Category: Economy

  • एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ में निवेश के लिए सोमवार को आखिरी मौका है। सब्सक्रिप्शन के अंतिम दिन इश्यू के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौजूदा स्थिति में जीएमपी 60 रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 59 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 3.31 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है।

    एनएसई के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कमजोरी देखने को मिली है। 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद जीएमपी करीब 218 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को जब आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, तब ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर या करीब 7.96 प्रतिशत था।

    अब अंतिम दिन तक जीएमपी घटकर 59 रुपये रह गया है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधिकारिक बाजार संकेतक नहीं माना जाता है। यह आईपीओ के इश्यू प्राइस से ऊपर अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। इसलिए जीएमपी का मौजूदा स्तर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।

    एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। इस आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी। ऐसे में आईपीओ के जरिए कंपनी के कारोबार में सीधे नई पूंजी का प्रवेश नहीं होगा।

    निवेशकों के बीच एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा है। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से कंपनी की आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। समीक्षा अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट है।

    आईपीओ के अंतिम दिन जीएमपी में आई कमी और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में दर्ज गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। इश्यू की अंतिम स्थिति और आगे शेयर की बाजार में लिस्टिंग का प्रदर्शन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में भारत का चौथा क्लाउड रीजन शुरू किया, एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मिलेगा नया बल

    माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में भारत का चौथा क्लाउड रीजन शुरू किया, एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मिलेगा नया बल

    नई दिल्ली । माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में अपना चौथा क्लाउड रीजन लॉन्च किया है। ‘इंडिया साउथ सेंट्रल’ नाम से शुरू किया गया यह क्लाउड रीजन भारत में कंपनी की क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अवसंरचना क्षमता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही देश में माइक्रोसॉफ्ट की हाइपरस्केल क्लाउड मौजूदगी और मजबूत हुई है।

    हैदराबाद का नया क्लाउड रीजन माइक्रोसॉफ्ट के पुणे, चेन्नई और मुंबई स्थित मौजूदा क्लाउड रीजन से जुड़ गया है। कंपनी के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने और एंटरप्राइज स्तर पर एआई के इस्तेमाल में तेजी आने की संभावनाओं के बीच यह विस्तार किया गया है।

    यह लॉन्च भारत में माइक्रोसॉफ्ट के पहले घोषित 20.5 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के तहत देश में क्लाउड क्षमताओं, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और परिचालन विस्तार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

    क्लाउड रीजन के लॉन्च के दौरान माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंदोक ने भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को तेजी से आगे बढ़ने वाला चरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डेटा उत्पादक देशों में तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं की जरूरत और बढ़ सकती है।

    चंदोक के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत उत्पन्न करता है, जबकि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी केवल करीब 3 प्रतिशत है। उनके मुताबिक, डेटा उत्पादन और डेटा सेंटर क्षमता के बीच का यह अंतर भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की बड़ी संभावना को दर्शाता है।

    उन्होंने बताया कि भारत में मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता लगभग 2 गीगावाट है। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक यह क्षमता बढ़कर 12 से 14 गीगावाट के बीच पहुंच सकती है। इस विस्तार के पीछे डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती जरूरत को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    एआई के क्षेत्र में बदलाव अब केवल प्रयोग या शुरुआती इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनियां, सरकारी विभाग और विभिन्न संस्थान बड़े स्तर पर एआई आधारित अनुप्रयोगों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके कारण कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है।

    बढ़ती मांग के बीच पर्याप्त भौतिक और डिजिटल अवसंरचना तैयार करना बड़ी आवश्यकता बन गई है। एआई मॉडल और उनसे जुड़ी सेवाओं के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग संसाधन और क्लाउड क्षमता की जरूरत होती है।

    माइक्रोसॉफ्ट का हैदराबाद क्लाउड रीजन ऐसे समय शुरू हुआ है जब भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। नए क्लाउड रीजन से देश में स्थानीय स्तर पर क्लाउड सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और एआई आधारित तकनीकों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    चंदोक ने कहा कि जिस डिजिटल पैमाने पर भारत आगे बढ़ रहा है, उसके अनुरूप भौतिक अवसंरचना का विस्तार भी जरूरी है। उनके अनुसार, डिजिटल विकास की गति को बनाए रखने के लिए डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।

  • ESIC : वेतन गणना का फॉर्मूला बदला…., नई व्यवस्था में लाखों कर्मचारियों को फायदा

    ESIC : वेतन गणना का फॉर्मूला बदला…., नई व्यवस्था में लाखों कर्मचारियों को फायदा


    नई दिल्ली।
    कर्मचारियों के वेतन की गणना (Calculation Employees’ Salaries) को लेकर तस्वीर और साफ हो गई है। सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) के तहत लागू नई व्यवस्था में वेतन का बड़ा हिस्सा अलग-अलग भत्तों के नाम पर बाहर नहीं रखा जा सकेगा। अगर वेतन से बाहर रखी गई भत्तों की रकम कुल पारिश्रमिक के 50 फीसदी से अधिक है, तो 50 फीसदी से ऊपर की रकम को भी वेतन में जोड़कर माना जाएगा। इसका असर कर्मचारी राज्य बीमा यानी ईएसआई (Employees’ State Insurance- ESIC) के दायरे पर पड़ेगा।


    50 फीसदी से अधिक भत्ते की रकम तो वेतन में जुड़ेगी

    नई गणना का फायदा देश के लाखों कर्मचारियों को मिल सकता है। नई व्यवस्था के प्रभावी होने की स्थिति भी साफ हो गई है। ईएसआईसी के डीजी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि 21 नवंबर 2025 से ही सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 2(88) के तहत नई वेतन परिभाषा लागू हो गई है। जबकि इसे आठ मई 2026 को गजट जारी होने की तारीख से प्रभावी माना जाएगा। निगम ने इसको लेकर नियोक्ताओं को नई वेतन परिभाषा के आधार पर कर्मचारियों की ईएसआई कवरेज की गणना करने को कहा।


    नई परिभाषा से कैसे होगी गणना?

    मान लीजिए, किसी कर्मचारी को हर महीने 20 हजार रुपये मिलते हैं। उसमें मूल वेतन 8 हजार रुपये है। इसके अलावा मकान किराया और दूसरे भत्ते 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। इस तरह से कुल भुगतान 20 हजार रुपये हो गया। मतलब भत्ते के रूप में वेतन से बाहर भुगतान 12 हजार रुपये हैं। अब 20 हजार रुपये का आधा यानी 10 हजार रुपये है। यानी 10 हजार की सीमा से 2 हजार रुपये ज्यादा। नए वेतन परिभाषा के तहत यही अतिरिक्त 2 हजार रुपये का भत्ता भी वेतन में जोड़ा जाएगा। इस तरह ईएसआई की गणना के लिए वेतन सिर्फ 8 हजार रुपये नहीं माना जाएगा। उसमें अतिरिक्त 2 हजार रुपये जुड़ेंगे और 10 हजार रुपये वेतन माना जाएगा।

  • Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

    Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को करेगा। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23346.40 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर रहा। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.22 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह लगातार छठा सप्ताह रहा जब निफ्टी साप्ताहिक आधार पर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    अब 21 सितंबर से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी। सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें मानी जा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधि भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। ऐसे में 21 सितंबर के कारोबार में निवेशक विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली और DII की खरीदारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

    निफ्टी के तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विश्लेषणों में 23000 से 23100 के आसपास के क्षेत्र को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना गया है। वहीं 23600 से 23700 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि ये तकनीकी स्तर बाजार की दिशा की गारंटी नहीं देते और वास्तविक कारोबार वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के आधार पर बदल सकता है।

    इस सप्ताह NSE का IPO भी बाजार की चर्चा में रहेगा। NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त होना है। इसके बाद 24 सितंबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है। इस बड़े IPO से जुड़े आंकड़ों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी बाजार की नजर रहेगी।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों की स्थिति रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में 21 सितंबर को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझें। बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना अधिक उचित माना जाता है।

  • सोने के गहने खरीदना अब और महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा, 75 रुपए पर 18% GST भी अलग

    सोने के गहने खरीदना अब और महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा, 75 रुपए पर 18% GST भी अलग


    नई दिल्ली। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच आभूषण खरीदने वालों की लागत में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए प्रति आर्टिकल कर दी है। यानी प्रति आभूषण 30 रुपए की बढ़ोतरी हुई है और बेस शुल्क करीब 66.7% बढ़ गया है। नई दर 14 सितंबर से लागू हो चुकी है। हालांकि, चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपए प्रति आर्टिकल ही रखी गई है।

    खरीदार के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि 75 रुपए हॉलमार्किंग शुल्क ही अंतिम राशि नहीं है। BIS के नियमों के अनुसार इस फीस पर लागू टैक्स अलग से देना होता है। BIS की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में हॉलमार्किंग शुल्क पर 18% GST का उल्लेख है। इस हिसाब से 75 रुपए पर 18% GST जोड़ने के बाद प्रति आभूषण प्रभावी शुल्क 88.50 रुपए हो जाता है।

    वजन नहीं, आभूषण की संख्या से तय होती है फीस

    BIS के अनुसार हॉलमार्किंग शुल्क आभूषण के वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लिया जाता है। यानी आभूषण एक ग्राम का हो या उससे अधिक वजन का, शुल्क का आधार उसका वजन नहीं बल्कि एक आर्टिकल होना है।

    इसका सीधा असर हल्के आभूषण खरीदने वालों पर पड़ सकता है। कम वजन के आभूषणों में हॉलमार्किंग शुल्क प्रति ग्राम के हिसाब से तुलनात्मक रूप से ज्यादा बैठता है। त्योहारी सीजन में अंगूठी, नोज पिन, चेन या दूसरे हल्के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह अतिरिक्त लागत ज्यादा महसूस हो सकती है।

    ज्वेलर्स बोले- बढ़ा हुआ खर्च आखिरकार ग्राहक तक पहुंचता है

    कूचा महाजनी, चांदनी चौक स्थित ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल का कहना है कि हॉलमार्किंग चार्ज हो या किसी अन्य तरह का शुल्क और टैक्स, उसका भुगतान अंततः ग्राहक से ही लिया जाता है और संबंधित सरकारी विभाग में जमा कराया जाता है।

    उनके मुताबिक, एक तरफ पहले से कई तरह के टैक्स और शुल्क लागू हैं, वहीं अब हॉलमार्किंग की लागत भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कारोबार की लागत में होने वाली हर बढ़ोतरी किसी न किसी रूप में ग्राहक की जेब तक पहुंचती है।

    2021 में 256 जिलों से शुरू हुई थी अनिवार्य हॉलमार्किंग

    सोने के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था जून 2021 में 256 जिलों से शुरू की गई थी। इसके बाद अलग-अलग चरणों में इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया।

    मार्च 2026 में छठे चरण के तहत सात और जिले इसमें शामिल किए गए। इसके बाद अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे वाले जिलों की संख्या बढ़कर 380 हो गई। यानी बीते वर्षों में हॉलमार्किंग व्यवस्था का विस्तार हुआ है और अब प्रति आर्टिकल लगने वाली फीस में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है।

    इस बदलाव के बाद सोने के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को आभूषण की कीमत के अलावा हॉलमार्किंग शुल्क और उस पर लागू GST की लागत भी ध्यान में रखनी होगी।

  • सिर्फ 250 रुपये से शुरू करें बच्चे के भविष्य की तैयारी, एनपीएस वात्सल्य में बढ़ी अभिभावकों की दिलचस्पी

    सिर्फ 250 रुपये से शुरू करें बच्चे के भविष्य की तैयारी, एनपीएस वात्सल्य में बढ़ी अभिभावकों की दिलचस्पी

    नई दिल्ली । बच्चों के भविष्य के लिए कम उम्र से निवेश शुरू करने की सोच रखने वाले अभिभावकों के बीच एनपीएस वात्सल्य योजना की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। अगस्त 2026 तक इस योजना से जुड़े खातों की संख्या चार लाख का आंकड़ा पार कर गई है। बढ़ते आंकड़े संकेत देते हैं कि माता-पिता अब बच्चों के लिए शुरुआती उम्र से ही लंबी अवधि का वित्तीय फंड तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं।

    आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक एनपीएस वात्सल्य से जुड़े बच्चों की संख्या करीब 2.15 लाख थी। मार्च 2025 में यह संख्या लगभग 1.07 लाख थी। यानी एक वर्ष के दौरान योजना से जुड़ने वाले खातों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    एनपीएस वात्सल्य के तहत माता-पिता या अभिभावक नाबालिग बच्चे के नाम पर खाता खोल सकते हैं। योजना में निवेश की शुरुआत केवल 250 रुपये से की जा सकती है, जबकि अधिकतम निवेश की कोई निर्धारित सीमा नहीं है। बच्चे के खाते में माता-पिता के अलावा रिश्तेदार और मित्र भी राशि जमा कर सकते हैं।

    इस योजना का उद्देश्य कम उम्र से बच्चों के लिए लंबी अवधि का निवेश कोष तैयार करना और उनमें वित्तीय अनुशासन की आदत विकसित करना है। उम्र बढ़ने के साथ लंबे समय तक निवेश जारी रहने से फंड तैयार करने की संभावना बढ़ती है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो एनपीएस वात्सल्य में 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इस वर्ग के बच्चे कुल खाताधारकों का करीब 36.9 प्रतिशत हैं। इसके बाद 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 31.6 प्रतिशत है।

    वहीं 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत और 0 से 4 वर्ष के बच्चों की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत है। इस तरह 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कुल खाताधारकों में लगभग 68.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों की शुरुआती उम्र से ही निवेश शुरू कर रहे हैं।

    एनपीएस वात्सल्य बाजार से जुड़ी निवेश योजना है। इसमें जमा राशि को विभिन्न निवेश साधनों में लगाया जाता है और अलग-अलग पेंशन फंड अपनी निवेश रणनीति के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराते हैं। चुने गए विकल्प के आधार पर इक्विटी में निवेश की हिस्सेदारी काफी अधिक हो सकती है।

    बाजार आधारित निवेश होने के कारण इसमें लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है, लेकिन निवेश का प्रदर्शन बाजार की स्थिति और चुनी गई निवेश रणनीति पर निर्भर करता है। इसलिए इसे निश्चित रिटर्न वाली बचत योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    योजना में कुछ परिस्थितियों में आंशिक निकासी की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के तीन वर्ष पूरे होने के बाद जमा मूल राशि का 25 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है। इसका उपयोग शिक्षा, चिकित्सा उपचार और निर्धारित विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है। इस सीमा में निवेश से मिलने वाला रिटर्न शामिल नहीं होता।

    बच्चे के 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी खाते को निर्धारित नियमों के तहत आगे जारी रखा जा सकता है और इसे 21 वर्ष की आयु तक बनाए रखने का प्रावधान है। इसके बाद खाते को सामान्य एनपीएस खाते में बदलने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    एनपीएस वात्सल्य को अन्य बचत और निवेश विकल्पों के साथ समझना जरूरी है। पीपीएफ अपेक्षाकृत सुरक्षित और सरकार समर्थित बचत विकल्प है, जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश और निकासी को लेकर अलग सुविधाएं होती हैं। एनपीएस वात्सल्य का मुख्य जोर लंबी अवधि के निवेश और भविष्य के लिए वित्तीय अनुशासन पर है।

    कम शुरुआती निवेश, लंबी अवधि और बाजार आधारित वृद्धि की संभावना के कारण एनपीएस वात्सल्य बच्चों के लिए वित्तीय योजना बनाने वाले अभिभावकों के बीच एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। हालांकि निवेश से पहले जोखिम, अवधि, निकासी नियम और उपलब्ध विकल्पों को समझना जरूरी है।

  • CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    नई दिल्ली । केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में वैल्यूअर और अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और टैक्स रिकवरी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। संशोधित नियमों के कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने गए हैं, जबकि अन्य बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किए गए हैं।

    इनकम टैक्स अधिनियम, 2026 में चौथे संशोधन के तहत वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रक्रियाओं को संशोधित किया गया है। इसके तहत मौजूदा फॉर्म में भी जरूरी सुधार किए गए हैं, ताकि रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सके।

    नए प्रावधानों के तहत वैल्यूअर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को Form-169 में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी और संबंधित पेशेवर अनुभव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए वैल्यूएशन का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

    इस बदलाव का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की योग्यता और अनुभव से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से दर्ज करना है। इससे वैल्यूअर के पेशेवर रिकॉर्ड और उनके द्वारा किए गए वैल्यूएशन से संबंधित विवरण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

    इसी तरह टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए Form-171 पेश किया गया है। इस फॉर्म में आवेदक को अपनी शैक्षणिक योग्यता और जरूरी प्रमाणपत्रों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा यदि आवेदक से जुड़ी कोई अयोग्यता या डिस्क्वालिफिकेशन है, तो उसका विवरण भी देना आवश्यक होगा।

    इनकम टैक्स नियमों में किए गए बदलावों का एक प्रमुख हिस्सा टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया से जुड़ा है। नए प्रावधानों के तहत प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। कंप्लायंस से संबंधित समयसीमा में विस्तार से संबंधित करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

    समयसीमा बढ़ाए जाने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और अन्य संबंधित टैक्सपेयर्स को अंतिम समय में होने वाली जल्दबाजी से राहत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    CBDT ने टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत इस नियम से जुड़े कई प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

    संशोधन के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर किया गया है। पहले जिन प्रक्रियाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, उनकी समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।

    इन बदलावों के साथ इनकम टैक्स नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन, अनुपालन और टैक्स रिकवरी से जुड़ी प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया है। नए फॉर्म और विस्तारित समयसीमा का सीधा संबंध संबंधित पेशेवरों और करदाताओं की प्रक्रियात्मक

  • टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद… कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा ट्रस्ट

    टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद… कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा ट्रस्ट


    नई दिल्ली।
    टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) (Tata Education and Development Trust – TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने साफ कर दिया है कि ट्रस्ट टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच एन चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) की दोबारा नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद से जुड़े किसी भी कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा। टीईडीटी के कोष का अनुमान करीब 5,000 करोड़ रुपये बताया गया है। मेहली ने टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को ईमेल भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसकी प्रति टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा और टीईडीटी के दूसरे ट्रस्टी जेएन मिस्त्री को भी भेजी गई है।

    मेहली ने कहा कि ट्रस्टी, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहा मुकदमा पिछले 150 वर्षों में अभूतपूर्व है। उन्होंने विवाद में शामिल लोगों के अनुभव या रवैये पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए टीईडीटी के रुख को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि टीईडीटी टाटा संस का शेयरधारक नहीं है और इसलिए इन विवादों से अलग है।


    क्या अभी टीईडीटी का पैसा इस विवाद में खर्च हो रहा है?

    मेहली मिस्त्री के ईमेल में यह नहीं कहा गया है कि टीईडीटी का पैसा फिलहाल इस विवाद से जुड़े कानूनी खर्च में इस्तेमाल किया जा रहा है। ईमेल में ऐसा भी नहीं कहा गया है कि इस तरह के खर्च का कोई प्रस्ताव सामने आया है। उनकी आपत्ति इस आशंका पर आधारित है कि टीईडीटी से भविष्य में ऐसे कानूनी खर्च उठाने को कहा जा सकता है। मेहली ने मांग की है कि उनका ईमेल 20 नवंबर 2026 को होने वाली टीईडीटी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की अगली बैठक में रखा जाए और रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।


    चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

    चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इसके बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। लेकिन 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने 4:1 के मतदान से चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।


    टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी इस विवाद में क्यों अहम?

    विवाद में टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी भी अहम है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी इक्विटी शेयर पूंजी है। दो प्रमुख ट्रस्टों में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास 27.98 फीसदी और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 फीसदी है। बाकी हिस्सेदारी अन्य संबद्ध टाटा ट्रस्ट्स के पास है। टीईडीटी, सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ा एक संबद्ध ट्रस्ट है, लेकिन मेहली ने स्पष्ट किया है कि टीईडीटी खुद टाटा संस का शेयरधारक नहीं है।


    क्या टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी अलग विवाद है?

    चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के मुद्दे के साथ टाटा संस के भविष्य के स्वामित्व को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर को कहा था कि उसने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है। ट्रस्ट्स ने कहा कि लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए और फैसला लेने से पहले सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच और समीक्षा होनी चाहिए। ट्रस्ट्स ने टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने की अपनी स्थिति दोहराई और उसकी धर्मार्थ बहुमत हिस्सेदारी की भूमिका का भी उल्लेख किया।

  • सब्सिडी का लाभ लेने वाले LPG ग्राहकों के लिए 1 अक्टूबर से बदलेगा ये नियम…

    सब्सिडी का लाभ लेने वाले LPG ग्राहकों के लिए 1 अक्टूबर से बदलेगा ये नियम…


    नई दिल्ली।
    घरेलू एलपीजी सिलेंडर (Domestic LPG cylinder) पर सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर है। दरअसल, 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी के साथ विनियमित खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) पर घरेलू LPG रिफिल बुक कराने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (Biometric Aadhaar Authentication- BAA) पूरा करना अनिवार्य होगा। अगर ऐसा नहीं कराया तो सब्सिडी का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है।


    क्या है इसका मकसद?

    बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण से यह सुनिश्चित होता है कि सब्सिडी वाली एलपीजी केवल वास्‍तविक और योग्‍य परिवारों तक पहुंचे। प्रत्‍येक कनेक्शन को आधार-प्रमाणित उपभोक्‍ता से जोड़ने से सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का कॉमर्शियल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डायवर्जन रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा, डुप्लीकेट और अयोग्य कनेक्शन हटते हैं। वहीं, सब्सिडी पहुंचाने का तरीका पारदर्शी और सही लोगों तक पहुंचने वाला बनता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्‍य किसी भी वास्‍तविक परिवार को एलपीजी से वंचित करना नहीं है और प्रत्‍येक योग्य उपभोक्‍ता इसे कई आसान तरीकों से पूरा कर सकते हैं।


    कितने लोग कर चुके बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 19 सितंबर तक देश के 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता यानी 89.9 प्रतिशत अपना बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा कर चुके हैं। इन उपभोक्ताओं को दोबारा प्रमाणीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें रिफिल पहले की तरह मिलता रहेगा।


    एक अक्टूबर से पहले करना जरूरी

    जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया है, वे एक अक्टूबर से पहले इसे पूरा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के समय भी पूरी की जा सकती है। डिलीवरी कर्मचारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के मोबाइल ऐप के माध्यम से मौके पर ही प्रमाणीकरण करा सकता है। इसके अलावा उपभोक्ता अपने एलपीजी वितरक की दुकान पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। उपभोक्ताओं के लिए घर बैठे मोबाइल ऐप से स्वयं ई-केवाईसी पूरा करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    इंडेन के ग्राहक इंडेनऑइलवन, भारत गैस के ग्राहक हेलोबीपीसीएल और एचपी गैस के ग्राहक एचपी पे ऐप के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। स्वयं ई-केवाईसी करने के संबंध में वीडियो ट्यूटोरियल पीएमयूवाई पोर्टल पर उपलब्ध है।

    जिन उपभोक्ताओं ने बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया है, उनके लिए प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद सब्सिडी के साथ खुदरा बिक्री मूल्य पर रिफिल बुकिंग शुरू हो जाएगी। हालांकि, जो उपभोक्ता बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराना चाहते या किसी कारण से इसे पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए भी एलपीजी प्राप्त करने का विकल्प रहेगा।


    LPG पर करीब ₹210 की सब्सिडी

    सरकार घरेलू LPG को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाए रखने के लिए वित्तीय सहायता भी दे रही है। सितंबर 2026 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू LPG सिलेंडर पर निहित सब्सिडी करीब ₹210 प्रति सिलेंडर बताई गई है।

  • रविवार को नहीं होगी शेयर बाजार में खरीद बिक्री जानिए NSE BSE बंद रहने की वजह और अगले सत्र की तैयारी

    रविवार को नहीं होगी शेयर बाजार में खरीद बिक्री जानिए NSE BSE बंद रहने की वजह और अगले सत्र की तैयारी


    नई दिल्ली। रविवार का दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सामान्य कारोबारी दिनों से अलग होता है। भारत में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर रविवार को नियमित इक्विटी ट्रेडिंग नहीं होती है। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने की योजना बना रहे निवेशकों को बाजार के अगले कारोबारी सत्र का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि रविवार को बाजार की छुट्टी होने के बावजूद निवेशकों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसी दौरान वे पिछले सप्ताह के कारोबार की समीक्षा करते हैं और आने वाले सप्ताह की रणनीति पर नजर डालते हैं।

    शेयर बाजार में सोमवार से शुक्रवार तक सामान्य कारोबारी गतिविधियां होती हैं जबकि शनिवार और रविवार को नियमित कारोबार बंद रहता है। इसका मतलब यह है कि रविवार को सामान्य तरीके से शेयरों की खरीद बिक्री नहीं की जा सकती। निवेशक अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर तैयार कर सकते हैं लेकिन उसकी वास्तविक प्रक्रिया बाजार खुलने के बाद ही संबंधित नियमों के अनुसार आगे बढ़ती है। इसलिए किसी भी ऑर्डर को लगाने से पहले उसके प्रकार और निष्पादन की स्थिति को समझना जरूरी है।

    रविवार को बाजार बंद रहने के दौरान निवेशकों के पास अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का अच्छा समय होता है। इस दौरान यह देखा जा सकता है कि सप्ताह के दौरान किन शेयरों में तेजी या गिरावट रही और उसके पीछे कौन से कारोबारी या आर्थिक कारण रहे। कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रबंधन से जुड़ी घोषणाएं सेक्टर से संबंधित खबरें और वैश्विक बाजारों के संकेत भी अगले कारोबारी सत्र के लिए बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    वैश्विक बाजारों पर नजर रखना भी सप्ताहांत में उपयोगी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों के फैसले कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और भू राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि किसी एक खबर के आधार पर अगले कारोबारी सत्र में बाजार किस दिशा में जाएगा इसका निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं है। बाजार में अचानक उतार चढ़ाव हो सकता है और अलग अलग शेयरों पर उसका असर भी अलग हो सकता है।

    रविवार को निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति पर भी विचार करना चाहिए। केवल बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार उसकी वित्तीय स्थिति और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और जोखिम निवेश के प्रकार तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।

    सप्ताहांत में निवेशक अपनी वॉचलिस्ट भी तैयार कर सकते हैं। जिन कंपनियों पर लंबे समय से नजर है उनके प्रदर्शन की तुलना की जा सकती है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि किसी शेयर की कीमत में बदलाव कंपनी के मूल कारोबार में आए बदलाव से जुड़ा है या केवल बाजार की सामान्य हलचल का हिस्सा है। इस तरह की तैयारी अगले कारोबारी सत्र में भावनाओं के बजाय जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

    शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए रविवार भले ही ट्रेडिंग का दिन नहीं है लेकिन यह तैयारी और समीक्षा का दिन जरूर हो सकता है। बाजार बंद होने के दौरान सही जानकारी जुटाना अपने जोखिम को समझना और निवेश के उद्देश्य को स्पष्ट रखना लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अगले कारोबारी दिन बाजार खुलने पर निवेशकों को अपने फैसले लेते समय ताजा बाजार संकेतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।