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  • एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर

    एनएसई आईपीओ की ग्रे मार्केट चमक फीकी, एक हफ्ते में जीएमपी करीब 32 प्रतिशत गिरा, निवेशकों की नजर वित्तीय प्रदर्शन पर


    नई दिल्ली ।लंबे समय से प्रतीक्षित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ गुरुवार से आम निवेशकों के लिए खुल गया। हालांकि, आईपीओ के बाजार में आने के साथ ही इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान एनएसई के जीएमपी में करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब केवल संभावित लिस्टिंग पर ही नहीं, बल्कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी बनी हुई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 11 सितंबर को एनएसई के आईपीओ का जीएमपी 218 रुपये प्रति शेयर था। इसके बाद 12 सितंबर को यह 208 रुपये, 13 सितंबर को 210 रुपये और 14 सितंबर को 208 रुपये रहा। 15 सितंबर को जीएमपी घटकर 160 रुपये और 16 सितंबर को 145 रुपये पर आ गया। 17 सितंबर को यह 125 रुपये बताया गया, जबकि दोपहर तीन बजे के आसपास यह 148 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। एक सप्ताह के दौरान इस स्तर पर कुल मिलाकर करीब 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी आईपीओ के शेयरों के लिए अनौपचारिक बाजार में इश्यू प्राइस के ऊपर चल रहे प्रीमियम को दर्शाता है। हालांकि, जीएमपी आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं होता और इसके आधार पर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं दी जा सकती। आईपीओ की लिस्टिंग के समय बाजार की परिस्थितियां, निवेशकों की मांग और अन्य कारक वास्तविक कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।

    एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर से 21 सितंबर तक आम निवेशकों के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी मूल्य सीमा के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के रूप में है। इसका मतलब है कि आईपीओ के तहत पेश किए जा रहे शेयर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी से संबंधित हैं। इसलिए इश्यू से मिलने वाली राशि कंपनी के कारोबार में नई पूंजी के रूप में सीधे नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    एनएसई के आईपीओ को लेकर निवेशकों के लिए कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की ऑपरेशन से आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार समीक्षा अवधि में यह आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यानी इसमें सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    आईपीओ खुलने के साथ अब निवेशकों के सामने कंपनी के मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन, इश्यू प्राइस और बाजार में संभावित मांग जैसे कई पहलू हैं। वहीं जीएमपी में आई हालिया गिरावट ने संभावित लिस्टिंग प्रीमियम को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव का संकेत दिया है। हालांकि अंतिम लिस्टिंग कीमत का निर्धारण आधिकारिक बाजार में कारोबार शुरू होने के बाद ही होगा।

  • भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार, सेंसेक्स 22 अंक फिसला जबकि निफ्टी 53 अंक चढ़कर 23,270 पर बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार, सेंसेक्स 22 अंक फिसला जबकि निफ्टी 53 अंक चढ़कर 23,270 पर बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार मिला-जुला रहा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों और उसके संकेतों का आकलन करने के बीच घरेलू बाजार में पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 में हल्की बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

    बीएसई सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,314.59 पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 74,336.45 के स्तर पर बंद हुआ था। गुरुवार को सूचकांक 153.83 अंक यानी 0.20 प्रतिशत नीचे 74,182.62 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 74,677.56 का ऊपरी स्तर छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 341.11 अंक यानी 0.45 प्रतिशत अधिक था। दिन के दौरान इसका निचला स्तर 74,163.95 रहा।

    निफ्टी50 में इसके विपरीत बढ़त दर्ज की गई। सूचकांक 53 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,270.60 पर बंद हुआ। पिछले सत्र में निफ्टी 23,217.60 पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 22.34 अंक की गिरावट के साथ 23,195.25 पर खुला। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 23,363.55 का इंट्रा-डे हाई बनाया, जो 145.95 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की बढ़त थी। इसका निचला स्तर 23,193.65 रहा।

    व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.92 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की रुचि चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में रियल्टी, ऑटो और मेटल सूचकांकों का प्रदर्शन बेहतर रहा। दूसरी ओर बैंकिंग से जुड़े सूचकांकों पर दबाव दिखाई दिया। निफ्टी बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक में गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी50 में एचडीएफसी लाइफ का शेयर 5.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख लाभ वाले शेयरों में रहा। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एसबीआई लाइफ, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, बीईएल, इंडिगो और टाटा स्टील भी बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर ओएनजीसी, टाइटन, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, कोल इंडिया और नेस्ले इंडिया में गिरावट रही।

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हालिया गिरावट के बाद कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग भी देखने को मिली। निवेशकों ने मजबूत कमाई की संभावना, अच्छे ऑर्डर बुक और बेहतर बैलेंस शीट वाली कंपनियों पर ध्यान बनाए रखा। कैपिटल गुड्स, इंडस्ट्रियल, डिफेंस, पावर और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में चुनिंदा कंपनियों के प्रति रुचि बनी रही।

    वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेतों का असर भी बाजार के रुख पर रहा। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिकी टैरिफ से जुड़े जोखिमों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी रहने की बात कही गई। आने वाले सत्रों में वैश्विक आर्थिक संकेतक और केंद्रीय बैंकों के फैसले बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • 20 रुपये के लेज पैक से रणबीर कपूर से मिलने का मौका, कंपनी ने लॉन्च किया नया कैंपेन

    20 रुपये के लेज पैक से रणबीर कपूर से मिलने का मौका, कंपनी ने लॉन्च किया नया कैंपेन

    नई दिल्ली। पोटैटो चिप्स ब्रांड लेज ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया कैंपेन शुरू किया है। ‘लेज खोलो, रणबीर से मिलो’ नाम के इस अभियान में 20 रुपये वाले पात्र लेज पैक के जरिये ग्राहकों को कई आकर्षक इनाम जीतने का मौका मिलेगा। इस फैन-जर्नी का सबसे बड़ा आकर्षण ब्रांड एंबेसडर और अभिनेता रणबीर कपूर से मिलने का अवसर है। कंपनी के अनुसार, छह सप्ताह तक चलने वाले इस कॉन्टेस्ट में कुल 2 करोड़ रुपये तक के इनाम जीतने का मौका मिलेगा।

    लेज लंबे समय से अपने ब्रांड को खुशी, मस्ती और रोजमर्रा के यादगार पलों से जोड़कर प्रस्तुत करता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ने के लिए कई अभियान चलाए हैं। हाल ही में रणबीर कपूर के साथ ‘लेज के लिए कुछ भी’ कॉन्टेस्ट के जरिये फैंस के उत्साह को सामने लाया गया था। अब नए अभियान के माध्यम से कंपनी ग्राहकों के इस जुड़ाव को एक खास अनुभव में बदलने की कोशिश कर रही है।

    20 रुपये का पैक बनेगा इनाम की यात्रा का पहला कदम

    ‘लेज खोलो, रणबीर से मिलो’ अभियान के तहत 20 रुपये वाले पात्र लेज पैक को फैन-जर्नी की शुरुआत बनाया गया है। ग्राहकों को पात्र पैक खरीदने के बाद उसकी तस्वीर लेकर अभियान में भाग लेने का अवसर मिलेगा। कंपनी के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान पैक का सत्यापन किया जाएगा और प्रतिभागी आगे बढ़कर अलग-अलग इनाम जीतने के मौके हासिल कर सकेंगे।

    इस अभियान की खास बात यह है कि ग्राहकों को किसी बड़े खर्च के बजाय 20 रुपये वाले पैक से शुरुआत करने का अवसर दिया गया है। कंपनी ने इसे अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने और रोजमर्रा के चिप्स पैक को एक रोमांचक अनुभव में बदलने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया है।

    पैक बढ़ने के साथ बड़े होते जाएंगे इनाम

    छह सप्ताह तक चलने वाले इस कॉन्टेस्ट में प्रतिभागियों को सत्यापित पैकों की संख्या के आधार पर अलग-अलग इनाम जीतने के मौके मिलेंगे। कंपनी द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, अभियान में आगे बढ़ने के लिए निम्न चरण रखे गए हैं—

    • तीन सत्यापित पैक: गेमिंग कंसोल जीतने का मौका।
    • पांच सत्यापित पैक: प्रीमियम स्मार्टफोन जीतने का अवसर।
    • 10 सत्यापित पैक: अंतरराष्ट्रीय अवकाश यात्रा जीतने का मौका।
    • 20 सत्यापित पैक: रणबीर कपूर से मिलने का अवसर।

    इन इनामों के अलावा अभियान में कुल 2 करोड़ रुपये तक के पुरस्कार जीतने का मौका दिया जा रहा है। कंपनी ने इसे अपने ग्राहकों के लिए स्वाद, मनोरंजन और खास अनुभव को एक साथ जोड़ने वाली पहल बताया है।

    वाट्सऐप से पूरी होगी कॉन्टेस्ट की प्रक्रिया

    कंपनी ने ग्राहकों के लिए अभियान में शामिल होने की प्रक्रिया को आसान रखने पर जोर दिया है। इसके लिए वाट्सऐप के माध्यम से पैक अपलोड और सत्यापन की सुविधा दी गई है। पात्र पैक खरीदने के बाद ग्राहक अभियान का क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं या उपलब्ध डिजिटल लिंक का इस्तेमाल कर वाट्सऐप जर्नी में शामिल हो सकते हैं।

    इसके बाद प्रतिभागियों को अपने पैक की तस्वीर लेकर कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। सत्यापित पैकों की संख्या बढ़ने के साथ वे अलग-अलग इनामों के लिए आगे बढ़ सकेंगे। अभियान में शामिल होने से पहले ग्राहकों को पात्रता, सत्यापन और अन्य लागू नियमों की जानकारी देखनी होगी।

    किराना दुकानों को अभियान का अहम हिस्सा बनाया

    लेज ने इस अभियान के लिए देशभर की नजदीकी किराना दुकानों को भी केंद्र में रखा है। ग्राहक अभियान से जुड़े स्टोर से 20 रुपये वाला पात्र लेज पैक खरीद सकते हैं। इसके बाद पैक पर दिए गए क्यूआर कोड या डिजिटल लिंक के माध्यम से वाट्सऐप जर्नी में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    कंपनी का कहना है कि इस व्यवस्था के जरिये अभियान को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्थानीय दुकानों के माध्यम से ग्राहकों को अभियान की जानकारी मिलने के साथ-साथ पैक खरीदने और कॉन्टेस्ट में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा।

    पेप्सिको इंडिया ने बताया ग्राहकों के प्यार का जश्न

    पेप्सिको इंडिया की पोटैटो चिप्स कैटेगरी की मार्केटिंग डायरेक्टर आस्था भसीन ने अभियान के बारे में कहा कि लेज हमेशा से जिंदगी में खुशियों के पल बनाने पर ध्यान देता रहा है और उसके हर कदम के केंद्र में ग्राहक होते हैं।

    उन्होंने कहा कि ‘लेज खोलो, रणबीर से मिलो’ कॉन्टेस्ट के जरिये ग्राहकों के साथ जुड़ाव को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश की गई है। चिप्स का पैकेट खोलने जैसी सामान्य गतिविधि को यादगार अनुभव में बदलने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार, बेहतरीन स्वाद, खुशी, इनाम और रणबीर कपूर से मिलने का अवसर इस अभियान की खास बातें हैं।

    आस्था भसीन ने कहा कि यह पहल लेज के प्रति ग्राहकों के लगातार प्यार का जश्न मनाने का तरीका है। साथ ही, हर पात्र पैक को कुछ खास पाने के अवसर में बदलने का प्रयास किया गया है।

    रणबीर कपूर बोले—फैंस के लिए खास है यह अभियान

    लेज के ब्रांड एंबेसडर रणबीर कपूर ने भी नए कॉन्टेस्ट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लेज के साथ उनका अनुभव बहुत मजेदार रहा है और यह अभियान इसलिए खास है क्योंकि यह सीधे फैंस के लिए है।

    रणबीर कपूर के अनुसार, प्रशंसकों ने उन्हें हमेशा बहुत प्यार दिया है। ऐसे में यह विचार अच्छा लगता है कि 20 रुपये का एक छोटा सा पैक उन्हें अपने प्रशंसकों से मिलने का अवसर दे सकता है। उन्होंने अभियान में शानदार इनामों का भी उल्लेख किया और कहा कि वे विजेताओं से मिलने तथा उनके साथ लेज का पैक साझा करने का इंतजार कर रहे हैं।

    रिटेल से लेकर डिजिटल माध्यमों तक प्रचार

    कंपनी ने इस अभियान को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का सहारा लेने की योजना बनाई है। इसके तहत रिटेल, डिजिटल, क्रिएटर्स और सोशल मीडिया के जरिये अभियान का प्रचार किया जाएगा।

    इसका उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ-साथ आसपास की दुकानों के माध्यम से भी ग्राहकों को अभियान की जानकारी देना है। कंपनी का कहना है कि पहले पैक से लेकर अंतिम इनाम तक, इस फैन-जर्नी का मकसद ग्राहकों के लेज अनुभव को और खास बनाना है।

    लेज का ग्राहकों से जुड़ाव बढ़ाने पर जोर

    नए अभियान के माध्यम से लेज ने अपने प्रशंसकों को स्वाद के साथ मनोरंजन और इनाम का अनुभव देने की कोशिश की है। 20 रुपये वाले पात्र पैक से शुरू होने वाली यह पहल छह सप्ताह तक चलेगी और इसमें सत्यापित पैकों की संख्या के आधार पर अलग-अलग इनाम जीतने के अवसर मिलेंगे।

    रणबीर कपूर से मिलने का मौका इस अभियान का सबसे खास आकर्षण है। कंपनी के अनुसार, अभियान के जरिये ग्राहकों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करने और देशभर में ब्रांड के प्रति उत्साह बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिला

    सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिला

    नई दिल्ली ।सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए उनके नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिला है। मुकुंदन ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने पर भी उन्हें बधाई दी।

    मुकुंदन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके अनुसार, औपचारिकीकरण, समावेशन और डिजिटलाइजेशन प्रधानमंत्री के कार्यकाल की उपलब्धियों के तीन प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उन्होंने इन तीनों क्षेत्रों में उठाए गए कदमों को अर्थव्यवस्था में बदलाव से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

    अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण की चर्चा करते हुए मुकुंदन ने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, जीएसटी ने अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे आर्थिक व्यवस्था में बदलाव लाने वाले प्रमुख कदमों में शामिल किया।

    वित्तीय समावेशन के संदर्भ में उन्होंने जन धन-आधार-मोबाइल यानी जेएएम ढांचे का उल्लेख किया। मुकुंदन के मुताबिक, जेएएम ढांचा वित्तीय समावेशन का एक प्रमुख माध्यम रहा है। इसके जरिए वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव बढ़ाने की दिशा में काम हुआ है।

    डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में मुकुंदन ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यूपीआई को भारत के डिजिटलाइजेशन अभियान का एक अहम हिस्सा बताया और इसे डिजिटल आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर देखा।

    मुकुंदन ने आगे कहा कि अब देश में ध्यान केवल कारोबार करने में आसानी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, फोकस आम नागरिक के लिए जीवन जीने में आसानी, जीवन-यापन की लागत और जीवन की गति को बेहतर बनाने पर होना चाहिए। उन्होंने इसे भविष्य के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में सामने रखा।

    उन्होंने कहा कि अब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से आगे बढ़कर ‘ईज ऑफ लिविंग’, ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग’ और ‘स्पीड ऑफ लिविंग’ पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आर्थिक विकास का असर आम नागरिक के जीवन में भी दिखाई देना चाहिए और नीतिगत प्राथमिकताओं में लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े पहलुओं को महत्व मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए मुकुंदन ने कहा कि उन्हें देश और उसके लोगों के लिए ऊंची आकांक्षाएं तय करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक नेता के रूप में प्रधानमंत्री को पूरे देश और समाज से ऊंची आकांक्षाएं रखने की जरूरत है।

    मुकुंदन के अनुसार, ऐसी आकांक्षाएं भारत को अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश में विकास के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है। ऐसे समय में ऊंचे लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।

    मुकुंदन ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व और आर्थिक बदलावों का उल्लेख करते हुए औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने भविष्य की प्राथमिकताओं में आम नागरिक के जीवन से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में तैयार होने वाली चिप्स आने वाले समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेंगी। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास दर और तकनीकी क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उनके अनुसार, वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने पिछले कुछ समय में देश में हुए कई महत्वपूर्ण आयोजनों और विकास से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

    इस दौरान उन्होंने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का जिक्र किया। यहां एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए वित्तीय सेवाओं को अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री ने इन तकनीकी क्षेत्रों को देश के डिजिटल और वित्तीय ढांचे से जोड़ते हुए भारत में हो रहे बदलावों का उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने देश में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर से देशभर में माल की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर होगी और विनिर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी। इससे उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की चिप इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत में तैयार होने वाली चिप्स दुनिया भर में जाएंगी। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन इसी व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेटिंग में सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत है। भारत की मेजबानी में हाल ही में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने आम सहमति से नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाए जाने को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रति भरोसे का एक संकेत बताया।

    केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके छह प्रमुख स्तंभों में चिप डिजाइन, मशीन और मटेरियल, फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के पहले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इनमें करीब 20 स्टार्टअप्स ने लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की। सेमीकॉन 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है।

    अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत ने 10 वर्षों में 85,000 डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का शुरुआती लक्ष्य रखा था, लेकिन चार वर्षों में ही 70,000 इंजीनियर तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि देशभर की 400 से अधिक यूनिवर्सिटीज में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, शोध और प्रतिभा विकास से जुड़े प्रयासों को एक व्यापक ढांचे में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • पीएमईजीपी योजना से धमतरी के शाकिर खान ने शुरू किया होटल, अब 6 से 7 युवाओं को दे रहे रोजगार

    पीएमईजीपी योजना से धमतरी के शाकिर खान ने शुरू किया होटल, अब 6 से 7 युवाओं को दे रहे रोजगार

    नई दिल्ली ।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के रहने वाले शाकिर खान ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी पीएमईजीपी योजना का लाभ लेकर अपना कारोबार शुरू किया है। कभी खुद का व्यवसाय शुरू करना उनके लिए एक सपना था, लेकिन बैंक ऋण और सरकारी सब्सिडी की मदद से उन्होंने होटल स्थापित किया। अब वह अपने कारोबार के जरिए खुद रोजगार पाने के साथ 6 से 7 युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर केंद्र सरकार की पीएमईजीपी योजना को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़कर देखा जा रहा है। योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को अपना कारोबार शुरू करने में मदद करना है, जो रोजगार की तलाश में हैं और अपना व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं। इसके तहत बैंक ऋण के साथ सरकारी सब्सिडी का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।

    शाकिर खान के लिए इस योजना का लाभ उनके कारोबारी सफर में महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने बताया कि पहले खुद का व्यवसाय शुरू करना केवल एक सपना था। कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन जुटाना उनके लिए आसान नहीं था। पीएमईजीपी योजना के तहत बैंक से ऋण मिलने और सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद उनके लिए होटल शुरू करना संभव हो सका।

    होटल शुरू होने के बाद उनका कारोबार आगे बढ़ा और अब वह अपने काम को संचालित कर रहे हैं। शाकिर के मुताबिक, इस योजना ने उनके उद्यमी बनने के सपने को पूरा करने में मदद की। उनका कहना है कि यदि उन्हें पीएमईजीपी योजना का सहयोग नहीं मिलता तो अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना अधूरा रह सकता था।

    शाकिर खान का उदाहरण इस बात से जुड़ा है कि सरकारी वित्तीय सहायता का इस्तेमाल करके कोई व्यक्ति अपना रोजगार स्थापित करने के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार कर सकता है। होटल में फिलहाल 6 से 7 युवा काम कर रहे हैं। इस तरह उनका कारोबार उनके लिए आय का साधन बनने के साथ दूसरे युवाओं के रोजगार से भी जुड़ा है।

    पीएमईजीपी योजना का उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करना है। इसके माध्यम से उद्योग, सेवा और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। योजना के तहत कारोबार शुरू करने के इच्छुक लोगों को बैंक वित्तपोषण के माध्यम से अपना उद्यम स्थापित करने का अवसर मिलता है।

    शाकिर खान ने योजना को युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने और आर्थिक रूप से मजबूत होने में मददगार बताया। उनके अनुसार, कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से उन लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, जिनके पास अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छा तो होती है, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होते।

    पीएमईजीपी के जरिए शाकिर ने धमतरी में अपना होटल शुरू किया और अब वह स्वयं उद्यमी के रूप में काम कर रहे हैं। उनके कारोबार से जुड़े 6 से 7 युवाओं को भी रोजगार मिला है। इस तरह उनकी व्यक्तिगत कारोबारी शुरुआत अब अन्य लोगों की आजीविका से भी जुड़ गई है।

    शाकिर की कहानी स्वरोजगार के उस पहलू को सामने रखती है, जिसमें सरकारी योजना के जरिए व्यवसाय शुरू करने वाले व्यक्ति आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी काम के अवसर तैयार कर सकते हैं। पीएमईजीपी के तहत मिलने वाले ऋण और सब्सिडी के सहारे उन्होंने अपने सपने को कारोबार में बदला और रोजगार देने वाले उद्यमी के रूप में आगे बढ़े।

  • त्योहारी सीजन से पहले सोने पर बढ़ा ये चार्ज सरकार ने बदली हॉलमार्किंग की फीस समझें पूरा हिसाब

    त्योहारी सीजन से पहले सोने पर बढ़ा ये चार्ज सरकार ने बदली हॉलमार्किंग की फीस समझें पूरा हिसाब


    नई दिल्ली। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले सोने के गहनों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS ने सोने के गहनों और आर्टवर्क की हॉलमार्किंग फीस में बढ़ोतरी कर दी है। हॉलमार्किंग की फीस अब पहले के मुकाबले ज्यादा होगी। प्रति आर्टिकल लगने वाली फीस को 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है। यानी हॉलमार्किंग चार्ज में 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव BIS हॉलमार्किंग संशोधन नियम 2026 के तहत लागू किया गया है।

    हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके जरिए सोने के आभूषणों और दूसरी संबंधित वस्तुओं की गुणवत्ता और शुद्धता की पहचान की जाती है। ऐसे में त्योहारी सीजन में जब सोने और सोने के गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है तब हॉलमार्किंग फीस में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि फीस बढ़ने के बावजूद ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि उन्हें सीधे तौर पर 30 रुपये अतिरिक्त देने का नियम नहीं बनाया गया है।

    हॉलमार्किंग की नई फीस ज्वैलर्स द्वारा हॉलमार्किंग सेंटर को दी जाएगी। सरकारी नियमों के मुताबिक यह शुल्क सीधे ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सोने का आभूषण खरीदता है तो दुकानदार उससे हॉलमार्किंग के नाम पर अलग से 30 रुपये वसूल नहीं कर सकता। हालांकि ज्वैलर्स के पास बढ़ी हुई लागत को अपनी कीमत तय करने के दौरान शामिल करने का विकल्प हो सकता है।

    ज्वैलर्स चाहें तो हॉलमार्किंग फीस में हुई अतिरिक्त लागत को खुद वहन कर सकते हैं। इसके अलावा वह इसे गहनों की मेकिंग चार्ज या अपनी ओवरऑल प्राइसिंग में शामिल कर सकते हैं। इसलिए ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि हॉलमार्किंग फीस बढ़ने का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक के बिल में अलग से 30 रुपये जोड़ दिए जाएंगे।

    नई व्यवस्था के तहत हॉलमार्किंग सेंटरों से BIS को भी निर्धारित राशि मिलेगी। सोने के प्रति आर्टिकल पर BIS को 7.50 रुपये देने होंगे। इसके लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति कंसाइनमेंट का प्रावधान रखा गया है। चांदी के मामले में प्रति आर्टिकल 3.50 रुपये BIS को देने होंगे और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट की राशि तय की गई है। इन रकम पर लागू टैक्स अलग से लिया जाएगा।

    हालांकि कुछ शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस 200 रुपये ही बनी रहेगी। यानी एक कंसाइनमेंट के लिए कम से कम 200 रुपये का शुल्क देना होगा। चांदी की वस्तुओं की हॉलमार्किंग फीस भी 35 रुपये प्रति आर्टिकल पर पहले की तरह बनी रहेगी। चांदी के लिए कंसाइनमेंट चार्ज 150 रुपये निर्धारित है।

    त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए इन बदलावों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि हॉलमार्किंग सोने की खरीद से जुड़ी अहम प्रक्रिया है। ग्राहक आभूषण खरीदते समय बिल में सोने की कीमत मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी ध्यान से देख सकते हैं। वहीं हॉलमार्क वाले आभूषण खरीदने से उन्हें सोने की शुद्धता से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। नई फीस व्यवस्था के बाद हॉलमार्किंग की लागत ज्वैलर्स के स्तर पर बढ़ेगी लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार इसे ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में सीधे वसूल नहीं किया जाना चाहिए।

  • 17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी

    17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 17 सितंबर को कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। इससे पहले 16 सितंबर को बाजार ने लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली। बुधवार को Sensex 332.63 अंक की बढ़त के साथ 74336.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Nifty 99 अंक चढ़कर 23217.60 पर पहुंच गया। बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी तथा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट से भी सेंटीमेंट को सहारा मिला।

    अब 17 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगा। 16 सितंबर को भारतीय बाजार बंद होने के बाद फेड का फैसला सामने आना था इसलिए इसका असर अगले कारोबारी सत्र में दिखाई दे सकता है। वैश्विक बाजारों में निवेशक फेड के फैसले के साथ उसकी आगे की मौद्रिक नीति को लेकर टिप्पणी पर भी नजर रखेंगे। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रहने पर उभरते बाजारों से विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है जबकि नरम संकेत मिलने पर बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।

    कच्चा तेल भी 17 सितंबर के कारोबार के लिए बड़ा संकेत रहेगा। 16 सितंबर को Brent crude करीब 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर था। हाल के दिनों में तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई और व्यापार घाटे से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों में आगे की चाल का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। 15 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2978 करोड़ रुपए की निकासी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक 2686 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे। लगातार विदेशी बिकवाली की स्थिति बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 23200 का स्तर चर्चा में रहेगा। 16 सितंबर को Nifty इसी स्तर के ऊपर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान यह 23116.10 के निचले स्तर तक गया था लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से 23284.75 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा। ऐसे में 17 सितंबर को बाजार में शुरुआती चाल के बाद निवेशकों की नजर यह देखने पर होगी कि Nifty अपनी बढ़त को बनाए रखता है या फिर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलती है।

    सेक्टोरल स्तर पर बैंक और FMCG शेयरों में बुधवार को मजबूती देखने को मिली जबकि IT और फार्मा शेयर दबाव में रहे। SBI HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों ने Nifty को सहारा दिया। 17 सितंबर को भी इन प्रमुख सेक्टरों की गतिविधियां बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    इसके अलावा 17 सितंबर से NSE का बहुप्रतीक्षित IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। NSE IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपए प्रति शेयर रखा गया है और यह इश्यू 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। प्राथमिक बाजार में इस बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की सक्रियता का असर सेकेंडरी मार्केट की liquidity पर भी नजर आने वाला विषय रहेगा।

    कुल मिलाकर 17 सितंबर को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान अमेरिकी फेड का फैसला कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की खरीदारी और Nifty के प्रमुख तकनीकी स्तर सबसे अहम संकेत रहेंगे। बाजार में तेजी के बाद भी उतार चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए निवेशकों के लिए किसी भी दिशा में कदम उठाने से पहले बाजार की चाल और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • UPI यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नए MDR ढांचे से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद

    UPI यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नए MDR ढांचे से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद

    नई दिल्ली । UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए किसी तरह का नया शुल्क लागू नहीं होगा। नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR ढांचे को लेकर फोनपे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर निगम ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक पहले की तरह बिना किसी शुल्क के UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नए राजस्व मॉडल का उद्देश्य भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

    समीर निगम के मुताबिक, UPI ग्राहकों से इस्तेमाल के लिए पहले भी कोई शुल्क नहीं लिया गया है और आगे भी उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P और व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M दोनों तरह के UPI भुगतान ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेंगे।

    नए MDR ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि संबंधित व्यापारी करेगा। इसके अलावा एक लाख रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी MDR व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

    समीर निगम ने बताया कि बड़े दुकानदारों के मामले में भी 2,000 रुपये से कम राशि वाले करीब 96 प्रतिशत लेनदेन किसी शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की बड़ी संख्या में होने वाली छोटी राशि की UPI खरीदारी पर ग्राहकों को किसी अतिरिक्त भुगतान का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि MDR का भुगतान करने वाले व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे। उनके अनुसार, शुल्क का ढांचा व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों के बीच रहेगा, जबकि ग्राहक पहले की तरह UPI के जरिए भुगतान कर सकेंगे।

    समीर निगम ने डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में होने वाले खर्च का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित रखने के लिए उद्योग हर साल करीब 10,000 करोड़ से 12,000 करोड़ रुपये खर्च करता है। यह खर्च केवल तकनीकी ढांचे तक सीमित नहीं है। KYC, साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन, धोखाधड़ी नियंत्रण, मर्चेंट चार्जबैक और पूंजीगत निवेश जैसी व्यवस्थाओं पर भी लगातार खर्च होता है।

    उनके अनुसार, नए MDR मॉडल से मिलने वाला राजस्व उन बैंकों और कंपनियों के निवेश को समर्थन देने में मदद करेगा, जो UPI इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। इससे डिजिटल भुगतान से जुड़ी सेवाओं के संचालन और आगे के विकास के लिए आर्थिक आधार मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

    समीर निगम ने भारत में UPI के बढ़ते इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वर्ष 2020 में UPI के करीब 20 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 50 से 55 करोड़ तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लगातार विस्तार और निवेश की जरूरत है।

    उन्होंने नए राजस्व मॉडल को फिनटेक क्षेत्र की निजी कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, इससे कंपनियों को मार्केटिंग, नवाचार तथा अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक आगे बढ़ाने के लिए व्यवसायों को उचित आय अर्जित करने का अवसर मिलना जरूरी है।

    इस तरह नए MDR ढांचे में ग्राहकों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रखने पर जोर दिया गया है, जबकि निर्धारित श्रेणी के मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पूरे इकोसिस्टम के संचालन और निवेश के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार करना बताया गया है।

  • शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    शेयर बाजार में दो दिन बाद रिकवरी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,217 पर बंद, आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

    नई दिल्ली ।अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के फैसले से पहले बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने पिछले दो कारोबारी सत्रों की गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया। तेल की कीमतों में नरमी और एफएमसीजी, पीएसयू बैंक तथा रियल्टी शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे।

    सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,217.60 अंक पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने पिछले दो दिनों की कमजोरी के बाद बाजार में रिकवरी दर्ज की।

    हालांकि व्यापक बाजार में स्थिति पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। निफ्टी मिडकैप में 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख शेयरों में खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव बना रहा।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी एफएमसीजी सबसे ज्यादा बढ़ने वाले प्रमुख सूचकांकों में रहा। इसमें 1.63 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 1.44 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.99 प्रतिशत चढ़ा। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार की रिकवरी को मजबूती दी।

    इसके विपरीत निफ्टी आईटी पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके अलावा निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 में टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। वहीं एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ, एसबीआई और आईटीसी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

    बाजार के तकनीकी रुझान को लेकर विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए 23,300 से 23,400 के स्तर को अहम बाधा बताया है। उनके मुताबिक व्यापक तकनीकी स्थिति में सुधार के लिए निफ्टी का 23,500 के ऊपर टिकना जरूरी होगा। दूसरी ओर 23,100 से 23,070 का स्तर तत्काल समर्थन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 23,070 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में सूचकांक 23,000 से 22,800 के दायरे तक जा सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में इन स्तरों पर बाजार की दिशा पर नजर रहेगी।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक के नतीजों पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर किस तरह का रुख अपनाता है। फेड की टिप्पणी से वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की दिशा भी प्रभावित हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फेड की टिप्पणी संतुलित रहती है तो बाजार में आगे रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है। वहीं सख्त रुख, बॉन्ड यील्ड में दोबारा तेजी या ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने की स्थिति में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार की रिकवरी सीमित हो सकती है।

    विश्लेषकों के मुताबिक अब निवेशकों का ध्यान फेड चेयरमैन की टिप्पणियों पर रहेगा। भविष्य की ब्याज दरों को लेकर मिलने वाले संकेत वैश्विक तरलता, पूंजी प्रवाह और वित्तीय बाजारों की निकट अवधि की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।