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  • इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का पारंपरिक शिल्प कौशल केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का एक सशक्त आधार भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, आधुनिक सोच और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारतीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर रोजगार, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। उनका कहना था कि यदि पारंपरिक कौशल को आधुनिक अवसरों के साथ जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने इस विषय पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विचारों को साझा करते हुए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद विशिष्ट उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आजीविका मजबूत हो रही है और भारत की पारंपरिक विरासत को भी नई पहचान मिल रही है।

    वित्त मंत्री ने चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग ने भारतीय कारीगरों को वैश्विक फैशन उद्योग से जोड़ने का नया रास्ता खोला है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से फ्रांस की उच्चस्तरीय फैशन परंपरा और भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई कला का सफल समन्वय हुआ है। इससे भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों के लिए उच्च मूल्य वाले कार्य अवसर भी विकसित हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भी इस पहल का उल्लेख किया गया था, जिससे भारतीय शिल्प कौशल की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत मिलता है। भारत लौटने के बाद उन्होंने तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला का दौरा किया और वहां कार्यरत कारीगरों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें यह जानकर विशेष संतोष हुआ कि कंपनी ने अपनी कार्यशाला को शहर से गांव में स्थानांतरित करने का निर्णय इसलिए लिया ताकि पारंपरिक कौशल रखने वाले ग्रामीण परिवारों को उनके अपने क्षेत्र में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्यतः रोजगार की तलाश में ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन इस पहल ने विपरीत दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांवों में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभा को अपने क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इससे पारंपरिक शिल्प की निरंतरता भी बनी रहती है और नई पीढ़ी का इस कला से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

    उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लंबे समय से सूखे की चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे समय में जब खेती प्रभावित होती थी, तब ग्रामीण परिवार सूती और रेशमी वस्त्रों पर बारीक कढ़ाई कर अपनी आजीविका चलाते थे। यही परंपरा आज आधुनिक बाजारों तक पहुंचकर नए अवसरों का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि धैर्य, अनुशासन और बारीकी जैसी विशेषताओं से परिपूर्ण भारतीय कारीगरों की यह कला देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक विकास की भी मजबूत आधारशिला बन सकती है।

  • वैश्विक बाजार में नई पहचान, सिंगापुर पहुंची प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

    वैश्विक बाजार में नई पहचान, सिंगापुर पहुंची प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में शोपियां और पुलवामा से प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप सिंगापुर के लिए रवाना की गई है। इस पहल को क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए नए अवसरों का द्वार माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत करना है।

    जम्मू-कश्मीर लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले शीतोष्ण फलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां की जलवायु, मिट्टी और प्राकृतिक परिस्थितियां ऐसे फलों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। अरेको चेरी अपनी मिठास, आकर्षक रंग और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशेष मांग रखती है, जबकि सेंटरोज प्लम भी गुणवत्ता और स्वाद के आधार पर प्रीमियम श्रेणी का फल माना जाता है।

    इस निर्यात के लिए फलों की कटाई से लेकर ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन तक पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पूरी की गई। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली का उपयोग किया गया, ताकि सिंगापुर पहुंचने तक फलों की ताजगी और गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पौध स्वच्छता से जुड़े सभी आवश्यक मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया गया।

    इससे पहले जम्मू-कश्मीर से ताजी चेरी और प्लम का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई जैसे बाजारों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। अब सिंगापुर जैसे नए और प्रीमियम बाजार में प्रवेश से क्षेत्र के बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और व्यापक होने की उम्मीद है। इससे भविष्य में अन्य देशों के साथ भी निर्यात के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

    इस पहल में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं और स्थानीय निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। आधुनिक पैकिंग, गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात प्रबंधन की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि उत्पाद वैश्विक बाजार की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरें। इससे स्थानीय बागवानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन और प्रबंधन की नई जानकारी भी मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से किसानों को पारंपरिक बिक्री व्यवस्था की तुलना में काफी बेहतर प्रतिफल मिलने की संभावना है। बेहतर मूल्य मिलने से बागवान आधुनिक खेती तकनीकों, उन्नत पौधों, वैज्ञानिक प्रबंधन और फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी, फसल की बर्बादी कम होगी और निर्यात योग्य फलों की मात्रा में भी वृद्धि होगी।

    जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादकों के लिए यह उपलब्धि केवल एक निर्यात खेप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों से सीधा जुड़ाव किसानों को स्थायी आय, बेहतर बाजार विकल्प और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है। साथ ही भारत के उच्च गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय पहचान और मजबूत होगी, जिससे भविष्य में कृषि निर्यात को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड ने आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते (ईयू-भारत एफटीए) को इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है। दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं ने हेलसिंकी में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की।

    फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री रिक्का पुर्रा और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बैठक में आर्थिक संबंधों को अधिक विविध, मजबूत और दीर्घकालिक बनाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि ईयू-भारत एफटीए लागू होने के बाद व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य भी अधिक व्यावहारिक माना गया।

    बैठक के बाद फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री रिक्का पुर्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भारत और फिनलैंड की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उनके अनुसार डिजिटल और टिकाऊ प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    रिक्का पुर्रा ने यह भी कहा कि भविष्य में स्पेस, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि उनकी बैठकों में आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा डिजिटलाइजेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी का विस्तार करने पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री साकारी पुइस्तो से भी मुलाकात की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी संचार, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक और सस्टेनेबिलिटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

    फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति और ईयू-भारत एफटीए की संभावनाएं फिनलैंड की कंपनियों के लिए नए अवसर लेकर आएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार का विशाल आकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी निवेश और व्यावसायिक विस्तार के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।

    अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और निर्यात आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों का मानना है कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश पर आधारित यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • इंडिया पोस्ट ने लॉन्च की मैस्कॉट डिजाइन प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे 2 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार

    इंडिया पोस्ट ने लॉन्च की मैस्कॉट डिजाइन प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे 2 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार


    नई दिल्ली ।
    संचार मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स ने देशभर के रचनात्मक प्रतिभागियों के लिए ‘इंडिया पोस्ट मैस्कॉट डिजाइन कॉन्टेस्ट’ की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के माध्यम से नागरिकों को इंडिया पोस्ट का आधिकारिक मैस्कॉट तैयार करने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता का आयोजन इनोवेट इंडिया मायगव प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है और इसका उद्देश्य ऐसा मैस्कॉट विकसित करना है जो इंडिया पोस्ट की विश्वसनीयता, भरोसे, समावेशिता, सेवा भावना और डिजिटल नवाचार जैसी मूल पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सके।

    यह प्रतियोगिता सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुली है। प्रतिभागियों को एक मौलिक मैस्कॉट डिजाइन तैयार करने के साथ उसका उपयुक्त नाम और एक संक्षिप्त कॉन्सेप्ट नोट भी प्रस्तुत करना होगा। प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक स्वीकार की जाएंगी। सरकार ने विद्यार्थियों, डिजाइनर्स, कलाकारों और अन्य रचनात्मक पेशेवरों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है, ताकि इंडिया Post की भविष्य की दृश्य पहचान तैयार करने में उनका योगदान मिल सके।

    प्रतियोगिता को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें मैस्कॉट डिजाइन और मैस्कॉट नेमिंग शामिल हैं। मैस्कॉट डिजाइन श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं मैस्कॉट नेमिंग श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 25 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी। सभी विजेताओं को सम्मान स्वरूप प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

    चयनित मैस्कॉट को इंडिया पोस्ट का आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। भविष्य में इसका उपयोग विभाग के प्रचार अभियानों, फिलाटेलिक उत्पादों, जन-जागरूकता कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, सोशल मीडिया अभियानों और अन्य आधिकारिक संचार माध्यमों में किया जाएगा। इससे न केवल इंडिया पोस्ट की ब्रांड पहचान को नया स्वरूप मिलेगा, बल्कि देश के रचनात्मक प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर भी प्राप्त होगा।

    यह पहल ऐसे समय शुरू की गई है जब इंडिया पोस्ट अपने वित्तीय प्रदर्शन में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। हाल ही में डाक विभाग ने किसी भी वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में पहली बार 4,000 करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विभाग ने 4,008.95 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक प्रथम तिमाही राजस्व दर्ज किया, जो विभाग की सेवाओं के बढ़ते दायरे और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में उसकी मजबूत प्रगति को दर्शाता है। ऐसे में यह प्रतियोगिता इंडिया पोस्ट की नई पहचान को और अधिक प्रभावी तथा जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

  • भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का दम, 130 देशों की भागीदारी के बीच मिले 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का दम, 130 देशों की भागीदारी के बीच मिले 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    नई दिल्ली । भारत के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले भारत टेक्स 2026 ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और पारंपरिक भारतीय शिल्प को एक ही मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। तीसरे संस्करण के रूप में आयोजित इस प्रदर्शनी में दुनिया के 130 से अधिक देशों से छह हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार पहुंचे, जबकि करीब 1.30 लाख व्यापारिक आगंतुकों ने इसमें भाग लिया। व्यापक वैश्विक भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के प्रति अंतरराष्ट्रीय बाजार का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

    करीब 1.6 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस विशाल प्रदर्शनी में 20 हजार से अधिक टेक्सटाइल उत्पाद प्रदर्शित किए गए। आयोजन का उद्देश्य केवल व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि भारतीय विरासत, पारंपरिक शिल्प, आधुनिक तकनीक और सतत विकास को एक साथ प्रस्तुत करना भी रहा। प्रदर्शनी में टेक्सटाइल उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया, जिससे घरेलू और विदेशी खरीदारों को एक ही स्थान पर विविध उत्पादों और नवाचारों का व्यापक परिचय मिला।

    प्रदर्शनी में फाइबर, यार्न, फैब्रिक, रेडीमेड परिधान, होम टेक्सटाइल्स, टेक्निकल टेक्सटाइल्स, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स सहित अनेक क्षेत्रों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इससे भारतीय उद्योग की विविधता और उत्पादन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा निवेशकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला और वस्त्र परंपराओं ने भी विदेशी प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

    बिहार की प्रसिद्ध टिकुली कला इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। अपनी चमकदार रंग योजना और बारीक इनामेल कार्य के लिए प्रसिद्ध इस पारंपरिक कला ने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया। इसके अलावा देशभर के अनेक पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र उत्पादों ने भी आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।

    हैंडलूम क्षेत्र को भी प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया। लगभग 120 बुनकरों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक निर्यातक हैंडलूम सहकारी संस्था ने रियायती स्टॉल के माध्यम से अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत किए। इस पहल से छोटे बुनकरों और पारंपरिक उत्पादकों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला, जिससे निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    भारत टेक्स 2026 में 1,600 से अधिक प्रदर्शकों और 11 हजार से ज्यादा खरीदारों की भागीदारी रही। आयोजन के दौरान 28 हजार से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकें आयोजित की गईं, जबकि 100 से अधिक गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट और बिजनेस-टू-गवर्नमेंट संवाद भी हुए। इन बैठकों के परिणामस्वरूप 14,300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में बढ़ते निवेश विश्वास का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    इस आयोजन के साथ आयोजित इंडी हाट 2026 ने भी भारतीय हैंडलूम और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें 48 कारीगरों और बुनकरों के साथ 12 डिजाइन आधारित ब्रांड्स ने भाग लेकर क्षेत्रीय कला और शिल्प परंपराओं का प्रदर्शन किया। गुलाबी मीनाकारी, डोकरा, उस्ता कला, पिचवाई, सोजनी कढ़ाई, ब्लू पॉटरी, सिल्वर फिलिग्री, चेरियाल पेंटिंग, माता नी पछेड़ी, पेपियर-माशे, बागरू ब्लॉक प्रिंटिंग, जामदानी साड़ियां, मूगा और एरी सिल्क तथा ओडिशा इकत जैसी अनेक पारंपरिक कलाओं ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध विविधता को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

  • भारत के स्पेस रिफॉर्म्स को मिली बड़ी सफलता, विक्रम-1 की लॉन्चिंग पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया गर्व और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक

    भारत के स्पेस रिफॉर्म्स को मिली बड़ी सफलता, विक्रम-1 की लॉन्चिंग पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया गर्व और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक

    नई दिल्ली ।भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए निजी भागीदारी के नए युग की मजबूत शुरुआत का संकेत दिया है। स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों और निजी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ाने की नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उनके अनुसार यह सफलता भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की मजबूत उपस्थिति का आधार बनेगी।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने अपनी निर्धारित योजना के अनुरूप सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने इसे केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, वैज्ञानिक प्रतिभा और उद्योग जगत की बढ़ती भूमिका का भी प्रमाण बताया। उनका कहना था कि इस उपलब्धि से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच समन्वय से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि लगभग पांच-छह वर्ष पहले केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। इस नीति के बाद देश में नई कंपनियों को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला। विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग उसी दूरदर्शी निर्णय का सकारात्मक परिणाम है, जिसने भारतीय स्पेस इकोसिस्टम को नई दिशा दी है।

    मंत्री ने इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़े सभी संस्थानों और वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से ऑर्बिटल लॉन्च करने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनकर नया इतिहास बनाया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रभावी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है और आने वाले वर्षों में ऐसे कई नवाचार देखने को मिल सकते हैं।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण, इसरो और मिशन से जुड़े सभी तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के सहयोग और मार्गदर्शन ने निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत मंच उपलब्ध कराया है। उनके अनुसार यह मॉडल भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बीते पांच वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में जिस गति से प्रगति की है, वह उल्लेखनीय है। सामान्य तौर पर स्पेस सेक्टर में बड़े परिणाम हासिल करने में कई दशक लग जाते हैं, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत कम समय में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। उनका मानना है कि यह सफलता देश की नीतिगत स्पष्टता, वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार को प्रोत्साहन देने वाली व्यवस्था का परिणाम है।

    मंत्री ने कहा कि जिन देशों ने भारत से कई दशक पहले अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किए थे, उनकी तुलना में पहली कोशिश में सफलता प्राप्त करने का भारत का रिकॉर्ड अत्यंत प्रभावशाली रहा है। विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग इस उपलब्धि को और मजबूत करती है तथा यह संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह सफलता भारतीय निजी स्पेस उद्योग के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करने के साथ-साथ देश की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान देती है।

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, सरकार के बड़े विनिर्माण संबंधी फैसलों और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने घरेलू बाजार को सहारा दिया। इसी का परिणाम रहा कि सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों का भरोसा कायम रहा।

    सप्ताह भर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंकों यानी करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए मजबूत स्थिति में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 127.40 अंकों यानी लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में खरीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया। सेंसेक्स 964.58 अंकों की छलांग लगाकर 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत रही कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी घरेलू निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल पैदा किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

    बाजार को सबसे बड़ा सहारा प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों से मिला। कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आईटी और चुनिंदा अन्य क्षेत्रों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंजूरी दिए जाने से औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना। इन घोषणाओं ने दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र पूरे सप्ताह सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जिससे तकनीकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर रियल्टी, मेटल, डिफेंस, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में ही अधिक भरोसा दिखाया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूती रही, लेकिन व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की अस्थिरता दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स भी बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के संकेतों, मानसून की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

  • भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    नई दिल्ली । भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का सशक्त प्रमाण बताते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस, इसरो और आईएन-स्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, युवा प्रतिभा और निजी अंतरिक्ष उद्योग की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।

    गौतम अदाणी ने अपने संदेश में कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल उड़ान ने मिशन के सभी निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदाना, भारत डाका और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस मिशन की सफलता सामूहिक वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का परिणाम है।

    उन्होंने इस उपलब्धि को देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां सफलतापूर्वक ऑर्बिटल लॉन्च करने की क्षमता प्रदर्शित कर चुकी हैं। उनके अनुसार यह उपलब्धि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की मजबूत होती उपस्थिति और तकनीकी आत्मविश्वास को भी दर्शाती है।

    गौतम अदाणी ने विशेष रूप से मिशन से जुड़ी युवा टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। उन्होंने कहा कि इतनी युवा टीम द्वारा हासिल की गई यह सफलता पूरी दुनिया के सामने भारत की नई पीढ़ी की क्षमता और नवाचार की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनका मानना है कि देश के युवाओं की प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच भारत को भविष्य की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में नई पहचान दिला सकती है।

    हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। यह चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मिशन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेज, लचीली और मांग आधारित लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं को नई गति मिल सके।

    विक्रम-1 का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रह मिशनों की बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    करीब सात मंजिला ऊंचाई वाले इस रॉकेट को पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्षेपित किया गया। इस मिशन की सफलता ने यह संकेत दिया है कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी उपलब्धियां देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं और वैश्विक वाणिज्यिक स्पेस मार्केट में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • 15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

    15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी


    नई दिल्ली। आईफोन बनाने वाली दिग्गज टेक कंपनी Apple ने करीब 15 महीने बाद एक बार फिर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब हासिल कर लिया है। कंपनी ने मार्केट वैल्यूएशन के मामले में AI चिप निर्माता Nvidia को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा कर लिया।

    Apple की कुल वैल्यूएशन करीब 4.88 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई, जबकि Nvidia की वैल्यूएशन में 3.5 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह लगभग 4.86 ट्रिलियन डॉलर रह गई। इस बदलाव के साथ टेक कंपनियों की वैश्विक रैंकिंग में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला और Apple फिर से नंबर-1 कंपनी बन गई।

    खास बात यह है कि Apple पिछले साल अप्रैल के बाद पहली बार इस मुकाम पर लौटी है। कंपनी की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब सीईओ टिम कुक का कार्यकाल खत्म होने की चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुक सितंबर में अपना पद हार्डवेयर विशेषज्ञ जॉन टर्नस को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

    निवेशकों का भरोसा Apple पर क्यों बढ़ा?
    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों का नजरिया अब बदल रहा है। कुछ समय पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर में Nvidia को सबसे बड़ा फायदा उठाने वाली कंपनी माना जा रहा था, लेकिन अब Apple की मजबूत कमाई, विशाल इकोसिस्टम और सर्विस बिजनेस ने निवेशकों का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा है।

    BRI वेल्थ मैनेजमेंट के इन्वेस्टमेंट हेड टोनी मीडोज के अनुसार, Apple को पहले इसलिए पीछे माना जा रहा था क्योंकि कंपनी AI मॉडल बनाने पर भारी खर्च नहीं कर रही थी। लेकिन अब बाजार की सोच बदल रही है।

    उनका कहना है कि Apple पर कैपिटल एक्सपेंडिचर का दबाव कम है और कंपनी अपनी सर्विसेज, मजबूत इकोसिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड के जरिए AI से कमाई करने की बेहतर स्थिति में है। यह बदलाव AI से जुड़े संभावित फायदों के बजाय कंपनी की स्थिर कमाई पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    Siri में बदलाव से Apple को उम्मीद
    Apple ने हाल ही में अपने वर्चुअल असिस्टेंट Siri में लंबे समय से चल रहे बदलावों को लागू किया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नया और बेहतर Siri सिस्टम AI के क्षेत्र में Apple को बड़ी टेक कंपनियों और नए स्टार्टअप्स के करीब लाने में मदद करेगा।

    कुछ विश्लेषकों का मानना है कि Apple के पास हर iPhone में मौजूद यूजर डेटा के रूप में AI के लिए बड़ा आधार है। यह डेटा Siri को अधिक उपयोगी और स्मार्ट बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, कंपनी के सामने चुनौती यह है कि यूजर प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस डेटा की क्षमता का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।

    Nvidia की वापसी की संभावना भी बरकरार
    हालांकि बाजार की स्थिति बदलने पर Nvidia फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर सकती है। Nvidia अब भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी लाभार्थी कंपनियों में शामिल है। कंपनी के ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU) दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश जनरेटिव AI मॉडल को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि AI सेक्टर में Nvidia की मजबूत पकड़ अभी भी बनी हुई है।

  • देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी

    देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (Inida) में जल्द ही कटे-फटे और गंदे नोटों की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India ) ने देश में पॉलीमर (Polymer) यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत फैसला कर लिया है और अगले साल तक 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में उतारे जा सकते हैं। क्रेडिट कार्ड की तरह कड़े होने के बजाय ये नोट बेहद पतले, हल्के और लचीले होंगे।

    भारत में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट चलन में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल दस व बीस रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में लाए जाएंगे। इसमें सुरक्षा के उन्हीं उन्नत नियमों का पालन किया जाएगा जो कागज के नोट छापने में अपनाए जाते हैं। अगले साल यह नोट बाजार में आ सकते हैं।

    रिजर्व बैंक ने पॉलीमर शीट आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित किया है। शुरुआती चरण सफल रहा तो बड़े नोट भी चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे। इन पॉलीमर नोटों के लिए डिजाइन, आकार व छपाई उसी तरह होगी जैसे कागज के नोट पर होगी। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इन नोटों में विशेष तकनीक अपनाई जाएगी।

    रिजर्व बैंक के अधिकारियों के मुताबिक पॉलीमर नोटों के प्रचलन में आने की समय सीमा नहीं बताई जा सकती। इतना जरूर है कि पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत निर्णय हो चुका है और चार चरणों से गुजरने के बाद पॉलीमर नोट छापे जाएंगे।


    पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे नोट

    इस पूरी प्रक्रिया में वक्त लगना स्वाभाविक है। इसमें मौसम, इस्तेमाल के तौर-तरीकों व जनता की सहूलियत का भी ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में कितने नोट तैयार होंगे इसका आकलन बाजार में दस व बीस रुपये मूल्य वर्ग के नोटों की उपलब्धता, एटीएम व बैंकों की जरूरत के हिसाब से तय होगा। यह नोट एक पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे। ये क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कठोर नहीं हल्के, लचीले होंगे।

    पहले भी हो चुकी है कवायद…वर्ष 2012 में भारत सरकार ने मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला समेत कुछ शहरों में 10 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी थी। लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी।


    कटे-फटे नोटों से निजात

    लोगों को कटे, फटे व गंदे नोटों से निजात मिलेगी। इसे वह आसानी से ले जा सकेंगे। पॉलीमर करेंसी नोट में नए सुरक्षा फीचर होंगे। इससे नकली नोट तैयार होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी। पॉलीमर नोटों में माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष स्याही जैसी उन्नत, सुविधाओं का उपयोग होगा। कागज के मुकाबले इनके निर्माण पर खर्च भी कम आएगा। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट कई वर्षों से चलन में हैं।

    नोटों की छपाई पर बढ़ रहा खर्च
    रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की छपाई पर व्यय वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, यह पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि मुख्य रूप से नोटों की बढ़ती मांग के कारण हुई है। वित्त वर्ष 2025 में, लगभग 23.8 अरब गंदे नोटों का निस्तारण किया गया। 10 रुपये और 20 रुपये जैसे कम मूल्यवर्ग के नोटों की जांच सबसे पहले होने की संभावना है।