Category: Economy

  • जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

    जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति


    नई दिल्ली ।
    भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में नई दिशा देने के उद्देश्य से व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक मॉस्को में हुई। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए और कई प्रमुख क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    दो दिवसीय रूस यात्रा पर पहुंचे जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के संबंधों में लगातार मजबूती और अनुकूलन क्षमता दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच आपसी हित और विश्वास को रणनीतिक साझेदारी का आधार बताया गया।

    जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में करीब 13 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। व्यापार में यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि व्यापार घाटे का अंतर करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने इस असंतुलन को दूर करना भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। दोनों पक्षों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए नए अवसर तलाशने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

    बैठक में ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और मानव संसाधन की आवाजाही जैसे क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया। जयशंकर ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी माहौल में दोनों देशों को नए क्षेत्रों की संभावनाओं की पहचान करते हुए सहयोग का दायरा बढ़ाना होगा।

    उन्होंने भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार सरकारें व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक ढांचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन वास्तविक निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन में कारोबारी क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका रहती है। इसलिए संस्थागत तंत्र को उद्योग की प्राथमिकताओं के साथ लगातार जोड़े रखने की आवश्यकता है।

    जयशंकर ने कहा कि अंतर-सरकारी आयोग के विभिन्न कार्य समूहों और उप-समूहों को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने समस्या समाधान और व्यावहारिक परिणामों को भविष्य की बैठकों की सफलता का प्रमुख आधार बताया।

    बैठक के बाद जयशंकर ने मंटुरोव को आयोग की सह-अध्यक्षता के लिए धन्यवाद दिया और चर्चा को उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बैठक उपयोगी रही। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने तथा नई तकनीकी और रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप साझेदारी विकसित करने पर दोनों पक्षों का जोर रहा।

  • स्वास्थ्य और पोषण दावों पर सख्ती के बाद कई कंपनियों ने उत्पाद लेबल सुधारे, ऑनलाइन लिस्टिंग हटाईं और अनुपालन रिपोर्ट दी

    स्वास्थ्य और पोषण दावों पर सख्ती के बाद कई कंपनियों ने उत्पाद लेबल सुधारे, ऑनलाइन लिस्टिंग हटाईं और अनुपालन रिपोर्ट दी

    नई दिल्ली ।भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से खाद्य उत्पादों पर भ्रामक स्वास्थ्य, पोषण, व्यापारिक और उत्पाद संबंधी दावों के खिलाफ जारी नोटिस के बाद कई कंपनियों ने अपने स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई की है। कंपनियों ने उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले दावों को हटाने, विज्ञापन वापस लेने, ऑनलाइन उत्पाद लिस्टिंग हटाने और पैकेजिंग में बदलाव करने जैसे कदम उठाए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों के लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में ऐसे दावे नहीं किए जा सकते, जिनसे उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति, गुणवत्ता, पोषण संबंधी विशेषताओं या अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर गलत धारणा बन सकती है। कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना है।

    मोंडेलेज इंडिया फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के कुछ उत्पादों के संबंध में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े तुलनात्मक दावों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी। नोटिस के बाद कंपनी ने संबंधित दावों और विज्ञापन सामग्री को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से हटाने की कार्रवाई की। इसके साथ ही नियमों के अनुरूप आवश्यक संशोधन भी किए गए।

    एक अन्य मामले में सैपियंस लैब्स को भी भ्रामक दावे से संबंधित नोटिस दिया गया था। इसके बाद कंपनी ने नियामक को अपना जवाब सौंपा और उत्पाद से जुड़े संबंधित दावों तथा प्रचार सामग्री को वापस लेने की जानकारी दी। इससे यह संकेत मिलता है कि नोटिस के बाद संबंधित कंपनियां अपने विपणन दावों की समीक्षा कर रही हैं।

    विची एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक मामले में विपणन किए जा रहे उत्पाद और मिसेज जानकी जय बारोट यानी जेजे फूड्स द्वारा प्रसंस्कृत एवं पैक किए गए उत्पाद के व्यापारिक नाम को लेकर आपत्ति सामने आई। नियामकीय हस्तक्षेप के बाद संबंधित ऑनलाइन उत्पाद लिस्टिंग को हटाने की कार्रवाई की गई।

    एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के मामले में उत्पाद के नाम में 100 परसेंट प्योर कोकोनट ऑयल शब्दावली के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया। नियामक के अनुसार नाम में 100 परसेंट शब्द का उपयोग खाद्य सुरक्षा कानून, विज्ञापन एवं दावे संबंधी नियमों और इस तरह की शब्दावली के इस्तेमाल को रोकने संबंधी परामर्श के अनुरूप नहीं था।

    नोटिस मिलने के बाद एमवे इंडिया ने अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की। कंपनी ने बताया कि उसने अपने उत्पाद की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री से 100 परसेंट शब्द स्वेच्छा से हटा दिया है। कंपनी ने पुराने स्टॉक की बिक्री रोकने और संशोधित पैकेजिंग के साथ नए उत्पाद बाजार में उपलब्ध कराने की भी पुष्टि की।

    एफएसएसएआई की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाली भाषा पर नियामकीय निगरानी बढ़ाई जा रही है। खासतौर पर स्वास्थ्य, पोषण, गुणवत्ता और उत्पाद की विशेषताओं से जुड़े दावों को लेकर कंपनियों को अधिक सावधानी बरतनी होगी।

    नियामक का जोर इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदने से पहले लेबल और प्रचार सामग्री के माध्यम से स्पष्ट तथा तथ्यात्मक जानकारी मिले। भ्रामक दावों से उपभोक्ता की खरीद संबंधी धारणा प्रभावित हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    एफएसएसएआई ने संकेत दिया है कि उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और खाद्य बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भ्रामक दावों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। इससे खाद्य कंपनियों के लिए पैकेजिंग, विज्ञापन और ऑनलाइन बिक्री सामग्री को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

  • राखी बाजार में बढ़ी त्योहारी खरीदारी, दिल्ली समेत देशभर में स्वदेशी और थीम आधारित राखियों की मांग में तेजी

    राखी बाजार में बढ़ी त्योहारी खरीदारी, दिल्ली समेत देशभर में स्वदेशी और थीम आधारित राखियों की मांग में तेजी

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन से पहले देशभर के बाजारों में त्योहारी खरीदारी तेज हो गई है और कारोबारियों को इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर बिक्री की उम्मीद है। व्यापारिक संगठनों के आकलन के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है। इसमें अकेले राखियों की बिक्री करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

    त्योहार में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में राखियों, मिठाइयों, कपड़ों, उपहारों और अन्य त्योहारी सामान की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले अंतिम दिनों में बिक्री की रफ्तार और बढ़ेगी।

    दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में रक्षाबंधन से जुड़ी खरीदारी का असर दिखाई दे रहा है। स्थानीय बाजारों के अलावा छोटे और मध्यम व्यापारियों को भी त्योहार के कारण कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।

    अनुमान के मुताबिक, देशभर में सिर्फ राखियों का कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। दिल्ली में राखियों की बिक्री लगभग चार हजार करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई गई है। राखियों के अलावा मिठाई, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुएं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य उपहारों की बिक्री को जोड़ने पर रक्षाबंधन से संबंधित कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

    इस वर्ष बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ अलग-अलग विषयों और संदेशों वाली राखियां भी दिखाई दे रही हैं। विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र गौरव और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाले संदेशों से जुड़ी राखियों की मांग को लेकर व्यापारिक क्षेत्र में उत्साह है।

    विकसित भारत राखी, मोदी गारंटी राखी, ब्रह्मोस राखी, नारी वंदन राखी, आत्मनिर्भर भारत राखी और वोकल फॉर लोकल राखी जैसे डिजाइन बाजार में उपलब्ध हैं। इसके अलावा भारत गौरव राखी, लखपति दीदी राखी, नमामि गंगे राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और अमृतकाल राखी भी ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

    बच्चों और युवाओं में ब्रह्मोस राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और विकसित भारत राखी को लेकर खास रुचि बताई जा रही है। वहीं महिलाओं के बीच नारी वंदन और लखपति दीदी जैसी थीम वाली राखियों को पसंद किए जाने की बात सामने आई है। इससे राखी बाजार में डिजाइन और संदेश आधारित उत्पादों की विविधता बढ़ी है।

    व्यापारिक क्षेत्र का कहना है कि स्वदेशी राखियों की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और कुटीर उद्योगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की बिक्री त्योहार के दौरान छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन रही है।

    रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख भारतीय त्योहार है, लेकिन इसके साथ जुड़ा बाजार भी लगातार विस्तृत हो रहा है। अब राखी के साथ उपहार, मिठाई, कपड़े और अन्य सामान की खरीदारी त्योहार के कारोबार को व्यापक बनाती है। इस बार बाजार में स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय स्तर पर तैयार सामान को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कारोबारी वर्ग को उम्मीद है कि रक्षाबंधन से पहले खरीदारी के अंतिम दौर में बाजारों में भीड़ और बिक्री दोनों बढ़ेंगी। यदि राखियों और अन्य त्योहारी वस्तुओं की मांग अनुमान के अनुरूप रहती है, तो इस वर्ष रक्षाबंधन का कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जा सकता है।

  • गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, सेंसेक्स 287 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.48 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में लौटी खरीदारी, सेंसेक्स 287 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.48 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू स्तर पर फार्मा तथा पीएसयू बैंक शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए।

    30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,656.09 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 116 अंकों यानी 0.48 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 24,335.55 के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले सोमवार के कारोबार में बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी।

    मंगलवार को सेंसेक्स 77,369.11 के पिछले बंद स्तर की तुलना में 73.61 अंक नीचे 77,295.49 पर खुला। शुरुआती कमजोरी के बाद सूचकांक ने तेजी पकड़ी और दिन के दौरान 297.28 अंक की बढ़त के साथ 77,666.39 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी भी 24,219.05 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 43.29 अंक की गिरावट के साथ 24,175.75 पर खुला। कारोबार के दौरान खरीदारी बढ़ने से इसमें सुधार आया और सूचकांक 115.5 अंक की तेजी के साथ 24,334.55 के इंट्रा-डे उच्च स्तर तक पहुंचा।

    बाजार की तेजी में फार्मा, हेल्थकेयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक में मजबूती दिखाई दी। इसके विपरीत निजी क्षेत्र के बैंक और मेटल से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप में 0.54 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.10 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की दिलचस्पी चुनिंदा बड़ी और मध्यम कंपनियों में बनी रही।

    निफ्टी 50 में अदाणी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, श्रीराम फाइनेंस, इंफोसिस और इटरनल प्रमुख तेजी वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, सिप्ला और ओएनजीसी कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे।

    बाजार की धारणा को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी समर्थन मिला। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं के मुकाबले अपेक्षाकृत कम सख्ती रहने की धारणा बनी, जिससे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में हालिया ऊंचाई से कुछ नरमी आई। ऊर्जा लागत में राहत ने घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनाया।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों ने हेल्थकेयर और वित्तीय क्षेत्र जैसे अपेक्षाकृत रक्षात्मक तथा घरेलू मांग पर आधारित क्षेत्रों की ओर रुख किया। घरेलू बॉन्ड बाजार में स्थिरता के संकेतों ने भी बाजार धारणा को सहारा दिया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी बनी हुई है।

    बाजार participants अब महंगाई के आगामी आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख अधिकारियों की टिप्पणियों पर नजर रख रहे हैं। इन संकेतों से आगे ब्याज दरों की दिशा और वैश्विक निवेश धारणा को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

    निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार में सावधानी बनी रह सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में संभावित बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में मंगलवार की तेजी ने निवेशकों को राहत जरूर दी, लेकिन आगे के कारोबार में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • सोने की कीमतों में सीमित दायरे में तेजी, एमसीएक्स पर 1.63 लाख रुपये के ऊपर कारोबार, चांदी में 542 रुपये की गिरावट

    सोने की कीमतों में सीमित दायरे में तेजी, एमसीएक्स पर 1.63 लाख रुपये के ऊपर कारोबार, चांदी में 542 रुपये की गिरावट

    नई दिल्ली ।घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सोने में सीमित दायरे में कारोबार के बीच मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमत में गिरावट रही। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों की नजर कीमती धातुओं के बाजार पर बनी हुई है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दोपहर 12 बजे अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 247 रुपये यानी 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,63,476 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने ने 1,62,564 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,63,617 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर दर्ज किया।

    सोने की कीमत में दिन के दौरान ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। इससे बाजार में फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार का संकेत मिला। मंगलवार सुबह सोना पिछले कारोबारी सत्र के 1,63,229 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव की तुलना में मामूली कमजोरी के साथ 1,63,015 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला था। बाद में खरीदारी बढ़ने के साथ कीमत में सुधार हुआ और यह 1.63 लाख रुपये के स्तर को पार कर गया।

    दूसरी ओर चांदी के वायदा भाव में कमजोरी रही। सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी दोपहर तक 542 रुपये यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,43,678 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। दिन के कारोबार में चांदी ने 2,44,420 रुपये प्रति किलोग्राम का ऊपरी स्तर और 2,42,299 रुपये प्रति किलोग्राम का निचला स्तर छुआ।

    चांदी की शुरुआत भी पिछले बंद भाव की तुलना में कमजोर रही। इसका पिछला बंद भाव 2,44,220 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि मंगलवार सुबह कारोबार की शुरुआत 2,42,299 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर हुई। इसके बाद कीमत में कुछ सुधार आया, लेकिन यह पिछले बंद स्तर से नीचे बनी रही।

    बाजार में सोने की मजबूती के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शन के खतरे ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत मजबूत बनी हुई थी। कॉमेक्स पर सोना 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,708 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय कीमत का यह स्तर पिछले करीब तीन महीनों में सबसे ऊंचे स्तर के आसपास रहा। दूसरी ओर चांदी लगभग स्थिर रही और करीब 68 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखाई दी।

    कीमती धातुओं के बाजार में आगे की दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा से प्रभावित हो सकती है। सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिलता रहा तो इसकी कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। वहीं चांदी की चाल पर औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजारों के संकेतों का भी असर पड़ सकता है।

    फिलहाल घरेलू बाजार की तस्वीर में सोना बढ़त के साथ और चांदी गिरावट के साथ कारोबार कर रही है। निवेशकों के लिए आने वाले कारोबारी सत्रों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा और ईरान से जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण संकेतक बने रह सकते हैं।

  • कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    कर्नाटक में ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, Amazon, Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में जहरीले धतूरा फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने Amazon, Instamart और BigBasket से जुड़े फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज को मानव इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराए जाने की शिकायतों और जांच के बाद की गई।

    धतूरा एक जहरीला पौधा माना जाता है और इसके फल तथा बीज का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी वजह से खाद्य पदार्थों की श्रेणी में इसकी बिक्री और वितरण को लेकर विभाग ने गंभीर आपत्ति जताई। जांच के दौरान अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरा के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित पाए गए।

    जांच में कुछ ऐसे पैकेट भी सामने आए जिन पर फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। विभाग के अनुसार, धतूरा जैसे जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के रूप में स्टोर करना, बेचना या वितरित करना स्वीकार्य नहीं है। जांच के दौरान ऐसे उत्पादों के गोदामों में रखे होने की जानकारी भी सामने आई, जिससे खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को विभाग के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कंपनियों से ऑनलाइन बिक्री, उत्पादों की उपलब्धता और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज मांगे गए।

    Amazon की ओर से इस मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया गया। वहीं Instamart ने अपने स्तर पर की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। BigBasket ने बताया कि उसने धतूरा के फलों की ऑनलाइन बिक्री रोक दी है। कंपनी की ओर से भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग को स्पष्ट करने की बात भी कही गई।

    BigBasket ने यह भी कहा कि ऐसे उत्पादों पर मानव उपभोग के लिए नहीं होने की स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी। हालांकि, नियामक विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। विभाग का कहना है कि जहरीले उत्पादों को खाद्य पदार्थ के तौर पर उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से स्वीकार्य नहीं है।

    कार्रवाई के तहत Amazon, Instamart और BigBasket के संबंधित फूड लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। लाइसेंस की बहाली आगे की सुनवाई और कंपनियों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही हो सकेगी। इस दौरान कंपनियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।

    विभाग ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से धतूरा के फल और बीज की उन सभी लिस्टिंग और विज्ञापनों को तत्काल हटाने या निलंबित करने का निर्देश दिया है, जिनमें इन्हें खाद्य पदार्थ या मानव उपभोग के लिए उपलब्ध बताया गया हो। साथ ही धतूरा उत्पादों की आपूर्ति करने वाले संबंधित विक्रेताओं और सप्लायरों के लाइसेंस तथा रजिस्ट्रेशन पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    इस कार्रवाई से ऑनलाइन खाद्य बिक्री में उत्पादों की जांच, सही लेबलिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की जिम्मेदारी एक बार फिर सामने आई है। विभाग की सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहरीले या मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थ खाद्य उत्पादों के रूप में उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।

  • दिल्ली में छोटे सैलेलाइट बनाएगी फिनलैंड की दिग्गज स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी

    दिल्ली में छोटे सैलेलाइट बनाएगी फिनलैंड की दिग्गज स्पेस इंटेलिजेंस कंपनी


    नई दिल्ली।
    फिनलैंड (Finland) की अंतरिक्ष-आधारित खुफिया तकनीक (Space-based Intelligence Technology) की वैश्विक कंपनी आईसीईवाईई (ICEYE) ने भारत (India) में अपना कामकाज शुरू करने का एलान किया है। यह कंपनी देश में छोटे उपग्रहों के निर्माण के लिए एक स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने की संभावनाएं तलाश रही है। ये उपग्रह रक्षा, चौकसी और पर्यावरणीय निगरानी में इस्तेमाल किए जाएंगे।

    आईसीईवाईई इंडिया नई दिल्ली से संचालित होगी। यह कंपनी की भारत जैसे अहम रक्षा और अंतरिक्ष बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी के सैटेलाइट का समूह का इस्तेमाल पहले से ही रक्षा, खुफिया, बीमा और आपातकालीन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में हो रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध समेत दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कंपनी की तकनीक की मांग भी बढ़ी है।


    कंपनी के सीईओ ने क्या कहा?

    कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक राफल मोड्रजेव्स्की ने कहा कि कंपनी भारत में वास्तविक इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि आईसीईवाईई भारत सरकार और स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर देश की संप्रभु खुफिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उत्साहित है। आईसीईवाईई की प्राथमिकता भारतीय रक्षा व खुफिया ग्राहकों को उन्नत खुफिया हल मुहैया कराना होगी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूती बढ़ेगी। कंपनी भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है।

    इसमें लॉन्च प्रदाता, इलेक्ट्रॉनिक्स व कंपोनेंट निर्माता और तकनीकी साझेदार शामिल हैं। कंपनी का स्थानीय औद्योगिक क्षमता विकसित करने का मॉडल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से मेल खाता है। इसके पास दुनिया का सबसे उन्नत सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) सैटेलाइट समूह है। दुनिया भर में कंपनी के 1,000 से अधिक कर्मचारी हैं इस साल कंपनी का राजस्व लगभग 280 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,680 करोड़ रुपये) को पार कर गया है।

  • SIP Rule-40 से 40 साल तक 2 करोड़ का लक्ष्य, 21 साल की उम्र में कितनी मासिक SIP से शुरू करें निवेश

    SIP Rule-40 से 40 साल तक 2 करोड़ का लक्ष्य, 21 साल की उम्र में कितनी मासिक SIP से शुरू करें निवेश

    नई दिल्ली । कम उम्र में निवेश शुरू करने वालों के लिए SIP Rule-40 एक ऐसी निवेश रणनीति के तौर पर चर्चा में है, जिसमें नियमित निवेश के साथ हर साल SIP की राशि बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। इस तरीके में 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का फंड तैयार करने का लक्ष्य रखा जाता है। इसके लिए गणना में औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न और हर वर्ष SIP में 10 फीसदी बढ़ोतरी को आधार माना गया है।

    SIP यानी Systematic Investment Plan के जरिए म्यूचुअल फंड में एक तय राशि नियमित अंतराल पर निवेश की जाती है। Rule-40 की अवधारणा में शुरुआत में एक निश्चित मासिक रकम से निवेश शुरू किया जाता है और इसके बाद हर साल SIP की राशि 10 फीसदी बढ़ाई जाती है। इसका उद्देश्य बढ़ती आय के साथ निवेश की क्षमता बढ़ाना और लंबे समय में कंपाउंडिंग का लाभ लेना है।

    इस रणनीति में निवेश शुरू करने की उम्र बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उदाहरण के तौर पर 40 साल की उम्र तक 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल करने के लिए 21 साल की उम्र में शुरुआत करने पर करीब 11,796 रुपये की मासिक SIP की जरूरत बताई गई है। अगर शुरुआत 22 साल की उम्र में होती है तो यह राशि करीब 13,875 रुपये प्रति माह हो जाती है।

    इसी तरह 23 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर करीब 16,370 रुपये, 24 साल की उम्र में करीब 19,379 रुपये और 25 साल की उम्र में लगभग 23,031 रुपये की शुरुआती मासिक SIP की जरूरत पड़ सकती है। इससे स्पष्ट होता है कि निवेश शुरू करने में देरी होने पर शुरुआती निवेश राशि बढ़ती जाती है।

    21 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले व्यक्ति के मामले में इस गणना के अनुसार करीब 19 वर्षों तक निवेश जारी रखना होगा। 10 फीसदी सालाना स्टेप-अप के साथ कुल निवेश लगभग 72.42 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। 12 फीसदी औसत अनुमानित रिटर्न के आधार पर यह राशि बढ़कर करीब 2 करोड़ रुपये के लक्ष्य तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस गणना में लगभग 1.28 करोड़ रुपये का हिस्सा अनुमानित रिटर्न से जुड़ा हो सकता है।

    इस रणनीति का फायदा खासतौर पर उन युवाओं को हो सकता है जो अपने करियर की शुरुआत में हैं और भविष्य में आय बढ़ने की संभावना रखते हैं। शुरुआत में आय सीमित होने के कारण बड़ी रकम निवेश करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन छोटी SIP से शुरुआत करके हर वर्ष राशि बढ़ाने से निवेश का आकार धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।

    हालांकि, 2 करोड़ रुपये का लक्ष्य निश्चित या गारंटीड रकम नहीं है। 12 फीसदी सालाना रिटर्न केवल अनुमान के तौर पर लिया गया है और बाजार आधारित निवेश में वास्तविक रिटर्न समय के साथ बदल सकता है। इसलिए निवेशक को अपनी आय, खर्च, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।

    SIP Rule-40 का मूल विचार जल्द शुरुआत, नियमित निवेश और बढ़ती आय के साथ निवेश बढ़ाने पर आधारित है। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने और बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद अनुशासन कायम रखने से कंपाउंडिंग को अधिक समय मिल सकता है। यही कारण है कि निवेश की शुरुआत की उम्र इस तरह की लंबी अवधि की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • Stock Market Today: 25 अगस्त को बाजार में दिख सकती है हलचल, निवेशकों की नजर इन बड़े ट्रिगर्स पर

    Stock Market Today: 25 अगस्त को बाजार में दिख सकती है हलचल, निवेशकों की नजर इन बड़े ट्रिगर्स पर


    नई दिल्ली। 25 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहने वाली है। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए हर छोटी बड़ी खबर महत्वपूर्ण हो जाती है। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें रुपये की चाल और कंपनियों से जुड़ी खबरें अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में मंगलवार के कारोबार में भी बाजार में तेजी और दबाव दोनों देखने को मिल सकते हैं।

    बाजार की शुरुआत पर सबसे पहले वैश्विक संकेतों का असर दिखाई दे सकता है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों की चाल से भारतीय निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित होता है। अगर विदेशी बाजारों में मजबूती बनी रहती है तो घरेलू बाजार को भी शुरुआती सपोर्ट मिल सकता है। वहीं किसी बड़े ग्लोबल इवेंट या आर्थिक संकेत के कारण विदेशी बाजारों में कमजोरी आती है तो भारतीय बाजार पर भी दबाव बन सकता है।

    निवेशकों की नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की गतिविधियों पर भी रहेगी। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर सकती है जबकि लगातार बिकवाली से बाजार में दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को गिरावट के दौरान सहारा दे सकती है। इसलिए मंगलवार को बाजार की दिशा समझने के लिए इन आंकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के प्रदर्शन पर भी बाजार की चाल काफी हद तक निर्भर रह सकती है। इसके अलावा आईटी ऑटो फार्मा मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में होने वाली खरीदारी या बिकवाली से प्रमुख सूचकांकों पर असर पड़ सकता है। किसी बड़ी कंपनी से जुड़ी खबर या कारोबारी अपडेट आने पर उसके शेयर में तेज हलचल देखने को मिल सकती है और इसका प्रभाव संबंधित सेक्टर के दूसरे शेयरों पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था और कुछ कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है। रुपये की डॉलर के मुकाबले चाल भी बाजार के लिए अहम रहेगी।

    तकनीकी स्तर पर निवेशक निफ्टी और सेंसेक्स में महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रख सकते हैं। अगर खरीदारी का दबाव मजबूत रहता है तो बाजार ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ सकता है जबकि मुनाफावसूली बढ़ने पर प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे समय में बिना पूरी जानकारी के तेजी से किसी शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है।

    कुल मिलाकर 25 अगस्त का कारोबारी सत्र घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच उतार चढ़ाव वाला रह सकता है। निवेशकों को बाजार में अचानक आने वाली तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। खासकर शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन और स्टॉप लॉस का ध्यान रखना जरूरी है। शेयर बाजार में रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है इसलिए निवेश का फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना बेहतर है।

  • प्याज महंगा हुआ तो सरकार ने बढ़ाई सप्लाई, बफर स्टॉक खोला, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से ढुलाई शुरू

    प्याज महंगा हुआ तो सरकार ने बढ़ाई सप्लाई, बफर स्टॉक खोला, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से ढुलाई शुरू


    नई दिल्ली। प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। नासिक से देश के प्रमुख खपत केंद्रों तक प्याज की ढुलाई शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही बफर स्टॉक से भी नियंत्रित मात्रा में प्याज बाजार में उतारा जा रहा है। सरकार का मकसद पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अचानक होने वाली तेजी को रोकना है।

    अगस्त-सितंबर में बढ़ती है प्याज की मांग

    सरकार के मुताबिक, अगस्त और सितंबर में प्याज की कीमतों में मौसमी तेजी आमतौर पर देखी जाती है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के अलावा मौसम और सप्लाई-चेन से जुड़ी दिक्कतों का भी कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में बाजार में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए पहले से कदम उठाए जा रहे हैं।

    पहले चरण में 5 बड़े शहरों पर फोकस

    शुरुआती चरण में सरकार ने पांच बड़े खपत केंद्रों को चुना है। इनमें चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी शामिल हैं। नासिक से इन शहरों तक प्याज पहुंचाया जाएगा और मांग के अनुसार बाजार में इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

    सरकार के अनुसार, यदि किसी अन्य शहर में भी कीमत या सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो उसे भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

    देश में प्याज की कमी नहीं

    सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों की घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त प्याज उपलब्ध है। वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 307.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन के लगभग बराबर है।

    ऐसे में मौजूदा स्थिति को बड़े सप्लाई संकट के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। सरकार का फोकस बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने पर है।

    बफर स्टॉक से भी प्याज बाजार में उतारा

    बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की नियंत्रित मात्रा में रिलीज शुरू कर दी गई है। जरूरत के हिसाब से आगे भी इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

    प्याज की ढुलाई में रेलवे की ‘कांदा एक्सप्रेस’ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार के मुताबिक, 2025-26 में इसके जरिए करीब 88 हजार मीट्रिक टन प्याज देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया गया।

    86 रेलवे रैक से 16 शहरों तक पहुंचा प्याज

    रेलवे के 86 रैक के जरिए प्याज को देश के 16 बड़े शहरों तक पहुंचाया गया है। सरकार का कहना है कि बाजार की स्थिति और मांग के अनुसार आगे भी प्याज की ढुलाई और बफर स्टॉक से रिलीज का दायरा बढ़ाया जाएगा।

    नासिक से बड़े खपत केंद्रों तक सप्लाई बढ़ाने और बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने से आने वाले दिनों में उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। अब इसका असर अलग-अलग शहरों की खुदरा कीमतों पर कितना पड़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।