Category: Economy

  • शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री

    शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 26 अक्टूबर को कारोबार के दौरान काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दबाव में नजर आए। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ खरीदारी लौटी और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रही। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी रही।

    दोपहर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 73 हजार 179 अंक के आसपास पहुंच गया जबकि एनएसई निफ्टी 22 हजार 610 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 500 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी आने से निवेशकों को कुछ राहत मिली लेकिन बाजार में पूरी तरह मजबूती लौटने के संकेत नहीं मिले। कारोबार के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर शेयरों की चाल पर दिखाई दिया।

    बाजार की चिंता की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने ऊर्जा बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था की विकास गति पर भी पड़ सकता है।

    शेयरों की बात करें तो सोमवार को डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहने के बाद शेयर में तेजी दर्ज की गई। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बढ़त रही। इसके विपरीत इंफोसिस के शेयरों पर दबाव बना रहा। कंपनी की ओर से सालाना राजस्व वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। उत्तर अमेरिकी बाजार में कमजोरी भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।

    श्रीराम फाइनेंस का शेयर भी निवेशकों के रडार पर रहा। कंपनी की ओर से कर्ज वृद्धि के अनुमान में कमी और संभावित क्रेडिट लागत को लेकर संकेत दिए जाने के बाद शेयर में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में केवल वैश्विक घटनाक्रम ही नहीं बल्कि कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य के अनुमान भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। तिमाही नतीजों के इस दौर में अलग अलग कंपनियों के शेयरों में अलग रुख देखने को मिल सकता है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगी। यदि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला न लें और निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति तथा अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें।

  • नवंबर में पांच राशियों की चमक सकती है किस्मत, नौकरी में तरक्की और धन लाभ के बन सकते हैं योग

    नवंबर में पांच राशियों की चमक सकती है किस्मत, नौकरी में तरक्की और धन लाभ के बन सकते हैं योग

    नई दिल्ली ।नवंबर 2026 का महीना कुछ राशियों के जातकों के लिए करियर और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलाव का असर नौकरी, कारोबार, पदोन्नति और धन से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। कुछ राशियों के लोगों को कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने, नई जिम्मेदारियां संभालने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन संभावनाओं को निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।

    ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, नवंबर में मेष, सिंह, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से समय महत्वपूर्ण हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम में सुधार करने और बेहतर अवसर तलाशने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, कारोबार से जुड़े लोगों के लिए योजनाओं की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना उपयोगी हो सकता है।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए नवंबर में अपनी क्षमता और मेहनत के दम पर आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने या उनके काम की सराहना होने की संभावना हो सकती है। नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे लोगों को अपने अनुभव और योग्यता के अनुसार अवसर तलाशने चाहिए। कारोबारियों के लिए नई योजनाओं पर काम करने और मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण रहेगा।

    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों के लिए कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर मिल सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल और जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। पदोन्नति की उम्मीद कर रहे लोगों को अपने प्रदर्शन और कार्यकुशलता पर ध्यान देना चाहिए। कारोबार से जुड़े जातक भी अपनी योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए नौकरी और करियर से जुड़े नए विकल्प सामने आने की संभावना जताई जा रही है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अपनी योग्यता के अनुरूप अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। पहले से नौकरी कर रहे लोगों के लिए नई जिम्मेदारियां संभालने और अपने काम में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी भी नए प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तों और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी करियर में आगे बढ़ने के प्रमुख आधार हो सकते हैं। लंबे समय से किसी लक्ष्य के लिए प्रयास कर रहे लोगों को अपने काम की समीक्षा करने और आगे की योजना बनाने का अवसर मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नए कौशल सीखने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। कारोबारियों के लिए कामकाज को व्यवस्थित रखना और आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेना महत्वपूर्ण रहेगा।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के जातकों के लिए नवंबर में करियर के नए विकल्पों पर विचार करने का समय हो सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोग अपनी योग्यता, अनुभव और उपलब्ध अवसरों का आकलन कर सकते हैं। वर्तमान कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना के बीच काम की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी रहेगा। कारोबारियों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार अपनी योजनाओं में बदलाव करने और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करने पर ध्यान देना चाहिए।

    ग्रहों के गोचर का महत्व

    ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध को बुद्धि, संवाद और व्यापार से, शुक्र को सुख-सुविधाओं और आर्थिक मामलों से तथा सूर्य को आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से जोड़ा जाता है। मंगल को ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है, जबकि गुरु को ज्ञान, विस्तार और अवसरों से संबंधित माना जाता है। नवंबर में इन ग्रहों की स्थिति और गोचर के आधार पर विभिन्न राशियों के लिए संभावनाओं का आकलन किया जाता है।

    हालांकि, केवल राशिफल के आधार पर नौकरी, निवेश या कारोबार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेना उचित नहीं है। करियर में प्रगति के लिए योग्यता, मेहनत, सही योजना और परिस्थितियों का आकलन भी जरूरी है। इसी तरह, धन लाभ की संभावना को निश्चित आमदनी नहीं माना जा सकता।

    SEO हेडलाइन 1:
    नवंबर 2026 राशिफल में पांच राशियों के लिए करियर में तरक्की, नई नौकरी और धन लाभ की संभावनाओं पर ज्योतिषीय आकलन

    SEO हेडलाइन 2:
    नवंबर में ग्रहों के गोचर से पांच राशियों को मिल सकते हैं नए अवसर, जानें नौकरी, प्रमोशन और आर्थिक मामलों के संकेत

  • कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की चिंता, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब पहुंचने से बढ़ा दबाव

    कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की चिंता, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब पहुंचने से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली ।
    वश्विक बाजारों में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण निवेशकों की चिंता बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि भारत के लिए महत्वपूर्ण इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। महंगे तेल का असर भारत के आयात खर्च, महंगाई और तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने की आशंका है।

    ब्रेंट क्रूड का भाव पिछले कारोबारी सत्र में बढ़कर 117.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। बाद में यह 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। सोमवार सुबह इसमें पिछले बंद स्तर के मुकाबले करीब 1.55 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत 114.91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। इसके बावजूद कच्चे तेल का भाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान भी तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची थीं।

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड का भाव अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने की स्थिति में रहा है। सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने भी कीमतों को समर्थन दिया। सोमवार को भाव में नरमी आने के बावजूद आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं और वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की वास्तविक लागत भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्टूबर को इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 119.99 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। अक्टूबर का औसत भाव भी लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल बताया गया है। इस स्तर पर कच्चे तेल की खरीद भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है और रुपये तथा महंगाई पर दबाव डाल सकती है।

    महंगे तेल का असर तेल विपणन कंपनियों की कमाई पर भी पड़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनियों को प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान बताया गया है। इसके अलावा, प्रत्येक एलपीजी सिलिंडर पर लगभग 300 रुपये की अंडर रिकवरी होने की जानकारी सामने आई है।

    त्योहारी मौसम में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की आशंका कम बताई जा रही है। हालांकि, यदि त्योहारों के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने पर विचार कर सकती हैं। फिलहाल, खुदरा कीमतों में बदलाव को लेकर कोई निश्चित फैसला सामने नहीं आया है।

    अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 652.82 अंक यानी करीब 1.23 प्रतिशत गिरकर 52,215.16 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 0.52 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सोमवार सुबह अमेरिकी वायदा बाजार में कुछ सुधार दिखाई दिया। डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 52,341.69 पर कारोबार कर रहा था।

    एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। जापान के निक्केई 225 में करीब 0.26 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 0.92 प्रतिशत, चीन के शंघाई कंपोजिट में 0.36 प्रतिशत और सिंगापुर के स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा।

    भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत लगभग सपाट रहे। सुबह 7:36 बजे गिफ्ट निफ्टी 22,599.50 पर था, जो पिछले बंद स्तर से 8.50 अंक यानी 0.04 प्रतिशत नीचे था। इस सप्ताह 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक भी निवेशकों के लिए अहम है। ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच ब्याज दरों और महंगाई पर फेड के रुख से वैश्विक बाजारों की आगे की दिशा प्रभावित हो सकती है।

  • लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । लगातार कई दिनों तक गिरावट का सामना करने के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी लौटी। पिछले सप्ताह सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की। हालांकि, बाजार में आई इस तेजी को फिलहाल गिरावट के बाद की रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है। आगे कीमतों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है।

    घरेलू वायदा बाजार में सोने के दिसंबर अनुबंध का भाव लगभग 0.50 प्रतिशत यानी 761 रुपये बढ़कर 1,42,733 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने पिछले बंद भाव 1,42,024 रुपये प्रति 10 ग्राम से 864 रुपये की बढ़त हासिल करते हुए 1,42,888 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। यह तेजी लगभग 0.60 प्रतिशत रही।

    चांदी के दिसंबर वायदा अनुबंध में भी मजबूती दर्ज की गई। इसका भाव करीब 0.49 प्रतिशत यानी 968 रुपये बढ़कर 1,96,687 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने पिछले बंद स्तर 1,95,719 रुपये से 1,467 रुपये की छलांग लगाई और 1,97,186 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान चांदी में 0.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद दोनों धातुओं में आई खरीदारी को बाजार की अहम गतिविधि माना जा रहा है। उस दौरान सोने की कीमत लगभग 4 प्रतिशत और चांदी की कीमत 7 प्रतिशत से अधिक टूट गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव का असर दिखाई दिया था। स्पॉट गोल्ड जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया था।

    अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स में सोमवार सुबह सोना लगभग 0.48 प्रतिशत बढ़कर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। सत्र के दौरान इसने 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर भी छुआ। चांदी लगभग 0.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 54.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची और कारोबार के दौरान 54.47 डॉलर प्रति औंस का स्तर दर्ज किया।

    बाजार में सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया गिरावट के बाद इस स्तर के आसपास खरीदारी लौटने से कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। ब्याज दरों को लेकर संकेत सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

    इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई महंगाई आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है।

    चांदी ने हालिया कारोबार में सोने की तुलना में बेहतर रिकवरी दिखाई है, लेकिन तकनीकी संकेतों के अनुसार इसमें अभी पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है। घरेलू बाजार में चांदी के लिए 2 लाख से 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का क्षेत्र प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 1.92 लाख से 1.94 लाख रुपये का स्तर समर्थन दे सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा था। तेल महंगा रहने से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती टलने का जोखिम रहता है। ऐसे में निवेशकों की नजर डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा बाजार की चाल पर भी बनी हुई है।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले। बाजार में गिरावट का यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दबाव देखने को मिला। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी एक प्रतिशत के करीब गिरावट के साथ अपने निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बीएसई का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र में 73,123.83 अंक पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 72,990.04 अंक पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत नीचे था। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 609.25 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 72,514.57 अंक के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,600 अंक के मुकाबले 22,524.40 अंक पर खुला। इसमें शुरुआती स्तर पर 75.59 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में सूचकांक 212.65 अंक यानी 0.94 प्रतिशत फिसलकर 22,387.35 अंक के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में कमजोरी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.81 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की कमी आई। इससे व्यापक बाजार में भी निवेशकों के सतर्क रुख का संकेत मिला।

    सेक्टर के स्तर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक तक की गिरावट देखी गई। इसके विपरीत निजी बैंकिंग शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 0.49 प्रतिशत चढ़ा। फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों में भी अन्य प्रमुख क्षेत्रों की तुलना में कम दबाव रहा।

    निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। बाजार में व्यापक उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, बैठक के बाद भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर मिलने वाले संकेत अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

    कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड दो प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड दो प्रतिशत से अधिक टूटकर 100.70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालिया नरमी के बावजूद तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं कायम हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट की एक वजह मार्जिन फंडिंग पर आधारित सौदों का बंद होना भी रही। हालांकि, गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश के अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेशकों को आर्थिक जोखिमों पर नजर रखनी होगी।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के आंकड़े बाजार के लिए एक अलग संकेत भी देते हैं। 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 887 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र खरीदारी जारी रखते हुए 3,236 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी थी।

    एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों की बैठकें, कंपनियों के तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी निवेश धारणा आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।

  • पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल

    पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर पटना में की गई टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव करेंगे। भाजपा कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने स्थित शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा कांग्रेस नेतृत्व से बयान पर जवाब मांगने की तैयारी में है।
    विवाद की शुरुआत रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर बापू सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी नीतियों पर टिप्पणी कर रहे थे। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाने वाले हैं। इसके जवाब में खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा। इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया और मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

    मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या खरगे ने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो क्या कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस्तीफा मांगेगी। शिवराज ने टिप्पणी को भारतीय संस्कृति और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब देने की मांग की।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना राजनीति की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। खंडेलवाल ने सवाल किया कि खरगे इस तरह के बयान खुद देते हैं या इसके पीछे गांधी परिवार का कोई निर्देश होता है। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और व्यवहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीति में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद स्वाभाविक है लेकिन विरोध करते समय भाषा और व्यवहार में गरिमा बनी रहनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना भी जरूरी है।

    भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं विश्वास सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

    पटना के कार्यक्रम में टिप्पणी के बाद हंगामे की खबर भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक जिस व्यक्ति ने बीच में अपनी बात कही थी उसके साथ वहां मौजूद कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी पूरी बात नहीं सुनी गई थी और वह कह रहा था कि विद्रोह के बिना मोदी नहीं जाएंगे। इस घटनाक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

    अब भोपाल में होने वाला भाजपा का प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद का अगला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यालय के घेराव के दौरान भाजपा नेता खरगे के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। दूसरी ओर इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल विवाद का केंद्र बयान की भाषा और राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा बना हुआ है।

  • Jio IPO Listing: लिस्टिंग से पहले जियो के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार ₹30 हजार करोड़ के IPO ने तोड़े रिकॉर्ड अब निवेशकों को मुनाफे का इंतजार

    Jio IPO Listing: लिस्टिंग से पहले जियो के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार ₹30 हजार करोड़ के IPO ने तोड़े रिकॉर्ड अब निवेशकों को मुनाफे का इंतजार


    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त चर्चा बटोरी है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग पर टिकी हुई है। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में जियो के शेयरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 की सुबह उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपनी के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम 247 रुपये प्रति शेयर बताया जा रहा है। IPO का अपर प्राइस बैंड 1119 रुपये निर्धारित किया गया था जबकि ग्रे मार्केट में शेयर का अनुमानित भाव 1366 रुपये तक पहुंच गया है। इस आधार पर शेयर करीब 22.07 प्रतिशत के प्रीमियम पर कारोबार करते बताए जा रहे हैं।

    ग्रे मार्केट के मौजूदा संकेतों ने उन निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं जिन्होंने जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में पैसा लगाया है। हालांकि निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल संभावित लिस्टिंग प्रदर्शन का संकेत देता है। इसे वास्तविक लिस्टिंग प्राइस या निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं माना जा सकता है। शेयर बाजार में लिस्टिंग के समय परिस्थितियों के अनुसार कीमत में बदलाव हो सकता है।

    एक लॉट पर 2964 रुपये के मुनाफे का अनुमान

    जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में एक लॉट में 12 शेयर रखे गए हैं। कंपनी के शेयरों का अपर प्राइस बैंड 1119 रुपये होने के कारण एक लॉट के लिए निवेशकों को 13428 रुपये लगाने होते हैं। वहीं ग्रे मार्केट में 1366 रुपये प्रति शेयर के अनुमानित भाव के आधार पर 12 शेयरों की कीमत 16392 रुपये बैठती है। इस तरह दोनों कीमतों के बीच प्रति शेयर 247 रुपये का अंतर है। एक लॉट के हिसाब से यह अंतर 2964 रुपये तक पहुंच जाता है।

    इस गणना के अनुसार यदि ग्रे मार्केट का प्रीमियम लिस्टिंग तक बना रहता है और शेयर इसी अनुमानित भाव पर सूचीबद्ध होते हैं तो एक लॉट पाने वाले निवेशक को करीब 2964 रुपये का संभावित फायदा हो सकता है। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग इस अनुमान से अलग हो सकती है। निवेशकों को केवल ग्रे मार्केट के आंकड़ों के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    28 अक्टूबर को हो सकती है शेयरों की लिस्टिंग

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को NSE और BSE पर प्रस्तावित है। IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। जिन निवेशकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे उनके रिफंड 27 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। अलॉटमेंट की स्थिति सामने आने के बाद निवेशक यह जान सकेंगे कि उन्हें कंपनी के शेयर मिले हैं या नहीं। इसके बाद बाजार की निगाहें लिस्टिंग के दिन शेयर के प्रदर्शन पर रहेंगी।

    22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ने दिखाई निवेशकों की दिलचस्पी

    जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को निवेशकों का जोरदार समर्थन मिला। तीन दिन की बोली प्रक्रिया के दौरान इश्यू को कुल मिलाकर 22 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने की जानकारी सामने आई। निवेशक श्रेणियों के आंकड़ों के मुताबिक क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB श्रेणी में 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी NII श्रेणी में यह आंकड़ा करीब 14 गुना रहा जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इन आंकड़ों से पता चलता है कि IPO में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी काफी मजबूत रही।

    30213 करोड़ रुपये के IPO ने बनाया रिकॉर्ड

    जियो प्लेटफॉर्म्स का 30213 करोड़ रुपये का IPO भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है। इस इश्यू ने 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। IPO के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
    जियो प्लेटफॉर्म्स का 30213 करोड़ रुपये का IPO भारतीय शेयर बाजार के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो गया है। इस इश्यू ने 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इश्यू को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी इतनी अधिक थी कि खुलने के करीब 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। IPO के लिए लगभग 1.4 करोड़ आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

    अब निवेशकों की नजर 28 अक्टूबर को होने वाली संभावित लिस्टिंग पर है। ग्रे मार्केट में दिखाई दे रही तेजी ने बाजार की उम्मीदों को बढ़ाया है लेकिन वास्तविक प्रदर्शन का पता लिस्टिंग के समय ही चलेगा। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • एलन मस्क ने एक्स मनी के नए फीचर का किया ऐलान, लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे एक डॉलर…

    एलन मस्क ने एक्स मनी के नए फीचर का किया ऐलान, लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे एक डॉलर…

    नई दिल्ली । एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक्स मनी के एक नए प्रस्तावित फीचर की घोषणा की है। इस सुविधा के तहत यूजर किसी दूसरे यूजर को केवल लाइक बटन को कुछ देर तक दबाकर एक डॉलर भेज सकेंगे। इसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाना और कंटेंट क्रिएटर्स को सीधे आर्थिक समर्थन देने का विकल्प उपलब्ध कराना है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फीचर को शुरू करने की तारीख और इसके इस्तेमाल से जुड़ी शर्तों की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    मस्क ने रविवार को इस नए फीचर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यूजर एक्स पर लाइक बटन को लॉन्ग प्रेस करके किसी अन्य व्यक्ति को एक्स मनी के जरिए एक डॉलर भेज पाएंगे। इस सुविधा के लागू होने पर किसी पोस्ट को पसंद करने वाले लोग उसके लेखक को सीधे छोटी रकम भेज सकेंगे। इसके लिए उन्हें अलग से किसी भुगतान विकल्प या दूसरे ऐप पर जाने की जरूरत नहीं होगी।

    प्रस्तावित फीचर को कंटेंट क्रिएटर्स के लिए उपयोगी माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर नियमित रूप से सामग्री साझा करने वाले यूजर को उनके दर्शक छोटी राशि देकर प्रोत्साहित कर सकेंगे। इसके अलावा, लोग अपनी पसंद की पोस्ट बनाने वाले यूजर को आर्थिक सहयोग भी दे पाएंगे। लाइक बटन के साथ भुगतान का विकल्प जोड़ने से सामान्य सोशल मीडिया गतिविधि के दौरान ही पैसे भेजना संभव हो सकता है।

    यह पहल एक्स को एक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदलने की एलन मस्क की व्यापक योजना का हिस्सा है, जहां सोशल नेटवर्किंग, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध हों। मस्क एक्स को ‘एवरीथिंग ऐप’ के रूप में विकसित करना चाहते हैं। इसका मतलब ऐसा ऐप है, जिसका इस्तेमाल लोग संवाद करने, कंटेंट देखने और भुगतान जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए कर सकें। एक्स मनी को इसी रणनीति के तहत विकसित की जा रही वित्तीय सेवा के रूप में देखा जा रहा है।

    एक्स मनी को हाल ही में अमेरिका में लॉन्च किया गया है। यह सेवा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने की सुविधा देती है। इसके साथ एक्स वीजा डेबिट कार्ड भी उपलब्ध कराया गया है, जिसका इस्तेमाल भौतिक दुकानों और डिजिटल माध्यमों से भुगतान करने के लिए किया जा सकता है। इस कार्ड को एप्पल पे से भी जोड़ा जा सकता है। इसके जरिए उन स्थानों पर संपर्क रहित भुगतान किया जा सकता है, जहां यह सुविधा उपलब्ध है।

    कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को आसान बनाने से जुड़े विकल्पों पर भी ध्यान दिया है। हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ और इस्तेमाल की शर्तें यूजर की पात्रता तथा लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। नए लाइक-टू-पेमेंट फीचर के मामले में भी फिलहाल उपलब्ध जानकारी सीमित है। कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि भुगतान की प्रक्रिया किस तरह काम करेगी, किन यूजर को इसका लाभ मिलेगा और क्या इसके इस्तेमाल पर कोई अतिरिक्त शर्त लागू होगी।

    फिलहाल एक्स मनी का मुख्य फोकस अमेरिकी बाजार पर है। कंपनी ने यह भी नहीं बताया है कि एक्स मनी या लाइक बटन के जरिए एक डॉलर भेजने वाला प्रस्तावित फीचर भारत समेत दूसरे देशों में कब उपलब्ध कराया जाएगा। भारत डिजिटल भुगतान के बड़े बाजारों में शामिल है, ऐसे में यहां इस सेवा की संभावित शुरुआत को लेकर आगे की घोषणाओं पर नजर रहेगी। फिलहाल यह सुविधा प्रस्तावित है और इसकी वैश्विक उपलब्धता को लेकर कोई निश्चित समय-सीमा सामने नहीं आई है।

  • शरद पूर्णिमा पर गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से की मुलाकात, शिक्षा की ताकत पर दिया संदेश

    शरद पूर्णिमा पर गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से की मुलाकात, शिक्षा की ताकत पर दिया संदेश

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा के अवसर पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से मुलाकात की। इन पूर्व छात्रों ने शिक्षा के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। इनमें डॉक्टर, वकील, आईआईटी इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वैज्ञानिक, पुलिसकर्मी और मर्चेंट नेवी अधिकारी शामिल हैं। इस मुलाकात के दौरान अदाणी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिभा को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर युवा अपनी क्षमताओं को पहचानकर आगे बढ़ सकते हैं।

    गौतम अदाणी ने इस मुलाकात को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इन युवाओं की उपलब्धियां दिखाती हैं कि शिक्षा किस तरह जीवन में बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि जब प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर मिलता है और शिक्षक उनके सपनों पर भरोसा करते हैं, तो वे अपने लिए नए रास्ते बना सकते हैं। उनके मुताबिक, इन पूर्व छात्रों की जीवन यात्राएं शिक्षा की ताकत और सही मार्गदर्शन के महत्व को सामने लाती हैं।

    अदाणी ने अपने संदेश में 14 युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कहानियों की शुरुआत अदाणी विद्या मंदिर से हुई थी। अलग-अलग पेशों में काम कर रहे ये युवा इस बात का उदाहरण हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर मिलने पर विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों पर गर्व जताया और उन्हें इसी तरह आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

    अदाणी विद्या मंदिर की स्थापना आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। संस्थान का लक्ष्य बच्चों को सीखने, अपने सपने पूरे करने और अपनी क्षमताओं का विकास करने का अवसर देना है। यहां ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है, जिनके परिवारों में कई बच्चे पहली बार स्कूल तक पहुंचते हैं।

    यह सह-शिक्षा संस्थान वंचित वर्गों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उनमें सामाजिक जागरूकता और भारतीय मूल्यों के प्रति समझ भी विकसित करना है। संस्थान बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर देता है।

    गौतम अदाणी की पूर्व छात्रों से हुई मुलाकात ने शिक्षा के जरिए हासिल की गई उपलब्धियों को सामने रखा। डॉक्टरों, इंजीनियरों, वकीलों, वैज्ञानिकों और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में पहुंचे इन युवाओं की यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि शिक्षा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल सकती है। साथ ही, शिक्षकों का विश्वास और उचित मार्गदर्शन बच्चों को अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    अदाणी विद्या मंदिर का उद्देश्य वंचित बच्चों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक कठिनाइयों से आगे बढ़ने का अवसर देना है। संस्थान की पृष्ठभूमि और पूर्व छात्रों की उपलब्धियां इसी लक्ष्य से जुड़ी हैं। शरद पूर्णिमा पर आयोजित यह मुलाकात इन युवाओं की सफलता और शिक्षा के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करने का अवसर बनी।

  • जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    जियो आईपीओ की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को, ग्रे मार्केट में ₹248 प्रीमियम से निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर निवेशकों की नजरें अब शेयर बाजार में होने वाली लिस्टिंग पर टिकी हैं। कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। अब निवेशक शेयरों के अलॉटमेंट, ग्रे मार्केट प्रीमियम और बाजार में संभावित शुरुआती कीमत को लेकर उत्सुक हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे।

    24 अक्टूबर को शाम पांच बजे उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी करीब 248 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। ऊपरी प्राइस बैंड में 248 रुपये का प्रीमियम जोड़ने पर अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,367 रुपये बनती है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 22.16 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत देता है।

    हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत नहीं माना जा सकता। यह अनौपचारिक बाजार में चल रही खरीद-बिक्री से मिलने वाला संकेत है। इसमें लिस्टिंग से पहले बदलाव हो सकता है। शेयर बाजार में कंपनी के शेयर किस भाव पर कारोबार शुरू करेंगे, यह वास्तविक मांग, निवेशकों के व्यवहार और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए मौजूदा जीएमपी को संभावित संकेत के रूप में ही देखना जरूरी है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को निर्धारित है। कारोबार शुरू होने से पहले सुबह नौ बजे से 9:45 बजे तक विशेष प्री-ओपन सत्र आयोजित किया जाएगा। इस अवधि में निवेशक अपने ऑर्डर दे सकेंगे, उनमें बदलाव कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द भी कर सकेंगे। इसके बाद शेयर का शुरुआती भाव निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह दस बजे कारोबार शुरू होना है।

    आईपीओ के अलॉटमेंट की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को पूरी होने की उम्मीद है। जिन आवेदकों को शेयर आवंटित नहीं होंगे, उनके रिफंड की प्रक्रिया 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। इसी दिन सफल आवेदकों के डीमैट खातों में शेयर जमा किए जाने की भी उम्मीद है। अलॉटमेंट पूरा होने के बाद निवेशक बीएसई, एनएसई या आईपीओ रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे। इसके लिए पैन नंबर या आवेदन से संबंधित विवरण की जरूरत पड़ सकती है।

    इस आईपीओ का कुल आकार 30,213 करोड़ रुपये था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। ऊपरी प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम 13,428 रुपये का निवेश जरूरी था।

    सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के अनुसार, योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में आईपीओ 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में यह आंकड़ा 14 गुना रहा, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल मिलाकर इश्यू को 22.19 गुना आवेदन प्राप्त हुए।

    लिस्टिंग से पहले निवेशकों के लिए अलॉटमेंट की स्थिति और बाजार में बन रहे संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, केवल जीएमपी के आधार पर मुनाफे का अनुमान लगाना उचित नहीं है। वास्तविक लिस्टिंग कीमत अनुमान से कम या अधिक हो सकती है। निवेश संबंधी निर्णय लेते समय कंपनी की वित्तीय स्थिति, आईपीओ से जुड़ी जानकारी और अपनी जोखिम सहने की क्षमता पर ध्यान देना जरूरी है।