Category: Economy

  • GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    नई दिल्ली : GST कानून लागू होने के करीब नौ साल बाद सरकार टैक्स व्यवस्था में एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत GST अधिकारियों को मिली सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति हटाई जा सकती है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारी मौजूदा व्यवस्था के तहत सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है।

    GST कानून 2016 में संविधान के 101वें संशोधन के साथ अस्तित्व में आया था और 2017 में इसे लागू किया गया। मौजूदा कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान है। इनमें फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामले शामिल हैं। CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। इसके लिए संबंधित अधिकारी के पास यह मानने का पर्याप्त आधार होना जरूरी है कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।

    सरकार ने वर्ष 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि केवल कानून में गिरफ्तारी की अनुमति होने के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। कार्रवाई से पहले मामले की गंभीरता, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। अब प्रस्तावित बदलाव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख कारण टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतें बताई जा रही हैं।

    पिछले करीब आठ से नौ महीनों से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा चलने की बात कही गई है। कारोबारियों और कंपनियों की ओर से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई जाती रही है। विशेष रूप से कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं। सरकार ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रहे, लेकिन कारोबारियों के बीच अनावश्यक डर की स्थिति न बने।

    GST कानून के तहत गिरफ्तारी के इस्तेमाल के आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच GST अपराधों के 72,393 मामले दर्ज हुए और केंद्रीय GST अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़ा केवल केंद्रीय GST फॉर्मेशन से संबंधित है। इसमें राज्य GST अधिकारियों की ओर से की गई गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है, लेकिन GST अधिकारी स्वयं गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। गंभीर और जानबूझकर किए गए फ्रॉड के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    अब 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर नजर है। बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो GST कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी और सरकार इसे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। फिलहाल GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम स्थिति GST काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

  • आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    नई दिल्ली । छोटे कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह बाजार की दिशा पर आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने पर भारतीय बाजार में राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत आरबीआई की नीति, महंगाई को लेकर उसका रुख और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

    पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही हो गई थी। सोमवार को सेंसेक्स में 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और अगले दो कारोबारी सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत और गिर गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

    तकनीकी संकेतकों के स्तर पर भी बाजार में कमजोरी बनी हुई है। निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसका साप्ताहिक आरएसआई करीब 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी की संभावना बन सकती है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22,800 और 23,000 के स्तर निफ्टी के लिए निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेंगे। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट माने जा रहे हैं।

    बाजार की धारणा पर फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव अधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में संशोधित आंकड़ा 7.4 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत तथा बिजली और गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    ऊर्जा बाजार का रुख भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जैसे आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर आरबीआई नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े अगले सप्ताह बाजार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे।

  • बचत का पैसा शेयर मार्केट में लगाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम छोटी गलती पड़ सकती है भारी

    बचत का पैसा शेयर मार्केट में लगाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम छोटी गलती पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली। शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की चाहत आज बड़ी संख्या में लोगों में देखने को मिल रही है। खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा ने शेयर बाजार तक आम निवेशकों की पहुंच आसान कर दी है। हालांकि शेयर मार्केट में पैसा लगाना केवल किसी शेयर को खरीदने और कुछ समय बाद बेचने तक सीमित नहीं है। इसमें बाजार की समझ जोखिम उठाने की क्षमता और सही वित्तीय योजना का होना बेहद जरूरी माना जाता है। इसलिए अगर आप अपनी कमाई या बचत का पैसा शेयर मार्केट में इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कितना पैसा निवेश करना चाहिए और किस उद्देश्य से करना चाहिए।

    शेयर बाजार में निवेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए रखे पैसे को बाजार में लगाने से बचना चाहिए। घर का खर्च बच्चों की पढ़ाई स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बीमा और आपातकालीन स्थिति के लिए जरूरी रकम अलग रखना बेहतर वित्तीय अनुशासन माना जाता है। निवेश के लिए वही पैसा इस्तेमाल करना चाहिए जिसकी तत्काल जरूरत नहीं है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए अचानक जरूरत पड़ने पर निवेश को नुकसान में बेचने की स्थिति से बचना जरूरी है।

    अगर आप शेयर मार्केट में नए हैं तो बिना जानकारी किसी दोस्त रिश्तेदार या सोशल मीडिया की सलाह पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। किसी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके कारोबार वित्तीय स्थिति आय मुनाफे कर्ज और भविष्य की संभावनाओं जैसी बुनियादी बातों को समझना जरूरी है। केवल इसलिए किसी शेयर में पैसा लगाना उचित नहीं माना जाता क्योंकि उसकी कीमत तेजी से बढ़ रही है। बाजार में किसी भी समय तेजी के बाद गिरावट आ सकती है।

    निवेश में पैसे को अलग अलग विकल्पों में बांटने की रणनीति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। पूरी बचत को एक ही शेयर या एक ही सेक्टर में लगाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार विविधता रखना जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। लंबी अवधि के निवेश और छोटी अवधि की ट्रेडिंग को भी एक जैसा नहीं समझना चाहिए। ट्रेडिंग में बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और अधिक जोखिम उठाने की जरूरत पड़ सकती है जबकि लंबी अवधि का निवेश अलग रणनीति पर आधारित होता है।

    निवेश करते समय जल्द अमीर बनने की उम्मीद से बचना भी जरूरी है। शेयर बाजार में रिटर्न निश्चित नहीं होता और पिछले प्रदर्शन से भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। इसलिए किसी भी निवेश का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर मार्केट को कमाई का आसान रास्ता समझने के बजाय एक वित्तीय निवेश माध्यम के रूप में देखा जाए। पर्याप्त जानकारी हासिल करने नियमित रूप से अपने निवेश की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाह लेने से निवेश संबंधी फैसलों को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। बाजार में पैसा लगाने से पहले यह तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है कितने समय के लिए निवेश करना है और नुकसान की स्थिति में आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। यही तैयारी आपके निवेश को अधिक अनुशासित बनाने में मदद कर सकती है।

  • भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत, वैश्विक अनिश्चितता के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती पर वित्त मंत्री सीतारमण का जोर

    भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत, वैश्विक अनिश्चितता के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती पर वित्त मंत्री सीतारमण का जोर

    नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितता का भारत ने सफलतापूर्वक सामना किया है और देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 के विशेष पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस दौर से उल्लेखनीय रूप से बेहतर स्थिति में निकला है और उसकी आर्थिक बुनियाद में और मजबूती आई है। उन्होंने वैश्विक सार्वजनिक ऋण का जिक्र करते हुए कहा कि 2025 में यह बढ़कर वैश्विक जीडीपी के करीब 94 प्रतिशत तक पहुंच गया और 2029 तक इसके 100 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

    उन्होंने कहा कि ऐसे समय में आर्थिक झटके व्यापक आर्थिक प्रणालियों, वितरण तंत्र और राज्य की क्षमता की परीक्षा लेते हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी, अगस्त 2026 में सीपीआई मुद्रास्फीति करीब 4.8 प्रतिशत रही और पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 0.5 प्रतिशत रहा।

    सीतारमण ने कहा कि 2014 से सरकार ने सतत विकास के लिए जरूरी क्षमताओं को मजबूत करने पर काम किया है। इनमें राज्य की प्रतिक्रिया देने की क्षमता, अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता और नागरिकों तथा उद्यमों की विकास में भागीदारी शामिल है। उन्होंने पहली बुनियाद परिवारों के स्तर पर लचीलेपन को मजबूत करना बताया। उनके अनुसार सरकारी खर्च और योजनाओं को लोगों के जीवन में ठोस सुधार में बदलने, पारदर्शी तंत्र, निगरानी और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन से परिवारों की असुरक्षा के अलग-अलग स्रोतों को कम करने में मदद मिली।

    जन धन-आधार-मोबाइल यानी जेएएम और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने लाभार्थियों तक सीधे सहायता पहुंचाने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत किया। पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत किए गए कार्यों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    वित्त मंत्री ने दूसरी बुनियाद को आर्थिक अवसरों को उत्पादक गतिविधियों में बदलने की क्षमता बताया। उन्होंने कहा कि वित्त तक पहुंच इसका महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे स्वरोजगार और छोटे उद्यमों को समर्थन मिला। पीएम स्वनिधि योजना से रेहड़ी-पटरी वालों को सहायता मिलने का भी उन्होंने उल्लेख किया। सीतारमण के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र में पुनर्पूंजीकरण, संकट वाली परिसंपत्तियों के समाधान, बेहतर प्रशासन और जोखिम प्रबंधन ढांचे के जरिए वित्तीय प्रणाली को मजबूत किया गया है।

    अगस्त 2026 तक के एक वर्ष में गैर-खाद्य ऋण में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना ने कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने, परिचालन और रोजगार बनाए रखने तथा व्यवधान के समय नकदी की कमी से निपटने में मदद की।

    तीसरी बुनियाद के तौर पर सीतारमण ने उस बुनियादी ढांचे को बताया, जो लोगों, कारखानों और बाजारों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अकेले पूंजीगत व्यय के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। उनके अनुसार प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये है, जो जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 2014 से लगातार किए गए निवेश के संचयी परिणाम दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार करीब 61 प्रतिशत हुआ है, परिचालन रेलवे मार्ग दोगुने से अधिक हो गए हैं और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

    चौथी बुनियाद के रूप में उन्होंने मजबूत सुधारवादी सोच वाले नेतृत्व का उल्लेख किया। सीतारमण ने कहा कि सरकार ने जीएसटी, दिवाला और दिवालियापन संहिता, चार श्रम संहिताओं और जन विश्वास अधिनियमों के जरिए राष्ट्रीय स्तर के ढांचे को आगे बढ़ाया है। उन्होंने परिचालन हवाई अड्डों की संख्या दोगुने से अधिक होने और प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई क्षमता में करीब 60 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया।

  • एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एलआईसी निवेश फ्रॉड मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत के सामने रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस एडीए ग्रुप के ग्रुप एमडी अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वास जोशी और एलआईसी के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पी. वेणुगोपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी के अनुसार चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े प्रावधानों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

    मामला एलआईसी की ओर से वर्ष 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 1,500 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर की खरीद से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार ये डिबेंचर गंभीर रूप से गलत जानकारी के आधार पर जारी किए गए थे। एलआईसी की ओर से की गई शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 1 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोप लगाया कि डिबेंचर की सदस्यता से प्राप्त धनराशि बाद में एडीए ग्रुप की कंपनियों में भेजी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक इससे एलआईसी को कथित तौर पर गलत तरीके से नुकसान हुआ और संबंधित आरोपियों तथा संस्थाओं को अनुचित लाभ मिला।

    जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में एलआईसी को हुआ कुल कथित नुकसान 3,750 करोड़ रुपये है। सीबीआई ने कहा है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने और दूसरे आरोपों की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है। चार्जशीट में शामिल आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दर्ज मामले के आधार पर हैं। मामले में आगे की जांच के साथ अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।

    इसके अलावा सीबीआई की बीएसएफबी, दिल्ली शाखा ने कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एलआईसी और ईपीएफओ से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस एडीए ग्रुप की अन्य संस्थाओं के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले अलग-अलग शिकायतों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं। एजेंसी इन मामलों में भी जांच आगे बढ़ा रही है।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े मामलों में इससे पहले सात चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। मौजूदा चार्जशीट इन मामलों में आठवीं चार्जशीट है। एजेंसी ने बताया कि अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एलआईसी निवेश मामले में दाखिल मौजूदा चार्जशीट के बाद जांच का दायरा आगे भी जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका तथा अतिरिक्त आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, इस सप्ताह सोना 2,800 रुपये और चांदी 5,000 रुपये तक सस्ती

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, इस सप्ताह सोना 2,800 रुपये और चांदी 5,000 रुपये तक सस्ती


    नई दिल्ली:
    त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक और घरेलू बाजारों के मिले-जुले रुख के बीच पूरे सप्ताह दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव रहा। सप्ताह के दौरान सोने की कीमत में कुल मिलाकर 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी के भाव में भी सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्रों में करीब 5,000 रुपये तक की बड़ी गिरावट दर्ज हुई। ऐसे में दोनों धातुओं की खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए इस सप्ताह के भाव महत्वपूर्ण रहे हैं।

    आज 22 कैरेट सोने की कीमत कई प्रमुख शहरों में 1,38,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है, जबकि 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में भी 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1,38,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक है। 24 कैरेट सोने का भाव इन शहरों में 1,50,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर है। सप्ताह के दौरान गिरावट के बावजूद सोने की कीमतें इन स्तरों पर बनी हुई हैं।

    दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने का भाव 1,38,004 रुपये प्रति 10 ग्राम है। मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,50,400 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,37,854 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,450 रुपये और 22 कैरेट की कीमत 1,37,904 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,400 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,37,854 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

    जयपुर में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,550 रुपये और 22 कैरेट की कीमत 1,38,004 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना 1,50,400 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,37,854 रुपये प्रति 10 ग्राम है। लखनऊ में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,550 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 1,38,004 रुपये प्रति 10 ग्राम है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,450 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 1,37,904 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इस तरह अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर बना हुआ है।

    चांदी की कीमत की बात करें तो आज इसके भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, पिछले कारोबारी सत्रों में हुई गिरावट के कारण अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,26,570 रुपये प्रति किलोग्राम बना हुआ है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमत में करीब 5,000 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई थी। इस तरह सप्ताह के दौरान सोने और चांदी दोनों के भाव में कमी देखने को मिली है। त्योहारों से पहले खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए मौजूदा बाजार भाव इसी स्तर पर बने हुए हैं।

  • LPG सिलेंडर के दाम आज स्थिर, लेह में घरेलू सिलेंडर 1179 रुपये; अक्टूबर में कॉमर्शियल गैस के रेट बढ़े

    LPG सिलेंडर के दाम आज स्थिर, लेह में घरेलू सिलेंडर 1179 रुपये; अक्टूबर में कॉमर्शियल गैस के रेट बढ़े

    नई दिल्ली: घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। अलग-अलग शहरों में घरेलू सिलेंडर के दाम अलग हैं। लेह में घरेलू सिलेंडर 1179 रुपये, दिल्ली में 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और भोपाल में 947.50 रुपये में मिल रहा है। पटना में इसकी कीमत 1031.50 रुपये, लखनऊ में 979.50 रुपये, अहमदाबाद और कन्याकुमारी में 949 रुपये तथा तवांग में 1007.50 रुपये है। आम उपभोक्ताओं के लिए घरेलू सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर हैं। घरेलू सिलेंडर की कीमत में आखिरी बढ़ोतरी जून में हुई थी और उसके बाद से इसमें बदलाव नहीं किया गया है।

    1 अक्टूबर को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। इस दौरान कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में अधिकतम 71.50 रुपये तक का इजाफा हुआ। इसके बाद चेन्नई में कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट 2983 रुपये हो गया। मुंबई में 63 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 2701 रुपये और अहमदाबाद में 2831.50 रुपये पहुंच गई। लेह में कॉमर्शियल सिलेंडर 3450 रुपये का है। भोपाल में इसका दाम 2815 रुपये और लखनऊ में 2932.50 रुपये हो गया। लखनऊ में 1 अक्टूबर को कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपये बढ़ाई गई थी। बिहार की राजधानी पटना में भी 1 अक्टूबर को 71.50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कॉमर्शियल सिलेंडर का दाम 3100.50 रुपये हो गया।

    इस साल कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है। 1 जनवरी को दिल्ली में इसका रेट 1691.50 रुपये था। 1 फरवरी को यह बढ़कर 1740.50 रुपये और 1 मार्च को 1768.50 रुपये हो गया। इसके बाद 7 मार्च को 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत बढ़कर 1883 रुपये पहुंच गई। 1 अप्रैल को दाम 2078.50 रुपये और 1 मई को 3071.50 रुपये हो गया। 1 जून को दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर का रेट 3113.50 रुपये था। इसके बाद जुलाई में पहली बार कीमत में कमी की गई और राष्ट्रीय राजधानी में दाम 2930 रुपये हो गया।

    अगस्त में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में एक बार फिर कटौती हुई। 1 अगस्त के बाद दिल्ली में इसका रेट घटकर 2738 रुपये रह गया। सितंबर में यह रुख फिर बदला और कीमत बढ़ाई गई। इसके बाद 1 सितंबर को दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर का दाम 2747.50 रुपये हो गया। वहीं, घरेलू सिलेंडर की कीमतों में इस साल मार्च और फिर जून में बढ़ोतरी हुई थी। जून के बाद घरेलू सिलेंडर के दाम स्थिर बने हुए हैं और अक्टूबर की शुरुआत में भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।

  • जी7 देश जारी करेंगे 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल, अगले चार महीनों में होगी आपूर्ति

    जी7 देश जारी करेंगे 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल, अगले चार महीनों में होगी आपूर्ति


    नई दिल्ली:
    जी7 और उसके साझेदार देश अपने इमरजेंसी भंडार से करीब 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करेंगे। यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच लिया गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति और जी7 के मौजूदा चेयरमैन इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि जी7 ईंधन की कीमतों में कमी लाना चाहता है। इसके तहत अगले चार महीनों में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की देखरेख में रणनीतिक भंडार से आपूर्ति जारी की जाएगी।

    यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ने संकेत दिया है कि अगर यूरोपीय देशों ने अपने भंडार से और आपूर्ति जारी नहीं की, तो डीजल निर्यात पर भारी असर डालने वाला प्रतिबंध लगाया जा सकता है। ऐसा कदम यूरोप के लिए आपूर्ति के एक महत्वपूर्ण स्रोत को प्रभावित कर सकता है। यूरोपीय महाद्वीप डीजल उत्पादन में कमी को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। जी7 देशों का यह कदम बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया है।

    ईरान युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद आईईए ने मार्च में 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने इन बैरल को अपेक्षित तेजी से उपलब्ध नहीं कराया। जी7 के एक बयान से संकेत मिला है कि अब जारी किए जाने वाले 100 मिलियन बैरल में वे बैरल भी शामिल हो सकते हैं, जो मार्च में जारी किए गए स्टॉक के तहत अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

    मैक्रों ने कहा कि सभी देशों ने मिलकर उन अनुपातों के अनुसार रणनीतिक भंडार जारी करने का संकल्प लिया है जिनका उन्होंने उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि इसमें डीजल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, सभी देश यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि निर्यात पर कोई रोक न लगे। इस कदम का उद्देश्य ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में कमी लाने की कोशिश करना है। अगले चार महीनों के दौरान होने वाली आपूर्ति की निगरानी आईईए करेगा।

    हालांकि, जी7 और उसके साझेदार देशों की ओर से इमरजेंसी भंडार से तेल और डीजल जारी करने के फैसले के बाद भी कच्चे तेल की कीमत में कोई खास कमी नहीं आई। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ। इस तरह करीब 100 मिलियन बैरल की प्रस्तावित आपूर्ति के बावजूद बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रही। फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों और डीजल की आपूर्ति को लेकर बने दबाव के बीच लिया गया है।

  • अक्टूबर की शुरुआत में महंगाई का असर, गैस सिलेंडर से लेकर हवाई सफर तक बढ़ा खर्च

    अक्टूबर की शुरुआत में महंगाई का असर, गैस सिलेंडर से लेकर हवाई सफर तक बढ़ा खर्च

    नई दिल्ली: अक्टूबर महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई का असर बढ़ाने वाले कई बदलाव लेकर आई है। त्योहारों के सीजन में जहां लोग खरीदारी, यात्रा और अन्य जरूरी खर्चों की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ), घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पासपोर्ट सेवाओं की लागत बढ़ गई है। इन बदलावों का असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग, हवाई यात्रा और घरेलू खरीदारी के बजट पर पड़ सकता है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 62.50 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 2,810 रुपए और मुंबई में 2,764 रुपए हो गई है। पटना में कीमत में सबसे अधिक 71.50 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई है।

    कमर्शियल गैस की कीमत बढ़ने से होटल, रेस्तरां, ढाबा और कैटरिंग उद्योग की लागत बढ़ सकती है। अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों तथा शादी-विवाह के कारण खाद्य सेवाओं की मांग बढ़ने के बीच कारोबारियों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव पड़ सकता है। इसका असर आगे उपभोक्ताओं तक भी पहुंचने की संभावना है। इसी तरह अक्टूबर से एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों ने हवाई ईंधन की कीमत में प्रति लीटर 16 रुपए तक का इजाफा किया है। विमानन उद्योग में ईंधन कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है, इसलिए एटीएफ महंगा होने से एयरलाइंस की लागत बढ़ेगी। दशहरा, दीपावली और छठ पूजा के दौरान यात्रियों की मांग बढ़ने पर एयरलाइंस किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं।

    त्योहारी खरीदारी के बीच घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी भी उपभोक्ताओं के बजट को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक बाजार में कॉपर, स्टील और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण कंपनियों ने कई उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, स्मार्ट टीवी, स्प्लिट एसी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी वस्तुओं की कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। इससे उत्पाद के अनुसार ग्राहकों को करीब 1,200 रुपए से 3,500 रुपए तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। त्योहारी ऑफर्स और डिस्काउंट उपलब्ध होने के बावजूद कीमतों में हुई यह वृद्धि खरीदारी के कुल बजट पर असर डाल सकती है।

    पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं की लागत बढ़ना भी उन लोगों के लिए अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकता है, जो नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने की योजना बना रहे हैं। सामान्य श्रेणी के पासपोर्ट आवेदन शुल्क में वृद्धि की गई है। नई व्यवस्था के तहत पासपोर्ट बनवाने की लागत में 1,000 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर विदेश यात्रा, शिक्षा या रोजगार के लिए पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों की कुल लागत पर पड़ सकता है। अक्टूबर और नवंबर का समय त्योहारों, शादी-विवाह और यात्रा के लिहाज से व्यस्त माना जाता है, इसलिए इस दौरान बढ़ी हुई लागत का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर, अक्टूबर की शुरुआत में गैस सिलेंडर, हवाई ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पासपोर्ट सेवाओं से जुड़े खर्च बढ़े हैं। कच्चे माल और ऊर्जा की लागत ऊंची बनी रहने पर आने वाले समय में अन्य उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की बात विशेषज्ञों ने कही है। ऐसे में त्योहारों के दौरान खरीदारी और यात्रा की योजना बना रहे लोगों को बढ़ी हुई लागत को ध्यान में रखना होगा। कारोबारियों के लिए भी ईंधन और अन्य परिचालन खर्च में बढ़ोतरी अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती है।

  • नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल के दाम, 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल की कीमत में भी 3 रुपये का इजाफा

    नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल के दाम, 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल की कीमत में भी 3 रुपये का इजाफा

    नई दिल्ली: ग्लोबल टेंशन के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। देश की बड़ी निजी ईंधन खुदरा कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने शनिवार की शुरुआती घंटों से देशभर में अपने पेट्रोल पंपों पर नई कीमतें लागू कर दी हैं। नायरा एनर्जी देशभर में 7,108 पेट्रोल पंपों का संचालन करती है। कंपनी की ओर से इस संबंध में टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

    इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर डालने वाली नायरा एनर्जी पहली ईंधन खुदरा कंपनी थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन खुदरा कंपनियों ने मई में पेट्रोल पंपों पर कीमतें बढ़ाना शुरू किया था। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद नायरा ने मार्च की बढ़ोतरी वापस ले ली थी। कंपनी ने 1 जुलाई को पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे।

    इसी बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री की सीमा को लेकर भी चर्चा चल रही है। सरकार ने ईंधन की बिक्री पर किसी भी तरह की सीमा लगाए जाने पर ऐतराज जताया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने हाल ही में डीजल की बिक्री सीमित किए जाने की खबरों पर कहा था कि किसी को भी पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा था कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यह बयान ऐसे समय आया, जब जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने अपने कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की खरीद सीमित कर दी थी।

    डीजल की खुदरा और थोक कीमतों के बीच अंतर बढ़ने के कारण कारखानों, दूरसंचार कंपनियों, होटल, अस्पताल और अन्य बड़े उपभोक्ता खुदरा पंपों से अपेक्षाकृत सस्ता डीजल खरीदने लगे हैं। डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में अंतर करीब 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसके चलते कुछ औद्योगिक उपभोक्ता एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीद रहे हैं। इससे कुछ पेट्रोल पंपों के भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। पेट्रोल पंपों की भंडारण क्षमता सीमित होती है और दोबारा आपूर्ति में कुछ दिन लग सकते हैं।

    इसी वजह से कुछ कंपनियों ने अपने पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीद की सीमा तय की है। जियो-बीपी ने कुछ पंपों पर एक ग्राहक के लिए प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल खरीदने की सीमा लगाई है। वहीं नायरा एनर्जी के पेट्रोल पंपों पर यह सीमा 70 से 200 लीटर के बीच रखी गई है। ऐसे में नायरा एनर्जी की ओर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने के साथ ही ईंधन की बिक्री और उपलब्धता को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है।