Category: Economy

  • 1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    नई दिल्ली। 1 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में गिरावट आई। 24 कैरेट सोने का भाव 308 रुपये बढ़कर 1,48,687 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,379 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी महंगा हुआ। इसका भाव 282 रुपये बढ़कर 1,36,197 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि बुधवार को यह 1,35,915 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में 319 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर को एक किलो चांदी 2,21,954 रुपये पर आ गई, जबकि बुधवार को इसका भाव 2,22,273 रुपये प्रति किलो था।

    देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के भाव में भी मामूली अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,950 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और रायपुर में यह भाव 1,36,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। भोपाल और अहमदाबाद में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,850 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। इन शहरों में आभूषणों की वास्तविक कीमत स्थानीय कर, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोने के मानक बुलियन भाव और आभूषणों के खुदरा भाव में भी अंतर हो सकता है।

    सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता और कीमत की जांच करना जरूरी है। खरीदारी के दौरान बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना लेने पर ध्यान देना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है, इसलिए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के भाव की जांच करना जरूरी है। आभूषण खरीदते समय केवल सोने की मूल कीमत ही नहीं, बल्कि उस पर लागू अन्य शुल्कों को भी ध्यान में रखना होता है।

    चांदी खरीदने वालों के लिए भी उसकी शुद्धता की जांच महत्वपूर्ण है। चांदी की वस्तु को चुंबक के पास ले जाकर शुरुआती तौर पर जांच की जा सकती है, क्योंकि शुद्ध चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती। हालांकि, केवल इस परीक्षण से शुद्धता की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती। बर्फ के जरिए भी एक शुरुआती जांच की जा सकती है, क्योंकि चांदी गर्मी को तेजी से स्थानांतरित करती है और उसकी सतह पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में तेजी से पिघल सकती है। चांदी में तेज या असामान्य धातु जैसी गंध होना भी दूसरी धातु की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।

    चांदी की सतह को साफ सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी कपड़े पर काला या गहरा निशान दिखाई दे सकता है। यह चांदी की सतह पर होने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया के कारण हो सकता है, लेकिन इस तरीके से भी शुद्धता की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। घरेलू परीक्षण केवल शुरुआती अंदाजा लगाने में मदद करते हैं। चांदी की शुद्धता की सही पुष्टि के लिए हॉलमार्क, 925 स्टैम्प या पेशेवर शुद्धता जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है। सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव को देखते हुए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के ताजा भाव और आभूषण की शुद्धता की जानकारी जांचना जरूरी है।

  • सितंबर में GST कलेक्शन 14.7% बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार, पहली छमाही में भी 11.6% की बढ़त

    सितंबर में GST कलेक्शन 14.7% बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार, पहली छमाही में भी 11.6% की बढ़त


    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। त्योहारों के मौसम से पहले देश के कर संग्रह से जुड़े आंकड़ों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में कुल सकल वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कलेक्शन 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2,03,521 करोड़ रुपये के नए स्तर पर पहुंच गया। पिछले साल सितंबर की तुलना में यह उल्लेखनीय वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भी जीएसटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस छह महीने की अवधि में कुल कलेक्शन 12,46,278 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 11.6 प्रतिशत अधिक है।

    सितंबर के दौरान घरेलू आर्थिक गतिविधियों से होने वाले जीएसटी कलेक्शन में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। घरेलू स्तर पर प्राप्त जीएसटी राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.38 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके साथ ही आयात से मिलने वाले राजस्व में इससे भी अधिक तेजी देखी गई। आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व 26 प्रतिशत बढ़कर 65,525 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सितंबर में कुल जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में घरेलू गतिविधियों के साथ आयात से प्राप्त राजस्व की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    सितंबर के आंकड़ों के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही का प्रदर्शन भी सामने आया है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कुल जीएसटी कलेक्शन 12,46,278 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में दर्ज संग्रह से 11.6 प्रतिशत अधिक है। छह महीने के संचयी आंकड़ों में दर्ज यह वृद्धि कर संग्रह में लगातार बने सुधार को दर्शाती है। सितंबर में दर्ज 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मासिक कलेक्शन भी इस अवधि के दौरान कर संग्रह में आई तेजी को रेखांकित करता है।

    त्योहारी सीजन से ठीक पहले जीएसटी कलेक्शन में यह वृद्धि कारोबारी और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेहतर कर अनुपालन और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी ने संग्रह बढ़ाने में योगदान दिया है। सितंबर में घरेलू गतिविधियों से प्राप्त राजस्व में 10.1 प्रतिशत और आयात से मिलने वाले राजस्व में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इससे संकेत मिलता है कि कर संग्रह में बढ़ोतरी केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों और आयात दोनों से राजस्व में वृद्धि हुई है।

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 12,46,278 करोड़ रुपये का कुल जीएसटी कलेक्शन और सितंबर में 2,03,521 करोड़ रुपये का मासिक संग्रह सरकार के राजस्व आंकड़ों में दर्ज महत्वपूर्ण बढ़ोतरी को दिखाता है। त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू होने से पहले आए इन आंकड़ों में बाजार की गतिविधियों और कर संग्रह में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर के दौरान कुल संग्रह में 14.7 प्रतिशत की वृद्धि और अप्रैल से सितंबर की अवधि में 11.6 प्रतिशत की संचयी बढ़त रही। इससे चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीएसटी राजस्व संग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है। वित्त मंत्रालय की सितंबर माह की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पहली तिमाही में दर्ज विकास की रफ्तार दूसरी तिमाही में भी जारी रहने की संभावना है, हालांकि इसकी गति कुछ संतुलित रह सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण में पेश किए गए नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी थी, जो मौजूदा शृंखला में किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर है।

    वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पहली तिमाही की आर्थिक वृद्धि व्यापक आधार वाली रही और इसमें विनिर्माण, निर्माण तथा सेवा क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन शामिल रहा। घरेलू मांग ने आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया, जबकि निवेश वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनकर सामने आया। समीक्षा के अनुसार, निवेश दर मौजूदा शृंखला के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समय पर उठाए गए कदमों ने बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी का घरेलू ईंधन कीमतों पर असर रहने से भी आर्थिक गतिविधियों पर बड़ा दबाव नहीं पड़ा।

    हालांकि कुछ उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों में पहले की तुलना में वृद्धि की गति थोड़ी धीमी हुई है। ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई की वृद्धि दर में कुछ नरमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अगस्त में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूती आई और इसे नए कारोबार तथा रोजगार में बढ़ोतरी का समर्थन मिला। बिजली और ईंधन की खपत लगातार स्वस्थ वृद्धि दर्ज कर रही है, जबकि बैंक ऋण वितरण भी मजबूत बना हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र ने भी पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। वास्तविक औद्योगिक सकल मूल्य वर्धन यानी जीवीए में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र ने 9.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे बड़ा योगदान दिया।

    हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में कोर सेक्टर इंडेक्स 4.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 52.8 पर रहा, जो औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। जुलाई में उद्योग क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में भी तेजी देखी गई और यह वृद्धि सभी आकार की कंपनियों में व्यापक रही। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत कदमों का भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। महंगाई के मोर्चे पर वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि और मौसम संबंधी अस्थिरता के कारण खुदरा, थोक तथा उत्पादक स्तर पर मूल्य दबाव बढ़ा है, लेकिन समग्र महंगाई परिदृश्य नियंत्रित बना हुआ है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की टोकरी में शामिल करीब 69 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर अब भी 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है।

    निर्यात के मोर्चे पर भी समीक्षा में सकारात्मक स्थिति सामने आई है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में भारत का कुल निर्यात मूल्य करीब 400 अरब डॉलर की रफ्तार से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यदि यह गति बनी रहती है तो पूरे वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात करीब एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते निर्यात वृद्धि को गति दे रहे हैं और भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक अवसर पैदा कर रहे हैं। इस तरह, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक मार्गों पर दबाव के बावजूद घरेलू मांग, निवेश, औद्योगिक गतिविधियों, सेवा क्षेत्र, बैंक ऋण और निर्यात में बनी मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को समर्थन दे रही है।

  • महिंद्रा की सितंबर बिक्री 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने 77,916 वाहनों की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की

    महिंद्रा की सितंबर बिक्री 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने 77,916 वाहनों की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की

    नई दिल्ली। देश की प्रमुख वाहन कंपनियों ने सितंबर की बिक्री के आंकड़े जारी किए हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने निर्यात समेत कुल 1,14,874 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की घरेलू बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में घरेलू बाजार में यूटिलिटी वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 64,092 यूनिट्स हो गई। वहीं, कमर्शियल वाहनों की बिक्री भी 14 प्रतिशत बढ़कर 30,420 यूनिट्स रही।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव बिजनेस के अध्यक्ष डॉ. वेलुसामी आर ने कहा कि कंपनी की इलेक्ट्रिक ओरिजिन एसयूवी की लॉन्चिंग के बाद से 1 लाख की बिलिंग का माइलस्टोन पार हो गया है। कमर्शियल वाहन खंड में भी सितंबर के दौरान अलग-अलग श्रेणियों में बिक्री बढ़ी। 2 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 4,044 यूनिट्स हो गई। वहीं, 2 से 3.5 टन वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री 13 प्रतिशत बढ़कर 26,376 यूनिट्स रही। इलेक्ट्रिक मॉडल समेत थ्री-व्हीलर की बिक्री में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 16,343 यूनिट्स तक पहुंच गई।

    दूसरी ओर, हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने सितंबर में अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री दर्ज की। कंपनी ने महीने के दौरान कुल 77,916 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल की तुलना में 10.8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू बाजार में कंपनी की मासिक बिक्री सालाना आधार पर 10.9 प्रतिशत बढ़कर 57,166 यूनिट्स हो गई। वहीं, निर्यात में भी 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 20,750 यूनिट्स तक पहुंच गया। इस तरह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में बिक्री बढ़ने से कंपनी ने सितंबर में नया मासिक रिकॉर्ड बनाया।

    हुंडई मोटर इंडिया के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा कि सितंबर की बिक्री का आंकड़ा जुलाई 2026 में बने कंपनी के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है। उनके अनुसार, घरेलू और निर्यात बाजारों में दर्ज हुई बढ़ोतरी कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो की मजबूत अपील और भारत तथा वैश्विक बाजारों में मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी की ओर से सितंबर के आंकड़ों में घरेलू बाजार और निर्यात दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन के दौरान ग्राहकों का उत्साह बना रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि हुंडई बेयोन की बुकिंग शुरू होने से बिक्री को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सितंबर के बिक्री आंकड़ों में महिंद्रा एंड महिंद्रा की कुल बिक्री में 15 प्रतिशत की सालाना वृद्धि और हुंडई मोटर इंडिया की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज हुई है। दोनों कंपनियों के आंकड़ों में घरेलू बाजार के साथ निर्यात और विभिन्न वाहन श्रेणियों में बिक्री की स्थिति भी सामने आई है।

  • लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट जारी रही। ऊर्जा की स्थिर कीमतों, बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव के साथ भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर 72,573 से फिसलकर 71,293 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस दौरान इसमें करीब 1,280 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक 2 अप्रैल 2026 को बने 71,545 के पिछले कैलेंडर वर्ष के न्यूनतम स्तर से भी नीचे चला गया। निफ्टी 50 में भी दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत यानी 394 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। सूचकांक 22,611 के उच्च स्तर से गिरकर 22,217 के निचले स्तर तक पहुंचा। अप्रैल में निफ्टी ने कैलेंडर वर्ष का 22,183 का न्यूनतम स्तर छुआ था।

    निफ्टी 50 में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही। इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार समाप्त हुआ। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई।

    एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य रूप से बाहरी कारण रहे। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने से 2026-27 के आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। घरेलू स्तर पर निवेशक दूसरी तिमाही यानी क्यू2 के नतीजों और अगले सप्ताह आने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर भी सतर्क हैं। विशेषज्ञ ने कहा कि क्यू2 की कमाई क्यू1 की तुलना में कमजोर रह सकती है, क्योंकि क्यू1 में परिचालन लागत के प्रभाव का लाभ मिला था, जो इस बार उसी स्तर पर नहीं मिल सकता।

    विशेषज्ञ के मुताबिक, पिछली मौद्रिक नीति में आरबीआई का रुख अपेक्षाकृत खुला था, लेकिन वैश्विक महंगाई के दबाव और रुपये को समर्थन देने की जरूरत को देखते हुए उसके रुख में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबे समय के निवेशकों के लिए बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की बात कही गई है, जबकि कम अवधि के निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकार के कदमों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने तक इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

  • खुदरा चीनी की कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट, एक्स-मिल दाम 28 प्रतिशत घटे, सरकार ने स्टॉक सीमा भी तय की

    खुदरा चीनी की कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट, एक्स-मिल दाम 28 प्रतिशत घटे, सरकार ने स्टॉक सीमा भी तय की

    नई दिल्ली। खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में अगस्त के उच्चतम स्तर से करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स-मिल कीमतों में भी उच्चतम स्तर से करीब 28 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार के अनुसार एक्स-मिल चीनी की कीमतें पिछले करीब तीन सप्ताह से स्थिर बनी हुई हैं। सरकार ने उम्मीद जताई है कि कम एक्स-मिल कीमतों का लाभ सप्लाई चेन तक पहुंचने के बाद खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में आगे भी कमी आ सकती है। अगस्त में चीनी की कीमतें अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची थीं, जिसके बाद औसत खुदरा कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है।

    सरकार के मुताबिक चीनी की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में चीनी की सुचारू आवाजाही बनाए रखने के लिए उठाए गए विभिन्न कदम हैं। जमाखोरी रोकने और सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए चीनी डीलरों के स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई है। इसके साथ ही डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा 1,000 क्विंटल तय की गई है। ये नए नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेंगे। नियमों के तहत डीलरों को चीनी मिलने की तारीख से 15 दिन से अधिक समय तक उसका स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

    इसके अलावा देश में किसी भी स्थान पर और किसी भी समय डीलर 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। हालांकि क्षेत्रीय बाजार की विशेष जरूरतों को देखते हुए कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय इलाकों तथा असम के लिए अलग सीमा निर्धारित की गई है। इन क्षेत्रों में चीनी डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा 2,000 क्विंटल तय की गई है। सरकार के अनुसार इन क्षेत्रों में आपूर्ति की जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह अलग सीमा तय की गई है।

    सरकार ने बताया कि कोलकाता में चीनी की आपूर्ति उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से होती है। यहां से चीनी की आपूर्ति पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी की जाती है। वहीं, असम के लिए अधिक स्टॉक सीमा तय करने के पीछे भौगोलिक चुनौतियों और परिवहन से जुड़ी लॉजिस्टिक्स को ध्यान में रखा गया है। सरकार के अनुसार पूर्वोत्तर क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए भी असम के लिए 2,000 क्विंटल की सीमा रखी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों में चीनी की आपूर्ति को प्रभावित किए बिना स्टॉक नियंत्रण बनाए रखना है।

    नए नियमों का मुख्य उद्देश्य डिस्ट्रीब्यूशन चेन में चीनी के अनावश्यक जमावड़े को रोकना और मिलों से डीलरों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक इसकी आपूर्ति सुचारू बनाए रखना है। सरकार के अनुसार स्टॉक रखने की मात्रा और अवधि दोनों सीमित करने से सप्लाई चेन में चीनी की आवाजाही व्यवस्थित होगी। इससे जमाखोरी पर रोक लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा लंबे समय तक चीनी जमा करके रखने की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इन उपायों के जरिए बाजार में उचित कीमतों पर चीनी की लगातार उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं, एक्स-मिल कीमतों में पहले ही करीब 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है और पिछले तीन सप्ताह से इसमें स्थिरता बनी हुई है।

  • Honor Magic 9 Super Edition लॉन्च, 11,000mAh बैटरी और 200MP कैमरे के साथ मिलेंगे दमदार फीचर्स

    Honor Magic 9 Super Edition लॉन्च, 11,000mAh बैटरी और 200MP कैमरे के साथ मिलेंगे दमदार फीचर्स

    नई दिल्ली। Honor ने अपने होम मार्केट चीन में Magic 9 सीरीज लॉन्च कर दी है। इस सीरीज में कंपनी ने तीन स्मार्टफोन पेश किए हैं, जिनमें Magic 9, Magic 9 Pro Max और Magic 9 Super Edition शामिल हैं। इनमें Super Edition को खास तौर पर बड़ी बैटरी, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा और ब्राइट OLED डिस्प्ले के साथ पेश किया गया है। फोन में 11,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जबकि फोटोग्राफी के लिए 200MP का मुख्य कैमरा मिलता है। डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 10,000 निट्स तक है।

    Honor Magic 9 Super Edition में 11,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 80W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करती है। इसके अलावा फोन में 50W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है। डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 6.81 इंच का OLED पैनल मिलता है। इसका रेजॉल्यूशन 2788 x 1280 पिक्सल है और यह 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। डिस्प्ले में 1.07 बिलियन कलर्स का सपोर्ट दिया गया है। इसकी पीक ब्राइटनेस 10,000 निट्स तक है। फोन का स्क्रीन-टू-बॉडी रेश्यो 95.5 प्रतिशत है, जबकि इसमें 1.03mm के नैरो बैजल्स दिए गए हैं।

    परफॉर्मेंस के लिए Honor Magic 9 Super Edition में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया गया है। इसके साथ LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज मिलती है। कंपनी ने इस फोन को तीन मेमोरी कॉन्फिगरेशन में लॉन्च किया है। इनमें 12GB रैम के साथ 256GB स्टोरेज, 12GB रैम के साथ 512GB स्टोरेज और 16GB रैम के साथ 512GB स्टोरेज विकल्प शामिल हैं। कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में ट्रिपल रियर कैमरा दिया गया है। इसका मुख्य कैमरा 200MP का Samsung S5KHP5 सेंसर है, जिसका साइज 1/1.55 इंच और अपर्चर f/1.9 है। यह कैमरा OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट करता है।

    मुख्य कैमरे के साथ फोन में 50MP का Sony LYTIA 500 टेलीफोटो कैमरा दिया गया है। यह 3x ऑप्टिकल जूम और OIS सपोर्ट करता है। इसके अलावा फोन में 12MP का अल्ट्रावाइड कैमरा भी मिलता है, जिसमें ऑटोफोकस का सपोर्ट दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन के फ्रंट में 50MP का कैमरा मौजूद है। इस तरह फोन में हाई-रिजॉल्यूशन मुख्य कैमरे के साथ टेलीफोटो और अल्ट्रावाइड कैमरा का संयोजन मिलता है।

    चीन में Honor Magic 9 Super Edition की शुरुआती कीमत 4,499 युआन रखी गई है, जो भारतीय करेंसी के हिसाब से करीब 54,000 रुपये है। इसके 12GB + 512GB मॉडल की कीमत 4,999 युआन यानी करीब 63,000 रुपये है, जबकि 16GB + 512GB वेरिएंट 5,499 युआन यानी करीब 72,000 रुपये में लॉन्च किया गया है। फोन को चीन में Popcorn Yellow, Curtain Black, Opening Statement और Olive Green कलर विकल्पों में खरीदा जा सकता है। Magic 9 सीरीज में Magic 9 और Magic 9 Pro Max के साथ Super Edition को शामिल किया गया है, जिसमें कंपनी ने बड़ी बैटरी, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा और ब्राइट OLED डिस्प्ले पर खास फोकस किया है।

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  • सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे, कच्चा तेल और FII बिकवाली से दबाव

    सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे, कच्चा तेल और FII बिकवाली से दबाव


    नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हुई। सोमवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 9:26 बजे सेंसेक्स 72,371.25 अंक पर कारोबार कर रहा था और इसमें 400.47 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी 22,658.75 अंक पर था और 121.50 अंक नीचे कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,800 के स्तर से भी नीचे चला गया। बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर रही और कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रमुख शेयरों की कमजोरी का भी बाजार पर असर पड़ा। तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी का 22,700 के नीचे टिकना बिकवाली के दबाव को बढ़ा सकता है।

    बाजार में गिरावट के बीच निफ्टी के 22,400 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना पर भी नजर रखी जा रही है, यदि कमजोरी आगे जारी रहती है। यह स्तर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पिछले दो वर्षों की प्रमुख निचली ट्रेंडलाइन तथा 200 सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से जुड़ा हुआ है। निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया है। इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबार में इस स्तर के आसपास बाजार की चाल महत्वपूर्ण रहेगी।

    भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली प्रमुख वजहों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब 106 से 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों यानी FII की भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ाया है।

    भारतीय बाजार की कमजोरी के बीच एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:51 बजे S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे था, जबकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जापान का टॉपिक्स 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.1 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 फीसदी और Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। इस तरह वैश्विक बाजारों में एक समान रुख नहीं रहा।

    बाजार की तकनीकी स्थिति को लेकर एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,650 से 22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन है। उनके अनुसार, यदि इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आती है तो शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। फिलहाल सेंसेक्स की 400 अंक से अधिक की गिरावट, निफ्टी का 22,700 से नीचे जाना, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और FII की लगातार बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख दबाव वाले कारक बने हुए हैं।

  • 2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो UPI डे’, मोबाइल दुकानदार नहीं लेंगे डिजिटल पेमेंट, नए MDR चार्ज के विरोध में अभियान

    2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो UPI डे’, मोबाइल दुकानदार नहीं लेंगे डिजिटल पेमेंट, नए MDR चार्ज के विरोध में अभियान

    नई दिल्ली। 2 अक्टूबर को देशभर के मोबाइल दुकानदार UPI से भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR चार्ज के विरोध में इस दिन को ‘नो UPI डे’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है। अभियान में शामिल दुकानदार अपने UPI QR कोड पर काला कपड़ा ढकेंगे और ग्राहकों से डिजिटल भुगतान नहीं लेंगे। ऐसे में अगर आप 2 अक्टूबर को मोबाइल या मोबाइल एक्सेसरीज खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपने साथ नकद रखना जरूरी हो सकता है। एसोसिएशन का विरोध UPI या डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि दुकानदारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च को लेकर है। नए नियमों के तहत कुछ UPI लेनदेन पर 15 अक्टूबर से MDR लागू होना है।

    MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले लिया जाता है और सामान्य तौर पर इसका भुगतान दुकानदार की ओर से किया जाता है। नए ढांचे के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन होगी। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और फ्यूल जैसे कुछ क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

    इस व्यवस्था का आम ग्राहकों पर सीधा असर सीमित रखने की बात कही गई है। दोस्तों या रिश्तेदारों को भेजे जाने वाले P2P भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। दुकानों पर 2,000 रुपये तक के भुगतान भी इस दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा जिन छोटे दुकानदारों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान मिलता है, उनके लिए पहले की तरह जीरो MDR लागू रहेगा। सरकार के मुताबिक नए नियमों का असर करीब 4 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन पर पड़ेगा, जबकि लगभग 96 प्रतिशत P2M भुगतान पहले की तरह जारी रहेंगे। नियमों के मुताबिक दुकानदार MDR का शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं वसूल सकते। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि यदि उन्हें यह खर्च खुद उठाना पड़ा तो उनके मार्जिन पर असर पड़ेगा और कुछ कारोबारी कीमतों या पेमेंट से जुड़े ऑफर में बदलाव कर सकते हैं।

    मोबाइल दुकानदारों का कहना है कि इस कारोबार में पहले से ही मार्जिन काफी कम है। एसोसिएशन की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि महीने में 5 लाख से 30 लाख रुपये तक UPI के जरिए कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों पर हर महीने करीब 2,000 से 12,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ सकता है। एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक देशभर के छोटे मोबाइल रिटेलर्स पर हर महीने करीब 40 करोड़ रुपये और सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। संगठन की मांग है कि UPI मर्चेंट पेमेंट पर जीरो MDR की व्यवस्था जारी रखी जाए।

    इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन चार्ज पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल करना होगा। यह याचिका वकील अंजन दत्ता ने दायर की है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने अदालत में कहा कि 96 प्रतिशत लोग नए ढांचे से बाहर हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने इसे कानूनी से ज्यादा तकनीकी मामला बताया। ऐसे में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ नए MDR चार्ज के खिलाफ मोबाइल दुकानदारों के विरोध का प्रमुख हिस्सा होगा।

  • 20 अक्टूबर से लागू होगा भारत-न्यूजीलैंड FTA, 2030 तक दोगुना होगा द्विपक्षीय व्यापार, निर्यातकों को मिलेगा बड़ा बाजार

    20 अक्टूबर से लागू होगा भारत-न्यूजीलैंड FTA, 2030 तक दोगुना होगा द्विपक्षीय व्यापार, निर्यातकों को मिलेगा बड़ा बाजार

    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए 20 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक दोगुना करना है। समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वस्त्र और परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को इसका प्रमुख लाभ मिलने की संभावना है। आयात शुल्क हटने के बाद इन क्षेत्रों के भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में अन्य देशों के उत्पादों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती हो सकेंगे।

    समझौते का एक महत्वपूर्ण प्रावधान न्यूजीलैंड की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का साझा लक्ष्य तय किया है। एफटीए के प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। कुछ उत्पादों पर शुल्क तत्काल समाप्त किया जाएगा, जबकि कुछ श्रेणियों में शुल्क कई वर्षों के दौरान धीरे-धीरे कम होगा। वहीं, कुछ कृषि उत्पादों के लिए कोटा और सुरक्षा उपायों को बनाए रखा गया है। भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले करीब 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है। इनमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्ची खालें जैसे कुछ उत्पाद तत्काल शुल्क-मुक्त प्रवेश पाने वाली श्रेणियों में शामिल हैं।

    भारतीय उपभोक्ताओं पर समझौते का सीधा असर न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी फल, सेब और मनुका हनी जैसे उत्पादों पर पड़ सकता है। हालांकि, समझौते के तहत भारतीय बाजार को पूरी तरह नहीं खोला गया है। भारत ने कृषि क्षेत्र के कुछ संवेदनशील उत्पादों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था रखी है। कृषि उत्पादों के मामले में टैरिफ रेट कोटा यानी टीआरक्यू व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत सीमित मात्रा में उत्पादों का आयात कम शुल्क पर किया जा सकेगा, जबकि तय सीमा से अधिक आयात पर सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार पहुंच बढ़ाने के साथ घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है।

    कीवी फल के लिए समझौते में विशेष कोटा तय किया गया है। पहले वर्ष में न्यूजीलैंड से 6,250 टन कीवी फल शुल्क-मुक्त आयात किए जा सकेंगे। यह सीमा छठे वर्ष तक बढ़कर 15,000 टन हो जाएगी। हालांकि, इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू रहेंगी। सेब के लिए भी कोटा व्यवस्था रखी गई है। इन पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो मौजूदा 50 प्रतिशत शुल्क का आधा है। सेब के आयात पर भी न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी शर्तें लागू होंगी। इससे भारतीय फल उत्पादकों पर कम कीमत वाले आयात के संभावित प्रभाव को सीमित रखने का प्रयास किया गया है।

    समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत के संवेदनशील डेयरी क्षेत्र को कम शुल्क वाले आयात के लिए नहीं खोलना है। सरकार ने करोड़ों छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए डेयरी समेत कई कृषि उत्पादों को एफटीए के दायरे से बाहर रखा है। इस तरह समझौते में भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार तक पहुंच बढ़ाने के साथ घरेलू कृषि और डेयरी क्षेत्र के संवेदनशील हितों के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई है। 20 अक्टूबर से समझौता लागू होने के बाद इसके अलग-अलग प्रावधान तय चरणों के अनुसार प्रभावी होंगे।