Category: Economy

  • India's industrial production rose by 8 percent in August; manufacturing and capital goods sectors showed strong momentum.

    India's industrial production rose by 8 percent in August; manufacturing and capital goods sectors showed strong momentum.

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत के औद्योगिक उत्पादन में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि को गति दी। अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 9 प्रतिशत रही और यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब इस क्षेत्र ने 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें मोटर वाहनों का विनिर्माण प्रमुख रहा, जिसमें उत्पादन 25.2 प्रतिशत बढ़ा। इलेक्ट्रिकल उपकरणों के विनिर्माण में 30.9 प्रतिशत और मशीनरी एवं उपकरणों के विनिर्माण में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती दिखाई दी।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में लगातार उत्पादन बढ़ने से आगे रोजगार और आय से जुड़े अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। औद्योगिक उत्पादन में आई तेजी को इसी व्यापक आर्थिक गतिविधि के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    औद्योगिक उत्पादन के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी अगस्त के दौरान वृद्धि दर्ज की गई। बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में उत्पादन 12.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, खनन क्षेत्र का प्रदर्शन इसके विपरीत रहा और अगस्त में इसमें 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

    उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों में कैपिटल गुड्स के उत्पादन में भी मजबूत तेजी दिखाई दी। कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों यानी कैपिटल गुड्स के उत्पादन में अगस्त के दौरान 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस श्रेणी को अर्थव्यवस्था में वास्तविक निवेश से जुड़ी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। मशीनरी के उत्पादन में बढ़ोतरी से आगे औद्योगिक क्षमता, रोजगार और आय के अवसरों पर असर पड़ सकता है।

    अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी वस्तुओं के उत्पादन में तेजी उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से जुड़ी रही। वहीं साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसी कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स वस्तुओं के उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

    इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में अगस्त के दौरान 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हाईवे, बंदरगाह और रेलवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश से इस क्षेत्र को गति मिली। इन परियोजनाओं से निर्माण गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर पैदा होने और व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना रहती है। कुल मिलाकर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि प्रमुख रूप से सामने आई।

  • भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और एसएएफ सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं, 2030 तक ईंधन मिश्रण लक्ष्य पर जोर

    भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और एसएएफ सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं, 2030 तक ईंधन मिश्रण लक्ष्य पर जोर


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और सतत विमानन ईंधन यानी एसएएफ के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। भारत में ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अब्दुल्ला अल शिबानी ने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और उनके बीच एयरस्पेस भी साझा होता है। ऐसे में ऊर्जा और विमानन क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ओमान के राजदूत ने यह बात राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दूसरे इंडिया एसएएफ कॉन्क्लेव और अवार्ड 2026 के दौरान कही। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, सस्टेनेबल एयर फ्यूल और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

    उन्होंने दोनों देशों के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों का भी उल्लेख किया। ओमान ने वर्ष 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है, जबकि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजदूत ने कहा कि दोनों देश इस दिशा में अपनी क्षमता विकसित करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

    एसएएफ को लेकर विशेषज्ञों ने भारत के लिए अलग रणनीति अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। एसएएफ एसोसिएशन के अध्यक्ष और जेडआर2 ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जिमी ओल्सन ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा, बायोमास, ऊर्जा उपलब्धता और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षमता विकसित की है। इसी आधार पर देश को एसएएफ के लिए अपनी जरूरतों के अनुरूप रास्ता तैयार करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि एसएएफ क्षेत्र में सरकार की ओर से वायबिलिटी फंडिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यह क्षेत्र काफी पूंजी निवेश वाला है और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद ही इसकी लागत को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    भारत में विमानन ईंधन में एसएएफ की हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर भी लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। एसएएफ एसोसिएशन ने विमानन ईंधन में 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का लक्ष्य रखा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रस्तावित मिश्रण व्यवस्था के तहत वर्ष 2027 में 1 प्रतिशत, 2028 में 2 प्रतिशत और वर्ष 2030 तक 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का अनुमान है।

    इस लक्ष्य के साथ एसएएफ की मांग में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है। अनुमान के मुताबिक मांग वर्ष 2027 में करीब 46 हजार टन से बढ़कर 2030 तक लगभग 2.50 लाख टन हो सकती है। मौजूदा उत्पादन क्षमता वर्ष 2027 और 2028 की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बताई गई है।

    हालांकि, वर्ष 2030 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में नई परियोजनाओं का समय पर शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया कि 2028 से 2030 के बीच प्रस्तावित एचईएफए और एटीजे परियोजनाओं के शुरू नहीं होने की स्थिति में 2030 के एसएएफ मिश्रण लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

    एसएएफ उत्पादन के लिए लगातार और पर्याप्त मात्रा में फीडस्टॉक की जरूरत होगी। ऐसे में किसानों और कच्चे माल के संग्रह से जुड़े नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मजबूत सप्लाई चेन के बिना बड़े स्तर पर एसएएफ उत्पादन को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    भारत और ओमान के बीच ऊर्जा सहयोग के साथ विमानन क्षेत्र में सतत ईंधन को लेकर बढ़ती संभावनाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब वैश्विक विमानन उद्योग कार्बन उत्सर्जन कम करने के विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। एसएएफ को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    नई दिल्ली 28 सितंबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में दबाव के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

    बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,780.25 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान दोनों सूचकांकों में लगातार दबाव बना रहा।सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,734.83 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत तक टूटकर 72,716.23 के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत नीचे 23,064.90 पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट बढ़ी और यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत टूटकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में जारी तनाव प्रमुख कारणों में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ा और शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हुई।व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक में भी दबाव रहा, जबकि निफ्टी आईटी में तुलनात्मक रूप से सबसे कम गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में शामिल ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर अन्य शेयरों में कमजोरी रही। टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली।

    बाजार में तेज गिरावट का असर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।वैश्विक स्तर पर भी शेयर बाजारों पर दबाव रहा। ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने से संबंधित ईरानी प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद बाजारों में चिंता बढ़ी। ईरान ने संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीति को ही रास्ता बताया है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर, तेल और बॉन्ड बाजारों पर दिखाई दिया।

    एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का सूचकांक करीब 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा। चीन के बाजारों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।पश्चिम एशिया संकट के समाधान में देरी के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

    ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली फिर से शुरू हुई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा।

  • बोइंग 737 मैक्स में सॉफ्टवेयर खामी से सुरक्षा पर असर नहीं, अकासा एयर ने यात्रियों को लेकर स्थिति साफ की

    बोइंग 737 मैक्स में सॉफ्टवेयर खामी से सुरक्षा पर असर नहीं, अकासा एयर ने यात्रियों को लेकर स्थिति साफ की

    नई दिल्ली। बोइंग 737 मैक्स विमानों में सामने आई सॉफ्टवेयर समस्या को लेकर अकासा एयर ने स्पष्ट किया है कि इससे उसके परिचालन की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है। एयरलाइन ने कहा कि वह इस मामले को लेकर बोइंग के साथ लगातार संपर्क में है और उसके विमान सभी निर्धारित प्रक्रियाओं तथा लागू नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार सुरक्षित तरीके से उड़ान भर रहे हैं।

    यह मामला बोइंग की ओर से 737 मैक्स विमान संचालकों को दी गई जानकारी के बाद सामने आया है। विमान निर्माता ने एक ऐसी स्थिति की पहचान की है, जिसमें लैंडिंग के एक विशेष चरण के दौरान सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण पायलट ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

    बोइंग ने इस संबंध में दुनिया भर में 737 मैक्स विमानों का संचालन करने वाले ऑपरेटरों को पहले ही जानकारी उपलब्ध करा दी है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा पायलट प्रक्रियाएं ऐसी स्थिति से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। साथ ही समस्या का स्थायी समाधान तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम किया जा रहा है।

    अकासा एयर ने इस मुद्दे पर यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके विमान सुरक्षित रूप से परिचालित हो रहे हैं। एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग के साथ मिलकर इस मामले पर काम किया जा रहा है और मौजूदा समस्या का उसके परिचालन की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

    एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसके विमानों का संचालन निर्धारित प्रक्रियाओं और लागू नियमों के अनुरूप किया जा रहा है। यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा को उसने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

    हालांकि, अकासा एयर ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके बेड़े में शामिल किसी विशेष विमान पर इस सॉफ्टवेयर समस्या का सीधा प्रभाव पड़ा है या नहीं। ऐसे में फिलहाल एयरलाइन की ओर से यह जानकारी दी गई है कि उसके परिचालन में सुरक्षा संबंधी कोई जोखिम नहीं है।

    बोइंग के अनुसार, कंपनी ने पिछले महीने ही सभी 737 ऑपरेटरों को इस समस्या की जानकारी दे दी थी। कंपनी ने लैंडिंग के दौरान सामने आ सकने वाली उस विशेष परिस्थिति की पहचान की है, जिसमें पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस उपलब्ध नहीं हो सकता है।

    विमान निर्माता ने कहा है कि स्थायी तकनीकी समाधान उपलब्ध होने तक पायलटों के लिए मौजूदा प्रक्रियाएं ऐसी परिस्थितियों को सुरक्षित ढंग से संभालने में सक्षम हैं। इसके साथ ही ऑपरेटरों के साथ जरूरी जानकारी साझा की गई है, ताकि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सके।

    बोइंग के इंजीनियर इस समस्या को स्थायी रूप से दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट विकसित कर रहे हैं। अपडेट लागू होने के बाद तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    अकासा एयर के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एयरलाइन अपनी विस्तार योजना के तहत बोइंग 737 मैक्स विमानों का बेड़ा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की योजना 200 से अधिक अतिरिक्त 737 मैक्स विमानों का ऑर्डर देने की है।

    फिलहाल एयरलाइन ने अपने मौजूदा परिचालन को सुरक्षित बताया है, जबकि बोइंग की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट तैयार किया जा रहा है। इससे विमान संचालन में पायलट प्रक्रियाओं और तकनीकी सुधार दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • दिल्ली में त्योहारों से पहले महंगी हो सकती है शराब, नई आबकारी नीति में टैक्स और रिटेल मार्जिन बदलने की तैयारी

    दिल्ली में त्योहारों से पहले महंगी हो सकती है शराब, नई आबकारी नीति में टैक्स और रिटेल मार्जिन बदलने की तैयारी

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। राजधानी दिल्ली में आने वाले त्योहारों के दौरान शराब खरीदने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीति के लागू होने के बाद शराब की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

    नई आबकारी नीति का अंतिम मसौदा तैयार होने की जानकारी सामने आई है। आबकारी विभाग में नए कमिश्नर की नियुक्ति के बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल के पास भेजा जाना है। सरकार की कोशिश है कि अक्टूबर में त्योहारों का सीजन तेज होने से पहले नई नीति लागू कर दी जाए।

    नई व्यवस्था में शराब की कीमतों पर असर डालने वाले कई बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे प्रमुख शराब पर लगने वाली आबकारी ड्यूटी में बढ़ोतरी से जुड़ा है। फिलहाल दिल्ली में शराब की अलग-अलग कैटेगरी और व्होलसेल प्राइस स्लैब के आधार पर 30 प्रतिशत से 300 प्रतिशत तक आबकारी ड्यूटी लगती है।

    अगर ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो उसका असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा रिटेल विक्रेताओं के लिए मौजूदा निश्चित मार्जिन व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव भी सामने आया है। वर्तमान व्यवस्था में भारतीय निर्मित विदेशी शराब यानी IMFL पर 50 रुपये और विदेशी शराब पर 100 रुपये का निश्चित मार्जिन मिलता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था में इस फिक्स मार्जिन को खत्म करने या बदलने की तैयारी है। इसका उद्देश्य शराब के खुदरा कारोबार में कीमत और उपलब्धता से जुड़े मौजूदा ढांचे में बदलाव करना बताया जा रहा है।

    नई आबकारी नीति में प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में प्रीमियम स्टोर सीमित संख्या में हैं। इनकी संख्या बढ़ने से महंगी और प्रीमियम श्रेणी की शराब के लिए ग्राहकों को दिल्ली में ही अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकती है।

    होटल, क्लब और रेस्तरां में शराब परोसने के समय को लेकर भी बदलाव की संभावना है। नई नीति में सर्विंग टाइम से जुड़े मौजूदा नियमों में परिवर्तन का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि इन बदलावों का अंतिम स्वरूप नीति को मंजूरी मिलने के बाद स्पष्ट होगा।

    फिक्स रिटेल मार्जिन में बदलाव के पीछे एक प्रमुख कारण महंगी शराब की उपलब्धता से जुड़ी समस्या बताई गई है। मौजूदा व्यवस्था में 1,000 रुपये से अधिक कीमत वाली विदेशी और प्रीमियम शराब रखने में कुछ विक्रेताओं की रुचि कम रहती है। कम मार्जिन के कारण प्रीमियम उत्पादों का स्टॉक सीमित रहने की स्थिति सामने आती है।

    इसका असर यह भी बताया गया है कि दिल्ली के कुछ ग्राहक प्रीमियम शराब खरीदने के लिए आसपास के शहरों का रुख करते हैं। नई व्यवस्था में प्रीमियम स्टोर बढ़ाने और मार्जिन ढांचे में बदलाव के जरिए इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया जा सकता है।

    नई आबकारी नीति का एक उद्देश्य दिल्ली के राजस्व को बढ़ाना और शराब बिक्री की मौजूदा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करना भी बताया जा रहा है। फिलहाल राजधानी में सरकारी निगमों द्वारा 700 से अधिक शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं।

    नई व्यवस्था में निजी कंपनियों को शराब की खुदरा दुकानों के संचालन में शामिल करने के बजाय सरकारी निगमों के माध्यम से ही दुकानों का संचालन जारी रखने का प्रस्ताव है। इस तरह सरकार मौजूदा सरकारी खुदरा ढांचे को बनाए रखते हुए उसमें आवश्यक बदलाव करने की तैयारी में है।

    दिल्ली की पिछली विवादित आबकारी नीति को जांच के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद राजधानी में शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों के माध्यम से संचालित व्यवस्था के तहत जारी है। अब प्रस्तावित नई नीति के जरिए कीमत, मार्जिन, प्रीमियम स्टोर और सर्विंग टाइम से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाने की तैयारी है।

  • भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत

    भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत का प्राइमरी मार्केट अब कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के एक नियमित और महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में मजबूत होता जा रहा है। देश में मेनबोर्ड आईपीओ की पाइपलाइन करीब 3.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए जुटाए गए 1.10 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना अधिक है।

    इस पाइपलाइन में करीब 130 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें बाजार नियामक से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा लगभग 75 कंपनियों ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी दाखिल किया है और वे नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं।

    इतनी बड़ी पाइपलाइन से संकेत मिलता है कि कंपनियां सार्वजनिक बाजारों के माध्यम से पूंजी जुटाने में लगातार रुचि दिखा रही हैं। इससे भारतीय प्राइमरी मार्केट के आकार, गहराई और भविष्य में पूंजी उपलब्ध कराने की क्षमता का भी पता चलता है।

    संस्थागत निवेशकों, उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भी इस बाजार के विस्तार में भूमिका निभाई है। इससे प्राइमरी मार्केट का इस्तेमाल केवल तत्काल फंड जुटाने के बजाय लंबे समय के पूंजी निर्माण के माध्यम के रूप में बढ़ रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। वर्ष 2016 में यह राशि 26,494 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये हो गई।

    मेनबोर्ड आईपीओ की संख्या में भी इसी अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। वर्ष 2016 में देश में 26 मेनबोर्ड आईपीओ आए थे। 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई, जबकि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में आ चुके हैं।

    भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेश की भूमिका भी लगातार बढ़ी है। बाजार की मजबूती अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं है। म्यूचुअल फंड उद्योग के विस्तार के साथ सार्वजनिक इक्विटी, निजी पूंजी और ऋण बाजार के बीच भी बेहतर जुड़ाव विकसित हुआ है।

    आगे की दिशा में यह महत्वपूर्ण होगा कि सार्वजनिक बाजार से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबारी विस्तार, नई उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और अन्य दीर्घकालिक उत्पादक निवेश में किस तरह किया जाता है।

    SME IPO बाजार में भी गतिविधियां तेज हुई हैं। वर्ष 2025 में 267 SME आईपीओ आए, जो उस वर्ष का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा रहा। वहीं 2026 में अब तक 156 SME इश्यू बाजार में आ चुके हैं।

    2016 से 2026 के बीच SME कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से कुल 39,849 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसी अवधि में औसत SME इश्यू का आकार भी बढ़ा है। वर्ष 2016 में यह करीब 8 करोड़ रुपये था, जो 2026 में बढ़कर 45 करोड़ रुपये हो गया।

    पब्लिक मार्केट गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर निवेश बैंकिंग क्षेत्र पर भी दिखाई दिया है। सितंबर 2016 में देश में 188 मर्चेंट बैंकर पंजीकृत थे। सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 250 हो गई, जो करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि है।

    भारतीय प्राइमरी मार्केट के अगले चरण में केवल आईपीओ की संख्या बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की गुणवत्ता, संस्थागत निवेशकों की भागीदारी, बेहतर खुलासे, पूंजी का व्यापक वितरण और कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को समर्थन देने की क्षमता भी बाजार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, शुरुआती कारोबार में चांदी 2.34 प्रतिशत और सोना 1.80 प्रतिशत तक टूटा

    सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, शुरुआती कारोबार में चांदी 2.34 प्रतिशत और सोना 1.80 प्रतिशत तक टूटा

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार, 28 सितंबर को गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के शुरुआती दौर में सोना करीब 1.80 प्रतिशत और चांदी 2.34 प्रतिशत तक टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट रही।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर 2026 का वायदा कॉन्ट्रैक्ट पिछले कारोबारी सत्र में 1,50,881 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। इसके बाद कीमत में और गिरावट दर्ज की गई।

    सुबह 9:50 बजे सोने का वायदा भाव 2,721 रुपये यानी 1.80 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,48,160 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,47,667 रुपये प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर छुआ। वहीं, इसका उच्चतम स्तर 1,50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    सोने की तरह चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी का 4 दिसंबर 2026 का वायदा कॉन्ट्रैक्ट पिछले कारोबारी सत्र में 2,34,696 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 2,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला।

    सुबह 9:50 बजे चांदी 5,490 रुपये यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,29,206 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। कारोबार के दौरान चांदी का न्यूनतम भाव 2,28,035 रुपये प्रति किलोग्राम और उच्चतम भाव 2,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.09 प्रतिशत गिरकर 4,230 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की कीमत 3.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका और डॉलर इंडेक्स में लगातार तेजी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.83 पर पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती का असर सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

    डॉलर इंडेक्स के जरिए दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को मापा जाता है। इसमें यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कनाडाई डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक शामिल हैं। इन मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती या कमजोरी को दर्शाने वाला यह सूचकांक वैश्विक बाजार में डॉलर की स्थिति का संकेत देता है।

    सोमवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने तथा चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, दिए गए कारोबारी आंकड़े सुबह 9:50 बजे तक के हैं और पूरे दिन के अंतिम भाव इनमें शामिल नहीं हैं।

  • TRAI के नए रिचार्ज नियमों पर Jio, Airtel और Vi की अलग-अलग दलीलें, सस्ते वॉइस प्लान को लेकर जताई ये चिंताएं

    TRAI के नए रिचार्ज नियमों पर Jio, Airtel और Vi की अलग-अलग दलीलें, सस्ते वॉइस प्लान को लेकर जताई ये चिंताएं


    नई दिल्ली ।
    महंगे मोबाइल रिचार्ज से राहत देने के उद्देश्य से भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन 2026 जारी किया है। नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को बिना डेटा वाले कॉलिंग और SMS प्लान उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही 28 दिन के बजाय 30 दिन की वैलिडिटी वाले रिचार्ज भी पेश करने होंगे।

    इन नियमों का फायदा खास तौर पर उन ग्राहकों को मिलने की उम्मीद है जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होती या जो अतिरिक्त सिम को केवल चालू रखने के लिए रिचार्ज करते हैं। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां इस व्यवस्था को लेकर पहले से अपनी चिंताएं जाहिर करती रही हैं।

    रिलायंस जियो ने स्टैंडअलोन वॉइस प्लान को लेकर तर्क दिया है कि कम कीमत और कम वैलिडिटी वाले ऐसे प्लान साइबर जालसाजों और स्पैम कॉल करने वालों के लिए प्रवेश की बाधा कम कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इससे अनचाही व्यावसायिक कॉल और धोखाधड़ी वाले कॉल में बढ़ोतरी का खतरा हो सकता है।

    जियो ने यह भी कहा है कि उसका नेटवर्क मुख्य रूप से आधुनिक 4G और 5G तकनीक पर आधारित है। कंपनी के मुताबिक ऐसे नेटवर्क में केवल वॉइस सेवाओं वाले प्लान तकनीकी और व्यावसायिक रूप से अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। जियो का दावा है कि उसके करीब 80 प्रतिशत एंट्री-लेवल ग्राहक डेटा सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कंपनी के अनुसार केवल वॉइस वाले प्लान की मांग सीमित रह सकती है।

    वोडाफोन आइडिया यानी Vi ने अपनी चिंता को अलग तरीके से सामने रखा है। कंपनी का कहना है कि यदि किसी प्लान में डेटा पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो स्मार्टफोन में चलने वाले बैकग्राउंड अपडेट, ऐप सिंक और नोटिफिकेशन जैसी गतिविधियां उपभोक्ता के लिए अतिरिक्त शुल्क का कारण बन सकती हैं। कंपनी ने इसे ‘बिल शॉक’ की स्थिति से जोड़ा है।

    Vi के मुताबिक, पे-एज-यू-गो व्यवस्था में ऐसे ग्राहक जिनको मोबाइल डेटा की तकनीकी जानकारी कम है, अनजाने में डेटा इस्तेमाल कर सकते हैं और बाद में उन्हें अपेक्षा से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

    एयरटेल ने इन प्लान को लेकर डिजिटल सेवाओं के विस्तार से जुड़ी चिंता जताई है। कंपनी के अनुसार भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा अब मोबाइल और इंटरनेट पर काफी हद तक निर्भर है। इसमें आधार आधारित सेवाएं, UPI और कई सरकारी कल्याणकारी सेवाएं शामिल हैं। एयरटेल का तर्क है कि केवल वॉइस प्लान को बढ़ावा मिलने से कुछ ग्राहक इंटरनेट आधारित सेवाओं से दूर हो सकते हैं।

    दूसरी ओर, इन दलीलों को लेकर यह सवाल भी उठाया गया है कि जिन ग्राहकों को इंटरनेट की जरूरत नहीं है, उनके लिए डेटा के बिना सस्ता रिचार्ज उपलब्ध कराने में क्या समस्या है। फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए बैकग्राउंड डेटा की समस्या भी नहीं होती। वहीं स्मार्टफोन में मोबाइल डेटा बंद करने का विकल्प पहले से मौजूद है।

    ऐसे प्लान उन ग्राहकों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिनके पास मुख्य सिम पर पहले से डेटा उपलब्ध है और दूसरी सिम को केवल कॉलिंग या सक्रिय रखने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। कंपनियों की ओर से दिए गए तर्कों के बीच यह भी चर्चा है कि सस्ते स्टैंडअलोन वॉइस प्लान से औसत प्रति ग्राहक राजस्व पर असर पड़ सकता है।

    TRAI के नए नियमों के बाद टेलीकॉम कंपनियों को ग्राहकों के लिए स्टैंडअलोन वॉइस और SMS वाउचर तथा 30 दिन की वैलिडिटी वाले विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इससे मोबाइल रिचार्ज में ग्राहकों के लिए डेटा के बिना अपनी जरूरत के मुताबिक प्लान चुनने का विकल्प बढ़ेगा।

  • त्योहारी सीजन से पहले महंगे होंगे एसी-टीवी और फ्रिज…. 1 अक्तूबर से दाम बढ़ाने की तैयारी

    त्योहारी सीजन से पहले महंगे होंगे एसी-टीवी और फ्रिज…. 1 अक्तूबर से दाम बढ़ाने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    त्योहारी सीजन (Festive season) से ठीक पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई की मार पड़ने वाली है। एसी, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामान (Electronic products) एक अक्तूबर से महंगे (Costlier) होने वाले हैं। कंपनियां कीमतों में 3 से 8 फीसदी तक बढ़ोतरी की तैयारी में हैं।


    एसी के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ने की संभावना

    एसी के दाम करीब पांच से आठ फीसदी, जबकि कुछ कंपनियां टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज के दाम तीन से चार फीसदी बढ़ा सकती हैं। यह इस साल तीसरी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, कुछ कंपनियां अभी बाजार की स्थिति का आकलन कर रही हैं।


    महंगाई बढ़ने के 3 कारण

    – एल्युमिनियम, तांबा, स्टील और प्लास्टिक के दाम बढ़े।
    – माल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत बढ़ी।
    – डॉलर मजबूत होने से आयातित सामान की लागत बढ़ी है।


    कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाया कंपनियों का खर्च

    – ब्लू स्टार ने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण एसी और डीप फ्रीजर के दाम पहले ही पांच से आठ फीसदी बढ़ाए जा चुके हैं। हायर इंडिया के चेयरमैन एन.एस. सतीश बताते हैं कि तांबे का दाम पिछले साल के 8 से 9 हजार डॉलर प्रति टन से बढ़कर करीब 14,500 डॉलर हो गया है। एक एसी में 3 से 4 किलो तांबा लगता है। दाम बढ़ना स्वाभाविक है।

  • डिनर के बाद भीड़ में आलिया भट्ट को संभालते दिखे रणबीर कपूर, प्रोटेक्टिव अंदाज और मुस्कान ने खींचा सबका ध्यान

    डिनर के बाद भीड़ में आलिया भट्ट को संभालते दिखे रणबीर कपूर, प्रोटेक्टिव अंदाज और मुस्कान ने खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली । रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, विकी कौशल और निर्देशक संजय लीला भंसाली इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ को लेकर चर्चा में हैं। शनिवार 26 सितंबर की रात फिल्म की पूरी टीम मुंबई में डिनर के लिए एक साथ पहुंची। डिनर के बाद सभी सितारों ने रेस्टोरेंट के बाहर मौजूद लोगों और कैमरों के सामने तस्वीरें भी खिंचवाईं। इसी दौरान रणबीर कपूर और आलिया भट्ट का एक पल कैमरे में कैद हो गया, जो अब चर्चा में है।

    डिनर के बाद जब फिल्म की टीम रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर अपनी कारों की ओर बढ़ रही थी, तब वहां कैमरों और लोगों की भीड़ मौजूद थी। इसी दौरान आलिया भट्ट भीड़ के बीच से कार की तरफ जाने लगीं। रणबीर कपूर ने उन्हें कमर से पकड़कर अपने साथ रखा और भीड़ के बीच से बाहर निकालते हुए नजर आए।

    इस दौरान रणबीर का अंदाज अपनी पत्नी के प्रति काफी केयरिंग और प्रोटेक्टिव नजर आया। वीडियो में दिखाई देता है कि वह आलिया को भीड़ और अफरातफरी के बीच संभालते हुए कार की ओर ले जा रहे हैं। दोनों के बीच का यह पल कैमरे में रिकॉर्ड हो गया।

    आलिया भट्ट इस मौके पर पीले रंग की स्कर्ट और मैचिंग टॉप में नजर आईं। उन्होंने अपने बालों को करीने से बांधा हुआ था। वहीं रणबीर कपूर कैजुअल लुक में दिखाई दिए। विकी कौशल ने सफेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी। डिनर के बाद सभी कलाकारों ने रेस्टोरेंट के बाहर तस्वीरों के लिए पोज दिए।

    वीडियो में विकी कौशल को अलविदा कहने के बाद आलिया कार की तरफ बढ़ती दिखाई देती हैं। इसी दौरान रणबीर उनके पास पहुंचे और भीड़ के बीच उन्हें संभालते हुए आगे ले गए। रणबीर के इस अंदाज पर आलिया के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी और वह कुछ पल के लिए शरमाती हुई नजर आईं।

    आलिया और रणबीर के इस पल को फिल्मी टीम के डिनर के दौरान का एक खास क्षण माना जा रहा है। दोनों का यह वीडियो सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच भी चर्चा में है। खास तौर पर भीड़ के बीच रणबीर का आलिया को संभालना और आलिया का मुस्कुराना वीडियो का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।

    इस मुलाकात के दौरान फिल्म ‘लव एंड वॉर’ से जुड़े कलाकार भी एक साथ नजर आए। रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विकी कौशल इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि संजय लीला भंसाली इसका निर्देशन कर रहे हैं। फिल्म को लेकर कलाकारों के फर्स्ट-लुक पोस्टर भी सामने आ चुके हैं, जिनमें तीनों अलग-अलग अंदाज में दिखाई दिए हैं।

    ‘लव एंड वॉर’ को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विकी कौशल पहली बार एक साथ प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी और कलाकारों के लुक को लेकर भी लगातार चर्चा बनी हुई है।

    फिल्म की रिलीज की बात करें तो ‘लव एंड वॉर’ 21 जनवरी 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इससे पहले फिल्म की टीम का एक साथ डिनर करना और उसके बाद रणबीर-आलिया का यह वीडियो मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।