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  • TRAI ने बदले मोबाइल रिचार्ज के नियम, अब बिना डेटा वाले Voice-SMS प्लान के साथ मिलेंगे नए विकल्प

    TRAI ने बदले मोबाइल रिचार्ज के नियम, अब बिना डेटा वाले Voice-SMS प्लान के साथ मिलेंगे नए विकल्प

    नई दिल्ली ।मोबाइल रिचार्ज को लेकर ग्राहकों के लिए नया बदलाव सामने आया है। भारतीय दूरसंचार नियामक ने Telecom Consumers Protection (Thirteenth Amendment) Regulations, 2026 जारी किए हैं। नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे Special Tariff Vouchers यानी STV उपलब्ध कराने होंगे, जिनमें केवल Voice और SMS सेवाएं शामिल होंगी। इन प्लान में मोबाइल डेटा देना जरूरी नहीं होगा।

    नए प्रावधान के मुताबिक, ग्राहकों को 30 दिन और 30 दिन से कम अवधि वाले Voice-SMS-only रिचार्ज का विकल्प भी देना होगा। इन प्लान की वैलिडिटी संबंधित Voice, SMS और Data वाले STV की वैलिडिटी के अनुरूप रखी जाएगी। साथ ही, डेटा सेवा शामिल नहीं होने के कारण इन प्लान की कीमत में उचित कमी करनी होगी।

    इस बदलाव से उन मोबाइल ग्राहकों को अलग रिचार्ज विकल्प मिलने की उम्मीद है, जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत कम या बिल्कुल नहीं होती। ऐसे ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार केवल कॉल और SMS की सुविधा वाला प्लान चुन सकेंगे और डेटा के लिए भुगतान करने से बच सकेंगे।

    नियामक ने अपने फैसले में मौजूदा Voice-SMS-only प्लान की वैलिडिटी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। अभी ऐसे कई प्लान सीमित विकल्पों के साथ उपलब्ध हैं और कुछ मामलों में इनकी अवधि 80 या 84 दिन, जबकि कुछ की वैलिडिटी 336 या 365 दिन तक होती है। कम अवधि का रिचार्ज चाहने वाले ग्राहकों के लिए ऐसे विकल्प सीमित रहे हैं।

    नए नियमों में हर महीने एक निश्चित तारीख को रिन्यू होने वाले Voice-SMS-only प्लान की सुविधा का भी प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि ग्राहक हर महीने उसी तारीख को अपना प्लान रिन्यू करा सकेंगे। अगर किसी महीने में चुनी गई तारीख मौजूद नहीं होगी, तो रिन्यूअल उस महीने की आखिरी तारीख को किया जाएगा।

    इस व्यवस्था से रिचार्ज की तारीख को लेकर ग्राहकों को बार-बार अलग-अलग तारीख याद रखने की जरूरत कम होगी। खास तौर पर नियमित रूप से Voice और SMS का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।

    नए प्रावधान केवल कम अवधि वाले रिचार्ज तक सीमित नहीं हैं। टेलीकॉम कंपनियों को कम से कम एक लंबी वैलिडिटी वाला Voice-SMS-only STV भी उपलब्ध कराना होगा। इसकी वैलिडिटी संबंधित डेटा वाले प्लान की अवधि से जुड़ी होगी।

    हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद डेटा वाले मौजूदा बंडल प्लान बंद नहीं किए जाएंगे। ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार डेटा, Voice और SMS वाले मौजूदा प्लान या केवल Voice-SMS सुविधा वाले नए विकल्पों में से चुनाव कर सकेंगे।

    नए नियम 21 सितंबर 2026 को अधिसूचित किए गए हैं। इनके लागू होने की प्रक्रिया Official Gazette में प्रकाशन के 30 दिन बाद शुरू होगी। इसके बाद टेलीकॉम कंपनियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार Voice-SMS-only रिचार्ज उपलब्ध कराने होंगे।

    इस बदलाव के साथ मोबाइल रिचार्ज बाजार में ग्राहकों के लिए प्लान चुनने के विकल्प बढ़ेंगे। खासकर ऐसे उपभोक्ता, जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत नहीं है, वे अपनी जरूरत के मुताबिक केवल कॉल और SMS वाली सेवा का विकल्प ले सकेंगे।

  • जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ी, सस्ती कीमतों से वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ी

    जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ी, सस्ती कीमतों से वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ी

    नई दिल्ली ।जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो रिटेल बाजार में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 11 महीनों में देश में तीन करोड़ से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ। इस अवधि में वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही, जबकि इससे एक साल पहले समान अवधि में यह पांच प्रतिशत से भी कम थी।

    ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष साई गिरिधर के अनुसार, जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की वृद्धि दर करीब चार गुना तक बढ़ी है। उनके मुताबिक, वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ना यानी अफोर्डेबिलिटी मौजूदा समय में मांग को आगे बढ़ाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है।

    उनका कहना है कि जीएसटी में बदलाव के बाद छोटे कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों की ऑन-रोड लागत में स्थायी कमी आई। इन वाहन श्रेणियों पर बड़ी संख्या में उपभोक्ता निर्भर हैं। कीमतों में कमी का असर सिर्फ पहले से तय खरीद को आगे लाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बाजार में नए ग्राहकों की भागीदारी भी बढ़ी।

    साई गिरिधर के मुताबिक, इस बदलाव के बाद पहली बार वाहन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के साथ लंबे समय से खरीद टाल रहे ग्राहक भी दोबारा शोरूम पहुंचने लगे। इससे ऑटो बाजार में मांग का दायरा बढ़ा है और कई श्रेणियों में बिक्री के मजबूत आंकड़े सामने आए हैं।

    उन्होंने पिछले त्योहारी सीजन में दिखाई दी मजबूत मांग को भी इसी बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि यह तेजी केवल मौसमी गतिविधि नहीं रही। उनके अनुसार, मांग में आया बदलाव अब उद्योग के लिए नई सामान्य स्थिति का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

    ऑटो क्षेत्र में जीएसटी 2.0 के असर को उन्होंने मौसमी के बजाय संरचनात्मक बताया। इसी वजह से बीते एक साल में उद्योग की अलग-अलग वाहन श्रेणियों ने अपने मजबूत बिक्री महीनों का रिकॉर्ड दर्ज किया। इससे बाजार में उपभोक्ता मांग के विस्तार के संकेत मिले हैं।

    दोपहिया वाहनों को व्यापक जन-आधारित मांग का प्रमुख संकेतक माना जाता है। गिरिधर ने बताया कि इस श्रेणी ने 2018 के बाद का अपना सर्वोच्च स्तर फिर हासिल किया है। इससे बड़े उपभोक्ता वर्ग के बीच वाहन खरीदने की क्षमता और रुचि में सुधार का संकेत मिलता है।

    यात्री वाहन बाजार में भी बदलाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा कई वाहन श्रेणियों में ग्रामीण बाजारों की वृद्धि शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेज रही।

    उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को भी ऑटो क्षेत्र में बढ़ती खपत से जोड़ा और कहा कि किफायती वाहन उपलब्ध कराने पर जोर देने से मांग और विकास का नया चक्र शुरू हुआ है। हालांकि, उद्योग के सामने चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।

    वाहन निर्माता कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उद्योग के लिए बढ़ी हुई मांग को बनाए रखना कीमतों और लागत के संतुलन पर भी निर्भर करेगा।

    पिछले एक साल के अनुभव को लेकर उद्योग का कहना है कि वाहन बाजार में मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे प्रभावी कारकों में से एक साबित हुई है। जीएसटी 2.0 के बाद बढ़ी खरीद क्षमता ने ऑटो रिटेल को नई गति दी है।

  • यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को लेकर बड़ी सफाई, 96 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा शुल्क का असर

    यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को लेकर बड़ी सफाई, 96 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा शुल्क का असर

    नई दिल्ली ।यू पीआई भुगतान को लेकर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर और उस पर लगने वाले जीएसटी को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच स्थिति स्पष्ट की गई है। नई व्यवस्था के तहत छोटे व्यापारियों और कम राशि वाले अधिकांश यूपीआई भुगतान पर एमडीआर का बोझ नहीं पड़ेगा।

    जानकारी के अनुसार, 2,000 रुपये तक के सभी व्यक्ति-से-व्यापारी यानी पी2एम यूपीआई ट्रांजैक्शन पर पहले की तरह शून्य एमडीआर लागू रहेगा। ऐसे भुगतान पर एमडीआर नहीं होने के कारण उससे संबंधित जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2,000 रुपये तक के भुगतान यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि यूपीआई के माध्यम से होने वाले अधिकांश व्यापारी भुगतान एमडीआर और उससे जुड़े जीएसटी दायित्व से बाहर रहेंगे।

    छोटे व्यापारियों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी रखा गया है। जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां एक लाख रुपये तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। इसलिए इस श्रेणी के व्यापारियों पर एमडीआर के संबंध में जीएसटी लगने का सवाल भी नहीं उठता।

    एमडीआर का उद्देश्य यूपीआई भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच भुगतान प्रक्रिया की लागत को पूरा करना है। इसमें बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई एप प्रदाता जैसे भागीदार शामिल होते हैं। एमडीआर सरकार या यूपीआई व्यवस्था संचालित करने वाली संस्था द्वारा लगाया जाने वाला कोई कर नहीं है।

    नई व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है।

    कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर पांच रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में भुगतान लागत को सीमित और पूर्वानुमेय रखना है।

    एमडीआर पर जीएसटी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। यदि किसी व्यापारी को एमडीआर पर जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, तो वह अन्य इनपुट टैक्स की तरह इस राशि को अपनी जीएसटी देनदारी के विरुद्ध समायोजित कर सकता है। ऐसे में यह राशि सीधे तौर पर व्यापारी की अंतिम लागत नहीं बनती।

    दूसरी ओर, व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी पी2पी यूपीआई भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। इसमें भुगतान की राशि कितनी भी हो, पी2पी ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू नहीं होगा।

    इस व्यवस्था का असर मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पी2एम भुगतान पर पड़ेगा। वहीं कम राशि वाले भुगतान और एक लाख रुपये तक की मासिक यूपीआई प्राप्ति वाले छोटे व्यापारी इससे बाहर रहेंगे।

    कुल मिलाकर, यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन के बड़े हिस्से पर शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। 96 प्रतिशत से अधिक मर्चेंट ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये तक के होने के कारण अधिकांश डिजिटल भुगतान इस शुल्क व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे।

  • भारत की आर्थिक रफ्तार पर वैश्विक भरोसा बढ़ा, WEF ने 6.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताकर दिया बड़ा संकेत

    भारत की आर्थिक रफ्तार पर वैश्विक भरोसा बढ़ा, WEF ने 6.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताकर दिया बड़ा संकेत


    नई दिल्ली ।भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 6.7 प्रतिशत की अनुमानित GDP वृद्धि के साथ दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत विकास संभावनाओं वाले देशों में बना हुआ है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सितंबर 2026 की चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे घरेलू मांग को प्रमुख आधार बताया गया है।

    रिपोर्ट में अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, भारत समेत दुनिया के 10 प्रमुख क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से जुड़े 92 मुख्य अर्थशास्त्रियों की राय ली गई।

    भारत को लेकर विशेषज्ञों का भरोसा मई की तुलना में बढ़ा है। सितंबर की रिपोर्ट में 74 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों ने भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है। मई में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत था। वहीं 98 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि कम से कम मध्यम स्तर या उससे बेहतर रह सकती है।

    रिपोर्ट में रोजगार की स्थिति को लेकर अपेक्षाकृत स्थिर तस्वीर सामने आई है। करीब 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक वर्ष में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि 17 प्रतिशत विशेषज्ञ बेरोजगारी बढ़ने और 13 प्रतिशत इसमें कमी आने का अनुमान लगा रहे हैं।

    आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर जुलाई में 5.1 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 5 प्रतिशत रह गई। इसी दौरान श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई।

    रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच श्रम बाजार के अपेक्षाकृत स्थिर रहने का संकेत देते हैं। हालांकि रोजगार के नए अवसर पैदा करने की गति बनाए रखना अभी भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    महंगाई के मोर्चे पर भी विशेषज्ञों की चिंता मई के मुकाबले कम हुई है। अगले 12 महीनों को लेकर 55 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने मध्यम महंगाई की संभावना जताई है, जबकि 45 प्रतिशत ने उच्च महंगाई की आशंका व्यक्त की है। मई में 61 प्रतिशत विशेषज्ञ उच्च या बहुत उच्च महंगाई को लेकर चिंतित थे।

    अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.8 प्रतिशत रही। यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन 2 से 6 प्रतिशत के निर्धारित दायरे में बनी हुई है।

    मौद्रिक नीति को लेकर 67 प्रतिशत विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं 24 प्रतिशत विशेषज्ञों ने नीति के और सख्त होने की संभावना जताई है। अगस्त में RBI ने नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए तटस्थ रुख कायम रखा था।

    राजकोषीय नीति को लेकर भी 72 प्रतिशत विशेषज्ञों ने बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई। करीब 22 प्रतिशत ने कुछ नरम रुख अपनाए जाने की संभावना व्यक्त की।

    रिपोर्ट का सर्वेक्षण 20 अगस्त को पूरा हुआ था। इसके बाद 31 अगस्त को जारी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। इस प्रदर्शन के बाद कई वैश्विक संस्थानों ने भारत के विकास अनुमान में बदलाव किया है।

    मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।

  • 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य कैसे होगा हासिल, पीयूष गोयल ने बताया आर्थिक विकास का पूरा रोडमैप

    2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य कैसे होगा हासिल, पीयूष गोयल ने बताया आर्थिक विकास का पूरा रोडमैप

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता, इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और लक्षित समाज कल्याण योजनाओं के जरिए भारत 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को मजबूत आधार के रूप में विकसित करने पर सरकार का विशेष जोर है।

    गोयल ने एक आर्थिक सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश मजबूत आधार तैयार कर रहा है। उन्होंने इसके लिए आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विस्तार और लक्षित समाज कल्याण योजनाओं को प्रमुख एजेंडा बताया।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार व्यापार, विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के विस्तार से भारत वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है।

    गोयल ने वैश्विक स्तर पर साझेदारियों के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं देशों और लोगों का है, जो साझेदारी बनाने की क्षमता रखते हैं। उनके मुताबिक भारत ने विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है और विकसित तथा विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाया है।

    इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश को लेकर गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर हर साल करीब 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस निवेश में बंदरगाह, एक्सप्रेसवे, जलमार्ग और रेलवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।

    उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ कारोबार और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

    व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में कई देशों के साथ द्विपक्षीय और मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इन समझौतों से भारतीय घरेलू उद्योग और कारोबारियों के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के अवसर बढ़े हैं।

    गोयल के अनुसार 2014 से अब तक हुए व्यापार समझौतों के जरिए भारत को कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में हुए नौ मुक्त व्यापार समझौतों के परिणामस्वरूप भारतीय कारोबारियों को 38 देशों के बाजारों में तरजीही पहुंच मिली है।

    इन देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार करीब 60 ट्रिलियन डॉलर बताया गया है। इससे भारतीय कंपनियों और कारोबारियों के लिए निर्यात तथा अंतरराष्ट्रीय कारोबार के नए अवसर उपलब्ध होने की बात कही गई है।

    गोयल ने बताया कि सरकार फिलहाल आठ और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रही है। इन समझौतों के पूरा होने पर भारतीय कारोबारियों को लगभग 15 ट्रिलियन डॉलर के अतिरिक्त बाजारों में तरजीही पहुंच मिलने की संभावना है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिरता, इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, व्यापार विस्तार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को साथ लेकर भारत 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स 330 अंक टूटा और निफ्टी गिरा, जानिए बाजार में दबाव की बड़ी वजहें

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र की तेजी के बाद मंगलवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। आईटी और वित्तीय शेयरों में दबाव के चलते बाजार की चार दिन से जारी तेजी का सिलसिला भी टूट गया।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,529.08 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 में 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,329.00 के स्तर पर पहुंच गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.08 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार के बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज हुई।

    सेक्टरवार कारोबार की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा में गिरावट रही। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में तेजी दर्ज की गई।

    निफ्टी50 के शेयरों में कोल इंडिया सबसे अधिक बढ़ने वाले शेयरों में रहा। कंपनी के शेयर में 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। इसके अलावा इटरनल, इंडिगो, टाइटन और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

    दूसरी तरफ टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, नेस्ले इंडिया, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, ग्रासिम, ट्रेंट, आयशर मोटर्स और टीसीएस में दबाव रहा। इन शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर भी असर डाला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत दोबारा 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ विदेशी निवेश की निकासी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

    इन परिस्थितियों में महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंता बनी हुई है। रुपये की स्थिति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। मंगलवार को रुपया करीब 95.8 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास रहा।

    वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी रहा। इन अंतरराष्ट्रीय संकेतकों का असर घरेलू बाजार के निवेशकों की धारणा पर देखने को मिल रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के 23,300 से 23,350 के दायरे में रहने के कारण निवेशकों को अल्पकालिक तेजी का पीछा करने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने, मजबूत कंपनियों पर ध्यान देने और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही बाजार में बड़ी गिरावट की स्थिति में अवसरों का इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त नकदी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। मंगलवार की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख पर रहेगी।

  • NPS Swasthya में पेंशन के साथ हेल्थ कवर का फायदा, ₹1,000 से शुरुआत और इलाज के लिए 25% निकासी की सुविधा

    NPS Swasthya में पेंशन के साथ हेल्थ कवर का फायदा, ₹1,000 से शुरुआत और इलाज के लिए 25% निकासी की सुविधा


    नई दिल्ली ।
    रिटायरमेंट के लिए बचत करने वालों के साथ अब स्वास्थ्य सुरक्षा को जोड़ने की दिशा में NPS Swasthya योजना महत्वपूर्ण है। इस योजना के तहत पेंशन अकाउंट के साथ सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस कवर जोड़ा गया है। योजना के नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। इसमें निवेश और हेल्थ इंश्योरेंस को दो अलग हिस्सों के तौर पर रखा गया है।

    NPS Swasthya में शामिल होने के लिए NPS में प्रवेश की पात्रता रखने वाले नागरिक आवेदन कर सकते हैं। योजना में फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस का विकल्प है, जिसके तहत खाताधारक के साथ पति या पत्नी और दो बच्चों को कवर किया जा सकता है। माता-पिता को इस स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत शामिल नहीं किया गया है।

    इस योजना की शुरुआत के लिए तीन तरह की राशि जरूरी होगी। इसमें पहले साल का इंश्योरेंस प्रीमियम, ₹200 का सालाना मेंटेनेंस चार्ज और NPS Swasthya खाते में कम से कम ₹1,000 का निवेश शामिल है। शुरुआती निवेश के बाद न्यूनतम ₹10 का योगदान भी किया जा सकता है।

    योजना में 18 से 70 वर्ष की उम्र के लोग प्रवेश ले सकते हैं। इसे 85 वर्ष की उम्र तक रिन्यू कराया जा सकता है। जमा राशि का निवेश केंद्र सरकार की पेंशन योजना से जुड़े निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। इसके अलावा पेंशन फंड सालाना कॉर्पस पर 0.08 प्रतिशत तक चार्ज ले सकता है।

    हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए अलग-अलग डिडक्टिबल विकल्प दिए गए हैं। ₹10,000 के डिडक्टिबल पर ₹1 लाख का सम इंश्योर्ड, ₹50,000 डिडक्टिबल पर ₹5 लाख का कवर और ₹1 लाख डिडक्टिबल पर ₹10 लाख का सम इंश्योर्ड उपलब्ध है। वहीं ₹3 लाख के डिडक्टिबल विकल्प के साथ फैमिली फ्लोटर के तहत ₹30 लाख तक का बीमा कवर मिल सकता है।

    डिडक्टिबल उस शुरुआती राशि को कहा जाता है, जिसे बीमा क्लेम से पहले खाताधारक को खुद या किसी दूसरी पॉलिसी के जरिए वहन करना होता है। इसके बाद की पात्र अस्पताल संबंधी लागत बीमा कवर के दायरे में आती है।

    योजना में इलाज और अस्पताल से जुड़े खर्च के लिए कुल जमा योगदान का 25 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा भी दी गई है। इसके लिए किसी वेटिंग पीरियड की जरूरत नहीं बताई गई है और निकासी की संख्या पर भी कोई सीमा नहीं है। हालांकि निकाली जाने वाली राशि सीधे खाताधारक के बैंक खाते में देने के बजाय अस्पताल या हेल्थकेयर सेंटर को ट्रांसफर की जाएगी।

    इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। रिन्यूअल के समय खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने पर पेंशन फंड की ओर से 90, 60 और 30 दिन पहले अलर्ट भेजे जाएंगे। अगर ग्रेस पीरियड समाप्त होने तक प्रीमियम का भुगतान नहीं किया जाता है, तो हेल्थ इंश्योरेंस बंद हो जाएगा और NPS Swasthya खाता सामान्य ऑल सिटिजन मॉडल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

  • Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर

    Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। सोमवार को बाजार ने लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की सांस ली और सेंसेक्स तथा निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। सोमवार को सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23414.30 पर पहुंचा। बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेश से मिले सहारे के बीच देखने को मिली।

    अब 22 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सोमवार की तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से दबाव में आता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23200 से 23150 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 23500 के स्तर के आसपास बाजार को तत्काल प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि निफ्टी 23500 से ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में आगे की दिशा को लेकर नजर 23600 के आसपास के स्तर पर जा सकती है।

    सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की भी भूमिका रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हालिया बिकवाली के बाद खरीदारी की तरफ रुख किया। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 599 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

    हालांकि बाजार के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हाल के सप्ताहों में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण रही हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत भी उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वैश्विक मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंका और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    22 सितंबर को सेक्टर आधारित गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। सोमवार को फार्मा और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिली जबकि आईटी मेटल और पीएसयू बैंकिंग जैसे कुछ हिस्सों में दबाव रहा। बाजार में स्टॉक विशेष गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं इसलिए केवल इंडेक्स की चाल के बजाय अलग अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत होकर 95.8150 पर बंद हुआ। हालांकि आयातकों की डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियां रुपये पर असर डाल सकती हैं। विदेशी निवेश का प्रवाह भी मुद्रा और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    कुल मिलाकर 22 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के 23200 से 23150 के सपोर्ट क्षेत्र और 23500 से 23600 के प्रतिरोध क्षेत्र पर बाजार की नजर रह सकती है। यह स्तर बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं और वास्तविक कारोबार में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है। निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी निवेश या ट्रेडिंग फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए।

  • ओडिशा तट से 43 किमी दूर समुद्र में मिली प्राकृतिक गैस, ‘समुद्र मंथन’ अभियान की पहली बड़ी खोज

    ओडिशा तट से 43 किमी दूर समुद्र में मिली प्राकृतिक गैस, ‘समुद्र मंथन’ अभियान की पहली बड़ी खोज


    नई दिल्ली। भारत के अपतटीय ऊर्जा अभियान को बड़ी सफलता मिली है। ओएनजीसी ने ओडिशा तट से करीब 43 किलोमीटर दूर समुद्र में गहरे कुएं से प्राकृतिक गैस की खोज की है। महानदी बेसिन में 18 सितंबर को करीब 1450 मीटर की गहराई पर हुई इस खोज को ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत पहली बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कंपनी के मुताबिक कुएं से पिछले तीन दिनों से लगातार अच्छे प्रवाह और दबाव के साथ गैस निकल रही है।

    इस खोज से भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए घरेलू स्रोत मजबूत होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुएं में कुल कितनी गैस उपलब्ध है और यहां से व्यावसायिक स्तर पर कितना उत्पादन संभव होगा। आगे की जांच और मूल्यांकन के बाद ही भंडार की वास्तविक क्षमता तथा व्यावसायिक उपयोगिता का पता चलेगा।

    चार कुओं में सबसे पहले एमडीडब्ल्यू-28 की खुदाई

    गैस की खोज जिस कुएं में हुई है, उसका नाम एमडीडब्ल्यू-28 है। इसकी खुदाई 25 जुलाई को शुरू हुई थी। यह कुआं समुद्र में करीब 770 मीटर गहरे पानी में स्थित है और ओएनजीसी के मौजूदा अभियान के तहत खोदे जाने वाले चार कुओं में पहला है।

    एमडीडब्ल्यू-28 महानदी बेसिन के उस क्षेत्र में आता है, जहां पहले भी गैस की खोज हो चुकी है। यह कुआं ओएनजीसी की 2024 में की गई उत्कल और कोणार्क गैस खोजों से करीब 23 नॉटिकल मील की दूरी पर है।

    आगे जांच के बाद सामने आएगी उत्पादन क्षमता

    ओएनजीसी के सामने अब अगली चुनौती इस खोज की वास्तविक क्षमता का आकलन करना है। इसके लिए आगे तकनीकी जांच की जाएगी, जिससे पता चलेगा कि कुएं से कितनी गैस निकाली जा सकती है और व्यावसायिक उत्पादन आर्थिक रूप से कितना फायदेमंद रहेगा।

    कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा है कि वह गहरे और अत्यंत गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज का अभियान जारी रखेगी। इससे संकेत मिलता है कि महानदी बेसिन में अपतटीय खोज गतिविधियां आगे भी जारी रहने वाली हैं।

    पेट्रोलियम मंत्री ने बताया बड़ी उपलब्धि

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज को भारत के अपतटीय खोज कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में पहले मिली अन्य खोजों के साथ इस नए संसाधन को जोड़कर साझा सुविधाओं के माध्यम से विकास की संभावनाएं बन सकती हैं। इससे परियोजनाओं में लागत और समय दोनों कम करने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि, उत्कल और कोणार्क खोजों के कुल भंडार तथा उनकी व्यावसायिक उपयोगिता से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    महानदी बेसिन में बड़े संसाधन का अनुमान

    ‘समुद्र मंथन’ पहल का उद्देश्य महानदी बेसिन के उन गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की तलाश करना है, जिनकी अभी तक पर्याप्त खोज नहीं हुई है। सरकारी एजेंसी के अनुमान के अनुसार महानदी बेसिन में जमीन पर करीब 45 मिलियन टन और उथले पानी वाले क्षेत्र में करीब 100 मिलियन टन संसाधन मौजूद हो सकते हैं। वहीं, गहरे पानी वाले हिस्से के संसाधनों का अभी आकलन नहीं हुआ है।

    केंद्र सरकार ने जुलाई में ‘समुद्र मंथन’ अभियान को मंजूरी दी थी। इसके लिए 84,084 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है और यह कार्यक्रम 2030-31 तक चलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल के जरिए देश के हाइड्रोकार्बन संसाधनों में 600 मिलियन टन से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है।

    महानदी बेसिन में एमडीडब्ल्यू-28 से गैस की खोज ऐसे समय हुई है, जब भारत घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस खोज का वास्तविक आर्थिक और ऊर्जा प्रभाव गैस भंडार की मात्रा तथा व्यावसायिक उत्पादन की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    नई दिल्ली ।कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी देखने को मिली। फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,858.99 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,294.96 अंक के स्तर से 240.21 अंक यानी 0.32 प्रतिशत ऊपर 74,535.18 अंक पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,987.40 अंक का उच्चतम स्तर भी छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 692.43 अंक यानी 0.93 प्रतिशत अधिक था।

    निफ्टी 50 में हालांकि कारोबार की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। यह पिछले बंद 23,346.40 अंक की तुलना में 16.20 अंक फिसलकर 23,330.20 अंक पर खुला। बाद में इसमें तेजी आई और यह 120.40 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,466.80 अंक के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। अंत में निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23,414.30 अंक पर बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि सोमवार के कारोबार में तेजी मुख्य रूप से बड़े शेयरों तक सीमित रही।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, पीएसयू बैंक और ऑटो इंडेक्स में कमजोरी रही।

    निफ्टी 50 के प्रमुख लाभ वाले शेयरों में इटरनल, एचसीएल टेक, आईटीसी, सन फार्मा, मैक्स हेल्थ, टाइटन, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावरग्रिड, विप्रो, ग्रासिम, इंफोसिस और टाटा स्टील में गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी अहम संकेत रही। सऊदी अरब से शिपमेंट में सुधार की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.25 प्रतिशत घटकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर बाजार की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    भारतीय शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि में भी बदलाव देखने को मिला। लगातार सात कारोबारी सत्रों की बिकवाली के बाद शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 599 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी खरीदारी जारी रखी और सत्र के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया।

    बाजार में सकारात्मक माहौल को वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच प्रस्तावित बातचीत तथा अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं से भी समर्थन मिला। हालांकि, आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।