिखाई देता है। सार्वजनिक निर्गम से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को कम करने में लगाएगी, जिससे भविष्य में ब्याज व्यय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इससे कंपनी की लाभप्रदता और नकदी प्रवाह दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    हालांकि निवेशकों के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। कंपनी की आय का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्नाटक से आता है, जिससे किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अधिक निर्भरता का जोखिम बना रहता है। यदि उस क्षेत्र में कारोबार प्रभावित होता है तो कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी अन्य राज्यों में नए अस्पताल शुरू करने और अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है, जिससे भविष्य में यह निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईपीओ से पहले दिन भारी प्रीमियम पर लिस्टिंग की संभावना सीमित हो सकती है। इसलिए केवल अल्पकालिक मुनाफे या लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। इसके विपरीत, जिन निवेशकों का निवेश दृष्टिकोण तीन वर्ष या उससे अधिक का है, उनके लिए यह आईपीओ बेहतर विकल्प माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग, कंपनी का मजबूत प्रबंधन और विस्तार की योजनाएं इसे लंबी अवधि में संभावनाओं वाला निवेश बना सकती हैं।

    मनीपाल हेल्थ का आईपीओ 29 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक निवेशकों के लिए खुला है। कंपनी इस निर्गम के जरिए कुल ₹9,275.22 करोड़ जुटाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें नए शेयर जारी करने के साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम 25 शेयरों का एक लॉट निर्धारित किया गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्गम उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है जो गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के माध्यम से स्थिर रिटर्न की तलाश कर रहे हैं।

  • सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट

    सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट


    नई दिल्ली ।
    अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के बाद गुरुवार को वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद बाजार में मुनाफावसूली और निवेशकों की बदली रणनीति के कारण कीमतों में फिर नरमी आ गई। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया, जहां सोने और चांदी के ताजा भाव में बदलाव दर्ज किया गया।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखने का निर्णय लिया। बाजार पहले से ही इस फैसले की संभावना जता रहा था, लेकिन निवेशकों की निगाहें महंगाई और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर फेड नेतृत्व की टिप्पणियों पर टिकी रहीं। महंगाई को निर्धारित लक्ष्य के करीब लाने की चुनौती बरकरार रहने के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी ध्यान दिया।

    फेड के फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत में तेजी आई और यह लगभग 4,078 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतें 4,080 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छूती दिखाई दीं। हालांकि यह तेजी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी और बाद में बाजार में बिकवाली बढ़ने से सोने का भाव घटकर करीब 4,058 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी शुरुआती मजबूती के बाद इसी तरह का रुख देखने को मिला।

    वैश्विक बाजार में आई इस हलचल का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,47,000 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। वहीं चांदी के दाम में भी बढ़त दर्ज की गई और इसका भाव करीब 2,25,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और डॉलर की चाल का असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी घरेलू कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

    वायदा बाजार में भी सोने के दाम मजबूत रहे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 10 ग्राम सोना लगभग 570 रुपये की बढ़त के साथ 1,42,192 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसके विपरीत एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में कमजोरी रही और इसका भाव करीब 852 रुपये घटकर 2,16,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि हाजिर और वायदा बाजार में निवेशकों की रणनीति अलग-अलग बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स की चाल और केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं आर्थिक संकेतकों में सुधार और डॉलर की मजबूती की स्थिति में कीमतों पर दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और घरेलू बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है, इसलिए निवेश संबंधी निर्णय बाजार की मौजूदा स्थिति और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर लेना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

  • फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    नई दिल्ली । अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के फैसले से अमेरिकी निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार में तेज बिकवाली दर्ज की गई। दूसरी ओर, वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    अमेरिका में डॉऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार के दौरान 1,100 अंकों से अधिक तक फिसल गया। इसके साथ ही नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांकों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ब्याज दरों को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों की उम्मीद थी, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा मौजूदा दरों को बरकरार रखने के फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके बाद निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    फेडरल रिजर्व ने अपनी नीति समीक्षा के बाद ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने यह संकेत भी दिया कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की प्रक्रिया अभी जारी है और भविष्य के निर्णय आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। इसी कारण बाजार को निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी।

    अमेरिकी बाजार में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया, हालांकि विभिन्न देशों के बाजारों में मिश्रित रुख रहा। कुछ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संभावित प्रभाव का आकलन करने में जुटे हुए हैं।

    वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान के साथ खुले। बाजार में ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र के कुछ शेयरों पर दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा और भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति ने बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

    विदेशी बाजारों की हलचल के बीच भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे मजबूत होकर 95.59 के स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार की स्थिरता और विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपये को समर्थन मिला, हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। वहीं भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेश, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेतकों का असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार की मजबूती के बीच संतुलन पर बनी हुई हैं।